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ग्रेजुएशन करने काॅलेज गई हिंदू लड़की, मुस्लिम दोस्त पढ़ाने लगे ‘इस्लामी पाठ’: केरल की श्रुति से सुनिए कैसे वह बनी रहमत

फिल्म द केरल स्टोरी (The Kerala Story) 5 मई 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस फिल्म की रिलीज रुकवाने को लेकर काॅन्ग्रेसी और वामपंथी गैंग ने तमाम हथकंडे अपनाए हैं। फिल्म को प्रोपेगेंडा बताकर खारिज करने की कोशिश की है। लेकिन इस फिल्म ने केरल की उन तमाम लड़कियों की कहानियों को चर्चा में ला दिया है, जिनका सुनियोजित तरीके से इस्लामी धर्मांतरण किया गया। कई को आतंकी संगठन आईएसआईएस में सेक्स स्लेव बना दिया गया।

केरल में चल रहे ‘कन्वर्जन फैक्ट्री’ का सच जानने के लिए ABP न्यूज ने कई पीड़िताओं से बात की है। इनमें से एक लड़की श्रुति भी है। वह कॉलेज पढ़ने के लिए गई थी। लेकिन वहाँ मुस्लिम साथियों ने उसका ब्रेन वॉश कर धर्म परिवर्तन करवा दिया। फिर वह रहमत के नाम से जानी जाने लगी। केरल के कासरगोड की रहने वाली श्रुति का कहना है कि फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के ट्रेलर में जो कुछ दिखाया गया है, वह सही है।

ABP न्यूज को श्रुति ने बताया, “इसमें (द केरल स्टोरी) लड़कियाँ जो कुछ बोल रही हैं, वो सब सही है। 10 साल पहले मेरा भी ब्रेन वॉश किया गया, जिसके चलते मैंने अपना धर्म बदल लिया था। मैं एक ब्राह्मण परिवार में पैदा हुई। ग्रेजुएशन में ज्यादातर क्लासमेट मुस्लिम थे। उन लोगों से मैं इस्लाम को लेकर प्रभावित हो गई। वो मुझसे अपने मजहब के बारे में ज्यादा से ज्यादा बात करते थे। उन्होंने मेरे हिंदू धर्म पर सवाल भी खड़े किए। उन सवालों का जवाब मुझे मालूम नहीं होता था। मैं टीवी पर ओम नम: शिवाय और जय हनुमान जैसे सीरियल से कुछ-कुछ जानती थी। लेकिन उन लोगों के इतने सवाल थे कि मैं सबके जवाब नहीं दे सकती थी। इस चीज का मेरे क्लास के लोगों ने फायदा उठाया।”

श्रुति ने बताया कि मुस्लिम दोस्त हिंदू धर्म का मजाक उड़ाते थे। वे कहते थे कि हिंदू त्योहार ऐसे होते हैं जैसे लड़के और लड़की के मिलने के लिए हो रहा है। मंदिर में त्योहार मनाया जाता है, जहाँ पुरुष महिलाओं का फायदा उठाते हैं। बॉडी टच को त्योहार से वे लोग जोड़ते थे। गलत तरीके से हिंदू धर्म की व्याख्या करते थे। ऐसे में कई सवाल उठने लगे थे कि क्या सच में ऐसा है?

उसने बताया कि मुस्लिम दोस्त उससे कहते थे कि इस्लाम में ऐसा नहीं होता। लड़के और लड़कियों को अलग-अलग बैठाया जाता है। वे पर्दा प्रथा को लड़कियों की सुरक्षा की गारंटी बताते थे। अपने मजहब को सर्वोपरि रखते थे। उनके मुताबिक, इस्लाम ही सही विचारधारा है। वे अपनी बात को इस तरह से बताते थे कि सुनने वाले को भी यही लगता था कि ये सही बात है। बता दें कि फिल्म में भी शालिनी नाम की लड़की की कहानी दिखाई गई है, जो अपने दोस्तों से प्रभावित होकर इस्लाम कबूल कर लेती है।

करोड़पति घराना, MBA की डिग्री, सोलह श्रृंगार… सब त्यागकर ‘साध्वी’ बनीं MP की सलोनी भंडारी: हजारों लोगों के बीच ली जैन मुनि की दीक्षा, अंतिम बार भाई को राखी बाँधी

मध्य प्रदेश के उज्जैन में 25 साल की सलोनी भंडारी (Saloni Bhandari) सभी सुखों को त्यागकर साध्वी बन गई हैं। उन्होंने बुधवार (4 मई 2023) को दीक्षा ग्रहण की। अब सलोनी भंडारी जैन साध्वी हैं। उनका नाम साध्वी श्री मल्लि दर्शना श्रीजी मसा रखा गया है। दीक्षा ग्रहण समारोह में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए थे। अब सलोनी का उनके परिवार वालों से कोई रिश्ता नहीं रहेगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सलोनी भंडारी ज्वेलर विमल भंडारी और पूजा भंडारी की बेटी हैं। उन्होंने उज्जैन के एमआईटी कॉलेज से एमबीए की है। इसके बाद सलोनी ने करीब डेढ़ वर्ष तक इंदौर में जॉब की और फिर अपने पिता के कारोबार को भी सँभाला। जब उन्होंने अपने परिवार वालों को साध्वी बनने का फैसला सुनाया तो वे तुरंत इसके लिए मान गए।

दरअसल, जैन मुनि की दीक्षा लेना बहुत कठिन होता है। दीक्षा लेने के बाद संयमित जीवन जीना होता है, जिसमें भोग-विलास की जिंदगी नहीं होती है। साथ ही आजीवन पैदल ही चलना होता है। सलोनी ने इसी जीवन को अपनाया है। इसके लिए उज्जैन के अरविंद नगर स्थित मनोरमा-महाकाल परिसर में विरती मंडप सजाया गया। इसमें दीक्षा पूर्ण होने तक पाँच दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

मंगलवार (3 मई 2023) सुबह 8:30 बजे खाराकुआ स्थित श्री हीर विजय सूरी बड़ा उपाश्रय मंदिर से वर्षीदान वरघोड़ा निकला, जिसमें सलोनी ने हाथी पर बैठकर सांसारिक वस्तुओं के त्याग स्वरूप विभिन्न सामग्री लुटाईं। बुधवार को मुख्य दीक्षा सम्पन्न हुई। हजारों लोगों के समक्ष करोड़पति पिता की बेटी ने सोलह श्रृंगार और वैभव त्याग कर साध्वी की दीक्षा ग्रहण की। दीक्षा लेने के बाद वह सभी सांसारिक रीति-रिवाज से दूर हो गईं। सलोनी ने अंतिम बार अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधी। रिश्तेदारों और परिवार ने उनके बेहतर जीवन की कामना की। वहीं, सलोनी के दीक्षा समारोह में शामिल होकर जैन संतों ने उन्हें अपना आशीर्वाद दिया।

बता दें कि इस साल जनवरी में गुजरात के सूरत में 9 साल की देवांशी ने भी संन्यास ग्रहण किया था। हीरा कारोबारी संघवी मोहन भाई की पोती और धनेश-अमी बेन की बेटी ने जैनाचार्य कीर्तियशसूरीश्वर महाराज से दीक्षा प्राप्त की। देवांशी के संन्यास लेने से पहले दीक्षा महोत्सव के अवसर पर सूरत में वर्षीदान यात्रा निकाली गई थी। इसमें 4 हाथी, 11 ऊँट और 20 घोड़ों को शामिल किया गया था। देवांशी के दीक्षा ग्रहण करने कार्यक्रम में करीब 35 हजार लोग शामिल हुए थे।

अब कर्नाटक के हर जिले में बजरंग बली का मंदिर बनाने का काॅन्ग्रेस ने किया वादा, ‘बजरंग दल पर प्रतिबंध’ से पीछा छुड़ाने को फेंका नया सियासी पासा

कर्नाटक विधानसभा चुनाव (Karnataka Assembly Election) में अपनी घोषणा पत्र में बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा करने वाली कॉन्ग्रेस अब बैकफुट पर है। बजरंग दल (Bajrang Dal) पर प्रतिबंध लगाने से पीछे हटने के बाद कॉन्ग्रेस ने अब राज्य के हर जिले में हनुमान मंदिर बनवाने का ऐलान किया है।

कर्नाटक के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) ने कहा है कि अगर कॉन्ग्रेस सत्ता में आती है तो एक विशेष कार्यक्रम चलाया जाएगा और इसके तहत कर्नाटक के हर जिले में आंजनेय स्वामी (हनुमान) के मंदिरों का निर्माण और उनका नवीनीकरण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए अंजनाद्री बोर्ड की स्थापना की जाएगी।

चामुंडा पर्वत पर स्थित माता चामुंडेश्वरी की पूजा-अर्चना करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए डीके शिवकुमार ने कहा, “हम कन्नडिगा लोग (कर्नाटक के लोग) भगवान आंजनेय के बहुत पहले से भक्त हैं, क्योंकि भगवान आंजनेय का जन्म यहीं हुआ था। हम प्रत्येक जिला संगठन में आंजनेय के सिद्धांत को बनाए रखेंगे, ताकि युवाओं को सशक्त बनाया जा सके।”

लोकमत के अनुसार, बजरंग दल पर प्रतिबंध के सवाल पर उन्होंने कहा कि बजरंग बली तुलना कभी भी बजरंग दल से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि बजरंग दल के एक राजनैतिक संगठन है, जो भाजपा को लाभ पहुँचाने के लिए उपद्रव का काम करते हैं। डीके शिवकुमार बोले, “हमने तो उन लोगों को सिर्फ रोकने की बात कर रहे हैं, जो समाज में मोरल पुलिसिंग के नाम पर कानून अपने हाथ में लेते हैं।”

बता दें कि कर्नाटक विधानसभा के लिए जारी घोषणा-पत्र में काॅन्ग्रेस ने बजरंग दल की तुलना प्रतिबंधित इस्लामी कट्टरपंथी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से करते हुए कहा है कि सत्ता में आने पर इस पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली ने बुधवार (3 मई 2023) को उडुपी में मीडिया से बात करते हुए इससे इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा, “काॅन्ग्रेस के घोषणा-पत्र (Congress Manifesto) में पीएफआई और बजरंग दल का उल्लेख है। इसमें सभी कट्टरपंथी संगठन शामिल हैं, लेकिन किसी संगठन पर प्रतिबंध लगाना राज्य सरकार के लिए संभव नहीं है, क्योंकि यह केंद्र सरकार का अधिकार क्षेत्र है। इसलिए कर्नाटक सरकार के लिए बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाना संभव नहीं है। डीके शिवकुमार इस बारे मे और विस्तार से बताएँगे।”

वीरप्पा मोइली कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि घोषणा पत्र में बजरंग दल जैसे संगठनों पर प्रतिबंध का वादा हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों को ध्यान में रखकर किया गया है। उल्लेखनीय है कि 28 अप्रैल 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच पर स्वतः संज्ञान लेकर सभी राज्यों को एफआईआर करने के निर्देश दिए थे। कहा था कि ऐसा नहीं होने पर इसे अदालत की अवमानना मानी जाएगी।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस ने मंगलवार 2 मई 2023 को अपना घोषणा-पत्र जारी किया था। इसमें बजरंग दल पर प्रतिबंध का वादा करते हुए उसकी तुलना पीएफआई से की गई थी। इसके बाद से न केवल कर्नाटक, बल्कि देशभर में काॅन्ग्रेस का विरोध हो रहा है। इतना ही नहीं काॅन्ग्रेस ने घोषणा पत्र में अल्पसंख्यकों के लिए बजट में 10 हजार करोड़ रुपए की व्यवस्था करने की बात कही है।

दिलचस्प यह है कि करीब एक साल पहले प्रतिबंधित इस्लामी कट्टरपंथी संगठन पीएफआई ने भी राज्य में अल्पसंख्यकों के लिए 10 हजार करोड़ रुपए के फंड की ही डिमांड की थी। गौरतलब है कि 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा (Karnataka Assembly election 2023) के लिए 10 मई 2023 को वोट पड़ने हैं। नतीजे 13 मई को आएँगे।

अब IPL में लगे ‘भाभी जिंदाबाद’ के नारे, सुनकर परिणीति चोपड़ा शर्म से हुईं लाल: राघव चड्ढा के साथ मोहाली में देख रही थीं मैच, Video

बॉलीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा (Parineeti Chopra) और आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा (Raghav Chaddha) की शादी के चर्चे जोरों पर हैं। हालाँकि, दोनों ने अपने रिश्ते को लेकर अभी तक खुलकर कुछ भी नहीं कहा है। लेकिन परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा को एक साथ कई जगहों पर स्पॉट किया गया है। इस बार दोनों पंजाब किंग्स और मुंबई इंडियंस के बीच बुधवार (3 मई 2023) को मोहाली में हुए आईपीएल मुकाबले को देखने के लिए के एक साथ पहुँचे।

इस दौरान परिणीति को मोहाली के स्टेडियम में देखकर वहाँ मौजूद लोग ‘परिणीति भाभी जिंदाबाद’ के नारे लगाने लगे, जिसके बाद एक्ट्रेस शरमा गईं। वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि उनके साथ खड़े राघव चड्ढा ‘परिणीति भाभी जिंदाबाद’ के नारे सुनकर अपनी हँसी कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। इसके बाद परिणीति ये सुनकर अपने सिर पर हाथ रख लेती हैं। फिर दोनों ने भीड़ को देखकर हाथ हिलाया। सोशल मीडिया पर उनका ये वीडियो खूब वायरल हो रहा है।

वीडियो के अलावा दोनों की कुछ तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं, जिसमें दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब नजर आ रहे हैं।

इसके अलावा पिछले महीने (अप्रैल 2023) सोशल मीडिया पर परिणीति की एक वीडियो वायरल हुई थी, जिसमें उन्हें फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा के घर के बाहर देखा गया था। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में बताया गया था कि परिणीति और राघव का ‘रोका’ हो गया है। इनकी शादी इसी साल अक्टूबर के आखिर में हो सकती है। रिपोर्ट में परिणीति और राघव के एक करीबी के हवाले से लिखा गया था, “दोनों का रोका काफी प्राइवेट तरीके के साथ किया गया। इसमें केवल परिवार के लोग ही शामिल थे। दोनों बहुत खुश हैं। इनकी शादी इस साल अक्टूबर तक होगी। परिणीति और राघव को अभी कोई जल्दबाजी नहीं है। दोनों अपने-अपने काम में बिजी हैं।

बता दें कि परिणीति और राघव की शादी की अफवाहें तब शुरू हुईं, जब दोनों को 22 मार्च, 2023 को पैपराजी ने एक रेस्टोरेंट के बाहर देखा। यहाँ ये दोनों व्हाइट शर्ट पहने हुए दिखाई दिए थे। डिनर डेट के बाद, राघव और परिणीति को बांद्रा में एक बार फिर से (लंच के लिए जाते हुए) स्पॉट किया गया। हालाँकि, कुछ दिन पहले ऐसी खबरें आई थीं कि दोनों 13 मई, 2023 को दिल्ली में सगाई करने वाले हैं। लेकिन दोनों ने अभी तक इस पर खुलकर कोई बयान नहीं दिया है।

‘मैतेई समाज को ST दर्जा देने का भेजें प्रस्ताव’: हाई कोर्ट के आदेश से मणिपुर में भड़के ईसाई, हिंसा-आगजनी के बाद मैरी कॉम ने भेजा त्राहिमाम संदेश

मणिपुर में जनजातीय समुदाय के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई, जिसके बाद भारतीय सेना और ‘असम राइफल्स’ के जवानों को शांति कायम करने के लिए लगाया गया है। हिंसाग्रस्त इलाकों से अब तक 7500 से भी अधिक लोगों को बचा कर निकाला जा चुका है। लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया जा रहा है। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए फ्लैग मार्च निकाले जा रहे हैं। एक मार्च के आयोजन के बाद ये सब शुरू हुआ।

जनजातीय समाज के मार्च के बाद शुरू हुई हिंसा

असल में मणिपुर का मैतेई समज लंबे समय से माँग कर रहा है कि उसे ‘अनुसूचित जनजाति (ST)’ का दर्जा दिया जाए। हाल ही में उन्होंने अपनी इस माँग को तेज कर दिया। मैती समाज मणिपुर की जनसंख्या का 53% है, यानी आधा से भी ज़्यादा। इसी माँग के विरोध में ‘ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर (ATSUM)’ ने बुधवार (3 मई, 2023) को राज्य के 10 पहाड़ी जिलों में मार्च निकाला था। मणिपुर हाईकोर्ट ने कहा है कि मैती समाज को ST में सम्मिलित करने के लिए राज्य सरकार केंद्र को प्रस्ताव भेजे, जिसके बाद ये हिंसा की घटनाएँ हुईं।

आरोप है कि चुराचांदपुर के तोरबुंग में मार्च के दौरान हथियारबंद भीड़ ने मैती समाज के लोगों पर हमला बोल दिया। इसके बाद पहाड़ी जिलों में बदले में कई हमले किए गए। फिर पूरे राज्य भर में हिंसा फ़ैल गई। तुरबुंग में 3 घंटे तक दंगे चलते रहे। घरों-दुकानों में तोड़फोड़ हुई। आगजनी की गई। मुख्यमंत्री N बीरेन सिंह ने कहा है कि लोगों की जानें गई हैं और संपत्ति को नुकसान पहुँचा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे समाज में कुछ गलतफहमियों का नतीजा बताया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जानमाल की सुरक्षा के लिए हर प्रकार के कदम उठा रही है। मिजोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरमथंगा ने भी मणिपुर सीएम को पत्र में लिखा है कि एक स्थायी पड़ोसी और संस्कृति-इतिहास के मामले में दोनों राज्यों में समानता होने के कारण वो मणिपुर में हुई हिंसा से दुःखी हैं। दोनों मुख्यमंत्रियों ने फोन कॉल पर भी बात की है। गैर-जनजातीय के प्रभाव वाले इम्फाल बेल्ट, कक्चिंग, थौबल, जिरीबाम और बिष्णुपुर जिलों के अलावा जनजातीय समाज की बहुलता वाले चुराचांदपुर, कांगपोकपी और तेगनोपाल में भी कर्फ्यू लगाया गया है।

ये मामला ट्राइबल्स और गैर-ट्राइबल्स का नहीं, जानें सच

असल में मणिपुर उच्च न्यायालय ने वहाँ की राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वो केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय को ये प्रस्ताव भेजे कि मैतेई समाज को भी ST में शामिल किया जाए। इन्हें मणिपुर की ट्राइब्स की सूची में शामिल करने को कहा गया। इसके बाद राज्य में दंगे शुरू हो गए। बताया जा रहा है कि ईसाई जनजातीय समुदाय ने मणिपुर के लोकप्रिय त्योहार लाई-हराओबा के दौरान हिंसा की साजिश रच ली थी। उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के दौरे के दौरान राज्य भर में मैतेई समाज पर हमले की साजिश रची गई और इसे अंजाम दिया गया।

ईसाई जनजातीय समुदाय के लोगों ने न सिर्फ मैतेई समाज के लोगों के घरों पर पत्थरबाजी की, हथियारबंद होकर हमले किए। मैतेई समाज के लोगों के घरों को आग के हवाले कर दिया गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि ईसाई जनजातीय समुदाय के जो अंडरग्राउंड आतंकी संगठन हैं, उनके लोग भी मैतेई समाज के खिलाफ हिंसा कर रहे हैं। जैसा कि मेनस्ट्रीम और राष्ट्रीय मीडिया चला रहा है, ये जनजातीय समाज बनाम गैर-ट्राइबल्स का मामला नहीं है।

चुराचांदपुर में मैतेई समाज के 1000 लोगों को घर छोड़ कर दूसरे क्षेत्रों में भागना पड़ा है। वहीं मुक्केबाज मैरी कॉम ने भी इस हिंसा को लेकर ट्वीट किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप की माँग की है। उन्होंने कहा है कि वो हिंसा के कारण अच्छा महसूस नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की जान जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वो ईश्वर से प्रार्थना करती हैं कि स्थिति जल्द से जल्द ठीक हो जाए।

जानिए क्या है SCO जिसकी बैठक में शामिल होने गोवा आए हैं बिलावल भुट्टो जरदारी, 12 साल बाद भारत में पाकिस्तान का विदेश मंत्री

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए पाकिस्तान के विदेश बिलावल भुट्टो जरदारी (Bilawal Bhutto Zardari) गुरुवार (4 मई 2023) को भारत पहुँच गए। गोवा पहुँचकर उन्होंने कहा कि वे पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। पाकिस्तान के किसी विदेश मंत्री की 12 साल के बाद यह पहली भारत यात्रा है।

इससे पहले पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार साल 2011 में भारत आई थीं। उस समय भारत में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए (UPA) की सरकार थी। वहीं, पाकिस्तान में प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के नेतृत्व वाली पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की सरकार थी। हीना ने तत्कालीन विदेश मंत्री एमएम कृष्णा से मुलाकात की थी। गिलानी ने शाह महमूद कुरैशी को विदेश मंत्री पद से हटाकर हिना को विदेश मामलों का राज्यमंत्री बनाया था।

2018 में पहली बार सांसद बने 34 साल के बिलावल भुट्टो पाकिस्तान के युवा मंत्रियों में से एक हैं। उन्होंने अपनी भारत यात्रा को लेकर किए गए ट्वीट में लिखा, “मैं गोवा के रास्ते में हूँ। वहाँ पहुँचकर SCO समिट में अपने देश का प्रतिनिधित्व करूँगा। बैठक में शामिल होने का मेरा फैसला SCO के चार्टर के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। SCO पर केंद्रित अपनी इस यात्रा के दौरान मैं मित्र राष्ट्र के अपने समकक्षों के साथ रचनात्मक चर्चा की उम्मीद करता हूँ।”

बिलावल भुट्टो पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और एक हमले में मारी गईं पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के बेटे हैं। बिलावल का जन्म 21 सितंबर 1988 को पाकिस्तान के कराची शहर में हुआ था। उनकी पढ़ाई-लिखाई ब्रिटेन में हुई है। इमरान खान की सरकार गिरने के बाद वहाँ बनी शहबाज शरीफ की सरकार की सरकार में वे 27 अप्रैल 2022 को मुल्क के 37वें विदेश मंत्री बने।

अपनी आत्मकथा में खुद को राजस्थान के भाटी राजपूतों का वंशज बताने वाली बेनजीर भुट्टो ने अपने बाद बिलावट भुट्टो को ‘पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी’ का अध्यक्ष बनाने के लिए कहा था। बिलावल के बालिग होते ही उन्हें इसकी कमान दे दी गई। पाकिस्तान की सरकार में भागीदार हैं। शाहबाज शरीफ की सरकार बनने के बाद वे पाकिस्तान के 37वें विदेश मंत्री बने हैं। यह उनकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। वे गोवा में आयोजित SCO बैठक में हिस्सा लेंगे।

बता दें कि भारत में आतंकवाद को प्रायोजित करने के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध अनुकूल नहीं हैं। भारत पिछले 7 सालों से पाकिस्तान के साथ किसी तरह का संवाद नहीं कर रहा है। बैठक में आने से पहले बिलावल ने कहा था कि उनका दौरा भारत से संबंधों को सुधारने को लेकर नहीं है।​ उन्होंने कहा था कि यह SCO की बैठक तक ही सीमित है। बता दें कि साल 2020 में जैसलमेर रियासत के पूर्व महाराजा बृजराज सिंह के निधन पर भुट्टो परिवार ने शोक संदेश भेजा था। 

भुट्टो परिवार के चौथे व्यक्ति की भारत यात्रा

भुट्टो परिवार के तीन सदस्य अब तक भारत आ चुके हैं। साल 1972 में पहली बार बिलावल भुट्टो के नाना और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो भारत आए थे। साल 1971 की जंग में मिली हार के बाद वे साल 1972 में शिमला समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए भारत आए थे।

साल 2002 में उनकी माँ बेनजीर भुट्टो पाकिस्तान की महिला प्रधानमंत्री के रूप में भारत आई थीं। बेनजीर ने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मुलाकात की थी। इसके बाद साल 2012 में बिलावल के पिता और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री आसिफ अली जारदारी भारत आए थे। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी।

पीएम मोदी और भारत के प्रति तल्ख रहे हैं बिलावल

बिलावल भुट्टो भारत के प्रति हमेशा तल्ख रूख अपनाए रहे हैं। 5 दिसंबर 2023 को संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बिलावल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कसाई कहा था। उन्होंने कहा था, “ओसामा बिन लादेन तो मर गया, लेकिन गुजरात का कसाई अभी जिंदा है और वह भारत का प्रधानमंत्री है।” इसके बाद भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि भुट्टो 1971 भूल गए हैं, जब पाकिस्तान के 90,000 से ज्यादा सैनिकों ने भारतीय सेना के आगे सरेंडर किया था।

इसके बाद 18 दिसंबर 2022 को बिलावल ने कहा था, “मैं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनकी पार्टी भाजपा और RSS से नहीं डरता।” PM मोदी को कसाई कहने वाले बयान पर उन्होंने कहा था, “उनका मकसद भारत में मुस्लिमों के खिलाफ हो रहे भेदभाव और नफरत के खिलाफ आवाज उठाना था।” मई 2022 में बिलावल भुट्टो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हाटने और परिसीमन लागू करने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि भारत में कश्मीरियों का उत्पीड़न हो रहा है।

बिलावल भुट्टो ने साल 2014 में पहली बार कश्मीर को लेकर बयान दिया था। उन्होंने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के कार्यकर्ताओं से कहा था, “मैं पूरा कश्मीर वापस लूँगा। मैं इसका एक इंच जमीन भी भारत के लिए नहीं छोड़ूँगा, क्योंकि कश्मीर सिर्फ पाकिस्तान का है। पाकिस्तान के बाकी राज्यों की तरह कश्मीर भी हमारा है।”

भारत के विदेश मंत्री से मुलाकात नहीं होगी

इस दौरे में बिलावल भुट्टो का भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मुलाकात नहीं होगी। यह बात बिलावल भुट्टो जानते हैं। इसीलिए उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया कि इस यात्रा का मकसद भारत से संबंध सुधारना नहीं, बल्कि SCO की बैठक में हिस्सा लेना है। दरअसल, कुछ दिन पहले ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को लेकर एक कड़ा बयान दिया था।

जयशंकर ने कहा था कि भारत का पड़ोसी देश अभी भी आतंकवाद को प्रश्रय दे रहा है। डोमिनिकन रिपब्लिक के दौरे में विदेश मंत्री ने कहा था कि पिछले कुछ समय से भारत ने पड़ोसी पहले की नीति अपनाई है, लेकिन पाकिस्तान इसका अपवाद है, क्योंकि वह सीमा पार से आतंकवाद को समर्थन देना अभी भी नहीं छोड़ा है।

क्या है SCO?

इस साल SCO की अध्यक्षता भारत कर रहा है और इसकी बैठक गोवा में हो रही है। वर्तमान में SCO के 8 सदस्य देश हैं- भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान। इसके अलावा पूर्ण सदस्यता ग्रहण करने के इच्छुक 4 पर्यवेक्षक देश- अफगानिस्तान, ईरान, मंगोलिया और बेलारूस। इसके साथ ही SCO में 6 डायलॉग पार्टनर भी हैं, जिनमें नेपाल, कंबोडिया, श्रीलंका, आर्मेनिया, अजरबैजान और तुर्की शामिल हैं।

इस संगठन की स्थापना 15 जून 2001 में चीन और रूस ने की थी। बाद में भारत को इसका सदस्य बनाया गया। भारत में SCO की बैठक 4 मई और 5 मई को है। इस बैठक में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस और चीन के विदेश मंत्रियों के साथ-साथ अन्य सदस्य देशों के मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। SCO का फोकस स्टार्टअप्स, पारंपरिक चिकित्सा, युवा सशक्तीकरण और विज्ञान एवं तकनीक पर है।

अब बिहार के लोगों की जाति नहीं गिनी जाएगी, पटना हाई कोर्ट ने लगाई रोक: नीतीश-तेजस्वी सरकार को झटका, याचिका में बताया था निजता का उल्लंघन-₹500 करोड़ की बर्बादी

बिहार सरकार द्वारा कराई जा रही जाति जनगणना पर पटना उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। इससे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी CM तेजस्वी यादव की सरकार को बड़ा झटका लगा है। बता दें कि बिहार की सत्ताधारी पार्टियाँ राजद, जदयू और कॉन्ग्रेस देश भर में जाति जनगणना के लिए जोर लगा रही है। बिहार में तो इसकी शुरुआत भी हो गई थी। शिक्षक पढ़ाना छोड़ कर जाति जनगणना में लगा दिए गए थे, लेकिन अब पटना हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है।

साथ ही अब तक की जाति जनगणना के आँकड़े हैं, उन्हें पटना हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने आदेश दिया है कि जाति जनगणना को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने ये फैसला सुनाया है। इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में 2 दिन की सुनवाई हुई, जिसके बाद ये निर्णय दिया गया। अब इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख़ 3 जुलाई, 2022 (सोमवार) मुक़र्रर की गई है।

पटना हाईकोर्ट ने सवाल दागा है कि क्या जाति जनगणना कराना और आर्थिक सर्वेक्षण कराना एक कानूनी बाध्यता है? ये सवाल भी पूछा गया है कि राज्य सरकार के पास इसका अधिकार है या नहीं। जातीय गणना पर निजता का उल्लंघन होगा या नहीं, इस पर भी बिहार सरकार को जवाब देना होगा। याचिका में आरोप लगाया गया था कि जाति जनगणना का बिहार सरकार को कोई अधिकार नहीं है, ऊपर से इससे लोगों की निजता एवं गोपनीयता का उल्लंघन हो रहा है।

इस याचिका में कहा गया है कि लोगों की जाति, उनके कामकाज और योग्यता का ब्यौरा लेना उनकी निजता का उल्लंघन है। साथ ही कहा गया है कि संविधान प्रदेश सरकार को इसकी अनुमति नहीं देता। इसके लिए 500 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, इसे भी याचिका में जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी करार दिया गया है। केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट को पहले ही बता चुकी है कि जाति आधारित जनगणना नहीं कराई जाएगी।

‘माफ कर दीजिए, भारतीय उच्चायोग पर पत्थर-अंडे फेंक गलती की’: कश्मीरी नेता के बेटे ने PM मोदी को भेजा ‘माफीनामा’, माँ के अंतिम संस्कार के लिए चाहिए वीजा

साल 2021 में लंदन के भारतीय उच्चायोग पर अंडे फेंकने वाले ‘अंकित लव’ भारत आने के लिए छटपटा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी हरकत के लिए माफी माँगी है। साथ ही ये भी कहा है कि उन्हें किसी ने बहका दिया था। अब वो भारत आना चाहते हैं और अपनी माँ को आखिरी बार देखकर उनका अंतिम संस्कार करना चाहते हैं।

दरअसल, अंकित (39) लव जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के संस्थापक भीम सिंह के बेटे हैं जो काफी समय से लंदन में रहते हैं। साल 2021 के फरवरी में भारतीय उच्चायोग पर पत्थर और अंडे फेंकने के बाद सरकार ने उन्हें भारत में ब्लैकलिस्ट कर दिया था। अब उनके देश लौटने पर प्रतिबंध है। हालाँकि अब वो प्रधानमंत्री से मिन्नतें करके भारत आना चाहते हैं। उनकी माँ ‘जयमाला’ का शव जम्मू की एक मॉर्च्युरी में 7 दिन से पड़ा है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अंकित ने कहा, “मैं अपनी माँ का चेहरा देखना चाहता हूँ। उन्हें आखिरी बार गले लगाना चाहता हूँ। मेरी माँ यूपी के मेरठ की गौड़ ब्राह्मण थी और उन्हें पूरा अधिकार है कि उनका अंतिम संस्कार हिंदू रिवाजों के अनुसार सम्मानजनक तरीके से हो। मैं उनका एकलौता बेटा हूँ। उनका अंतिम संस्कार उधमपुर की देवक नदी के किनारे करूँगा, ये उनकी आखिरी इच्छा थी।”

भारत आने की गुहार लेकर 2 मई को अंकित ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा। इसमें कहा, “मैं तहे दिल से अपनी भारतीय उच्चायोग पर अंडे फेंकने की गलती के लिए माफी माँगता हूँ। मुझे इसका पछतावा है। कुछ लोगों ने मुझे बहका दिया था, जिसकी वजह से मुझसे यह गलती हुई। मैं माफी माँगता हूँ। आगे कभी भी ऐसा कुछ नहीं करूँगा जो अपने देश के खिलाफ हो। मैं अपने देश को बहुत प्यार करता हूँ और मुझे इसपर बहुत गर्व है।

अंकित ने यह भी कहा कि वो जम्मू हमेशा के लिए नहीं आना चाहता बस सरकार उसे इतनी अनुमति दे दे कि वो अपनी माँ का ऊधमपुर में अंतिम संस्कार कर सके। चाहे तो उसके बाद उसे वापस यूके की फ्लाइट में बैठाकर वापस भेज दिया जाए।

उल्लेखनीय है कि जयमाला सुप्रीम कोर्ट की एक वरिष्ठ वकील थीं। उनका देहांत 26 अप्रैल को हुआ था। उसके बाद से उनका शव जम्मू के सरकारी अस्पताल की मॉर्च्युरी में पड़ा है। उनकी भतीजी मृगनयनी ने शव की माँग यह कहकर की थी कि लव शायद नहीं भारत आ पाए इसलिए उसे वो बॉडी दी जाए ताकि वो क्रियाक्रम कर सकें।

मृगनयनी ने यह भी कहा कि जयमाला उसी के साथ रहती थीं। 25 अप्रैल को सीढ़ियों से गिरने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। लेकिन अगले दिन उनका निधन हो गया। इस घटना के बाद जयमाला के भतीजे व जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री हर्ष देव सिंह ने शव के पोस्टमार्टम की माँग की जिसपर मृगनयनी ने अंतिम संस्कार में देरी का कारण हर्ष देव को बताया। हालाँकि लव ने लंदन से यह बात स्पष्ट की कि उनकी माँ के अंतिम संस्कार में देर केवल उनके वजह से हो रही है।

‘FIR हो गई, सुरक्षा मिल गई’: सुप्रीम कोर्ट ने बंद की जंतर-मंतर वाले पहलवानों की फाइल, बजरंग पुनिया बोले- मेडल/अवॉर्ड लौटा देंगे; दिल्ली की सीमाओं पर अलर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (4 मई, 2023) को 3 महिला पहलवानों द्वारा दायर की गई याचिका को ये नोट करने के बाद बंद कर दिया कि दिल्ली पुलिस ने ‘भारतीय कुश्ती संघ (WFI)’ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। भारत के मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़, जस्टिस PS नरसिम्हा और जस्टिस JB पार्डीवाला की पीठ ने कहा कि FIR दर्ज करने के लिए याचिका दायर की गई थी और अब जब ये हो गया है, प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

आगे किसी भी प्रकार की शिकायत या माँग के लिए सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी पहलवानों को स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष जाने की सलाह भी दी है। पहलवानों की तरफ से पेश वकील नरेंद्र हुड्डा ने पूरी जाँच प्रक्रिया की निगरानी करने का अनुरोध सुप्रीम कोर्ट से किया, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इसे नकारते हुए कहा कि अन्य मुद्दों के लिए दिल्ली हाईकोर्ट या मजिस्ट्रेट के समक्ष जाइए। दिल्ली पुलिस ने न सिर्फ पीड़िताओं का बयान दर्ज किया है, बल्कि उन्हें सुरक्षा भी प्रदान की है।

एक वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में जाँच आगे बढ़ रही है। उधर दिल्ली की सीमाओं पर फिर से अलर्ट जारी कर दिया गया है। सभी सीमावर्ती जिलों के DCP को निर्देश दिया गया है कि वो विष सतर्कता बरतें। सेन्ट्रल दिल्ली की तरफ जाने वाली सड़कों पर सख्त निगरानी रखने को कहा गया है। कई जगहों पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं। सूत्रों से खबर मिली है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर पहलवानों का समर्थन करने पहुँच सकते हैं।

उधर प्रदर्शनकारी पहलवानों ने अब अपने मेडल्स लौटाने की भी घोषणा कर दी है। बजरंग पूनिया ने कहा कि अगर पहलवानों के साथ ऐसा ही व्यवहार होता रहा तो फिर हमे इन मेडल्स का क्या करेंगे? उन्होंने कहा कि इससे अच्छा है कि हम इन मेडल्स को लौटा कर एक सामान्य ज़िन्दगी जिएँ। उन्होंने सारे मेडल्स और अवॉर्ड्स भारत सरकार को लौटाने की घोषणा कर डाली। पहलवानों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उन्हें बुलाने की माँग की और कहा कि ये राजनीतिक मुद्दा नहीं है। उन्होंने IT सेल पर उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया।

‘जंतर-मंतर पर हमें पलंग, गद्दे, मैट चाहिए’: मीडिया गैंग ने अमित शाह के नाम लेटर कर दिया वायरल, पहलवान बोले- यह फर्जी, हमने लिखा ही नहीं

सोशल मीडिया पर एक पत्र वायरल हुआ, जिसके बारे में का गया कि विरोध प्रदर्शन कर रहे पहलवानों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखा है हालाँकि, खुद प्रदर्शनकारी पहलवानों ने ही कहा है कि ये चिट्ठी फर्जी है और उन्होंने ऐसा कुछ नहीं लिखा है। रणविजय सिंह समेत लिबरल गिरोह के कई पत्रकारों ने भी इस पत्र को शेयर किया। पहलवान बजरंग पूनिया और विनेश फोगट ने भी ट्विटर पर स्पष्ट किया है कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा है।

वायरल हो रहे पत्र में पहलवानों की माँगों का तत्काल समाधान करने की माँग करते हुए लिखा गया है कि पिछले 11 दिनों से मेडल जीतने वाले पहलवान शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं और रात्रि विश्राम के दौरान बुधवार (3 मई, 2023) की रात दिल्ली पुलिस के 100 पुलिसकर्मियों ने उन पर हमला कर दिया। पत्र में दुष्यंत फोगट और राहुल यादव नाम के दो पहलवानों का सर फोड़े जाने का आरोप भी लगाया गया है।

साथ ही साक्षी मलिक और संगीता फोगट को भी पुरुष अधिकारियों द्वारा धक्के मारने का आरोप लगाया गया है। इसमें लिखा है कि अंतरराष्ट्रीय पहलवानों पर इस तरह से हमला करना और उन्हें अपमानित करना उनके मनोबल को तोड़ने वाला है। इसे देश की छवि को खराब करने वाला भी बताया गया है। जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की गई है। पत्र में लिखा है कि अलग-अलग स्थानों से इनके जो साथी हिरासत में लिए गए हैं, उन्हें रिहा किया जाए।

वायरल हो रहे इस पत्र में माँग की गई है कि वॉटरप्रूफ टेंट, मजबूत स्टेज, पलंग, साउंड सिस्टम, गद्दे और प्रैक्टिस के लिए कुश्ती मैट के अलावा जिम के सामानों की भी माँग की गई है। साथ ही सरकार के उच्चाधिकारियों से भी तुरंत वार्ता कराए जाने की माँग रखी गई है। हालाँकि, अब जब पहलवानों ने ही साफ़ कर दिया है कि ये पत्र उनका नहीं है, इससे स्पष्ट है कि ये फर्जी है और किसी ने जानबूझ कर लिख कर इसे फैलाया है।