Home Blog Page 2034

जितना कीचड़ उछालोगे, कमल उतना खिलेगा: राज्यसभा में PM मोदी ने पहले विपक्ष पर कसा शायराना तंज, फिर शुरू की स्पीच

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (9 फरवरी 2023) विपक्ष के हंगामे के बीच राज्यसभा में अपनी स्पीच की शुरुआत की। उन्होंने विपक्ष के सवालों का जवाब देने से पहले भाषण की शुरुआत उनपर तंज कसने से की।

उन्होंने विपक्ष को लेकर कहा, “यह सही बात है कि आप जितना कीचड़ उछालोगे, कमल उतना ही खिलेगा। आप लोगों का कमल खिलाने में अहम योगदान रहा है। इसके लिए मैं आपका भी आभार व्यक्त करता हूँ।”

इस दौरान पीएम मोदी ने विपक्ष के लगातार सवालों का जवाब देते हुए एक शायरी पढ़ी और कहा,

कीचड़ उसके पास था, मेरे पास गुलाल।
जो भी जिसके पास था, उसने दिया उछाल।

पीएम मोदी के भाषण के दौरान चूँकि विपक्ष चिल्ला रहा था इसलिए पीएम मोदी ने इस बात पर भी विपक्ष की चुटकी ली। उन्होंने कहा,

“जनधन, आधार और मोबाइल… ये वो त्रिशक्ति है, जिससे पिछले कुछ वर्षों में 27 लाख करोड़ रुपये DBT के माध्यम से सीधा हितधारकों के खातों में गए हैं। इससे 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक रुपया… जो किसी इको-सिस्टम के हाथों में जा सकता था वो बच गया।”

आगे वह कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पर तंज कसते हुए बोले कि जिन्हें ये रुपया नहीं मिल पाया उनका चिल्लाना स्वभाविक है।

गाजियाबाद की सड़क जाम करके हुड़दंगी काट रहे थे बर्थडे केक: UP पुलिस की ‘चीता टीम’ ने कासिम, फरहान समेत 10 को गिरफ्तार किया

गाजियाबाद के एलिवेटेड रोड पर हुड़दंग मचाने वाले 10 उत्पातियों को गिरफ्तार किया गया है। ये लोग इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अंतर्गत  रेलवे लाइन के ऊपर एलिवेटेड रोड पर केक काट रहे थे और डांस कर रहे थे। यहाँ दिल्ली और गाजियाबाद से दो अलग-अलग लड़के अपने दोस्तों के साथ बर्थडे सेलिब्रेशन मनाने पहुँचे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। आरोपितों में समीउददीन, समीर, कासिम समेत 10 मुस्लिम लड़के शामिल हैं। पुलिस ने इसके साथ ही तीन वाहनों को अपने कब्जे में लिया है।

पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद ने मंगलवार (7 फरवरी 2023) को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी और साथ में प्रेस नोट भी साझा किया है। पुलिस ने अपने ट्वीट में कहा, ”थाना इंदिरापुरम पुलिस ने एलिवेटेड रोड पर गाड़ी खड़ी कर मार्ग अवरुद्ध कर लोगों की जान को खतरे में डालकर केक काटने वाले 10 युवकों को गिरफ्तार किया है। साथ ही तीन वाहनों को भी सीज किया है।”

पुलिस ने आगे कहा कि गिरफ्तार अभियुक्तों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। वहीं इस बारे में पूछे जाने पर एक महिला अधिकारी ने कहा कि हमारी ‘चीता टीम’ ने इनलोगों को केक काटते हुए पकड़ा। यह पूछे जाने पर कि लोग लगातार एलिवेटेड रोड पर इस तरह की गतिविधि करते पकड़े जा रहे हैं। बावजूद क्या कारण है कि लोग फिर भी वहाँ इकट्ठे होकर हुडदंग मचाते हैं। इसपर अधिकारी ने कहा कि इस बारे में जब आरोपितों से पूछा गया है तो उनका कहना है कि एलिवेटेड रोड पर व्यू बहुत अच्छा आता है, इसलिए वह यहाँ रील या वीडियो बनाते हैं।

पकड़े गए मुस्लिम हुडदंगियों में समीउददीन, समीर, कासिम, शाहिल अमन गाजियाबाद के रहने वाले हैं जबकि मून अहमद, फरहान अली, खज्र खान, हमजा औरअपफान दिल्ली के रहने वाले हैं। उल्लेखनीय है कि एलिवेटेड रोड पर लगातार इस तरह की घटनाएँ हो रही हैं और हुडदंगी पकड़े भी जा रहे हैं। बावजूद इसके ऐसा करने वाले युवाओं में पुलिस का खौफ नहीं हैं।

लखनऊ हो लक्ष्मणपुरी और गाजीपुर बने विश्वामित्र नगर: BJP सांसद और ओपी राजभर की CM योगी से माँग, सम्राट भरत से भी गाधिपुर का कनेक्शन

पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित कई शहरों के नाम बदलने की चर्चा है। इसके लिए लगातार माँग उठ रही है। प्रतापगढ़ के बीजेपी सांसद संगम लाल गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर लखनऊ का नाम बदलने की माँग की है। वहीं, सुभासपा (SBSP) के अध्यक्ष ओपी राजभर ने गाजीपुर का नाम बदलकर विश्वामित्र नगर करने की माँग की है।

सांसद संगम लाल गुप्ता ने पत्र में कहा कि अगर मुगल गार्डन का नाम बदलकर अमृत उद्यान किया जा सकता है तो लखनऊ का नाम बदलकर लखनपुरी या लक्ष्मणपुररी क्यों नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि मुगल काल के नाम अब नहीं रहना चाहिए। उन्होंने इस नाम को अविलंब बदलने की माँग की।

सांसद ने लिखा, “स्थानीय मानता के अनुसार, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने बतौर अयोध्या नरेश श्री लक्ष्मण को भेंट किया था। उसी कारण से उसका नाम लखनपुर और लक्ष्मणपुर रखा गया था। 18वीं सदी में नवाब आसुफदौला ने उसका नाम बदलकर लखनऊ रख दिया था।” 

लखनऊ का इतिहास

त्रेतायुग में भगवान राम ने अयोध्या से 30 किलोमीटर दूर कौशल राज्य का एक हिस्सा अपने भाई लक्ष्मण को दे दिया था। इसका नाम लक्ष्मणपुरी रखा गया था। बाद में यह अपभ्रंश होकर लखनपुरी और फिर लखनपुर हो गया था। सन 1290 ईस्वी तक लखनऊ नाम का कहीं जिक्र नहीं है।

मुगलकाल में पहली बार लखनपुर का जिक्र अकबर के शासनकाल में आया। अकबर ने लखनपुर की जागीर बिजनौर के गर्वनर शेख अब्दुला को सौंपी थी। साल 1775 के बाद नवाब आसफुद्दौला ने लखनपुर की गद्दी संभाला। इसके बाद उसने लखनपुर का नाम बदलकर लखनऊ कर दिया। यह आज तक लखनऊ के नाम से ही जाना जाता है।

गाजीपुर का नाम बदलने की माँग

उधर, गाजीपुर का नाम बदलने के लिए ओपी राजभर ने सीएम योगी को पत्र लिखा है। राजभर ने अपने पत्र में कहा है कि उनकी पार्टी के नेताओं ने इस पर ध्यान दिया कि गाजीपुर के पौराणिक महत्व में ऋषि विश्वामित्र की विशेष भूमिका रही है। इसलिए गाजीपुर का नाम बदलकर विश्वामित्र नगर किया जाए।

राजभर ने गाजीपुर के साथ-साथ बहराइच जिले का नाम भी बदलने की माँग की। इस संबंध में उन्होंने सीएम योगी के साथ-साथ पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को भी पत्र लिखा है।

गाजीपुर का इतिहास

शास्त्रों के अनुसार, गाजीपुर का प्राचीन नाम गाधिपुर था, जिसे राजर्षि विश्‍वामित्र के पिता महाराजा गाधि ने बसाया था। इस्लामी शासन के दौरान मुस्लिम शासक मसूद गाजी ने इसका नाम गाधिपुर से बदलकर गाजीपुर कर दिया।

गाजीपुर जिले के करंडा क्षेत्र में कर्ण ऋषि के आश्रम में महाराजा भरत का बचपन बीता था। वे इन आश्रम में शेरों के साथ खेला करते थे। चक्रवर्ती सम्राट भरत की माता का नाम शकुन्तला था और पिता का नाम राजा दुष्यन्त था। भरत का ननिहाल गाधिपुर में था। शंकुलता विश्वामित्र और मेनका की पुत्री थीं।

भारत-नेपाल सीमा पर 1500+ अवैध मदरसे…कौन करता है फंड?: योगी सरकार ने कसा शिकंजा, कमाई से लेकर छात्रों के रिकॉर्ड की होगी जाँच

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) की सरकार ने भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में 1,500 से अधिक गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को मिलने वाले धन के स्रोत को ट्रैक करने की कवायद शुरू की है। इसके तहत ऐसे मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या की भी जानकारी जुटाई जाएगी।

उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के रजिस्ट्रार जगमोहन सिंह ने 31 जनवरी 2023 को इस संबंध में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को पत्र लिखा था। जगमोहन सिंह ने छात्रों की संख्या के साथ-साथ सीमाओं पर संचालित हो रहे मदरसों के आय-व्यय के रिकॉर्ड की जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।

छात्रों की संख्या के आधार पर मदरसों को वर्गीकृत किया जाना

पहली श्रेणी में 100 से 200 छात्रों वाले मदरसे शामिल हैं। दूसरी श्रेणी में 200 से 500 छात्रों वाले मदरसे शामिल हैं। अंतिम श्रेणी में 500 से अधिक छात्रों वाले मदरसे शामिल हैं। गोरखपुर में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष पाण्डेय ने बताया कि इस संबंध में एक पत्र प्राप्त हुआ था और इस कवायद का लक्ष्य मदरसा बोर्ड की वेबसाइट के रिकॉर्ड को अपडेट करना है।

ये गैर मान्यता प्राप्त मदरसे बलरामपुर, श्रावस्ती, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बहराइच और लखीमपुर खीरी जिलों में स्थित हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में राज्य सरकार ने प्रदेश में चल रहे गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की जानकारी जुटाने के लिए सर्वे किया था।

46 दिनों तक चले इस सर्वे में कई पहलुओं के बीच इन मदरसों को मिलने वाले फंड की भी जानकारी जुटाई गई थी। इनमें से अधिकांश मदरसों ने कोलकाता, चेन्नई, मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद से जकात प्राप्त करने का दावा किया था, लेकिन इन मदरसों में पैसे पहुँचने का कोई रिकॉर्ड नहीं था।

पिछले साल अक्टूबर में राज्य सरकार के एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई थी कि राज्य में 7,500 से अधिक गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने 1 सितंबर 2022 को घोषणा की थी कि वह राज्य के गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वेक्षण करेगी ताकि शिक्षकों और छात्रों के विवरण, पाठ्यक्रम और किसी गैर-सरकारी संगठन के साथ इसकी संबद्धता जैसी जानकारी का पता लगाया जा सके।

पिछले साल ऑपइंडिया ने संवेदनशील भारत-नेपाल सीमा पर मज़ारों और अन्य अवैध धार्मिक संरचनाओं के तेजी से बढ़ने के बारे में विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट की एक सीरीज प्रकाशित की थी। इन रिपोर्ट्स का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश की सरकार ने कई कदम उठाए थे।

ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम… सब ठप्प: यूजर्स ने बताया- न पोस्ट दिख रहे, न कोई फॉलो हो रहा

दुनियाभर में यूजर्स को बुधवार (8 फरवरी 2023) और गुरुवार (9 फरवरी 2023) तड़के सोशल मीडिया साइट्स (Social Media Sites) के सर्वर डाउन (Server Down) होने के चलते परेशानी का सामना करना पड़ा है। ट्विटर के साथ-साथ फेसबुक (Facebook), इंस्टाग्राम (Instagram) के यूजर्स को पोस्ट करने में समस्या हुई। कई यूजर्स ने सोशल मीडिया साइट्स पर इस बाबत शिकायत भी की है। कई जगहों पर लोगों को यूट्यूब (Youtube) चलाने में भी समस्या हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सबसे ज्यादा परेशानी ट्विटर के यूजर्स को हुई है।

ट्विटर ने इसे लेकर ट्वीट भी किया था। ट्वीट के अनुसार, ”हो सकता है कि ट्विटर आप में से कुछ के लिए उम्मीद के मुताबिक काम न कर रहा हो। परेशानी के लिए खेद है। हम इस परेशानी के बारे में पता हैं और इसे ठीक करने के लिए काम कर रहे हैं।”

कई यूजर ट्विटर पर अपनी इस परेशानी का इज़हार किया। एक यूजर ने कहा, ”मैं अब पोस्ट कर सकती हूँ लेकिन लोगों का फ़ॉलो नहीं कर सकती। मैं शायद ही कभी लोगों का फ़ॉलो करती हूँ। इसलिए मुझे केवल इतना पता है कि अभी भी समस्याएँ हैं क्योंकि मैंने वास्तव में किसी को फ़ॉलो करने की कोशिश की और मुझे यह मिला।”

आउटेज ट्रैकर डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, ट्विटर पर गुरुवार को सुबह तीन बजे के आसपास लोगों को समस्या का सामना करना पडा। सुबह साढ़े चार बजे के आसपास सबसे ज्यादा 810 लोगों ने ट्विटर पर हो रही परेशानी के बारे में बताया। यूजर्स की तरफ से एप पर 43 फीसदी वेबसाइट पर 25 फीसदी और सर्वर कनेक्शन से जुड़ी 12 प्रतिशत रिपोर्ट मिली।

रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा समस्या अमेरिका के यूजर्स को हुई है। वहीं आउटेज से प्रभावित इंस्टाग्राम के यूजर्स ने बताया कि जब वह स्टोरी या फोटो पोस्ट कर रहे थे, ऐसा लग रहा था कि यह अपलोड तो हो रहा है, लेकिन वह वास्तव में दिखाई नहीं देता था। कुछ यही हाल फेसबुक के साथ भी रहा।

दूसरी ओर कंपनी ने बुधवार को कहा कि कुछ समय के लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम के यूजर्स को परेशानी हुई थी। मेटा के एक प्रवक्ता ने बताया कि एक तकनीकी समस्या के कारण कुछ लोगों को प्रोडक्ट तक पहुँचने में परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि मामला सुलझा लिया गया है।

भारत में लॉन्च हो गया ट्विटर BLUE: जानें कितना होगा सब्सक्रिप्शन चार्ज, कैसे होगी पेमेंट

ट्विटर ने भारत में ब्लू टिक सब्सक्रिप्शन सर्विस लॉन्च कर दी है। ब्लू सब्सक्रिप्शन सर्विस भारत के अलावा ब्राजील और इंडोनेशिया में भी लागू हो चुकी है। इस सर्विस के तहत ट्विटर वेब के लिए 2 प्लान दिए जाएँगे। पहले प्लान में यूजर से 6, 800 रुपए लिए जाएँगे जिसके मुताबिक हर माह 566 रुपए प्रति माह देना होगा। इसके अलावा दूसरा प्लान 7800 रुपए सालाना का है। इसमें यूजर से 650 रुपए प्रति माह लिया जाएगा।

ट्विटर वेब का सब्सक्रिप्शन चार्ज

पेमेंट की बात करें तो फिलहाल ये केवल कार्ड पेमेंट ही स्वीकार रहा है। इसमें वीजा, मास्टरकार्ड, अमेरिकन एक्सप्रेस, डिस्कवर कार्ड का प्रयोग सब्सक्रिप्शन लेने के लिए किया जा सकता है। RUPAY और UPI की सुविधा फिलहाल ट्विटर की ओर से नहीं दी गई है।

एंड्रॉयड और एप्पल यूजर्स को सब्सक्रिप्शन के लिए तोड़ा ज्यादा पैसा देना होगा। इन दोनों तरह के यूजर्स को ट्विटर 900 रुपए प्रति माह में सब्सक्रिप्शन देगा।

एंड्रॉयड और एप्पल यूजर्स के लिए सब्सक्रिप्शन

बता दें कि ट्विटर ने ये भी ऐलान किया है कि ब्लू सब्सक्रिप्शन का अपडेटेड वर्जन में कई सुविधाएँ साथ आने वाली हैं। जैसे यूजर्स को ट्वीट एडिट करने को दिया जाएगा, बुकमार्क ऑर्गनाइज हो सकेगा, एप्लीकेशन आइकन कस्टमाइज हो सकेंगे, HD वीडियो आदि चीजें भी मिलेंगी। इसके अलावा रिप्लाई में टॉप प्राइरटी, मेंशन, सर्च, कम एड, लंबी वीडियो और नए फीचर एक्सेस करने की क्षमता आदि देना प्राथमिकता है।

मालूम हो कि इससे पहले बताया गया था कि ट्विटर ब्लू बटन वेब वर्जन में दिखना शुरू हो चुका है। बिजनेस के लिए ट्विटर ब्लू एक अन्य सर्विस है । ऐसे सब्सक्राइबर्स के लिए गोल्ड चेकमार्क है जो एक सामान्य अकाउंट और ऑफिशियल बिजनेस अकाउंट में फर्क बताएगा।

250 जवान, 129 टन मेडिकल उपकरण, 30 बेड वाला अस्पताल: ‘ऑपरेशन दोस्त’ के तहत भारत ने राहत सामग्री भरकर तुर्की भेजे 6 विमान, भूकंप से 15000 मौतें

तुर्की-सीरिया में आए विनाशकारी भूकंप से जान-माल की भारी क्षति हुई है। मृतकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में भारत ने भी भूकंप प्रभावित देश की मदद के लिए अपना हाथ बढ़ाया है। भारत लगातार राहत सामग्री भेजकर तुर्की-सीरिया की मदद कर रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की के राष्ट्रपति ने बताया कि भूकंप से अब तक 15,000 लोग अपनी जान गँवा चुके हैं।

आपदा की इस घड़ी में भारत भूकंप आने के बाद से लगातार राहत सामग्री भेज रहा है। भारत ‘ऑपरेशन मदद’ की तहत इस कार्य को अंजाम दे रहा है। इस बीच राहत सामग्री के साथ एक और विमान तुर्की पहुँच चुका है। भारत सरकार अब तक इस तरह के छह विमानों तुर्की भेज चुकी है। दूसरी ओर तुर्की व सीरिया की सरकार जल्द से जल्द बचाव कार्य को तेजी से समाप्त करना चाहती है ताकि जिंदा बचे लोगों को सकुशल बाहर निकाला जा सके। इसी क्रम में विश्व के देश दोनों देशों की मदद कर रहे हैं।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार (9 फरवरी 2023) को छठे विमान के तुर्की पहुँचने की जानकारी दी। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ”ऑपरेशन दोस्त के तहत छठी फ्लाइट तुर्की पहुँच गई है। राहत प्रयासों में तेजी लाने के लिए ज्यादा खोज और बचाव दल, डॉग स्क्वॉड, आवश्यक खोज और पहुँच उपकरण, दवाएँ और चिकित्सा उपकरण अपनी सेवा देने के लिए तैयार हैं।”

भारत ने मंगलवार (7 फरवरी 2023) को तुर्की में राहत सामग्री भेजी थी। राहत सामग्री में 30 बिस्तरों वाला एक मोबाइल अस्पताल भी शामिल था। इसके साथ ही भारत ने चार सी-17 ग्लोबमास्टर सैन्य परिवहन विमानों के जरिए विशेष खोज और बचाव दल भेजा था। भारत सरकार ने सीरिया के लिए भी राहत सामग्री भेजी थी। भारतीय वायु सेना के सी-130 जे विमान के जरिए सीरिया में मदद पहुँचाई गई है।

उल्लेखनीय है कि ऑपरेशन दोस्त के तहत अब तक NDRF और इंडियन आर्मी के 250 जवानों को तुर्की भेजा जा चुका है। वहीं अब तक सात विमानों के जरिए 129 टन मेडिकल उपकरण और अन्य राहत सामग्री भेजी गई है। इसके अलावा भारत से तुर्की के लिए 7वें विमान के रवाना होने की भी खबर है।

‘मैं नहीं माँगने वाली माफी…’: संसद में ‘हरामी’ बोलने का महुआ मोइत्रा को कोई पछतावा नहीं, कहा- मुझसे Sorry सुनना है तो पहले खुद बोलें

भाजपा नेता को भरे लोकसभा सदन में ‘हर@मी’ बोलने के बाद सांसद महुआ मोइत्रा ने माफी माँगने से इनकार कर दिया है। उन्होंने संसदीय मामलों के मंत्री प्रहलाद जोशी को लेकर कि अगर वह माफी सुनना चाहते हैं तो उन्हें बहुत इंतजार करना पड़ेगा।

इंडिया टुडे से बात करते हुए वह बोलीं, “अगर उन्हें माफी सुननी है तो लंबा इंतजार करना होगा। उन्हें अपने ‘बिलकुल सम्माननीय नहीं’ सांसद से पूछना चाहिए जो मेरे बात करते में बंदर की तरह कूद पड़े थे ताकि मेरी स्पीच बिगाड़ सकें।”

महुआ ने कहा, “मुझे लगता है कि मुझसे माफी माँगने के लिए पहले उनके सांसद को मुझसे माफी माँगनी चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि मंगलवार को सदन के भीतर महुआ मोइत्रा ने अपनी बात खत्म करने के बाद भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी को उठकर ‘हरामी’ कहा था। इसी के बाद पूरी सभा में बवाल मचा। प्रह्लाद जोशी ने मामले को सदन में उठाते हुए महुआ से माफी की माँग की। हालाँकि उन्होंने माफी माँगने से न केवल मना किया बल्कि इस वाकये में पितृसत्ता को घुसा दिया था।

उन्होंने अपनी भाषा को लेकर हुए विवाद पर बुधवार (8 फरवरी, 2023) को कहा, “बीजेपी कह रही है कि मैं महिला होने के नाते इस तरह के शब्द का इस्तेमाल कैसे कर सकती हूँ? क्या इसके लिए मुझे एक पुरुष होने की आवश्यकता है। यह तो पितृसत्ता है। मुझे आश्चर्य है कि भाजपा हमें संसदीय शिष्टाचार सिखा रही है। दिल्ली के उस प्रतिनिधि ने मेरे साथ बदसलूकी की। मैं एक सेब को एक सेब कहूँगी, नारंगी नहीं… अगर वे मुझे विशेषाधिकार समिति में ले जाएँगे, तो मैं वहाँ अपना पक्ष रखूँगी।”

टीएमसी सांसद ने इस बीच अडानी मुद्दे पर भी टिप्पणी की और सच्चाई को छिपाने के लिए भाजपा को पर कई आरोप लगाए। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “पहली बार, हम सभी भारत के लोगों को यह दिखाने में सक्षम हुए कि यह अडानीगेट क्या था? बीजेपी पिछले 3 सालों से इसे छिपाने कोशिश कर रही है। मुझे खुशी है कि सभी विपक्षी दल एकजुट होकर सामने आए। भारत के लोग अडानीगेट घोटाले को देख सकते हैं।”

महाकवि जो आपातकाल के दौरान भी बने थे कॉन्ग्रेस की टेंशन, फिर उन्हीं के नाम से राहुल गाँधी के नीचे से ‘खिसक रही जमीन’: PM मोदी ने पढ़ी दुष्यंत कुमार त्यागी की पंक्ति

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बुधवार (8 फरवरी, 2023) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में दुष्यंत कुमार के शेर सुनाकर विपक्ष पर हमला बोला। प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधने के लिए दुष्यंत कुमार का एक शेर पढ़ा। पीएम मोदी के शायराना तंज पर NDA के सांसद ठहाका लगाने लगे।

अपने संबोधन के दौरान पीएम ने कहा, “मुझे विश्वास है कि भविष्य में कॉन्ग्रेस की बर्बादी पर हॉर्वर्ड ही नहीं, बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में अध्ययन होना ही होना है और कॉन्ग्रेस को डुबाने वाले लोगों पर भी अध्ययन होने वाला है। ऐसे लोगों के लिए दुष्यंत कुमार ने बहुत बढ़िया बात कही है। उन्होंने कहा है- “तुम्हारे पाँव के नीचे कोई जमीन नहीं, कमाल यह है कि फिर भी तुम्हें यकीन नहीं।”

कौन हैं दुष्यंत कुमार?

दुष्यंत कुमार की यह रचना “तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं” उनके रचना संग्रह “साये में धूप” में छपी है। इस संग्रह में दुष्यंत कुमार के कई मशहूर रचनाएँ छपी हैं। जिनमें “हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए” जैसी रचना भी शामिल है। दुष्यंत कुमार ने सूर्य का स्वागत, आवाजों के घेरे, जलते हुए वन का बसंत, छोटे-छोटे सवाल, आँगन में एक वृक्ष, दुहरी जिंदगी जैसे कई उन्यास भी लिखे हैं।

दुष्यंत कुमार का जन्म 1 सितंबर, 1933 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर के राजपुर नवादा गाँव में हुआ था। उनका पूरा नाम दुष्यंत कुमार त्यागी है। दुष्यंत कुमार ने इलाहबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी। इसके साथ-साथ लेखन का कार्य भी करते रहे। दुष्यंत कुमार ने आकाशवाणी भोपाल में सहायक निर्माता के रूप में भी कार्य किया था। प्रारंभ में वे परदेशी के नाम से लिखा करते थे लेकिन बाद में दुष्यंत कुमार ने अपने ही नाम से लिखना शुरू कर दिया।

दुष्यंत कुमार ने प्रेम के अलावा आस पास के परिवेश, समाज, भ्रष्टाचार और शासन-प्रशासन व्यवस्था पर भी कटाक्ष किया है। उनकी रचनाओं को लोगों ने हाथों-हाथ लिया। समाज में पनप रही संवेदनहीनता और खत्म होते मानवीय मूल्यों पर दुष्यंत लिखते हैं-

इस शहर में वो कोई बारात हो या वारदात,
अब किसी भी बात पर खुलती नहीं हैं खिड़कियाँ।

दुष्यंत कुमार ने कई प्रेरणा दायक (Motivational) रचनाएँ भी की हैं। जैसे-

एक चिंगारी कहीं से ढूंढ लाओ दोस्तों
इस दीये में तेल से भीगी हुई बाती तो है।
कैसे आकाश में सुराख नहीं हो सकता,
एक पत्थर तो तबीयत से उछालों यारों।।

गज़लों और उपन्यास के अलावा दुष्यंत कुमार ने नाटक और लघुकथाएँ भी लिखीं हैं। उनके लघुकथाओं के संग्रह का नाम ‘मन के कोण’ है। 30 दिसम्बर, 1975 को महज 42 वर्ष की आयु में दुष्यंत कुमार का निधन हो गया।

बिन दाढ़ी मुख सून… कौन थे हाथरस वाले प्रभुनाथ गर्ग, PM मोदी ने पढ़ा जिनका दोहा तो ठहाकों से गूँज उठी संसद: सामाजिक-राजनीतिक कुरीतियों पर खूब किया व्यंग्य

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में शामिल होते हुए प्रधानमंत्री ने बुधवार (8 फरवरी, 2023) को अपने ऊपर लग रहे आरोपों का जवाब अपने चिर-परिचित अंदाज में दिया। विरोधियों पर बरसते हुए प्रधानमंत्री ने कविताओं का जमकर प्रयोग किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधने के लिए दुष्यंत कुमार का एक शेर और काका हाथरसी का एक दोहा भी सुनाया। पीएम नरेंद्र मोदी ने काका हाथरसी का जो दोहा पढ़ा वह इस प्रकार है –

आगा-पीछा देखकर क्यों होते गमगीन, जैसी जिसकी भावना वैसा दीखे सीन।

‘काका हाथरसी’ की इन्हीं पंक्तियों को PM मोदी ने किया उद्धृत

पीएम मोदी के मुँह से काका हाथरसी का यह दोहा सुनकर सदन के लगभग सभी सदस्य मेज थपथपाते नजर आए। चलिए जानते हैं कौन थे काका हाथरसी, जिनकी रचनाएँ आज भी इतनी प्रासंगिक हैं कि प्रधानमंत्री मोदी भी उनका जिक्र किए बिना नहीं रह पाते। काका हाथरसी ने अपनी आत्मकथा ‘मेरा जीवन ए-वन’ में अपने निजी जीवन के कई विषयों पर बेबाकी से लिखा है।

काका हाथरसी का असली नाम प्रभुनाथ गर्ग है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के हाथरस में 18 सितंबर, 1906 को हुआ था। अपने जन्म के बारे में काका ने स्वयं लिखा है –

दिन अट्ठारह सितंबर, अग्रवाल परिवार। उन्निस सौ छः में लिया, काका ने अवतार।।

प्रभुनाथ गर्ग (काका हाथरसी) के पिता का नाम शिवलाल और माता का नाम बर्फी देवी था। काका के पुरखे गोकुल महावन से आकर हाथरस में बस गए थे। जब काका हाथरसी सिर्फ 15 दिन के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। बड़े भाई भजन लाल उस समय केवल 2 साल के थे। पिता के निधन के बाद दोनों भाइयों को लेकर माँ बर्फी देवी मायके चली गईं, लेकिन अधिक दिनों तक न रुक सकीं और अपने पति के घर ही रहने का फैसला किया।

प्रभुनाथ गर्ग कैसे बने काका हाथरसी?

काका हाथरसी पढ़ाई करने ननिहाल चले गए। वहाँ कुछ पढ़ लिख जाने के बाद उन्हें एक नौकरी मिली। समाज की कुरीतियों, भ्रष्टाचार और राजनीतिक कुशासन पर व्यंग करने वाले प्रभुनाथ ड्रामे में हिस्सा लिया करते थे। हाथरस में आयोजित एक नाटक में उन्होंने काका नाम के चौधरी का किरदार अदा किया। उनका यह अभिनय इतना जीवंत हुआ कि लोग उन्हें काका जी कहकर पुकारने लगे। मित्रों की सलाह पर उन्होंने काका के साथ हाथरसी जोड़ लिया। इसके बाद प्रभुनाथ काका हाथरसी के नाम से कविताएँ लिखने लगे।

1946 में ‘काका की कचहरी’ नाम से उनकी पहली पुस्तक प्रकाशित हुई। अपने कटाक्ष और व्यंगों के कारण काका धीरे-धीरे मशहूर होने लगे। कविताओं के अलावा काका हाथरसी अपनी दाढ़ी के लिए भी प्रशंसा के पात्र थे। इस पर काका हाथरसी ने ही लिखा-

“काका दाढ़ी साखिए, बिन दाढ़ी मुख सून। ज्यों मसूरी के बिना, व्यर्थ देहरादून।।

काका हाथरसी अपनी कविताओं और दोहों के माध्यम से समाज में व्याप्त दोषों, कुरीतियों, भ्रष्टाचार और राजनीतिक कुशासन पर चोट किया करते थे। काका हाथरसी की प्रमुख रचनाएँ उनके कविता संग्रह काका की फुलझड़ियाँ, काका के प्रहसन, लूटनीति मंथन करि, खिलखिलाहट, काका तरंग, जय बोलो बेईमान की, यार सप्तक, काका के व्यंग्य बाण में पढ़े जा सकते हैं। 18 सितंबर को जन्मे काका हाथरसी का निधन भी 18 सितंबर, 1995 को ही हुआ।