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पुलिसवाला लव जिहादी: इमरान ने नाम और मजहब छिपा हिंदू युवती को फाँसा, बड़े भाई के साथ मिल किया रेप-धर्म परिवर्तन का डाला दबाव

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। यहाँ इमरान नाम के एक पुलिसकर्मी ने अपना धर्म और पहचान छुपाकर एक हिंदू युवती को अपने चंगुल में फँसाया। इसके बाद लगातार उसका शोषण करता रहा। इतना ही नहीं उसने अपने बड़े भाई के साथ मिलकर उसका रेप किया और धर्म परिवर्तन का दबाव डाला। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

युवती मूल रूप से यूपी के सहारनपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र की रहने वाली है। पीड़िता ने पीलीभीत के एसपी को अपनी शिकायत दी। उस शिकायत में उसने कहा कि तीन साल उसकी मुलाकात शामली जिले के रहने वाले एक युवक से हुई थी। उस दौरान उसने अपनी पहचान और धर्म छिपाते हुए अपना नाम रोहित बताया था। उसने कहा था कि वह पुलिस में है।

युवती का आरोप है कि कुछ समय बाद रोहित ने उसे प्रपोज किया और फिर शादी करने की बात कही। शादी के वादे की आड़ में रोहित बना इमरान उसे अलग-अलग होटलों में ले जाने लगा और वहाँ वह दुष्कर्म करता था। पीड़िता ने कहा कि कई बार मना करने के बाद भी वह जबरन शारीरिक संबंध बनाता था। दुष्कर्म के कारण गर्भवती होने पर उसने जबरदस्ती गर्भपात भी करवा दिया।

पीड़िता का कहना है कि वह जब भी इमरान से शादी की बात करती थी तो वह उसके साथ दुर्व्यवहार करता था। शादी के लिए बार-बार कहने के बाद रोहित बना इमरान उसे एक मंदिर में लेकर गया और वहाँ शादी की। पीड़िता का कहना है कि शादी करने के बाद वह उसे साथ रखने से मना कर दिया। इस दौरान वह उस पर गंदे-गंदे आरोप भी लगाता था।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा है कि रोहित के व्यवहार से तंग आकर उसने उसके बारे में पता लगाना शुरू किया। युवती को पता चला कि आरोपित पीलीभीत के न्यू एरिया थाने में तैनात है और उसका नाम रोहित नहीं, बल्कि इमरान मिर्जा है। पीड़िता का कहना है कि इसकी जानकारी होने के बावजूद वह इमरान से शादी के लिए तैयार थी, लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं हुआ।

पीड़िता ने कहा कि लगभग 6 महीना पहले उसने न्यूरिया थाने में आरोपित इमरान मिर्जा के खिलाफ शिकायत की थी। इसके बाद उसे सस्पेंड कर दिया गया था। 25 जनवरी 2023 को इमरान उससे मिलने पहुँचा और मनाने लगा। इसके बाद इमरान युवती से शपथ पत्र दिलवाकर अपने साथ ले गया। इमरान उसे शामली में किराए के कमरे पर रखा।

पीड़िता का कहना है कि शामली में इमरान ने शामली पुलिस में तैनात अपने बड़े भाई फुरकान से उसकी मुलाकात करवाई। इसके बाद दोनों भाई रोज उसके कमरे पर आने लगे और रिवॉल्वर दिखाकर उससे रेप करने लगे। महिला का आरोप है कि इस दौरान दोनों उससे मारपीट भी करते थे। महिला ने आरोप लगाया कि दोनों आरोपित भाई उस पर धर्म परिवर्तन का भी दबाव बनाते थे।

युवती ने शिकायत पत्र में आगे लिखा कि एक दिन इमरान ने उसके साथ मारपीट करके भगा दिया और किसी से शिकायत करने पर मारने की धमकी दी। दोनों भाई ने धमकी देते हुए कहा कि वे पुलिस में हैं और उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता। पीड़िता के आवेदन पर कोतवाली पुलिस ने दोनों सिपाही भाइयों के के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कर लिया है।

बजरंग दल पर प्रतिबंध से पीछे हटी काॅन्ग्रेस, बोले वीरप्पा मोइली- राज्य सरकार ऐसा नहीं कर सकती: कर्नाटक में अब डैमेज कंट्रोल की कोशिश

कर्नाटक में ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ का कार्ड भारी पड़ते देख काॅन्ग्रेस डैमेज कंट्रोल की कोशिशों में लग गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली (Veerappa Moily) का कहना है कि बजरंग दल (Bajrang Dal) पर प्रतिबंध लगाने का काॅन्ग्रेस का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा है कि न तो पार्टी के पास ऐसा कोई प्रस्ताव है और न ही राज्य सरकार प्रतिबंध लगा सकती है।

कर्नाटक विधानसभा के लिए जारी घोषणा-पत्र में काॅन्ग्रेस ने बजरंग दल की पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से तुलना करते हुए सत्ता में आने पर प्रतिबंध का वादा किया है। लेकिन मोइली ने बुधवार (3 मई 2023) को उडुपी में मीडिया से बात करते हुए इससे इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा, “काॅन्ग्रेस के घोषणा-पत्र (Congress Manifesto) में पीएफआई और बजरंग दल का उल्लेख है। इसमें सभी कट्टरपंथी संगठन शामिल हैं। लेकिन किसी संगठन पर प्रतिबंध लगाना राज्य सरकार के लिए संभव नहीं है, क्योंकि यह केंद्र सरकार का अधिकार क्षेत्र है। इसलिए कर्नाटक सरकार के लिए बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाना संभव नहीं है। डीके शिवकुमार इस बारे मे और विस्तार से बताएँगे।”

वीरप्पा मोइली कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि घोषणा पत्र में बजरंग दल जैसे संगठनों पर प्रतिबंध का वादा हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों को ध्यान में रखकर किया गया है। उल्लेखनीय है कि 28 अप्रैल 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच पर स्वतः संज्ञान लेकर सभी राज्यों को एफआईआर करने के निर्देश दिए थे। कहा था कि ऐसा नहीं होने पर इसे अदालत की अवमानना मानी जाएगी।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस ने मंगलवार 2 मई 2023 को अपना घोषणा-पत्र जारी किया था। इसमें बजरंग दल पर प्रतिबंध का वादा करते हुए उसकी तुलना पीएफआई से की गई थी। इसके बाद से न केवल कर्नाटक, बल्कि देशभर में काॅन्ग्रेस का विरोध हो रहा है। इतना ही नहीं काॅन्ग्रेस ने घोषणा पत्र में अल्पसंख्यकों के लिए बजट में 10 हजार करोड़ रुपए की व्यवस्था करने की बात कही है।

दिलचस्प यह है कि करीब एक साल पहले प्रतिबंधित इस्लामी कट्टरपंथी संगठन पीएफआई ने भी राज्य में अल्पसंख्यकों के लिए 10 हजार करोड़ रुपए के फंड की ही डिमांड की थी। गौरतलब है कि 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा (Karnataka Assembly election 2023) के लिए 10 मई 2023 को वोट पड़ने हैं। नतीजे 13 मई को आएँगे।

शौहर की तस्वीर फाड़ी, पैरों से कुचला… साउथ की हिरोइन को रियाज ने इतना किया टॉर्चर, 3 साल बाद ‘डायवोर्स फोटोशूट’ से मनाया जश्न

सोशल मीडिया पर आजकल तमिल एक्ट्रेस शालिनी का डायवोर्स फोटोशूट खूब वायरल है। इस फोटोशूट में वह बिलकुल तैयार होकर अपनी शादी की फोटोज को फाड़कर अपना डायवोर्स सेलीब्रेट करती दिख रही हैं।

तस्वीरों में देख सकते हैं कि उन्होंने लिखा है- “मुझे परेशानियाँ 99 मिलीं लेकिन शौहर के पास एक भी नहीं है।” इस फोटोशूट में वह अपनी और शौहर रियाज की तस्वीरों को फाड़ती दिख रही हैं। एक में दोनों की फोटोज को पैर से भी कुचल रही हैं। कई लोगों ने इस पहल को देखने के बाद उनकी बोल्डनेस की तारीफें कर रहे हैं। वहीं कुछ इस तरह डायवोर्स पर उनको खुश होता देख सवाल भी उठा रहे हैं।

शालिनी ने अपना यह फोटो शूट शेयर करते हुए लिखा, “जिन लोगों को दबा हुआ महसूस होता है उनके लिए एक तलाकशुदा महिला का संदेश….खराब शादी को छोड़ना उचित है क्योंकि आप खुश रहना और निम्न स्तर में गुजारा न करना डिजर्व करती है। अपनी जिंदगी का नियंत्रण अपने पास रखें और अपने व अपने बच्चे के अच्छे भविष्य के लिए जरूरी बदलाव करें। डायवोर्स कोई फेलियर नहीं है। ये तो एक टर्निंग प्वाइंट है ताकि आप अपने जीवन में सकारात्मकता ला सकें। शादी छोड़कर अकेले रहने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए। तो मेरी बहादुर औरतों ये मैं तुम्हें समर्पित करती हूँ।”

बता दें कि शालिनी तमिल की एक टीवी एक्ट्रेस हैं जिन्होंने ‘मुल्लूमा मालारूम’ से डेब्यू किया था। इसके बाद वो सुपर मॉम शो में भी नजर आईं थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी शादी साल 2020 में रियाज से हुई थी। दोनों की एक बेटी भी है। मगर कुछ महीनों पहले शालिनी ने रियाज के ऊपर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देने के आरोप लगाया और फिर उनसे अलग हो गईं।

इस खबर पर उत्तम नगर से विधायकी का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी कृष्ण गहलोत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, तलाक के फोटोशूट के नाम पर जिस तरह पितृसत्तात्मकता के विरुद्ध क्रान्ति के रूप में इसे कूल बताते हुए लड़की को पोस्टरगर्ल बताया जा रहा है, जरा उसकी वह सच्चाई भी जान लीजिए जो मक्कार मीडिया छुपा गया।

उन्होंने लिखा कि शालिनी ने रियाज से निकाह पढ़ा था। बाद में रियाज उसे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देने लगा। जब शालिनी ने तलाक देना चाहा तो रियाज तलाक को भी तैयार नहीं था। ऐसे में बड़ी मुश्किल से एक्ट्रेस रियाज से मुक्त हुईं। कृष्ण लिखते हैं बड़ी कठिनाइयों से मुक्त हुई शालिनी इस तरह छिछोरेपन के साथ स्वतन्त्रता का उत्सव मना रही है। मनाना भी चाहिए, अन्ततः एक नरक से बाहर जो आई है। पर मैडम को समाज को पूरा सच बताना चाहिए।

अतीक अहमद का ‘पढ़ाकू’ बेटा 10वीं के हर सब्जेक्ट में फेल, असद की मार्कशीट वायरल: खूब चली थी विदेश जाकर पढ़ाई न कर पाने की कहानी

माफिया अतीक अहमद के बेटे असद अहमद के एनकाउंटर के बाद पुलिस को छानबीन में उसकी 10वीं की मार्कशीट हाथ लगी है। इसे देख पता चल रहा है कि प्रयागराज के सेंट जोसेफ स्कूल से दसवीं करने वाला असद पढ़ाई में बिलकुल अच्छा नहीं था। उसके 700 में से कुल 125 नंबर (कुल 25%) आए थे और वह हर पेपर में फेल था। उसके एक पेपर में भी 33 से ऊपर नंबर नहीं थे।

मार्कशीट में देख सकते हैं कि असद को अंग्रेजी में 100 में से 28 नंबर मिले थे। हिंदी में उसके 100 में से 21.5 नंबर आए थे। इसी तरह साइंस-मैथ्स में 19-19 और सोशल साइंड में 19.8 नंबर आए थे। मार्कशीट दिखा रही है कि अच्छे नंबर लेकर पास होना असद की प्राथमिकता थी ही नहीं। उसका मकसद माफिया बनना था। वह अपने अब्बा से प्रेरित था। उसने स्कूल प्रशासन को और टीचरों को डराया-धमकाया हुआ था।

इतना ही नहीं खबरों के अनुसार, उसने एक स्कूल प्रतियोगिता में अपने ही शिक्षक को बुरी तरह प्रताड़ित किया था। इसी तरह एक खेल के दौरान उसने एक रेफ्री को झापड़ मार दिया था। उसकी मार्कशीट में साफ लिखा दिख रहा है कि स्कूल ने उसे हर सब्जेक्ट अच्छे से पढ़ने की सलाह दी थी।

बता दें कि असद अहमद की मार्कशीट ऐसे समय में सामने आई है जब कुछ दिन पहले ही मीडिया रिपोर्ट्स ने दावा किया था कि असद अहमद पढ़ने में बहुत होनहार था और लॉ पढ़ने विदेश जाना चाहता था। लेकिन अतीक के आपराधिक बैकग्राउंड के कारण उसे वीजा नहीं मिला। रिपोर्ट ने यह भी कहा था कि असद के 12 वीं 85 परसेंट आए थे।

हालाँकि अब असद की 10 वीं की मार्कशीट देखकर लगता है कि मीडिया के दावे पूरी तरह फर्जी थे। उन्होंने ऐसे शख्स का महिमामंडन करने का प्रयास किया जो उमेश पाल की हत्या में शामिल था और पुलिस के रिकॉर्ड में बदमाश था। हत्या के बाद उसके ऊपर 5 लाख रुपए ईनाम रखा गया था। इसके बाद 13 अप्रैल को झाँसी में उसका एनकाउंटर कर दिया गया। वह अतीक का तीसरा बेटा था। उसके एनकाउंटर के दो दिन बाद ही अतीक की हत्या कर दी गई थी। रिपोर्ट में सामने आया था कि असद हमेशा अतीक के दम पर गुंडागर्दी करता था। वह खुद को ‘छोटे सांसद जी’ कहता था।

सारे ट्रैक्टर लेकर आओ, हर कोई दिल्ली आओ, पुलिस हमें पीट रही-गाली दे रही… AAP नेता के खाट से जंतर-मंतर पर रात को दंगल

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे पहलवानों के प्रदर्शन में पहलवानों और पुलिस के बीच झड़प की खबर है। एक वीडियो सामने आई है जिसमें कुछ लोग फोल्डिंग बेड लेकर प्रोटेस्ट में घुसते दिख रहे हैं, वहीं दिल्ली पुलिस उन्हें ऐसा करने से रोक रही है। इस दौरान रेसलर्स को बार-बार ‘वीडियो बना लो-वीडियो बना लो’ कहते और पुलिस से भिड़ते देखा जा सकता है।

घटना के बाद बजरंग पूनिया समेत अन्य पहलवानों का बयान आया। इसमें वह सारे देशवासियों से कह रहे हैं कि उनके प्रदर्शन को लोग समर्थन देने दिल्ली के जंतर-मंतर आएँ। पूनिया कहते हैं, “हमें पूरे देश के साथ की जरूरत है। हर किसी को दिल्ली आना चाहिए। पुलिस हमारे विरुद्ध तो बल इस्तेमाल कर रही है, बहन-बेटियों के साथ गाली-गलौच कर रही है, बद्तमीजी हो रही है, लेकिन बृजभूषण का कुछ नहीं हो रहा।”

पूनिया की इसी वीडियो के बीच में कुछ पहलवानों को गुस्से में कहते सुना जा सकता है- “सभी लोग ट्रैक्टर लेकर आओ, ट्रैक्टर लेकर दिल्ली आओ, सुबह नहीं होनी चाहिए। सुबह सभी यहीं पर सबसे पहले आओ।”

दिल्ली पुलिस ने इस झड़प के बाद बताया कि जंतर-मंतर पर चल रहे पहलवानों के प्रदर्शन के दौरान आप नेता सोमनाथ भारती प्रदर्शन स्थल पर फोल्डिंग बेड लेकर पहुँचे थे। जब पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो समर्थक भड़क गए और बेड को ट्रक से नीचे फेंकने का प्रयास किया। इस बीच छोटी झड़प हो गई। पुलिस ने सोमनाथ भारती समेत 2 को हिरासत में लिया है।

डीसीपी प्रणव ने भी इस संबंध में बताया, “अनुमति न होने के बावजूद सोमनाथ भारतीय जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में फोल्डिंग बेड लेकर आए। हमने बस उन्हें घुसने नहीं दिया तो उस पर झड़प गुई। उन्होंने महिला पहलवानों से बदसलूकी पर कहा कि साइट पर महिला पुलिसकर्मी लगातार तैनात हो रखी हैं। हमने पहलवानों से कहा है कि वो अपनी शिकायत दें और पुलिस उसपर निष्पक्ष जाँच करेगी। जिस पुलिसकर्मी पर इन्होंने नशे में होने का आरोप लगाया है कि उसका भी मेडिकल करवाया जा रहा है जो भी एक्शन लेना होगा वो भी लेंगे।”

बता दें कि इससे पहले भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी ऊषा ने जंतर-मंतर पर बैठे खिलाड़ियों से बात की थी। उन्होंने आश्वासन दिया था कि पहलवानों की समस्या पर गौर किया जाएगा और जल्द समाधान होगा। वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिल रही पुलिस सुरक्षा को पहलवानों ने लेने से मना कर दिया। पहलवानों ने कहा कि अगर वे जंतर-मंतर पर भी सुरक्षित नहीं है, तो वे कही भी सुरक्षित नहीं है। वे यहाँ शांतिपूर्वक धरना दे रहे हैं। उन्हें किसी से भी कोई दिक्कत नहीं है।

जंतर-मंतर पहुँच जिन पहलवानों को गले लगाया, सुनी जिनकी बात, उनके समर्थकों ने ही पीटी उषा से की बदसलूकी: देखिए Video

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा के साथ पहलवानों के समर्थकों ने बुधवार (3 मई 2023) को जंतर-मंतर पर बदसलूकी की। स्थिति को देखते हुए सुरक्षाबल उन्हें वहाँ से निकालकर सुरक्षित जगह ले गए। बता दें कि धरना दे रहे पहलवानों से मिलने के लिए वह धरना स्थल पर गई थीं।

इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में दिख रहा है कि एक महिला सहित कई लोग पीटी उषा को घेर उनके साथ बदतमीजी कर रहे हैं। वीडियो में दिख रहा है कि एक महिला कह रही कि ‘इन्होंने महिलाओं का अपमान किया है। क्यों नहीं करें ऐसा…’। इस दौरान पीटी उषा भीड़ से खुद को बचाने की कोशिश करती दिख रही हैं।

इसके एक एक बुजुर्ग व्यक्ति उन पर चिल्लाते दिख रहा है। कार में बैठी पीटी उषा के सामने आकर एक बुजुर्ग चीखते हुए कहता है, ‘हम फौजी आदमी हैं। हमारी बहन-बेटियों के लिए कर सकत है तो बता।”

बता दें कि पीटी उषा भारतीय ओलंपिक संघ (IOC) की अध्यक्ष हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने पहलवानों के धरने को अनुशासनहीनता बताया था। पीटी उषा ने कहा था कि पहलवान सड़कों पर आकर भारत की छवि धूमिल कर रहे हैं। उन्होंने पहलवानों की आलोचना की थी।

इस पर पहलवान साक्षी मलिक ने पीटी उषा पर ही सवाल दाग दिया था। साक्षी मलिक ने 27 अप्रैल 2023 को कहा, “मैं पीटी उषा का सम्मान करती हूँ। उन्होंने हमें प्रेरित किया है, लेकिन मैं मैम से पूछना चाहती हूँ कि महिला पहलवानों ने आगे आकर उत्पीड़न का मुद्दा उठाया है। क्या अब हम विरोध भी नहीं कर सकते?”

पीटी उषा बुधवार (3 मई 2023) को भारतीय कुश्ती संघ के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह (WFI Chief Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दे रहे पहलवानों से मिलने पहुँची। उन्होंने पहलवानों से मुलाकात की।

मुलाकात के बाद धरना में शामिल बजरंग पुनिया ने कहा, “उन्होंने (पीटी उषा) कहा कि वे हमारे साथ खड़ी हैं और हमें न्याय दिलाएँगी। वह पहले एक एथलीट हैं और फिर कुछ और। उन्होंने (पीटी उषा) ने कहा कि वह हमारी समस्या पर गौर करेंगी और जल्द से जल्द इसका समाधान करेंगी।”

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जब दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की थी, तब पहलवान विनेश फोगाट ने कहा था कि धरना दे रहे हरियाणा के पहलवानों को दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं है।

पहलवान साक्षी मलिक ने तो यहाँ तक कह दिया था, “हम अपना बयान सुप्रीम कोर्ट में दर्ज कराएँगे। उनको (बृजभूषण शरण सिंह) को जेल में डालने और सभी पदों से हटाने के बाद ही हमारा प्रदर्शन खत्म होगा।” पहलवान बृजभूषण शरण सिंह ने सांसद की सदस्यता छोड़ने की भी माँग रहे हैं।

पुतिन के घर पर ड्रोन अटैक की कोशिश: रूस ने बताया राष्ट्रपति की हत्या की साजिश, यूक्रेन को ठहराया जिम्मेदार

रूस और यूक्रेन (Ukrain-Russia War) के बीच पिछले कई महीनों से युद्ध जारी है। इस बीच रूस ने यूक्रेन पर आरोप लगाया है कि उसने मध्य मास्को में स्थित राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के आवास क्रेमलिन को ड्रोन के जरिए निशाना बनाकर उनकी हत्या करने की कोशिश की।

रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय ने कहा कि सुरक्षा बलों ने रात में दो ड्रोन को मार गिराया है। वहीं, पुतिन के प्रवक्ता ने कहा कि रूसी नेता उस समय परिसर में नहीं थे। इस मामले पर यूक्रेन का कहना है कि ड्रोन हमले से उसका कोई लेना-देना नहीं है।

बता दें कि सोशल मीडिया पर वायरल एक क्लिप में क्रेमलिन के ऊपर विस्फोट से पहले एक छोटी सी वस्तु को उड़ते हुए और बाद में उसमें धुँआ उठते हुए दिखाई दे रहा है। हालाँकि, यह फुटेज सही है या गलत, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

रूस ने कहा कि मध्य मास्को में स्थित बड़े सरकारी परिसर क्रेमलिन को निशाना बनाने वाले दो ड्रोन को रडार का उपयोग करके निष्क्रिय कर दिया गया। रूसी राष्ट्रपति के आवास ने कहा, “पिछली रात कीव शासन ने मानव रहित हवाई वाहनों के साथ रूसी संघ के राष्ट्रपति के क्रेमलिन निवास पर हमला करने का प्रयास किया।”

बयान में कहा गया है कि रूस इसे एक सुनियोजित आतंकवादी कृत्य और राष्ट्रपति की हत्या के प्रयास के रूप में मानता है। रूस जहाँ भी और जब भी आवश्यक समझेगा, प्रतिशोधात्मक उपाय करेगा। बता दें कि रूस के राष्ट्रपति की सुरक्षा बेहद उच्च कोटि की है।

रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि ड्रोन के टुकड़े क्रेमलिन स्थल पर गिरे लेकिन किसी को चोट नहीं आई और इमारतों को कोई नुकसान नहीं हुआ। कार्यालय ने कहा कि राष्ट्रपति सुरक्षित हैं और उनका कार्यक्रम सामान्य रूप से जारी रहेगा।

बता दें कि यह घटना रूस की 9 मई विजय दिवस परेड से कुछ समय पहले हुई थी। इस विजय दिवस में कई विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के शामिल होने की उम्मीद है। यह द्वितीय विश्वयुद्ध में रूस की जीत के रूप में मनाया जाता है। अब माना जा रहा है कि इस घटना के बाद रूस यूक्रेन पर नए सिरे से हमले कर सकता है।

उधर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमीर ज़ेलेंस्की के प्रवक्ता ने कहा कि पिछले साल रूस के आक्रमण के बाद यूक्रेन अपने क्षेत्र को मुक्त कराने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने कहा कि इस घटना से संकेत मिलता है कि रूस यूक्रेन में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति के प्रवक्ता सेर्ही निकिफोरोव ने कहा, “मास्को में जो हुआ वह स्पष्ट रूप से 9 मई से पहले स्थिति को खराब करने के लिए बनाया गया है। यह घटना रूस को यूक्रेन में नागरिक लक्ष्यों पर हमलों को सही ठहराने में मदद कर सकती है और रूस के अंदर स्थानीय प्रतिरोध बलों की छापामार गतिविधियों का संकेत भी दे सकती है।”

जो बजरंग दल राम भक्तों की रक्षा के लिए बना, जो इस्लामी कट्टरपंथ से है लड़ता; उस पर कर्नाटक में प्रतिबंध का वादा कॉन्ग्रेस की हिंदू घृणा का एक और नमूना

कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा (Karnataka Assembly election 2023) के लिए 10 मई 2023 को वोट पड़ने हैं। चुनावों में सत्ताधारी बीजेपी और कॉन्ग्रेस के बीच कड़ी टक्कर बताई जाती है। इस चुनाव में कॉन्ग्रेस ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ वाला कार्ड चलकर ध्रुवीकरण की कोशिशों में लगी है। पहले उसने मुस्लिम आरक्षण (Muslim Reservation) को फिर से बहाल करने का वादा किया। जब घोषणा-पत्र (Congress Manifesto) जारी किया तो उसमें हिंदुवादी संगठन बजरंग दल की तुलना कट्टर इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से की। बजरंग दल (Bajrang Dal) पर प्रतिबंध लगाने का वादा किया। इतना ही नहीं कुछ महीने पहले पीएफआई ने कर्नाटक में अल्पसंख्यकों के नाम पर जितना फंड माँगा था, घोषणा-पत्र में काॅन्ग्रेस ने उतना ही देने का वादा भी किया है।

पिछले साल ही उन साजिशों का खुलासा हुआ था, जिससे पता चला कि पीएफआई 2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के मिशन पर काम कर रहा है। इसके लिए वह मुस्लिम युवाओं को ट्रेनिंग दे रहा था। देशभर में हिंसा के मामलों में इस इस्लामी संगठन की संलिप्तता भी सामने आती रही है। केंद्र सरकार अब इस कट्टरपंथी संगठन को प्रतिबंधित कर चुकी है। दूसरी तरफ बजरंग दल ऐसा संगठन है जो इस्लामी कट्टरपंथ के खतरों से लड़ता है। जैसा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान कहते हैं, “बजरंग दल एक राष्ट्रवादी संगठन है। यह संगठन आतंकवाद और लव जिहाद का विरोध करता है। समाज सेवा में विश्वास करता है।”

जाहिर है कि पीएफआई और बजरंग दल की नीति और नीयत में दूर-दूर तक कोई समानता नहीं है। बावजूद कॉन्ग्रेस का बजरंग दल पर प्रतिबंध की बात करना बताता है कि वह पीएफआई पर केंद्र की मोदी सरकार की कार्रवाइयों से खार बैठी है। इसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि कर्नाटक में जब कॉन्ग्रेस की सरकार थी तो पीएफआई के 1600 आतंकियों के खिलाफ केस वापस लिए गए थे। तो क्या कर्नाटक चुनाव के बहाने इस्लामी कट्टरपंथियों को कॉन्ग्रेस यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि यदि वह सत्ता में आती है तो वे बेरोकटोक फिर से अपनी गतिविधियों में लग सकते हैं? इसके लिए जरूरी नहीं है कि वे पीएफआई के ही नाम से काम करें। हम पहले भी देख चुके हैं कि कैसे सिमी पर प्रतिबंध के बाद उसी कट्टरपंथी एजेंडे को पीएफआई के रूप में विस्तार मिला। कॉन्ग्रेस की इस छिपी हुई रणनीति के संकेत छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भी ताजा बयान से मिलते हैं। बघेल ने अपने राज्य में भी बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने पर विचार की बात कही है। दिलचस्प यह है कि इस साल के अंत तक छत्तीसगढ़ में भी चुनाव होने हैं।

कब, कैसे, क्यों बना बजरंग दल

विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने 1984 में ‘श्रीराम जानकी रथ यात्रा’ शुरू की। राम भक्तों को लगातार धमकियाँ मिल रही थी। लेकिन उस समय की उत्तर प्रदेश सरकार ने सुरक्षा देने से इनकार कर दिया। उस समय प्रदेश में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में उसी काॅन्ग्रेस की सरकार थी जो आज प्रतिबंध लगाने की बात कर रही है। ऐसे में रामभक्तों की सुरक्षा के लिए 8 अक्टूबर 1984 को बजरंग दल की स्थापना की गई। हिंदुवादी नेता विनय कटियार इसके संस्थापक संयोजक थे। उसके बाद से रामजन्मभूमि मुक्त आंदोलन में इस संगठन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बजरंग दल पर पहले भी प्रतिबंध लगा चुकी है कॉन्ग्रेस

6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढाँचा ध्वस्त हो गया। उसके बाद केंद्र की तत्कालीन काॅन्ग्रेस सरकार ने बजरंग दल पर प्रतिबंध लगा दिया। एक साल बाद प्रतिबंध हटा लिया गया। सवाल है कि यदि काॅन्ग्रेस के लिए पीएफआई की कट्टरता और बजरंग दल की हिंदुवादिता एक जैसी ही है तो उसने पहले ऐसी नौबत क्यों आने दी जो इस संगठन की नींव पड़ी? जब उसने बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाया तो फिर उसे एक ही साल में क्यों हटाया? जाहिर है कि बजरंग दल बस एक बहाना है। काॅन्ग्रेस का असली मकसद इस बहाने से हिंदुओं को नीचा दिखाना और इस्लामी कट्टरपंथियों को तुष्ट करना है।

बजरंग दल का मौजूदा संगठन

बजरंग दल की वेबसाइट बताती है कि 1993 में ही उसका सांगठनिक विस्तार हो चुका था। सभी राज्यों में उसकी ईकाई बन गई थी। आज भी यह संगठन देश भर में सक्रिय है। देश भर के 13 लाख युवा संगठन से जुड़े बताए जाते हैं। धार्मिक स्थानों की सुरक्षा, गौरक्षा के लिए संगठन काम कर रही है। घुसपैठ, लव जिहाद, लैंड जिहाद जैसी चुनौतियों से लड़ रही है। भूकंप, दुर्घटना जैसी प्राकृतिक आपदाओं में उसके कार्यकर्ताओं को राहत एवं बचाव कार्यों में भी शामिल देखा जा सकता है। इसके अलावा भी संगठन कई सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ा रही है।

काॅन्ग्रेस की वही पुरानी नफरत

यह काॅन्ग्रेस की तुष्टिकरण ही जिसने सिमी और पीएफआई जैसे इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों को भारत में फलने-फूलने की जगह दी। यह काॅन्ग्रेस की तुष्टिकरण ही है जिसने हिंदू, उनके धार्मिक स्थानों, उनके हितों की रक्षा के लिए बजरंग दल जैसे संगठनों की आवश्यकता को पैदा किया। यह काॅन्ग्रेस की तुष्टिकरण ही है जो वह कभी राम को तो कभी बजरंग बली को अपमानित कर हिंदुओं को नीचा दिखाने का काम करती है। यह जगजाहिर है कि अयोध्या में राम मंदिर के राह में काॅन्ग्रेस ने कितनी अड़चनें पैदा की। यहाँ तक कि नेहरू रामलला को ही बेघर करने पर अमादा थे। ऐसे समय में जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर का स्वरुप आकार ले रहा है तो काॅन्ग्रेस बजरंग दल को निशाने पर लेकर अपनी तुष्टिकरण का प्रदर्शन कर रही है।

राम मंदिर का निर्माण रोकने में विफल रही काॅन्ग्रेस अब हिंदुओं से वह सुरक्षा कवच छीनना चाहती है जो राम भक्तों की, उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए बनी है। इसलिए जरूरी है कि केवल कर्नाटक ही नहीं देश के हर कोने में ‘काॅन्ग्रेस मुक्त भारत’ की भावना और बलवती हो ताकि फिर कोई पीएफआई भारत राष्ट्र के धर्मांतरण की साजिश न रच सके।

PM मोदी पर डॉक्यमेंट्री को लेकर BBC, विकिपीडिया और इंटरनेट अर्काइव को समन: RSS और VHP को बदनाम करने को लेकर दायर है मानहानि का मुकदमा

दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार (3 मई 2023) को ब्रिटेन की मीडिया कंपनी BBC, विकिमीडिया और इंटरनेट अर्काइव को समन जारी किया है। बीबीसी द्वारा ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ (India: The Modi Question) के डॉक्यूमेंट्री बनाने के बाद भाजपा नेता बिनय कुमार सिंह ने BBC के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

इस मामले पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (ADJ) रुचिका सिंगला ने बीबीसी के साथ-साथ विकिपीडिया की फंडिंग करने वाली कंपनी विकिमीडिया फाउंडेशन और अमेरिका में स्थित डिजिटल लाइब्रेरी ‘इंटरनेट आर्काइव’ को भी समन भेजा है। अदालत ने समन की तामील की तारीख से 30 दिनों के भीतर लिखित बयान दर्ज करने का निर्देश दिया है।

बिनय कुमार सिंह ने यह कहते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था किया कि वह झारखंड भाजपा की राज्य कार्यकारी के सदस्य और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के सक्रिय स्वयंसेवक हैं। दायर मुकदमे में उन्होंने कहा है कि बीबीसी ने डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से आरएसएस, विहिप और भाजपा जैसे संगठनों को बदनाम किया है।

अपनी याचिका में उन्होंने कहा, “आरएसएस और वीएचपी के खिलाफ लगाए गए आरोप संगठनों और उसके लाखों सदस्यों/स्वयंसेवकों को बदनाम करने के दुर्भावनापूर्ण इरादे से प्रेरित हैं। इस तरह के आरोप न केवल निराधार हैं, बल्कि आरएसएस, वीएचपी की प्रतिष्ठा और छवि को नुकसान पहुँचाने वाले भी हैं।”

इसमें आगे कहा गया है, “प्रतिवादी नंबर 1 (बीबीसी) ने दावों की प्रामाणिकता की पुष्टि किए बिना रणनीतिक और उद्देश्यपूर्ण रूप से निराधार अफवाहें फैलाईं। इसके अलावा, इसमें लगाए गए आरोप कई धर्मों, विशेष रूप से हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देते हैं।”

बार एंड बेंच के अनुसार, इस दौरान कोर्ट को बताया गया है कि भारत सरकार ने इस डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बावजूद विकिपीडिया पर इसके लिए एक पेज बनाया गया है और उस पर इसे देखने के लिए लिंक दिया गया है। इसके साथ ही यह सामग्री अभी भी इंटरनेट आर्काइव पर उपलब्ध है।

याचिका में कहा गया है, “यह एक उचित निष्कर्ष की ओर जाता है कि सभी तीन प्रतिवादी देश की छवि को खराब करने के साथ-साथ RSS और VHP जैसे प्रतिष्ठित संगठनों की छवि को खराब करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।” इस मामले की अगली सुनवाई 11 मई 2023 को होगी।

₹10000 करोड़ का घोटाला, दारू के पैसे से चल रही नीतीश कुमार की पार्टी JDU: बिहार BJP अध्यक्ष का दावा, कहा- शराबबंदी में हो रही होम डिलीवरी

बिहार के भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर शराबबंदी सहित कई मामलों को लेकर जोरदार हमला बोला है। चौधरी ने कहा कि शराब बिहार के हर हर में पहुँच चुकी है और होम डिलीवरी के जरिए सीएम नीतीश कुमार पैसे कमा रहे हैं।

सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार की सरकार पर शराब घोटाले का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “आज हर घर में शराब पहुँच गई है और नीतीश कुमार को होम डिलीवरी के जरिए पैसा मिल रहा है। नीतीश कुमार की पार्टी अवैध शराब में 10,000 करोड़ रुपए का घोटाला कर रही है।”

उन्होंने बिहार की नीतीश सरकार पर शराब माफियाओं के साथ साँठ-गाँठ का भी आरोप लगाया। चौधरी ने कहा, “प्रशासन शराब माफियाओं के साथ मिलकर सारा पैसा जद (यू) के खाते में भेज रहा है। इसलिए आज हम संकल्प लेते हैं कि 2024 में हम बिहार में पूर्ण बहुमत से जीतेंगे।”

सासाराम के एक कार्यक्रम में बोलते हुए सम्राट चौधरी ने मंगलवार (2 मई 2023) को कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम को रद्द कराने के लिए मुख्यमंत्री आवास एक अणे मार्ग से साजिश रची गई। उन्होंने कहा, “सासाराम की धरती पर अमित शाह को आना था। उनके कार्यक्रम को डिस्टर्ब करने के लिए नीतीश कुमार की सरकार ने ये पूरा कुचक्र रचा था।

चौधरी ने कहा कि जब भी शोभायात्रा निकलती थी, पुलिस फोर्स को लगाया जाता था। उन्होंने कहा, “हम लोगों ने गृह सचिव और डीजीपी से कहा कि स्थिति गड़बड़ हो रही है फ्लैग मार्च कराइए, लेकिन कुछ नहीं किया गया। सरकार षडयंत्र कर रही थी कि सासाराम में अमित शाह नहीं आएँ। वे जल्द सासाराम आएँगे। कोई माई का लाल रोक नहीं सकता है।

सासाराम में रामनवमी के दंगे को लेकर अमित शाह ने अपना कार्यक्रम रद्द दिया था। वहीं, उस दंगे को लेकर पाँच बार विधायक रहे जवाहर प्रसाद को बिहार पुलिस ने आरोपित बनाकर गिरफ्तार कर लिया है। सम्राट चौधरी ने कहा कि जवाहर प्रसाद 70 साल के बुजुर्ग हैं और वो साधु आदमी हैं।

चौधरी ने कहा, “घटना के बाद एक माह तक जवाहर प्रसाद प्रशासन से मिलते रहे, लेकिन प्रशासन ने कभी नहीं कहा कि आपको गिरफ्तार करना है। अमित शाह के कार्यक्रम की जब घोषणा हुई, तब विधायक का जिला प्रशासन से झगड़ा हुआ। जिला प्रशासन ने कहा कि ज्यादा तंग कीजिएगा तो आपके होम मिनिस्टर के कार्यक्रम को रद्द करा देंगे।”

गौरतलब है कि जवाहर प्रसाद को गिरफ्तार करने के लेकर भाजपा मंगलवार को धरना पर बैठी थी। इस धरने में भाजपा के कई दिग्गज नेता भी पहुँचे थे। बता दें कि भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने अपने संसदीय क्षेत्र बेगुसराय में ‘सम्राट चौधरी बिहार के योगी हैं’ के नारे लगवाए थे।

उन्होंने कहा था, “मैं देख रहा हूँ सम्राट चौधरी जिस दिन से अध्यक्ष बने हैं, नारे लग रहे हैं सम्राट चौधरी बिहार का…? बिहार का…? बिहार का…? बिहार का…?” इसके बाद भीड़ की ओर से जवाब मिला ‘योगी है’ और ‘मुख्यमंत्री हो’।

मंगलवार (2 मई 2023) को यह नारेबाजी मंच से स्थानीय विधायकों, राज्यसभा सांसद और संगठन के तमाम नेताओं की उपस्थिति में हुई। हालाँकि, पत्रकारों के सवाल पर गिरिराज ने कहा, “यह मैंने नहीं कहा। आपने कहा कि बिहार में योगी जैसा मुख्यमंत्री चाहिए और सम्राट चौधरी का नाम आप ही ले रहे हैं।”