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‘मोदी को राष्ट्रपिता कहना उनका अपमान’: जेल से निकलने के बाद संजय राउत ने शुरू की बयानबाजी, ‘सामना’ में बाल ठाकरे की बात को ही बता दिया गैर-ज़रूरी मुद्दा

‘शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे)’ के नेता संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपिता कहने वाले बयान पर तंज कसा है। पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ में लिखे गए एक लेख में राउत ने ऐसा कहना मोदी का अपमान बताया है। हालाँकि इस दौरान उन्होंने महंगाई, गरीबी आदि का भी जिक्र किया। यह बयान उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस द्वारा नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपिता कहने के जवाब में दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सामना में लिखे गए एक लेख में संजय राउत ने भाजपा से सवाल किया है कि क्या वो अमृता फडणवीस के बयान से सहमत हैं। राऊत के मुताबिक भारत गरीबी, आतंकवाद से पीड़ित है और ऐसे समय में मोदी को नया राष्ट्रपिता बताया जा रहा है। राउत ने यह भी सवाल किया कि भाजपा वीर सावरकर को राष्ट्रपिता क्यों नहीं कहती। उन्होंने RSS पर सावरकर विरोधी होने का भी आरोप लगाया।

इस दौरान राउत ने भाजपा पर बलिदानियों का सम्मान न करने का भी आरोप लगाया है। संजय राउत का यह लेख ‘सामना’ के साप्ताहिक कॉलम रोकटोक’ में छपा है। इसी लेख में राऊत ने आगे कहा कि भाजपा ने भारत को नए और पुराने रूप में बाँट दिया है। हालाँकि, इसी लेख में यह स्वीकार किया गया है कि शिवसेना सुप्रीमो दिवंगत बाला साहब ठाकरे गाँधी को राष्ट्रपिता कहे जाने के विरोधी थे। लेकिन राउत ने इस बात को वर्तमान में गैर-जरूरी मुद्दा करार दे दिया।

इसी लेख में संजय राउत ने कॉन्ग्रेस द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले सवाल को अपनी तरफ से दोहराया है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के योगदान पर सवाल खड़ा किया है। भाजपा द्वारा सरदार वल्लभभाई पटेल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस को दिए जा रहे सम्मान पर भी संजय राउत ने तंज कसा है। उन्होंने इन कार्यों को कॉन्ग्रेस से जुड़े महापुरुषों के प्रतीक चुराने जैसे काम करार दिया।

गौरतलब है कि अमृता फडणवीस ने कुछ समय पहले अपने इंटरव्यू में गाँधी को पुराना और नरेंद्र मोदी को भारत का नया राष्ट्रपिता कहा था। इस बयान का विरोध गाँधी के प्रपौत्र तुषार गाँधी ने भी किया है।

‘अन्ना-सदा चौकन्ना’: टीम इंडिया को हारी बाजी जिताने के बाद अश्विन ट्विटर पर छाए, सचिन-सहवाग सबने सराहा

टीम इंडिया ने बांग्लादेश के विरुद्ध खेली गई 2 मैचों की टेस्ट सीरीज जीत ली है। शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में रविचंद्रन अश्विन ने पहले शानदार गेंदबाजी और फिर बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया को जीत दिलाई है। मुश्किल परिस्थिति में घिरी टीम इंडिया की जीत में अहम भूमिका निभाने के कारण सोशल मीडिया में अश्विन की जमकर तारीफ हो रही है।

दरअसल, दूसरे टेस्ट मैच में बांग्लादेश ने टीम इंडिया को जीत के लिए 145 रन का लक्ष्य रखा था। हालाँकि, टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज पूरी तरह फेल होते नजर आए। केएल राहुल, शुभमन गिल, चेतेश्वर पुजारा और विराट कोहली और ऋषभ पंत जैसे बल्लेबाज दहाई के आँकड़े तक भी नहीं पहुँच पाए थे। वास्तव में, पिच में जिस तरह का टर्न था उससे बल्लेबाजी करना आसान नहीं था।

एक समय ऐसा था जब टीम इंडिया ने 74 रन पर 7 विकेट खो दिए। ऐसे में, बांग्लादेश का पलड़ा पूरी तरह भारी नजर आ रहा था। हालाँकि, इसके बाद, बल्लेबाजी करने आए रविचंद्रन अश्विन ने श्रेयस अय्यर के साथ मिलकर न केवल पारी को आगे बढ़ाया बल्कि बांग्लादेश के हाथ से जीत भी छीन ली। श्रेयस अय्यर 29 और रविचंद्रन अश्विन 42 रन बनाकर नाबाद रहे।

इससे पहले, रविचंद्रन अश्विन ने पहली पारी में 4 विकेट और दूसरी पारी में 2 विकेट झटके थे। अश्विन के इस ऑल राउंडर प्रदर्शन को लेकर क्रिकेट के दिग्गजों से लेकर फैंस तक ने सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है। पूर्व भारतीय ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने अश्विन ने साइंटिस्ट बताते हुए ट्वीट किया। सहवाग ने लिखा, “साइंटिस्ट ने कर दिखाया। कैसे भी यह जीत हासिल हुई। अश्विन ने शानदार पारी खेली और श्रेयस अय्यर के साथ बेहतरीन साझेदारी की।”

वहीं, क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने भी अश्विन की तारीफ की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “सीरीज जीतने के लिए टीम इंडिया को बधाई। बांग्लादेश के स्पिनर्स ने एक समय के लिए भारतीय टीम को बुरी स्थिति में डाल दिया था लेकिन श्रेयस अय्यर और रविचंद्रन अश्विन शानदार बल्लेबाजी कर भारतीय टीम को जीत की ओर ले गए।”

वीरेंद्र सहवाग की ही तरह क्रिकट्रैकर ने अश्विन को साइंटिस्ट के रूप में दिखाते हुए ट्वीट किया और लिखा, “शांत रहें और अश्विन पर विश्वास करें। उन्होंने एक बार फिर जीत का फॉर्मूला खोज निकाला।”

क्रिकट्रैकर ने एक अन्य ट्वीट में अश्विन को सुपरमैन के रूप में दिखाते हुए फोटो ट्वीट की है।

पुलकित नामक ट्विटर यूजर ने एक फोटो ट्वीट की। इस फोटो में लिखा है, “इम्पोर्टेन्ट मैच में बाउंड्री मारकर टीम इंडिया को जिताने का घमंड है।” दरअसल, अश्विन ने टी20 विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ हुए मैच में भी बाउंड्री के साथ टीम इंडिया को जीत दिलाई थी।

एक अन्य यूजर ने विराट कोहली के डांस वाली वीडियो ट्वीट कर लिखा, “जीता दिया भाई अय्यर और अश्विन ने मैच। अब मेरा मूड…”

ट्विटर यूजर @abdhi_007 ने लिखा, “आर. अश्विन, श्रेयस अय्यर ने तोड़ा बांग्लादेश का ख्वाब। भारत हारते-हारते आखिरकार जीत ही गया।”

@muktak8 नामक ट्विटर यूजर ने टीम इंडिया की जीत के बाद रविचंद्रन अश्विन और श्रेयस अय्यर की फोटो ट्वीट करते हुए लिखा, “अश्विन अन्ना-सदा चौकन्ना”

कुछ अन्य यूजर्स ने मीम शेयर करते हुए प्रतिक्रिया दी है::

पंडित मदन मोहन मालवीय: वकील बने तो 153 को फाँसी से बचाया, हैदराबाद के निजाम को भी अपने सामने झुकाया

विद्वत्वं च नृपत्वं च नैव तुल्यं कदाचन।
स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान् सर्वत्र पूज्यते।।

अर्थात, एक विद्वान और राजा की कभी कोई तुलना नहीं की जा सकती। क्योंकि राजा तो केवल अपने राज्य में सम्मान पाता है, परंतु एक विद्वान हर जगह सम्मान पाता है। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय का व्यक्तित्व उपरोक्त श्लोक में वर्णित ‘विद्वान’ शब्द का पर्यायवाची था।

आज ही के दिन महामना पंडित मदन मोहन मालवीय का जन्म हुआ था। भारतीय समाज, राजनीति एवं शिक्षा जगत में उनका योगदान अप्रतिम है। समस्त जन तक ‘सत्यमेव जयते’ के नारे को लोकप्रिय बनाने वाले, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक, राष्ट्रवाद के प्रखर समर्थक, एक कुशल अधिवक्ता, महान स्वतंत्रता सेनानी, निर्भीक पत्रकार, शिक्षा और ज्ञान की अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर सामाजिक कुरीतियों पर कठोर प्रहार करने वाले महान शिक्षाविद एवं भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय का जीवन प्रेरणादायक है।

अंग्रेजों के विरुद्ध स्वतन्त्रता आन्दोलन में पंडित मालवीय ने अपनी महती भूमिका निभाई। महात्मा गाँधी ने उन्हें ‘भारत निर्माता’ कहकर पुकारा। उनकी राष्ट्रभक्ति को देखकर महात्मा गाँधी भावविभोर हो गए और उन्होंने कहा:

“जब मैं मालवीय जी से मिला वह मुझे गंगा की धारा की तरह निर्मल और पवित्र लगे। मैंने तय कर लिया कि मैं उसी निर्मल धारा में गोता लगाऊँगा।”

पंडित मालवीय समाज में व्याप्त असमानता, अस्पृश्यता, अशिक्षा, बाल विवाह, रूढ़िवादी परंपराओं और तुष्टिकरण की नीतियों के विरुद्ध थे। वे सभी के लिए एक समान न्याय और समानता के पक्षधर थे। उन्होंने सामाजिक न्याय और समानता को स्थापित करने हेतु ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जंग छेड़ा और भावशाली तरीके से अपना पक्ष रखा। पंडित मालवीय का स्वभाव बिल्कुल सरल एवं सहज था और इसका प्रभाव कमोबेश सभी पर था। फिर चाहे वो भारतीय जनमानस था या ब्रिटिश हुक्मरान। सभी उनके असाधारण व्यक्तित्व से प्रभावित थे।

वैसे तो पेशे से वे वकील थे परंतु स्वतन्त्रता आंदोलन में उन्होंने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। राष्ट्र हेतु जरूरत पड़ने पर वे कभी पीछे नहीं हटे। आजादी की लड़ाई लड़ने वालों के लिए उन्होंने अपने दरवाजे हमेशा खुले रखे। एक समय था 1922 में, जब चौरीचौरा कांड में करीब 172 में से 153 लोगों को अकाट्य तर्कों के आधार पर फाँसी की सजा से उन्होंने बचाया था।

शिक्षा के क्षेत्र में पंडित मदन मोहन मालवीय का उत्कृष्ट योगदान रहा। भारत में जब भी शिक्षा की क्रांति की मशाल जगाने की बात होगी, उनका नाम सर्वप्रथम आएगा। अपनी कड़ी मेहनत, चातुर्य एवं लगन से 4 फरवरी 1916 को काशी हिंदू विश्वविद्यालय की नींव डाल कर अंग्रेजी हुकूमत को करारा जवाब दिया था। इस संदर्भ में हैदराबाद के निजाम से विश्वविद्यालय के लिए चंदे की कहानी बहुत प्रसिद्ध है कि कैसे निजाम उनको नीचा दिखाना चाहते थे, पर वे पंडित मालवीय के सामने झुक गए, और महत्वपूर्ण आर्थिक मदद देकर विश्वविद्यालय के निर्माण में अपना योगदान दिया। आज इस बात से कौन अवगत नहीं कि भारतीय शैक्षिक जगत, राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक एवं प्रशासनिक क्षेत्र में इस विश्वविद्यालय का योगदान अप्रतिम रहा है।

महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की सादगी, शैक्षिक गुणवत्ता, ईमानदारी एवं गरिमा उच्चकोटी की थी। इस संदर्भ में एक कहानी प्रसिद्ध है। जब पंडित मालवीय अपनी कॉलेज की शिक्षा पूरी किए थे तब उनकी आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक थी। लेकिन उनकी प्रतिभा, योग्यता और विद्वता की चर्चा चारों तरफ थी। उस समय कालाकांकर के राजा रामपाल सिंह को अपने समाचारपत्र ‘हिंदोस्थान’ के लिए एक योग्य संपादक की जरूरत थी और उन्होंने पंडित मालवीय के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था। राजा ने उन्हें बुलवाकर संपादक पद हेतु पूछा और करीब 250 रुपए मासिक वेतन का प्रस्ताव रखा।

पंडित मालवीय ने अपनी आर्थिक परिस्थिति को देखते हुए राजा रामपाल सिंह के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। परंतु उन्होंने एक शर्त रखी कि वो सम्पादन का काम तो करेंगे लेकिन राजा रामपाल सिंह जब नशे में हों तो उनके करीब न आएँ। राजा ने हामी तो भर दी लेकिन एक बार वे शर्त को भूल गए और नशे में पंडित मालवीय के पास चले गए। उन्होंने नाराज होकर अपना त्यागपत्र दे दिया। राजा को अपनी गलती का अहसास हुआ और वे उनसे क्षमा भी माँगे फिर भी वे नहीं नहीं माने। पंडित मालवीय ने कहा:

“मैं क्षमा करने से कहीं अधिक अपने आदर्श और मूल्यों को मानता हूं। अतः मैं अब सम्पादन का कार्य नहीं कर सकता।”

फलत: राजा को ग्लानि हुए और इस घटना का इतना असर पड़ा कि उन्होंने नशे की लत को छोड़ दिया। कहा जाता है कि पंडित मालवीय को कोई आर्थिक नुकसान ना हो, इसीलिए वेतन के बराबर राशि राजा उन्हें वकालत की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति के रूप में देने लगे।

भारतीय समाज एवं स्वतन्त्रता आंदोलन में पंडित मालवीय का योगदान अमर है। वह भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के चार बार अध्यक्ष के रूप में चुने गए (1909, 1918, 1930, 1932)। स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होकर करीब 35 वर्षों तक राष्ट्र सेवा में अपना अद्भुत योगदान दिया। कष्ट इस बात का रहा कि आजादी मिलने के कुछ ही महीने पूर्व उनका निधन हो गया और वे आजाद भारत को न देख सके। लेकिन भारत को आजाद कराने में उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा। उनकी तपस्या, संघर्ष और योगदान को पढ़ कर हर भारतीय हमेशा प्रेरणा लेता रहेगा।

लड़की के जबड़े पर मारी लात ही लात, बेहोश होने तक पीटा: Video वायरल होने के बाद MP पुलिस ने युवक को पकड़ा, घर पर चला बुलडोजर

मध्यप्रदेश के रीवा के मऊगंज थाने के ढेरा से वायरल हुई लड़की की पिटाई की वीडियो मामले में पुलिस ने आरोपित लड़के को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित की पहचान पंकज त्रिपाठी के तौर पर हुई है। पुलिस ने उसे उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से शनिवार (24 दिसंबर 2022) से पकड़ा। घटना के संबंध में लापरवाही बरतने पर थाना प्रभारी निरीक्षक श्वेता मौर्या को निलंबित को किया गया।

बता दें कि दो दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होनी शुरू हुई थी। इस वीडियो में युवती, युवक से शादी की बात कर रही थी। इसी बीच लड़के ने वीडियो बनाने वाले से कहा कि वो वीडियो बनाना बंद करे और उसके बाद वो उस लड़की को पीटने लगा। लड़के ने पहले लड़की को पकड़कर नीचे गिराया उसके बाद मुँह पर लात ही लात मारी। जब उसे लगा कि लड़की बेहोश हो गई है तो उसने उसे खड़ा करके चेक भी किया।

घटना की वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर आरोपित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग उठ रही थी। पुलिस पर आरोपितों को पकड़ने का दबाव था। पुलिस ने रातोंरात टीम बनाकर उसे मिर्जापुर से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद राजस्व व पुलिस अधिकारियों की टीम आरोपित के घर ढेरा पहुँची, जहाँ उसके घर की नपाई हुई और घर पर बुलडोजर चलाया गया।

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, “रीवा जिले के मऊगंज क्षेत्र में युवती के साथ हुई बर्बरता की घटना में अपराधी पंकज त्रिपाठी को गिरफ्तार कर उसके घर पर बुलडोजर चलाया गया। ड्राइवर पंकज का लाइसेंस भी कैंसल कर दिया गया है। मध्यप्रदेश की धरती पर महिलाओं पर अत्याचार करने वाला कोई बख्शा नहीं जायेगा।”

एसपी नवनीत भसीन ने इस संबंध में बताया कि उन्होंने थाना प्रभारी श्वेता मौर्या को सस्पेंड कर दिया है। केस की जाँच एडिशनल एसपी मऊगंज विवेक कुमार लाल को सौंप दी गई है। मामले के संबंध में पुलिस ने पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर केस को धारा 366, 294, 323, 506 सहित 363 और आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया है। वहीं वीडियो वायरल करने वाला आरोपित भारत साकेत भी पकड़ लिया गया है। कहा जा रहा है कि पहले लड़की के घरवालों ने इस संबंध में शिकायत करने से पहले मना कर दिया था। हालाँकि बाद में वीडियो वायरल हुई तो कार्रवाई की माँग तेज हो गई। लोगों ने आरोपित पंकज को हैवान कहकर उसपर एक्शन लेने की माँग उठाई।

छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज की लड़की की हत्या: रिपोर्ट में दावा – शाहबाज़ ने 51 बार पेचकस से गोदा, तकिए से मुँह दबाया, छाती तक चीर डाला

छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक लड़की की निर्मम हत्या का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि नीलकुसुम नाम की इस 21 वर्षीया मृतका को पेचकस से 51 बार गोदा गया है। नीलकुसुम ने जनजातीय समुदाय में जन्म लेने के बाद ईसाई मत अपना लिया था। इस मामले में ‘लव जिहाद’ के एंगल का भी दावा किया जा रहा है। आरोपित का नाम शाहबाज़ बताया जा रहा है। घटना शनिवार (24 दिसंबर, 2022) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की पंप हाउस कालोनी का है। मृतका के भाई का कहना है कि उनकी बहन पहले मदनपुर के स्कूल में पढ़ाई करती थीं। उस समय एक बस कंडक्टर उनकी बहन का पीछा किया करता था। बीच में कंडक्टर से लड़की के घर वालों के विवाद का भी दावा किया जा रहा है। हालाँकि, अभी तक कातिल की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।

घटना के दिन लड़की घर में अकेली थी। परिवार के बाकी सदस्य कहीं बाहर गए थे। लड़की का भाई सुबह लगभग 11 बजे जब वापस लौट कर आया तब उसने पीछे का दरवाजा खुला देखा। अंदर आने के बाद उसने देखा कि उसकी बहन की हत्या हो गई है और वो बिस्तर पर मृत पड़ी है। लड़की के चेहरे पर खून के छींटे थें और उसका मुँह तकिए से दबा दिया गया था। उसके भाई ने देखा तो लड़की का शरीर ठंडा पड़ चुका था। लड़के ने फौरन ही अपने घर वालों को सूचना दी।

शक जताया जा रहा है कि पीछे से खुले दरवाजे से प्रेमी अंदर आया होगा। हालाँकि अभी तक पुलिस किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुँची है।

कातिल का नाम शाहबाज़

वही ‘दैनिक जागरण’ व कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि युवती की हत्या का आरोपित शाहबाज़ नाम का युवक है। बताया गया है कि हत्या की वजह मृतका द्वारा खुद को अनदेखा करना है। शाहबाज़ गुजरात में रहता है जो लड़की को मारने के लिए फ्लाइट पकड़ कर छत्तीसगढ़ आया था। दावा किया जा रहा है कि लड़की की लाश के पास से फ्लाइट की टिकटें बरामद हुईं हैं, जो 2 दिन पुरानी हैं। घटना के बाद से शाहबाज फरार चल रहा है, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, शाहबाज़ ने नीलकुसुम की हत्या बड़ी निर्ममता से की। पेचकस से मृतका पर 51 वार किए गए। लड़की की चीख किसी को सुनाई न दे इसके लिए तकिए से उसका मुँह दबा दिया गया। इस दौरान लड़की के सीने पर 34, पीठ पर 16 और बगल में एक बार पेचकस घोंपा गया। एक पेचकस हृदय में घाव करता हुआ निकल गया था। फिलहाल शाहबाज़ की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की 4 टीमें बनाई गईं हैं

राजस्थान में RPSC की ये कैसी परीक्षा, बस में पेपर सॉल्व करते धराए लोग: पेपर लीक पर CM गहलोत कह रहे – कई राज्यों में होता है ऐसा

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के तहत ली जाने वाली शिक्षक भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद इसे रद्द कर दिया गया है। इस मामले में अब तक 46 से परीक्षार्थियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा, पाँच मामले का मास्टरमाइंड भी गिरफ्तार किए गए हैं। वहीं, विपक्षी दल इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस (Congress) सरकार को लगातार घेर रही है।

दरअसल, शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए 24 दिसंबर 2022 को सुबह 9 बजे से 11 बजे तक परीक्षा का आयोजन किया गया था। परीक्षा शुरू होने के पहले ही सामान्य ज्ञान का पेपर आउट हो गया। उदयपुर में पुलिस ने एक निजी बस में सवार पेपर सॉल्व करते हुए लोगों को देखा। इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया।

पुलिस ने बरामद पेपर का मिलान किया तो यह असली पेपर का नकल था। इसके बाद मामले की जानकारी राजस्थान लोक सेवा आयोग को दी गई और आयोग ने परीक्षा को निरस्त कर दिया। इसके बाद पुलिस पेपर लीक माफियाओं को पकड़ने में लग गई है।

पेपर लीक के कई माफिया बताए जा रहे हैं। इनके स्थानीय नेताओं से भी संपर्क की बात कही जा रही है। इन्हीं माफियाओं में से एक सुरेश ढाका को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह भी कई नेताओं का नजदीकी बताया जा रहा है। जयपुर में गुर्जर की थड़ी पर कोचिंग चलाने वाला ढाका दो बार पहले भी जेल जा चुका है। इसमें से एक मामला मनी लॉन्ड्रिंग का है।

सुरेश ढाका उमंग नाम का एक कोचिंग इंस्टीट्यूट चलाता है। इसके साथ ही वह सोशल मीडिया पर भी खूब एक्टिव रहता है। सोशल मीडिया पर उसके 15 लाख फॉलोवर हैं। सुरेश ढाका की पहुँच राज्य के कई मंत्रियों तक है। ढाका लक्जरी लाइफ जीने का शौकीन है और इसकी तस्वीरें वह सोशल मीडिया पर डालते रहता है।

सामान्य ज्ञान (GK) और मनोविज्ञान विषय के पेपर लीक मामले में चार लोग मास्टरमाइंड बताए जा रहे हैं। इनमें से जोधपुर निवासी सुरेश विश्नोई और उसके जीजा सुरेश ढाका समेत पीराराम साहू तथा भूपेंद्र सारण को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा, डॉ. भजनलाल को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

इस मामले का मुख्य मास्टरमाइंड सुरेश विश्नोई है। विश्नोई जोधपुर का रहने वाला है और जालौर के सरकारी स्कूल में शिक्षक है। शनिवार (24 दिसंबर 2022) की सुबह बेकरिया पुलिस ने एक बस को रोका तो उसमें सुरेश सहित 44 लोग सवार थे। सुरेश बस में बैठे अभ्यर्थियों को पर्चा हल करवा रहा था।

सुरेश ने पर्चा देने के बदले अभ्यर्थियों से 10 लाख रुपए से 20 लाख रुपए तक वसूल किए थे। बता दें कि राजस्थान में ऐसी शायद ही कोई परीक्षा बची हो, जिसका पेपर आउट नहीं हुआ हो। इन माफियाओं पर नेताओं के हाथ होते हैं, इसलिए असली माफिया बच जाते हैं और उनके छोटे गुर्गे को पकड़ कर पुलिस वाहवाही लूट लेती है।

बता दें कि यूपी के कुलपति विनय पाठक पर घोटाले, भर्ती में अनियमितता, रिश्वतखोरी और पेपर लीक जैसे कई सबूत सामने आ चुके हैं, लेकिन पुलिस उनका बाल भी बाँका नहीं कर पा रही है। ऐसा ही हाल देश के अधिकांश माफियाओं के साथ है। ये पूरे मामले में बच निकलते हैं। बिहार का हाल भी इससे अलग नहीं है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी जिम्मेदारी से भागते हुए कहा कि कई राज्यों में पेपर लीक हुए हैं, राजस्थान देश का इकलौता स्टेट नहीं है। पेपर लीक होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राजस्थान तो आरोपितों को पकड़कर जेल में भी डाला है, वहीं अन्य राज्यों में तो ऐसे मामलों में कार्रवाई तक नहीं होती। 

गौरतलब है कि राजस्थान लोक सेवा आयोग 21 दिसंबर 2022 से इस परीक्षा का आयोजन कर रहा है। इस परीक्षा के लिए 12 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने अपना पंजीकरण कराया है। परीक्षा रद्द होने के बाद आयोग अब नए तारीख की घोषणा करेगा।

20 साल की तुनिशा शर्मा की मौत के पीछे ‘लव जिहाद’ का एंगल होने की भी चर्चा: जानिए कौन है शीजान मोहम्मद खान, जिसे 4 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया

टीवी एक्ट्रेस तुनिशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में तुनिशा के एक्स बॉयफ्रेंड और को-स्टार शीजान खान को 4 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। तुनिशा की माँ का आरोप है कि शीजान से परेशान होकर तुनिशा ने आत्महत्या की है। इस बीच, भाजपा नेता राम कदम ने कहा है कि यदि तुनिशा शर्मा की मौत के मामले में ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया तो कड़ी जाँच होगी।

कौन है शीजान खान

तुनिशा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद से लोग यह जानना चाहते हैं कि जिस शीजान खान पर तुनिशा को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लग रहा है, वह कौन है। शीजान खान का पूरा नाम शीजान मोहम्मद खान है। उन्होंने टीवी सीरियल ‘जोधा अकबर’ में अकबर के बचपन का किरदार निभाया था। इससे पहले भी वह कई टीवी सीरियल्स में नजर आ चुके हैं। फिलहाल वह सब टीवी के शो ‘अली बाबा-दास्तान-ए-काबुल में’ नजर आ रहे थे। शीजान की दो बड़ी बहनें फलक नाज और शफक नाज हैं। ये दोनों भी टीवी एक्ट्रेस हैं।

साल 2013 में जोधा अकबर से अपने करियर की शुरुआत करने वाले शीजान ने साल 2016 में ‘सिलसिला प्यार का’ नामक टीवी शो में काम किया था। इसके बाद, साल 2017 में वह ‘चंद्र नंदिनी’ सीरियल में नजर आए। साल 2018 में ‘पृथ्वी वल्लभ’ में भी बतौर एक्टर काम किया था। वहीं, साल 2019 में ‘तारा फ्रॉम सितारा’ और ‘एक थी रानी एक था रावण’ में भी काम किया था। 2020 में शीजान ‘नजर 2’ और 2021 में ‘पवित्र- भरोसा का एक सफर’ नजर आए थे।

तुनिशा शर्मा से पहले शीजान खान का नाम टीवी सीरियल ‘कुंडली भाग्‍य’ फेम एक्‍ट्रेस मृणाल सिंह से भी जुड़ा था। हालाँकि, बाद में वे दोनों अलग हो गए थे। कहा जा रहा है कि अली बाबा-दास्तान ए काबुल की शूटिंग के दौरान शीजान और तुनिशा शर्मा नजदीक आ गए थे।

4 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया शीजान

अभिनेत्री तुनिशा शर्मा की माँ ने आरोप लगाया था कि शीजान के कारण उनकी बेटी ने आत्महत्या की है। तुनिशा की माँ के आरोप के बाद पुलिस ने शीजान को हिरासत में लेते हुए कोर्ट में पेश किया था। जहाँ से कोर्ट ने शीजान को 4 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। यानी अब, बुधवार (28 दिसंबर 2022) तक शीजान पुलिस हिरासत में ही रहेगा।

शीजान के वकील ने बार-बार यह दावा किया है कि शीजान निर्दोष है। पुलिस ने शीजान का फोन भी ले लिया है। पुलिस कोर्ट से परमीशन लेकर फोन की भी जाँच कर सकती है। ऐसे में, आने वाले 4 दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

देश भर में लव जिहाद की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए भाजपा नेता माधव कहा ने कहा है कि मामला लव जिहाद से जुड़ा है या नहीं इसकी जाँच की जाएगी। उन्होंने कहा है, “तुनिषा शर्मा के परिवार को न्याय मिलेगा। हम पता लगाएँगे कि मामला लव जिहाद से जुड़ा है या नहीं और अगर जुड़ा है तो इसके पीछे के षड्यंत्रकारियों और संगठनों का भंडाफोड़ किया जाएगा।”

नेहरू की नीतियों के कारण Pak में जाने वाला था असम, लेकिन राह में खड़ा हो गया ये नेता: ‘मुस्लिम लीग’ ने रची थी डेमोग्राफी बदलने की साजिश, बोस के खिलाफ थे मौलाना आज़ाद

1826 में अंग्रेजो द्वारा असम के विलय के साथ, ब्रिटिश चाय बागानों में तथा अन्य कार्य हेतु पूर्व-बंगाल और उन स्थानों से किसानों को ले आए थे, जहाँ आबादी अधिक थी। 1906 में ढाका में हुए अपने सम्मेलन में मुस्लिम लीग, मुख्य रूप से गैर-मुस्लिम असम और पूर्वोत्तर पर हावी होने के लिए और इसे मुस्लिम-बहुल क्षेत्र बनाने के लिए, एक रणनीति बनाती है। वो असम में मुस्लिम आबादी बढ़ाने के लिए और पूर्वी बंगाल के मुस्लिमों को असम में प्रवास करने और बसने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

1931 की जनगणना रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर पलायन के इस तथ्य को भी नोट किया गया था। कॉन्ग्रेस नेता बारदोलाई, मेधी और अन्य भी पलायन के इस गंभीर मुद्दे को उठाते हैं, लेकिन केंद्र में कॉन्ग्रेस नेतृत्व से इस बार भी उचित समर्थन नहीं मिला। 1938 में, जब असम में ‘मुस्लिम लीग’ के नेतृत्व वाला गठबंधन गिर गया, तो नेताजी सुभाष बोस ने सरकार बनाने के लिए कॉन्ग्रेस द्वारा सरकार बनाने का समर्थन किया, किन्तु उनका विरोध करने के लिए इस बार सामने थे – मौलाना आज़ाद।

सरदार पटेल सुभाष बोस का समर्थन करते हैं और गोपीनाथ बोरदोलोई के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस सरकार कार्यभार सँभाल लेती है। बोरदोलोई के आने से यह आशा बँधी थी कि मुस्लिम पलायन रुक जाएगा, और मुस्लिम लीग का खेल हार जाएगा। हालाँकि, नेहरू और उनके वामपंथी समर्थकों की नासमझी के कारण, प्रांतों में कॉन्ग्रेस की सरकारें 1939 में इस्तीफा दे देती हैं। इस कारण गोपीनाथ बोरदोलोई को भी असम में इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

हालाँकि, नेताजी सुभाष बोस और पटेल चाहते थे कि बोरदोलोई सरकार बनी रहे। ‘मुस्लिम लीग’ के सर सैयद मोहम्मद सादुल्ला, जो अंग्रेजों के पिट्ठू थे, दोबारा से सत्ता सँभाल लेते हैं। सादुल्ला वही थे जिनको हटा कर बोरदोलोई सत्ता में आये थे। अगले सात सालों तक सादुल्ला असम में निर्बाध शासन करते हुए मुस्लिम आधार को मजबूत अत्यंत मजबूती प्रदान करते हैं। सादुल्ला 1941 में एक भूमि बंदोबस्त नीति लाते हैं, जिसके आधार पर पूर्वी बंगाल से आने वाले मुस्लिमों को असम में आने की कानूनी अनुमति दे दी जाती है।

साथ ही ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए प्रत्येक परिवार के लिए 30 बीघे ज़मीन भी उपहार में दी जाती है। एक समय में सादुल्ला ने लियाकत अली खान के सामने या स्वयं कबूला था कि अपनी नीतियों के माध्यम से उन्होंने असम घाटी के निचले चार जिलों में मुस्लिम आबादी को चौगुना कर डाला था था। नेहरू की इन नीतियों को देखते हुए ऐसा ही लगता है कि शायद उनके लिए असम और पूर्वोत्तर भारत का हिस्सा नहीं रहा होगा। संक्षेप में, नेहरू के गलत निर्णय के कारण असम में जनसांख्यिकीय स्थिति बहुत खराब हो चुकी थी।

भारतीय स्वतंत्रता के लिए 1946 की प्रारंभिक ब्रिटिश योजना ने ग्रुप-सी में असम और बंगाल को एक साथ रखा था। इस तरह के समावेशन का अर्थ यह था कि असम निवासियों के अल्पमत में होने के कारण असम का अंततः पूर्वी-पाकिस्तान में समाहित कर दिया जाना निश्चित था। इस अशुभ संभावना को भाँपते हुए, बोरदोलोई ने नेहरू की सहमति के विपरीत ग्रुप-सी में क्लब किए जाने का विरोध आरम्भ कर दिया था। नेहरू के साथ न देने पर, बोरदोलोई ने जन आंदोलन शुरू किया।

उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान में असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) के अन्य हिस्सों को शामिल करने के लिए ‘मुस्लिम लीग’ के प्रयासों का डटकर मुकाबला किया और अपनी माँग मनवा कर ही रहे। नेहरू के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्तर पर कॉन्ग्रेस पार्टी ने ‘मुस्लिम लीग’ को स्वीकार कर लिया होता, अगर कॉन्ग्रेस पार्टी की असम इकाई द्वारा समर्थित और महात्मा गाँधी और असम की जनता द्वारा समर्थित बोरदोलोई द्वारा विद्रोह नहीं किया गया होता।

आज जब हम पूर्वोत्तर की बात करते हैं तो हमें सबसे पहले गोपीनाथबोरदोलोई का एहसान मंद होना चाहिए, जिन्हें नेहरू ने नजरअंदाज कर दिया था और उन्हें बहुत बाद में गैर कॉन्ग्रेसी सरकार ने ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया था।”

‘अपनी मर्जी से कर रही हूँ शादी’: मुस्लिम लड़की ने हिन्दू लड़के से की शादी तो SDM कोर्ट के बाहर मुस्लिम भीड़ ने किया हंगामा, लात-घूँसे भी चले

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक हिन्दू लड़के से मुस्लिम लड़की की शादी के दौरान हंगामा खड़ा हो गया। लड़की के घर वालों ने युवक पर अपहरण का आरोप लगाया। वहीं लड़की ने SDM कोर्ट में खुद को बालिग बताते हुए अपनी मर्जी से शादी करने का बयान दिया। इस मामले में हिन्दू और मुस्लिम पक्ष आमने-सामने हो गए। मौके पर पहुँची पुलिस ने तनावपूर्ण माहौल को शांत करवाया। घटना शुक्रवार (23 दिसंबर, 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लड़का देहरादून के चंद्रबनी इलाके का और लड़की माज़रा क्षेत्र की रहने वाली है। कुछ दिन पूर्व 18 नवम्बर 2022 को लड़की अपने प्रेमी के साथ उसके घर चली गई थी। इस मामले में लड़की पक्ष में पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। जाँच के दौरान पुलिस ने लड़की को लड़के के घर से खोज निकाला था। हालाँकि तब लड़की ने खुद को बालिग बताते हुए अपनी मर्जी से अपने प्रेमी के साथ रहने का बयान दिया था।

इस बीच मिली जानकारी के मुताबिक, लड़की और लड़के ने एक मंदिर में शादी भी कर ली थी। अपनी इसी शादी को कानूनी वैधता देने के लिए दोनों ने उप जिला मजिस्ट्रेट की कोर्ट में अर्जी दी थी। इस मामले में बयान दर्ज करवाने के लिए कोर्ट ने दोनों को शुक्रवार को बुलवाया था। इस दिन होने वाली सुनवाई की जानकारी लड़की के घर वालों को हो गई और अपने कुछ साथियों के साथ SDM कोर्ट के बाहर खड़े हो गए।

लड़की के परिजनों की तरफ से कोर्ट में मुस्लिम संगठन के लोग जमा होने लगे। मुस्लिम पक्ष की तरफ से महिला वकील रज़िया बेग मौजूद थीं। इस बात की जानकारी हिन्दू संगठनों को हुई तो उन्होंने भी SDM कोर्ट का रुख किया। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे करते हुए नारेबाजी की। इस दौरान लात-घूँसे चलने की भी खबर है। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को हुई तो उसने मौके पर पहुँच कर लोगों को अलग किया। इस बीच बार एसोसिएशन के सदस्य भी SDM कोर्ट के बाहर पहुँच गए।

मुस्लिम पक्ष की वकील ने लड़की के धर्म परिवर्तन करवा कर हिन्दू बनाने का आरोप लगाया है। लड़की के परिजनों की आपत्ति को देखते हुए SDM ने इस मामले की अगली सुनवाई 30 दिसंबर को तय की। उन्होंने पुलिस को लड़का और लड़की की सुरक्षा का भी आदेश दिया। पुलिस ने कड़ी सुरक्षा के बीच युवक और युवती को उनके घर छोड़ा। इसके बाद दोनों तरफ से जमा हुए लोग वापस लौट आए।

न डगमगाया, न सर झुकाया, मैं अनोखा बल हूँ… पंकज त्रिपाठी ने शेयर किया ‘मैं अटल हूँ’ का फर्स्ट लुक, लोग देखकर बोले- आपसे बेहतर कोई इसे नहीं कर सकता

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 98वीं जयन्ती के अवसर पर उनकी बायोपिक की पहली झलक बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने आज (25 दिसंबर 2022) अपने सोशल मीडिया अकॉउंट पर शेयर की।

पोस्टर को शेयर करते हुए पंकज त्रिपाठी ने लिखा, “अटल जी के व्यक्तित्व को पर्दे पर साकार करने के लिए मुझे संयम से मेरे व्यक्तिमत्व पर काम करना जरूरी है, यह मैं जानता हूँ। स्फूर्ति और मनोबल के आधार से मैं नई भूमिका को न्याय दे सकूँगा यह अटल विश्वास मुझे है। मैं अटल हूँ सिनेमाघरों में दिसंबर 2023 में आएगी।

उन्होंने इस बायोपिक की झलक साझा करते हुए जो वीडियो शेयर की। उसमें वह बिलकुल अटल बिहारी वाजपेयी के अंदाज में नजर आए। इसमें पूर्व पीए को एक स्टेट्समैन, एक जेंटलमैन, एक कवि बताया गया और अंत में उनका पूरा चित्र दिखाते हुए कहा गया-“मैं अटल हूँ।”

इस पोस्ट के साथ उन्होंने पंडित धीरेंद्र की पंक्ति लिखी। उन्होंने लिखा- “न कभी कहीं डगमगाया। न कभी कहीं सर झुकाया। मैं एक अनोखा बल हूँ। मैं अटल हूँ |” आगे उन्होंने कहा, “अवसर मिला है इस विलक्षण व्यक्तित्व को पर्दे पर अभिव्यक्त करने का। भावुक हूँ। कृतज्ञ हूँ।”

बता दें कि पंकज त्रिपाठी का लुक देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स इसे काफी पसंद कर रहे हैं। उन्हें शुभकामनाएँ देने के साथ कहा जा रहा है कि इस महान व्यक्तित्व को चरितार्थ करने के लिए पंकज त्रिपाठी ही परिपक्व कलाकार हैं।

उल्लेखनीय है कि अटल बिहारी वाजपेयी की जिंदगी को पर्दे पर लाने का काम ‘मैं अटल हूँ’ शीर्षक के साथ निर्देशक रवि जाधव द्वारा किया जा रहा है। इसे लिखा उत्कर्ष नैथानी द्वारा गया है। यह फिल्म दिसंबर 2023 में रिलीज होगी। फिल्म को म्यूजिक सलीम-सुलेमान ने दिया और लिरिक्स समीर द्वारा दिए गए हैं। मोशन वीडियो में सोनू निगम की आवाज भी सुनाई पड़ रही है। वहीं फिल्म को प्रोड्यूस करने वालों में विनोद भानुशाली, संदीप सिंह, सैम खान और कमलेश भानुशाली का नाम शामिल है।