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IPL 2023 ऑक्शन: 9 गुना अधिक भाव पर बिके हैरी ब्रूक, लेकिन चर्चा काव्या मारान की, नेटिजन्स बोले- वो स्त्री है कुछ भी कर सकती है

इंडियन प्रीमियर लीग 2023 (IPL 2023) की नीलामी में सभी टीमें अपनी जरूरतों के हिसाब से प्लेयर्स को ट्रेड करती नजर आ रही हैं। इस बीच सनराइजर्स हैदराबाद की ऑक्शन टेबल पर नजर आने वाली काव्या मारान का नाम (#KavyaMaran) ट्विटर से लेकर सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड कर रहा है।

कौन हैं काव्या मारान?

इससे पहले काव्या मारान आईपीएल 2022 की मेगा नीलामी में भी ऑक्शन टेबल पर नजर आईं थीं। तब, बहुत सारे क्रिकेट फैंस इस मिस्ट्री गर्ल को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा कर रहे थे। ठीक इसी तरह आईपीएल 2023 की नीलामी में भी काव्या को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है।

दरअसल, काव्या मारान सन ग्रुप (Sun Group) के मालिक कलानिधि मारान की बेटी हैं। कलानिधि मारान सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के मालिक हैं। वहीं, काव्या मारान सनराइजर्स में CEO पद पर हैं। इसके अलावा, वह सन टीवी नेटवर्क के ओटीटी प्लेटफॉर्म के सन नेक्स्ट (Sun NXT) की भी प्रमुख हैं।

ट्रेंड पर क्यों हैं काव्या मारान?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर काव्या मारान के ट्रेंड होने की पहली वजह यह है कि लोग जानना चाहते हैं कि आखिर वह कौन लड़की है जो सनराइजर्स के लिए प्लेयर्स को ट्रेड कर रही है। वहीं, दूसरी वजह यह है कि काव्या ने इंग्लैंड के युवा बल्लेबाज हैरी ब्रूक (Harry Brook) को 13.25 करोड़ रुपए की कीमत पर खरीदा है। यह कीमत ब्रूक के बेस प्राइस 1.5 करोड़ से करीब 9 गुना अधिक है। वहीं, उन्होंने मयंक अग्रवाल के लिए 8.25 करोड़ रुपए की बोली लगाई है। ऐसे में, नेटिजन्स ने काव्या मारान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है। कुछ लोगों ने कहा कि वो स्त्री है कुछ भी कर सकती है तो किसी ने उनसे पूछा कि आखिर वो क्या कर रही हैं।

हैरी ब्रूक को 13.25 करोड़ रुपए में खरीदने को लेकर सिद्धार्थ पटेल नामक यूजर ने मीम शेयर करते हुए ट्वीट किया है, “जब काव्या मारान ने हैरी ब्रूक को 13 करोड़ में खरीदा तब सनराइजर्स के फैंस काव्या को कहते हैं- आप ओवर मोटिवेट हो गए हो थोड़ा प्रैक्टिकल होकर सोचो।”

Rampy नामक यूजर ने एक मीम शेयर किया। इसमें हैरी ब्रूक को काव्या मारान की गोद में दिखाया गया है। यूजर ने ट्वीट कर लिखा, “अगली पीढ़ी का सुपर स्टार यहाँ है, हैरी ब्रूक..”

Vaibhav walde नामक यूजर ने ट्वीट किया, “अगर इस बंदी को शिद्दत से चाहूँगा तो मिलेगी क्या”?

IPL 2023 की नीलामी में काव्या मारान द्वारा प्लेयर्स पर पैसा लुटाने को लेकर Jal Sain नामक ट्विटर यूजर ने लिखा, हैरी ब्रूक 13.25 करोड़ कुछ ज्यादा नहीं हो गया”

कुछ अन्य यूजर्स ने मीम शेयर करते हुए काव्या मारान को ट्रोल किया है::

बता दें कि इस बार आईपीएल नीलामी में सबसे महंगे बिकने वाले खिलाड़ी सैम कुर्रन हैं। उन्हें पंजाब किग्स ने 18.5 करोड़ रुपए में खरीदा है।

‘केंद्र सरकार ने राम सेतु के अस्तित्व से किया इनकार’: द टेलीग्राफ ने मंत्री के बयान से की छेड़छाड़, जानें संसद में क्या कहा गया

अंग्रेजी में प्रकाशित होने वाले दैनिक समाचार पत्र ‘द टेलीग्राफ’ ने हाल ही में ‘नो कन्क्लूसिव प्रूफ ऑफ राम सेतु: गवर्नमेंट इन पार्लियामेंट’ टाइटल के साथ एक रिपोर्ट प्रकाशित की। टेलीग्राफ के इस टाइटल को देखने के बाद ऐसा लगता है कि केंद्र ने भगवान श्री राम की सेना द्वारा भारत को श्रीलंका से जोड़ने वाले ऐतिहासिक पुल राम सेतु के अस्तित्व को नकार दिया है।

दरअसल, भाजपा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने राम सेतु को लेकर संसद में मौखिक रूप से एक सवाल पूछा था। उन्होंने कहा था, वह जानना चाहते हैं कि सरकार भारत के इतिहास का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने के लिए कोई प्रयास कर रही है। उनके इस सवाल को लेकर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने जवाब दिया था।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के इसी जवाब को कोट करते हुए टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि केंद्र सरकार ने भारत और श्रीलंका के बीच बने राम सेतु के अस्तित्व से इनकार किया है।

क्या डॉ. जितेंद्र सिंह ने राम सेतु के अस्तित्व को नकारा?

द टेलीग्राफ की हेडलाइन ने पूरी तरह से यह बताने की कोशिश की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही केंद्र सरकार ने राम सेतु के आस्तित्व को खारिज कर दिया है। हालाँकि, डॉ. जितेंद्र सिंह के जवाब में ऐसी कोई बात थी ही नहीं।

भाजपा सांसद कार्तिकेय शर्मा के सवाल का जवाब देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा था, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि वास्तव में अंतरिक्ष विभाग इसमें लगा हुआ है। राम सेतु के संबंध में उनके द्वारा यहाँ पूछे गए सवाल की बात करें तो इसकी खोज को लेकर हमारी कुछ सीमाएँ हैं। इसका बड़ा कारण यह है कि इस पुल का इतिहास 18,000 साल से अधिक पुराना है और यदि आप इतिहास को देखें, तो वह पुल लगभग 56 किमी लंबा था।”

उन्होंने यह भी कहा है, “इस बारे में जो चीजें मैं संक्षेप में कहने की कोशिश कर रहा हूँ वह यह है कि वहाँ मौजूद सटीक संरचना को दर्शाना बेहद मुश्किल है। लेकिन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ऐसी बातें सामने आईं हैं कि वे संरचनाएँ मौजूद हैं।”

केंद्रीय मंत्री डॉ. सिंह ने आगे कहा कि उपग्रह द्वारा ली गई फोटो से यह कहा जा सकता है, “स्थान में निरंतरता की एक निश्चित मात्रा का पता चला है जिसके माध्यम से कुछ अनुमान लगाया जा सकता है।”

उन्होंने राज्यसभा में यह भी कहा है, “हाँ कुछ हद तक, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (स्पेस टेक्नोलॉजी) के माध्यम से हम सेतु के टुकड़ों, द्वीपों और कुछ प्रकार के चूना पत्थर के ढेरों की खोज करने में सक्षम हुए हैं, जिन्हें निश्चित रूप से अवशेष या पुल के हिस्से नहीं कहा जा सकता।”

कुल मिलाकर देखें तो डॉ सिंह ने यह कहा है कि राम सेतु वहाँ पर मौजूद था। लेकिन, यह 18,000 वर्ष से अधिक पुराना है, इसलिए इस पुल के निर्णायक प्रमाण खोजने के लिए उपयोग किए गए साधन अब तक उपयुक्त परिणाम नहीं दे पाए हैं। डॉ जितेंद्र सिंह ने राम सेतु को खोजने में अपनी सीमाओं के बारे में बात कर रहे थे। हालाँकि, उन्होंने राम सेतु के अस्तित्व से इनकार नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि राम सेतु 56 किमी लंबा था और यह स्थान पर संरचनाओं की निरंतरता से पूरी तरह स्पष्ट है।

एएसआई ने राम सेतु के पानी के भीतर खोज से जुड़ी परियोजना को मंजूरी दी

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने पिछले साल राम सेतु से जुड़े एक शोध प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इस परियोजना में पानी के नीचे की खोज शामिल थी, जिसमें सेतु (पुल) की उम्र और इसके निर्माण से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है।

इस परियोजना को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अंतर्गत काम करने वाले केंद्रीय पुरातत्व सलाहकार बोर्ड द्वारा अप्रूव किया गया था। इस परियोजना को सीएसआईआर-राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, गोवा द्वारा प्रस्तुत किया गया था।

राम सेतु भारत के तमिलनाडु में पंबन द्वीप (जिसे रामेश्वरम द्वीप भी कहा जाता है) और श्रीलंका में मन्नार द्वीप के बीच शैलों की एक श्रृंखला है। भूवैज्ञानिक साक्ष्य के अनुसार, यह सेतु भारत और श्रीलंका के बीच एक प्राचीन संरचना है।

गुरुग्राम में फिर खुले में नमाज: बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने भगाया, कहा- हिंदुओं के खिलाफ रच रहे साजिश, कुछ दिन बाद बना लेंगे मजार

​हरियाणा के गुरुग्राम में एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करने का मामला सामने आया है। शुक्रवार (23 दिसंबर 2022) को सेक्टर-69 में खुले में नमाज पढ़े जाने का हिंदू संगठनों ने जमकर विरोध किया है। मौके पर पहुँचे बजरंग दल के कार्यकताओं ने जुम्मे की नमाज पढ़ने आए मुस्लिमों को यहाँ से खदेड़ कर भगा दिया। इस दौरान पुलिस पर मौजूद रही।

हिंदू संगठनों का आरोप है कि दूसरी जगहों से सैकड़ों लोगों को बुलाकर यहाँ खुले में नमाज पढ़वाई जा रही है। हिंदुओं के खिलाफ बड़ी साजिश रची जा रही है। खुले में नमाज पढ़ने के लिए यह जमीन नहीं दी गई है। ​हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का आदेश है कि कोई भी खुले में नमाज नहीं पढ़ सकता है। यहाँ कई लोग अन्य जिले से आए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिंदू संगठन के लोगों के कहना है कि मुस्लिम बाहर से आकर यहाँ नमाज पढ़ते हैं। मौलवी पलवल से यहाँ नमाज पढ़ाने आ रहा है। हर शुक्रवार को ये यहाँ आकर लैंड जिहाद कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा, “हम 15 सालों से यहाँ रह रहे हैं। थोड़े दिन बाद ये यहाँ मजार बनाकर कहेंगे की ये 25 साल पहले बनी थी। सीएम साहब के स्पष्ट आदेश है कि खुले में नमाज नहीं पढ़ सकते, इसके बावजूद ये लोग ऐसा कर रहे हैं।” बताया जा रहा है कि घटनास्थल पर दोनों पक्षों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।

वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस घटना का ​वीडियो खूब वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे वीडियो में बजरंग दल के कार्यकर्ता मुस्लिमों द्वारा खुले में नमाज पढ़ने को लेकर उनका विरोध कर रहे हैं। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कहा, “खुले में होने वाली 6 नमाजों को भी हटाया जाएगा। तुम्हें खुले में नमाज पढ़ने की अनुमति किसने दी है।” तभी एक अन्य कार्यकर्ता पीछे से कहता है कि ये लोग कह रहे हैं कि वे यहाँ 15 सालों से खुले में नमाज अदा कर रहे हैं, जबकि इस रोड को भी बने हुए 15 साल नहीं हुए हैं।

इसके बाद कार्यकर्ताओं ने कहा, “यहाँ 35 टुकड़े नहीं चलेंगे। ये उदयपुर नहीं है, गुड़गाँव है ये। गुड़गाँव की धरती है ये। दिन में पढ़ा करो तुम लोग नमाज। नमाज पढ़ने के लिए वहाँ से यहाँ आते हो। कहाँ है पुलिस प्रशासन।” इसके बाद सभी कार्यकर्ताओं ने पास में खड़ी पुलिस से इन पर कार्रवाई करने को कहा।

ध्यान दें पिछले साल 10 दिसंबर को हरियाणा CM मनोहर लाल खट्टर ने गुरुग्राम में खुले में नमाज पढ़ने के मामले पर कहा था, “अगर कोई अपनी जगह पर नमाज पढ़ता है, पाठ पढ़ता है उससे हमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन खुले में ऐसे कार्यक्रम नहीं होने चाहिए। नमाज पढ़ने का जो काम खुले में हुआ है, यह बिल्कुल भी सहन नहीं किया जाएगा।”

गौरतलब है कि पिछले साल भी गुरुग्राम में खुले में नमाज अदा करने को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ था। शुक्रवार (15 अक्टूबर, 2021) को गुरुग्राम सेक्टर-47 में स्थानीय हिंदू लोगों ने लगातार चौथे सप्ताह भजन-कीर्तन कर प्रदर्शन किया था।

सिक्किम में सैन्य ट्रक खाई में गिरा, 16 जवान बलिदान: सीमा चौकियों पर जा रहे थे सैनिक

उत्तरी सिक्किम (North Sikkim) में शुक्रवार (23 दिसंबर 2022) को एक दर्दनाक सड़क हादसे में सेना के 16 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए और 4 अन्य घायल हो गए। यह हादसा राजधानी गंगटोक से लगभग 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लाचेन से करीब 15 किलोमीटर दूर जेमा (Zema) में आज सुबह करीब 8 बजे हुआ। भारतीय सेना ने बतायाकि जवान ट्रक से काफिले के साथ चट्टेन से थांगू जा रहे थे, तभी यह हादसा हुआ।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिक्किम में हुए हादसे में भारतीय सेना के वीर जवानों के बलिदान पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पीएम ने कहा, “शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएँ। घायल जवान जल्द स्वस्थ हों।” दुर्घटना के तुरंत बाद बचाव कार्य शुरू किया गया।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, सभी घायलों को उत्तरी बंगाल के एक सैन्य अस्पताल में हवाई मार्ग से ले जाया गया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ट्वीट कर गहरा दुख जताया है।

राजनाथ सिंह ने कहा, “उत्तरी सिक्किम में एक सड़क दुर्घटना के कारण भारतीय सेना के जवानों के बलिदान होने का गहरा दुख हुआ। देश उनकी सेवा और प्रतिबद्धता के लिए हमेशा आभारी रहेगा। जवानों के परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएँ। हादसे में जो लोग घायल हुए हैं, उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूँ।”

चुंगथांग उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) अरुण थाटल के मुताबिक, सेना के वाहन में 20 लोग थे। ये सीमा चौकियों की ओर जा रहा था। ऐसा लगता है कि जेमा 3 क्षेत्र में एक तीव्र मोड़ को पार करते समय जवानों से भरा ट्रक सड़क से उतर गया और सैकड़ों फीट नीचे गिर खाई में गिर गया।

इस हादसे में सेना का ट्रक चकनाचूर हो गया है। यह तीन बसों के उस काफिले का हिस्सा था, जो चट्टेन से थांगू के लिए निकला था। बलिदान होने वालों में तीन जूनियर कमिशन ऑफिसर (JSO) और 13 जवान शामिल हैं।

सेना के 16 जवानों के पार्थिव शरीर को दुर्घटनास्थल से बरामद कर लिया गया है। लाचेन की एक पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर मौजूद थाटल ने कहा कि चार गंभीर रूप से घायल जवानों की स्थिति अज्ञात बनी हुई है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए गंगटोक के सरकारी एसटीएनएम अस्पताल ले जाया गया है, जिसके बाद इसे सेना को सौंप दिया जाएगा। पीड़ितों की रेजिमेंट का पता लगाया जाना बाकी है।

बिहार के भोजपुर में बैडमिंटन ट्रॉफी जीतने के बाद ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के लगाए गए नारे: मोहम्मद अरमान, तनवीर सहित 5 गिरफ्तार, अन्य लोगों को तलाश जारी

बिहार के भोजपुर (Bhojpur, Bihar) में कुछ लोगों ने पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक ट्रॉफी के साथ कुछ लड़कों की टोली पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हुए आगे बढ़ रही है।

इस मामले में पुलिस ने पाँच लड़कों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, अन्य लोगों की तलाश जारी है। दावा किया जा रहा है कि मामले से जुड़ा एक और वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें नारे लगाने वाले 2 लड़कों को पकड़ कर उनसे हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगवाए जा रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भोजपुर के कोईलवर इलाके के चाँदी में बैडमिंटन टूर्नामेंट का आयोजन किया गया था। बुधवार (21 दिसंबर 2022) को कोईलवर बनाम चाँदी के बीच फाइनल मुकाबला खेला गया, जिसमें चाँदी की टीम जीत गई। विजयी टीम के खिलाड़ी ट्रॉफी लेकर पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। दर्जनों नौजवान ट्रॉफी के साथ जुलूस निकालते हुए ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगा रहे थे। घटना के कुछ ही देर बाद इससे जुड़ा वीडियो वायरल होने लगा।

वायरल वीडियो के सही पाए जाते ही पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस ने अब तक 5 लड़कों को गिरफ़्तार किया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। जिन लोगों को गिरफ्तार किया या है उनमें मोहम्मद अरमान, मोहम्मद तनवीर आलम, कल्लू और सोनू शामिल हैं। पुलिस वायरल वीडियो से चिन्हित कर बाकियों की तलाश कर रही है। पूरे मामले पर एसपी संजय कुमार सिंह ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ एक्शन लिया जा रहा है।

वहीं, मामले से जुड़ा एक अन्य वीडियो भी वायरल हो रहा है। दावा है कि दूसरे वीडियो में पाकिस्तान के हक में नारे लगाने वाले नौजवानों को पकड़ कर उनसे हिन्दुस्तान जिंदाबाद और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगवाए जा रहे हैं। वायरल वीडियो चाँदी का ही बताया जा रहा है।

कश्मीर में पाकिस्तान का ड्रग्स रैकेट चला रहे थे 5 पुलिसकर्मी: 17 गिरफ्तारों में कारोबारी, ठेकेदार और नेता भी शामिल

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। नशीले पदार्थों की तस्करी के मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। ड्रग्स की यह तस्करी पाकिस्तान के जरिए हो रही थी। पुलिस ने कुपवाड़ा और बारामूला के विभिन्न इलाकों से से इस रैकेट से जुड़े 17 लोगों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार लोगों में 5 पुलिसकर्मी हैं। इसके अलावा एक स्थानीय नेता, एक ठेकेदार और एक कारोबारी भी गिरफ्तार लोगों में शामिल है। पुलिस ने 2 किलो हेरोइन भी बरामद की है।

जम्मू-कश्मीर के DGP दिलबाग सिंह ने बताया है, “इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, भले ही वे किसी भी विभाग के हों। हम ड्रग्स की इस चुनौती से उसी तरह निपटेंगे जैसे हमने आतंकवाद की चुनौती का सामना किया है।”

न्यूज 24 की रिपोर्ट के मुताबिक, कुपवाड़ा के SSP युगल मन्हास ने मॉड्यूल के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि एक पोल्ट्री दुकान के मालिक के बारे में सूचना मिली थी कि उसके घर में कुछ नशीला पदार्थ है। इसके बाद उसे ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया गया था। जाँच में खुलासा हुआ कि गिरफ्तार पोल्ट्री दुकान का मालिक ड्रग्स तस्करी के एक बड़े समूह का हिस्सा था। गिरफ्तार व्यक्ति ने कुछ ड्रग पेडलर्स और बारामूला जिले के कुछ सहयोगियों के नाम का खुलासा किया था।

SSP ने बताया कि इस ड्रग्स तस्करी रैकेट के भंडाफोड़ होने से कश्मीर में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संचालकों की सीधी संलिप्तता फिर से उजागर हुई है। दरअसल पाकिस्तान स्थित आतंकवादी हैंडलर शाकिर अली खान भारत में अपने बेटे तहमीद खान को नशीले पदार्थों का आपूर्ति करता था।

इससे पहले गुरुवार (22 दिसंबर 2022) को पुलिस ने सुरक्षा बलों के साथ मिलकर कुपवाड़ा जिले के वन क्षेत्र में आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन (HM) के पाँच आतंकवादी सहयोगियों को गिरफ्तार किया था। सुरक्षाबलों ने उनके पास से बड़ी संख्या में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया था।

‘खुद को ईसाई कहने में गर्व’- मुख्यमंत्री का बेटा और DMK नेता ने कहा, बेटी जब भगवान गणेश की मूर्ति पकड़ी थी तो बोला था नास्तिक

तमिलनाडु (Tamil Nadu) में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) सरकार पर द्रविड़ मॉडल के नाम पर ईसाई धर्म को बढ़ावा देने के आरोप लग रहे हैं। पार्टी ने कई मौकों पर इसे साबित भी किया है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (MK Stalin) के बेटे उधयनिधि स्टालिन ने गुरुवार (22 दिसंबर 2022) को यह कहकर विवाद खडा कर दिया कि वह और उनकी पत्नी ईसाई हैं। उन्होंने कहा कि सुनकर संघी आग-बबूला हो जाएँगे। उधयनिधि को हाल ही में राज्य का युवा कल्याण और खेल विकास मंत्री नियुक्त किया गया है।

चेन्नई के हार्बर निर्वाचन क्षेत्र में एक क्रिसमस समारोह में DMK नेता ने कहा कि उन्हें खुद को ईसाई कहने में गर्व है और यह जानने के बाद संघी आग बबूला हो जाएँगे। वह यहीं नहीं रूके। उन्होंने कहा, “हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HRCE) मंत्री पीके शेखर बाबू ‘हैललूजाह (Hallelujah)’ कह रहे हैं। मैं खुद को ईसाई बता रहा हूँ। मैं यह भी कहूँगा कि मैं मुस्लिम हूँ।”

उधयनिधि ने कहा, ”मैं यहाँ एग्मोर के डॉन बॉस्को स्कूल में पढ़ा। मैंने अपनी डिग्री लॉयोला कॉलेज से प्राप्त की। मुझे एक ईसाई महिला (किरुथिगा उधयनिधि) से प्यार हो गया और मैंने उससे शादी कर ली। इस आधार पर मैं इस क्रिसमस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर खुश हूँ।”

उधयनिधि स्टालिन ने आगे कहा, “हर कोई पूछ रहा है कि यह ‘द्रविड़ मॉडल’ शासन क्या है। हमारे प्रमुख बार-बार ‘द्रविड़ मॉडल शासन’ का उल्लेख करते हैं। मैं आपको बताता हूँ। HR&CE मंत्री ‘हैललूजाह’ कहते हैं। इसे द्रविड़ मॉडल शासन के रूप में जाना जाता है। उन्होंने रमजान के लिए और भी बड़ी योजना बनाई थी। वह बाहर माला लेकर घूम रहे होंगे। यह सामाजिक न्याय का शासन है। इन सब चीजों को हमें पेरियार, अन्ना, कलैगनार और अंबाझगन ने हमें सिखाया है। यही ‘द्रविड़ मॉडल शासन’ है, जिसे हमारे प्रमुख लागू कर रहे हैं।”

एक ट्वीटर यूजर ने उधयनिधि के बयान का वीडियो ट्वीट किया, जिसके कैप्शन में उन्होंने लिखा, “उधयनिधि स्टालिन ने अंततः स्वीकार किया कि वह गर्व से भरे एक ईसाई हैं। डीएमके सबसे बड़ा मिशनरी माफिया है। जागो हिन्दुओं जागो।”

उधयनिधि भले ही खुद को ईसाई बता लें या मुस्लिम बता लें, वह वास्तव में अपनी ही बात को काट रहे हैं। उधयनिधि स्टालिन ने साल 2020 में दावा किया था कि वह और उनकी पत्नी नास्तिक हैं।

दरअसल उन्होंने सोशल मीडिया पर भगवान गणेश की मूर्ति पकड़े हुए अपनी बेटी की तस्वीर साझा की थी, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया था। उधयनिधि ने तब एक बयान में स्पष्ट किया था कि भगवान की मूर्ति पकड़कर फोटो खिंचवाने की इच्छा उनकी बेटी की थी। वह और उनकी पत्नी किसी भी भगवान में विश्वास नहीं करते हैं।

वास्तव में यह पहली बार नहीं है कि DMK के किसी नेता ने ईसाई धर्म का महिमामंडन किया है। 28 जुलाई 2022 को तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष एम अप्पावु ने कहा था कि तमिलनाडु में डीएमके की सरकार ईसाइयों के कारण ही बनी है।

उन्होंने कहा था कि डीएमके सरकार ईसाइयों के लिए और ईसाइयों द्वारा है। स्पीकर ने तब ईसाई कैथोलिक मिशनरियों को डीएमके के सत्ता में आने की प्रार्थना करने के लिए धन्यवाद दिया था।

‘शराब को पेप्सी समझ पीने पर अल्लाह माफ कर देगा, लेकिन क्रिमसम की बधाई देने पर नहीं’: जो कट्टरपंथी जाकिर नाइक ने कहा वही इस्लामी विद्वान कह रहे, बता रहे गैर-इस्लामी

क्रिसमस और अंग्रेजी नववर्ष से पहले लोग छुट्टियाँ मना रहे हैं। इस बीच इंडोनेशिया के एक मौलवी ने कहा है कि मुस्लिमों को ‘मेरी क्रिसमस’ कहते हुए क्रिसमस की शुभकामनाएँ देने से बचना चाहिए। मौलवी मारूफ अमीन ने बुधवार (21 दिसंबर 2022) को कहा, “यह अभी भी बहस का विषय है कि दूसरों को शुभकामनाएँ देना हलाल है या हराम। इसलिए, बेहतर है कि मुस्लिम इससे दूर रहें और मेरी क्रिसमस न कहें।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, मौलवी मारूफ अमीन इंडोनेशिया में इस्लामिक संस्था का अध्यक्ष है। मौलवी ने कहा है कि मुस्लिम ‘हैप्पी न्यू ईयर’ विश कर सकते हैं, लेकिन उन्हें दूसरों को ‘मेरी क्रिसमस’ कहने से बचना चाहिए। उसने यह भी कहा कि मुस्लिमों के लिए क्रिसमस पार्टियों या समारोहों में शामिल होना ‘हराम’ है। 

मौलवी ने कहा है, “MUI ने मुस्लिमों को इस तरह के कार्यक्रमों में भाग लेने से मना करने का आदेश जारी किया है, क्योंकि ऐसे कार्यक्रम धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। इसलिए किसी भी मुस्लिम के लिए इसमें हिस्सा लेना हराम होगा।”

मौलवियों ने कुरान का हवाला देकर ‘मेरी क्रिसमस’ कहना बताया हराम

क्रिसमस से पहले ‘द इस्लामिक इंफॉर्मेशन’ द्वारा प्रकाशित की गई एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लाम में क्रिसमस सहित किसी भी गैर-मुस्लिम त्योहार को मनाना ‘हराम’ है। ईसाई यीशु (ईश्वर के पुत्र) के जन्म को मनाते हैं। क्रिसमस का जश्न शिर्क (पाप) के दायरे में है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह इस्लाम में सबसे दंडनीय अपराधों में से एक है।

रिपोर्ट में कुरान की उन आयतों का भी हवाला दिया गया है, जो क्रिसमस मनाने पर रोक लगाती हैं। कुरान की आयत को कोट करते हुए कहा गया है, “ऐ किताब के मानने वालों! अपने विश्वास के संबंध में अति न करें; सत्य के सिवा अल्लाह के बारे में कुछ मत कहो। मरियम के पुत्र यीशु मसीह अल्लाह के दूत से अधिक नहीं थे और मरियम के माध्यम से उनके शब्दों की पूर्ति से ज्यादा कुछ नहीं था। केवल एक ईश्वर है और वह अल्लाह है। उसकी जय हो। वह एक बेटा होने से बहुत ऊपर है।”

(फोटो साभार: TheIslamicInformation.com)

‘मेरी क्रिसमस’ के जवाब में ‘वा अलैकुम अस-सलाम’ कहें मुसलमान

इससे पहले, जिम्बाब्वे के इस्लामी विद्वान मुफ्ती मेंक ने कहा था कि मुस्लिमों को जबरदस्ती मेरी क्रिसमस की शुभकामनाएँ देने की जरूरत नहीं है। लेकिन, अगर कोई उन्हें मेरी क्रिसमस कहता है तो उन्हें ‘वा अलैकुम अस-सलाम’ कहना चाहिए।

5 साल पहले शेयर किए गए इस वीडियो में मुफ़्ती मेंक को इस्लाम को ‘गलत’ तरीके से चित्रित करने के लिए मीडियाकर्मियों की खिंचाई करते हुए भी देखा जा सकता है। वीडियो में कहा है, “मेरी क्रिसमस की बधाई नहीं देने का मतलब यह नहीं है कि मुस्लिम ईसाइयों का अपमान करते हैं।”

सऊदी के मौलाना आसिम अलहकीम ने बताया है हराम

इससे पहले ऐसे कई वाकये सामने आए हैं, जब दुनिया भर के कई इस्लामी मौलवियों और विद्वानों ने मुस्लिम समुदाय को क्रिसमस नहीं मनाने और ‘मेरी क्रिसमस’ कहने से बचने का निर्देश दिया था। साल 2018 में असिम अलहकीम नामक एक सऊदी मौलवी ने ट्विटर पर कहा था कि किसी को ‘मेरी क्रिसमस’ की बधाई देना इस्लाम में हराम है। अलहकीम ने ट्वीट किया था, “मेरी क्रिसमस कहने का मतलब है कि आप स्वीकार करते हैं कि अल्लाह का एक बेटा है। कोई मुस्लिम ऐसा नहीं करेगा।”

एक अन्य ट्वीट में मौलवी ने स्पष्ट करते हुए कहा था कि इस मुद्दे पर उनके दृष्टिकोण का उद्देश्य दुश्मनी को बढ़ावा देना या साथ में रहने पर रोक लगाना नहीं था। मौलवी ने ट्वीट कर कहा था, “बधाई नहीं देने का मतलब यह नहीं है कि हम उनसे (ईसाइयों से) नफरत करते हैं या वे हमारे दुश्मन हैं या फिर उनके (यीशु के) होने से इनकार कर रहे हैं। हम अपने धर्म का पालन कर रहे हैं और वे अपने धर्म का पालन कर रहे हैं। हम उनके अधिकार का सम्मान करते हैं और उन्हें भी हमारे अधिकार का सम्मान करना चाहिए।”

‘क्रिसमस की बधाई देना हत्या से बड़ा पाप’: इस्लामी मौलवी

एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटिश कोलंबिया के एक इस्लामिक मौलवी शेख यूनुस कथराडा ने कहा था कि जो मुस्लिम ईसाइयों को ‘मेरी क्रिसमस’ की बधाई देते हैं, वे हत्या से भी गंभीर पापों के दोषी हैं। साल 2018 में कथराडा ने ब्रिटिश कोलंबिया में एक भाषण देते हुए कहा था, “ऐसे लोग हैं जो उन्हें (ईसाइयों को) ‘मेरी क्रिसमस’ कहेंगे। आप उन्हें किस बात की बधाई दे रहे हैं? क्या ये आपके भगवान के जन्म पर बधाई है? क्या यह एक मुस्लिम को मंजूर होगा? क्या अब आप उनकी मान्यताओं का स्वीकृति दे रहे हैं?”

मौलवी ने कहा था, “यदि कोई व्यक्ति बहुत बड़ा पाप कर रहा है, जैसे कि व्यभिचार, ब्याज लेना, झूठ बोलना या हत्या। कोई अन्य व्यक्ति गैर-मुस्लिमों को उनके त्योहारों पर बधाई दे रहा है तो वह इनसे कहीं अधिक बड़ा पाप कर रहा है।”

केरल के इस्लामी स्कॉलर शम्सुद्दीन फरीद ने क्रिसमस को बताया ‘गैर-इस्लामी’

केरल के एक इस्लामी मौलवी शम्सुद्दीन फरीद ने साल 2016 में क्रिसमस और ओणम को गैर-इस्लामिक त्यौहार कहकर विवाद खड़ा कर दिया था। उसने मुस्लिमों को क्रिसमस के दौरान होने वाले समारोहों से दूर रहने का भी आदेश दिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, फरीद केरल में एक ऐसे इस्लामी संगठन का अनौपचारिक प्रवक्ता है, जो केरल के युवाओं के बीच कट्टरता फैलाने के लिए भी जिम्मेदार है।

‘मेरी क्रिसमस’ विश करना 100% गलत: इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक

फरार कट्टरपंथी जाकिर नाइक ने अप्रैल 2019 में एक वीडियो में कहा था कि मुस्लिमों द्वारा मेरी क्रिसमस की शुभकामना देना 100% गलत है। उसने कहा था, “अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए आप गलत साधनों का उपयोग नहीं कर सकते। जो उनके लिए हराम है, वह आपके लिए भी हराम है। जब आप उन्हें मेरी क्रिसमस की शुभकामनाएँ दे रहे हैं तो आप मान रहे हैं कि वह ईश्वर का पुत्र है और वह शिर्क (पाप) है।”

भगोड़े जाकिर नाइक ने यह भी कहा था, “यदि आप नहीं जानते कि क्रिसमस क्या है और किसको बधाई दे रहे हैं तो अल्लाह आपको क्षमा कर सकता है। अगर आप गलती से पेप्सी समझकर शराब पीते हैं तो अल्लाह आपको माफ कर सकता है, लेकिन अगर आप यह जानने के बाद भी कि क्रिसमस क्या है, सिर्फ संबंध बनाने के लिए ऐसा कर रहे हैं तो आप जहन्नम (नरक) में अपनी जगह बना रहे हैं।”

बीते कई वर्षों से इस्लामी मौलवियों और विद्वानों ने ईसाई त्योहार क्रिसमस को ‘हराम’ कहा है। मौलवियों ने मुस्लिमों को निर्देश दिया है कि वे दूसरों को ‘मेरी क्रिसमस’ की शुभकामनाएँ न दें। क्रिसमस का पेड़ भी मुस्लिमों के लिए हराम है, क्योंकि क्रिसमस मनाना इस्लाम में हराम है।

ब्यूटी पार्लर वाली जाहिला बेगम का हनीट्रैप: एक ने ₹50 लाख देकर किया सुसाइड, दूसरे से ₹30 लाख वसूले; अब गैंगस्टर एक्ट में एक्शन

उत्तर प्रदेश के बांदा में एक महिला को लखनऊ के युवक को हनी ट्रैप में फँसाकर 30 लाख रुपए वसूलने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस महिला का नाम जाहिला बेगम है। वह ब्यूटी पार्लर चलाती है। यह पहली बार नहीं है, जब जाहिला ने किसी शख्स को हनी ट्रैप में फँसाया है। इससे पहले उसने इस साल मई में एक सर्राफा व्यापारी को भी अपना शिकार बनाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिजनेसमैन शैलेश जड़िया को प्रेम जाल में फँसाने के बाद जाहिला ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसका वीडियो बना लिया। इसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देने लगी। ब्लैकमेल कर उसने व्यापारी से करीब 50 लाख रुपए वसूले थे। बाद में वह और बड़ी रकम की माँग कर रही थी। बार-बार धमकियों से तंग आकर व्यापारी ने आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने इस मामले की जाँच करने के बाद जाहिला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन जेल से बाहर आने के बाद वह फिर इसी काम में लग गई।

जेल से छूटने के बाद वह सोशल मीडिया पर फिर एक्टिव हो गई। इस बार उसने लखनऊ के रहने वाले इरसाद शहाद खान को अपने जाल में फँसाया। वह उससे चैटिंग करने लगी। इसके बाद दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए। बाद में महिला ने शहाद के साथ भी वही किया, जो वह अपने हर शिकार के साथ करती थी। उसने शारीरिक संबंध बनाकर वीडियो बनाया। फिर खान को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। उससे करीब 30 लाख रुपए वसूले। कुछ रिपोर्ट में यह रकम 40 लाख रुपए बताई गई है। महिला की ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवक ने लखनऊ में मामला दर्ज कराया। कुछ मीडिया रिपोर्ट में गिरफ्तार की गई महिला का नाम राहिला बेगम बताया जा रहा है।

बांदा के अपर पुलिस अधीक्षक लक्ष्मी निवास मिश्रा ने बताया कि इस महिला ने सर्राफा व्यापारी को अपने प्रेमजाल में फँसाकर काफी पैसा ऐंठा था। इससे तंग आकर उसने आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में उसको जेल भेजा गया था। अब दूसरा प्रकरण सामने आया है, जिसमें एक युवक से फेसबुक के जरिए उसका सम्पर्क हुआ था। सम्पर्क के बाद दोनों काफी निकट आ गए। बाद में युवक को पता चला कि महिला शादीशुदा है। महिला के पास युवक की आपत्तिजनक तस्वीरें और फोटो थी, जिसके चलते उसने उससे 30 से 40 लाख रुपए अपने खाते में डलवा लिए, जिसके प्रमाण भी मिले हैं। महिला को जेल भेजा गया है और छानबीन की जा रही है। वहीं इस मामले में SP अभिनंदन ने कहा कि आरोपित महिला के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।

चीन में 10 लाख नए केस, रोज 5000 मौतें: ब्रिटिश रिसर्च कंपनी ने बताया, चीन कर रहा था 4000 कोरोना+ होने का ही दावा

चीन की सरकार (Chinese Government) के लाख प्रयासों के बावजूद वहाँ की हकीकत दुनिया से छुप नहीं पा रही है। ब्रिटेन स्थित रिसर्च कंपनी एयरफिनिटी (Airfinity) के अनुसार, चीन में हर दिन कोरोना इंफेक्शन (Corona) के लगभग 10 लाख नए मामले आ रहे हैं। वहीं, हर रोज 5,000 लोगों की मौत हो रही है। उधर, चीन की सरकार देश में कोरोना (Covid-19) के सिर्फ 4,000 केस बता रही है।

एयरफिनिटी का दावा है कि उसने चीन के क्षेत्रीय आँकड़ों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। फर्म का दावा है कि चीन में मौजूदा दैनिक संक्रमण एक मिलियन (10 लाख) से अधिक है, जो जनवरी के आखिर तक 37 लाख तक पहुँच सकती है। एयरफिनिटी का अंदाजा है कि कोरोना के इस लहर से चीन में 10 लाख से भी ज्यादा लोगों की मौत हो सकती है। बता दें कि चीन के बीजिंग और ग्वांगडोंग में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं।

चीन के सरकारी आँकड़ों की बात करें तो पिछले एक हफ्ते में कोरोना के 1800 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि सिर्फ 7 लोगों की मौत हुई है। दूसरी तरफ, चीन के इन खोखले दावों की पोल वहीं के लोग खोल रहे हैं। चीन की ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट जेनिफर जेंग ने एक क्लास रुम की तस्वीर साझा की है, जिसमें कुछ बच्चे ड्रिप लगाकर पढ़ाई कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि इन बच्चों को कोरोना संक्रमण है।

एक अन्य पोस्ट में कब्रिस्तान में लंबी कतार दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि अंतिम संस्कार के लिए 20 दिन की वेटिंग है। जेनिफर के एक पोस्ट के मुताबिक, चीन शवों को जलाने के लिए भट्टियों का निर्माण करवा रहा है। भट्टियाँ बनाने की ठेकेदारी एक सरकारी चीनी कंपनी को दी गई है।

इधर, चीन में कोविड मामलों में वृद्धि के बीच एक बार फिर से राष्ट्रपति शी जिनपिंग के खिलाफ विरोध शुरू हो गया है। लोग राष्ट्रपति से इस्तीफा माँग कर रहे हैं। दरअसल, चीन की ‘ज़ीरो कोविड पॉलिसी’ का स्थानीय लोग जोर-शोर से विरोध कर रहे थे। इसके बाद चीन की सरकार ने जीरो कोविड पॉलिसी में ढील देने का निर्णय लिया था। ढील देते ही चीन में कोरोना विस्फोट हो गया है। कहा जा रहा है कि सच्चाई बाहर न आ सके इसके लिए चीन में बड़े पैमाने पर परीक्षण बंद कर दिया गया है।