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‘युवाओं की मानसिकता समझता हूँ’: ड्रग्स केस से निकलने के बाद अब दारू बेचेगा शाहरुख़ खान का बेटा, लॉन्च किया नया ब्रांड, नई शो की स्क्रिप्ट भी लिख रहा

बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान ने हाल ही में ऐलान किया था कि वह ‘रेड चिलीज एंटरटेनमेंट’ के साथ बतौर डायरेक्टर अपना करियर शुरू करने जा रहे हैं। साथ ही, उन्होंने बिजनेस में हाथ आजमाने के लिए बडवाइजर और कोरोना बीयर बेचने वाली दुनिया की सबसे बड़ी शराब कंपनी ‘AB InBev’ के साथ पार्टनरशिप की है। इसके लिए, उन्होंने आर्यन खान ने लाइफस्टाइल लक्ज़री कलेक्टिव ब्रांड D’YAVOL लॉन्च किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आर्यन खान बड़े पर्दे पर दिखने की बजाए पर्दे के पीछे काम करना चाहते हैं। यानी वह एक्टिंग की जगह स्क्रिप्ट रायटिंग और डायरेक्शन में हाथ आजमाते दिखेंगे। ऐसा कहा जा रहा है कि उन्होंने अपनी पहली स्क्रिप्ट पूरी भी कर ली है।

बीते दिनों आर्यन ने इंस्टाग्राम पर अपनी स्क्रिप्ट नोटबुक के साथ फोटो शेयर करते हुए लिखा था, “लेखन से लिपटा हुआ… एक्शन कहने का और इंतजार नहीं कर सकता।” इंस्टाग्राम पोस्ट के साथ उन्होंने एक फोटो भी शेयर की थी। इस फोटो में क्लैपरबोर्ड पर रेड चिलीज एंटरटेनमेंट लिखा हुआ था।

इसके अलावा, आर्यन खान ने अपने बिजनेस पार्ट्नर्स के साथ मिलकर भारत में प्रीमियम वोदका ब्रांड लॉन्च करने की तैयारी की है। उन्होंने इसका ऐलान अपने इंस्टाग्राम पोस्ट पर किया है। इस वोदका ब्रांड का नाम D’Yavol है। इसे वह अपने बिजनेस पार्टनर बंटी सिंह और लेटी ब्लागोएवा के साथ शुरू करेंगे। आर्यन ने अपने इंस्टाग्राम पर D’Yavol के लोगो के साथ दो फोटोज शेयर की हैं। इसमें एक में वे अकेले नजर आ रहे हैं। वहीं, दूसरी फोटो में वे अपने पार्टनर्स के साथ दिख रहे हैं। इन तस्वीरों के साथ उन्होंने कैप्शन देते हुए लिखा, “इसके लिए करीब 5 साल लग चुके हैं। D’Yavol फाइनली यहाँ है।”

दरअसल, आर्यन खान ने बडवाइजर और कोरोना बीयर बेचने वाली दुनिया की सबसे बड़ी शराब कंपनी AB InBev के साथ पार्टनरशिप की है। इस ब्रांड को देश में फिलहाल AB InBev ही बेच रही है।

‘इकोनॉमिक्स टाइम्स’ से बातचीत करते हुए आर्यन खान ने कहा है कि उन्हें लगता है कि वो युवाओं की मानसिकता को समझते हैं। भारतीय बाजार में अभी विकास की बहुत गुंजाइश बाकी है। इस ब्रांड की लॉन्चिंग के बाद शुरुआत में व्हिस्की और रम जैसी ब्राउन स्पिरिट लॉन्च की जाएगी। बाद में मार्केट को देखते हुए अन्य शराब व पैशन रिलेटेड प्रोडक्ट भी बेचे जाएँगे।

ड्रग्स केस में फंसे थे आर्यन..

मुंबई के चर्चित क्रूज ड्रग्स केस में एनसीबी ने आर्यन पर इंटरनेशनल मार्केट में ड्रग्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया था। इस केस में फसने के बाद आर्यन खान को जेल की हवा खानी पड़ी थी। वह 28 दिन तक जेल में बंद थे। आर्यन को रिहा करने के लिए शाहरुख ने अपनी पूरी लीगल टीम उतार दी थी। हालाँकि, इसके बाद हुई जाँच में NCB की चार्जशीट में आर्यन को क्लीन चिट मिल गई थी।

‘हरे कपड़ों में पठान, भगवा बिकनी में हिन्दू लड़की संग रोमांस’: लोगों ने पूछा – SRK ने अश्लीलता फैलाने के लिए जानबूझ कर चुना पवित्र रंग?

बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान की फिल्म ‘पठान (Pathaan)’ के बायकॉट की माँग तेज होती जा रही है। फिल्म के नए गाने ‘बेशरम रंग’ को लेकर सोशल मीडिया पर लोग तीखी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। लोगों की नाराजगी का एक कारण दीपिका के कपड़े भी हैं। नेटीजन्स ने शाहरुख खान पर जानबूझकर भगवा रंग को बदनाम करने का इल्ज़ाम लगाया है।

पिछले दिनों फिल्म का पहला गाना ‘बेशरम रंग’ रिलीज किया गया। गाना रिलीज होने के बाद से ही एक बार फिर से फिल्म के बायकॉट की माँग तेज हो गई। गाने के कई दृश्यों में दीपिका को भगवा रंग की बिकनी पहने दिखाया गया है। जिसे लेकर ट्विटर यूजर्स आपत्ति जता रहे हैं। लोग गाने के बोल ‘बेशरम रंग’ को दीपिका के बिकनी के रंग से जोड़ कर शाहरुख व फिल्म निर्माताओं पर जानबूझकर भगवा रंग को बदनाम करने का आरोप लगा रहे हैं।

पत्रकार अभय प्रताप सिंह ने लिखा है कि शाहरुख खान की फिल्म ‘पठान’ में पवित्र भगवा रंग को ‘बेशरम रंग’ बताते हुए अश्लील चित्रण किया जा रहा है। अभय आगे लिखते हैं, “एक तरफ शाहरुख खान माता वैष्णो देवी जा रहे हैं, दूसरी तरफ भगवा को ‘बेशरम रंग’ बताकर अश्लील दृश्य फिल्मा रहे हैं।”

भाजपा नेता अरुण यादव ने भी ट्विटर पर गाने की एक तस्वीर साझा कर शाहरुख खान को आड़े हाथों लिया और ‘बायकॉट पठान’ हैशटैग का समर्थन किया।

इसी तर्ज पर कई यूजर्स ने फिल्म का नाम, दीपिका के पोशाक और गाने के बोल को जोड़कर भगवा को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए फिल्म के बायकॉट की माँग की।

एक अन्य यूजर ने लिखा कि फिल्म में शाहरुख खान मुस्लिम पठान की भूमिका में हैं, जो हरे रंग का शर्ट पहनकर भगवा रंग के कपड़े पहनी हिंदू लड़की (जिसका किरदार दीपिका अदा कर रही हैं) के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। उसने इसे ‘लव जिहाद’ और गज़वा-ए-हिंद बताते हुए कहा कि इस फिल्म का बायकॉट किया जाना चाहिए।

एक यूजर ने लिखा, “तो बॉलीवुड ने इस अश्लीलता को प्रदर्शित करने के लिए भगवा रंग को चुना।

इसके पहले भी शाहरुख खान अपने फिल्म डॉन 2 में बतौर अपराधी कैद में भगवा रंग के कपड़ों में देखे गए थे। दुनिया भर में कैदियों के पहनने के लिए अलग-अलग रंग के कपड़े दिए जाते हैं लेकिन शाहरुख और उनकी टीम ने कैदियों को भगवा रंग के कपड़े में ही दिखाना ज्यादा उचित समझा।

फिल्म के गाने में जिस तरह से अश्लीलता दिखाई गई है, लोग उससे भी नाराज हैं। दीपिका पादुकोण के ‘मोनोकिनी अवतार’ पर फोकस के बाद ये अंदेशा लगाया जा सकता है कि क्या शाहरुख़ खान अब दीपिका पादुकोण के ‘सेक्सी गाने’ को दिखा कर अपनी फिल्म ‘पठान’ को हिट कराना चाहते हैं। इस गाने को गीतकार कुमार ने लिखा है, जबकि संगीत निर्देशक विशाल-शेखर की जोड़ी ने इसे बनाया है। वहीं शिल्पा राव और कैरालीसा मोंटेरियो ने इसे आवाज़ दी है। बता दें कि ‘पठान’ के निर्देशक सिद्धार्थ आनंद हैं।

‘PM मोदी की आलोचना पर 7 साल जेल – कर्मचारियों को धमकी’: ‘ट्विटर फाइल्स 5.0’ में NYT की रिपोर्ट के आधार पर झूठा दावा, फर्जी खबरें फैलाने पर मिली थी चेतावनी

ट्विटर फाइल्स (Twitter Files) की अब तक रिलीज हुई सीरीज से अमेरिका की राजनीति में सनसनी मची हुई थी। वहीं, अब ‘ट्विटर फाइल्स 5.0’ (Twitter Files 5.0) में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर झूठा दावा भी किया गया है। इसके अलावा, इस नई सीरीज (ट्विटर फाइल्स 5.0) में खुलासा किया गया है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बैन करने के बाद ट्विटर कर्मचारी खुशियाँ मना रहे थे।

दरअसल, ‘द फ्री प्रेस’ की संपादक बारी वीस ने सोमवार (12 दिसंबर, 2022) को 46 ट्वीट्स के थ्रेड में बताया है कि नियमों के उल्लंघन के बिना ही ट्विटर ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ट्विटर हैंडल बैन कर दिया था। इसके साथ ही, उन्होंने दुनिया भर के उन नेताओं का उदाहरण भी दिया है जिनके विवादित ट्वीट या लोगों को उकसाने वाले ट्वीट के बाद भी बैन नहीं किया गया। बारी वीस ने इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी जिक्र किया है।

एक ट्वीट में बारी वीस ने न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है, “फरवरी 2021 की शुरुआत में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वाले सैकड़ों ट्विटर अकाउंट को बहाल करने के लिए सरकार ने ट्विटर के कर्मचारियों को गिरफ्तार करने और उन्हें सात साल तक के लिए जेल भेजने की धमकी दी थी। लेकिन ट्विटर ने मोदी को बैन नहीं किया।”

बारी वीस का यह ट्वीट न केवल भ्रामक है, बल्कि यह जानने के बाद भी कि न्यूयॉर्क टाइम्स फेक खबरें फैलाने के लिए जाना जाता है, उन्होंने इसे कोट किया था। हालाँकि, इस पूरे मामले की सच्चाई दावे से पूरी तरह उलट है।

दरअसल, 10 फरवरी 2021 को, न्यूयॉर्क टाइम्स ने ‘सोशल मीडिया में मोदी के दबाव के बाद ट्विटर ने भारत में अकाउंट्स ब्लॉक किए’ (Twitter Blocks Accounts in India as Modi Pressures Social Media) शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार के दबाव के कारण देश में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभिव्यक्ति की आजादी नहीं मिल पा रही है। हालाँकि, यह रिपोर्ट कहाँ से आई और इसकी पृष्ठभूमि क्या थी -इस बारे में कुछ भी नहीं बताया गया था। साथ ही, इसमें ट्विटर कर्मचारियों की गिरफ्तारी की बात कहाँ से आई, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया।

वास्तव में, ट्विटर कर्मचारियों या ट्विटर पर कार्रवाई की बात की शुरुआत कृषि कानूनों (जो अब निरस्त हो चुके हैं) के विरोध में 26 जनवरी, 2021 को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुए ट्रैक्टर मार्च के बाद शुरू हुई थी। इस ट्रैक्टर मार्च के दौरान, आंदोलनजीवियों व उपद्रवियों ने सुरक्षा बलों के खिलाफ हिंसक रुख अपना लिया था। साथ ही, लाल किले पर आपत्तिजनक झंडे फहरा दिए थे और राष्ट्रध्वज तिरंगे का अपमान हुआ था।

इस दौरान ट्विटर पर कुछ खास हैशटैग, फोटोज और कंटेंट और फर्जी खबरों के साथ देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही थी। ऐसा ही एक ट्वीट दुर्घटना के कारण एक प्रदर्शनकारी की मौत से संबंधित था। हालाँकि, मीडिया हाउस और भारत विरोधी लोगों ने झूठ फैलाते हुए दावा किया कि प्रदर्शनकारी की मौत पुलिस की गोली से हुई है।

इसके कुछ दिन बाद, केंद्र सरकार ने आईटी एक्ट की धारा-69A के तहत ट्विटर को नोटिस जारी करते हुए खालिस्तान अलगाववाद को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान के 1178 अकाउंट्स ब्लॉक करने के लिए कहा। इसमें 257 ट्विटर अकाउंट ऐसे भी थे, जिन्होंने भारत विरोधी टिप्पणी की थी। हालाँकि, ट्विटर ने कुछ ही अकाउंट्स ब्लॉक किए और इसके बाद उसमें से कुछ अकाउंट्स को अनब्लॉक करते हुए कहा था कि वह किसी भी मीडिया, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं या राजनेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगा।

भारत सरकार हरकत में आई और कंपनी को सूचित किया कि उसे देश के कानून का पालन करना होगा। उस समय मुख्य चिंता बड़े पैमाने पर फैलाई जा रही फर्जी खबरें और गलत सूचनाएँ थीं। सरकार द्वारा किसी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने का कोई प्रयास नहीं किया गया, लेकिन यह समझना होगा कि कोई भी स्वतंत्रता पूर्ण नहीं होती। भारत सरकार किसी भी तरह से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को फर्जी खबरें फैलाने का आधार नहीं बनने दे सकती थी।

इसके बाद 11 फरवरी को, भारत सरकार ने कहा कि भारत के कानूनों को नहीं मानने पर भारत में ट्विटर के कर्मचारियों को गिरफ्तारी का सामना करना पड़ सकता है। सरकार ने ट्विटर को चेतावनी दी थी कि कंपनी द्वारा आईटी अधिनियम की धारा 69ए के तहत नियमों का पालन करने से इनकार करने पर अब कार्रवाई करनी पड़ेगी।

इसका सीधा मतलब यह है कि नियमों के उल्लंघन के बाद सरकार ने चेतावनी दी थी न कि ट्विटर के कर्मचारियों को धमकी। लेकिन, बारी वीस ने सच्चाई जाने बिना ही भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर झूठा दावा कर दिया।

डोनाल्ड ट्रंप को बैन करने के बाद ट्विटर ऑफिस में खुशी का माहौल

बारी वीस ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ट्विटर से हटाए जाने को लेकर बड़े दावे किए हैं। इन दावों के अनुसार, ट्रंप को ट्विटर से बैन करने के लिए ट्विटर के कर्मचारियों ने नियमों को ताक पर रख दिया था। हालाँकि, ट्विटर की कंटेंट मॉडरेशन टीम को ट्रंप के ट्वीट्स में नियमों का उल्लंघन नहीं मिला था। लेकिन, इसके बाद भी कंपनी के बड़े अधिकारियों ने बैन करने का फैसला कर लिया।

इसके अलावा, ‘ट्विटर फाइल्स 5.0’ में ‘ट्विटर फाइल्स 3.0’ के उस दावे की भी पुष्टि की गई है, जिसमें कहा गया था विजया गड्डे और योएल रोथ ने अपनी सनक और पसंद के हिसाब से फैसले लिए थे।

इसके बाद, ट्विटर के कर्मचारियों ने नए नियम बनाए। इन नियमों के अंतर्गत ट्रम्प को ट्रंप को ट्विटर से पूरी तरह हटाने का फैसला किया गया। 8 जनवरी, 2021 की सुबह, डोनाल्ड ट्रम्प ने दो ट्वीट पोस्ट किए। इसमें उन्होंने अपने समर्थकों को ‘अमेरिकी देशभक्त’ बताया था।

उन्होंने कहा था कि उनके वोटर्स द्वारा उन्हें दिए गए जनादेश का अनादर नहीं किया जा सकता है और वह जो बिडेन के शपथ ग्रहण समारोह में नहीं जाएँगे।

ट्विटर के कर्मचारियों की माँग

6 जनवरी, 2021 को हुए यूएस कैपिटल दंगों के बाद से ट्विटर के कर्मचारियों के बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही थी। कई कर्मचारियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से उनको हटाए जाने की खुलकर वकालत की थी।

यहाँ तक ​​कि वामपंथी मीडिया हाउस, ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने भी एक पत्र प्रकाशित करते हुए बताया था कि ट्विटर के 300 कर्मचारियों ने डोनाल्ड ट्रंप को ट्विटर से हटाए जाने को लेकर हस्ताक्षर किए हैं। पत्रकार बारी वीस ने बताया है कि ट्विटर के कुछ कर्मचारी ही ट्रंप को ट्विटर से हटाए जाने का विरोध कर रहे थे। लेकिन, ये कर्मचारी अल्पसंख्यक की तरह बन कर रह गए थे।

चूँकि, ट्विटर के अधिकांश कर्मचारी डोनाल्ड ट्रम्प पर प्रतिबंध लगाना चाहते थे। लेकिन, उनके पास इस बारे में कोई पुख्ता सबूत नहीं थे। ट्विटर के आंतरिक दस्तावेजों से पता चला है कि ट्विटर के कर्मचारियों को डोनाल्ड ट्रम्प के सामान्य ट्वीट्स को ‘हिंसा भड़काने’ वाले ट्वीट के रूप में लेबल करना मुश्किल हो रहा था।

8 जनवरी, 2021 की सुबह ट्विटर की सेफ्टी टीम इस नतीजे पर पहुँची थी कि डोनाल्ड ट्रंप ने ट्विटर के किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया। एक कर्मचारी ने कहा था “बस यह कहने के लिए है कि वह (ट्रम्प) फिर से ट्वीट कर रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट रूप से हिंसक नहीं है। उन्होंने सिर्फ इतना कह है कि वह वहाँ (जो बाइडेन के शपथ ग्रहण में) नहीं जा रहे हैं।”

हालाँकि, अगले डेढ़ घण्टे में चीजें बदलने लगीं और विजया गड्डे (ट्विटर पर कानूनी, नीति और ट्रस्ट की पूर्व प्रमुख) और योएल रोथ (ट्रस्ट एंड सेफ्टी के पूर्व वैश्विक प्रमुख) जैसे अन्य शीर्ष अधिकारियों ने मौजूदा नियमों को दरकिनार करने के तरीके ढूँढे, इसमें वह काफी हद तक कामयाब भी रहे।

इसके बाद, ट्विटर के कर्मचारियों ने ट्रंप की तुलना एडॉल्फ हिटलर से करना शुरू कर दिया। फिर, ट्विटर के संस्थापक जैक डार्सी और विजया गड्डे ने ट्विटर के कर्मचारियों के साथ एक बैठक आयोजित की। इस बैठक में ट्रम्प पर प्रतिबंध नहीं लगाने के बारे में उनके सवालों का जवाब दिया। इस मीटिंग में योएल रोथ ने आग में घी डालने का काम किया और दावा किया कि ट्विटर के कर्मचारी अब बड़े अधिकारियों की निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।

रोथ ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप को ट्विटर से नहीं हटाने के लिए उनकी तुलना नाज़ियों (हिटलर के समर्थकों) से की जा रही है। साथ ही, यह भी दावा किया कि हिटलर के कारण जर्मनी में उसके परिवार वालों को नुकसान उठाना पड़ा था।

इसके बाद शुरू हुआ था असली खेल और अगले एक घंटे के भीतर, डोनाल्ड ट्रम्प को ट्विटर से बैन कर दिया गया। वास्तव में, यह एक ऐसा समय था जहाँ एक प्राइवेट कंपनी ने किसी देश के ‘मुखिया’ को बैन किया हो। ट्रंप का बैन होना ट्विटर कर्मचारियों के लिए बड़ी सफलता की तरह था। इसलिए, ट्विटर ऑफिस में खुशी की लहर दौड़ गई थी।

विधानसभा में राष्ट्रगान के दौरान बैठे रहे कॉन्ग्रेस MLA अबीदुर रहमान, BJP ने विधानसभा अध्यक्ष से की कार्रवाई की माँग

बिहार विधानसभा में राष्ट्रगान के अपमान का मामला सामने आया है। यहाँ कॉन्ग्रेस विधायक अबीदुर रहमान राष्ट्रगान के दौरान अपनी जगह से खड़े नहीं हुए। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसका जबरदस्त विरोध किया और विधायक के खिलाफ राजद्रोह का केस करने की माँग की।

मंगलावर (13 नवंबर, 2022) को बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हुई। दरअसल जब भी सत्र की शुरुआत होती है तो सभी राष्ट्रगान के लिए खड़े होते हैं। सदन में अररिया से कॉन्ग्रेस विधायक अबीदुर रहमान इस दौरान खड़े नहीं हुए। पूछने पर बताया कि पैरों में दर्द है। हालाँकि कुछ ही देर बाद ही वह शोक प्रस्ताव के वक्त वह खड़े हो गए, जिस पर भाजपा अब सवाल खड़े कर रही है।

राष्ट्रगान की समाप्ति के बाद भाजपा विधायकों ने ‘भारत माता की जय’ और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। भगवा गमछा ओढ़ कर आए भाजपा विधायकों ने ‘हर-हर महादेव’ के नारे भी लगाए। इसके बाद सत्ता पक्ष के विधायकों ने ‘जय भीम’ की नारेबाजी की। हालाँकि, हंगामे के बीच सदन को बुधवार (14 दिसंबर, 2022) सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दिया गया।

भाजपा विधायक नीरज सिंह बबलू ने बाद में संवाददाताओं से कहा कि यदि रहमान पैर में दर्द की वजह से राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े नहीं हुए, तो बाद में उनका दर्द कैसे गायब हो गया? उन्होंने कहा कि रहमान दिवंगत सदस्य के सम्मान में रखे गए मौन के दौरान खड़े थे, जिसमें राष्ट्रगान में लगने वाले समय से अधिक समय लगा, इसलिए ऐसा लगता है कि उन्होंने जानबूझ कर राष्ट्रगान का अपमान किया।

भाजपा विधायक एवं पूर्व उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने रहमान की निंदा की और विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी से ‘राष्ट्रगान के अपमान’ का संज्ञान लेने तथा उचित कार्रवाई करने की माँग की। वहीं अन्य भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री प्रमोद कुमार ने कॉन्ग्रेस विधायक के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की।

बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर 2022 तक चलेगा। इस बार का शीतकालीन सत्र सरकार के सामने कई चुनौतियाँ लेकर आया है। विपक्ष के साथ-साथ सहयोगी भी इस बार सरकार को घेरने के मूड में दिखाई दे रहे हैं।

महाकाल की नगरी में गैर-मुस्लिमों के लिए पैगंबर मुहम्मद पर निबंध प्रतियोगिता, हिन्दू संगठनों ने बताया धर्मांतरण की साजिश: नरोत्तम मिश्रा के एक्शन के बाद रोक

महाकाल की नगरी उज्जैन में ‘पैगाम ए इंसानियत’ सोसायटी की तरफ से एक निबंध प्रतियोगिता आयोजित की जा रही थी। प्रतिभागियों को हजरत मोहम्मद पर निबंध लिखना था। लेकिन इस प्रतियोगिता में सिर्फ गैर मुस्लिम ही हिस्सा ले सकते थे। प्रतियोगिता के बारे में जानकारी होते ही हिन्दू संगठनों ने इस पर रोक लगाने की माँग शुरू कर दी।

हिंदुत्ववादी संगठनों का कहना है कि प्रतियोगिता के माध्यम से हिंदुओं का धर्मांतरण कराने की योजना बनाई जा रही थी। प्रतियोगिता में गैर-मुस्लिमों को शामिल होना था, अर्थात उनका टारगेट हिंदू थे, जिन्हें पैगंबर मोहम्मद पर जीवनी लिखनी थी। इसके लिए आयोजकों द्वारा रजिस्ट्रेशन के बाद एक किताब उपलब्ध करवाई जा रही थी। किताब पैगंबर मोहम्मद की जीवनी पर आधारित थी।

स्थानीय बजरंग दल के नेता पिंटू कौशल ने ‘अमर उजाला’ को जानकारी दी कि प्रतियोगिता के नाम पर यह लोग मोहम्मद साहब की जीवनी पढ़ाकर लोगों को धर्मांतरण की ओर ले जाने की कोशिश कर रहे थे। इतना ही नहीं, प्रतियोगिता में ज्यादा से ज्यादा लोगों को शामिल करने के लिए 21 हजार रुपए से लेकर 500 रुपए तक नकद पुरस्कार भी रखे गए थे। सभी के लिए प्रोत्साहन पुरस्कार की व्यवस्था थी।

पैगंबर मोहम्मद पर होने जा रही प्रतियोगिता स्थगित (फोटो साभार: टीवी 9)

प्रतियोगिता को लेकर हिंदू संगठनों ने राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा से शिकायत कर इस पर रोक लगाने की माँग की। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी मामले पर संज्ञान लिया और उज्जैन के एसपी सत्येंद्र कुमार शुक्ल को प्रतियोगिता स्थगित करने के निर्देश दिए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आयोजकों से प्रतियोगिता स्थगित करने के निर्देश दिए। जिसके बाद आयोजक ‘पैगाम-ए-इंसानियत’ संगठन ने तत्काल इस प्रतियोगिता को स्थगित कर दिया। प्रतियोगिता के आयोजकों में शामिल सैयद नासिर ने बताया कि हर जाति व मजहब के लोगों को हजरत मोहम्मद के बारे में बताने के लिए इस प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा था। आपत्ति के बाद इसे स्थगित कर दिया गया है और इसकी सूचना सार्वजनिक कर दी गई है।

‘शिवा ठाकुर’ बन कर हिन्दू लड़की से मिला साकिब सैफी, किया बलात्कार: मुस्लिम बनने से मना करने पर कई बार पीटा, घर वाले भी करते थे प्रताड़ित

उत्तराखंड के नैनीताल जिले से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि एक मुस्लिम युवक ने खुद को हिन्दू बता कर एक लड़की से दोस्ती की और बाद में उससे रेप किया। आरोप है कि अब लड़की पर धर्म-परिवर्तन का दबाव बनाया जा रहा है। पीड़िता ने परेशान को कर पुलिस में शिकायत दी है। पुलिस ने साकिब आम के आरोपित सहित कुल 5 आरोपितों पर FIR दर्ज कर ली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना रामनगर कोतवाली क्षेत्र की है। यहाँ के मोहल्ला बंगाघोर में साकिब सैफी नाम का व्यक्ति रहता है। साकिब पर आरोप है कि उसने ‘शिवा ठाकुर’ नाम बता कर हिन्दू लड़की से दोस्ती की। कुछ दिनों तक साथ रहने के बाद शाकिब ने लड़की की मर्जी के खिलाफ उस से रेप किया। थोड़ा समय और बीत जाने के बाद साकिब ने लड़की पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया। जब लड़की ने मना किया तब साकिब ने कई बार उसकी पिटाई की।

आखिरकार लड़की ने पुलिस में में शिकायत दर्ज करवाई। लड़की ने आरोपित साकिब सैफी के घर वालों पर भी खुद को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। लड़की ने यह भी आरोप लगाया है कि न सिर्फ उसे जान से मार डालने की धमकी दी गई है बल्कि आरोपित साकिब उसकी बहन का पीछा भी कर रहा था। लड़की की शिकायत पर पुलिस ने साकिब के साथ सबा, यूनुस, राहीला और गजाला पर भी FIR दर्ज कर ली है।

कोतवाली रामनगर के सब-इंस्पेक्टर कश्मीर सिंह के मुताबिक, सभी आरोपितों पर IPC की धारा 323, 354, 354डी, 376, 504, 506 के साथ ‘उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2018’ के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने जानकारी दी कि केस दर्ज होने के बाद सभी आरोपित फरार हो गए हैं, जिनकी पुलिस तलाश कर रही है।

2024 से पहले ही नीतीश कुमार रेस से हटे, बिहार में तेजस्वी यादव का चेहरा भी कबूला: कहा- मैं PM कैंडिडेट नहीं, BJP की हार मकसद

बिहार में जब से नीतीश कुमार (Nitish Kumar) बीजेपी को छोड़कर लालू यादव की राजद के साथ गए हैं, दो सवाल लगातार पूछे जा रहे हैं। पहला, बिहार में वे लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) का नेतृत्व कब स्वीकार करेंगे? दूसरा, क्या वे 2024 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्षी दलों के प्रधानमंत्री उम्मीदवार होंगे?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दोनों सवालों का जवाब दे दिया है। इससे लगता है कि 2024 के आम चुनावों से पहले ही उन्होंने घुटने टेक दिए हैं। उन्होंने खुद को रेस से बाहर करते हुए कहा है कि वे प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी के दावेदार नहीं हैं। साथ ही स्पष्ट कर दिया है कि 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव राजद नेता व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।

नीतीश कुमार ने ये बातें सोमवार (12 दिसंबर 2022) को अपनी अध्यक्षता में हुई महागठबंधन की बैठक में कही। यह बैठक विधानसभा के सेंट्रल हॉल में हुई। महागठबंधन में नीतीश कुमार की जेडीयू, राजद के अलावा कॉन्ग्रेस, वाम दल और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की हम जैसी पार्टियाँ भी शामिल हैं। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब कुढ़नी में हुए उपचुनाव में जेडीयू को बीजेपी के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी है।

नीतीश कुमार ने बैठक में कहा कि 2025 का विधानसभा चुनाव बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। बिहार की जो भी सेवा करनी थी, वह वे कर चुके हैं। अब आगे की सेवा तेजस्वी यादव करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे पीएम पद की उम्मीदवारी के दावेदार नहीं ​हैं।

नीतीश कुमार ने कहा, “मेरी इच्छा केवल इतनी है कि 2024 के पहले सभी विपक्षी दल एक मंच पर आएँ। जब तक सारे विपक्षी दल एक मंच पर नहीं आएँगे, तब तक बीजेपी को 2024 में हराना नामुमकिन है। मेरा मुख्य उद्देश्य 2024 में किसी भी तरह से बीजेपी को हराना है। जब तक बीजेपी केंद्र में रहेगी, तब तक बिहार का समुचित विकास नहीं हो पाएगा। इसलिए मैं हर हाल में बीजेपी को 2024 में केंद्र से हटाना चाहता हूँ और इसके लिए जो भी बन पड़ेगा, वह मैं जरूर करूँगा।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक नीतीश कुमार ने कहा, “2025 का विधानसभा चुनाव तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। मेरा लक्ष्य 2024 लोकसभा में भाजपा के हराना है। मैं सीएम या पीएम पद का उम्मीदवार नहीं बनना चाहता हूँ।” इस दौरान वित्त मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता विजय चौधरी ने बताया कि बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह साफ कर दिया कि उनके बाद तेजस्वी यादव नेतृत्व होगा।

राजद विधायक राहुल तिवारी ने बताया कि बैठक में मुख्यमंत्री ने उन विधायकों को भी चेताया है, जो यह कहते हैं कि हमारी बात अधिकारी नहीं सुनते हैं। नीतीश कुमार ने विधायकों से कहा कि गलत पैरवी लेकर जाएँगे तो अधिकारी आपकी नहीं सुनेंगे। सही पैरवी करें तो अधिकारी सुनेंगे। यदि सम्मान पाना है तो गलत का साथ छोड़ दीजिए।

पीछे से दबोचा, मुँह में डाली ऊँगली, सब इंस्पेक्टर ने उगले घूस के पैसे: देखिए Video, विजिलेंस टीम को देखते ही निगल गया था

आपने रिश्वत लेने वाले कई देखे होंगे। पर शायद ही किसी को मुँह से घूस का पैसा उगलते देखा हो। ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। हरियाणा के फरीदाबाद में विजिलेंस की टीम ने एक सब इंस्पेक्टर के मुँह से रिश्वत का पैसा निकालकर उसे गिरफ्तार किया।

आरोपित सब इंस्पेक्टर महेंद्र पाल सेक्टर-3 की पुलिस चौकी में तैनात है। वीडियो में देखा जा सकता है कि विजिलेंस की टीम को देखते हीं सब इंस्पेक्टर ने रुपए मुँह में ठूँस लिए। उसके बाद उससे उगलवाने की कोशिश हो रही है। इस बीच आरोपित पुलिसकर्मी खुद को विजिलेंस टीम से छुड़ाने की कोशिश करता हुआ भी दिख रहा है।

विजिलेंस टीम सब इंस्पेक्टर का मुँह जबरन खुलवाने की कोशिश करती है। उसे पीछे से एक सदस्य पकड़ता है। दूसरा उसके मुँह में ऊँगली डालता है। जब सब इंस्पेक्टर के मुँह से कुछ रुपए निकलते हैं, तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है।

दरअसल भैंस चोरी के मामले में कार्रवाई करने की एवज में शिकायतकर्ता से सब इंस्पेक्टर ने रिश्वत माँगी थी। शिकायतकर्ता उसे 6 हजार रुपए पहले ही दे चुका था। सुब इंस्पेक्टर 4 हजार रुपए और माँग रहा था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने विजिलेंस से उसकी शिकायत की।

जानकारी के मुताबिक, सेक्टर 3 निवासी शंभूनाथ यादव ने करीब एक साल पहले किसी को गाय 30 हजार रुपए में बेची थी। लेने वाले ने 10 हजार रुपए ही दिए थे। बाकी 20 हजार रुपए बकाया था। पैसे न देने पर शंभूनाथ अपनी गाय वापस ले आया। बताया जाता है कि शंभूनाथ ने जिसको गाय बेची थी, वह उसकी भैंस खोल ले गया और उल्टे शिकायतकर्ता के पोते के खिलाफ केस दर्ज करा दिया।

सोमवार (12 दिसंबर 2022) को आरोपित सब इंस्पेक्टर ने शिकायतकर्ता को सेक्टर-3 कम्युनिटी सेंटर में बुलाया था। सब इंस्पेक्टर वहाँ किसी शादी समारोह में शामिल था। विजिलेंस ने पहले से ही जाल बिछा रखा था। शिकायतकर्ता ने जैसे ही 4 हजार रुपए की रिश्वत दी, विजिलेंस टीम ने सब इंस्पेक्टर को पकड़ लिया।

पहले PM मोदी की हत्या की बात, अब विक्ट्री साइन दिखा बताया विचारधारा की लड़ाई: कॉन्ग्रेस नेता राजा पटेरिया को जमानत नहीं

मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री राजा पटेरिया को जमानत देने से कोर्ट ने इनकार कर दिया है। उनका एक वीडियो सामने आया था जिसमें वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की बात कर रहे थे। पटेरिया को मंगलवार (13 दिसंबर 2022) सुबह गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने जमानत से इनकार करते हुए 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं, उनकी पार्टी ने भी उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब देने को कहा है।

हालाँकि, दिग्विजय सिंह सरकार में मंत्री रह चुके पटेरिया को इस बात का कोई अफसोस नहीं है। जमानत याचिका खारिज होने के बाद कोर्ट से बाहर निकलते हुए कॉन्ग्रेस नेता पटेरिया ने मीडियाकर्मियों को विक्ट्री साइन दिखाया और इसे विचारधारा की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा, “यह विचारधारा की लड़ाई है। मैंने ये शब्द नहीं कहे हैं। मैं महात्मा गाँधी का अनुयायी हूँ।”

दरअसल, कॉन्ग्रेस के पूर्व मंत्री राजा पटेरिया का वायरल वीडियो सामने आने के बाद गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। उनके खिलाफ पन्ना के पवई पुलिस थाने में IPC की धारा 451, 504, 505 (1-B), 505 (1-C), 506, 153-B (1)(C) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

वायरल वीडियो में पटेरिया ने कहा था कि ‘पीएम मोदी की हत्या के लिए तत्पर रहो’। उन्होंने कहा, “मोदी चुनाव खत्म कर देगा, वो धर्म, जाति, भाषा के आधार पर बाँट देगा। दलितों का, वनवासियों का और अल्पसंख्यकों का भावी जीवन खतरे में है। संविधान यदि बचाना है तो मोदी की हत्या करने पर तत्पर रहो।” वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि पहले पटेरिया ने हत्या की बात कही और उसके बाद उसे संभालते हुए बोले, “मोदी की हत्या का मतलब मोदी को हराने के लिए तैयार रहो। कार्यकर्ता की उपेक्षा नेता की उपेक्षा होती है।”

बता दें कि वीडियो वायरल होने के बाद राजा ने अपनी सफाई देते हुए कहा था कि उनके कहने का मतलब था कि चुनाव में मोदी को हराओ। उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।

‘पत्थर क्या समझेगा, उसकी पूजा मत करो’: बारामती में लगा ‘येशु का दरबार’, कहा- ‘भारत जोड़ो यात्रा’ जैसी रैलियों से जुड़ो

महाराष्ट्र के दिग्गज नेता और राष्ट्रवादी कॉन्‍ग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार के क्षेत्र बारामती में प्रार्थना सभा के नाम पर ‘यीशु का दरबार’ लगाया गया। कार्यक्रम में ईसाई प्रचारक वहाँ मौजूद लोगों से ईसाई धर्म से जुड़ने का आह्वान करते हैं। हालाँकि, ऑपइंडिया के हस्तक्षेप के बाद कार्यक्रम का आयोजन तीसरे दिन नहीं हो सका।

कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय पादरी सुनील जाधव ने किया था और ‘प्रोफेट’ डॉ अनीश विजगत कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। जाधव ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “ईसाई धर्म में विश्वास करो। यीशु के अस्तित्व में विश्वास करो। अगर आप अभी बदलते हैं तो ही आप देश भर में कई लोगों को बदल पाएँगे। आप नहीं जानते लेकिन ऐसा हो सकता है कि हम ‘भारत जोड़ो’ जैसी यात्रा में शामिल हो जाएँ और देश भर में रहने वाले लोगों को ईसाई धर्म के बारे में विश्वास दिला सकें।”

कार्यक्रम को संबोधित करते पादरी जाधव

तीन दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन का आयोजन शहर के मिशन हाई स्कूल में गुरुवार (8 दिसंबर, 2022) को किया गया था। कार्यक्रम में ज्यादा लोग उपस्थित नहीं थे और 30-35 लोगों के मैदान में आने के बाद कार्यक्रम शुरू हुआ। हालाँकि वहाँ 300 लोगों की बैठने की व्यवस्था की गई थी।

वहीं कार्यक्रम में मौजूद सिस्टर मर्सी ने कहा कि वे सभी लोग जो इस कार्यक्रम में उपस्थित हैं, उन्हें व्यक्तिगत रूप से प्रभु द्वारा चुना गया है और जो नहीं आए, वह प्रभु की इच्छा से नहीं आए हैं। कई गरीब हिन्दू महिलाओं (साड़ी, बिंदी और सिंदूर पहने हुए) को इस कार्यक्रम में देखा जा सकता था। ऑपइंडिया ने इस कार्यक्रम का वीडियो भी बना लिया था।

इस बीच, इस कार्यक्रम में मौजूद ईसाई महिलाओं ने अन्य महिलाओं को ईसाई मजहब अपनाने का प्रलोभन दिया। वहाँ मौजूद एक महिला ने कहा, “ईश्वर अदृश्य है। हमें उसे महसूस करना चाहिए। पत्थरों (मूर्तियों) की पूजा नहीं करना चाहिए, जैसे हिंदू करते हैं। वह पत्थर क्या समझेगा? हम मनुष्य पापों से घिरे हुए हैं। अपनी आने वाली पीढ़ियों को पापों से मुक्त करने के लिए, हमें यीशु की पूजा करनी चाहिए।”

ईसाई महिला हिंदू महिलाओं से कह रही है कि ‘मूर्ति पूजा’ की कोई अहमियत नहीं है

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ‘प्रोफेट’ डॉ अनीश विजगत ने दावा किया कि वह सिर्फ एक ‘प्रोफेट’ नहीं बल्कि एक बिशप हैं और 300 से अधिक प्रचारक उनके पुणे स्थित एनजीओ ‘ग्लोरियस इवेंजेलिकल प्रोफेटिक’ में काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने से पहले वह एक ‘अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार अधिकारी’ और ‘भ्रष्टाचार-विरोधी अधिकारी’ थे। हालाँकि, उनके सोशल मीडिया पेज के अनुसार, वह दो गैर-सरकारी संगठनों के सदस्य हैं, जिनका नाम ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ़ इंडिया और एंटी करप्शन एंड मीडिया इन्वेस्टिगेशन है।

वहीं कार्यक्रम के दौरान सिस्टर मर्सी को लोगों से डोनेशन माँगते देखा गया।

सिस्टर मर्सी उपस्थित लोगों से चंदा एकत्र कर रही हैं

सुरक्षा कारणों से नाम न छापने की शर्त पर जानकारी देने पर सहमत हुए स्थानीय ईसाइयों में से एक ने कहा कि पादरी सुनील जाधव एक स्वयंभू पादरी हैं और उन्होंने अपने घर की छत पर अपना चर्च बनाया है। यह कार्यक्रम क्रिसमस से पहले तीन दिन आयोजित किया जाना था, जिसमें से एक दिन इसका आयोजन मिशन हाई स्कूल में किया जाना प्रस्तावित था और। वहीं कार्यक्रम को दो दिन ‘ज्येष्ठ नागरीक संघ’ नामक एक प्रसिद्ध सार्वजनिक सामुदायिक हॉल में किया जाना निर्धारित था।

‘ज्येष्ठ नागरिक संघ’ के प्रशासक एम डब्ल्यू जोशी से ऑपइंडिया ने बात की। उन्होंने कहा कि ईसाइयों ने यह कहकर कार्यक्रम के लिए हॉल लिया था कि वे प्रार्थना सभा आयोजित करना चाहते हैं और उनके पास इसके लिए कोई जगह नहीं है।

10 दिसंबर की सुबह ‘ज्येष्ठ नागरिक संघ’ के गेट पर लगा ताला

धर्मांतरण के प्रयासों और पोस्टर पर पादरी द्वारा किए गए झूठे दावों के बारे में पूछने पर जोशी ने कहा कि वे लोग सिर्फ एक साथ प्रार्थना करने के लिए जगह चाहते थे। हालाँकि, ऐसा लग रहा था कि संघ के पदाधिकारी को आयोजकों के उद्देश्यों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। आयोजन के तीसरे दिन शनिवार (10 दिसंबर, 2022) को ऑपइंडिया द्वारा जोशी से बात करने के बाद, सभा को रद्द कर दिया गया और कार्यक्रम स्थल ‘ज्येष्ठ नागरिक संघ’ के गेट पर ताले लगे देखे जा सकते हैं।

वहीं आरएसएस के एक स्थानीय सदस्य मुकुंद कुलकर्णी ने महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा, “यह सब दिखावा है। वे (ईसाई) गरीब और जरूरतमंद लोगों को लुभाते हैं और उन्हें पैसे या बुनियादी सुविधाएँ देते हैं। वे यह भी सुनिश्चित करते हैं कि हिंदू धर्म जैसे अन्य धर्मों के गरीब लोग हिंदू धार्मिक देवी-देवताओं से घृणा करें और ईसाई मजहब में विश्वास करना शुरू कर दें। जीसस क्राइस्ट या ईसाई मजहब बुरा नहीं है, वास्तव में, कोई धर्म बुरा नहीं है। लेकिन लोगों को बहला-फुसलाकर, फर्जी दावे करके और धर्म-परिवर्तन के लिए मजबूर करना गलत है।”

(मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई इस रिपोर्ट को विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)