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निकाह करने जा रहे हैं आमिर खान, फातिमा सना शेख ही बनेंगी तीसरी बेगम: KRK ने किया ट्वीट, बताया ‘दंगल’ के टाइम से ही कर रहे डेट

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान (Aamir Khan) और ‘दंगल’ फेम अभिनेत्री फातिमा सना शेख (Fatima Sana Shaikh) फिर से चर्चा में हैं। दोनों के जल्द निकाह करने की बात कही जा रही है। वैसे इस बात की अटकलें तब से ही लग रही हैं जब आमिर खान ने किरण राव से तलाक लिया था।

दोनों के जल्द निकाह का दावा कमाल राशिद खान उर्फ KRK ने किया है। असफल अभिनेता केआरके अलग अंदाज में फिल्मों की समीक्षा करने के लिए जाने जाते हैं। 25 मई 2023 को किए एक ट्वीट में उन्होंने कहा है, “ब्रेकिंग न्यूज: आमिर खान जल्द ही अपनी बेटी की उम्र फातिमा सना शेख से शादी करने जा रहे हैं। आमिर खान अपनी फिल्म दंगल के समय से ही सना को डेट कर रहे हैं।”

फिल्म ‘दंगल’ में आमिर और फातिमा ने बाप-बेटी का किरदार निभाया था। पिछले दिनों दोनों का पिकलबॉल खेलते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। इससे भी दोनों के जल्द शादी करने की कयासों ने जोर पकड़ लिया था। नेटिजन्स ने इस वीडियो पर कमेंट करते हुए कहा था, “मम्मी नंबर 3 आने वाली हैं।”

बता दें कि 2021 में जब आमिर खान और उनकी दूसरी बीवी किरण राव ने अपनी 15 साल की शादी को ख़त्म कर तलाक लेने का फैसला लिया, तब भी सोशल मीडिया पर ‘दंगल’ फेम अभिनेत्री फातिमा सना शेख ट्रेंड होने लगी थीं। लोग आमिर खान के साथ उनका नाम जोड़ने लगे थे। यहाँ तक की लोगों ने फातिमा सना शेख को आमिर खान और किरण राव की तलाक की वजह तक बता दिया था। एक सोशल मीडिया यूजर ने तो फातिमा सना शेख और आमिर खान को बधाई देते हुए ये कामना तक कर डाली कि उनका रिश्ता लंबा चले।

गौर करने की बात यह भी है कि दोनों के जल्द निकाह करने की खबरें सोशल मीडिया में पहली बार नहीं आ रही हैं। इससे पहले कहा जा रहा था कि दोनों अप्रैल 2022 में लाल सिंह चड्ढा की रिलीज के बाद निकाह कर लेंगे। बॉलीवुड की ख़बरें देने वाली वेबसाइट ‘Koimoi’ ने दावा किया था कि आमिर खान अपनी नई फिल्म से लोगों का ध्यान भटकना नहीं चाहते हैं और हाइप बने रहने देना चाहते हैं, इसीलिए वो अपनी तीसरी शादी की घोषणा ‘लाल सिंह चड्ढा’ की रिलीज के बाद ही करेंगे। हालाँकि आमिर खान और फातिमा सना शेख ने इन खबरों को अफवाह बताया था। 

जो सौंपेगे PM मोदी को राजदंड, उन्होंने 2024 को लेकर की मन की बात: कहा- अच्छा काम कर रहे, फिर से प्रधानमंत्री बन करें मार्गदर्शन

उनका नाम श्री हरिहर देसिका स्वामीगल (Sri Harihara Desika Swamigal) है। वे मदुरै अधीनम (Madurai Adheenam) के 293वें प्रधान पुजारी हैं। 28 मई 2023 को वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत का राजदंड यानी सेंगोल सौंपेंगे, जो नई संसद भवन (New Parliament Building) में स्थापित किया जाएगा। 1947 में जब भारत स्वतंत्र हुआ था, तब भी इसी मदुरै अधीनम के तत्कालीन प्रधान पुजारी ने पंडित जवाहर लाल नेहरू को सेंगोल (Sengol) सौंपा था।

न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में श्री स्वामीगल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) अच्छा काम कर रहे हैं। उन्हें वैश्विक सराहना मिली है। देश में सभी को उन पर गर्व है। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी एक ऐसे नेता हैं जिन्हें वैश्विक सराहना मिली है। वह लोगों के लिए अच्छा काम कर रहे हैं। 2024 में उन्हें फिर से प्रधानमंत्री बनना चाहिए और लोगों का मार्गदर्शन करना चाहिए। हम सभी को बहुत गर्व है क्योंकि विश्व के नेता हमारे पीएम मोदी की सराहना कर रहे हैं।”

श्री स्वामीगल ने बताया कि वे 28 मई को प्रधानमंत्री से मिलेंगे और उन्हें सेंगोल सौंपेंगे। बता दें कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में सेंगोल और मदुरै अधीनम के पुजारियों का महत्वपूर्ण स्थान है। 1947 में भी सत्ता हस्तांतरण के समय यहीं के प्रधान पुजारी ने राजदंड सौंपा था। 28 मई को नई संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए थिरुवावादुठुरै अधीनम मठ के कम से कम 31 सदस्यों के आने की बात कही जा रही है। ये दो जत्थों में चार्टर्ड फ्लाइट से नई दिल्ली आएँगे।

गौरतलब है कि सेंगोल इतिहास के पन्नों में गुम हो गया था। लेकिन नई संसद भवन के उद्घाटन के साथ ही यह चर्चा में आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसकी सूचना कुछ साल पहले एक वीडियो से लगी थी। 5 फीट लंबे सेंगोल पर वीडियो ‘वुम्मिडी बंगारू ज्वेलर्स (VBJ)’ ने बनाई थी। इसके मैनेजिंग डायरेक्टर आमरेंद्रन वुम्मिडी ने कहा कि उन्हें सेंगोल के बारे में खुद भी नहीं पता था। उन्होंने 2018 में एक मैग्जीन में इसका जिक्र देखा और जब इसे खोजा तो 2019 में उन्हें ये इलाहाबाद के एक म्यूजियम में रखा हुआ मिला। म्यूजियम में यह नेहरू की ‘स्वर्ण छड़ी’ के तौर पर रखा गया था।

दरअसल सत्ता हस्तांतरण का यह प्रतीक चोल राजवंश के काल से प्रेरित है। यह भारत का सबसे प्राचीन और सबसे लंबे समय तक चलने वाला शासनकाल था। उस समय एक चोल राजा से दूसरे चोल राजा को ‘सेंगोल’ देकर सत्ता हस्तांतरण की रीति निभाई जाती थी। ये एक तरह से राजदंड था, शासन में न्यायप्रियता का प्रतीक।

चोल राजवंश भगवान शिव को अपना आराध्य मानता था। इस ‘सेंगोल’ को राजपुरोहित द्वारा सौंपा जाता था, भगवान शिव के आशीर्वाद के रूप में। इस पर शिव की सवारी नंदी की प्रतिमा भी है। इसी तरह के समारोह और रिवाज की सलाह नेहरू को चक्रवर्ती राजगोपालचारी ने दी थी। इसके बाद राजाजी ने मयिलाडुतुरै स्थित ‘थिरुवावादुठुरै आथीनम’ से संपर्क किया, जिसकी स्थापना आज़ादी से 500 वर्ष पूर्व हुई थी। मठ के तत्कालीन महंत अम्बालवाना देशिका स्वामी उस समय बीमार थे, लेकिन उन्होंने ये कार्य अपने हाथ में लिया था।

स्कूल बुलाकर बाँधे हाथ, मशीनगन से भून मिट्टी का तेल डाल लगा दी आग: बांग्लादेश के बुरुंगा में 94 हिंदुओं का नरसंहार, जिसे भूला दिया गया

सन् 1971 में भारतीय सेना के पराक्रम का ही नतीजा था कि दुनिया में नए देश बांग्लादेश का जन्म हुआ। स्वराज्य के लिए वहाँ के लोगों ने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम छेड़ा। इस आंदोलन को दबाने के लिए पाकिस्तान की क्रूर सेना ने जुल्म और ज्यादती की हदें पार कर दीं। इस मुक्ति संग्राम में स्थानीय हिंदू बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे थे। इसके चलते उन्हें पाकिस्तानी सेना के जुल्मों का शिकार होना पड़ा।

कट्टर इस्लामवादी पाकिस्तानी सैनिक चुन-चुन कर हिंदुओं की हत्या कर रहे थे। पाकिस्तानी सैनिकों ने लाखों महिलाओं की आबरू लूट ली। कई हिंदू नरसंहारों को अंजाम दिया। उन्हीं नरसंहारों में एक था बुरुंगा नरसंहार। 26 मई 1971 के दिन पाकिस्तानी सेना ने बुरुंगा हाईस्कूल में 94 हिंदुओं की नृशंस हत्या कर दी थी। यह नरसंहार बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ दिए गए कई भयानक नरसंहारों में से एक है।

बांग्लादेश के सिलहट जिले के बालागंज उपजिला स्थित बुरुंगा गाँव में हिंदुओं और मुस्लिमों की मिश्रित आबादी थी। मई 1971 के तीसरे हफ्ते के शुरू होते ही गाँव के लोगों को पाकिस्तानी फौजियों के हमले का डर सताने लगा था। एक तरफ बांग्लादेश में आजादी की लड़ाई चरम पर थी तो दूसरी तरफ बुरुंगा के लोग खौफ के साये में जी रहे थे। उन्हें डर था कि किसी भी वक्त पाकिस्तानी फौज उनके गाँव पर धावा बोल सकते हैं।

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बुरुंगा के डरे हुए ग्रामीणों ने बुरुंगा यूनियन के चेयरमैन इंजद अली (Injad Ali) से मुलाकात की। 25 मई 1971 की दोपहर को इंजद अली और शांति समिति (Union Peace Committee) के चीफ सोयफ उद्दीन मास्टर (Soyef Uddin Master) ने बुरुंगा और आसपास के गाँवों में घोषणा करवा दी कि अगले दिन (26 मई) को बुरुंगा हाईस्कूल में एक शांति समिति का गठन किया जाएगा। पीस कमेटी की तरफ से ग्रामीणों को पहचान पत्र दिया जाएगा। जिन लोगों के पास यह पहचान पत्र उपलब्ध होगा, उन्हें पाकिस्तानी फौज नुकसान नहीं पहुँचाएगी। पहचान पत्र धारकों को कहीं भी आने जाने की स्वतंत्रता होगी।

साभार: इंडिया टुडे

यूनियन के चेयरमैन इंजद अली और पीस कमेटी के सदस्यों के आश्वासन पर 26 मई की सुबह गाँव के हिंदू और मुस्लिम बुरुंगा हाईस्कूल पहुँचे। वहाँ ग्रामीणों ने समिति की बैठक में भाग लिया। सुबह के 8 बजने वाले थे और स्कूल पर करीब एक हजार लोग जमा हो चुके थे। पीस कमेटी के लोग ग्रामीणों की सूची तैयार करने लगे। सुबह के 9 बजे के करीब पास के करंसी गाँव के रजाकार के कमांडर अब्दुल अहद चौधरी और गाँव के ही डॉक्टर अब्दुल खलेक के साथ पाकिस्तानी फौज के बुरुंगा हाईस्कूल पहुँची।

पाकिस्तनी आर्मी ने पीस कमेटी के लोगों से सूची ले ली। उन्होंने गाँव के हर घर को छान मारा और जो लोग हाईस्कूल पर पीस कमेटी की मीटिंग में नहीं पहुँचे थे, उन्हें घरों से निकाल कर स्कूल के मैदान में ले जाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, लोगों के चेहरे पर डर के भाव स्पष्ट रूप से देखे जा सकते थे। स्थानीय रजाकारों, पाकिस्तानी सेना और शांति समिति के सदस्यों ने सूची के अनुसार हिंदुओं और मुस्लिमों को अलग कर दिया।

हिंदुओं को स्कूल के ऑफिस में ले जाया गया और मुस्लिमों को एक क्लास रूम में बंद कर दिया गया। हिंदू और मुस्लिमों को कलमा पढ़ाया गया और उन्हें पाकिस्तान का राष्ट्रगान (National anthem) गाने को कहा गया। अब घड़ी में सुबह के 9.30 बज चुके थे। अब्दुल अहद चौधरी के साथ एक पाकिस्तानी फौजी ने लोगों से उनके पास मौजूद रुपए और आभूषण जमा कराने को कहा। इसके बाद ज्यादातर मुस्लिमों को छोड़ दिया गया। पाकिस्तानी सैनिकों ने गाँव के मुस्लिमों से ही नायलॉन की रस्सी मँगवाई और सभी हिंदुओं को एक साथ कसकर बाँधने को कहा। पाकिस्तानी सैनिकों के इस आदेश से घबराए निहत्थे और लाचार हिंदू चिल्लाने लगे।

रिपोर्टों के मुताबिक, स्कूल के शिक्षक प्रीति रंजन चौधरी भी बुरुंगा हाईस्कूल पर पीस कमेटी की मीटिंग में शामिल होने वाले थे, लेकिन स्कूल पहुँचने में उन्हें देर हो गई। प्रीति रंजन के अनुसार, जब वे स्कूल पहुँचे तो सभी हिंदुओं को एक ऑफिस में बंद देखा। पाकिस्तानी फौजियों ने प्रीति रंजन को देखते ही पकड़ लिया और ऑफिस रूम में ले गए। प्रीति रंजन बचने का रास्ता तलाश रहे थे। उन्हें रूम की एक टूटी खिड़की नजर आई। स्कूल शिक्षक ने किसी तरह खिड़की को थोड़ा और तोड़ा और बाहर कूद गया। उनके साथ रानू मालाकार समेत कुछ अन्य लोग भी भाग निकलने में कामयाब रहे।

प्रीति रंजन चौधरी, फोटोः अहमद इश्तियाक (द डेली स्टार बांग्ला)

जो भाग नहीं सके, उन्हें पाकिस्तानी सैनिकों ने स्कूल के मैदान में खड़ा कर दिया। सभी के हाथ बँधे हुए थे। इसके बाद अचानक फायरिंग शुरू हो गई और लाशों का ढेर लग गया। इस नरसंहार में जिंदा बचे दूसरे शख्स श्रीनिवास चक्रवर्ती ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि बंधे हुए हिंदुओं पर पीछे से मशीनगन की गोलियाँ दागी गईं। कोई हिंदू बचा न रह जाए, इसके लिए सभी पर मिट्टी का तेल डालकर आग के हवाले कर दिया गया। चक्रवर्ती बताते हैं कि उनके बाएँ हाथ पर गोली लगी थी। गोली लगने के बाद वे जमीन पर गिर गए और मरने का नाटक करने लगे।

श्रीनिवास चक्रवर्ती, फोटोः अहमद इश्तियाक (द डेली स्टार बांग्ला)

चक्रवर्ती बताते हैं कि पाकिस्तानी फौजियों को जाता देख कुछ घायल उठने लगे। कुछ देर बाद पाकिस्तानी सैनिक लौटे और घायलों पर दोबारा गोली चलाने लगे। इस दौरान प्रीति रंजन को भी पीठ में गोली लगी। हालाँकि, इसके बावजूद वे बच गए। नरसंहार में जिंदा बचे प्रीति रंजन कहते हैं कि कुछ देर बाद रोती-बिलखती आवाजें सुनी जाने लगीं।

कुछ घायल पानी के लिए तड़प रहे थे। प्रीति रंजन के पिता निकुंज बिहारी और कुछ लोगों ने मिलकर घायलों की मदद की और उन तक पानी पहुँचाया। इस घटना में निकुंज बिहारी खुद भी घायल हो गए थे। प्रीति रंजन ने इस नरसंहार में अपने पिता और भाई नीता रंजन चक्रवर्ती को भी खो दिया।

पाकिस्तानी सेना और रजाकारों ने सिलहट कोर्ट के बीमार वकील राम रंजन भट्टाचार्य को जान बचाने के लिए भागने को कहा। बीमार राम रंजन जैसे ही अपनी कुर्सी से उठे उन्हें गोली मार दी गई। अब्दुल अहद चौधरी और गाँव के ही डॉक्टर अब्दुल खलेक के नेतृत्व में स्थानीय रजाकारों ने पूरे गाँव में लूटपाट की और हिंदुओं के घरों को आग लगा दी। बांग्लादेश की आजादी के लिए लड़ी गई पूरी जंग में पाकिस्तान ने 30 लाख लोगों की हत्या की। इनमें कई सामूहिक नरसंहार शामिल थे।

चलता रहा विपक्ष का प्रलाप… मोदी सरकार 9 साल में लाई कई बदलाव: PM की वो योजनाएँ जिनसे सुधरी ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता ने भारत की तस्वीर को वैश्विक स्तर पर कई मायनों में बदलकर रख दिया है। विपक्ष के तमाम अडंगों के बावजूद पीएम मोदी देश की स्थिति सुधारने पर लगातार काम कर रहे हैं। उनकी योजनाएँ जमीनी हैं जो देश के गरीब तबके की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाई गई हैं। आज पीएम मोदी को इस दिशा में काम करते हुए पूरे 9 साल हो रहे हैं। 

26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी देश के पीएम बने थे और 5 साल सफल कार्यकाल के बाद 2019 में फिर से लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल करके इस पद पर अब तक हैं। उनके इस कार्यकाल के दौरान शुरू हुई योजनाएँ जनता के जीवन में आमूलचूल बदलाव लेकर आईं। लेकिन इनकी शुरुआत इतनी आसान नहीं थी क्योंकि देश में विपक्ष का सरोकार जनता से न होकर राजनीति से था।

2014 से लेकर अब तक विपक्ष लगातार प्रधानमंत्री की हर पहल पर तंज कसके, उनकी नीतियों और योजनाओं को जमीन पर आने से रोकने की कोशिशें करता रहा। लेकिन उन्हें नजरअंदाज करके आगे बढ़ने का परिणाम देश में यह हुआ कि स्थितियाँ बदलने लगीं, जीवन जीने के तरीके बदलने लगे, लोगों की सोच बदलने लगी।

जिन ग्रामों में कभी शौचालय बनना सपना होता था आज वहाँ ‘हर घर शौचालय’ बन रहे हैं। खुले में शौच को सामान्य समझने वाले इस स्कीम में एप्लाई करके जल्द से जल्द शौचालय चाहते हैं।  इसी तरह सुदूर इलाकों में जहाँ पानी के लिए कभी लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था या फिर कहीं दूर से पानी की जरूरत पूरी करनी होती थी…उनके लिए मोदी सरकार हर घर नल योजना लेकर आ गई। 

हर घर नल योजना

हर घर नल योजना हका उद्देश्य देश के प्रत्येक ग्रामीण इलाकों के हर घर में पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाना है। पहले इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक घर तक स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाने का लक्ष्य 2030 निर्धारित किया गया था। मगर अब समयसीमा 2024 कर दी गई है। उद्देश्य यही है कि देश के किसी भी नागरिक को पीने के पानी के लिए कहीं भी दूर जाने की आवश्यकता न पड़े और घर में उन्हें स्वच्छ पानी उपलब्ध हो 1 फरवरी 2022 को पीआईबी द्वारा दी जानकारी के अनुसार, इस योजना को सफल करने के लिए सरकार ने 60 हजार करोड़ का बजट पास किया था ताकि 2022-203 में 3.8 करोड़ घरों में इस स्कीम का फायदा पहुँचाया जा सके। साल 2022 तक इस स्कीम का लाम 8 करोड़ 7 लाख लोग लाभान्वित हुए थे जिसमें से 5.5 करोड़ घरों को तो सिर्फ 2 साल के भीतर ही इस योजना का फायदा पहुँचाया गया था।

हर घर शौचालय

इसी तरह प्रधानमंत्री की हर घर शौचालय योजना भी ग्रामीणों के जीवन में बड़े बदलाव लेकर आई। पहले जहाँ शौच के लिए लोग घर से बाहर जाते थे। वहीं अब उनके पास अपने शौचालय हैं और इसके अतिरिक्त गाँवों में सार्वजनिक शौचालयों का भी निर्माण करवाया जा रहा है। 2022 तक के आँकड़ों के अनुसार इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 10 करोड़ 93 लाख से ज्यादा शौचालय अलग-अलग राज्यों में बनवाए जा चुके हैं जबकि शहरी इलाकों में ये आँकड़ा 62 लाख से ज्यादा पार कर गया है। वहीं हाल में पीएम मोदी के दिए बयान के अनुसार, ये संख्या 11 करोड़ पार कर गई है।

तमाम योजनाएँ हैं जिनका फायदा हो रहा

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई ऐसी तमाम योजनाएँ हैं जिनका फायदा जन-जन को हुआ। लोगों ने प्रधानमंत्री के प्रयासों के कारण स्वदेश वस्तुओं के मोल को समझा और विदेशी वस्तुओं की उपयोगिता कम की, कौशल योजना से युवाओं ने अपनी क्षमताओं को उभारा तो ‘मेक इन इंडिया’ मिशन से हिम्मत पाकर अपने स्टार्टअप के जरिए अपनी पहचान बनाई। उज्जवला योजना ने महिलाओं को चूल्हे के धुएँ से राहत दी तो आयुष्मान भारत के कारण गरीबों को इलाज मिल पाया।

इतना ही नहीं दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना से अंधेरे ग्रामों में बिजली पहुँची, पीएम किसान सम्मान निधि योजना से किसानों मदद के तौर पर 6000 रुपए प्रति माह मिलना शुरू हुआ। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लोगों को सिर के ऊपर छत बनाने के लिए 30 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। जन-धन योजना का फायदा 31 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिल रहा है। मुद्रा योजना के तहत लोन लेकर लोग नए-एन उद्यमों की शुरुआत कर रहे हैं। 

विपक्ष के प्रलाप

उल्लेखनीय है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से विपक्ष का प्रलाप लगातार जारी है। पहले सवाल उठता था कि वो चाय वाले होकर पीएम कैसे बन गए और अब उनकी भारत को बेहतर बनाने की योजना सामने आते ही विरोध के स्वर तेज हो जाते हैं। साल 2018 में कॉन्ग्रेस नेता व कॉन्ग्रेस सरकार में पेयजल और स्वच्छता मंत्री रहे जयराम रमेश ने मोदी सरकार में बड़े पैमाने पर बने शौचालयों की बात को हवाई दावा कहा था। इसके अलावा हर घर नल जल योजना पर भी समय-समय पर सवाल उठाए गए। कभी कहा गया कि योजना के तहत पानी बहाया जा रहा है तो कभी ये कहा गया नलों में पानी नहीं आ रहा है।

इतना ही नहीं जन-धन खातों को खोलने की घोषण के वक्त किया गया विरोध, उज्जवला योजना का विरोध, स्वच्छता अभियान का विरोध इनका उदाहरण है। वर्तमान में पीएम मोदी जो नए संसद भवन का उद्घाटन करने जा रहे हैं इससे भी विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई है। इससे पूर्व वो पीएम मोदी के कोरोना महामारी में लिए गए फैसलों पर भी प्रश्न पूछ चुके है जिनकी विदेशों तक में तारीफ हो रही है।

CWG से जमानी थी भारत की धाक, कॉन्ग्रेस ने घोटाला किया: PM मोदी बोले- 9 साल में आया खेल का नया युग, बजट ₹300 करोड़ से ₹3000 करोड़ हुआ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (25 मई 2023) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए यूपी में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स की शुरुआत की। ये खेल 3 जून तक यूपी भर में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि पिछली सरकार में खेल का क्या हाल था।

प्रधानमंत्री बोले पिछले 9 सालों में भारत में खेलों का एक नया युग शुरू हुआ है। ये नया युग विश्व में भारत को एक खेल शक्ति बनाने का ही नहीं है ये खेलों के माध्यम से समाज के सशक्तिकरण का भी नया दौर है।

उन्होंने जानकारी दी कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्पोर्ट्स को एक विषय के रूप में पढ़ाया जाना प्रस्तावित है। स्पोर्ट्स अब पाठ्यक्रम का हिस्सा होगा और देश की पहली राष्ट्रीय खेल यूनिवर्सिटी के निर्माण से इसे और मदद मिलेगी। उन्होंने युवा खिलाड़ियों से कहा इन खेलों में भाग लेने से से हम खेलेंगे भी खिलेंगे भी।

उन्होंने कॉन्ग्रेस का नाम लिए बिना कहा, “खेलों के प्रति पिछली सरकारों का जो रवैया रहा है उसका एक जीता जाता सबूत कॉमनवेल्थ घोटाला था। जो खेल प्रतियोगिता विश्व में भारत की धाक जमाने के काम आ सकती थी उसी में घोटाला कर दिया गया।” पीएम ने कहा, “पहले की सरकारों ने केवल कार्यक्रमों के नाम बदले थे, अब हम खेल को नेक्सट लेवल पर ले जाया जा रहा है।”

पीएम ने जानकारी दी कि शहरों खेलों के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर पिछली सरकारें केवल 300 करोड़ रुपए खर्च करती थीं। हालाँकि, खेलो इंडिया पहल के तहत हमारी सरकार ने लगभग 3,000 करोड़ रुपए खर्च किए।

पूजा पाठ के साथ शुरू होगा नए संसद भवन का उद्घाटन, पंडित-संत सब मौजूद होंगे: जानिए कार्यक्रम का पूरा शेड्यूल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई 2023 को संसद के नए भवन का उद्घाटन दोपहर 12 बजे करेंगे। हालाँकि, उससे पहले सुबह 7 बजे से ही हवन-पूजन आदि का कार्यक्रम शुरू हो जाएगा। निश्चित किए गए कार्यक्रम के अनुसार, सुबह 7:30 से 8:30 बजे तक हवन और पूजा किया जाएगा।

इस पूजा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह उपस्थित रहेंगे। पूजा का पंडाल महात्मा गाँधी की प्रतिमा के पास लगाया जाएगा। इस दौरान अन्य गणमान्य लोग भी शामिल होंगे।

पूजा के बाद सुबह 8.30 से 9.00 बजे के बीच लोकसभा के अंदर राजदंड या सेंगोल (Sengol) को स्थापित किया जाएगा। यह राजदंड लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी के पास स्थापित की जाएगी। उसके बाद सुबह सुबह 9 बजे से 9:30 बजे प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी। इसमें कई विद्वान और संत मौजूद रहेंगे।

सुबह पूजा और हवन के बाद दोपहर 12 बजे से दूसरे चरण का कार्यक्रम शुरू हो जाएगा। दूसरे चरण का कार्यक्रम राष्ट्रगान के साथ शुरू होगा। इस दौरान दो लघु फिल्में भी दिखाई जाएँगी। इसके बाद राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति का संदेश पढ़ेंगे।

इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष सभी को संबोधित करेंगे। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का भी संबोधन होगा। इस ऐतिहासिक मौके पर एक सिक्के और स्टाम्प को भी रिलीज किया जाएगा। सबसे अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन होगा। संबोधन के साथ ही पीएम मोदी नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे।

तय कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर लगभग 3 बजे कार्यक्रम का समापन होगा। कार्यक्रम में गणमान्य लोगों को आमंत्रण पत्र भेज दिया गया है। जिन लोगों को बुलाया गया है, उनमें तिरुवदुथुराई, पेरूर और मदुरै सहित तमिलनाडु के 20 ‘आदीनम’ भी शामिल हैं।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में तमिलनाडु की भूमिका को देखते हुए आदिनामों को आमंत्रित किया गया था। ‘आदीनम’ शब्द शैव संप्रदाय के मठों और उससे जुड़े इसके प्रमुखों- दोनों को कहा जाता है।

बता दें कि कॉन्ग्रेस सहित लगभग 21 विपक्षी दलों ने इस कार्यक्रम का विरोध किया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि नए संसद भवन का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से उद्घाटन नहीं कराकर उनके पद एवं गरिमा को ठेस पहुँचाने के साथ-साथ एक दलित महिला का अपमान भी किया जा रहा है।

इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है। याचिका में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा नए संसद भवन के उद्घाटन के लिए लोकसभा सचिवालय को निर्देश देने की माँग की गई है। दलील में कहा गया कि राष्ट्रपति एकमात्र व्यक्ति हैं जो नए संसद भवन का उद्घाटन कर सकती हैं। लोकसभा सचिवालय और लोकसभा महासचिव के पास ऐसा करने का अधिकार नहीं है।

क्या ‘शीशमहल’ की फाइलें दिल्ली सचिवालय से हुईं इधर-उधर?: CCTV फुटेज में दिखे 3 लोग, IAS ने AAP मंत्री पर लगाया आरोप

अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार को लेकर एक और खुलासा हुआ है। कहा जा रहा है कि सतर्कता विभाग के IAS अधिकारी राजशेखर के कक्ष में घुसकर कुछ लोग फाइलों को इधर-उधर करते नजर आए हैं। इसको लेकर दिल्ली सचिवालय का CCTV फुटेज के सामने आने की बात कही जा रही है।

अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कई स्टिंग ऑपरेशन कर चुके टाइम्स नाऊ नवभारत ने गुरुवार (25 मई 2023) को ऑपरेशन ‘शीशमहल’ Part-8 में दावा किया कि रात में करीब 2 बजे कुछ लोग IAS अधिकारी राजशेखर के कक्ष में घुसकर फाइलों के बंडल को इधर से उधर करते दिखाई दे रहे हैं।

सामने आए वीडियो में तीन व्यक्ति सतर्कता विभाग के अधिकारी एवं IAS राजशेखर के केबिन (कमरा नंबर 403) से निकलते दिखे। ये लोग रात 2 बजे से लेकर 2:36 बजे के बीच उनके केबिन में घुसकर कुछ फाइलें लेकर निकले। हालाँकि, ऑपरेशन शीशमहल में ये स्पष्ट नहीं किया गया कि ये लोग फाइलें लेकर कहाँ गए?

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इस तरह से किसी अधिकारी के दफ्तर में रात को जाना अपराध है। उधर, भाजपा प्रवक्ता आशीष सूद ने कहा, “दिल्ली सीएम को अब तक तो इस्तीफा दे देना चाहिए था। वे तो कहते थे कि आरोप लगते ही इस्तीफा होना चाहिए। कट्टर ईमानदार का सच सामने आ गया है।” हालाँकि, इस संबंध में अभी तक किसी तरह की FIR दर्ज कराने की बात भी सामने नहीं आई है।

बता दें कि सतर्कता (Vigilance) के विशेष सचिव वाईवीवीजे राजशेखर ने 16 मई 2023 को केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली के भ्रष्टाचार निरोधक शाखा और उपराज्यपाल कार्यालय को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी (AAP) के मंत्री सौरभ भारद्वाज के इशारे पर उनके कार्यालय में रात में तोड़फोड़ की गई, आबकारी नीति की जाँच एवं सीएम आवास के नवीनीकरण जैसे संवेदनशील फाइलों की फोटोकॉपी की गई।

दरअसल, अरविंद केजरीवाल के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने पिछले सप्ताह राजशेखर को हटा दिया था। इसके बाद 15-16 मई की रात 3 बजे के करीब दिल्ली सचिवालय में विशेष सचिव (सतर्कता) के कमरा नंबर 403 को तोड़ दिया गया था। पत्र में यह भी आशंका व्यक्त की गई है कि उनके कार्यालय की जासूसी की गई हो सकती है।

अपने पत्र में राजशेखर ने कहा कि दिल्ली सरकार के मंत्री (सतर्कता) सौरभ भारद्वाज ने सहायक निदेशकों को भ्रष्टाचार के मामलों से संबंधित फाइलों को सतर्कता अधिकारी को जमा नहीं करने का निर्देश दिया था। यह पत्र उनके पुरानी रिपोर्ट का अगला हिस्सा है।

पत्र में कहा गया है, “माननीय मंत्री के ये निर्देश जब दिनांक 15.05.2023 को पूर्वाह्न 11.30 बजे प्राप्त हुए, उस समय अधोहस्ताक्षरी के गोपनीय खंड में लगभग 76 फाइलें थीं। इन फाइलों को माननीय मंत्री (सतर्कता) के निर्देशानुसार जाँच किए बिना केवल रिकॉर्ड करने के लिए सचिव (सतर्कता) को भेज दिया गया था। ये ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि माननीय मंत्री ने अधोहस्ताक्षरी को फाइलों की जाँच नहीं करने का निर्देश दिया।”

राजशेखर का कहना है कि ‘principle of arms length’ के तहत किसी भी परिस्थिति में मंत्री को फाइलें स्थानांतरित करने का मानदंड नहीं है। इसका अनिवार्य रूप से मतलब है कि मंत्री को सतर्कता अधिकारी की जाँच से दूरी बनाए रखनी चाहिए, ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। हालाँकि, अपने-अपने काम को पूरा करने के सिद्धांत का उल्लंघन किया गया।

राजशेखर को हटाने के बाद दिल्ली सरकार ने कहा था, “राजशेखर के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं कि वह प्रोटेक्शन मनी की माँग करते हैं। आधिकारिक तौर पर 13 मई को उनसे काम छीन लिया गया…। अगर उनसे आधिकारिक तौर पर काम वापस ले लिया गया है तो फिर भी उनके पास सभी फाइलें कैसे हैं? जब उसका काम अन्य अधिकारियों को सौंपा जाता है तो कार्यालय प्रक्रिया की माँग होती है कि उसे आधिकारिक रूप से सभी फाइलों को नए अधिकारियों को सौंप देना चाहिए।”

कहा जाता है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नौकरशाही पर नियंत्रण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला सुनाए जाने के बाद AAP की सरकार नौकरशाहों और DANICS अधिकारियों को परेशान करने लगी थी। इसको लेकर 8 IAS, IPS, IFS और DANICS अधिकारियों ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना से दिल्ली सरकार और उनके मंत्री सौरभ भारद्वाज (Saurabh Bharadwaj) की शिकायत की थी।

इन अधिकारियों की शिकायतों को देखते हुए और आम आदमी पार्टी के मंत्री सौरभ भारद्वाज की कार्यप्रणाली के देखते हुए केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया। इस अध्यादेश में अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग एवं सेवाओं का अधिकार फिर से उपराज्यपाल को दिया गया। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट के पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने पुलिस, भूमि और सार्वजनिक व्यवस्था को छोड़कर सेवाओं के प्रशासन में नौकरशाहों पर दिल्ली सरकार का नियंत्रण दे दिया था।

उपराज्यपाल कार्यालय के अधिकारियों ने 20 मई 2023 को कहा था कि दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम (MCD) में तैनात कम-से-कम आठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejariwal) की सरकार पर ‘घोर उत्पीड़न’ का आरोप लगाया था। रिपब्लिक के अनुसार, मुख्य सचिव नरेश कुमार ने अपनी शिकायत में लिखा कि AAP के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने उनसे कहा, “ऐसे कैसे साइन नहीं करेगा… तेरे को करना ही पड़ेगा। इसके बाद तेरा करियर खत्म। तेरी तो जिंदगी बर्बाद करके रखूँगा।”

मजार, त्रिशूल और कव्वाली… हिंदुओं को थी मुस्लिम बनाने की तैयारी: आजमगढ़ में 18 (2 महिला+16 मर्द) गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश पुलिस ने बुधवार (24 मई 2023) की रात को आजमगढ़ जिले के एक गाँव में रेड डालकर हिंदुओं को मुस्लिम बनाने की कोशिश कर रहे 18 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार लोगों में दो महिलाएँ भी हैं। घटनास्थल से पुलिस ने कई सारी आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की है। इनके खिलाफ कई धाराओं में केस दर्ज कर जेल भेज दिया है।

घटना देवगाँव थाना क्षेत्र के लालगंज के चिरकिहिट गाँव का है। अवधेश पासी के घर एक कार्यक्रम में देर रात मुस्लिम धर्मगुरुओं की फोटो के साथ में त्रिशूल गाड़कर हिंदू समाज के लोगों को मुस्लिम बनाने की कोशिश की जा रही थी। इस धर्मांतरण कार्यक्रम को सांस्कृतिक कार्यक्रम का रूप देने के लिए कौव्वाली का आयोजन किया गया था।

इस पूरे कार्यक्रम का सरगना सिकंदर पुत्र सज्जाद है। उसे भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। अवधेश के घर पर एक मजारनुमा ढाँचा तैयार करके बीमारी ठीक करने का दिखावा किया जा रहा था। अवधेश पासी पाँच साल से बाराबांकी के देवा शरीफ जाता था। सिकंदर वहाँ झाड़-फूंक का काम करता था। उसने अवधेश को अपने झाँसे में ले लिया। आरोपित सिकंदर अपने साथ कौव्वाल लेकर चलता था।

अवधेश पासी के घर जुटे लोगों के बीच हिंदू धर्म की बुराई और इस्लाम की तारीफ कर उन्हें इस्लाम कबूल करने के लिए बरगलाया जा रहा था। बलरामपुर से बुलाए गए कौव्वाल फरीद अहमद के कौव्वाली के बीच इस्लाम को लेकर तकरीर दी जा रही थी। इसमें हिन्दू धर्म की मान्यताओं को पाखण्ड और झूठा बताया जा रहा था। हिंदू धर्म के खिलाफ लोगों को भड़काया जा रहा था। 

इस कार्यक्रम के बारे में एक व्यक्ति ने पुलिस थाने को जानकारी दी। थाने के अधिकारियों ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। घटना की जानकारी मिलते ही जिले के एसपी अनुराग आर्य पुलिस दल के साथ मौके पर पहुँच गए। पुलिस ने 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इन आरोपितों में 16 पुरुष और दो महिलाएँ हैं।

ये सभी आरोपित आजमगढ़, मऊ, गोंडा, बलरामपुर जिलों के रहने वाले हैं। ये सभी लोग गाँव के भोले-भाले लोगों को बरगला रहे थे। वे पैसे का लालच भी दे रहे थे। आरोपितों के कब्जे से सात त्रिशूल, दो धार्मिक फोटो, दो ढ़ोल, साउंड मिक्शर, हारमोनियम, साउंड बॉक्स, भगोना, गैस चूल्हा, बुलेट, टेम्पो, कार, जेनरेटर आदि बरामद की गई है।

एसपी अनुराग आर्य ने मामले की विवेचना के लिए लालगंज के CO मनोज रघुवंशी के नेतृत्व में स्पेशल टीम का गठन किया है। इसके साथ ही थाना देवगाँव और लोकल इंटेलिजेंस को लगा दिया गया है। पुलिस इन लोगों के ये भी जानने की कोशिश कर रही है कि इनका कोई दूसरा ग्रुप तो नहीं है, जो इस तरह के कामों में लगा है।

एसपी अनुराग आर्य ने कहा कि मामले की जानकारी होते ही रात में सिविल ड्रेस में पुलिस टीम को मौके पर भेजा गया। घटना की पुष्टि होते ही फरीद मोहम्मद, मोहम्मद सबरोज, रमजान, रसीद, सहाबुद्दीन, सिकंदर, मोहम्मद जावेद, फैय्याज, परवेज आजम, इरफान, साबिर अली, जावेद अहमद, हसीना, ऊषा देवी, आकाश सरोज, अवधेश सरोज, पन्नालाल गुप्ता और कुंदन बेनवंशी को गिरफ्तार कर लिया गया।

भैंस लेकर हैदराबाद की सड़क पर उतरा यादव समाज, तेलंगाना कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का विरोध: कहा- माफी माँगे नहीं तो दिल्ली में पार्टी मुख्यालय का करेंगे घेराव

तेलंगाना कॉन्ग्रेस अध्यक्ष रेवंत रेड्डी यादव समाज के निशाने पर हैं। उनके खिलाफ समाज के लोगों ने भैंस के साथ हैदराबाद में प्रदर्शन किया है। रेड्डी पर यादव समाज को अपमानित करने का आरोप लगाया गया है। उनसे माफी की माँग की गई है। ऐसा नहीं होने पर कॉन्ग्रेस मुख्यालय को घेरने की चेतावनी दी गई है।

रेवंत रेड्डी के करीब 15 दिन पुराने एक बयान को लेकर गुरुवार (25 मई 2023) को इंदिरा पार्क में प्रदर्शन किया गया। इस विरोध-प्रदर्शन में भैंस भी शामिल थे। यादव समाज के लोगों को पुलिस ने आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई। प्रदर्शनकारी लगातार कॉन्ग्रेस के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक प्रदर्शनकारी गड्डम श्रीनिवास यादव ने कहा कि 15 दिन पहले रेवंत रेड्डी ने यादव समाज का अपमान किया था। इस पर उन्हें पूरे समाज से माफी माँगनी चाहिए। श्रीनिवास यादव ने कहा कि यदि कॉन्ग्रेस नेता माफी माँग लेते हैं तो बात यहीं खत्म हो जाएगी। लेकिन अगर उन्होंने माफी नहीं माँगी तो दिल्ली में कॉन्ग्रेस पार्टी के मुख्यालय का घेराव किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लगभग 15 दिन पहले रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना के पशुपालन मंत्री तालासानी श्रीनिवास यादव के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसके बाद तेलंगाना के यादव समाज और गोल्ला कुरुमा समाज में इसे लेकर नाराजगी फैल गई। विवाद बढ़ने के बाद यादव समाज के नेता और राज्यसभा सांसद बादुगुला लिंगाइया यादव ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रेवंत रेड्डी से माफी माँगने को कहा था।

ड्रग्स लेता-पोर्न देखता और बच्चों की तलाश में निकल पड़ता: 7 साल में 30+ शिकार, 6 साल की बच्ची की हत्या-रेप में कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद

दिल्ली के सीरियल किलर रवींद्र कुमार (Ravinder Kumar) को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। रोहिणी कोर्ट (Rohini Court in in Delhi) ने उसे गुरुवार (25 मई 2023) को 6 साल की बच्ची के अपहरण, रेप और हत्या के मामले में सजा सुनाई। 32 साल के रवींद्र को 2015 में गिरफ्तार किया गया था।

वह 2008 से 2015 के बीच उसने 30 से अधिक बच्चों को अपना शिकार बनाया था। यौन शोषण के बाद वह बच्चों की हत्या कर देता था। हालाँकि उसके खिलाफ केवल तीन मामलों की ही सुनवाई हो पाई है। जिस मामले में उसे उम्रकैद हुई है उसमें उसे 6 मई 2023 को अदालत ने दोषी करार दिया था। दिल्ली पुलिस ने उसे अधिकतम सजा देने की माँग की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रवींद्र 6 से 12 साल तक के बच्चों की तलाश करता था। एक बार उसने 2 साल के बच्चे को भी अपना शिकार बनाया था। वह उत्तर प्रदेश के कासगंज का रहने वाला है। साल 2008 में काम की तलाश में दिल्ली आया था। उसके पिता प्लंबर का काम करते और माँ दूसरों के घरों में जाकर काम करती थी। मजदूरी करते हुए रवींद्र को नशे की लत गई और वह ड्रग्स लेने लगा। ड्रग्स न मिलने पर शराब के नशे में चूर हो जाता था। इसी दौरान एक बार उसने एक पॉर्न फिल्म देखी। इसके बाद उसके अंदर का हैवान जाग गया। वह घर से निकला और एक बच्चे का रेप कर उसकी हत्या कर दी।

यह उसका पहला अपराध था। लेकिन इसके बाद जब वह पकड़ा नहीं गया, तब उसकी हिम्मत बढ़ गई। मजदूरी करने के बाद घर वापस आते ही नशा करना, पॉर्न फिल्म देखना और फिर अँधेरा होते ही बच्चों की तलाश करना उसकी आदत बन गई। अपनी हवस को बुझाने के लिए वह बच्चों को चॉकलेट तो कभी कुछ पैसों का लालच देता। इसके बाद रेप कर उनकी हत्या कर देता। साल 2014 में एक 7 साल के बच्चे का यौन शोषण कर उसकी हत्या करने की कोशिश में भी रवींद्र पुलिस के हत्थे भी चढ़ा था। लेकिन बाद में वह जमानत पर बाहर आ गया। इसके बाद साल 2015 में उसे दिल्ली के बेगमपुर इलाके में एक 6 साल की लड़की का रेप और हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

दिल्ली के एडिशनल कमिश्नर और तत्कालीन DCP विक्रमजीत सिंह ने बताया था कि पूछताछ के दौरान रवींद्र की बातों ने पुलिस टीम को भी हैरान कर दिया था। उसे हवस का शिकार बने लगभग सभी बच्चे याद थे। इस केस की जाँच टीम का हिस्सा रह चुके रिटायर्ड ACP जगमिंदर सिंह दाहिया का कहना था कि रवींद्र बच्चों की हत्या करने के बाद उनके शव का भी रेप करता था। कई बार तो जब लड़कियाँ या बच्चे उसके कंट्रोल में नहीं होते थे तो वह रेप से पहले ही उन्हें मार देता, फिर रेप करता।

रवींद्र कुमार ने अपने रिश्तेदारों के बच्चों को भी शिकार बनाया था। उसने अपनी मौसी के एक रिश्तेदार के दो बच्चों को निशाना बनाने की बात भी कबूली थी। यही नहीं, उसने पुलिस को 15 ऐसी जगहें दिखाई हैं जहाँ उसने अपहरण, रेप और हत्या की वारदातों को अंजाम दिया था।