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‘इसमें नारियों के लिए अपशब्द, सर्व समाज को बेवकूफ बनाया’: लखनऊ में जलाई गई रामचरितमानस की प्रतियाँ, स्वामी प्रसाद मौर्य को सपा ने बनाया महासचिव

रामचरितमानस को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ओबीसी महासभा ने सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थन में रामचरितमानस की प्रतियाँ जलाईं। स्वामी प्रसाद ने रामचरित मानस को बकवास बताते हुए प्रतिबंध लगाने की माँग की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (29 जनवरी 2023) को लखनऊ के वृंदावन योजना में अखिल भारतीय ओबीसी महासभा ने समाजवादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थन में रामचरितमानस की प्रतियाँ जलाईं। ओबीसी महासभा के लोगों ने कहा है कि उन्होंने रामचरितमानस की विवादित अंश की प्रतियाँ जलाई हैं।

ओबीसी महासभा के एक सदस्य ने कहा है, “इसमें नारी शक्ति, शूद्रों, दलित समाज और ओबीसी समाज के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी हैं। हम इन टिप्पणियों को रामचरितमानस से निकलवाना चाहते हैं। जब निकाला जाएगा तभी ये विरोध प्रदर्शन शांत होगा। नहीं तो जगह-जगह विरोध प्रदर्शन होगा।” उधर स्वामी प्रसाद मौर्य को सपा ने महासचिव बना दिया है।

रामचरित मानस की प्रतियाँ जलाने वाले एक अन्य व्यक्ति ने कहा है  “जब दुनिया चाँद पर जा रही है तब हिंदुस्तान का तथाकथित 15 फीसदी समाज 85 फीसदी समाज को बेवकूफ बनाकर पीछे ले जाना चाह रहा था। कई सदियों से वो पीछे लेकर जा रहा है। सनातन धर्म का सबसे बड़ा रामचरितमानस को बताया गया है। इसमें सर्व समाज को बेवकूफ बनाया गया है। नारियों के लिए अपशब्द कहे गए हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य ने जो कहा है हम उसका पूरी तरह से समर्थन करते हैं। संविधान में संशोधन हो सकता है तो रामचरितमानस में क्यों नहीं।”

वहीं, इस विवाद के बीच समाजवादी पार्टी ने इस स्वामी प्रसाद मौर्य को पार्टी महासचिव बनाया दिया। इस फैसले के बाद भाजपा सपा पर हमलावर है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि यह सपा के ताबूत में आखिरी कील है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “मानसिक रूप से विक्षिप्त हो चुकी समाजवादी पार्टी ने अपना हिंदू विरोधी चरित्र उजागर कर दिया है। श्रीरामचरित मानस को अपमानित करने वाले को सपा बहादुर श्री अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय महासचिव बनाकर खुद सपा के ताबूत में आखिरी कील ठोक दी है। विनाशक काले विपरीत बुद्धि। जय श्रीराम।”

बता दें कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने 22 जनवरी 2023 को रामचरित मानस को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अब करोड़ों लोग रामचरितमानस को नहीं पढ़ते, इसमें सब बकवास है। स्वामी प्रसाद ने सरकार से रामचरितमानस में कुछ अंश को आपत्तिजनक बताते हुए उसे हटाने की माँग की। उन्होंने कहा था कि अगर वो अंश न हट पाएँ तो पूरी किताब को ही बैन कर देना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा था कि वो रामचरितमानस को धर्म ग्रंथ नहीं मानते क्योकि इस किताब को तुलसीदास ने अपनी खुद की खुशी के लिए लिखा था। स्वामी प्रसाद ने आरोप लगाया कि रामचरितमानस में कुछ ऐसी चौपाइयाँ हैं, जिनमें शूद्रों को अधम होने का सर्टिफिकेट दिया गया है। उन्होंने उन चौपाइयों को एक वर्ग के लिए गाली जैसे बताया।

उन्होंने कहा था रामचरितमानस के हिसाब से ब्राह्मण भले ही कितना गलत करे वो सही और शूद्र कितना भी सही करे वो गलत होता है। मौर्य के अनुसार, अगर उसे ही धर्म कहते हैं वो ऐसे धर्म का सत्यानाश हो और ऐसे धर्म को वो दूर से नमस्कार करते हैं।

इस बयान के बाद शिवेंद्र मिश्रा नामक व्यक्ति ने सोमवार (24 जनवरी 2023) को समाजवादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। स्वामी प्रसाद के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 ए, 295 ए, 298, 504 505 (2) के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।

ओडिशा के मंत्री की इलाज के दौरान मौत: सीने के आर-पार निकल गई थी पुलिसकर्मी की गोली, आरोपित की बीवी ने कहा – उनकी मानसिक हालत ठीक नहीं

ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री नब किशोर दास, जिन्हें झारसुगुड़ा में एक पुलिसकर्मी ने गोली मार दी थी – इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई है। ये घटना रविवार (29 जनवरी, 2023) को हुई है। उन्हें एक एसिस्टेंट सब इंस्पेक्टर ने गोली मार दी थी। उनके सीने में गोली लगी थी, जिसके बाद इलाज के लिए उन्हें राजधानी भुवनेश्वर स्थित अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गाँधी चौक के पास जब वो रुके थे, तब उन्हें 4-5 गोलियाँ मारी गई थीं।

ये घटना बृजराजनगर इलाके में हुई है। मंत्री उस समय एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए जा रहे थे। आरोपित ASI की पहचान गोपाल दास के रूप में हुई है। स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया, जिसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि जब मंत्री नब किशोर दास को लोग उन्हें कार की सीट पर बिठा रहे थे, तब उनके शरीर से काफी खून बह रहा था। एक बुलेट उनके सीने के आर-पार हो गई थी।

उन्हें ICU केयर यूनिट में भर्ती कराया गया था और दिल की पंपिंग को सुधारने के लिए कदम उठाए गए। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इसे राज्य के लिए एक बड़ी क्षति करार दिया है। उन्होंने क्राइम ब्रांच द्वारा मामले की जाँच कराने की बात कही है। ASI ने इस घटना को अंजाम देने से पहले अपनी पत्नी को वीडियो कॉल किया था। पत्नी जयंती का कहना है कि गोपाल दास आखिरी बार 5 महीने पहले घर आया था। साथ ही पत्नी ने उसे मानसिक बीमारी होने का दावा करते हुए कहा कि वो 7-8 साल से इलाज करवा रहा था और दवा लेता था।

गोपाल दास ने घटना वाले दिन सुबह अपनी बेटी से भी बात की थी। बीवी का कहना है कि वो दवा लेने के बाद सामान्य व्यवहार करता था। BJD कार्यकर्ताओं में इस घटना के बाद खासा आक्रोश है। सीएम पटनायक खुद मंत्री का हालचाल लेने अस्पताल पहुँचे थे और बेटे को सांत्वना दी थी। अपराध शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत मौके पर जाकर जाँच शुरू करने के लिए कहा गया। नब किशोर दास ओडिशा के सबसे अमीर नेताओं में से एक थे, जिन्होंने महाराष्ट्र के शनि मंदिर को 1 करोड़ रुपए का सोने का घड़ा दान किया था।

जो हिंदू हित का काम करेगा, वही देश पर राज करेगा… ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’ और धर्मांतरण के खिलाफ सड़क पर उतरे लाखों हिन्दू, महिलाओं ने किया विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व

देश में ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’ और धर्मांतरण की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कानून बनाने की माँग होती रही है। इन्हीं माँगों को लेकर हिंदू संगठनों ने मुंबई में प्रदर्शन किया। इसमें, विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोग शामिल हुए। दावा किया जा रहा है कि इस प्रदर्शन में एक लाख से अधिक लोग शामिल हुए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिंदू संगठनों ने यह प्रदर्शन रविवार (29 जनवरी, 2023) को दादर शिवाजी पार्क से कामगार स्टेडियम तक किया गया। लोगों की माँग है कि महाराष्ट्र सहित पूरे देश में लव जिहाद, लैंड जिहाद और धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाए जाएँ। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण बंद हो। अवैध इस्लामी मजहबी स्थलों पर कार्रवाई हो। ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाए।

इस प्रदर्शन में भाजपा नेता राम कदम, केशव उपाध्ये, नीतेश नारायण राणे, बालासाहेब शिवसेना के सदा सरवणकर सहित कई हिंदू नेता उपस्थित रहे। इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसकी अगुवाई महिलाएँ कर रहीं थीं।

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने जमकर नारेबाजी की। इस दौरान, ‘जो हिंदू हित का काम करेगा, वही देश पर राज करेगा’, ‘गर्व से कहो हम हिंदू हैं’ जैसे नारे लगाए गए। इस प्रदर्शन के दौरान, बड़ी संख्या में पहुँच लोगों को संबोधित करते हुए भाजपा नेता राम कदम ने लव जिहाद और धर्मांतरण को देश के लिए घातक बताया। उन्होंने कहा है कि श्रद्धा वॉल्कर की हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। हिंदुस्तान में ‘लव जिहाद’ के मामले बढ़ रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा है कि श्रद्धा वाल्कर की हत्या के बाद भी कुछ ऐसी ही घटनाएँ सामने आई हैं। यही कारण है कि हिंदू एकजुट होकर’ लव जिहाद’ और धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने की माँग कर रहे हैं।

इस प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेता नीतेश राणे ने उद्धव ठाकरे सरकार को निशाने में लेते हुए कहा कि बीते ढाई वर्षों में हिंदुओं के साथ बहुत अन्याय हुआ है। अब सत्ता में भाजपा आ गई है। सरकार ने धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। ‘लव जिहाद’ के खिलाफ भी कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

‘कश्मीर में किसी को कोई डर नहीं, तिरंगा लेकर मजे से घूम रहे लोग’: राहुल गाँधी की यात्रा में योगेंद्र यादव ने मोदी सरकार की कर दी तारीफ

कॉन्ग्रेस पार्टी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में अहम भूमिका निभा रहे ‘स्वराज इंडिया’ के संस्थापक योगेंद्र यादव ने खुद एक तरह से मोदी सरकार के अच्छे कार्यों का बखान कर दिया है। राहुल गाँधी ने यात्रा के समापन के दौरान जम्मू कश्मीर के लाल चौक पर राष्ट्रध्वज तिरंगा झंडा फहराया। अब ‘इच्छाधारी आंदोलनजीवी’ कहे जाने वाले योगेंद्र यादव ने एक वीडियो में बताया है कि कैसे जम्मू कश्मीर में अमन का राज है और आतंकियों का अब कोई भय नहीं रहा।

योगेंद्र यादव ने कहा, “यही वो लाल चौक है। वैसे इस पूरे इलाके को लाल चौक कहा जाता है और इसे घंटाघर कहा जाता है, लेकिन भारत के बाक़ी लोगों के लिए यही लाल चौक है। ऐसा माना जाता है कि ये काफी खतरनाक जगह है और यहाँ पर आकर कोई तिरंगा नहीं लहरा सकता – ऐसी बातें की जाती हैं। और आप आज देखिए, ये लगभग उत्सव बन गया है। तमाम लोग तिरंगा लेकर घूम रहे हैं, अपने-अपने तरीके से।”

उन्होंने ‘ सार्वजनिक उत्सव’ बताते हुए इसकी पुष्टि की कि वहां सुरक्षा बल मौजूद हैं और किसी को किसी प्रकार का डर नहीं है। योगेंद्र यादव ने कहा कि किसी को ये डर नहीं है कि तिरंगा झंडा को देख कर कोई आएगा और उन्हें गोली मार देगा। उन्होंने ये भी बताया कि बिना सुरक्षा के सुबह से घूमने के बावजूद उन्हें कोई डर महसूस नहीं हुआ। योया ने ये भी कहा कि कुछ नहीं है, लोग मजे से घूम रहे हैं और माहौल शांत है।

‘भारत जोड़ो यात्रा’ समापन के दौरान इसीलिए भी विवादों में है, क्योंकि राहुल गाँधी का कटआउट वहाँ तिरंगे झंडे से ज्यादा ऊँचा देखा गया। लोग पूछ रहे हैं कि या भारत के फ्लैग कोड का उल्लंघन है या नहीं। लाल चौक पर भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी कई वर्ष पहले तिरंगा फहरा चुके हैं, जब उनके साथ तब भाजपा संगठन की जिम्मेदारी देख रहे नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे। तब मोदी ने आतंकियों को ललकारते हुए कहा था कि लाल चौक पर झंडा फहराने से कोई नहीं रोक सकता।

केरल का वो इलाका, जहाँ रहते हैं 32 समुदाय के लोग और बोली जाती हैं 16 से अधिक भाषाएँ: जानिए अरबों से लेकर डचों का क्या रहा है कनेक्शन

ग्रेटर कोचीन विकास प्राधिकरण (GCDA) ने फोर्ट कोच्चि और मट्टनचेरी (Fort Kochi and Mattancherry) में विरासत और ऐतिहासिक स्थलों की जियोटैगिंग (Geotagging) का पहला चरण पूरा कर लिया है। जियोटैगिंग किसी दिए गए चित्र की सामग्री पर उस स्थान से संबंधइत भिन्न प्रकार की जानकारी उपलब्ध करती है।

दरअसल, GCDA ने कोचीन हेरिटेज ज़ोन कंज़र्वेशन सोसाइटी (CHZCS) के साथ मिलकर 150 से अधिक विरासत स्थलों की पहचान की है और उन्हें जियोटैग किया है। जियोग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GIS) आधारित जियोटैगिंग भौगोलिक निर्देशांक को विभिन्न मीडिया, जैसे फोटो या वीडियो में जोड़ने की प्रक्रिया है।

जियोटैगिंग के दूसरे चरण में चिह्नित स्थानों के ऐतिहासिक महत्व को लिखना शामिल है, जिस पर काम पहले ही शुरू हो चुका है। एक बार जब यह पूरा हो जा जाएगा तो आम लोग और पर्यटक वेब GIS के माध्यम से विरासत स्थलों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। केरल का भव्य इतिहास रहा है। अन्य पर्यटनस्थलों को भी धीरे-धीरे इसमें शामिल किया जाएगा।

फोर्ट कोच्चि भारत के केरल राज्य में कोच्चि शहर का एक क्षेत्र है। यह मुख्य भूमि के दक्षिण-पश्चिम की ओर पानी वाले क्षेत्रों का हिस्सा है। यहाँ औपनिवेशिक काल के मकान, सड़कें, पेड़-पौधे, पंक्तिबद्ध रास्ते और इमारतें लोगों को 14वीं-15वीं शताब्दी में लेकर जाती हैं। इसे प्यार से अरब सागर की रानी कहा जाता है।

इतना ही नहीं, यहाँ पर बने हुए आकर्षक पुर्तगाली स्टाइल के घर, चर्च, विला और इंडो यूरोपीय वास्तुकला की इमारतें भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। यहाँ की यहूदी बस्तियाँ 500 साल से भी अधिक पुरानी हैं। यह केरल का सबसे पुराना गाँव भी है, जो मछली मारने के व्यवसाय में शामिल था।

वहीं, मट्टनचेरी में स्थित मट्टनचेरी पैलेस नालुकेट्टू और यूरोपीय वास्तुकला की शैली में बना है। इस संग्रहालय में कोच्चि के शासकों की पुरानी कलाकृतियों को रखा गया है। इतिहासकारों का मानना है कि यह महल पुर्तगालियों ने बनवाया था।

कहा जाता है कि पुर्तगालियों ने इसका निर्माण कराने के बाद 1555 ईस्वी में इसे तत्कालीन कोचीन (अब कोच्चि) के राजा को उपहार में दे दिया था। बाद में इस इलाके पर डचों का कब्जा हो गया। कब्जा होने के बाद उन्होंने इस पैलेस को डच रूप दिया।

ब्राह्मण लेकर आए डोसा-चपाती

व्यापारिक केंद्र होने के कारण गुजरात, कश्मीर से लेकर आंध्र प्रदेश के लोग यहाँ पहुँचे। धीरे-धीरे यह यह कॉस्मोपॉलिटीन सिटी के रूप में विकसित हुआ। यहाँ कम-से-कम 32 समुदाय के लोग रहते हैं। इसके साथ ही यहाँ मलयालम के अलावा कम-से-कम 16 भाषाएँ बोली जाती हैं।

अन्य लोगों की तरह दक्षिण भारत के तमिल ब्राह्मण भी यहाँ पहुँचे। ये यहाँ के महाराजा के लिए काम करने लगे। कर्नाटक से तुलु और हेगड़े, आंध्र प्रदेश से चेटियार समुदाय आकर तेल का कारोबार करने लगे। कर्नाटक के उडुपी इलाके से आए तुलु ब्राह्मणों ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इन्होंने अपने रेस्टोरेंट कोचीन में शुरू किए।

कोचीन के लोगों को पहली बार यहाँ ‘मसाला डोसा’ मिला। इसके साथ ही ‘चपाती’ का भी व्यापक प्रसार हुआ। इसके पहले केरल के लोग चपाती के बारे में नहीं जानते थे। यहाँ मिलने वाली जलेबी जैसी मिठाई ‘जांगरी’ भी तुलु ब्राह्मण ही लेकर आए।

अरब से लेक यूनान तक व्यापार

इतिहासकारों का मानना है कि सन 1341 में पेरियार नदी में बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बाद कोच्चि को एक बंदरगाह के रूप में स्थापित किया गया था। केरल के कोच्चि बंदरगाह क्षेत्र को फोर्ट कोच्चि-मट्टनचेरी क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। यह चीन, यूनान, रोम, अरब, लेबनान, सीरिया और वर्तमान इजरायल के लिए व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र था।

16वीं शताब्दी की शुरुआत से भारतीय स्वतंत्रता तक, पहले पुर्तगाली फिर डच और अंत में अंग्रेज कोच्चि आए और शासन किया। इतना ही नहीं, व्यापार का मुख्य केंद्र होने की वजह से भारत के विभिन्न क्षेत्रों के लोग एवं समुदाय कोच्चि आए और यहाँ बस गए।

इस्लाम का आगमन

केरल प्रमुख शहर कोच्चि पहले कोडुनगल्लूर के अधीन आता था। यहाँ चेरा साम्राज्य का शासन था। इन्हें ब्राह्मण वंश का शासक माना जाता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार, छठी शताब्दी में चेरा वंश का अंतिम राजा चेरामन पेरुमल का जन्म हुआ था। व्यवसाय का प्रमुख केंद्र होने के चलते यहाँ दुनिया भर से यात्री आते रहते थे।

इसी दौरान अरब में पैगंबर मुहम्मद के नेतृत्व में इस्लाम तेजी से फैल रहा था। अरब के व्यापारियों के साथ इस्लाम के प्रचारक भी यहाँ पहुँचे। उन्होंने तटीय इलाकों में लोगों को इस्लाम कबूल करवाना शुरू किया। कहा जाता है कि पेरुमल ने इस्लाम के बारे में सुना। एके अम्पोट्टी लिखित ‘ग्लिम्प्सेज़ ऑफ इस्लाम इन केरल’ और एसएन सदाशिवन लिखित ‘कास्ट इनवेड्स केरल, ए सोशल हिस्ट्री ऑफ इंडिया’ में इसका जिक्र मिलता है।

कहा जाता है कि एक दिन पेरुमल ने चाँद में दरार देखी और उसने ज्योतिषियों से इसके बारे में पूछा। इस्लाम के धर्म प्रचारकों ने ब्राह्मण राजा को पैगंबर के बारे में बताया और राजा को इस्लाम के प्रति लगाव हो गया। इसके बाद वह पैगंबर से मिलने अरब चला गया। वहाँ उसने इस्लाम कबूल कर लिया और अपना नाम ताजुद्दीन रख लिया।

कहा जाता है कि चेरामन ने जेद्दा के सुल्तान की बहन से निकाह कर लिया। उसने पत्र के साथ मलिक बिन दीनार और मलिक बिन हबीब को मस्जिद बनाने के लिए भारत भारत। आज यह चेरामन जुमा मस्जिद कहलाता है। कुछ लोग कहते हैं कि राजा के मंदिर को ही मस्जिद में बदल दिया गया। इस मंदिर में पहले की ही भाँति आज भी पिछले हजार सालों से दीया जल रहा है। इसका तेल सब लोग मिलकर देते हैं।

कुछ लोगों का कहना है कि चेरामन ने पत्र में अपने परिवार के लोगों को भी इस्लाम अपनाने और उसका प्रसार करने के लिए कहा था। कहा जाता है कि चेरामन के घर की महिला-पुरुष सहित इलाके के हिंदुओं ने इस्लाम अपनाना शुरू कर दिया। जो मुस्लिम स्थानीय लोगों से शादी करते वे यही बस जाते। बाद में ये मोपला या मोपिला कहलाए। मोपिला का अर्थ होता है दामाद। यह मलयालम के मपिलई और तमिल के मपिला से बना है। आज मालाबार क्षेत्र में मोपिला मुस्लिमों की भारी संख्या है।

माना जाता है कि चेरामन जब भारत लौटने लगा तो बीमारी से उसकी वहीं मौत हो गई और वहीं दफना दिया गया। इस तरह वह भारत छोड़कर गया तो कभी लौटकर नहीं आ पाया। हालाँकि, चेरामन की इस कहानी पर कई लोग सवाल भी उठाते हैं।

खैर जो भी हो, केरल का इतिहास सदियों पुराना है। कहा जाता है कि चेरामन शासकों को यहाँ की जमीन परशुराम ने दी थी। चेरा शासकों का केरल में शासन 5-4 शताब्दी ईसा पूर्व भी अस्तित्व में था। चेरा राजवंश का उल्लेख हिंदू महाकाव्य रामायण और महाभारत में भी मिलता है। यह तब केरल की प्रमुख शासक शक्ति थी।

अशोक के शिलालेखों में चेरा वंश संस्कृत में केतलपुत्र या केरलपुत्र के रूप में प्रकट होता है। उस युग के ग्रीको-रोमन स्रोतों ने चेरों को केरोबोथरा और केलेबोथरा कहा। इसका अर्थ है कि तमिल शीर्षक ‘चेरामन’ के अलावा, चेर राजाओं के पास केरलपुत्र भी उनके सांस्कृतिक शीर्षक के रूप में था।

पवन के प्यार में 6000 Km दूर से खिंची चली आई क्रिस्टल: हिन्दू रीति-रिवाज से की शादी, स्वीडन की महिला को यूपी के युवक से फेसबुक पर हुआ था प्यार

सोशल मीडिया के जरिए परवान चढ़ा प्यार इस कदर हावी हो गया कि स्वीडन की रहने वाली महिला ने भारत आकर शादी कर ली। स्वीडन की क्रिस्टन लिवर्ट और उत्तर प्रदेश में रहने वाले पवन कुमार फेसबुक के जरिए मिले थे। फेसबुक के जरिए ही साल 2012 में शुरू हुई बातचीत प्यार में बदल गई। इसके बाद अब 10 साल बाद दोनों ने शादी कर ली।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश के एटा जिले के अवागढ़ गाँव में रहने वाले पवन कुमार और स्वीडन की रहने वाली क्रिस्टल लिवर्ट ने शुक्रवार (27 जनवरी, 2023) को स्थानीय स्कूल में हिंदू रीति रिवाज से शादी कर ली। दोनों की शादी न केवल एटा बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

पवन के पिता की साइकल रिपेयरिंग का काम करते हैं। हालाँकि, पवन ने इंजीनियरिंग की है। लेकिन, वह बेरोजगार हैं। वहीं, क्रिस्टल लिवर्ट भी पढ़ी लिखी है। उसने होटल मैनेजमेंट और टूरिज्म में डिप्लोमा किया है।

पवन और क्रिस्टल की दोस्ती फेसबुक के जरिए हुई थी। साल 2012 में क्रिस्टल ने पवन कुमार को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी। इसे पवन ने एक्सेप्ट कर लिया। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। बाद में फोन कॉल और वीडियो तक बात पहुँच गई। फेसबुक से शुरू हुई दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई।

पवन कुमार के प्यार में पड़ने के बाद क्रिस्टल ने भारत आकर पवन से मिलने का फैसला किया। क्रिस्टल बीते 10 सालों में 8 बार भारत आ चुकी है। हालाँकि, इनकी शादी का फैसला साल 2022 में तब हुआ जब दोनों साथ में ताजमहल देखने गए। ताजमहल देखते ही दोनों ने शादी करने का फैसला किया।

इस शादी को लेकर पवन का कहना है कि उनके पिता इस शादी के खिलाफ थे। लेकिन जब उन्होंने मनाया तो वह मान गए। उन्होंने यह भी कहा है कि यह शादी उनके और क्रिस्टल के घरवालों की मर्जी से हुई है। दोनों के ही घरवाले खुश हैं। पवन के पिता गीतम सिंह ने कहा है कि बच्चों की खुशी में ही उनकी खुशी है। वह इस शादी से पूरी तरह से सहमत हैं और खुश भी हैं।

‘जीवित नाथूराम गोडसे ही नहीं, उसकी लाश और राख तक से डर गई थी नेहरू सरकार’: पुस्तक लॉन्च में प्रखर श्रीवास्तव का खुलासा, ‘हे राम’ में गाँधी हत्याकांड की ‘प्रामाणिक पड़ताल’

दिल्ली के लोधी गार्डन्स में स्थित ‘इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC)’ में शनिवार (28 जनवरी, 2023) को ‘जनसभा’ पब्लिकेशन के बैनर तले प्रखर श्रीवास्तव की पुस्तक ‘हे राम: गाँधी हत्याकांड की प्रामाणिक पड़ताल’ का विमोचन हुआ, जिसमें वरिष्ठ इतिहासकार मीनाक्षी जैन और ‘Zee News’ के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया भी मौजूद रहे। इस दौरान पुस्तक के लेखक प्रखर श्रीवास्तव ने बताया कि कैसे उस समय की कॉन्ग्रेस सरकार महात्मा गाँधी को बचाने में नाकाम रही।

प्रखर श्रीवास्तव ने इस दौरान उपस्थित लोगों से कहा कि गाँधी हत्याकांड में फ़िल्म स्टार पृथ्वीराज कपूर को फँसाने की कोशिश क्यों हुई थी और गाँधी की वो करीबी महिला कौन थी, जो गोडसे को गाँधी के बारे में सारी जानकारी देती थी – इस संबंध में और अधिक जानने के लिए आपको ये पुस्तक पढ़नी चाहिए। उन्होंने बताया कि महात्मा गाँधी के शिष्य जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल सरकार में होने के बावजूद उन्हें सुरक्षा देने में नाकाम रहे।

इस दौरान उन्होंने महात्मा गाँधी की हत्या के बाद हुए चितपावन ब्राह्मणों के नरसंहार की भी बात की और बताया कि कैसे वीर विनायक दामोदर सावरकर के भाई नारायण सावरकर की भीड़ ने हत्या कर दी। नारायण सावरकर स्वतंत्रता सेनानी थे। प्रखर श्रीवास्तव ने बताया कि न सिर्फ जीते-जी नाथूराम गोडसे से तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार डरी हुई थी, बल्कि उसकी लाश और राख से भी वो डर गई थी। नाथूराम गोडसे का अंतिम संस्कार जेल में ही कर दिया गया था।

पद्मश्री मीनाक्षी जैन ने इस दौरान बताया कि कैसे भारत सरकार ने पहले आरसी मजूमदार को स्वतंत्रता संग्राम इतिहास लिखने का काम दिया था, लेकिन बाद में एक ऐसे व्यक्ति को चुन लिया गया जिनके रिसर्च का फिल्ड इतिहास का ये काल था ही नहीं। कार्यक्रम में मौजूद तांत्या टोपे के वंशज पराग टोपे ने इस दौरान ध्यान दिलाया कि कैसे भारत के हर जगह का इतिहास जुबानी रूप से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक आता रहा है।

कंगाल पाकिस्तान में आटे के बाद अब मुर्गियों पर धावा: 30 लाख रुपए की 5000 मुर्गियाँ लूट कर ले गए मास्क में आए लुटेरे, फ़ौज के मुख्यालय के पास ही हुई घटना

कंगाली और बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान में आटे के बाद अब मुर्गियाँ लूटने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि लुटरों ने रावलपिंडी के एक पोल्ट्री फॉर्म से 30 लाख रुपए की मुर्गियों को लूट लिया है। लुटेरों की संख्या 1 दर्जन बताई जा रही है जो हथियारों के बल पर लगभग 5 हजार मुर्गियों को लूट ले गए हैं।। घटना गुरुवार (26 जनवरी, 2023) की बताई जा रही है, जिसमें पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित का नाम नाम वकास अहमद है। वकास ने अपनी शिकायत में बताया है कि गुरुवार रात लगभग 12 लुटेरों ने उनकी पोल्ट्री पर धावा बोल दिया। लुटरों के हाथों में हथियार थे। उन्होंने पोल्ट्री फॉर्म पर काम करने वाले 3 कर्मचारियों को बंधक बना लिया और उन्हें बाथरूम में ले जा कर बाहर से बंद कर दिया। FIR में यह भी बताया गया है कि लुटेरे 2 बाइकों और 3 मिनी ट्रकों पर सवार हो कर आए थे। तीनों स्टाफ को बंद कर के लुटेरे लगभग 5 हजार मुर्गियाँ उन्हीं मिनी ट्रक में भर कर लिए गए।

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, सभी लुटेरों में मास्क लगा रखा था। बताया जा रहा है कि बंधक बने पोल्ट्री के तीनों स्टाफ रात भर बाथरूम में ही रहे। अगले दिन शुक्रवार को ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकाला। इस मामले में अभी तक पुलिस किसी भी आरोपित को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। जिस जगह मुर्गी लूट की यह घटना हुई है, वो पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय के नजदीक बताई जा रही है।

गौरतलब है कि मौजूदा हालात में पाकिस्तान बद से बदतर आर्थिक दौर से गुजर रहा है। सोशल मीडिया पर पाकिस्तान का बता कर कई ऐसे वीडियो भी वायरल हुए हैं जिसमें पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा AK- 47 ले कर आटा बाँटा जा रहा है। कुछ वीडियो में लोगों को आटे के लिए आपस में मारा-मारी करते भी देखा गया है। वहीं गुजरावालां इलाके में एक किन्नर को राशन देने के बदले सरकारी ऑफिस में नाचने पर मजबूर करने का भी आरोप लगा था जिस पर जाँच चल रही है।

40 टन की 2 शालीग्राम शिलाएँ, उम्र 6 करोड़ साल से भी पुरानी: नेपाल से अयोध्या के रास्ते में जगह-जगह हो रही पूजा, मिथिला में साधु-संतों ने किया स्वागत

अयोध्या में बन रहे भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के लिए दो विशाल शिलाएँ नेपाल से लाई जा रहीं हैं। इनसे भगवान राम और माता सीता की मूर्ति का निर्माण होना है। इन शिलाओं को जिस रास्ते से लाया जा रहा है। वहाँ इनके दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। दोनों शिलाओं का वजन 60 टन बताया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार (28 जनवरी 2023) रात करीब 11 बजे ये दोनों शीलाएँ जनकपुर धाम में स्थित जानकी मंदिर पहुँचीं। जहाँ मंदिर के महंत राम तपेश्वर दास ने इन दोनों शिलाओं का स्वागत किया। यही नहीं, इन शिलाओं के जनकपुर में प्रवेश करने पर बड़ी संख्या में स्थानीय व आसपास के लोग एकजुट हुए। इस दौरान, कहीं पूजा-अर्चना तो कहीं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ देव शिलाओं का स्वागत हुआ।

ये दोनों शिलाएँ नेपाल के पोखरा में शालीग्रामी नदी से निकाली गई हैं। शालिग्रामी नदी को काली गंडकी नाम से भी जाना जाता है। पोखरा से जनकपुर के रास्ते में पड़ने वाले प्रत्येक गाँव, शहर, कस्बे व चौक-चौराहों में इन शिलाओं का भव्य स्वागत हुआ है। कुछ जगहों पर भजन, कीर्तन व शांति पाठ का भी किया गया है।

इन शिलाओं के साथ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों के अलावा साधु, संत, महंत व हिंदूवादी संगठनों के नेता शामिल हैं। साथ ही, रास्ते में पड़ने वाले मठों व मंदिरों के संत भी शामिल होते जा रहे हैं। एक शिला का वजन 26 टन जबकि दूसरे का 14 टन है। इस तरह, दोनों शिलाओं का वजन 40 टन बताया जा रहा है।

ये शिलाएँ सोमवार (30 जनवरी, 2023) को बिहार के मधुबनी जिले के रास्ते भारतीय सीमा में प्रवेश करेंगीं। इसके बाद शिलाएँ मंगलवार (31 जनवरी, 2023) को गोरखपुर पहुँचेगी। जहाँ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इनका पूजन करेंगे। इसके बाद 2 फरवरी को शिलाएँ अपने गंतव्य, यानी अयोध्या पहुँचेगी।

इन शिलाओं के साथ चल रहे ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के सदस्य कामेश्वर चौपाल का कहना है, “जब वह शालिग्राम की शीलाएँ लेकर पोखरा से निकले तो रास्ते में सड़कों के दोनों तरफ नेपाल के लोग खड़े दिखे। वहाँ लोग शिलाओं का पूजन-अर्चन इस तरह से कर रहे थे जैसे कि त्रेतायुग आ गया हो। मिथिला में तो रामलला के प्रति इतनी श्रद्धा और स्नेह  दिखाई दिया, जिसको देखने के बाद मैं बस अभिभूत हो गया और उसको बोलने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।”

उन्होंने यह भी कहा है, “हमें अभी शिलाओं को अयोध्या लाने के लिए कहा गया है। शिलाओं के अयोध्या पहुँचने के बाद ट्रस्ट अपना काम करेगा। ये शिलाएँ अयोध्या में 2 फरवरी को पहुँच सकती हैं। शालिग्रामी नदी से निकाली गईं ये दोनों शिलाएँ करीब 6 करोड़ साल पुरानी बताई जा रही हैं।”

PFI की महिला जासूस, अदालत की रेकी… इंदौर के कोर्ट में वकील के ड्रेस में धराई सोनू मंसूरी, हिन्दू कार्यकर्ताओं पर रख रही थी नजर

मध्य प्रदेश के इंदौर में पुलिस ने कोर्ट की कार्रवाई की वीडियो बना कर उसे प्रतिबंधित संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया) तक पहुँचाने के आरोप में एक 23 वर्षीया महिला को गिरफ्तार किया है। महिला का नाम सोनू मंसूरी है जो अदालत में वकील की ड्रेस में आई थी। जब महिला को गिरफ्तार किया गया था तब पठान फिल्म के विरोध के दौरान आपत्तिजनक नारे लगाने के आरोप में पकड़े गए हिन्दू संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं की सुनवाई चल रही थी। इस मामले में एक अन्य महिला वकील नूरजहाँ पर भी FIR दर्ज हुई है। नूरजहाँ पर आरोपित सोनू मंसूरी को अपने साथ कोर्ट में लाने का आरोप है। घटना शनिवार (28 जनवरी 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला एम जी रोड का है। दरअसल शनिवार को ‘पठान’ फिल्म के विरोध के दौरान कस्तूरी सिनेमा पर आपत्तिजनक नारे लगाने के आरोप में गिरफ्तार हिन्दू संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं की कोर्ट में पेशी थी। इस पेशी दौरान एक महिला चल रही कोर्ट कार्रवाई की वीडियो बना रही थी। आस-पास मौजूद अन्य वकीलों की नजर उस महिला पर गई तो उन्होंने उस से पूछताछ की। इस दौरान वीडियो बनाने वाली महिला कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई।

महिला वकील की ड्रेस में थी। पूछताछ में आरोपिता ने बताया कि वह वीडियो महिला वकील नूरजहाँ के कहने पर बना रही थी। लड़की के मोबाइल में कोर्ट कार्रवाई का वीडियो भी मिला। बाद में पुलिस को मामले की सूचना दी गई। बताया जा रहा है कि लड़की ने पुलिस के आगे कबूल किया कि वह प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के इशारे पर ऐसा कर रही थी। तलाशी के दौरान लड़की के पास से 1 लाख 16 हजार रुपए नकद मिलने की भी जानकारी है। पुलिस द्वारा मंसूरी का फोन जब्त कर लिया गया है जिसमें कई अन्य आत्तिजनक वीडियो मिलने की बात कही जा रही है।

महिला वकील की ड्रेस में थी। पूछताछ में आरोपित महिला ने बताया कि वह वीडियो महिला वकील नूरजहाँ के कहने पर बना रही थी। महिला जासूस के मोबाइल में कोर्ट कार्रवाई का वीडियो भी मिला। बाद में पुलिस को मामले की सूचना दी गई। बताया जा रहा है कि लड़की ने पुलिस के आगे कबूल किया कि वह प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के इशारे पर ऐसा कर रही थी। तलाशी के दौरान लड़की के पास से 1 लाख 16 हजार रुपए नकद मिलने की भी जानकारी है। मंसूरी ने पुलिस के आगे यह भी माना कि वह वकील नहीं है। कोर्ट की घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।

हालाँकि सोनू मंसूरी के पास बरामद हुए पैसों को ले कर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। वहीं दावा ये भी है कि अरोपिता के पास से फर्जी कागजात भी बरामद हुए हैं। अभिभाषक संघ के सदस्य सुरेन्द्र सिंह की शिकायत पर फर्जी वकील सोनू मंसूरी (23) पिता सुपडु मंसूरी निवासी सुनिकेत अपार्टमेंट आंनद बाजार, इंदौर और वकील नूरजहाँ के खिलाफ 410, 420 और 120 बी के तहत FIR दर्ज हुई है। घटना के बाद दूसरी आरोपिता महिला वकील नूरजहाँ फरार चल रहीं हैं जिनकी तलाश पुलिस कर रही है। मूल रूप से भोपाल की रहने वाली नूरजहाँ इंदौर बार एसोशिएशन का चुनाव भी लड़ चुकी हैं और PFI से जुडी बताई जा रहीं हैं।