Home Blog Page 2153

अब नाक से ले सकेंगे कोरोना की वैक्सीन, मोदी सरकार ने दी हरी झंडी: बूस्टर डोज के तौर पर लगेगी, जानिए कैसे काम करेगी

चीन में कोरोना (Corona Virus) के विस्फोटक हालात से पूरी दुनिया चिंतित है। नए वैरिएंट के कुछ केस भारत में भी मिले हैं। इसे देखते हुए नए साल और आगामी त्योहारों के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय नई एडवाइजरी जारी करेगी। इस बीच भारत सरकार ने कोरोना के नेजल वैक्सीन (Nasal vaccine) को मंजूरी दे दी है। शुक्रवार (23 दिसंबर 2022) से ही यह भारत के कोविड 19 वैक्सीनेशन प्रोग्राम में शामिल हो गया है।

नेजल वैक्सीन को भारत बायोटेक ने तैयार किया है। इस वैक्सीन का नाम iNCOVACC है। इसे बूस्टर डोज के तौर पर लगाया जा सकेगा। नेजल वैक्सीन शुरुआत में प्राइवेट अस्पतालों में लगाई जाएगी। इसे 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को बूस्टर डोज के रूप में लगाया जा जाएगा। भारत बायोटेक की यह वैक्सीन देश की पहली ऐसी बूस्टर खुराक होगी, जिसमें टीका नहीं लगाया जाएगा, बल्कि य​ह नाक के द्वारा स्प्रे करके दी जाएगी।

पहले इस वैक्सीन का नाम BBV154 रखा गया था। सितंबर में ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया DCGI ने इसके आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी ने लगभग 4,000 वॉलिटिंयर पर नेजल वैक्सीन का क्लिनिकल टेस्ट किया था। किसी पर भी कोई भी साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिला। इस साल अगस्त में इसके तीसरे क्लीनिकल ट्रायल के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि नेजल वैक्सीन के इस्तेमाल से कोई भी जोखिम नहीं है। इस वैक्सीन को काफी किफायती और फ्लू व कोरोना वायरस इंफेक्शन से लड़ने वाला बताया गया है।

किस तरह काम करेगी नेजल वैक्सीन

कोरोना के अलावा कई तरह के वायरस म्युकोसा के जरिए हमारे शरीर में जाते हैं। नेजल वैक्सीन म्युकोसा में इम्युन पैदा करती है। यह (म्युकोसा) एक तरह का चिपचिपा पदार्थ होता है, जो नाक, फेफड़ों, पाचन तंत्र में पाया जाता है। जो लोग पहले वैक्सीन की दो डोज ले चुके हैं, उन्हें ही बूस्टर डोज के तौर पर यह वैक्सीन लगाई जाएगी।

गौरतलब है कि चीन के साथ दुनिया भर में कोरोना के कारण हाहाकार मचा हुआ है। भारत में भी ओमिक्रोन बीएफ.7 की दस्तक दे चुका है। इसको देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (22 दिसंबर 2022) को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी। बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है। इस दौरान उन्होंने भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनने, टेस्टिंग बढ़ाने और जीनोमिक सीक्वेंसिंग का आग्रह किया था।

दक्षिण कोरिया में मस्जिद बनाने को लेकर बवाल: स्थानीय लोगों ने सुअर भूनकर किया विरोध, पाकिस्तानी के हमले के बाद से तनाव

दक्षिण कोरिया (South Korea) में प्रवासी मुस्लिमों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस बीच यहाँ डेगू के दहेयोन-डोंग में रहने वाले लोग प्रवासी मुस्लिमों द्वारा इलाके में बनाई जा रही मस्जिद का विरोध कर रहे हैं। कोरिया हेराल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, विगत गुरुवार (15 दिसंबर 2022) को स्थानीय लोग निर्माणाधीन मस्जिद के पास इकट्ठा हुए और वहाँ उन्होंने सुअर का मांस पकाकर पार्टी की।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दहेयोन-डोंग इलाके में बन रही मस्जिद का विरोध करने के लिए स्थानीय लोगों ने ‘डेगू मस्जिद विरोधी समिति’ का गठन किया है। यह समिति ही अप्रवासी मुस्लिमों द्वारा बनाई जा रही मस्जिद का विरोध कर रही है।

सोशल मीडिया पर शेयर की गई बारबेक्यू पार्टी (आउटडोर पार्टी) की तस्वीरों में एक छोटी मेज पर सुअर का सिर दिखाया गया है। तस्वीरों में दहेयोन-डोंग के लोगों को सुअर का मांस भूनते और उससे बने कई व्यजनों का लुफ्त उठाते देखा गया। बता दें कि सुअर को इस्लाम में हराम माना जाता है।

स्थानीय लोगों ने क्यूंगपुक नेशनल यूनिवर्सिटी के गेट के पास आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले एक पाकिस्तानी छात्र ने स्थानीय कोरियाई पर हमला किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तानी छात्र द्वारा किए गए हमले को हल्के में नहीं लिया जाएगा।

मस्जिद निर्माण का विरोध कर रही ‘डेगू मस्जिद विरोधी समिति’ ने कहा, “एक स्थानीय निवासी ने मस्जिद निर्माण कर रहे व्यक्ति का टेंट हटाने की कोशिश की थी। पाकिस्तानी छात्र द्वारा उस पर हमला किया गया, लेकिन पाकिस्तानी छात्र पर छोटा-मोटा अपराध का आरोप लगाया गया।” यह आरोप तब लगाया जाता है, जब कोर्ट द्वारा किसी औपचारिक परीक्षण के बिना छोटे अपराधों के लिए जुर्माना लगाया जाता है।

कोरिया हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कानून व्यवस्था बनाए रखने और दोनों गुटों के बीच किसी प्रकार की झड़प को रोकने के लिए डेगू उत्तरी जिला पुलिस स्टेशन ने मस्जिद के पास इमरजेंसी टीम को तैनात किया है। गौरतलब है कि इससे पहले इसी साल अक्टूबर में मस्जिद निर्माण का विरोध कर रहे लोगों ने मस्जिद के बगल में सुअर का कटा हुआ सर रखकर विरोध किया था।

दक्षिण कोरिया के डेगू शहर के दहेयोन-डोंग के स्थानीय लोग और अप्रवासी मुस्लिमों के बीच संघर्ष लंबे समय से चला आ रहा है। इस विवाद का कारण एक मस्जिद है, जिसका निर्माण 2020 के अंत में शुरू हुआ था। नाटकों और पॉप संस्कृति के लिए मशहूर दक्षिण कोरिया तेजी से बदल रही जनसांख्यिकीय चुनौती का सामना कर रहा है। साल 2020 के आँकड़ों के अनुसार, ‘अप्रवासी’ अब कुल आबादी का 3.3% हैं और उनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।

दहेयोन-डोंग में मस्जिद के बनने से स्थानीय दक्षिण कोरियाई डरे हुए हैं और वह अपने घरों को छोड़ने के लिए भी तैयार हैं। यहाँ की क्यूंगपुक नेशनल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले मुस्लिम छात्र 2014 से नमाज अदा करने के लिए दहेयोन-डोंग में एक घर का इस्तेमाल कर रहे थे।

जनवरी 2020 में मस्जिद निर्माण का हुआ था विरोध (फोटो साभार: द न्यूयॉर्क टाइम्स)

हालाँकि, साल 2020 में 6 मुस्लिमों (पाकिस्तान और बांग्लादेश से) के एक ग्रुप द्वारा यहाँ जमीन खरीदे जाने के बाद से यहाँ सब कुछ बदलने लगा। उसी साल दिसंबर में इन मुस्लिमों ने स्थानीय अधिकारियों की अनुमति लेकर 20 मीटर लंबी मस्जिद बनानी शुरू कर दी। अप्रवासी मुस्लिमों का तर्क था कि अब तक जहाँ वह नमाज पढ़ रहे थे, वहाँ एक बार में केवल 150 लोग ही इकट्ठे हो सकते हैं।

स्थानीय कोरियाई लोगों की शिकायतें

स्थानीय कोरियाई लोगों का कहना है कि बीते कई वर्षों से वे लोग मुस्लिमों के साथ ही रह रहे हैं। अब तक उनसे कोई समस्या नहीं रही, लेकिन अब मस्जिद बन जाने से नमाज से होना वाला शोर बढ़ जाएगा। लोगों की यह भी आशंका है कि मस्जिद निर्माण से यह इलाका भीड़-भाड़ भरा हो जाएगा।

साल 2020 मस्जिद निर्माण शुरू होने के बाद से स्थानीय जिला प्रशासन के यहाँ के लोगों ने लगातार शिकायतें भेजनी शुरू कर दीं। इसके बाद लोगों के दवाब में आकर मस्जिद बनाने की अनुमति रद्द कर दी गई और मस्जिद का निर्माण रुक गया था।

हालाँकि, स्थानीय लोगों की यह खुशी थोड़े दिनों की ही थी, क्योंकि इसके बाद मुस्लिमों ने जिला प्रशासन के फैसले के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर कर दी। कोर्ट में उन्हें जीत मिल गई। इसके बाद इसी साल सितंबर में कोरियाई सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए मस्जिद निर्माण की अनुमति दे दी थी।

इसके बाद भी स्थानीय लोगों ने हार नहीं मानी और जिला प्रशासन से मस्जिद को ‘स्थानांतरित’ करने की माँग करने लगे। हालाँकि, उनकी यह अपील भी किसी काम नहीं आई। हालातों से मजबूर कोरियाई लोग अब दहेयोन-डोंग में मस्जिद के निर्माण को किसी ना किसी बहाने रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

मस्जिद के विरोध में लगे हुए पोस्टर (फोटो साभार: कोरियाई हेराल्ड)

कोरियाई लोग अब मस्जिद के गेट पर वाहनों को खड़ा कर रहे हैं और गली में सूअरों के कटे हुए सिर रख रहे हैं। यहाँ तक कि मस्जिद के पास खुले में सूअर का मांस भी पका रहे हैं। यही नहीं, नमाज के समय तेज आवाज में गाने भी बजा कर विरोध कर रहे हैं।

इसके अलावा, स्थानीय लोगों ने मोहल्ले में पोस्टर लगाकर भी मस्जिद निर्माण का विरोध किया। इन पोस्टरों में ‘इस्लाम एक दुष्ट मजहब है जो लोगों को मारता है’, ‘हम इस्लामी मस्जिद के निर्माण का कड़ा विरोध करते हैं’, ‘सबसे पहले कोरियाई लोग’ और ‘आतंकवादियों का अड्डा’ जैसे वाक्य लिखे हुए हैं। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद भी मस्जिद निर्माण जारी है। इसके 2022 के अंत तक शुरू होने की भी उम्मीद है।

‘भारत रहने लायक नहीं’ पर घिरे अब्दुल बारी सिद्दीकी: बीजेपी नेता ने बताया मदरसा छाप, लिबरलों का राष्ट्रविरोधी एजेंडा

अपनी संतानों को विदेश में बस जाने की सलाह देने वाले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी (Abdul Bari Siddiqui) पर भाजपा ने करारा हमला बोला है। भाजपा नेता निखिल आनंद ने कहा है कि अगर सिद्दीकी को देश में इतनी ही तकलीफ है तो वे यहाँ मिलने वाली सारी सुविधाओं को छोड़कर परिवार सहित पाकिस्तान चले जाएँ, उन्हें कोई नहीं रोकेगा। सिद्दीकी ने एक कार्यक्रम में कहा था कि अब भारत का माहौल रहने लायक नहीं है। इसलिए वे अपने बच्चों को विदेश में बसने की सलाह दे रहे हैं।

निखिल आनंद ने एक वीडियो ट्वीट कर कहा, “राजद नेता सिद्दीकी का बयान निंदनीय है। ये लोग मदरसा संस्कृति से अभी भी बाहर नहीं निकल पाए हैं। ऐसे ही लोग सेक्युलरिज्म व लिबरलिज्म के मुखौटे में राष्ट्र-विरोधी व धार्मिक एजेंडा चलाते हैं। सिद्दीकी का बयान आरजेडी की विचारधारा को परिलक्षित करता है।” निखिल आनंद ने कहा कि राजद की तुष्टिकरण और मुस्लिम-परस्ती राजनीति के तहत सिद्दीकी हिंदू विरोधी बयान दे रहे हैं।

दरअसल, विधान परिषद के सभापति देवेश चंद्र ठाकुर के सम्मान में एक उर्दू दैनिक की ओर से सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था। समारोह में जब सिद्दीकी को बोलने का मौका मिला तो उन्होंने देश का माहौल खराब बता दिया और कहा कि यह देश अब रहने लायक नहीं है। भाजपा नेता निखिल आनंद ने गुरुवार (22 दिसंबर 2022) को एक और ट्वीट किया था, जिसमें अब्दुल बारी सिद्दीकी के विवादास्पद बयान का वीडियो है।

वीडियो के कैप्शन में भाजपा नेता ने लिखा है, “भड़काऊ बयान देकर सिद्दीकी किसे खुश करना चाहते हैं? बेहतर होगा कि वह पाकिस्तान चले जाएँ। सिद्दीकी भारत में रह रहे हैं और भारत की थाली में खा रहे हैं, लेकिन कट्टरपंथियों के इशारों पर गा रहे हैं और विक्टिम कार्ड खेलकर देश विरोधी ज्ञान दे रहे हैं।”

वीडियो में सिद्दीकी कहते हैं, “मेरा एक बेटा और एक बेटी है। बेटा अभी हार्वर्ड में पढ़ रहा है, जबकि बेटी लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से पास आउट है। देश के माहौल को देखते हुए हमने अपने बेटा-बेटी को कहा कि वहीं नौकरी कर लो और अगर सिटीजनशिप मिले तो वह भी ले लो। अब इंडिया में वह माहौल नहीं रह गया है। पता नहीं तुम लोग झेल पाओगे या नहीं। आप समझिए कि कोई आदमी कितनी तकलीफ से यह बात अपने बच्चों को कहेगा कि तुम अपनी मातृभूमि छोड़ दो।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सिद्दीकी ने बताया कि उनकी सलाह का उनके बच्चों ने ही विरोध किया है। बकौल सिद्दीकी, उनके बच्चों का कहना है कि वे बालिग हैं और उन्हें कहाँ रहना है, इसका निर्णय वे स्वयं करेंगे। इस बारे में सलाह देने का अधिकार उन्हें नहीं है। वहीं, सिद्दीकी ने कहा कि ऐसी सलाह देने में क्या बुराई है।

अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि अगर सर्वेक्षण कराया जाए तो पता चलेगा कि कितने ही देशभक्तों के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं और वहीं बस गए हैं। उन्होंने कहा कि समारोह में न्यायपालिका से जुड़े लोग भी उपस्थित थे। सब सहज भाव से सुन रहे थे, लेकिन भाजपा समारोह के पाँच दिन गुजर जाने के बाद अपने एजेंडे के हिसाब से उनकी आलोचना कर रही है।

‘तू शादी के बाद नमाज अदा करेगी’: लव जिहाद का नया मरकज बना इंदौर; 24 घंटे में तीन मामले, एक गणेश मंदिर से पकड़ा गया

मध्य प्रदेश के इंदौर से हाल के दिनों में लव जिहाद के कई मामले सामने आए हैं। बीते 24 घंटे में इस तरह की तीन घटना देखने को मिली है। एक मामले में तो लव जिहादी को मंदिर से पकड़ा गया है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार (22 दिसंबर 2022) को इंदौर के तीन अलग-अलग स्थानों पर हिंदू लड़कियों को प्रेम का झॉंसा देते मुस्लिमों को पकड़ा गया। एक मामले में अरबाज खान ने अज्जू बनकर हिंदू लड़की से दोस्ती की थी। उसके आधार कार्ड से धोखेबाजी का खुलासा हुआ। दूसरे मामले में फैजान एक स्कूली छात्रा पर शादी करने का दबाव बना रहा था। तीसरे मामले में मोहम्मद समीर एक हिंदू लड़की के साथ अश्लील हरकत करते पकड़ा गया।

पहला मामला

इंदौर के रेडियो कॉलोनी के पास पार्क में बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने एक जोड़े को अश्लील हरकत करते देखा। कार्यकर्ताओं को देख युवक भागने लगा। इससे उस पर शक हुआ और बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने उसे पकड़ लिया। उसने अपना नाम अज्जू बताया। आधार कार्ड देखने पर पता चला कि उसका नाम अरबाज खान है। यह बात जान उसके साथ पार्क आई लड़की भी चौंक गई। उसने बताया कि वह अरबाज को हिंदू समझ रही थी। कार्यकर्ताओं ने अरबाज को पुलिस के हवाले कर दिया।

दूसरा मामला

इंदौर के के खजराना गणेश मंदिर से मोहम्मद फैजान एक हिंदू स्कूली छात्रा पर शादी का दबाव बनाते पकड़ा गया। वह टाइल्स लगाने का काम करता है। वह लड़की से शादी और शादी के बाद नमाज अदा करने को लेकर दबाव बना रहा था। पुलिस के अनुसार लाल चौक इलाके में रहने वाला फैजान और छात्रा एक ही स्कूल में पढ़ा करते थे। 12वीं की छात्रा को प्रेम जाल में फँसा वह शादी और धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था। वह छात्रा से किसी को बिना बताए धोखे से शादी करने के लिए भी कह रहा था। पुलिस ने फैजान के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस फैजान की सोशल मीडिया और फोन की भी जाँच कर रही है।

तीसरा मामला

इंदौर के नगीन नगर स्थित सिटी स्टार स्कूल के बाहर मोहम्मद समीर हिंदू लड़की के साथ अश्लील हरकत करते पकड़ा गया। ख़बर के मुताबिक वह हिंदू छात्रा से मिलने रोज आता था। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने जब उसे अश्लील हरकत करते पकड़ा तो वह छात्रा को पहले सहपाठी और फिर अपनी बहन बतलाने लगा। इस बीच मामले की खबर छात्रा के भाई को हुई और वह भी मौके पर पहुँचा। इसके बाद समीर छात्रा से प्यार की बात कहने लगा।

गौरतलब है कि इंदौर से हाल में लव जिहाद के कई मामले सामने आए हैं। 19 दिसंबर 2022 को राजा नगर इलाके में दर्ज मामले के अनुसार आफताब ने राहुल बनकर हिंदू लड़की से दोस्ती की। असलियत सामने आने के बाद लड़की ने उससे दूरी बना ली। इसके बाद आफ़ताब ने श्रद्धा की तरह उसे 35 टुकड़ों में काटने की धमकी दी। 20 दिसंबर 2022 को हीरानगर क्षेत्र से एक मामला सामने आया था, जिसमें तलाकशुदा व 1 बच्चे की माँ लव जिहाद का शिकार हो गई थी। बिहार के नबील शेख ने खुद को नवीन बता कर महिला से दोस्ती की थी और बाद में उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगा। एक अन्य मामले में मोइन खान खुद को मोनू वर्मा बताते हुए हिंदू लड़की को प्रेम जाल में फँसा कर अश्लील हरकत करते पकड़ा गया था। पुलिस ने बताया था कि वह कई वर्षों से नाम बदलकर युवती से संबंध बना रहा था।

छठी और 7वीं में गीता, 11-12वीं में वेद के श्लोक: NCERT की किताबों में शामिल करेगी मोदी सरकार, कहा- भारतीय संस्कृति के बारे में सीखें बच्चे

केंद्र सरकार ने बच्चों के पाठ्य-पुस्तकों से संबंधित एक अहम फैसला लिया है। अब बच्चों को श्रीमदभगवद गीता का पाठ पढ़ाया जाएगा। श्रीमदभगवद गीता (Shrimad Bhagavad Gita) के श्लोकों और संदर्भ को एनसीईआरटी (NCERT) की पाठ्य-पुस्तकों में शामिल किया जाएगा। देश की शिक्षा राज्यमंत्री अन्नपूर्णा देवी ने लोकसभा में पत्र लिखकर यह जानकारी दी।

केंद्र सरकार चाहती है कि छात्र भारतीय संस्कृति के बारे में सीखे। इसी के मद्देनजर यह फैसला किया गया है। शिक्षा राज्यमंत्री ने बताया कि NCERT की कक्षा छठी और सातवीं की किताबों में वेदों का ज्ञान और श्रीमदभगवद गीता के संदर्भ शामिल किए जाएँगे। वहीं, कक्षा 11 और 12 की पाठ्य-पुस्तकों में संस्कृत में इसके श्लोक शामिल किए जाएँगे।

अन्नपूर्णा देवी ने बताया कि श्रीमदभगवद गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों से मिले इनपुट के आधार पर किया गया है। इसके लिए NCERT ने काम भी शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्रालय द्वारा लिए गए फैसले से बच्चे भारतीय संस्कृति के बारे में जान सकेंगे।

अन्नपूर्णा देवी ने लोकसभा में बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का पैरा 4.27 भारत के पारंपरिक ज्ञान के बारे में है, जिसमें सभी के कल्याण का प्रयास है। इसके साथ ही उन्होंने कहा, “अगर हमें इस शताब्दी में ज्ञान की शक्ति बनना है तो हमें अपनी विरासत को समझना होगा और दुनिया को काम करने के ‘भारतीय तरीके’ के बारे में सिखाना होगा।”

पाठ्य-पुस्तकों में श्रीमदभगवद गीता पढ़ाने के केंद्र सरकार के फैसले का कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आलोचना की है। उनका कहना है कि भाजपा शिक्षा व्यवस्था का भगवाकरण करने की कोशिश कर रही है। कॉन्ग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि अगर भाजपा श्रीमदभगवद गीता को पाठ्यक्रम में शामिल कर रही है तो उसे अन्य धार्मिक पुस्तकों पर भी विचार करना चाहिए।

भारतीय संस्कृति और विरासत से बच्चों को अवगत कराने के संदर्भ में संसदीय पैनल ने देश के लिए बलिदान होने वाले पूर्वोत्तर के ‘गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों’ की कहानियों को भी एनसीईआरटी में शामिल करने की सिफारिश की थी।

संसदीय पैनल का कहना था कि छात्र भारत के समृद्ध इतिहास को जान सकें, इसके लिए स्कूली पाठ्य-पुस्तकों में स्वतंत्रता सेनानियों और देश के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका पर जोर दिया जाना चाहिए।

4 बार सुसाइड की कोशिश, सुशांत की मौत के बाद बॉलीवुड छोड़ना चाहते थे अमित साध: बताया- स्मृति ईरानी ने 6 घंटे बात कर समझाया

अभिनेता अमित साध (Amit Sadh) चार बार सुसाइड की कोशिश कर चुके हैं। यह खुलासा उन्होंने लेखक चेतन भगत के पॉडकास्ट (Chetan Bhagat Podcast) में बातचीत के दौरान की। उन्होंने बताया कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद वे इतने टूट गए थे कि वे बॉलीवुड छोड़ना चाहते थे। डिप्रेशन की स्थिति से उबरने में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने भी उनकी मदद की थी। करीब 6 घंटे बात कर उनका माइंडसेट बदला था।

सुसाइडल थॉट पर बात करते हुए साध ने कहा कि उन्होंने चार बार इसकी कोशिश की थी। तब उनकी उम्र 16 से 18 के बीच थी। सुशांत सिंह राजपूत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके 2 साल से अधिक हो गए हैं। लेकिन यह बात मेरे लिए कभी पुरानी नहीं होगी। इससे मुझे ऐसा झटका लगा कि मैंने इंडस्ट्री (बॉलीवुड) छोड़ने का मन बना लिया। मैंने खुद को सीमित कर लिया था।

अमित साध ने कहा, “पहले मैं भी खुदकुशी की कोशिश कर चुका हूँ। इसलिए मुझे उस मानसिकता का अंदाजा है। मैं इस शख्स (सुशांत) की मानसिकता को बहुत अच्छी तरह से जानता था। जब कोई आत्महत्या करने की सोचता है तो उसकी जिंदगी में पूरी तरह से अँधेरा हो चुका होता है।” उन्होंने कहा कि जब ऐसा होता है तो इसमें समाज की गलती होती है। उन लोगों की गलती होती है जो आपके आसपास होते हैं।

साध ने बताया कि सुशांत की मौत से पहले उन्होंने उनसे मिलने की कोशिश की थी। मौत से करीब 3-4 महीने पहले उन्होंने सुशांत के एक करीबी से उनका नंबर माँगा था। उस शख्स ने बताया कि सुशांत ने खुद को पूरी तरह से अलग कर लिया है। उनका नंबर भी बदल गया और संपर्क नहीं हो सका। साध ने बताया कि वे सुशांत के घर जाना चाहता था। लेकिन उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया गया। सुशांत से नहीं मिल पाने का उन्हें बेहद अफसोस है।

बता दें कि अमित साध और सुशांत सिंह राजपूत ने ‘काई पो चे’ फिल्म के साथ अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। इसके अलावा अमित ने गोल्ड, बरोत हाउस, ऑपरेशन परिंदे जैसी फिल्मों में भी काम किया है। उन्होंने ब्रीद, जीत और जिद व अवरोध जैसे वेब सीरीज में भी काम किया है। सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को बांद्रा में अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे।

फिल्म ‘काई पो चे’ का दृश्य

चेतन भगत ने जब साध से बॉलीवुड छोड़ने को लेकर पूछा तो उन्होंने कहा, “मैं चिढ़ गया था। बड़ी मुश्किल है ये इंडस्ट्री। मैं हताश भी था और कुछ कोरोना का भी असर था।” उन्होंने बताया कि इस डिप्रेशन से निकलने में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी उनकी मदद की थी। साध के मुताबिक उन्हें नहीं पता कि स्मृति ईरानी को उनकी स्थिति के बारे में कैसे पता चला। लेकिन उन्होंने फोन कर उन्हें समझाया। करीब 6 घंटे बात की। साध के अनुसार आज भी ईरानी अक्सर फोन कर उनका हाल लेती रहती हैं।

‘उस समय लगा उसका (साजिद खान) मर्डर कर दूँ’: हीरोइन ने बताया काम देने के नाम पर गंदी बात की, पैंट में हाथ डालने का प्रयास

बॉलीवुड डायरेक्टर साजिद खान (Sajid Khan) पर कई महिलाएँ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा चुकी हैं। बिग बॉस सीजन 16 में उसकी एंट्री के बाद फिर से ये आरोप चर्चा में हैं। कई महिलाओं ने उसे टीवी पर मंच देने का विरोध किया है। अब मराठी अभिनेत्री जयश्री गायकवाड़ ने साजिद खान ने पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

इंडिया सब्सक्राइबस नामक Youtube चैनल ने जयश्री का एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो में वह कहती हैं, “आठ साल पहले एक कास्टिंग डायरेक्टर मुझे एक पार्टी में ले गए थे। वहाँ पर मुझे साजिद खान से मिलाया गया। मैं साजिद खान से मिलकर बहुत खुश हुई। साजिद खान ने मुझे अगले दिन अपने ऑफिस बुलाया। उसने कहा कि वह कोई फिल्म बना रहे हैं और शायद उसमें मेरे लिए कोई रोल निकले। मैं जैसे ही उसके ऑफिस गई, वह मुझे यहाँ-वहाँ टच करने लगा और अश्लील कमेंट करने लगा।”

अभिनेत्री ने कहा है, “साजिद ने मुझसे कहा कि तुम तो बहुत खूबसूरत हो लेकिन मैं तुम्हें काम क्यों दूँ। फिर मैंने उससे कहा कि आपको क्या चाहिए सर। मैं अच्छी एक्टिंग कर सकती हूँ। फिर उसने कहा कि एक्टिंग से काम नहीं चलता है। जो मैं बोलूँगा, जो मैं कहूँगा, वो तुम्हें करना होगा। मुझे बहुत गुस्सा आया। उस समय लगा कि मैं उसका मर्डर कर दूँ या कुछ और कर दूँ। फिर मैं वहाँ से निकल आई।”

आईटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक जयश्री ने आरोप लगाया है कि साजिद खान ने उन्हें अनुचित तरीके से छूने की कोशिश की थी। उनके स्तनों को दबाया था। नितंबों को सहलाया था। पैंट में हाथ डालने और ब्लाउज टॉप उतारने की कोशिश की। कथित तौर पर साजिद खान ने कहा कि सेक्सुअल डिमांड पूरा करने पर वह उसे एक फिल्म में सेकेंड लीड रोल देगा। जयश्री ने कहा है कि उन्हें बोल्ड सीन से परहेज नहीं है। लेकिन काम के लिए वह किसी निर्माता या निर्देशक के साथ समझौता नहीं कर सकती। उनके साथ नहीं सो सकती।

इससे पहले भोजपुरी अभिनेत्री रानी चटर्जी ने बताया था कि फिल्म में कास्ट करने के बहाने साजिद खान ने अपने घर पर बुलाकर उनका यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की थी। रानी ने बताया था, “साजिद ने कहा कि अपनी ब्रेस्ट की साइज बताओ। तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है या नहीं? कितनी बार सेक्स करती है?”

कन्हैया लाल का गला काटने में 2 पाकिस्तानी भी शामिल: NIA की चार्जशीट में 11 नाम, बताया- आतंकी मॉड्यूल की तरह कर रहे थे काम

कन्हैया लाल की हत्या में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। जयपुर की स्पेशल कोर्ट में दायर चार्जशीट में 11 नाम हैं। इनमें दो पाकिस्तानी भी हैं। नुपूर शर्मा का समर्थन करने के कारण उदयपुर में 28 जून 2022 को मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने दुकान में घुसकर कन्हैया लाल का गला रेत दिया था।

चार्जशीट में रियाज और गौस मोहम्मद के अलावा मोहसिन खान, आसिफ हुसैन, मोहम्मद मोहसिन, वसीम अली, फरहाद मोहम्मद शेख, मोहम्मद जावेद, मुस्लिम खान के नाम हैं। पाकिस्तान के सलमान और अबू इब्राहिम को भी आरोपित बनाया गया है। दोनों कराची के रहने वाले हैं। NIA ने बताया है कि आरोपित आतंकी मॉड्यूल की तरह काम कर रहे थे। देश भर में आतंक फैलाना चाहते थे। इसलिए वीडियो बनाया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक चार्जशीट के मुताबिक सोशल मीडिया पर कन्हैया लाल के पोस्ट शेयर करने की वजह से उसकी हत्या की साजिश रची गई। हत्यारे कट्टर और भड़काऊ ऑडियो, वीडियो और मैसेज से प्रेरणा ले रहे थे। सुनियोजित तरीके से कन्हैया लाल की हत्या के लिए चाकू और हथियारों की व्यवस्था की गई। हत्या के बाद धमकी भरा वीडियो जारी किया गया था।

हाल ही में आई एक रिपोर्ट से पता चला था कि उदयपुर की जिस गली में कन्हैया लाल का गला काटा गया था, वो अब भी सुनसान है। घरवाले न्याय की आस लिए बैठे हैं। उनके बेटे ने कसम खा रखी है कि जब तक हत्यारों को फाँसी नहीं होगी वह जूते-चप्पल नहीं पहनेगा। हत्यारों के दावत-ए-इस्लामी से कनेक्शन भी सामने आए थे। यह बात भी सामने आई थी कि गौस मोहम्मद और मोहम्मद रियाज अजमेर दरगाह के गौहर चिश्ती के संपर्क में भी था।

गौरतलब है कि इससे पहले एनआईए ने उमेश कोल्हे की हत्या मामले में चार्जशीट दायर की थी। महाराष्ट्र के अमरावती में उनकी भी हत्या कन्हैया लाल की तरह नुपूर शर्मा का समर्थन करने के कारण की गई थी। 16 दिसंबर को दाखिल इस चार्जशीट में 11 आरोपित बनाए गए हैं। इनका कनेक्शन कट्टरपंथी तबलीगी जमात से बताया गया है। यह बात भी सामने आई है कि कोल्हे के 16 साल पुराने दोस्त युसूफ ने ही उनकी मौत का फरमान जारी किया था। हत्या से पहले गला काटने की प्रैक्टिस भी की गई थी।

महाराष्ट्र: सोलापुर में 50 कुँवारों की ‘बारात’ बैंड, बाजा लेकर पहुँची कलेक्टर के पास, शिकायत में कहा- ‘हमें दुल्हन नहीं मिल रही’

महाराष्ट्र के पुणे के सोलापुर में 50 कुँवारे लड़के दूल्हे की पोशाक में घोड़ी पर चढ़कर और बैंड, बाजा, बारात के साथ बुधवार (21 दिसंबर 2022) को कलेक्टर ऑफिस पहुँच गए। इस पूरे जुलूस को स्थानीय संगठन ‘दुल्हन मोर्चा’ द्वारा आयोजित किया गया। जुलूस में शामिल लोगों का उद्देश्य शादी करना नहीं बल्कि स्त्री-पुरुष के बिगड़ते अनुपात के बारे में अधिकारियों को जागरूक करना था।

इन दुल्हों ने अपनी माँग को लेकर एक ज्ञापन कलेक्टर कार्यालय में सौंपा। यह ज्ञापन दरअसल राज्य में स्त्री-पुरुष अनुपात में सुधार के लिए प्री-कंसेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (PCPNDT) एक्ट को सख्ती से लागू करने की माँग को लेकर था। दरअसल महाराष्ट्र में स्त्री पुरुष अनुपात की हालत अच्छी नहीं है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2019-21) के अनुसार, महाराष्ट्र का लिंगानुपात प्रति 1,000 पुरुषों पर 920 महिलाओं का है।

यही वजह है कि यहाँ रहने वाले कई अविवाहितों ने ज्ञापन में अपनी शादी कराने और दुल्हन खोजने की गुहार कलेक्टर से लगाई।सोलापुर और उसके आसपास के जिलों के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में कुँवारे हैं। इन लोगों को दुल्हन नहीं मिल रही और और शादी के लिए इनकी उम्र निकली जा रही है। इन लोगों का मानना है कि इस क्षेत्र में लड़कियों की संख्या कम होने के चलते ऐसा हो रहा है। इसी के चलते ये लोग एक स्थानीय संगठन के बैनर तले कलेक्टर ऑफिस पहुँच गए।

यहाँ शादी की माँग को लेकर पहुँचे कई दुल्हों ने शेरवानी तो कइयों ने कुर्ता-पायजामा पहना था। इन लोगों ने अपने अपने गले में तख्तियाँ भी लटकाई हुई थी। कार्यक्रम का आयोजन करने वाले रमेश बारस्कर का कहना है कि हो सकता है लोग इस आयोजन का मजाक उड़ाएँ लेकिन वास्तविकता यह है कि विवाह योग्य युवाओं को दुल्हन नहीं मिल रही है। बकौल बारस्कर इसकी वजह राज्य में लैंगिक अनुपात का सही नहीं होना है।

बारस्कर ने कहा कि आजकल लडकियाँ नौकरी वाले या फिर शहरों में रहने वाले युवाओं को शादी के लिए तरजीह देते हैं। वक्त पर शादी नहीं होने से युवा बुराईयों की तरफ मुड़ जाते हैं या शराब पीने लगते हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावक भी अपने अविवाहित बेटों को इस तरह से देखकर चिंतित रहने लगते हैं और बीमार हो जाते हैं।

‘कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ’: PM मोदी ने 2 घंटे की हाई-लेवल मीटिंग में दी सलाह, राज्यों को कहा- ऑक्सीजन सिलेंडर, वेंटिलेटर की सुविधाएँ तैयार रखें

दुनियाभर में कोरोना के मामले फिर से बढ़ रहे हैं। चीन में कोरोना से हाहाकार मचा हुआ है। चीन में लाशों का ढेर लगा देने वाले बीएफ.7 की भारत में एंट्री हो चुकी है। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (22 दिसंबर 2022) को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी। बैठक में पीएम मोदी ने कोरोना को लेकर सतर्कता पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनने, टेस्टिंग बढ़ाने और जीनोमिक सीक्वेंसिंग का आग्रह किया। उन्होंने साथ ही कहा कि से कमजोर और बुजुर्ग समूहों के लिए ‘प्रिकॉशन डोज’ को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

पीएम मोदी ने इसके साथ ही राज्यों को ऑक्सीजन सिलेंडर, पीएसए प्लांट, वेंटिलेटर और मानव संसाधन सहित अस्पताल के बुनियादी ढाँचे की परिचालन तत्परता सुनिश्चित करने के लिए कहा। उन्होंने कोविड विशिष्ट सुविधाओं का ऑडिट करने की सलाह दी। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया, स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण, आईसीएमआर के अधिकारी, सिविल एविएशन के अधिकारी, नीति आयोग के वीके पॉल समेत कई अधिकारी मौजूद थे।

कोविड-19 पर उच्च स्तरीय बैठक के दौरान पीएम मोदी को बताया गया कि दवाओं, टीकों और अस्पताल के बेड पर्याप्त रूप से मौजूद हैं। इसके बाद उन्होंने आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और कीमतों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले बुधवार (21 दिसंबर, 2022) को स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से भी हाई लेवल मीटिंग भी बुलाई गई थी। मीटिंग के दौरान देश में कोरोना की स्थिति की समीक्षा की गई। इस बैठक में स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ भारती पवार समेत स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक में कोविड को लेकर हर हफ्ते समीक्षा बैठक आयोजित करने की बात कही गई।

वहीं चीन की बात करें तो वहाँ ‘जीरो कोविड पॉलिसी’ के खत्म होते ही कोरोना विस्फोट हुआ है। कुछ ही दिनों में लाखों लोग कोरोना की चपेट में आ गए हैं। कहा यह भी जा रहा है कि कोरोना से बड़े पैमाने पर लोगों की जान गई है, लेकिन चीन इन आँकड़ों को छिपा रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि अस्पतालों के बेड भरे हुए हैं। मरीजों का इलाज फर्श पर किया जा रहा है। कब्रिस्तानों और अंतिम संस्कार वाले दूसरे स्थल भरे हुए हैं।