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झारखंड में बोतल बम फेंक कर जिस हिन्दू नेता को मार डाला था, उनके परिवार को झारखंड पुलिस पर विश्वास नहीं: CBI जाँच की माँग, अनशन पर परिजन

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में शनिवार (12 नवम्बर, 2022) को हिन्दू नेता कमलदेव गिरी की बोतल बम फेंक कर हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए थे। शहर में पथराव और तोड़फोड़ भी हुआ था। आक्रोशित समर्थक उनके शव को उठाने नहीं दे रहे थे। काफी मान-मनव्वल के बाद उनका अंतिम संस्कार हो पाया था। लेकिन, उनके परिवार और आक्रोशित समाज से किए गए सरकारी वादे अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं। इसी के साथ मृतक का परिवार लगातार अनशन पर बैठा है। ऑपइंडिया ने उनके भाई फूलननाथ गिरी से वर्तमान हालात की जानकारी ली।

फूलननाथ ने हमें बताया कि हत्या के बाद अब तक कुल 9 आरोपित गिरफ्तार हुए हैं। इन आरोपितों में 7 मुस्लिम और 2 हिन्दू हैं। इसमें अब तक हाशिम, शकीर, रकीब, जाहिद, शहनवाज और अभिषेक के नाम प्रकाश में आए हैं। फूलननाथ ने इस पूरी घटना के पीछे स्थानीय झामुमो विधायक सुखराम उराँव की सजिश बताते हुए कहा कि पुलिस में उन्हें गिरफ्तार करने का साहस नहीं है। हमें आगे बताया गया कि अभी तक किसी भी आरोपित की जमानत नहीं हो पाई है, हालाँकि सभी आरोपितों ने जमानत अर्जी दाखिल की है।

फूलननाथ के मुताबिक, सरकारी वकील होने के बावजूद वो अपना खुद का वकील भी खड़ा कर के आरोपितों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का प्रयास करेंगे।

हमसे बातचीत करते हुए मृतक के भाई फूलननाथ रोने लगे। रोते हुए उन्होंने हमें बताया कि भाई की हत्या के लगभग 10 दिनों बाद ही उन सभी ने मामले की CBI जाँच और आरोपितों का नार्को करवाने की माँग की, जिसको स्थानीय स्तर पर नहीं माना गया। उन्होंने बताया कि जब उनकी माँग नहीं मानी गई तब उन्होंने अपने परिवार के साथ अनशन का एलान किया। जहाँ भी उन्होंने अनशन की जगह माँगी, वहीं पर धारा 144 लागू होने की चेतावनी देते हुए स्थानीय प्रशासन ने मना कर दिया। आखिरकार, उन्होंने अपने घर के बगल उस जगह अनशन शुरू किया, जहाँ उनके भाई जनसेवा का कार्य किया करते थे।

CBI जाँच की माँग की वजह पूछने पर पीड़ित परिवार ने बताया कि स्थानीय विधायक सुखराव उराँव की सलिप्तता झारखंड पुलिस कभी चाह कर भी सामने नहीं ला सकती है। बकौल फूलननाथ, उनके अनशन के लगातार चलने के बाद भी सत्ता पक्ष से कोई उनसे बात भी करने को तैयार नहीं है। उन्होंने हमें बताया कि भाई का शव उठाने के दौरान प्रशासन ने मुआवजा और नौकरी जैसी माँगों पर गंभीरतापूर्वक विचार का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक एक भी प्रशासनिक अधिकारी इस बाबत बात भी करने उनके घर नहीं आया।

फूलननाथ के अनुसार, उनके अनशन में उनके परिजनों के अलावा शुभचिंतक भी जमा होते हैं। उन्होंने बताया कि भाजपा के ही वरिष्ठ नेता उनके परिवार का हाल-चाल ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमसे बात करने के दौरान फूलनदेव गिरी अपने भाई के लिए आयोजित एक कैंडिल मार्च में थे। उस कैंडिल मार्च में कमलदेव के हत्यारों को फाँसी दो फाँसी दो का नारा साफ सुनाई दे रहा था।”

नज़्ज़ू अंसारी ने शुभचिंतक को दी धमकी

फूलननाथ के मुताबिक, उनके भाई के लिए न्याय की माँग वाले धरने में शामिल होने वाले एक शुभचिंतक को नज्जू अंसारी नाम के एक व्यक्ति ने धमकी दी है। सुरक्षा कारणों से अपने शुभचिंतक का नाम बताने से मना करते हुए फूलननाथ ने कहा कि उनके भाई कमलदेव की हत्या के बाद तमाम लोग डरे हुए हैं। फूलननाथ के अनुसार, धमकी देने वाला नज्जू अंसारी झामुमो विधायक सुखराव उराँव का बेहद खास है और उनके सभी गलत काम संचालित करता है। हालाँकि, पुलिस के बस का कुछ ही न होना बताते हुए मृतक कमलदेव के भाई ने कहा कि इसी कारण से इस धमकी की शिकायत नहीं दर्ज करवाई गई।

सार्वजनिक स्थानों पर फैलाती है अश्लीलता, कार्रवाई करे मुंबई पुलिस: आर्यन खान की दोस्त के वकील अली काशिफ ने उर्फी जावेद के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत

अपने बेबाक अंदाज और अतरंगी फैशन के कारण अक्सर सुर्खियों में रहने उर्फी जावेद (Uorfi Javed) के खिलाफ वकील अली काशिफ खान देशमुख ने अँधेरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। ‘बिग बॉस ओटीटी (Bigg Boss OTT)’ की एक्स कंटेस्टेंट पर सोशल मीडिया और सार्वजनिक स्थानों पर अवैध, अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने रविवार (11 दिसंबर, 2022) को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वकील काशिफ ने 9 दिसंबर, 2022 को उर्फी जावेद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और अपनी अजीबोगरीब ड्रेसिंग सेंस के मामले में उर्फी बॉलीवुड एक्ट्रेस तापसी पन्नू (Taapsee Pannu), ऋचा चड्ढा (Richa Chadha) और स्वरा भास्कर (Swara Bhasker) तक को पीछे छोड़ चुकी हैं। सोशल मीडिया पर उन्हें लाखों लोग फॉलो करते हैं।

वकील काशिफ खान ने 8 दिसंबर को मुंबई पुलिस को टैग करते हुए सिलसिलेवार दो ट्वीट किए और सवाल किया कि पुलिस ने अभी तक उर्फी के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने लिखा, “अभिनेत्री उर्फी जावेद सार्वजनिक तौर पर जो कर रही हैं, वह आईपीसी की धारा 294 के तहत अश्लील नहीं है, तो क्या है? जब ऐसे ही कृत्य के खिलाफ अभिनेता रणवीर सिंह पर कार्रवाई की जा सकती है, तो उसके खिलाफ क्यों नहीं? मुंबई पुलिस क्या इस तरह के अवैध कृत्यों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करना हमारा नैतिक कर्तव्य नहीं है?”

इसके बाद उन्होंने एक और ट्वीट में लिखा, “क्या संज्ञेय अपराधों को रोकने के लिए धारा 149 और संज्ञेय अपराध होने पर एफआईआर दर्ज करने के लिए सीआरपीसी की धारा 154 के तहत कार्रवाई करना और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना मुंबई पुलिस का कर्तव्य नहीं है? उर्फी जावेद द्वारा लगातार सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील हरकत की जा रही है।”

खान मुंबई ड्रग मामले की आरोपित मुनमुन धमेचा का केस लड़ रहे हैं। इस केस में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को भी आरोपित बनाया गया था।

बता दें कि इससे पहले नवंबर 2022 में एक कार्यक्रम के दौरान चेतन भगत (Chetan Bhagat) ने उर्फी जावेद को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि उर्फी यूथ का ध्यान भटका रही हैं। उन्होंने कहा था, “आज यूथ सिर्फ उर्फी जावेद के वीडियो देख रहे हैं, फोटो लाइक कर रहे हैं। यह उर्फी की गलती नहीं है। वो तो अपना करियर बना रही हैं। लेकिन लोग बिस्तर में घुस कर उर्फी की फोटोज देख रहे हैं। मैं भी आज उर्फी की सब फोटोज देखकर आया हूँ।”

चेतन भगत की यह बात उर्फी को जरा भी रास नहीं आई थी। लेखक के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने अपनी इंस्‍टा स्टोरी में चेतन भगत को जमकर खरी-खोटी सुनाई थी। उर्फी ने कहा था, “उन्होंने सच में बकवास हरकत की है, जब अपने से आधी उम्र की लड़कियों को सोशल मीडिया पर मैसेज करते थे, तब उनके कपड़ों ने आपका ध्यान नहीं भटकाया था। आप उन इंसानों में से एक हो, जो अपनी हर गलती के लिए महिलाओं को दोषी मानते हैं।”

खुद को बताया था ‘आशीष ठाकुर’, निकला हसीन सैफी: उत्तराखंड को युवती को फाँस कर कई बार बनाए शारीरिक सम्बन्ध, वीडियो से कर रहा था ब्लैकमेल

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। युवती का आरोप है कि हसीन शैफी ने खुद को आशीष ठाकुर बताते हुए दोस्ती की थी। सोमवार (12 दिसंबर, 2022) को वह युवती से कोर्ट मैरिज करने जा रहा था। इससे पहले ही उसकी सच्चाई सामने आ गई। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तराखंड निवासी युवती ग्रेटर नोएडा के दादरी कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत रह रही थी। वह, एक प्राइवेट कंपनी में काम करती है। इसी कंपनी में उसकी मुलाकात हसीन शैफी से हुई। मुलाकात के दौरान, हसीन ने खुद को आशीष ठाकुर बताते हुए युवती से दोस्ती की।

इस दोस्ती के बाद दोनों में बातचीत होने लगी और फिर प्रेम हो गया। इसके बाद, दोनों एक साथ सूरजपुर में एक किराए के मकान में रहने लगे। दो माह पहले ही पीड़ित युवती और आरोपित हसीन शैफी ने दादरी के एक मकान में रहना शुरू किया। इन दोनों का प्रेम आगे बढ़ गया था। आरोपित हसीन पीड़िता के साथ सोमवार (12 दिसंबर, 2022) को कोर्ट मैरिज करने की फिराक में था। लेकिन, इससे पहले ही पीड़िता को हसीन की सच्चाई पता चल गई।

शादी से पहले हुआ खुलासा

शुक्रवार (9 दिसंबर, 2022) को पीड़िता और हसीन शादी के लिए खरीदारी करने गए थे। इस दौरान, आरोपित का अब्बा शकील सैफी उसकी तलाश में दादरी स्थित उसके कमरे में पहुँचा था। वहाँ लोगों ने बताया कि उक्त कमरे में आशीष नहीं बल्कि हसीन रहता है।

खरीदारी करने के बाद युवती कमरे पर आई तो आरोपित हसीन की सच्चाई का खुलासा हो गया। पीड़िता का आरोप है, मजहब और नाम बदलकर प्रेमजाल में फँसाने वाले हसीन शैफी ने उसका शरीरिक शोषण करते हुए कई बार शारीरिक संबंध भी बनाए हैं और अश्लील वीडियो भी बनाया है। इन वीडियो के आधार पर वह शादी करने के लिए दबाव बना रहा था। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी जब हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं को हुई तो वे मौके पर पहुँच गए। इसके बाद, पुलिस को सूचना देकर आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

‘कुत्ते (हैरी महाराणा) से सीखा हीरोइन का पाँव चाटना’: राम गोपाल वर्मा ने वायरल वीडियो के बाद तस्वीर के साथ दी सफाई, लोगों ने बताया पागल

फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा (Ram Gopal Varma) अक्सर अपने विवादित बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी फिल्म ‘डेंजरस’ के प्रमोशन के दौरान एक्ट्रेस आशु रेड्डी के पैर की उँगलियों को चूमा और उन्हें चाटा। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल होने के बाद उनकी काफी आलोचना हुई। अब उन्होंने अपनी हीरोइन अप्सरा रानी के कुत्ते की तुलना खुद से की है। उन्होंने 9 दिसंबर 2022 को ट्वीट किया, “ऐ सबसे बड़ा डेंजरस मैं हूँ। खबरदार जो मेरी अप्सरा रानी को हाथ लगाया… जहाँ काटूँगा तुम लोग जानते भी नहीं।”

फिर इसके बाद उन्होंने 10 दिसंबर 2022 को दो तस्वीरें साझा कीं। पहली तस्वीर में अप्सरा रानी अपने कुत्ते के साथ हैं। वहीं दूसरी तस्वीर में राम गोपाल वर्मा एक्ट्रेस आशु रेड्डी के पैर पकड़े हुए और उनकी टाँगों को घूरते हुए दिखाई दे रहे हैं।

राम गोपाल वर्मा ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक साथ शेयर की गई इन दोनों तस्वीरों के साथ लिखा, “आशु रेड्डी के पैरों में बैठकर मैंने जो खतरनाक फिलिंग महसूस की, वह मैंने अप्सरा रानी के कुत्ते से सीखी हैं, जिसका इंस्टाग्राम अकाउंट मैंने यहाँ साझा किया है।” जी हाँ, अप्सरा रानी के साथ नजर आने वाले कुत्ते का princeharry18 के नाम से इंस्टाग्राम पर अकाउंट है। यहाँ पर उसकी 175 पोस्ट हैं और उसे 20 हजार लोग फॉलो भी करते हैं।

‘जंगल’ फिल्म के डायरेक्टर द्वारा शेयर की गई फोटो को 18 नवंबर 2022 को princeharry18 (हैरी महाराणा) के अकाउंट पर भी शेयर किया गया है। इसके साथ ही लव इमोजी के साथ लिखा है, “ओह गर्ल यू आर माइन।”

अपने विवादित ट्वीट्स को लेकर एक बार फिर से राम गोपाल वर्मा यूजर्स के निशाने पर आ गए हैं। रोहित गुप्ता लिखते हैं, “यह वही इंसान है जिसने हमें शिवा, रात, सत्या, कौन ,कंपनी , जंगल, सरकार, भूत जैसी शानदार फ़िल्में दी हैं। कहते हैं जीनियस पागल होते है आज देख भी लिया।”

एक और यूजर्स ने कहा कि ये कुत्ता आप हो क्या।

एक यूजर कहता है, “जलो मत। हो सकता है कि कुत्ते की परफॉर्मेंस आपसे बेहतर हो….।”

बता दें कि समलैंगिक संबंधों पर आधारित राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘डेंजरस (Dangerous)’ जल्द ही सिनेमा घरों में दस्तक देने वाली है। बताया जा रहा है कि इस फिल्म में भी काफी बोल्ड सीन हैं। ऐसे में वह अपनी फिल्म के प्रमोशन में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में राम गोपाल वर्मा ने हाल ही में एक्ट्रेस आशु रेड्डी (Ashu Reddy) के साथ अपना एक वीडियो शेयर किया था। वीडियो में वह इन्फ्लुएंसर और साउथ एक्ट्रेस आशु रेड्डी के कदमों में बैठे हुए और उनकी उँगलियों को चाटते नजर आए थे। सोशल मीडिया यूजर्स को उनकी यह हरकत बिल्कुल भी पसंद नहीं आई थी।

150 (6 बेगम+54 बच्चे) लोगों का परिवार, हार्ट अटैक से मर गए अब्दुल: इलाज करवाने के लिए भी घरवालों के पास नहीं थे पैसे

54 बच्चों के अब्बू और छह बेगम के शौहर अब्दुल मजीद की हार्ट अटैक से मौत हो गई है। पाकिस्तान का यह शख्स अपने छोटे कस्बेनुमा परिवार की वजह से चर्चा में रहता था। अब्दुल ट्रक चलाकर अपने परिवार का पेट पालता था और उसपर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी।

आश्चर्यजनक यह है कि 75 वर्षीय अब्दुल को बच्चे पैदा करने का इतना शौक था कि उसकी सबसे छोटी बेटी सात साल की थी और अधिकतर बच्चे 15 साल से कम उम्र के थे। उसकी पहली शादी 18 साल की उम्र में हुई थी। अब्दुल दिल का मरीज था। उसके घर में इतनी किल्लत थी कि मौत से पाँच दिन पहले तक वह ट्रक चला रहा था। पाकिस्तान के नौशकी जिले में रहने वाले अब्दुल की मौत बुधवार (7 दिसंबर 2022) को हुई थी।

अब्दुल मजीद के बेटे शाह वली ने बताया कि 54 बच्चों की जरूरतें पूरी करना आसान काम नहीं था। फिर भी उसके अब्बू पूरी जिंदगी इसी काम में लगे रहे। उसने बताया कि कभी भी अपने पिता को आराम करते नहीं देखा। शाह वली ने कहा कि उनमें से कोई बीए पढ़ा है तो कोई कोई मैट्रिक, लेकिन उनके पास रोजगार नहीं है। उसने बताया कि आर्थिक तंगी की वजह से ही अपने पिता का इलाज नहीं करा सके। वली 37 साल का है। वह भी अपने पिता की तरह ही ट्रक चलाता है।

अब्दुल पहली बार 2017 की जनगणना के दौरान सुर्खियों में आया था। पाकिस्तान में 2017 में 19 साल बाद जनगणना हुई थी। टीम ने पाया था कि अब्दुल अपनी 4 पत्नियों और 42 बच्चों के साथ रह रहा है। उसकी 2 पत्नियों और 12 बच्चों की मौत हो चुकी थी।

जनगणना कि रिपोर्ट के मुताबिक, अब्दुल के पोता-पोतियों को जोड़ लिया जाए तो यह 150 लोगों का परिवार है। जनगणना अधिकारी भी अब्दुल के परिवार के सदस्यों की संख्या जानकर हैरत में पड़ गए थे। अब्दुल अपने बच्चों और पत्नियों के साथ सात कमरों के घर में रहता था। वह बारी-बारी से बच्चों से मिलता था और पारिवारिक कार्यक्रमों में भाग लेता था।

2017 में एक इंटरव्यू में अब्दुल ने बताया था कि उसके पास पैसे नहीं हैं, फिर भी उसे 54 बच्चों के होने का कभी मलाल नहीं है। तंगी की वजह से उनके बच्चों को दूध नहीं मिल पाता। लिहाजा उनके कई बच्चों की मौत हो चुकी है। शुरुआत में उन्होंने कड़ी मेहनत करके अपने कुछ बच्चों को पढ़ाया-लिखाया लेकिन जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती गई, अब्दुल की काम करने की क्षमता भी कम होती चली गई।

मंदसौर में अफसर मंसूरी बने कृष्णा सनातनी: मंदिर जाने और व्रत रखने पर अब्बू ने घर से निकाला, चैतन्य राजपूत ने कराई घर वापसी

मध्य प्रदेश के मंदसौर में एक मुस्लिम युवक ने घर वापसी की है। अफसर मंसूरी ने हिन्दू धर्म स्वीकार कर अपना नाम कृष्णा सनातनी रखा है। घर वापसी के दौरान मंसूरी ने भगवा वस्त्र पहने थे। उन्होंने विधि विधान से वैदिक मंत्रौच्चार के बीच हिन्दू धर्म अपनाया। लगभग 7 माह पूर्व मुस्लिम से हिन्दू बने चैतन्य राजपूत ने अफसर के कृष्णा बनने की जानकारी सार्वजानिक की है। यह घर वापसी सोमवार (12 नवम्बर 2022) को हुई।

चैतन्य सिंह राजपूत के मुताबिक मदंसौर जिले में पिछले 7 माह में यह 6वीं घर वापसी हुई है। कृष्णा बनने वाला अफसर मूल रूप से मंदसौर के गाँव कचनारा का निवासी है। फिलहाल वो कयामपुर में रह रहा है। बताया गया कि मुस्लिम होने के बावजूद अफसर हिन्दू धर्म में पूर्ण आस्था रखता था। वो आए दिन मंदिर जाता था और वहाँ पर विधि विधान से देवी-देवताओं की आराधना किया करता था।

चैतन्य राजपूत की घर वापसी की खबर मिलने के बाद मंसूरी ने उनसे संपर्क किया। हिन्दू बनने की इच्छा जताई। अफसर ने चैतन्य को यह भी बताया कि वो काफी पहले से हिन्दू बनना चाह रहा था, लेकिन उसे कोई रास्ता दिखाने वाला नहीं था। चैतन्य राजपूत ने अफसर की घर वापसी के वैदिक विधान के साथ कानूनी प्रक्रिया को भी पूरा किया।

हिन्दू धर्म में वापसी के दौरान अफसर ने पंचगव्य स्नान भी किया। इस मौके पर चैतन्य के साथ कई अन्य लोग भी मौजूद रहे। घर वापसी के बाद अफसर ने चैतन्य को गुरु मानते हुए आशीर्वाद लिया। चैतन्य ने अफसर की घर वापसी को प्रभु की इच्छा बताया है। उन्होंने इस कार्यक्रम को अपने फेसबुक पर शेयर भी किया है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए चैतन्य राजपूत ने बताया कि अफसर का बचपन से ही हिंदू धर्म से लगाव था। वह व्रत रखता था। मंदिर जाता था। इससे नाराज हो कर उसके अब्बू ने उसे घर से निकाल दिया था। बाद में वह एक हिन्दू के साथ रहने लगा। अपनी गुजर-बसर करने के लिए अफसर एक बस चलाने लगा। इसी दौरान उसने बाल्मीकि समाज की एक लड़की से शादी भी कर ली। शादी के बाद वो हिन्दू धर्म स्वीकार करना चाहता था। लेकिन उसे कोई उचित माध्यम नहीं मिल रहा था। चैतन्य के मुताबिक अफसर ने उन्हें सम्पर्क किया और उन्होंने विधि-विधान से उसकी घर वापसी करवाई।

मोदी-मोदी के नारों से गूँजा गुजरात का नया सचिवालय, नतमस्तक हुए PM: भूपेंद्र पटेल बने गुजरात के 18वें CM, 16 मंत्रियों ने भी ली शपथ

भूपेंद्र पटेल (Bhupendra Patel) ने सोमवार (12 दिसंबर 2022) को गुजरात के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने गाँधीनगर में बने नए सचिवालय परिसर के अंदर हेलीपैड मैदान में शपथ दिलाई। भूपेंद्र पटेल ने लगातार दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में पद की शपथ ली है। इस दौरान पीएम मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने झुककर गुजरात की जनता का अभिवादन किया। वहीं भीड़ ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाती रही।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के नेतृत्व वाले राज्यों के मुख्यमंत्री व अन्य दिग्गज नेता शामिल हुए। भूपेंद्र पटेल के साथ 16 मंत्रियों (कैबिनेट व राज्य) ने भी शपथ ली। मंत्री मण्डल में कुछ नए चेहरे भी शामिल किए गए हैं।

शपथ लेने वाले 16 मंत्रियों में कनुभाई देसाई, ऋषिकेश पटेल, राघवजी पटेल, बलवंत सिंह राजपूत, कुंवरजी बावलिया, मुलूभाई बेरा, कुबेर डिंडोर, भानुबेन बाबरिया, हर्ष संघवी, जगदीश पांचाल, परसोतम भाई सोलंकी, बच्चूभाई खाबड़, मुकेश पटेल, प्रफुल्ल पंसेरिया, भीखू सिंह परमार, कुंवरजी हलपति का नाम शामिल है।

शपथ ग्रहण समारोह की समाप्ति के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच में हाथ जोड़कर झुकते हुए गुजरात की जनता और पार्टी के कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया। इसके बाद पीएम पार्टी के अन्य नेताओं से मुलाकात करते हुए नजर आए।

बता दें कि इससे पहले शुक्रवार (9 दिसंबर 2022) को भूपेंद्र पटेल ने नई सरकार के गठन के लिए मंत्रिमंडल समेत इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद, शनिवार (10 दिसंबर 2022) को हुई बैठक में उन्हें भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया था। सीएम भूपेंद्र पटेल ने घाटलोडिया सीट पर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कॉन्ग्रेस प्रत्याशी डॉ. अमी याज्ञनिक के खिलाफ 1.92 लाख मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की है।

गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा ने रिकॉर्ड तोड़ जीत दर्ज करते हुए 156 सीटें हासिल कीं थीं। बीते 27 सालों से गुजरात की सत्ता में रहने के बाद भी भाजपा की इस बड़ी जीत के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रेय दिया जा रहा है। इस चुनाव में, जहाँ भाजपा ने सत्ता हासिल की है। वहीं कॉन्ग्रेस 17 सीटों और आम आदमी पार्टी मात्र 5 सीटों में सिमट गई थी।

‘बहस को इतना नीचे ले जाओगे तो परिणाम भुगतने होंगे’: मानहानि के मामले को खत्म कराने सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे मनीष सिसोदिया, याचिका हो गई ख़ारिज

सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा (Assam CM Himanta Biswa Sarma) द्वारा दर्ज कराए गए मानहानि के केस रद्द करने की माँग की थी।

इस सुनवाई के दौरान जस्टिस कौल ने मनीष सिसोदिया की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी से कहा कि यदि आप सार्वजनिक बहस को इस स्तर तक नीचे लाते हैं, तो आपको इसके परिणाम भुगतने होंगे। आपको इसके लिए पहले बिना शर्त माफी माँगनी चाहिए।

इस पर वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सिसोदिया की ओर से कहा, “आप सत्ता का इस्तेमाल धमकाने के लिए नहीं कर सकते। हमने कभी आरोप नहीं लगाया। हमने जो कहा है, वह तथ्य हैं। हमने कभी ये आरोप नहीं लगाया है कि उन्हें पैसे मिले हैं।”

सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा, “असम के मुख्यमंत्री की बीवी के भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा से आपका क्या मतलब है?”

जस्टिस कौल कि ये घटना कब की है, जिसके जवाब में अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि मार्च 2020 में। जस्टिस कौल ने कहा, “बीच कोरोना काल में! सरकार का समर्थन करने की बजाए आप आरोप लगाने में व्यस्त थे? ऐसे कठिन समय में किसी ने कुछ ऐसा किया जिससे कुछ अच्छा हो।”

दरअसल, मानहानि मामले को रद्द करने से इनकार करने के गुवाहाटी उच्च न्यायालय के आदेश को दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिसोदिया ने असम के सीएम पर और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप थे। सिसोदिया ने दावा किया था कि सरमा ने अपनी पत्नी की कंपनी को ठेका दिलवाया था और पीपीई किट्स के लिए ज्यादा रुपए का भुगतान भी कराया था।

इसके साथ ही मनीष सिसोदिया ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा था कि असम के वर्तमान सीएम हिमंत बिस्वा सरमा जो 2020 में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री थे, उन्होंने उस वक्त कोरोना म​हामारी की आड़ में जमकर भ्रष्टाचार किया। इस मामले को लेकर पहले असम के मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने दिल्ली के डिप्टी सीएम के सभी आरोपों से इनकार किया। फिर इसके बाद उन्होंने मनीष सिसोदिया के खिलाफ मानहानि का केस दायर किया था।

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने शराब घोटाले के आरोपित मनीष सिसोदिया की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने सरमा के मानहानि केस को रद्द करने की माँग की थी।

‘सेकुलरिज्म बचाने वाले अब तक जेल में’: दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के आरोपितों के लिए विदेशी लिबरलों का छलका दर्द, कहा- केवल मुस्लिमों को नहीं मिल रही बेल

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के कट्टरपंथी आरोपितों की काली करतूतें धो-पोछने के लिए ‘द वर्ल्ड इज वॉचिंग इंडिया’ नाम के संगठन ने एक वीडियो डाली। ये वीडियो 6 दिसंबर को हुए वेबिनार की है, जिसका शीर्षक- ‘सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों की यूएपीए के तहत गिरफ्तारी पर ग्लोबल एक्टर्स’ है। इसमें तमाम लिबरलों के साथ एक हिंदूविरोधी इतिहासकार ऑद्रे ट्रुश्के की ‘विशेष टिप्पणियाँ’ भी जोड़ी गई हैं, जो उन्होंने भारत विरोधी व आतंकी संगठनों से संबंध रखने वाले IAMC द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कही थीं।

नए वेबिनार की वीडियो में बताया गया है कि कैसे 2 साल बीत चुके हैं जब भारत ने उन 18 ‘छात्र और कार्यकर्ताओं’ को आतंकवाद के आरोप में जेल में डाल दिया था। इन 18 छात्रों में शरजील इमाम, इशरत जहाँ, खालिद सैफी, ताहिर हुसैन, सलीम मलिक, मोहम्मद सलीम, मीरान हैरान, शादाब अहमद, तस्लीम अहमद, शिफा उर रहमान, गुलफिशा फातिमा, अतहर खान, सफूरा जरगर, उमर खालिद, नताशा नरवाल, आसिफ इकबाल तन्हा, फैजान खान और देवांगना कलिता का नाम था।

दंगों के आरोपित- छात्र और कार्यकर्ता: लिबरलों की चर्चा

वीडियो में बुद्धिजीवियों ने चर्चा की है कि कैसे 2020 में गिरफ्तार हुए 12 लोग अब भी कैद में हैं। 

मैरी लॉलर (यूएन स्पेशल रैपोर्टेयर, ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स) ने पकड़े गए आरोपितों के लिए दुख जताया। वह बोलीं दिल्ली हाईकोर्ट लगातार केवल मुस्लिम आरोपितों की बेल ही मना कर रही है। 

डेलफाइन रेकूल्यू (वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन अगेंस्ट टॉर्चर) ने इन गिरफ्तारियों पर कहा कि आजकल तो देखा जा रहा है कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को शांत कराने के लिए आतंक-विरोधी कानून का हथियार की तरह इस्तेमाल होता है।

बांग्लादेश के फोटो जर्नलिस्ट शाहिदुल आलम ने कहा, “ऐसे समय में जब साउथ एशिया में इतना दमन जारी है, मानवाधिकारों का अनादर हो रहा है उस समय में जिन लोगों ने निकलकर प्रदर्शन किया, उन्होंने बहुत हिम्मत दिखाई।”

प्रोफेसर लाइला मेहता बोलीं- “ये तो साफ है कि इस तरह छात्रों और मानवाधिकार का बचाव करने वाले जो देश के सेकुलरिज्म को बचाए रखना चाहते हैं वो अब भी जेल में हैं।”

आतंकी संगठन से कनेक्शन रखने वाले इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल का भी कोट लिया गया जिसका कहना था कि अगर गाँधी जिंदा होते तो वो इन हिरासत में लिए प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते या फिर नरेंद्र मोदी सरकार का।

एक अन्य बुद्धिजीवी आनिया लूंबा ने दंगों के 18 आरोपितोंं को बहादुर बताया। साथ ही उस प्रदर्शन को शांतिपूर्ण कहा जिसकी वजह से दिल्ली में दंगे हुए। उन्होंने यहाँ तक बोला कि अच्छा हुआ वो लोग फिली में प्रदर्शन कर रहे थे अगर दिल्ली में करते तो शायद जेल चले जाते।

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे

उल्लेखनीय है कि दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगे फरवरी 2020 में हुए थे। तब यहाँ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप आए थे। 23 फरवरी 2022 को इस्लामी भीड़ ने उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़काए थे जिसमें 50 से ज्यादा लोग मारे गए थे। आज उन दंगों के आरोपितों पर ऐसी चर्चा केवल, उनके कृत्यों को छिपाना का प्रयास है।

नोट: मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई इस रिपोर्ट को विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

अनिल देशमुख को बॉम्बे HC से जमानत तो मिली, लेकिन फैसले पर लग गई 10 दिन की रोक: ₹100 करोड़ की वसूली मामले में 1 साल से जेल में हैं बंद

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) को जमानत मिल गई है। राष्ट्रवादी कॉन्‍ग्रेस पार्टी (NCP) के नेता देशमुख ‘100 करोड़ की वसूली’ मामले में जेल में बंद हैं। उन्होंने स्वास्थ्य आधार पर जमानत की माँग की थी। हालाँकि देशमुख जेल से तुरंत बाहर नहीं निकल पाएँगे। अदालत ने जमानत के तुरंत बाद इसपर 10 दिनों की रोक लगा दी।

दरअसल मामले की जाँच कर रही केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में इस फैसले का विरोध किया और शीर्ष न्यायालय में इसे चुनौती देने के लिए समय की माँग की । बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई की माँग को स्वीकार कर लिया और आदेश को दस दिन तक स्थगित कर दिया।

अनिल देशमुख पर 100 करोड़ रुपए की वसूली का आरोप है। इसी मामले में उन्हें 2 नवंबर, 2021 को गिरफ्तारी किया गया था और तब से वह जेल में ही हैं। सीबीआई (CBI) मामले की जाँच कर रही है। इससे पहले, सीबीआई की विशेष अदालत ने पिछले महीने 72 वर्षीय अनिल देशमुख की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया था। इसके बाद न्यायमूर्ति एमएस कार्णिक की एकल पीठ ने गुरुवार (8 दिसंबर 2022) को देशमुख की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था।

अनिल देशमुख 100 करोड़ की वसूली मामले में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों के निशाने पर हैं। सीबीआई जहाँ इस मामले में भ्रष्टाचार के अपराध की जाँच कर रही है तो ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जाँच कर रही है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने 4 अक्टूबर, 2022 को उन्हें जमानत दे दी थी।

उल्लेखनीय है कि 20 मार्च 2021 को मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया था कि पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने सचिन वाजे को हर महीने 100 करोड़ रुपए इकट्ठा करने का आदेश दिया था। परमबीर सिंह ने चिट्ठी में ये भी कहा था कि सचिन वाजे ने उन्हें बताया था कि अनिल देशमुख ने उससे हर महीने जेल से, रेस्ट्रां, होटल, बार आदि जगहों से 100 करोड़ रुपए इकट्ठा करने को कहा था।

इन्हीं आरोपों के बाद सीबीआई ने अनिल देशमुख के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। हालाँकि बाद में जाँच एजेंसी ने बरख़ास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को माफी दे दी थी और उसे सरकारी गवाह बना लिया था।