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इमरान खान को बवासीर है, नंगा नहीं करना है, न ही रेप… बाँस-सरिया डालने पर रोक: पाकिस्तान सरकार से PTI का एग्रीमेंट – Fact Check

पाकिस्तान में चल रही हिंसा और इमरान खान की गिरफ्तारी के बीच सोशल मीडिया पर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के स्टैंप से एक लेटर वायरल हुआ है। इस लेटर में दावा था कि पाकिस्तान सरकार ने पीटीआई अध्यक्ष इमरान खान से वादा किया था कि इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद बाद उन्हें कोई नंगा नहीं करेगा, उनके साथ रेप नहीं होगा और उन्हें सरिया-बाँस आदि से नहीं प्रताड़ित किया जाएगा।

इस लेटर में यूएस राजदूत डोनाल्ड ब्लूम का भी नाम है जिन्हें (लेटर के मुताबिक) जिम्मेदारी दी गई है कि वो इस बात की देख-रेख करें कि पुलिस कस्टडी में पूर्व प्रधानमंत्री के साथ ये सब न हो।

अब जियो फैक्ट चेक ने इस लेटर को फर्जी बताया है। लेटर में कहा गया है कि एक अधिकारी ने उन्हें नाम न बताने की शर्त पर बताया कि इस तरह का कोई एग्रीमेंट इमराऩ खान, पाकिस्तान सरकार और यूएस राजदूत के बीच नहीं हुआ था। इस लेटर में एक यूसुफ नसीम खोकर का नाम है, जिनको इंटीरियर सेक्रेट्री बताया गया है। जियो फैक्ट चेक के अनुसार, यूसुफ नसीम 7 मार्च को रिटायर हो चुके हैं और लेटर की तारीख 8 मई 2023 की डाली गई है।

बता दें कि इस लेटर में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के इमरान खान और पाकिस्तानी सरकार को दो पार्टियाँ बताया गया है जिनके बीच यह करार हुआ। इसमें लिखा है कि इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद उनके साथ निम्नलिखित बर्ताव नहीं होंगे।

  1. पीटीआई के इमरान खान अहमद नियाजी को पूछताछ के दौरान नंगा नहीं किया जाएगा।
  2. किसी को ये इजाजत नहीं दी जाएगी कि वो पीटीआई के इमरान खान का रेप करे। खासकर तब जब वो बवासीर के मरीज हैं।
  3. इमरान खान को किसी भी तरह के बाँस-सरिया-डंडे से प्रताड़ित नहीं किया जाएगा।

पत्र में यह भी लिखा है कि ये सारी नियम और शर्तों की देखरेख अमेरिकी राजदूत डोनाल्ड ब्लूम द्वारा की जाएगी क्योंकि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के अध्यक्ष इमरान खा, यूएस राजदूत डोनाल्ड ब्लूम के अलावा किसी पर विश्वास नहीं कर सकते। इस पत्र में देख सकते हैं कि इमरान अहमद खान नियाजी, इंटीरियर सेक्रेट्री यूसुफ नसीम खोकर और अमेरिकी राजदूत डोनाल्ड ब्लूम के हस्ताक्षर दिखाए गए है। जियो फैक्ट चेक ने पूरे पत्र को फर्जी बताया है।

सूरत नगर निगम ने बनाया शेल्टर होम, शाहिद मसीद सोसायटी को दिया चलाने: हिंदू को प्रताड़ना-मुस्लिमों पर कृपा, जाँच के बाद ब्लैक लिस्टेड

गुजरात के सूरत में शेल्टर होम का प्रबंध करने वाली ट्रस्ट पर धर्म के आधार पर भेदभाव करने का आरोप लगा है। स्थानीय पार्षद ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है। आरोपों के अनुसार शहर के रांदेर के गोराट इलाके में संचालित शेल्टर होम में रहने वाले हिंदू आश्रितों को परेशान किया जा रहा है, जबकि मुस्लिमों को खास सुविधाएँ दी जा रही हैं। आश्रय गृह सूरत नगर निगम (SMC) के दायरे में आता है। लेकिन इसे चलाने की जिम्मेदारी शाहिद मसीद मेडिकल सर्वेंट सोसायटी नाम के ट्रस्ट को दी गई थी। भेदभाव समेत कई अनियमितताओं की वजह से ट्रस्ट को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है।

बीजेपी के पार्षद केयूर चपटवाला ने सूरत के मेयर हेमाली बोघावाला से ट्रस्ट की शिकायत की थी। शिकायत मिलने के बाद मेयर खुद शेल्टर होम का दौरा करने पहुँचीं। शेल्टर होम में मेयर के अचानक दौरे से हड़कंप मच गया। मेयर द्वारा किए गए निरीक्षण में शेल्टर होम में कई अनियमितताएँ पाई गईं। मेयर ने जाँच के दौरान पाया कि आश्रय गृह परिसर का ठीक से रखरखाव नहीं किया जा रहा है। इतना ही नहीं शेल्टर होम चलाने वाले ट्रस्ट द्वारा बिजली बिलों का भी भुगतान नहीं किया गया था।

औचक निरीक्षण के दौरान जब मेयर हेमाली बोघावाला ने शेल्टर होम में रहने वाले आश्रितों की सूची माँगी तो कर्मचारियों के हाथ-पैर फूलने लगे। ट्रस्ट ने दावा किया कि यहाँ 300 लोग रहते हैं, जबकि जाँच में सिर्फ 100 लोग ही मिले। हेमाली बोघावाला ने पार्षद की शिकायत पर की गई जाँच में आरोपों को सही पाए जाने के बाद शाहिद मसीद मेडिकल सर्वेंट सोसाइटी को ब्लैकलिस्ट करने के आदेश दिए।

शाहिद मसीद मेडिकल सर्वेंट सोसायटी पिछले दो वर्षों से इस शेल्टर होम के प्रबंधन की जिम्मेदारी सँभाल रहा था। इस दौरान अनियमितताओं को लेकर कई बार संगठन को नोटिस भी भेजे जा चुके थे। कुछ दिन पहले ही शिकायत आई थी कि परिसर में एक व्यक्ति को बुरी तरह पीटा गया। पिटाई से जख्मी शख्स को इलाज के लिए सूरत के सिविल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। पार्षद केयूर चपटवाला द्वारा की गई शिकायत के अनुसार शेल्टर होम में हिंदुओं को न सिर्फ प्रताड़ित किया जा रहा है, बल्कि उनको शेल्टर होम छोड़कर जाने के लिए बाध्य भी किया जाता है।

बता दें कि सूरत महानगर पालिका की ओर से शहर के अलग-अलग हिस्सों में गरीब और निराश्रित लोगों के लिए शेल्टर होम का निर्माण कराया गया है। इसे चलाने की जिम्मेदारी अलग-अलग संस्था व ट्रस्ट के लोगों को दी जाती है।

NDMC की बैठक में ‘ढोंगी राजा’ की कहानी, चलते बने अरविंद केजरीवाल: CM बंगले पर ₹45 करोड़ खर्च का नहीं दे पाए जवाब, पिछली बार स्कूलों पर सवाल से थे भागे

NDMC काउंसिल की बैठक में बुधवार (11 मई 2023) को जमकर हंगामा हुआ और यह बैठक 30 मिनट में ही खत्म करनी पड़ी। NDMC के उपाध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा कि कुलजीत चहल और अन्य लोगों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से शीशमहल के मुद्दे पर सवाल पूछे, लेकिन वे जवाब नहीं दे पाए।

अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में दिल्ली की एनडीएमसी की बैठक के दौरान भाजपा सदस्यों ने सीएम आवास के नवीनीकरण में अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। भाजपा ने इसमें दिल्ली सरकार पर भ्रष्टाचार और करदाताओं के पैसे के दुरुपयोग का आरोप लगाया। बताते चलें कि अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली से विधायक हैं। इसलिए नियमों के मुताबिक, वे नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) के स्वाभाविक सदस्य भी हैं।

बैठक के दौरान भाजपा नेता और NDMC सदस्य कुलजीत चहल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा और उन्हें एक ढोंगी राजा की कहानी सुनाई, जिसने दिल्ली की जनता को बेवकूफ बनाया। चहल ने कहा कि केजरीवाल ने कहा था कि गाड़ी और बंगला नहीं लेंगे, लेकिन करदाताओं के पैसे बंगला बनवाया। बिना इजाजत के केजरीवाल के घर पर पेड़ काटे गए।

कुलदीप चहल ने आगे कहा कि अरविंद केजरीवाल घूर-घूरकर देख रहे थे। एनडीएमसी के इतिहास में पहली बार बैठक अव्यवस्थित रही। चहल ने आगे कहा कि काउंसिल मीटिंग के दौरान उन्होंने केजरीवाल को ढोंगी राजा की कहानी सुनाई थी, जिस पर वो कहने लगे की मीटिंग को आगे बढ़ाओ। सीएम के चेहरे पर डर दिख रहा था।

इसका एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में दिख रहा है कि कुलदीप चहल कह रहे हैं, “केजरीवाल जी एक कहानी मैंने भी आपकी सुनी। एक कहानी मैं भी आपको सुनाना चाहता हूँ। एक ढोंगी राजा था। उस ढोंगी राजा ने….. (इस दौरान बैकग्राउंड में शोरगुल होने लगता है।” इस दौरान भाजपा के सदस्य सीएम केजरीवाल से जवाब माँगते रहे, लेकिन वे चुप रहे।

दरअसल, अरविंद केजरीवाल ने पिछले महीने एक अनपढ़ राजा की कहानी सुनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि पढ़ा-लिखा शासक ही देश को तरक्की की राह पर ले जा सकता है। अनपढ़ शासक से देश का सिर्फ नुकसान हो सकता है। अगर शासक अनपढ़ है और उसका कोई दोस्त है तो उस राजा को उखाड़ फेंकना चाहिए।

अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में कहा था, “किसी समय एक महान देश में चौथी पास राजा था। वह बहुत अहंकारी और भ्रष्टाचारी था। कुछ लोगों के कहने पर ही राजा फैसले लेता था। राजा ने अपने दोस्त के साथ मिलकर बैंकों का दो-ढाई लाख करोड़ लूट लिया और एयरपोर्ट, बिजली, तेल, खदान सब खरीद लिया। देश में पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस सब महंगा होने से चारों तरफ हाहाकार मच गया। राजा ने विरोध करने वालों को जेल में डालना शुरू कर दिया।”

उन्होंने आगे कहा था, “आखिर में जनता को राजा की हकीकत पता चल गई और उसने उसे हटाकर एक ईमानदार देशभक्त आदमी को राजा बना दिया। देश खूब तरक्की करने लगा। राजा को कम पढ़ा होने पर बुरा लगने लगा और उसने एक फर्जी डिग्री बनवा ली। लोगों को यह बात ठीक नहीं लगी कि राजा ने फर्जी डिग्री बनवा ली और उन्होंने आरटीआई डाली, मगर आरटीआई डालने वालों पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया जाता था।”

दरअसल, इस अरविंद केजरीवाल की इस कहानी पर ही कटाक्ष करते हुए भाजपा नेता कुलदीप चहल ने अरविंद केजरीवाल को ढोंगी राजा की कहानी सुनाई। कहानी सुनते ही वो असहज हो गए और 30 मिनट में ही बैठक खत्म हो गई। इससे पहले साल 2022 में NDMC की बैठक में दिल्ली के सरकारी स्कूलों पर खर्च की गई राशि के बारे में पूछा गया था तो अरविंद केजरीवाल बैठक से बाहर निकल गए थे।

उस दौरान कुलदीप चहल ने सीएम केजरीवाल से पूछा था, “एक आरटीआई कहती है कि आपके विधायक निधि को खर्च नहीं किया गया। कृपया उत्तर दें अरविंद केजरीवाल जी। आरटीआई में कहा गया है कि पिछले सात सालों से एनडीएमसी इलाकों में स्कूली बच्चों के लिए कोई काम नहीं किया गया है।” इस पर जवाब देने के बजाय वे बैठक छोड़कर निकल गए थे।

बताते चलें कि अरविंद केजरीवाल ने अपने सरकारी बंगले के सौंदर्यीकरण में 45 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए हैं। इसका खुलासा टाइम्स नाऊ चैनल ने ‘शीशमहल’ नाम के अपने कार्यक्रम में किया था। सीएम केजरीवाल ने अपने घरों में लाखों रुपए के पर्दों से लेकर बाथरूम तक में करोड़ों रुपए खर्च किए हैं। इसको लेकर वे विपक्षी दलों के निशाने पर है।

पहली बार मुख्यमंत्री बनने पर अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि वे आम लोग हैं। इसलिए वे सरकार से ना ही गाड़ी लेंगे और ना ही बंगला लेंगे। हालाँकि, बाद में उन्होंने सारी सुविधाएँ लीं और उन सुविधाओं को और बढ़ाने के लिए 45 करोड़ रुपए का हिसाब पैसा खर्च किया। इसी को लेकर भाजपा नेताओं ने उन्हें ढोंगी राजा की उपाधि से नवाजते हुए कहानी सुना डाली।

‘तू नाम की मुस्लिम, अपने नाम से अली हटा’: सारा अली खान को केदारनाथ में देख फिर भड़के इस्लामी कट्टरपंथी, बोले- अल्लाह से बड़ा कोई नहीं

बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान (Sara Ali Khan) एक बार फिर बाबा केदारनाथ के दर्शन करने पहुँची हैं। उन्होंने बुधवार (10 मई 2023) को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर केदारनाथ ट्रिप की कुछ तस्वीरें भी शेयर कीं। इसमें एक्ट्रेस बाबा के धाम के आगे और बर्फीली वादियों में कैमरे के सामने पोज देती नजर आ रही हैं। जहाँ कुछ लोगों को उनकी ये तस्वीरें पसंद आ रही हैं। वहीं, इस्लामी कट्टरपंथियों ने उन्हें खरी-खोटी सुनाई है।

सारा अली खान ने इंस्टाग्राम पर अपनी फोटोज के साथ दिल छू लेने वाला कैप्शन भी लिखा है। सारा ने लिखा, “पहली बार जब मैं यहाँ आई थी, तो मैंने कभी कैमरे का सामना नहीं किया था। आज मैं कैमरे के बिना अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकती। धन्यवाद, केदारनाथ बाबा आज मैं जो हूँ, मुझे वो बनाने के लिए। मुझे वो सब देने के लिए धन्यवाद जो मेरे पास है।”

सारा आगे लिखती हैं, “बहुत कम लोग भाग्यशाली होते हैं, जो आपके पास आते हैं। मैं आभार और सराहना से भरी हुई हूँ। मैं सिर्फ आपको धन्यवाद देने के लिए वापस आ सकती हूँ। जय भोलेनाथ।”

एक्ट्रेस की पोस्ट पर भड़के रहमान ने लिखा कि कभी मस्जिद के भी दर्शन भी कर लिया करो।

सारा अली खान की इंस्टाग्राम पोस्ट

मोहम्मद बहाउद्दीन लिखता है, “सारा को अपने नाम से अली हटा देना चाहिए… क्योंकि वह सनातन धर्म का पालन कर रही हैं… अली नाम ऐसे के साथ नहीं लिखा जाता है… वह अपना नाम सारा खान या सारा राधा खान..या सारा देवी.. या सारा रानी रख सकती हैं। उन्हें अपने नाम के साथ अली नहीं लगाना चाहिए… खान वह अपने अब्बा के सरनेम की वजह से लगा सकती हैं।”

सारा अली खान की इंस्टाग्राम पोस्ट

सोहराब अली ने सारा की पोस्ट पर कमेन्ट किया, “कुरान भी पढ़ लिया करो, अल्लाह से बड़ा कोई नहीं….।”

सारा अली खान की इंस्टाग्राम पोस्ट

उमेर खान लिखता है, “तू नाम की मुस्लिम है।”

सारा अली खान की इंस्टाग्राम पोस्ट

सुशांत सिंह राजपूत की याद आई

वहीं, सारा की इन फोटोज को देखकर कुछ लोगों को बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की याद आ गई। क्योंकि सारा अली खान और सुशांत सिंह ने ‘केदारनाथ’ फिल्म में एक साथ काम किया था। यह फिल्म दिसंबर 2018 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म की ज्यादातर शूटिंग केदारनाथ में ही हुई थी।

बता दें कि इससे पहले फरवरी 2023 में सैफ अली खान की बेटी ने महाशिवरात्रि के अवसर पर इंस्टाग्राम पर कुछ फोटोज अपलोड की थीं। इसको लेकर कट्टरपंथियों ने उन्हें गालियाँ दी थीं और काफिर बताया था।

दिल्ली का बॉस कौन, सुप्रीम कोर्ट ने खींच दी लकीर: पुलिस-कानून व्यवस्था-जमीन केंद्र की, ट्रांसफर-पोस्टिंग सहित बाकी सब NCT सरकार की

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की प्रशासनिक सेवाओं पर नियंत्रण के अधिकार के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने आज (11 मई 2023) अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की प्रशासनिक सेवाओं पर दिल्ली में चुनी गई सरकार का अधिकार होगा। इसके अलावा अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर से जुड़े निर्णय भी दिल्ली सरकार कर पाएगी। वहीं केंद्र का अधिकार दिल्ली में व्यवस्था, पुलिस और जमीन से जुड़े मामलों में रहेगा।

दिल्ली की आम आदमी पार्टी और एलजी विनय कुमार सक्सेना के बीच चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एमआर शाह, जस्टिस कृष्णा मुरारी, जस्टिस हीमा कोहली और जस्टिस पीएमस नरसिम्हा ने सर्वसम्मति से अपना फैसला सुनाया।

पीठ ने कहा राज्य के पास भी शक्ति है, लेकिन राज्य की कार्यकारी शक्ति, संघ के मौजूदा कानून के अधीन होगी। कोर्ट ने कहा कि वो साल 2019 के जस्टिस भूषण के फैसले से सहमत नहीं है। प्रशासन चलाने की असल शक्ति निर्वाचित सरकार के पास होनी चाहिए। अगर संवैधानिक रूप से चुनी गई सरकार को ये अधिकार नहीं मिलते तो जवाबदेही के लिए ट्रिपल चेन का सिद्धांत निरर्थक हो जाएगा।

अदालत ने यह भी कहा कि अगर अधिकारी मंत्रियों को रिपोर्ट करना बंद कर देते हैं या उनके निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो सामूहिक जिम्मेदारी का सिद्धांत प्रभावित होता है। अधिकारियों को लगता है कि वे सरकार के नियंत्रण से अछूते हैं, जो जवाबदेही को कम करेगा और शासन को प्रभावित करेगा।

इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा दिल्ली में पब्लिक ऑर्डर, पुलिस और लैंड पॉवर एलजी के पास ही रहेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि दिल्ली अन्य केंद्रशासित प्रदेशों जैसा प्रदेश नहीं है। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली विधानसभा के पास भूमि, लोक व्यवस्था और पुलिस को छोड़कर सूची 2 में सभी विषयों पर कानून बनाने की शक्ति है।

बता दें कि दिल्ली सरकार और केंद्र के बी कामकाज के अधिकार को लेकर विवाद पुराना है। इस संबंध में एक फैसला 4 जुलाई 2018 को भी आया ता। हालाँकि सर्विसेज और अधिकारियों पर नियंत्रण जैसे मुद्दों को आगे की सुनवाई पर छोड़ दिया गया था। इसके बाद राजधानी दिल्ली में प्रशासनिक सेवाएँ के नियंत्रण का अधिकार किसके पास रहेगा इस पर एक फैसला साल 2019 में आया। लेकिन तब पीठ के दोनों जजों के मत अलग-अलग थे। आगे यह मामला मुख्य न्यायाधीश को रेफर किया गया ताकि तीन जजों की बेंच गठित हो सके। अंत में यह मामला पाँच जजों की पीठ ने सुना और 18 जनवरी 2023 को फैसला सुरक्षित रख लिया।

शिवसेना का झगड़ा अब सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों वाली बेंच के हवाले, कहा- उद्धव ठाकरे ने खुद दिया इस्तीफा, इसलिए नहीं बहाल हो सकती उनकी सरकार

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट की विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (11 मई 2023) को मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया। वर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत 16 विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बगावत कर दिया था। इससे वहाँ की महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार गिर गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने इस मामले को 7 जजों की बेंच के पास भेज दिया है। इस पीठ में जस्टिस एमआर शाह, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा शामिल रहे। मामला बड़ी बेंच को भेजे जाने के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित बगावत करने वाले 16 विधायकों पर फैसला फिलहाल टल गया है। सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच इन विधायकों की अयोग्यता के मामले में फैसला सुनाएगी।

उद्धव ठाकरे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, देवदत्त कामत और अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी पेश हुए। वहीं, एकनाथ शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल, हरीश साल्वे, महेश जेठमलानी और अभिकल्प प्रताप सिंह शामिल हुए। 17 फरवरी 2023 को शुरू हुई इस मामले की सुनवाई में राज्यपाल कार्यालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह उद्धव सरकार की बहाली का आदेश नहीं दे सकता, क्योंकि उन्होंने फ्लोर टेस्ट का सामना किए बिना इस्तीफा दे दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे ने इस्तीफा नहीं दिया होता तो यथास्थिति बहाल हो सकती थी। दरअसल, उद्धव ठाकरे के वकीलों ने राज्य में पुरानी सरकार बहाल करने की माँग सुप्रीम कोर्ट से की। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पार्टी के आंतरिक विवाद में फ्लोर टेस्ट का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि फ्लोर टेस्ट के लिए राज्यपाल का फैसला गलत था और एकनाथ शिंदे समूह के व्हिप की नियुक्ति में भी स्पीकर गलत थे। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि महाराष्ट्र के राज्यपाल ने संविधान के अनुरूप काम नहीं किया था। राज्यपाल को बगावत करने वाले गुट के पत्र पर भरोसा नहीं करना चाहिए था। पत्र में यह संकेत नहीं था कि उद्धव ठाकरे ने समर्थन खो दिया है।

दरअसल, महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सरकार के 16 विधायकों ने बगावत कर दिया था। उस दौरान एकनाथ शिंदे ने एक पत्र जारी कर कहा था कि उनके पास 35 विधायकों का समर्थन है। इसके बाद डिप्टी स्पीकर ने सभी 16 बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने का नोटिस दिया, लेकिन बागियों ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया और उन्हें वहाँ से राहत मिल गई।

इसके बाद 28 जून 2022 को राज्यपाल ने उद्धव ठाकरे को बहुमत साबित करने के लिए कहा। उद्धव ठाकरे गुट ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रूख किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 30 जून को भाजपा के सहयोग से एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री बने। विधानसभा में नए स्पीकर ने शिंदे गुट को सदन में मान्यता दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई तक इस मामले में चुनाव आयोग को भी किसी तरह का निर्णय लेने से रोक दिया था।

हिरोइन तो हिरोइन, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का स्पेशल असिस्टेंट भी निकला जमूरा: कहा- RSS के कहने पर हिंसा, भारत में बँटी मिठाइयाँ

एक होते हैं नागरिक। एक होते हैं सठियाए नागरिक। पाकिस्तान (Pakistan) क्यों बर्बाद मुल्क है, इसका पता आप वहाँ के सठियाए लोगों के बयानों से भी लगा सकते हैं। अब ये सठियाए पाकिस्तानी अपने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी (Imran Khan arrested) के बाद भड़की हिंसा का तोहमत भारत पर मढ़ने में लगे हैं।

इसमें पाकिस्तानी हिरोइन से लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) के स्पेशल असिस्टेंट तक शामिल हैं। हिरोइन सहर शिनवारी (Sehar shinwari) ने इस हिंसा के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय एजेंसी राॅ पर एफआईआर की तमन्ना जताई थी। अब शरीफ के स्पेशल असिस्टेंट अत्ता तरार (Atta Tarar) ने भी इस हिंसा का जिम्मेदार भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को बताया है।

तरार ने बुधवार (10 मई 2023) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “जो लोग तोड़फोड़ और आगजनी कर रहे हैं, वे भारत से आरएसएस और बीजेपी द्वारा भेजे गए लोग हैं। पाकिस्तान में RSS के लोग सक्रिय है, जो ये सब करके देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “ये मुट्ठी भर लोग भाजपा और आरएसएस से संबंधित हैं। कल जो घटना (पीटीआई समर्थकों की हिंसा) हुई, वह आरएसएस के कहने पर हुई। भारत में भाजपा और आरएसएस ने इसका जश्न मनाया। भारत में मिठाइयाँ भी बाँटी गई हैं।”

तरार ने दावा किया, “इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद बड़ी संख्या में लोग उनके समर्थन में नहीं आए। लगभग 50 लोगों के केवल कुछ छोटे समूह थे, जिन्होंने यह जताया है कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थानों के खिलाफ देश के अंदर और बाहर एक अभियान शुरू कर रहे हैं। इन लोगों की पहचान कर ली गई है। उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। सब पर आतंकवाद का मामला दर्ज होगा। उन्हें कोई नौकरी या वीजा भी नहीं मिलेगा। इसके साथ ही इन लोगों को करैक्टर सर्टिफिकेट भी जारी नहीं किया जाएगा।”

बता दें कि इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने बुधवार (10 मई 2023) को पूरे पाकिस्तान में बंद और प्रदर्शन का ऐलान किया था। इसको देखते हुए लगभग पूरे पाकिस्तान में इंटरनेट सेवा को बंद कर दी गई थी। लाहौर, पेशावर, क्वेटा, कराची और रावलपिंडी सहित कई जगहों पर हिंसा की खबरें भी सामने आईं। इस दौरान कई लोगों के मारे जाने और दर्जनों के घायल होने की बात भी सामने आई है। वहीं, बड़े पैमाने पर वाहनों और संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया।

बम फेंका और सराय में जाकर सो गए: SGPC ने जारी किया CCTV फुटेज, गोल्डन टेंपल के पास तीसरे धमाके के बाद 5 गिरफ्तार

पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर (Golden Temple Amritsar) के पास बुधवार (10 मई 2023) देर रात धमाका हुआ। 5 दिनों के भीतर इस इलाके में हुआ यह तीसरा विस्फोट है। पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार कर इन धमाकों की गुत्थी सुलझा लेने का दावा किया है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (SGPC) ने सीसीटीवी फुटेज जारी कर बताया है कि बम फेंकने के बाद संदिग्ध एक सराय में जाकर सो गए थे। प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एचएस धामी ने इन धमाकों को पंजाब सरकार की नाकामी बताया है।

न्यूज एजेंसी एएनआई ने पंजाब पुलिस के सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमृतसर विस्फोट की साजिश रचने वाले 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनका मकसद शांति भंग करना था। ब्लास्ट के लिए पटाखों वाला विस्फोटक इस्तेमाल किया गया था। गिरफ्तार लोगों में एक नवविवाहित जोड़ा भी बताया जा रहा है। यह जोड़ा गुरदासपुर का रहने वाला है। ये श्री गुरु राम दास सराय के कमरा नंबर 225 में ठहरे हुए थे।

बताया जा रहा है कि रात के 12:12 श्री गुरु राम दास सराय के टॉयलेट से विस्फोटक बाहर फेंका गया था, जिससे जोरदार धमाका हुआ। आसपास के दुकानदारों ने तत्काल इसके बारे में पुलिस को सूचित किया। इस बीच एसजीपीसी के कर्मचारियों को एक आदमी टाॅयलेट में जाता और बाहर निकलता दिखाई पड़ा। सीसीटीवी से ट्रेस कर उसे पकड़ा गया और पुलिस के हवाले कर दिया गया। इस बीच वह सराय में जाकर लेट चुका था। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुरुआती पूछताछ में ही नवविवाहित जोड़े ने धमाकों को लेकर सारा मामला साफ कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उनके तीन अन्य साथियों को गिरफ्तार किया।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एचएस धामी ने ​इसे पंजाब सरकार की नाकामी बताते हुए कहा है कि पहले हुए दो विस्फोट की जाँच को लेकर राज्य सरकार ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। अगर उन्होंने मामले को गंभीरता से लेकर जाँच को होती तो इसका असर दिखाई देता। उन्होंने कहा, “रात को एक बार फिर हृदय विदारक घटना हुई, जिसने हम सभी को सचेत कर दिया है। मैं मौजूदा सरकार से कहना चाहता हूँ कि अगर आप इस पवित्र स्थल की रक्षा करने में नाकाम हैं, तो किसी और मौका दें। हम अपनी खुद की टास्क फोर्स को मजबूत करेंगे। हम पुलिस से इस मामले की गहन जाँच का अनुरोध करते हैं।”

बता दें कि स्वर्ण मंदिर के पास सबसे पहले 6 मई 2023 को अमृतसर के हेरिटेज स्ट्रीट में ब्लास्ट हुआ था। इस धमाके में करीब 6 लोग घायल हुए थे। शुरुआत में इसे रेस्टोरेंट की चिमनी में हुआ ब्लास्ट बताया जा रहा था, लेकिन बाद में घटनास्थल से कुछ संदिग्ध चीजें बरामद हुई थी। इसके बाद 8 मई 2023 को स्वर्ण मंदिर से लगभग 800 मीटर दूर एक और ब्लास्ट हुआ। इस बार कोल्ड ड्रिंक के कैन में बम डालकर उसे लटका दिया गया था।

दिल्ली में कुत्तों के आतंक का इलाज खोजने को सेमिनार, ‘पशु प्रेम’ के नाम पर मानवों में झूमाझटकी: योगिता भयाना की थप्पड़बाजी का Video वायरल

दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब (Constitution Club of India) में बुधवार (10 मई 2023) को एक सेमिनार का आयोजन किया गया था। विषय था- कुत्तों के काटने का आतंक, समाधान क्या। पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल की तरफ से आयोजित विचार गोष्ठी में इस आतंक का समाधान क्या मिला, यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन यह गोष्ठी ‘पशु प्रेम’ के नाम पर हुई झूमाझटकी और थप्पड़बाजी का एक वीडियो वायरल होने के बाद से चर्चा में बनी हुई है।

वायरल वीडियो में दो महिलाओं को थप्पड़ का आदान प्रदान करते हुए देखा जा सकता है। इनमें से एक एनिमल एक्टिविस्ट योगिता भयाना है। वीडियो में देख सकते हैं कि धक्का-मुक्की के बीच योगिता एक महिला को थप्पड़ मारती है, जवाब में वह महिला भी उन्हें तमाचा खींच देती है।

मानवों के बीच हुए इस थप्पड़कांड की शुरुआत योगिता भयाना के नारेबाजी करते हुए अचानक मंच पर चढ़ने से हुआ। उन्हें और अन्य एक्टिविस्टों को जब सेमिनार में मौजूद लोगों तथा पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो हाथापाई और गाली-गलौच शुरू हो गई। योगिता भयाना ने दावा किया है कि कार्यक्रम के आयोजकों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने आरोप लगाया, “हम अपने मन की बात कहना चाहते थे। हमें मंच देने के बजाय उन्होंने हमें पीटना शुरू कर दिया।”

विजय गोयल ने भी अपने ट्विटर हैंडल से एक वीडियो साझा कर इस हंगामे के बारे में बताया है। उन्होंने कहा है, “बुधवार को हमने आवारा कुत्तों के काटने की समस्या पर कांस्टीट्यूशन क्लब में मीटिंग रखी थी। इस बैठक में पूरी दिल्ली के आरडब्ल्यूएस प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यह बैठक तीन घंटे तक चली। इसमें आए सभी लोगों ने अपने-अपने विचार और आवारा कुत्तों के काटने की समस्या का समाधान बताया। जब हमारी मीटिंग हो रही थी, उसी के बराबर में मेनका गाँधी के नाम पर एक और मीटिंग रख ली गई। पता नहीं मेनका गाँधी को बदनाम करने के लिए या फिर उन्होंने ही यह मी​टिंग रखवाई। उन लोगों ने हमारी मीटिंग में आकर हंगामा किया। इस दौरान वो लोग कह रहे थे कि हम मीटिंग नहीं होने देंगे।”

गोयल ने कहा है कि देश भर में 6 करोड़ 40 लाख कुत्ते हैं। केवल दिल्ली के अंदर 6 लाख कुत्ते हैं, जो कहीं भी गली, मोहल्ले और बाग में लोगों को काट रहे हैं। इसलिए लोग इनसे बहुत परेशान हैं। उन्होंने हाथों में डंडा लेकर चलना शुरू कर दिया है। कुत्तों को लोग नफरत की निगाह से न देखें, सम्मान की निगाह से देखें। इसके लिए जरूरी है कि हम कुछ कदम उठाएँ। लेकिन उन लोगों ने हंगामा किया। बावजूद मीटिंग सफलतापूर्वक सम्पन हुई। हंगामे करने वाले लोगों को बाहर कर दिया गया। मीटिंग में दिल्ली नगर निगम द्वारा ज्यादा से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी करने और सभी की गणना की करने की बात तय हुई। साथ ही सभी कुत्तों को रैबीज का टीका लगाना होगा और बेसहारा कुत्तों को गोद लेने की राष्ट्रीय नीति बनानी होगी।

बता दें कि हाल में दिल्ली-एनसीआर में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक पर कुत्तों के हमलों के कई मामले सामने आए हैं। मार्च 2023 में दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में दो भाइयों को आवारा कुत्तों ने नोच-नोचकर मार डाला था। इनमें एक भाई की उम्र 7 साल थी और दूसरे की महज 5 साल थी। वहीं दिल्ली से सटे गाजियाबाद में 2022 में एक साल की बच्ची रिया पर आवारा कुत्ते ने बेरहमी से हमला कर दिया था। कुत्ते के हमले में बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई थी। 36 घंटे तक चले ऑपरेशन में पीड़िता को 115 टाँके लगे थे।

50 बच्चों में अकेला इंडियन और बाकी खिलाफ… NSA के बेटे ने सुनाया पाकिस्तान में पढ़ाई का किस्सा, कहा- ऐसे में राष्ट्रवाद खुद ही पैदा हो जाता है

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल (NSA Ajit Doval) के पाकिस्तान में काम करने से जुड़े कई किस्से हैं। लेकिन शायद कम ही लोगों को पता हो कि उनके बेटे शौर्य डोभाल (Shaurya Doval) ने पाकिस्तान में पढ़ाई भी की है। शौर्य ने 1981 से 1987 के बीच करीब छह साल पाकिस्तानी स्कूलों में पढ़ाई की है। उस समय उनके पिता इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास में तैनात थे।

शौर्य ने पाकिस्तानी स्कूलों में पढ़ाई का यह किस्सा लल्लनटॉप को दिए एक इंटरव्यू में सुनाया है। एक सवाल का जवाब देते हुए शौर्य ने बताया कि उनकी पढ़ाई देशभर में हुई है। मिजोरम से पढ़ाई शुरू हुई। इसके बाद कुछ समय सिक्किम में पढ़ाई की। फिर पाकिस्तान में। शौर्य ने बताया कि वे करीब 6-7 साल पाकिस्तान के इस्लामाबाद में रहे थे। जब उस समय सुरक्षा के हालात को लेकर उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उस समय अफगानिस्तान का क्राइसिस चल रहा था। पाकिस्तान का पूरा फोकस उधर था। पंजाब का संकट शुरू नहीं हुआ था। इसलिए पाकिस्तान में भारतीय राजनयिक और उनके परिवारों के लिए वैसा सुरक्षा खतरा नहीं था।

जब उनसे कहा गया कि पाकिस्तान में पढ़ाई करना अलग बात है तो शौर्य ने कहा कि यह कुछ ऐसा ही था जैसे आप देश के दूसरे हिस्सों में बड़े होते हैं, पढ़ते हैं। हाँ, केवल एक अंतर था कि 50 बच्चों में मैं अकेला इंडियन था और बाकी खिलाफ। ऐसे में आप जीवन में दो चीजें सीखते हैं। पहला, अपने देश से प्रेम करना। दूसरा, अकेले लड़ना। उन्होंने आगे कहा, “जैसे एक क्रिकेट मैच हो रहा है और 49 लड़के एक तरफ हैं, आप अकेले दूसरी तरफ तो फिर आपमें राष्ट्रवाद खुद ही पैदा हो जाता है। आपमें अकेले लड़ने की क्षमता खुद ही आ जाती है।”

इस दौरान शौर्य से पाकिस्तान के स्कूलों में इतिहास की पढ़ाई को लेकर भी सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि उस समय उम्र कम होने की वजह से उन्हें इन चीजों की वैसी समझ नहीं थी। लेकिन वहाँ के बच्चों को चीजें अलग तरह से दिखाई जाती है। उनका इतिहास 1947 से शुरू होता। उससे पहले की हर चीज को वे नजरंदाज कर देते हैं। यदि थोड़ा बहुत पढ़ाते भी हैं तो इस तरह से जिससे मुस्लिामें को हिंदुओं पर सुपर दिखाया जा सके।

उन्होंने कहा, “उनमें एक गलत धारणा होती है कि 1947 के पहले वे हिंदुस्तान के हुक्मरान थे और 47 के बाद उन्होंने नई कंट्री बना ली और अब उसके हुक्मरान हैं। पाकिस्तानियों की हिस्ट्री सिंध में मोहम्मद बिन कासिम के आने के बाद शुरू होती है और इसे वह पाकिस्तान की हिस्ट्री मानते हैं। सिंधु घाटी सभ्यता में भी वे हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के बारे में ही पढ़ते हैं और उसके बाद सीधे कासिम पर आ जाते हैं। गुप्त, मौर्य काल की कोई बात नहीं होती है। चोल वगैरह के बारे में तो उनका इंट्रेस्ट ही नहीं है।”

पाकिस्तान में इतिहास की ऐसी पढ़ाई को लेकर टिप्पणी करते हुए शौर्य ने कहा, “कहा गया है न कि अगर आप अनपढ़ हैं तो उसकी कीमत आपको चुकानी पड़ती है।” उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान में उनके कुछ दोस्त भी बने थे। लेकिन आज उनसे कोई संपर्क नहीं है। उन्होंने कहा, “भारत लौटने के बाद उनसे संपर्क खत्म हो गया, क्योंकि उस समय इंटरनेट जैसा कोई माध्यम नहीं था।”