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‘अब BBC को नहीं देंगे पैसे’: ISIS की ‘जिहादी बेगम’ का महिमामंडन कर अपने ही देश में गाली सुन रहा मीडिया संस्थान, सब्सक्रिप्शन पर भी आफत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री बनाने के बाद बीबीसी ने अब आईएसआईएस की आतंकी ‘जिहादी दुल्हन’ पर डॉक्यूमेंट्री बनाई है। बीबीसी ने इस डॉक्यूमेंट्री को ‘द शमीमा बेगम स्टोरी’ (The Shamima Begum Story) नाम दिया है। इस डॉक्यूमेंट्री का ब्रिटेन में जमकर विरोध हो रहा है। साथ ही, लोग बीबीसी का सब्सक्रिप्शन रिन्यू नहीं कराने की बात कह रहे हैं।

दरअसल, बीबीसी ने ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से कुख्यात शमीमा बेगम पर 90 मिनट की एक डॉक्यूमेंट्री जारी की है। इस डॉक्यूमेंट्री के जरिए बीबीसी ने शमीमा बेगम का ‘चरित्र चित्रण’ की कोशिश की है। डॉक्यूमेंट्री के पॉडकास्ट ‘आई एम नॉट ए मॉन्स्टर’ के 10 एपिसोड में शमीमा बेगम की ब्रिटेन से सीरिया तक की यात्रा के बारे में बताया गया है। साथ ही उसके प्रति सहानुभूति पैदा करने की कोशिश गई है।

बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री में शमीमा बेगम ने कहा है कि जब वह ब्रिटेन से भागकर सीरिया पहुँची थी, तब वहाँ ISIS का एक आतंकी बस लेकर उसका इंतजार कर रहा था। उसने दावा किया है कि जब वह ब्रिटेन से भागकर सीरिया गई तो उसे आईएसआईएस के आतंक के बारे में नहीं पता था। लेकिन, बाद में उसने ISIS की भयानक करतूतों के वीडियो देखे थे। लेकिन इसके बाद उसने पीछे न हटने का फैसला किया।

‘जिहादी बेगम’ ने यह भी कहा है कि वह उत्तरी सीरिया के एक शरणार्थी शिविर में रह रही है। वहाँ रहना जेल में रहने से भी बदतर है। उसने यह भी कहा है कि कम से कम जेल की सजा के बारे में यह पता होता है कि सजा कब खत्म होगी। लेकिन शरणार्थी शिविर में जो हो रहा है यह सब कब खत्म होगा पता नहीं।

ब्रिटेन में हो रहा विरोध बीबीसी का विरोध

बीबीसी की इस डॉक्यूमेंट्री का ब्रिटेन में जमकर विरोध हो रहा है। बीबीसी द्वारा बार-बार प्रोपेगैंडा डॉक्यूमेंट्री बनाने को लेकर लोगों का कहना है कि वह अब बीबीसी को पैसे नहीं देंगे। लोग बीबीसी के सब्सक्रिप्शन को रिन्यू न कराने की भी बात कह रहे हैं। #DeFundTheBBC के साथ ब्रिटेन के लोग ट्वीट कर रहे हैं।

एक यूजर ने लिखा, “बीबीसी ने बकवास डॉक्यूमेंट्री बनाई। बीबीसी ने उसे अपने फैसलों को सही और उचित बताने के लिए एक मंच दिया। बीबीसी, ब्रिटेन में रहने वाले लोगों का हितैषी नहीं है। वह हम पर हँसी उड़ाते हुए हमारा अपमान कर रहा है। अब समय आ गया है हम बीबीसी को पैसे नहीं देंगे।”

एक अन्य यूजर ने कहा है, “चैनलों के माध्यम से उसे सही बताने की कोशिश हो रही है। दुष्ट शमीमा बेगम बीबीसी पर खुद को मासूम की बता रही है। बीबीसी देश के गद्दार हैं। यह लड़की जानती थी कि वह क्या कर रही है। वह ऑन रिकॉर्ड कह रही है कि मैनचेस्टर में बमबारी सही थी। लोगों ने अपने बच्चों और प्रियजनों को खो दिया।”

15 साल की लड़की कैसे बनी ‘जिहादी दुल्हन’…?

दरअसल, साल 2015 में ब्रिटेन में रहने वाली 15 साल की शमीमा बेगम अपने दो दोस्तों खादिजा सुल्ताना और अमीरा अबासे के साथ भागकर सीरिया चली गई थी। यहाँ उसने इस्लामिक आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) जॉइन कर लिया था।

यही नहीं, शमीमा बेगम ने ISIS के एक आतंकी से शादी भी कर ली थी। इसके बाद से उसे पूरी दुनिया में ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से पहचाना जाने लगा था। शमीमा के आईएसएस में शामिल होने के बाद ब्रिटेन ने साल 2019 में उसकी नागरिकता छीन ली थी। हालाँकि, अब सीरिया में आईएसएस के खात्मे के बाद शमीमा ब्रिटेन वापस आना चाहती है। लेकिन सरकार इसकी इजाजत नहीं दे रही है। शमीमा के ब्रिटेन लौटने को लेकर कोर्ट में भी मामला चल रहा है।

जेल बंद विधायक शौहर अब्बास के साथ घंटों बिताती थी मुख्तार अंसारी की बहू, छापेमारी के दौरान कमरे में मिली

उत्तर प्रदेश में माफियाओं के उपर योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) सरकार का डंडा जारी है। जेल में बंद माफिया मुख़्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) की बहू निखत अंसारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। वह रोज जेल में शौहर के संग 2-3 घंटे बीताती थी। वहीं, कानपुर से सपा विधायक हाजी इरफ़ान सोलंकी (Haji Irfan Solanki) की 21 करोड़ रुपए की सम्पत्ति को सीज कर लिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, निखत अंसारी अपने शौहर अब्बास अंसारी तक मोबाइल फोन पहुँचाने का प्रयास कर रही थीं। इसके साथ ही वह अक्सर अपने शौहर विधायक अब्बास अंसारी के साथ जेल में घंटों बीताती थी। अब्बास फिलहाल चित्रकूट जेल में बंद है। निखत और उसके ड्राइवर नियाज के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। मामला शुक्रवार (10 फरवरी 2023) दोपहर का है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, निखत अंसारी सुबह ही जेल में अपने शौहर अब्बास से मिलने पहुँची थीं। उनके साथ काफी सामान भी था, जो वो जेल में अपने शौहर को पहुँचाना चाह रही थीं। जब सामान की बारीकी से तलाशी हुई, तब उसमें मोबाइल बरामद हुआ। सवाल करने पर वो कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं।

इसके बाद स्थानीय थाने में मुकदमा दर्ज करके निखत अंसारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। जानकारी यह भी सामने आ रही है कि अब्बास अंसारी और निखत की मुलाकत डिप्टी जेलर के कमरे में हो रही थी। इस दौरान कुछ अन्य सामन भी बरामद होने की सूचना है, जो जेल मैनुअल के हिसाब से प्रतिबंधित माने जाते हैं।

लाइव हिंदुस्तान के अनुसार, चौकी इंचार्ज ने बताया कि निखत अंसारी जेल में बंद अपने शौहर अब्बास के साथ रोज 3-4 घंटे बीताती थी। इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई। इसके बाद शुक्रवार (10 फरवरी 2023) को जिले के डीएम और एसपी ने जेल में छापेमारी की। उस दौरान अब्बास अपने बैरक में नहीं मिला।

अधिकारियों ने कड़ाई से पूछताछ की तो जेल अधीक्षक के बगल वाले कमरे को खोला। उसमें निखत बैठी हुई थी। वहीं, जेलकर्मियों ने मौका पाकर अब्बास को उसके बैरक में पहुँचा दिया था। निखत ने पूछताछ में बताया कि मोबाइल फोन से अब्बास मुकदमे से जुड़े गवाहों और अधिकारियों को धमकाता था। वह उनकी हत्या की भी योजना बना रहा था। निखत ने यह भी कहा कि अब्बास जेल से भागने की योजना बना रहा था।

जेल में हुई इस घटना की जाँच DIG जेल प्रयागराज को सौंप दी गई है। जाँच रिपोर्ट आने के बाद दोषी जेलकर्मियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। दर्ज FIR में अब्बास अंसारी, निखत अंसारी, उसके ड्राइवर नियाज के साथ-साथ चित्रकूट जेल के अधीक्षक अशोक कुमार सागर, डिप्टी जेल अधीक्षक सुशील कुमार, कांस्टेबल जगमोहन के साथ ड्यूटी पर तैनात अन्य जेलकर्मियों को आरोपित किया गया है।

इस मामले की FIR कोतवाली नगर चित्रकूट में दर्ज हुई है। सभी आरोपितों पर IPC की धारा 387, 222, 186, 506, 201, 120 B, 195 A, 34 के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 8 और 13 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

सपा विधायक इरफ़ान सोलंकी की सम्पत्ति जब्त

वहीं, एक अन्य मामले में कानपुर पुलिस ने जेल में बंद समाजवादी पार्टी के विधायक इरफ़ान सोलंकी की लगभग 20 करोड़ रुपए मूल्य की सम्पत्ति को जब्त कर लिया है। इरफ़ान सोलंकी के साथ उनके सहयोगी शौकत की भी सम्पत्ति को सीज किया गया है।

इन सम्पत्तियों में हिलाल कम्पाउंड में बने 27 फ़्लैट शामिल हैं। इसमें रह रहे मालिकों में महज 1 ही जरूरी कागजात दिखा पाए। पुलिस के मुताबिक, इरफ़ान सोलंकी की अन्य सम्पत्तियों की जानकारी जमा की जा रही है।

टैक्स इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़ ग्लैमर वर्ल्ड में आई, ₹263 करोड़ के फ्रॉड मामले में ED ने कृति वर्मा को तलब किया: रोडिज और बिग बॉस में किया है काम

TV अदाकारा कृति वर्मा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की है। इस मामले में ED ने पूछताछ के लिए कृति को तलब किया है। फिलहाल जाँच के दायरे में 263 करोड़ रुपए की संदिग्ध राशि बताई जा रही है। कृति वर्मा बिग बॉस सीजन 12 में दिख चुकी हैं। उन पर धोखाधड़ी के आरोपितों से रिश्तों का भी आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत तब हुई जब कृति ने हरियाणा के गुरुग्राम में अपनी एक प्रॉपर्टी बेची। आरोप लगा कि ये जमीन उन्होंने साल 2021 में धोखाधड़ी के पैसों से लिया था। तब जाँच के दौरान कृति के खाते में 1 करोड़ 18 लाख रुपए की रकम जमा पाई गई थी। इस पैसे को जाँचकर्ताओं ने फ्रीज कर दिया था।

जाँच के कृति द्वारा ऐसे ही जमीनों की खरीद फरोख्त कुछ अन्य शहरों में भी करने की जानकारी मिली। जिन शहरों में कृति ने जमीनें खरीदीं, उनमें पुणे, खंडाला, कर्जत, उडुपी प्रमुख हैं। इसके साथ ही पनवेल और मुंबई में उनके नाम पर फ्लैट का भी पता चला। इन सभी के अलावा कृति के पास तीन लग्जरी गाड़ियों की भी जानकारी सामने आई थी।

बताया जा रहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग के इस रैकेट में कृति के साथ सारिका शेट्टी, राजेश शेट्टी और अनंत पाटिल भी शामिल मिले थे। मिले सबूतों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने PMLA कानून के अंतर्गत इन सभी आरोपितों की कर्नाटक और महाराष्ट्र में 69.65 करोड़ रुपए और 32 चल और अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया था।

ED का मानना है कि इन सम्पत्तियों को खरीदने के लिए पैसे धोखाधड़ी से कमाए गए थे। अभिनेत्री कृति के इन साथियों पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से गलत टैक्स रिफंड जारी करने का भी आरोप। है। अब इस केस में ED कृति से भी जल्द ही सवाल जवाब कर सकती है।

हालाँकि, इन आरोपों पर अभी तक कृति की तरफ से कोई सफाई या बयान नहीं आया है। बता दें कि एक्ट्रेस कृति वर्मा टैक्स ऑफिसर थीं। इस नौकरी को छोड़कर वह ग्लैमर की दुनिया में आई थीं। कृति केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड में जीएसटी इंस्पेक्टर थीं।

दरअसल, कहानी की शुरुआत कहीं और से शुरू होती है। पिछले साल CBI ने इनकम टैक्स के सीनियर टैक्स असिस्टेंट तानाजी मंडल अधिकारी और पनवेल के व्यापारी भूषण अनंत पाटिल के अलावा कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जाँच कर रही थी। इन लोगों पर धोखाधड़ी करके टैक्स रिफंड जारी कराने का आरोप था।

इस मामले में दर्ज FIR के आधार पर ED ने PMLA के तहत जाँच शुरू कर दी। जाँच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय को पता चला कि अनंत पाटिल के बैंक अकाउंट के अलावा कई अन्य बैंक अकाउंट्स में पैसा ट्रांसफर किया गए थे। इसी कृति वर्मा का नाम भी सामने आया। ED के अधिकारियों का कहना है कि पाटिल और कृति रोमांटिक रूप से जुड़े हैं।

टैक्स अधिकारी तानाजी मंडल ने 15 नवंबर 2019 और 4 नवंबर 2020 के बीच 263.95 करोड़ रुपए के 12 फर्जी TDS रिफंड जारी किए गए थे। रिफंड का यह पैसा पाटिल और संबंधित लोगों के अलावा शेल कंपनियों में भी ट्रांसफर किए गए थे।

माओवादियों ने छत्तीसगढ़ में भाजपा जिला उपाध्यक्ष की हत्या की, AK-47 से सिर में मारी गोली: 5 दिन पहले BJP मंडलाध्यक्ष को कुल्हाड़ी से काट दिया था

छत्तीसगढ़ में माओवादी फिर से सिर उठाने लगे हैं। नारायणपुर जिले के भाजपा उपाध्यक्ष सागर साहू की माओवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। शुक्रवार (10 फरवरी 2023) को बाइक पर सवार होकर आए माओवादियों ने जबरन घर में घुसकर गोली मार दी। बीते 5 दिनों में यह भाजपा के दूसरे नेता की हत्या है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार (10 फरवरी 2023) की रात 8 बजे भाजपा जिला उपाध्यक्ष सागर साहू नारायणपुर जिले के छोटे डोंगर गाँव में स्थित अपने घर में टीवी देख रहे थे। इसी दौरान बाइक से दो माओवादी आए और उनके घर का दरवाजा खटखटाया। सागर साहू ने जैसे ही घर का दरवाजा खोला, माओवादी जबरदस्ती करते हुए उनके घर के अंदर घुस गए।

घर में घुसने के बाद माओवादियों ने उनके सिर में 2 गोली मार दी। गोली लगते ही भाजपा नेता गिर गए। घटना को अंजाम देकर माओवादी बाइक पर सवार होकर जंगल की ओर भाग निकले। आनन फानन में उन्हें को स्थानीय हॉस्पिटल में ले जाया गया, जहाँ से उन्हें नारायणपुर जिला चिकित्सालय रेफर किया गया। यहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

इस हत्याकांड के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस घटनास्थल पर पहुँची। पुलिस को सागर साहू के घर से गोली के 2 खोखे मिले हैं। गोली के खोखे को देखकर पुलिस ने भाजपा नेता सागर साहू की हत्या में AK-47 का इस्तेमाल होने की आशंका जताई है।

रिपोर्ट के अनुसार, पहले माओवादियों ने सागर साहू को लौह अयस्क संयंत्र की स्थापना का समर्थन न करने की चेतावनी दी थी। इस हत्या को लेकर नारायणपुर के एएसपी हेमसागर सिदार ने कहा है कि मामले की जाँच चल रही है। शुरुआती जाँच में सामने आया है कि नक्सलियों की स्मॉल एक्शन टीम ने हत्या को अंजाम दिया है।

इस हत्या के बाद छत्तीसगढ़ राज्य की शासन व्यवस्था और पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि मृत भाजपा नेता सागर साहू के घर से महज 100 मीटर दूर एक पुलिस स्टेशन है। हालाँकि इसके बाद भी माओवादियों ने हत्या को अंजाम दे दिया और छत्तीसगढ़ पुलिस गहरी नींद में सोती रही।

बता दें कि इससे पहले माओवादियों ने रविवार (5 फरवरी 2023) को बीजापुर जिले में बीजेपी नेता नीलकंठ कक्केम की चाकू और कुल्हाड़ी मारकर हत्या कर दी थी। वह बीते 15 वर्षों से उसूर के भाजपा मंडल अध्यक्ष थे। नीलकंठ कक्केम साली की शादी की तैयारी करने के लिए अपने गाँव गए थे। इसी दौरान माओवादियों ने परिजनों के सामने उनकी हत्या कर दी थी।

‘अगर अम्बेडकर जिन्दा होते तो मैं गोडसे की तरह उन्हें गोली मार देता’: दलित नेता ने उन्हें बताया हिंदू विरोधी, वीडियो वायरल होते ही हुआ गिरफ्तार

तेलंगाना से डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर के खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाजी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति कह रहा है कि अगर आज अम्बेडकर जीवित होते तो वो उन्हें मार देता। वीडियो में दिख रहे व्यक्ति का नाम हमारा प्रसाद बताया जा रहा है, जो राष्ट्रीय दलित सेना नाम के समूह का फाउंडर है। वीडियो जारी करने वाले व्यक्ति ने भीमराव अम्बेडकर पर हिन्दू धर्म विरोधी होने का भी आरोप लगाया है। पुलिस ने हमारा प्रसाद को गिरफ्तार कर लिया है।

इस वीडियो को गुरुवार (9 फरवरी 2023) को बहुजन समाज पार्टी (BSP) के नेता आरएस प्रवीण कुमार ने शेयर किया। वायरल वीडियो में दलित नेता हमारा प्रसाद के हाथों में भीमराव अम्बेडकर की तस्वीर दिखाई दे रही है। वीडियो में आरोपित ने बेहद नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर अम्बेडकर जीवित होते तो वह नाथूराम गोडसे की तरह उन्हें गोली मार देता।

दलित नेता के मुताबिक, अम्बेडकर ने अपनी किताब ‘रीड्स इन हिंदुइज्म’ में हिन्दू भावनाओं का अपमान किया है। उन्होंने जो किताब लिखी है, वो गलत है। बसपा नेता प्रवीण ने इस वीडियो पर कार्रवाई की माँग करते हुए मुख्यमंत्री KCR पर तंज भी कसा।

बसपा नेता ने लिखा कि वो सिर्फ वोट लेने के लिए अम्बेडकर के नाम का जाप करते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वीडियो जारी करने वाले हमारा प्रसाद को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन पर IPC की धारा 153- A और 505 (2) के तहत कार्रवाई हुई है।

‘इस्लाम सबसे पुराना मजहब, भारत मुस्लिमों के पहले पैगंबर की जमीन’: जमीयत प्रमुख मदनी बोले- यह देश जितना मोदी-भागवत का, उतना ही महमूद का

जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख महमूद मदनी (Mahmood Madani) ने कहा है कि इस्लाम सभी धर्मों से पुराना है और यह भारत में बाहर से नहीं आया है। मदनी ने शुक्रवार (10 फरवरी 2023) को कहा कि भारत जितना नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) का है, उतना ही उनका भी है।

दरअसल, दिल्ली के रामलीला मैदान में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद का आम सत्र आयोजित चल रहा है। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महमूद मदनी ने कहा, “भारत हमारा देश है। यह देश जितना नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत का है, उतना ही यह देश महमूद का भी है। न तो महमूद उनसे एक इंच आगे है और न ही वे महमूद से एक इंच आगे हैं।”

मदनी ने यह भी कहा है कि भारत खुदा के सबसे पहले पैगंबर अब्दुल बशर सईदाला आलम की जमीन है। भारत मुस्लिमों की पहली मातृभूमि है। इसलिए यह कहना कि इस्लाम बाहर से आया, पूरी तरह गलत और आधारहीन है। इस्लाम इसी देश का मजहब है। इस्लाम सभी धर्मों में सबसे पुराना महजब है। भारत हिंदी मुसलमानों के लिए सबसे अच्छा देश है।

साथ ही उन्होंने कहा है कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा भड़काने वालों को सजा देने के लिए एक अलग कानून बनाया जाए। मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत और उकसावे के मामलों के अलावा इस्लामोफोबिया में वृद्धि हाल के दिनों में देश में खतरनाक स्तर तक बढ़ गई है।

मदनी ने आगे है कि आज देश में नफरत का माहौल है। बेबुनियाद प्रोपेगेंडा फैलाने का काम तेजी से किया जा रहा है। ऐसे लोगों को सुप्रीम कोर्ट भी छोड़कर कर उनका हौसला अफजाई कर रहा है। जो देश के लिए खतरा हैं, उन्हें खुला छोड़ा जा रहा है।

मदनी ने कहा कि आज के हालात में अगर स्वामी विवेकानंद, मोहनदास करमचंद गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और चिश्ती के आदर्शों को मानने वाले नेता इसी तरह तमाशाबीन बने रहे तो पता नहीं देश की हालत क्या होगी।

मुस्लिमों की छवि बदलने के लिए किए जाएँ कार्यक्रम

जमीयत के इस सत्र में मुस्लिमों द्वारा बड़ी संख्या में इस्लाम छोड़ने और ‘एक्स मुस्लिम’ अभियान को लेकर भी चिंता जताई गई। इस बैठक में प्रस्ताव लाकर मुस्लिमों को गुमराह होने से बचाने के लिए प्रयास करने की बात कही गई।

इसमें यह भी कहा गया कि विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मुस्लिमों की छवि एक मददगार और भरोसेमंद बनाकर प्रस्तुत की जाए ताकि फिल्मों, टीवी सीरियलों और किताबों से जो छवि बनाई गई है, उसको सुधारा जा सके। साथ ही महमूद मदनी ने इस्लामवादी युवाओं से हिंसा और जिहाद का रास्ता न अपनाने की भी बात कही।

जासूसी से परेशान अमेरिका सतर्क: चीनी नागरिकों द्वारा देश में जमीन-मकान या प्रॉपर्टी खरीदने पर रोक वाला कानून बनाने की तैयारी

अमेरिकी (America) क्षेत्र में जासूसी चीनी गुब्बारों के घुसपैठ के बाद अमेरिका और चीन (China) के रिश्तों में और खटास बढ़ गई है। अमेरिका का टेक्सास राज्य अब जो कानून बनाने जा रहा है, उससे निकट भविष्य में दोनों देशों के बीच संबंध सुधार की उम्मीद कम ही नजर आ रही है।

टेक्सास राज्य द्वारा प्रस्तावित कानून के मुताबिक, वहाँ रह रहे चीनी नागरिकों को किसी तरह की प्रॉपर्टी या जमीन खरीदने का अधिकार नहीं होगा। इसके बाद संभव है कि अमेरिका के दूसरे राज्य भी इस तरह का कानून बनाएँ। टेक्सास के इस कदम की चीन ने निंदा की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, टेक्सास राज्य की तरफ से लाए जा रहे नए कानून में रूसी, ईरानी, उत्तर कोरियाई और चीनी मूल के लोगों को टेक्सास राज्य में घर, जमीन, इमारत या दूसरे तरह की संपत्ति खरीदने पर रोक लगाई जाएगी। भले ही कानून में अन्य देशों से जुड़े लोगों का जिक्र है, लेकिन कहा जा रहा है कि मुख्य निशाना चीन है। कानून का मसौदा टेक्सास के रिपब्लिकन सीनेटर लोइस कोलखोर्स्ट (Republican state Sen. Lois Kolkhorst) ने 2022 में पेश किया था।

टेक्सास के रिपब्लिकन गवर्नर ग्रेग एबॉट (Republican Gov. Greg Abbott) ने कहा है कि वे सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी के साथ हैं। यदि सीनेट इस प्रस्ताव को पारित करता है तो वे इस पर हस्ताक्षर करने को तैयार हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald J. Trump) ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।

विदेशियों द्वारा खेती के नाम पर जमीन और दूसरी तरह की संपत्ति हासिल करने से लोग नाराज है। खास तौर पर चीनी नागरिकों के वहाँ की जमीनों पर बढ़ता कब्जा अमेरिका के लिए बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। रिपोर्ट की मानें तो फ्लोरिडा, साउथ डकोटा और अराकान्स समेत 8 और राज्य इस तरह का कानून बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

उधर चीन के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राज्य अमेरिका में लाए जा रहे इस नए कानून की निंदा की है। चीन ने अमेरिका के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का उल्लंघन करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर व्यापार और निवेश से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण कर रहा है।

माओ निंग ने अमेरिका के इस कदम को बाजार अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों का उल्लंघन करार दिया। उन्होंने कहा कि चीन ने अमेरिका में कई महत्वपूर्ण निवेश किए हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है।

अर्जुन बन भगवान श्रीकृष्ण से कीजिए सवाल, Gita GPT भगवद्गीता के आधार पर देगा जवाब: गूगल के इंजीनियर ने बनाई जीवन-दर्शन से संबंधित चैटबॉट

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से हर सवाल का जवाब देने के लिए डेवलप चैटबॉट चैटजीपीटी (ChatGPT) इन दिनों काफी लोकप्रिय हो रहा है। इस बीच गूगल (Google) के एक इंजीनियर ने गीता जीपीटी (Gita GPT) नाम से चैटबॉट लॉन्च किया है। दावा किया जा रहा है कि यह चैटबॉट गीता के आधार पर आपके प्रश्नों का उत्तर देगा।

गीता जीपीटी को बेंगलुरु के गूगल सॉफ्टवेयर इंजीनियर सुकुरु साई विनीत ने विकसित (Develop) किया है। यह जीपीटी-3 पर आधारित प्रोग्राम है। ट्विटर पर इसके बारे में विनीत ने पोस्ट शेयर की है। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि क्या होगा जब आप भगवद्गीता या भगवान श्रीकृष्ण से बात करें? भगवान श्रीकृष्ण का पवित्र गान अब आपके हाथों में। इक्कीसवीं सदी (21st Century) में आपका स्वागत है।

विनीत आपको अर्जुन बनकर भगवान कृष्ण से कठिन से कठिन प्रश्न पूछने का अवसर दे रहे हैं। यह एक चैट जीपीटी टूल है, जो भगवद्गीता के आधार पर प्रश्नों का जवाब देता है। दावा है कि अपने जीवन के समस्याओं का हल भी इस टूल के जरिए प्राप्त किया जा सकता है। यह टूल भगवद्गीता को जानने और समझने में भी आपकी मदद करेगा।

विनीत ने अपने ट्वीट के जरिए समझाया है कि सवालों के जवाब के साथ-साथ आप चाहें तो गीता परामर्श (consult the Gita) भी ले सकते हैं। उन्होंने ऐप पर पूछे गए सवाल का जवाब भी साझा किया है। इसमें उन्होंने गीता जीपीटी से जीवन का अर्थ, धर्म क्या है जैसे कई सवाल पूछे हैं। इसका जवाब गीता के अनुसार नीचे दिया गया है।

क्या है भगवद्गीता?

भगवद्गीता महाभारत की लड़ाई से पहले भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच संवाद पर आधारित ग्रन्थ है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के सवालों का जवाब देते हुए ज्ञानयोग, कर्मयोग, भक्ति योग और राजयोग पर विस्तार से चर्चा की है। गीता में भगवान ने मनुष्यों को कर्म के लिए प्रेरित करते हुए, इसका महत्व समझाया है। इसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं।

क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद के बलिदान स्थल वाले पार्क में वक्फ बोर्ड वाली दरगाह; मर्दों को टोपी पहन कर ही घुसने का फरमान

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (Prayagraj, Uttar Pradesh) में चल रहा माघ मेला अब समापन की ओर है। इस माघ मेले (Magh Mela) में सुविधा और सुरक्षा को लेकर अधिकतर संत और श्रद्धालु शासन और प्रशासन से संतुष्ट दिखे। ऑपइंडिया की टीम ने भी धर्मक्षेत्र कहे जाने वाले माघ मेले का दौरा किया।

काफी चीजों में जहाँ शासन-प्रशासन के कार्य सराहनीय पाए गए तो एकाध स्थान ऐसे भी रहे, जो लगा कि सरकार की नजर से छूट गए। इन्हीं स्थानों में सबसे प्रमुख है प्रयागराज में क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद से जुड़े स्थान। हमने उन बिंदुओं की तरफ सरकार का ध्यान आकर्षित करने का फैसला किया है। प्रस्तुत है भाग ..

अधिकतर स्थान अंग्रेजों के नाम पर

गुरुवार (9 फरवरी 2023) को हम उस चंद्रशेखर आज़ाद पार्क में थे, जहाँ 27 फरवरी 1931 को अंग्रेजों से लड़ते हुए आज़ाद ने वीरगति पाई थी। यहाँ ये बात गौर करने योग्य है कि चंद्रशेखर आजाद को घेरकर खुद को गोली मारने पर मजबूर करने वालों में अधिकतर सिपाही भारतीय थे।

ये भारतीय सिपाही ब्रिटिश अफसर नॉट बावर के अधीनस्थ लड़ रहे थे। उन्हीं में एक प्रमुख नाम इंस्पेक्टर विश्वेश्वर सिंह का है, जो उस समय कर्नलगंज थाने का SHO हुआ करता था। उस कर्नलगंज थाने का नाम आज भी ज्यों-का-त्यों ही है।

थाना कर्नलगंज, प्रयागराज (फाइल फोटो)

प्रयागराज न सिर्फ चंद्रशेखर आज़ाद, बल्कि उनके साथी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल के नाम से विख्यात रामप्रसाद सिंह तोमर सहित कई अन्य वीरों की कर्मभूमि रहा है। हालाँकि, यहाँ घूमते हुए आपको कई स्थानों के नाम अभी भी अंग्रेजों के नाम पर मिल जाएँगे। इनमें स्टैनली रोड, कर्नलगंज, मम्फोर्डगंज, बेली रोड व अस्पताल और एलनगंज आदि प्रमुख हैं।

पार्क में घुसते ही दरगाह

चंद्रशेखर आज़ाद पार्क का मुख्य द्वार गेट नंबर 1 है। यहाँ से पार्क में घुसने वालों को 0 किलोमीटर का बोर्ड भी लगा दिखाई देता है। जैसे ही गेट नंबर 1 से कोई पार्क में प्रवेश करता है, वैसे ही उसे पार्क प्रशासन और DM प्रयागराज का बोर्ड लगा मिलता है।

इस बोर्ड में साफ तौर पर हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए लिखा गया गया है कि उस स्थान का प्रयोग सिर्फ पार्क के लिए होगा। हालाँकि, इसी बोर्ड से महज 50 मीटर की दूरी पर हमें एक मजार दिखी जहाँ कई लोग जियारत करते दिखाई दिए।

दरगाह का बाहरी हिस्सा

वसीम हैं दरगाह के खादिम

जैसे ही हम मज़ार के अंदर गए तो वहाँ हमें कुछ लोग एक कुएँ के पास घेरा लगाए बैठे मिले। दरगाह 2 हिस्सों में थी और दूसरे भाग में कुछ लोग एक कब्र को घेरे हुए थे। हमने वहाँ के खादिम से बात करनी चाही तो वसीम नाम के व्यक्ति से हमने मिलवाया गया।

वसीम ने हमें दरगाह को औरंगजेब के जमाने का बताया। वहाँ जियारत कर रहे लोगों के बारे में वसीम ने दावा किया कि दरगाह पर आने वालों की हर मनोकामना पूरी होती है। खादिम वसीम ने हमें बताया कि वो सरकार से चाहते हैं कि मज़ार को व्यापक रूप दिया जाए।

दरगाह के खादिम वसीम और उनके सहयोगी

सुन्नी वक्फ बोर्ड का लगा है पोस्टर

जब हमने खादिम वसीम को मजार के बारे में और बताने के लिए कहा तो उन्होंने हमें एक बोर्ड दिखाया, जिस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड लिखा हुआ था। हमने बोर्ड को पूरा पढ़ा तो उसमें अरबी भाषा में 786 के बाद वो जगह हजरत शंदल शाह और गुलाब शाह बाबा की दरगाह लिखी हुई थी।

दरगाह की जगह कम्पनी बाग़ यानी चंद्रशेखर आज़ाद पार्क के अंदर बताई गई। इस बोर्ड में दावा किया गया है कि गुलाब शाह और शंदल शाह 1857 की क्रान्ति में अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हुए थे। हालाँकि, हमने पार्क प्रशासन से इस दावे के संबंध में सबूत माँगे तो उनके पास यह मौजूद नहीं था।

वक्फ बोर्ड वाली दरगाह

उर्दू में है, पढ़ नहीं पाओगे

1857 की क्रांति में गुलाब शाह और शंदल शाह की शहादत के बारे में जब हमने मजार के खादिम वसीम से कुछ सबूत दिखाने के लिए कहा तो उन्होंने टाल दिया। खादिम वसीम बोले, “कागज उर्दू में है। पढ़ नहीं पाओगे।”

सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के इस पोस्टर के मुताबिक, यह जगह पहले रसूलपुर व समदाबाद नाम से जानी जाती थी। इसी बोर्ड में दरगाह के लिए सहयोग की अपील की गई है। खादिम के तौर पर बोर्ड में किसी जमील खाँ का नाम लिखा हुआ था। हालाँकि, खुद को खादिम बता रहे वसीम ने यह बोर्ड उखाड़ कर अंदर रखा हुआ था।

दरगाह से सट कर पार्क को पार्क ही रखने का हाईकोर्ट के हवाले से आदेश

मर्द टोपी पहने और औरतें न छुएँ मजार

इस मजार के गेट मुख्य पर शंदल शाह का नाम हजरत सैयद फ़िरोज़ अली बाबा रहमत उल्लाह अलैह के तौर पर भी दर्ज है। मजार के बाहर साफ तौर पर आदेश है कि मर्द अंदर घुसने से पहले सिर पर टोपी रखें और औरतें पल्लू।

इसमें औरतों को साफ़ तौर पर आदेश है कि वो मजार का पीछा करके न जाएँ और आगे से आएँ। औरतों को मजार छूने से भी साफ मना किया गया है। यहाँ जो चंदा देना चाहते हैं, उसके लिए एक गुल्लक रखा हुआ है।

दरगाह के निर्देश

बाहर फूल बेच रही महिला लम्बे समय से बीमार

हालाँकि, मजार के खादिम वसीम का कहना था कि वहाँ आने के बाद तमाम समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है, लेकिन मजार के बाहर लम्बे समय से फूल बेचने वाली महिला खुद को लम्बे समय से बीमार बता रही थी।

दरगाह के ही एक सदस्य से लम्बी बातचीत की रिकॉर्डिंग ऑपइंडिया के पास मौजूद है, जिसमें वो तमाम दवा लेने और अस्पतालों के चक्कर लगाने की जानकारी दे रही है। हैरानी की बात ये रही कि दरगाह का नियमित सदस्य ही उस महिला को अच्छे डॉक्टर के पास जाने की सलाह दे रहा था।

दरगाह में माँगी जा रही दुआ

बात दें कि अक्टूबर 2021 में साल हाईकोर्ट के आदेश पर चंद्रशेखर पार्क के अंदर बने मस्जिद, मजार, 14 कब्र सहित दर्जन भर अवैध अतिक्रमणों को तोड़ा गया था। हाईकोर्ट ने साल 1975 के बाद बने अवैध निर्माणों को हटाने का निर्देश दिया था।

इन अवैध निर्माणों को हटाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र सिंह बिसेन याचिका दाखिल की थी। उन्होंने याचिका में कहा था कि इतने महान स्वतंत्रता सेनानी से जुड़े इस पार्क पर अतिक्रमण होना मामूली घटना नहीं है। एक साजिश के तहत इस पर कब्जा किया जा रहा है।

बता दें कि कि चंद्रशेखर आजाद पार्क 133 एकड़ में फैला है। अवैध अतिक्रमण हटाने से पहले लगभग 25-30 साल पहले वहाँ मस्जिद, मजार और कब्र बना दिए गए थे। उस दौरान वहाँ लगभग 20 मजार व तीन मस्जिद बनाई जा चुकी थीं।

हालाँकि, यहाँ बने मजार पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अपना दावा किया है। सितंबर 2022 में मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में एक याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि ये मजार 200 साल पुराना है। हालाँकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मजार अवैध है।

प्रयागराज में ही मौजूद चंद्रशेखर आज़ाद से जुड़े एक अन्य भूले-बिसरे स्थान की चर्चा हम अपनी अगली रिपोर्ट में करेंगे।

2047 तक फिर होगा भारत का विभाजन: कट्टर इस्लामी और वामपंथियों का है यह टारगेट, लंबी प्लानिंग पर कर रहे काम

2047 में भारत को अंग्रेजों से आजादी मिले 100 साल पूरे हो जाएँगे। तब तक का रास्ता आसान होगा, ऐसा नहीं है। वो देश जिसे दो हिस्सों इस्लामिक पाकिस्तान और धर्मनिरपेक्ष भारत में बाँट दिया गया था, उसके बँटवारे के 100 साल पूरे होने से पहले एक नापाक मंसूबा सामने दिखाई दे रहा है। इस नापाक मंसूबे को पूरा करने के लिए कट्टर इस्लामी और वामपंथी भारत को एक बार फिर उन परिस्थितियों की ओर धकेल रहे हैं, जिसके कारण पहले उसका विभाजन हुआ था।

जुलाई 2022 में, ऑपइंडिया ने एक खास दस्तावेज़ की डिटेल निकाली थी, जो प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने अपने सदस्यों को प्रसारित किया था। ‘विजन 2047’ नाम के दस्तावेज में गजवा-ए-हिंद के रोडमैप की डिटेल थी। इसमें उनकी योजना मुस्लिमों को कट्टरपंथी बनाना, ‘कायर हिंदुओं’ पर पूरी तरह से हावी होना, भारतीय संविधान को शरीयत कानून में बदल देना, हिंदुओं का नरसंहार करना और भारत को एक इस्लामिक राष्ट्र में बदल देना है।

महाराष्ट्र एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) ने 2 फरवरी 2023 को 5 पीएफआई आतंकवादियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की, जिन्हें गैरकानूनी गतिविधियों और राष्ट्र के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन के खिलाफ देशव्यापी छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किया गया था। महाराष्ट्र एटीएस की मुंबई इकाई ने जिन 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया उनके नाम हैं – मजहर खान, सादिक शेख, मोहम्मद इकबाल खान, मोमिन मिस्त्री और आसिफ हुसैन खान। पीएफआई के साथ इनका कनेक्शन था। यही नहीं, पीएफआई के खिलाफ कार्रवाई शुरू होने के बाद से इस्लामिक संगठन से जुड़े 100 से अधिक आतंकवादियों को कई एजेंसियों ने गिरफ्तार किया है।

महाराष्ट्र एटीएस द्वारा 5 आरोपितों के खिलाफ दायर चार्जशीट 600 से अधिक पन्नों की है। इसमें बताया गया है कि आरोपित 2047 तक भारत को एक इस्लामिक राष्ट्र में बदलने की दिशा में कैसे काम कर रहे थे। विजन 2047 दस्तावेज, जिसे जुलाई 2022 में ऑपइंडिया द्वारा विशेष रूप से विस्तार से बताया गया था, को भी इसमें संलग्न किया गया है। चार्जशीट में पीएफआई के नापाक मंसूबों और उनकी योजनाओं को पूरा करने के लिए उनके गुर्गों के काम करने के खूँखार तरीकों को भी बताया गया है।

चार्जशीट में उन 5 आरोपितों के बारे में निम्नलिखित खुलासे किए गए हैं, जो PFI से जुड़े आतंकी थे:

  • पीएफआई और आतंकवादी संगठन के साथ काम करने वाले कट्टर इस्लामी देश के खिलाफ साजिश रच रहे थे।
  • महाराष्ट्र के चेंबूर, धारावी, कुर्ला, ठाणे, नेरुल, पनवेल और मुंब्रा में पीएफआई सदस्यों द्वारा गुप्त बैठकें की गईं। इन बैठकों में, उन्होंने योजना बनाई कि देश के खिलाफ कैसे काम किया जाए, मुस्लिमों को कट्टरपंथी बनाने और 2047 तक भारत को एक इस्लामी राष्ट्र में बदलने के लिए साजिश भी रची गई।
  • पीएफआई ने मुस्लिमों को अपने साजिश का हिस्सा बनाने के लिए उन्हें विश्वास दिलाने की योजना बनाई थी कि देश इस्लाम के खिलाफ काम कर रहा है और उन्हें हिंदुओं के खिलाफ एकजुट होना है।
  • पीएफआई का मंसूबा इस्लामी शरिया के साथ भारत के संविधान को बदलने की दिशा में काम करना है।
  • वे भारत को इस्लामी राज्य बनाना चाहते हैं।
  • वे चाहते थे कि मुस्लिमों को केवल मुस्लिमों के रूप में ही जाना जाए न कि भारतीयों के रूप में।
  • पीएफआई ने मुस्लिमों के खतरे में होने और उन पर अत्याचार होने के दुष्प्रचार को आगे बढ़ाया।
  • पीएफआई पैसा जुटाना चाहता था और भारतीय लोकतंत्र को खत्म करने के लिए विदेशी संगठनों से मदद लेना चाहता था। यही नहीं, भारत को इस्लामी राष्ट्र में बदलने की अपनी योजना को पूरा करना चाहता था।
  • आरोपितों में से दो को कानून का ज्ञान था और वे उसी के अनुसार टीम का मार्गदर्शन कर रहे थे।
  • आरोपितों में से एक मुस्लिम युवकों को भर्ती करने के खिलाफ था।

साल 2047 पीएफआई द्वारा दी गई केवल एक समय सीमा नहीं है। बल्कि वामपंथी भी सामाजिक न्याय की आड़ में भारत में अशांति फैलाने के लिए इसी तरह के एजेंडे को चला रहे हैं।

8 फरवरी को लेखक और शिक्षाविद राजीव मल्होत्रा ने हार्वर्ड में होने वाले एक कार्यक्रम के बारे में ट्वीट किया, जहाँ भारत पर ‘जाति’ का ट्रायल होगा। उन्होंने ट्वीट किया कि कई भारतीय दानदाता इस कार्यक्रम को प्रायोजित कर रहे हैं।

11 फरवरी 2023 को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का नाम हार्वर्ड 2023 में भारत सम्मेलन रखा गया है। हार्वर्ड वेबसाइट पर इसके बारे विवरण दिया गया है। हार्वर्ड में वार्षिक भारत सम्मेलन के दौरान होने वाली पैनल चर्चाओं में से एक का शीर्षक है, “2047 तक जाति को खत्म करने के लिए क्या करना होगा।”

हार्वर्ड इवेंट शेड्यूल का स्क्रीनशॉट

इस पैनल में शामिल वक्ताओं ने भारत की एकता को तोड़ने वाले लफ्ज़ों का इस्तेमाल किया और हिंदुओं के खिलाफ पीएफआई की तरह जहर उगला। सेंटर फॉर सोशल इक्विटी एंड इंक्लूजन (CSEI) और नेशनल यूथ इक्विटी फोरम (NYEF) के सह-संस्थापक और निदेशक सत्येंद्र कुमार का ट्विटर प्रोफाइल देखने के बाद आपको पता चल जाएगा कि उनकी सोच क्या है। दिल्ली के हिंदू-विरोधी दंगे भड़कने से कुछ दिन पहले उनका उद्देश्य काफिरों को सबक सिखाना था। कुमार ने 2020 में ट्वीट किया था, “ना तो हम CAA-NPR-NRC आने देंगे, ना ही मोदी को जिम्मेदारी से भागने देंगे!”

उन्होंने कन्हैया कुमार के ट्वीट को भी रीट्वीट किया था, जिन्होंने पीएफआई के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला था।

ट्वीट को सत्येंद्र कुमार ने रीट्वीट किया

वार्ता के अन्य पैनलिस्ट, दलित लेखक चंद्रभान प्रसाद प्रचार-प्रसार के अनुभवी हैं। 2018 में, जब भीमा-कोरेगाँव घटना के बाद नक्सलियों द्वारा दंगा किया गया, तो चंद्रभान प्रसाद ने इसके लिए ऑरेंज ब्रिगेड को दोषी ठहराया था।

उन्होंने हाल ही में कॉन्ग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी को समर्थन भी दिया था।

अगले पैनलिस्ट थेनमोझी साउंडराजन (Thenmozhi Soundararajan) हैं, जो इक्वैलिटी लैब्स के कार्यकारी निदेशक हैं। इक्वैलिटी लैब्स संयुक्त राज्य अमेरिका में ब्राह्मणवाद विरोधी जाति सक्रियता समूह है। इसका प्रभाव इतना है कि ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने एक बार बड़े पैमाने पर विवाद खड़ा कर दिया था। डोर्सी ने 2018 में, जो प्लेकार्ड पकड़ा था, उसमें ‘Smash the Brahminical Patriarchy’ (ब्राह्मणवादी पितृसत्ता की धज्जियाँ उड़ा दो) लिखा था। इसकी वजह से इस पहचान से जुड़े लोगों ने ट्विटर पर डोर्सी की आलोचना की थी और उन्हें हिंसा का समर्थक और एक पहचान विशेष का विरोधी बताया था। इक्वैलिटी लैब्स ने अमित जानी के खिलाफ भी कड़ा अभियान चलाया, जिन्होंने जो बिडेन अभियान में काम किया था, उन पर ‘हिंदू फासीवाद’ का समर्थन करने का आरोप लगाया गया।

इस कार्यक्रम में दलित लेखिका यशिका दत्त भी पैनलिस्ट हैं। हिंदुओं के खिलाफ अक्सर जहर उगलने वाली यशिका ने सीएए के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन का भी समर्थन किया था और मुस्लिम अपराधियों को बचाने का प्रयास किया था।

यही नहीं हार्वर्ड सम्मेलन में हिंदुओं को गलत ठहराने, कट्टर इस्लामियों द्वारा उन पर किए जा रहे अत्याचारों को क्लीन चिट देने के अलावा मुस्लिम समुदाय को पीड़ितों के रूप में पेश किया जाएगा।

हार्वर्ड इवेंट शेड्यूल का स्क्रीनशॉट

हर्ष मंदर भी पैनल के सदस्य हैं। हर्ष मंदर सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज के एक विदेशी वित्त पोषित एनजीओ, सोनिया गाँधी की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य भी थे, जिसने हिंदू विरोधी सांप्रदायिक हिंसा विधेयक का मसौदा तैयार किया था। ध्यान दें कि मार्च 2020 में, ऑपइंडिया ने यह खबर प्रसारित की थी कि हर्ष मंदर ने कैसे मुस्लिमों को सड़कों पर आने के लिए उकसाया और हिंसा भड़काने का प्रयास किया था।

इससे यह प्रमाणित होता है कि वामपंथी जो भारत की संप्रभुता पर हमला करते रहे हैं, वे अब सम्मेलनों में हिंदू के खिलाफ अपने एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। वे इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि 2047 तक भारत को कैसा होना चाहिए। उनका उद्देश्य 2047 तक भारत को एक इस्लामिक राष्ट्र में बदलना है। यहाँ यह कहना गलत नहीं होगा कि कट्टर इस्लामी और वामपंथी भारत में अशांति पैदा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं, ऐसी परिस्थितियाँ पैदा कर रहे हैं, जो 1947 में भारत के विभाजन और हिन्दुओं के नरसंहार का कारण थी।