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अपनी ही अम्मी से गुलफाम का अवैध संबंध, शक में अब्बा शाहिद ने चाकू घोंप मार डाला: बताया- मेरे बदले बच्चों के साथ रहना पसंद करती थी बीवी

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से हैरान करने वाली खबर सामने आई है। पुलिस ने यहाँ शाहिद नाम के शख्स को बेटे गुलफाम की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही कत्ल में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद किया है। यह मामला तब सामने आया जब शाहिद के खिलाफ उसकी बीवी ने ही अपने बेटे की हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने 45 वर्षीय शाहिद को 29 अप्रैल 2023 को गिरफ्तार किया। उसने अपना जुर्म कूबल कर लिया है। आरोपित ने पुलिस को बताया कि उसे अपनी बीवी और बेटे गुलफाम के बीच अवैध संबंधों का शक था। उसने उन्हें कई बार समझाने का प्रयास किया, लेकिन ये लोग उसके साथ झगड़ा करते थे। उसे मारते-पीटते थे। शाहिद बीवी को अपने साथ रहने के लिए कहता था, लेकिन वह उसकी बजाए अपने बच्चों के साथ रहना पसंद करती थी। इस बात से वह काफी गुस्से में रहता था।

आरोपित ने बताया कि 5 मार्च 2023 को उसने अपने बेटे गुलफाम को गाँव हाजीपुर में बुलाया और उसे फिर से समझाने का प्रयास किया तो वह उससे नाराज होकर बहस करने लगा। इससे आहत आरोपित ने गुलफाम पर छूरे से वार कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद शाहिद ने छूरे को आम के बाग में झााड़ियों में छुपाकर रख दिया था।

पुलिस के अनुसार, मृतक की अम्मी ने आरोप लगाया है कि उसके शौहर का बेटे गुलफाम से किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। आरोपित ने गुस्से में आकर उसे चाकू से गोदकर घायल कर दिया। इसके बाद गुलफाम की मृत्यु हो गई। पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए शाहिद के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 4/25अवैध शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

गौरतलब है कि इस घटना से दो दिन पहले 3 मार्च 2023 को बिजनौर के किरतपुर थाना इलाके में 5 साल की मासूम की हत्या की गुत्थी सुलझाई गई थी। पुलिस के मुताबिक, रेप में नाकाम रहने पर पास के ही अमान खान (19) नाम के शख्स ने बच्ची की गला रेत कर हत्या कर दी थी। बच्ची की लाश बरामद होने के बाद पुलिस ने 24 घंटे में आरोपित को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया था।

‘हिन्दू राष्ट्र बने भारत’: मथुरा पहुँचे नेपाल के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने की माँग, बोले – इससे पूरी दुनिया पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव, शंकराचार्य का लिया आशीर्वाद

नेपाल के पूर्व मुख्य न्यायाधीश गोपाल परांजलि ने भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की वकालत की है। परांजलि ने कहा है कि भारत के हिंदू राष्ट्र बनने से पूरी दुनिया पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने यह बात सोमवार (1 मई, 2023) को मथुरा में कही।

दरअसल, नेपाल के पूर्व मुख्य न्यायाधीश गोपाल परांजलि प्रतिनिधि मंडल के साथ मथुरा के गोवर्धन में स्थित मंदिरों के दर्शन करने पहुँचे थे। प्रतिनिधि मंडल में उनके साथ पशुपतिनाथ विकास कोष काठमांडू के प्रमुख सदस्य एवं संहिता शास्त्री अर्जुन प्रसाद वास्तोला एवं 10 अन्य लोग उनके साथ थे।

मंदिरों के दर्शन के बाद उन्होंने श्रीआद्य शंकराचार्य आश्रम जाकर गोवर्धनपुरी के पीठाधीश्वर स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ से आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने भारत-नेपाल संबंधों पर चर्चा करते हुए कहा है कि नेपाल सैद्धांतिक रूप से पहले से ही हिंदू राष्ट्र है। ऐसे में यदि भारत को भी हिंदू राष्ट्र घोषित कर दिया जाएगा तो इससे पूरी दुनिया पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। परांजलि ने आगे कहा है कि भारत के हिंदू राष्ट्र बन जाने के बाद दुनिया भर में रह रहे 178 करोड़ से अधिक हिंदुओं को भी गौरव की अनुभूति होगी और उनका आत्मबल भी बढ़ेगा।

इस दौरान वास्तोला पशुपतिनाथ विकास कोष काठमांडू के प्रमुख सदस्य एवं संहिता शास्त्री अर्जुन प्रसाद वास्तोला ने कहा है कि आज से 2530 साल पहले आद्य शंकराचार्य ने विधर्मियों द्वारा छिन्न-भिन्न की जा चुकी वैदिक सनातन संस्कृति की फिर से स्थपना की थी। अब एक बार फिर शंकराचार्य के विचारों से ही सबका कल्याण होगा।

वास्तोला ने यह भी कहा है कि दुनिया में ईसाई, मुस्लिमों और बौद्धों के भी देश हैं। यहाँ तक कि यहूदियों का भी एक देश है। ऐसे में दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित किया चाहिए। भारत एक दिव्य देश है। यहाँ हमेशा ही ज्ञान की धारा बहती रही है। इसके हिन्दू राष्ट्र घोषित हो जाने से दुनिया के करोड़ों सनातनियों का आत्मबल मजबूत होगा। साथ ही दुनिया का कल्याण होगा।

‘आडवाणी भी जेल गए थे, और लोग भी जाएँगे’: रामचरितमानस को कूड़ा-कचरा बताने वाले बिहार के शिक्षा मंत्री ने अब बागेश्वर धाम वाले बाबा को धमकाया

संत तुलसीदास कृत पवित्र हिन्दू धर्म ग्रन्थ रामचरितमानस को कूड़ा-कचरा बताने वाले बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव ने अब बागेश्वर धाम के पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को निशाना बनाया है। उन्होंने कहा, “बाबा बागेश्वर अगर गंदे काम करने आएँगे तो बिहार इजाजत नहीं देगा, अगर नफरत फैलाने आए हो तो आडवाणी भी जेल गए थे, और लोग भी जाएँगे। बागेश्वर बाबा हो या कोई बाबा हों, उनके पास कोई तिलस्म या चमत्कार नहीं है।”

साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री और उनके जैसे अन्य लोग धर्म के नाम पर व्यापार करते हैं। बता दें कि मध्य प्रदेश के छतरपुर में स्थित बागेश्वर बालाजी धाम लाखों अनुयायी पहुँचते हैं। वहाँ भगवान हनुमान का मंदिर है, जिसके महंत पंडित शास्त्री हैं। उधर राजद नेता व मंत्री तेज प्रताप यादव पूरी की पूरी सेना तैयार कर के बैठे हैं। वहीं पूर्व उप-मुख्यमंत्री व भाजपा नेता सुशिल कुमार मोदी ने राजद नेताओं को चुनौती दी है कि वो इस्लाम और ईसाई प्रचारकों पर ऐसी टिप्पणी कर के दिखाएँ।

सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि राजद को जगदानंद और चंद्रशेखर के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। जगदानंद ने राम मंदिर को ‘नफरत की जमीन पर बनने वाला धर्मस्थल’ कहा था। मोदी ने पूछा कि लालू यादव ने इस बयान पर मौन साधा, किसका वोट पाने के लिए? उन्होंने याद किया कि जैसे राजद नेता गुलाम रसूल बलियावी ने पूरे बिहार को कर्बला की भूमि बना देने की धमकी दी थी। सुशील मोदी ने कहा कि विपक्ष में रहने पर राजद को मंदिर और हवन-पूजन याद आता है, जबकि सत्ता में आते ये लोग अहंकारी हो जाते हैं।

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने कहा, “बाबा के चमत्कार की हवा तो मशहूर माइंड रीडर सुहानी शाह निकाल चुकी हैं। उनका सारा तिलस्म झूठ का कबाड़ है।” बता दें कि शनिवार (13 मई, 2023) को पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री बिहार पहुँच रहे हैं। पटना के नौबतपुर में उनका कार्यक्रम होना है। बिहार-झारखंड से लाखों श्रद्धालु आने वाले हैं। आयोजकों का कहना है कि इसके सामने गाँधी मैदान भी छोटा पड़ गया है।

JNU में हुई ‘The Kerala Story’ की स्क्रीनिंग: वामपंथी SFI ने रोया ‘सेक्युलरिज्म’ का रोना, कहा – ये RSS का प्रोपेगंडा, हम निंदा करते हैं

बहुचर्चित फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ की रिलीज से पहले ही जमकर चर्चा हो रही है। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में फिल्म की स्क्रीनिंग हुई। यह स्क्रीनिंग ABVP ने आयोजित की थी। वहीं, वामपंथियों ने स्क्रीनिंग का विरोध किया। फिल्म 5 मई 2023 को रिलीज होगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने जेएनयू परिसर में मंगलवार (2 मई, 2023) शाम 4 बजे स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया था। फिल्म की स्क्रीनिंग का वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने विरोध किया। एसएफआई ने एक बयान जारी कहा, “एसएफआई-जेएनयू इकाई इस प्रचार फिल्म की स्क्रीनिंग की निंदा और कड़ा विरोध करती है। यह फिल्म धर्मनिरपेक्षता के ताने-बाने को कलंकित कर देगी।” यही नहीं, एसएफआई ने यह फिल्म को आरएसएस का प्रोपेगेंडा भी बताया।

दरअसल, ‘The Kerala Story’ फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे केरल में कट्टरपंथी मुस्लिम युवकों को हिन्दू लड़कियों को फँसाने का प्रशिक्षण देते हैं, जिसके बाद लड़की का इस्लामी धर्मांतरण करा के उसे आतंकी संगठन ISIS का सेक्स स्लेव बनने के लिए भेज दिया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने रिलीज पर रोक लगाने से किया इनकार

बता दें कि इस फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की माँग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। लेकिन कोर्ट ने मंगलवार (2 मई, 2023) को इस पर सुनवाई करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। जस्टिस केएम जोसफ और जस्टिस BV नागरत्न की पीठ के समक्ष इसका जिक्र किया गया था। हेट स्पीच संबंधी अपराधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक पेंडिंग रिट पेटिशन दाखिल की गई है, उसी के तहत इस IA को डाला गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसके जरिए किसी फिल्म की रिलीज को चुनौती देना ठीक तरीका नहीं है।

वकील निजाम पाशा ने इस पर तुरंत सुनवाई की माँग की थी। उन्होंने इसे ‘हेट स्पीच की सबसे बुरी घटना’ बता कर पेश किया था। उन्होंने इसे ‘ऑडियो-विजुअल हेट प्रोपेगंडा’ भी करार दिया था। इस पर जजों ने कहा कि इसे हाईकोर्ट क्यों नहीं ले जाया जा सकता और हर प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट से ही क्यों शुरू हो।

सेंसर बोर्ड ने दिया ‘A’ सार्टिफिकेट

गौरतलब है कि सेंसर बोर्ड ने कुछ बदलावों के साथ इसे रिलीज के लिए तैयार किया है। एक दृश्य में हिन्दू देवी-देवताओं को लेकर टिप्पणी (मुस्लिम किरदार द्वारा) थी, जिसे हटाया गया है। भारतीय कम्युनिस्टों को दोहरे रवैये वाला बताने वाली एक टिप्पणी में से ‘भारतीय’ शब्द हटाया गया है। केरल के एक पूर्व मुख्यमंत्री अच्युतानंदम ने राज्य के इस्लामी स्टेट बनने की भविष्यवाणी की थी, उस टीवी इंटरव्यू को हटाया गया है। सेंसर बोर्ड ने 10 दृश्य हटा कर इसे रिलीज के लिए आगे बढ़ाया है। साथ ही फिल्म को A सार्टिफिकेट जारी किया है।

सरकारी कंपनी के पूर्व CMD के ठिकाने से मिला ₹20 करोड़ कैश: CBI की 19 ठिकानों पर छापेमारी, संदिग्ध संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी बरामद

CBI ने भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले का खुलासा किया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली PSU कंपनी WAPCOS (वॉटर एंड पॉवर कंसल्टेंसी) लिमिटेड के पूर्व CMD (चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर) राजेंद्र कुमार गुप्ता के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान केंद्रीय जाँच एजेंसी को 20 करोड़ रुपए से भी अधिक नकद बरामद करने में सफलता मिली है। मंगलवार (2 मई, 2023) को ये कार्रवाई हुई। राजेंद्र गुप्ता पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था।

CBI ने इस मामले में राजेंद्र गुप्ता के अलावा उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भी FIR दर्ज की थी। कई अन्य संपत्तियों के दस्तावेज भी एजेंसी के हाथ लगे हैं, जिनका कोई हिसाब-किताब नहीं है। WAPCOS को ‘Water and Power Consultancy Services (India) Limited’ के नाम से जाना जाता है। ये एक पब्लिक सेक्टर कंपनी है, जो पूरी तरह केंद्र सरकार के मालिकाना हक़ में आती है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय इसके संचालन का काम देखता है।

CBI ने दिल्ली, चंडीगढ़, गुरुग्राम, सोनीपत और गाजियाबाद में 19 ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें आरोपितों से जुड़े आवासीय और कमर्शियल परिसर शामिल थे। कुछ डिजिटल उपकरणों को भी CBI ने अपने कब्जे में ले लिया है। WAPCOS की साइट पर जानकारी दी गई है कि ये कंपनी भारत और विदेशों दोनों में, व्यवसाय और समुदाय से संबंधित पानी, बिजली और इंफ़्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में इंजीनियरिंग कंसल्टेशन सर्विसेज और निर्माण-कार्य का जिम्मा सँभालती है। 

4 अक्टूबर, 2021 से रजनीकांत अग्रवाल कंपनी ने CMD हैं। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि राजेंद्र कुमार गुप्ता के ठिकानों से जो कैश बरामद हुए हैं, उन्हें सूटकेस और बिस्तर में रखा गया था। ये कैश इतना ज्यादा है कि पूरे बेड पर इसे फैलाना पड़ा। ऐसी कंपनियों को टेंडर सौंप कर इंफ्रास्ट्रक्चर व अन्य कार्यों को पूरा करने का जिम्मा दिया जाता है। राजेंद्र गुप्ता की पत्नी रीमा सिंगल को भी इस मामले में आरोपित बनाया गया है।

‘The Kerala Story देखने जाने वालों के लिए मुफ्त ऑटो सर्विस’: महाराष्ट्र के ड्राइवर का ऐलान, कहा – ‘लव जिहाद’ के षड्यंत्र को समझें हिन्दू महिलाएँ

फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ (The Kerala Story) 5 मई, 2023 को रिलीज होगी। लेकिन, इससे पहले ही इस फिल्म को लेकर चर्चा जोरों पर है। इस्लामी कट्टरपंथियों की सच्चाई को उजागर करती इस फिल्म को लेकर लोग चाहते हैं कि हिंदू महिलाएँ अपने खिलाफ हो रहे षड्यंत्र को समझें। महाराष्ट्र के ऑटोरिक्शा चालक साधु मगर एक ऐसे ही हिंदू कार्यकर्ता हैं जो चाहते हैं कि अधिक से अधिक हिंदू महिलाएँ इस फिल्म को देखें और इस्लामी षड्यंत्रो को लेकर जागरूक और सतर्क रहें।

साधु मगर की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर में वह अपने ऑटोरिक्शा के पास खड़े दिखाई दे रहे हैं। अपने ऑटोरिक्शा में उन्होंने एक बैनर लगाया है। इस बैनर में लिखा है कि फिल्म ‘द केरला स्टोरी‘ देखने जाने वाले लोगों के लिए उनका ऑटो बिल्कुल फ्री है। साथ ही उन्होंने इस बैनर में यह भी लिखा है कि उनके ऑटो से फिल्म देखने जाने वाली पहली दस महिलाओं के वह टिकट भी खरीदकर देंगे।

साधु मगर की फोटो वायरल होने के बाद ऑपइंडिया ने उनसे बात की। इस बातचीत में ‘द केरला स्टोरी’ मुफ्त में दिखाने को लेकर उन्हें प्रेरणा कैसे मिली इस बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते थे। लेकिन उन्होंने बातचीत की शुरुआत ‘जय श्री राम’ और ‘जय हिंदू राष्ट्र’ के संबोधन के साथ ‘गर्व से कहो, हम हिंदू हैं’ कहते हुए की।

साधु मगर महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के अक्कलकोट शहर के रहने वाले हैं। पहले वह पुणे की एक कंपनी में काम करते थे। लेकिन तीन साल पहले उन्होंने एक ऑटोरिक्शा खरीदा और अपना व्यवसाय शुरू किया। भले ही उनका व्यवसाय बहुत बड़ा नहीं है। लेकिन वह वह हमेशा से ही एक मालिक बनना चाहते थे। वह पुणे के आलंदी और मार्कल इलाके में ऑटोरिक्शा चलाते हैं।

गौरतलब है कि अक्कलकोट श्री स्वामी समर्थ के मंदिर के लिए मशहूर है। श्री स्वामी समर्थ को भगवान दत्तात्रेय के अवतार के रूप में पूजा जाता है। साथ ही संत ज्ञानेश्वर की समाधि भी आलंदी में ही है। इसको लेकर साधु मगर ने कहा, जहाँ वह रहते हैं और जहाँ वह काम करते हैं दोनों ही स्थानों ने धर्म के प्रति समर्पण की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

साधु मगर ने कहा, “मुझे शुरू से ही धार्मिक कार्य पसंद थे। लेकिन ऐसा करने के लिए मेरे पास उपयुक्त साधन नहीं था। जबसे मैंने अपना ऑटोरिक्शा खरीदा है मैं धार्मिक कार्यों में लगा रहता हूँ।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने ‘द केरल स्टोरी’ का ट्रेलर देखा। मुझे यह बहुत अच्छा लगा। ठीक वैसे ही जैसे मुझे ‘द कश्मीर फाइल्स’ पसंद आई थी। ट्रेलर देखने के बाद मैंने फिल्म देखने जाने वालों को मुफ्त ले जाने का फैसला किया। मैं जानता हूँ कि हजारों हिंदू महिलाएँ ‘लव जिहाद’ का शिकार हुई हैं। इसलिए मैं चाहता हूँ कि हिंदू महिलाएँ इस षड्यंत्र के बारे में समझें और सतर्क रहें। मैं उन्हें इन सब चीजों के बारे में जागरूक करना चाहता था। इसके लिए फिल्म से बेहतर कोई अन्य माध्यम ठीक नहीं लगा। इसलिए मैंने यह फैसला किया।”

साधु मगर ने आगे कहा, “मैं अक्सर फिल्में नहीं देखता। लेकिन, अगर कोई ऐसी फिल्म है जो किसी अच्छे उद्देश्य को लेकर होती है उसे मैं जरूर देखता हूँ। मैं चाहता हूँ कि अन्य लोग भी ऐसी फिल्में देखें। इसके लिए मैं जो कुछ भी कर सकता हूँ हर हाल में करने की कोशिश करता हूँ। पिछले साल ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म रिलीज हुई थी। मैंने फिल्म देखी। मुझे यह बहुत पसंद आई। इसमें कश्मीर में हिंदुओं पर हुए अत्याचारों को साफ तौर पर दिखाया गया था। यह सब किसी अन्य फिल्म में नहीं दिखाया गया। इसलिए, जो लोग भी वह फिल्म देखना चाहते थे मैं उन्हें अपने ऑटोरिक्शा में मुफ्त में जाता था।”

उन्होंने यह भी कहा है, “5 मई को मैं सबसे पहले इस फिल्म को देखूँगा। अगर यह फिल्म लव जिहाद की समस्या को सही तरीके से दर्शाती है तो मैं लोगों को फिल्म देखने के लिए मुफ्त में ले जाऊँगा। लेकिन अगर फिल्म में किसी भी तरीके से हिंदू विरोधी बातों का थोड़ा सा भी जिक्र किया गया है या फिर लव जिहाद के मुद्दे को सही तरीके से दिखाने में किसी भी तरह का समझौता किया गया है तो मैं फेसबुक पर एक पोस्ट लिखूँगा। इस पोस्ट के माध्यम से लोगों को बताऊँगा कि यह फिल्म सच्चाई नहीं दिखा रही है, इसलिए इस फिल्म को न देखें।”

साधु ने आगे कहा, “लेकिन अगर यह ‘लव जिहाद’ और केरल में जो कुछ हुआ है उसे ठीक से दिखाती है तो मैं लोगों को यह फिल्म दिखाने के लिए ले जाऊँगा और कोई पैसा नहीं लूँगा। मेरे लिए जरूरी है कि मैं पहले इसे देखूँ और सच्चाई जान सकूँ। पूरी फिल्म देखने से पहले हम कुछ नहीं कह सकते। अभी फिल्म के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही प्रोपेगैंडा किया जा रहा है।”

इन सबके बीच एक और बात ऑपइंडिया के सामने आई, वह यह कि साधु मगर पुणे शहर में कहीं भी भारतीय सैनिकों और अधिकारियों को मुफ्त में सेवाएँ देते हैं। वह विद्यार्थियों को मुफ्त में स्कूल भी ले जाते हैं। जब भी वह गरीब लोगों को देखते हैं जिनके पास कोई पैसा नहीं है, तो वह उनसे भी पैसे नहीं लेते।

साधु मगर ने यह भी कहा कि वह खुद से धार्मिक कार्य करते हैं और किसी संगठन से नहीं जुड़े हैं। अपने हाथ में गर्व से कलावा रखने वाले और माथे पर तिलक लगाने वाले मगर इस तरह एक आम हिंदू नागरिक का प्रतीक बन गए हैं। वो कहते हैं कि वो सच बोलने की इच्छा रखते हैं, भले ही यह कितना भी असहज या राजनीतिक रूप से गलत क्यों न हो।

‘बजरंग दल’ के दलित समर्थक की हत्या, उत्तराखंड पुलिस ने आजम, इरफ़ान, रिजवान और साबिर को दबोचा: मृतक के परिवार का आरोप – घर में घुस महिलाओं से की थी छेड़छाड़

उत्तराखंड के नैनीताल में ‘बजरंग दल’ के समर्थक दलित अरविंद सागर उर्फ़ पप्पी की रविवार (30 अप्रैल, 2023) को हत्या कर दी गई। पुलिस ने घटना का पर्दाफाश कर लिया है। जिप्सी पर सवार होकर आए अपराधियों ने पहले उन्हें घर से बुलाया, फिर 250 मीटर दूर ले जाकर उन पर गोलीबारी कर दी। आक्रोशित परिजनों ने इसके बाद हत्यारों की गिरफ़्तारी के लिए सिटी एसपी का घेराव भी किया। 24 वर्षीय अरविंद सागर शिवलालपुर रियूनिया के रहने वाले थे।

उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनके शरीर में 3 गोलियाँ लगी थीं। मृतक के भाई चंदन ने बताया कि एकाध महीने पहले मुस्लिमों से उनका विवाद हुआ था, जिसके बाद 20-25 लोग घर के भीतर घुसे थे और घर की महिलाओं पर हाथ लगाया था, लेकिन तहरीर के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। चंदन ने बताया कि आजम सहित सभी हत्यारे आए और एक लड़ाई में मदद की माँग करते हुए साथ ले गए।

चंदन का कहना है कि उनके माँ-बाप नहीं है और सिर्फ एक भाई था, जिसने पाल-पोष कर बड़ा किया था और आज उसके साथ ऐसा हो गया। मृतक के चाचा रमेश ने बताया कि सुबह जब ये घटना हुई, तब वो घूम रहे थे। उन्होंने बताया कि 5-6 लोग हत्या के लिए आए थे और झगड़े की बात कह कर गाड़ी में बिठा कर ले गए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी उनकी सुनवाई नहीं हुई है। उत्तराखंड पुलिस ने बयान देकर पूरे मामले को साफ़ किया है।

SHO अरुण कुमार ने कहा कि उन्हें अस्पताल से गोलीबारी में मौत की सूचना मिली थी। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम में भिजवाया गया। इस मामले में संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। पुलिस द्वारा पहले कार्रवाई न किए जाने की बात को नकारते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा कोई बात नहीं है। पुलिस ने घटना के 36 घंटों के भीतर 4 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया। हत्या के खुलासे के लिए 10 टीमों का गठन किया गया था।

घटना के बाद सीसीटवी खँगाला गया, सोशल मीडिया की मॉनिटरिंग की गई और मुखबिरों से सूचना ली गई। जसपुर खुर्द निवासी 20 वर्षीय आजम, लूटाबड़ रामनगर निवासी इरफ़ान, महुआखेड़ा गंज निवासी 24 साल का रिजवान उर्फ सुक्खा और साबिर उर्फ पंचर को गिरफ्तार किया गया है। घटना में इस्तेमाल की गई बाइक और तमंचा जब्त कर लिया गया है। ऑपइंडिया से बात करते हुए VHP जिला मंत्री रामनगर यशपाल ने बताया कि मृतक हिंदू संगठन में कोई लिखित पदाधिकारी नहीं था, लेकिन वो संगठन की सभाओं में आता जाता था।

1600 PFI दंगाइयों पर से केस वापस लेने वाली कॉन्ग्रेस अब ‘बजरंग दल’ के पीछे पड़ी: वोटों के लिए किया था राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़, SDPI से भी हुई थी ‘डील’

देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करना कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए कोई नई बात नहीं है। मुस्लिम तुष्टिकरण तो तभी से चला आ रहा है जब से पार्टी का जन्म हुआ था। PFI जिस तरह से फैला-फूला, उसमें कॉन्ग्रेस पार्टी का भी बड़ा योगदान है। मोदी सरकार ने बड़ी तैयारी के साथ ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया’ को बैन किया। इसने 2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की साजिश के साथ हथियारों के प्रशिक्षण से लेकर विदेशी फंडिंग जुटाने तक के प्रयास तेज कर दिए थे।

अब कॉन्ग्रेस पार्टी अपने घोषणापत्र में ‘बजरंग दल’ की तुलना PFI से करते हुए इसे प्रतिबंधित करने का वादा कर रही है। ‘बजरंग दल’ का नाम आज तक न तो किसी देश विरोधी गतिविधि में आया है और न ही राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ जाकर इसने कुछ किया है। संगठन हिन्दुओं को सुरक्षा देने का कार्य करता है। पीड़ित हिन्दुओं की आवाज़ उठाता है। ऐसे में बजरंग बली की जन्मभूमि पर ‘बजरंग दल’ को बैन करने का वादा करना कॉन्ग्रेस की हिन्दू विरोधी मानसिकता को बताता है।

ये वही कॉन्ग्रेस पार्टी है, जिसने केंद्र में सत्ता में रहते लिंगायत समाज को अलग धर्म की मान्यता देने का प्रयास कर के हिन्दू धर्म को तोड़ने की कोशिश की थी। लिंगायत समाज भगवान शिव की पूजा करता है। कॉन्ग्रेस पार्टी का हमेशा से प्रयास रहा है कि हिन्दुओं को कमजोर किया जाए और मुस्लिम तुष्टिकरण कर के अपने पक्ष में हिन्दू विरोधी वोटों का ध्रुवीकरण किया जाए। लेकिन, लोग अब पार्टी के इस प्रयास को समझ गए हैं और यही कारण है कि जनता ने कई राज्यों की सत्ता से उसे उखाड़ फेंका।

1600 PFI सदस्यों के खिलाफ केस वापस लिया था कॉन्ग्रेस सरकार ने

कर्नाटक में मई 2013 से मई 2018 तक सिद्धारमैया मुख्यमंत्री रहे और कॉन्ग्रेस सत्ता में रही। इसके बाद भी अगले 1 वर्ष तक JDS के एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री रहे और कॉन्ग्रेस सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा रही। इन 6 वर्षों में PFI को पनपने के बड़ा अवसर दिया गया। इसका सबसे बड़ा उदाहरण समझने के लिए हमें चलना होगा जून 2015 में। तब सिद्धारमैया की सरकार ने 1600 PFI आतंकियों के खिलाफ सारे केस वापस लेने का निर्णय लिया था।

सोचिए, ये कितना खतरनाक निर्णय था। एक ऐसा संगठन जिसके दर्जनों ठिकानों पर NIA की छापेमारी में हथियार और देश विरोधी साहित्य से लेकर विदेशी फंडिंग के सबूत तक मिले, उसके सदस्यों के साथ इतनी नरमी? ये अदूरदर्शिता का नहीं, बल्कि जानबूझ तक तुष्टिकरण और वोटों के लिए देश की सुरक्षा से खेलने का मामला था। आज इस संगठन की तुलना ‘बजरंग दल’ से कर के कॉन्ग्रेस विपक्ष में बैठ कर भी यही काम कर रही है।

PFI के अलावा ‘कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी (KFD)’ के सदस्यों पर से भी केस वापस लिए गए थे। ये दोनों ही संगठन SIMI से निकले थे, जिसका गठन उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में अप्रैल 1977 में हुआ था। ये एक आतंकी संगठन था, जिसके लोगों ने बाद में ‘इंडियन मुजाहिद्दीन’ बनाया। जयपुर, इलाहाबाद, दिल्ली, पुणे, पटना और बोधगया से लेकर हैदराबाद तक बम विस्फोटों में इस संगठन का नाम सामने आया। SIMI के लोग ही बैन के बाद PFI का हिस्सा बन गए।

जहाँ तक KFD की बात है, मैसूर में सांप्रदायिक दंगों से लेकर IISC बेंगलुरु में गोलीबारी जैसी घटनाओं तक में इसका नाम सामने आया। मैसूर के एक कॉलेज में 2 छात्रों की हत्या का सीधा आरोप इसी संगठन पर लगा। ये सब सिद्धारमैया की सरकार बनने से पहले की घटनाएँ हैं, अर्थात सब कुछ जानबूझ कर किया गया। तब कर्नाटक के कानून मंत्री रहे TB जयचंद्र ने केस वापस लेने के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि ये शांतिपूर्ण लोग हैं जो सिर्फ विरोध प्रदर्शन के लिए जमा हुआ थे, लेकिन इनका नाम चार्जशीट में डाल दिया गया।

बिना किसी जाँच के उन्होंने ऐलान कर दिया कि वो भीड़ का हिस्सा थे और हिंसा में उनका कोई हाथ नहीं था। तब भाजपा ने 1600 PFI कार्यकर्ताओं पर से 175 मामले वापस लेने के फैसले का विरोध करते हुए कहा था कि देश की सुरक्षा की कीमत पर ये सब किया जा रहा है। पार्टी ने आरोप लगाया था कि इन संगठनों को लेकर जो आरोप हैं, उन्हें नज़रअंदाज़ किया जा रहा है जिससे राज्य में सांप्रदायिक तनाव और बढ़ेगा। इन पर कोई साधारण आरोप नहीं थे, बल्कि मैसूर और शिवमोगा सहित कई इलाकों में दंगे के आरोप थे।

अक्टूबर 2022 में भाजपा ने फिर से जनता को इस फैसले की याद दिलाने के लिए अभियान शुरू किया था, जिसमें बताया गया था कि तत्कालीन DGP और कानून विभाग के सचिव की राय के विरुद्ध जाकर कॉन्ग्रेस की सरकार ने ये निर्णय लिया था। कॉन्ग्रेस महासचिव किसी वेणुगोपाल ने बयान दिया था कि PFI को बैन करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। कॉन्ग्रेस विधायक तनवीर सैत द्वारा सरकार को लिखे पत्र में केस वापस लेने की माँग की गई थी, जिसके बाद ये निर्णय हुआ।

PFI के साथ ‘डील’, जिहादी मानसिकता से समाज को बचाने वाले ‘बजरंग दल’ से दिक्कत: कॉन्ग्रेसी मानसिकता

इतना ही नहीं, कॉन्ग्रेस ने कई सीटों पर PFI और इसके छात्र संगठन SDPI के साथ एक गुप्त डील भी की थी, जिसके तहत 2018 के विधानसभा चुनाव में इन्होंने कॉन्ग्रेस के खिलाफ अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे। केरल और तमिलनाडु के मुकाबले PFI कर्नाटक में तेजी से पाँव पसार रहा था और इसने हिन्दू धर्म के बड़े चेहरों की हत्या के लिए हिटलिस्ट भी बना ली थी। RSS नेता इनका निशाना थे। पुत्तुर में एक पूरा का पूरा कम्युनिटी हॉल हथियारों का गोदाम बना दिया गया था, जिसे NIA ने सीज भी किया था।

जो कॉन्ग्रेस पार्टी कल तक PFI के साथ डील करती थी और उसके सदस्यों को कानून से बचाती थी, आज वही ‘बजरंग दल’ को बदनाम करने के लिए PFI के साथ उसका नाम जोड़ रही है। VHP ने इसे पार्टी की जिहादी मानसिकता करार दिया है। राहुल गाँधी कह चुके हैं कि 2008 में मुंबई को दहलाने वाले आतंकियों से ज्यादा हिन्दू संगठन खतरनाक हैं। उनकी पार्टी के नेता दिग्विजय सिंह ने मुंबई हमले को RSS की साजिश करार दिया था।

इससे ही पता चल जाता है कि कॉन्ग्रेस किस कदर हिन्दू विरोधी मानसिकता में डूब चुकी है। ‘गजवा-ए-हिन्द’ बनाने वालों की तुलना उनसे की जा रही है जो इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा से समाज को सुरक्षित रखने के कार्य में लगे हुए हैं। PFI 17 राज्यों में फ़ैल गया, इसके श्रेय कॉन्ग्रेसी मानसिकता को जाता है। ‘बजरंग दल’ को बिना सबूत आतंकी संगठन बताने वाली कॉन्ग्रेस को तथ्यों के साथ बात करनी चाहिए। या फिर, ये बार-बार ऐसी हरकतों से ये जताती रहे कि ये राहुल गाँधी की पार्टी है।

घर गया, पानी की टंकी गई… अब भीषण गर्मी में चारपाई ही छत: जानिए जोधपुर के बुलडोजर पीड़ित पाकिस्तानी हिंदुओं का हाल

करीब चार महीने पहले 23 साल के रामचंद्र भील ने पाकिस्तान छोड़ा था। कई दिनों की यात्रा के बाद वे राजस्थान के जोधपुर के चोखा गाँव पहुँचे। जीवन भर की कमाई (70 हजार रुपए) देकर यहीं जमीन का एक टुकड़ा लिया। घर बनाया और रहने लगे। लेकिन अब भील बेघर हैं। इस गर्मी में चारपाई ही उनकी छत है। भील उन पाकिस्तानी हिंदुओं में से एक हैं, जिनके घरों पर 24 अप्रैल 2023 को जोधपुर विकास प्राधिकरण ने बुलडोजर चला दिया था।

बुलडोजर चलने के बाद यहाँ रह रहे लोगों के हालात बदतर हो गए हैं। भीषण गर्मी में भी वे खुले में रहने को मजबूर हैं। बच्चों को एक वक्त का खाना तो दूर पानी भी ढंग से नसीब नहीं हो पा रहा। घर टूटने के बाद सब कुछ अस्त-व्यस्त है। चारों ओर फटे हुए तिरपाल, खाली बर्तन और अन्य सामान बिखरे हुए हैं। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने जमीन खरीदकर घर बनाया था। वहीं, प्रशासन का कहना है कि इनके पास जमीन के कोई कागजात नहीं हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई के बाद स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने यहाँ जाकर पीड़ितों का हालात जाना। स्वराज्य को पाकिस्तान के सिंध प्रांत के संघार जिले से आए रामचंद्र भील ने बताया कि वे 4 महीने पहले यात्री वीजा पर भारत आए। अब लॉन्ग टर्म वीजा भी बनवा लिया है। लेकिन जीवन भर की कमाई से जो उन्होंने और उनकी पत्नी ने जो घर यहाँ बनाया वो अब नहीं है। इसके कारण रामचंद्र और और उनका परिवार भीषण गर्मी में चारपाई की छत के भरोसे जी रहे हैं। वे लकड़ी के सहारे चारपाई को तिरछा खड़ा देते हैं और पूरा परिवार उसकी छाया में दिन काटता है। उन्होंने बताया कि अब खाना तो दूर पानी भी नहीं मिल पा रहा है। यहाँ पानी के लिए सीमेंट की जो टंकी थी, उसे भी प्रशासन ने तोड़ दिया।

मजना राम भील तो साल 2013 में ही पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भारत आ गए थे। अब पानी और भोजन के लिए उनके परिवार को कई किलोमीटर चलना पड़ रहा है। वे पूछते हैं कि हम यहाँ नहीं रहेंगे तो और कहाँ जाएँगे। सरकार हमें यहीं घर बनाने की अनुमति दे। बेघर होने के बाद कुछ लोग घर बनाने के लिए किसी दूसरी जगह की तलाश कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोग पुरानी जगह पर ही फिर से घर बनाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। बुजुर्ग चौथराम बताते हैं कि जब पीने का पानी ही नहीं है तो लोग नहाना और दूसरी चीज़ों के बारे में सोच भी नहीं सकते।

स्वराज्य की रिपोर्ट की मानें तो इस जगह बुलडोजर चलने के बाद भी अधिकांश मुस्लिमों के पक्के घर बने हुए हैं। वहीं, पाकिस्तानी हिंदू हिंदू बाँस और तिरपाल के सहारे झुग्गी में रहने को मजबूर हैं। 24 अप्रैल को JDA की कार्रवाई के दौरान कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर जेसीबी ड्राइवर और एक पत्रकार पर पथराव किया था। इसके बाद प्रवासी हिन्दुओं को उकसाने का आरोप में भाग चंद भील को गिरफ्तार किया गया है। भाग चंद की गिरफ्तारी को लेकर भी इन लोगों में गुस्सा है। लोगों का कहना है कि भाग चंद ने उन्हें बसाने में मदद की थी, क्या उसका यही अपराध था?

‘छुट्टियों में लिखूँगा फैसला’: राहुल गाँधी को गुजरात HC ने 2 साल की सज़ा के मामले में अंतरिम राहत देने से किया इनकार, 1 महीने की गर्मी छुट्टी पर गए जज

मोदी सरनेम पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने राहुल गाँधी को अंतरिम राहत प्रदान करने से इनकार कर दिया है। सूरत की अदालत द्वारा सुनाई गई 2 साल की सज़ा के खिलाफ राहुल गाँधी गुजरात हाईकोर्ट पहुँचे थे। सज़ा मिलने के बाद राहुल गाँधी की संसद सदस्यता भी चली गई थी। अगर उनकी सज़ा पर रोक लग जाती तो वो वापस संसद सदस्यता के लिए प्रयास कर सकते थे। उनके वकील ने सुनवाई में कहा था कि एक जमानती अपराध में सज़ा के लिए ज़िन्दगी भर चुनाव लड़ने से वंचित होना संविधान और व्यक्ति पर बहुत बुरा प्रभाव है।

हालाँकि, गुजरात उच्च न्यायालय ने इस मामले में अपना फैसला रिजर्व रख लिया है और इसे छुट्टियों के बाद सुनाया जाएगा। राहुल गाँधी अपने बयान ‘सभी चोरों का सरनेम मोदी ही है’ को लेकर घिरे हुए हैं। एकल पीठ के जज हेमंत प्रच्छक ने इस मामले में अंतरिम रहत देने से मना कर दिया। फ़िलहाल हाईकोर्ट में गर्मी की छुट्टियाँ चल रही हैं। 5 मई को अंतिम वर्किंग डे है, जिसके बाद अब सीधे 1 महीने बाद 5 जून को हाईकोर्ट खुलेगा।

राहुल गाँधी की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता व कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने उन्हें अंतरिम राहत देने की माँग की। उन्होंने गुहार लगाई कि कुछ तो निर्णय दे दिया जाए, लेकिन जज ने कहा, “मैंने पहले ही सब स्पष्ट कह दिया है। मैं दलीलें वगैरह सुनूँगा। छुट्टियों के दौरान मैं फैसला लिखूँगा।” इस मामले के ऑरिजिनल रिकॉर्ड और सुनवाई के डिटेल्स हाईकोर्ट ने अपने समक्ष पेश किए जाने का भी आदेश दिया है।

इस मामले में पूर्णेश मोदी ने मुकदमा दायर किया था, जो भाजपा के विधायक भी रहे हैं। उन्होंने कहा था कि इससे मोदी समुदाय को ठेस पहुँची है। उन्होंने दलील दी थी कि एक सासंद होने के कारण वो जो कहते हैं, उसका गहरा असर होता है। पूर्णेश मोदी ने ये भी कोर्ट को बताया कि राहुल गाँधी ने अब तक अपने बयान पर अफ़सोस तक नहीं जताया है। उनके वकील ने कहा कि अगर राहुल गाँधी को माफ़ी नहीं माँगनी है तो फिर को अदालत में जाकर ‘Crybaby’ बनना बंद करें।