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कलावा काट डाला, भगवान के पोस्टर फाड़े, ‘जय श्री राम’ बोलने पर छात्रों को 10 चक्कर लगवा कर सस्पेंड किया… दिल्ली के इस स्कूल में टीका लगाना भी ‘अपराध’

देश की राजधानी दिल्ली के एक स्कूल में बच्चों के हाथों से कलावा काटने की खबर सामने आई है। आरोप यह भी है कि स्कूल में न सिर्फ भगवान राम के पोस्टर फाड़े गए बल्कि उनकी जय बोलने वाले छात्रों को सस्पेंड कर के परीक्षा देने से भी रोक दिया गया। इस मामले में हिन्दू संगठनों ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया है। हालात काबू में रखने के लिए पुलिस को मौके पर पहुँचना पड़ा। हंगामे के बाद छात्रों का निलंबन वापस ले लिया गया है।

छात्रों का कलावा 16 मई, 2023 को काटा गया और बाद में पोस्टर 19 मई को फाड़े गए। इसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शनिवार (20 मई, 2023) को हुआ है।

यह मामला मयूर विहार के फेज 3 स्थित वनस्थली पब्लिक स्कूल का है। यहाँ के कई हिन्दू बच्चों ने सामूहिक रूप से एकजुट हो कर स्कूल के अध्यापक अनूप रावत पर अपने हाथ में बँधा कलावा काटने का आरोप लगाया है। कटे कलाओं को डस्टबिन में डाल दिया गया। छात्रों का आरोप है कि एक अन्य टीचर रवि ने क्लास में लगा भगवान राम का पोस्टर भी फाड़ दिया और बाद में ‘जय श्री राम’ बोलने वाले छात्रों को सस्पेंड भी करवा दिया।

सस्पेंड किए गए छात्रों की संख्या 9 बताई जा रही है। छात्रों की इस सामूहिक शिकायत का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

एक छात्र का आरोप है कि ‘जय श्री राम’ बोलने वाले छात्रों को पहले बुलवा कर स्कूल के 10 चक्कर कटवाए गए, फिर उन्हें अगले दिन सस्पेंड किया गया। एक छात्र ने खुद को भगवान राम का भक्त बताया। इस घटना से संबंधित कुछ चैट भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वायरल चैटिंग छात्रों की आपस में बातचीत बताई जा रही है, जिसमें वो स्कूल में हुए इस घटनाक्रम के बारे में चर्चा कर रहे हैं। छात्रों को स्कूल के चक्कर लगवाने वाली टीचर का नाम रितु बताया जा रहा है।

इस घटना की जानकारी होते ही हिन्दू संगठनों और छात्रों के अभिभावकों ने स्कूल के गेट पर हंगामा शुरू कर दिया। सभी लोग आरोपित टीचरों पर कार्रवाई और छात्रों का निलंबन वापस लेने की माँग कर रहे थे। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस टीम पहुँची। पुलिस ने हिन्दू संगठनों सहित अभिभावकों को समझाने के प्रयास किए। इस दौरान दोनों पक्षों में नोकझोंक भी हुई। वनस्थली स्कूल साल 2002 में स्थापित हुआ है। इसके मैनेजिंग डायरेक्टर रोहित जैन और प्रिंसिपल अनुराधा जैन हैं।

3 टीचर मौखिक रूप से सस्पेंड

ऑपइंडिया ने इस मामले में एक पीड़ित छात्र से बात की। छात्र ने बताया कि उनका कलावा 16 मई को खेल टीचर रवि द्वारा काटा गया और 19 मई को एक अन्य खेल टीचर अनूप ने क्लास में घुस कर भगवान राम का पोस्टर फाड़ा। इसके बाद तीसरी खेल टीचर रितु ने ‘जय श्री राम’ बोलने वाले छात्रों को प्रताड़ित किया और कॉलेज के चक्कर लगवाए। छात्र ने आगे बताया कि स्कूल की प्रिंसिपल ने मौखिक तौर पर इन तीनों टीचरों को सस्पेंड कर दिया है जिसका कोई लिखित आदेश नहीं है। छात्र का ये भी दावा है कि निलंबित छात्रों को बहाल कर दिया गया है।

स्कूल के अंदर से वायरल हो रहे एक वीडियो में निगम पार्षद मुनेश ने भी किसी टीचर को स्कूल से निकाले जाने की बात कही है। जब ऑपइंडिया ने इस निलंबन आदि की पुष्टि के लिए स्कूल के नम्बरों पर फोन किया तो किसी ने कॉल नहीं उठाई। स्कूल का आधिकारिक मोबाइल नंबर भी सेवा से बाहर बताया। स्कूल का वर्जन आने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

ईसाई हैं रितु मैडम

राम के नाम पर स्कूल के 5 छात्रों को प्रताड़ित करने और उनके कलावे काटने वाले टीचरों रितु, रवि और अनूप में से रितु को पीड़ित छात्र ने ईसाई बताया। छात्र का दावा है कि क्लास में लगा पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिता में किसी ने बनाया था। बताया यह भी गया कि बाकी अन्य पोस्टरों और चित्रों को छोड़ दिया गया और राम के चित्र की अनुमति न होने की बात कह कर टीचर अनूप द्वारा उसे फाड़ कर डस्टबिन में डाल दिया गया।

पीड़ित छात्र के मुताबिक कलावे क्लास 10 में पढ़ने वाले बच्चों के कलावा काटे गए और भगवान राम का पोस्टर कक्षा 9 में फाड़ा गया था। हमें आरोपित टीचरों को पहले भी कुछ छात्रों से ऐसी हरकतें करने का आदी बताया गया। साथ ही छात्र ने दावा किया कि रितु, रवि और अनूप मिल कर उन्हें टीका लगाने से भी मना किया करते थे।

‘बजरंग दल’ वालों ने दी है शिकायत

स्कूल के 3 खेल टीचरों द्वारा खुद से किए गए व्यवहार से दुखी छात्र ने ऑपइंडिया को बताया कि इस मामले में ‘बजरंग दल’ ने पुलिस में शिकायत दी है। हालाँकि, शिकायत की जाँच में क्या निकला ये छात्र को मालूम नहीं था। छात्र का आरोप है कि स्कूल के स्टाफ पुलिस, मीडिया और हिन्दू संगठनों को देख कर अपनी बातचीत का रंग-ढंग बदल लेते हैं जबकि छात्रों से वो किसी और ही रूप में पेश आते हैं। स्कूल की प्रिंसिपल ने बयान दिया है कि उन्हें घटना के बारे में जानकारी नहीं थी।

उनके बयान को भी छात्र ने संदेहास्पद बताया और कहा कि बिना उनकी जानकारी के बच्चों को सस्पेंड कैसे कर दिया गया था। ऑपइंडिया ने पुलिस कार्रवाई की जानकारी लेने के लिए DCP ईस्ट को कॉल किया तो उनके द्वारा फोन नहीं उठाया गया। पुलिस का वर्जन आने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

प्रिंसिपल ने छात्रों को दोबारा बाँधे कलावे

पीड़ित छात्र के मुताबिक हंगामा होने के बाद मामले को दबाने के लिए स्कूल की प्रिंसिपल ने छात्रों को दोबारा कलावे बाँधे हैं और फिर ऐसा न होने का भरोसा दिया था। छात्र का ये भी कहना है कि माहौल गर्म देख कर स्कूल मैनेजमेंट ने फ़िलहाल के लिए स्कूल में ऑनलाइन क्लास शुरू कर दी है।

‘तेरी तो जिंदगी बर्बाद कर दूँगा…’: AAP मंत्री सौरभ भारद्वाज के खिलाफ 8 नौकरशाहों ने LG से की शिकायत, केजरीवाल सरकार पर लगाया ‘घोर उत्पीड़न’ का आरोप

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नौकरशाही पर नियंत्रण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला सुनाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार नौकरशाहों और DANICS अधिकारियों को परेशान करने लगी थी। इसको लेकर अधिकारियों ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना से दिल्ली सरकार और उनके मंत्री सौरभ भारद्वाज (Saurabh Bharadwaj) की शिकायत की है।

इसके बाद केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया। इस अध्यादेश में अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग एवं सेवाओं का अधिकार फिर से उपराज्यपाल को दिया गया है। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने पुलिस, भूमि और सार्वजनिक व्यवस्था को छोड़कर सेवाओं के प्रशासन में नौकरशाहों पर दिल्ली सरकार का नियंत्रण दे दिया था।

उपराज्यपाल कार्यालय के अधिकारियों ने शनिवार (20 मई 2023) को दावा किया कि दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम (MCD) में तैनात कम-से-कम आठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejariwal) की सरकार पर ‘घोर उत्पीड़न’ का आरोप लगाया है। रिपब्लिक के अनुसार, मुख्य सचिव नरेश कुमार ने अपनी शिकायत में लिखा कि AAP के मंत्री ने उनसे कहा, “ऐसे कैसे साइन नहीं करेगा… तेरे को करना ही पड़ेगा। इसके बाद तेरा करियर खत्म। तेरी तो जिंदगी बर्बाद करके रखूँगा।”

उपराज्यपाल कार्यालय के अधिकारियों ने कहा कि इस साल की शुरुआत में दो शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जबकि छह शिकायतें 11 मई के बाद प्राप्त हुई थीं। 11 मई को ही सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था। शिकायत करने वाले अधिकारियों में IAS, IPS, IRS और DANICS (दिल्ली, अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप, दमन और दीव तथा दादरा और नगर हवेली (सिविल) सेवा कैडर) के अधिकारी शामिल हैं।

अरविंद केजरीवाल सरकार के खिलाफ शिकायत करने वालों में पाँच IAS अधिकारी शामिल हैं। जिन IAS अधिकारियों ने शिकायत की है, वे हैं- मुख्य सचिव नरेश कुमार, पूर्व सेवा सचिव आशीष मोरे, विशेष सचिव किन्नी सिंह और सतर्कता के विशेष सचिव वाईवीवीजे राजशेखर और ऊर्जा सचिव शूरबीर सिंह हैं।

शूरबीर सिंह ने एलजी कार्यालय को सूचित किया है कि उन्होंने AAP की सत्ता वाली पंजाब में अपने परिवार के उत्पीड़न के खिलाफ उन्होंने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। हालाँकि, इन आरोपों को दिल्ली सरकार ने खारिज करते हुए फर्जी बताया और कहा है कि यह ‘गंदी राजनीति’ का हिस्सा है।

वहीं, IPS अधिकारी एवं भ्रष्टाचार निरोधी शाखा के प्रमुख मधुर वर्मा, IRS अधिकारी एवं मुख्य मूल्यांकनकर्ता एवं MCD के गृह कर विभाग में कलेक्टर कुणाल कश्यप और सेवा विभाग में तदर्थ DANICS अधिकारी एवं उपसचिव अमिताभ जोशी भी शिकायतकर्ताओं में शामिल हैं। पंजाब के रहने वाले मधुर वर्मा और शूरबीर सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके गृह राज्य में उनके परिवारों को निशाना बनाया जा रहा है।

बताते चलें कोर्ट के फैसले के बाद AAP सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सेवा सचिव आशीष मोरे को हटा दिया था। इतना ही नहीं, सौरभ भारद्वाज ने विशेष सचिव सतर्कता वाईवीवीजे राजशेखर को भी हटा दिया था। उन्होंने AAP के भ्रष्टाचार के कई मामलों की जाँच की थी। भारद्वाज ने दावा किया था कि राजशेखर पर भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के आरोप थे।

इस बीच दिल्ली के सेवा मंत्री सौरभ भारद्वाज ने शुक्रवार (19 मई 2023) को आरोप लगाया था कि मुख्य सचिव नरेश कुमार ने 16 मई 2023 को उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। इस संबंध में उन्होंने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उधर, सेवा विभाग से हटाए गए सचिव आशीष मोरे ने सौरभ भारद्वाज पर आरोप लगाया था कि कि 16 मई को मंत्री ने उन्हें अपने चेंबर में बुलाकर बदसलूकी की और धमकी दी।

‘हिन्दू पलायन को मजबूर… कॉन्ग्रेस पार्षद फरीद कुरैशी जिम्मेदार’ : जयपुर में घरों के बाहर पोस्टर लगाने वालों पर राजस्थान पुलिस ने की FIR, कहा- ऐसी कोई घटना नहीं हुई

राजस्थान की राजधानी जयपुर में हिन्दुओं के पलायन के पोस्टर लगे पाए गए। इन पोस्टरों में पलायन का जिम्मेदार स्थानीय कॉन्ग्रेस पार्षद फरीद कुरैशी को बताया गया। इस विवाद की शुरुआत कॉन्ग्रेस पार्षद के एक रिश्तेदार द्वारा कॉलोनी के एक हिंदू का घर खरीदने से हुई। भाजपा ने इन पोस्टरों पर राज्य की गहलोत सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तुष्टिकरण का आरोप लगाया। कॉन्ग्रेस ने ये पोस्टर लगाने वाले पर ही कार्रवाई की बात कर रही है। वहीं पुलिस ने किसी भी तरह के पलायन से इंकार करते हुए पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला जयपुर के किशनपोल इलाके का है। यहाँ वार्ड नंबर 69 में ओम प्रकाश पारीक अपने परिवार के साथ रहते थे। कुछ समय पहले उन्होंने स्थानीय पार्षद फरीद कुरैशी के रिश्तेदारों को अपना मकान बेच दिया था। वार्ड के अन्य स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। हालाँकि बताया जा रहा है कि ओम प्रकाश पारीक को इसके लिए अच्छी कीमत मिली थी। ओम प्रकाश का मकान फरीद के रिश्तेदारों को बिकने के बाद ये पोस्टर वार्ड में लगा दिए गए। हालाँकि अभी ये तय नहीं हो पाया है कि ऐसा किसने किया।

जहाँ पलायन के पोस्टर लगे हैं उस जगह का नाम पुरोहित जी का मोहल्ला है। इस मोहल्ले में अधिकतर हिन्दू रहते हैं। आस-पास ज्यादातर मुस्लिम आबादी बताई जा रही है। मोहल्ले वालों का आरोप है कि धीरे-धीरे उनके आस-पास मुस्लिम आबादी जानबूझ कर बढ़ाई जा रही है। इसका आरोप उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्षद फरीद कुरैशी पर लगाया है। कॉन्ग्रेस पार्षद फरीद पर मारपीट और गाली-गलौज के साथ लोगों पर झूठे केस लगवाने का भी आरोप है। स्थानीय लोगों ने सबसे अधिक फ़िक्र अपनी बहन-बेटियों की बताई।

एक स्थानीय महिला के मुताबिक, “कारण ये है कि यहाँ दिन ब दिन गंदगी फैलना शुरू हो जाएगी। यहाँ की बहन बेटियॉं खतरे में आ जाएँगी। गंदी-गंदी गालियाँ बकते हैं ये। आज सुबह ही मेरी जेठानी को गली बकी है। जातिवाद को ले कर गालियाँ बकी हैं। गालियाँ सुनने के लिए थोड़ी न है औरतें। इन लोगों का कहना है कि हम लोग यहाँ से हिन्दुओं को हटाएँगे।” स्थानीय लोगों ने कॉन्ग्रेस पार्षद पर इस समस्या का सूत्रधार बताया। महिला ने आगे कहा, “पहले बच्चे आराम से रात में घूमते थे लेकिन अब आज़ादी छिन गई। अब हम लोग नहीं घूम सकते।”

एक अन्य महिला का कहना है कि पहले हम स्वतंत्र हो कर रहते थे और अपने हिसाब से मंदिर आदि जाते थे लेकिन अब हमें परेशांनी हो जाएगी। महिला का आरोप है कि ये लोग हमारी तरफ देख कर ये कहते हैं कि ये हमें देख रहा है। एक अन्य महिला का कहना है, “आने से पहले ही ये लोग गाली-गलौज करने लगे है। आने के बाद क्या स्थिति होगी।” मोहल्ले में अभी तक 4 घर पहले से ही मुस्लिमों के बताए जा रहे हैं और हिन्दुओ के 50 घर। महिलाओं का कहना है कि जो 4 घर पहले से है उनसे उन्हें कोई दिक्कत नहीं है।

इस पोस्टर में लिखा है, “स्थानीय निवासी- पलायन को मजबूर। किशनपोल क्षेत्र से हिन्दुओं का पलायन जारी। जिम्मेदार कॉन्ग्रेस पार्षद फारिद कुरैशी। वार्ड नंबर 69। ये पोस्टर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं जिसके बाद भाजपा विधायक रामलाल शर्मा ने कॉन्ग्रेस की गहलोत सरकार को आड़े हाथों लिया है। भाजपा विधायक के मुताबिक राजस्थान सरकार तुष्टिकरण की राह चल रही है। रामलाल शर्मा ने इस घटना के असल दोषियों पर कार्रवाई की भी माँग की है।

हालाँकि भाजपा के इन आरोपों पर कॉन्ग्रेस ने इसे प्रदेश भर में चल रही भाजपा की ध्रुवीकरण की राजनीति बताया है। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता आरसी चौधरी ने पलायन के पोस्टर लगाने वाले के खिलाफ ही कार्रवाई की माँग कर डाली है। उनका कहना है कि ऐसे लोगों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए।

जयपुर के DCP उत्तरी क्षेत्र के मुताबिक मामले में FIR दर्ज कर ली गई है और आरोपितों की तलाश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रकार की कोई घटना नहीं है और केवल असामाजिक तत्वों द्वारा भ्रांति फैलाई जा रही है। फ़िलहाल मामले में अभी तक किसी गिरफ्तारी की कोई सूचना नहीं है। मामले की जाँच की जा रही है।

हनीट्रैप में पहले हिंदू युवकों को फँसाती, फिर ISIS में धकेलती: पूर्व कॉन्ग्रेस MLA की बहू ‘मरियम’ का पूरा चिट्ठा, कर्नाटक में 10 का करवा चुकी है धर्मांतरण

पिछले साल जनवरी में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने दीप्ति मरला उर्फ मरियम को कुख्यात आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) से कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया था। कर्नाटक के कोडागु की रहने वाली दीप्ति बीएम बाशा के बेटे अनस अब्दुल रहमान की पत्नी हैं। इनके पिता इदिनब्बा कभी कॉन्ग्रेस के विधायक थे। इदीनाबा की 2009 में मृत्यु हो गई।

NIA के अधिकारियों ने दीप्ति से मरियम बनी युवती के बारे में संदेह के आधार पर जाँच की थी। जाँच के दौरान पता चला कि मरियम इस्लामिक स्टेट (ISIS) नेटवर्क में युवाओं को भर्ती करने के रैकेट में शामिल थी। उसे गिरफ्तार करने के लिए सुरक्षा एजेंसी ने पाँच महीनों तक उसके खिलाफ सबूत जुटाए थे।

उल्लेखनीय है कि NIA ने अगस्त 2021 में उसके घर पर छापा मारा था और अनस अब्दुल रहमान के चचेरे भाई अम्मार को ISIS लिंक के लिए गिरफ्तार किया था। NIA ने उस वक्त मरियम से पूछताछ की थी। हालाँकि, उस वक्त उसे हिरासत में नहीं लिया गया था। सबूत मिलने के बाद उसे जनवरी 2022 में गिरफ्तार कर लिया गया।

पेशे से दंत चिकित्सक दीप्ति मरला, अनस से निकाह करने से पहले हिंदू थीं। जब वह UAE में पढ़ती थी, उस दौरान वह इस्लाम की ओर ‘आकर्षित’ हो गई। बाद में मैंगलोर के डेरलकट्टे के एक कॉलेज में बीडीएस की पढ़ाई के दौरान उसे अनस से प्यार हो गया। उसने इस्लाम धर्म अपना लिया और अपना नाम मरियम रख लिया। इसके बाद उसने अनस से निकाह कर ली।

हिंदुओं को हनीट्रैप में फँसाती थी मरियम

पूछताछ के दौरान दीप्ति मरला उर्फ मरियम ने NIA को बताया कि वह हनीट्रैप के जरिए हिंदुओं को फँसाती थी और इस्लाम में धर्मांतरित करती थी। इसके बाद वह उन्हें ISIS में भर्ती करने की कोशिश करती थी। उसने पूरे कर्नाटक में 10 से अधिक हिंदू युवकों को इस्लाम में धर्मांतरित करने की बात कबूल की।

मरियम ने फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हिंदू और मुस्लिम नामों से 15 से ज्यादा अपनी ID बना रखी थी। वह अपने शौहर के कहने पर ISIS के लिए इंस्टाग्राम पेज क्रॉनिकल फाउंडेशन को हैंडल करती थी।

मरियम अश्लील चैट के जरिए युवाओं को फँसाती थी। जान-पहचान बढ़ाने के बाद मरियम ने हिंदू युवकों को वीडियो कॉल किया। उसकी यौन उत्तेजक बातचीत युवकों को लुभाती थी और उन्हें प्यार के जाल में फँसा लेती थी। फिर वह उनसे शादी करने का वादा करती थी।

एक बार जब हिंदू युवक उसकी जाल में पूरी तरह से फँस जाते थे तो वह उन्हें इस्लाम कबूल करने और फिर आईएसआईएस में शामिल होने के लिए मजबूर करती थी। अगर उसका संभावित निशाना कोई मुस्लिम युवक होता तो वह प्यार का नाटक करती और उन्हें आईएसआईएस में शामिल होने के लिए उकसाती थी।

NIA ने कहा कि मरियम के बहकावे में आकर 2020 और 2021 में चार से पाँच युवक केरल से सीरिया चले गए। गिरफ्तारी से पाँच महीने पहले बेंगलुरू में गिरफ्तार मदेश पेरुमल उर्फ अब्दुल भी मरियम के झाँसे में आ गया था। उसने धर्म परिवर्तन करके इस्लाम अपना लिया था।

मदेश पेरुमल ने कथित तौर पर आतंकवादी संगठन के संचालकों को देश में बम विस्फोट करने का वादा किया था। एजेंसी ने बताया कि मरियम ने मदेश पेरुमल को लुभाने के लिए 10 लाख रुपए खर्च किए हैं। ISIS के साथ संबंध होने के अलावा दीप्ति मरला उर्फ मरियम के जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी संगठनों के साथ भी संबंध थे।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, NIA ने कहा, “जाँच के दौरान यह पता चला है कि सीरिया/ईराक में ISIS खिलाफत खत्म होने के बाद दीप्ति मरला और मोहम्मद अमीन ने जनवरी और मार्च 2020 में हिजरा (धार्मिक प्रवास) के तहत कश्मीर का दौरा किया था। वह कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने और ISIS की गतिविधियों का समर्थन करने के लिए के लिए वहाँ गए थे।

जाँच के दौरान यह भी पता चला है कि मोहम्मद अमीन के साथ-साथ दीप्ति मरला भी ISIS की साजिश का सरगना थी। मार्च 2021 में दर्ज मामले के संबंध में NIA द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों में मोहम्मद अमीन उर्फ ​​अबू याहया और उसके दो सहयोगी- डॉ. रहीस रशीद और मुसहब अनवर भी शामिल थे।

कुख्यात इस्लामी आतंकी संगठन ISIS के साथ संबंधों को लेकर दीप्ति मरला उर्फ मरियम की गिरफ्तारी होने के बाद उसके माता-पिता ने उससे संबंध तोड़ लिए। कहा जाता है कि इसके लिए उसके माता-पिता ने एक समाचार पत्र में विज्ञापन देकर अपने संबंध खत्म करने की घोषणा की।

पटना में 2 बदमाशों ने पुलिस वाले को सरेआम मारी गोली: पिस्टल लहराते फरार हुए, दावा- बड़ी घटना को देने जा रहे थे अंजाम

बिहार की राजधानी पटना में 2 बदमाशों ने एक पुलिस कॉन्स्टेबल को गोली मार दी। घटना उस समय की है जब पुलिस वाहनों की चेकिंग कर रही थी। हमले के बाद दोनों संदिग्ध फरार हो गए। घायल कॉन्स्टेबल को अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसकी हालात खतरे से बाहर है। इस हमले के बाद पुलिस ने अब तक 6 संदिग्धों को हिरासत में लिया और 4 बाइकों को सीज कर दिया है। हालाँकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। घटना शनिवार (20 मई 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला पटना के थानाक्षेत्र पत्रकार नगर का है। पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक IPS राजीव मिश्रा ने इस मामले की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शनिवार को काली मंदिर के पास पुलिस टीम संदिग्ध लोगों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इस दौरान बाइक सवार 2 लोगों ने सिपाही को गोली मार दी और फरार हो गए। पुलिस का कहना है कि दोनों बदमाशों के पास पिस्टल थी। आशंका है कि दोनों किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए आए थे। उन्होंने जानकारी दी कि मामले में आगे की जाँच जा रही है।

मिली जानकारी के मुताबिक घायल सिपाही का नाम राम अवतार है। घटना के समय कॉन्स्टेबल राम अवतार के साथ अन्य पुलिसकर्मी भी चेकिंग में मौजूद थे। इस दौरान बजाज पल्सर बाइक से 2 संदिग्ध आते दिखे। पुलिस ने दोनों को रोका और तलाशी शुरू कर दी। दोनों की हरकतों को संदिग्ध देखते हुए पुलिस ने दोनों को काबू करना चाहा। इसी प्रयास में राम अवतार ने एक संदिग्ध को पकड़ भी लिया। साथी को पकड़ा देख कर दूसरे संदिग्ध ने पिस्टल निकाल लिया और सिपाही राम अवतार पर गोली चला दी।

गोली लगने से राम अवतार सड़क पर गिर पड़े। इस दौरान मौके का फायदा उठा कर दोनों बदमाश पैदल भी भाग निकले। बताया जा रहा है कि फरार होने के दौरान बदमाशों ने हवाई फायरिंग भी की। उनकी पल्सर गाड़ी को पुलिस ने जब्त कर लिया है। बाकी पुलिसकर्मियों ने अपने घायल साथी रामावतार को नजदीकी अस्पताल पहुँचाया जहाँ उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। गोली सिपाही के घुटने में लगी है जिसका इलाज चल रहा है। वहीं जब्त गाड़ी व आस-पास लगे CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस टीमें घटना को अंजाम देने वाले बदमाशों की तलाश में जुटी हैं। बदमाशों की बाइक पर लगा नंबर प्लेट भी फर्जी बताया जा रहा है।

SC ने हटाया बैन, फिर भी बंगाल में एक भी जगह नहीं चल रही ‘द केरल स्टोरी’: BJP नेता का दावा- थिएटर मालिकों को प्रशासन ने दे रखी है धमकी

भाजपा IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय (Amit Malviya) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (West Bengal CM Mamata Banerjee) पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य में ‘द केरल स्टोरी (The Kerala Story)’ से प्रतिबंध हटाने के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सरकार फिल्म ना दिखाने के लिए थिएटर मालिकों को धमका रही है।

बता दें कि बंगाल सरकार ने फिल्म को तथ्यहीन और समाज में वैमनस्य फैलाने का हवाला देकर राज्य में फिल्म को दिखाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा पलटने के बाद फिल्म वितरकों और थिएटर मालिकों ने फिल्म में दिलचस्पी दिखाई थी। हालाँकि, शनिवार (20 मई 2023) को फैसले के दो दिन बीत जाने के बाद भी किसी सिनेमाघर में ‘द केरला स्टोरी’ का प्रदर्शन नहीं किया।

अमित मालवीय ने इसके लिए ममता बनर्जी और तृणमूल कॉन्ग्रेस की सरकार को दोषी ठहराया है। उन्होंने कहा कि ममता सरकार ने इस फिल्म को दिखाने वाले थिएटरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की धमकी दी है। इसके कारण फिल्म को बंगाल में नहीं दिखाया जा रहा है। इसको लेकर मालवीय ने ट्वीट किया है।

अपने ट्वीट में अमित मालवीय ने लिखा, “सुप्रीम कोर्ट द्वारा पश्चिम बंगाल में द केरला स्टोरी पर प्रतिबंध हटाने के बाद कोलकाता में एक भी थिएटर फिल्म की स्क्रीनिंग नहीं कर रहा है, जबकि ममता बनर्जी द्वारा प्रतिबंध लगाने से पहले वे सभी हाउसफुल चल रहे थे। सिनेमा हॉल मालिकों को स्थानीय प्रशासन द्वारा दंडात्मक कार्रवाई, बिल्डिंग और फायर लाइसेंस रद्द करने और इससे भी बदतर की धमकी दी गई।”

मालवीय ने आगे कहा, “यह कोर्ट की अवमानना नहीं तो और क्या है? सुप्रीम कोर्ट को पश्चिम बंगाल की सीएम की अवमानना का स्वत: संज्ञान लेना चाहिए। अगर सुश्री बनर्जी इस तरह की दंडमुक्ति के साथ सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियाँ उड़ा सकती हैं तो कोई भी कल्पना कर सकता है कि यहाँ कानून का शासन कितना कमजोर है।”

बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने जब फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की वजह पूछा तो बंगाल सरकार की ओर पेश अधिवक्ता ने तर्क दिया था कि केरल की इस कहानी में अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है और यह फिल्म हेरफेर किए गए तथ्यों पर आधारित है। इससे राज्य में सांप्रदायिक वैमनस्य और कानून व्यवस्था से संबंधित स्थिति खड़ी हो सकती है।

इस फिल्म के निर्माता ने राज्य में इस फिल्म को ना दिखाने के सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी। अपनी याचिका में निर्माता ने पश्चिम बंगाल सिनेमा (विनियमन) अधिनियम, 1954 की धारा 6 (1) की संवैधानिकता को भी चुनौती दी है, जिसके तहत पश्चिम बंगाल सरकार ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था।

इस पर राज्य सरकार ने कहा कि फिल्म पर प्रतिबंध खुफिया सूचनाओं पर आधारित एक नीतिगत निर्णय है। इससे याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हुआ है। याचिकाकर्ता के वित्तीय नुकसान को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं बताया जा सकता है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि पश्चिम बंगाल सिनेमा (विनियमन) अधिनियम के रूप में संवैधानिकता की एक धारणा है, जो उन फिल्म प्रदर्शनियों के लिए एक अपवाद बनाती है, जो शांति भंग कर सकती है।

JNU के बाद FTII में हुई ‘The Kerala Story’ की स्क्रीनिंग: झूठी कहानी बता विरोध करते रह गए वामपंथी छात्र: फिल्म के निर्माता-निर्देशक भी रहे मौजूद

महाराष्ट्र के पुणे में स्थित फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में भारी विरोध और पुलिस की मौजूदगी के बीच फ़िल्म ‘द केरल स्टोरी’ की स्क्रीनिंग हुई। एफटीआईआई में छात्रों का एक गुट जहाँ फिल्म की स्क्रीनिंग का समर्थन कर रहा था वहीं एक अन्य गुट विरोध में ढोल-नगाड़ों के साथ नारेबाजी करता नजर आया।

दरअसल, FTII में MITEE फिल्म सोसाइटी ने ‘द केरल स्टोरी’ की स्क्रीनिंग का आयोजन शनिवार (20 मई 2023) सुबह 9:30 बजे किया था। हालाँकि टेक्निकल समस्या आने के कारण स्क्रीनिंग में एक घण्टे की देरी हुई। FTII स्टूडेंट्स एसोसिएशन (FTIISA) इस स्क्रीनिंग का विरोध कर रहा था। संगठन के छात्रों का कहना है कि उन्हें न तो स्क्रीनिंग की जानकारी दी गई और न ही स्क्रीनिंग के लिए बुलाया गया।

‘द केरल स्टोरी’ की स्क्रीनिंग का विरोध कर रहे FTIISA के छात्रों ने कहना है कि ‘द केरल स्टोरी’ में जो भी दिखाया वह सब झूठ है। धर्मांतरण और लव जिहाद जैसे मुद्दों को फिल्म में गलत तरीके से पेश किया गया है। स्क्रीनिंग के दौरान फ़िल्म के निर्देशक सुदीप्तो सेन और निर्माता विपुल शाह मौजूद रहे। दोनों ने ही फिल्म देखने आए छात्रों से बातचीत की। इस दौरान सुदीप्तो सेन ने कहा है, “कुछ छात्रों को थिएटर में जाने की अनुमति नहीं दी गई। हमने छात्रों से बात की। FTII में कानून व्यवस्था बिगड़ने जैसी कोई बात नहीं हुई। विरोध कर रहे छात्र अगर फ़िल्म देखना चाहते हैं तो उनके लिए अलग से व्यवस्था की जाएगी। हमने फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए FTII का चयन नहीं किया था। बल्कि हमें यहाँ आने के लिए आमंत्रण दिया गया था।”

बता दें कि ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म में दिखाया गया है कि केरल में कट्टरपंथी मुस्लिम हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए प्रशिक्षण देते हैं। इसके बाद लड़कियों का इस्लाम में धर्मांतरण करा कर उन्हें इस्लामिक आतंकी संगठन ISIS के लिए सेक्स स्लेव बनने के लिए भेजा जाता है। फिल्म में ऐसी ही लड़कियों की कहानी दिखाई गई है। इस फिल्म द्वारा इस्लामवादियों और वामपंथियों को उनका असली चेहरा उजागर होने का डर सता रहा है। ऐसे में फ़िल्म का विरोध किया जा रहा है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सरकार ने ‘द केरल स्टोरी’ पर बैन लगा दिया था। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों ही राज्यों को फटकार लगाते हुए बैन हटाने के लिए कहा। साथ ही तमिलनाडु सरकार को फिल्म देखने जाने वालों को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया था।

‘उन लोगों की स्थिति देख लीजिए, जो पार्टी छोड़ कर गए’: कॉन्ग्रेस के प्रभारी ने कर दी सचिन पायलट की ‘बेइज्जती’, बोले – उनकी यात्रा व्यक्तिगत, हमारा लेना-देना नहीं

राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच खींचतान जारी है। शनिवार (20 मई, 2023) को कॉन्ग्रेस प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा का एक बयान सामने आया है। रंधावा का यह बयान पायलट को लेकर दिया गया बताया जा रहा है। पिछले दिनों पायलट ने भ्रष्टाचार को लेकर अपने ही सरकार के खिलाफ पदयात्रा भी निकाली। बताया जा रहा है कि उनका यह कदम गहलोत के अलावा कई पार्टी नेताओं को नागवार गुजरा है।

एयरपोर्ट पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए रंधावा ने कहा कि कॉन्ग्रेस कभी भी असहमति जताने वाले नेताओं को पार्टी से नहीं निकालती। कॉन्ग्रेस ऐसी पार्टी है जो हर व्यक्ति का सम्मान करती है और वे उसे नहीं जाने देना चाहती जो इसके साथ लंबे समय से रहे हों। उन्होंने कहा कि आपको उन लोगों की स्थिति का पता है जो पार्टी छोड़कर गए हैं। रंधावा ने पायलट की ‘जन संघर्ष यात्रा’ को एक व्यक्तिगत यात्रा करार दिया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का उससे कोई लेना देना नहीं है।

बता दें कि पायलट ने अजमेर से जयपुर तक 125 किलोमीटर की पदयात्रा निकाली थी। इसके समापन के बाद उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उनकी माँगे नहीं मानी गई तो महीने के आखिर में राज्यव्यापी आंदोलन की शुरुआत होगी। पायलट ने राजस्थान पब्लिक सर्विस कमिशन को खत्म करके इसके पुनर्गठन की भी माँग की है। उनकी तीसरी माँग पेपर लीक के कारण प्रभावित नौजवानों को मुआवजा दिए जाने और मामले की हाई लेवल जाँच कराए जाने की भी है।

बता दें कि राजस्थान में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कभी उनके डिप्टी रहे सचिन पायलट की लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई है। दोनों नेता एक दूसरे पर तंज करने और छींटाकशी का एक भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं।

‘दिल्ली पुलिस ने IPL मैच देखने से रोका, टिकटें छीन ली और नहीं जाने दिया अंदर’: पहलवानों का एक और झूठ धराया, जानें क्या है सच्चाई

राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दे रहे पहलवान शनिवार (20 मई 2023) को आईपीएल का मैच देखने अरुण जेटली स्टेडियम पहुँचे। पहलवानों ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने उनसे टिकटें ले ली लेकिन अंदर जाने नहीं दिया। उधर दिल्ली पुलिस का कहना है कि किसी भी वैध टिकट या पासधारी को मैच देखने से नहीं रोका गया।

दिल्ली में आईपीएल का 67वाँ मुकाबला दिल्ली कैपिटल्स और चेन्नई सुपर किंग्सके बीच खेला गया। इस मैच को देखने के लिए धरना दे रहे विनेश फोगाट, साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया सहित कई पहलवान अरुण जेटली स्टेडियम पहुँचे। पहलवानों का दावा है कि उन्हें अंदर जाने नहीं दिया। कुछ ही देर में घटना से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो में विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया के साथ अन्य पहलवान नजर आ रहे हैं। विनेश फोगाट बता रही हैं कि पहलवानों को दिल्ली पुलिस ने मैच देखने नहीं दिया।

मंदीप पुनिया नाम के यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि पहलवानों को आईपीएल मैच देखने से रोका गया। इस वीडियो में विनेश फोगाट कह रही हैं कि दिल्ली पुलिस ने पहले तो सुरक्षा कारणों से उन्हें स्टेडियम में दाखिल नहीं होने दिया। उसके बाद उनकी टिकटें ले ली गईं। विनेश का कहना है कि दिल्ली पुलिस सुरक्षा कारणों से उन्हें वीआईपी सुविधा देने की पेशकश कर रहे थे। विनेश फोगाट और बाकी के पहलवान इसके लिए तैयार नहीं थे।

पहलवानों का कहना था कि उन्हें कोई सुविधा नहीं चाहिए। आरोप के अनुसार, बहस के बाद पहलवान लौटने लगे तो दिल्ली पुलिस के जवानों ने उन्हें अंदर जाने के लिए कहा। वीडियो में विनेश कह रही हैं कि हमें न स्टेडियम में जाने दिया जा रहा है न लौटने दिया जा रहा है। जबकि उसी वीडियो में वे कह चुकी हैं कि बहस के बाद जब वे लौटने लगीं तो पुलिस के लोगों ने उन्हें अंदर आने के लिए कहा।

इसी वीडियो को शेयर करते हुए रामनिवास भाम्भू नाम के यूजर ने लिखा, “दिल्ली जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे पहलवान आईपीएल मैच देखने के लिए गये थे लेकिन दिल्ली पुलिस ने स्टेडियम के बाहर ही उन्हें रोक लिया व टिकटें छीन लीं और वापिस भेज दिया यह देश में चल क्या रहा है।? क्या आपातकाल लग गया है?

प्रेम सिंह सियाग नाम के यूजर ने भी पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए पहलवानों का वीडियो शेयर किया। यूजर ने भी दावा किया कि पहलवानों को आईपीएल मैच देखने से रोक दिया गया।

इसके अलावा पहलवानों के लिए किए गए झूठे ट्वीट एख दूसरे के कॉपी पेस्ट किए हुए थे।

दिल्ली पुलिस ने बताई सच्चाई

पहलवानों के इस वीडियो को कई सोसल मीडिया हैंडल्स द्वारा शेयर किया जा रहा है और दिल्ली पुलिस पर पहलवानों को मैच देखने से रोकने के इल्ज़ाम लगाए जा रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने पहलवानों के आरोपों का खंडन किया है। दिल्ली पुलिस ने इसे लेकर ट्वीट किया है।

दिल्ली पुलिस की तरफ से लिखा गया है, “कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स पहलवानों को आईपीएल मैच देखने से रोके जाने संबंधित भ्रामक खबर प्रसारित कर रहे है। किसी भी वैध टिकट या पासधारी को नहीं रोका गया है, सभी को उनके नियत गेटों से प्रवेश दिया गया है।” दिल्ली पुलिस की तरफ से सच्चाई बताए जाने के बाद भी सोशल मीडिया पर इस झूठ को प्रसारित किया जा रहा है।

‘ये मानवता का मुद्दा, समाधान के लिए जो हो सकता है सब करेंगे’: PM मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति को दिया आश्वासन, बोले जेलेंस्की – ‘धन्यवाद भारत’

जापान के हिरोशिमा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के बीच मुलाकात हुई। दोनों देशों के नेता G7 समिट में भाग लेने जापान पहुँचे हैं। इस दौरान उन्होंने PM मोदी ने कहा है रूस-यूक्रेन युद्ध राजनीति या अर्थव्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि मानवता का मुद्दा है। युद्ध विराम के लिए भारत और उनके द्वारा जो कुछ भी हो सकेगा वह करने के लिए तैयार हैं।

भारतीय प्रधानमंत्री और यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच यह मुलाकात रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच हुई है। ऐसे में यह मुलाकात कई मामलों में अहम मानी जा रही है। इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है “बीते एक-डेढ़ साल में हमने कई बार फोन पर बात की है। लेकिन ग्लासगो में हुई मुलाकात के बाद अब यह मुलाकात हो रही है। यूक्रेन में चल रहा युद्ध पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ा मुद्दा है। समूचे विश्व में इस युद्ध के प्रभाव पड़े हैं। लेकिन मैं इसे राजनीतिक या अर्थव्यवस्था का मुद्दा नहीं मानता। मेरे लिए यह मानवता का मुद्दा है, मानवीय मूल्यों का मुद्दा है।”

PM मोदी ने यह भी कहा है, “युद्ध की पीड़ा क्या होती है, यह आप हम सबसे अधिक जानते हैं। गत वर्ष जब हमारे देश के बच्चे यूक्रेन से वापस आए, तब उन्होंने वहाँ की परिस्थितियों के बारे में बताया था। इससे मैं आपकी और यूक्रेन के नागरिकों की पीड़ा को अच्छे से समझ गया था। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि युद्ध के समाधान के लिए भारत और व्यक्तिगत रूप से मैं जो कुछ भी हो सकता है सब करने की कोशिश करेंगे।”

इस मुलाकात को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए ट्वीट किया है। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा, “भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जापान में बैठक की। मैंने उन्हें यूक्रेन की शांति सूत्र पहल के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। कार्यान्वयन में शामिल होने के लिए उन्हें आमंत्रित भी किया। मानवीय समस्याओं और मोबाइल अस्पतालों में यूक्रेन की जरूरतों के बारे में बात की। हमारे देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का समर्थन करने के लिए, विशेष रूप से, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के मंचों पर और यूक्रेन को मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए भारत को धन्यवाद देता हूँ।”

गौरतलब है कि पीएम मोदी और जेलेंस्की के बीच बीते साल कम से कम 4 बार फोन पर बात हुई थी। वहीं, दिसंबर 2022 में यूक्रेन के राष्ट्रपति ने बाली में आयोजित हुए G20 शिखर सम्मेलन में घोषित 10 सूत्री शांति योजना के लिए भारत के समर्थन की माँग की थी। इसके अलावा, ज़ेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र में मानवीय सहायता और समर्थन के लिए भी गत माह पीएम मोदी को पत्र लिखा था।