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मेरठ में वंदे मातरम् गाने से ओवैसी के पार्षदों ने किया इनकार, BJP सदस्यों ने खड़े होने को कहा तो मारपीट पर उतर आए AIMIM के प्रतिनिधि: Video वायरल

उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut, UP) में निगम और नगर पंचायत का शपथ ग्रहण समारोह के दौरान वंदेमातरम् के गान का AIMIM (All India Majlis‑e‑Ittehadul Muslimeen) के सदस्यों ने विरोध किया। इसको लेकर भाजपा के सदस्यों के साथ उनकी जमकर हाथापाई हुई।

मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस ऑडिटोरियम में शुक्रवार (26 मई 2023) को शपथ ग्रहण का समारोह वंदेमातरम से शुरू हुआ। इस दौरान AIMIM के सदस्य अपनी सीट पर बैठे रहे। इसका विरोध करते हुए भाजपा के सदस्यों ने खड़े होने के लिए कहा तो वे भड़क गए।

इसके बाद भाजपा और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के नेताओं के बीच तूतू-मैंमैं और हाथापाई होने लगी। हालात को देखते हुए पुलिसकर्मी आगे आए और उन्होंने AIMIM एवं भाजपा के सदस्यों को बाहर निकाला। इसके बाद AIMIM के सदस्यों ने समारोह का बहिष्कार कर दिया और वहाँ से चले गए।

शपथ ग्रहण के दौरान मेरठ की कमिश्नर जे सेल्वा कुमारी मेयर और पार्षदों को शपथ दिलाने आई थीं। वह मंच पर बैठी हुई थीं। वहीं, जिलाधिकारी और एसपी ट्रैफिक पुलिस बल के साथ व्यवस्था सँभाले हुए थे। AIMIM के सदस्यों ने कहा कि वे राष्ट्रगान गा लेंगे, भारत हिंदुस्तान जिंदाबाद बोल देंगे, लेकिन वंदेमातरम नहीं गाएँगे।

AIMIM के सदस्यों ने तर्क दिया कि यह कार्यक्रम भाजपा का नहीं है। यह मेयर और पार्षदों का कार्यक्रम है। उन्होंने आरोप लगाया कि शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भाजपा ने गुंडागर्दी की और वो भी जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में की।

वहीं, भाजपा के पार्षदों का कहना है कि ये लोग जिन्ना के मानने वाले लोग हैं… ओवैसी के लोग हैं… जो देश का बँटवारा चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जो वंदेमातरम नहीं गाएगा, उस मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

देश के सबसे बड़े सेक्स कांड पर जुलाई में आ रही ‘अजमेर 92’: 100+ छात्राओं से हुआ था रेप-250 की बँटी थी न्यूड फोटो, 28 परिवार रातोंरात हो गए लापता

90 के दशक में अजमेर में हुए सेक्स और ब्लैकमेलिंग कांड पर बनीं ‘अजमेर 92’ इस साल जुलाई में रिलीज होने वाली है। यह घोषणा रिलायंस एंटरटेनमेंट ने की है। उन्होंने फिल्म का पोस्टर जारी कर बताया कि अजमेर 92 इस साल 14 जुलाई को आएगी।

पोस्टर में देख सकते हैं कि इस पर 28 परिवारों के लापता होने की बात, हत्याओं का जिक्र, 250 कॉलेज गर्ल्स की न्यूड फोटो बँटने की खबरें हाईलाइट है। इस फिल्म में करण वर्मा, सुमित सिंह, सायजी शिंदे और मनोज जोशी नजर आएँगे। फिल्म का निर्देशन पुष्पेंद्र सिंह ने किया है। वहीं इसके प्रोड्यूसर उमेश कुमार हैं।

सीरीज की शूटिंग दो साल पहले शुरू हुई थी। उस समय हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी थी कि अगर इस फिल्म में तथ्यों से छेड़छाड़ हुई तो वो लोग आंदोलन करेंगे।

अजमेर 1992 कांड

बता दें कि अजमेर का ब्लैकमेलिंग कांड का खुलासा अप्रैल 1992 में हुआ था। इसे दुनिया के सामने लाने वाले पत्रकार संतोष कुमार थे। इस रेप और ब्लैकमेलिंग कांड की शिकार अधिकतर स्कूल और कॉलेज जाने वाली लड़कियाँ थीं। लोग कहते हैं कि इनमें से अधिकतर ने तो आत्महत्या कर ली।

जब ये केस सामने आया था, तब अजमेर कई दिनों तक बन्द रहा था। लोग सड़क पर उतर गए थे और प्रदर्शन चालू हो गए थे। जानी हुई बात है कि आरोपितों में से अधिकतर समुदाय विशेष से थे और पीड़िताओं में सामान्यतः हिन्दू ही थीं।

इस केस में 18 को आरोपित बनाया गया था। इनमें एक फारूक चिश्ती भी था जो कभी कॉन्ग्रेस का नेता हुआ करता था। इस मामले में 200 से भी अधिक पीड़िताएँ थीं लेकिन कुछ ने ही बयान दिया था। अफसोस, इनमें से शायद ही कोई अपने बयान पर कायम रही हों।

कहते हैं उस वक़्त अजमेर में 350 से भी अधिक पत्र-पत्रिका थी और इस सेक्स स्कैंडल के पीड़ितों का साथ देने के बजाए स्थानीय स्तर के कई मीडियाकर्मी उल्टा उनके परिवारों को ब्लैकमेल किया करते थे। आरोपितों को छोड़िए, इस पूरे मामले में समाज का कोई भी ऐसा प्रोफेशन शायद ही रहा हो, जिसने एकमत से इन पीड़िताओं के लिए आवाज़ उठाई हो।

आरोप यह भी है कि जिस लैब में फोटो निकाले गए, जिस टेक्नीशियन ने उसे प्रोसेस किया, जिन पत्रकारों को इसके बारे में पता था- उन सबने मिल कर अलग-अलग ब्लैकमेलिंग का धँधा चमकाया। पीड़ित लड़कियों और उनके परिवारों से सबने रकम ऐंठे। ऐसे में भला कोई न्याय की उम्मीद करे भी तो कैसे? कभी 29 पीड़ित महिलाओं ने बयान दिया था, आज गिन कर इनकी संख्या 2 है। सिस्टम ने हर तरफ से इन्हें तबाह किया।

सीने पर पवित्र राख, नागरस्वम का स्वर, नेहरू के हाथ में राजदंड… कॉन्ग्रेस ‘सेंगोल’ पर माँग रही सबूत, पढ़िए 25 अगस्त 1947 को TIME में छपा लेख

28 मई 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) संसद का नया भवन राष्ट्र को समर्पित करेंगे। नई संसद में स्वतंत्र भारत का राजदंड सेंगोल (Sengol) भी स्थापित किया जाएगा। इतिहास में गुम हो चुका सेंगोल 24 मई 2023 को चर्चा में आया, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे नई संसद New Parliament Building) में स्थापित करने की जानकारी दी। सेंगोल अंग्रेजों से भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को हुई सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक है। लेकिन कॉन्ग्रेस ने सेंगोल से जुड़े दावों को झूठ बताया है।

कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट कर आरोप लगाया है कि नई संसद को व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से मिले ज्ञान के आधार पर दूषित किया जा रहा है। बीजेपी और आरएसएस बिना सबूत के तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह सही है कि अगस्त 1947 में सेंगोल नेहरू को सौंपर गया था। लेकिन इसके सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक होने का कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है।

अब केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ट्वीट कर टाइम मैगजीन का एक लेख शेयर किया है। यह लेख 25 अगस्त 1947 का छपा हुआ है। यानी भारत को स्वतंत्रता मिलने के 10 दिन बाद। इसमें 14 अगस्त को पंडित नेहरू को सेंगोल सौंपे जाने का विवरण मिलता है।

इस लेख की शुरुआत करते हुए बताया गया है कि ऐतिहासिक दिन के के लिए भारतीय अपने अपने अराध्यों का आभार जता रहे हैं। विशेष पूजा प्रार्थना हो रही है। भजन आदि सुनाई पड़ रहे हैं। लेख में आगे बताया गया है कि स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बनने से पहले जवाहर लाल नेहरू धार्मिक अनुष्ठान में व्यस्त थे। दक्षिण भारत के तंजौर से मुख्य पुजारी श्री अंबलवाण देसिगर के दो प्रतिनिधि नई दिल्ली आए थे। श्री अंबलवाण ने सोचा कि प्राचीन भारतीय राजाओं की तरह, भारत सरकार के पहले भारतीय प्रमुख के रूप में नेहरू को पवित्र हिंदुओं से सत्ता का प्रतीक हासिल करनी चाहिए।

लेख में कहा गया है पुजारी के प्रतिनिधि के साथ नागस्वरम बजाने वाले भी थे। यह वाद्य यंत्र बाँसुरी का विशिष्ट भारतीय प्रकार है। संन्यासियों की तरह ही पुजारी के दोनों प्रतिनिधियों के बाल बड़े थे। उनके सिर और सीने पर पवित्र राख थी। वे 14 अगस्त 1947 की शाम धीरे-धीरे नेहरू के घर की तरफ बढ़े…।

लेख में कहा गया है, “पुजारियों के नेहरू के घर आगमन होने के बाद नागरस्वम बजता रहा। उन्होंने पूरे सम्मान के साथ घर में प्रवेश किया। दो युवा उन्हें बड़े पंखे से हवा दे रहे थे। एक संन्यासी ने पाँच फीट लंबा सोने का राजदंड लिया हुआ था। इसकी मोटाई 2 इंच थी। उन्होंने तंजौर से लाए पवित्र जल को नेहरू पर छिड़का और उनके माथे पर पवित्र भस्म लगाया। इसके बाद उन्होंने नेहरू को पीतांबर ओढ़ाया और उन्हें गोल्डन राजदंड सौंप दिया। उन्होंने नेहरू को पके हुए चावल भी दिए, जिसे तड़के दक्षिण भारत में भगवान नटराज को अर्पित किया गया था और प्लेन से दिल्ली लाया गया था।”

लेख में यह भी बताया गया है कि इस अनुष्ठान के बाद नेहरू और दूसरे लोग संविधान सभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद के घर गए। लौटने के बाद चार केले के पौधे अस्थायी मंदिर के खंभे के तौर पर लगाया गया। पवित्र अग्नि के ऊपर हरी पत्तियों की छत तैयार की गई और ब्राह्मण पुजारी शामिल हुए। महिलाओं ने भजन गाए। संविधान तैयार करने वाले और मंत्री बनने जा रहे लोग पुजारी के सामने से गुजरे और उनपर पवित्र जल छिड़का गया। एक बुजुर्ग महिला ने प्रत्येक पुरुष के माथे पर लाल टीका लगाया। इसके बाद रात के 11 बजे सभी संविधान सभा हॉल में इकट्ठा हुए। इसके बाद ही नेहरू का ‘जब आधी रात को दुनिया सो रही है…’ वाला प्रसिद्ध भाषण हुआ था।

गौरतलब है कि सेंगोल इतिहास के पन्नों में गुम हो गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसकी सूचना कुछ साल पहले एक वीडियो से लगी थी। 5 फीट लंबे सेंगोल पर वीडियो ‘वुम्मिडी बंगारू ज्वेलर्स (VBJ)’ ने बनाई थी। इसके मैनेजिंग डायरेक्टर आमरेंद्रन वुम्मिडी ने कहा कि उन्हें सेंगोल के बारे में खुद भी नहीं पता था। उन्होंने 2018 में एक मैग्जीन में इसका जिक्र देखा और जब इसे खोजा तो 2019 में उन्हें ये इलाहाबाद के एक म्यूजियम में रखा हुआ मिला। म्यूजियम में यह नेहरू की ‘स्वर्ण छड़ी’ के तौर पर रखा गया था।

दरअसल सत्ता हस्तांतरण का यह प्रतीक चोल राजवंश के काल से प्रेरित है। यह भारत का सबसे प्राचीन और सबसे लंबे समय तक चलने वाला शासनकाल था। उस समय एक चोल राजा से दूसरे चोल राजा को ‘सेंगोल’ देकर सत्ता हस्तांतरण की रीति निभाई जाती थी। ये एक तरह से राजदंड था, शासन में न्यायप्रियता का प्रतीक।

चोल राजवंश भगवान शिव को अपना आराध्य मानता था। इस ‘सेंगोल’ को राजपुरोहित द्वारा सौंपा जाता था, भगवान शिव के आशीर्वाद के रूप में। इस पर शिव की सवारी नंदी की प्रतिमा भी है। इसी तरह के समारोह और रिवाज की सलाह नेहरू को चक्रवर्ती राजगोपालचारी ने दी थी। इसके बाद राजाजी ने मयिलाडुतुरै स्थित ‘थिरुवावादुठुरै आथीनम’ से संपर्क किया, जिसकी स्थापना आज़ादी से 500 वर्ष पूर्व हुई थी। मठ के तत्कालीन महंत अम्बालवाना देशिका स्वामी उस समय बीमार थे, लेकिन उन्होंने ये कार्य अपने हाथ में लिया था।

‘मैडम CM’ के मन के अनुसार सजा ‘शीशमहल’, वही देती थीं मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश: टाइम्स नाउ के खुलासे से घिरीं अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नेतृत्व वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार को लेकर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। हालिया खुलासे में यह बात सामने आई है कि ‘मैडम CM’ नाम की एक किरदार अधिकारियों को निर्देश देती थीं और उस पर काम भी होता था। कहा जाता है कि ‘मैडम सीएम’ कोई और नहीं, बल्कि सीएम केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल है।

टाइम्स नाऊ नवभारत ने ‘ऑपरेशन शीशमहल’ के अपने हालिया एपिसोड में इसका खुलासा किया है। ‘ऑपरेशन शीशमहल पार्ट 7’ में चैनल ने कहा कि सीएम केजरीवाल के सरकारी बंगले के जीर्णोद्धार में दिल्ली सरकार के मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों को निर्देश ‘मैडम CM’ देती थीं।

टाइम्स नाऊ नवभारत के अनुसार, ‘मैडम CM’ कोई और नहीं, बल्कि सीएम केजरीवाल की धर्मपत्नी सुनीता केजरीवाल हैं। ये मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश देती थीं और उस पर अमल भी होता था। इसकी पुष्टि सामने आए दस्तावेज भी करते हैं। कहा जा रहा है कि सीएम हाउस के रेनोवेशन में 45 करोड़ नहीं, बल्कि 52 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।

मीडिया हाउस के अनुसार, सीएम केजरीवाल के सरकारी बंगले के रिनोवेशन में 45 करोड़ रुपए खर्च किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन 45 करोड़ से कहीं ज्यादा के ‘पेपर’ सामने आए हैं। सामने आए पेपर में रेनोवेशन का खर्च भी बढ़ता हुआ प्रतीत हो रहा है। सीएम हाउस के रिनोवेशन का काम सुनियोजित था। हालाँकि, सीएम मैडम के कहने पर इसमें बदलाव किए गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, डेकोरेशन के दौरान सीएम मैडम की आवश्यकता के अनुसार कंसल्टेंट के द्वारा जमा की गई इंटिरियर्स की डिजाइन में बड़े बदलाव किए गए। सीएम मैडम के कहने पर जो बदलाव किए गए उनमें खिड़कियों एवं दरवाजों के मैटेरियल में बदलाव, इंटिरियर, किचन/लाउंड्री और पैंट्री में बदलाव, फ्लोरिंग आइटम में बदलाव, आर्किटेक्चर की ड्राइंग में स्ट्रक्चरल बदलाव शामिल हैं।

बता दें कि इसी चैनल ने खुलासा किया था कि सीएम केजरीवाल ने अपने मुख्यमंत्री आवास को डेकोरेट कराने में 45 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि खर्च की है। साल 2020 में जब दिल्ली की जनता कोरोना के कहर से कराह रही थी और मजदूर पैदल ही यूपी बिहार जैसे दूर-दराज के राज्यों के लिए प्रस्थान कर रहे थे, तब सीएम केजरीवाल सीएम हाउस चमका रहे थे।

टाइम्स नाउ नवभारत’ ने जानकारी दी थी कि CM आवास में 8-8 लाख रुपए के पर्दे लगाए गए। केवल पर्दों पर ही 1 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। कुल 23 पर्दों का ऑर्डर दिया गया था, जिनमें से कुछ अभी लगने बाकी हैं और कुछ लगाए दिए गए हैं। शुरुआत में 8 पर्दे लगाए गए, जिनकी कीमत 45 लाख रुपए थी। दूसरे चरण में 15 पर्दों का ऑर्डर दिया गया, जो 51 लाख रुपए के थे।

इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री आवास में लगाने के लिए वियतनाम से मार्बल मँगाया गया। इसे ‘डियोर पर्ल मार्बल’ बोला जाता है, जो सुपीरियर क्वालिटी का होता है। इसकी कीमत 15 लाख रुपए होती है। साथ ही इसे लगाने के लिए भी अलग तरीके से फिटिंग की जाती है। AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल आंदोलन से निकले नेता हैं और कोई फकीर नहीं है। उन्होंने कहा कि वो बँगला 1942 का बना है, वहाँ छत से पानी टपकती थी और बुजुर्गों को परेशानी होती थी।

तमिलनाडु में नटराज मंदिर के पुजारी की नाबालिग बेटी के प्राइवेट पार्ट छुए, बाल विवाह का आरोप लगा किया वर्जिनिटी टेस्ट: NCPCR की जाँच से खुलासा

तमिलनाडु में श्री नटराज मंदिर के दीक्षितार को नीचा दिखाने के लिए उनकी नाबालिग बच्चियों के प्राइवेट पार्ट तक छूने की बात सामने आई है। बाल विवाह का आरोप लगाकर उनका वर्जिनिटी टेस्ट किया गया जिसे टू फिंगर टेस्ट भी कहते हैं। इसका खुलासा राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) की जाँच में हुआ है

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2022 में तमिलनाडु के नटराज मंदिर के दो दिक्षितार यानी की पुजारी की गिरफ्तारी की खबर आई थी। इन्हें अपने नाबालिग बच्चों का विवाह करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अब यह बात सामने आई है कि ऐसी कोई शादी हुई ही नहीं थी। फिर भी बाल विवाह का आरोप लगाकर बच्चियों को अस्पताल ले जाकर उनका वर्जिनिटी टेस्ट करवाया गया।

इस संबंध में 4 मई को तमिलनाडु के राज्यपाल रविंद्र नारायण रवि ने जानकारी दी थी कि प्रशासन द्वारा चिदंबरम में पोढू दीक्षितार की नाबालिग लड़कियों का जबरन टू फिंगर टेस्ट करवाया जा रहा है ताकि नटराज मंदिर के वंशानुगत पुजारी (पोढू दिक्षितारों) को बदनाम किया जा सके। इस क्रम में पोढू दिक्षिता के खिलाफ बाल विवाह करवाने का मुकदमा भी दर्ज करवाया जा चुका है जबकि जाँच में ऐसे कोई प्रमाण नहीं सामने आए। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने बताया था कि माता-पिता को गिरफ्तार करके छठी, सातवीं की बच्चियों को अस्पताल ले जाकर उनका टू-फिंगर टेस्ट करवाया गया।

गवर्नर के इन आरोपों के मीडिया में आने के बाज तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक सिलेंद्र बाबू और स्वास्थ्य मंत्री मा सुब्रमण्यन ने इन्हें नकार दिया था। मगर एनसीपीसीआर ने ऐसे दावे सुनने के बाद खुद इस मामले पर जाँच का फैसला किया। सवाल पूछने पर तमिलनाडु पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने फिर इन दावों का खंडन किया, लेकिन एनसीपीसीआर ने स्वत: संज्ञान लेकर जाँच की पूरी प्रक्रिया शुरू की और तमिलनाडु के मुख्य सचिव इराई अनबू को भी एनसीपीसीआर ने इस मुद्दे पर एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

बुधवार को एनसीपीआर सदस्य आनंद जाँच हेतु चिदंबरम पहुँचे और फिर वहाँ से नटराज मंदिर गए। पोढू दीक्षितार से उनके आरोपों के बारे में जाना। फिर वह महिला थाने गए। जाँच अधिकारियों से सवाल किए और उस डॉक्टर से मिले जिन्होंने बच्चियों का टेस्ट किया था।

इसके बाद एनसीपीसीआर के डॉ आरजी आनंद उन लड़कियों के घर गए और माता-पिता समेत सबका इंटरव्यू लिया। आनंद की जाँच में सामने आया कि किसी भी प्रकार की कोई बाल विवाह नहीं हुआ था और उनसे पूरी जाँच में धोखे से स्वीकार करने को कहा गया था। अब इस मामले में रिपोर्ट दो-तीन दिन में एनसीपीसीआर अध्यक्ष को दी जाएगी।

टू फिंगर टेस्ट

बता दें कि टू फिंगर प्रक्रिया साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक घोषित की जा चुकी है। इस प्रक्रिया में रेप पीड़िता की योनि में दो अंगुली डालकर चेक किया जाता था कि हाइमन टूटा है  या नहीं। कोर्ट ने ऐसी प्रक्रिया पर कहा था। परीक्षण का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह महिलाओं को फिर से पीड़ित करता है और फिर से आघात पहुँचाता है। इसके अलावा परीक्षण बलात्कार पीड़ितों के निजता, शारीरिक और मानसिक अखंडता और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करता है।

‘हम जानते हैं क्यों दाखिल की है ये याचिका, शुक्र मनाओ जुर्माना नहीं लगा रहे’: सुप्रीम कोर्ट ने नई संसद के उद्घाटन पर सवाल को लेकर लगाई लताड़

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (26 मई 2023) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा नए संसद भवन का उद्घाटन कराने के लिए लोकसभा सचिवालय को निर्देश देने की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि शुक्र मनाओ पर कोर्ट जुर्माना नहीं लगा रहा है।

जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की सुप्रीम कोर्ट की अवकाश पीठ ने कहा कि याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता सीआर जया सुकिन के पास इस तरह की याचिका दायर करने का कोई अधिकार नहीं है। पीठ ने कहा कि उन्हें आभारी होना चाहिए कि अदालत उन पर जुर्माना नहीं लगा रही है।

बेंच ने याचिकाकर्ता से पूछा, “आपका उद्देश्य क्या है? हम जानते हैं कि आपने ये याचिका क्यों दायर की है। हम अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं।” इस पर याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने की कोर्ट से अनुमति माँगी, कोर्ट ने उसे इसकी अनुमति नहीं दी।

अदालत में केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “याचिका वापस लेने की अनुमति देने से उन्हें उच्च न्यायालय जाने की स्वतंत्रता मिलेगी। ये न्यायसंगत नहीं है। अदालत को इस पर ध्यान देना चाहिए।” कोर्ट ने कहा, “काफी समय तक बहस करने के बाद याचिकाकर्ता इसे वापस लेने की माँग कर रहा है, लेकिन हम याचिका को खारिज करते हैं।”

दरअसल, अधिवक्ता सीआर जया सुकिन द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि 18 मई 2023 को लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी बयान और लोकसभा के महासचिव द्वारा नए संसद भवन के उद्घाटन के लिए जारी किया गया निमंत्रण भारतीय संविधान का उल्लंघन है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 79 का हवाला देते हुए कहा गया है कि राष्ट्रपति संसद के अभिन्न अंग हैं। इसलिए उन्हें उद्घाटन से दूर नहीं रखा जाना चाहिए।

याचिका में कहा गया है, “राष्ट्रपति भारत के पहले नागरिक हैं और संसद की संस्था के प्रमुख हैं। इसलिए देश के बारे में सभी महत्वपूर्ण निर्णय भारतीय राष्ट्रपति के नाम पर लिए जाते हैं। संसद में राष्ट्रपति और दोनों सदन- राज्यसभा और लोकसभा शामिल हैं। राष्ट्रपति के पास संसद को बुलाने और सत्रावसान करने या लोकसभा को भंग करने का अधिकार है।”

बताते चलें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई 2023 को नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे। इस समारोह का कॉन्ग्रेस सहित 21 विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा संसद भवन का उद्घाटन करना राष्ट्रपति का अपमान है।

छोटे कपड़ों में मंदिर दर्शन पर भड़कीं कंगना रनौत: लड़कियों को बताया ‘मूर्ख’, कहा- मुझे शॉर्ट्स में वेटिकन परिसर में भी नहीं जाने दिया था

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने छोटे कपड़ों में मंदिर जाने पर नाराजगी जताई है। ऐसी लड़कियों को मूर्ख बताया है। इन्हें रोकने के लिए सख्त नियमों की पैरवी की है। कंगना ने यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया में वायरल एक पोस्ट को रिट्वीट करते हुए दी है।

उन्होंने जिस पोस्ट को रिट्वीट किया है उसमें दो तस्वीरें लगी है। इसमें एक लड़की छोटे कपड़ों में दिख रही है। तस्वीर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा स्थित बाबा बैजनाथ शिव मंदिर की बताई जा रही है। पोस्ट में लिखा गया है, “ये दृश्य है हिमाचल के प्रसिद्ध शिव मंदिर बैजनाथ का। बैजनाथ मंदिर में ऐसे पहुँचे हैं, जैसे किसी पब या नाइटक्लब में गए हों। ऐसे लोगों मंदिर में घुसने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। मैं इसका कड़ा विरोध करता हूँ। मेरी सोच को अगर ये सब देख कर छोटा या घटिया कहा जाता है तो भी मँजूर है।” पोस्ट के साथ लगी तस्वीरें कब की हैं यह स्पष्ट नहीं है।

इसी पोस्ट को रिट्वीट करते हुए कंगना रनौत ने मंदिरों में जाने के लिए सख्त नियमों की बात की है। उन्होंने लिखा है, “ये वेस्टर्न कपड़े हैं, जिन्हें गोरे लोगों ने बनाया और प्रमोट किया है। मैं एक बार वेटिकन में शॉर्ट्स और टीशर्ट में थी और मुझे परिसर में भी जाने की अनुमति नहीं थी। मुझे होटल वापस जाकर कपड़े बदलने पड़े। नाइट ड्रेस पहनने वाली ये जोकर कैजुअल कपड़ों में कुछ और नहीं बल्कि आलसी और बेवकूफ हैं। मुझे नहीं लगता कि कोई और मंशा होगी, इन मूर्खों के लिए सख्त नियम होने चाहिए।”

बाबा बैजनाथ मंदिर की बताई जा ही तस्वीरों वाला पोस्ट सोशल मीडिया में जमकर शेयर हो रहा। यूजर्स का कहना है कि मंदिर जैसी जगहों पर मर्यादित कपड़े पहनकर आना चाहिए। कुछ लोग छोटे कपड़ों में मंदिर आने पर रोक की भी माँग कर रहे हैं। वहीं कुछ नेटिजन्स ने कंगना रनौत के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए इस चलन के लिए बॉलीवुड को ही जिम्मेदार बताया है।

रामवीर ने सुनी रोने की आवाज, देखा तो 5 दिन की बच्ची को काट रहे थे मच्छर… दूध की बोतल के साथ थी एक ‘चिट्ठी’ जो आपको रुला देगी

राजस्थान का भरतपुर। भरतपुर के मथुरा गेट थाना इलाके में महिलाओं का एक अस्पताल है। गुरुवार (25 मई 2023) की रात रामवीर इस अस्पताल में अपने एक परिचित से मिलने गए थे। बिल्डिंग से निकलते हुए उन्होंने रोने की आवाज सुनी। रोने वाले की तलाश की तो एक नवजात बच्ची मिली जिसे मच्छर काट रहे थे। पास में ही कपड़े और दूध की एक बोतल रखी थी। साथ में थी एक चिट्ठी। चिट्ठी में जो कुछ लिखा था वह बेहद भावुक करने वाला है।

चिट्ठी में लिखा गया था, “मुझ पर 6 लड़कियाँ हो गई हैं। इसलिए मेरी सास परेशान करती है। इसी वजह से मैंने यह कदम उठाया है। मेरी बेटी को पाल लो तुम्हारा एहसान होगा। मुझे माफ कर दो।” किस लाचार माँ को ये शब्द लिखने पड़े यह अभी पता नहीं चल पाया है। बच्ची अभी हॉस्पिटल के एनआईसीयू वार्ड में रखी गई है। पुलिस बच्ची के परिजनों की तलाश में लगी हुई है।

रामवीर ने दैनिक भास्कर को बताया है कि रोने की आवाज सुन उन्हें पहले तो कुछ समझ नहीं आया। लेकिन जब बिल्डिंग में खोज शुरू की तो एक बच्ची खुले में बेंच पर लेटी हुई थी। वह लगातार रो-रही थी। मच्छरों ने उसे घेर रखा था। उन्होंने इसकी जानकारी अस्पताल प्रबंधन को दी। बच्ची के परिजन की तलाश शुरू हुई। वे नहीं मिले तो बच्ची को अस्पताल में एडमिट कर लिया गया। रामवीर ने बताया कि दूध की बोतल, बच्ची के कपड़े और चिट्ठी भी वहीं रखे हुए थे।

मामले की जानकारी मिलने के बाद बाल कल्याण समिति के लोग भी अस्पताल आए। समिति के अध्यक्ष राजाराम भुतोली ने कहा है कि अभी नवजात के परिजनों को खोजा जा रहा है। यदि वे नहीं मिले तो फिर उसे कानूनी प्रक्रिया से गोद दिया जाएगा। अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर हिमांशु गोयल बताया है कि बच्ची का वजन दो किलो के करीब है। अभी उसे बिना ऑक्सीजन के रखा गया है। टेस्ट करवाए गए हैं। कुछ रिपोर्टों में बच्ची का जन्म तीन दिन पहले बताया गया है।

6 सप्ताह के लिए सत्येंद्र जैन को जमानत, स्वास्थ्य बना आधार: सुप्रीम कोर्ट ने AAP नेता के दिल्ली से बाहर जाने और गवाहों से मिलने पर लगाई रोक

मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के मामले में पिछले लगभग एक साल से जेल में बंद आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बड़ी राहत दी है। जैन के लगातार गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (26 मई 2023) को उन्हें 6 सप्ताह की अंतरिम बेल दे दी। हालाँकि, उन्हें दिल्ली से बाहर जाने पर रोक लगा दी गई है।

जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस पीएस नरसिम्हा वाली सुप्रीम कोर्ट की वैकेशन बेंच ने 6 सप्ताह की यह अंतरिम जमानत सत्येंद्र जैन को दिल्ली के किसी भी अस्पताल में अपना इलाज कराने के लिए दिया है। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने जैन के लिए कुछ शर्तें भी निर्धारित की हैं। अंतरिम जमानत अवधि में उन्हें इसका पालन करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि इस अवधि में सत्येंद्र जैन किसी भी मुद्दे पर मीडिया में बयान नहीं देंगे और ना ही किसी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे। बेंच ने जैन को जमानत देने की प्रवर्तन निदेशालय (ED) के विरोध को नजरअंदाज कर दिया। ED ने कोर्ट से कहा कि जैन के स्वास्थ्य का दिल्ली एम्स द्वारा स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

सत्येंद्र जैन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में मेडिकल आधार पर सत्येंद्र जैन की जमानत की माँग की थी। वहीं, ED की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसीटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि जैन के स्वास्थ्य का मूल्याँकन दिल्ली एम्स या राम मनोहर लोहिया अस्पताल में किया जाना चाहिए।

राजू ने कोर्ट में दलील दी कि सत्येंद्र जैन के स्वास्थ्य को लेकर दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल द्वारा जारी मेडिकल सर्टिफिकेट पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सत्येंद्र जैन दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं और ये अस्पताल उनके अधीन रहे हैं। ऐसे में ये मेडिकल सर्टिफिकेट फर्जी हो सकते हैं।

इस पर बेंच ने कहा कि ASG राजू को मेडिकल रिकॉर्ड पर विश्वास क्यों नहीं है। इसका जवाब देते हुए ASG राजू ने कहा कि सत्येंद्र जैन का पहले का कारनामा संदेह उत्पन्न करता है। इससे पहले जैन ने मेडिकल ग्राउंड पर जमानत माँगी थी, तब ED ने AIIMS के डॉक्टरों से जाँच कराने की माँग की थी। इसके बाद सत्येंद्र जैन ने अपनी अर्जी वापस ले ली थी।

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल तिहाड़ जेल के लिए अनिवार्य रेफरल अस्पताल है। उन्होंने कोर्ट में तर्क दिया कि सत्येंद्र जैन को मॉस्क्यूलर एट्रॉफी, जिसमें मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं, हो गई है और उनका वजन 35 किलोग्राम तब घट चुका है। इस दलील को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत की याचिका स्वीकार कर ली।

बता दें कि साल 2017 में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने सत्येंद्र जैन एवं अन्य पर 2010-2012 के दौरान 11.78 करोड़ रुपए और 2015-16 के दौरान 4.63 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है। साल 2015-16 में ही वे दिल्ली सरकार में मंत्री बने थे। CBI ने अपने आरोप में कहा है कि प्रयास इंफोसल्यूशन, इंडो मेटालिम्पेक्स, अकिंचन डेवलपर्स और मंगलायतन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से सत्येंद्र जैन ने मनी लॉन्ड्रिंग की थी।

सत्येंद्र जैन ने इस शेल कंपनियों के माध्यम से कोलकाता स्थित कुछ विभिन्न शेल कंपनियों के एंट्री ऑपरेटरों को पैसे दिए थे। इसके बाद एंट्री ऑपरेटरों ने जैन से जुड़ी कंपनियों में शेयरों के माध्यम से ‘शेल कंपनियों के माध्यम से लेयरिंग’ करने के बाद निवेश के रूप में पैसे को कथित तौर पर फिर से भेज दिया था। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सामने आने के बाद बाद में ED ने मामला दर्ज किया था।

मुस्लिम सहेली के साथ खाना खाने पर कर्नाटक में हिंदू युवक की पिटाई, इस्लामी कट्टरपंथियों ने फूड स्टॉल पर मारा: लड़की से बोले- इनके साथ घूमना गुनाह

कर्नाटक के चिकाबल्लापुर (Chikkaballapur) में गुरुवार (25 मई 2023) को मुस्लिमों के समूह ने हिंदू युवक के साथ मारपीट की। हिंदू युवक की पिटाई उस वक्त की गई जब वह एक फूड स्टॉल पर अपनी मुस्लिम दोस्त के साथ नाश्ता कर रहा था। जानकारी के अनुसार एक हिंदू के साथ घूमने और नाश्ता करने के लिए मुस्लिम लड़की के साथ भी मारपीट की गई। इससे संबंधित एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। पुलिस वायरल वीडियो के आधार पर आरोपित मुस्लिमों की तलाश में जुट गई है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मुस्लिम लड़की अपने एक हिंदू दोस्त के साथ नाश्ता करने के लिए गोपिका चाट नाम के फूड स्टॉल पर गई थी। यहीं आरोपितों की नजर उस पर और उसके दोस्त पर पड़ी। उन्हें लड़के के हिंदू होने का एहसास हुआ और वे उसके साथ मारपीट पर उतर आए। लड़की ने बीच बचाव की कोशिश की, लड़के के साथ मारपीट कर रहे आरोपितों को समझाने की कोशिश की कि वो लड़का सिर्फ दोस्त है, लेकिन कट्टरपंथियों ने एक नहीं सुनी।

उलटा लड़की को बीच बचाव करता देख कट्टरपंथी भड़क गए और उसी के साथ सवाल जवाब करने लगे। रिपोर्टों के अनुसार वे लोग लड़की से कहते हैं कि किसी हिंदू लड़के के साथ नाश्ता करने बाहर जाना गुनाह है। उसे इसके लिए माफी माँगनी चाहिए। रिपोर्टों के मुताबिक पीड़िता ने न सिर्फ कट्टरपंथियों का मुकाबला किया बल्कि वह पुलिस के पास भी पहुँची। हालाँकि लड़की के घर वालों ने उसे माफी माँगने के लिए मजबूर कर दिया। पुलिस वीडियो के आधार पर आरोपितों की तलाश में जुट गई है।

बता दें हाल के दिनों में ऐसी कई घटना हुई है जब मुस्लिम लड़कियों के हिंदुओं के साथ दिखने पर इस्लामी समूह ने मारपीट और अभद्रता की है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर में तो इसके लिए बकायदा टीम बनाई गई थी। टीम का काम इलाके में घूम-घूम कर हिंदुओं के साथ मुस्लिम लड़कियों के दिखने पर वीडियो बनाना और लड़की के घर वालों को इसकी खबर देना था। यूपी पुलिस ने मामले में अल्तमस, फरदीन, मोहम्मद अनस और बिट्टू उर्फ आमिर को गिरफ्तार किया है। दूसरे आरोपितों की तलाश की जा रही है।