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केरल की नई शिक्षा नीति पर इस्लामी दलों का दबाव: मुस्लिम लीग के नेता ने कहा- कक्षा में लड़का-लड़की को साथ बैठाएँगे और हस्तमैथुन-समलैंगिकता पढ़ाएँगे

केरल सरकार (Kerala Government) की तरफ से विधानसभा में पेश किए गए शिक्षा सुधार प्रस्ताव पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के नेता अब्दुरहिमन रंदथानी ने विवादित बयान दिया है। कुन्नूर में एक सभा को संबोधित करते हुए रंदथानी ने कहा कि सरकार के शिक्षा सुधार का मकसद स्कूल में हस्तमैथुन और समलैंगिकता को बढ़ावा देना है।

IUML नेता अब्दुरहिमन ने मंगलवार (13 दिसंबर 2022) को कन्नूर जिले में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के विरोध कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केरल के वामपंथी सरकार की प्रस्तावित शिक्षा सुधारों की आलोचना की। आपको बता दें IUML केरल में UDF का घटक दल है, जिसमें कॉन्ग्रेस (Congress) भी शामिल है। शिक्षा सुधार प्रस्ताव में कक्षाओं के दौरान लड़के-लड़कियों का एक जैसे यूनिफॉर्म में साथ बैठने की व्यवस्था का सुझाव दिया गया है।

IUML नेता ने कहा कि लड़कियों ने शिक्षा में अच्छी प्रगति की है, लेकिन लड़कों के साथ बैठकर नहीं। लड़के और लड़कियों को एक साथ बैठने का प्रस्ताव देश की संस्कृति को नुकसान पहुँचाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार दावा करती है, “लड़कों और लड़कियों को एक साथ बैठाने से शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधार होने की उम्मीद है और फिर कक्षाओं में हस्तमैथुन और समलैंगिकता सिखाया जाता है तो हमारी संस्कृति का क्या हश्र होगा?” उन्होंने कहा कि यौन शिक्षा जबरदस्ती थोपी जाने वाली चीज नहीं है।

हालाँकि, थोड़ी ही देर में अब्दुरहिमन रंदथानी ने अपने बयान पर सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि वो शिक्षा में सुधारों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन लिंग के आधार पर छात्रों को एक साथ नहीं बैठाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर स्कूलों के समय में बदलाव होता है तो मदरसा की तालीम प्रभावित होगी। जेंडर यूनिफॉर्म की आड़ में छात्रों को जींस या ट्राउजर पहनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।

दरअसल, रंदथानी केरल में शिक्षा सुधारों को लेकर शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे। वी शिवनकुट्टी पहले ही कह चुके हैं कि सरकार किसी भी नीति को थोप नहीं रही है, बल्कि हाउस में इस पर बहस और चर्चा के लिए प्रस्तावित किया गया है। इसके बावजूद विपक्ष प्रस्तावित शिक्षा नीति को लेकर सरकार पर हमलावर है।

चंदा, सीक्रेट डील, गुपचुप मुलाकात, घूस लेकर वीजा: तवांग से भागे चीनी फौजी फिर भी भारत सरकार को घेर रही कॉन्ग्रेस, आखिर किसके हाथ खेल रही

अरुणाचल प्रदेश के तवांग (Twang, Arunachal Pradesh) में चीनी सैनिकों (Chinese Soldiers) द्वारा घुसपैठ का कोशिश के बाद हुए झड़प को लेकर विपक्षी दल कॉन्ग्रेस (Congress) में हंगामा कर दिया। सवाल ये है कि कॉन्ग्रेस खुद चीन से चंदा लेने, गुप्त समझौते करने और वरिष्ठ अधिकारियों से गुपचुप मुलाकात करने के मामले में घिर चुकी है। ऐसे में कॉन्ग्रेस को इन बिंदुओं पर जवाब दिए बिना, सरकार को सीधे कठघड़े में खड़ा करना, अपने आप में कई सवाल पैदा करता है।

तवांग मुद्दे को लेकर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने सदन में कहा कि अगर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) देश की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं तो वे कुर्सी छोड़ दें।हालाँकि, सत्ताधारी पार्टी भाजपा (BJP) ने स्पष्ट कर दिया कि चीन की घुसपैठ नाकाम हुई है और वह भारत की इंच भूमि पर भी कब्जा करने में नाकाम रहा है। भारत सरकार के आश्वासन के बाद भी कॉन्ग्रेस नेता सदन में हंगामा करते रहे।

इसके बाद सदन में जवाब देते हुए गृहमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस और पंडित जवाहरलाल नेहरू के कारण चीन ने भारत की हजारों किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया है। कॉन्ग्रेस के कारण भारत को संयुक्त राष्ट्र में स्थाई सदस्यता नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि साल 2005 से 2007 के बीच राजीव गाँधी फाउंडेशन (RGF) के जरिए पार्टी ने चीन से 1.35 करोड़ रुपए चंदा लिए।

इतना ही नहीं, भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नेशनल रिलीफ फंड (PMNRF) का पैसा डायवर्ट करके राजीव गाँधी फाउंडेशन यानी RGF को दिया गया था। भाजपा ने इसके लिए साल 2005-06 और 2007-08 की वार्षिक रिपोर्ट का हवाला दिया।

बता दें कि राजीव गाँधी फाउंडेशन की अध्यक्ष सोनिया गाँधी हैं। इसके साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम इसमें ट्रस्टी रहे हैं। इस दौरान इस फाउंडेशन को भरपूर पैसा मिलता रहा।

RGF का रजिस्ट्रेशन सामाजिक कार्यों के लिए करवाया गया था। दूसरी तरफ चीनी दूतावास ने भारत-चीन संबंधों पर शोध लिए पैसा दिया गया था। इतना ही नहीं, RGF कट्टरपंथी इस्लामी जाकिर नाइक का इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन से 50 लाख रुपए मिले थे। इन सब तमाम कारणों से सरकार ने RGF का FCRA लाइसेंस कर दिया।

कॉन्ग्रेस भले ही तवांग के नाम पर चीन का मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश करे, लेकिन कॉन्ग्रेस, राहुल गाँधी एवं इसके अन्य नेताओं के चीन के साथ नजदीकियाँ जगजाहिर हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम तो दो कदम आगे बढ़ गए।

कार्ति चिदंबरम ने साल 2011 में 263 चीनी नागरिकों को वीजा जारी कराने के बदले 50 लाख रुपए की घूस ली थी। इस मामले की जाँच सीबीआई कर रही है। जिस समय चीनी नागरिकों को वीजा जारी किया गया था, उस समय कार्ति चिदंबरम के पिता पी. चिदंबरम केंद्रीय गृहमंत्री थे।

इसी साल मई में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी पर नेपाल की राजधानी काठमांडू के एक नाइटक्लब में नेपाल की चीन की राजदूत होउ यांकी से मुलाकात करने की बात सामने आई थी। इतना ही नहीं, जब देश में डोकलाम विवाद चल रहा था, जब राहुल गाँधी चीन के अधिकारियों से साथ मुलाकात की थी। उस वक्त यह मुद्दा भारतीय राजनीति में एक अहम मुद्दा बना था।

पहली मीटिंग 2017 में हुई थी, जब उन्होंने चीनी राजदूत लुओ झाओहुई के साथ उस समय बैठक की थी। उस समय भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद छिड़ा था। इस बैठक के संबंध में पहले तो कॉन्ग्रेस ने साफ इंकार कर दिया था, लेकिन जब चीन की एंबेसी ने खुद इसका खुलासा किया तो कॉन्ग्रेस को इस मुद्दे पर काफी जिल्लत झेलनी पड़ी थी। य

यह बैठक विशेष रूप से संदिग्ध इसलिए भी थी, क्योंकि उस समय कॉन्ग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी चीन के साथ चल रहे सैन्य गतिरोध पर अपने रुख पर कायम थे। उस दौरान राहुल गाँधी भारत सरकार का सात खड़े होने के बजाय वे भारत सरकार पर लगातार तीखे हमले कर रहे थे।

इसके बाद कैलाश मानसरोवर मामले पर चीन के नेताओं से हुई गुप्त बैठक के बारे में तो राहुल गाँधी ने खुद ही खुलासा कर दिया था। राहुल उस समय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। जिसके कारण उनका इस तरह चीन अधिकारियों व नेताओं से बैठक करने ने कई सवाल खड़े कर दिए थे।

इसी तरह जून 2020 में सीमा विवाद शुरू होने के बाद कॉन्ग्रेस और चीन के बीच कई गुप्त समझौतों होने का खुलासा हुआ था। यह समझौता 7 अगस्त 2008 को सोनिया गाँधी की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच हुआ था। जिस वक्त यह समझौता हुआ था, उस दौरान राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी भी उपस्थिति थे। चीन की ओर से इस समझौते पर चीन के वर्तमान प्रधानमंत्री शी जिनपिंग ने हस्ताक्षर किया था। उस समय जिनपिंग पार्टी के उपाध्यक्ष थे। 

साल 2008 में सोनिया गाँधी अपने बेटे राहुल, बेटी प्रियंका, दामाद रॉबर्ट वाड्रा और दोनों के बच्चों को साथ लेकर ओलंपिक खेल देखने पहुँची थीं। इसके अलावा उन्होंने और राहुल गाँधी ने चीन में कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी किया था।

नाम- मेहताब, सरताज, जुनैद और दीन मोहम्मद; काम- निर्मला सीतारमण के नाम से लेटर भेजना: डेढ़ साल में करोड़ों ठगे, 3000 लोगों का डाटा मिला

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के नाम पर ऑनलाइन ठगी करने का मामला सामने आया है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने चार लोगों को पकड़ा है। इनके नाम मेहताब आलम, सरताज खान, मोहम्मद जुनैद और दीन मोहम्मद हैं।

ये बंद पड़ी इंश्योरेंस पॉलिसी को मैच्योर कराने के नाम लोगों से ठगी करते थे। निर्मला सीतारमण, आरबीआई (RBI) के रिजनल डायरेक्टर एसएमएन स्वामी, आईआरडीए (IRDA) समेत विभिन्न इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारी के नाम से लोगों के पास फर्जी ईमेल भेजते थे। इनके फर्जी हस्ताक्षर वाले पत्र भेज कर लोगों को फँसाते थे।

यह गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के आईएफएसओ यूनिट (IFSO Unit) ने की है। आरोपितों के पास से लगभग 3 हजार लोगों का इंश्योरेंस डेटा बरामद किया गया है। पुलिस ने इसके साथ ही आरोपितों से 7 मोबाइल फोन और 1 लैपटॉप भी बरामद किया है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार आरोपितों ने अपराध के इसी तरीके का इस्तेमाल कर बीते करीब डेढ़ साल में कई लोगों से करोड़ों रुपए ठगे हैं। पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपित वित्त मंत्रालय के अधिकारी बन लोगों से ठगी कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक आरोपितों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के जाली हस्ताक्षर का भी अपराध में इस्तेमाल किया था। इसी तरह के अन्य मामलों के बाद वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में शिकयत दर्ज करवाई थी, जिसके बाद यह मामला उजागर हुआ।

IFSO यूनिट के पुलिस उपायुक्त प्रशांत गौतम ने कहा कि ठगी के संबंध में शिकायत दिल्ली पुलिस आयुक्त के कार्यालय को भेजी गई थी। ताजा मामला वाराणसी के एक व्यापारी से बंद पॉलिसी को मैच्यौर करने के एवज में 1.27 लाख रुपए ठगने का है। दरअसल पीड़ित के पास एक फर्जी लेटर भेजा गया था, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के हस्ताक्षर थे। पीड़ित को बताया गया कि उसकी लैप्स हो चुकी पॉलिसी के लिए 12 लाख से अधिक रुपए स्वीकृत किए गए हैं। हालाँकि इसके लिए उसे प्रोसेसिंग फी के नाम पर कुछ रुपए चुकाने होंगे। पीड़ित ने ये पैसे भी दे दिए थे। बाद में उसे ठगे जाने का एहसास हुआ।

नाम आश्रम, काम ईसाई धर्मांतरण: महिलाओं का हटवा देते हैं सिंदूर-बिंदी, संस्कृत पढ़ाने के नाम पर बच्चों को पादरी की ट्रेनिंग

भारत के कई हिस्सों में गरीबों के बीच ईसाई मिशनरी अपनी पैठ बनाने के लिए न सिर्फ कई किस्म के लालच देते हैं, बल्कि हिन्दू धर्म के प्रति घृणा भी सिखाते हैं। क्रिसमस 2023 (25 दिसंबर) के मौके पर दमोह के ‘येशु भवन’ में 500 लोगों के ईसाई धर्मांतरण का कार्यक्रम था, लेकिन जागरूक लोगों द्वारा विरोध किए जाने के कारण मिशनरियों की पोल खुल गई और कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। पुलिस द्वारा गठित SIT की जाँच में भी सामने आया है कि ‘येशु भवन’ धर्मांतरण का केंद्र बना हुआ था।

‘दैनिक भास्कर’ में इस सम्बन्ध में पत्रकार संतोष सिंह की विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, जिसमें बताया गया है कि कैसे ‘बप्टिज्म (ईसाई धर्मांतरण की प्रक्रिया)’ के तहत हिन्दू घृणा सिखाई जाती है। पानी से भरे गड्ढे में डुबकी लगवा कर महिलाओं की सिंदूर, बिंदी, चूड़ी और मंगलसूत्र उतरवा दिए जाते हैं। इतना ही नहीं, उनके घर से देवी-देवताओं की तस्वीरों और मूर्तियों को भी पानी में डलवा दिया गया। कुछ महिलाओं की स्थिति ऐसी हो गई है कि वो अब न हिन्दू हैं और न ईसाई।

ये महिलाएँ घर-वापसी करवाना चाहती हैं, लेकिन बीच की अवधि में ये ईसाई मिशनरियों के जाल में फँस कर कहीं की नहीं रहतीं। दमोह जिले के ‘येशु भवन’ को केरल का एक संगठन चलाता है। एक परिवार पुलिस के पास पहुँच गया, वरना उनका ये खेल और लंबा चलता। बाप्टिज्म के माध्यम से धर्मांतरण किया जाता है। खुद जीसस क्राइस्ट का भी धर्मांतरण हुआ था। सबसे बड़ी बात कि धर्मांतरण के केंद्र का नाम ‘येशु भवन आश्रम’ रखा गया है। कहीं बच्चे होने का लालच, कहीं नौकरी का लालच तो कहीं ईसाई लड़की से शादी करा कर ढेर सारा दहेज़ दिला कर धर्मांतरण के लिए तैयार किया गया।

संस्थानों के हिन्दू धर्म से जुड़े नाम रख कर गरीबों को बरगलाया जाता है। 13 नवंबर, 2022 को ‘राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR)’ के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो भी दमोह पहुँचे हुए थे। जब वो ‘मिड इंडिया क्रिश्चियन सर्विसेस’ द्वारा दिव्यांग बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा-दीक्षा के नाम पर संचालित छात्रावास के निरीक्षण के लिए पहुँचे तो वहाँ कोई और ही खेल चलता मिला। वहाँ नाबालिगों का धर्म-परिवर्तन कराया जा रहा था। ‘बाइबिल’ कॉलेज के एक छात्रावास में एक जनजातीय समाज के लड़के को पादरी बनने की शिक्षा दी जा रही थी।

जबकि उसे संस्कृत की शिक्षा दिलाने के नाम पर यहाँ लाया गया था। NCPCR के मुखिया ने इसे धर्मांतरण के साथ-साथ मानव तस्करी का मामला भी करार दिया। यहाँ तक कि ‘येशु भवन’ में निर्माण कार्यों के लिए लाए गए मिस्त्री और मजदूरों पर भी धर्मांतरण के लिए जम कर डोरे डाले जाते थे। खाना खिलाने से पहले ईसाई प्रेयर कराया जाता था। पादरी आँख बंद कर सिर पर हाथ रख कर कुछ बुदबुदाते थे। उन्हें लालच दिया जाता था कि उनके बच्चों की शिक्षा से लेकर परिवार के खाने-पीने तक की चिंता ईसाई समाज करेगा, अगर वो हिन्दू धर्म छोड़ कर बप्टिज्म करा लेते हैं तो।

कई महिलाओं को 5000 रुपए तक दिए गए। बप्टिज्म के दौरान हिन्दू धागों से लेकर पायल तक खुलवा दिया जाता था। सलाह दी जाती थी कि येशु के अलावा किसी के सामने सिर न झुकने पाए। धर्मांतरण के बाद ये गरीब लोग अपने नाते-रिश्तेदारों से भी दूर हो जाते हैं, ऊपर से उनकी जाति के कारण ईसाई मिशनरी भी भेदभाव करना शुरू कर देते हैं। ये कहीं के नहीं रहते। फ़िलहाल ‘येशु भवन’ में ताला लगा हुआ है। 8 पर FIR हुई है और 2 दिल्ली से गिरफ्तार भी हुए हैं।

मछुआरे की बीवी जिस पर धोती थी कपड़ा, उससे खुलेगा 239 लोगों की मौत (हत्या?) का राज: रहस्यमयी गायब हवाई जहाज पर नई रिपोर्ट

पूर्वी अफ्रीका में एक देश है मैडेगास्कर। यहाँ टैटेली (Tataly) नाम का एक मछुआरा रहता है। समंदर के किनारे उसे एक चीज मिलती है, उठा कर अपने घर ले आता है। मजबूत दिखने वाली उस चीज को मछुआरे की बीवी कपड़े धोने के काम में लाती है। 5 साल तक जिस पर कपड़े धोए जा रहे थे, अब पता चला है कि वो चीज दुर्घटनाग्रस्त और गायब हो चुके हवाई जहाज MH370 का हिस्सा (लैंडिंग गियर) है।

ब्रिटिश मीडिया कंपनी Independent की रिपोर्ट के अनुसार मलेशियन एयरलाइंस की विमान MH370 के पायलट ने जानबूझ कर प्लेन को समंदर में डुबाया। एयरलाइन इंडस्ट्री के एक्सपर्ट के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त हवाई जहाज के लैंडिंग गियर का मिलना इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि जब प्लेन समुद्र के सतह से टकराया तो उस समय उसके लैंडिंग गियर खुले हुए थे। मीडिया रिपोर्ट में दो एक्सपर्ट ने बताया कि जानबूझ कर और ज्यादा से ज्यादा नुकसान (टुकड़े-टुकड़े कर देना) की मंशा के साथ MH370 को समुद्र में क्रैश करवाया गया।

मलेशियन एयरलाइंस की विमान MH370 के मलबे की खोज में जुटे अमेरिकी नागरिक ब्लेन गिब्सन और ब्रिटेन के इंजीनियर रिचर्ड गॉडफ्रे ने बताया:

“विमान के सभी हिस्सों की क्षति और उसके टुकड़ों तक की पानी में घुसने की गति इस निष्कर्ष की ओर ले जाती है कि पायलट ने जानबूझ कर अधिक से अधिक स्पीड रखते हुए प्लेन को समुद्र में क्रैश किया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि विमान कई टुकड़ों में टूट जाए। MH370 का समुद्र में क्रैश होना सॉफ्ट लैंडिंग (दुर्घटना की स्थिति में हवाई जहाज को कम से कम गति पर रखते हुए पानी की सतह के समानांतर रखते हुए अंततः उसे एक नाव की तरह पानी पर चलाने जैसा) बिल्कुल भी नहीं था।”

MH370 के लैंडिंग गियर मिलने पर और उससे उपजी संभावनाओं/शंकाओं पर अपनी बात जारी रखते हुए दोनों एक्सपर्ट ने कहा कि विमान का पायलट एक्टिव था और उसने लैंडिंग गियर को नीचे किया ताकि जितनी जल्दी हो सके, हवाई जहाज डूब जाए। विमान की अति तीव्र गति और लैंडिंग गियर का नीचे होना यह स्पष्ट करता है कि पायलट इस दुर्घटना के साक्ष्य को छिपाना चाहता था।

MH370 दुर्घटना: कब, कैसे, कहाँ

8 मार्च 2014 को मलेशियन एयरलाइंस के विमान MH370 ने कुआलालंपुर से उड़ान भरी थी। 227 यात्री और 12 क्रू मेंबर थे इसमें – मतलब कुल 239 लोग। प्लेन को जाना था चीन की राजधानी बीजिंग। उड़ान के कुछ देर बाद ही प्लेन रडार से गायब हो गया। जिस रूट पर हवाई जहाज को चलना था, उससे अलग दिशा भी पकड़ ली।

बहुत बड़े सर्च ऑपरेशन के बाद पता चला कि MH370 हिंद महासागर में डूब गया या क्रैश करवाया गया। ऐविएशन इंडस्ट्री में दुर्घटनाग्रस्त विमान को सर्च करने में सबसे महँगा सर्च ऑपरेशन (151 मिलियन डॉलर, अभी के अनुसार 1247 करोड़ रुपए) इसी का रहा है। समंदर में 1 लाख 20 हजार वर्ग किलोमीटर एरिया में MH370 को या इसके मलबों को खोजने पर काम किया गया। हर सर्च हालाँकि असफल रहा अब तक। इस विमान के जो भी टुकड़े अभी तक मिले हैं, उनको उसी विमान के टुकड़े मानने के बजाय “शायद उसी विमान के टुकड़े” माना गया है।

इतने बड़े सर्च ऑपरेशन के बाद पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने दावा किया था कि MH370 विमान को एक आत्मघाती पायलट ने क्रैश करवाया था। उन्होंने तब कहा था, “मलेशियाई सरकार के शीर्ष लोगों और सूत्रों से स्पष्ट है कि यह दुर्घटना पायलट द्वारा हत्या-आत्महत्या थी।”

पिता 6 बार के CM, खुद MLA, मुख्यमंत्री पद पर भी जता रहे थे दावेदारी: पत्नी के साथ हिंसा में हाजिर होने का आदेश, MP माँ भी आरोपित

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत के बाद जब कॉन्ग्रेस में मुख्यमंत्री बनने को लेकर घमासान चल रहा था तो आपने दो नाम सुने होंगे। ये नाम हैं- विक्रमादित्य सिंह और प्रतिभा सिंह। दोनों वीरभद्र सिंह की दुहाई देकर मुख्यमंत्री पद पर अपनी दावेदारी जता रहे थे। हिमाचल प्रदेश के 6 बार मुख्यमंत्री रहें दिवंगत वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा फिलहाल सांसद हैं तो बेटे विक्रमादित्य विधायक। माँ-बेटे को घरेलू हिंसा के एक मामले में आज (14 दिसंबर 2020) को कोर्ट में पेश होना है।

घरेलू हिंसा का यह मामला शिमला ग्रामीण के विधायक विक्रमादित्य की पत्नी सुदर्शना ने दर्ज करवा रखा है। सुदर्शना चंडावत ने पति और अपने ससुराल वालों पर राजस्थान के उदयपुर कोर्ट में 17 अक्तूबर 2022 घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई थी। 17 नवंबर 2022 को पहली सुनवाई में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी उदयपुर की अदालत ने विक्रमादित्य सिंह, सास प्रतिभा सिंह, ननद अपराजिता, ननदोई अंगद सिंह और चंडीगढ़ की एक युवती के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए थे। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार विक्रमादित्य पहली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष पेश नहीं हुए थे, जिसके बाद अदालत ने सभी प्रतिवादियों को उदयपुर कोर्ट में बुधवार (14 दिसंबर 2022) पेश होने के आदेश दिए।

बता दें कि सुदर्शना ने घरेलू हिंसा में महिला संरक्षण अधिनियम की धारा 20 के तहत कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि शादी के कुछ समय के बाद उनके साथ घरेलू हिंसा की गई। उन्होंने अदालत से ससुराल वालों की शारीरिक, मानसिक और आर्थिक हिंसा पर रोक लगाने की गुहार लगाई है। साथ ही उनके अलग रहने के लिए आवास की व्यवस्था करने का निर्देश देने की भी अपील की है।

विक्रमादित्य सिंह की शादी मार्च 2019 में सुदर्शना चंडावत से हुई थी। दोनों में कुछ समय बाद अनबन हो गई और दोनों लंबे समय से अलग-अलग रह रहे हैं। विक्रमादित्य सिंह ने हालाँकि मामले में टिप्पणी से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि पूरा मामला पारिवारिक है।

विक्रमादित्य का राजनीतिक सफर 2013 में शुरू हुआ था। वह उसी साल हिमाचल प्रदेश में कॉन्ग्रेस कमेटी से जुड़े और उन्हें युवा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनाया गया। 2017 तक विक्रमादित्य इस पद पर रहे। हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में वे दूसरी बार शिमला ग्रामीण क्षेत्र से विधायक चुने गए हैं। उनकी माँ प्रतिभा सिंह हिमाचल कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष हैं।

भारतीय सैनिकों ने दनादन बरसाई लाठियाँ, भागी दुश्मन फौज: तवांग का बताया जा रहा Video, क्या सच में 9 दिसंबर को ऐसे ही कूटे गए चीनी

अरुणाचल प्रदेश के तवांग में 9 दिसंबर को भारतीय सैनिकों और चीनी फौज के बीच हिंसक झड़प हुई थी। तवांग सेक्टर के यांग्त्से क्षेत्र में एलएसी पार करने की कोशिश करने वाले चीनी फौजियों को भारतीय सैनिकों ने अपने पोस्ट्स पर लौटने को मजबूर कर दिया था। अब सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल है। 2 मिनट 20 सेकेंड के इस वीडियो को कुछ लोग तवांग सेक्टर की झड़प से जोड़कर शेयर कर रहे हैं।

इस वीडियो में भारतीय सैनिकों की दुश्मनों से झड़प दिख रही है। दुश्मन फौजी जैसे ही तारबंदी को तोड़ भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश करते हैं भारतीय सैनिक उनके सामने दीवार बनकर खड़े हो जाते हैं। फिर दे दनादन इतनी लाठियाँ बरसाते हैं कि दुश्मन फौजी भाग खड़े होते हैं। पत्रकार रुबिका लियाकत ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है, “ये भारतीय सैनिक हैं और जो पिट रहे हैं वो दुश्मन हैं।”

‘बाबा बनारसी’ नाम के यूजर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है, “300+ चीनी सैनिक बनाम लगभग 100 भारतीय सैनिक। तवांग भारतीय सेना के शौर्य का गवाह बना। शानदार है यह क्लिप।”

एक और यूजर ने वीडियो शेयर कर ट्वीट किया, “ये भारतीय सेना द्वारा जारी किया गया तवांग का ट्रेलर है। पूरी फिल्म जल्द ही अक्साई चीन से रिलीज होगी।”

वायरल वीडियो कब और कहाँ का है, यह साफ नहीं है। पत्रकार शिव अरूर ने कहा है कि यह वीडियो 9 दिसंबर का नहीं है।

भू-रणनीतिक विशेषज्ञ मेजर अमित बंसल (सेवानिवृत्त) ने भी इसे पुराना वीडियो बताया है। उन्होंने कहा है कि जिस यांग्त्से क्षेत्र में 9 दिसंबर को झड़प हुई है वह इलाका इस समय बर्फ से ढका रहता है।

पत्रकार आदित्य राज कौल ने भी इस वीडियो के पुराना होने की संभावना जताई है।

उल्लेखनीय है कि चीनी सैनिकों ने 9 दिसंबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में एलएसी को पार करने की कोशिश की थी। लेकिन 17000 फीट की ऊँचाई पर भारतीय सैनिकों ने ही उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। चीन की फौज को वापस होने के लिए मजबूर कर दिया था। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार चीन के 300 से अधिक फौजी इसमें शामिल थे। लेकिन भारत के 50 सैनिकों ने ही उनका रास्ता रोक दिया। करीब आधे घंटे के भीतर ही भारतीय सेना की बैकअप टीम भी मौके पर पहुँच गई। इसके बाद दोनों देशों के बीच झड़प हुई और चीनी फौजियों को लौटना पड़ा।

दलितों के घर से फिंकवा दी हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ, धोखे से धर्मांतरण: कर्नाटक में पादरी पत्नी सहित गिरफ्तार, रेप आरोपित नाबालिग बेटा भी धराया

कर्नाटक के बेल्लारी इलाके में दलितों को ईसाई धर्म अपनाने को लेकर मजबूर करने का मामला सामने आया है। दलितों को ईसाई बनाने के इल्ज़ाम में एक पादरी और उसके परिवार पर मामला दर्ज किया गया है। इतना ही नहीं पादरी के 17 साल के बेटे पर पिछड़े समुदाय की एक नाबालिग से बलात्कार का आरोप भी लगा है। पुलिस ने कोप्पल के आरोपित पादरी सैमुअल और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि उनके बेटे को बेल्लारी के रिमांड होम में भेज दिया गया।

धर्मांतरण और बलात्कार का मामला बेल्लारी के कोप्पल से आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पादरी सत्यनारायण उर्फ ​​सैमुअल अपने प्रार्थना घर में लोगों को बरगला कर व प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराता है। इलाके के दलित समुदाय के एक शख्स ने ही पादरी के खिलाफ शिकायत दी थी। आरोप है कि पादरी ने इलाके के दलितों को प्रार्थना घर में आने के लिए मना लिया और यहाँ बपतिस्मा (धर्मांतरण वाली एक प्रकार की ईसाई रस्म) करवा दिया। इसके बाद पादरी और उसका परिवार लोगों पर ईसाई धर्म का पालन करने के लिए दबाव बनाने लगा।

दलितों के मुताबिक उन्हें हिंदू देवी-देवताओं की पूजा न करने की चेतावनी दी गई। आरोप है कि धर्मांतरण करा कर दलितों के घर से हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें और मूर्तियाँ भी जब्त कर लीं गईं और उन्हें एक नहर में फेंक दिया गया। दलितों से कहा गया कि यदि उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं की पूजा की तो ‘बुरी शक्तियाँ’ उन्हें परेशान करेंगी।

पादरी की पत्नी पर आरोप है कि वह दलितों के बच्चों को चर्च ले जाती थी और उन्हें चर्च की गतिविधियों में शामिल करती थी। पीड़ित ने आरोप लगाया कि जब उसने समुदाय के नेताओं को जबरन धर्मांतरण के बारे में जानकारी दी तो पादरी ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया और मार-पीट की।

इसके अलावा पादरी के नाबालिग बेटे ने समुदाय की ही एक लड़की को शादी का झाँसा देकर बलात्कार किया। जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाने के बाद पीड़िता के परिवार ने रेप की शिकायत भी दर्ज कराई जिसके बाद पादरी के परिवार पर दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए। केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने पादरी और उसके परिवार को गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश किया। जहाँ से पादरी और उसकी पत्नी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया वहीं उसके नाबालिग बेटे को सुधारगृह में भेजा गया है।

‘कॉन्ग्रेस की अंग्रेज परस्त नीतियों की खुल कर आलोचना करते थे श्री अरबिंदो’: महर्षि की 150वीं जयंती पर बोले PM मोदी – भारत वो अमर बेल है, जो…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए महर्षि अरबिंदो की 150वीं जयंती पर पुडुचेरी में ‘आज़ादी के अमृत महोत्सव’ के तहत आयोजित ‘कम्बन कला संगम’ के कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने श्री अरबिंदो के जन्मदिवस के पुण्य अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उनके 150वें जन्मदिवस के ऐतिहासिक अवसर पर उनके विचारों और प्रेरणाओं को हमारी नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए इस पूरे साल को विशेष रूप से बनाने का संकल्प लिया गया है।

पीएम मोदी ने कहा कि जब प्रेरणा और कर्तव्य, मोटिवेशन और एक्शन एक साथ मिल जाते हैं, तो असंभव लक्ष्य भी अवश्यम्भावी हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि कैसे आज़ादी के अमृतकाल में आज देश की सफलताएँ, देश की उपलब्धियाँ और ‘सबका प्रयास’ का संकल्प इस बात का प्रमाण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री अरबिंदो का जीवन ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का प्रतिबिंब है और उनका जन्म भले ही बंगाल में हुआ था, लेकिन अपना ज्यादातर जीवन उन्होंने गुजरात और पुडुचेरी में बिताया।

प्रधानमंत्री ने बताया कि महर्षि जहाँ भी गए, वहां अपने व्यक्तित्व की गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने कहा कि श्री अरबिंदो उन स्वतंत्रता सेनानियों में से थे जिन्होंने पूर्ण स्वराज की माँग की और कॉन्ग्रेस की अंग्रेज परस्त नीतियों की खुलकर आलोचना की। बकौल पीएम, उन्होंने कहा था कि अगर हम अपने राष्ट्र का पुनर्निर्माण चाहते हैं तो हमें रोते हुए बच्चे की तरह ब्रिटिश राज के सामने रोना बंद करना होगा। इस दौरान पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत वो अमर बीज है, जो विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में थोड़ा दब सकता है, थोड़ा मुरझा सकता है, लेकिन मर नहीं सकता। क्योंकि, भारत मानव सभ्यता का सबसे परिष्कृत विचार है, मानवता का सबसे स्वाभाविक स्वर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “महर्षि अरबिंदो के जीवन में हमें भारत की आत्मा और भारत की विकास यात्रा के मौलिक दर्शन होते हैं। उनके ऊपर एक सिक्का और पोस्टल स्टाम्प भी रिलीज किया गया है। आज पूरे देश का युवा भेष-भूषा के आधार पर भेद वाली राजनीति छोड़ कर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की राजनीति से प्रेरित है। महर्षि अरबिंदो के जीवन में आधुनिक शोध भी था, राजनैतिक प्रतिरोध भी था और ब्रह्म बोध भी था। दुनिया में आज भीषण चुनौतियाँ हैं, जिनके समाधान में भारत की भूमिका अहम है।

‘कम्युनिस्ट केंद्र बन जाएँगे राज्य के सारे विश्वविद्यालय’: केरल की वामपंथी सरकार ने राज्यपाल को चांसलर पद से हटाने का कानून पारित किया

केरल विधानसभा में मंगलवार (13 दिसंबर, 2022) को विश्वविद्यालय कानून संशोधन विधेयक (University Law Amendment Bill) पारित कर दिया गया। इस विधेयक के कानून बनते ही केरल के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति पद पर राज्यपाल की जगह किसी अन्य की नियुक्ति की जा सकेगी। यदि ऐसा हुआ तो केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान अब राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलपति नहीं रह जाएँगे।

इस मुद्दे को लेकर विपक्षी यूडीएफ ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। विपक्ष ने विधेयक के संबंध में उनके सुझावों की अनदेखी का आरोप लगाया है। विधानसभा में घंटों की चर्चा के बाद इस विधेयक को पारित कर दिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल के कानून मंत्री पी राजीव ने वीसी की नियुक्ति के लिए समिति गठित करने की बात कही है। समिति में मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता और विधानसभा अध्यक्ष शामिल हो सकते हैं। विधेयक में पाँच साल के कार्यकाल का प्रावधान किया गया है।

चर्चा के दौरान कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली यूडीएफ ने कहा कि वह चांसलर के पद से राज्यपाल को हटाए जाने के खिलाफ नहीं है, लेकिन इस पद के लिए सुप्रीम कोर्ट के र‍िटायर जजों और केरल हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्‍ट‍िस में से चयन किया जाना चाहिए। विपक्ष ने यह भी कहा कि हर विश्वविद्यालय के लिए अलग-अलग चांसलर की जरूरत नहीं है और चयन समिति में मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता के साथ-साथ केरल हाईकोर्ट के चीफ जस्‍ट‍िस को होना चाहिए।

इस पर प्रदेश के कानून मंत्री पी राजीव ने असहमति जताते हुए कहा कि किसी जज को चयन समिति का हिस्सा नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके स्थान पर विधानसभा अध्यक्ष बेहतर विकल्प होंगे। सरकार के रुख पर विपक्ष ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीशन ने कहा कि विधेयक में कुलपति के उम्र सीमा और शैक्षणिक योग्यता का जिक्र नहीं है। इससे यह साबित होता है कि राज्य सरकार केरल के विश्वविद्यालयों को कम्युनिस्ट या मार्क्सवादी केंद्रों में बदलने की कोशिश कर रही है। इसके लिए वीसी जैसे महत्वपूर्ण पद पर अपने पसंद के लोगों को बैठाने का प्रयास कर रही है।

उधर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान पूरे मामले पर पिछले महीने ही अपना रुख साफ कर चुके हैं। उन्होंने पत्रकारों को दिए एक जवाब में कहा था कि यदि राज्य सरकार मु झे निशाना बनाने की कोशिश करती है तो अध्यादेश राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। आपको बता दें कि राज्य के गवर्नर होने के नाते विधानसभा से पास विधेयक मंजूरी के लिए आरिफ मोहम्मद खान के पास ही आएगा। जिसे वो राष्ट्रपति के पास भेजने की बात कर रहे थे।