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हिंदुओं के त्योहार में अड़ंगा, पहली लाठी भी हिंदू को, पत्थरबाजी मस्जिद से… फिर भी हिंदू ही हो गया दंगाई: पलामू पर ‘मुस्लिम विक्टिम’ रोना शुरू

झारखंड के पलामू में महाशिवरात्रि को लेकर हिंदुओं द्वारा तोरणद्वार लगाए जाने पर बवाल हो गया है। तोरणद्वार का मुस्लिमों ने विरोध किया और कहा कि मस्जिद के सामने इसे नहीं लगाया जा सकता। इसके बाद हिंसक भड़क उठी। मस्जिदों से ना सिर्फ पथराव किया गया, बल्कि आगजनी भी की गई। अब इस हिंसा को लेकर मुस्लिमों द्वारा ‘विक्टिम कार्ड’ खेला जा रहा है।

हैदराबाद से सांसद और AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस पूरी घटना में मुस्लिमों को ही पीड़ित बता दिया है। उन्होंने कहा कि मस्जिद पर पत्थर फेंके गए और दो घर तथा कुछ गाड़ियाँ जला दी गईं। हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट सबसे पहले एक हिंदू का सिर फोड़ने की बात कह रहा है और उसके बाद मस्जिद से पत्थरबाजी हुई।

ओवैसी यहीं नहीं रूकते हैं। उनका कहना है कि मस्जिद के सामने तोरणद्वार नहीं बनाना चाहिए था। उन्होंने इसका दोष भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर मढ़ दिया और कहा कि इसमें दंगाई और संघ परिवार जीत गए।

वहीं, सोशल मीडिया पर मुस्लिमों को पीड़ित साबित करने की कोशिश की जा रही है। मीर फैसल नाम के एक कथित पत्रकार ने एक वीडियो शेयर किया और। कहा कि हिंदुत्ववादी गुंडों ने मुस्लिमों की घर एवं दुकानें जला दीं और उनकी गाड़ियों में आग लगा दी।

पलामू हिंसा को लेकर जिस तरह की नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की जा रही है, उसमें मुस्लिमों को पीड़ित और पीड़ित हिंदुओं को गुंडा साबित करने की कोशिश की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट में स्पष्ट कहा जा रहा है कि महाशिवरात्रि को लेकर पलामू के पांकी के हिंदू तैयारी कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने चौक पर तोरणद्वार बनाया था। चौक के पास ही मस्जिद स्थित है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जामा मस्जिद के नाम से पहचाने जाने वाली यह मस्जिद हिंदुओं के सहयोग से ही बनाई गई है। लोगों का कहना है कि यह मस्जिद ज्यादा पुरानी भी नहीं है और ना ही आसपास के इलाके में मुस्लिमों की इतनी जनसंख्या है। जहाँ मस्जिद बनाई गई है, वह इलाका हिंदू बहुल है।

तोरणद्वार बनाने के बाद मस्जिद से कुछ मुस्लिम निकल कर आए और इस द्वार को हटाने के लिए कहने लगे। उनका कहना था कि पास में मस्जिद है और मस्जिद के पास तोरणद्वार नहीं बना सकते। इसके लिए हिंदू पक्ष राजी नहीं हुआ और कहा कि वे तोरणद्वार सड़क पर बना रहे हैं, जो कि सरकारी संपत्ति है।

इसके बाद मुस्लिम पक्ष उनके भीड़ गए। बुधवार (14 फरवरी 2023) को एक मुस्लिम ने निरंजन सिंह नाम के एक हिंदू के सिर पर डंडा मार दिया। इस हमले में निरंजन सिंह का सिर फट गया। जिस समय हमला किया गया, उस वक्त वहाँ पुलिस मौजूद थी। कहा जाता कि इसके बाद मस्जिद से हिंदुओं पर पत्थरबाजी की जाने लगी।

इस दौरान दंगाइयों ने 4 घरों, 3 गुमटीनुमा दुकान, 1 कार और 2 बाइक में आग लगा दी। इसके अलावा, 4 गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की। इस हमले में लेस्लीगंज के एसडीपीओ आलोक कुमार टूटी और पांकी थाना के इंस्पेक्टर अरुण महथा समेत 8 लोगों को गंभीर रूप से चोट आई है।

पांकी की भाजपा नेत्री मंजूलता दुबे ने बताया कि मस्जिद से आए दिन हिन्दुओं के कार्यक्रम में खलल डाला जाता रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मस्जिद कमिटी से जुड़े लोगों द्वारा अक्सर बाजार और आस-पास विवाद पैदा किया जाता है और उसके बाद मारपीट की जाती है।

पांकी के सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश सिंह ने कहा कि हिन्दुओं पर पेट्रोल बम और पत्थर मस्जिद की छत से फेंके जा रहे थे। कमलेश सिंह ने हमें बताया, “न तो आज जुमा था और न ही उस क्षेत्र में मुस्लिमों की इतनी आबादी। न ही घटना का समय किसी नमाज या कार्यक्रम का था, फिर हमलावरों की इतनी भीड़ आई कहाँ से।” उन्होंने इस घटना को सुनियोजित बताया।

पांकी बाजार में घटी घटना को कमलेश सिंह ने गज़वा-ए-हिन्द का ट्रायल बताया। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी पूरे देश में अपनी ताकत को तौल रहे हैं और जहाँ कमी-अधिकता है, उसकी तैयारी कर रहे हैं। वहीं, मंजूलता ने मंजूलता ने ऑपइंडिया को बताया कि एक बार 14 अगस्त को उन्हें पुलिस ने हिरासत में महज इसलिए लिया था, क्योंकि वो तिरंगा लगाने के लिए उस चौक पर जगह चिन्हित कर रहीं थीं। हालाँकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

दरअसल, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीतियों के कारण प्रदेश अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की शरणस्थली बनती जा रही है। यहाँ लव जिहाद और लैंड जिहाद की घटनाओं के साथ हिंदुओं की हत्या आम बात हो गई है। कई जगहों पर आदिवासियों और दलितों को मुस्लिमों की प्रताड़ना के कारण भागना तक पड़ रहा है। हिंदुओं को अपना त्योहार मनाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

हिंदू त्योहारों पर मुस्लिमों के हमले झारखंड में आम हो गए हैं। हेमंत सोरेन की तुष्टिकरण की नीति के कारण देवघर में महाशिवरात्रि के दिन पूरे शहर में धारा 144 लागू कर दी गई है। इतना ही नहीं, महाशिवरात्रि कमिटी ने शिव बारात के लिए जो रूट तय किया था, उस पर प्रशासन ने रोक लगा दिया है। जिला प्रशासन ने पुराने रूट से ही शिव बारात के आयोजन की इजाजत दी है।

पिछले साल अगस्त में पांडू थाना क्षेत्र के मुरुमातू गाँव में महादलित मुसहर जाति के लोगों पर मुस्लिमों की एक भीड़ ने हमला कर उनके घरों को तोड़ दिया था। टोंगरी पहाड़ी के निकट बसे इन मुसहरों के डेढ़ दर्जन से अधिक कच्चे घर और झोपड़ियों को ध्वस्त कर दिया। मारपीट की गई। इतना ही नहीं, इन जगहों पर कब्जा करने के लिए मुस्लिमों ने घर ध्वस्त करने के बाद उनके सामानों को दो वाहनों पर लादकर छतरपुर के लोटो गाँव के पास जंगल में छोड़ दिया था। 

इसी तरह 6 फरवरी 2022 को हजारीबाग में सरस्वती पूजा के दौरान एक हिंदू बच्चे की मॉब लिंचिंग कर दी गई थी। दरअसल, बच्चे सरस्वती पूजा के बाद प्रतिमा का विसर्जन करने के लिए जा रहे थे। बरही थाना के नईटांड गाँव में लखना दूलमाहा इमामबाड़ा के पास मुस्लिम युवकों ने विसर्जन करने जा रहे लड़कों को रोक लिया। इसके बाद दोनों पक्षों में मारपीट होने लगी। मुस्लिम युवक रूपेश कुमार को तब तक पीटते रहे, जब तक वह बेहोश नहीं हो गया। बेहोशी की हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।

 

मुस्लिम बनने को तैयार नहीं हुई चंदा, पहले बुरी तरह पीटा फिर गला दबाकर मार डाला: पुलिस ने मुठभेड़ के बाद मोहम्मद आरिफ को पकड़ा

उत्तर प्रदेश के कौशांबी में धर्मांतरण से इनकार किए जाने पर एक हिंदू महिला की हत्या का मामला सामने आया है। महिला की पहचान चंदा सिंह के तौर पर हुई है। आरोपित मोहम्मद आरिफ को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है।

आरोप है कि आरिफ ने धर्म परिवर्तन से इनकार किए जाने पर महिला को बुरी तरह पीटा। फिर इलाज के बहाने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। महिला की लाश घर में छोड़कर आरिफ फरार हो गया। गुरुवार (16 फरवरी, 2023) की सुबह उसे मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया।

रिपोर्ट के अनुसार आफिर नदी के रास्ते आरिफ चित्रकूट भागने की फिराक में था। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की। आरिफ ने पुलिस पर फायरिंग की और जवाबी कार्रवाई में उसके दोनों पैर में गोली लगी।

रिपोर्टों के मुताबिक चंदा सिंह के पति दुर्गेश सिंह की मौत हो चुकी है। वह मऊ के हलधरपुर में रहती थी। पार्लर चलाकर बच्चों का भरण-पोषण करने लगी। इसी दौरान उसके संपर्क में गुड्डू राजपूत बनकर आरिफ आया। गुड्डू ने चंदा को मऊ की सारी संपत्ति बेचकर कौशांबी शिफ्ट होने की सलाह दी। करीब 2 साल पहले अपनी संपत्ति बेच चंदा दोनों बेटियों के साथ कौशांबी आ गई। यहाँ उसे पता चला कि जिसे वह गुड्डू समझ रही, वह मोहम्मद आरिफ है।

इसके बाद आरिफ और चंदा के बीच झगड़े होने लगे। आरिफ धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा। बच्चों को भी नमाज पढ़ने के लिए कहने लगा। आए दिन पिटाई की वजह से चंदा बीमार हो गई। चंदा की बेटी और भतीजे ने मीडिया को जानकारी दी कि आरिफ मंगलवार (14 फरवरी, 2023) को इलाज के बहाने चंदा को अपने साथ ले गया। मौका पाकर उसने चंदा की हत्या की और लाश को घर पर छोड़कर फरार हो गया। बेटी के मुताबिक चंदा फोन पर चिल्ला रही थी, जिसके बाद आरिफ ने फोन छिन लिया और उसकी तबीयत खराब होने की बात कही। उसी रात वह चंदा की लाश घर पर छोड़ गया।

चंदा की बेटी की मानें तो आरिफ की नजर उसकी संपत्ति पर थी। वह आए दिन चंदा से पैसे माँगा करता था। साथ ही आरिफ चाहता था कि चंदा कौशांबी में खरीदी गई प्रॉपर्टी आरिफ के नाम कर दें। बता दें कि चंदा ने मऊ की संपत्ति बेचकर कौशांबी में जमीन खरीदी थी और घर बनवाया था।

जागरण की रिपोर्ट के अनुसार बलिया की रहने वाली चंदा सिंह की माँ को उनकी बेटी ने हफ्ते भर पहले फोन किया था। इस दौरान उन्होंने अपनी माँ को गुड्डू राजपूत के आरिफ होने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरिफ चंदा को अपने गाँव मिरदहन का पुरवा ले गया था। यहाँ उस पर मुस्लिम समुदाय के 100 लोगों ने मतांतरण के लिए दबाव बनाया। इस्लाम कबूल न करने पर उसकी पिटाई की गई।

मामले में मृतका की माँ ने शिकायत दी है। जिसके आधार पर 12 नामजद व 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या व धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का मामला दर्ज किया गया है। चंदा के शव का पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है। फिलहाल पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।

छुट्टी पर गाँव आए थे भारतीय सेना के जवान प्रभु, DMK पार्षद और उसके साथियों ने पीट-पीटकर मार डाला: तमिलनाडु की घटना

तमिलनाडु के कृष्णागिरि में भारतीय सेना के जवान की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। रिपोर्टों के मुताबिक छुट्टी पर घर आए सैनिक प्रभु और उनके बड़े भाई प्रभाकरण का डीएमके (DMK) के पार्षद आर. चिन्नासामी के साथ विवाद हुआ था। इसके बाद चिन्नासामी और उसके 8 साथियों ने प्रभु पर हमला कर उन्हें बुरी तरह पीटा। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने अब तक 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। तमिलनाडु में इस समय कॉन्ग्रेस के सहयोगी डीएमके की ही सरकार है। इस घटना पर मुख्यमंत्री स्टालिन की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

कृष्णागिरि पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 8 फरवरी, 2023 की दोपहर प्रभु और प्रभाकरण का स्थानीय पार्षद चिन्नासामी के साथ विवाद हुआ था। पानी टंकी के पास कपड़ा धोने को लेकर हुए झगड़े को स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव कर सुलझा दिया था। उसी दिन शाम को चिन्नासामी 8 साथियों के साथ प्रभु और प्रभाकरन के घर आ धमका। उनलोगों ने दोनों भाइयों पर हमला कर दिया। इस हमले में प्रभु के सर पर चोट लगी। चोट लगने के बाद प्रभु को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ मंगलवार (14 फरवरी, 2023) की रात उनकी मौत हो गई।

सैनिक की मौत के बाद भाजपा और एआईएडीएमके की तरफ से राज्य में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। एआईएडीएमके प्रवक्ता कोवई साथ्यन ने कहा कि जब भी डीएमके सत्ता में होती है राज्य की कानून-व्यवस्था चरमरा जाती है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सेना के जवान तक की हत्या की जा रही है।

तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के.अन्नामलाई ने भी घटना को लेकर ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा कि DMK पार्षद द्वारा सैनिक की हत्या की खबर सुनकर वे हैरान हैं। DMK शासन में सैनिक अपने गाँव में भी सुरक्षित नहीं हैं। डीएमके देश की सरहदों की रक्षा करने वाले सैनिकों के परिवार को धमकाने, हमला करने और हत्या करने की हद तक जा चुकी है।

प्रभु की मौत के बाद से ही पार्षद चिन्नासामी फरार है। पुलिस के मुताबिक हमला करने वालों में उसका बेटा राजापांडी और गुरु सूर्यमूर्ति भी शामिल थे। उनके अलावा अन्य आरोपित भी चिन्नासामी के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। स्थानीय पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर चिन्नासामी के बेटे राजापंडी समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। चिन्नासामी की तलाश में छापे मारे जा रहे हैं।

हिंदू राष्ट्र का संकल्प, बागेश्वर धाम में चल रहा महायज्ञ: बोले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री- बने सनातन बोर्ड, लोग जुड़ेंगे तो संविधान भी बदलेगा

मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में इन दिनों महायज्ञ चल रहा है। सात दिनों का यह आयोजन भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ हो रहा है। इसका हिस्सा बनने के लिए संतों के साथ-साथ बड़ी संख्या में भक्त बागेश्वर धाम पहुँच रहे हैं। धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदू राष्ट्र का अपना संकल्प दोहराते हुए कहा है कि यदि एक तिहाई लोग भी इसकी माँग करते हैं तो संविधान में बदलाव संभव है।

एबीपी न्यूज की रुबिका लियाकत को दिए इंटरव्यू में उन्होंने लोगों से हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए आवाज उठाने और इस मुहिम का हिस्सा बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि एक तिहाई लोग हिंदू राष्ट्र की माँग करेंगे तो भारत हिंदू राष्ट्र हो जाएगा। साथ ही कहा कि एक प्रतिशत लोग हिंदू राष्ट्र का विरोध भी करते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। नीचे लगे वीडियो में आप 40वें सेकेंड से यह बात सुन सकते हैं।

यह पूछे जाने पर कि हिंदू राष्ट्र की माँग पाकिस्तान जैसी कट्टरता नहीं है, धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि पाकिस्तान वाले भी हिंदू ही हैं। जैन और बौद्धों को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जैन और बुद्ध भी हमारी आत्मा हैं। जिन लोगों को यह लगता है कि हमारी जिद (हिंदू राष्ट्र) गलत है उन्हें अपना इलाज कराना चाहिए। इसी तरह जी न्यूज के पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए भी उन्होंने कहा कि जब एक तिहाई लोग तिलक लगाकर हिंदू राष्ट्र की माँग करेंगे तो संविधान में भी सुधार कर दिया जाएगा।

स्वामी प्रसाद मौर्य के चीन को भस्म कर देने वाले बयान का जवाब देते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हम भस्म नहीं करते। हम विश्व कल्याण का काम करते हैं। हमारा सनातन दंड नहीं, बल्कि शिक्षा देने का कार्य करता है। आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने देश में सनातन बोर्ड बनाने की माँग की है। हिंदू राष्ट्र की माँग को लेकर अडिग बागेश्वर महाराज ने कहा कि जिनके खून में दिक्कत होगी वही हिंदू राष्ट्र की बात नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि हिंदू राष्ट्र को लेकर देश में क्रांति आने वाली है, जिसके बाद संसद में कुछ होने वाला है। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि आने वाले समय में भारत हिंदू राष्ट्र घोषित होगा।

रेलवे अधिकारी की बेटी के खो गए जूते: GRP, RPF और IRCTC की टीमों ने महीने भर छानी खाक, दिल्ली के डॉक्टर के पास से बरामद किए

ओडिशा के डिविजनल रेलवे मैनेजर (DRM) की बेटी के जूते रेल यात्रा के दौरान खो गए थे। इस जूते को खोजने में गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP), रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (IRCTC) की टीम लगी रही। आखिरकार अपने अधिकारी की बेटी की खोए जूते को टीम ने बरामद कर लिया।

जूते को खोजने वाली टीम ने चोरी की बात से इनकार किया है। उनका कहना है कि DRM की बेटी का जूता चोरी नहीं हुआ था, बल्कि एक यात्री गलती से पहन कर चली गई थीं। लगभग एक महीने की मशक्कत के बाद टीम ने जूते को एक महिला यात्री के पास से बरामद कर लिया है। अब इसे अधिकारी की बेटी को वापस लौटा दिया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, DRM विनीत सिंह की बेटी मानवी 3 जनवरी 2023 को लखनऊ मेल से दिल्ली से लखनऊ जा रही थीं। इस बीच उनका जूता गायब हो गया। मानवी को बगल की सीट पर सफर कर रही महिला यात्री पर शक हुआ। इसके बाद उन्होंने घटना की जानकारी अपने पिता को दी।

मानवी ने बताया कि साथ यात्रा कर रही एक महिला 4 जनवरी की सुबह बरेली उतर गई थी और वह उनके जूते लेकर चली गई। DRM विनीत सिंह ने GRP पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद रेलवे पुलिस, जीआरपी और आईआरसीटीसी की टीम ने जूते की तलाश शुरू कर दी। उधर

बरेली के डिप्टी एसपी देवी दयाल ने बताया, “हमने बरेली स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वार के 4 जनवरी के सीसीटीवी फुटेज की जाँच की, लेकिन महिला का कोई पता नहीं चला। फिर हमने आईआरसीटीसी अधिकारियों से एसी प्रथम श्रेणी के यात्रियों के आरक्षण डिटेल हासिल करने में मदद माँगी। यह काम कर गया और हमने संदिग्ध पर ध्यान केंद्रित किया।”

महीने भर की खोजबीन के बाद आखिरकार उस महिला का पता लगाया गया, जिस पर मानवी को शक था। मानवी के साथ सफर करने वाली सह-यात्री दिल्ली में प्रैक्टिस करने वाली 34 वर्षीय महिला डॉक्टर हैं। महिला डॉक्टर ने जूते ले जाने की बात स्वीकार की। गायब हुए जूते की कीमत 10,000 रुपए बताई जा रही है।

केस से जुड़े जाँच अधिकारी मनोज त्यागी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि पूछताछ के दौरान महिला डॉक्टर ने कहा कि जब ट्रेन 4 जनवरी को सुबह बरेली स्टेशन पहुँची तो जल्दबाजी में उन्होंने गलत जूते पहन लिए और चली गईं। एक ही आकार के जूतों के होने के कारण यह गलती हुई।

अधिकारी ने बताया कि महिला ने मानवी के जूतों को वापस लौटा दिया है और अब इस जूते को इसके मालिक तक पहुँचा दिया जाएगा। जूतों को चोरी किए जाने का कोई सबूत नहीं है, इसलिए उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया गया है।

‘हिंदुओं के खिलाफ मुस्लिमों के अपराधों में वृद्धि’: Hate Speech मामले में हिंदू संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में दिया आवेदन, कहा- बहुसंख्यकों के खिलाफ चल रही मुहिम

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में हेटस्पीच (Hate Speech) को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई चल रही है। इस बीच हिंदू संगठन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ (HFJ) की तरफ से शीर्ष अदालत में हस्तक्षेप आवेदन (Intervention application) दाखिल की गई है। इसमें कहा गया है कि देश में मुस्लिम और ईसाई मिशनरियों द्वारा हिंदुओं को धर्मांतरित करने के लिए मुहिम चलाई जा रही है।

बता दें पत्रकार कुर्बान अली द्वारा 17 दिसंबर 2021 को हरिद्वार में नरसिंहानंद द्वारा आयोजित धर्म संसद में और 19 दिसंबर 2021 को दिल्ली में हिंदू युवा वाहिनी के कार्यक्रमों में दिए गए भाषणों के खिलाफ कार्रवाई माँग को लेकर दायर याचिका की गई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। अब इस मामले में हिंदू संगठन ने कोर्ट में अर्जी दाखिल की है।

अधिवक्ता हरि शंकर जैन और विष्णु शंकर जैन के द्वारा दी गई याचिका में कहा गया है कि कई मौकों पर मुस्लिम भीड़ ने ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए। एक तरह से सरेआम सिर काटने की बात कही जा रही थी। उसके बाद देश के कई हिस्सों में सिर काटने व सिर काटने की कोशिश जैसी घटनाएँ सामने आईं।

आवेदन में कुछ ऐसे उदाहरण भी दिए गए हैं, जिनमें स्टैंडअप कॉमेडियन हिंदू धर्म व देवी-देवताओं पर भद्दे और अपमानजनक चुटकुले बनाते नजर आए। इसमें मुनव्वर फारूकी का जिक्र है, जिसने कुछ दिन पहले भगवान राम और माता सीता के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। अर्जी में कई उदाहरण दिए गए हैं, जहाँ हिंदुओं के खिलाफ हेट स्पीच के बाद अपराधिक घटनाएँ घटित हुईं।

याचिका में कहा गया है कि हिंदुओं के खिलाफ मुस्लिमों के अपराधों में लगातार वृद्धि हुई है। मुस्लिमों में हिंदुओं के प्रति घृणा की भावना तेजी के साथ बढ़ी है, लेकिन पुलिस राजनीतिक कारणों और मुस्लिम भीड़तंत्र के डर से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में हिचकिचाती है।

याचिका में आगे कहा गया है कि बेहद खास और मजबूर करने वाली परिस्थितियों में ही पुलिस द्वारा FIR दर्ज की गई, लेकिन हिंदुओं के खिलाफ घृणा को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।। मुस्लिमों के एक वर्ग में बढ़ रहे हिंदू घृणा को रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है।

आवेदन में आगे कहा गया है कि भारत के विभिन्न हिस्सों में ईसाई मिशनरी सक्रिय हैं। ये गरीबों को प्रलोभन देकर उनका धर्म बदलने के काम में लगे हुए हैं। इनमें ज्यादातर एससी/एसटी हिंदुओं को अनैतिक रूप से ईसाई धर्म में परिवर्तित किया जा रहा है। आवेदन में मेघालय, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और भारत के अन्य स्थानों में ईसाई मिशनरियों द्वारा लोगों की आर्थिक स्थिति का लाभ उठाकर उनके धर्मांतरण की कोशिश का जिक्र है।

बता दें कि तत्कालीन चीफ जस्टीस ऑफ इंडिया (CJI) एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कुर्बान अली द्वारा दायर जनहित याचिका में नोटिस जारी किया था। इसमें हरिद्वार और दिल्ली में दिए गए कथित घृणास्पद भाषणों में न्यायालय के हस्तक्षेप की माँग की गई थी।

‘गजवा-ए-हिन्द का ट्रायल’: पलामू में जामा मस्जिद से पथराव का दावा, स्थानीय निवासी बोले- ‘आज शिव बारात रोकी, कल ये शादी ब्याह भी रोक सकते हैं’

झारखंड के पलामू जिले (Palamu, Jharkhand) में बुधवार (15 फरवरी 2023) को महाशिवरात्रि के लिए तोरणद्वार लगा रहे श्रद्धालुओं पर जमकर पथराव और आगजनी की गई। इस झड़प में लगभग 1 दर्जन लोग घायल हो गए। घायल होने वालों में पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। घटनास्थल पांकी बाजार में मौजूद एक मस्जिद के पास का बताया जा रहा है।

इलाके में तनाव को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके साथ ही इलाके में धारा 144 लगा दी गई है और इंटरनेट को बंद कर दिया गया है। पुलिस ने फिलहाल हालात के काबू में होने का दावा किया है। ऑपइंडिया ने इस मामले में स्थानीय लोगों से बात करके मौजूदा हालातों की जानकारी ली।

उनके छोटे- छोटे कामों में भी भीड़, हमारी शिवरात्रि पर भी हंगामा

ऑपइंडिया ने इस घटना के बारे में पांकी बाजार के सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश सिंह से बात की। कमलेश सिंह ने हमें बताया कि महाशिवरात्रि का आयोजन कोई नई बात नहीं है। यह हर साल आयोजित होता है। हिंदुओं के त्योहारों में खलल डालने की बात कही जा रही है।

कमलेश सिंह ने बताया, “जिस चौक पर ये बवाल हुआ, वहाँ एक बड़ी मस्जिद है। इसे जामा मस्जिद नाम से जाना जाता है। जब मुस्लिमों का कोई छोटे-से-छोटा कार्यक्रम होता है तो पूरी जगह घेर ली जाती है, लेकिन हिन्दुओं की महाशिवरात्रि में वो एक छोटा सा तोरण द्वार नहीं सह पाए।”

वहीं, पांकी की रहने वाली भाजपा नेत्री मंजूलता दुबे ने बताया कि मस्जिद से आए दिन हिन्दुओं के कार्यक्रम में खलल डाला जाता रहा है। मंजूलता के मुताबिक, जिस रास्ते पर तोरणद्वार लग रहा था, उधर से ही शिव बरात गुजरती हुई थोड़ी दूर पर स्थित पहाड़ पर शिवजी के एक धर्मस्थल पर जाती है।

अबुल हसन है मस्जिद कमेटी का अध्यक्ष

कमलेश सिंह के अनुसार, जिस जामा मस्जिद से सारे विवाद की शुरुआत हुई है वो एक कमेटी से चलती है और उस कमेटी का अध्यक्ष अबुल हसन है। कमलेश के मुताबिक, अबुल हसन के प्रमुख सहयोगियों में से अक्सर हसन अंसारी, अनवर आलम, महबूब अंसारी, शाहिद अंसारी और बबलू अंसारी के नाम सामने आते हैं। उ

उन्होंने दावा किया कि ये सभी अक्सर बाजार और आस-पास विवाद पैदा किया करते हैं। हालाँकि ताजा हिंसा में इनकी भूमिका पूछने पर कमलेश सिंह ने कहा कि यह जाँच करना प्रशासन का काम है।

जानबूझकर मुस्लिम पक्ष द्वारा विवाद किया गया

मंजूलता और कमलेश सिंह दोनों के मुताबिक, विवाद की शुरुआत मुस्लिमों की तरफ से हुई थी। उन्होंने बताया कि शांति से तोरणद्वार लगा रहे हिन्दुओं को पहले मुस्लिम समाज के कुछ लोग रोकने आए। इसके बाद उन लोगों ने उस तोरण गेट को तोड़ डाला।

ऑपइंडिया को बताया गया कि जब इस हरकत का विरोध हिन्दू समाज की तरफ से हुआ तब उन पर न सिर्फ पथराव किया जाने लगा। इतना ही नहीं, उन पर लाठी-डंडे और अन्य धारदार हथियारों का इस्तेमाल किया गया। हिंदुओं पर पेट्रोल बम भी फेंके गए।

हिंसा के दौरान फँसे रहे कई स्कूली बच्चे

पांकी के समाजिक कार्यकर्ता कमलेश सिंह के अनुसार, जब ये हिंसा शुरू हुई थी तब बच्चों के स्कूल जाने का समय था। हिंसा की वजह से कई बच्चे रास्ते में फँसे रह गए थे। इस दौरान उनकी सुरक्षा का भी खतरा उत्पन्न हो गया था। उनके मुताबिक, पुलिस ने आकर माहौल को नहीं सँभाला होता तो काफी नुकसान हो सकता था।

मस्जिद था हमले का बेस

मंजूलता और कमलेश सिंह ने हमें बताया कि हमले के लिए मस्जिद को ही बेस बनाया गया था। हमलावरों के उसी मस्जिद से निकलने की जानकारी दी गई। मंजूलता के मुताबिक, मस्जिद के नीचे कुछ मुस्लिमों की दुकानें हैं, जिसमें से कुछ लोग आए दिन विवाद खड़ा करते रहते हैं।

वहीं, कमलेश सिंह ने दावा किया कि हिन्दुओं पर पेट्रोल बम और पत्थर मस्जिद की छत से फेंके जा रहे थे। कमलेश सिंह ने हमें बताया, “न तो आज जुमा था और न ही उस क्षेत्र में मुस्लिमों की इतनी आबादी। न ही घटना का समय किसी नमाज या कार्यक्रम का था, फिर हमलावरों की इतनी भीड़ आई कहाँ से।” उन्होंने इस घटना को सुनियोजित बताया।

खुद दुकानों में तोड़फोड़ कर के फँसाने की साजिश

कमलेश सिंह का दावा है कि प्री प्लानिंग के तहत हिन्दुओं पर हमला करने वालों ने अपनी दुकानों में तोड़फोड़ की और कुछ वाहनों को भी नुकसान पहुँचाया है। ऐसा करने के पीछे कमलेश सिंह ने हमलावरों द्वारा लोगों की हमदर्दी बटोरने के साथ हिन्दुओं को फँसाने की साजिश बताया।

शहीद चौक को बोला जा रहा मस्जिद चौक

मंजूलता ने हेमंत सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया और बताया कि उनकी तुष्टिकरण से जनता त्राहिमाम कर रही है। बकौल मंजूलता, जिस जगह हिंसा हुई है उस चौराहे का नाम कुछ मुस्लिम जानबूझ कर मस्जिद चौक रखना चाह रहे हैं, लेकिन हिन्दू समाज उसे शहीद चौक नाम से ही याद करता है। उन्होंने कहा कि उस स्थान पर जल्द ही भगत सिंह की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

हिन्दुओं के ही सहयोग से बनी थी मस्जिद

कमलेश सिंह और मंजूलता ने हमें बताया कि मस्जिद बहुत ज्यादा पुरानी नहीं है। कमलेश सिंह का तो दावा था कि वो मस्जिद हिन्दुओं के सहयोग से बनी थी और जहाँ वो मौजूद है, वो हिन्दू व्यापारियों की बहुलता वाली मार्किट है। वहीं, मंजूलता का आरोप है कि अगर सही से जाँच करवाई जाए तो मस्जिद का कुछ हिस्सा अतिक्रमण में निकलेगा।

15 अगस्त को तिरंगे और देशभक्ति गानों से एतराज

मस्जिद चौक का जिक्र करते हुए मंजूलता ने बताया कि एक बार 14 अगस्त को उन्हें पुलिस ने हिरासत में महज इसलिए लिया था, क्योंकि वो तिरंगा लगाने के लिए उस चौक पर जगह चिन्हित कर रहीं थीं। हालाँकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। वहीं दावा है कि एक अन्य 15 अगस्त को मंजूलता को 2 मुस्लिमों ने उस चौक पर देशभक्ति गाना बजाने पर टोका था।

ये गज़वा ए हिन्द का ट्रायल है

पांकी बाजार में घटी घटना को कमलेश सिंह ने गज़वा-ए-हिन्द का ट्रायल बताया। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी पूरे देश में अपनी ताकत को तौल रहे हैं और जहाँ कमी-अधिकता है, उसकी तैयारी कर रहे हैं।

एकपक्षीय कार्रवाई न करे हेमंत सरकार

ऑपइंडिया ने इस घटना को लेकर स्थानीय भाजपा सांसद सुनील सिंह से बात की। सुनील सिंह के मुताबिक, उन्होंने पुलिस अधीक्षक से बात कर के साफ तौर पर कहा है कि वो इस घटना में एकपक्षीय कार्रवाई न करे। हेमंत सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए सांसद सुनील सिंह ने कहा कि वो और उनका महाशिवरात्रि जैसे अवसर पर सुरक्षा नहीं दे पा रहे है।

ऑपइंडिया को बताया गया कि जिस कार्यक्रम में आज व्यवधान डाला गया वह आज से नहीं, बल्कि अनादि काल से चल रहा है। भाजपा सांसद के अनुसार, आज शिवरात्रि में बहाने से अड़ंगा डालने वाले शायद कल शादी-ब्याह में भी कोई बहाना लेकर आपत्ति जाता दें।

पलामू प्रशासन ने हालत नियंत्रण में बताया

पलामू प्रशासन ने हालत को नियंत्रण में बताया है। हिंसा प्रभावित क्षेत्र में धारा 144 लागू होने की जानकारी देते हुए DC पलामू ने सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की अफवाह न फैलाने की चेतावनी भी दी है।

‘द वायर’ की संपादक सीमा चिश्ती ने ऑर्गेनाइज़र, विजय पटेल और ट्विटर को भेजा कानूनी नोटिस: अडानी विरोधी कैंपेन में विदेशी हाथ के खुलासे से भड़कीं

प्रॉपगेंडा वेबसाइट द वायर (The Wire) की संपादक (Editor) सीमा चिश्ती ने 8 फरवरी 2023 को ऑर्गेनाइज़र (Organiser) के संपादक प्रफुल्ल केतकर, फैक्ट चेकर विजय पटेल और ट्विटर (Twitter) को कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस में उन्होंने इन लोगों से सार्वजनिक रूप से माफी माँगने के लिए कहा है। सीमा चिश्ती ने नोटिस में कहा कि उनके लेख और आरोप से उनकी छवि को नुकसान पहुँचा है।

दरअसल, ऑर्गेनाइडर और विजय पटेल ने अपने लेख के जरिए एक ऐसे विदेशी एनजीओ के साथ सीमा चिश्ती का संबंध उजागर किया था, जो कथित तौर पर व्यवसायी गौतम अडानी के खिलाफ हिटजॉब में शामिल था। बता दें कि सीमा चिश्ती कम्युनिस्ट नेता सीताराम येचुरी की पत्नी हैं।

द ऑर्गेनाइज़र वेबसाइट पर 04 फरवरी 2023 को ‘डिकोडिंग द हिटजॉब बाइ हिंडनबर्ग अगेंस्ट अडानी ग्रुप’ नाम से एक आर्टिकल पब्लिश हुआ। इसमें अडानी समूह को टार्गेट करने को लेकर विस्तृत रूप में बताया गया है। इसके साथ ही लेख में इसके विदेशी लिंक के बारे में भी बताया गया है।

इसके पहले 2 फरवरी 2023 को फैक्ट चेकिंग वेबसाइट ‘ओनली फैक्ट इंडिया’ के संस्थापक विजय पटेल ने ट्विटर पर एक थ्रेड लिखा था। इस थ्रेड में उन्होंने अडानी विरोधी अभियान में शामिल पत्रकारों और विदेशों से फंड प्राप्त करने वाले एनजीओ के बीच संबंधों को उजागर किया था।

ऑर्गनाइज़र द्वारा प्रकाशित लेख और विजय पटेल द्वारा साझा किए गए थ्रेड में बताया गया है कि कैसे हिंडनबर्ग रिपोर्ट के जरिए अडानी समूह के खिलाफ एक सुनियोजित हमला किया गया। यह दावा किया गया कि देश में नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया (NFI) नाम का एक एनजीओ काम करता है।

इस एनजीओ के बारे में कहा गया कि यह कुछ भारतीय और विदेशी लोगों व एनजीओ के चंदे पर चलता है। जिन लोगों द्वारा चंदा दिया जाता है, उनमें बिल गेट्स, अजीम प्रेमजी, जॉर्ज सोरोस, फोर्ड फाउंडेशन, रॉकफेलर, ओमिडयार आदि शामिल हैं।

सीमा चिश्ती के नोटिस पर विजय पटेल ने ट्विटर पर थ्रेड के जरिए एक के बाद एक कई सवाल पूछे। उन्होंने लिखा, “दिए गए नोटिस में सीमा चिश्ती का दावा है कि उन्हें नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया (NFI) से वित्तीय लाभ नहीं मिलता है और वह उनके साथ नि:स्वार्थ भाव से काम कर रही हैं। सीमा चिश्ती के इस दावे को लेकर मेरे मन में कुछ सवाल हैं। मुझे आशा है कि वह उत्तर देंगी।”

उन्होंने कहा, “सीमा ऐसे संगठन के साथ नि:स्वार्थ भाव से काम क्यों कर रही हैं, जिसे विदेशी अभिजात वर्ग (Elites) द्वारा धन प्राप्त होता है? क्या यह आपके पति (सीताराम येचुरी) और मार्क्सवाद की विचारधारा के खिलाफ नहीं है? आप एक ऐसे संगठन के साथ कैसे काम कर सकती हैं, जिसे अमेरिकी एलीट क्लास (फोर्ड फाउंडेशन) ने शुरू किया था?”

विजय पटेल ने आगे पूछा, “मुझे बताएँ कि क्या आपने कभी किसी विदेशी एलीट क्लास के खिलाफ कोई लेख लिखा है, जो फंड देने वालों की सूची में शामिल हैं? आप एक विदेशी वित्तपोषित (Foreign Funded) एनजीओ के साथ फेलोशिप सलाहकार के रूप में काम कर रही हैं तो क्या आपको उनसे कोई गैर-वित्तीय (Non-Financial) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होता है?”

विजय पटेल ने यह भी पूछा, “एक फेलोशिप सलाहकार के तौर पर फेलो के लिए आप और आपकी टीम के सदस्यों ने ज्यादातर उन्हीं लोगों को चुना जो आपकी संपर्क वाली वेबसाइटों में काम कर रहे हैं। क्या इसे महज एक संयोग कहा जाएगा या आप फेलोशिप के बहाने उनकी वित्तीय सहायता कर रही हैं?

बता दें कि 24 जनवरी 2023 को हिंडनबर्ग ने रिपोर्ट जारी कर अडानी ग्रुप पर कई तरह के आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों के बाद से अडानी ग्रुप के शेयरों में तेजी से गिरावट देखी गई। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयर में सामूहिक रूप से करीब 47 फीसदी की गिरावट देखी गई। अडानी ग्रुप ने हिंडनबर्ग की रिपोर्टों को खारिज कर दिया था।

नेपाल फिर बनेगा हिंदू राष्ट्र!: अभियान में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह भी हुए शामिल, लोगों का मिल रहा जबरदस्त समर्थन

नेपाल (Nepal) को हिंदू राष्ट्र बनाने की माँग तेज होने लगी है और इसे देश के पूर्व महाराजा ज्ञानेंद्र शाह (Gyanendra Shah) को भी समर्थन मिला है। पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ने सोमवार (13 फ़रवरी 2023) को हिंदू राज्य के पहले वाले दर्जे की बहाली से जुड़े एक महत्वपूर्ण अभियान में शामिल हुए।

नेपाल में राजशाही समाप्त होने के बाद ज्ञानेंद्र शाह की यह पहली राजनीतिक उपस्थिति थी। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अभियान उस दिन शुरू किया गया है, जिस दिन हिंसक माओवादी से प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ के नेतृत्व वाली नेपाल सरकार ने माओवादी युद्ध के 23 साल पूरे होने पर देश में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की।

‘प्रचंड’ के इस निर्णय का पूरे देश में विरोध हो रहा है। विरोध करने वालों में सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ पार्टी भी शामिल हैं। विरोध कर रहे लोगों ने विद्रोह को ‘लोगों के युद्ध’ के रूप में मान्यता देने से इनकार कर दिया है। दूसरी ओर

ज्ञानेंद्र शाह ने पूर्वी नेपाल के झापा जिले के काकरभिट्टा से ‘आइए धर्म, राष्ट्र, राष्ट्रवाद, संस्कृति और नागरिकों को बचाते हैं’ अभियान की हरी झंडी दिखाकर शुरुआत की। वहाँ लोगों की भारी भीड़ मौजूद थी, जो ज्ञानेंद्र शाह का अभिवादन कर रहे थे और उनका हौसला बढ़ा रहे थे।

यह अभियान नेपाल के चिकित्सा व्यवसायी दुर्गा परसाई के नेतृत्व में शुरू किया गया है। दुर्गा परसाई पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनिफाइड मार्क्सिस्ट लेनिनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के सदस्य हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान को नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह और उनके परिवार का समर्थन प्राप्त है। राजनीतिक अभियान में पहली बार ज्ञानेंद्र शाह अपने बेटे पारस शाह और बेटी प्रेरणा शाह के साथ दिखे।

पूर्व राजा ने भले ही कोई भाषण नहीं दिया, लेकिन राजशाही समाप्त होने के 14 वर्ष बाद सार्वजनिक समारोह में उनकी उपस्थिति काफी महत्वपूर्ण है। पूर्व राजा ने ऐसे समय किसी राजनीतिक मंच पर शिरकत की है, जब देश के राजनीतिक हालात फिर से अराजकता की ओर बढ़ रहे हैं। 

परसाई कैंसर अस्पताल भी चलाते हैं। उन्होंने सीधे राजशाही की वापसी की बात तो नहीं की, लेकिन कहा, “हम ऐसा देश कभी नहीं चाहते थे। हम ऐसा गणतंत्र बनना कभी नहीं चाहते थे, जो 1 करोड़ से अधिक नेपाली युवाओं को अपना खून और पसीना बहाने के लिए खाड़ी देशों में भेजे।”

आज़म खान के बाद अब बेटे अब्दुल्ला की भी गई विधायकी: बाप की गाड़ी रोके जाने पर पुलिस से उलझ पड़ा था, फर्जी सर्टिफिकेट का भी हुआ था खुलासा

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान (Azam Khan) के बाद अब उनके बेटे अब्दुल्ला आजम (Abdullah Azam Khan) की भी विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई है। मुरादाबाद की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बुधवार (15 फरवरी 2023) को 15 साल पुराने मामले में फैसला सुनाया। फैसला सुनाए जाने के बाद यूपी विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर बताया ​कि स्‍वार टांडा विधानसभा सीट खाली हो गई। इसलिए वहाँ फिर से चुनाव कराया जाएगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रामपुर की स्वार विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक अब्दुल्ला आजम को तीन साल में दो बार अपनी विधायकी से हाथ धोना पड़ा है। तीन साल पहले भी उम्र के फर्जी प्रमाणपत्र मामले में लखनऊ हाईकोर्ट में अब्दुल्ला की विधायकी को रद्द कर दिया था। अब एक 15 साल पुराने मामले में अब्दुल्ला आजम को मुरादाबाद की कोर्ट ने दो साल की सजा सुनाई है। इसी सजा के बाद अब्‍दुल्‍ला आजम की विधायकी चली गई है। नियम यह है कि आपराधिक मामले में दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर जनप्रतिनिधि की विधायकी खुद ही खत्म हो जाती है।

ठीक इसी तरह अमर्यादित भाषा और भड़काऊ बयान देने के कारण सपा नेता आजम खान को 3 साल की कैद की सजा हुई है। इसके कारण उनकी विधानसभा की सदस्यता भी रद्द कर दी गई और मतदान करने पर भी रोक लगा दिया गया। आजम की सदस्यता रद्द होने के कारण ही रामपुर में विधानसभा उपचुनाव हुए थे। दरअसल, आजम खान 28 नवंबर 2022 को रामपुर विधानसभा उपचुनाव में पार्टी के उम्मीदवार असीम रजा के पक्ष में चुनाव प्रचार करने के लिए शुतुरखाना मुहल्ले में पहुँचे थे।

यहाँ उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा था, “बहुत कम अकल है। अगर अकल होती तो जो लोग आज दावा कर रहे हैं कि 35 बरस बाद हमें छोड़ा है तो ये हमें छोड़ देते, मैं खुद ही छोड़ देता इन्हें? जो आज तुम्हारे और हमारे साथ हुआ है, चार सरकारों में रहते हुए मैंने ऐसा किया होता, तो बच्चों तुम्हारी मुस्कुराहट की कसम खाकर कहता हूँ, माँ के पेट से पैदा होने से पहले बच्चा कहता कि पूछ लो आजम खान से कि बाहर निकलना भी है या नहीं।”

15 साल पहले का छजलैट मामला

अब्दुल्ला आजम को जिस मामले में सजा सुनाई गई है, वह 29 जनवरी, 2008 का है। उस दिन मुरादाबाद के छजलैट थाने में पुलिस चेकिंग कर रही थी। आजम खान की कार को भी चेकिंग के लिए रोका गया था, जिससे नाराज होकर आजम खान ने सड़क पर धरना दे दिया था। उसके समर्थन में कई सपा नेता मौके पर पहुँचे थे। इस मामले में आजम खान, अब्दुल्ला आजम, अमरोहा के सपा विधायक महबूब अली, हाजी इकराम कुरैशी और सपा नेता राम कुंवर प्रजापति को नामजद करते हुए उनके खिलाफ एफआईआर लिखी थी।

एफआईआर में आजम और दूसरों पर सड़क जाम करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, भीड़ को उकसाने के आरोप लगे थे। मुरादाबाद की एमपी एमएलए कोर्ट ने इस मामले में आजम खान और अब्‍दुल्‍ला आजम को छोड़कर सभी को दोषमुक्‍त करार दिया था।