दिल्ली (Delhi) में जिगोलो (Gigolo) बनाने का झाँसा देकर हजारों युवाओं के साथ ठगी का मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने पूरे गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने ऑनलाइन नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को जिगोलो और एस्कॉर्ट्स सर्विस में नौकरी का झाँसा देकर लाखों की ठगी की है। बता दें जिगोलो का अर्थ पुरुष वेश्यावृत्ति (Male prostitution) है।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, नौकरी की तलाश कर रहे 4000 युवकों से लाखों रुपए की ठगी की गई है। इनमें से ज्यादातर पीड़ित समाज के डर और शर्म के मारे चुप रहे, जबकि कुछ ने हिम्मत करके पुलिस में शिकायत दी। एसएचओ साइबर थाना रमन कुमार सिंह की टीम ने राजस्थान के जयपुर से 2 मुख्य आरोपितों कुलदीप चारन और श्याम लाल को गिरफ्तार किया है।
कुलदीप पहले होटलों में रूम ब्वॉय का काम करता था, जबकि दूसरा आरोपित श्याम लाल होटल के रिसेप्शन पर काम करता था। दोनों हिंदी के साथ-साथ फर्राटेदार अंग्रेजी भी बोलते हैं। कुलदीप महिला की आवाज में बात कर सकता है। युवाओं को झाँसे में लेने के लिए कुलदीप महिला की आवाज में बात करता था। ठगी की रकम वसूलने के लिए इन लोगों ने दर्जनभर बैंक में खाते खुलवा रखे थे।
कैसे खुला मामला ?
पुलिस के मुताबिक, दिल्ली के नरेला के रहने वाले एक शख्स ने साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दी थी। शिकायत के अनुसार, ऑनलाइन नौकरी की तलाश करते हुए वह एक वेबसाइट पर पहुँच गया। वेबसाइट पर दिए गए नंबर पर उसने संपर्क किया।
जिस व्यक्ति ने कॉल उठाया, उसने उसे जिगोलो बनाने के लिए ट्रेनिंग देने की बात कही। इसके लिए शख्स से बतौर रजिस्ट्रेशन फीस 2499 रुपए लिए गए। इसके बाद उनसे एडवांस कमीशन, पासकोड और मसाज किट देने के नाम पर 39,190 ऐंठ लिए गए।
शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना पुलिस ने टीम बनाकर दिए गए फोन नंबर और वेबसाइट को खंगालना शुरू किया। साइबर पुलिस की टीम ने डोमेन नेम और सर्वर स्पेस, कॉल डिटेल और मनी ट्रेल की जाँच की। इसके बाद लोकल इंटेलिजेंस और रेकी के जरिए पहले कुलदीप और फिर दूसरे आरोपित श्याम लाल को गिरफ्तार किया गया।
इन दोनों आरोपितों के पास से पुलिस ने एक डेस्कटॉप, एक लैपटॉप, 4 मोबाइल फोन, एक हार्ड-डिस्क, 2 एसडी कार्ड, 18 सिम कार्ड, 11 बैंक खाते, 21 एटीएम कार्ड और चेकबुक बरामद किए गए हैं।
पश्चिम बंगाल में गर्भवती महिलाओं के आँकड़ों में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि राज्य में हर 6 गर्भवती महिलाओं में 1 टीनेज (13 से 19 साल की लड़की) है। ये आँकड़े राज्य स्वास्थ्य विभाग के ही हैं। विभाग ने इन आँकड़ों पर चिंता प्रकट की है।
पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग के तहत गर्भवती महिलाओं, जच्चे-बच्चे से संबंधित एक वेब-पोर्टल है। ‘मातृमा (MatriMa)’ नाम है उसका। इसके आँकड़ों के अनुसार सितंबर 2022 में बंगाल में किशोर (टीन एजर्स) जोड़ों की तादाद लगभग 4 लाख थी। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों ने उन्हें गर्भ निरोधक चीजों के इस्तेमाल की सलाह दी थी।
गर्भ निरोधकों के इस्तेमाल को लेकर ‘मातृमा (MatriMa)’ की पहल पश्चिम बंगाल में बहुत असरदायक नहीं रही। तुलनात्मक तौर पर देखें तो पिछले वर्ष की तुलना में गर्भ निरोधक चीजों का प्रयोग करने वाले जोड़ों की संख्या में महज 5% का इजाफा हुआ है। जनवरी 2022 में जहाँ गर्भ निरोधकों का प्रयोग करने वाले जोड़ों की सँख्या 50% थी, वहीं 1 साल बाद जनवरी 2023 में यह सँख्या 55% ही हो पाई।
‘मातृमा (MatriMa)’ के आँकड़ों के अनुसार सितंबर 2022 में पश्चिम बंगाल में कुल विवाहित महिलाओं में से टीनेजर लड़कियों की संख्या 4 लाख थी। इससे ज्यादा चौंकाने वाला आँकड़ा यह है कि बंगाल में कुल गर्भवती महिलाओं में 17% टीनेज लड़कियाँ हैं, जबकि शादीशुदा महिलाओं में टीनेज लड़कियों का प्रतिशत सिर्फ 4% ही है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण ने पश्चिम बंगाल में गर्भवती महिलाओं की स्थिति, कम-उम्र वाले विवाहित जोड़ों आदि पर 2019-2020 में आँकड़े जारी किए थे। उन आँकड़ों के अनुसार तब राज्य में गर्भवती कुल महिलाओं में 17% टीनएजर्स बताई गई थीं। उस समय जारी आँकड़े के अनुसार 15 से 19 वर्ष की उम्र के बीच गर्भवती हुई लड़कियों का प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में 8.5% था, जबकि ग्रामीण इलाकों में इसी का प्रतिशत 19.6 था।
स्वास्थ्य मंत्रालय जहाँ लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल से ऊपर मानता है तो वहीं बच्चे पैदा करने के लिए न्यूनतम उम्र 21 साल बताई गई है। मंत्रालय का मानना है कि इस उम्र से कम होने पर न सिर्फ बच्चे बल्कि माँ को भी तमाम संक्रमण और खतरों का डर होता है।
तमिलनाडु (Tamil Nadu) में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के पथ संचालन (Route March) को लेकर मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तामिलनाडु पुलिस को आदेश दिया है कि आरएसएस को राज्य भर में पथ संचलन की अनुमति दी जाए।
इसके पहले एकल न्यायाधीश ने आरएसएस को सार्वजनिक सड़कों से जुलूस निकालने की इजाजत नहीं दी थी। कोर्ट ने आरएसएस को किसी मैदान या स्टेडियम में पथ संचालन आयोजित करने के निर्देश दिए थे। आरएसएस की तरफ से इस फैसले को चुनौती दी गई थी।
मद्रास हाईकोर्ट ने आरएसएस की तरफ से एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ दी गई याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस मोहम्मद शफीक की पीठ ने नागरिकों के बोलने (भाषण देने) और अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का हवाला देते हुए आरएसएस के पक्ष में फैसला सुनाया।
हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से तीन अलग-अलग तारीखों पर रूट मार्च निकालने के लिए दोबारा आवेदन देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस को राज्य के विभिन्न जिलों में निकाले जाने वाले जुलूस के लिए अनुमति देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस संघ द्वारा किसी भी तारीख को जुलूस निकालने की इजाजत दे।
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस को दिया आदेश।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को राज्यभर के जिलों में निकालने दें पथसंचलन।
इसके पहले आरएसएस की तरफ से 50 स्थानों पर रैली और जुलूस की इजाजत माँगी गई थी। उच्च न्यायालय ने 4 नवंबर 2022 को तमिलनाडु में 44 स्थानों पर कुछ शर्तों के साथ संघ को कार्यक्रमों की इजाजत दी थी। आरएसएस की तरफ से इस फैसले को चुनौती दी गई।
जी. सुब्रमण्यम की ओर से दाखिल की गई याचिका में 2 अक्टूबर 2023 के फैसले का जिक्र किया गया था, जिसमें उन्हें मार्च निकालने की अनुमति दी गई थी। सुब्रमण्यम ने राज्य सरकार के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को अदालत की अवमानना के लिए दंडित करने की भी माँग की थी।
बता दें कि इसके पहले राज्य सरकार और पुलिस की तरफ से हिंदू संगठन इंदु मक्कल काची-तमिझगम (IMKT) को भी राज्यस्तरीय सम्मेलन की इजाजत नहीं मिल रही थी। पुलिस ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी थी। संगठन ने इसके बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) ने 29 जनवरी 2023 को आयोजित राज्यस्तरीय सम्मेलन की इजाजत दे दी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि धार्मिक सभाओं के आयोजन पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।
उत्तर प्रदेश की राजधानी में यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 (UP Global Investors Submit 2023) का आयोजन जारी है। इस आयोजन में कई दिग्गज उद्योगपतियों ने उत्तर प्रदेश में निवेश की घोषणा की। इस दौरान रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने प्रदेश में 75,000 करोड़ रुपए निवेश करने का ऐलान किया है।
समिट में मुकेश अंबानी ने कहा कि रिलायंस ने अगले चार वर्षों में यूपी में जियो, खुदरा और नवीकरणीय व्यवसायों में 75000 करोड़ रुपए का निवेश करने की योजना बनाई है। इससे राज्य में 1,00,000 से अधिक अतिरिक्त रोजगार पैदा होंगे। उन्होंने इस समिट को विकास का महाकुंभ बताते हुए कहा कि जियो दिसंबर 2023 तक पूरे राज्य में 5G सर्विस शुरू कर देगी।
मुकेश अंबानी ने कहा कि इस साल के बजट ने भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभरने की नींव रखी है। भारत बहुत मजबूत विकास पथ पर है। रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन ने कहा कि उनका ग्रुप उत्तर प्रदेश में 10 गीगावॉट नवीकरणीय क्षमता स्थापित करेगा। यह उत्तर प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी अक्षय ऊर्जा परियोजना होगी।
मुकेश अंबानी ने बायो-गैस एनर्जी बिजनेस में उतरने की घोषणा भी की। उनका कहना है कि बायो-गैस से पर्यावरण में सुधार के साथ ही किसानों को भी बड़ा लाभ होगा। किसान हमारे अन्नदाता तो हैं ही, अब ऊर्जादाता भी बनेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि 2018 से अब तक रिलायंस प्रभु श्रीराम की नगरी उत्तर प्रदेश में 50 हजार करोड़ रुपए निवेश कर चुकी है। 75000 करोड़ के नए निवेश को मिलाकर कुल निवेश 1.25 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा। यूपी 5 साल के भीतर ही 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बन जाएगा।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लखनऊ में यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 का उद्घाटन किया। इस खास मौके पर पीएम ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि एक समय पर यूपी बीमारू राज्य कहलाता था। हर कोई इस राज्य से अपनी उम्मीदें छोड़ चुका था, लेकिन बीते 5-6 वर्षों में यूपी ने अपनी नई पहचान स्थापित कर ली है। अब यूपी अपने सुशासन से गुड गवर्नेंस (Good Governance) के लिए पहचाना जा रहा है।
To make the #UPGIS23 a success, the ministers of the UP cabinet did road shows in 21 cities of 16 countries. Ambassadors have contributed in carrying forward the campaign as per your (Prime Minister Shri Narendra Modi ji) vision by giving full cooperation: #UPCM@myogiadityanathpic.twitter.com/MApHtVK2Wr
वहीं, पीएम के अलावा तीन दिन तक चलने वाले इस समिट के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमें 32.92 लाख करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव मिला है, जबकि हमने 23 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा था। उन्होंने कहा कि यूपी लक्ष्य से कई गुना अधिक निवेश हासिल करने में सफल हुए।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुरुवार (09 फरवरी 2023) को उच्च न्यायालय (High court) के लिए मुख्य न्यायाधीशों (Chief Justice) के नामों की सिफारिश भेजी है। कॉलेजियम सिस्टम बनने के बाद 25 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब पद रिक्त होने से पहले ही उस पर नियुक्ति के लिए न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की गई है।
कॉलेजियम ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लिए जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर, कलकत्ता उच्च न्यायालय के लिए जस्टिस टीएस शिवगणनम, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए जस्टिस रमेश सिन्हा, गुजरात हाईकोर्ट के लिए जस्टिस सोनिया जी गोकानी और मणिपुर उच्च न्यायालय के लिए जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर की सिफारिश की है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ समेत तीन मेंबरों वाले कॉलेजियम का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के वर्तमान चीफ जस्टिस राजेश बिंदल को उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत किया जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी भी मिल गई है। ऐसे में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश का पद खाली हो जाएगा। खाली हो रहे इस पद के लिए जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर की नियुक्ति की सिफारिश की गई है।
As per the provisions under the Constitution of India, Hon’ble President of India has appointed the following Chief Justices of High Courts as Judges of the Supreme Court. My best to them. 1.Rajesh Bindal, Chief Justice, Allahabad HC. 2.Aravind Kumar, Chief Justice, Gujarat HC
इसी तरह गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जा रहा है। रिक्त हो रहे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद के लिए जस्टिस सोनिया जी गोकानी के नाम की सिफारिश की जा रही है।
जस्टिस सोनिया जी गोकानी गुजरात उच्च न्यायालय की वरिष्ठतम न्यायाधीश हैं। उधर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरूप गोस्वामी 10 मार्च को रिटायर हो रहे हैं। इसलिए कॉलेजियम ने जस्टिस रमेश सिन्हा के नाम की इस पद के लिए अनुशंसा की है।
कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव का कार्यकाल 30 मार्च 2023 को समाप्त हो रहा है। इस पद के लिए कॉलेजियम द्वारा वरिष्ठतम जज जस्टिस टीएस शिवगणनम के नाम की सिफारिश की गई है।
मणिपुर उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस पीवी संजय कुमार की भी सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति हो रही है। ऐसे में कॉलेजियम ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के वरिष्ठतम जज जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर के नाम की सिफारिश मणिपुर उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस के रूप में की है। बता दें जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर के भाई हैं।
देश में पहली बार जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में सोने और लिथियम (Lithium) जैसे रेयर मेटल (Rare Metal) का भंडार मिला है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने गुरुवार (9 फरवरी 2023) को इसकी जानकारी दी। इससे चीन जैसे देशों पर भारत की निर्भरता खत्म हो जाएगी। इसके साथ ही भारत से निर्यात भी कर सकेगा।
खनन मंत्रालय के मुताबिक, “भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने पहली बार जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के सलाल-हैमाना क्षेत्र में 59 लाख टन लिथियम का पता लगाया है।” लिथियम का इस्तेमाल मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल कैमरा, सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए रिचार्बेल बैट्री में किया जाता है।
इसके अलावा, इसका उपयोग खिलौनों और घड़ियों को बनाने के लिए भी किया जाता है। वर्तमान में भारत लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे कई रेयर मेटल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है। अब जम्मू-कश्मीर में लिथियम के भंडार का पता लगने के बाद भारत की दूसरे देशों से आयात पर निर्भरता कम हो जाएगी।
माइंस सेक्रेटरी विवेक भारद्वाज ने कहा, “देश में पहली बार जम्मू-कश्मीर में लिथियम के भंडार की खोज की गई है। मोबाइल फोन से लेकर सोलर पैनल और महत्वपूर्ण खनिजों की हर जगह आवश्यकता होती है। आत्मनिर्भर बनने के लिए देश के लिए महत्वपूर्ण खनिजों का पता लगाना और उन्हें संसाधित करना बहुत जरूरी है। यदि सोने का आयात कम किया जाता है तो हम आत्मनिर्भर बन जाएँगे।”
खनन मंत्रालय के अनुसार, लिथियम और सोने सहित 51 खनिज ब्लॉक पर एक रिपोर्ट राज्य सरकारों को सौंपी गई हैं। इन 51 खनिज ब्लॉकों में से 5 ब्लॉक सोने से संबंधित हैं। ये ब्लॉक जम्मू-कश्मीर (केंद्र शासित), आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक जैसे 11 राज्यों में फैले हैं। ये पोटाश, मोलिब्डेनम, बेस मेटल आदि जैसी वस्तुओं से संबंधित हैं।
Shri. Vivek Bharadwaj, IAS, Secretary, @MinesMinIndia handed over 16 geological reports (G2 & G3 stage) & 35 Geological memorandums to state governments during the 62nd Central Geological Programming Board (CGPB) meeting held today. pic.twitter.com/oZiQUQtc3w
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने फील्ड सीजन 2018-19 से अब तक के कामों के आधार पर ये ब्लॉक तैयार किए थे। इनके अलावा, 7897 मिलियन टन के कुल संसाधन वाले कोयला और लिग्नाइट की 17 रिपोर्टें भी कोयला मंत्रालय को सौंपी गईं।
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने रणनीतिक और महत्वपूर्ण खनिजों पर 115 परियोजनाएँ और उर्वरक खनिजों पर 16 परियोजनाएँ स्थापित की हैं। 62वीं केंद्रीय भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (CGPB) की बैठक के दौरान लिथियम और गोल्ड सहित 51 खनिज ब्लॉकों पर एक रिपोर्ट राज्य सरकारों को सौंपी गई है।
बता दें कि चीन (China) और ऑस्ट्रेलिया (Australia) दुनिया में लिथियम के सबसे बड़े सप्लायर हैं। इसके चलते भारत समेत कई देशों को उन पर निर्भर रहना पड़ता है। ये देश इस कारण से मनमानी भी करते हैं। हालाँकि, अब भारत में भी लिथियम के भंडार का पता चलने के बाद इन देशों पर निर्भरता कम होगी।
भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की साजिश को लेकर महाराष्ट्र एटीएस ने बड़ा खुलासा किया है। दरअसल, एटीएस ने 2 फरवरी 2023 को PFI के 5 आतंकियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। इस चार्जशीट में कहा गया है कि गिरफ्तार आतंकी अग्निपथ योजना को मुस्लिमों के खिलाफ बताकर मुस्लिम युवकों को भड़का रहे थे।
महाराष्ट्र एटीएस ने सितंबर 2022 में छापेमारी करते हुए पीएफआई से जुड़े 20 आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इनमें से 5 आतंकी मुंबई से गिरफ्तार हुए थे। इन 5 आरोपितों की पहचान मजहर खान, सादिक शेख, मोहम्मद इकबाल खान, मोमिन मिस्त्री और आसिफ हुसैन खान के रूप में हुई थी। इन सभी पर गैरकानूनी गतिविधियों और देश के खिलाफ साजिश में शामिल होने का आरोप है।
महाराष्ट्र एटीएस द्वारा इन 5 आतंकियों के खिलाफ 600 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में कहा गया है कि आरोपित साल 2047 तक भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने के उद्देश्य से काम कर रहे थे। इस चार्जशीट में इन आतंकियों के पास से मिले ‘विजन 2047’ को भी बतौर दस्तावेज इस्तेमाल किया गया है।
बता दें कि ऑपइंडिया ने जुलाई 2022 में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के खतरनाक और राष्ट्रद्रोही ‘विजन 2047’ को लेकर विस्तृत जानकारी दी थी। इस रिपोर्ट को आप इस लिंक को क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
महाराष्ट्र ATS ने जो चार्जशीट दाखिल की है, उसमें पीएफआई के नापाक मंसूबों और इसे पूरा करने के लिए बनाई गई योजना के बारे में बताया गया है। इसके साथ ही इसमें बताया गया है कि PFI के गुर्गे इन योजनाओं को पूरा करने के लिए किस तरह से काम कर रहे थे। इस चार्जशीट में PFI को लेकर जो खुलासे हुए हैं वह बेहद चौंकाने वाले हैं।
चार्जशीट में PFI के 5 आतंकियों को लेकर निम्न खुलासे हुए हैं :
◆ सभी 5 आतंकी PFI के पदाधिकारी थे। पीएफआई ये लोग आतंकवादी संगठनों के साथ काम करते हुए भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के लिए साजिश रच रहे थे।
◆ महाराष्ट्र के चेंबूर, धारावी, कुर्ला, ठाणे, नेरुल, पनवेल और मुंब्रा में पीएफआई के सदस्यों द्वारा गुप्त बैठकें की गई थीं। इन बैठकों में देश के खिलाफ काम करने के उद्देश्य से योजनाएँ बनाईं गई थीं। साथ ही मुस्लिमों को कट्टरपंथी बनाने और साल 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के षड्यंत्र रचे गए थे।
◆ पीएफआई ने मुस्लिमों को अपने संगठन में शामिल करने की योजना बनाई थी। ये आतंकी मुस्लिमों को इस बात का विश्वास दिला रहे थे कि वह भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे में इनका प्लान मुस्लिमों को हिंदुओं के खिलाफ एकजुट करना था।
◆ पीएफआई देश के कानून में बदलाव कर शरिया कानून लागू करने के उद्देश्य से काम कर रहा था।
◆ PFI के गिरफ्तार आरोपितों की मंशा था कि देश के मुस्लिमों की पहचान सिर्फ मुस्लिमों के रूप में हो न कि उन्हें भारतीय के रूप में जाना जाए।
◆ पीएफआई मुस्लिमों के बीच इस बात का प्रचार कर रहा था कि देश में उन पर खतरा है। साथ ही उन पर अत्याचार हो रहा है। इन सबका उपयोग कर वह मुस्लिमों को हथियार चलाने के लिए प्रशिक्षित करना चाहते थे।
◆ पीएफआई पैसा जुटाते हुए भारतीय लोकतंत्र को खत्म करने के लिए विदेशी संगठनों से मदद लेनी की कोशिश कर रहा था।
◆ गिरफ्तार आरोपितों में से 2 लोग कानून के जानकार थे। कानून के हिसाब से वे पीएफआई की टीम को मार्गदर्शन दे रहे थे।
◆ 1 आरोपित पीएफआई में मुस्लिम युवकों की भर्ती के खिलाफ था।
◆ अग्निपथ को ‘मुस्लिम नरसंहार’ के लिए एक योजना होने के बारे में पीएफआई कैसे प्रचार कर रहा था।
एटीएस ने आरोपितों के फोन चैट रिकवर किए हैं। इस चैट में अग्निपथ योजना को ‘मुस्लिमों के नरसंहार’ की योजना बताया गया है। अग्निपथ का दुष्प्रचार कर हिंदुओं के खिलाफ मुस्लिमों को एकजुट करने की योजना थी। यह मैसेज दानिश मलिक नामक व्यक्ति द्वारा भेजा गया था। इस मैसेज का शीर्षक ‘अग्निपथ या संघियों की बंदर सेना’ था।
पीएफआई के गिरफ्तार आतंकवादियों के पास से बरामद चैट
इस चैट में कहा गया था कि अग्निपथ योजना के तहत 17 से 21 साल के हिंदुओं की भर्ती की जा रही है। भर्ती युवाओं को हथियार और सैन्य प्रशिक्षण दिया जाएगा। सेना में 5 साल काम करना के बाद हथियार चलाने के लिए प्रशिक्षित हिंदू युवा पूरी दुनिया में खुले घूम रहे होंगे।
इस चैट में अग्निपथ योजना की तुलना ‘शैतान इजराइल जैसी नीति’ से की गई है। इसके साथ ही कहा गया है कि इस योजना के बॉस देश के कोने-कोने में सेना प्रशिक्षण प्राप्त हिंदू होंगे। ये हिंदू दंगाइयों की एक ऐसी सेना होगी, जो सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त होने के कारण डरेंगे नहीं। इन्हें यदि धक्का दिया जाएगा तो वह भागेंगे नहीं।
इस मैसेज में दावा किया गया था कि अग्निपथ योजना आरएसएस मॉड्यूल को विस्तार कर तैयार किया गया है। आरएसएस ने भी हिंदुओं को हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया था। पीएफआई के मैसेज में यह भी दावा किया गया है कि इजरायल की नीति की तरह ही इस रोजगार योजना के तहत मुस्लिमों का नरसंहार करने के लिए हिंदुओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।
PFI ने इस मैसेज में अग्निपथ योजना शुरू करने के 4 बड़े कारण बताए हैं :
1.) ‘संघी’ (हिंदू) मुस्लिमों के खिलाफ भारतीय सेना तैनात नहीं कर सकते। 2.) यदि वे ऐसा करते हैं तो सीमा सुरक्षा कमजोर हो जाएगी। 3.) अगर ‘संघी’ (हिंदू) मुस्लिमों के खिलाफ सेना तैयार करते हैं तो उन्हें वैश्विक स्तर पर शर्मिंदा होना पड़ेगा। यह ठीक वैसे ही होगा जैसे रोहिंग्या मुस्लिमों के “नरसंहार” के कारण म्यांमार की सेना को शर्मिंदा होना पड़ा था। 4.) पीएफआई का यह भी मानना है कि हिंदू मुस्लिमों के खिलाफ सेना तैनात नहीं कर सकते। इसके पीछे तर्क देते हुए कहा गया है कि यदि सेना संगठित हो जाएगी तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटा देंगे। इसमें कुछ भी नया नहीं होगा। यह पहले भी कई देशों में हो चुका है।
पीएफआई के अनुसार, यही कारण है कि ‘संघी’ मुस्लिमों के खिलाफ सीधे भारतीय सेना को तैनात नहीं करेंगे। मुस्लिमों का नरसंहार हेतु हिंदुओं को ट्रेंड करने के लिए अग्निपथ की शुरुआत की गई है। मैसेज में आगे कहा गया है कि सभी मुस्लिम, सुन्नी, वहाबी, शिया आदि को एकजुट होकर अग्निपथ योजना में भर्ती होना चाहिए।
मैसेज में यह भी कहा गया है, “यदि आप सुन्नी हैं तो हमास की तरह, यदि आप वहाबी हैं तो जिहादी इस्लामी की तरह (शायद हरकत-उल-जिहाद अल-इस्लामी की बात की गई है, यह संगठन अल कायदा और तालिबान से जुड़ा हुआ है), यदि आप एक शिया तो हिज़्बुल्लाह की तरह, आपको सामने आना होगा। समय बहुत कम है। अग्निपथ योजना की तरह प्रशिक्षण और नौकरी पाने के लिए मुस्लिम युवाओं को भी इसी तरह से इस योजना में शामिल होने की जरूरत है।”
PFI के इस मैसेज में आगे कहा गया है, “वैसे तो मुस्लिमों को अग्निपथ में भर्ती होना चाहिए। हालाँकि इसकी संभावना बेहद कम है कि अग्निपथ योजना में मुस्लिमों को सम्मिलित किया जाएगा। वास्तव में, यह योजना इस्लाम का विरोध करने वालों द्वारा बनाई गई है।” मैसेज में यह भी कहा गया है कि यदि मुस्लिम इस योजना में भर्ती होते हैं तो वे एक ‘शेरों की सेना’ बना सकते हैं, जिससे देश को फायदा मिलेगा।
इसके अलावा, महाराष्ट्र एटीएस ने पीएफआई के इन आरोपितों के फोन से ‘365 डेज: थ्रू अ थाउजेंड कट्स’ (365 days: Through a Thousand Cuts) नामक किताब जब्त की थी। इस किताब में कहा गया है कि साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने आने के बाद से देश में मुस्लिमों के लिए स्थितियाँ बदल गई हैं।
इस किताब के एक पैराग्राफ में लिखा है, “मोदी के सत्ता में आने के अगले ही दिन से सभी बुरी ताकतें सामने आ गईं। नफरत फैलाने वाले लोगों ने जहर उगलना शुरू कर दिया। उन सभी को यह लग रहा है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र बन चुका है।” हिंदुओं के खिलाफ नफरत से भरी हुई इस किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात में हुए 2002 के दंगों का भी जिक्र है। दंगों के समय मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।
इसके अलावा एटीएस द्वारा जब्त की गई इस किताब में योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति और गिरिराज सिंह समेत कई अन्य हिंदू नेताओं का भी जिक्र किया गया है। इस किताब में पीएफआई और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के संबंधों का भी खुलासा हुआ। इस किताब में एसडीपीआई का नाम बतौर प्रकाशक लिखा हुआ है। हालाँकि, एसडीपीआई ने पीएफआई से अपने संबंधों को कभी स्वीकार नहीं किया है।
बता दें कि पीएफआई ने ‘इंडिया विज़न 2047’ नाम के दस्तावेज़ को अपने कैडर के बीच आंतरिक रूप से प्रसारित किया है। उसका लक्ष्य ‘कायर हिंदुओं’ पर पूरी तरह से हावी होना और उन्हें अपने अधीन करना है। यह लक्ष्य तब ही प्राप्त किया जा सकता है, जब पीएफआई के पीछे 10 प्रतिशत मुस्लिम एकजुट हों।
इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि PFI अपने प्रशिक्षित कैडरों और तुर्की जैसे इस्लामी देशों की मदद से भारत के खिलाफ एक पूर्ण सशस्त्र विद्रोह शुरू करने की योजना बना रहा है। इस कट्टरपंथी इस्लामी संगठन ने अन्य इस्लामी देशों से भी भारत सरकार और बहुसंख्यक हिंदुओं को ‘घुटनों पर’ लाने में मदद करने की अपील की है।
‘इंडिया विजन 2047’ दस्तावेज़ में एक टैगलाइन है जो पीएफआई के लक्ष्य को रेखांकित करती है – “भारत में इस्लामी शासन की ओर”। इस खतरनाक दस्तावेज़ में ‘भारत में मुस्लिमों की वर्तमान स्थिति’, ‘हर घर में पीएफआई’ तक की रणनीति, भारत 2047 योजना और भारत में मुस्लिम समुदाय के लिए कार्रवाई योग्य बिंदुओं की बारे में वर्णन डराने वाली है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने शुक्रवार (10 फरवरी 2023) को राजधानी लखनऊ में आयोजित यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 (UP Global Investors Summit 2023) का उद्घाटन किया। इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) भी मौजद रहे।
इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “उत्तर प्रदेश के प्रति मेरा एक विशेष स्नेह है और यूपी के लोगों के प्रति मेरी एक विशेष जिम्मेदारी भी है। मैं आप सभी निवेशकों का यूपी में स्वागत करता हूँ, यहाँ आने के लिए धन्यवाद करता हूँ।”
पीएम ने अपने संबोधन में कहा कि एक समय पर यूपी बीमारू राज्य कहलाता था। हर कोई इस राज्य से अपनी उम्मीदें छोड़ चुका था, लेकिन बीते 5-6 वर्षों में यूपी ने अपनी नई पहचान स्थापित कर ली है। अब यूपी अपने सुशासन से गुड गवर्नेंस (Good Governance) के लिए पहचाना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बहुत जल्द यूपी देश के उस इकलौते राज्य के रूप में जाना जाएगा, जहाँ 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ यूपी में सरकारी सोच और अप्रोच में ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस को लेकर सार्थक बदलाव आया है। आज यूपी एक आशा… एक उम्मीद बन चुका है।
बहुत जल्द यूपी देश के उस इकलौते राज्य के रूप में जाना जाएगा, जहां 5 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ यूपी में सरकारी सोच और अप्रोच में ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस को लेकर सार्थक बदलाव आया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि आज दुनिया की हर विश्वसनीय आवाज यह मानती है कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ती रहेगी। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है भारतीयों का खुद पर बढ़ता भरोसा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत का हर नागरिक ज्यादा से ज्यादा विकास होते देखना चाहता है, वो अब भारत को जल्द से जल्द विकसित होते देखना चाहता है। ये जन आशाएँ ही विकास के कार्यों में गति ला रही हैं।
’35 हजार करोड़ रुपए एनर्जी ट्रांजिशन के लिए’
उन्होंने अपनी बात को जारी रखते हुए उन्होंने कहा, “आज भारत में सोशल, डिजिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जो काम हुआ है, उसका बड़ा लाभ यूपी को भी मिला है। हमने दर्जनों पुराने कानूनों को खत्म किया है और आज भारत सही मायनों में स्पीड और स्केल के रास्ते पर चल पड़ा है। वर्तमान में इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार रिकॉर्ड खर्च कर रही है और हर साल इसे बढ़ा रही है।”
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को लेकर पीएम ने कहा, “ग्रीन ग्रोथ के जिस रास्ते पर भारत चल पड़ा है, उस पर मैं आपको विशेष रूप से आमंत्रित करता हूँ। इस वर्ष बजट में हमने 35 हजार करोड़ रुपए सिर्फ एनर्जी ट्रांजिशन के लिए रखे हैं। यह दिखाता है कि हमारा इरादा क्या है।”
इस वर्ष बजट में हमने 35 हजार करोड़ रुपये सिर्फ एनर्जी ट्रांजिशन के लिए रखे हैं।
पीएम ने आगे कहा कि इस बजट में किसानों के लिए 10 हजार बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर स्थापित करने की घोषणा की गई है। इस कदम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा और इसमें प्राइवेट कारोबारियों के लिए निवेश की संभावनाएँ हैं। स्किल डेवलपमेंट मिशन के तहत यूपी के 16 लाख से अधिक युवाओं को विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि पीजीआई लखनऊ और आईआईटी कानपुर में एआई से संबंधित कोर्स शुरू किए गए हैं। आज भारत के कुल मोबाइल उत्पादन में से 60 फीसदी से अधिक यूपी में होता है। देश के दो डिफेंस कॉरिडोर में से एक यूपी में है। यहाँ फिशरी, डेयरी और फूड प्रोसेसिंग को लेकर भी अनंत संभावनाएँ हैं।
आइटम गर्ल नाम से प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री राखी सावंत (Rakhi Sawant) ने अपने शौहर आदिल खान दुर्रानी की नई करतूतों का खुलासा किया है। राखी के मुताबिक, आदिल ने उनकी अश्लील वीडियो बनाकर पैसे के लिए बेच दिया है। आदिल को जमानत न देने की गुहार लगाते हुए राखी सावंत ने कोर्ट में अपनी प्रताड़ना के तमाम सबूत जमा करने की जानकारी दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राखी सावंत ने एक इंटरव्यू में आरोप लगाया है कि आदिल ने उन्हें विश्वास में लेकर उनकी नंगी तस्वीरें और वीडियो बना लिए और पैसों के लिए उसे बेच दिया। राखी का कहना है कि उन्होंने पुलिस की साइबर क्राइम टीम को इस संबंध में शिकायत दी है।
खुद को आदिल द्वारा ठगे जाने का आरोप लगाते हुए राखी ने कहा कि उन्हें किसी भी हाल में जमानत नहीं मिलनी चाहिए। राखी के मुताबिक, उन्होंने कोर्ट में अपनी मेडिकल रिपोर्ट सहित सभी सबूत भी जमा करा दिए हैं।
वहीं ,एक अन्य वीडियो में राखी सावंत ने बताया है कि वो आदिल खान के साथ बच्चे की तैयारी कर रही थीं, लेकिन आदिल उनकी हत्या की साजिश रच रहा था। राखी ने आरोप लगाया कि आदिल खान उनकी प्रॉपर्टी हड़पना चाहता है। उन्होंने कहा कि उनके प्रोडक्शन हाउस में 1.5 करोड़ रुपए का घपला भी किया है।
राखी के मुताबिक, उनकी माँ की मौत के दौरान आदिल तनु नाम की लड़की के साथ होटल में समय बिता रहा था। राखी का दावा है कि मरते हुए उनकी माँ ने आदिल के बारे में पूछा, लेकिन इससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ा।
राखी सावंत ने आदिल पर कुरान की झूठी कसम खाने और खुदा को धोखा देने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अब आदिल दुर्रानी फिर से रिश्ते नॉर्मल करना चाहता है, लेकिन वो मौक़ा देने के लिए तैयार नहीं हैं।
इसी वीडियो में राखी का दावा है कि आदिल ने उनकी लगातार और बेरहमी से पिटाई की। फिलहाल अब राखी सावंत आदिल पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करवाने के मूड में हैं। इंटरव्यू के दौरान वो बीच-बीच में रो भी रही थीं।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शुक्रवार (10 फरवरी 2023) को विधानसभा में बजट पेश कर रहे थे। विपक्ष ने बीच में ही हँगामा करना शुरू कर दिया। क्यों? क्योंकि सीएम अशोक गहलोत सदन में लगातार 7 मिनट तक पुराना बजट पढ़ते रहे, उनको पता भी नहीं चला। इसको लेकर पहले तो विपक्ष ने ठहाके लगाए। इसके बाद हँगामा शुरू कर दिया। हँगामे के चलते सदन को आधे घंटे के लिए स्थगित करना पड़ा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बजट भाषण में पुराने बजट के कुछ पन्ने शामिल थे। अशोक गहलोत बिना इस बात पर ध्यान दिए लगातार पुराना बजट पढ़ते जा रहे थे। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने सदन में ही ठहाके लगाने शुरू कर दिए। हालाँकि, गहलोत फिर भी नहीं रुके। इससे विपक्ष ने हँगामा शुरू कर दिया।
राजस्थान कांग्रेस की लीक सरकार में कुछ भी संभव है। सदन में मुख्यमंत्री जी ने पिछले साल का बजट पढ़ा pic.twitter.com/QEPeoIKb7R
इसके बाद राजस्थान सरकार में मंत्री महेश जोशी ने अशोक गहलोत को बताया कि वह पुराना बजट पढ़ रहे हैं। तब कहीं जाकर उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। विपक्ष के हँगामे के बीच अशोक गहलोत ने अपनी गलती के लिए माफी भी माँगी। लेकिन विपक्ष का हँगामा नहीं रुका। इसके बाद सदन को स्थगित करना पड़ा। राजस्थान के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब बजट भाषण के बीच में विधानसभा स्थगित की गई हो।
हालाँकि, अब यह सवाल उठना लाजिमी है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ब्रीफकेस में पुराना बजट कैसा आया? सरकार की ओर से यह कहा जा सकता है कि किसी अधिकारी ने ऐसी गलती की है। लेकिन किसी की गलती होने के बाद भी क्या अशोक गहलोत ने बजट पेश करने से पहले इसे पढ़ना जरूरी नहीं समझा?