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‘निर्दयी नहीं था मुगल बादशाह औरंगजेब, उसने काशी विश्वनाथ मंदिर तोड़ने का नहीं दिया फरमान’: ज्ञानवापी पर मस्जिद कमेटी की दलील, कहा- परिसर में शिवलिंग नहीं फव्वारा है

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के पूरे सर्वे की माँग के विरोध में अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी ने वाराणसी कोर्ट में एप्लीकेशन दायर की है। इस एप्लीकेशन में न केवल हिंदुओं की याचिका का विरोध किया गया बल्कि औरंगजेब के आतंक को धो-पोंछने का प्रयास भी हुआ है। इसमें कहा गया है औरंगजेब निर्दयी नहीं था और उसने आदि विशेश्वर मंदिर को नहीं तोड़ा था।

बता दें कि हिंदुओं ने पूरे विवादित ढाँचे के एएसआई सर्वे के लिए याचिका डाली थी। इसमें उन्होंने कहा था भगवान आदि विशेश्वर मंदिर को मुस्लिम आक्रमणकारियों ने तोड़ दिया था। बाद में राजा टोंडल ने सन् 1580 में इसका दोबारा निर्माण कराया।

कमेटी ने अब इसी याचिका का विरोध करते हुए कहा है दो काशी विश्वनाथ मंदिरों की कोई अवधारणा है ही नहीं। इसके अलावा उन्होंने ‘आक्रमणकारी’ शब्द के प्रयोग पर भी आपत्ति जताई। कमेटी ने इसे हिंदू और मुस्लिमों के बीच नफरत फैलाने का एक प्रयास बताया।

एप्लीकेशन में कहा गया, “जमीन पर जो मस्जिद आलमगिरी/ज्ञानवापी मस्जिद है वो हजारों सालों से है। वह कल भी मस्जिद था और अब भी मस्जिद ही है। वाराणसी के मुसलमान या पड़ोसी जिलों के मुसलमान, अधिकार के नाते और बिन किसी पाबंदी के नमाज पंजगाना और नमाज जुमा और नमाज इदान यहाँ अदा कर रहे हैं।”

कमेटी यह भी मानने से इनकार करती है कि विवादित ढाँचे के परिसर में कोई शिवलिंग बरामद हुआ है। उनका अब भी यही कहना है कि वो एक फव्वारा है। वो कोर्ट से माँग करते हैं कि हिंदू श्रद्धालुओं की याचिका को खारिज कर दिया जाए।

मालूम हो कि अप्रैल 2021 में वाराणसी के सिविल जज ने विवादित ढाँच की एएसआई जाँच के लिए ऑर्डर पास किया था। इसपर मुस्लिमों ने इलाहाबाद कोर्ट में याचिका लगाई। मामला की सुनवाई हुई और दलीलों के बाद फैसला रिजर्व रख लिया गया। मस्जिद कमेटी का कहना है कि ऐसी स्थिति में एएसआई सर्वे का निर्देश नहीं दिया जा सकता है।

बता दें कि हिंदुओं ने वकील विष्णु शंकर जैन के माध्यम से याचिका देते हुए माँग उठाई है कि विवादित ढाँचे का पूरा सर्वे ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार का इस्तेमाल होते हुए होना चाहिए। इस पर कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से और यूपी सरकार को आपत्ति जाहिर करने के लिए 19 मई का समय दिया। अब मामले में एप्लीकेशन दायर हो गई है। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई है।

औरंगजेब नहीं था क्रूर…कितना सच?

उल्लेखनीय है कि इस एप्लीकेशन में मस्जिद कमेटी ने दावा किया है कि औरंगजेब ने भगवान विशेश्वर के मंदिर को नहीं तोड़ा। जबकि इतिहास की किताबों में यह विदित है कि सन् 1669 CE में काशी विश्वनाथध मंदिर पर औरंगजेब ने हमला किया था। उसने मंदिर को तुड़वाकर ज्ञानवापी मस्जिद बनाया। इसके प्रमाण अब भी विवादित ढाँचों के खंबों में देखने को मिल जाते हैं।

हिंदू श्रद्धालु जिस काशी विश्वनाथ परिसर में आज पूजा करते हैं वो ज्ञानवापी मस्जिद के सामने हैं। इसे महान अहिल्या बाई होल्कर ने इंदौर में 1780 में बनवाया था। मासिर-ई-आलमगिरी में इस बात का उल्लेख मिलता है कि अप्रैल 1669 को औरंगजेब ने एक फरमान जारी किया था जिसमें काफिरों के स्कूल और मंदिर तोड़ने का आदेश दिया गया था। इसके अलावा इस फरमान के बारे में वाराणसी गजेटियर में भी पढ़ने को मिलता है जो 1965 में प्रकाशित हुआ था।

₹13428 करोड़… LIC का मुनाफा 466% बढ़ा: हिंडनबर्ग विवाद के बाद मर्सिया पढ़ रहा था विपक्ष, अमीरों की सूची में गौतम अडानी की भी लंबी छलांग

ज्यादा दिन नहीं हुए जब विपक्षी दल देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी और उद्योगपति गौतम अडानी (Gautam Adani) का मर्सिया पढ़ रहे थे। यह दुष्प्रचार हिंडनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research Report) की एक विवादित रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ था। अब LIC ने वित्त वर्ष 2022-23 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। इससे पता चलता है कि बीमा कंपनी (LIC Profit) का मुनाफा 466% बढ़कर करीब 13428 करोड़ रुपए हो गया है। वहीं गौतम अडानी ने भी अमीरों की लिस्ट में लंबी छलांग लगाई है और टॉप 20 में फिर से शामिल हो गए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार भारतीय जीवन बीमा निगम (Life Insurance Corporation of India) ने चौथी तिमाही में 13,427.8 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया है। एक साल पहले इसी तिमाही में LIC का मुनाफा 2,371 करोड़ रुपए ही था। बीमा कंपनी ने बुधवार (24 मई 2023) को ये नतीजे जारी किए। जारी नतीजों के अनुसार मार्च तिमाही में कंपनी का फर्स्ट ईयर प्रीमियम सालाना आधार पर 12.33 प्रतिशत गिरकर 12811.2 करोड़ रुपए रहा, जबकि रिन्यूअल प्रीमियम 6.8 फीसद बढ़कर 76009 करोड़ रुपए पर पहुँच गया। LIC को कमीशन से 8428.5 करोड़ रुपए की आमदनी हुई। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर के मुकाबले 5.4 प्रतिशत और पिछले तिमाही के मुकाबले 33.4 प्रतिशत अधिक है।

अच्छा-खासा मुनाफा कमाने के बाद बीमा कंपनी ने अपने निवेशकों को भी रिटर्न गिफ्ट देने का फैसला किया है। कंपनी ने 3 रुपए प्रति शेयर डिविडेंड देने का ऐलान किया है। एलआईसी के नेट प्रीमियम इनकम की बात करें तो मार्च तिमाही के दौरान इसमें 0.12 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इसके कारण इस तिमाही में नेट प्रीमियम इनकम 1.32 लाख करोड़ रुपए ही रही। साल भर पहले इसी तिमाही में यह 1.44 लाख करोड़ रुपए थी। इसके साथ ही मार्च तिमाही में एकीकृत आधार (Integrated base) पर कंपनी की कुल आमदनी घटकर 2,01,022 करोड़ रुपए रह गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आमदनी 2,15,487 करोड़ रुपए थी।

बीमा कंपनी ने निवेश से भी कमाई की है। जनवरी से मार्च 2023 के दौरान एलआईसी ने इन्वेस्टमेंट से रिटर्न के रूप में 67,846 करोड़ रुपए की कमाई की है। रिपोर्टों के अनुसार देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी ने सिर्फ 2 महीने में ही अडानी ग्रुप के शेयरों से 5,500 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है। बता दें एलआईसी अडानी ग्रुप की कंपनियों में एक बड़ा संस्थागत इन्वेस्टर है। अडानी ग्रुप में एलआईसी के निवेश की कीमत अब 44,600 करोड़ रुपए के पास पहुँच गई है।

टॉप 20 अमीरों में गौतम अडानी

उद्योगपति गौतम अडानी के शेयरों में भी तेजी का सिलसिला जारी है। इसी का नतीजा है कि उन्होंने एक बार फिर से दुनिया के 20 अरबपतियों की लिस्ट में अपनी जगह बना ली है। रिपोर्टों के अनुसार 18 मई को गिरावट के साथ अडानी की नेटवर्थ 52.4 अरब डॉलर पर आ गया था। लेकिन पिछले तीन दिनों में अडानी का नेटवर्थ 64.2 अरब डॉलर पहुँच गया। इसका मतलब हुआ कि 18 मई के बाद से गौतम अडानी की कुल संपत्ति में 11.8 अरब डॉलर यानी करीब 98 हजार करोड़ रुपए का इजाफा हुआ। इसी के साथ दुनिया के सबसे अमीरों की लिस्ट में 24 वें नंबर पर काबिज अडानी अब सीधे 18 वें नंबर पर पहुँच गए।

बता दें कि अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग  रिसर्च (Hindenburg Research) की रिपोर्ट के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में अडानी समूह पर मनी लॉन्ड्रिंग, अनऑथोराइज्ड ट्रेडिंग, वित्तीय गड़बड़ी, भारी-भरकम लोन सहित कई गंभीर आरोप लगाए थे। लेकिन इस रिपोर्ट के बाद अडानी समूह के खिलाफ जाँच के लिए सर्वोच्च न्यायालय (SC) द्वारा गठित विशेषज्ञ पैनल ने पिछले दिनों बताया था कि कीमतों में हेरफेर को लेकर पहली नजर में उसे किसी तरह की रेगुलेटरी कमी नहीं दिखी है।

‘आशीष देसो दूधो नहाओ पूतो फलो’: टीना डाबी ने पूरा किया वादा तो पाकिस्तानी हिंदुओं ने दिया आशीर्वाद, बोलीं IAS- बेटी भी चलेगी

कुछ दिन पहले राजस्थान के जैसलमेर की कलेक्टर टीना डाबी (IAS Tina Dabi) पाकिस्तानी हिंदुओं का घर उजाड़ने का आदेश देने को लेकर विवादों में घिरी थीं। लेकिन अब इस IAS अधिकारी को पाकिस्तानी हिंदू संतान सुख प्राप्त होने का आशीर्वाद दे रहे हैं। वजह टीना डाबी ने अपना वह वादा पूरा किया है जो उन्होंने इनके घरों पर बुलडोजर चलने के बाद किया था।

दरअसल पाकिस्तान से आए इन हिंदू शरणार्थियों को बसाने के लिए जैसलमेर जिला प्रशासन ने मूल सागर में 40 बीघा जमीन आवंटित की है। इस फैसले के बाद 25 मई को टीना डाबी शरणार्थी परिवारों के बीच पहुँची। इनलोगों ने उनका भावपूर्ण अंदाज में स्वागत किया। रिपोर्ट के अनुसार शरणार्थियों ने कहा, “कलेक्टर साहिबा, थों न्याल कर दिया… हे तो हेक ही आशीष देसो थे दूधो नहाओ पूतो फलो।” पुत्रवती होने के आशीर्वाद के जवाब में हँसते हुए कलेक्टर टीना डाबी ने कहा- बेटी होगी तो भी चलेगी।

दैनिक भास्कर ने पाकिस्तानी शरणार्थी महिला सुगनी देवी के हवाले से बताया है, “अब हम बहुत खुश हैं। कलेक्टर टीना डाबी को बहुत बहुत धन्यवाद देकर उनके लिए दुआएँ कर रहे हैं। हम सब पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर जैसलमेर आए थे।”

फिलहाल रैन बसेरे में रह रहे शरणार्थी परिवारों के लिए जमीन का आवंटन जिला मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर मूल सागर के पास किया गया है। जमीन समतल करने का काम शुरू करने से पहले पूजा-अर्चना भी की गई। नगरीय सुधार न्यास (UIT) को बिजली और पानी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इस जमीन पर करीब 200 परिवारों को बसाने की योजना है। पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए यूआईटी द्वारा अलग से जमीन चिन्हित करने का यह शायद राजस्थान में पहला मामला है। जिला प्रशासन ने इन शरणार्थियों की मदद के लिए एक कमेटी का भी गठन किया है। इन्हें नागरिकता दिलाने का प्रयास भी किया जाएगा।

गौरतलब है कि 16 मई 2023 को राजस्थान के जैसलमेर के अमर सागर इलाके में पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों की बस्ती को उजाड़ दिया गया था। कलेक्टर के आदेश के बाद यूआईटी की टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में यहाँ बुलडोजर चलाया था। इस कार्रवाई से विवादों में घिरीं टीना डाबी के निर्देश पर जिला प्रशासन ने प्रभावित लोगों के रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की थी। जमीन के चयन के लिए सर्वे टीम बनाई गई थी।

इससे पहले राजस्थान के जोधपुर में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। 24 अप्रैल 2023 को चोखा गाँव में जोधपुर विकास प्राधिकरण ने अतिक्रमण विरोधी अभियान के नाम पर शरणार्थी हिन्दुओं के घरों पर बुलडोजर चलाया था। इस कार्रवाई के शिकार हुए अधिकतर लोगों के पास भारत में रहने के लिए लॉन्ग टर्म वीजा तो है, लेकिन अब तक उन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिली है।

मुस्लिम लड़की+हिंदू लड़का… नजर रखने के लिए टीम, काम वीडियो बनाना-खबर देना: UP के बिजनौर में अल्तमस, फरदीन, अनस और आमिर गिरफ्तार

हाल के दिनों में ऐसी कई घटना हुई है जब मुस्लिम लड़कियों के हिंदुओं के साथ दिखने पर इस्लामी समूह ने मारपीट और अभद्रता की है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पुलिस ने ऐसे ही चार युवकों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान अल्तमस, फरदीन, मोहम्मद अनस, बिट्टू उर्फ आमिर के तौर पर हुई है।

पता चला है कि ये लोग टीम के तौर पर काम करते थे। इलाके में घूमते रहते थे। हिंदुओं के साथ मुस्लिम लड़कियों के दिखने पर उन्हें रोककर वीडियो बनाते थे। फिर लड़​की के घरवालों को इसकी खबर करते थे। इन चारों की गिरफ्तारी 20 मई 2023 को देहरादून-नैनीताल हाईवे पर हुई घटना में हुई है। चारों आरोपित शेरकोट के रहने वाले हैं। इनके दो अन्य साथी की भी तलाश जारी है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अफजलगढ़ के सलामतनगर का रहने वाला विनोद धामपुर से अफजलगढ़ जा रहा था। धामपुर में विनोद का मुस्लिम दोस्त अपनी बहनों के साथ सवारी का इंतजार कर रहा था। सवारी मिलने में हो रही देरी के कारण उसने विनोद से अपनी बहनों को घर पहुँचा देने का निवेदन किया। विनोद उसकी दोनों बहनों को अपनी बाइक पर लेकर निकल पड़ा।

जैसे ही वे लोग देहरादून-नैनीताल हाईवे पर पहुँचे तीन बाइक सवार उनका पीछा करने लगे। बाइक सवारों ने घोसी गाँव के पास विनोद की मोटरसाइकिल रुकवा दी। तीन बाइक पर सवार 6 युवकों ने विनोद और उसके दोस्त की दोनों बहनों के साथ बदसलूकी शुरू कर दी और वीडियो बनाने लगे। आरोपों के अनुसार लड़कों ने दोनों युवतियों को नकाब हटाने के लिए कहा। उन लोगों ने विनोद के साथ गाली-गलौज की और विरोध करने पर मारपीट पर उतारू हो गए।

वायरल वीडियो में आरोपित युवकों को गाली देते और बदसलूकी करते देखा और सुना जा सकता है। आरोपित नौजवान बार-बार लड़कियों से बाइक चला रहे विनोद के बारे में जानकारी माँग रहे हैं। लड़कियों के विरोध के बाद लड़के उनके घर का फोन नंबर माँगते हैं। उसके बाद उन्हें घर तक ले जाने की बात कहते हैं। विनोद कुमार ने इस संबंध में अज्ञात युवकों के खिलाफ केस दर्ज कराया। इसके बाद पुलिस इनकी तलाश में जुट गई और 4 युवकों को गिरफ्तार किया।

बता दें कि हाल के समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी कई घटनाएँ हुईं है, जब मुस्लिम लड़कियों के साथ दिखने पर हिंदुओं को इस्लामी कट्टरपंथी समूह ने निशाना बनाया है। अभद्रता और मारपीट के साथ-साथ ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी किए गए हैं। 21 मई को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में मुस्लिम लड़की को हिन्दू लड़के के साथ शॉपिंग करते देख कर कुछ मुस्लिम युवक भड़क गए थे और उन्होंने उनकी पिटाई कर दी थी।

समोसे में गोमांस भर कर ग्राहकों को खिलाता था इस्माइल युसूफ, नदी किनारे काटी जाती थी गायें: गुजरात पुलिस ने दबोचा

गुजरात के सूरत में गौ हत्या और बीफ बेचने के आरोप में दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। ‘दिव्य भास्कर’ की रिपोर्ट के मुताबिक माँगरोल पंचायत के कोसाडी गाँव में जलपान की दुकान चलाने वाला इस्माइल युसूफ समोसे में गोमांस भरकर बेचा करता है। जलपान की दुकान पर प्रतिबंधित मांस बेचने की सूचना पाकर पुलिस सक्रिय हो गई।

पुलिस को जानकारी मिली कि गोमांस बेचने वाला आरोपित मोसली चार रास्ते से गुजरने वाला है। पुलिस ने पहले से ही जाल बिछा लिया। पुलिस की टीम ने चार रास्ते से गुजर रही एक संदिग्ध रिक्शे को रोका और तलाशी लेनी शुरू कर दी। इस दौरान पुलिस ने रिक्शे पर से 2 किलो समोसा जब्त कर लिया और आरोपित इस्माइल युसूफ को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूछताछ में उसने कबूला कि गोमांस युक्त समोसा बनाने के लिए वह सुलेमान उर्फ सुल्लू सलीम भीखू और नगीन वसावा उर्फ साइमन वसावा से गोमांस खरीदता है। इस्माइल ने बताया कि सुलेमान और साइमन कोसाडी गाँव के नदी तट पर गायों को काटते हैं। पुलिस ने जब्त किए गए समोसे के परीक्षण के लिए सूरत स्थित रीजनल जस्टिस असिस्टेंट साइंस स्कूल भेजा गया।

एफएसएल अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र में जब्त किए गए समोसे में गोमांस पाए जाने की पुष्टि हो गई। इसके बाद गुजरात पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

‘गौतम गंभीर के जाने के बाद मेरे साथ…’: शाहरुख़ खान की KKR को लेकर रॉबिन उथप्पा का बड़ा खुलासा, CSK की जर्सी पहनने पर फैंस कर रहे थे ट्रॉल

मंगलवार (23 मई, 2023) को IPL 2023 के पहले क्वालिफायर में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने गुजरात टाइटन्स (GT) को 15 रनों से मात दे दी। इस तरह CSK की टीम 10 वीं बार आईपीएल के फाइनल में पहुँच गई। इस मैच को देखने के लिए विस्फोटक बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा भी पहुँचे हुए थे। रॉबिन इस सीज़न में शाहरुख़ खान की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के लिए खेल रहे थे। उनकी टीम पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो गई।

बतौर दर्शक रॉबिन CSK को सपोर्ट कर रहे थे। उन्होंने ट्विटर पर एक पोस्ट भी शेयर की थी जिसमें वह सीएसके की जर्सी में टीम को चीयर करते हुए नजर आ रहे थे। शेयर की गई तस्वीर में उथप्पा के साथ उनके बेटे भी नजर आ रहे थे। हालाँकि केकेआर के फैन्स को उथप्पा का सीएसके को सपोर्ट करना रास नहीं आया। ट्विटर पर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा। एक यूजर ने लिखा कि रॉबिन ने चेन्नई के लिए सिर्फ एक या दो सीजन खेले होंगे इतने में ही उन्होंने अपनी आत्मा बेच दी। उन्हें कभी केकेआर का इस तरह समर्थन करते नहीं देखा गया।

इस पर रॉबिन ने जवाब दिया, “वफादारी और सम्मान आपसी समझबूझ का मामला है मेरे दोस्त।” ट्रोल्स को जवाब देते हुए रॉबिन उथप्पा ने दूसरा ट्वीट भी किया। उन्होंने लिखा, “खुद को मिल रहे नफरत से हैरान नहीं हूँ। आप सभी को शांति और प्यार।”

रॉबिन उथप्पा के ट्वीट पर क्रिकेटर इरफान पठान ने लिखा, “हेट को हटा मेरे भाई बस प्यार को देख।” इस पर रॉबिन ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “जिंदगी तो प्यार से भरी हुई है मेरे दोस्त और प्यार ही नफरत को हरा सकता है।”

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उथप्पा ने चेन्नई की जीत के बाद एक और ट्वीट किया और सीएसके के फाइनल में जगह बनाने पर खुशी जताई। उन्होंने जीटी को भी अगले मुकाबले में मजबूती से वापसी की उम्मीद जाहिर की। लेकिन बात यहीं तक सीमित नहीं है। 23 मई 2023 को ही जियो सिनेमा के शो के दौरान रॉबिन उथप्पा ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि अब वे आईपीएल नहीं खेलेंगे क्योंकि वे पहले ही संन्यास ले चुके हैं। लेकिन यदि उन्हें खेलने का मौका मिला तो वे सीएसके के लिए खेलना पसंद करेंगे।

रॉबिन उथप्पा के इस बयान के बाद KKR के फैन्स उन्हें जमकर ट्रोल करने लगे। फैन्स को नाखुश देखकर उथप्पा ने सफाई देते हुए दो ट्वीट और किए थे। उथप्पा ने ट्विटर पर लिखा कि केकेआर में गौतम गंभीर के साथ पहले चार साल बाद के 2 सालों की तुलना में पूरी तरह अलग थे। इससे मेरे प्रदर्शन पर भी काफी बड़ा प्रभाव पड़ा था। साथ ही मैं कहना चाहता हूँ कि इसका कप्तानी से कोई लेना-देना नहीं है।

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, “गौतम गंभीर के टीम से अलग होने के बाद सब कुछ बदल गया और मुझे अलग-थलग महसूस हुआ। केकेआर के फैन्स के लिए मेरा प्यार पहले भी था और हमेशा रहेगा। मैं उनके समर्थन के लिए हमेशा आभारी हूँ और मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि ये बातें केकेआर के प्रशंसकों के लिए नहीं हैं। मैं उन्हें हमेशा प्यार और सम्मान दूँगा।”

बता दें 2018 में गंभीर ने कोलकाता का साथ छोड़ दिया था। तब ऐसा माना जा रहा था कि 2018 आईपीएल के लिए उथप्पा को केकेआर का कप्तान बनाया जाएगा। लेकिन टीम मैनेजमेंट ने दिनेश कार्तिक को कप्तान चुना और उथप्पा को उप-कप्तान की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद उथप्पा 2020 में राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा बने और 2021 में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेले। 2021 में चेन्नई को चैंपियन बनाने में उनका योगदान अहम रहा था।

गोदावरी के पुल पर जारी हुआ ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘कार्तिकेय 2’ के निर्माता की अगली फिल्म का फर्स्ट लुक: अलग अवतार में दिखे रवि तेजा, डराने वाला वीडियो

‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘कार्तिकेय 2’ के निर्माता अभिषेक अग्रवाल की अगली फिल्म ‘टाइगर नागेश्वर राव (Tiger Nageswara Rao)’ का फर्स्ट लुक वीडियो जारी कर दिया गया है। आंध्र प्रदेश के गोदावरी जिले के राजमुंद्री में स्थित हैवलॉक ब्रिज पर हुए एक भव्य कार्यक्रम में ‘टाइगर नागेश्वर राव’ के फर्स्ट लुक जारी किया, जिसमें रवि तेजा (Ravi Teja) को अलग अवतार में देखा जा सकता है। ये फिल्म सच्ची कहनियों पर आधारित है। इसे तेलुगु, हिंदी, तमिल, कन्नड़ और मलयालम में रिलीज किया जाएगा।

ये रवि तेजा की पहली पैन-इंडिया फिल्म है, ऐसे में अभिषेक अग्रवाल वामसी द्वारा निर्देशित इस फिल्म को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। हिंदी में जॉन अब्राहम ने फर्स्ट लुक वीडियो को आवाज दी है। इसमें वो कहते सुनाई देते हैं, “दक्षिण भारत के गुनाहों की राजधानी”। बता दें कि स्टुअर्टपुरम नामक गाँव के लिए इस वाक्य का इस्तेमाल किया गया है। वीडियो में मुख्यतः अँधेरे के दृश्य दिखाई दे रहे हैं और ट्रेन में भी स्टंट के दृश्य होंगे।

वीडियो में दृश्यों के साथ बैकग्राउंड में जॉन अब्राहम कहते हैं, “70 का दशक। बंगाल की खाड़ी के तटवर्ती इलाके में एक गाँव। दुनिया को डराने वाला अँधेरा भी वहाँ के लोगों को देख कर डरता है। थर-थर काँपने वाली रेलगाड़ी भी इस इलाके के नजदीक पहुँचते ही थर-थर काँपने लगती है। इस गाँव के मील पत्थर को देखते ही कदम लड़खड़ाने लगते हैं।” आगे वो कहते हैं, “स्टुअर्टपुराम, इस इलाके का एक नाम और भी है – टाइगर जोन, द जोन ऑफ टाइगर नागेश्वर राव।”

रवि तेजा के लुक को इंट्रोड्यूस करते हुए कहा गया है, ” भेड़ों का शिकार करने वाले बहुत को देखा होगा, कभी बाघ का शिकार करने वाले बाघ को देखा है क्या।” इसके बाद दाढ़ी में रवि तेजा का लुक दिखता है। ‘टाइगर नागेश्वर राव’ स्टुअर्टपुराम के ही एक चोर की कहानी है, जो चेन्नई जेल से भी भागने में कामयाब रहा था। अभिषेक अग्रवाल आने वाली फिल्म ‘द दिल्ली फाइल्स’ और ‘द वैक्सीन वॉर’ के निर्माता भी हैं। दोनों फिल्मों का निर्देशन विवेक अग्निहोत्री कर रहे हैं।

AltNews ने कोलकाता के NGO को जाल में फँसा कर अपने साथ जोड़ा, झूठ बोल कर चीजें छिपाई फिर मीडिया में ढिंढोरा पिटवाया: संस्था ने कहा – उससे हमारे कोई संबंध नहीं

AltNews ने कोलकाता के एक NGO द्वारा किए जा रहे कार्यों का श्रेय लेने की कोशिश की, लेकिन संस्था के संचालकों ने प्रोपेगंडा पोर्टल के साथ संबंधों को नकारते हुए धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। प्रतीक सिन्हा ने संस्था के साथ संबंधों की बात करते हुए लिखा था कि उसके द्वारा बच्चों को ‘मीडिया साक्षरता एवं क्रिटिकल थिंकिंग’ के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है। साथ ही उसने लिखा कि ‘The Hindu’ ने ‘हमारे’ ताज़ा प्रयासों को खबरों में जगह दी है।

लेकिन, ऑपइंडिया की पड़ताल में उसका झूठ पकड़ा गया। उक्त NGO का नाम ‘विक्रमशिला’ है, जिसने अपने ‘नभ दिशा कम्युनिटी सेंटर’ में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में बच्चों को पढ़ाया। प्रतीक सिन्हा ने इसे ‘AltEd’ का हिस्सा करार दिया। प्रतीक सिन्हा और उसके कर्मचारियों महाप्रज्ना और अनीश मुखर्जी के ट्वीट्स ऐसा लगा कि वो लोग व्यक्तिगत रूप से इस प्रोजेक्ट में शामिल हैं और ये काम कर रहे हैं। ‘The Hindu’ की रिपोर्ट की मानें तो बच्चों को ऐसे दावों पर विश्वास न करने की सलाह दी, जिसमें इस्लामी संरचनाओं को हिन्दुओं का बताया गया हो।

हालाँकि, ऑपइंडिया से बात करते हुए संस्था के संचालकों ने बताया कि ‘फैक्ट-चेक’ या ‘मीडिया पक्षपात’ इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था और बच्चों को प्रशिक्षक वाला काम अनीश ने पार्टनर बन कर संभाला हुआ था। NGO की डायरेक्टर शुब्रा चटर्जी ने तो कहा कि ‘The Hindu’ में छपी खबर के बारे में उन्हें पता तक नहीं है। उन्होंने बताया कि अनीश मुखर्जी नामक व्यक्ति को उन्होंने सपोर्ट दिया था, जिसके AltNews के साथ संबंधों के बारे में उन्हें पता तक नहीं था। उन्होंने कहा कि हम भविष्य में ज्यादा सतर्क रहेंगे, ताकि ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

33 वर्ष पुरानी संस्था ने कहा कि अनीश मुखर्जी की संस्था ‘Art For Play’ ने उनसे संपर्क किया था, जो उनकी तरह की विप्रो की पार्टनर है। ‘डिजिटल लिटरेसी’ के एक टेस्ट कोर्ट के लिए उन्होंने अनुमति माँगी, इसमें किसी एजेंडे के बारे में उन्हें पता नहीं था। अनीश के कहने पर उन्होंने अपनी संस्था के बच्चों से बातचीत करने की अनुमति उन्होंने दी। उन्होंने बताया कि AltNews या AltEd के साथ उनका कोई संबंध नहीं है। साथ ही वो न तो प्रतीक सिन्हा और न ही मोहम्मद जुबैर को जानती हैं।

उन्होंने बताया कि अनीश ने बच्चों को जब पढ़ाया, उस समय उनके शिक्षक वहीं पर थे और अगर कुछ गड़बड़ हुई होगी तो उनकी जानकारी में ये नहीं है। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था झुग्गियों के बच्चों के लिए कोलकाता पुलिस के साथ मिल कर काम करती है और उनका मानना है कि बच्चों को एकपक्षीय चीजें नहीं पढ़ाई जानी चाहिए। अनीश के साथ उनकी जान-पहचान कुछ न्यूट्रल लोगों ने कराई थी। NGO को AltNews की करतूतों या विचारधारा के बारे में भी नहीं पता है।

LinkedIn पर अनीश मुखर्जी ने AltNews से अपने संबंधों को छिपाया

अनीस मुखर्जी ने LinkedIn पर AltNews से अपने संबंधों के बारे में अपने बायो में कुछ नहीं लिखा है। पूरा प्रोग्राम चलाने से लेकर मीडिया को इस बारे में बताने तक, सब अनीश ने NGO को बताए बिना ही किया। उन्हें इस कार्यक्रम में AltNews के शामिल होने को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने साफ़ किया, ‘विक्रमशिला’ AltNews का पार्टनर नहीं है। कुल मिला कर बात ये है कि AltNews ने कोलकाता के NGO को झूठ बोल कर, उनसे बातें छिपा कर कार्यक्रम आयोजित किया और उसका श्रेय खुद लेते हुए मीडिया में ढिंढोरा पीट दिया।

(नूपुर शर्मा द्वारा लिखित मूल लेख को विस्तृत रूप से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)

‘हमारे लोगों को पीटते हैं मुस्लिम, लड़कियों से करते हैं छेड़खानी’: अहमदाबाद में पलायन को मजबूर वाल्मीकि समाज, कहा – अवैध दुकानें खड़ी कर ली, मिलती है धमकियाँ

गुजरात के अहमदाबाद में वाल्मीकि समाज के लोग पलायन को मजबूर हो गए हैं। समाज के लोगों का आरोप है कि स्थानीय मुस्लिमों ने इलाके में उत्पात मचा रखा है। वे आए दिन लड़के व लड़कियों को छेड़ते हैं और विरोध करने पर मारपीट और गाली गलौज पर उतर आते हैं। पिछले दिनों ही विरमगाम के पास स्थित मांडल में वाल्मीकि समाज के 2 युवकों पर मुस्लिम नौजवानों ने जानलेवा हमला कर दिया था। वाल्मीकि समाज के लोगों ने जान का खतरा बताते हुए स्थानीय तालुका विकास पदाधिकारी (TDO) को पत्र लिखकर पलायन की इजाजत माँगी है।

2 मई 2023 को मांडल में वाल्मीकि समुदाय के लड़के से भद्दे मजाक का विरोध करने पर समीर, सलीम और एक नाबालिग ने वाल्मीकि समाज के युवकों की पिटाई कर दी थी। पिटाई के दौरान एक युवक के सिर में गंभीर चोट आई जबकि दूसरे का हाथ टूट गया। मामले में पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना सामने आने के बाद स्थानीय हिंदू समाज के लोग दोषियों को सख्त सजा देने की माँग कर रहे हैं।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपित मुस्लिम नौजवानों को अदालत में पेश किया। अदालत ने मामले में नाबालिग आरोपित को जमानत दे दी। वहीं पीड़ित पक्ष ने कोर्ट में समीर और सलीम की जमानत पर आपत्ति जताई। आरोप है कि इसके बाद से ही मुस्लिमों द्वारा वाल्मीकि समुदाय के लोगों को धमकियाँ दी जा रही हैं। टीडीओ को लिखे पत्र में बताया गया है कि वाल्मीकि समाज की बस्ती के सामने मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अवैध रूप से दुकानें खड़ी कर ली हैं। इन दुकानों में चोरी का सामान बेचा जाता है।

पत्र में आगे लिखा गया है कि स्थानीय मुस्लिम वाल्मीकि समाज के लोगों से उलझने की कोशिश करते रहते हैं। मौका मिलते ही वे लोग लड़ाई पर उतर आते हैं। उनके मुस्लिमों के अत्याचार से बस्ती के वाल्मीकि समाज के लोगों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। मुस्लिमों द्वारा शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से बचने के लिए उन्हें सामूहिक पलायन के लिए विवश होना पड़ेगा।

गाड़ी से ठोकर मारकर हत्या की धमकी

मामले में और जानकारी हासिल करने के लिए ऑपइंडिया ने वाल्मीकि समाज के लोगों से संपर्क किया। स्थानीय भाविन सिरेसिया ने जानकारी दी कि पिछले दिनों हुए मारपीट की घटना के बाद मुस्लिमों द्वारा पीड़ितों पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। पीड़ित युवकों में से एक राहुल सिरोसिया ने बताया कि केस वापस न लेने पर हर दूसरे दिन अलग-अलग लोगों को भेजकर जान से मारने की धमकी दी जाती है।

पीड़ित परिवार के लोगों को रास्ते पर कार से टक्कर मार कर हत्या की धमकी मिल रही है। धमकियाँ मिलने के बाद परिवार के लोग भयभीत हैं और घर से नहीं निकल रहे हैं। लिहाजा समाज के लोग टीडीओ से पलायन की अनुमति माँग रहे हैं। टीडीओ को भेजे गए पत्र की कॉपी ऑपइंडिया के पास भी उपलब्ध है।

क्या है पूरा मामला?

2 मई की शाम करीब 6 बजे वाल्मीकि समाज का एक 10 वर्षीय बालक बस्ती की गेट के सामने की एक दुकान पर गया। दुकान पर मौजूद मुस्लिम युवकों ने लड़के का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। इसमें सलीम, समीर और महबूब भाई नाम के शख्स का नाबालिग बेटा शामिल था। पास ही खड़े दलित समुदाय के दो युवकों ने मजाक उड़ा रहे नौजवानों से बच्चे को परेशान न करने की बात कही। इसे लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई और जमकर मारपीट हुई।

सलीम, समीर और नाबालिग लड़के ने वाल्मीकि समाज के दोनों युवकों को जातिसूचक शब्द कहकर पीटना शुरू कर दिया। तीनों ने पत्थर और लकड़ी के हथियारों से दोनों युवकों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। इसके बाद भीड़ का फायदा उठाकर तीनों धमकी देते हुए फरार हो गए। पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास भी उपलब्ध है। मामले की जाँच जारी है।

स्वतंत्रता का प्रतीक ‘सेंगोल’, संविधान में श्रीराम-श्रीकृष्ण विराजमान, पर मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए बदल दिया वेदों की भूमि का इतिहास ही

भारत सनातन की भूमि है। ये वेदों की भूमि है। ये धरती है भगवान श्रीराम की, श्रीकृष्ण की, रामायण-महाभारत की। ये वो भूमि है जहाँ वेद व्यास और वाल्मीकि जैसे विद्वान ऋषि एवं लेखक हुए। जिस महाराज भरत के नाम पर इस देश का नामकरण हुआ, उनका जिक्र भी पुराणों से ही आया है। आजकल इनकी चर्चा करने पर कह दिया जाता है कि ये सब तो हिन्दू धर्म की बातें हैं, इनसे भय का माहौल बनता है और एक सेक्युलर देश में ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए।

हम ये क्यों नहीं सोचते कि ये चीजें भारतीय पहले है, बाद में धार्मिक। क्या इस देश का नाम सिर्फ इसीलिए बदल दिया जाए क्योंकि ये पुराणों में वर्णित एक राजा के नाम पर है? रामायण-महाभारत भारत भूमि की कथाएँ हैं, इतिहास हैं, बाद में इसमें हिन्दू धर्म आता है। यहाँ रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और जगद्गुरु श्रीकृष्ण पर गौरव होना चाहिए, क्योंकि वो इसी भूमि पर मानवता के नए मूल्य स्थापित कर के गए, जीवन की कई समस्याओं का समाधान बता कर गए।

ये कितना बेहूदा तर्क है कि ‘जय श्री राम’ या ‘जय श्री कृष्ण’ नहीं बोलना चाहिए, क्योंकि इस देश में अन्य मजहबों के लोग भी रहते हैं। अमेरिका का राष्ट्रपति बाइबिल पर हाथ रख कर शपथ लेता है, इंग्लैंड के राजा का राज्याभिषेक ईसाई पादरियों की निगरानी में होता है और मलेशिया जैसे लोकतांत्रिक मुल्क का भी आधिकारिक मजहब इस्लाम वहाँ के संविधान में वर्णित है। फिर भारत में यहाँ के इतिहास, संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं का पालन करना, इसकी चर्चा करना और इस पर गौरव करना कैसे ‘सेक्युलर’ विचारधारा के विपरीत हो गया?

‘सेंगोल’: भारतीय परंपरा का ऐसा प्रतीक जिसे नेहरू ने भुला दिया

उदाहरण के लिए, ‘सेंगोल’ को ही ले लीजिए। ये शब्द आजकल काफी चर्चा में है। ‘सेंगोल’ अर्थात, चोल वंश का राजदंड। इसे मुख्य पुरोहित द्वारा एक शासक को सौंपा जाता था, जिसके साथ ही उसके शासन का शुभारंभ हो जाता था। चोल साम्राज्य भारत के सबसे प्राचीन और सबसे लंबे समय तक राज करने वाले राजवंशों में से एक रहा है। 300 ईसापूर्व में भी इसका वर्णन मिलता है। 1500 से भी अधिक वर्षों तक इस राजवंश ने शासन किया।

11वीं शताब्दी में इस साम्राज्य ने अपने शिखर को छुआ। चेरा और पंड्या के अलावा चोल राजवंश ने दक्षिण भारत में अपनी प्रभुता स्थापित की और कई मंदिर बनवाए। सामान्यतः, चोल राजा शिवभक्त होते थे। यही कारण है कि ‘सेंगोल’ में सबसे ऊपर भगवान शिव के वाहन वृषभ की, नंदी की प्रतिमा है। तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर चोल राजवंश की निर्माण कला का सबसे उत्कृष्ट नमूना है। राजेंद्र चोल को इस राजवंश का सबसे महान शासक माना जाता है।

ऐसा दिखता है ‘सेंगोल’, जो था चोल वंश का राजदंड

जब से ये सामने आया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस ‘सेंगोल’ को ग्रहण किया जाएगा और इसे नए संसद भवन में स्थापित किया जाएगा, तब से एक बार फिर से ‘सेक्युलरिज्म’ का नाम लेकर रोना-धोना शुरू हो गया है। न तो वेद विदेशी है और न ही ‘सेंगोल’, जब दोनों ही भारतीय परंपरा और सभ्यता का हिस्सा रहे हैं तो फिर ऐसी चर्चा क्यों हो रही है कि इससे ‘सेक्युलरिज्म’ को नुकसान पहुँचेगा? ‘सेंगोल’ तो न्यायप्रियता, सत्य और शक्ति का प्रतीक है।

वेदों की धरती पर अगर वैदिक मंत्रोच्चार नहीं होने तो क्या फिर अरब और यूरोंप की परंपराएँ उधार ली जाएँगी? हाल ही में हम सबने देखा कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथोनी अल्बानीज सिडनी स्थित कुडोस बैंक एरिना में प्रवासी भारतीयों के कार्यक्रम में पहुँचे तो वहाँ वैदिक मंत्रोचार के साथ उनका स्वागत किया। जब आसट्रेलिया में इससे कोई समस्या नहीं है तो फिर वेदों की धरती पर वेद से किसी को दिक्कत क्यों?

आगे बढ़ने से पहले ‘सेंगोल’ के बारे में थोड़ा और जान लेते हैं। इसके लिए हमें चलना होगा तब के ज़माने में, जब इस देश को आज़ादी मिल गई थी और बस इसकी औपचारिकता बाक़ी थी। इस देश का दुर्भाग्य है कि जब पंडित जवाहरलाल नेहरू से अंग्रेजों के अंतिम गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने पूछा कि आपके देश में सत्ता हस्तांतरण को लेकर क्या रीति-रिवाज हैं, तो नेहरू को कुछ जवाब नहीं सूझा। आखिर वो ‘सेक्युलर’ जो ठहरे!

जवाहर लाल नेहरू ने भले ही ‘भारत: एक खोज’ लिखी, लेकिन ये आश्चर्य की बात है कि इस धरती की परंपराओं को आगे बढ़ाने में उन्हें शर्म महसूस होती थी। उन्होंने ‘स्वतंत्रता पार्टी’ के संस्थापक रहे चक्रवर्ती राजगोपालचारी से इस बारे में पूछा, जो भारतीय संस्कृति की गहरी समझ रखते थे। चक्रवर्ती राजगोपालचारी बाद में भारत के गवर्नर-जनरल और गृह मंत्री भी बने। उन्होंने इस समस्या का समाधान ‘सेंगोल’ के रूप में किया।

जवाहरलाल नेहरू से ज्यादा चिंता तो लॉर्ड माउंटबेटन को थी कि इस सत्ता हस्तांतरण की प्रतीकात्मकता क्या हो और इस समारोह को विशेष बनाने के लिए क्या किया जाए। इस तरह चोल राजाओं का एक विधि अनुष्ठान भारत की आज़ादी के सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम का हिस्सा बना। प्राचीन काल में गैर-ब्राह्मण ‘आधीनम्‌’ पुरोहितों द्वारा इस अनुष्ठान को संपन्न कराया जाता था। ये शैव संप्रदाय में आते थे। थिरुवावदुथुरई मठ से राजाजी के आग्रह पर स्वतंत्रता समारोह में परंपराओं के वहन का कार्य संभाला।

इस दौरान तमिल कवि संत थिरुज्ञानसंबंधर द्वारा रचित ‘कोलारु पदिगम’ का गायन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 14 अगस्त, 1947 को सेंगोल को जवाहर लाल नेहरू को सौंपा गया, पुरोहितों द्वारा इसे शुद्ध जल से पवित्र किए जाने के बाद। जिस ‘सेंगोल’ का उस समय इस्तेमाल हुआ था, उसे मद्रास के स्वर्णकार वुम्मिडि बंगारू चेट्टी ने हस्तशिल्प कारीगरी द्वारा बनवाया था। दुर्भाग्य है कि जवाहरलाल नेहरू और फिर कॉन्ग्रेस ने दशकों तक इस देश पर राज करने के बावजूद ‘सेंगोल’ को कभी याद नहीं किया। आखिर ‘सेकुलरिज्म’ जो खतरे में आ जाता।

सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात तो ये है कि तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK भी नए संसद भवन के उद्घाटन के बॉयकॉट कर रही है। उन्हें तो खुश होना चाहिए, जिस तमिलनाडु की जनता ने उन्हें चुना है उस तमिल संस्कृति को दिल्ली में अपना कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का ध्येय लेकर चल रहे हैं। जो लोग दक्षिण भारत में क्षेत्रीय कट्टरवादी विचारधारा को पोषण देते हैं और आर्य-द्रविड़ वाले खेल से भारतीय समाज को विभाजित करने का उपक्रम चलाते हैं, उन्हें भला ‘सेंगोल’ का दिल्ली में स्थापित किया जाना कैसे पसंद आएगा?

‘सेंगोल’ तमिलनाडु को दिल्ली से जोड़ रहा है। ‘सेंगोल’ चोल राजवंश की अनुष्ठान परंपरा को जीवंत कर रहा है। ‘सेंगोल’ भारत के इतिहास, प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का प्रतीक बन कर सामने आ रहा है। ‘सेंगोल’ की स्थापना वेदों की इस भूमि पर वैदिक रीति-रिवाजों का सम्मान है। ‘सेंगोल’ हजारों वर्ष पुरानी इस जीवंत सभ्यता की समृद्धि का प्रतीक है। ‘सेंगोल’ सत्ता को शिव से जोड़ता है। ‘सेंगोल’ सत्ताधीशों को सत्य और न्याय की याद दिलाता रहेगा।

जिस संविधान की देते हैं दुहाई, उसमें भी भगवान श्रीराम

आपने अक्सर ‘सेक्युलर’ ब्रिगेड को बात-बार पर संविधान की चर्चा करते हुए देखा होगा। भारतीय संस्कृति के हर प्रदर्शन को वो संविधान से जोड़ कर कहने लगते हैं कि इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है। लेकिन, ये लोग भूल जाते हैं कि उसी संविधान की मूल प्रति में भगवान श्रीराम की तस्वीर है। आज ‘जय श्री राम’ को असंवैधानिक ठहराने की हर कोशिश हो रही है। संविधान भारतीय कलाकृति का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण है, आइए बताते हैं कैसे।

रवीन्द्रनाथ टैगोर के ‘विश्व भारती’ के कलाकारों ने इसे बनाया था, जिसमें 5 वर्ष लगे थे। भारत के संविधान की मूल प्रति में कलाकारी की शुरुआत सिंधु घाटी सभ्यता के प्रतीक वृषभ से होती है, अर्थात साँड़। इसे उस समय के सील पर देखा गया था, जो आज तक इतिहासकारों में चर्चा का विषय है। भारत के वैदिक युग को भी हमारे संविधान की मूल प्रति में दर्शाया गया है, एक गुरुकुल के रूप में। इसी तरह ‘मूलभूत अधिकारों’ वाला हिस्सा भगवान श्रीराम से शुरू होता है।

रामायण से जो तस्वीर ली गई है, उसमें भगवान श्रीराम, उनके भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता को वनवास के लिए जाते हुए दिखाया गया है। भगवान राम को अदालत द्वारा ‘संवैधानिक देवता’ भी घोषित किया जा चुका है और उनकी इस तस्वीर का इस्तेमाल अयोध्या के एक जजमेंट में भी हुआ था। इसी तरह ‘राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांत’ वाले हिस्से में श्रीकृष्ण और अर्जुन हैं। युद्ध भूमि में श्रीकृष्ण के अर्जुन को भगवद्गीता का ज्ञान दिया था, उसी तस्वीर को यहाँ उकेरा गया है।

युद्ध भूमि में अर्जुन को गीता का ज्ञान देते श्रीकृष्ण – संविधान की मूल प्रति में ये तस्वीर

इतना ही नहीं, महात्मा बुद्ध और महावीर भी हमारे संविधान की मूल प्रति में मौजूद हैं। यहाँ भी चोल राजवंश का कलेक्शन दिखता है। चोल राजवंश की नटराज प्रतिमा की तस्वीर उकेरी गई है। भाग-13, जिसमें व्यापार एवं वाणिज्य के बारे में बताया गया है, उसमें महाबलीपुरम में अर्जुन को तपस्या करते हुए दिखाया गया है। इसी तरह छत्रपति शिवाजी महाराज और गुरु गोविंद सिंह की भी तस्वीर है। क्या राम, कृष्ण, अर्जुन, तपस्या और नटराज की बात करना ‘सेक्युलर’ नहीं है? वामपंथी अब भी ऐसा कहेंगे।