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6 बच्चों की अम्मी नूरजहाँ का नौशाद से अवैध संबंध, इसलिए शौहर ईश मोहम्मद का करवा दिया मर्डर: गोली मार रहे थे शूटर, खुद खिड़की से देख रही थी

बिहार में मछली कारोबारी ईश मोहम्मद की हत्या का राज खुल गया है। उसकी बीवी नूरजहाँ खातून ने ही सुपारी देकर हत्या करवाई थी। इसके लिए नूरजहाँ ने अपने आशिक नौशाद आलम की भी मदद ली थी। मोहम्मद की गोपालगंज के लाढ़पुर गाँव में 22 मई 2023 की रात गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

गोपालगंज के एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया है कि अवैध संबंधों के कारण यह हत्या हुई। 6 बच्चों की अम्मी नूरजहाँ के बथुआ बाजार निवासी नौशाद आलम से अवैध संबंध थे। इसकी भनक उसके शौहर ईश मोहम्मद को लग चुकी थी। ईश मोहम्मद ने नूरजहाँ की पिटाई भी की थी। इसके बाद उसने शौहर के कत्ल का प्लान बनाया। नौशाद की सहायता से नूरजहाँ ने 50 हजार रुपए में कॉन्ट्रैक्ट किलर्स को सुपारी दी।

22 मई की रात ईश मोहम्मद घर के बाहर सो रहा था। मौका देखकर उसी रात हत्या करना तय हुआ। नूरजहाँ खुद खिड़की के पास खड़ी हो गई और मोबाइल से अपने आशिक और भाड़े के हत्यारों को निर्देश दे रही थी। शूटरों ने सो रहे ईश मोहम्मद के सिर में गोली मारी और फरार हो गए। नूरजहाँ यह सब कुछ खिड़की से देख रही थी। जब हत्यारे चले गए तो वह घर से बाहर निकली और रोने का नाटक करते हुए शोर मचाने लगी। उसने ही पुलिस को हत्या की जानकारी दी। परिजनों को फोन किया। अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।

मामले की पड़ताल के दौरान पुलिस को कॉल डिटेल से नूरजहाँ पर शक हुआ। पुलिस ने उसे सख्ती से पूछताछ की। उसके बाद हत्या की पूरी कहानी सामने आ गई। पुलिस ने इस मामले में नूरजहाँ और नौशाद के अलावा शूटर मंसूर और परवेज अंसारी को गिरफ्तार किया है। हथियार उपलब्ध करवाने वाले संदीप शर्मा की तलाश की जा रही है।

बांग्लादेश से आई, सनातनी बनने की अर्जी ले बागेश्वर सरकार के पास पहुँची: कहा- रामनाम जपने से सुकून मिलता है, बालाघाट की कथा में कइयों ने की घर वापसी

बांग्लादेश (Bangladesh) की एक मुस्लिम महिला बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Krishna Shastri) के पास पहुँची और सनातन धर्म स्वीकार करने के लिए बोली। उसने बताया कि भगवान राम का नाम लेने से उसे बहुत सुकून मिलता है। उसने यह भी बताया कि यूट्यूब पर वह हिंदू धर्म के भजन-कीर्तन और कथा आदि देखती-सुनती रहती है।

दरअसल, मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के परसवाड़ा में धीरेंद्र शास्त्री की वनवासी रामकथा का आयोजन किया जा रहा था। बुधवार (24 मई 2023) को वनवासी रामकथा का अंतिम दिन था। उसी दिन पड़ोसी बंगलादेश की रहने वाली एक मुस्लिम महिला अपनी अर्जी लेकर पहुँची थी। अपनी अर्जी में वह सनातन धर्म में आने की बात कही।

मुस्लिम युवती को धीरेंद्र शास्त्री ने मंच पर बुलाया। मंच पर उसने धीरेंद्र शास्त्री से कहा कि वह उन्हें फॉलो करती है और यूट्यूब पर उनके कार्यक्रम को अक्सर देखती है। उसने कहा कि उसे राम नाम का जाप करने से सुकून मिलता है और अब वह सनातन धर्म अपनाना चाहती है। उसने कहा कि सनातन धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है।

उन्होंने युवती से पूछा, “किसी के दबाव में आकर तो ये कार्य नहीं कर रही हो, इस पर युवती ने कहा कि वह अपनी मर्जी से वीजा लेकर भारत आई है। उस पर किसी का दबाव नहीं है।” इसके बाद धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “आप अपने मजहब में रहकर भी सनातन धर्म को स्वीकार कर सकते हैं।”

इस धीरेंद्र शास्त्री ने मुस्लिम युवती से कहा, “अभी आप जिस धर्म में हैं, वहीं रहे। हम पर उपद्रव करवाने के आरोप लगते रहते हैं, लेकिन हम किसी मजहब के खिलाफ नहीं हैं। ना ही धर्मांतरण में विश्वास करते हैं और ना ही इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है। बस राम नाम में हमारी भूमिका है, लेकिन हमें घर वापसी पर भरोसा है।”

धीरेंद्र शास्त्री ने वनवासी रामकथा के बाद युवती से मिलने और फिर आयुष मंत्री राम किशोर कावरे से मिलवाने की बात कही, ताकि वह सनातन धर्म स्वीकार कर सके। युवती ने धीरेंद्र शास्त्री से कहा कि उसके सनातन धर्म स्वीकारने से उसके परिवार को परेशानी उठानी पड़ सकती है, फिर वह यह कदम उठा रही है।

इसके पहले पटना में धीरेंद्र शास्त्री का जब हनुमंत कथा का आयोजन किया गया था तो पश्चिम बंगाल से एक मुस्लिम युवती वहाँ उनसे मिलने पहुँची थी। मुस्लिम महिला ने बताया था, “मैं कष्ट में हूँ और बाबा को मोबाइल में मैंने देखा है। बाबा सभी के कष्टों को दूर करते हैं। इसलिए मैं बाबा के पास आई हूँ। हमारे धर्म में जितने भी इस टाइप के लोग हैं, सभी ठग हैं। ये लोग बस ठगने का काम करते हैं और गलत काम करते हैं।”

इस इलाके में रामकथा के बारे में बागेश्वर धाम के ट्विटर हैंडल से कहा गया है, “यह वो इलाका है, जिसे धर्मान्तरण कराने वाली मिशनरियों और सनातन विरोधी अन्य संस्थाओं ने अपना चरागाह बनाकर रखा है। सरकार (धीरेंद्र शास्त्री) ने यहाँ खुद व्यवस्था करवाई, आदिवासियों को मंच पर बुलाकर उनसे आरती कराई, अनेक लोगों की सनातन में धर्म वापसी कराई…. और भगवत् नाम सिमरन करवाया।”

बताते चलें कि धीरेंद्र शास्त्री ने 24 मई 2023 की रात को दिव्य दरबार लगा। इसके साथ ही प्रेत दरबार का भी आयोजन किया था। इसमें शामिल होने के लिए लोग दूरदराज के इलाकों से आए थे। कई लोग अपनी कथित प्रेत बाधा से मुक्ति पाने के लिए भी आए थे। इस दौरान रामकथा का भी आयोजन किया जाता था।

अब वे गुजरात प्रवास पर जा रहे हैं। वहाँ वे 5-6 जून तक रहेंगे और रामकथा का वाचन करेंगे। बता दें कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को केंद्र की मोदी सरकार ने Y श्रेणी की सुरक्षा दी। उनकी सुरक्षा घेरे में एक या दो कमांडो समेत आठ पुलिस के जवान होंगे। इन जवानों के अलावा उन्हें सब-इंस्पेक्टर रैंक के दो पीएसओ भी दिए जाएँगे।

मुस्लिम और ईसाई बने दलितों को आरक्षण का विरोध: अनुसूचित जाति बचाओ मंच ने सौंपा ज्ञापन, 27 मई को जनजाति सुरक्षा मंच की रैली

धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम या ईसाई बने दलितों को आरक्षण और अन्य सुविधाओं का लाभ देने का विरोध हो रहा है। अनुसूचित जाति बचाओ मंच (AJBM) ने सोमवार (22 मई 2023) को इस संबंध में अहमदाबाद के कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। वहीं जनजाति सुरक्षा मंच 27 मई 2023 को गुजरात के अहमदाबाद में रिवरफ्रंट के पास एक रैली करने जा रहा है।

एजेबीएम ने ज्ञापन में इस्लाम या ईसाई मजहब अपनाने वालों को किसी तरह के आरक्षण या अन्य सरकारी लाभों से वंचित करने की माँग की है। मंच के लोगों ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यदि धर्म परिवर्तन के बाद भी लोगों को आरक्षण व अन्य सुविधाएँ मिलती रही तो एक दिन समाज का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।

उधर जनजाति सुरक्षा मंच ने भी हिंदू धर्म छोड़कर मुस्लिम-ईसाई बने लोगों को सूची से बाहर निकालने की माँग तेज कर दी है। इसे लेकर 27 मई को अहमदाबाद रिवरफ्रंट पर एक रैली का आयोजन किया जा रहा है। जनजाति सुरक्षा मंच का कहना है कि जनजातीय समूह के लोग साल 2006 से ही देश के अलग-अलग हिस्सों में आवाज उठा रहे हैं। वे इस्लाम या ईसाई में परिवर्तित होने वाले लोगों को मिलने वाले विशेष लाभ खासकर आरक्षण संबंधी लाभ रोकने की माँग कर रहे हैं। मंच के नेताओं का कहना है कि धर्मांतरित लोगों को जनजाति और अल्पसंख्यक दोनों के नाम पर लाभ प्राप्त हो रहा है।

बता दें कि धर्म बदलने वालों को आरक्षण का लाभ दिए जाने का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में भी है। इस बीच देश के अलग-अलग शहरों में इसे लेकर प्रदर्शन और कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 4 और 5 मार्च को यूपी के ग्रेटर नोएडा में विश्व हिंदू परिषद की तरफ से संगोष्ठी का आयोजन हुआ था। इसमें परिषद की तरफ से कहा गया कि आरक्षण का फायदा ऐसे लाभार्थियों को नहीं मिलना चाहिए जिन्होंने अपना धर्म बदल लिया है। 10 फरवरी, 2023 को मध्य प्रदेश में भी जनजाति सुरक्षा मंच की तरफ से जनजाति गर्जना डी-लिस्टिंग महारैली का आयोजन किया गया था। महारैली में राज्य भर के 40 जिलों से आए जनजातीय समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया था।

‘द केरल स्टोरी’ पर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने पलटा स्टैंड, कहा- मैं कभी नहीं चाहूँगा कोई फिल्म बैन हो: पहले कहा था- फिल्म का काम तोड़ना नहीं

सुदीप्तो सेन के निर्देशन में लव जिहाद पर बनी फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ का ताबड़तोड़ कमाई का सिलसिला लगातार जारी है। फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। वहीं, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में इस फिल्म को बैन का सामना कराना पड़ा है। इस बीच बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने ‘द केरल स्टोरी’ पर लगाए प्रतिबंध को सपोर्ट देने की खबरों पर अपना ट्वीट किया है।

उन्होंने प्रकाशित होती मीडिया रिपोर्ट्स को लेकर कहा, “कृपया करके कुछ व्यूज और हिट्स के लिए झूठी खबरें फैलाना बंद करो। इसे सिर्फ सस्ती टीआरपी कहते हैं। मैंने यह कभी नहीं कहा है कि किसी फिल्म पर बैन लगाओ। फिल्मों पर बैन लगाना रोको। झूठी खबरें फैलाना बंद करो।”

बता दें कि इससे पहले नवाजुद्दीन सिद्दीकी को लेकर जो खबरें चली थीं वो न्यूज 18 को दिए इंटरव्यू पर आधारित थीं। उसमें उन्होंने कहा था, “अगर कोई फिल्म या उपन्यास किसी को ठेस पहुँचा रहा है, तो यह गलत है। हम दर्शकों या उनकी भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए फिल्में नहीं बनाते हैं।” उन्होंने यह भी कहा, “हम लोगों के बीच सामाजिक सद्भाव और प्रेम को बढ़ावा देने के लिए फिल्में बनाते हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम ऐसी फिल्में बनाएँ, जो लोगों को जोड़ने का काम करें। हमें इस दुनिया को जोड़ना है, तोड़ना नहीं।”

दरअसल, ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे केरल की हिंदू महिलाओं को अपने प्यार के जाल में फँसाकर, उनका धर्मांतरण कराकर उन्हें ISIS के आतंकवादियों की ‘सेक्स स्लेव’ बनने के लिए मजबूर किया जाता है। यह फिल्म 5 मई 2023 को सिनेमाघरों की गई। इसके रिलीज होने के बाद भारत में भले ही वामपंथी और कट्टरपंथी गिरोह इसे प्रोपेगेंडा बताकर खारिज करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हकीकत में यह फिल्म विदेशों तक में सराही जा रही है। ‘द केरल स्टोरी’ को देखने के बाद लंदन की पत्रकार ने भी इस फिल्म की तारीफ की है।

वहीं, फिल्म की रिलीज के बाद कई ऐसी लड़कियाँ सामने आई हैं, जिन्होंने फिल्म में दिखाए गए एक-एक दृश्य को सही ठहराया है। उन्होंने कैमरे के सामने खुद कबूला है कि कॉलेज में उनका ब्रेनवॉश किया गया। श्रुति ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया था कि उन्हें इस हद तक कट्टरपंथी बना दिया गया था कि अगर कोई उनकी विचारधारा नहीं मानता और इस्लाम में कन्वर्ट करने से मना करता तो वह उसकी हत्या भी कर सकती थीं।

श्रुति के अनुसार, पहले ऐसी लड़कियों को तलाशा जाता है जिन्हें हिंदू धर्म के बारे में ज्यादा न पता हो। इसके बाद इन्हें इनके धर्म के बारे में भड़काया जाता है जिसका जवाब उन लड़कियों के पास नहीं होता। पीड़िता ने यह भी बताया था कि ब्रेनवॉश करने की प्रक्रिया में ये लोग पूछते हैं कि भगवान राम को तुम पूजते हो? बताओ उन्होंने अपनी पत्नी को क्यों छोड़ा? महिलाओं को उन्होंने क्या इज्जत दी? तुम कृष्ण को पूजते हो जिनकी इतनी पत्नियाँ थीं? तुम बंदरों को मानते हो। सुदीप्तो सेन की फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ की भी यही कहानी है।

वर्क फ्रंट की बात करें तो नवाजुद्दीन सिद्दीकी जल्द ही फिल्म ‘जोगीरा सारा रा रा’ में नजर आएँगे। इस फिल्म में उनके साथ नेहा शर्मा दिखाई देंगी।

जो था भारत का राजदंड, उसे बना दिया नेहरू की ‘स्वर्ण छड़ी’: जानिए कैसे PM मोदी की नजर में आया ‘सेंगोल’ का गुमनाम इतिहास

नए संसद भवन के उद्घाटन की खबर के साथ चर्चा में आए ‘सेंगोल’ को कुछ समय पहले कोई जानता तक नहीं था। मगर पीएम मोदी के प्रयासों से अब इसकी महत्वता और इसका इतिहास सब मुख्यधारा मीडिया में है। साल 1947 में स्वतंत्रता के समय आखिरी वायसराय माउंटबेटन ने सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के तौर पर ‘सेंगोल’ पंडित नेहरू को सौंपा था। इसके बाद इसे इलाहाबाद संग्राहलय में ‘नेहरू को तोहफे में मिली स्वर्ण छड़ी’ बताकर रख दिया गया।

प्नधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसकी सूचना कुछ साल पहले एक वीडियो से लगी। 5 फीट लंबे सेंगोल पर वीडियो ‘वुम्मिडी बंगारू ज्वेलर्स (VBJ)’ ने बनाई थी। इसके मैनेजिंग डायरेक्टर आमरेंद्रन वुम्मिडी ने कहा कि उन्हें सेंगोर के बारे में खुद भी नहीं पता था। वो तो 2018 में एक मैग्जीन में इसका जिक्र देखा और जब खोजा तो 2019 में उन्हें ये इलाहाबाद के एक म्यूजियम में रखा हुआ पाया।

इसके बाद उन्होंने म्यूजियम के अधिकारियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की सोची। हालाँकि महामारी के कारण ऐसा नहीं हो पाया, और सेंगोल पर एक वीडियो बनाई गई। बाद में यह वीडियो पीएम मोदी के संज्ञान में आई। पीएम कार्यालय ने एक टीम नियुक्त की जिसने वुमुड्डी ग्रुप से संपर्क किया। खोजबीन में सामने आया कि ये सेंगोल को बंगलौर के फेमस वुम्मिडी बंगारू चेट्टी एंड सन्स ज्वैलर्स एंड डायमंड मर्चेंट्स ने ही तैयार किया था। उनके परिवार के पास सेंगोर की एक तस्वीर भी है।

इस दौरान यह भी पता चला कि 1947 में सत्ता के हस्तांतरण को दर्शाने के लिए सी राजगोपालाचारी के अनुरोध पर तमिलनाडु (तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी) में तिरुववदुथुरई अधिनाम द्वारा राजसी 5 फीट लंबा सेंगोल का निर्माण किया गया था। इसे बनाने के लिए वुम्मिदी बंगारू चेट्टी को मिली थी।

बंगारू चेट्टी द्वारा सेंगोल को 100 से अधिक सोने के गहनों से बनाया गया था। जिन्होंने उस समय इसे बनाने के केवल 15000 रुपए लिए थे और 30 दिन से भी कम का समय में इसे तैयार कर दिया था। उनके साथ इसे बनाने में इसे बनाने में उनके बेटों वुम्मिदी एथिराजुलू और वुम्मिदी सुधाकर ने एक प्रमुख भूमिका निभाई थी। लेकिन इनका परिवार वक्त के साथ सेंगोल को भूल गया।

आमरेंद्रन कहते हैं कि उन्हें नहीं पता था कि सेंगोल कैसा दिखता है और उसे कैसे बनाया गया। वुम्मिडी परिवार की मानें तो वो खुद उस सेंगोल को भुला चुके थे। ये भी नहीं पता था सेंगोल लंबे समय से कहा था। सेंगोल सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक है। इसकी प्रथा तमिलनाडु में शासन करने वाले चोल, पांडियार, पल्लव राजवंशों के समय से है। उन्होंने सेंगोर को नेहरू की स्वर्ण छड़ी बताने पर कहा कि हाँ मैंने म्यूजियम में रखे सेंगोर की कुछ तस्वीरें देखीं, गलती हुई है।

वहीं इंडिया टुडे से बातचीत में वुम्मिदी एथिराजुलू के बेटे उजय वुम्मिदी ने बताया वो कहते हैं कि उन्हें नहीं पता था सेंगोल लंबे समय से कहाँ था। अगर आज ये दोबारा मिला तो इसके लिए मीडिया और पीएम मोदी का आभार। पीएम मोदी ने हमें ढूँढकर इसके बारे में पूछा और हमारी स्मृतियों को जिंदा किया। वैसे ये सेंगोल कहीं खोया नहीं था। बस यादों से धूमिल हो गया था। कुछ समय पहले उनके मार्केटिंग हेड को ये छड़ी के रूप में इलाहाबाद म्यूजियम में मिला। इसे बॉक्स में रखा गया था और लिखा कि ये स्वर्ण छड़ी नेहरू को तोहफे में मिली थी।

बता दें कि सेंगोल 1947 में नेहरू को मिलने के बाद से गायब हो गया था। लेकिन 15 अगस्त 1978 में कांचीपुरम के कांची कामकोटि पीतम के 68वें संत श्री चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती स्वामिगल जिन्हें महा पेरियावा नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने इसके बारे में एक आयोजन में अपने अनुयायी डॉ बी आर सुब्रमण्यम को बताया और उन्होंने इसका जिक्र अपनी किताब में किया। इसके बाद इसी किताब के हवाले से मीडिया में लेख प्रकाशित हुए और उन्हीं लेखों की बदौलत आजाद भारत में पंडित नेहरू को मिले सेंगोल की कहानी हमारे सामने है।

मीडिया में यह भी बताया जा रहा है कि सेंगोर की जानकारी पीएम मोदी को प्रसिद्ध डांसर पद्मा सुब्रमण्यम ने एक चिट्ठी के जरिए भी दी गई थी। उन्होंने अपनी चिट्ठी में एक तमिल मैग्जीन ‘तुगलक’ में प्रकाशित एक लेख का हवाला देते हुए ‘सेंगोल’ के बारे में पीएम को बताया। साथ ही माँग उठाई की पीएम इस बारे में जानकारी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सभी देशवासियों के साथ साझा करें।

पीएम मोदी कार्यालय में ये चिट्ठी रिसीव होने के बाद भी सेंगोल की खोजबीन शुरू हुई। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने इंदिरा गाँधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स के विशेषज्ञों की मदद ली और राष्ट्री अभिलेखागार से लेकर उस वक्त तमाम अखबारों और डॉक्यूमेंट्स में इसके बारे में खँगाला गया। हालाँकि बाद में पता चला कि ये सेंगोल प्रयागराज के आनंद भवन में है।

‘द क्रिएटर- सृजनहार’ पर बवाल, अहमदाबाद में बजरंग दल कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन: फिल्म पर लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप

बॉलीवुड (Bollywood) की फिल्म ‘द क्रिएटर- सृजनहार’ का विरोध हो रहा है। गुजरात के अहमदाबाद में बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन किया है। शुक्रवार (26 मई 2023) को रिलीज होने वाली इस फिल्म को लेकर हिंदूवादी संगठनों का आरोप है कि यह लव जिहाद को बढ़ावा देती है। वे इस पर बैन लगाने की माँग कर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, बुधवार (24 मई 2023) की शाम अहमदाबाद के एक मल्टीप्लेक्स के पास जमा हुए। बजरंग दल वालों ने बताया कि उन्हें पता चला कि यह फिल्म लव जिहाद को बढ़ावा देती है। इसलिए कार्यकर्ता फिल्म का विरोध कर रहे हैं। इस दौरान जमकर नारेबाजी की गई। थियेटर वालों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुँची और उन्हें हिरासत में ले लिया।

फिल्म का विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं को नजदीकी वडाज थाने ले जाया गया, जहाँ कुछ देर तक समझा-बुझाकर उन्हें छोड़ दिया गया। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए बजरंग दल कार्यकर्ता हिरेन रबारी ने घटना को लेकर ऑपइंडिया से खास बातचीत की।

हिरेन रबारी ने कहा, “यह फिल्म हमारे बच्चों को भारतीय संस्कृति से खुद को अलग करने और लव जिहाद के जाल में फँसने के लिए उकसाती है। फिल्म में युवाओं को माता-पिता से दूर रहकर गैर-धर्म के लोगों के साथ प्यार करने की सीख दी गई है। बजरंग दल इस फिल्म का विरोध करेगा और इसकी रिलीज को रोकेगा।”

विवाद पर क्या बोले फिल्म मेकर्स ?

फिल्म के विरोध पर इसके निर्माता राजेश कराटे ‘गुरुजी’ ने कहा कि वो किसी धमकी से नहीं डरते। कराटे ने कहा, “हमने फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की है कि दुनिया को बदला जा सकता है। मैं सभी धर्मों के मानने वालों से अपील करता हूँ कि वे धर्म के नाम पर दंगा और हिंसा न करें। धर्म बचाने के नाम पर किसी की हत्या क्यों करते हैं? धर्म को नहीं व्यक्ति को बचाओ।”

राजेश कराटे ने कहा कि फिल्म में कई धर्म के जोड़ों को एक दूसरे से प्यार करते दिखाया गया है। उन्होंने कहा, “जो लोग अपने मजहब को मानते हैं, मुझे उनसे कुछ नहीं कहना। मेरा मानना है कि दुनिया में मजहब जैसा कुछ नहीं होता, इसलिए मेरा उद्देश्य है दुनिया से मजहब को खत्म करना।”

फिल्म ‘द क्रिएटर- सृजनहार’ के निर्माता राजेश कराटे ‘गुरुजी’ और राजू पटेल हैं। फिल्म का लेखन और निर्देशन प्रवीण हिंगोनिया ने किया है। यह फिल्म 26 मई 2023 को देश भर के 250 से अधिक सिनेमा घरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म में आर्य बब्बर, रजा मुराद, सीआईडी ​​सीरियल फेम दयानंद शेट्टी और मिर्जापुर वेब सीरीज फेम शाजी चौधरी मुख्य भूमिका में हैं।

ट्रेन से दिया धक्का, हाथ-पैर कट गए, इलाज के दौरान बड़े भाई की मौत; फिर भी एक दर्जी के बेटे ने ‘तीन ऊँगली’ से UPSC किया क्रैक

23 मई 2023 को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सर्विस परीक्षा 2022 के परिणामों की घोषणा की थी। इसके बाद इस परीक्षा को पास करने वाले लोगों की कहानियाँ सामने आ रही हैं। इनमें से कई बेहद प्रेरक हैं। ऐसी ही एक कहानी सूरज तिवारी की भी है।

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के रहने वाले सूरज तिवारी ने तीन ऊँगलियों से यह परीक्षा पास की है। एक ट्रेन हादसे में उनके हाथ-पैर कट गए थे। इलाज के दौरान ही उनके बड़े भाई की मृत्यु हो गई थी। पिता दर्जी हैं तो परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। पर इनमें से कोई भी मुसीबत सूरज के हौसलों के आगे टिक नहीं पाई।

यूपीएससी की परीक्षा में सूरज तिवारी ने 917वीं रैंक हासिल की है। सूरज के दोनों पैर नहीं हैं। एक हाथ भी नहीं है। एक हाथ में केवल तीन ऊँगलियाँ बची है। पर आर्थिक कमजोरी और दिव्यांगता को उन्होंने अपने रास्ते का रोड़ा नहीं बनने दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2017 में गाजियाबाद के दादरी में सूरज एक ट्रेन दुर्घटना के शिकार हो गए थे। बताते हैं कि उन्हें किसी ने ट्रेन से धक्का दे दिया था। इसके बाद वह चार महीने तक अस्पताल में रहे और करीब तीन माह तक बेड रेस्ट किया। फिर उन्होंने 2018 में जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (JNU) में बीए में दाखिला लिया। वहाँ से 2021 में बीए पास किया और एमए में प्रवेश लिया। इसके बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू की।

सूरज की सफलता से उनके माता-पिता बेहद खुश हैं। पिता रमेश कुमार तिवारी ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “मैं आज बहुत खुश हूँ। मेरे बेटे ने मुझे गौरवान्वित किया है। घटना के बाद भी उसका मन कभी छोटा नहीं हुआ। वह हमेशा कहता था कि आप लोग घबराइए मत। वह बहुत बहादुर है। उसकी तीन ऊँगलियाँ सफल होने के लिए काफी हैं। सूरज जैसा बेटा हर घर में पैदा हो।”

सूरज की माँ आशा देवी तिवारी कहती हैं, “मेरा बेटा बहुत बहादुर है। सूरज ने कभी हार नहीं मानी और अपने जीवन में सफल होने के लिए कड़ी मेहनत की। शुरू से ही उसके हौसले बुलंद थे। घटना के बाद भी उसने कभी हिम्मत नहीं हारी, बल्कि उसने हमें ही हौसला दिलाया कि आप चिंता मत करिए, मैं बहुत पैसा कमाऊँगा। वह हमेशा अपने छोटे भाई-बहनों को कड़ी मेहनत करने के लिए कहता है।”

बता दें कि सूरज के पिता पेशे से टेलर हैं। सिलाई कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। रमेश तिवारी के बड़े बेटे राहुल तिवारी का निधन हो चुका है। छोटा बेटा राघव तिवारी बीएससी और और बेटी प्रिया बीटीसी कर रही है।

जिन्होंने बनाया भारत की स्वतंत्रता का प्रतीक ‘सेंगोल’, वे भी नई संसद के उद्घाटन में रहेंगे मौजूद: बताया बनाने के बदले मिले थे 15000 रुपए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) 28 मई 2023 को नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे। इस दौरान तमिलनाडु (Tamil Nadu) के शैव पंथ के मठ थिरुवदुथुराई एथीनम से आए पुजारी पीएम को भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक राजदंड अर्थात् सेंगोल (Sengol) को सौंपेंगे। राजदंड को 1947 में चेन्नई (उस वक्त मद्रास) के सुनार वुम्मिडि बंगारू चेट्टी ने लगभग एक महीने में बनाया था।

राजदंड पाँच फीट लंबी दंड (छड़ी) है, जिसके सबसे ऊपर भगवान शिव के वाहन नंदी विराजमान हैं। नंदी न्याय व निष्पक्षता को दर्शाते हैं। साल 1947 में इसे सत्ता के हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था। दरअसल, राजतंत्र में हर लगभग हर राज्य का एक अपना राजदंड होता था, जो शासक की न्यायप्रियता, निष्पक्षता और जनकल्याणकारी भावना को दर्शाता था।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, इस राजदंड को बनाने में 96 साल के वुम्मिडि एथिराजुलु (Vummidi Ethirajulu) और 88 साल के वुम्मिडि सुधाकर (Vummidi Sudhakar) भी शामिल रहे हैं। कहा जा रहा है कि नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान वे दोनों भी शामिल होंगे।

उस वक्त को याद करते हुए वुम्मिडि एथिराजुलु बताते हैं, “अधीनम हमारे पास सेंगोल को बनाने के लिए एक चित्र लेकर आए थे और कहा था कि इसे बिल्कुल इसी तरह बनाना है। यह महत्वपूर्ण स्थान पर जाना है। ऐसे में हमारे लिए अच्छी क्वालिटी देना बहुत जरूरी था।”

उन्होंने आगे बताया, “यह चाँदी का बनाया गया था और इस पर सोने की परत चढ़ाई गई थी। स्वतंत्रता हम सबके लिए गौरवशाली क्षण था, लेकिन जब हमें ये अहम जिम्मेदारी सौंपी गई तो इसका महत्व हमारे लिए और बढ़ गया था।” बताते चलें कि इस राजदंड को बनाने के एवज में चेट्टी को इसके लिए उन्हें 15,000 रुपए दिए गए थे।

भाजपा नेता ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद कहा

स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल सी राजगोपालाचारी के प्रपौत्र और भाजपा नेता सीआर केसवन ने कहा, “सेंगोल को साल 1947 में अंग्रेजों से भारत को सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में सौंपा गया था। हम में से बहुत से लोग पवित्र राजदंड (सेंगोल) के साथ सत्ता के हस्तांतरण की इस महत्वपूर्ण घटना के बारे में नहीं जानते थे।”

केसवन ने आगे कहा, “एक भारतीय होने के नाते मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देना चाहता हूँ। भारतीय सभ्यता की विरासत, भारतीय संस्कृति की बहुत गहरी समझ रखने वाला और हमारे मूल्यों और परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान रखने वाला व्यक्ति ही यह सुनिश्चित कर सकता है कि इस तरह की महत्वपूर्ण घटना को गुमनामी से वापस लाया जाए और इतिहास में उसे उचित स्थान दिया जाए।”

तमिलनाडु में सेंगोल आम बोलचाल का शब्द है। सेंगोल ब्रिटिश सरकार से भारतीयों के हाथों में ली गई सत्ता के प्रतीक के रूप को दर्शाता है। राजदंड बनाने वाले सुनार वुम्मिडि बंगारू चेट्टी के प्रपौत्र जितेंद्र वुम्मी ने इसके इतिहास और महत्व के बारे में बताया।

उन्होंने कहा, “चोल साम्राज्य में जब भी कोई राजा गद्दी पर बैठता था, तब उसे यही सेंगोल सौंपा जाता था। भारत में यह विधान बेहद प्राचीन है। चोल राजवंश में भी यही विधान था। चोल भगवान शिव को आराध्य मानते थे। इसलिए उनके राजदंड के शीर्ष पर नंदी और धन व समृद्धि का प्रतीक देवी लक्ष्मी की एक नक्काशी शीर्ष पर है। सेंगोल को भगवान की प्रार्थना करने के बाद उनके आशीर्वाद के रूप में गढ़ा गया था।”

बता दें कि स्वतंत्रता के समय वुम्मिडि बंगारू चेट्टी और उनके साथी सेंगोल बनाने से काफी खुश थे। समारोह के आयोजन के लिए महंत ने अपने शिष्य कुमारस्वामी तम्बीरान को दिल्ली भेजा था। कुमारस्वामी तम्बीरान एक बड़े गायक और ‘नादसुर’ के विशेषज्ञ थे।

14 अगस्त 1947 की रात को कुमारस्वामी श्रीला श्री कुमारस्वामी तम्बीरान ने ‘सेंगोल’ लॉर्ड माउंटबेटन को दिया। इसे जल से पवित्र किया गया था और फिर उसे ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सौंपा था। इस दौरान तमिल संत ‘कोलारु पथिगम’ का गान किया गया, जो शैव कविता ‘थेवारम’ का हिस्सा है।

क्या हिजाब, गोहत्या और धर्मांतरण पर कानून बदलेगी कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार, एमनेस्टी की माँग पर खड़गे के मंत्री बेटे ने दिए संकेत

कर्नाटक (Karnataka) में सरकार बनाते ही कॉन्ग्रेस (Congress) ने अपने वादे के अनुसार मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति अपनानी शुरू कर दी है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और कर्नाटक सरकार में राज्यमंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि राज्य मे हिजाब पर प्रतिबंध, गोवध प्रतिबंध और धर्मांतरण कानून सहित अन्य मामलों पर विचार किया जाएगा।

कर्नाटक के सिद्धारमैया सरकार में राज्यमंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा, “हम अपने रुख को लेकर बहुत स्पष्ट हैं। हम ऐसे किसी भी कार्यकारी आदेश की समीक्षा करेंगे, हम किसी भी विधेयक की समीक्षा करेंगे जो कर्नाटक की आर्थिक नीतियों के प्रतिकूल है। जो राज्य की खराब छवि प्रस्तुत करता है।”

उन्होंने आगे कहा, “कोई भी विधेयक जो आर्थिक गतिविधियों के लिए उपयोग नहीं किया जाता है, कोई भी विधेयक जो रोजगार पैदा नहीं करता है, कोई भी विधेयक जो किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन करता है, कोई भी विधेयक जो असंवैधानिक है उसकी समीक्षा की जाएगी और यदि आवश्यक हुआ तो उसे रद्द किया जाएगा।”

बताते चलें कि राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार बनते ही मानवाधिकार के नाम पर भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) ने अपनी तीन प्रमुख माँगें रखी थीं। उसने कहा था कि कर्नाटक में हिजाब पर प्रतिबंध, धर्मांतरण विरोधी कानून और गोवध कानून का सरकार समीक्षा करेगी।

एमनेस्टी इंडिया ने अपनी पहली माँग में शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं के हिजाब पहनने पर लगे प्रतिबंध को हटाने को कहा। उसने कहा, “यह प्रतिबंध मुस्लिम लड़कियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता और शिक्षा के अधिकार के बीच चयन करने के लिए मजबूर करता है। इससे समाज में सार्थक रूप से भाग लेने की उनकी क्षमता बाधित होती है।”

अपनी दूसरी माँग में पशु क्रूरता (रोकथाम) अधिनियम 2020 और कर्नाटक धार्मिक स्वतंत्रता अधिकार संरक्षण विधेयक 2022 के प्रावधानों की समीक्षा करने और उन्हें निरस्त करने के लिए कहा। दूसरे शब्दों में, एमनेस्टी इंडिया ने कर्नाटक में गोहत्या की अनुमति और हिंदू विरोधी ताकतों को राज्य में धर्मांतरण रैकेट (लव जिहाद) चलाने की माँग की है।

एमनेस्टी इंडिया ने अपने ट्वीट में आगे कहा कि गोवध और धर्मांतरण पर बने कानून का दुरुपयोग हो सकता है और इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा, एमनेस्टी इंडिया ने मुस्लिम विक्रेताओं का बहिष्कार करने वाले हिंदुओं के खिलाफ कार्रवाई का आह्वान किया।

अपनी तीसरी माँग को लेकर एमनेस्टी ने कहा, “राज्य में चुनावों से पहले मुस्लिम के आर्थिक बहिष्कार और उनके खिलाफ हिंसा का आह्वान किया गया था। धर्म-जाति आधारित भेदभाव से प्रेरित घृणा और घृणित अपराधों को समाप्त करने के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करें।” दिलचस्प बात यह है कि ऐसी कई रिपोर्ट आई हैं, जिनमें मुस्लिमों ने हिंदू व्यवसायों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है, लेकिन एमनेस्टी ने इसे कभी भी घृणित नहीं कहा।

राज्य में प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामवादी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े बजरंग दल (Bajarang Dal) पर प्रतिबंध को लेकर भी प्रियांक खड़गे ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “कोई भी संगठन- धार्मिक, राजनीतिक या सामाजिक, जो असंतोष और वैमनस्य के बीज बोने जा रहा है… उसे कर्नाटक में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम कानूनी और संवैधानिक रूप से उनसे निपटेंगे – चाहे वह बजरंग दल हो, पीएफआई हो या कोई अन्य संगठन हो। हम उन्हें प्रतिबंधित करने में संकोच नहीं करेंगे, यदि वे कर्नाटक में कानून और व्यवस्था के लिए खतरा बनेंगे।”

दरअसल, कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि अगर वह सत्ता में आएगी तो राज्य में बजरंग दल पर प्रतिबंध लगा देगी। बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की कॉन्ग्रेस की घोषणा की देश भर में आलोचना हुई थी। भाजपा ने तो बजरंग दल को बजरंग बली से जोड़ दिया था।

घर लौटते ही PM मोदी ने विपक्ष को घेरा, उत्तराखंड को दिया पहला वंदे भारत: जयशंकर ने बताया क्यों पापुआ न्यू गिनी के पीएम ने किया चरण स्पर्श

तीन देशों के 6 दिवसीय दौरे से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लौट आए हैं। दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उनका जबर्दस्त स्वागत हुआ। इस दौरान अपने संबोधन में नई संसद के उद्घाटन समारोह पर राजनीति कर रहे विपक्षी दलों को प्रधानमंत्री ने घेरा। इसके बाद उन्होंने 25 मई 2023 की सुबह 11 बजे देहरादून से दिल्ली के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। यह उत्तराखंड को मिला पहला वंदे भारत है।

जापान, पापुआ न्यू गिनी और ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर गए पीएम मोदी गुरुवार की सुबह 5.20 बजे पालम एयरपोर्ट पर उतरे। उनकी आगवानी करने को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई पार्टी नेता मौजूद थे। स्वागत समारोह के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि विदेशों में जाकर वे भारतीयों के पराक्रम का गीत गाते हैं। हिंदुस्तान के सामर्थ्य की बात करते हैं। उन्होंने कहा, “यात्रा के दौरान जितना समय मेरे पास था, उसका पल-पल मैंने देश की बात करने और देश की भलाई के लिए निर्णय लेने में उपयोग किया।”

संसद उद्घाटन समारोह के 19 विपक्षी दलों के बहिष्कार पर तंज कसते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “सिडनी में भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्रीए पूर्व प्रधानमंत्री, सांसद, विपक्षी दलों के नेता भी शामिल थे। यह लोकतंत्र की ताकत है। उन सभी लोगों ने साथ मिलकर भारतीय समुदाय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया।”

पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना काल में जब दुनिया के बड़े और सामर्थ्यवान देशों ने घुटने टेक दिए तो भारत की वैक्सीन ने लोगों की जान बचाई। उन्होंने कहा कि जब वे पैसिफिक आइलैंड के देश (पापुआ न्यू गिनी) के नागरिकों से मिले तो हर कोई यह कहना चाहता था कि आपने जो वैक्सीन दी उसकी वजह से हम जिंदा हैं। पीएम ने देश के लोगों से भी अपनी संस्कृति और महान परंपरा के बारे में बात करने की अपील की। उन्होंने कहा, “जब मैं यह कहता हूँ कि हमारे तीर्थ क्षेत्रों पर हमले स्वीकार नहीं हैं तो दुनिया भी मेरे साथ खड़ी नजर आती है।”

बोले जयशंकर, कभी नहीं देखा ऐसा दृश्य

स्वागत समारोह को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी संबोधित किया। उन्होंने पीएम के साथ अपने विदेश यात्रा का अनुभव सबके साथ साझा किया। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत को दुनिया किस नजर से देखती है, इसे समझने के लिए मैं आपको कुछ बातें बताता हूँ। पापुआ न्यू गिनी में जब पीएम मोदी अपने हवाई जहाज से उतरे तो वहाँ के पीएम जेम्स मराबे ने जिस तरह पीएम के पैर छुए और स्वागत किया यह तस्वीर पूरी दुनिया ने देखी।

एस जयशंकर ने कहा, “मैं आपको बताना चाहता हूँ कि उससे पहले पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री हमारे राजदूत से क्या बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मैं भारत के पीएम को केवल प्रधानमंत्री नहीं मानता। मेरे लिए वह एक अतिथि नहीं हैं। बल्कि मेरे लिए वह गुरु हैं, विश्वगुरु।” जयशंकर ने यह भी बताया कि ऑस्ट्रेलिया के पीएम द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को ‘द बॉस’ कहकर संबोधित करना उनके स्पीच का हिस्सा नहीं था। यह उनके मन से निकली बात थी। कार्यक्रम के बाद खुद पीएम एंथोनी अल्बानीज ने जयशंकर को इसके बारे में बताया था। विदेश मंत्री ने कहा, “पिछले 45 सालों से मैं विदेश मंत्रालय के लिए सेवाएँ दे रहा हूँ। लेकिन आज तक मैंने ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा।”