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रामचरितमानस जलाने वालों में सलीम भी, अब अखिलेश यादव को भी हिन्दू ग्रन्थ से समस्या: यूपी पुलिस ने 5 को गिरफ्तार किया, स्वामी प्रसाद मौर्य बयान पर कायम

समाजवादी पार्टी महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान के समर्थन में लखनऊ में रामचरितमानस की प्रतियाँ जलाने के आरोप में लखनऊ पुलिस ने FIR दर्ज की है। इस केस में स्वामी प्रसाद सहित 10 लोगों को नामजद किया गया है। FIR में कुछ अज्ञात लोग भी शामिल हैं। अब तक 5 आरोपितों की गिरफ्तारी की भी खबर है। इधर स्वामी प्रसाद मौर्य ने खुद को अपने बयान पर कायम बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नामजद आरोपितों में स्वामी प्रसाद के अलावा यशपाल सिंह लोधी, देवेंद्र यादव, महेंद्र प्रताप यादव, नरेश सिंह, एसएस यादव, सुजीत ,संतोष वर्मा और सलीम हैं। वहीं स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि वो एक धार्मिक स्थल से जुड़े होने के नाते मौर्य द्वारा कही गई चौपाई को एक बार सुना दें। अखिलेश यादव ने लखनऊ के एक मंदिर में अपना विरोध करने वाले लोगों को भाजपा और संघ के गुंडे कह कर सम्बोधित किया।

वहीं, रविवार को एक बार फिर से इसी मुद्दे पर बोलते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने खुद को अपने बयान पर कायम बताया है।

क्या है FIR में

यह FIR लवी उर्फ़ सतनाम सिंह द्वारा दर्ज करवाई गई है। शिकायत में बताया गया है कि 29 जनवरी 2023 को PGI थानाक्षेत्र में आवास विकास ऑफिस के पास देवेन्द्र प्रताप यादव, यशपाल सिंह लोधी, सतेन्द्र कुशवाह, महेन्द्र प्रताप यादव, सुजीत यादव, नरेश सिंह, एस एस यादव, सन्तोष वर्मा, सलीम व अन्य कुछ अज्ञात लोगों ने भीड़ के आगे रामचरितमानस फाड़ कर उसे जला दिया। शिकायतकर्ता के मुताबिक उसने आरोपितों को रोकने की कोशिश की लेकिन वो नहीं माने। शिकायत में आरोपितों के कृत्य को जानबूझ कर और दंगा भड़काने की नीयत से किया गया बताया है।

पुलिस ने इस केस में IPC की धारा 120 B, 142, 143, 153 A, 295, 295 A, 298, 504, 505 (2) और 506 के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। बताया जा रहा है कि अब तक देवेंद्र प्रताप यादव, सत्येंद्र कुशवाहा और संतोष वर्मा व 2 अन्य की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस बाकी आरोपितों की तलाश करने के साथ वीडियो में दिख रहे अन्य लोगों को चिन्हित करने का प्रयास कर रही है।

कठघरे में किरेन रिजिजू, सवाल- आप अदालत को कंट्रोल करना चाहते हैं: जवाब में जज-कोर्ट पर मोदी सरकार के काम बताए, ₹9000 करोड़ का फंड भी

सालों से एक अदालत टीवी पर भी लगती है। नाम है- आप की अदालत। इंडिया टीवी पर प्रसारित पत्रकार रजत शर्मा के इस शो में इस बार केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू कठघरे में बैठे थे। इस दौरान उन्होंने बताया कि अदालतों और जजों के लिए जो काम मोदी सरकार ने किए हैं वे पहले कभी नहीं हुए। फिर भी न्यायपालिका को हाईजैक करने के आरोप उन पर लगाए जाते हैं।

रिजिजू ने कहा है कि जो लोग न्यायपालिका पर कंट्रोल का आरोप लगा रहे हैं, उनकी सोच में दिक्कत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अदालतों और न्यायाधीशों की सुविधाओं में सुधार के लिए बहुत काम किया है। शर्मा ने उनसे सवाल किया था कि आप अदालत को कंट्रोल करना चाहते हैं।

जवाब में केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा, “अदालतों को कंट्रोल नहीं कर सकते। इस बारे में सोचना भी नहीं चाहिए। मोदी जी ने साढ़े आठ साल में अदालतों और जजों की सुविधाओं को बढ़ाया है। कोर्ट हॉल, वकीलों के चैंबर आदि बनाने के लिए मुश्किल से 1000-2000 करोड़ रुपए मिलते थे। मोदी सरकार ने अगले 4 सालों में अदालतों में अलग-अलग सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए 9,000 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं।” आप 14 मिनट के बाद इस बातचीत को सुन सकते हैं।

रिजिजू ने कहा, “मोदी सरकार ने अदालतों के लिए जो काम किया है, उसका आधा भी किसी और सरकार ने नहीं किया। हमने न्यायपालिका के लिए इतना कुछ किया है, इसके बाद भी हम पर आरोप लगाया जा रहा है कि हम न्यायपालिका पर कब्जा करना चाह रहे हैं। यह सोचना भी गलत है। अगर कोई ऐसा कहता है तो उसकी सोच में दिक्कत है।”

कानून मंत्री ने यह भी कहा है कि न्यायपालिका पर नियंत्रण करने की चर्चा पहली बार इंदिरा गाँधी के समय में हुई थी। उस समय सीनियर जजों की वरिष्ठता को नजरअंदाज करते हुए एक जूनियर को सीनियर जज बनाया गया था। उसी समय आपातकाल भी घोषित किया गया था। अदालतों पर पूरी तरह से कंट्रोल था। वो लोग अब आरोप लगा रहे हैं कि सरकार अदालतों पर कंट्रोल करना चाहते हैं।

रजत शर्मा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल आरोप लगाते हैं कि बीजेपी ने सभी संस्थानों सीबीआई, ईडी पर कब्जा कर लिया है। अब न्यायपालिका पर भी कब्जा करना चाहते हैं। इस पर रिजिजू ने कहा है, “अरविंद केजरीवाल को सीरियस न लें। वह ऐसे ही कुछ भी कह देते हैं। उन्हें याद भी नहीं रहता होगा कि उन्होंने क्या कहा है।”

रजत शर्मा ने राहुल गाँधी का जिक्र करते हुए पूछा कि वे आरोप लगाते हैं कि अदालत सभी फैसले आपके फेवर में देती है। इस पर केंद्रीय मंत्री ने कहा, “राहुल गाँधी को बातें कहने के लिए चिट दी जाती हैं। उनके सलाहकार जैसा कहते हैं, राहुल गाँधी वैसा ही बोल देते हैं। अगर वहाँ से भटक गए तो फँस जाते हैं। उनकी पार्टी उन्हें बचाने में 24 घंटे लगी रहती है। उनकी बातों से भाजपा को नहीं, बल्कि देश को नुकसान होता है।”

कानून मंत्री ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम को जजशिप के लिए अनुशंसित उम्मीदवारों के बारे में खुफिया एजेंसियों द्वारा दी गई गोपनीय जानकारी का खुलासा नहीं करना चाहिए था। कॉलेजियम ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) द्वारा बताए गए बयानों को प्रकाशित किया था। इसमें, यह बताया गया था कि सरकार जजशिप के लिए कुछ व्यक्तियों की उम्मीदवारी का विरोध क्यों कर रही है।

इसको लेकर रजत शर्मा ने कहा कि न्यायाधीशों ने इसे सार्वजनिक किया है। न्यायाधीशों का कहना है कि यह पारदर्शिता के लिए है। इस पर रिजिजू ने जवाब दिया, “पारदर्शिता का पैमाना हमेशा अलग होता है। कुछ चीजें राष्ट्रीय हित में होती हैं, जिन्हें सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए और कुछ ऐसी चीजें हैं, जिन्हें सार्वजनिक तौर पर कहा जाना चाहिए। यह नियम स्पष्ट है।”

उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर अब कोई टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे। उचित मंच पर इसका समाधान करेंगे। उन्होंने जजों की छुट्टियों की वकालत करते हुए कहा है कि भारत के जजों की तुलना विदेश के जजों से नहीं की जा सकती। भारतीय जजों पर काम का बोझ कई गुना ज्यादा होता है।

रजनीकांत की आवाज़, तस्वीर और नाम के गलत इस्तेमाल पर हो सकती है जेल: सुपरस्टार ने जारी किया नोटिस, अमिताभ बच्चन भी HC से जारी करवा चुके हैं ऐसा आदेश

सुपरस्टार रजनीकांत (Rajinikanth) के वकील एस इलामभारती ने अभिनेता के नाम, फोटो और उनकी आवाज का दुरुपयोग करने वालों को सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। नोटिस में चेताया गया है कि एक्टर की पहचान, पब्लिसिटी और सेलिब्रिटी राइट्स का उल्लंघन करने वालों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। शनिवार (28 जनवरी, 2023) को जारी किए गए नोटिस में कहा गया है केवल रजनीकांत को ही अपनी पहचान, नाम, आवाज, फोटो समेत अन्य चीजों का इस्तेमाल करने का अधिकार है।

नोटिस में कहा गया है कि सिर्फ रजनीकांत की ही आवाज, नाम या इमेज का इस्तेमाल न करने के लिए मना नहीं किया जा रहा, बल्कि दूसरे सितारों की नकल करने को भी उल्लंघन माना जाएगा। बिना सहमति के एक्टर की प्रतिष्ठा या व्यक्तित्व का इस्तेमाल करना उनके अधिकारों का उल्लंघन होगा और इससे उनको काफी नुकसान होगा, जिसका असर कई क्षेत्रों पर पड़ेगा। ऐसा करने वालों के खिलाफ दीवानी और आपराधिक कार्रवाई होगी।

इस नोटिस को मशहूर लेखक, स्तंभकार श्रीधर पिल्लई (Sreedhar Pillai) ने भी अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। इसमें यह भी कहा गया है कि कई प्लेटफॉर्म, विज्ञापन बनाने वाले उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके जैसे चलने और बोलने की नकल भी उतारते हैं। यही नहीं, वे अपने उत्पादों को बेचने के लिए अभिनेता की फोटो, आवाज, कैरिकेचर फोटो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जेनेरेटेड इमेज का इस्तेमाल कर जनता को गुमराह भी करते हैं।

‘थलाइवा’ के नाम से मशहूर रजनीकांत (Rajinikanth) को उनके फैंस दक्षिण भारत में पूजते भी हैं। हर तीज-त्योहार पर वहाँ उनके जबरा फैंस एक्टर की पूजा-अर्चना करते हैं। उनकी फिल्म की रिलीज पर उन्हें दूध चढ़ाते हैं और तमाम तरह के पकवानों का भोग भी लगाते हैं। दुनिया भर में उनके करोड़ों चाहने वाले हैं। बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री में उनका बड़ा नाम है। नोटिस में इन सभी बातों का जिक्र करते हुए आगे कहा गया है कि उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने वालों और उनके व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन करने वालों की वजह से उनकी छवि खराब होगी।

वर्क फ्रंट की बात करें तो रजनीकांत इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म ‘जेलर’ की शूटिंग कर रहे हैं। इस फिल्म का निर्देशन नेल्सन दिलीप कुमार ने किया और सन पिक्चर्स ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में रजनीकांत के अलावा राम्या कृष्णन, तमन्ना भाटिया और शिव राजकुमार जैसे बड़े सितारे भी हैं। यह फिल्म 14 अप्रैल, 2023 को रिलीज हो सकती है। पिछले साल रजनीकांत की फिल्म ‘जेलर’ का फर्स्ट लुक रिलीज किया गया था, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया।

इसी तरह का एक फैसला अमिताभ बच्चन की अपील पर दिल्ली हाईकोर्ट ने भी दिया था। हिंदी सिनेमा के वयोवृद्ध अभिनेता ने दिल्ली उच्च-न्यायालय से ये निवेदन कर के ये आदेश जारी करवाया था कि उनके नाम, पहचान या आवाज़ कमर्शियल इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना न किया जाए। ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के नाम पर उनकी तस्वीर लगा कर हो रहे फर्जीवाड़े पर उन्होंने कानून का सहारा लिया था। वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे उनकी तरफ से अदालत में पेश हुआ थे।

अजमेर दरगाह पर उर्स में बवाल, नारेबाजी के बाद मुस्लिमों ने ही मुस्लिमों को कूटा: खादिमों ने मस्जिद में छिपकर बचाई जान

राजस्थान के अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह पर हंगामे की खबर है। बताया जा रहा है कि शनिवार (28 जनवरी, 2023) को यहाँ बरेलवी और खादिमों के बीच मारपीट हुई, जिसके चलते भगदड़ मच गई थी। पुलिस को बीच में दखल दे कर मामले को शाँत करवाना पड़ा। अब तक एक व्यक्ति की गिरफ्तारी की भी सूचना है। इस विवाद का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। हालात काबू में रखने के लिए फ़िलहाल दरगाह में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।

सैयद सुब्हानी सिराजी ने यह वीडियो ट्वीट करते हुए इसे गुंडागर्दी बताया है और राजस्थान पुलिस से कार्रवाई की माँग की है। 1 मिनट 8 सेकेंड के इस वायरल वीडियो में दो पक्ष एक दूसरे की पिटाई करते दिखाई दे रहे हैं। कुछ ही देर बाद एक व्यक्ति जमीन पर गिर पड़ता है। वहीं इसी आपाधापी में फँसा एक अन्य व्यक्ति खुद को घटना से अनजान बताते हुए पूछ रहा है कि मारपीट की वजह क्या है। सुब्हानी के इस वीडियो पर राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने अजमेर पुलिस से वर्तमान हालातों की जानकारी देने का आदेश दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह विवाद दरगाह में चल रहे वार्षिक उर्स की छठी रात को हुआ। घटना के समय सदारत की महफ़िल चल रही थी। इस महफ़िल में काफी भीड़ थी। रात 2 बजे जन्नती दरवाजे के पास कुछ लोग नारेबाजी करने लगे। इस नारेबाजी से दरगाह के खादिम नाराज हो गए और उन्होंने नारे लगा रहे लोगों की पिटाई कर दी। इस पिटाई से नाराज बरेलवी नारेबाजों ने पलटवार किया और खादिमों को पीटने लगे। इस वजह से भीड़ 2 हिस्सों में बँट गई और एक दूसरे की पिटाई करने लगी।

बताया जा रहा है कि खादिमों और दरगाह की सुरक्षा में तैनात नीली वर्दी में मौजूद सुरक्षा वॉलंटियर्स भी मारपीट के दौरान मौके से भाग निकले। मारपीट से बचने के लिए खादिमों ने शाहजहांनी मस्जिद में शरण ली। इस बवाल की जानकारी पुलिस को हुई तो उसने मौके पर पहुँच कर दोनों पक्षों को अलग-अलग किया। पुलिस ने इस दौरान एक व्यक्ति को शांतिभंग की आशंका के चलते गिरफ्तार भी किया। वहीं पुलिस को एक लाल पगड़ी वाले की भी तलाश है। पुलिस के मुताबिक उन्हें किसी भी पक्ष की तरफ से लिखित शिकायत नहीं मिली है। मौके पर फ़िलहाल शांति है जिसे बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

‘100 साल पुराने 3 मंदिरों को मैंने ही तोड़ा: मनमोहन सरकार में मंत्री रहे बालू ने गिनाए लक्ष्मी-सरस्वती-पार्वती मंदिर के नाम

टीआर बालू का एक बयान वायरल हो रहा है। इसमें वे तीन मंदिरों को तोड़ने की बात कर रहे हैं। डीएमके सांसद बालू मनमोहन सिंह की पहली सरकार में मंत्री रह चुके हैं। पिछले दिनों उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और अपनी पार्टी के नेता स्टालिन को छूने पर हाथ काटने की धमकी दी थी।

बालू का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। बीजेपी के तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने भी इसे ट्वीट किया है। इस वीडियो में बालू एक सभा को संबोधित करते दिख रहे हैं। वे कहते हैं, “मैंने 100 साल पुराने सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती मंदिर को तोड़ा है। ये तीनों मंदिर मेरे निर्वाचन क्षेत्र में जीएसटी रोड (ग्रैंड सदर्न ट्रंक रोड) पर थे।”

यह वीडियो वीडियो मदुरै की एक जनसभा का बताया जा रही है। इसे ट्वीट करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई ने कहा है कि DMK नेताओं को मंदिर तोड़ने पर फक्र है, जबकि वे मंदिरों को सरकारी कब्ज़े से निकालना चाहते हैं। अन्नामलाई ने अपने ट्वीट में HR&CE (हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम) को भंग करने की भी बात की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बालू ने सेतुसमुद्रम प्रोजेक्ट के समर्थन में सभा को संबोधित करते हुए यह बात कही। रामसेतु को नुकसान पहुॅंचने की वजह से हिंदूवादी संगठन इस प्रोजेक्ट के विरोध में हैं। वहीं डीएमके चाहती है कि यह परियोजना जल्द से जल्द शुरू हो।

इसी कड़ी में केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक परियोजना के लिए मंदिरों को तोड़े जाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मेरे निर्वाचन क्षेत्र में जीएसटी रोड पर सरस्वती मंदिर, लक्ष्मी मंदिर और पार्वती मंदिर को तोड़ा गया। मैंने ही इन तीनों मंदिरों को तोड़ा। मुझे पता है कि मुझे वोट नहीं मिलेंगे, लेकिन मुझे यह भी पता है कि मुझे वोट कैसे मिलेंगे। मेरे समर्थकों ने मुझे चेतावनी भी दी थी कि अगर मंदिर तोड़े गए तो मुझे वोट नहीं मिलेंगे। लेकिन मैंने उनसे कहा कि कोई दूसरा रास्ता नहीं है।”

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बालू ने अपने संबोधन में मस्जिद का भी जिक्र किया। साथ ही यह भी कहा कि मंदिर गिराने से नाराज लोगों को उन्होंने उससे भी बड़े और भव्य मंदिर बनवाने का भरोसा दिया और उसे बनवाया भी। गौरतलब है कि DMK के वरिष्ठ नेता बालू ने इससे पहले शनिवार (28 जनवरी 2023) को अपनी पार्टी के अध्यक्ष स्टालिन को छूने पर हाथ काट लेने की धमकी दी थी।

BBC शर्म करो… UK में मीडिया संस्थान के बाहर गूँजा ‘भारत माता की जय’, लोगों ने पूछा – गोधरा में मारे गए हिन्दुओं के परिजनों का इंटरव्यू लिया?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए बनाई गई बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री का ब्रिटेन में भी विरोध हो रहा है। प्रवासी भारतीयों ने लंदन में स्थित बीबीसी मुख्यालय और उसके क्षेत्रीय कार्यालयों के बाहर बड़ी संख्या में एकजुट होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन रविवार (29 जनवरी, 2023) को हुआ।

बीबीसी मुख्यालय के बाहर हुए इस प्रदर्शन में लोगों ने प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री को ब्रिटेन में भी बैन करने की माँग की। इस दौरान, प्रदर्शनकारियों ने ‘बायकॉट बीबीसी’, ‘ब्रिटिश बायस कॉर्पोरेशन’ और ‘स्टॉप द हिन्दूफोबिक नैरेटिव’, ‘बीबीसी शर्म करो’ और ‘भारत माता की जय’ जैसे नारे वाली तख्तियाँ लहराते दिखे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने तिरंगा लहराते हुए बीबीसी के विरोध में नारे भी लगाए। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने मीडिया से भी बात की। ब्रिटेन में मैन्युफैक्चरिंग कंपनी चलाने वाली वंदना शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मीडिया संस्थान की डॉक्यूमेंट्री एक प्रोपेगंडा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर झूठ फैलाया गया। डॉक्यूमेंट्री में बीबीसी ने अपने इंटरव्यू को काट दिया और वही दिखाया जो उनके एजेंडे के अनुकूल था।

उन्होंने यह भी कहा है, “बीबीसी ने हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच हिंसा को भड़काने के लिए एक झूठी कहानी फैलाई है। हमारे सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाने वाले कौन होते हैं? मैं बीबीसी का बहिष्कार कर रही हूँ। वे अब इसे क्यों दिखा रहे हैं? 2024 में मोदी को रोकने के लिए बहुत सारी शक्तियाँ काम कर रही हैं। लेकिन, मुझे लगता है कि वह फिर से जीतेंगे।”

एक अन्य प्रदर्शनकारी विश्व सिंह ने कहा, “हाई कोर्ट ने इन दंगों की जाँच में 10 साल लगाए। मोदी को सभी मामलों में बरी किया गया। फिर भी बीबीसी इसके बारे में बात करता रहता है। बीबीसी को दूसरे देश के मामलों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। बीबीसी यूके में ग्रूमिंग गिरोहों की जाँच क्यों नहीं करता? क्या बीबीसी ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद की बदहाली पर कोई डॉक्यूमेंट्री बनाई है?”

बीबीसी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने वाले प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बीबीसी ने गोधरा (ट्रेन) में मारे गए हिंदुओं के एक भी परिवार का इंटरव्यू नहीं लिया। उसका एजेंडा इस्लाम समर्थक और भारत व हिंदू विरोधी है। वह दूसरे पक्ष को नहीं दिखाता। बीबीसी मोदी और भारत को बदनाम करने के लिए एक एजेंडा चलाता है।

एक अन्य प्रदर्शनकारी जय ने कहा, “डॉक्यूमेंट्री पूरी तरह से एकतरफा है। दोनों पक्षों को नहीं दिखाया गया। बीबीसी ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि दंगे क्यों शुरू हुए। पुरुषों, महिलाओं और छोटे बच्चों से भरी एक ट्रेन कैसे जल गई। मरने वाले 300 से 400 हिंदुओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। मारे गए 200 पुलिस अधिकारियों का कोई उल्लेख नहीं है।”

दरअसल, इस डॉक्यूमेंट्री में BBC ने गुजरात दंगों का दोष वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर डालने की कोशिश की है। यही नहीं, उनकी छवि इस्लाम विरोधी भी दिखाने की कोशिश की है। दो पार्ट में बनाई गई BBC की इस सीरीज में प्रधानमंत्री मोदी और भारत के मुस्लिमों के बीच तनाव की बात कही गई है। बीबीसी ने मोदी सरकार के देश के मुस्लिमों के प्रति रवैए, कथित विवादित नीतियाँ, कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और नागरिकता कानून को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। BBC की डॉक्यूमेंट्री पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार के आदेश के बाद ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाए जा रहे हैं।

हिंडनबर्ग के 88 सवाल, अडानी ग्रुप ने 413 पन्नों में दिया जवाब: कहा- मुनाफा कमाने के लिए यह भारत पर सुनियोजित हमला

अडानी समूह ने अमेरिकी रिसर्च कंपनी हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब दिया। कंपनी ने 413 पन्नों के जवाब में हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोपों को झूठ करार दिया। कहा है कि ये आरोप भारत और यहाँ की कंपनियों तथा देश के विकास पर सुनियोजित हमला है।

अडानी समूह ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर जवाब देते हुए कहा है कि हिंडनबर्ग ने 88 सवालों के जवाब माँगे हैं। इनमें से 65 सवालों के जवाब अडानी पोर्टफोलियो कंपनियों की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। वेबसाइट में कंपनियों की वार्षिक रिपोर्ट में सभी के बारे में बताया गया है। समय-समय पर मेमोरेंडम, वित्तीय विवरण और स्टॉक एक्सचेंज के बारे में भी वेबसाइट पर जिक्र है।

गौतम अडानी के नेतृत्व वाली कंपनी ने यह भी कहा है कि हिंडनबर्ग के 18 सवाल सार्वजनिक शेयरधारकों और तीसरे पक्ष यानी अडानी ग्रुप की कंपनियों से संबंधित नहीं हैं। वहीं पाँच सवाल काल्पनिक और निराधार हैं।

अडानी समूह ने कहा है कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट स्पष्ट तौर पर मुनाफाखोरी करने के लिए तैयार की गई है। यह रिपोर्ट न तो स्वतंत्र है और न ही उद्देश्यपूर्ण है। अडानी समूह के निवेशकों की संख्या बहुत अधिक है। इन निवेशकों को नुकसान पहुँचाते हुए शॉर्ट सेलिंग कर मोटा मुनाफा कमाने के लिए हिंडनबर्ग फाल्स मार्केट बनाने का प्रयास कर रहा है। बता दें कि शॉर्ट सेलिंग में किसी भी कंपनी के शेयरों की गिरावट में पैसा लगाया जाता है।

413 पन्नों के जवाब में यह भी कहा गया है कि यह चिंता की बात है कि बिना किसी विश्वसनीयता या नैतिकता के हजारों मील दूर बैठी एक कंपनी के बयानों ने हमारे निवेशकों पर गंभीर रूप से बुरा प्रभाव डाला है। इस रिपोर्ट की दुर्भावनापूर्ण मंशा इसके टाइमिंग से भी भी साफ है। यह रिपोर्ट तब आई है, जब अडानी एंटरप्राइजेज इक्विटी शेयरों को लेकर देश का सबसे बड़ा एफपीओ (ADANI FPO) ला रहा था।

गौरतलब है कि हिंडनबर्ग ने अडानी समूह के खिलाफ लगाए गए आरोपों को उजागर करने के लिए 2 साल तक जाँच करने व अडानी ग्रुप के पूर्व अधिकारियों से बात करने का दावा किया था। इस पर अडानी समूह ने कहा है कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में दी गई जानकारी वर्षों से सार्वजनिक हैं। यानी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं। अडानी ग्रुप ने यह भी कहा है कि यह रिपोर्ट सिर्फ एक कंपनी पर एक हमला नहीं है। यह भारत, भारतीय संस्थाओं की स्वतंत्रता, अखंडता और गुणवत्ता तथा भारत की विकास गाथा और महत्वाकांक्षाओं पर एक सुनियोजित हमला है।

उल्लेखनीय है कि अमेरिकी रिसर्च कंपनी हिंडनबर्ग ने 88 सवालों की अपनी एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में अडानी समूह पर कॉरपोरेट जगत की सबसे बड़ी धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया था। इस रिपोर्ट में अडानी समूह पर शेयरों को मॅनिप्युलेशन और अकाउंटिंग फ्रॉड का भी आरोप लगाया गया है। हालाँकि, अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को झूठा और निराधार करार देते हुए कानूनी कार्यवाही करने की बात कही है।

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट सामने आने के बाद से अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में जोरदार गिरावट देखी गई है। इसका असर गौतम अडानी की नेटवर्थ पर भी पड़ा है।

परिवार को ठुकराकर मुस्लिम लड़की से लव मैरिज, इस्लाम कबूलने का इतना डाला दबाव कि फाँसी पर झूल गया दुष्यंत

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में धर्मांतरण के दबाव के चलते एक व्यक्ति ने अपने ही घर में फाँसी लगाकर आत्महत्या की खबर है। मृतक का नाम दुष्यंत चौधरी है। उसने करीब तीन साल पहले फरहा नाम की एक मुस्लिम युवती से परिवार की मर्जी के खिलाफ लव मैरिज की थी।

बताया जा रहा है कि शादी के बाद से ही ससुराल वाले दुष्यंत पर इस्लाम कबूलने का दबाव बना रहे थे। फरहा भी इसमें शामिल बताई जा रही है। वह दुष्यंत को छोड़कर मायके चली गई थी। यह भी दावा किया जा रहा है कि दुष्यंत ने इस्लाम कबूल कर लिया था। घटना रविवार (29 जनवरी 2023) की है। मेरठ पुलिस मामले की जाँच में जुटी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना नौचंदी थानाक्षेत्र की है। यहाँ के चित्रकूट कॉलोनी में रहने वाले 23 साल के दुष्यंत चौधरी ने लगभग 3 साल पहले मेरठ की फरहा से शादी की थी। इस शादी से दोनों को एक बेटा भी है। दुष्यंत के भाई जॉनी ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद से ही फरहा के घर वाले लगातार उसके भाई पर इस्लाम कबूल कर मुस्लिम बन जाने का दबाव बना रहे थे। इस बात से दुष्यंत काफी परेशान था। दबाव बनाने के फरहा कुछ समय पहले अपने मायके चली गई थी।

मृतक के परिजनों के मुताबिक फरहा के जाने के बाद दुष्यंत काफी परेशान रहने लगा था। वह लगातार अपनी ससुराल में फरहा को भेजने की मिन्नत कर रहा था। इधर फरहा के परिजन दुष्यंत पर लगातार इस्लाम कबूलने का दवाब बना रहे थे। मृतक के भाई के मुताबिक दुष्यंत ने मौत से पहले अंतिम कॉल बीवी फरहा को ही की थी। कॉल डिटेल में दोनों के बीच लगभग 40 मिनट तक बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। दुष्यंत के ताऊ के बेटे जॉनी ने पुलिस में तहरीर दे कर फरहा, उसके अब्बा हनीफ, भाई अमजद इब्राहिम, अम्मी और बहनों सहित 7-8 लोगों के खिलाफ नामजद तहरीर दी है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए DSP सिविल लाइन्स अरविन्द चौरसिया ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ IPC 306 के तहत केस दर्ज किया गया है। मामले में जाँच चल रही है और निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।

बन चुकी थी फैज़ कुरैशी नाम से प्रोफ़ाइल

इस मामले में मेरठ पुलिस ने थाना नौचंदी को जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। दैनिक भास्कर के मुताबिक फरहा मृतक दुष्यंत की बहन राखी चौधरी के साथ स्कूल में पढ़ती थी। राखी ने कई बार अपने भाई को फरहा से रिश्ता रखने के लिए रोका। राखी के मुताबिक फरहा अच्छी लड़की नहीं थी। हालाँकि दुष्यंत के अपनी बहन की बात नहीं मानी। दावा इस बात का भी किया जा रहा है कि दुष्यंत की एक फेसबुक प्रोफ़ाइल फैज़ कुरैशी नाम से भी बनाई गई थी। हालाँकि ये प्रोफ़ाइल खुद दुष्यंत ने बनाई थी या किसी और ने यह अभी साफ नहीं हो पाया है। वहीं मृतक की माँ का कहना है कि फरहा के घर वालों ने उनके बेटे का 3 साल पहले ही देवबंद में धर्मान्तरण करवा दिया था।

खालिस्तानियों का आतंक: बच्चे, औरत, हर भारतीय पर बरसाए डंडे-तलवार… तिरंगे का किया अपमान, देखती रही ऑस्ट्रेलिया की पुलिस

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में हिंदू मंदिरों पर हमला करने के बाद अब खालिस्तानी भारतीयों को निशाना बना रहे हैं। रविवार (29 जनवरी 2023) को वहाँ जनमत संग्रह आयोजित किया गया था। इस दौरान, तिरंगा यात्रा निकाल रहे भारतीयों को खालिस्तानियों ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा है। यही नहीं, इन लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज का भी अपमान किया। इस घटना के दौरान ऑस्ट्रेलिया की पुलिस मूक दर्शक बनी रही।

ऑस्ट्रेलियाई हिंदू मीडिया द्वारा शेयर किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि हाथ में तिरंगा लिए हुए भारतीयों को खालिस्तानी लोग कैसे दौड़ा-दौड़ा कर पीट रहे हैं। इन लोगों ने भारतीयों को पीटने के लिए खालिस्तानी झंडे में लगे डंडे का उपयोग किया। वहीं, कुछ खालिस्तानी तलवार के साथ भी नजर आए।

यही नहीं, वीडियो में देखा जा सकता है कि खालिस्तानियों से बचने के लिए भागते हुए एक व्यक्ति सड़क पर ही गिर जाता है। वह भागने की पूरी कोशिश करता है। लेकिन निहत्था पाकर खालिस्तानी आतंकी उसे लगातार पीटते हुए दिखाई देते हैं।

संजय दीक्षित नामक व्यक्ति द्वारा शेयर किए वीडियो में देख सकते हैं कि भारतीय शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं। लेकिन तभी खालिस्तानी उन पर पीछे से हमला कर देते हैं। इससे भारतीयों के बीच अफरा-तफरी मच जाती है। वह खुद को बचाते हुए भागते हुए दिखाई दे रहे हैं।

इस वीडियो में खालिस्तानियों को तिरंगे का अपमान करते हुए भी देखा जा सकता है। बड़ी बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ऑस्ट्रेलियाई पुलिस मौके पर मौजूद थी। लेकिन सिर्फ मूक दर्शक बनी रही। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया में हिंदू लगातार खालिस्तानियों के निशाने पर रहा है। बीते 20 दिनों के भीतर ही खालिस्तानियों ने 3 हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ करते हुए देश-विरोधी और खलिस्तान के समर्थन में नारे लिख दिए थे।

खालिस्तानियों ने हिंदू मंदिर पर पहला हमला 12 जनवरी को किया था। यह हमला मेलबर्न के BAPS स्वामीनारायण मंदिर में हुआ था। मंदिर में तोड़फोड़ करने के बाद खालिस्तानियों ने मंदिर की दीवार पर ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’, ‘मोदी हिटलर है’ और ‘भिंडरावाले जिंदाबाद’ जैसे नारे लिखे थे।

इसके बाद खालिस्तानियों ने 16 जनवरी 2023 को मेलबर्न के ही कैरम डाउन्स में स्थित ऐतिहासिक श्री शिव विष्णु मंदिर (Shri Shiva Vishnu Temple) पर हमला किया था। तोड़फोड़ के बाद, मंदिर की दीवारों पर ‘टारगेट मोदी (मोदी को बनाओ निशाना)’, ‘मोदी हिटलर’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिखे गए थे।

वहीं, तीसरा हमला मेलबर्न के ही अल्बर्ट पार्क इलाके में स्थित श्रीश्री राधा बल्लभ मंदिर में 22 जनवरी 2023 को हुआ था। इस मंदिर को इस्कॉन मंदिर भी कहा जाता है। हमले के बाद, मंदिर की दीवारों पर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’, ‘हिन्दुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिखे गए। इसके अलावा, खालिस्तानी आतंकी भिंडरवाले को शहीद बताते हुए भी नारा लिखा गया।

बता दें कि जरनैल सिंह भिंडरांवाले एक खूँखार खालिस्तानी आतंकी था। वह 20000 से अधिक हिंदू और सिखों की हत्या के लिए जिम्मेदार था। हालाँकि, अलगाववादी खालिस्तानी भिंडरांवाले को संत बताकर उसका महिमामंडन करते रहते हैं।

जोधपुर जेल में कैदी पर हमला, दावा- धर्मांतरण का डाल रहे थे दबाव, बाँट रहे हिंदू विरोधी किताबें: जेलर ने बताया कैदियों के बीच का झगड़ा

राजस्थान के जोधपुर सेंट्रल जेल में सुभाष नाम के एक बंदी पर हमले का मामला सामने आया है। सुभाष का दावा है कि उस पर धर्मांतरण का दबाव डाला जा रहा था। जेल के भीतर हिंदू विरोधी किताबें बाँटी जाती है। वकार और अशरफ सहित 6 लोगों पर उसने हमले का आरोप लगाया है। ये सभी आतंकवाद के आरोपों में जेल में बंद हैं।

घटना रविवार (29 जनवरी 2023) की है। सुभाष का इलाज चल रहा है। जोधपुर पुलिस ने जाँच की बात कही है। दैनिक भास्कर ने जेलर के हवाले से घटना को कैदियों के बीच का झगड़ा बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जोधपुर सेंट्रल जेल के वार्ड नंबर 15 में बंद सुभाष विश्नोई नाम के एक बंदी ने आरोप लगाया है कि लगभग डेढ़ माह से उस पर अशरफ और वकार इस्लाम कबूलने का दबाव बना रहे थे। इससे वह मानसिक तनाव में था। आरोप के मुताबिक रविवार सुबह 11 बजे जब वह अपनी बैरक से बाहर निकला तब अशरफ और वकार सहित आधे दर्जन बंदियों ने उस पर हमला कर दिया। इस हमले में सुभाष की पसलियों में फैक्चर हो गया। साथ ही उसके हाथ और मुँह पर भी चोटें आईं हैं।

जेल प्रशासन को भी कठघरे में खड़ा करते हुए सुभाष ने कहा कि वह 3 दिनों से मौखिक तौर पर इसकी शिकायत अधिकारियों से कर रहा था। पीड़ित के मुताबिक उन्हें लिखित शिकायत के लिए कलम और कागज ही नहीं मिला। बताया जा रहा है कि जेलर राजपाल सिंह ने सुभाष को सुरक्षा का भरोसा दिया था। सुभाष का यह भी आरोप है कि जेल के अंदर हिन्दू धर्म के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। उसने आरोपित बंदियों पर अन्य बंदियों को हिन्दू धर्म विरोधी किताबें पढ़ाने का भी आरोप लगाया है। सुभाष पर हमला करने के आरोपित करीब 8 साल पहले ATS द्वारा आतंकी मामलों में पकड़े गए थे।

अशरफ और वकार के हमले में घायल सुभाष को जोधपुर के महात्मा गाँधी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। हालाँकि जेल प्रशासन ने पॉक्सो केस में बंद सुभाष के आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है। इस घटना पर जोधपुर पुलिस कमिश्नर ने DCP पूर्व से वर्तमान कार्रवाई की जानकारी तलब की है।