Home Blog Page 1826

‘द केरल स्टोरी बनाने वाले को सरेआम फाँसी देनी चाहिए’: NCP नेता की डिमांड, कभी की थी शहीद इशरत जहाँ एंबुलेंस सेवा की शुरुआत

शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी काॅन्ग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक जितेंद्र आव्हाड (Jitendra Awhad) ने फिल्म द केरल स्टोरी (The Kerala Story) के निर्माता को सार्वजनिक तौर पर फाँसी देने की डिमांड की है। अतीत में हिंदू त्योहारों को दंगों का कारण बता चुके आव्हाड ने कभी आतंकी इशरत जहाँ के नाम पर एंबुलेंस सेवा की शुरुआत भी की थी। हाल में जब पवार ने एनसीपी अध्यक्ष पद छोड़ने का ऐलान किया था तो उनके समर्थन में इस्तीफा देने वालों में भी आव्हाड थे।

जितेंद्र आव्हाड ने कहा है, “द केरल स्टोरी के नाम पर एक राज्य और वहाँ की महिलाओं को बदनाम किया जा रहा। आधिकारिक आँकड़ा 3 का था, लेकिन इसे 32000 के तौर पर पेश किया गया। इस काल्पनिक फिल्म को बनाने वाले को सार्वजिनक रूप से फाँसी देना चाहिए।” उल्लेखनीय है कि द केरल स्टोरी का निर्देशन सुदीप्तो सेन ने किया है जबकि इसके निर्माता विपुल अमृतलाल शाह हैं।

इससे पहले जितेंद्र आव्हाड ने एक ट्वीट में केरल की साक्षरता समेत अन्य मुद्दों का जिक्र करते ‘द केरल स्टोरी’ को ‘झूठी फिल्म’ करार दिया था। उन्होंने लिखा था फिल्म में जैसा दिखाया गया है, सच्चाई उसके उलट है। 32000 महिलाओं का आँकड़ा फिल्म चलाने के लिए बताया जा रहा है। इस फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि महिलाएँ मूर्ख हैं और उन्हें कुछ भी समझ नहीं आता। फिल्म में महिलाओं को पुरुषों से कमजोर दिखाया गया है। यही फिल्म की सच्चाई है। इस तरह की फिल्में नफरत और हिंसा फैलाकर चुनाव जीतने के लिए बनाई जाती हैं।

बता दें कि 2016 में मुंबई में लश्कर-ए-तैयबा आतंकी इशरत जहाँ के नाम पर एंबुलेंस सेवा शुरू की गई थी। इसकी लॉन्चिंग में भी आव्हाड भी शामिल हुए थे। यही नहीं, आव्हाड हिंदुओं के प्रमुख त्योहार राम नवमी और हनुमान जयंती को दंगों की वजह भी करार दे चुके हैं। न्होंने कहा था कि लगता है जैसे रामनवमी और हनुमान जयंती सिर्फ दंगों के लिए ही मनाई जाती है।

पश्चिम बंगाल में ‘द केरल स्टोरी’ बैन

उत्तर प्रदेश में ‘द केरल स्टोरी’ टैक्स फ्री हो गई है। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फिल्म को राज्य में बैन कर दिया है। ममता ने कहा है कि यह फैसला राज्य में नफरत और हिंसा को रोकने तथा शांति बरकरार रखने के लिहाज से लिया गया है।

बता दें कि ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) फिल्म की कहानी ISIS में शामिल की जाने वाली लड़कियों के साथ घटित घटनाओं पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक एजेंडे के तहत दूसरे धर्म की लड़कियों को बहलाकर इस्लाम कबूल करवाया जाता है, फिर उन्हें आतंकी बनाकर ISIS में भेज दिया जाता है। फिल्म में अदा शर्मा ने शालिनी उन्नीकृष्णन का रोल निभाया है।

झाड़-फूँक करने घर आया उस्मान अली, करने लगा रेप: महिला ने काट दिया प्राइवेट पार्ट, असम की घटना

असम में उस्मान अली नाम के एक शख्स का महिला ने प्राइवेट पार्ट काट दिया। महिला का कहना है कि उस्मान ने उसके साथ रेप करने की कोशिश की थी। उस्मान अली के झाड़-फूँक करने के बहाने महिला के घर आया था। घटना सोमवार (8 मई 2023) की है। महिला मोरीगाँव जिले के भूरागाँव थाना क्षेत्र के बोरालीमारी की रहने वाली है। वहीं उस्मान असम के ही दरांग जिले का रहने वाला है।

भूरागाँव के पुलिस प्रभारी हेमंत बोरगोहैन के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने बताया है कि घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुँची। घायल उस्मान को बेहतर उपचार के लिए गुवाहाटी भेजा गया है। उन्होंने बताया कि महिला की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जाँच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महिला को कोई संतान नहीं है। वह अपनी समस्या लेकर उस्मान के पास जाया करती थी। सोमवार को उस्मान झाड़-फूँक करने उसके घर आया था। इसी दौरान उसने कथित तौर पर रेप का प्रयास किया। खुद को बचाने के लिए महिला भागी और आत्मरक्षा में धारदार वस्तु से उस्मान का प्राइवेट पार्ट काट दिया।

सोशल मीडिया में एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। इसमें उस्मान अस्पताल के स्ट्रेचर पर लेटकर रोता दिख रहा है।

MP के बाद अब UP में भी ‘द केरल स्टोरी’ टैक्स फ्री, कैबिनेट के साथ फिल्म देखेंगे CM योगी आदित्यनाथ: बंगाल में बैन को डिप्टी सीएम ने बताया तुष्टिकरण

मध्य प्रदेश के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी फिल्म ‘द केरल स्टोरी (The Kerala Story)’ को टैक्स फ्री कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस फिल्म को अपनी कैबिनेट के साथ देखेंगे भी। उत्तर प्रदेश सरकार ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में फिल्म पर रोक लगा दी है। इसको अदालत में चुनौती देने की बात फिल्म के निर्माता विपुल अृमतलाल शाह ने कही है।

उत्तर प्रदेश में फिल्म टैक्स फ्री करने की जानकारी CM योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर दी है। मंत्रिमंडल के साथ 12 मई 2023 को लखनऊ में वे फिल्म देखेंगे। वहीं UP के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने इसे फिल्म को बैन करने के लिए बंगाल की ममता सरकार की आलोचना की है।

चित्र साभार- @Myogioffice

उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने राज्य में फिल्म को टैक्स फ्री करने पर ख़ुशी जताई है। उन्होंने कहा, “प्रदेश के लोग इसे देखें और समझें कि हिंदुस्तान के दूसरे भूभाग में किस ढंग से हमारी बहनों के साथ अत्याचार और दुर्व्यवहार हो रहा है। सतर्कता बरतते हुए अपने परिवार को और बच्चों को सँभाले। केरल स्टोरी बनाने वालों को बहुत-बहुत बधाई।”

पाठक ने पश्चिम बंगाल में द केरल फाइल्स पर लगे बैन को तुष्टिकरण बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता कभी इसे स्वीकार नहीं करेगी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश से पहले मध्य प्रदेश में द केरल स्टोरी को टैक्स फ्री किया गया था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बयान जारी करते हुए कहा था कि यह फिल्म आतंकवाद और उसकी साजिशों का भंडाफोड़ करती है।

द केरल स्टोरी: मुल्ला के इस्लाम की कहानी, भारत के अंतहीन दुर्भाग्य की कथा

यह भारत के दुर्भाग्य की कथाएँ हैं। अंतहीन दुर्भाग्य की रुला देने वाली आपबीतियाँ। यह किसी मिशनरी या मजहब की बात ही नहीं है। यह भारत को तिल-तिलकर नष्ट करने के प्रयासों की एक सामान्य सी झलक है, जो केरल की पृष्ठभूमि से सिनेमा के परदे पर प्रस्तुत हुई है। मैं ‘द केरल स्टोरी (The Kerala Story) ‘ की बात कर रहा हूँ। एक फिल्म, जो इन दिनों सर्वाधिक चर्चा में हर कहीं हाऊस फुल है। होनी भी चाहिए।

5 मई 2023 को सिनेमाघरों में लगी इस फिल्म को मैंने रिलीज होने के चौथे दिन देखा। यह किसी कोण से किसी भी धर्म विशेष को अपमानित नहीं करती। धर्मांतरण भारत के लिए नया विषय नहीं है। छल और बल से यह होता ही रहा है। अखंड भारत के तीन टुकड़ों में जनसांख्यिकी का विस्तार सदियों के उसी फैलाव का फल है। यह फिल्म केरल में जारी धर्मांतरण के सर्वाधिक भयावह पक्ष को संसार के सामने लाती है।

किसी पारसी, सिख, ईसाई या हिंदू कन्या से किसी मुस्लिम का प्रेम या विवाह कोई नया विषय नहीं है। हर शहर में बीते तीस वर्षों की घटनाएँ और उनके पात्रों का स्मरण कीजिए। उनकी कहानियों के अपडेट लेना समाज के लिए जरूरी है कि वे किस हाल में कहाँ कैसा जीवन जी रही हैं? संभव है कि वे बहुत सुखी परिवारों में अपने बड़े होते बच्चों के साथ हमारे बीच आएँ, जहाँ धर्म कोई बाधा नहीं है।

हो सकता है कि नमाज के साथ पर्यूषण, अग्निपूजा, शबद गायन और रुद्राभिषेक उन परिवारों में सब मिलकर कर रहे हों। तिलक भी लगा हो, टोपी भी सजी हो। हो सकता है वह प्रेम दो धर्मों को एक धारा में लेकर अब तक चल रहा हो। किंतु इसका बहुत उल्टा भी संभव है। कि भावुक कन्या के सिर से प्रेम का भूत साल भर में उतर गया हो। उन्हें अपना धर्म और अपना अतीत छोड़ना पड़ा हो, वे दूसरी या तीसरी बीवी बनी हों। उन्हें इसी जीवन में दोजख के विराट दर्शन हो गए हों। कुछ भी हो सकता है। मगर यह गहरे सामाजिक शोध का विषय है, जिस पर विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को परिश्रमपूर्वक बहुत गहरे काम की आवश्यकता है।

कोई गैर मुस्लिम कन्या किसी मुस्लिम युवक के साथ विवाह संबंधों में चली गई, उसने इस्लाम कुबूल भी कर लिया लेकिन जीवन चल रहा है, बच्चे बड़े हो रहे हैं, वे हमारे ही समाज में अब स्वीकार्य युगल हैं, बात इतनी सरल भी हो तो कोई बात नहीं। ‘द केरल स्टोरी’ सर्वाधिक भयावह पक्ष इसलिए है कि वहाँ प्रेम एक जाल है, जिसमें फँसाने की सुनियोजित चालें हैं और उनके पीछे कुछ चेहरे हैं, उनके स्पष्ट उद्देश्य हैं।

यह 2014 में सीरिया में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के उभार के समय हुई सत्य घटनाओं की कथा है, शालिनी उन्नीकृष्णन इसकी केंद्रीय पात्र है। शालिनी की तीन और सहेलियाँ हैं, जो केरल के कासरगोड जिले के एक नर्सिंग कॉलेज में डिग्री लेने पहुँचती हैं। केरल के एक सिरे पर है तिरुवनंतपुरम और दूसरे सिरे पर है कासरगोड, जो कर्नाटक के मेंगलोर से सटा लगभग शत-प्रतिशत मुस्लिम इलाका है।

आसिफा नाम की एक स्थानीय सहपाठी उन्हें होस्टल में मिलती है। आसिफा उस गिरोह की एक निचली कड़ी है, जिसे गैर मुस्लिम खूबसूरत लड़कियों को गिरोह के दूसरे सहभागी मुस्लिम लड़कों के नजदीक लाना है। उनके मस्तिष्क में अपने मूल धर्म के विरुद्ध बीज बोने हैं और इस्लाम की काल्पनिक महिमा प्रस्तुत करनी है। वह अपने मिशन पर बाहिजाब है। तीनों गैर मुस्लिम लड़कियाँ केवल उसका अगला शिकार हैं, अंतिम नहीं।

इन लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाकर ड्रग की लत लगाना अगला चरण है, जिसमें अब आसिफा के कुछ मुस्लिम युवा मित्र और परिजन भी जुड़ गए हैं। ड्रग की चपेट में लाने के बाद आकर्षक गंगा-जमनी माहौल में उनके साथ शारीरिक संबंध बनाना और गर्भवती करना उनके लिए सरल है। ऐसा ही होता है। शालिनी और उसकी एक और सहेली इस दलदल में उतर जाती हैं। तीसरी नेमाह थोड़ा बचकर चलती है। वह ईसाई है।

गर्भवती शालिनी को एक दिन बताया जाता है कि उसका पार्टनर तो विदेश चला गया है। होने वाले बच्चे की खातिर उससे निकाह के लिए अब दूसरा पात्र सामने लाया जाता है। शालिनी की सहेली निकाह के लिए तैयार नहीं होती तो उसके अश्लील वीडियो पहले ही बनाकर रखे गए होते हैं, जो एक दिन इंटरनेट पर डाल दिए जाते हैं। वह आत्महत्या करती है। शालिनी कोलंबो से अफगानिस्तान होकर सीरिया में इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों में जुड़ने जा रहे अपने नए शौहर के साथ रास्ते में एक संतान को जन्म देती है। अभी उसे और धोखे और अपमान से गुजरना शेष है।

हर दृश्य प्रभावी ढँग से अगले दृश्य तक कहानी को लेकर जा जाता है। आप गहरे सन्नाटे से घिरे एक ऐसी कथा को परदे पर देखते हैं, जो हजारों लड़कियों ने अपने जीवन में भोगी और यह सदियों पहले गुलामों के बाजार में बेची गई लड़कियों की बहुत दूर की कहानियाँ नहीं हैं। यह अजमेर की उन बदकिस्मत स्कूली बच्चियों की दारुण कथा भी नहीं है, जिन्हें चालीस साल पहले संगठित गिरोह ने ऐसे ही जालों में फँसाकर जाने कब तक ब्लैकमेल किया था! गूगल और यूट्यूब पर उनकी सत्य कथाएँ देखिए कि वे कौन लोग थे?

अजमेर हो या केरल, वे लड़कियाँ आज भी कहीं न कहीं हैं। यह वर्तमान है और यह उनका भोगा हुआ सच है। वह सब आज भी बंद नहीं हुआ है। शालिनी का जीवन नष्ट करने वाला कथित मुस्लिम प्रेमी केरल में पिज्जा की दुकान चला रहा है। शालिनी उसका अंतिम शिकार नहीं ही होगी। वह आज भी शिकार पर हो सकता है! आसिफा अकेली नहीं होगी। हर शहर में सैकड़ों आसिफाएँ अपने काम पर लगी होंगी। एक ऐसे काम पर, जो अल्लाह ने ही उन्हें दिया है। एक ऐसा अल्लाह, जो उनके अनुसार सर्वश्रेष्ठ है, जिससे किसी भगवान की तुलना करना भी पाप है!

जब दूसरे मुस्लिम युवक के साथ गर्भवती शालिनी का निकाह हो रहा होता है तो उसकी बेबस माँ रोती-पड़ती वहाँ तक आती है। आसिफा उसे ढाँढस बँधाती है। कहती है- अब वह शालिनी नहीं है। वह फातिमा है। आप लौट जाइए। अल्लाह सब ठीक करेगा!

यह सही है कि अल्लाह सब ठीक करेगा मगर इस्लाम के महान दर्शन में अल्लाह किसका ठीक करेगा, क्या वाकई? बार-बार यह बात दोहराई गई है कि काफिरों को दोजख की आग में वह जलाने वाला है और वह आग सामान्य आग से 70 गुना ज्यादा तेज होगी। इसलिए इस्लाम कुबूल करो!

यह फिल्म हर उस परिवार को देखनी चाहिए, जिसके यहाँ बेटी है, जिसके संबंधियों में किसी के यहाँ भी एक बेटी है और जिसके पड़ोस में किसी भी घर में एक बेटी है। यह सबको मिलकर देखना चाहिए। सब बेटियों को भी, जो पढ़ने के लिए स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी तक जाती हैं। अपने गाँव-घर से दूर होस्टल और किराए के कमरों में रहती हैं।

यह तय मानिए कि कोई न कोई उनके शिकार पर किसी नुक्कड़ पर बाइक लिए खड़ा है। वह क्लासरूम में भी हाे सकता है। पड़ोस के फ्लैट में भी। जरूरी नहीं कि वह सीरिया या अफगानिस्तान में आतंकी बनने के लिए ही ले जाने के लिए खड़ा हो। किंतु यह अटल सत्य है कि वह आपसे आपका धर्म, आपका परिवार, आपकी परंपराएँ, आपका अतीत सदा के लिए छीनने के लिए ही घात लगाए है। एक बार आगे बढ़ने के बाद आपसे आपका नाम और आपकी पहचान सब कुछ छिन जाने वाला है।

यह क्यों होगा, यह समझने के लिए इस्लाम का डिजाइन हर गैर मुस्लिम को ठीक से पता होना चाहिए। कोई स्कूल-कॉलेज में यह नहीं पढ़ाएगा, लेकिन धर्मों के तुलनात्मक अध्ययन पर समाज में चर्चाएँ होना जरूरी हैं। घरों में अपने धर्म की सर्वश्रेष्ठ सीखें बच्चों को बताएँ। सामाजिक संगठन और स्टडी सर्कल नियमित रूप से तुलनात्मक अध्ययन की कक्षाएँ शुरू करें। एक युवा मुस्लिम भी प्रेम की ओर पहला कदम बढ़ाते हुए शायद नहीं समझता होगा कि वह जाने-अनजाने उस गैर मुस्लिम लड़की से क्या कुछ छीन लेने वाला है। वह इस्लाम के डिजाइन में एक मामूली टूल है और संगठित सियासी या आतंकी गिरोह हर प्रकार के नटबोल्ट, पाने, पेंचकस से भरीपूरी एक टूलकिट!

और फिल्म को लेकर इसी बिंदु पर आग लगी हुई है। दाढ़ियाँ और टोपियाँ सुलगी हुई हैं। क्योंकि काफिर और मोमिन का दर्शन एक ऐसे विचार से उपजा है, जिसे वे इस्लाम कहते हैं। उसमें एक ऐसे अल्लाह का आविष्कार है, जो काफिरों और बुतखानों को नष्ट करने पर ही अड़ा हुआ बैठा है। सदियों से इस हम्माली में सबको लगाया हुआ है। हर मोमिन का यह प्राथमिक कर्त्तव्य है कि वह इस्लाम को फैलाए। अल्लाह के निकट सबको घसीटकर लाए। छल से बल से, जैसे भी। लड़कियाँ सबसे सरल शिकार हैं। उन्हें प्रेमपूर्वक लाया जाए!

तो फिल्म में कुछ मौलवी हैं, आलिम हैं, मस्जिद है, अजानें हैं, नमाजें हैं, शरिया कानून के रक्तरंजित क्रियान्वयन हैं, अल्लाहो-अकबर का सदाबहार शोर है, जोशीले लड़ाकों के गोली-बम के धूम-धमाके हैं। तारेक फतह जीवन भर कहते रहे कि अल्लाह का इस्लाम अलग है, मुल्ला का इस्लाम अलग। मुल्ला का इस्लाम राजनीतिक इस्लाम है, अल्लाह ने तो आध्यात्मिक टाइप का कोई इस्लाम दिया था।

तारेक फतह की कसौटी पर यह फिल्म मुल्ला के इस्लाम की कहानी है, जो पूरी दुनिया को इस्लामी परचम के नीचे लाने में दिन-रात लगे हैं। चूँकि यह सब चल इस्लाम के नाम पर रहा है, इसलिए इस्लाम की बंद दिमाग जमातों के पेट में मरोड़ें स्वाभाविक हैं। एक सत्य इतनी प्रखरता के साथ परदे पर आ गया है कि दाढ़ी में तिनका ही दिखाई नहीं दिया है। तिनकों की ही दाढ़ियाँ बेहिजाब हो गई हैं!

मैं मानता हूँ कि ज्यादातर मुस्लिम ऐसे नहीं होते। वहाँ भी दया और प्रेम, सहिष्णुता और करुणा रखने वाले आम लोग हैं। अगर ऐसे हैं तो सिनेमा में आधी सीटें इनसे भी भरनी चाहिए। वे भी देखें कि आध्यात्मिक इस्लाम जैसा कुछ अस्तित्व में है तो वह कहाँ है? अगर सिनेमा में आधा सच है तो पूरा सच क्या है, यह निर्दोष संसार के संज्ञान में भी लाया जाए।

मैंने इसे भारत के अंतहीन दुर्भाग्य की कथा कहा। मजहब के नाम पर हुए बँटवारे के बाद पाकिस्तान में गैर मुस्लिम बेटियों की दुर्दशा किससे छिपी है, बांग्लादेश में आए दिन मंदिरों और हिंदू घरों पर हमलों के बारे में किसे नहीं पता और इन दो टुकड़ों के बाद बचे हुए भारत में कश्मीर से बंगाल होकर केरल तक हतभाग्य हिंदुओं के हिस्से में क्या आया है? वे भारत के दुर्भाग्य को अकेले ढोने के लिए जाने कब से अभिशप्त हैं!

शालिनी की निमाह नाम की ईसाई सहेली धोखे से ड्रग की चपेट में लाकर रेप की शिकार बनाई जाती है, वह जैसे-तैसे पुलिस स्टेशन में इस संगठित नेटवर्क की शिकायत रो-रोकर जब कर रही होती है तो उसके पीछे दीवार पर लगी एक तस्वीर पर ध्यान टिकता है। सेक्युलर भारत के आबादी में आधे मुस्लिम-ईसाई हो चुके वामपंथी शासकों वाले केरल नामक राज्य के उस पुलिस अफसर के कार्यालय में लगी उस तस्वीर में महात्मा गाँधी मुस्कुरा रहे हैं!

यह समीक्षा नहीं, एक सकारात्मक टिप्पणी है। फिल्म देखकर किसी प्रकार की राय बनाने के मैं बिल्कुल पक्ष में नहीं हूँ। वैसे भी यह फिल्म इस्लाम की कोई नकारात्मक छवि नहीं दर्शाती। यह केरल की बेटियों का जीवन और भविष्य बरबाद करने में लगे उन संगठित गिराेहों की सत्य कथा काे प्रकट करती है, जो इस्लाम के वेश में सक्रिय हैं। इस्लाम उनके कारण बदनाम हो रहा होगा, सिनेमा में इतनी शक्ति नहीं कि वह सर्वशक्तिमान अल्लाह के सर्वश्रेष्ठ इस्लाम पर एक कण बराबर भी दाग लगा सके! यह असंभव है। भला षड्यंत्र, छल-कपट और आतंक का भी कोई धर्म होता है! कदापि नहीं…

द केरल स्टोरी के क्रू मेंबर को धमकी, कहा- घर से अकेले मत निकलना, ये कहानी दिखाकर अच्छा नहीं किया: मुंबई पुलिस ने दी सुरक्षा

इस्लामी धर्मांतरण की साजिशों को चर्चा में लाने वाली फिल्म द केरल स्टोरी (The Kerala Story) से जुड़े एक क्रू मेंबर को धमकी दी गई है। धमकी सोमवार (8 मई 2023) को एक अनजान नंबर से मैसेज कर भेजी गई। धमकी देने वाले ने कहा है कि फिल्म में ये कहानी दिखाकर अच्छा नहीं किया गया है। मुंबई पुलिस ने क्रू मेंबर को सुरक्षा मुहैया कराई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 8 मई को द केरल स्टोरी के एक क्रू मेंबर को एक अनजान नंबर से मैसेज आया। मैसेज करने वाले व्यक्ति ने धमकाते हुए लिखा,  “अकेले घर से बाहर मत निकलना। तुमने फिल्म में ये कहानी दिखाकर अच्छा नहीं किया।” फिल्म के डायरेक्टर सुदीप्तो सेन ने इसकी शिकायत मुंबई पुलिस से की है। पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते क्रू मेंबर को सुरक्षा मुहैया करवाई। हालाँकि शिकायत कॉपी न मिलने के चलते अभी तक केस दर्ज नहीं किया गया है।

फिल्म से जुड़े किस व्यक्ति को धमकी मिली है, यह स्पष्ट नहीं है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि धमकी फिल्म डायरेक्टर सुदीप्तो सेन को ही दी गई है।

प्रशंसकों को भी मिली हैं धमकियाँ

इससे पहले ‘द केरल स्टोरी’ के प्रशंसकों को भी जान से मारने की धमकियाँ मिल चुकी है। पुणे में इस फिल्म को देखने के लिए लोगों को फ्री राइड देने का एलान करने वाले ऑटो ड्राइवर साधु मगर को भी जान से मारने की धमकियाँ मिल रहीं हैं। साधु ने पुलिस में देश-विदेश के कुछ अनजान नंबरों की शिकायत देते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

इसके अलावा राजस्थान के जोधपुर में VHP से जुड़े राजू सरगरा पर भी इसलिए हमला किया गया, क्योंकि वे लोगों से ‘द केरल स्टोरी’ देखने की अपील कर रहे थे। आरोप है कि कट्टरपंथियों ने राजू सरगरा के व्हाट्सएप स्टेटस को देखने के बाद उन पर हमला किया था। स्टेटस में उन्होंने फिल्म का पोस्टर लगाते हुए उसकी तारीफ की थी। राजू को सिर तन से जुदा की धमकियाँ भी मिली हैं।

‘5 साल में 40000 महिला लापता’: द केरल स्टोरी की खुन्नस में गुजरात पर गुमराह कर रहा था मीडिया गिरोह, पुलिस ने आँकड़ों के साथ बता दी हकीकत

द केरल स्टोरी (The Kerala Story) ने इस्लामी धर्मांतरण की साजिशों को चर्चा में ला दिया है। इससे आहत लिबरल और वामपंथी गैंग ने गुजरात को लेकर एक प्रोपेगेंडा शुरू किया था। इसमें राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों का हवाला देकर दावा किया जा रहा था कि गुजरात से 5 साल में करीब 40 हजार महिलाएँ गायब हुईं हैं। आधे-अधूरे तथ्यों के साथ चलाए जा रहे इस प्रोपेगेंडा का गुजरात पुलिस ने खंडन किया है।

वायरल पोस्ट में कहा जा रहा था कि साल 2016 से 2020 के बीच गुजरात से 40 हजार से अधिक महिला लापता हुई हैं। लेकिन सोमवार (8 मई 2023) को गुजरात पुलिस ने सिलसिलेवार ट्वीट में बताया है कि लापता हुई 41,621 महिलाओं में से 39,497 को खोज कर उनके परिवारों से वापस मिलाया जा चुका है।

ट्वीट में गुजरात पुलिस ने बताया है कि लापता महिलाओं की संख्या एनसीआरबी का है। लेकिन इनमें से 95% को बरामद कर उनके परिवार से मिलाया जा चुका है। पुलिस ने इन महिलाओं के लापता होने की वजह पारिवारिक विवाद, घर से भाग जाना, परीक्षा में फेल होना वगैरह बताए हैं। साथ ही कहा है कि जाँच से गुमशुदगी के इन मामलों में यौन शोषण या अंगों के लिए मानव तस्करी से जुड़े होने का सबूत नहीं मिला है।

गुजरात पुलिस बताया है कि गुमशुदगी के मामलों में स्थानीय पुलिस सुप्रीम कोर्ट के तय मापदंडों के अनुसार पड़ताल करती है। लापता लोगों का डाटा राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय के लिए एक खास वेबसाइट पर इसलिए अपलोड किया जाता है ताकि पड़ताल में अन्य राज्यों के पुलिस बल की मदद मिल सके।लापता व्यक्तियों की जाँच सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय मापदंडों के आधार पर की जाती है। लापता हुए लोगों का डाटा एक खास वेबसाइट पर इसलिए पोस्ट किया जाता है जिस से उनकी राष्ट्रीय स्तर पर तलाश में अन्य राज्यों के पुलिस बल का सहयोग मिले। माना जा रहा है कि इस प्रकार की खबर को द केरला स्टोरी फिल्म से कनेक्ट करने की कोशिश की गई। उस फिल्म को केरल में हुईं लव जिहाद की घटनाओं से जोड़ कर बनाया गया था जिसमें लड़कियों का प्रयोग ISIS जैसे आतंकी संगठनों के लिए किया गया था।

भ्रम फैलाने में मीडिया संस्थान भी

गुजरात की 40 हजार महिलाओं के लापता होने की खबर को सोशल मीडिया यूजर्स के अलावा न्यूज़ 24 और न्यू इंडियन एक्सप्रेस जैसे मीडिया संस्थान ने भी प्रचारित किया। इन्होंने रिपोर्ट में 40 हजार से अधिक महिलाओं के लापता होने की जानकारी तो दी, लेकिन बरामद की गईं 39,400 महिलाओं के बारे में नहीं बताया। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे ‘गुजरात स्टोरी’ नाम देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को घेरने की कोशिश की और पूछा कि इसकी कहानी कौन दिखाएगा।

अरफ़ा खानम और सायमा के ट्वीट्स

गौरतलब है कि गुजरात राज्य के खिलाफ ये प्रोपेगेंडा बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘द केरला स्टोरी‘ की रिलीज के बाद किया गया है। यह फिल्म को केरल में हुई लव जिहाद की साजिशों का पर्दाफाश करती है। बताती है कि कैसे लड़कियों का ब्रेन वाॅश कर उनका धर्मांतरण और ISIS जैसे आतंकी संगठनों के लिए इस्तेमाल किया गया।

इस्लाम के नाम पर बना देश, मुस्लिमों के पास हज पर जाने के पैसे नहीं: कंगाल Pak ने बचा लिए 681 करोड़ पाकिस्तानी रुपए

महँगाई और गरीबी से जूझ रहे पाकिस्तान ने अपना हज कोटा (Pakistan Hajj Quota) सऊदी अरब को वापस कर दिया है। पाकिस्तान के बीते 75 सालों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ। दरअसल, भारी महँगाई के चलते इस साल हज के लिए काफी कम आवेदन आए थे। इसके चलते पाकिस्तान को यह कदम उठाना पड़ा। हज कोटा वापस करने के साथ ही पाकिस्तान सरकार ने करोड़ों डॉलर बचा लिए।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने कहा है कि सरकार ने हज यात्रा के आठ हजार सरकारी योजना कोटे वापस किए हैं। इस तरह से सरकार ने करीब 2.4 करोड़ डॉलर यानी करीब 6,80,95,20,000 करोड़ पाकिस्तानी रुपए (8 मई 2023 के रेट से) बचा लिए हैं। अब पाकिस्तान को हज कोटे के लिए कोई भी शुल्क नहीं देना होगा।

बताया जा रहा है कि यदि पाकिस्तान हज कोटा वापस नहीं करता तो उसे बची हुई राशि को हज जाने वाले लोगों के रहने पर खर्च करना होता। पाकिस्तान को यह पैसा सब्सिडी के रूप में देना पड़ता। लेकिन अब बचा हुआ हज कोटा वापस होने के बाद पाकिस्तान का यह पैसा बच जाएगा।

बता दें कि सऊदी अरब ने इस साल पाकिस्तान को 1,79,000 हज यात्रियों का कोटा दिया था। इसके तहत 89605 हज यात्रियों का कोटा सरकार को तथा शेष कोटा प्राइवेट ऑपरेटरों को दिया गया था। पाकिस्तान में हज कोटा के लिए पर्याप्त आवेदन नहीं आए। ऐसे में सरकार ने ऐलान किया है कि इस साल की हज यात्रा के लिए लकी ड्रॉ नहीं होगा। जब आवेदकों की संख्या अधिक होती थी, तब लकी ड्रॉ के द्वारा हज यात्रियों का चयन होता था।

गौरतलब है कि हज यात्रा के लिए पर्याप्त आवेदन न आने पर पाकिस्तान की सरकार ने पहले हज कोटा प्राइवेट ऑपरेटरों को सौंपने का फैसला किया था। लेकिन विदेशी मुद्रा की किल्लत से जूझ रही सरकार को डर था कि यदि प्राइवेट ऑपरेटर को हज कोटा मिल गया तो वे खुले मार्केट से डॉलर खरीदेंगे। इससे डॉलर की किल्लत और भी अधिक बढ़ जाएगी। इसके बाद पाकिस्तान ने हज कोटा सऊदी अरब को लौटाने का फैसला किया।

मणिपुर हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा – विस्थापितों की हो घर वापसी, यह मानवीय संकट

मणिपुर हिंसा (Manipur Violence) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार ने कोर्ट से कहा है कि मणिपुर में हालात सामान्य हो रहे हैं। दो दिनों से कोई हिंसा नहीं हुई। वहीं, कोर्ट ने हिंसा के चलते विस्थापित हुए लोगों को लेकर सोमवार (8 मई 2023) को कहा कि उन्हें घर वापस लाया जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मणिपुर हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने सुनवाई की। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के मौजूदा हालातों को मानवीय मुद्दा बताया। साथ ही कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि सरकार काम कर रही है। लेकिन सरकार को राहत शिविरों में उचित व्यवस्था करनी चाहिए। वहाँ रह रहे लोगों को भी राशन और चिकित्सा सुविधाओं जैसी बुनियादी सुविधाएँ दी जानी चाहिए।

मणिपुर की स्थितियों को लेकर कोर्ट को जबाव देते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा है कि पिछले दो दिनों में राज्य में किसी प्रकार की हिंसा नहीं हुई है। इसलिए कर्फ्यू में ढील भी दी गई। सुरक्षा की दृष्टि से हेलीकॉप्टर और ड्रोन से भी निगरानी की जा रही है। राहत शिविर में रह रहे लोगों को आवश्यक सुविधाएँ मुहैया कराई जा रही हैं।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य में पैरामिलिट्री फोर्स की 52 कंपनियाँ और असम राइफल्स की 100 से अधिक कंपनियाँ तैनात की गई हैं। हिंसा प्रभावित और अशांत क्षेत्रों में फ्लैग मार्च हो रहा है।

तुषार मेहता ने बताया कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार काम कर रही है। केंद्र सरकार भी इस पूरे मामले में नजर बनाए हुए है। केवल धार्मिक स्थलों को ही नहीं, बल्कि राज्य में लोगों और संपत्तियों की भी रक्षा के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

मणिपुर मामला: हाई कोर्ट का आदेश, सुप्रीम कोर्ट के सवाल

इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मैतेई समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने को लेकर हाई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश पर हैरानी जताई। बेंच ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के ऐसे कई फैसले हैं, जिनके अनुसार हाईकोर्ट किसी भी समाज को एसटी का दर्जा देने का निर्देश नहीं दे सकता है। यह शक्ति हाईकोर्ट के पास नहीं है। ऐसा करना राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में आता है।

तमाम दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अब केंद्र और राज्य सरकार को 10 दिन के अंदर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई 17 मई 2023 को होगी।

जनजातीय समाज के मार्च के बाद शुरू हुई हिंसा

असल में मणिपुर का मैतेई समाज लंबे समय से माँग कर रहा है कि उसे ‘अनुसूचित जनजाति (ST)’ का दर्जा दिया जाए। हाल ही में उन्होंने अपनी इस माँग को तेज कर दिया।

मैतेई समाज मणिपुर की जनसंख्या का 53% है, यानी आधा से भी ज़्यादा। इसी माँग के विरोध में ‘ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर (ATSUM)’ ने बुधवार (3 मई, 2023) को राज्य के 10 पहाड़ी जिलों में मार्च निकाला था।

मणिपुर हाईकोर्ट ने कहा है कि मैतेई समाज को ST में सम्मिलित करने के लिए राज्य सरकार केंद्र को प्रस्ताव भेजे, जिसके बाद ये हिंसा की घटनाएँ हुईं। जनजातियों और बहुसंख्यक मैतेई समुदाय के बीच हिंसा के कारण 54 से अधिक लोग मारे गए हैं।

हाउसबोट डूबने से केरल में 22 की मौत: राज्य सरकार ने दिया न्यायिक जाँच का आदेश, मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए आर्थिक सहायता

केरल के मलप्पुरम जिले में एक हाउसबोट डूबने के चलते 22 लोगों की मौत हो गई। रविवार (7 मई 2023) को हुई इस घटना के समय नाव में 31 लोग सवार थे। जिन्दा बचे 9 यात्रियों को नजदीक के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और उपराष्ट्रपति ने घटना पर शोक जताते हुए मृतकों के आश्रितों को 2-2 लाख रुपए सहायता की घोषणा की है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने मामले की न्यायिक जाँच के आदेश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला मलप्पुरम जिले के तानुर इलाके में ओट्टुम्पुरम का है। केरल सरकार के मंत्री वी अब्दुर्रहमान के अनुसार रविवार शाम लगभग 7 बजे यह हादसा हुआ। घटना के समय नाव नदी के बीच थी, जिसे किनारे लाने का प्रयास किया जा रहा है। राहत और बचाव कार्यों में फायर ब्रिगेड, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जुटे हुए हैं। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने न्यायिक जाँच के आदेश दिए हैं।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में रात के समय नदी में डूबी नाव के आस-पास सुरक्षाकर्मी राहत और बचाव कार्य करते दिखाई दे रहे हैं।

राहत और बचाव कार्यों में नौसेना की भी मदद ली जा रही है। नौसेना का चेतक हेलीकॉप्टर भी मदद में लगाया गया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए आर्थिक सहायता की घोषणा भी की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर दुःख जताते हुए मृतकों के परिजनों को PM राहत कोष से 2-2 लाख रुपए देने का एलान किया है।

राजस्थान में मिला ‘सफेद सोना’, देश का 80% डिमांड पूरा करने में सक्षम: जम्मू-कश्मीर में भी मिला था लीथियम का भंडार, चीन का एकाधिकार होगा खत्म

राजस्थान में लिथियम का बड़ा भंडार मिला है। इससे देश की 80% लिथियम माँग को पूरा किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि भारत को अब लिथियम के लिए चीन जैसे देशों पर निर्भर नहीं रहना होगा। लिथियम का उपयोग मोबाइल, लैपटॉप के साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी में किया जाता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लिथियम का यह विशाल भंडार राजस्थान के नागौर जिले के डेगाना में मिला है। इसकी खोज जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने की है। जीएसआई के अधिकारियों का कहना है कि लिथियम का यह भंडार जम्मू-कश्मीर में मिले भंडार से कहीं अधिक बड़ा है। इसी साल फरवरी में जम्मू-कश्मीर में लिथियम के 59 लाख टन भंडार का पता चला था।

मौजूदा समय में दुनिया का सबसे बड़ा लिथियम भंडार 210 लाख टन का है, जो कि बोलीविया में है। इसके बाद अर्जेंटीना, चिली और अमेरिका में भी बड़े भंडार हैं। इसके बावजूद 51 लाख टन लिथियम के भंडार वाले देश चीन का लिथियम के बाजार में एकाधिकार है। भारत अपने कुल लिथियम आयात का 53.76 प्रतिशत हिस्सा चीन से खरीदता है। साल 2020-21 में भारत ने 6000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य का लिथियम आयात किया था। इसमें से 3500 करोड़ रुपए से अधिक का लिथियम चीन से खरीदा गया था।

लिथियम के लिए भारत अब तक चीन, ऑस्ट्रेलिया और चिली जैसे देशों पर निर्भर है। इस विशाल भंडार के मिलने के बाद चीन का एकाधिकार खत्म होने की बात कही जा रही है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि खाड़ी देशों की ही तरह राजस्थान के साथ-साथ पूरे देश की भी किस्मत चमकने वाली है।

दिलचस्प बात यह है कि जियोलॉजिक सर्वे ऑफ इंडिया की टीम लिथियम की खोज नहीं, बल्कि टंगस्टन की खोज के लिए डेगाना गई थी। लेकिन वहाँ उन्होंने लिथियम का भंडार खोज निकाला। अंग्रेजी शासन के समय इस क्षेत्र में टंगस्टन का बड़ा भंडार था।

क्या है लिथियम

आप जिस मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं उसमें लगी बैटरी बनाने में लिथियम का उपयोग किया जाता है। वास्तव में, लिथियम दुनिया की सबसे मुलायम और सबसे हल्की धातु है। इसे चाकू से काटा जा सकता है और यह आसानी से पानी में तैरती भी है। लेकिन इसका महत्व इसके मुलायम होने या पानी में तैरने से नहीं, बल्कि बैटरी में उपयोग होने के चलते बहुत अधिक बढ़ गया है। लिथियम रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदल देता है।

आज घर के सभी चार्जेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैटरी से चलने वाले हर गैजेट में लगी बैटरी में लिथियम का उपयोग होता है। दुनिया अब ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ रही है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर अन्य सभी उपकरणों में लगने वाली बैटरी की माँग लगातार बढ़ती जा रही है। पूरी दुनिया में हो रही माँग में वृद्धि के चलते ही इसे ‘व्हाइट गोल्ड’ भी कहा जाता है। एक टन लिथियम की कीमत करीब 57.36 लाख रुपए है।