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‘सभी आधार कार्ड धारकों को मिलेगा ₹80000’… केंद्र सरकार ने YouTube को दिया फर्जी खबरें फैलाने वाले 3 चैनलों को हटाने का निर्देश, ‘आज तक लाइव’ भी नपा

यूट्यूब पर टीवी चैनलों से मिलता-जुलता नाम रखकर झूठी खबरें और फर्जी सनसनीखेज दावे कर के पैसे कमाने वाले चैनलों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने यूट्यूब से इस तरह के तीन चैनलों पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के पीआईबी विभाग की फैक्ट चेक यूनिट ने तीन चैनलों को फर्जी और भ्रामक ख़बरें फैलाने वाला करार दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यूट्यूब के तीन चैनलों ‘आज तक लाइव’, ‘न्यूज हेडलाइंस’ और ‘सरकारी अपडेट्स’ नाम के यूट्यूब चैनलों को बंद करने का निर्देश दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘आज तक लाइव’ चैनल इंडिया टुडे ग्रुप का हिस्सा नहीं है।

पीआईबी फैक्ट चेक यूनिट की तरफ से जानकारी दी गई कि ये चैनल दर्शकों को गुमराह करने के लिए टीवी समाचार चैनलों और उनके एंकर्स की तस्वीरों का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि यह यकीन दिलाया जाए कि उनके द्वारा दी जा रही जानकारी सही है। बताया गया कि ये चैनल अपने वीडियो में विज्ञापन दिखाते और यूट्यूब पर भ्रामक खबरें दिखा कर पैसे भी कमा रहे हैं।

यूट्यूब पर आजतक की नक़ल कर चलाए जा रहे फर्जी चैनल आज तक LIVE के 65 हजार से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं। इस चैनल से कई वीआईपी लोगों के मरने या सरकार के फैसलों पर गलत व भ्रामक जानकारी दी जाती है। इस चैनल पर पीएम मोदी की माँ को लेकर भी भ्रामक ख़बर फैलाई गई थी। चैनल का लोगो भी आजतक से मिलता जुलता है, जिससे लोगों को एक बार के लिए यह यकीन हो जाता है कि शायद वो सही चैनल देख रहे हैं। इस तरह लोगों का ध्यान खींचकर अपने सब्सक्राइबर्स बढ़ा लेते हैं और झूठ परोस कर पैसे की कमाई करते हैं।

उधर ‘News Headlines’ नाम का चैनल भी लगातार फेक न्यूज़ फैलाने में लगा हुआ है। ये कोई छोटा-मोटा यूट्यूब चैनल नहीं है, बल्कि इसके 9.67 लाख सब्सक्राइबर्स हैं, यानी एक मिलियन के करीब। इसके 3 वीडियो ऐसे हैं, जिन पर 50 लाख से भी अधिक व्यूज आ चुके हैं। अब तक 32 करोड़ व्यूज इस यूट्यूब चैनल के वीडियोज को मिल चुके हैं। खास बात ये है कि YouTube ने फर्जी खबरें फैलाने वाले ‘News Headlines’ चैनल को वेरिफाइड का टिक दिया हुआ था।

‘सरकारी अपडेट’ नाम के यूट्यूब चैनल से लगातार सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों को पैसे दिए जाने की फर्जी जानकारी साझा की जाती रही है। एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार सभी आधार कार्ड धारकों को ₹80,000 की राशि दे रही है। उसके बाद लड़कियों को हर महीने ₹2100 रुपए मिलने की झूठी ख़बर फैलाई गई। चैनल से लगातार इस तरह की फर्जी ख़बरें फैलाई गईं। इस चैनल के 20 लाख से भी ज्यादा सब्सक्राइबर हैं।

इतना ही नहीं, फैक्ट चेक यूनिट ने जानकारी दी है कि यूट्यूब पर ये तीन चैनल भारत के उच्चतम न्यायालय, भारत के प्रधान न्यायाधीश, सरकारी योजनाओं, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और कृषि ऋणों को माफ करने जैसी झूठी और सनसनीखेज खबरें फैलाई। इन यूट्यूब चैनलों के कुल मिलाकर लगभग 33 लाख सब्सक्राइबर हैं और इनके वीडियो को 30 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया है।

इस्माइल ने एक्स गर्लफ्रेंड को 4 महीने तक होटल में कैद रख कर दी यातनाएँ, बलात्कार भी किया: अपहरण कर ले गया था, रोज करता था पिटाई

अमेरिका के जॉर्जिया में इस्‍माइल पैट्रिको एग्‍वरे (Ismael Patricio Aguirre) नाम के शख्स ने अपनी पूर्व गर्लफ्रेंड को चार महीने तक होटल में बंधक बना कर रखा। इस दौरान उसने अपनी पूर्व गर्लफ्रेंड के साथ रेप किया। उसे तरह-तरह की यातनाएँ दी और गुलामों की तरह व्यवहार किया। महिला हालाँकि किसी तरह अपने पूर्व ब्वॉयफ्रेंड के चंगुल से आजाद हो गई। इस्‍माइल को गिरफ्तार कर लिया गया है।

‘फॉक्स न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जॉर्जिया में इस्‍माइल पैट्रिको नामक एक व्यक्ति को दक्षिण कैरोलिना की एक महिला का अपहरण करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उसने महिला को महीनों तक बंदी बनाए रखा और उसके साथ रेप किया और पिटाई की। इस्माइल को 13 दिसंबर, 2022 को गिरफ्तार किया गया। वहीं उसने कोर्ट में जमानत की गुहार लगाई थी, लेकिन उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी गई।

जाँचकर्ताओं का कहना है कि इस्‍माइल ने चार महीने पहले अपनी पूर्व प्रेमिका को दक्षिण कैरोलिना के चार्ल्सटन से उसके घर से अगवा कर लिया था और उसे दक्षिण-पूर्व वेनेसबोरो में एक होटल के कमरे में कैद करके रखा गया था। हालाँकि यह बात आश्चर्यजनक है कि होटल के किसी कर्मचारी को इसकी भनक तक न लगी।

वहीं अपने सनकी पूर्व ब्वॉयफ्रेंड के चंगुल से आजाद होना महिला के लिए कतई आसान नहीं था। महिला ने दरअसल अपनी प्रेग्‍नेंसी का बहाना लगाया और किसी तरह अस्पताल जाने के लिए पूर्व ब्वॉयफ्रेंड को मना लिया। इसी बहाने से वह वेनेसबोरो में बर्क हेल्थ अस्पताल पहुँची और अस्पताल के कर्मचारी को अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद इस्माइल को गिरफ्तार कर लिया गया।

अस्पताल के कर्मचारियों ने जाँचकर्ताओं को बताया कि इस्माइल और महिला अस्पताल में एक कॉल करने के बाद पहुँचे थे। कॉल में दावा किया गया था कि महिला गर्भवती है और उसे ट्रीटमेंट की आवश्यकता है। कर्मचारियों ने बताया कि वह वास्तव में गर्भवती नहीं थी, लेकिन इस्माइल से बचने के लिए मदद की जरूरत थी। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, महिला ने जाँचकर्ताओं को बताया कि इस्माइल उसे अपने हिसाब से खाने-पीने देता था और साथ में सेक्स करने कहता था।

महिला ने बताया कि वह वास्तव में उसकी कठपुतली बन गई थी। इसके साथ ही इस्माइल ने महिला को धमकी दी थी कि अगर वह उसकी माँगों को नहीं मानेगी तो वह उसे जान से मार डालेगा।

आसिफ ने पकड़ा हाथ, हाजी साहब ने खोली पैंट… दलित युवक का जबरन खतना: मुस्लिम बेवा से शादी पर ‘काफिर’ को सजा

मुस्लिम बेवा से शादी करने वाले एक दलित युवक ने खुद को प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया है। कहा है कि उसका जबरन खतना कर दिया गया। इस्लाम कबूलने का दबावा डाला गया। यह दलित व्यक्ति महाराष्ट्र के पुणे में अपने परिवार के साथ रहता है। उसकी शिकायत पर कुमेल कुरैशी और आसिफ शेख सहित 3 के खिलाफ पुलिस ने शुक्रवार (16 दिसंबर 2022) को मामला दर्ज किया है।

जानकारी के मुताबिक मामला दौंड क्षेत्र का है। मूल रूप से सोलापुर के गाँव मढ़ा के रहने वाले पीड़ित ने जून 2018 में एक मुस्लिम महिला से शादी की थी। वह बेवा और 2 छोटी बच्चियों की माँ थी। शादी के बाद यह व्यक्ति काम की तलाश में जून 2020 में परिवार के साथ पुणे आ गया। उसने कुम्भरगल्ली में किराए पर घर लिया। पति-पत्नी मजदूरी कर बच्चों को पालने लगे। डेढ़ साल तक सब कुछ सही चला। लेकिन बाद में उसी मकान में रहने वाले आसिफ शेख ने उसकी पत्नी को परेशान करना शुरू कर दिया।

अपनी शिकायत में पीड़ित दलित ने बताया है कि आसिफ उसकी पत्नी पर गलत नजर रखता था। उसे एक हिन्दू से शादी करने के लिए उलाहना देता था। जब उसने आसिफ को ऐसा करने से रोका तो उसने उसे हिन्दू काफ़िर कह कर गाली दी। इस्लाम कबूलने के लिए कहा। आरोप है कि ऐसा न करने पर आसिफ ने जान से मारने की धमकी भी दी। पीड़ित के अनुसार आसिफ ने उसे मुस्लिम बनने या पत्नी को छोड़ने का विकल्प रखा।

शिकायत में उसने बताया है कि कुछ दिन बाद आसिफ ने हाजी साहब नाम से चर्चित कुमेल कुरैशी को भी अपने साथ मिला लिया। दोनों ने 3 अक्टूबर 2022 को घर में घुस कर उसे मुस्लिम महिला से शादी करने के नाम पर प्रताड़ित किया। कुमेल कुरैशी का दौंड के कब्रिस्तान इलाके में ऑफिस भी है। यहाँ उसने पीड़ित की पत्नी और दोनों बेटियों को भी लाकर मारा-पीटा। 3 घंटे तक पिटाई के बाद कुमेल ने पीड़ित की शादी तोड़ने की धमकी देते हुए छोड़ दिया।

पीड़ित के अनुसार हाजी साहब ने उसकी पत्नी को भी एक काफिर से शादी पर भड़काया। साथ ही उसका निकाह किसी मुस्लिम से करवा देने की बात भी कही। ऐसा नहीं करने पर हत्या की धमकी दी। पीड़ित की पत्नी ने भी एक वीडियो जारी कर इन आरोपों से सहमति जताई है। महिला ने उससे पति को इस्लाम कबूलवाने के लिए कहा गया। लेकिन उसने कहा है कि पति का धर्मांतरण करवाने के बदले जरूरत पड़ने पर वह खुद हिन्दू बन जाएगी। ऑपइंडिया के पास ये वीडियो मौजूद है।

शिकायत के मुताबिक 14 अक्टूबर 2022 को आसिफ और कुमेल एक मुस्लिम डॉक्टर के साथ पीड़ित के घर में घुस गए। उसकी पत्नी और बच्चों को बाहर निकाल दिया। इसके बाद आसिफ शेख ने पीड़ित का हाथ पकड़ा और हाजी साहब ने उसके कपड़े उतारे। मुस्लिम डॉक्टर ने उसका खतना कर दिया। इस दौरान हाजी ने कुछ इस्लामी लाइनें भी पढ़ीं। पीड़ित ने बताया कि उसने बहुत मिन्नतें की लेकिन आरोपित कहते रहे, “देखते हैं कि तू इस्लाम कैसे नहीं कबूलेगा।”

शिकायत के मुताबिक खतना करने के बाद आरोपितों ने दलित युवक से उसका आधार और राशन कार्ड छीन लिया। खतने की पूरी प्रक्रिया भी मोबाइल में रिकॉर्ड करने की बात बताई जा रही है। पुलिस ने कुमेल कुरैशी, आसिफ सहित एक अन्य पर IPC की धाराओं 295-ए, 298, 452, 324, 323, 504, 506 और 34 के साथ SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। मामले की जाँच की जा रही है।

‘ISIS-अलकायदा से संपर्क, हिट लिस्ट के लिए गुप्त शाखा’: NIA ने बताया- जहाँ खुद नहीं खड़े हो पाते आतंकी संगठन, वहाँ बनाते हैं PFI

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने प्रतिबंधित इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के बारे में अहम खुलासा किया है। एजेंसी का कहना है कि पीएफआई सदस्यों का आतंकवादी संगठनों आईएसआईएस (ISIS) और अल कायदा के साथ संबंध हैं। एनआईए ने साथ ही कहा कि पीएफआई अपनी एक गुप्त शाखा भी चला रहा था।

एनआईए ने मंगलवार (20 दिसंबर, 2022) को केरल के कोच्चि में एनआईए की विशेष अदालत के समक्ष यह बात कही। इसके साथ ही जाँच एजेंसी ने पीएफआई पर प्रतिबंध के बाद गिरफ्तार किए गए इसके सदस्यों के बारे में कोर्ट में जानकारी दी और जाँच के लिए कोर्ट से और समय की माँग की। कोर्ट ने एनआईए की दलील को मानते हुए गिरफ्तार आरोपितों की हिरासत अवधि 90 दिन और बढ़ा दी।

एनआईए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पीएफआई के कई सरगना इस्लामिक स्टेट और अलकायदा के आतंकवादियों के संपर्क में थे और एजेंसी के पास इसका सबूत है। एनआईए की जाँच के अनुसार, प्रतिबंधित इस्लामी संगठन एक गुप्त शाखा भी चलाता था। एनआईए ने यह भी दावा किया कि पीएफआई की गुप्त शाखा अन्य धर्मों के लोगों की हिट लिस्ट तैयार कर रही थी। जाँच एजेंसी ने अदालत को बताया, “गुप्त शाखा का राज्यव्यापी नेटवर्क था और इसका काम डेटा संग्रह और सूची तैयार करना था।”

जाँच एजेंसी का कहना है कि आईएसआईएस और अलकायदा जैसे आतंकवादी संगठन उन देशों में पीएफआई जैसे संगठनों का उपयोग करके अपनी विध्वंसक गतिविधियों को अंजाम देते हैं, जहाँ वे खुले तौर पर काम नहीं कर सकते। एनआईए को इनपुट मिले हैं कि केरल में पीएफआई के कई नेता अलकायदा के कुछ नेताओं के संपर्क में थे। इसके लिए विस्तृत जाँच की आवश्यकता है।

NIA ने यह भी बताया कि छापेमारी के दौरान पीएफआई की देश विरोधी गतिविधियों के संबंध में डिजिटल और अन्य सबूत हासिल किए गए हैं। एजेंसी ने बताया, “जाँच में पता चला है कि पीएफआई के लोग सोशल मीडिया समूहों के माध्यम से आतंकवादी गतिविधियों के लिए युवाओं को भर्ती करने का प्रयास कर रहे थे। एनआईए ने कोर्ट को जानकारी देते हुए बताया कि मामले में जाँच पूरी होने के करीब है और कई लोगों से पहले ही पूछताछ की जा चुकी है।

यह मामला 22 सितंबर, 2022 को देश भर में एक साथ पीएफआई के ठिकानों पर छापेमारी और संगठन के नेताओं व कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी से जुड़ा हुआ है। प्रतिबंधित संगठन के नेताओं पर ‘गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA)’ के तहत मामला दर्ज किया गया था। कोच्चि में इस संबंध में 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। एनआईए ने जाँच पूरी करने और चार्जशीट दायर करने के लिए कोर्ट से अतिरिक्त 90 दिन की समय की माँग की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इस तरह मामले में गिरफ्तार लोगों की हिरासत की अवधि बढ़कर 180 दिन हो गई है।

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 21 नवंबर, 2022 को कोर्ट में जानकारी दी थी कि पीएफआई ने देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए देश से विदेश तक कई संस्थाओं और व्यक्तियों के साथ साझेदारी की थी। उनके माध्यम से प्रतिबंधित संगठन गैर कानूनी तरीके से धन जुटाता था और जुटाई गई रकम पीएफआई के बैंक खातों में चंदे के रूप में दिखा कर जमा की जाती थी। बाद में इस धन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों में किया जाता था।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने हाल ही में आतंकवादियों से संबंध होने और सांप्रदायिक घृणा फैलाने के आरोप में पीएफआई को प्रतिबंधित कर दिया था। पीएफआई की संबद्ध संस्थाओं- रिहैब इंडिया फाउंडेशन, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया इमाम काउंसिल, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन, नेशनल वीमेंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पॉवर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन-केरल को भी प्रतिबंधित संगठनों की सूची में रखा गया है।

‘नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान’ वाले डायलॉग के बाद दिखा राहुल गाँधी का गुस्सा, सेल्फी के लिए उठे हाथ को दिया झटका: Video वायरल

‘नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोल रहा हूँ’ वाले भाषण के बाद कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी का एक वीडियो वायरल हुआ है। इसमें वे गुस्से में एक कार्यकर्ता का हाथ झटकते दिख रहे हैं। यह कार्यकर्ता सेल्फी लेने की कोशिश कर रहा था। वायरल वीडियो भारत जोड़ो यात्रा के दौरान का बताया जा रहा है।

वीडियो में राहुल गाँधी मंच पर पार्टी समर्थकों के साथ दिखाई दे रहे हैं। सामने से एक व्यक्ति फोटो खींच रहा होता है तभी राहुल गाँधी के पास खड़ा समर्थक अपने मोबाइल से सेल्फी लेने की कोशिश करता है। राहुल गाँधी उसका हाथ झटक देते हैं। वीडियो में राहुल अपने समर्थक का हाथ पकड़ कर नीचे कर देते हैं और मोबाइल छीनने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। समर्थक मोबाइल छुड़ाकर वहाँ से जाने लगता है। फिर राहुल गाँधी भी वहाँ से लड़खड़ाते हुए निकलते दिखाई दे रहे हैं।

वीडियो को भाजपा नेता अजय सहरावत ने ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा है, ‘ये क्या हो रहा है।’ किया है। भाजपा सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौर ने भी लिखा है, “मोहब्बत की दुकान के फीके पकवान। कॉन्ग्रेस के लिए जनता सिर्फ वोट बैंक है। तुष्टिकरण की राजनीति तो इनकी रग-रग में है। भारत जोड़ो यात्रा तो सिर्फ एक नाटक है।”

यूपी सरकार में मंत्री और भाजपा नेता स्वतंत्र देव सिंह ने भी ट्विटर पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि कॉन्ग्रेस के समर्थक को उन्हीं के नेता पीट रहे हैं।

कुछ ट्विटर यूजर्स को लगता है कि राहुल गाँधी नशे में हैं। भारत माँ की बेटी नाम की ट्विटर यूजर ने लिखा कि क्या राहुल गाँधी नशे में हैं या सिर्फ मुझे ऐसा लग रहा है?

धीरेन्द्र विक्रम कुशवाहा नाम के यूजर ने लिखा, “लगता है टी शर्ट वाले नेता सुरूर में आ रहे थे।”

आपको बता दें कि राहुल गाँधी के नेतृत्व में चल रही भारत जोड़ो यात्रा अब हरियाणा में पहुँच चुकी है। यात्रा 24 दिसंबर 2022 को दिल्ली पहुँचने वाली है। दिल्ली पहुँचने के बाद यात्रा को 9 दिनों के लिए रोक दिया जाएगा। इस बात की जानकारी कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने दी है। कॉन्ग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया था कि 24 दिसंबर, 2022 से लेकर 2 जनवरी, 2023 तक भारत जोड़ो यात्रा रुकी रहेगी।

मुरब्बा-पटाखा के बाद ‘चिकनकारी’ भी हुआ मुगलों का, 2500 साल पुराने अजंता-चन्द्रकेतुगढ़ को भूले: राजा हर्ष भी कढ़ाई की इस कला के थे शौकीन

भारत हमेशा से फैशन के क्षेत्र में अग्रणी रहा है, वो अलग बात है कि कुर्ता-धोती को ‘गँवार’ और कोट-पैंट को आधुनिक मान लिया गया। वाराणसी से लेकर नाथद्वारा तक, देश के कोने-कोने में कई ऐसे इलाके हैं जहाँ की चित्रकला, कपड़ों पर काम और कढ़ाई की तकनीक खासी लोकप्रिय है। चिकनकारी का काम इन्हीं में से एक है। ‘चिकनकारी’ का मूल उद्भव उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को माना जाता है। अब इस कला को भी मुगलों का देन बताया जा रहा है।

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने हाल ही में एक ट्वीट किया, जिसमें उसने चिकनकारी कला का श्रेय इस्लामी आक्रांताओं को दे दिया, मुगलों को। इससे लोग भी खफा नज़र आए, क्योंकि भारत के लिबरल और सेक्युलर गिरोह के बीच ये चलन रहा है कि मुरब्बे से लेकर बिरयानी तक का श्रेय मुगलों को दे दिया जाए। वैसे भी इनका मानना है कि भारत के लोग असभ्य थे और इस्लामी आक्रांताओं ने ही उन्हें ठीक से रहना सिखाया। अपने उन्नत सभ्यता, भव्य इतिहास और समृद्ध संस्कृति के अलावा पूर्वजों की ज्ञान-संपदा पर भी उन्हें विश्वास नहीं।

तो, यहाँ बात हो रही है कढ़ाई की चिकनकारी कला की। ‘चिकनकारी’ कला का श्रेय नवाबों को दिया जाता है, जबकि ऐसा है नहीं। भगवान श्रीराम के भाई लक्ष्मण के नाम पर स्थापित लखनऊ को भी ऐसे ही उसकी सांस्कृतिक पहचान से दूर कर के ‘नवाबों का शहर’ बता दिया जाता है। कई अन्य कढ़ाई की कलाओं की तरह ‘चिकनकारी’ भी उद्भव, विकास, बदलाव और गिरावट के कई स्तरों से गुजरी है। जिस तरह की सत्ता और सभ्यता रही, ‘चिकनकारी’ कला को उसी के अनुरूप ढाला गया।

किसी खास समय में सत्ता में कौन लोग काबिज थे, इसे बनाने वाले कलाकार कहाँ के थे, उस समय की सभ्यता में किन चीजों का प्रचलन था और लोगों का रहन-सहन कैसा था – किसी भी कला या कढ़ाई की तकनीक पर इसका असर पड़ता है। ‘चिकनकारी’ हमेशा से बाजार पर आधारित कला रही है। जो इन उत्पादों को बनाते रहे हैं, वो अलग-अलग समुदाय में इसे बचते रहे हैं। ‘चिकनकारी’ का उद्भव कहाँ से हुआ, इसे सटीक तरीके से बताना संभव नहीं है।

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने ‘चिकनकारी’ कढ़ाई कला के उद्भव का श्रेय मुग़ल शासनकाल को दे दिया

खासकर उस देश में, जो कला के मामले में इतना समृद्ध रहा है कि दक्षिण में तंजावुर के मंदिर और उत्तर में मार्तण्ड सूर्य मंदिर (अब ध्वस्त) के वैभव से इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है। जसलीन धमीजा अपनी पुस्तक ‘Asian Embroidery‘ में बताती हैं कि प्राचीन साहित्यों के अध्ययन और उनके अर्थ निकालने से पता चलता है कि ईसा से 300 वर्ष पूर्व भी ‘चिकनकारी’ कढ़ाई कला का अस्तित्व था। इस कला का नमूना अजंता की पेंटिंग्स में भी मिलता है।

सोचिए, महाराष्ट्र के औरंगाबाद में स्थित अजंता की गुफाओं के निर्माण का इतिहास 480 ईसापूर्व तक जाता है। राजा हर्षवर्धन भी ऐसे कपड़ों के शौकीन थे, जिन पर पैटर्न बनाया होता था और कलाकृतियाँ की होती थीं। उन्हें मलमल (Muslin/हलके वजन वाला कॉटन) के कपड़े पसंद थे। दिवंगत सामाजिक कार्यकर्ता कमलादेवी चट्टोपाध्याय ने भी माना है कि ऐसे कढ़ाई वाले सफ़ेद कपड़े हर्षवर्धन को पसंद थे, लेकिन वो सफ़ेद रंग के होते थे और उनमें बहुत खास कलाकारी नहीं की जाती थीं।

राजा हर्षवर्धन का शासनकाल सातवीं शताब्दी के पहले 50 वर्षों का रहा है। उस समय इस्लाम की स्थापना ही हुई थी और तलवार के बल पर वो फैलने की कोशिश में था। लेकिन, इतना साफ़ है कि एक अच्छी चिकन कलाकारी भारत में सातवीं शताब्दी में अस्तित्व में थी। सफ़ेद फूलों वाले मलमल के कपड़ों पर चिकनकारी के कई प्राचीन सबूत आज भी मौजूद है। हालाँकि, चिकनकारी कला के अधिकतर सबूत 19वीं शताब्दी के हैं।

हो सकता है कि नवाबों के समय में ये ज़्यादा फ्ला-फूला हो, लेकिन इससे ये नहीं मान लिया जा सकता कि उनके समय में ही इसका उद्भव हुआ और इस्लामी आक्रांताओं ने इसका अविष्कार किया। मुगलों के दरबारियों की तस्वीरों में वो चिकनकारी कला वाले कपड़े पहने हुए ज़रूर दिखते हैं। ‘चिकन’ शब्द कहाँ से आया, इस संबंध में भी कुछ खास आकलन नहीं हो सका है। बस अंदाज़ा लगाया जा सका है कि ये बंगाली भी हो सकता है, जहाँ ‘चिकन’ का मतलब ‘बहुत उत्कृष्ट चीज’ होता है।

वैमपैंठी इतिहाकारों ने मुगलों और खासकर जहाँगीर की बीवी नूरजहाँ को ‘चिकनकारी’ कढ़ाई कला का श्रेय दे डाला। पर्सिया में ‘चिकनकारी’ का मूल खोजने वालों को पता होना चाहिए कि सिलाई की वहाँ की तकनीक और भारत की तकनीक में खासा अंतर रहा है। डोरे से सीने की तकनीक में भी अंतर रहता है। नूरजहाँ ने जहाँगीर के लिए टोपी सिली – इस कहानी का एक वर्जन लखनऊ में भी मौजूद है, बस किरदार अलग हैं।

कई विशेषज्ञ जमदानी तकनीक को ‘चिकनकारी’ से जोड़ कर देखते हुए ये अंदाज़ा भी लगाते हैं कि बंगाल में ही इसका जन्म हुआ होगा। मुस्लिमों द्वारा कहा जाता है कि लखनऊ में नवाब नजीरुद्दीन हैदर के काल में 19वीं सदी में ‘चिकनकारी’ का काम ज्यादा लोकप्रिय हुआ। इसमें सच्चाई हो सकती है, लेकिन ये भी सच ये कि ये कला पहले से भारत में मौजूद थी। ‘Indian Art At Delhi, 1903’ में जॉर्ज वाट ने स्पष्ट लिखा है कि ‘चिकनकारी’ पूरी तरह भारत में जन्मी सिलाई की तकनीक पर आधारित है।

पश्चिम बंगाल में एक 2500 वर्ष पुराना ऐतिहासिक स्थल है चन्द्रकेतुगढ़, जो कोलकाता से 35 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में बिद्याधरी नदी के किनारे स्थित है। नॉर्थ 24 परगनास जिले में स्थित इस स्थल पर एक महिला की टेराकोटा की प्राचीन मूर्ति भी है, जिसके वस्त्रों पर ‘चिकनकारी’ की तरह कढ़ाई की गई है। विशेषज्ञों का ऐसा ही कहना है। 300 ईसापूर्व में भारत में आए मेगस्थनीज ने भी ‘चिकनकारी’ जैसी कढ़ाई कला के उस समय भारत में मौजूद होने की बात कही है।

रियाज के साथ लिव इन में थी उरवी वैष्णव, नवी मुंबई में नहर के पास मिली लाश: परिजन बोले- हत्या कर फेंक दिया

महाराष्ट्र के नवी मुंबई में एक लड़की की लाश नहर के पास से मिली है। मृतका की पहचान उरवी वैष्णव के तौर पर हुई है। वह मूल रूप से राजस्थान के बूंदी जिले की रहने वाली थी। यहाँ एक होटल में वेटर थी। उसकी हत्या का आरोप रियाज खान पर लगा है। बताया जा रहा है कि उरवी उसके साथ लिव इन में थी। शव शनिवार (17 दिसम्बर 2022) को बरामद हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 27 वर्षीया उरवी करीब 7 साल पहले राजस्थान से मुंबई आई थी। यहाँ उसने कोपरखेरण इलाके के एक होटल में वेटर की नौकरी कर ली। उसके साथ उसके 2 भाई पारस और आरुष भी रहते थे। इसी दौरान उसका रियाज खान से संपर्क हुआ। दोस्ती बाद में प्यार में बदल गई। कुछ समय बाद वह रियाज के साथ लिव इन में रहने लगी।

पारस के मुताबिक उरवी के पास कार थी। इसी कार में रियाज खान भी घूमता था। हर दिन की तरह 13 दिसंबर 2022 को उरवी घर से होटल के लिए निकली। वह हर दिन शाम 5 बजे वो अपने भाई पारस को कॉल किया करती थी, लेकिन उस दिन कॉल नहीं आई। अपनी बहन का कॉल नहीं आने से परेशान पारस और आरुष ने रियाज खान को कॉल किया। रियाज ने कोई जवाब नहीं दिया और फोन काट दिया।

उरवी के भाई आरुष का कहना है कि 13 दिसंबर को रियाज ही उसकी बहन को कार से होटल छोड़ने गया था। आरोप है कि दोपहर लगभग डेढ़ बजे रियाज उरवी की कार से अकेले वापस आया। उसने सिर में दर्द बताकर कॉफी माँगी और फिर उरवी को वापस लाने की बात कह घर से निकल गया। देर रात तक उरवी घर नहीं लौटी। उसका फोन भी स्विच ऑफ बता रहा था। अगले दिन 14 दिसम्बर को भाइयों ने नेरुल थाने में उसको गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। इस दौरान रियाज का कुछ भी अता-पता नहीं चला। 3 दिनों तक दोनों भाइयों ने उरवी को अपने स्तर से बहुत खोजा पर कोई जानकारी नहीं मिल पाई।

17 दिसम्बर को पनवेल थाने से दोनों भाइयों को कॉल आई। कॉल पर उन्हें एक लड़की के नहर किनारे मिले शव की पहचान के लिए बुलाया गया था। दोनों भाई थाने गए तो उन्होंने उरवी के शव को पहचान लिया। बाद में इसकी सूचना उरवी के राजस्थान स्थित परिजनों को दे दी गई। उन सभी ने उरवी का शव लिया और 19 दिसम्बर 2022 को राजस्थान के बूँदी में उरवी का अंतिम संस्कार किया। उरवी के घर वाले रियाज खान पर हत्या का आरोप लगा रहे हैं। नवी मुंबई पुलिस मामले की जाँच कर रही है। अभी तक रियाज की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

यूट्यूब पर ‘डिस्को वाली रात’, इंस्टाग्राम पर अकाउंट बंद: रीवा अरोड़ा की माँ ने NCPCR से माँगी माफी, बार वाले रील पर हुआ था विवाद

चाइल्ड एक्ट्रेस रीवा अरोड़ा (Riva Arora) का इंस्टाग्राम अकाउंट प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये अकाउंट इंस्टाग्राम (Instagram) से कब हटाया गया। हालाँकि, फेसबुक और यूट्यूब जैसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उनके अकाउंट एक्टिव हैं।

रीवा अरोड़ा का इंस्टाग्राम अकाउंट हटाया गया। (फोटो साभार: इंस्टाग्राम)

दरअसल, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने अभिनेता करण कुंद्रा के साथ रीवा के विवादास्पद इंस्टाग्राम रील का संज्ञान लिया था, जिसमें एक शॉट बार में लिया गया था। हंगामे के बाद इस रील को हटा दिया गया है। वहीं, रीवा अरोड़ा की माँ निशा अरोड़ा ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिखकर आयोग से माफी माँगी है।

निशा अरोड़ा ने एनसीपीसीआर से माँगी माफी (फोटो साभार: इंस्टाग्राम)

18 नवंबर 2022 को एक इंस्टाग्राम पोस्ट में रीवा अरोड़ा की माँ ने लिखा, “मैं, निशा अरोड़ा, अपनी बेटी रीवा अरोड़ा के अकाउंट के लिए बनाए गए वीडियो के लिए माफी माँगती हूँ, जहाँ मैंने अल्कोहल सेटअप का इस्तेमाल किया। इससे समाज में गलत मैसेज गया। मैं दिल से मानती हूँ कि एक कलाकार और एक रोल मॉडल होने के नाते, हमें समाज में एक अच्छी इमेज पेश करनी चाहिए। मैं सभी बाल कलाकारों और उनके माता-पिता से अनुरोध करना चाहती हूँ कि वे इस तरह के वीडियो बनाने से बचें। मैं भविष्य में इस बात का ध्यान रखूँगी। मैंने इसके लिए एनसीपीसीआर (NCPCR) से लिखित में माफी भी माँगी है और उन्हें इस मामले से संबंधित सभी स्पष्टीकरण भी दिए हैं।”

इंस्टाग्राम रील विवाद

19 अक्टूबर 2022 को चाइल्ड एक्ट्रेस रीवा अरोड़ा और 38 वर्षीय अभिनेता करण कुंद्रा की इंस्टाग्राम रील सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। रील में कुंद्रा ने रीवा के ब्वॉयफ्रेंड का रोल प्ले किया था, जो पहले से ही किसी और के साथ रिलेशनशिप में थी। रील में यह दिखाया गया था कि अभिनेत्री का दो पुरुषों के साथ अफेयर है। अभिनेता उम्र में रीवा से बहुत बड़े थे। रील के एक दृश्य में दिखाया गया था कि 12 साल की लड़की बोल्ड ड्रेस में क्रॉस-लेग करके बैठी हुई है। वह रील में एक व्यस्क महिला की तरह व्यवहार करती हुई दिखाई देती है। इसको लेकर रीवा को उसके इंस्टाग्राम पोस्ट पर लगातार भद्दे कमेंट्स किए जा रहे थे। वहीं कुछ पुरुषों ने उन्हें कमेंट में कहा कि वे कैसे उनकी तस्वीरों और वीडियो को देखकर मास्टरबेशन कर रहे हैं।

रीवा अरोड़ा का इंस्टाग्राम हटाने से पहले ली गई तस्वीर। (फोटो साभार: रीवा अरोड़ा का इंस्टाग्राम)

रीवा की माँ बचाव में उतरीं

बाद में 23 अक्टूबर 2022 को रीवा की माँ ने अपनी बेटी का बचाव करने के लिए इंस्टाग्राम का सहारा लिया। उन्होंने अपनी बेटी की सुरक्षा पर बोलने की बजाए इंस्टाग्राम स्टोरी में रीवा की उम्र का खुलासा किया। उन्होंने दावा किया कि वह 12 साल की नहीं है। उनकी बेटी अभी 10वीं क्लास में है। उन्होंने इंडस्ट्री में 13 से अधिक वर्षों तक काम किया है और अपनी मेहनत के दम पर सब कुछ हासिल किया है। ध्यान दें कि अगर रीवा अरोड़ा 10वीं कक्षा में हैं, तो भी उनकी उम्र 14-15 साल होगी और वह अभी भी नाबालिग हैं। ऐसे में वह Hyper Sexualisation को समझने के लिए अभी भी बहुत छोटी हैं।

रीवा की माँ की इंस्टाग्राम स्टोरी

रीवा अरोड़ा का नया गाना ‘डिस्को वाली रात’

यह विवाद अभी थमा भी नहीं था कि 15 दिसंबर को यूट्यूब पर रीवा अरोड़ा का नया गाना ‘डिस्को वाली रात’ रिलीज किया गया। इसमें रीवा डिस्को-बार सेटअप में ‘डिस्को वाली रात’ गाने पर डांस कर रही हैं।

साक्षी होल्कर द्वारा गाए गए इस गाने में 22 वर्षीय अभिनेता अभिषेक कुमार भी हैं। इसे अपलोड करने वाले चैनल ने गाने पर कमेंट सेक्शन को बंद कर दिया है। इस गाने को अभी तक 10 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं।

तालिबान ने महिलाओं की शिक्षा पर लगाया रोक, लेकिन लिबरल कहते हैं – उसने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया: UN ने कहा – मुल्क पर पड़ेगा विनाशकारी प्रभाव

तालिबान (Taliban) ने अफगानिस्तान (Afghanistan) की सत्ता पर काबिज होने के बाद से महिलाओं की आजादी पर रोक लगाने वाले फैसले लिए हैं। महिलाओं के आने-जाने, सार्वजनिक रूप से चेहरा दिखाने तक पर पाबंदी लगाने वाले तालिबानी शासकों ने अब अपने ताजा फैसले में महिलाओं की शिक्षा पर रोक लगा दी है। इसको लेकर उच्च शिक्षा मंत्रालय ने देश के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को फरमान जारी किया है।

उच्च शिक्षा मंत्री नेदा मोहम्मद नदीम (Neda Mohammad Nadeem) ने कहा, “आप सभी को सूचित किया जाता ​है कि अगली सूचना तक महिलाओं को देश के किसी भी विश्वविद्यालय में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसे तुरंत लागू करें।” याद कीजिए, भारत के लिबरल गिरोह ने तालिबान की प्रशंसा करने की कोई कसर नहीं छोड़ी थी और उसने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिया था तो ये लोग उस पर लट्टू हो चले थे।

दूसरी बार अफगानिस्तान की सत्ता में वाले तालिबान ने खुद को बदलने को वादा किया था, लेकिन उसने अपने तालिबानी फैसलों से एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह बदलने वाला नहीं है। उसके आदेश को संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने भी परेशान करने वाला इस कदम बताया। उन्होंने कहा, “यह कल्पना करना मुश्किल है कि महिलाओं की शिक्षा और उनकी भागीदारी के बिना कोई देश कैसे विकास कर सकता है। उन सभी चुनौतियों से कैसे निपट सकता है, जो उसके सामने हैं।”

वहीं, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने भी तालिबान के महिलाओं की शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का कहना है, “शिक्षा पर बैन लगाना न केवल महिलाओं और लड़कियों के समान अधिकारों का उल्लंघन करता है, बल्कि इससे देश के भविष्य पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।”

अफगानिस्तान में एक 52 वर्षीय लेक्चरर ने कहा, “मेरी एक छात्रा तालिबान के इस फैसले से बेहद परेशान है। मुझे नहीं पता कि मैं उसे कैसे दिलासा दूँ। उनमें से एक छात्रा काबुल चली गई है। उसने कई कठिनाइयों को पार करते हुए यहाँ के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया था। लेकिन आज उसकी सारी उम्मीदें और सपने चकनाचूर हो गए हैं।”

इससे पहले जब 1990 के दशक के अंत में तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हुआ था, उस वक्त ‘मीना विश्वविद्यालय’ में पढ़ाई करती थीं। उन्होंने बताया, “मैं अपनी छात्रा के डर को अच्छी तरह से समझ सकती हूँ, क्योंकि पिछली बार जब वे सत्ता में आए थे, तब मुझे भी कई सालों तक अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। जिस दिन तालिबान ने राजधानी काबुल पर कब्जा किया था, मुझे उसी दिन पता चल गया था कि अब वे विश्वविद्यालयों में लड़कियों के प्रवेश कर प्रतिबंध लगाएँगे।”

उन्होंने आगे कहा, “भले ही अब वे स्मार्टफोन रखते हों, सोशल मीडिया पर उनका अकाउंट हो और बड़ी कारों में चलते हो, लेकिन ये अभी भी वही तालिबान है, जिसने मुझे शिक्षा से वंचित रखा और अब ये मेरे छात्रों का भी भविष्य खराब कर रहे हैं।”

दरअसल, अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद से ही महिलाओं की सुरक्षा और शिक्षा को लेकर सवाल उठने लगे थे। ऐसे में तालिबान का महिलाओं की शिक्षा को लेकर लिया गया यह फैसला चौंकाने वाला नहीं है, क्योंकि अफगानिस्तान में अपने शुरुआती शासन में भी उसने छठी कक्षा के बाद से लड़कियों की स्कूली शिक्षा पर ही रोक लगा दी थी।

गौरतलब है कि नवंबर 2022 में तालिबान की बर्बरता का एक वीडियो भी सामने आया था। यह पूर्वोत्तर अफगानिस्तान में बदख्शाँ विश्वविद्यालय के परिसर का था। इसमें तालिबानी शासकों ने छात्राओं को कॉलेज परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया था। ‘द इंडिपेंडेंट’ की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि जिस अधिकारी को छात्रों पर डंडों का इस्तेमाल करते हुए देखा गया था, वह तालिबान सरकार के ‘मोरल मंत्रालय’ से संबंधित है। वायरल वीडियो में तालिबान का एक अधिकारी छात्राओं को डंडों से दौड़ा-दौड़ा कर पीटते हुए दिख रहा था, क्योंकि वे अपने शिक्षा के अधिकार को लेकर विरोध कर रही थीं।

जहाँ जहरीली शराब से मरे 70+, वहीं JDU नेता के घर में मिला दारू का भंडार: राजद MLC ने बताया- तेजस्वी यादव भी पीते हैं, नीतीश ने कहा था- जो पिएगा वो मरेगा

बिहार के छपरा में जहरीली शराब से 70 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। अब जिले में जदयू नेता के घर से भारी मात्रा में शराब बरामद की गई है। जदयू नेता कामेश्वर सिंह के मकान से अंग्रेजी और देसी शराब जब्त की गई। इसके साथ ही पुलिस ने एक महिला को हिरासत में भी लिया है।

छपरा में ज़हरीली शराब से हुई मौत के बाद से लगातार छापेमारी की जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक गुप्त सूचना के आधार पर छपरा के मढ़ौरा नगर इलाके में स्थित जदयू नेता के मकान पर छापा मारा गया। यह मकान जदयू नेता कामेश्वर सिंह का है। कामेश्वर सिंह जेडीयू राज्य परिषद के सदस्य हैं। इस मकान में किराएदार के रूप में सरोज महतो और उसकी पत्नी रहती हैं। छापेमारी के बाद पुलिस ने घर की एक महिला को हिरासत में ले लिया है।

बता दें कि कामेश्वर सिंह मशरक के रहने वाले हैं। वही मशरक, जहाँ ज़हरीली शराब से सबसे ज्यादा मौत हुई है। हालाँकि शराब मिलने के बाद जदयू नेता कामेश्वर सिंह ने कहा है कि उन्हें और पार्टी को बदनाम करने की साज़िश हो रही है।

जदयू नेता के घर से बरामद शराब (फोटो साभार: एबीपी न्यूज़)

दूसरी तरफ राजद के विधान पार्षद रामबली सिंह पर हुए एक स्टिंग ऑपरेशन ने बिहार की राजनीति को झकजोर कर रख दिया है। इस स्टिंग में राजद नेता रामबली सिंह ने कहा है कि बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव खुद शराब पीते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के आधे से ज्यादा मंत्री- विधायक शराब पीते हैं और तेजस्वी भी उनमें शामिल हैं। बिहार भाजपा के ट्विटर हैंडल से भी वीडियो शेयर कर महागठबंधन सरकार पर हमला किया गया है।

एबीपी न्यूज़ की तरफ से किए गए स्टिंग ऑपरेशन में राजद एमएलसी रामबली सिंह कह रहे हैं कि शराबबंदी पर मुख्यमंत्री किसी की सुनना नहीं चाहते हैं और उनकी अपनी जिद है। इसमें वो कहते दिख रहे हैं कि सभी लोग महसूस करते हैं कि शराब नीति की समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि शराब नीति कामयाब नहीं है इससे गरीबों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा, “शराबबंदी के बावजूद शराब मिल रहा है। तेजस्वी भी नहीं बोल पाते हैं नीतीश जी के सामने। तेजस्वी खुद दारू पीते हैं तो वो क्यों नहीं चाहेंगे कि दारू मिलनी शुरू हो।”

स्टिंग कर रहे रिपोर्टर ने तेजस्वी का नाम सुनने के बाद दोबारा पूछा, “पीते हैं तेजस्वी जी?” इस पर रामबली सिंह ने जवाब दिया – “आधे से ज्यादा मंत्री और विधायक माननीय पीते हैं, आधे से ज्यादा ऑफिसर शराब पीते हैं। बंदी तो यहाँ दिखाने के लिए है। रात में जाकर पता कीजिए कितने ऑफिसरों के यहाँ दारू चल रहा है।”

उधर ‘राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC)’ की टीम छपरा में ज़हरीली शराब से मारे गए लोगों की जाँच के लिए बिहार पहुँच गई है। टीम में 10 लोग शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, छपरा सदर अस्पताल पहुँच कर जाँच टीम ने मरीजों और मृतकों की संख्या और पोस्टमार्टम से जुड़ी जानकारी हासिल की। NHRC टीम का बिहार आना सत्ता पक्ष के लोगों को पसंद नहीं आ रहा है। लोकसभा में जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने NHRC की टीम को बिहार भेजने पर विरोध किया था।

जदयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने भी पूछा था कि भाजपा शासित राज्यों में घटी घटनाओं की जाँच के लिए कोई टीम क्यों नहीं जाती? इस पर भाजपा ने भी सवाल पूछा है कि बिहार सरकार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जाँच से डर क्यों रही है?