‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) एकसाथ 37 से भी ज्यादा देशों में रिलीज होगी। शुक्रवार 12 मई 2023 को। फिल्म की हिरोइन अदा शर्मा ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है।
Thank you to all the crores of you who are going to watch our film,thank you for making it trend,thank you for loving my performance.This weekend the 12th #TheKeralaStory releases internationally in 37 countries (or more) ❤️❤️ #adahsharmapic.twitter.com/XiVnvBIQPw
मतलब जो प्यार इस फिल्म को अभी तक भारत के लोगों से मिला, वही अब विदेशी धरती पर भी होगा। कट्टरपंथी इस्लाम से जुड़ा जो मैसेज इस फिल्म के जरिए हिंदुस्तानी लोग देख-समझ पाए, वही अब विदेशी भी समझेंगे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 37 देशों में से कुछ जगहों पर ‘द केरल स्टोरी’ हिंदी में रिलीज की जाएगी जबकि कुछ जगहों पर हिंदी के साथ-साथ तमिल में भी। जैसे आयरलैंड के लोग ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) को सिर्फ हिंदी में देख पाएँगे जबकि इंग्लैंड में रहने वाले इसे हिंदी और तमिल दोनों भाषाओं में देख सकेंगे।
Wide Release for #TheKeralaStory in UK ?? & Ireland ??. Theatres for other regions locked too. Stay Tuned for more details.12th May release. pic.twitter.com/Fh9i4ce4wU
Wide Release for #TheKeralaStory in Australia ??. So far, centres for North America, France, UK, AUS/NZ & other countries have been locked. Stay Tuned for more details. pic.twitter.com/soMHPG2BwA
37 देशों के सिनेमा घरों में ‘द केरल स्टोरी’ के रिलीज होने का मतलब है – कॉन्ग्रेसी/वामपंथी विचारधारा वाले लोगों के घाव पर नमक रगड़ना। ऐसा इसलिए क्योंकि बैन लगा कर भी ये लोग ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) के सक्सेस को रोक नहीं पाए। तुष्टिकरण की राजनीति के चलते पश्चिम बंगाल में फिल्म पर बैन लगाया गया। तमिलनाडु में सिनेमा घरों के मालिकों को नुकसान की धमकी देकर शैडो-बैन करवाया गया। हुआ क्या लेकिन?
हुआ यह कि ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) रिलीज के पाँचवें दिन ही हाफ सेंचुरी पार कर गई। मंगलवार (9 मई 2023) तक इस फिल्म ने 2 राज्यों में बिना कमाई किए 56.86 करोड़ रुपए का बिजनेस कर लिया। 37 देशों में रिलीज के बाद फिल्म का मैसेज भी ग्लोबल दुनिया तक जाएगा, साथ ही साथ फिल्म का बिजनेस भी बढ़ेगा। दोनों मामलों में कॉन्ग्रेसी/वामपंथी लोगों की जलेगी।
The Kerala Story: कमाई में रणवीर-सलमान से आगे
मंगलवार (9 मई 2023) को ‘द केरल स्टोरी’ ने 11.14 करोड़ रुपए का बिजनेस किया। रिलीज के बाद पहले मंगलवार के कलेक्शन को देखा जाए तो 2023 की यह दूसरी सबसे सक्सेसफुल मूवी है। इससे ज्यादा शाहरुख की पठान (23 करोड़ रुपए) ही कमा पाई है।
रणवीर की ‘तू झूठी मैं मक्कार’ (6.02 करोड़ रुपए), सलमान खान की ‘किसी का भाई किसी की जान’ (6.12 करोड़ रुपए) और अजय देवगन की ‘भोला’ (4.4 करोड़ रुपए) के बिजनेस से काफी आगे निकल गई है ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story)
सुदीप्तो सेन की फिल्म ‘केरल स्टोरी (The Kerala Story)’ ने इस्लामी धर्मांतरण की साजिशों को सार्वजनिक बहस का मुद्दा बना दिया है। कई पीड़ित खुद सामने आकर अपनी आपबीती सुना रहे हैं। अनघा जयगोपाल और विशाली शेट्टी दो ऐसी महिलाएँ हैं, जिन्होंने धर्मांतरण और फिर सनातन धर्म में वापस आने के अपने अनुभव बताए हैं।
अनघा जयगोपाल (Anagha Jayagopal) और विशाली शेट्टी (Vishali Shetty) ने अपने अनुभव का विस्तार से वर्णन किया है। दोनों का कहना है कि केरल स्टोरी ने न केवल केरल या देश के अन्य राज्यों की स्थिति के बारे में बताती है, बल्कि यह दुनिया भर में जो कुछ हो रहा है, उसकी भी वास्तविकता को दर्शाती है।
अनघा जयगोपाल की आपबीती
अनघा जयगोपाल केरल के एर्नाकुलम की रहने वाली हैं। उनके सहपाठियों और सहकर्मियों द्वारा उसका ब्रेनवॉश किया गया था। उन्होंने कहा, “मैं बौद्धिक जिहाद की शिकार थी, न कि इस फिल्म में दिखाए गए लव जिहाद की। लेकिन, लव जिहाद होता है। यह निश्चित रूप से मौजूद है।”
जयगोपाल ने कहा, “मेरी धर्मांतरण की कहानी 2013-2014 से शुरू होती है। फिल्म द केरला स्टोरी की मुख्य पात्र शालिनी उन्नीकृष्णन कई सवालों का सामना करती है। जैसे कि वास्तव में हमारे कितने भगवान हैं, हम इस प्रकार के देवताओं की पूजा क्यों करते हैं आदि। मुझे अपने रूममेट्स और सहकर्मियों आदि से इसी तरह के सवालों का सामना करना पड़ता था। उस समय मैं चुप रही, क्योंकि मैं इन सवालों का जवाब नहीं दे सकी थी।”
ब्रेनवॉश की अपनी कहानी को लेकर उन्होंने आगे बताया, “जब मैंने उन सवालों को अपने माता-पिता से पूछा तो वे भी उनका जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने मुझसे कहा कि हम इन प्रथाओं का पालन कर रहे हैं, क्योंकि हमारे पूर्वजों ने ऐसा किया है। मैं संतुष्ट नहीं थी। मैंने सोशल मीडिया पर इसके बारे में और जानना चाहा, लेकिन वहाँ भी मुझे कोई ठोस जवाब नहीं मिला। इसलिए मैंने सोचा कि हिंदू धर्म का कोई मतलब नहीं है।”
जयगोपाल आगे कहती हैं, “इस तरह के सवाल पूछना धर्म परिवर्तन के लिए उनका पहला कदम है। वे आपको भ्रमित कर देंगे। वे आपका धर्म तय करना शुरू कर देंगे। इस चरण में भले ही आप चुप रहें और जवाब न दें, लेकिन वे धीरे-धीरे ब्रेनवॉश करने की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। दूसरे चरण में वे हमारे धर्म की आलोचना करने लगे। उस समय भी मैं उनके प्रश्नों का कोई उत्तर नहीं दे सकी तो उन्होंने धीरे-धीरे मुझे बताया कि इस्लाम ही असली रास्ता है और अल्लाह ही एकमात्र ईश्वर है।”
जयगोपाल ने आगे कहा, “उन्होंने मुझे पैगंबर मोहम्मद और कुरान वगैरह के बारे में बताया और साथ ही उन्होंने मुझे बताया कि इस्लाम में कहा जाता है कि एक महिला को इस तरह के कपड़े पहनने चाहिए। तब वह नरक की आग से बच जाएगी। यदि कोई महिला अपने पति के अलावा अन्य पुरुषों के सामने खुद को प्रदर्शित करती है तो वह नरक की आग में जलती है। धीरे-धीरे उन्होंने मुझे उस विचारधारा में खींच लिया।”
डर का इस्तेमाल कर कैसे ब्रेनवॉश किया जाता है, इसको लेकर जयगोपाल आगे बताती हैं, “उन्होंने मुझे इस मनःस्थिति में बनाए रखने के लिए मुख्य रूप से नरक के भय का उपयोग किया। धीरे-धीरे, उन्होंने मेरे साथ कुरान के अनुवाद और एमएम अकबर और जाकिर नाइक के वीडियो साझा किए। मैंने उन सभी वीडियो को देखना शुरू कर दिया।”
"After studying Islamc ideology for 5-6yrs I became a anti-Hindu, anti-national & not just that, I became a anti-Human as I started considering every non-M as 'kafer'. They said things against PM Modi, all Hindu orgs as well."
उन्होंने आगे कहा, “धीरे-धीरे मैं अपने मस्तिष्क में इस्लामी विचारधारा को बैठाती गई और 5-6 साल के इस्लामी अध्ययन के बाद मैं हिंदू-विरोधी, राष्ट्र-विरोधी और यहाँ तक कि मानव-विरोधी हो गई। मैं ये मानने लगी कि गैर-इस्लामी सिर्फ काफिर होते हैं। कुरान में लिखा है कि काफिरों को कोई तवज्जो नहीं दी जानी चाहिए। कुरान में कहा गया था कि उनके साथ जितना हो सके क्रूर व्यवहार किया जाना चाहिए। मेरा ब्रेनवॉश किया गया था।”
खुद को हिंदू विरोधी बना दिए जाने को लेकर जयगोपाल कहती हैं, “मैं अपने माता-पिता को काफिर मानती थी। मैं हिंदू देवताओं, हिंदू धर्म और हिंदू संस्कृति से नफरत करती थी। उस समय हिंदू शब्द से मुझे सबसे ज्यादा नफरत थी। उन्होंने मुझे हिंदू धर्म, हिंदू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हर हिंदू संगठनके खिलाफ कई बातें बताईं। छह साल के बाद मैं समाज में एक मुस्लिम महिला के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहती थी। इसलिए मुझे कानूनी तौर पर धर्म परिवर्तन करना पड़ा।”
अपने धर्मांतरण के बारे में और अधिक बताते हुए उन्होंने कहा, “साल 2020 में मैंने धर्म परिवर्तन केंद्र को कॉल किया। मैंने उनसे कहा कि मैं धर्म परिवर्तन करना चाहती हूँ। उन्होंने बताया कि फिलहाल लॉकडाउन है। इसलिए नए दाखिले नहीं लिए जा रहे हैं। मेरे पास और कोई चारा नहीं था। यह मेरे कार्यस्थल के पास था। मैंने नौकरी छोड़ दी और घर आ गई। वहाँ मैं एक मुस्लिम महिला की तरह इस्लाम का पालन करने लगी। मैंने हिजाब और फुल बाजू पहनना शुरू कर दिया। मैं इस्लाम में कही गई सभी बातों का पालन कर रही थी।”
यह पूछे जाने पर कि वह हिंदू धर्म में वापस कैसे आईं, अनघा जयगोपाल ने कहा, “उस समय RSS के कुछ कार्यकर्ताओं को मेरे बारे में पता चला। उन्होंने मुझे खोजा और उन्हें पता चला कि मैं धर्मांतरित होने जा रही हूँ। मेरा परिवार एक संगठन के साथ है, जो अर्श विद्या समाजम है। मेरे भाई मेरे पास आए और कहा कि यह मत सोचो कि उनके पास तुम्हारे सवालों का कोई जवाब नहीं है। यह मत सोचना कि तुम्हारे सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है। कोई ऐसी जगह है, जहाँ सारे सवालों के जवाब मिल सकते हैं।”
जयगोपाल आगे कहती हैं, “मैंने कहा कि मैं एक शर्त पर वहाँ आने को तैयार हूँ। एक बार जब मैं उस जगह को छोड़ दूँगी तो मैं पूर्ण हिंदू या पूर्ण मुस्लिम हो जाऊँगी। इस शर्त के साथ मैं अर्श विद्या समाजम में गई। वहाँ मैं आचार्य श्री मनोज से मिली। उन्होंने कुरान और हदीस के ही तथ्यों की ओर इशारा करके मुझे इस्लाम की धोखाधड़ी और खतरे का एहसास कराया। मुझे एहसास हुआ कि मैं उस रास्ते पर कितना खतरनाक तरीके से जा रही थी।”
वह आगे बताती हैं, “मैंने फैसला किया कि मैं जिस दौर से गुजर चुकी हूँ, वह किसी और लड़की को नहीं झेलना चाहिए। इसलिए, मैंने जीवन भर के लिए अर्श विद्या समाज के साथ काम करने का फैसला किया। मैं पिछले तीन साल से अर्श विद्या समाज से जुड़ी हुई हूँ। अब भी हमें प्रतिदिन लगभग 10 से 20 फोन कॉल आ रहे हैं कि हमारा बच्चा कट्टरपंथी बन रहा है। कृपया हमारी मदद करें।”
विशाली शेट्टी की आपबीती
अनघा जयगोपाल की तरह ही विशाली शेट्टी ने भी धर्मांतरण के अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने कहा कि फिल्म ने मजबूती के साथ सच्चाई को सामने रखा है। उन्होंने कहा, “कट्टरवाद और इस्लाम में मेरा ब्रेनवॉश मेरे कार्यस्थल में हुआ। मैं बेंगलुरु में एक आईटी कंपनी में काम कर रही थी। मैंने केरल में शुरुआत की और फिर बेंगलुरु आ गई। यहीं से इस्लाम में मेरा कट्टरवाद शुरू हुआ।”
विशाली बताती हैं, “मेरे सहकर्मियों ने मुझसे मेरे धर्म के बारे में सवाल पूछने शुरू कर दिए। इसकी शुरुआत में मैंने सामान्य ज्ञान और तर्क के साथ बचाव करने की कोशिश की, लेकिन बाद में मेरे पास उनके सवालों के जवाब नहीं थे। उस समय मेरे मन में भ्रम पैदा होने लगा। उन्हें उस शून्यता का आभास हो गया और उन्होंने अपनी विचारधाराओं को मेरे सामने रखने लगे।”
विशाली आगे बताती हैं, “उन्होंने मुझे इस्लामी विचारधारा के बारे में जानकारी देनी शुरू कर दीं। बा में मुझे लगने लगा कि कि वे जो कह रहे हैं, वह सही है। इस दौरान आपको लगने लगता है कि आप अब तक जिस धर्म का पालन करते आ रहे हैं, वह पूरी तरह से गलत है। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ। मैं अर्श विद्या समाज के संपर्क में आई और वहाँ हम कट्टरवाद की भ्रांतियों को समझ पाए। इसके बाद एक बार फिर हम सनातन धर्म में वापस आ गए।”
उन्होंने ‘द केरल स्टोरी’ और उस राज्य की वास्तविकता के बारे में पूछे जाने पर कहा कि यह सिर्फ केरल तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “हमने फिल्म देखी है। फिल्म जो दिखाती है, उससे हम आपको बता सकते हैं कि यह वही है जो आज न केवल केरल और भारत के कई जगहों पर, बल्कि दुनिया भर में हो रहा है। समाज में क्या हो रहा है यह फिल्म सटीक ढंग से दर्शाती है।”
धर्मांतरण करने वाले लोगों की घरवापसी के बारे में विशाली ने बताया, “अर्श विद्या समाज पिछले 23 वर्षों से धर्मांतरित लोगों को वापस सनातन में लाने का कम कर रहा है। अपने अनुभव में ही हम 7000 से अधिक लोगों को वापस ला चुके हैं। यह एक कदम-दर-कदम रणनीतिक धर्मांतरण प्रक्रिया है, जो अपने चरम रूप में उस हद तक कट्टरता की ओर ले जा सकती है, जहाँ ब्रेनवॉश किया गया व्यक्ति आईएसआईएस में शामिल हो जाता है। कई मामलों में हम उन्हें पहले चरण में वापस ला देते हैं। अगर उन्हें सनातन में वापस नहीं लाया गया होता तो निश्चित रूप से वे उस अवस्था में पहुँच जाते। इन 7000 लोगों में महिला और पुरुष दोनों हैं।”
बड़ी संख्या में लोगों को जबरन इस्लाम में परिवर्तित किए जाने के दावों की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा, “ऐसे ज्यादातर मामलों में हम खुलकर नहीं बता सकते, क्योंकि वे लोग सार्वजनिक रूप से बात करने के लिए तैयार नहीं होते हैं। यह सामाजिक प्रतिष्ठा और अन्य विभिन्न चीजों के कारण है। खासतौर पर जब बात किसी लड़की की हो तो वो सामने आकर इस बारे में बात नहीं करते हैं। इस फिल्म ने निश्चित रूप से एक ऐसा माहौल बनाया है, जहाँ अधिक से अधिक लोग कह रहे हैं कि यह वास्तव में हो रहा है।”
लव जिहाद को विशाली ने लव ट्रैप जिहाद बताया। उन्होंने कहा कि यह एक लड़की को धर्मांतरित करने की योजना के ट्रैप दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतर-धार्मिक संबंध में कोई समस्या नहीं है, अगर धर्मांतरण के लिए ऐसा कोई जाल नहीं है। उसने कहा कि अगर यह केवल एक लड़के और लड़की के बीच का रिश्ता है तो इसमें कोई समस्या नहीं है। कोई भी दो लोग प्यार में पड़ सकते हैं और एक रिश्ते में आ सकते हैं और शादी कर सकते हैं। समस्या यह है कि प्यार के नाम पर कट्टरवाद और कदम-कदम पर ब्रेनवॉश किया जाता है।
कट्टरवाद की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “हम इसे लव जिहाद कहने के बजाय लव ट्रैप जिहाद कहना चाहेंगे। ये लोग महिलाओं या युवतियों को प्रेम के बहाने फँसा रहे हैं और उसके जरिए धीरे-धीरे उनका धर्म परिवर्तन कर रहे हैं। पहले कदम में वे उन्हें फँसाते हैं। दूसरे चरण में वे लड़कियों से कहते हैं कि अगर मेरे परिवार को तुम्हें अपने घर में स्वीकार करना है तो तुम्हें धर्म परिवर्तन करना होगा। उनका कहना है कि यह सिर्फ शादी करने के लिए है। वे कहते हैं कि यह सिर्फ नाम के लिए है, सिर्फ माता-पिता को स्वीकार करने के लिए आपको शादी के लिए धर्म परिवर्तन करना होगा।”
विशाली शेट्टी ने आगे कहा, “धर्मांतरण केवल कागजी कार्रवाई या औपचारिकता नहीं है। धर्मांतरण प्रमाणपत्र प्राप्त करने से पहले उसे इस्लामी अध्ययन पर दो महीने का उचित पाठ्यक्रम पूरा करना होता है। इस प्रक्रिया में उन्हें वही सिखाया जाता है, जो फिल्म में दिखाया गया है। धर्मांतरण में क्या होता है, फिल्म में जो दर्शाया गया है, उसे सटीक दर्शाया गया है। जो रिश्ते लड़की या लड़के के इस तरह के रास्ते पर कदम-दर-कदम कट्टरता की ओर ले जाते हैं, वे देश-विरोधी, मानव-विरोधी और समाज-विरोधी मानसिकता अपनाते हैं। यही समस्या है।”
केरल से ISIS में शामिल होने गए लोगों की संख्या की रिकॉर्ड की गई रिपोर्ट में उन्होंने दावा किया है कि जो 150 या 200 लोग शामिल हुए हैं उनमें से अधिकांश लोग मुस्लिम हैं और केवल एक छोटी संख्या अन्य धर्मों से है। उन्होंने कहा, “यदि मुस्लिम खुद ISIS में शामिल हो रहे हैं तो यह देश के मुस्लिम समुदाय के लिए ही एक समस्या है। इसलिए उन्हें पहले इस ब्रेनवॉशिंग के खिलाफ लड़ना होगा। यह केवल समाज के एक निश्चित वर्ग के लिए समस्या नहीं है। यह पूरी मानवता की समस्या है।”
कर्नाटक विधानसभा चुनाव (Karnataka Assembly Election 2023) के लिए मतदान आज बुधवार (10 मई 2023) एक ही चरण में पूरा हो गया। राज्य के 224 विधानसभा सीटों के लिए 65.69 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। वोटों की गिनती 13 मई 2023 को होगी।
चुनाव आयोग के आँकड़ों के अनुसार, राज्य में शाम 5 बजे तक हुए मतदान में 65.69 प्रतिशत मतदान हुआ है। बीबीएमपी दक्षिण जिले को छोड़कर सभी जिलों में 50 प्रतिशत से अधिक वोटिंग हुई है। इस बार के चुनावों में मतदान करने के लिए कुल 42,48,028 नए मतदाता पंजीकृत किए गए हैं।
बता दें कि राज्य के कुल 224 सीटों के लिए 2,615 उम्मीदवार मैदान में हैं। सरकार बनाने के लिए बहुमत के तिलिस्मी आँकड़े 113 तक पहुँचना जरूरी है। किस पार्टी के हाथ में राज्य की बागडोर जाएगी, इसका फैसला 13 मई होगा। कर्नाटक चुनाव में हिस्सा लेने वाली प्रमुख पार्टियाँ भाजपा, कॉन्ग्रेस और जनता दल सेक्युलर (JDS) है।
अभी तक 38 साल में कोई भी सरकार लगातार दोबारा चुनकर नहीं आई है। हालाँकि, जिस तरह से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मिथक टूटे हैं, कुछ ऐसा ही इस बार कर्नाटक में होने की उम्मीद जताई जा रही है। वोटिंग खत्म होने के साथ ही एग्जिट पोल भी सामने आ गए हैं। इनमें से अधिकांश एग्जिट पोल में भाजपा और कॉन्ग्रेस के बीच काँटे की टक्कर बताई गई है।
‘जन की बात’ एवं ‘एशियानेट सुवर्णा न्यूज’ की एग्जिट पोल के अनुसार, भाजपा को 94-117 सीटें मिलती दिखाई गई हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस को 91-106 और जेडीएस को 14-24 और अन्य को 0-2 सीटें दी गई हैं। अगर वोट प्रतिशत की बात की जाए तो भाजपा को 37.5-39 प्रतिशत, कॉन्ग्रेस को 38-40 प्रतिशत और जेडीएस को 14-17 प्रतिशत वोट मिलने की संभवाना जताई गई है।
एजेंसी के अनुसार, मुंबई कर्नाटका क्षेत्र के कुल 50 सीटों में से भाजपा को 31 और कॉन्ग्रेस को 19 सीटें दी गई हैं। वहीं, कोस्टल कर्नाटका की कुल 19 सीटों में से भाजपा को 15 और कॉन्ग्रेस 4 सीटें मिलने की बात कही गई है। ओल्ड मैसूर क्षेत्र की कुल 57 सीटों में से भाजपा को 15, कॉन्ग्रेस को 24, जेडीएस को 16 और अन्य को 2 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।
वहीं, बेंगलुरु क्षेत्र की कुल 32 सीटों में भाजपा को 17 और कॉन्ग्रेस को 15 सीटें मिलने का अनुमान है। हैदराबाद कर्नाटका क्षेत्र की कुल 40 सीटों में से 15 भाजपा, 24 कॉन्ग्रेस और 1 सीट जेडीएस को मिलती दिख रही हैं। सेंट्रल कर्नाटका की कुल 24 सीटों में 13 भाजपा, 11 कॉन्ग्रेस और 2 जेडीएस को मिलने का अनुमान है।
हालाँकि, अलग-अलग एजेंसियों के अनुसार सभी दलों को अलग-अलग सीटें मिलती दिख रही हैं। न्यूज नेशन-CGS की एग्जिट पोल में भाजपा को 114, कॉन्ग्रेस को 86 और जेडीएस को 21 सीटें दी गई हैं। वहीं, अन्य के खाते में 3 सीटें गई हैं।
ZEE न्यूज-Matrize के एग्जिट पोल के अनुसार, कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भाजपा को 79-94 सीटें, कॉन्ग्रेस को 103-118 सीटें और जेडीएस को 25-33 सीटें दी गई हैं। वहीं, अन्य को 2-5 सीटें दी गई हैं।
टीवी9 भारतवर्ष और polstrat के अनुसार, राज्य में भाजपा को 88-98, कॉन्ग्रेस को 99-109 और जेडीएस को 21-26 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, अन्य को 0-4 सीटें मिल सकती हैं।
P Marq-Republic की एग्जिट पोल के अनुसार, राज्य में भाजपा 85-100, कॉन्ग्रेस को 94-108 सीटें और जेडीएस को 24-32 सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं। वहीं, अन्य को 2-6 सीटें दी गई हैं।
केरल के कोट्टारक्कारा में स्थित हॉस्पिटल में एक मरीज ने बुधवार (10 मई 2023) को चाकू मारकर महिला डॉक्टर की हत्या कर दी। इलाज कराने के लिए पुलिस आरोपित को हॉस्पिटल लेकर आई थी। इस घटना पर केरल हाई कोर्ट ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है यदि वह डॉक्टरों को सुरक्षा नहीं दे सकते तो हॉस्पिटल बंद कर देना चाहिए।
दरअसल, डॉक्टरों की सुरक्षा हमेशा से ही बड़ा मुद्दा रहा है। पुलिस हिरासत में रहने के दौरान आरोपित द्वारा महिला डॉक्टर की हत्या करना केरल की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। ऐसे में केरल हाई कोर्ट ने मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस कौसर एडप्पागथ की खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा है कि यदि आप डॉक्टरों की रक्षा नहीं कर सकते हैं, तो अस्पतालों को बंद कर दें। यही नहीं, हाई कोर्ट ने इस संबंध में केरल पुलिस प्रमुख को गुरुवार (11 मई 2023) को ऑनलाइन पेश होने और मामले पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा है, “माता-पिता के हालात की कल्पना करें। वे अपनी बेटी को अस्पताल में काम करने के लिए नहीं बल्कि सेवा करने के लिए भेजते हैं। लेकिन उसे एक ताबूत में वापस भेजा जा रहा है। जो आज हुआ है यह बेहद बुरा है।”
बता दें कि कोट्टारक्कारा के एक हॉस्पिटल में पुलिस आरोपित संदीप को इलाज के लिए लेकर आई थी। इस दौरान जब महिला डॉक्टर वंदना दास उसके घाव पर पट्टी लगा रही थीं, तब उसने सर्जरी में इस्तेमाल होने वाली चाकू मारकर उनकी हत्या कर दी। मृत डॉक्टर वंदना दास महज 22 वर्ष की थीं। वह अजीजिया मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में हाउस सर्जन थीं। लेकिन अपनी ट्रेनिंग के लिए वह कोट्टारक्कारा के हॉस्पिटल में आई हुई थीं।
#WATCH | Kerala | Medical students, under the aegis of House Surgeons Association, protest over the murder of Dr Vandana Das, in Thiruvananthapuram.
She was stabbed by an accused, brought for a medical check-up by Police at Kottarakkara Taluk Hospital & died at another hospital. pic.twitter.com/9TeIe8jV7m
इस मामले में एक पुलिस अधिकारी ने कहा है कि आरोपित ने शराब पी रखी थी। इलाज के दौरान वह हिंसक हो गया। हमले में कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। महिला डॉक्टर वंदना दास की हत्या के बाद डॉक्टरों में काफी गुस्सा है। तिरुवनंतपुरम में हाउस सर्जन एसोसिएशन के बैनर तले मेडिकल छात्रों ने केरल सरकार के विरोध में नारेबाजी करते हुए जमकर प्रदर्शन किया।
भारतीय सिनेमा को ‘बाहुबली’ और ‘आरआरआर’ जैसी सुपरहिट फिल्में देने वाले मशहूर डायेरक्टर एसएस राजामौली (SS Rajamouli) की अगली फिल्म का दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस बीच राजामौली ने खुलासा किया है कि वह लंबे समय से धर्मग्रन्थ महाभारत (Mahabharata) पर फिल्म बनाने का सपना देख रहे हैं और इसे जल्द ही पूरा भी करने वाले हैं।
एसएस राजामौली ने हैदराबाद में 14 से 16 अप्रैल 2023 को हुए एक इवेंट में यह बात कही। इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस दौरान उनसे महाभारत को लेकर सवाल पूछा गया कि क्या वो टेलीविजन पर 266-एपिसोड के शो महाभारत को एक फिल्म में बदलने के अपने लंबे समय के सपने को जल्द पूरा करेंगे? क्या यह उनके आगामी प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने वाला है?
इसके जवाब में उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए बहुत मुश्किल सवाल है। अगर मैं महाभारत बनाने की बात करता हूँ, तो मुझे महाभारत के संस्करण जो देश में उपलब्ध हैं, उन सभी को पढ़ने में एक साल लग जाएगा। मैं उन सभी को पढ़ना चाहता हूँ। मैं केवल यह मान सकता हूँ कि यह फिल्म 10 भागों में होगी।”
उन्होंने आगे कहा कि ये उनकी जिंदगी का उद्देश्य है। अब तक जो भी फिल्में वो बनाते आए हैं, उसने उन्हें ‘महाभारत’ को कैसे बनाना है, इसके बारे में सिखाया है। राजमौली से जब पूछा गया कि क्या वो अपने दर्शकों और इस देश के लोगों के लिए यह फिल्म बनाना चाहते हैं तो डायरेक्टर ने मुस्कुराकर कहा कि वो खुद के लिए महाभारत बनाना चाहते हैं। इस इंटरव्यू को Bones to Blockbusters यूट्यूब चैनल पर पूरा अपलोड किया गया है।
वहीं, इससे पहले एक इंटरव्यू के दौरान राजामौली ने बताया था कि उन्होंने कई धर्मग्रन्थों का अध्ययन किया है। तीर्थयात्रा की है। भगवा वस्त्र भी धारण किया है।
बता दें कि एसएस राजामौली की फिल्म ‘आरआरआर’ को देश के साथ-साथ दुनिया भर से खूब सराहना मिली। ‘आरआरआर’ के अलावा राजामौली की फिल्म ‘बाहुबली’ और ‘बाहुबली-2’ को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया था। जनवरी 2023 में राजामौली ने न्यूयॉर्क फिल्म क्रिटिक्स सर्कल अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार जीता था। उनकी फिल्म ‘आरआरआर’ के गाने ‘नाटू-नाटू’ ने ऑस्कर अवॉर्ड जीता है।
कॉन्ग्रेस नेता और राजस्थान सरकार में खनन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने प्रदेश में लिथियम भंडार मिलने का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि राजस्थान में लिथियम का जो भंडार मिला है वह जम्मू-कश्मीर में मिले भंडार से कई गुना अधिक बड़ा है। हालाँकि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने इस दावे को पूरी तरह से निराधार बताया है।
प्रमोद जैन भाया ने ANI से हुई बातचीत में कहा था, “राजस्थान में जो खनिज संपदा मिली है, वह प्रदेश की जनता का सौभाग्य है। राजस्थान के सीएम का खनिज भंडारों के अधिक से अधिक सर्वे और इसका जनता के लिए इस्तेमाल पर फोकस रहा है। नए लोगों को रोजगार मिले इस भावना को ध्यान में रखते हुए और माइनिंग सेक्टर को बढ़ाने के लिए एक ट्रस्ट का गठन किया गया। इसी का परिणाम रहा कि नागौर जिले के डेगाना तहसील में जीएसआई का सर्वे। इस सर्वे में लिथियम के जो भंडार मिले हैं, वह जम्मू-कश्मीर में मिले भंडार से कई गुना अधिक हैं।”
इस दावे के बाद अखबारों से लेकर मीडिया तक में राजस्थान में लीथियम का भंडार मिलने की खबरें छाई हुई थीं। अब इस पर जीएसआई का बयान आया है। इस बयान में कहा गया है कि जीएसआई द्वारा राजस्थान के नागौर जिले के डेगाना क्षेत्र में लीथियम के बड़े भंडार की खोज को लेकर विभिन्न अखबारों में प्रकाशित खबरें पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं। लिथियम के भंडार की खोज की ऐसी कोई सूचना न तो क्षेत्रीय मुख्यालय की ओर से और न ही जीएसआई के केंद्रीय मुख्यालय की ओर से जारी की गई थी।
जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह राजस्थान के नागौर जिले के डेगाना क्षेत्र में टंगस्टन, लिथियम समेत अन्य दुर्लभ धातुओं की खोज में जुटा हुआ है। धातुओं की खोज का यह अभियान साल 2019 से जारी है। इसके अंतर्गत क्षेत्र में खुदाई भी की जा रही है। इस क्षेत्र में मौजूद धातुओं की मात्रा खुदाई का काम पूरा होने और अंतिम रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
गौरतलब है कि इस साल फरवरी में जीएसआई ने जम्मू-कश्मीर के में लिथियम के भंडार की खोज की थी। यह भंडार रियासी जिले के सलाल-हैमाना क्षेत्र में है। लिथियम का यह भंडार करीब 59 लाख टन का है। इस भंडार से चीन जैसे देशों पर भारत की निर्भरता खत्म होने की बात कही जा रही है।
क्या है लिथियम
आप जिस मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं उसमें लगी बैटरी बनाने में लिथियम का उपयोग किया जाता है। वास्तव में, लिथियम दुनिया की सबसे मुलायम और सबसे हल्की धातु है। इसे चाकू से काटा जा सकता है और यह आसानी से पानी में तैरती भी है। लेकिन इसका महत्व इसके मुलायम होने या पानी में तैरने से नहीं, बल्कि बैटरी में उपयोग होने के चलते बहुत अधिक बढ़ गया है। लिथियम रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदल देता है।
आज घर के सभी चार्जेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैटरी से चलने वाले हर गैजेट में लगी बैटरी में लिथियम का उपयोग होता है। दुनिया अब ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ रही है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर अन्य सभी उपकरणों में लगने वाली बैटरी की माँग लगातार बढ़ती जा रही है। पूरी दुनिया में हो रही माँग में वृद्धि के चलते ही इसे ‘व्हाइट गोल्ड’ भी कहा जाता है। एक टन लिथियम की कीमत करीब 57.36 लाख रुपए है।
असम सरकार राज्य में बहुविवाह रोकने की तैयारी कर रही है। सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार (9 मई 2023) को कहा है कि राज्य सरकार द्वारा बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है या नहीं, इसकी जाँच करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने का फैसला किया गया है। इससे पहले असम में बाल विवाह को लेकर भी बड़ी कार्रवाई हो चुकी है।
The Assam Government has decided to form an expert committee to examine whether the state Legislature is empowered to prohibit polygamy in the state. The committee will examine the provisions of The Muslim Personal Law (Shariat) Act, 1937 read with Article 25 of the Constitution…
दरअसल, बहुविवाह रोकने के लिए असम के मुख्यमंत्री हिमंता विस्वा सरमा ने एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा:
“असम सरकार ने एक विशेषज्ञ समिति बनाने का फैसला किया है। यह समिति इस बात की जाँच करेगी कि क्या विधानसभा को राज्य में बहुविवाह पर रोक लगाने का अधिकार है? यह समिति भारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्व अनुच्छेद 25 तथा मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एक्ट 1937 के प्रावधानों की जाँच करेगी। यह समिति सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ विचार-विमर्श भी करेगी। ताकि सही निर्णय लिया जा सके।”
बता दें कि इससे पहले शनिवार (6 मई 2023) को कर्नाटक के कोडागु जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए सीएम सरमा ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की वकालत की थी। उन्होंने कहा था “हमें समान नागरिक संहिता भी लागू करना होगा। मुस्लिम महिलाओं और बेटियों की चार से ज्यादा शादियाँ कराई जाती हैं। ये कैसा चलन है? दुनिया में ऐसा नियम नहीं होना चाहिए।”
सीएम हिमंता ने यह भी कहा था, “यहाँ भी हमें समान नागरिक संहिता लानी होगी और इस चलन को समाप्त करना होगा। मुस्लिम बेटियों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाया जाना चाहिए, बच्चा पैदा करने वाली मशीन नहीं। बीजेपी ने सत्ता में आने पर समान नागरिक संहिता पर काम करने का वादा किया है। इसके लिए मैं भाजपा को धन्यवाद देता हूँ।”
गौरतलब है कि देश में मुस्लिमों को बहुविवाह यानी कि एक से अधिक निकाह करने की छूट है। मुस्लिमों को छोड़कर कोई अन्य व्यक्ति यदि एक से अधिक विवाह करता है तो इसे IPC की धारा 494 और 495 के तहत दण्डनीय अपराध माना जाता है। वहीं, मुस्लिम IPC की धारा 494 के तहत पहली बीवी की सहमति से 4 निकाह कर सकता है।
दरअसल, मुस्लिमों को यह छूट मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) 1937 के तहत दी गई है। मुस्लिम महिलाओं को हालाँकि 4 शादियाँ करने का अधिकार नहीं है। यदि किसी मुस्लिम महिला को दूसरी शादी करनी है तो उसे पहले शौहर को तलाक देना होगा।
बाल विवाह के खिलाफ असम सरकार का एक्शन
बता दें कि इस साल की शुरुआत में असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने बाल विवाह के खिलाफ कठोर कदम उठाए थे। इसके बाद पुलिस ने छापेमारी करते हुए बाल विवाह करने और कराने वालों को गिरफ्तार किया था।
आँकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल 2021 से फरवरी 2023 तक असम में बाल विवाह के 4670 मामले सामने आए। इसमें से 3483 लोगों की गिरफ्तार किया गया। बड़ी बात यह है कि इसमें से 3098 लोगों को इस साल के शुरुआती दो महीनों (जनवरी-फरवरी 2023) में गिरफ्तार किया गया।
बिहार में हाल के समय में यूट्यूबर पत्रकारों की एक खेप तैयार हुई है। मनीष कश्यप के मामले के बाद से ये लगातार चर्चा में है। इनमें मनीष कश्यप, रवि भट्ट, निभा सिंह, अभिषेक तिवारी, अभिषेक मिश्रा, सूरज, रवि रंजन जैसे कुछ यूट्यूबर पत्रकार इसलिए चर्चित रहे हैं कि वे ग्राउंड जीरो पर उतरकर व्यवस्था की खामियों को उजागर कर देते हैं। दूसरी ओर वेद प्रकाश (Ved Prakash) जैसे यूट्यूबर हैं जो खुद को पत्रकार से पहले ‘एक्टिविस्ट’ बताते हैं। यहाँ तक कि उनके यूट्यूब चैनल का नाम भी ‘द एक्टिविस्ट (@theActivist)’ ही है। 14 लाख से ज्यादा लोग उनके चैनल को फाॅलो करते हैं। करीब 5000 वीडियो इस यूट्यूब चैनल पर मौजूद हैं।
इनमें से ज्यादातर वीडियो में आप पाएँगे कि ये एक खास राजनीतिक एजेंडे के साथ बनाए गए हैं। यह वही एजेंडा है जिसे दलितों के नाम पर, पिछड़ों के नाम पर, मुस्लिमों के नाम पर राजनीति करने वाले आगे बढ़ाते रहते हैं। वेद प्रकाश यूट्यूबर पत्रकार का चोला ओढ़कर इसे बढ़ाते हैं। वे अपने वीडियो में ‘जय भीम’ कहना नहीं भूलते। अगड़े-पिछड़े की बात करने से नहीं चूकते। यहाँ तक कि छात्रों से यह भी पूछ लेते हैं कि वे सरस्वती की पूजा क्यों करते हैं। कुल मिलाकर वे अपने वीडियो में जातीय पक्ष को उभार देने के लिए वह सब कुछ करते हैं जिसकी सामान्य तौर पर पत्रकारों और पत्रकारिता से अपेक्षा नहीं की जाती है।
बिहार की जमीन पर वीडियो बना-बनाकर अगड़ा-पिछड़ा करने वाले वेद प्रकाश अब एक माफीनामे को लेकर चर्चा में हैं। यह माफीनामा उन्होंने खुद सोशल मीडिया में पोस्ट किया है। माफी उन्होंने बीबीसी के एक ‘ब्राह्मण संपादक’ से माँगी है। उसी ब्राह्मण से जिस पर वे अपने वीडियो में मीडिया व अन्य संस्थानों पर कब्जे का आरोप लगाते रहते हैं। जिसे हर समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं।
दरअसल वेद प्रकाश को यह माफी एक कानूनी मामले में राहत पाने के लिए माँगनी पड़ी है। इस मामले में भी वे दलित बनाम ब्राह्मण एजेंडा को बढ़ाने के कारण ही फँसे थे। वेद प्रकाश ने माफीनामे में लिखा है, “दलित एक्टिविस्ट और जर्नलिस्ट होने के नाते मीना (Meena Kotwal) को न्याय दिलाने के मकसद से मैंने इस संबंध में खबर बनाई और बीबीसी के इंडियन लैंग्वेज हेड रूपा झा को इस बात का जिम्मेदार बताते हुए उन पर एक पोस्ट किया। जिसकी भाषा उचित नहीं थी और मेरे पोस्ट पर कई लोगों ने आपत्तिजनक कमेंट्स कर दिए। इस पूरे मामले में रूपा झा ने दिल्ली के बाराखंबा थाने में मुकदमा दर्ज किया था।”
माफीनामे में वेद प्रकाश ने कहा है कि जाँच के दौरान वे अपने आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं पेश कर पाए। हालाँकि इसका जिम्मेदार उन्होंने मीना कोटवाल और उनके पति राजा पांडेय को बताया है। आगे उन्होंने लिखा है, “आज रूपा जी और हमारी आपसी सहमति से केस को खत्म कर दिया गया है। मीना और उसके पति राजा पांडेय द्वारा गलत सूचना दी गई, जिसके आधार पर मैंने पोस्ट किया एवं मेरे पोस्ट और उस पर आने वाली आपत्तिजनक प्रतिक्रिया से रूपा जी की भावनाएँ आहत हुई। इसके लिए मैं क्षमा/खेद और दुख प्रकट करता हूँ।”
वेद प्रकाश ने यह माफीनामा 9 मई 2023 को पोस्ट किया है। पोस्ट के साथ दो तस्वीर भी लगाई है। इसमें से एक में वे मीना तो दूसरे में रूपा झा के साथ दिख रहे हैं। पोस्ट में वेद प्रकाश ने बताया है कि यह केस करीब चार साल से चल रहा था। यह भी दावा किया है कि इस मामले को उठाने और रूपा झा को इसका जिम्मेदार बताने के लिए मीना कोटवाल और उनके पति ने उनसे व्यक्तिगत तौर पर संपर्क किया था। गौर करने वाली बात यह है कि बीबीसी ने उस समय भी मीना की विदाई का कारण उनका जाॅब काॅन्ट्रैक्ट पूरा होना बताया था। लेकिन उस समय ब्राह्मण बनाम दलित का एजेंडा चलाने वालों ने इसे खारिज कर दिया था। अब कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए आश्चर्यजनक तौर पर वेद प्रकाश ने इसे कबूल कर लिया है। इतना ही नहीं मीना और उनके पति पर यह भी आरोप लगाया है कि जब नई दिल्ली की अदालत से जमानत पाने के लिए गारंटर की जरूरत पड़ी और उन्होंने संपर्क किया तब भी पति-पत्नी ने इनकार कर दिया।
उल्लेखनीय है कि जिस मीना कोटवाल को इस प्रकरण का वेद प्रकाश कसूरवार बता रहे हैं, वह इस समय ‘मूकनायक’ नाम से एक वेबसाइट चलाती हैं। पहले बीबीसी में रह चुकी हैं।वायर और द प्रिंट जैसे वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल के लिए लिखती हैं। उनकी पत्रकारिता के मूल में वही सब कुछ है जो वेद प्रकाश की कथित पत्रकारिता का आधार है। वेद प्रकाश के माफीनामे वाले पोस्ट से यह भी पता चलता है कि मीना भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) में उनकी जूनियर थीं।
ऐसे वक्त में जब बिहार के ही एक यूट्यूबर पत्रकार मनीष कश्यप पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया है, उसी राज्य में पत्रकारिता के नाम पर अगड़ा-पिछड़ा एजेंडा चलाने वाले यूट्यूबर पत्रकार वेद प्रकाश को माफ कर देना रूपा झा की सहृदयता है। लेकिन सवाल है कि पत्रकार से पहले खुद को एक्टिविस्ट कहने वाले वेद प्रकाश की नीयत और सोच में इससे फर्क पैदा होगा? वैसे पत्रकार के ‘एक्टिविस्ट’ बनने के जोखिम बहुत सारे हैं, इस फेर में उसे पता भी नहीं चलता कि वह कब एक पक्ष बन गया, फिर भी एक्टिविस्ट से यह अपेक्षा की जाती है कि वह समाज के सभी वर्गों की आवाज बनेगा। लेकिन जो एक्टिविस्ट से पहले भी ‘दलित’ जोड़े, एक माफीनामे वाले पोस्ट में ‘जय भीम’ जोड़ने के लिए दर्जन बार एडिट कर ले, लगता नहीं कि उसके दिमाग से ‘जाति’ जा पाएगी। आज भले उसने कानूनी पचड़े से बचने के लिए मीना कोटवाल प्रकरण में जाति का एंगल ठूँसने के लिए माफी माँग ली हो, लेकिन कल को फिर जैसे ही उसे मीडिया से निकाली गई किसी मीना में दलित और किसी रुपा में ब्राह्मण दिखेगा, वह दोबारा मीडिया पर ब्राह्मणों के कब्जे का उतने ही जोर से प्रलाप करेगा।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 6 मई 2023 को कॉन्ग्रेस नेता एवं रायपुर के मेयर एजाज ढेबर के बड़े भाई अनवर ढेबर को शराब घोटाले में गिरफ्तार किया था। इस घोटाले की आँच अब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) तक पहुँच रही है। जिन अधिकारियों की देखरेख में 2000 करोड़ रुपए का शराब घोटाला हुआ, उन्हें बचाने का आरोप सीएम बघेल पर लगते रहे हैं।
ED ने अनवर की गिरफ्तार के बाद कहा था कि अनवर ढेबर शराब कारोबार का सरगना है। वहीं, IAS अधिकारी अनिल टुटेजा उस पैसे का प्रबंधन करते थे। एजेंसी ने दावा किया था कि शराब घोटाले की अवैध कमाई का इस्तेमाल चुनावों में किया गया। IAS टुटेजा वर्तमान में छत्तीसगढ़ के उद्योग और वाणिज्य विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं।
He is the main kingpin on ground in the liquor scam in which around Rs 2000 Crore was illegally generated by the criminal syndicate. PMLA Court has granted 4 day of ED Custody.
अनिल टुटेजा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खास माने जाते हैं। ये वही अधिकारी हैं, जिनका नाम राज्य के NAN घोटाले में सामने आया था। हालाँकि, भूपेश बघेल ने इन पर कार्रवाई करने के बजाए, इन्हें उद्योग एवं वाणिज्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग में संयुक्त सचिव का पद दे दिया। आरोप है कि सीएम बघेल टुटेजा को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
दरअसल, ED ने पहले इस मार्च में कई स्थानों पर तलाशी ली थी। इसके साथ ही विभिन्न व्यक्तियों के बयान दर्ज किए थे। इस दौरान यह निकल कर सामने आया कि साल 2019 से 2022 के बीच 2000 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के किया गया है। ED ने इसके सबूत भी एकत्र किए हैं।
ED का कहना है कि मनी लॉन्ड्रिंग जाँच से पता चला कि अनवर ढेबर के नेतृत्व में एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट छत्तीसगढ़ में काम कर रहा था। अनवर ढेबर की आड़ में उच्च स्तर के राजनीतिक अधिकारियों और नौकरशाहों द्वारा अवैध काम को अंजाम दिया जा रहा था। इसके लिए उन लोगों ने व्यक्तियों एवं संस्थाओं का एक व्यापक नेटवर्क तैयार किया था।
दरअसल, अनवर ढेबर ने अन्य लोगों के साथ मिलकर बेहिसाब देसी शराब बनवाना शुरू किया था और उसे सरकारी दुकानों के माध्यम से बेचता था। इस तरह वह सरकारी खजाने में एक रुपए भी जमा किए बिना बिक्री की सारी आय खुद रख लेता था। 2019 से 2022 के बीच यह अवैध बिक्री राज्य की कुल शराब बिक्री का लगभग 30-40 प्रतिशत थी।
इस घोटाले को तीन तरीके से अंजाम दिया गया। पहला सरकारी शराब की बोतलों पर 70-150 रुपए प्रति केस अनवर दुकानदारों से कमीशन लेता था। दूसरे पैटर्न में वह नकली शराब बनाकर सरकारी दुकानों के माध्यम से बिक्री करवाता था और उसका पैसा खुद रखता था। तीसरा पैटर्न था कि लाइसेंस में कमीशन लेता था। यह एक वार्षिक कमीशन था, जिसका भुगतान मुख्य डिस्टिलर्स द्वारा डिस्टिलरी लाइसेंस प्राप्त करने और सीएसएमसीएल की बाजार खरीद में निश्चित हिस्सेदारी प्राप्त करने के लिए किया जाता था।
छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री 800 सरकारी दुकानों के जरिए की जाती है। निजी दुकानों को शराब बेचने का अधिकार नहीं है। दुकान चलाने वाले लोगों के मैन पावर से लेकर कैश कलेक्शन तक का काम राज्य की सरकारी कंपनी छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (CSMCL) देखती है। अनवर ढेबर अपने राजनीतिक आकाओं एवं अधिकारियों के सहयोग से CSMCL के एक आयुक्त और एमडी तक पहुँच बनाने में कामयाब हो गया।
ईडी का कहना है कि सिंडिकेट में राज्य के वरिष्ठ नौकरशाह, नेता और आबकारी विभाग के अधिकारी शामिल हैं। फरवरी 2019 में ITS अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी राज्य सरकार के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (CSMCL) में शामिल हुए। ढेबर के कहने पर तीन महीने के भीतर त्रिपाठी को इसका प्रबंध निदेशक बना दिया गया। त्रिपाठी का काम था- रिश्वत संग्रह को अधिकतम करना। आईएएस अधिकारी विकास अग्रवाल पैसा इकट्ठा करने और आईएएस अधिकारी अरविंद सिंह को रसद इकट्ठा करने के काम में लगाया गया था।
इस सिंडिकेट में मैनपावर का इस्तेमाल अग्रवाल के एक सहयोगी की कंपनी सुमसेट फैसिलिटीज लिमिटेड द्वारा प्रदान की गई थी। होलोग्राम का ठेका प्रिज्म होलोग्राफी एंड फिल्म्स सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। कैश कलेक्शन का काम टॉप्स सिक्योरिटीज को दिया गया था, जिसके मालिक सिद्धार्थ सिंघानिया थे, जो अग्रवाल के करीबी सहयोगी थे।
जाँच में ED ने पाया कि मार्च 2019 में देशी शराब निर्माता कंपनी छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज लिमिटेड, भाटिया वाइन मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड और वेलकम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड ने ढेबर और त्रिपाठी से मुलाकात की। डिस्टिलर्स को 75 रुपए प्रति केस कमीशन देने का आदेश दिया गया। बदले में ढेबर ने अपनी उधार दरों को बढ़ाने का वादा किया। सिंडिकेट ने कमीशन में एक बड़ी राशि एकत्र की। इसका एक बड़ा हिस्सा एक राजनीतिक दल को दिया गया था।
इतना सब कुछ फिक्स करने के बाद सिंडिकेट ने बेहिसाब कच्ची शराब बनाना शुरू कर दिया। इसे सरकारी दुकानों पर बेचा जा रहा था। इन कच्ची शराब को असली दिखाने के लिए इन पर डुप्लीकेट होलोग्राम भी लगाया गया। डुप्लीकेट बोतलें नकद में खरीदी गईं और एक डिस्टिलर को सप्लाई की गईं, जो उन्हें भरने का काम करता था।
ढेबर ने मासिक लक्ष्य निर्धारित किए। डिस्टिलर्स द्वारा हर महीने 800 पेटी देशी शराब से लदे 200 ट्रकों की आपूर्ति की जाती थी। 560 रुपए प्रति पेटी के हिसाब से शराब की सप्लाई की जाती थी। एमआरपी 2,880 रुपए प्रति केस था। बाद में इसे बढ़ाकर 3,880 रुपए कर दिया गया।
इसके अलावा, विदेशी शराब की माँग को देखते हुए और विदेशी शराब निर्माताओं से पैसे लेने में आने वाली समस्याओं को देखते हुए Fl-10A लाइसेंस को लाया गया। यह ढेबर के तीन परिचितों को मिला। इन लोगों ने विदेशी शराब खरीदने के लिए बिचौलियों की तरह काम किया और इसे सरकारी गोदामों में बेच दिया और विदेशी शराब निर्माताओं से लगभग 10% का कमीशन प्राप्त किया।
ED ने पाया कि इस सिंडिकेट की ‘ऊपर’ तक पहुँच थी। इसमें अन्य कई नेताओं और नौकरशाहों के शामिल होने की आशंका है, जिसकी जाँच केंद्रीय एजेंसी कर रही है। उधर भाजपा ने सीएम भूपेश बघेल की सरकार पर हमला बोला है। भाजपा ने कहा, “भूपेश सरकार के संरक्षण में छत्तीसगढ़ में हुआ 2000 करोड़ का शराब घोटाला… भूपेश जी, जरा आँख उठाकर बताइये तो सही, कितना बँटा और कितना घर पहुँचा?”
भूपेश सरकार के संरक्षण में छत्तीसगढ़ में हुआ 2000 करोड़ का शराब घोटाला…
साल 2015 में रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर कॉन्ग्रेस सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इसके बाद रमन सिंह की सरकार ने आरोपों की जाँच का आदेश दिया था। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने NAN (नागरिक आपूर्ति निगम या सार्वजनिक वितरण निगम घोटाला) घोटाले का पर्दाफाश किया।
इस घोटाले में 27 लोगों पर मामला दर्ज किया गया था। जिन लोगों पर मामला दर्ज किया गया था, उनमें IAS अधिकारी अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला मुख्य आरोपित थे। साल 2015 में एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक चार्जशीट दायर की थी। इसके बाद राज्य में चुनाव हुए और सत्ता बदल गई। कॉन्ग्रेस की सरकार आते ही शुक्ला और टुटेजा के लिए चीजें बदल गईं।
टुटेजा पर लगे आरोपों को अनुचित बताते हुए बघेल के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने एक SIT का गठन किया। तब से टुटेजा को बचाने और रमन सिंह को घोटाले में फँसाने की कोशिश की जा रही है। साल 2020 में टुटेजा को मामले में जमानत दिए जाने के तुरंत बाद उन्हें बघेल सरकार ने वाणिज्य और उद्योग का संयुक्त सचिव बना दिया। वहीं, शुक्ला को शिक्षा व अन्य विभागों का प्रभारी प्रमुख सचिव बनाया गया है।
भाजपा सरकार के पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने कहा था कि भूपेश बघेल की सरकार ने SIT के प्रमुख GP सिंह को कहा था कि भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, उनकी पत्नी और तत्कालीन प्रमुख सचिव अमन सिंह को फँसाना है। जब जीपी सिंह ने ऐसा करने से मना कर दिया तो उन्हें साजिश रचने का अभियुक्त बनाकर उनके खिलाफ ही कार्रवाई की गई।
राजेश मूणत ने कहा था कि भाजपा नेताओं को फँसाने के लिए अधिकारी चैट करते थे। इसमें आलोक शुक्ला निर्देश देते थे और अनिल टुटेजा इसे इसका संचालन करते थे। मूणत ने कहा कि आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा से कॉन्ग्रेस के क्या रिश्ते हैं, ये पार्टी को बताना चाहिए।
ऑपइंडिया को मिले ह्वाट्सएप चैट से हुआ था खुलासा
फरवरी 2020 में आयकर विभाग द्वारा छापेमारी के दौरान IPS अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा के फोन जब्त कर लिए गए थे। व्हाट्सएप पर टुटेजा के दूसरे अधिकारियों के साथ चैट में विभाग को कई अहम जानकारियाँ मिली हैं। ऑपइंडिया के पास भी यह एक्सक्लूसिव व्हाट्सएप उपलब्ध है। चैट में टुटेजा के एसआरपी कल्लूरी, इंदिरा कल्याण एलेसेला, जीपी सिंह और आरिफ शेख जैसे अधिकारियों के साथ की गई बातचीत उपलब्ध है।
चैट में उपलब्ध बातचीत से यह साफ हो गया है कि अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा के इशारे पर राज्य में आपराधिक न्याय प्रणाली का जमकर दुरुपयोग किया गया। व्हाट्सएप चैट से यह भी स्पष्ट होता है कि कैसे राज्य के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी NAN घोटाले के मुख्य अभियुक्तों के सहायक बनकर रह गए हैं। चैट से पता चलता है कि राज्य के प्रमुख सचिव आलोक शुक्ला आरोपित टुटेजा के साथ मिलकर उनके केस को कमजोर करने और उनके विरोधियों पर मुकदमा दर्ज कराने की साजिश रच रहे थे।
राज्य के एक प्रमुख आईपीएस अधिकारी जीपी सिंह द्वारा दिए गए शपथ पत्र और अनिल टुटेजा के साथ हुई व्हाट्सएप चैट से भी मामले में कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। जानकारी के मुताबिक आलोक शुक्ला के निर्देशन में अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा, अन्य बड़े पुलिस अधिकारियों और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मिलकर राजनीतिक विरोधियों की एक हिटलिस्ट तैयार की थी।
मुख्यमंत्री बघेल न सिर्फ टुटेजा की मदद कर रहे थे बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, उनके परिवार के लोगों, पूर्व प्रमुख सचिव अमन सिंह उनकी पत्नी यास्मीन सिंह, पूर्व डीजी (पुलिस) मुकेश गुप्ता, अशोक चतुर्वेदी और चिंतामणि चंद्राकर जैसे अधिकारियों को भी फँसाने की कोशिश कर रहे थे।
19 अक्टूबर 2022 को छत्तीसगढ़ के NAN घोटाला मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने दावा किया कि मुख्य आरोपितों अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला की राज्य सरकार के बड़े अधिकारियों के साथ मिली भगत है। जो उन्हें बचाने की कोशिश में लगे हैं। ईडी ने मामले को राज्य से बाहर ट्रांसफर करने की अपील की थी।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को कोर्ट के अंदर से घसीट कर गिरफ्तार (Imran Khan Arrested) किया गया। इसके बाद ‘शांतिपूर्ण’ मजहब इस्लाम के नाम पर बने मुल्क में जगह-जगह दंगे हो रहे, सेना-पुलिस पर हमले किए जा रहे, उनके घरों और सरकारी संस्थाओं को जलाया जा रहा। इसी बीच पाकिस्तानी सोशल मीडिया में एक खबर वायलर हो गई – इमरान खान के मौत (death of Imran Khan) की।
इमरान खान की मौत से संबंधित एक वायरल फोटो
भारत के भी कुछ सोशल मीडिया हैंडल ने इमरान खान की मौत वाली फोटो शेयर की। पूरे पाकिस्तान में चल रहे बवाल के कारण वहाँ इंटरनेट लिमिटेड कर दिया गया था, इस कारण से इमरान खान के मौत की खबर को 9 मई 2023 की देर रात तक क्रॉस चेक नहीं किया जा सका।
पाकिस्तान में इमरान खान की मौत से संबंधित 2 तस्वीरें वायरल हो रही थीं। एक में वो लेटे हुए हैं और उनकी गर्दन के दोनों ओर तकिए या स्पंज जैसा कुछ सपोर्ट दिया गया है। दूसरी तस्वीर में इमरान खान को कुछ लोग लाद कर ले जा रहे हैं। दोनों तस्वीर के साथ इमरान खान की मौत के बारे में बातें कही गई हैं।
इमरान खान: जिंदा या मुर्दा?
खबर की सच्चाई जानने के लिए 10 मई 2023 को हमने पाकिस्तानी न्यूज वेबसाइट खंगालनी शुरू की। सुबह-सुबह तो कुछ पता नहीं चला लेकिन दोपहर बाद एक खबर आई, साथ में एक फोटो भी। इसमें इमरान खान से संबंधित अल-कादिर ट्रस्ट केस की सुनवाई एक कोर्ट में हुई। खबर में जो फोटो है, उसमें एक कुर्सी पर इमरान खान बैठे हुए हैं, साइड से उनका चेहरा दिख रहा है।
यह खबर ऑथेंटिक है, पाकिस्तान के प्रतिष्ठित मीडिया चैनलों पर भी है। मतलब इमरान खान जिंदा हैं। लेकिन किस हालात में हैं? ब्लूटिकधारी एक ट्विटर यूजर ने इसकी जानकारी दी है। इस ब्लूटिकधारी का ट्विटर हैंडल है @Gene5AK और इनके अनुसार इमरान खान जिंदा तो हैं लेकिन उन्हें पिछले 24 घंटे से सूसू-पॉटी नहीं करने दिया गया है, वॉशरूम ही नहीं जाने दिया गया।
?Imran Khan has requested to see his Doctor Faisal. ?He hasn't been allowed to go to the Washroom for 24hrs ?He doesn't want to be treated like Maqsood Chaprasi and be given slow death by injections.
— ?خـــͫــͣــͥـــــانـــــزادی? (@Gene5AK) May 10, 2023
ट्विटर यूजर @Gene5AK की बात को हवा में उड़ाने की जरूरत नहीं। इस यूजर ने नाम अपना सार्वजनिक नहीं किया है लेकिन जानकारी पुख्ता दी है। क्योंकि आज कोर्ट में इमरान खान ने खुद कहा:
“मैं पिछले 24 घंटे में वॉशरूम नहीं गया। क्या कोई मेरे डॉक्टर फैजल को बुला सकता है? मैं मकसूद चपरासी की तरह नहीं मरना चाहता, वे धीमी मौत के लिए इंजेक्शन लगाते हैं।”
इमरान खान के मौत वाली फोटो डिलीट
जिस ट्विटर यूजर बिन अफजल ( @bin_afzal_ ) ने पाकिस्तान में इमरान खान के मौत से संबंधित फोटो डाली थी, उसने भी अपनी पोस्ट डिलीट कर ली है।