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पंजाब में डंडे-तलवारों के साथ चर्च पर हमला, दावा- निहंगों ने की बाइबिल की बेअदबी भी: ईसाई पक्ष ने भी चलाए ईंट-पत्थर

पंजाब के अमृतसर में रविवार (21 मई, 2023) को लोगों द्वारा चर्च पर हमला किया गया। हमलावरों को निहंग सिख बताया जा रहा है। यह हमला चल रही ईसाई प्रार्थना के दौरान किया गया। इस वजह से दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और हालात तनावपूर्ण हो गए। घटनास्थल पर नारेबाजी और पत्थरबाजी भी हुई। मौके पर पहुँची पुलिस ने स्थिति को काबू किया। ईसाइयों ने निहंगों पर बाइबिल की बेअदबी का आरोप लगा कर कार्रवाई की माँग की है।

वहीं हमलावरों ने सिखों की वेशभूषा में ईसाईयत के प्रचार पर एतराज जताया है। पुलिस की मानें तो अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमलावर निहंग ही थे या कोई और। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना रविवार (21 मई, 2023) की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला अमृतसर के गाँव राजेवाल का है। यहाँ के सिखपाल राणा मिनिस्ट्रीज चर्च में 21 मई को दोपहर के समय प्रार्थना चल रही थी। प्रार्थना के ही दौरान निहंगों के वेश में लगभग 25 हमलावर अपने चेहरों को ढँक के आ धमके।

उनके हाथों में डंडे और तलवारें थीं। आरोप है कि हमलावरों ने आते ही चर्च में मौजूद लोगों से मारपीट शुरू कर दी। बाहर खड़ी गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की गई और चर्च में रखी बाइबिल की भी बेअदबी हुई। इस अचानक हुए हमले से पहले तो अफरातफरी मची गई और बाद में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। इस से हालात तनावपूर्ण हो गए।

बताया जा रहा है कि निहंगों के हमले के जवाब में ईसाई पक्ष से भी ईंट-पत्थर चलाए गए। इस दौरान दोनों तरफ से धार्मिक नारेबाजी भी की गई। हमलावरों का आरोप था कि चर्च के अंदर सिखों के वेश में प्रार्थना करवाई जाती है जिस पर उन्हें एतराज है। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस पहुँची। पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग-अलग किया और समझाया। अमृतसर ग्रामीण के एसएसपी सतिंदर सिंह के मुताबिक अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर के जाँच की जा रही है।

‘लाइव हिंदुस्तान’ की रिपोर्ट के अनुसार निहंग समूहों ने इस घटना में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है। साथ ही उन्होंने ऐसे हमलों के लिए निहंगों की पोशाक पहनने पर भी आपत्ति जताई है। अमृतसर ग्रामीण सतिंदर सिंह के मुताबिक, केस दर्ज कर के जाँच की जा रही है। हमलावरों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, पुलिस की जांच हमले का मकसद पता करना भी शामिल है।

इस हमले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दौड़ रहे निहंगों के हाथों में हथियार और डंडे देखे जा सकते हैं। कुछ लोग खुले मैदान और कुछ सड़क की तरफ भाग रहे हैं। ईसाई पक्ष खुद को पीड़ित बताते हुए अपने टूटे वाहन दिखा रहा है। पादरी जॉन का कहना था कि वो लोग चुपचाप प्रार्थना कर रहे थे कि अचानक ही हमला कर दिया गया। उन्होंने निहंगों पर सख्त कार्रवाई न होने पर पूरे पंजाब में चक्का जाम करने और उसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होने का एलान किया।

बताया जा रहा है कि घटना के बाद ईसाई समुदाय के लोगों ने ण्डली ने जंडियाला गुरु-तरनतारन मार्ग पर दो घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया और ट्रैफिक जाम किया। पंजाब अल्पसंख्यक आयोग सुभाष थोबा ने भी घटनास्थल का जायजा लिया। ईसाई समूहों का कहना है कि वो इस मामले को मुख्यमंत्री भगवंत मान के आगे उठाएँगे।

गौरतलब है साल 2021 में, SGPC ने पंजाब में हो रहे धर्मांतरण को रोकने के लिए डोर-टू-डोर अभियान की शुरुआत की थी। इसी के साथ पंजाब में चर्चों पर हमलों में भी वृद्धि हुई है। अगस्त 2022 में अमृतसर के ददुआना गाँव में एक ऐसी ही घटना में निहंगों ने जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में ईसाइयों के एक कार्यक्रम को बाधित कर दिया था।

दिल्ली के जिस स्कूल ने ‘जय श्री राम’ पर छात्रों को दी सज़ा, उसकी वेबसाइट हैक: दिख रहे केवल राम ही राम, बैकग्राउंड भगवा

दिल्ली के जिस स्कूल में रविवार (20 मई, 2023) को छात्रों ने जय श्री राम बोलने पर खुद को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था, उसकी वेबसाइट हैक हो गई है। हैकर ने पूरी वेबसाइट का बैकग्राउंड रंग भगवा कर दिया। वेबसाइट पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘जय श्री राम लिख’ दिया गया है। इसी के साथ भगवान राम की कई तस्वीरें भी स्कूल की होम स्क्रीन पर दिखाई दे रहीं हैं। खास बात ये है कि इस हैकिंग की जानकारी स्कूल को थी ही नहीं। हालाँकि, थोड़े समय बाद ही स्कूल प्रशासन ने इसमें सुधार कर लिया।

यह मामला दिल्ली के मयूर विहार स्थित वनस्थली पब्लिक स्कूल का है। यहाँ 20 मई को हिंदू संगठनों ने स्कूल में छात्रों के कलावा कटे जाने और भगवान राम का पोस्टर फाड़ने के आरोप में प्रदर्शन किया था। 22 मई (सोमवार) को इस स्कूल की वेबसाइट पर भगवान राम का चित्र होम स्क्रीन पर दिखने लगा। स्क्रीन पर भगवान राम के धनुष-बाण सहित फोटो के साथ बजरंग बली की भी फोटो दिखाई देने लगी। ये फोटो स्क्रॉल हो रहे थे।

इन तस्वीरों के ऊपर लिखा था, “हिन्दुओं की सहिष्णुता को उनकी कमजोरी समझने की भूल मत करो। हमें उकसाना बंद करो। हमारे धैर्य की प्रतीक्षा मत लो।”

वनस्थली स्कूल की वेबसाइट

इन सभी के नीचे ‘हमारे मंदिर’ नाम के एक वेरिफाइड ट्विटर हैंडल का फोटो भी आ रहा था। जब ऑपइंडिया ने वेबसाइट में हुए इस बदलाव के बारे में वनस्थली स्कूल में प्रशासनिक विभाग के अधिकारी महेश शर्मा से बात की तो उन्हें इसके बारे में पता ही नहीं था। पहले तो वो मामले से अनजान बने रहे, फिर कुछ देर बाद कुछ भी न दिखने की बात कही। अंत में महेश शर्मा ने कहा, “भगवान राम का फोटो जय श्री राम लिख कर आ रहा है तो गलत क्या है?” हालाँकि, थोड़े समय बाद स्कूल की वेबसाइट फिर से पहले जैसी हो गई।

गलती की शुरुआत छात्रों से: स्कूल का दावा

वनस्थली स्कूल के प्रशासनिक विभाग के अधिकारी महेश शर्मा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि इस पूरे विवाद की शुरुआत छात्रों की गलती से हुई। उन्होंने कहा कि कुछ छात्र स्कूल के बाहर बाइक से ‘जय श्री राम’ का नारा लगाते हुए गलत तरीके से ड्राइविंग कर रहे थे, जिन्हें रोकने और अगले दिन डाँटने के लिए बुलाने पर ये सारा विवाद शुरू हुआ। बकौल महेश शर्मा, वो भी राम के नाम का सम्मान करते हैं। लेकिन स्कूल का अनुशासन बरकरार रहना चाहिए।

महेश शर्मा ने इस पूरे मामले में आरोपित किए गए टीचर अनूप और रवि के निलंबन की पुष्टि की। उन्होंने यह भी कहा कि तीसरी टीचर रितु छुट्टी पर चली गई हैं। जब हमने उनसे सवाल किया कि अगर स्कूल प्रशासन गलती छात्रों की मानता है तो टीचरों को सस्पेंड क्यों किया गया तो इसके जवाब में उन्होंने मैनेजमेंट द्वारा यह कदम जनभावना को शांत करने के लिए उठाया गया बताया।

मंदिर में पूजा से होती है काम की शुरुआत

वनस्थली स्कूल का माहौल पूरी तरह से धार्मिक बताते हुए महेश शर्मा ने कहा कि वहाँ सुबह पूजा से ही काम की शुरुआत होती है। स्कूल की कई अलग-अलग जगहों पर ब्रांच बताते हुए उन्होंने कहा कि हर स्कूल के कैम्पस में एक मंदिर बना हुआ है जो हम लोगों की राम के प्रति श्रद्धा को दर्शाता है। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि हमारे स्कूल में पढ़ाई का वातावरण धर्म निरपेक्ष है क्योंकि यहाँ सभी धर्म के बच्चे पढ़ते हैं।

गौरतलब है कि वनस्थली स्कूल के कुछ छात्रों ने स्कूल के 3 खेल टीचरों अनूप, रवि और रितु पर अपना कलावा काटने और भगवान राम का नाम लेने पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि 5 छात्रों को स्कूल की तरफ से सस्पेंड भी कर दिया गया था। हालाँकि, हिन्दू संगठनों के प्रदर्शन के बाद सभी छात्रों को बहाल करने के साथ उन्हें स्कूल के प्रशासन की तरफ से कलावा बाँधा गया था।

कर्नाटक के नए CM सिद्धारमैया के खिलाफ सरकारी टीचर ने लिखा FB पोस्ट, कुछ देर बाद सस्पेंड: प्रशासन ने कहा- नियमों के उल्लंघन पर हुई कार्रवाई

कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले के कानुबेनहल्ली में एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के एक शिक्षक को फेसबुक पोस्ट पर निलंबित कर दिया गया। शिक्षक का नाम शांतन मूर्ति है। टीचर के खिलाफ यह कार्रवाई सिर्फ इसलिए हुई है क्योंकि उन्होंने प्रदेश के नए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की फ्री नीतियों के कारण बढ़ रहे कर्जे की पोल अपने पोस्ट में खोली थी।

जिस फेसबुक पोस्ट को लेकर उन पर यह कार्रवाई हुई है उसमें उन्होंने लिखा था पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में कर्जा… एसएम कृष्णा के दौरान कर्ज 3590 करोड़ रुपए था। जबकि धरम सिंह के वक्त 15635 करोड़ रुपए, एचडी कुमारस्वामी के कार्यकाल में 3545 करोड़ रुपए, बीएस येदियुरप्पा के समय 25653 करोड़ रुपए, डीवी सदानंद गौड़ा के रहते 9464 करोड़ रुपए, जगदीश शेट्टार में 13464 करोड़ रुपए था। लेक‍िन सिद्धारमैया के कार्यकाल के दौरान यह कर्ज 2,42,000 करोड़ रुपए हो गया था।

शिक्षक ने अपने पोस्ट के जरिए बताया था कि कृष्णा के समय से लेकर शेट्टार तक मुख्यमंत्रियों द्वारा लिया गया ऋण 71,331 करोड़ रुपए था, लेकिन सिद्धारमैया के शासनकाल में यह 2,42,000 करोड़ रुपए तक पहुँच गया था। इस पोस्ट में लिखा था, “इसलिए उनके लिए (सिद्धारमैया) मुफ्त उपहारों की घोषणा करना आसान है।”

इस फेसबुक पोस्ट के आधार पर चित्रदुर्ग जिले के पब्लिक इंस्ट्रक्शन के डिप्टी डायरेक्टर के रविशंकर रेड्डी ने होसदुर्गा तालुक के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी एल जयप्पा को शिक्षक को निलंबित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टीचर ने ऐसा पोस्ट लिखकर कर्नाटक सिविल सेवा (आचरण) नियम-1966 का उल्लंघन किया है। उन्होंने यह भी कहा क‍ि श‍िक्षक के विरुद्ध आगे की कार्रवाई करने से पहले विभागीय जाँच करवाई जाएगी।

बता दें कि शिक्षक के खिलाफ हुई कार्रवाई का सोशल मीडिया पर काफी विरोध हो रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या ये फासीवाद नहीं है क्या जो केवल सीएम की आलोचना पर टीचर सस्पेंड कर दिया गया। यूजर्स का सवाल है कि अगर ऐसा कुछ भाजपा के शासनकाल में हुआ होता तो अब तक हल्ला मच जाता।

मैदान में शुभमन गिल ने मारी सेंचुरी, सोशल मीडिया में उनकी बहन को ‘वेश्या’ बता रहे RCB फैंस: गुजरात टाइटंस के क्रिकेटर की मौत की भी कामना

रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर टीम के आईपीएल 2023 से आउट होने के बाद अब इसके फैन क्रिकेटर शुभमन गिल और उनकी बहन को जान से मारने की धमकियाँ दे रहे हैं। दरअसल 21 मई को गुजरात टाइटन्स की ओर से शुभमन गिल ने आरसीबी के खिलाफ शानदार पारी खेली थी। उन्होंने मात्र 52 बॉल पर 104 रन बनाए थे। उनकी इस पारी ने आरसीबी को मैच में हराने में काफी मदद की, जिसे देखते हुए आरसीबी फैन उन पर भड़क गए।

देख सकते हैं कि कैसे आरसीबी फैन शुभमन गिल की मौत की प्रार्थना करते हुए कह रहे हैं कि आज के बाद शुभमन गिल के साथ जो भी गलत होगा, वो उनकी बददुआओं के कारण होगा।

कुछ आरसीबी फैन्स तो खुलेआम उनकी मौत की बात लिखकर कह रहे हैं कि उन्हें अपनी आईडी की कोई परवाह नहीं है।

शुभमन गिल की बहन के इंस्टाग्राम की आईडी शेयर करके उसे रिपोर्ट करवाने की और गाली-गलौच करने की अपील कर रहे हैं।

स्क्रीनशॉट में दिख रहा है कि शहनील गिल की पोस्ट पर एक यूजर ने उन्हें गाली देते हुए कहा, “मेरी दुआ है कि तेरा भाई क्रिकेट खेलते में मर जाए । बॉल उसके सिर में लगे।”

एक यूजर कहता है, “अरे तू तो शुभमन ^%$ लग रही है। तू शुभमन तो नहीं है जो साला ^%$ बनकर दो रूप में है।” इतना ही नहीं शुभमन गिल की सेंचुरी से आहत होकर आरसीबी के फैन्स ने शुभमन गिल की बहन को ‘वेश्या’ तक कहा। उनकी फोटो डालकर वह बोलीं- ‘9 रुपए में सेल लगी हुई है इसकी’

अपनी ओर से टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन करने पर विराट कोहली फैंस ने शुभमन गिल को कहा, “तुझे आज ही अपना टैलेंट दिखाना था।” एक यूजर ने तो गंदी-गंदी गाली देकर क्लियर लिखा, “तुम पहले से ही क्वालिफाइड थे। तुम्हें विराट कोहली के बारे में सोचना चाहिए था।”

बता दें कि इस बार आरसीबी के आईपीएल से आउट होने के बाद अब चार टीमें खेल में बचीं हैं- गुजरात टाइटन्स, मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स और लखनऊ सुपर जियांट्स।

ये पहली दफा नहीं है जब विराट कोहली के फैन्स इस तरह उनके हारने के पीछे सामने वाली टीम के खिलाड़ी को गाली देते दिखे हों। इससे पहले मुंबई इंडियंस के कैप्टन राहुल शर्मा और चेन्नई सुपर किंग्स के एमएस धोनी को भी कोहली फैंस ने गालियाँ बकीं हैं।

कसाई उमर कुरैशी ने 8 साल की बच्ची का किया रेप, गर्भपात भी करवाया: पहले चॉकलेट फिर चाकू दिखाकर 6 महीने से कर रहा था यौन शोषण

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 8 साल की एक नाबालिग बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। रेप का आरोप पीड़िता के घर के बगल में माँस बेचने वाले 34 वर्षीय उमर कुरैशी पर है। बताया जा रहा है कि उमर पिछले 6 माह से नाबालिग को डरा-धमकाकर बलात्कार कर रहा था, जिससे वो प्रेग्नेंट हो गई थी। आरोपत ने एक नर्सिंग होम ले जाकर बच्ची का गर्भपात कराया। इस दौरान काफी ब्लीडिंग हुई। बच्ची के पेट में दर्द और खून देख कर घर वालों को शक हुआ तो उमर की करतूत सामने आई। उमर को गिरफ्तार कर लिया गया है। गर्भपात करवाने वाले नर्सिग होम पर भी प्रशासन कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला लखनऊ के थानाक्षेत्र गोसाईगंज का है। यहाँ के कस्बा अमेठी में अपने परिवार के साथ रहने वाली 8 वर्षीया पीड़िता क्लास 4 की छात्रा है। माता-पिता मजदूरी कर घर चलाते हैं। पीड़िता के घर के बगल उमर कुरैशी की मीट की दुकान है। लगभग 6 माह पहले उसने बच्ची को टॉफ़ी-चॉकलेट देकर बहलाया और उसका यौन शोषण किया। इसके बाद उमर बच्ची को चाकू दिखा कर लगातार उसके साथ रेप करने लगा। डर से बच्ची ने अपने घर में किसी को नहीं बताया।

बताया जा रहा है कि लगातार रेप की वजह से कुछ समय पहले पीड़िता प्रेग्नेंट हो गई। तब उमर ने पास के ही एक अस्पताल ले जाकर उसका गर्भपात करवा दिया। एबॉर्शन के बाद पीड़िता के पेट में काफी दर्द रहने लगा और काफी ब्लीडिंग हुई। इस पर लड़की के घर वालों को शक हुआ तो उन्होंने पूरी बात पूछी। आखिरकार बच्ची ने सारी बात घर वालों को बता दी। बच्ची के परिजनों ने उमर कुरैशी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

पुलिस ने पॉक्सो सहित अन्य धाराओं में कार्रवाई करते हुए उमर को गिरफ्तार कर लिया। उधर मामले का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने बच्ची का गर्भपात करवाने वाले अस्पताल को सीज करने के आदेश दिए। इस आदेश पर CMO ने अस्पताल को सीज करते हुए FIR दर्ज करने की जानकारी दी है।

बृजभूषण सिंह का चैलेंज जंतर-मंतर वाले पहलवानों ने किया एक्सेप्ट, कहा- लाइव हो नॉर्को टेस्ट, सुप्रीम कोर्ट करे निगरानी

पहलवानों के यौन शोषण आरोप में घिरे भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा था कि वह पूरे मामले में सच सामने लाने के लिए अपना ‘नार्को टेस्ट’ कराने के लिए तैयार हैं। हालाँकि उन्होंने शर्त ये रखी थी कि पहलवान विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया का भी नार्को टेस्ट कराना होगा। उनकी इस शर्त को जंतर-मंतर पर बैठे पहलवानों ने स्वीकार लिया है। उन्होंने माँग की है कि वो सब नार्को टेस्ट के लिए तैयार हैं। ये लाइव होना चाहिए और इसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा की जानी चाहिए।

बृजभूषण सिंह ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “मैं अपना नार्को टेस्ट, पॉलिग्राफी टेस्ट या लाइ डिटेक्टर करवाने के लिए तैयार हूँ लेकिन मेरी शर्त है मेरे साथ विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया का भी ये टेस्ट होने चाहिए। अगर दोनों पहलवान अपना टेस्ट करवाने के लिए तैयार हैं तो प्रेस बुलाकर घोषणा करें और मै उनको वचन देता हूँ कि मै भी इसके लिए तैयार हूँ। मैं आज भी अपनी बात पर कायम हूँ और हमेशा कायम रहने का देशवासियों को वादा करता हूँ। रघुकुल रीती सदा चली आई। प्राण जाए पर वचन न जाई। जय श्रीराम।”

उनके इस बयान के बाद अब विनेश फोगाट ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि नार्को टेस्ट के लिए सिर्फ विनेश ही नहीं बल्कि वो सारी लड़कियाँ तैयार हैं जिन्होंने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ शिकायत दी है। उनका टेस्ट लाइव होना चाहिए। ताकि पता चले कि उन्होंने देश की बेटियों के साथ कितनी दरिंदगी और ज्यादती की।

वहीं पूनिया ने नार्को टेस्ट के लिए कहा है कि अगर फेडरेशन के घोटाले गिनने हैं तो वो ‘नार्को टेस्ट’ कराने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा जिन लड़कियों ने शिकायत की है, वह भी नार्को टेस्ट कराने के लिए तैयार हैं। उन्होंने माँग की है कि कोच विनोद तोमर, जितेंद्र और धीरेंद्र का भी नार्को टेस्ट होना चाहिए।

बता दें कि बृजभूषण सिंह के खिलाफ चल रहे पहलवानों के प्रदर्शन में बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट मुख्य चेहरे हैं। ये लोग 23 अप्रैल को दोबारा से जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे थे। इसके बाद इन्हें कई राजनैतिक दलों का समर्थन प्राप्त हुआ।

वहीं सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दिल्ली पुलिस ने WFI के पूर्व चीफ के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज किए। लेकिन पहलवान इससे संतुष्ट नहीं हुए। बाद में खबर आई कि कुश्ती महासंघ की सभी गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। अधिकारियों को काम करने से रोक दिया गया है।

कल इसी बाबत खाप पंचायत भी हुई। इसमें ऐलान किया गया कि 28 मई को महिलाओं की महापंचायत होगी और उसमें फैसला लेंगे कि आगे क्या करना है। जो भी फैसला होगा उसपर अमल करेंगे।

पॉलिसी बदलने पर बवाल?

उल्लेखनीय है कि इससे पहले बृजभूषण सिंह ने 2 मई को इस प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि ये सब नई पॉलिसी लाने के बाद हो रहा है। वरना इससे पहले ये पहलवान उनके घर आते थे, अपने घर के शादी फंक्शन में बुलाते थे, घुल-मिलकर रहते थे। तब किसी ने कोई शिकायत नहीं की थीं। पर जब से पॉलिसी आई उसके बाद से ये विरोध होने लगे।

उन्होंने पहलवानों के प्रदर्शन में मोदी तेजी कब्र खुदेगी जैसे नारों का भी जवाब दिया। वह बोले, “जिस मोदी जी की आज ये निंदा कर रहे हैं, जिस योगी जी की आज ये निंदा कर रहे हैं, दुनिया का कोई देश खिलाड़ियों को इतनी सहूलियत या पैसा नहीं देता, जितना हमारा देश देता है। कई देश तरसते हैं कि काश, हमें भारत से मौका मिलता।”

‘रामराज को हटाना है, साधु के वेश में आतंकी’: सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर साधु-संतों ने दिया करारा जवाब, पूछा – सनातन को ही क्यों बनाते हैं निशाना?

समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपनी हिन्दू विरोधी घृणा को प्रदर्शित करने हुए फिर से बयान दिया है। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर भी विवादित टिप्पणी की है। उन्होंने रविवार (21 मई, 2023) को तथागत बुद्ध जयंती के कार्यक्रम में ‘हिन्दू राष्ट्र’ को लेकर भी अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने दावा किया कि ‘साधु के वेश में आतंकी’ जब उनकी हत्या की बात कर रहे थे, तब योगी सरकार कानून व्यवस्था की दुहाई देते हुए शांत बैठी हुई थी।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, “आज सत्ता पक्ष के एक नेता के द्वारा बयान दिया जा रहा है कि देश में हिंदुओं की संख्या घट रही है और मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ रही है। किस बात का हिंदू? हिंदू नीच होने के लिए? हिंदू आप की गुलामी करने के लिए? आज आप लोगों को हिंदुओं के चिंता सता रही है। आप लोगों ने हिंदुओं को पढ़ने लिखने से वंचित कर दिया था। हिंदू समाज के किसी भी नारी को आप लोगों ने पढ़ने लिखने का अधिकार नहीं दिया।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने दावा किया कि ‘हम सब एक हैं’ की भावना अगर आप में होती तो भारत कभी गुलाम नहीं होता। उन्होंने बौद्ध और सिख धर्म के प्रादुर्भाव को भी हिन्दू विरोध से जोड़ने की कोशिश की। स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि ‘हिन्दू राष्ट्र’ की माँग भारत विरोधी है। उन्होंने रामराज को हटाने की बात भी की। रामचरितमानस का अपमान करने के बाद हुई आलोचना को उन्होंने धमकी करार देते हुए आलोचकों को आतंकी बताया।

वहीं स्वामी प्रसाद मौर्य के इस बयान पर साधु-संतों ने भी मोर्चा खोल दिया है। उनके ‘आरक्षण हटाने की साजिश’ वाले प्रलाप पर भी उन्हें जवाब मिला है। हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने पूछा कि स्वामी प्रसाद मौर्य हमेशा हिन्दू धर्म को निशाना क्यों बनाते हैं? उन्होंने कहा कि रामराज में भगवान श्रीराम ने सबको गले लगाया। रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने स्वामी प्रसाद के बयान को राजनीतिक बताते हुए उन्हें मूर्ख और पागल करार दिया। साथ ही कहा कि उन्हें ज्ञान नहीं है।

चंद्रयान-3 के लिए हो जाइए तैयार… लॉन्चिंग और लैंडिंग की तारीख का ISRO ने किया ऐलान: सभी टेस्ट पूरे, पिछली गलतियों से भी लिया सबक

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) देश की महत्वाकांक्षी चंद्र मिशन परियोजना के तहत चंद्रयान-3 को जल्द ही लॉन्च करने जा रहा है। इसके लिए तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। इसी साल 12 जुलाई को चंद्रयान-3 को लॉन्च किया जाएगा और यह 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा।

चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग की जानकारी के लिए इसरो स्पेस फ्लाइट ने एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में लिखा है, “लॉन्चिंग की तारीख सामने आ गई है। 12 जुलाई 2023 को एक GSLV Mk-III रॉकेट श्रीहरिकोटा से चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान लॉन्च करेगा। यह 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव में एक सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास करेगा।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चंद्रयान-3 यूआर राव सैटेलाइट सेंटर में है। यहाँ इसके पेलोड की फाइनल असेंबली होनी है। इससे पहले, इसी साल मार्च में वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 के सभी आवश्यक टेस्ट पूरे कर लिए थे। इस टेस्ट में लॉन्चिंग के दौरान दौरान होने वाले तेज कंपन व वातावरण में होने वाले बदलावों पर चंद्रयान-3 पूरी तरह खरा उतरा है।

बता दें कि चंद्रयान-3 अपने इस मिशन में अपने साथ कई उपकरण लेकर जाएगा। ये उपकरण चंद्रमा की सतह पर भूकंप, प्लाज्मा और मौलिक संरचना की थर्मल-फिजिकल प्रॉपर्टीज की स्टडी में मदद करेंगे। चंद्रमा की सतह व अन्य जाँच के लिए वहाँ जाने वाले स्पेसक्रॉफ्ट को देश के सबसे मजबूत लॉन्च व्हीकल GSLV Mk-3 द्वारा लॉन्च किया जाएगा। चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से होगी। बड़ी बात है कि चंद्रयान-3 को स्पेसक्राफ्ट के तीनों सिस्टम प्रोपल्शन, लैंडर और रोवर से मिलाकर बनाया गया है।

नहीं होंगी चंद्रयान-2 वाली गलतियाँ

इसरो के वैज्ञानिक कोई भी गलती दोहरा नहीं चाहते। इसके लिए पूरी तैयारी जोरों पर है। दरअसल, चंद्रयान-2 में लैंडिंग से महज 400 मीटर पहले लैंडर से संपर्क टूट गया था। हालाँकि इस बार ऐसी किसी भी गलती की संभावना से इनकार किया जा रहा है। वास्तव में, वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 की लैंडिंग तकनीक में बड़ा बदलाव किया है। इसमें ज्यादातर प्रोग्राम को ऑटोमैटिक किया गया है।

यही नहीं, चंद्रयान-3 में लैंडिंग समेत अन्य कार्यों के लिए सैकड़ों सेंसर्स लगाए गए हैं। ये सेंसर लैंडर की लैंडिंग के समय ऊँचाई, लैंडिंग की जगह, स्पीड और लैंडर को पत्थर से बचाने मदद करेंगे। चंद्रयान-3 चंद्रमा की सतह पर 7 किलोमीटर की ऊँचाई से लैंडिंग शुरू करेगा। इसके बाद 2 किलोमीटर की ऊँचाई पर आते ही इसके ऑटोमेटिक सेंसर्स काम करने लगेंगे।

जब वैश्विक महामारी से जूझ रहा था गरीब देश, तब भारत ने 132000 वैक्सीन डोज भेज कर की मदद… यूँ ही नहीं PM मोदी के सम्मान में झुके पापुआ न्यू गिनी के PM

रविवार (21 मई, 2023) की शाम एक वीडियो खासा वायरल हुआ। ये वीडियो है ओशिआनिया के एक देश पापुआ न्यू गिनी का। ये एक छोटा देश है, लेकिन दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा द्वीपीय देश है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के हिरोशिमा में G-7 की बैठक में हिस्सा लेकर सीधे पापुआ न्यू गिनी पहुँचे। वहाँ के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने जिस तरह से पीएम मोदी का स्वागत किया, उसने सबका दिल छू लिया। लोग न सिर्फ इसे भारत के बढ़ते प्रभाव के रूप में देश रहे हैं, बल्कि भारतीय संस्कारों के प्रसार का भी एक रूप मान रहे हैं।

जेम्स मारापे ने पाँव छू कर पीएम मोदी का स्वागत किया। वो सम्मान में पीएम मोदी के आगे झुके, बदले में पीएम मोदी ने भी उन्हें गले लगाया। असल में ये सब अचानक नहीं हुआ है, भारत ने इसे कमाया है। इसे समझने के लिए हमें 2 साल पहले जाना होगा। वो तारीख़ थी – 13 अप्रैल, 2021. यही वो दिन था, जब पापुआ न्यू गिनी को भारत ने 1,32,000 कोविड वैक्सीन की खेप भेजी थी। ये वो समय था, जब अधिकतर वैक्सीन निर्माता देश एक्सपोर्ट में कटौती कर रहे थे।

ऐसे समय में भारत ने AstraZeneca कोविड-19 वैक्सीन की ये खेप पापुआ न्यू गिनी को उस समय भेजी, जब दुनिया भर में कोरोना के कारण स्थिति बेहाल थी और इस वैश्विक महामारी से लगातार मौतें हो रही थीं। भारत ने UNICEF के साथ मिल कर कई अन्य देशों को भी कोरोना टीके की खेप पहुँचाई थी। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार प्रशांत महासागर में स्थित इस देश के मदद के लिए सामने आई थी। यही मुख्य कारण है कि आज वहाँ के पीएम भारत के पीएम का पाँव छू कर उन्हें सम्मान दे रहे हैं।

ये वो समय था, जब पापुआ न्यू गिनी की स्वाथ्य व्यवस्था लचर हो गई थी और वहाँ कोरोना संक्रमण बढ़ता ही चला जा रहा है। भारत ने उस समय स्वदेश में लोगों के टीकाकरण पर जोर दिया हुआ था, लेकिन इसके बावजूद पापुआ न्यू गिनी को वैक्सीन देकर उसकी मदद की गई। ये एक गरीब देश है, जिसके बाद बड़ी मात्रा में वैक्सीन खरीदने की क्षमता नहीं थी। इससे पहले लगभग एक करोड़ की जनसंख्या वाले इस देश के लिए ऑस्ट्रेलिया ने मात्र 8000 वैक्सीन डोज की खेल भेजी थी।

पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री ने चरण स्पर्श कर PM मोदी को दिया सम्मान, स्वागत के लिए तोड़ दी अपने देश की ये पुरानी परंपरा: देखें वीडियो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए पूरी दुनिया बाहें फैलाए दिखाई दे रही है। दरअसल, PM मोदी पापुआ न्यू गिनी के दौरे पर हैं। जहाँ प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का पैर छूकर स्वागत किया। इसके बाद उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। पीएम मोदी पापुआ न्यू गिनी जाने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं।

दरअसल, जापान के हिरोशिमा में आयोजित G7 और क्वाड समिट के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीधे पापुआ न्यू गिनी की यात्रा पर निकल गए। यहाँ वह FIPIC, यानी फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। इस सम्मेलन में PM मोदी के अलावा 13 अन्य देशों के नेता भी शामिल होंगे।

परंपरा को तोड़कर हुआ स्वागत…

पापुआ न्यू गिनी की परंपरा है कि सूर्यास्त के बाद वहाँ आने वाले विदेशी मेहमानों का स्वागत नहीं किया जाता। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, कूटनीति और रणनीतिक कुशलता का ही परिणाम है कि पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री ने वर्षों पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए PM मोदी का सम्मान किया।

PM मोदी का पापुआ न्यू गिनी जाना कई मायनों में दोनों देशों के लिए खास है। सबसे बड़ी बात यह है कि मोदी भारत के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिसने पापुआ न्यू गिनी का दौरा किया है। इसके अलावा प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ आपसी संबंध और सहयोग को आगे बढ़ाने के नजरिए से भी यह यात्रा महत्वपूर्ण है। यही नहीं, वैश्विक मंचों पर बढ़ती साख और वैश्विक महाशक्ति की ओर अग्रसर भारत के साथ संबंध बनाने के लिए कोई भी देश आतुर होगा। ऐसे में पापुआ न्यू गिनी समेत FIPIC के सभी सदस्य देशों के लिए भारतीय प्रधानमंत्री का यह दौरा बेहद खास होगा।

PM ने भारतीयों से भी की मुलाकात

इस दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए वहाँ रहने वाले भारतीय भी बड़ी संख्या में पहुँचे थे। पीएम मोदी का स्वागत करने आए भारतीयों में पुरुषों और महिलाओं के अलावा बच्चे भी शामिल थे। ऐसे में पीएम मोदी ने लोगों से मिलकर उनका अभिवादन भी स्वीकार किया। कुछ लोग प्रधानमंत्री के लिए तोहफे भी लेकर आए थे।