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300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा पंजाब की AAP सरकार को पड़ा महंगा: चुकाने पड़ सकते हैं ₹23000 करोड़, पिछले साल का ₹7117 करोड़ बकाया भी शामिल

आम आदमी पार्टी (AAP) ने पंजाब में सत्ता हासिल करने के लिए कई लुभावने वादे किए थे। इनमें से एक वादा राज्य के लोगों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का था। सत्ता में आने के बाद भगवंत मान की अगुवाई वाली AA सरकार ने इस वादे को लागू कर दिया। हालाँकि सरकार अब खुद इस वादे के बोझ तले दबती जा रही है। पहले से ही कर्ज में डूबे पंजाब के लिए यह अब एक नई मुसीबत है। दरअसल एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार को बिजली सब्सिडी के रूप में 20,000 करोड़ रुपए से अधिक चुकाने हैं, जो संभवतः चालू वित्त वर्ष के अंत में बढ़कर 23,000 करोड़ रुपए तक हो जाएगा।

विभिन्न क्षेत्रों को भुगतान की गई कुल सब्सिडी, 1997-1998 वित्तीय वर्ष में, जब राज्य में पहली बार फ्री बिजली की घोषणा हुई थी तब 604.57 करोड़ रुपए थी। राज्य में पहली बार पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्टल ने 1997 में कृषि क्षेत्र को मुफ्त बिजली आपूर्ति की घोषणा की थी। तब से वित्तीय रूप से अस्थिर इस राज्य ने पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड को 1.18 लाख करोड़ रुपए का भुगतान अकेले बिजली सब्सिडी के रूप में किया है। यह आँकड़ा बीते वित्तीय वर्ष तक का है। बीते 25 वर्षों में सब्सिडी का लाभ यहाँ के किसानों, अनुसूचित जाति (एससी) समुदायों और उद्योग क्षेत्र को हुआ है।

हालाँकि सीएम भगवंत मान के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार के तहत यह स्थिति बिगड़ती दिख रही है क्योंकि राज्य को बिजली कंपनी को विभिन्न श्रेणियों के लिए बिजली सब्सिडी के रूप में 22,962 करोड़ रुपए का भुगतान करना है, जो कि काफी बड़ी राशि है और यह किसी भी सरकार द्वारा बिजली प्रदाता को किया गया एक रिकॉर्ड भुगतान होगा। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार चालू वित्त वर्ष में बिजली सब्सिडी के लिए 15,846 करोड़ रुपए का भुगतान करने का इरादा रखती है। इसमें बीते का 7,117.86 करोड़ रुपए का बकाया भी शामिल है। सरकार 6,947 करोड़ रुपए कृषि क्षेत्र को मुफ्त बिजली देने और 2,503 करोड़ रुपए उद्योगों को मुफ्त बिजली देने पर खर्च करेगी। रिपोर्टों के अनुसार, 22,962 करोड़ रुपए की भारी राशि में पंजाब के नागरिकों के लिए 300 मुफ्त यूनिट बिजली भी शामिल है।

उल्लेखनीय है की राज्य में सरकार 1997 के बाद से ही बिजली सब्सिडी देती रही है, लेकिन आम आदमी पार्टी ने हर किसी को 300 यूनिट बिजली मुफ्त में देने का वादा कर राज्य के खजाने पर दबाव बढ़ा लिया। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के मुताबिक नॉन-पीक डिमांड के दौरान भी बिजली की खपत 14,000 मेगावाट पर स्थिर बनी हुई है। इससे साफ़ तौर पर अनुमान लगाया जा सकता है कि बिजली की सब्सिडी में बढ़ोतरी होगी और राज्य के खजाने में और कमी आएगी। बढ़ती बिजली सब्सिडी की वजह से राज्य के करदाता कथित तौर पर PSPCL को प्रतिघंटे 2 करोड़ रुपए से अधिक की राशि चुका रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि जब पूर्व सरकार ने पिछले साल 7 किलोवाट लोड तक 3 रुपए प्रति यूनिट रिफंड की घोषणा की थी, तो कई ग्राहकों ने राहत पाने के लिए अपनी खपत कम कर दी थी। लेकिन आप सरकार को सब्सिडी की एवज में इस वित्तीय वर्ष 2,300 करोड़ रुपए चुकाने हैं। पंजाब राज्य के 74 लाख घरेलू उपभोक्ताओं में से 87% को नवंबर में ‘शून्य बिल’ मिला है। साथ ही, PSPCL को पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा किए गए वादे की वजह से 1,880 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो रहा है। वहीं बीते वर्ष PSPCL को 1,069 करोड़ रुपए का लाभ हुआ था।

‘…अंबे माँ, बालक को माफ कर दे’ : शिव मंदिर में बैठ अश्लील हरकत करने वाले वसीम का रोता Video वायरल, पीपल के पत्तों से पुलिस को मिला था सुराग

मध्य प्रदेश के इंदौर के शिव मंदिर में बैठकर अश्लील हरकत करने वाले आरोपित वसीम का एक और वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में आरोपित वसीम माफी माँगता नजर आ रहा है। वसीम इस वक्त पुलिस हिरासत में है। प्रकाश नगर स्थित विश्वेश्वर महादेव मंदिर में अश्लील हरकत करते वीडियो सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे नए वीडियो में हथकड़ी से बंधा हुआ वसीम देवी माँ से माफी माँग रहा है। वह अच्छा बनने की बात कर रहा है। वसीम का यह वीडियो कैसे और कब बना पुलिस यह पता करने की कोशिश कर रही है। इसमें वह कहता है, “अंबे माँ अपने बालक को माफ कर दे। अब नहीं करूँगा भगवान।”

उधर पुलिस ने वसीम की गिरफ्तारी को लेकर दिलचस्प खुलासा किया है। वीडियो वायरल होने के बाद वसीम की तलाश कर रही पुलिस को मंदिर के पास एक बुजुर्ग ने पुलिस को वसीम का सुराग दिया। बुजुर्ग ने पुलिस को जानकारी दी कि वह पीपल के पत्ते तोड़कर ले जाता था। तब जाकर पुलिस को अश्लील हरकत करने वाले शख्स के मुस्लिम होने का शक हुआ। पुलिस ने मुस्लिम इलाकों में जाकर उसकी तलाश शुरू की। जहाँ कुछ नौजवानों ने उसे पहचान लिया। इतना ही नहीं नौजवानों ने उसका नाम वसीम उर्फ अब्दुल ताहिर बताया। इसके बाद पुलिस ने नौजवानों की निशानदेही पर उसे पकड़ लिया।

मामले की जाँच कर रही पुलिस की टीम को मंदिर के पुजारी ने जानकारी दी कि वह पिछले 6 महीनों से मंदिर आ रहा है। इस दौरान यह भी पता चला कि शिव मंदिर के अलावा वसीम पास के दुर्गा मंदिर में भी जाकर बैठा रहता था। यहाँ भी उसे गंदी हरकत करते देखा गया है। पुलिस अब पता कर रही है कि उसने किसी और मंदिर में भी कोई अश्लील हरकत तो नहीं की।

आपको बता दें कि वसीम उर्फ अब्दुल ताहिर इंदौर के प्रकाश नगर स्थित विश्वेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में बैठकर अश्लील हरकत करता पाया गया था। साथ ही, महिलाओं पर भद्दे कमेंट्स भी करता था। आरोपित वसीम की हरकत से परेशान होकर महिलाओं ने उसका वीडियो बना लिया था। वीडियो के साथ उन्होंने क्षेत्रीय पार्षद मनीष मामा से संपर्क किया था। युवक के अश्लील हरकत करने का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपित वसीम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत मामला दर्ज किया है।

‘मेरे अल्लाह बुराई से बचाना…’: बरेली के स्कूल में छात्रों को इस्लामी प्रार्थना करवाते थे टीचर नाहिद और वजरूद्दीन, Video वायरल होने के बाद केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के बरेली में सरकारी स्कूल में इस्लामी प्रार्थना करवाए जाने का मामला प्रकाश में आने के बाद दो शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। टीचरों ने ‘मेरे अल्लाह बुराई से बचाना’ प्रार्थना स्कूल में करवाई थी। इसी की वीडियो सोशल मीडिया पर जब वायरल हुई तो हिंदू संगठन यह देख भड़क गए। उन्होंने केस को दर्ज कराते हुए कहा कि ये सब हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए किया गया है।

पूरा मामला फरीदपुर थाना के कमला नेहरू स्कूल का बताया जा रहा है। हिंदू संगठनों ने कहा कि यहाँ के अध्यापक नाहिद सिद्दीकी और शिक्षामित्र वजरूद्दीन ने हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए यह सब किया। ये लोग जानबूझकर इस्लामी विधि से स्कूल के छात्रों को प्रार्थना करवाते थे। साथ ही बच्चों द्वारा ये प्रार्थना न करने पर उन्हें धमकाते भी थे।

हिंदू संगठनों का इस घटना पर कहना है कि ये सब इसलिए करवाया जा रहा था ताकि छात्रों को धर्मांतरण के लिए प्रेरित किया जा सके। प्रार्थना के बारे में पता चलने के बाद विहिप के नगर अध्यक्ष सोमपाल राठौर आदि ने बुधवार (21 दिसंबर 2022) को थाने में इस संबंध में शिकायत दी। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि टीचर नाहिद सिद्दीकी के कहने पर शिक्षामित्र वजरुद्दीन काफी समय से ऐसा करा रहे थे।

जानकारी के अनुसार, विवाद उठने और मामला थाने पहुँचने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी विनय कुमार ने स्कूल के टीचर को निलंबित करते हुए शिक्षामित्र के विरुद्ध जाँच बैठा दी है। प्रार्थना का वीडियो भी वायरल है। इसमें तीन दर्जन से ज्यादा बच्चे प्रार्थना करते देखे जा सकते हैं।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले पुलिस अधीक्षक ग्रामीण राजकुमार अग्रवाल ने कहा कि स्कूल में प्रार्थना का वीडियो वायरल होने के बाद टीचरों के खिलाफ मिली शिकायत पर एफआईआर दर्ज करके जाँच शुरू कर दी गई है। जाँच के बाद जो भी तथ्य निकलकर सामने आएँगे उसके हिसाब से आगे कार्रवाई होगी।

जो थे कोरोना+ उनके घरों में गईं, खुद को जान-बूझकर किया संक्रमित… चीनी सिंगर की इस हरकत को जानकर रह जाएँगे हैरान

चीन इस समय कोरोना की सबसे घातक लहर का सामना कर रहा है। 90 प्रतिशत आबादी के संक्रमित होने की आशंका जताई जा रही है। अस्पतालों में बेड नहीं है। कब्रिस्तानों में शवों की लाइन लगी है। इससे पूरी दुनिया चिंतित है। लेकिन चीन की एक सिंगर ने खुद को जान-बूझकर संक्रमित किया ताकि वह नए साल पर कन्सर्ट मिस न करे। इस सिंगर का नाम है जेन झांग।

झांग ने चीन की सोशल मीडिया साइट पर खुद इसका खुलासा किया है। उन्होंने कहा है कि वह नए साल के दौरान संक्रमण का खतरा मोल नहीं लेना चाहती थी। इस खुलासे के बाद से वे चर्चा में हैं। उनकी तीखी आलोचना हो रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, झांग ने बताया है कि वह कोरोना पॉजिटिव होना चाहती थी ताकि नए साल के मौके पर होने वाले कार्यक्रम में वह संक्रमण की चिंता किए बगैर परफॉर्मेंस कर सके। इसके लिए वह ‘शीप’ के घरों में गईं। चीन में कोरोना संक्रमितों को शीप कहते हैं। उन्होंने कहा, “मैं ऐसे लोगों के घर गई, जो पहले से कोरोना पॉजिटिव थे। मेरे पास नए साल से पहले कोरोना से उबरने का पर्याप्त समय था।”

सिंगर ने कहा कि कोरोना पॉजिटिव लोगों से मिलने के बाद उन्हें बुखार, गले में खराश और शरीर में दर्द जैसे लक्षण महसूस हुए। इसके बाद वह एक दिन और रात सोई और लक्षण गायब हो गए। बकौल झांग, “उन्होंने जमकर पानी पिया, विटामिन सी लिया और वह ठीक हो गईं।” उन्होंने कहा कि उनके लक्षण एक कोविड रोगी के समान थे, लेकिन केवल एक दिन तक ही रहे।

एक ट्वीटर यूजर ने झांग को लेकर 17 दिसंबर 2022 को एक पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “गायिका जेन झांग का कहना है कि वह इस बात को लेकर चिंतित हैं कि वह नए साल के संगीत कार्यक्रम के समय संक्रमित हो सकती हैं, इसलिए उन्होंने इससे उबरने के लिए कुछ कोविड+ लोगों से मिलने का फैसला किया। अब उसकी आलोचना हो रही है क्योंकि उसने कहा कि वह 1 दिन में ठीक हो गई, वजन कम किया और अब उसकी त्वचा अच्छी हो गई।”

झांग की इस हरकत के बाद चीनी सोशल मीडिया साइट पर उनकी काफी आलोचना हो रही है। चौतरफा आलोचना से घिरी झांग ने लोगों से माफी माँगते हुए अपना पोस्ट हटा लिया है। उन्होंने कहा कि पोस्ट को शेयर करने से पहले मैंने गंभीरतापूर्वक नहीं सोचा था। वह लोगों से इसके लिए माफी माँगती हैं। इसके आलावा उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहती थीं कि कन्सर्ट के दौरान वह संक्रमित हों और उनकी वजह से दूसरे लोग। इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया।

दोस्ती, ड्रग्स, मर्डर: चार्ल्स शोभराज को मिली ‘सीनियर सिटीजन’ वाली आजादी, जानिए क्यों कहते हैं बिकिनी किलर और द सर्पेंट

नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने ‘बिकिनी किलर’ के नाम से मशहूर फ्रेंच सीरियल किलर चार्ल्स (Charles Sobhraj) शोभराज की उम्र को देखते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया है। दो अमेरिकी टूरिस्टों की हत्या के जुर्म में चार्ल्स शोभराज साल 2003 से नेपाल की जेल में बंद में है। अभी वह 78 साल का है। नेपाल में 70 साल से अधिक उम्र के कैदियों की रिहाई का प्रावधान है। इस फैसले को लेकर चार्ल्स शोभराज की सास शकुंतला थापा ने खुशी जताई है।

20 से अधिक हत्या का आरोप

शोभराज पर 20 से अधिक हत्या करने का आरोप है। वह अपनी पहचान बदलने और जेल से भागने में माहिर है। 2003 में काठमांडू के एक कैसिनो में शोभराज को देखे जाने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद उस पर मुकदमा चला था। हत्या का दोषी पाए जाने के बाद उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। कई सालों तक जेल में बंद रहने के बाद उसने नेपाल की जेल से रिहा होने के लिए याचिका दायर की थी। शोभराज ने अपनी याचिका में दावा किया था कि वह नेपाल के वरिष्ठ कैदियों को दी जाने वाली ‘छूट’ के अनुरूप अपनी सजा काट चुका है। उसने यह भी दावा किया कि वह 20 में से 17 साल की सजा पूरी कर चुका है और उसे उसके अच्छे आचरण के आधार पर रिहा करने का आदेश दिया जाए।

कौन है चार्ल्स शोभराज

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चार्ल्स शोभराज का जन्म अप्रैल 1944 में वियतनाम में हुआ था। उसका असली नाम हतचंद भाओनानी गुरुमुख चार्ल्स शोभराज है। उसकी माँ वियतनाम की और प‍िता भारतीय मूल के थे। बताया जाता है कि उसके ​माता-पिता ने शादी नहीं की थी। उसके पिता ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद चार्ल्स की माँ वियतनाम में तैनात फ्रांस के एक फौजी लेफ्टिनेंट से मिली। फौजी ने उन दोनों को अपनाया। इस तरह चार्ल्स को फ्रांस की नागरिकता मिली। उस वक्त शोभराज 4 साल का था।

शोभराज पर वर्ष 1972 से 1982 के बीच 5 देशों भारत, थाईलैंड, नेपाल, तुर्की और ईरान में हत्या करने के 20 से ज्यादा आरोप लगे। 1976 में भारत में उसे पकड़ा गया। उसे यहाँ 12 साल की सजा सुनाई गई। तिहाड़ जेल में सजा काटने के दौरान उसने यहाँ से भागने का प्लान बनाया। 1986 में उसने जेल में अपने जन्मदिन की पार्टी दी। इसमें कैदियों के साथ जेल के गार्ड भी आए। पार्टी में दिए गए बिस्किट-फल में उसने नींद की दवा मिला दी थी। उसे खाते ही गार्ड और बाकी कैदी सो गए और वह 4 कैदियों के साथ जेल से भाग गया। लेकिन जब वह फिर पकड़ा गया तो अपनीद सजा पूरी करके फ्रांस चला गया।

बिकिनी किलर नाम कैसे पड़ा

शोभराज कई भाषाएँ बोलने और वेश बदलने में माहिर था। वह टूरिस्ट और युवतियों को अपना निशाना बनाता था। वह पहले उनसे दोस्ती करता। फिर ड्रग्स देकर उन्हें सुनसान इलाके में ले जाता और उनकी हत्या कर देता। इसके बाद वह उनके सामान के साथ उनकी आईडी चुरा लेता था। उसने जिन महिलाओं की हत्या की थी, उनमें से ज्यादातर ने बिकिनी पहनी हुई थी, इसलिए उसे ‘बिकिनी किलर’ के नाम से जाना जाता है। साल 1975 में उसने पहली बार बिकिनी पहनी महिला को मौत के घाट उतारा था। बताया जाता है कि शोभराज अनजान लोगों को धोखा देने, यूरोप और एशिया में पुलिस से बचने में माहिर था। इसीलिए उसे ‘द सर्पेंट’ भी कहा जाता था।

‘मैं और चार्ल्स’ फिल्म

शोभराज की जिंदगी पर साल 2015 में ‘मैं और चार्ल्स‘ फिल्म रिलीज हुई थी। इस फिल्म में रणदीप हुड्डा ने चार्ल्स का किरदार निभाया था। एक इंटरव्यू में रणदीप हुड्डा ने बताया था कि अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘डॉन’ का मशहूर डायलॉग- डॉन का इंतजार तो 11 मुल्कों की पुलिस कर रही है, उसे पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। शोभराज की जिंदगी से लिया गया था।

शोभराज की जिंदगी पर ”द सर्पेंट’ वेब सीरीज और ‘मैं और चार्ल्स’ फिल्म भी बनाई गई है।

इसके अलावा नेटफिलिक्स पर दिखाई जाने वाली ‘द सर्पेंट’ वेब सीरीज चार्ल्स शोभराज की जिंदगी और उसके जुर्म की कहानी बताती है। इसमें फ्रैंच-अल्जीरियन एक्टर ताहर रहीम ने चार्ल्स का रोल निभाया है।

राहुल बन कहलाए बॉलीवुड के बादशाह, फिर फिल्में हुईं कम मुस्लिम कैरेक्टर बढ़ गए: पर्दे पर ‘पठान’ दिखना अजीब संयोग या उम्माह वाला प्रयोग

धंधेबाज उसे बॉलीवुड का बादशाह कहते हैं। फैन किंग खान। नाम है- शाहरुख खान (Shah Rukh Khan)। आजकल चर्चा में हैं अपनी आने वाली फिल्म पठान (Pathaan) को लेकर। बेशरम रंग (Besharam Rang) गाने पर चल रहे विवाद के बीच इस फिल्म का एक और गाना झूमे जो (Jhoome Jo) भी रिलीज हो गया है।

करीब 5 साल बाद बड़े पर्दे पर आ रही शाहरुख खान की इस फिल्म से जुड़े कई विवाद हैं। इनमें से एक भगवा रंग का अपमान कर हिंदुओं को नीचा दिखाने की भी है। वैसे शाहरुख खुद को सेकुलर बताते हैं। सिख हिंदू महिला से शादी भी की है। हाल ही में उमराह कर मक्का से आने के बाद उन्हें वैष्णो देवी मंदिर में भी देखा गया। लेकिन इन सबके बीच तीन दशक से अधिक समय से बॉलीवुड में काम कर रहे शाहरुख के फिल्मी किरदारों का ‘मजहब’ दिलचस्प तरीके से बदला है।

कभी शाहरुख खान साल में 5 से 7 फिल्में किया करते थे। साल 1995 में कुल 7 फिल्में की थी। इनमें से एक ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे’ थी। इसी तरह साल 2000 में ‘मोहब्बतें’ समेत 6 फिल्मों में वे दिखे थे। 1989 में ‘फौजी’ सीरियल से अभिनय की दुनिया में आने वाले शाहरुख की पहली फिल्म 1992 में आई थी। उनके फिल्मी करियर को हम तीन हिस्सों में बाँटकर देख सकते हैं। 1992 से 2002। 2002 से 2012 और 2012 से अब तक। इससे पता चलता है कि जैसे-जैसे वे बॉलीवुड में स्थापित होते गए मुस्लिम किरदार के लिए उनका मोह बढ़ते गया।

1992-2002 के बीच उन्होंने करीब 40 फिल्मों में काम किया। लेकिन इनमें से एक ही में उनके किरदार का मजहब इस्लाम था। यह फिल्म थी 1999 में आई हे राम। कमल हासन की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में शाहरुख ने अमजद अली खान का किरदार निभाया था। इसी कालखंड में वे पर्दे पर राहुल और राज बनकर लोकप्रिय हुए थे। बादशाह और किंग खान जैसे तमगे मिले थे।

2002-2012 के बीच उनकी 25 फिल्में आई। इनमें से कुछ में उनका स्पेशल या गेस्ट अपीयरेंस भी था। इस समय अंतराल में उनकी फिल्में 40 से घटकर भले आधी हो गई, लेकिन पर्दे पर वे तीन फिल्मों में मुस्लिम का किरदार निभाते दिख गए। 2007 में आई ‘चक दे इंडिया’ में वे कबीर खान बने। 2009 में आई ‘बिल्लू’ में साहिर खान। 2010 में रिलीज हुई ‘माई नेम इज खान’ में रिजवान खान’।

यदि जनवरी 2023 में रिलीज हो रही पठान को भी जोड़ लें तो 2012 के बाद से उनकी 10 फिल्में आई हैं। लेकिन इनमें से चार में वे मुस्लिम कैरेक्टर में हैं। 2016 में आई ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में वे ताहिर खान थे तो उसी साल आई ‘डियर जिंदगी’ में डॉ. जहाँगीर खान। इसी तरह 2017 में आई ‘रईस’ में उनके किरदार का नाम रईस आलम था। अब आ रही है पठान।

एक तरफ शाहरुख खान की फिल्मों की रफ्तार कम हो रही है। दूसरी ओर पर्दे पर उनके मुस्लिम किरदार बढ़ रहे हैं। आप चाहें तो इसे अजीब संयोग भी कह सकते हैं। लेकिन जो व्यक्ति 57 साल की उम्र में भी बोटॉक्स और वीएफएक्स पर खर्च कर 37 साल की दीपिका पादुकोण के साथ छिछोरे स्टेप्स लगाने का मोह नहीं छोड़ पा रहा हो, संभव है कि वह मजहबी किरदारों के साथ उम्माह वाला कोई प्रयोग भी कर रहा हो। वैसे भी सबको पता है कि ‘चक दे इंडिया’ के पीछे जिसकी कहानी प्रेरणा थी, वह असल जिंदगी में हिंदू हैं, भले वह पर्दे पर इस्लाम को मानने वाला कबीर खान दिखाया गया है। जरा सोचिएगा!

किडनी बची थी आधी, चमड़ी तक छीली: जिसे दिलदार अंसारी ने काटा उसके साथ हैवानियत देख डॉक्टर भी हैरान, कहा- कभी ऐसा पोस्टमार्टम नहीं किया

झारखंड के साहिबगंज में दिलदार अंसारी द्वारा रिबिका पहाड़िन की बेरहमी से हत्या करने के मामले में अब कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पहले जहाँ पता चला था कि दिलदार ने रिबिका के शव को टुकड़ों-टुकड़ों में काटा। वहीं अब जानकारी हुई है कि अंसारी ने शव को काटने से पहले रिबिका के शरीर से उसकी चमड़ी छीली थी। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी ऐसी क्रूरता देख हैरान थे। उनका कहना है कि उन्होंने ऐसा पोस्टमार्टम कभी नहीं किया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, पोस्टमार्टम कर रहे डॉक्टरों ने बताया है कि रिबिका के शव के साथ दरिंदगी की गई। उसकी हत्या करने के बाद शव से खाल उतार दी गई और शव को कई टुकड़ों में काट दिया गया। डॉक्टर का कहना है कि शव के छोटे-छोटे टुकड़े किए गए थे और इसे काटने में करीब 7 से 8 घंटे का वक्त लगा था।

रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों ने बताया कि पोस्टमार्टम के लिए रिबिका के करीब 28 अंग लाए गए थे और दोनों किडनियाँ आधी थीं। डॉक्टरों ने साथ ही बताया कि इनमें से कई अंग मौजूद नहीं थे। डॉक्टरों के अनुसार रिबिका के सिर, कई अंगुलियाँ, बाईं हिस्से की पसली इत्यादि अंग को पोस्टमार्टम के लिए नहीं लाया जा सका। डॉक्टरों ने बताया कि रिबिका की बच्चेदानी मिली है, जिसे आगे की जाँच के लिए रख लिया गया है।

इससे पहले इस मामले में बुधवार (21 दिसंबर 2022) को नया खुलासा हुआ था। पुलिस के मुताबिक दिलदार अंसारी की माँ मरियम निशा, रिबिका को किसी तरह से अपने रास्ते से हटाना चाहती थी और इसके लिए उसने अपने सगे भाई मोईनुल अंसारी को 20,000 रुपए एडवांस में दिए थे। दरअसल जिस बोरियो थाना में रिबिका की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, वहाँ की एएसआई सुषमा कुमारी ने दिलदार अंसारी के भाई आमिर अंसारी से पूछताछ की थी, जिसने इसका खुलासा किया था।

पुलिस की जाँच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है मामले में रौंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हत्या के समय रिबिका गर्भवती थी। दिलदार के मामा और उसके दोस्त ने रिबिका के क़त्ल से पहले उसके साथ जबरदस्ती भी की थी। सूत्रों का दावा है कि आरोपितों ने गुनाह कबूल लिया है।

ये भी पता चला है कि रिबिका के शौहर दिलदार अंसारी के मामा मोइनुद्दीन अंसारी और उसके दोस्त मैनुल अंसारी ने बलात्कार के बाद रिबिका की गला दबाकर हत्या कर दी गई। हत्या के बाद शव को मामा के दोस्‍त मैनुल अंसारी के घर ले जाया गया क्‍योंकि मोइनुद्दीन के घर पर लाश को बोटियों में काटने के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी।

मैनुल के घर पर प्‍लास्टिक बिछाकर शव के टुकड़े किए गए। शव के टुकड़े करने के लिए जिन धारदार हथियारों का इस्तेमाल हुआ उनमें से कुछ बरामद हो चुके हैं और कुछ की तलाश की जा रही है। रिबिका की बेदर्दी से हुई हत्‍या से उसके गाँव के लोगों में आक्रोश है। सभी आरोपितों की फाँसी की माँग कर रहे हैं।

दिशा सालियान की मौत की होगी SIT जाँच: डिप्टी CM फडणवीस का ऐलान, BJP विधायक ने कहा- आदित्य ठाकरे का हो नार्को टेस्ट

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी बाला साहेब शिवसेना के सासंद राहुल शेवाले ने बुधवार (21 दिसंबर 2022) को संसद में बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे किए थे। उनके बाद शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के विधायक भरत गोगावले (Bharat Gogavale) और बीजेपी विधायक नितेश राणे (Nitesh Rane) ने महाराष्ट्र विधानसभा में आज सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर दिशा सालियान की मौत का मुद्दा उठाया और इस मामले की जाँच की माँग की। इसके बाद सदन में विधायकों का हंगामा शुरू हो गया।

वहीं डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने ऐलान किया कि इस मामले की जाँच अब स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम द्वारा करवाई जाएगी। यह जाँच बिलकुल निष्पक्ष होगी

नितेश राणे ने इस मामले में आदित्य ठाकरे का नार्को टेस्ट कराने की माँग भी की है। राणे ने गुरुवार (22 दिसंबर 2022) को मीडियाकर्मियों से कहा, “दिशा सालियान की मौत का सच सामने आने दीजिए। यह मामला अभी भी मुंबई पुलिस के पास है। अभी तक इसकी सीबीआई जाँच नहीं कराई गई है। मैं सीएम से इसकी जाँच कराने का अनुरोध करूँगा। फाइनल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पूरी किताब के पन्ने अभी मिलने बाकी हैं। आदित्य ठाकरे का नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए।”

बीजेपी विधायक ने आगे कहा कि सुशांत सिंह राजपूत और उनकी मैनेजर दिशा सालियान मौत का केस फिर से खोला जाए। दिशा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है। इसलिए अगर आदित्य ठाकरे का नार्को टेस्ट किया जाता है, तो सच्चाई सामने आ जाएगी। जैसे श्रद्धा वाकर मर्डर केस में आफताब अमीन पूनावाला का नार्को टेस्ट कराया गया था, वैसे ही आदित्य ठाकरे का भी नार्को टेस्ट कराया जाए।

नितेश राणे ने यह भी कहा कि सुशांत राजपूत मौत मामले में आदित्य ठाकरे का नाम ही क्यों लिया जा रहा है। राहुल शेवाले कभी मातोश्री के चाहने वाले थे। उन्होंने ही इस मुद्दे को उठाया था। शेलावे का कहना है कि सुशांत की मौत से पहले रिया चक्रवर्ती को आदित्य ठाकरे 44 कॉल आए हैं।” नितेश राणे ने पूछा, फिर इस मामले में जाँच अधिकारी क्यों बदले गए।

बता दें कि लोकसभा में सांसद राहुल शेवाले ने कहा था, “रिया चक्रवर्ती को सुशांत की मौत से पहले 44 बार AU के नाम से फोन किया गया। रिया चक्रवर्ती की लीगल टीम ने AU को अनन्या उदास बताया था, लेकिन बिहार पुलिस की जाँच में AU का मतलब आदित्य उद्धव ठाकरे था। इसकी जाँच की जानी चाहिए और सच्चाई सामने आनी चाहिए।”

हालाँकि पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ने इसे सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपनी पार्टी के प्रति वफादार नहीं रहा उससे किसी तरह अपेक्षा नहीं की जा सकती। वैसे यह पहली बार नहीं है जब सुशांत और उनकी मैनेजर रही दिशा सालियान को लेकर आदित्य पर सवाल उठे हैं। इससे पहले इस केस में उनका नाम कई बार लिया गया है। अब इस मामले की जाँच स्पेशन इन्वेस्टिगेशन टीम द्वारा होगी। यह ऐलान प्रदेश के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा किया गया है।

जीसस के कारण कोरोना से बचा भारत, विकास भी उन्हीं की वजह से हुआ: तेलंगाना के हेल्थ डायरेक्टर का बयान वायरल, सफाई में कहा- ‘मैंने ये सब नहीं बोला’

दुनिया भर में बढ़ रहे कोरोना के मामलों के बीच तेलंगाना के स्वास्थ्य निदेशक जी श्रीनिवास राव का अजीब बयान सामने आया है। उन्होंने क्रिसमस से पूर्व आयोजित एक कार्यक्रम में ईसाइयत का महिमामंडन करते हुए कहा कि ईसा मसीह की वजह से ही भारत में कोविड को नियंत्रित किया जा सका। जीसस के चलते हीं लोग कोरोना महामारी से बच पाए।

श्रीनिवास ने भद्राद्री कोठागुडेम जिले में आयोजित क्रिसमस से पूर्व एक समारोह में यह विवादास्पद बयान दिया। टीवी 9 तेलुगु में छपी रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, ”ईसाई धर्म की वजह से ही भारत का विकास हुआ है। ईसा मसीह की कृपा से ही कोविड कम हुआ है। बहुत से लोगों का सोचना है कि कोरोना कम हो गया क्योंकि हम अच्छा काम कर रहे हैं। यह वास्तविकता नहीं है। जीसस क्राइस्ट की वजह से मामले कम हुए हैं।”

श्रीनिवास ने आगे कहा, ”मानव जाति का अस्तित्व खतरे में है। ईश्वर तो बहुत हैं, लेकिन केवल केवल यीशु ही है जो पृथ्वी पर चले थे।” श्रीनिवास ने कहा कि उनके पूर्वजों ने यह सब देखा है और आने वाली पीढ़ियों को यह बताया है। उन्होंने आगे लोगों से जाति और धर्म की परवाह किए बिना ईसा मसीह के संदेश को आगे ले जाने और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का आह्वान किया।

आश्चर्यजनक है कि सरकारी पद पर बैठा व्यक्ति एक पादरी की तरह बातें कर रहा है। यह पहली बार नहीं है कि श्रीनिवास विवादों में आए हैं। इससे पहले भी वह तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के पैर छूने को लेकर विवादों में रह चके हैं। श्रीनिवास के बयान को लेकर तेलंगाना भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। राज्य भाजपा ने स्वास्थ्य निदेशक का बयान को पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया है।

तेलंगाना भाजपा के नेता कृष्णा सागर राव ने कहा, ”एक तो वह कह रहे हैं कि भारत का जो भी विकास हुआ है वह जीसस क्राइस्ट ने किया है। वह यह भी कह रहे हैं कि कोविड-19 और उसके बाद की स्थितियों को यीशु ने संभाला। यह उनकी निजी आस्था हो सकती है लेकिन सार्वजनिक रूप से वह ऐसा कैसे कह सकते हैं। फिर वह स्वास्थ्य निदेशक क्यों हैं। उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और यीशु को इसकी रक्षा करने देना चाहिए।”

वहीं विवाद बढ़ता देख श्रीनिवास ने ट्वीट कर सफाई दी है। उन्होंने एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, ”मेरी छवि को खराब करने के लिए लोगों के एक वर्ग द्वारा मेरे भाषण को गलत तरीके से पेश किया गया है। मेरा पूरा वीडियो देखिए, मैंने केवल इतना कहा है कि सरकार के प्रयासों, स्वास्थ्य कर्मचारियों और सभी धर्मावलंबियों की प्रार्थनाओं की वजह से हम कोरोना पर लगाम कस पाए।”

तेलंगाना के स्वास्थ्य निदेशक के दावों के विपरीत भारत अपनी रणनीति की वजह से कोरोना के घातक लहरों से उबर पाया था। देश में कड़े लॉकडाउन लगाए गए, जिससे सामुदायिक संक्रमण कम हुआ।प्रभावशाली टीकों का निर्माण किया गया और इतनी बड़ी आबादी के लिए सफलता पूर्वक टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया गया। हालाँकि दुनियाभर में फिर से पाँव पसार रहे कोरोना ने भारत की भी चिंता बढ़ा दी है।

इस्लाम छोड़ हिंदू बने थे महामुद्दीन खान, माता मंदिर में करते थे पूजा-अर्चना: राजस्थान में धारदार हथियार से काटा, बोरों में भरकर लाश के टुकड़े फेंके

राजस्थान के धौलपुर में इस्लाम छोड़ हिंदू पुजारी बने शख्स की नृशंस हत्या का मामला सामने आया है। यह घटना कंचनपुर थाना क्षेत्र के टोंटरी गाँव की है। 60 वर्षीय महामुद्दीन खान माता मंदिर के पुजारी थे। मंगलवार (20 दिसंबर 2022) रात को कुछ बदमाशों ने धारदार हथियारों से काटकर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। इसके बाद लाश के कई टुकड़े करके उसे बोरों में भरकर फेंक दिया।

अगले दिन ग्रामीणों ने बोरों में बंद लाश देखने के बाद इसकी सूचना कंचनपुर थाना पुलिस को दी गई। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँचकर शव के टुकड़ों को अपने कब्जे में ले लिया और जाँच में जुट गई। बताया जा रहा है कि मंदिर के पास एक गुफा में रहने वाले तीन साधु घटना के बाद से फरार हैं। इनका महामुद्दीन के साथ मनमुटाव चल रहा था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक पुजारी महामुद्दीन खान ने 10 साल पहले इस्लाम मजहब को छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया था। हिंदू धर्म अपनाने के बाद से वह टोंटरी गाँव के नजदीक पार्वती नदी के बीहड़ों में स्थित चामण माता के मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे और यहीं पर रहते थे। दो दिन पहले बदमाशों ने पुजारी की निर्मम हत्या कर, उनकी लाश के टुकड़े कर पार्वती नदी किनारे चार अलग-अलग बोरों में डालकर फेंक दिया। बुधवार (21 दिसंबर 2022) सु​ब​ह ग्रामीणों ने जब बोरों में बंद खून से लथपथ लाश देखी तो इलाके में हड़कंप मच गया। इसके बाद उन्होंने पुलिस को घटना की जानकारी दी।

कुछ मीडिया रिपोर्ट में पुजारी का नाम बहाबुद्दीन खान बताया जा रहा है। धौलपुर जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने इस संबंध में कि टोंटरी गाँव के चामण माता मंदिर में महामुद्दीन पुजारी था। पुजारी की धारदार हथियारों से काटकर हत्या की गई। शव के टुकड़ों को चार प्लास्टिक के बारों में पार्वती नदी के किनारे से बरामद किया गया है। प्रारम्भिक जाँच में सामने आया है कि चामण माता मंदिर के पास एक गुफा है, जहाँ तीन साधु भी रहते हैं। इन साधुओं के साथ महामुद्दीन का मनमुटाव चल रहा था। ये तीनों अभी फरार हैं। पुलिस टीम गठित कर उनके संबंधित ठिकानों पर दबिश दे रही है।