ड्रामा क्वीन के नाम से मशहूर एक्ट्रेस राखी सावंत (Rakhi Sawant) ने इस्लाम अपनाकर आदिल खान दुर्रानी (Adil Khan Durrani) से निकाह किया था। हालाँकि, कुछ दिन बाद से ही वह आदिल पर तरह-तरह के आरोप लगाने लगीं। इसी बीच आदिल खान पर एक छात्रा ने बलात्कार (RApe) का केस दर्ज कराया है। इससे आदिल की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
आदिल खान के खिलाफ भारत में पढ़ाई कर रही ईरान की एक छात्रा ने मैसूर में बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराया है। वीवीपुरम थाने में दी गई शिकायत में ईरानी छात्रा ने कहा कि वह मैसूर में डॉक्टर ऑफ फॉर्मेसी की पढ़ाई कर रही है। इस दौरान उसकी मुलाकात आदिल से डेजर्ट लैब फूड अड्डा में हुई।
बता दें कि यह फुड आउटलेट आदिल का ही है। यहाँ पर दोनों की जान-पहचान के बाद दोस्ती हो गई। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियाँ बढ़ गईं। छात्रा आरोप है कि आदिल ने निकाह का झाँसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। छात्रा ने आदिल पर मैसूर के एक अपार्टमेंट में उसके साथ रेप करने का भी आरोप लगाया।
छात्रा का कहना है कि जब उसने आदिल से निकाह की बात कही तो उसने मान कर दिया और कहा कि उसके कई लड़कियों से इसी तरह के संबंध हैं। जब छात्रा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात कही तो आदिल उसकी अश्लील तस्वीरें लीक करने की धमकी दी। आदिल ने उसे कुछ इंटीमेट तस्वीरें भी भेजीं।
ईरानी छात्रा ने अपनी शिकायत में उस मोबाइल नंबर का भी जिक्र किया है, जिससे उसे अश्लील तस्वीरें भेजी गई थीं। इतना ही नहीं, छात्रा ने कहा कि आदिल ने ये तस्वीरें उसकी अम्मी-अब्बू को भी भेजने की धमकी दी और कहा कि वह उसे जान से भी मार डालेगा। उसने आरोप लगाया कि आदिल उसे ब्लैकमेल कर रहा है।
ईरानी छात्रा का कहना है कि आदिल की इन धमकियों से वह काफी डर गई थी। इसके बाद उसने आदिल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सोची और आखिरकार उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। आदिल के खिलाफ पुलिस ने IPC की धारा 417, 420, 376, 504 और 506 के तहत केस दर्ज किया गया है।
बता दें कि इससे पहले राखी सावंत ने भी आदिल खान के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराया था। इसके बाद मुंबई की ओशिवारा पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। आदिल इस समय 14 दिन की न्यायिक हिरासत में है। इसके बाद उसके खिलाफ रेप का यह दूसरा मुकदमा दर्ज किया गया है।
समाजवादी पार्टी नेता और राज्यसभा सांसद जया बच्चन का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस वीडियो में जया बच्चन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को उँगली दिखाते हुए दिख रहीं हैं। इस वीडियो को लेकर भाजपा ने जया बच्चन की निंदा की है। साथ ही सोशल मीडिया यूजर्स भी उनकी आलोचना कर रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह वीडियो गुरुवार (9 फरवरी, 2023) का है। राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान कॉन्ग्रेस की राज्यसभा सांसद रजनी पाटिल ने सभापति के निर्देशों का पालन नहीं किया। इसको लेकर उन्हें बजट सत्र के शेष समय के लिए निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद जया बच्चन कॉन्ग्रेस सांसद के समर्थन में बात कर रहीं थीं। इसी दौरान उन्होंने सभापति को उँगली दिखाते हुए टिप्पणी की।
जया बच्चन की इस हरकत को लेकर भारतीय जनता पार्टी जमकर आलोचना कर रही है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से सांसद अरुण साव ने लिखा है, “जया बच्चन जी रंगमंच और लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच का अंतर रखिए। युवा पीढ़ी आपका अनुसरण करती है।”
जया बच्चन जी रंगमंच और लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच का अंतर रखिए!
राजस्थान बीजेपी के नेता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने लिखा, “अहंकार में चूर जया बच्चन राज्यसभा में उप-राष्ट्रपति को उँगली दिखा रही हैं। लोकतंत्र के मंदिर में ऐसे लोग कैसे आ जाते हैं?”
अहंकार में चूर जया बच्चन राज्यसभा में उप-राष्ट्रपति को अंगुली दिखा रही है …लोकतंत्र के मंदिर में ऐसे लोग कैसे आ जाते हैं ? pic.twitter.com/Nfs21OtVoT
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सलाहकार कंचन गुप्ता ने ट्वीट कर कहा है, “उस मौके की याद आ गई जब जया बच्चन ने नेहरू खानदान पर तल्ख टिप्पणी की थी। यूपीए सत्ता में थी। अमिताभ बच्चन माफी माँगने के लिए दौड़ पड़े और हाथ से लिखा हुआ एक बयान जारी किया, जिसमें ‘वो राजा हैं, हम रंक हैं’ लिखा हुआ था।”
Reminded of the occasion when Jaya Bachchan commented harshly on Nehru clan. UPA was in power. Amitabh Bachchan rushed to apologise and issued a hand-wringing statement that ended with “वो राजा हैं, हम रंक हैं।” (They are rulers, we are commoners.) pic.twitter.com/4PTgffVC5I
वहीं ट्विटर यूजर ने लिखा, “आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जी इस महिला को जीवन के 50 से अधिक वर्ष झेलने के लिए श्री अमिताभ बच्चन जी को भारत रत्न दे दीजिए। बड़े बुजुर्ग कह गए हैं आधुनिक और ज्ञानी होना एक सामान्य बात है। लेकिन संस्कारी और मर्यादित होना श्रेष्ठ मनुष्यता का पर्याय है।”
@narendramodi आदरणीय प्रधानमंत्री जी इस महिला को जीवन के 50 से अधिक वर्ष झेलने के लिए श्री अमिताभ बच्चन @SrBachchan जी को भारत रत्न दे दीजिए बड़े बुजुर्ग कह गए है आधुनिक और ज्ञानी होना एक सामान्य बात है लेकिन संस्कारी और मर्यादित होना श्रेष्ठ मनुष्यता का पर्याय है pic.twitter.com/MNXngTSeYC
महाराष्ट्र एटीएस ने सितंबर 2022 में छापेमारी करते हुए प्रतिबंधित संगठन पीएफआई से जुड़े 20 आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इनमें से 5 आतंकी मुंबई से गिरफ्तार हुए थे। एटीएस ने गत 2 फरवरी को इनमें से 5 आतंकियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। एटीएस ने खुलासा करते हुए कहा है कि ये सभी आतंकी भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने की साजिश के तहत काम कर रहे थे।
गिरफ्तार 5 आरोपितों की पहचान मजहर खान, सादिक शेख, मोहम्मद इकबाल खान, मोमिन मिस्त्री और आसिफ हुसैन खान के रूप में हुई। इन सभी पर गैरकानूनी गतिविधियों और देश के खिलाफ साजिश में शामिल होने का आरोप है। इन कट्टरपंथियों में से एक इकबाल खान का ट्विटर पर @khaniqbal129 नामक अकाउंट है। इस अकाउंट से वह हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की धमकी देने के अलावा प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के समर्थन में ट्वीट करता था।
महाराष्ट्र एटीएस द्वारा दायर चार्जशीट का स्क्रीनशॉट
इकबाल खान ने हिंदुओं के खिलाफ अपनी नफरत को दिखाते हुए ट्वीट किया था, “आरएसएस/बीजेपी भारत में ब्राह्मणवादी प्रभुत्व के लिए काम कर रहे हैं। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है। भारत के हर आम नागरिक के लिए खतरा है। इसका विरोध किया जाएगा।”
RSS/BJP is just working for the Brahmanical dominance in India which is a threat to democracy and a threat to every common citizen of India, it will be objected. #PFIJhukegaNahi
एक अन्य ट्वीट में, उसने दावा करते हुए कहा कि हाशिए में पड़े समुदायों के साथ ‘हिरासत में हिंसा’ की जाती है। वहीं, सवर्णों (कथित तौर पर उच्च जाति के हिंदू) के लिए यह एक अपवाद है।
पीएफआई के चरमपंथी इकबाल ने हिंदुओं को ‘भगवा आतंकवादी’ बताते हुए लिखा, “इस खूनी खेल का गढ़ नागपुर (आरएसएस प्रशिक्षण केंद्र) है जहाँ हर दिन एक नया भगवा आतंकवादी पैदा होता है।”
उसने हिंदुओं के खिलाफ के खुले तौर पर हिंसा की धमकी देते हुए लिखा, “आज भारत के लोगों को यह कहने की जरूरत है कि जो मुल्लों को काटने आएँगे उन्हें भी काट दिया जाएगा। हमें ऐसा विश्वास पैदा करने की जरूरत है, नहीं तो अत्याचारियों का मनोबल बढ़ता ही जाएगा।”
इकबाल खान के ट्वीट्स का स्क्रीनशॉट
यही नहीं उसने हिंदुओं को डराते हुए लिखा है, “मुसलमानों का खून बहाकर भारत में राज करने की राजनीति चल रही है। अपना नंबर आने से पहले संभल जाना।”
इकबाल खान राम जन्मभूमि फैसले का बदला लेने के लिए मुस्लिम समुदाय को भड़काने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता था। जुलाई 2022 में किए गए एक ट्वीट में, उसने राम मंदिर को लेकर किए गए ऐतिहासिक फैसले को ‘मुस्लिमों के खिलाफ किया गया अन्याय’ करार दिया था।
पीएफआई के कट्टरपंथी इकबाल ने हिंदुओं को अपराधी के रूप में दिखाने के लिए करौली में रामनवमी के दौरान हुई हिंसा को हिंदुओं द्वारा की गई हिंसा बता दिया था। जबकि सच्चाई यह है कि 2 अप्रैल 2022 को करौली के हटवारा बाजार क्षेत्र में हिंदुओं द्वारा आयोजित की गई बाइक रैली पर इस्लामवादियों ने पथराव किया था।
हिंदुओं द्वारा ‘नव संवत्सर’ मनाने के लिए जब मुस्लिम बाहुल्य इलाके से रैली निकाली गई तब इस्लामवादी हिंसक हो गए थे। इस दौरान एक दर्जन से अधिक दुकानों और तीन बाइकों में आग लगा दी गई थी। कथित तौर पर, भीड़ के हमले में पुलिसकर्मियों सहित 43 लोग घायल हुए थे।
इकबाल खान सोशल मीडिया पर लगातार एक्टिव रहता था। इस दौरान वह भाजपा द्वारा तथाकथित रूप से ‘लोकतंत्र की हत्या’ करने को लेकर लोगों के बीच आतंक पैदा करने और बड़े पैमाने में जनआक्रोश फैलाने के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट करता था। उसने एक ट्वीट में कहा था, “भारतीय संविधान ने सरकार की किसी भी जनविरोधी नीति पर आपत्ति जताने का अधिकार दिया है। लेकिन RSS/BJP इसे आम लोगों से छीनना चाहती है।” इस ट्वीट में हैशटैग लगाते हुए लिखा था, ‘पीएफआई झुकेगी नहीं।’
Indian constitution has given the right to object to any anti-people government policies but RSS/BJP wants to snatch it from the common people. #PFIJhukegaNahi
एक अन्य ट्वीट में उसने दावा करते हुए कहा, “यदि आप एक मुस्लिम हैं, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप पत्रकार हैं या राजनेता। किसी भी समय कोई भी झूठा मामला आपको निशाना बनाने के लिए काफी है। कहाँ है न्याय और कानून का राज?”
If you are a Muslim, it does matter whether you are a journalist or political leader, any time any false case is enough to target you. Where is justice and rule of law? #BiharPoliceKaJhoot#IndiaWithPFI
इकबाल खान ने अपने कट्टरपंथी सह-धर्मवादियों, अर्थात् मोहम्मद रियाज़ और मोहम्मद गौस को संघ परिवार और भाजपा के सदस्यों के रूप में बताते हुए बचाने की भी कोशिश की। उसने लिखा, “भारतीय मुस्लिमों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध व्यक्त किया। उदयपुर हत्याकांड को अंजाम देने वाले दो लोग संघ परिवार से जुड़े हुए हैं।”
Indian Muslims expressed their protest democratically. Two people who committed Udaipur murder are linked to Sangh Parivar. Investigate the MRM plan to create communal conflicts #UdaipurMRMconspiracy
पीएफआई के कट्टरपंथी इकबाल खान ने भारत में सरकार द्वारा संचालित कॉलेजों में ‘हिजाब’ की अनुमति देने का मुद्दा भी उठाया। “यह हिंदुत्व का चेहरा है कि मुस्लिमों के साथ फिर से भेदभाव किया जा रहा है। वे सिर्फ अपने मौलिक अधिकार की माँग कर रहे हैं।’
This is the face of Hindutva that Muslims are being discriminated again,
They are only asking for their fundamental right”, Muslim female students barred by Udupi government college from entering classroom for wearing Hijab.#HijabIsOurRight
व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बात करें तो भारत में इसकी बहुत अधिक रक्षा की जाती है। लेकिन कर्नाटक हिजाब विवाद का मुद्दा सिर्फ यूनिफॉर्म ड्रेस कोड का था। धर्मनिरपेक्ष संस्थानों में, स्कूल मैनेजमेंट को यह निर्धारित करने का अधिकार है कि उसके परिसर में कैसे कपड़े पहनने की अनुमति देनी चाहिए और कैसे नहीं। साथ ही धार्मिक कपड़ों को लेकर भी यही बात लागू होती है।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी कहा था कि इस्लाम में हिजाब आवश्यक प्रथा नहीं है और सभी धर्मों की स्वतंत्रता के अधिकार पर एक उचित प्रतिबंध है। वास्तव में जो लड़कियाँ जो हिजाब पहनना चाहती हैं वह खुले तौर पर कहीं भी हिजाब पहन सकतीं हैं। सार्वजनिक स्थानों पर उनके हिजाब पहनने को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं है। हिजाब पर प्रतिबंध सिर्फ शैक्षिक संस्थानों में ही है, जहाँ पर ड्रेस कोड लागू होता है। यह अन्य धर्मों के छात्रों पर भी पूरी तरह लागू होता है, यदि उनके धर्म में कोई चीज अनिवार्य रूप से आवश्यक नहीं है।
गौरतलब है कि जब लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल के पटेल ने द्वीपों को मालदीव की तरह पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव पेश किए थे तब इस्लामवादियों ने उनका कड़ा विरोध किया था। इकबाल खान भी ऐसे लोगों में शामिल था जो लक्षद्वीप को इस्लामिक कट्टरवाद के जबड़े में धकेलना चाहते थे।
लोगों का शांति से रहना उन्हें पसंद नहीं है। ये वो लोग हैं जो अवाम के बीच सांप्रदायिकता फैलाकर उन्हें विभाजित कर रहे हैं। पहले इन्होंने कश्मीर को निशाना बनाया, अब वे लक्षद्वीप को निशाना बना रहे हैं, अगली बारी हमारी होगी। #WeWithLakshadweep
इकबाल ने हाथरस पीड़िता के ‘बलात्कार’ (हालाँकि फोरेंसिक और मेडिकल रिपोर्ट दोनों ने यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज कर दिया था) के झूठे आरोपों को बार-बार उछालने की कोशिश की। साथ ही उसने सिद्दीक कप्पन को लेकर सहानुभूति भी दिखाई थी। बता दें सिद्दीक कप्पन 5 अक्टूबर 2022 को फर्जी आईडी के साथ हाथरस में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था, इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।
A peace-loving, justice-oriented, passionate journalist of India is in Jail for more than 669 days. His Crime? He tried reporting a rape incident in Hathras, in Yogi’s UP. #ReleaseSiddiqueKappan
सुप्रीम कोर्ट को दिए अपने हलफनामे में, उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा था कि सिद्दीक कप्पन पत्रकारिता की आड़ में उत्तर प्रदेश में जाति विभाजन और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर रहा था। यही नहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 नवंबर 2011 को कप्पन द्वारा तेजस में लिखी गई एक स्टोरी की प्रति पेश की थी। इसमें कप्पन ने दावा किया था कि अल-कायदा आतंकवादी ओसामा बिन लादेन एक ‘शहीद’ था।
साथ ही उसके फोन के इंटरनल स्टोरेज में चार आपत्तिजनक वीडियो भी मिले थे। इसमें से एक वीडियो में ‘बोतल बम’ बनाने के तरीके के बारे में बताया गया था। वीडियो में दिखाया गया था कि एक काँच की बोतल में पेट्रोल भरकर उसे एक बेकार कपड़े से बंद करके और फिर कपड़े को जलाकर बम के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
एक अन्य वीडियो में दिखाया गया था कि कैसे मुस्लिम महिलाओं को कराटे और लाठी डंडे जैसी युद्ध तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाता है। तीसरे वीडियो में एक मौलाना भड़काऊ भाषण देते हुए नजर आ रहा था।
चौथे वीडियो में मौलाना अहमद नदवी ऐसा भाषण देते दिख रहे थे जो दो समुदायों के बीच दरार पैदा करने और उन्हें उकसाने के लिए काफी था। अपने भाषण में, वह उसे सुनने वाले लोगों को आपत्तिजनक वीडियो क्लिप भी दिखा रहा था। साथ ही उन्हें हिंदुओं और भारत सरकार के खिलाफ लड़ने के लिए पीएफआई में शामिल होने के लिए भी उकसा रहा था।
इकबाल खान ने द वायर के सिद्धार्थ वरदराजन और MeToo के आरोपित विनोद दुआ के लिए भी अपने समर्थन का प्रदर्शन किया था। साथ ही उसका प्रेम मृत अर्बन नक्सल पादरी स्टैन स्वामी के लिए भी था। वह ट्विटर पर आरफा खानम शेरवानी, अभिसार शर्मा, राणा अय्यूब, एसडीपीआई, असदुद्दीन ओवैसी, राहुल गाँधी, कुणाल कामरा और प्रशांत भूषण को भी फॉलो करता था।
समाजवादी पार्टी के महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा रामचरितमानस के लगातार किए जा रहे अपमान के बाद अब उनकी ही पार्टी में घमासान मच गया है। अमेठी के गौरीगंज से समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) विधायक राकेश प्रताप सिंह (Rakesh Pratap Singh) ने मोर्चा खोलते हुए स्वामी प्रसाद को विक्षिप्त प्राणी तक कह डाला।
भगवान राम और श्रीकृष्ण से स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए सदबुद्धि की माँग करते हुए राकेश प्रताप सिंह ने शनिवार (11 फरवरी 2023) को उन्हें मंच से ही खूब खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि वो विधायक रहें या ना रहें, पर धर्म की बात आई तो वे चुप नहीं बैठने वाले हैं।
वायरल हो रहे वीडियो में राकेश प्रताप सिंह ने कहा, “जब उस नेता के मुँह से निकली बात मेरे हृदय को कचोटने लगी, मुझे पीड़ा देने लगी तो सबसे पहले उत्तर प्रदेश में खड़े होकर मैंने मीडिया के माध्यम से ये कहने का साहस जुटाया कि राजनीति रहे या न रहे, विधायक रहूँ या न रहूँ, आगे टिकट रहे या न रहे, लेकिन धर्म को बचाने के लिए आपका भाई, आपका बेटा, आपका सेवक खड़ा रहेगा।”
सपा एमएलए राकेश प्रताप सिंह का सपा एमएलसी @SwamiPMaurya पर तीखा हमला, कहा राजनीति रहे न रहे, विधायक रहूं न रहूं, आगे टिकेट रहे न रहे। लेकिन धर्म को बचाने के लिए खड़ा रहूंगा।
सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह ने इसी बयान में आगे कहा, “मैंने पहले कहा है कि इस प्रकार का बयान देने वाले न तो सनातनी हो सकते हैं, न वो समाजवादी हो सकते हैं। हो सकता है तो सिर्फ एक विक्षिप्त प्राणी हो सकता है।”
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राकेश प्रताप सिंह ने एलान किया कि वो हर उस व्यक्ति का विरोध करेंगे, जो भगवान राम या कृष्ण के खिलाफ टिप्पणी करेगा। अंत में उन्होंने देवताओं से स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए सदबुद्धि की भी प्रार्थना की।
गौरतलब है कि रामचरितमानस के खिलाफ स्वामी प्रसाद मौर्य की टिप्पणी के बाद अखिलेश यादव ने उन्हें समाजवादी पार्टी का महासचिव बना दिया था। इस बीच मौर्य के समर्थकों द्वारा लखनऊ में रामचरितमानस जलाए जाने के आरोप में FIR भी दर्ज हुई थी, जिसमें सलीम सहित एक अन्य आरोपित पर NSA के तहत कार्रवाई की गई है।
स्वामी प्रसाद के इस बयान के बाद सपा में विरोध के स्वर लगातार उठ रहे हैं। जहाँ नोएडा में सपा नेता नवीन दुबे ने पार्टी छोड़ने का एलान किया था। वहीं, एक अन्य महिला नेत्री रोली तिवारी ने खुलेआम स्वामी प्रसाद की आलोचना की है।
इस्लामी संगठन ‘जमीयत उलेमा-ए-हिन्द’ के मुखिया मौलाना अरशद महमूद मदनी ने एक बार फिर से हिन्दुओं को लेकर ज़हर उगला है। दिल्ली में संगठन के अधिवेशन में उन्होंने इस बार कुछ ऐसा बोल दिया, कि जैन और हिन्दू धर्मगुरु मंच से नीचे उतर गए। उन्होंने मनु को ‘आदम’ कह दिया और पूछा कि हमारे मजहब में इतना दखल क्यों दिया जा रहा है? उन्होंने कह दिया, “तुम्हारा पूर्वज हिन्दू नहीं था। तुम्हारा पूर्वज मनु, यानी आदम था।”
मौलाना मदनी ने कहा, “मैंने धर्मगुरुओं से पूछा जब कोई नहीं था, न श्री राम, न ब्रह्म, तब मनु किसे पूजते थे? कुछ लोग बताते हैं कि वे ॐ को पूजते थे। तब मैंने कहा कि इन्हें ही तो हम अल्लाह, आप ईश्वर, फारसी बोलने वाले खुदा और अंग्रेजी बोलने वाले गॉड कहते हैं।” इस पर जैन धर्मगुरु लोकेश मुनि ने आपत्ति जताई। ये जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के 34वें अधिवेशन का मौका था, जिसमें मौलाना मदनी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत की भी आलोचना की।
लोकेश मुनि ने इस दौरान पूछा कि जब कार्यक्रम जोड़ने के नाम पर किया जा रहा है तो इसमें आपत्तिजनक बातें क्यों की जा रही हैं? उन्होंने मोहन भगवत के बयान को ‘जाहिल’ वाला भी करार दिया। उन्होंने ये भी कहा कि पैगंबर मुहम्मद का अपमान मुस्लिमों को मंजूर नहीं है। मौलाना मदनी ने न्यायपालिका पर भी केंद्र सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने यहाँ तक कह डाला कि मनु की पत्नी हव्वा है, जिसे हिन्दू हेमवती कहते हैं।
#WATCH मैंने धर्म गुरु से पूछा जब कोई नहीं था,न श्री राम,न ब्रह्म,तब मनु किसे पूजते थे?कुछ लोग बताते हैं कि वे ओम को पूजते थे तब मैंने कहा कि इन्हें ही तो हम अल्लाह,आप ईश्वर,फारसी बोलने वाले खुदा और अंग्रेजी बोलने वाले गॉड कहते हैं: जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख मौलाना सैयद अरशद मदनी pic.twitter.com/TxiKNjVhMk
उन्होंने कहा कि हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई – इन सभी के पूर्वक आदम और हव्वा ही थे। इससे पहले भी वो इस सम्मेलन में विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा था, “भारत हमारा देश है। यह देश जितना नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत का है, उतना ही यह देश महमूद का भी है। न तो महमूद उनसे एक इंच आगे है और न ही वे महमूद से एक इंच आगे हैं। भारत खुदा के सबसे पहले पैगंबर अब्दुल बशर सईदाला आलम की जमीन है। भारत मुस्लिमों की पहली मातृभूमि है।”
केंद्र की मोदी सरकार ने देश के 13 प्रदेशों और केंद्रशासित प्रदेशों के राज्यपालों एवं उपराज्यपालों को बदल दिया है। यह फेरबदल लद्दाख, महाराष्ट्र, सिक्किम, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, असम, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मणिपुर, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और बिहार में की गई है। बता दें कि महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और लद्दाख के उप-राज्यपाल ने कृष्ण माथुर ने इस्तीफा दे दिया है। कोश्यारी ने कुछ दिन पहले ही पत्र लिख कर इस्तीफा देने की पेशकश की थी।
किसे कहाँ मिली नियुक्ति
अरुणाचल प्रदेश के नए राज्यपाल के तौर पर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल कैवल्य त्रिविक्रम परनाइक को नियुक्त किया गया है। लक्ष्मण आचार्य सिक्किम और सीपी राधाकृष्णन झारखंड के राज्यपाल बनाए गए हैं। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ला को हिमाचल प्रदेश और गुलाबचंद कटारिया को असम की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एस अब्दुल नजीर को आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। जस्टिस नजीर अयोध्या मामले में फैसला सुनाने वाले जजों में शामिल थे। आंध्र प्रदेश के राज्यपाल विश्व भूषण हरिचंदन को छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसूइया उइके को मणिपुर भेजा गया है। वहीं, मणिपुर के राज्यपाल ला गणेशन को नागालैंड भेजा गया है।
मणिपुर के राज्यपाल ला गणेशन को नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। बिहार के राज्यपाल फागू चौहान को मेघालय का राज्यपाल नियुक्त किया गया। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिहार के वर्तमान राज्यपाल फागू चौहान को मेघालय भेजा गया है। वहीं, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को बिहार का नया राज्यपाल बनाया गया है। रमेश बैस अब महाराष्ट्र राज्यपाल होंगे, जबकि सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर बीडी मिश्रा लद्दाख के उपराज्यपाल होंगे।
भगत सिंह कोश्यारी और कृष्ण माथुर ने इस्तीफा दिया
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के इस्तीफे की वजह उनके द्वारा खुद ही माँगा गया रिटायरमेंट बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने खुद ही पत्र लिख कर आगे का जीवन पढ़ने-लिखने और अन्य गतिविधियों में बिताने की इच्छा जताई थी। कोश्यारी ने लगभग 3 साल महाराष्ट्र की जिम्मेदारी संभाली थी।
वहीं 1977 बैच के रिटयर्ड IAS अधिकारी कृष्ण माथुर का भी लद्दाख के उपराज्यपाल पद से इस्तीफ़ा मंजूर कर लिया गया है। उनके बदले अब वहाँ रिटायर्ड ब्रिगेडियर बीडी मिश्रा कार्यभार सँभालेंगे।
मराठा साम्राज्य के उद्भव के साथ ही मुगलों का पतन शुरू हो गया था यही कारण था कि औरंगजेब के समय अपने चरम को छूने वाली मुगलिया सत्ता उसके मरने के बाद ताश के पत्तों की तरह बिखरने लगी। छत्रपति शिवाजी महारज, संभाजी और साहूजी के बाद मराठा साम्राज्य में छत्रपति की जगह पेशवा का दबदबा रहने लगा, जो सेनापति होते थे। नानाजी फडणवीस एक ऐसा नाम है, जो छत्रपति या पेशवा नहीं थे, लेकिन उन्होंने इन दोनों को मजबूत करने में अपनी बुद्धिमत्ता और बहादुरी से कोई कसर नहीं छोड़ी।
नाना फडणवीस का जन्म सन् 1742 में 12 फरवरी को हुआ था, जबकि उनका निधन 13 मार्च, 1800 को हुआ। उनसे पहले हम इटली के निकोलो मैकियावेली के बारे में जानते हैं, जिन्हें आधुनिक राजनीतिक विज्ञान का जनक कहा जाता है। 15वीं-16वीं शताब्दी में जब यूरोप मध्यकाल से आधुनिक युग में घुस रहा था, तब मैकियावेली उस दौर के सबसे बड़े कूटनीतिज्ञ बन कर उभरे। फ्लोरेंस में जन्मे निकोलो से ही नाना फडणवीस की तुलना विदेशियों ने की।
बालाजी जनार्दन भानु, जिन्हें आगे चल कर नाना फडणवीस कहा गया – वो एक चितपावन ब्राह्मण थे। महात्मा गाँधी की हत्या के बाद महाराष्ट्र में उनके समर्थकों ने बड़ी संख्या में चितपावन ब्राह्मणों का नरसंहार किया था। भीड़ ने वीर विनायक दामोदर के भाई नारायण सावरकर की भी हत्या कर दी थी। वो भी एक स्वतंत्रता सेनानी थे। बालाजी का जन्म सतारा में हुआ था। पेशवा बालाजी विश्वनाथ भट्ट और भानु के परिवार का अच्छा रिश्ता था।
बालाजी महादजी, जो कि फडणवीस के नाना थे, उन्होंने मुगलों की एक साजिश से पेशवा की जान बचाई थी। पेशवा जब मराठा साम्राज्य के सर्वेसर्वा बन गए, तब फडणवीस उनके खासमखास हो गए और सरकार में धमक रखने लगे। पेशवा ने नाना फडणवीस के लिए भी शिक्षा-दीक्षा की वही व्यवस्था की थी, जो उन्होंने अपने बेटों विश्वास राव, माधव राव और नारायण राव के लिए की थी। नाना फडणवीस पानीपत के तीसरे युद्ध में बच कर निकल गए थे।
उस युद्ध में दुर्रानी ने मुगलों व अन्य इस्लामी ताकतों के बल पर मराठा साम्राज्य को बड़ा नुकसान पहुँचाया था, जिससे कुछ वर्षों के लिए उनका विजय रथ रुक गया था। नाना फडणवीस ने इसके बाद मराठाओं को आगे बढ़ने में मदद की और ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ के बढ़ते प्रभाव के बीच अपनी कूटनीति से साम्राज्य को मजबूत किया। उन्होंने अंग्रेजों, मैसूर के टीपू सुल्तान और हैदराबाद के निजाम के खिलाफ युद्ध में रणनीति बनाई और उन्हें परास्त किया।
भीमाशंकर मंदिर के शिखर के निर्माण का श्रेय नाना फडणवीस को ही दिया जाता है। अहिल्याबाई, तुकोजी और माधोजी के चल बसने के बावजूद अंग्रेजों के खतरों के बीच नाना फडणवीस ने मराठों को एकता के सूत्र में बाँधे रखा था। लेकिन, सन् 1800 में उनके निधन के बाद मराठे बँट गए और सिंधिया-होल्कर आपस में लड़ने लगे। पेशवा ने सिंधिया का साथ दिया। पेशवा को अंग्रेजों के साथ ‘बेसिन की संधि’ करने को मजबूर होना पड़ा।
नाना फडणवीस के बारे में कहा जाता है कि वो असाधारण बुद्धि के स्वामी थे और एक योद्धा न होने के बावजूद युद्धकला की समझ रखते थे। उनकी सूझबूझ के कारण ही मैसूर, हैदराबाद और अंग्रेजों से मराठे बचे रहे। सन् 1789 में उन्होंने महादजी सिंधिया को पत्र लिख कर कहा था कि काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करना हिन्दू धर्म के लिए एक योग्य कार्य होगा। उनका मानना था कि इस कार्य से न सिर्फ उस समय की मराठा सरकार के लोगों के नाम हिन्दुओं के दिमाग में छप जाएँगे, बल्कि इससे राज्य की भलाई भी होगी और प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी।
यही वो समय भी था, जब मुग़ल बादशाह शाह आलम को मराठों ने निर्देश दिया कि वो गौहत्या को प्रतिबंधित करने का आदेश जारी करे। नाना फडणवीस को मात्र 16 वर्ष की उम्र में सदाशिव राव का सचिव नियुक्त किया गया था। उन्होंने अहमदशाह अब्दाली के विरुद्ध पानीपत की लड़ाई में हिस्सा लिया। इस युद्ध के बाद मराठा सेनाओं को भागना पड़ा। इस पूरे प्रकरण में नाना फडणवीस की माँ और पत्नी कहीं गम हो गईं। उन पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा और वो दुनिया से अलग-थलग रहने लगे।
लेकिन, इस दौरान समर्थ गुरु रामदास की एक पुस्तक ‘दास बोध’ का उन्होंने अध्ययन किया और उनका दिमाग बदला। उन्होंने तब महाराष्ट्र के लिए कुछ करने का निर्णय लिया। उनके मराठा साम्राज्य के प्रधानमंत्री बनने के बाद अंग्रेजों को दो बार मुँह की खानी पड़ी। उन्होंने लगभग 40 वर्षों तक मराठा कूटनीति के शीर्ष पर खुद को बनाए रखा। महाराष्ट्र के कई जमींदार उस दौरान गद्दार हो गए थे, लेकिन अपने जीवित रहते नाना फडणवीस ने गद्दारों को रोके रखा।
पेशवा नाना साहब (बालाजी) तो पानीपत की हार की व्यथा में ही चल बसे, जिसके बाद उनके 16-17 साल के बेटे माधव राव को पेशवा बनाया गया। उन्होंने नाना फडणवीस के मार्गदर्शन में फिर से मराठा प्रभुत्व स्थापित किया और खोई गरिमा को वापस हासिल किया। माधव राव की युवावस्था में ही मौत के बाद उनके बेटे नारायण राव ने बागडोर सँभाली। लेकिन, वो उतने योग्य साबित नहीं हुए। उधर पेशवा नाना का भाई भी लॉबिंग में लगा था।
Wai is a small town located in the Satara district of Maharashtra, on the banks of the Krishna river. Surrounded by the Sahayadris, the town is famous for it’s numerous ghats on the Krishna river, and the old temples here.
राघोबा ने नारायण राव को मरवा दिया, लेकिन नाना फडणवीस ने एक हत्यारे को पेशवा नहीं बनाया। उन्होंने ‘अष्ट प्रधान’ सदस्यों की मदद से नारायण राव के बेटे सवाई माधो राव को पेशवा बना दिया। नाना फडणवीस को मराठा ख़ुफ़िया विभाग को मजबूत करने के लिए भी जाना जाता है। उनका ख़ुफ़िया विभाग इतना मजबूत था कि देश में कहीं कोई महत्वपूर्ण घटना होती थी तो नाना फडणवीस के पास उसकी सूचना अलग-अलग सूत्रों से पूरे विवरण के साथ पहुँचती थी।
फिर वो अपने अध्ययन कक्ष में बैठ कर मनन करते थे कि आगे क्या करना है और क्या नहीं। उन्होंने महादजी सिंधिया से कई बार कहा था कि अगर अंग्रेजों को छूट दे दी गई तो वो पूरे देश को गुलाम बना देंगे। अंग्रेजों ने नाना फडणवीस को रास्ते से हटाने की कई बार कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुए। उलटे, निजाम और भोंसले को नाना फडणवीस ने अंग्रेजों के खिलाफ कर दिया। वो एक दूरदृष्टि वाले नेता थे, जिन्हें बखूबी पता था कि राज्य के असली दुश्मन कौन हैं और कौन नहीं। नाना फडणवीस के वक्त मराठों ने जो संधियाँ की, उनकी बात कभी और।
उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से सटे श्रावस्ती जिले में एक मुस्लिम युवक द्वारा हिन्दू लड़की को भगाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि शादीशुदा और बाल-बच्चेदार बहलीम द्वारा पीड़िता को न सिर्फ 2 दिनों तक बंधक बनाए रखा गया, बल्कि उस से 93,000 रुपए भी ऐंठ लिए। बहलीम पहले पीड़िता के साथ रेप कर चुका है। पुलिस ने FIR दर्ज कर जाँच शुरू की है। घटना सोमवार (6 फरवरी 2023) की है।
मामला श्रावस्ती के मल्हीपुर थाना क्षेत्र के गाँव जैता जानकी नगर का है। मामले में शिकायकर्ता लड़की के पिता हैं। पुलिस को दी गई शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी 18 साल की बेटी है और उसे 6 फरवरी 2023 को शाम 5 बजे शहजाद का बेटा बहलीम बहला-फुसला कर अपने साथ ले गया। इस दौरान आरोपित की नीयत पीड़िता से शादी करने की बताई गई। आरोप है कि बहलीम ने लड़की को 2 दिनों तक अपने घर में रखा और फिर भगा दिया।
शिकायत में लड़की के पिता ने आगे लिखा है कि बहलीम द्वारा भगाए जाने के बाद पीड़िता अपने घर लौटकर नहीं गई। वहाँ से वो फकीरा मंदिर चली गई और एक दिन मंदिर में रही रही। इस दौरान लड़की के घर वालों ने पीड़िता की तलाश जारी रखी। आखिरकार 8 फरवरी को मंदिर के पुजारी ने एक व्यक्ति के साथ पीड़िता को उसके घर भेजवा दिया।
घर आकर पीड़िता ने अपने साथ की गई बहलीम की करतूत को परिजनों से बताया। आखिरकार लड़की के घर वालों ने 10 फरवरी (शुक्रवार) को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता के पिता का कहना है कि घर से निकलते वक्त उसकी बेटी घर में रखा 93,000 रुपए भी अपने साथ लेकर गई थी। यह पैसा बहलीम ने हड़प लिया है।
शिकायतकर्ता ने बताया कि वह इस घटना से वह काफी डर गया था, इसलिए उसने 6 फरवरी को हुई घटना का FIR 10 तारीख को कराई। पुलिस ने यह केस IPC की धारा 366 के तहत दर्ज किया है। FIR दर्ज होते ही आरोपित बहलीम फरार हो गया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।
लड़की करने जा रही थी आत्महत्या
लड़की का पिता मजदूरी करके घर चलाता है। ऑपइंडिया ने इस घटना की जानकारी लड़की के पिता से ली। उन्होंने बताया कि आरोपित बहलीम के अब्बा शहजाद मुंबई से फोन और दूसरे माध्यम से केस वापस लेने का दबाव बना रहा है।
पीड़िता के पिता ने कहा कि उसके गाँव में हिन्दू-मुस्लिम के हिसाब से मिश्रित आबादी है, जिसमें दबदबा मुस्लिमों का रहता है। पीड़ित पिता ने बताया कि घटना के बाद उसकी बेटी दुःखी होकर आत्महत्या करने जा रही थी। पीड़िता कक्षा 7 तक पढ़ी बताई जा रही है।
बहलीम पहले कर चुका है रेप
पीड़िता के पिता का कहना है कि आरोपित बहलीम पहले लड़की से घर में घुसकर रेप कर चुका है। रेप के लिए पीड़ित पिता ने ग्रामीण शब्द (घटिहई) का प्रयोग किया। हमें बताया गया कि घर के आगे बहलीम के परिवार वाले रात में तेज-तेज म्यूजिक सिस्टम बजा दिया करते थे, जिससे पीड़ित के घर वालों को सोने में भी दिक्क्त होती है। लड़की के पिता का कहना है कि पड़ोसी बहलीम को वो बेटे जैसा मानते थे पर उन्हें बदले में धोखा मिला।
बहन के साथ बहलीम का अब्बा कर चुका है रेप
ऑपइंडिया को पीड़िता के पिता ने आगे बताया कि आज बहलीम ने उनकी बेटी की जिंदगी खराब की, लेकिन लगभग 25 साल पहले बहलीम के अब्बा शहजाद ने यही हरकत उनकी बहन के साथ किया था। पीड़िता के पिता ने शहजाद और बहलीम को एक जैसा बताया।
25 साल पहले की घटना की जानकारी देते हुए लड़की के पिता ने बताया कि तब उनकी शादीशुदा बहन के साथ बहलीम के अब्बा ने घर में घुसकर रेप किया था। इस रेप के चलते पीड़ित की बहन को उसके पति ने छोड़ दिया था। बताया गया कि इसी घटना से दुःखी होकर उनकी बहन मानसिक तौर पर विक्षिप्त हो चुकी है।
नवभारत टाइम्स के पंचायत के दावे का खंडन
नवभारत टाइम्स में प्रकशित खबर में बताया गया है कि घटना के बाद गाँव में 2 दिनों तक पंचायत चली। लड़की के पिता ने किसी भी तरह की पंचायत से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि जो भी अख़बार ऐसी खबर छाप रहा है, तो वो गलत है। उन्होंने कहा कि आरोपितों द्वारा कुछ पत्रकारों को बुलाकर उलटी-सीधी खबर छापने की साजिश भी रची जा रही है।
मुंबई और दुबई के पैसे का जोर
पीड़िता के पिता का कहना है कि उसके घर के ठीक आगे आरोपित बहलीम की परचून की दुकान है। हमें बताया गया कि उनके गाँव के अधिकतर मुस्लिम सऊदी और मुंबई में मोटी कमाई करते हैं। उस पैसे के दम पर वो पीड़ित के घर वालों से आर्थिक तौर पर कई गुना मजबूत हैं।
पीड़ित ने डर के तमाम कारणों में ये वजह अपनी आर्थिक तंगी भी बताया। इन्हीं डर की वजह से पीड़ित के पिता ने घटना के चार दिन बाद FIR कराई। फिलहाल इस मामले में पुलिस कानूनी कार्रवाई कर रही है।
बांग्लादेश में एक हिंदू युवक को कथित ईशनिंदा के आरोप में एक अदालत ने 5 साल की जेल की सजा सुनाई है। रंगपुर साइबर ट्रिब्यूनल ने फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोपित पारितोष सरकार पर 30,000 टका (बांग्लादेशी मुद्रा) का जुर्माना भी लगाया गया है। ट्रिब्यूनल के न्यायाधीश अब्दुल मजीद रॉय ने पारितोष को डिजिटल सुरक्षा अधिनियम के तहत दोषी ठहराया।
परितोष सरकार को कुल 11 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। उसे कुल चार सजा सुनाई गई है, जिसमें एक साल, दो साल, तीन साल और पाँच साल की सजा शामिल है। हालाँकि, ये सभी सजाएँ साथ-साथ चलेंगी, इसलिए उन्हें 5 साल ही जेल में रहना होगा। अभियोजन पक्ष के वकील रूहुल अमीन तालुकदार ने कहा कि पारितोष को धार्मिक भावनाओं को आहत करने का दोषी ठहराया गया है।
पारितोष को डिजिटल सुरक्षा अधिनियम की धारा 31 (1) के तहत सजा सुनाई गई थी। यह अधिनियम ‘समाज के विभिन्न वर्गों या समुदायों के बीच शत्रुता, घृणा पैदा करने वाली या सांप्रदायिक सद्भाव को नष्ट करने वाली’ किसी भी चीज़ के प्रकाशन को अपराध बनाती है।
परितोष सरकार ने कथित तौर पर अक्टूबर 2021 में फेसबुक पर एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसे मुस्लिमों ने ईशनिंदा माना था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की गई छवि के बाद इस्लामवादियों की उन्मादी भीड़ ने उनके गाँव पर हमला कर दिया था।
17 अक्टूबर 2021 को पारितोष के गाँव को जला दिया गया था। यह घटना रामनाथपुर संघ के बारा करीमपुर हिंदू गाँव में हुई थी। यह गाँव रंगपुर जिले के पीरगंज उपजिला में स्थित है। कथित ईशनिंदा को लेकर मस्जिद के लाउडस्पीकर से भीड़ को जुटाया गया था।
जब भीड़ पहुँची थी, तब पुलिस ने समय पर पहुँचकर भीड़ को नियंत्रित किया थी। कुछ देर बाद उन्मादी भीड़ ने अपना गुस्सा पूरे गाँव पर निकाला। हालाँकि, उन्हें रोकने में पुलिस सक्षम थी, लेकिन वह रोक नहीं पाई।
हिंदुओं के मछली पकड़ने के वाले पूरे गाँव को इस्लामवादियों ने जला दिया था, क्योंकि हमले में हिंदुओं के 60 से अधिक घरों में आग लगा दी गई थी। घरों में आग लगाने से पहले उन्मादी भीड़ ने गाँव में तोड़फोड़ की थी और कीमती सामान और पशुधन आदि लूटकर ले गए थे।
इतना ही नहीं, इस दौरान गाँव के हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की गई। बाद में पारितोष के घर में भी तोड़फोड़ की गई और भीड़ द्वारा पुलिस पर काबू पाने के बाद गौशाला में आग लगा दी गई। जब गाँव को जलाया जा रहा था, तब ग्रामीण भागकर धान के खेतों में चले गए थे।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हवा में गोलियाँ चलानी पड़ी थी। पुलिस ने भीड़ पर रबड़ की गोलियाँ चलाई और हवा में फायरिंग की। साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल के आने के बाद स्थिति पर काबू पाया गया। परितोष और उसका परिवार भी गाँव से भाग गया था।
घटना के बाद न केवल गाँव पर हमले के मामले दर्ज किए गए, बल्कि पारितोष सरकार के खिलाफ कथित तौर पर दंगा भड़काने का भी मामला दर्ज किया गया। वह उस समय वह 10वीं कक्षा का छात्र था और उसकी उम्र 15-16 साल थी। पुलिस ने उसे कुछ दिनों बाद जॉयपुरहाट से उसे गिरफ्तार किया था।
पारितोष को कई बार जमानत से वंचित किया गया था और मुकदमे के दौरान उन्हें कई महीनों तक एकांत कारावास में रखा गया था। हालाँकि, जेल अधिकारियों ने उनके वकील और परिवार को बताया था कि उन्हें उनकी सुरक्षा के लिए अलग रखा गया है। आखिरकार उन्हें 9 मई 2022 को जमानत मिल गई, लेकिन इस महीने की शुरुआत में उन्हें फैसला सुनाते ही अदालत ने उन्हें फिर जेल भेज दिया।
पुलिस ने दावा किया है कि गिरफ्तारी के बाद परितोष सरकार ने ईशनिंदा करने की बात कबूल की और उस समय उसकी उम्र 19 साल थी। हालाँकि, परितोष और उनके परिवार का कहना है कि उन्होंने तस्वीर पोस्ट नहीं की थी और उनका फोन उस समय टूट गया था, जिसकी मरम्मत नहीं की जा सकती थी। उन्होंने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि उन्होंने तस्वीर पोस्ट की थी।
हालाँकि, अदालत ने इन तर्कों को खारिज कर दिया और उन्हें “धार्मिक भावनाओं को आहत करने” का दोषी ठहराया। उनके वकील ने कहा कि वे फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएँगे। पारितोष को फेसबुक पोस्ट के लिए दोषी ठहराकर सजा सुना दी गई, लेकिन हिंदू गाँव पर हमला करने वाले किसी भी अपराधी को अभी दोषी नहीं ठहराया गया है। मामले में लगभग 150 लोगों पर केस दर्ज किया गया है।
इस मामले में 72 लोग फरार हैं। वहीं, गाँव पर हमले के मामले में 74 आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और वे आजाद घूम रहे हैं। जिन लोगों को ज़मानत मिली है, उनमें गाँव की मस्जिद का इमाम रबीउल इस्लाम भी है। इसी ने लाउडस्पीकर से लोगों को इकट्ठा किया था। इसके अलावा, इसमें हिंसा का मास्टरमाइंड सैकत मंडलृ और उज्जल हसन है, जिसने ‘ईशनिंदा’ फ़ेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट लिया और फैलाया था।
केरल उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें बच्चों के गैर-चिकित्सीय खतने की प्रथा पर रोक लगाने की माँग की गई है। याचिका में इस प्रथा को बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन, अवैध और संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध घोषित करने की माँग की गई है।
यह जनहित याचिका नन-रिलीजियस सिटीजन (NRC) और पाँच अन्य व्यक्तियों द्वारा दायर की गई है। याचिका में दूसरे प्रतिवादी यानी कानून और न्याय मंत्रालय को खतने पर रोक लगाने वाले पर्याप्त कानून पर विचार करने और निर्णय लेने के लिए एक उपयुक्त रिट जारी करने की भी माँग की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि खतना बच्चों के मौलिक अधिकारों और उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि बच्चे इस प्रथा के शिकार हैं। इसका अभ्यास क्रूर, अमानवीय और बर्बर होने के साथ-साथ संविधान प्रदत्त अधिकारों के भी खिलाफ है।
याचिका में कहा गया है, “यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के मूल्यवान मौलिक अधिकार, “जीवन के अधिकार” का उल्लंघन करता है। यदि राज्य तंत्र संविधान के संरक्षक के रूप में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहता है तो संवैधानिक अदालतें इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए बाध्य हैं।”
याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया, “खतना का अर्थ उस चमड़ी को हटाने है, जो ऊतक है और जो लिंग के सिर (ग्रंथियों) को ढँकता है। यह एक प्राचीन प्रथा है, जिसकी उत्पत्ति धार्मिक संस्कारों में हुई है। आज कई माता-पिता अपने बेटों का खतना धार्मिक या अन्य कारणों से करवाते हैं। खतना आमतौर पर जन्म के बाद पहले या दूसरे दिन किया जाता है। बच्चों के मामले में प्रक्रिया अधिक जटिल और जोखिम भरी हो जाती है। पुरुषों को प्रक्रिया के दौरान सोने के लिए दवा दी जा सकती है, लेकिन बच्चों के मामले में नहीं।”
याचिका में आगे कहा गया है कि खतने से कई स्वास्थ्य समस्याएँ होती हैं और उनमें से एक आघात है। आघात की वजह से डर, असहायता, गंभीर चोट या मृत्यु के खतरे की भावना का अहसास होता है। इसमें यौन शोषण, शारीरिक शोषण, घरेलू हिंसा, सामुदायिक और स्कूल हिंसा, चिकित्सा आघात, मोटर वाहन दुर्घटनाएँ आदि शामिल हैं।
इस माँग की दलील दी गई है कि खतने से जुड़े अन्य जोखिम या जटिलताएँ हैं, इस प्रकार हैं: 1) रक्तस्राव। 2) शिश्न में संक्रमण। 3) शिश्न के खुले सिरे में जलन। 4) मूत्रमार्ग का क्षतिग्रस्त होना। 5) शिश्न पर निशान। 6) शिश्न की बाहरी त्वचा की परत हटना। 7) गंभीर एवं जानलेवा जीवाणु संक्रमण।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बच्चे को किसी विशेष धर्म को मानने या न मानने और किसी विशेष प्रथा या अनुष्ठान का पालन करने या न करने का अधिकार होना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि खतना की प्रथा बच्चों को मजबूर करने के लिए किया जाता है कि उनकी पसंद जैसी चीज नहीं है। उनके माता-पिता द्वारा लिए गए एकतरफा निर्णय का ही उन्हें पालन करना।
याचिका में आगे कहा गया है, “एक बच्चे को अपने माता-पिता की सनक का शिकार नहीं होना चाहिए। बच्चों को किसी विशेष प्रथा, विश्वास या धर्म को चुनने का अवसर मिलना चाहिए। हालाँकि, समाज बच्चों की अक्षमता और लाचारी का फायदा उठा रहा है। माता-पिता की धार्मिक कट्टरता के कारण बच्चों के अधिकारों और स्वतंत्रता का समर्पण नहीं किया जा सकता है। बालिग होने के बाद ही बच्चे को कोई धार्मिक अनुष्ठान चुनने की अनुमति दी जानी चाहिए।”