दिल्ली (Delhi) में स्थानीय लोगों ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandit) के नाम पर घर-घर जाकर रुपए वसूलने वाले गिरोह को पकड़ा है। हैरान करने वाली बात यह है कि वसूली करने वाले कोई और नहीं, बल्कि कश्मीरी मुस्लिमों (Kashmiri Muslim) का ही गिरोह है।
ऑपइंडिया को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, एक महिला समेत 5-6 लोगों का एक गिरोह कश्मीरी पंडितों के नाम पर लोगों से हजारों रुपए वसूल रहा था। इनमें से तीन लोगों को स्थानीय लोगों ने पकड़ लिया है। इसके बाद उन्हें कंझावाला पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस इन लोगों से पूछताछ कर रही है।
मामला समाने आने के बाद ऑपइंडिया ने स्थानीय लोगों से संपर्क किया। मामला नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के कराला गाँव का है। लोगों ने बताया कि कुछ लोग विस्थापित कश्मीरी पंडितों के नाम पर लोगों से चंदा माँग रहे थे। स्थानीय लोगों को जब शक हुआ तो उन्होंने पैसे वसूल रहे 2 लोगों से आई कार्ड दिखाने के लिए कहा।
दोनों संदिग्ध पहचान पत्र दिखाने के नाम पर आनाकानी करने लगे। इससे लोगों का शक और गहरा गया। स्थानीय लोगों ने इन संदिग्धों को रोककर पूछताछ शुरू कर दी। लोगों को संदिग्धों के पास से नेशनल स्टूडेंट कैंप नाम से कई पन्नों की पर्ची मिली। इस पर देनदार के साथ वसूले गए चंदे की रकम लिखी हुई थी।
स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो का स्क्रीन शॉट
स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो का स्क्रीन शॉट
कुछ देर के बाद दोनों कश्मीरियों ने स्थानीय लोगों को अपना आधार कार्ड दिखलाया। आधार कार्ड के मुताबिक, पकड़े गए कश्मीरी में से एक का नाम शब्बीर अहमद खान है, जो कुलगाम के चट्टाबल का रहने वाला है। दूसरे की पहचान फाज़िल अहमद खान के तौर पर हुई है। फाज़िल अनंतनाग के नरसेंगपोरा का रहने वाला है।
इन लोगों के साथ कश्मीरी महिलाएँ भी पकड़ी गई है। मामले में दिल्ली के कंझावला थाने में शिकायत दी गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, 6 लोगों का एक गिरोह है, जो नेशनल स्टूडेंट कैंप के नाम पर लोगों से अवैध तौर पर रुपए वसूल रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने उस पर्ची का भी वीडियो ऑपइंडिया को सौंपा है, जिसमें वसूले गए लोगों के नाम और रकम दर्ज है। पर्ची में दी गई जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों ने 500 से लेकर 5 हजार रुपए तक की रकम दी चंदा के तौर पर दी है।
लोगों का कहना है कि पुलिस इस बात का पता लगाए कि रकम कहाँ खर्च करने के लिए वसूली जा रही है। लोगों को शक है कि कश्मीर से भगाए गए कश्मीरी पंडितों के नाम पर रुपए जमा करने के बाद इनका इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो का स्क्रीन शॉट
मामले में पुलिस का पक्ष जानने के लिए ऑपइंडिया ने कंझावला थाने से कई बार संपर्क करने की कोशिश की। हालाँकि, थाने की तरफ से फिलहाल कोई जानकारी साझा नहीं की गई है। शिकायतकर्ता की मानें तो पुलिस ने शुरुआत में टाल-मटोल की कोशिश की, लेकिन स्थानीय लोगों के दबाव के कारण उन्होंने जाँच की बात कही है।
जानकारी मिली है कि कंझावला थाने में 3 कश्मीरी मुस्लिम युवक और 3 महिलाओं से पूछताछ की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी कई संदिग्ध गाँव में आकर कश्मीरी पंडितों के नाम पर वसूली करते रहे हैं।
साल 2019 में हरियाणा के फरीदाबाद के एक स्थानीय पत्रकार ने फेसबुक लाइव पर नेशनल स्टूडेंट कैंप के नाम पर अवैध वसूली का जिक्र किया था। इस लाइव में पत्रकार ने संदिग्ध कश्मीरी मुस्लिमों द्वारा फरीदाबाद के अलग-अलग स्थानों से पैसा जुटाने की बात कही थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने गुरुवार (9 फरवरी 2023) को विपक्ष पर जमकर हमला बोला। राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा है कि पंडित जवाहरलाल नेहरु और इंदिरा गाँधी ने 90 बार चुनी हुई सरकारों को गिराया। इंदिरा गाँधी ने तो 50 बार संविधान के आर्टिकल 356 का दुरुपयोग किया।
क्या है आर्टिकल 356?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस आर्टिकल 356 के दुरुपयोग की बात कही है, उसे आम भाषा में राष्ट्रपति शासन कहा जाता है। राष्ट्रपति शासन लगाने के बाद वह राज्य सीधे केंद्र सरकार के शासन के अधीन आ जाता है। वहाँ राज्यपाल के निर्देश पर सारे कार्य होते हैं।
राष्ट्रपति शासन केंद्रीय मंत्री मण्डल की अनुशंसा पर लगाया जाता है। केंद्र सरकार की अनुशंसा के बाद राष्ट्रपति संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का उपयोग करते हुए किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं। राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए कुछ नियमों का पालन करने के लिए कहा गया है।
1.) यदि राष्ट्रपति को लगता है कि किसी राज्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है कि राज्य सरकार संविधान के नियमों के अनुसार नहीं चलाई जा सकती है।
2.) राज्यपाल द्वारा निर्धारित समय के भीतर यदि मुख्यमंत्री का चुनाव नहीं होता है, तब राज्यपाल की अनुशंसा पर राष्ट्रपति आर्टिकल 356 का उपयोग कर सकते हैं।
3.) जब सरकार अल्पमत में हो और राज्यपाल द्वारा दी गई समयावधि में मुख्यमंत्री बहुमत साबित न कर पाएँ।
4.) अविश्वास प्रस्ताव के बाद अल्पमत में सरकार।
5.) प्राकृतिक आपदा, युद्ध या महामारी या अन्य विषम परिस्थितियों के कारण चुनाव स्थगित होने की स्थिति में भी राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।
यहाँ महत्वपूर्ण यह है कि राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए हर हाल में राज्यपाल की अनुशंसा की आवश्यकता होती है। देश में अब तक जितनी बार भी राष्ट्रपति शासन लगाया गया है, उसमें से अधिकांश बार इन नियमों का उल्लंघन कर ही लगाया है। इसके लिए पंडित नेहरू और इंदिरा गाँधी का शासन हमेशा आलोचना के घेरे में रहा है।
कितने समय के लिए लगाया जा सकता है राष्ट्रपति शासन?
आर्टिकल 356 के तहत किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन 6 महीने के लिए लगाया जा सकता है। इसके बाद इस समय अवधि को अधिकतम 3 साल तक बढ़ाया जा सकता है। राष्ट्रपति शासन हटाने के लिए राष्ट्रपति को संसद की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि वह अपने विवेक से इसे हटा सकते हैं।
जिस राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है, वहाँ की सारी व्यवस्था सीधे केंद्र सरकार के हाथों में होती है। राज्य की शासन व्यवस्था कहने को तो राष्ट्रपति के हाथों में होती है, लेकिन उसे चलाती केंद्र सरकार है। बता दें कि केंद्र की सरकार भी राष्ट्रपति के नाम पर ही चलती है।
कब-कब हुआ आर्टिकल 356 का इस्तेमाल…
आर्टिकल 356 का इस्तेमाल पहली बार 20 जून 1951 को पंजाब की गोपीचंद भार्गव सरकार को गिराने के साथ हुआ था। उस समय पंजाब में 302 दिनों तक राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। गोपीचंद भार्गव कॉन्ग्रेस से ही मुख्यमंत्री थे। सरकार के पास पूर्ण बहुमत था। राज्य में कोई विपरीत परिस्थिति भी नहीं थी, लेकिन इसके बाद भी राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था।
इसके बाद साल 1954 में आंध्र प्रदेश की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को भी आर्टिकल 356 के तहत उखाड़ फेंका गया था। उस समय आंध्र के मुख्यमंत्री तन्गुतुरी प्रकाशम थे। कॉन्ग्रेस की सरकार होने के बाद भी राष्ट्रपति शासन लगने का कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू का वामपंथियों से भय को माना जाता है। दरअसल, नेहरू को डर था कि आंध्र प्रदेश में कम्युनिस्ट सरकार सत्ता में आ सकती है।
पंडित नेहरू द्वारा सरकार गिराने की शुरू की गई प्रथा को इंदिरा गाँधी ने आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हालाँकि, लालबहादुर शास्त्री, मोरारजी देसाई और चौधरी चरण सिंह की सरकार में भी राष्ट्रपति शासन लगा, लेकिन 356 के दुरुपयोग का सबसे बड़ा आरोप इंदिरा गाँधी पर लगता रहा है।
इंदिरा गाँधी ने कुल मिलाकर 51 बार राज्य सरकारों को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया था। आँकड़ों को देखें तो इंदिरा गाँधी का बतौर प्रधानमंत्री करीब 15 साल का कार्यकाल रहा। इस दौरान 1966 से 1977 के बीच 36 बार तथा 1980 से 1984 के बीच उन्होंने 15 बार अलग-अलग राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाए। साल 1980 में आपातकाल के बाद सरकार में वापसी होते ही इंदिरा गाँधी ने जनता पार्टी की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई 9 सरकारें गिरा दी थीं।
इंदिरा गाँधी के साथ-साथ मोरारजी देसाई के कार्यकाल में 21 बार तो पीवी नरसिंह राव के कार्यकाल में 11 बार राष्ट्रपति शासन लगा गया था। जनता पार्टी के तीन साल के कार्यकाल में 6 महीने का चौधरी चरण सिंह का कार्यकाल भी शामिल है।
वहीं, राजीव गाँधी के कार्यकाल में 6 बार तो मनमोहन सिंह के समय 12 बार आर्टिकल 356 का उपयोग व दुरुपयोग किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कॉन्ग्रेस पर हमला करने की बड़ी वजह यह रही है कि देश में अब तक कुल 132 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया है। इनमें से करीब 90 बार कॉन्ग्रेस की सत्ता के समय राष्ट्रपति शासन लागू करते हुए सरकारें गिराई गईं।
अंबेडकर ने बताया था ‘संविधान का मृतपत्र’
भारतीय संविधान समिति के अध्यक्ष भीमराव अंबेडकर ने आर्टिकल 356 को ‘संविधान का मृत पत्र’ कहा था। अंबेडकर ने कहा था कि उन्हें लगता है कि राजनीतिक फायदे के लिए इस आर्टिकल का दुरुपयोग किया जा सकता है।
अंबेडकर ने कहा था, “मुझे लगता है कि ऐसे आर्टिकल्स को कभी भी लागू नहीं किया जाएगा और वे एक मृत पत्र बने रहेंगे। यदि इन्हें लागू किया जाता है तो मुझे उम्मीद है कि राष्ट्रपति, राज्य सरकारों को निलंबित करने से पहले उचित सावधानी बरतेंगे। मैं आशा करता हूँ कि यदि किसी राज्य सरकार ने गलती की है तो पहले उसे चेतावनी दी जाएगी।”
भारतीय पशु कल्याण बोर्ड ने 14 फरवरी को काउ हग डे (Cow Hug Day) मनाने की अपील की थी। हालाँकि अब शुक्रवार (10 फरवरी 2023) को बोर्ड ने यह अपील वापस ले ली। इससे पहले बोर्ड ने सोमवार (6 फरवरी 2023) काउ हग डे मनाने की अपील की थी।
पशु कल्याण बोर्ड द्वारा जारी नए आदेश में कहा गया है, “सक्षम प्राधिकारी और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के निर्देशानुसार 14 फरवरी 2023 को काउ हग डे मनाने के लिए भारत के पशु कल्याण बोर्ड की ओर से जारी की गई अपील वापस ली जाती है।”
योग दिवस की तरह ही भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के सहयोग से मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ‘काउ हग डे’ मनाने की पहल की थी। हालाँकि बोर्ड द्वारा इस फैसले को वापस लेने के पीछे के कारण का खुलासा अब तक नहीं हो सका। बता दें कि भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) भारत सरकार का एक संवैधानिक निकाय है, जिसे पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (पीसीए एक्ट) के अंतर्गत बनाया गया था।
इससे पहले बोर्ड की तरफ से की गई अपील में कहा गया था, “हम सब जानते हैं कि गाय भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। गाय हमारे जीवन को बनाए रखने के अलावा पशुधन और जैव विविधता का प्रतिनिधित्व भी करती है। माँ के समान पोषक प्रकृति और दूध देने के कारण गायों को कामधेनु और गौमाता के नाम से जाना जाता है। अपील में आगे लिखा है कि पश्चिमीकरण के कारण हमने अपनी संस्कृति और वैदिक परंपराओं को भुला दिया है।”
अपील में यह भी कहा गया था, “गाय के उपकारों के बदले उसे गले लगाने से गायों के साथ हमारा भावनात्मक जुड़ाव होगा। इसलिए गाय से प्रेम रखने वाले लोगों को 14 फरवरी को COW HUG DAY मनाना चाहिए। इस दिन को मनाते हुए हमें मानव जीवन पर गाय के उपकारों और गाय की महत्ता को याद करना चाहिए। ताकि हमारा जीवन सकारात्मक और खुशहाल बना रहे।”
दिल्ली (Delhi) में जिगोलो (Gigolo) बनाने का झाँसा देकर हजारों युवाओं के साथ ठगी का मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने पूरे गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने ऑनलाइन नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को जिगोलो और एस्कॉर्ट्स सर्विस में नौकरी का झाँसा देकर लाखों की ठगी की है। बता दें जिगोलो का अर्थ पुरुष वेश्यावृत्ति (Male prostitution) है।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, नौकरी की तलाश कर रहे 4000 युवकों से लाखों रुपए की ठगी की गई है। इनमें से ज्यादातर पीड़ित समाज के डर और शर्म के मारे चुप रहे, जबकि कुछ ने हिम्मत करके पुलिस में शिकायत दी। एसएचओ साइबर थाना रमन कुमार सिंह की टीम ने राजस्थान के जयपुर से 2 मुख्य आरोपितों कुलदीप चारन और श्याम लाल को गिरफ्तार किया है।
कुलदीप पहले होटलों में रूम ब्वॉय का काम करता था, जबकि दूसरा आरोपित श्याम लाल होटल के रिसेप्शन पर काम करता था। दोनों हिंदी के साथ-साथ फर्राटेदार अंग्रेजी भी बोलते हैं। कुलदीप महिला की आवाज में बात कर सकता है। युवाओं को झाँसे में लेने के लिए कुलदीप महिला की आवाज में बात करता था। ठगी की रकम वसूलने के लिए इन लोगों ने दर्जनभर बैंक में खाते खुलवा रखे थे।
कैसे खुला मामला ?
पुलिस के मुताबिक, दिल्ली के नरेला के रहने वाले एक शख्स ने साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दी थी। शिकायत के अनुसार, ऑनलाइन नौकरी की तलाश करते हुए वह एक वेबसाइट पर पहुँच गया। वेबसाइट पर दिए गए नंबर पर उसने संपर्क किया।
जिस व्यक्ति ने कॉल उठाया, उसने उसे जिगोलो बनाने के लिए ट्रेनिंग देने की बात कही। इसके लिए शख्स से बतौर रजिस्ट्रेशन फीस 2499 रुपए लिए गए। इसके बाद उनसे एडवांस कमीशन, पासकोड और मसाज किट देने के नाम पर 39,190 ऐंठ लिए गए।
शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना पुलिस ने टीम बनाकर दिए गए फोन नंबर और वेबसाइट को खंगालना शुरू किया। साइबर पुलिस की टीम ने डोमेन नेम और सर्वर स्पेस, कॉल डिटेल और मनी ट्रेल की जाँच की। इसके बाद लोकल इंटेलिजेंस और रेकी के जरिए पहले कुलदीप और फिर दूसरे आरोपित श्याम लाल को गिरफ्तार किया गया।
इन दोनों आरोपितों के पास से पुलिस ने एक डेस्कटॉप, एक लैपटॉप, 4 मोबाइल फोन, एक हार्ड-डिस्क, 2 एसडी कार्ड, 18 सिम कार्ड, 11 बैंक खाते, 21 एटीएम कार्ड और चेकबुक बरामद किए गए हैं।
पश्चिम बंगाल में गर्भवती महिलाओं के आँकड़ों में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि राज्य में हर 6 गर्भवती महिलाओं में 1 टीनेज (13 से 19 साल की लड़की) है। ये आँकड़े राज्य स्वास्थ्य विभाग के ही हैं। विभाग ने इन आँकड़ों पर चिंता प्रकट की है।
पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग के तहत गर्भवती महिलाओं, जच्चे-बच्चे से संबंधित एक वेब-पोर्टल है। ‘मातृमा (MatriMa)’ नाम है उसका। इसके आँकड़ों के अनुसार सितंबर 2022 में बंगाल में किशोर (टीन एजर्स) जोड़ों की तादाद लगभग 4 लाख थी। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों ने उन्हें गर्भ निरोधक चीजों के इस्तेमाल की सलाह दी थी।
गर्भ निरोधकों के इस्तेमाल को लेकर ‘मातृमा (MatriMa)’ की पहल पश्चिम बंगाल में बहुत असरदायक नहीं रही। तुलनात्मक तौर पर देखें तो पिछले वर्ष की तुलना में गर्भ निरोधक चीजों का प्रयोग करने वाले जोड़ों की संख्या में महज 5% का इजाफा हुआ है। जनवरी 2022 में जहाँ गर्भ निरोधकों का प्रयोग करने वाले जोड़ों की सँख्या 50% थी, वहीं 1 साल बाद जनवरी 2023 में यह सँख्या 55% ही हो पाई।
‘मातृमा (MatriMa)’ के आँकड़ों के अनुसार सितंबर 2022 में पश्चिम बंगाल में कुल विवाहित महिलाओं में से टीनेजर लड़कियों की संख्या 4 लाख थी। इससे ज्यादा चौंकाने वाला आँकड़ा यह है कि बंगाल में कुल गर्भवती महिलाओं में 17% टीनेज लड़कियाँ हैं, जबकि शादीशुदा महिलाओं में टीनेज लड़कियों का प्रतिशत सिर्फ 4% ही है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण ने पश्चिम बंगाल में गर्भवती महिलाओं की स्थिति, कम-उम्र वाले विवाहित जोड़ों आदि पर 2019-2020 में आँकड़े जारी किए थे। उन आँकड़ों के अनुसार तब राज्य में गर्भवती कुल महिलाओं में 17% टीनएजर्स बताई गई थीं। उस समय जारी आँकड़े के अनुसार 15 से 19 वर्ष की उम्र के बीच गर्भवती हुई लड़कियों का प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में 8.5% था, जबकि ग्रामीण इलाकों में इसी का प्रतिशत 19.6 था।
स्वास्थ्य मंत्रालय जहाँ लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल से ऊपर मानता है तो वहीं बच्चे पैदा करने के लिए न्यूनतम उम्र 21 साल बताई गई है। मंत्रालय का मानना है कि इस उम्र से कम होने पर न सिर्फ बच्चे बल्कि माँ को भी तमाम संक्रमण और खतरों का डर होता है।
तमिलनाडु (Tamil Nadu) में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के पथ संचालन (Route March) को लेकर मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तामिलनाडु पुलिस को आदेश दिया है कि आरएसएस को राज्य भर में पथ संचलन की अनुमति दी जाए।
इसके पहले एकल न्यायाधीश ने आरएसएस को सार्वजनिक सड़कों से जुलूस निकालने की इजाजत नहीं दी थी। कोर्ट ने आरएसएस को किसी मैदान या स्टेडियम में पथ संचालन आयोजित करने के निर्देश दिए थे। आरएसएस की तरफ से इस फैसले को चुनौती दी गई थी।
मद्रास हाईकोर्ट ने आरएसएस की तरफ से एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ दी गई याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस मोहम्मद शफीक की पीठ ने नागरिकों के बोलने (भाषण देने) और अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का हवाला देते हुए आरएसएस के पक्ष में फैसला सुनाया।
हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से तीन अलग-अलग तारीखों पर रूट मार्च निकालने के लिए दोबारा आवेदन देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस को राज्य के विभिन्न जिलों में निकाले जाने वाले जुलूस के लिए अनुमति देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस संघ द्वारा किसी भी तारीख को जुलूस निकालने की इजाजत दे।
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस को दिया आदेश।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को राज्यभर के जिलों में निकालने दें पथसंचलन।
इसके पहले आरएसएस की तरफ से 50 स्थानों पर रैली और जुलूस की इजाजत माँगी गई थी। उच्च न्यायालय ने 4 नवंबर 2022 को तमिलनाडु में 44 स्थानों पर कुछ शर्तों के साथ संघ को कार्यक्रमों की इजाजत दी थी। आरएसएस की तरफ से इस फैसले को चुनौती दी गई।
जी. सुब्रमण्यम की ओर से दाखिल की गई याचिका में 2 अक्टूबर 2023 के फैसले का जिक्र किया गया था, जिसमें उन्हें मार्च निकालने की अनुमति दी गई थी। सुब्रमण्यम ने राज्य सरकार के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को अदालत की अवमानना के लिए दंडित करने की भी माँग की थी।
बता दें कि इसके पहले राज्य सरकार और पुलिस की तरफ से हिंदू संगठन इंदु मक्कल काची-तमिझगम (IMKT) को भी राज्यस्तरीय सम्मेलन की इजाजत नहीं मिल रही थी। पुलिस ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी थी। संगठन ने इसके बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) ने 29 जनवरी 2023 को आयोजित राज्यस्तरीय सम्मेलन की इजाजत दे दी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि धार्मिक सभाओं के आयोजन पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।
उत्तर प्रदेश की राजधानी में यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 (UP Global Investors Submit 2023) का आयोजन जारी है। इस आयोजन में कई दिग्गज उद्योगपतियों ने उत्तर प्रदेश में निवेश की घोषणा की। इस दौरान रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने प्रदेश में 75,000 करोड़ रुपए निवेश करने का ऐलान किया है।
समिट में मुकेश अंबानी ने कहा कि रिलायंस ने अगले चार वर्षों में यूपी में जियो, खुदरा और नवीकरणीय व्यवसायों में 75000 करोड़ रुपए का निवेश करने की योजना बनाई है। इससे राज्य में 1,00,000 से अधिक अतिरिक्त रोजगार पैदा होंगे। उन्होंने इस समिट को विकास का महाकुंभ बताते हुए कहा कि जियो दिसंबर 2023 तक पूरे राज्य में 5G सर्विस शुरू कर देगी।
मुकेश अंबानी ने कहा कि इस साल के बजट ने भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभरने की नींव रखी है। भारत बहुत मजबूत विकास पथ पर है। रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन ने कहा कि उनका ग्रुप उत्तर प्रदेश में 10 गीगावॉट नवीकरणीय क्षमता स्थापित करेगा। यह उत्तर प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी अक्षय ऊर्जा परियोजना होगी।
मुकेश अंबानी ने बायो-गैस एनर्जी बिजनेस में उतरने की घोषणा भी की। उनका कहना है कि बायो-गैस से पर्यावरण में सुधार के साथ ही किसानों को भी बड़ा लाभ होगा। किसान हमारे अन्नदाता तो हैं ही, अब ऊर्जादाता भी बनेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि 2018 से अब तक रिलायंस प्रभु श्रीराम की नगरी उत्तर प्रदेश में 50 हजार करोड़ रुपए निवेश कर चुकी है। 75000 करोड़ के नए निवेश को मिलाकर कुल निवेश 1.25 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा। यूपी 5 साल के भीतर ही 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बन जाएगा।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लखनऊ में यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 का उद्घाटन किया। इस खास मौके पर पीएम ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि एक समय पर यूपी बीमारू राज्य कहलाता था। हर कोई इस राज्य से अपनी उम्मीदें छोड़ चुका था, लेकिन बीते 5-6 वर्षों में यूपी ने अपनी नई पहचान स्थापित कर ली है। अब यूपी अपने सुशासन से गुड गवर्नेंस (Good Governance) के लिए पहचाना जा रहा है।
To make the #UPGIS23 a success, the ministers of the UP cabinet did road shows in 21 cities of 16 countries. Ambassadors have contributed in carrying forward the campaign as per your (Prime Minister Shri Narendra Modi ji) vision by giving full cooperation: #UPCM@myogiadityanathpic.twitter.com/MApHtVK2Wr
वहीं, पीएम के अलावा तीन दिन तक चलने वाले इस समिट के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमें 32.92 लाख करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव मिला है, जबकि हमने 23 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा था। उन्होंने कहा कि यूपी लक्ष्य से कई गुना अधिक निवेश हासिल करने में सफल हुए।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुरुवार (09 फरवरी 2023) को उच्च न्यायालय (High court) के लिए मुख्य न्यायाधीशों (Chief Justice) के नामों की सिफारिश भेजी है। कॉलेजियम सिस्टम बनने के बाद 25 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब पद रिक्त होने से पहले ही उस पर नियुक्ति के लिए न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की गई है।
कॉलेजियम ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लिए जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर, कलकत्ता उच्च न्यायालय के लिए जस्टिस टीएस शिवगणनम, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए जस्टिस रमेश सिन्हा, गुजरात हाईकोर्ट के लिए जस्टिस सोनिया जी गोकानी और मणिपुर उच्च न्यायालय के लिए जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर की सिफारिश की है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ समेत तीन मेंबरों वाले कॉलेजियम का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के वर्तमान चीफ जस्टिस राजेश बिंदल को उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत किया जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी भी मिल गई है। ऐसे में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश का पद खाली हो जाएगा। खाली हो रहे इस पद के लिए जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर की नियुक्ति की सिफारिश की गई है।
As per the provisions under the Constitution of India, Hon’ble President of India has appointed the following Chief Justices of High Courts as Judges of the Supreme Court. My best to them. 1.Rajesh Bindal, Chief Justice, Allahabad HC. 2.Aravind Kumar, Chief Justice, Gujarat HC
इसी तरह गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जा रहा है। रिक्त हो रहे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद के लिए जस्टिस सोनिया जी गोकानी के नाम की सिफारिश की जा रही है।
जस्टिस सोनिया जी गोकानी गुजरात उच्च न्यायालय की वरिष्ठतम न्यायाधीश हैं। उधर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरूप गोस्वामी 10 मार्च को रिटायर हो रहे हैं। इसलिए कॉलेजियम ने जस्टिस रमेश सिन्हा के नाम की इस पद के लिए अनुशंसा की है।
कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव का कार्यकाल 30 मार्च 2023 को समाप्त हो रहा है। इस पद के लिए कॉलेजियम द्वारा वरिष्ठतम जज जस्टिस टीएस शिवगणनम के नाम की सिफारिश की गई है।
मणिपुर उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस पीवी संजय कुमार की भी सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति हो रही है। ऐसे में कॉलेजियम ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के वरिष्ठतम जज जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर के नाम की सिफारिश मणिपुर उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस के रूप में की है। बता दें जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर के भाई हैं।
देश में पहली बार जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में सोने और लिथियम (Lithium) जैसे रेयर मेटल (Rare Metal) का भंडार मिला है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने गुरुवार (9 फरवरी 2023) को इसकी जानकारी दी। इससे चीन जैसे देशों पर भारत की निर्भरता खत्म हो जाएगी। इसके साथ ही भारत से निर्यात भी कर सकेगा।
खनन मंत्रालय के मुताबिक, “भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने पहली बार जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के सलाल-हैमाना क्षेत्र में 59 लाख टन लिथियम का पता लगाया है।” लिथियम का इस्तेमाल मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल कैमरा, सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए रिचार्बेल बैट्री में किया जाता है।
इसके अलावा, इसका उपयोग खिलौनों और घड़ियों को बनाने के लिए भी किया जाता है। वर्तमान में भारत लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे कई रेयर मेटल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है। अब जम्मू-कश्मीर में लिथियम के भंडार का पता लगने के बाद भारत की दूसरे देशों से आयात पर निर्भरता कम हो जाएगी।
माइंस सेक्रेटरी विवेक भारद्वाज ने कहा, “देश में पहली बार जम्मू-कश्मीर में लिथियम के भंडार की खोज की गई है। मोबाइल फोन से लेकर सोलर पैनल और महत्वपूर्ण खनिजों की हर जगह आवश्यकता होती है। आत्मनिर्भर बनने के लिए देश के लिए महत्वपूर्ण खनिजों का पता लगाना और उन्हें संसाधित करना बहुत जरूरी है। यदि सोने का आयात कम किया जाता है तो हम आत्मनिर्भर बन जाएँगे।”
खनन मंत्रालय के अनुसार, लिथियम और सोने सहित 51 खनिज ब्लॉक पर एक रिपोर्ट राज्य सरकारों को सौंपी गई हैं। इन 51 खनिज ब्लॉकों में से 5 ब्लॉक सोने से संबंधित हैं। ये ब्लॉक जम्मू-कश्मीर (केंद्र शासित), आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक जैसे 11 राज्यों में फैले हैं। ये पोटाश, मोलिब्डेनम, बेस मेटल आदि जैसी वस्तुओं से संबंधित हैं।
Shri. Vivek Bharadwaj, IAS, Secretary, @MinesMinIndia handed over 16 geological reports (G2 & G3 stage) & 35 Geological memorandums to state governments during the 62nd Central Geological Programming Board (CGPB) meeting held today. pic.twitter.com/oZiQUQtc3w
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने फील्ड सीजन 2018-19 से अब तक के कामों के आधार पर ये ब्लॉक तैयार किए थे। इनके अलावा, 7897 मिलियन टन के कुल संसाधन वाले कोयला और लिग्नाइट की 17 रिपोर्टें भी कोयला मंत्रालय को सौंपी गईं।
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने रणनीतिक और महत्वपूर्ण खनिजों पर 115 परियोजनाएँ और उर्वरक खनिजों पर 16 परियोजनाएँ स्थापित की हैं। 62वीं केंद्रीय भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (CGPB) की बैठक के दौरान लिथियम और गोल्ड सहित 51 खनिज ब्लॉकों पर एक रिपोर्ट राज्य सरकारों को सौंपी गई है।
बता दें कि चीन (China) और ऑस्ट्रेलिया (Australia) दुनिया में लिथियम के सबसे बड़े सप्लायर हैं। इसके चलते भारत समेत कई देशों को उन पर निर्भर रहना पड़ता है। ये देश इस कारण से मनमानी भी करते हैं। हालाँकि, अब भारत में भी लिथियम के भंडार का पता चलने के बाद इन देशों पर निर्भरता कम होगी।
भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की साजिश को लेकर महाराष्ट्र एटीएस ने बड़ा खुलासा किया है। दरअसल, एटीएस ने 2 फरवरी 2023 को PFI के 5 आतंकियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। इस चार्जशीट में कहा गया है कि गिरफ्तार आतंकी अग्निपथ योजना को मुस्लिमों के खिलाफ बताकर मुस्लिम युवकों को भड़का रहे थे।
महाराष्ट्र एटीएस ने सितंबर 2022 में छापेमारी करते हुए पीएफआई से जुड़े 20 आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इनमें से 5 आतंकी मुंबई से गिरफ्तार हुए थे। इन 5 आरोपितों की पहचान मजहर खान, सादिक शेख, मोहम्मद इकबाल खान, मोमिन मिस्त्री और आसिफ हुसैन खान के रूप में हुई थी। इन सभी पर गैरकानूनी गतिविधियों और देश के खिलाफ साजिश में शामिल होने का आरोप है।
महाराष्ट्र एटीएस द्वारा इन 5 आतंकियों के खिलाफ 600 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में कहा गया है कि आरोपित साल 2047 तक भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने के उद्देश्य से काम कर रहे थे। इस चार्जशीट में इन आतंकियों के पास से मिले ‘विजन 2047’ को भी बतौर दस्तावेज इस्तेमाल किया गया है।
बता दें कि ऑपइंडिया ने जुलाई 2022 में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के खतरनाक और राष्ट्रद्रोही ‘विजन 2047’ को लेकर विस्तृत जानकारी दी थी। इस रिपोर्ट को आप इस लिंक को क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
महाराष्ट्र ATS ने जो चार्जशीट दाखिल की है, उसमें पीएफआई के नापाक मंसूबों और इसे पूरा करने के लिए बनाई गई योजना के बारे में बताया गया है। इसके साथ ही इसमें बताया गया है कि PFI के गुर्गे इन योजनाओं को पूरा करने के लिए किस तरह से काम कर रहे थे। इस चार्जशीट में PFI को लेकर जो खुलासे हुए हैं वह बेहद चौंकाने वाले हैं।
चार्जशीट में PFI के 5 आतंकियों को लेकर निम्न खुलासे हुए हैं :
◆ सभी 5 आतंकी PFI के पदाधिकारी थे। पीएफआई ये लोग आतंकवादी संगठनों के साथ काम करते हुए भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के लिए साजिश रच रहे थे।
◆ महाराष्ट्र के चेंबूर, धारावी, कुर्ला, ठाणे, नेरुल, पनवेल और मुंब्रा में पीएफआई के सदस्यों द्वारा गुप्त बैठकें की गई थीं। इन बैठकों में देश के खिलाफ काम करने के उद्देश्य से योजनाएँ बनाईं गई थीं। साथ ही मुस्लिमों को कट्टरपंथी बनाने और साल 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के षड्यंत्र रचे गए थे।
◆ पीएफआई ने मुस्लिमों को अपने संगठन में शामिल करने की योजना बनाई थी। ये आतंकी मुस्लिमों को इस बात का विश्वास दिला रहे थे कि वह भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे में इनका प्लान मुस्लिमों को हिंदुओं के खिलाफ एकजुट करना था।
◆ पीएफआई देश के कानून में बदलाव कर शरिया कानून लागू करने के उद्देश्य से काम कर रहा था।
◆ PFI के गिरफ्तार आरोपितों की मंशा था कि देश के मुस्लिमों की पहचान सिर्फ मुस्लिमों के रूप में हो न कि उन्हें भारतीय के रूप में जाना जाए।
◆ पीएफआई मुस्लिमों के बीच इस बात का प्रचार कर रहा था कि देश में उन पर खतरा है। साथ ही उन पर अत्याचार हो रहा है। इन सबका उपयोग कर वह मुस्लिमों को हथियार चलाने के लिए प्रशिक्षित करना चाहते थे।
◆ पीएफआई पैसा जुटाते हुए भारतीय लोकतंत्र को खत्म करने के लिए विदेशी संगठनों से मदद लेनी की कोशिश कर रहा था।
◆ गिरफ्तार आरोपितों में से 2 लोग कानून के जानकार थे। कानून के हिसाब से वे पीएफआई की टीम को मार्गदर्शन दे रहे थे।
◆ 1 आरोपित पीएफआई में मुस्लिम युवकों की भर्ती के खिलाफ था।
◆ अग्निपथ को ‘मुस्लिम नरसंहार’ के लिए एक योजना होने के बारे में पीएफआई कैसे प्रचार कर रहा था।
एटीएस ने आरोपितों के फोन चैट रिकवर किए हैं। इस चैट में अग्निपथ योजना को ‘मुस्लिमों के नरसंहार’ की योजना बताया गया है। अग्निपथ का दुष्प्रचार कर हिंदुओं के खिलाफ मुस्लिमों को एकजुट करने की योजना थी। यह मैसेज दानिश मलिक नामक व्यक्ति द्वारा भेजा गया था। इस मैसेज का शीर्षक ‘अग्निपथ या संघियों की बंदर सेना’ था।
पीएफआई के गिरफ्तार आतंकवादियों के पास से बरामद चैट
इस चैट में कहा गया था कि अग्निपथ योजना के तहत 17 से 21 साल के हिंदुओं की भर्ती की जा रही है। भर्ती युवाओं को हथियार और सैन्य प्रशिक्षण दिया जाएगा। सेना में 5 साल काम करना के बाद हथियार चलाने के लिए प्रशिक्षित हिंदू युवा पूरी दुनिया में खुले घूम रहे होंगे।
इस चैट में अग्निपथ योजना की तुलना ‘शैतान इजराइल जैसी नीति’ से की गई है। इसके साथ ही कहा गया है कि इस योजना के बॉस देश के कोने-कोने में सेना प्रशिक्षण प्राप्त हिंदू होंगे। ये हिंदू दंगाइयों की एक ऐसी सेना होगी, जो सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त होने के कारण डरेंगे नहीं। इन्हें यदि धक्का दिया जाएगा तो वह भागेंगे नहीं।
इस मैसेज में दावा किया गया था कि अग्निपथ योजना आरएसएस मॉड्यूल को विस्तार कर तैयार किया गया है। आरएसएस ने भी हिंदुओं को हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया था। पीएफआई के मैसेज में यह भी दावा किया गया है कि इजरायल की नीति की तरह ही इस रोजगार योजना के तहत मुस्लिमों का नरसंहार करने के लिए हिंदुओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।
PFI ने इस मैसेज में अग्निपथ योजना शुरू करने के 4 बड़े कारण बताए हैं :
1.) ‘संघी’ (हिंदू) मुस्लिमों के खिलाफ भारतीय सेना तैनात नहीं कर सकते। 2.) यदि वे ऐसा करते हैं तो सीमा सुरक्षा कमजोर हो जाएगी। 3.) अगर ‘संघी’ (हिंदू) मुस्लिमों के खिलाफ सेना तैयार करते हैं तो उन्हें वैश्विक स्तर पर शर्मिंदा होना पड़ेगा। यह ठीक वैसे ही होगा जैसे रोहिंग्या मुस्लिमों के “नरसंहार” के कारण म्यांमार की सेना को शर्मिंदा होना पड़ा था। 4.) पीएफआई का यह भी मानना है कि हिंदू मुस्लिमों के खिलाफ सेना तैनात नहीं कर सकते। इसके पीछे तर्क देते हुए कहा गया है कि यदि सेना संगठित हो जाएगी तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटा देंगे। इसमें कुछ भी नया नहीं होगा। यह पहले भी कई देशों में हो चुका है।
पीएफआई के अनुसार, यही कारण है कि ‘संघी’ मुस्लिमों के खिलाफ सीधे भारतीय सेना को तैनात नहीं करेंगे। मुस्लिमों का नरसंहार हेतु हिंदुओं को ट्रेंड करने के लिए अग्निपथ की शुरुआत की गई है। मैसेज में आगे कहा गया है कि सभी मुस्लिम, सुन्नी, वहाबी, शिया आदि को एकजुट होकर अग्निपथ योजना में भर्ती होना चाहिए।
मैसेज में यह भी कहा गया है, “यदि आप सुन्नी हैं तो हमास की तरह, यदि आप वहाबी हैं तो जिहादी इस्लामी की तरह (शायद हरकत-उल-जिहाद अल-इस्लामी की बात की गई है, यह संगठन अल कायदा और तालिबान से जुड़ा हुआ है), यदि आप एक शिया तो हिज़्बुल्लाह की तरह, आपको सामने आना होगा। समय बहुत कम है। अग्निपथ योजना की तरह प्रशिक्षण और नौकरी पाने के लिए मुस्लिम युवाओं को भी इसी तरह से इस योजना में शामिल होने की जरूरत है।”
PFI के इस मैसेज में आगे कहा गया है, “वैसे तो मुस्लिमों को अग्निपथ में भर्ती होना चाहिए। हालाँकि इसकी संभावना बेहद कम है कि अग्निपथ योजना में मुस्लिमों को सम्मिलित किया जाएगा। वास्तव में, यह योजना इस्लाम का विरोध करने वालों द्वारा बनाई गई है।” मैसेज में यह भी कहा गया है कि यदि मुस्लिम इस योजना में भर्ती होते हैं तो वे एक ‘शेरों की सेना’ बना सकते हैं, जिससे देश को फायदा मिलेगा।
इसके अलावा, महाराष्ट्र एटीएस ने पीएफआई के इन आरोपितों के फोन से ‘365 डेज: थ्रू अ थाउजेंड कट्स’ (365 days: Through a Thousand Cuts) नामक किताब जब्त की थी। इस किताब में कहा गया है कि साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने आने के बाद से देश में मुस्लिमों के लिए स्थितियाँ बदल गई हैं।
इस किताब के एक पैराग्राफ में लिखा है, “मोदी के सत्ता में आने के अगले ही दिन से सभी बुरी ताकतें सामने आ गईं। नफरत फैलाने वाले लोगों ने जहर उगलना शुरू कर दिया। उन सभी को यह लग रहा है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र बन चुका है।” हिंदुओं के खिलाफ नफरत से भरी हुई इस किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात में हुए 2002 के दंगों का भी जिक्र है। दंगों के समय मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।
इसके अलावा एटीएस द्वारा जब्त की गई इस किताब में योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति और गिरिराज सिंह समेत कई अन्य हिंदू नेताओं का भी जिक्र किया गया है। इस किताब में पीएफआई और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के संबंधों का भी खुलासा हुआ। इस किताब में एसडीपीआई का नाम बतौर प्रकाशक लिखा हुआ है। हालाँकि, एसडीपीआई ने पीएफआई से अपने संबंधों को कभी स्वीकार नहीं किया है।
बता दें कि पीएफआई ने ‘इंडिया विज़न 2047’ नाम के दस्तावेज़ को अपने कैडर के बीच आंतरिक रूप से प्रसारित किया है। उसका लक्ष्य ‘कायर हिंदुओं’ पर पूरी तरह से हावी होना और उन्हें अपने अधीन करना है। यह लक्ष्य तब ही प्राप्त किया जा सकता है, जब पीएफआई के पीछे 10 प्रतिशत मुस्लिम एकजुट हों।
इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि PFI अपने प्रशिक्षित कैडरों और तुर्की जैसे इस्लामी देशों की मदद से भारत के खिलाफ एक पूर्ण सशस्त्र विद्रोह शुरू करने की योजना बना रहा है। इस कट्टरपंथी इस्लामी संगठन ने अन्य इस्लामी देशों से भी भारत सरकार और बहुसंख्यक हिंदुओं को ‘घुटनों पर’ लाने में मदद करने की अपील की है।
‘इंडिया विजन 2047’ दस्तावेज़ में एक टैगलाइन है जो पीएफआई के लक्ष्य को रेखांकित करती है – “भारत में इस्लामी शासन की ओर”। इस खतरनाक दस्तावेज़ में ‘भारत में मुस्लिमों की वर्तमान स्थिति’, ‘हर घर में पीएफआई’ तक की रणनीति, भारत 2047 योजना और भारत में मुस्लिम समुदाय के लिए कार्रवाई योग्य बिंदुओं की बारे में वर्णन डराने वाली है।