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नाबालिग हिन्दू लड़की को लेकर नेपाल भाग रहा था वसीउल्लाह खान, SSB ने दबोचा: यूपी की रहने वाली है पीड़िता

सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने भारत-नेपाल सीमा के बढ़नी बॉर्डर से एक नाबालिग हिन्दू लड़की को सही-सलामत बचा लिया है। इस लड़की को वसीउल्लाह शफी खान नाम का एक आरोपित अपने साथ नेपाल ले जा रहा था। आरोपित मूल रूप से गुजरात का रहने वाला है, जबकि लड़की उत्तर प्रदेश की बताई जा रही है। पीड़िता और आरोपित को जिला सिद्धार्थनगर पुलिस के हवाले कर दिया गया है। घटना शुक्रवार (9 दिसंबर 2022) की है।

जानकारी के मुताबिक, हर दिन की तरह शुक्रवार को भी SSB के जवान सीमा पर चौकसी रखे हुए थे। इस बीच दोपहर लगभग 10:30 पर भारत से नेपाल की सीमा में घुस रहे एक लड़के और लड़की पर जवानों की नजर पड़ी। दोनों के हाथों में सामान थे, जिस से जवानों को उनके कहीं दूर सफर से आने का शक हुआ। दोनों को रोक कर सशस्त्र सीमा बल के जवानों ने सवाल शुरू किए तो लड़का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया।

बताया जा रहा है कि कुछ ही देर बाद SSB के जवानों ने सारा सच निकलवा लिया। लड़के का नाम वसीउल्लाह सफी खान निकला। वह मूल रूप से गुजरात प्रदेश के वापी जिले में बल्लम नगर क्षेत्र का रहने वाला निकला। वसीयल्लाह की उम्र लगभग 23 साल है। वहीं लड़की उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के थाना क्षेत्र के स्वरूपनगर की रहने वाली निकली। वह नाबालिग बताई जा रही है, जो हिन्दू धर्म से है। लड़की की उम्र लगभग 17 बताई जा रही है।

शक होने के बाद SSB के जवानों ने दोनों को कस्टडी में ले लिया। तत्काल ही जिला पुलिस सिद्धार्थनगर को सूचना दी गई। मौके पर पहुँची पुलिस वसीउल्लाह सफी खान और लड़की को अपने साथ ले गई। पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है। दोनों के परिवार को संपर्क साधा गया है। आशंका इस बात की भी जताई जा रही है कि वसीउल्लाह शफी खान लड़की को नेपाल के रास्ते किसी और देश ले जाने की फिराक में था। दोनों संपर्क में कैसे आए इसकी भी जानकारी पुलिस जुटा रही है। आरोपितों के पास मिले कागजातों की भी जाँच करवाई जा रही है।

100 नकाबपोशों की भीड़ ने महिला डॉक्टर को घर से उठा लिया: तेलंगाना में थाने के बगल में ही घटना, बचाने आए लोगों को भी पीटा

तेलंगाना (Telangana) में पुलिस स्टेशन के बगल से दर्जनों लोगों द्वारा दिन-दहाड़े एक महिला का उसके घर से अपहरण करने का मामला सामने आया है। रंगारेड्डी जिले में 24 वर्षीय महिला के अपहरण के मामले में अभी तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, महिला को भी पुलिस ने छुड़ा लिया है।

राजधानी हैदराबाद से सटे रंगारेड्डी जिले के आदिबटला इलाके में शुक्रवार (9 दिसंबर 2022) को करीब 16 लोगों ने अपहरण का दुस्साहसिक कांड किया। सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि नकाबपोश लोग एक घर में और पार्क की गई गाड़ियों में तोड़फोड़ करते और लड़की के परिवार को पीटते दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद वे लड़की का अपहरण कर लेते हैं।

लड़की के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि लगभग 100 लोग उनके घर में घुस आए और उनकी 24 वर्षीया बेटी वैशाली को जबरन उठा ले गए। इसके साथ ही उन्होंने घर और गाड़ियों में तोड़फोड़ की। उधर पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है।

पुलिस का कहना है कि इस मामले में सभी 16 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके साथ ही घटना के 6 घंटे के अंदर लड़की को भी छुड़वा लिया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपितों पर हत्या का प्रयास और अपहरण का चार्ज लगाया गया है। हालाँकि, इस घटना को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

पीड़ित महिला दंत चिकित्सक बताई जा रही है। राचकोंडा के पुलिस आयुक्त महेश बागवाथ ने कहा, “अब तक कुल 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। छह घंटे के भीतर महिला को बचा लिया गया। बाकी अपराधियों की भी जल्दी गिरफ्तारी की जाएगी और मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा। गिरफ्तार लोगों के आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाले जाएँगे।”

इस घटना का मुख्य आरोपित 26 वर्षीय के नवीन रेड्डी है। नवीन चाय की दुकानों की एक श्रृंखला का प्रमोटर है। कहा जा रहा है कि नवीन ने पुलिस को बताया कि वे दोनों पहले ही शादी कर चुके हैं। बाद में जब लड़की डेंटिस्ट बन गई तो उसके माता-पिता ने अपना विचार बदल दिया और शादी से इनकार कर दिया।

वहीं, उसके माता-पिता का कहना है कि नवीन ने उनकी बेटी को प्रपोज किया था। जब उसने मना किया था तो उसे घर से अपहरण करके ले गए। इस दौरान जब उसके रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने रोकने की कोशिश की तो उनके साथ भी मारपीट की गई।

बुर्के में ‘रामायण वाली सीता’, धर्मांतरण वाले पोस्ट … ज़ाकिर नाइक का फैन निकला यूपी पुलिस का कॉन्स्टेबल मुशीर खान, पोल खुलने पर बंद किया फेसबुक

उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में पदस्थापित पुलिस के एक कॉन्स्टेबल पर भगोड़े आतंकी ज़ाकिर नाईक के समर्थन का आरोप लगा है। सिपाही का नाम मुशीर खान है, जो जिले के महिला थाना में तैनात है। कॉन्स्टेबल का फेसबुक स्क्रीनशॉट भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इन वायरल स्क्रीनशॉट में सिपाही धर्मांतरण वाली पोस्ट भी शेयर करता दिखाई दे रहा है।

सीतापुर के एक मंदिर के महंत बजरंग मुनि उदासीन ने मुशीर खान की फेसबुक के स्क्रीनशॉट्स शेयर किए हैं। इन स्क्रीनशॉट्स में मुशीर नाम की ID से ज़ाकिर नाईक के वीडियो शेयर किए जा रहे हैं। स्क्रीनशॉट के मुताबिक कॉन्स्टेबल मुशीर फेसबुक के जिस ग्रुप से जुड़ा हुआ है, उसका नाम ‘डॉक्टर ज़ाकिर नाईक के चाहने वालों का ग्रुप’ है। इस ग्रुप के एडमिन का नाम आमिर खान है। ग्रुप में लगभग 4 लाख 15 हजार मेंबर जुड़े हुए हैं जिसका एक सदस्य सिपाही मुशीर भी है।

मिल रही जानकारी के मुताबिक, सिपाही मुशीर ललितपुर के महिला थाने में पोस्टेड है। वह महिला थाने की SHO की सरकारी गाड़ी चलाता है। विभाग में किसी को उसकी हरकतों की जानकारी नहीं थी। एक अन्य स्क्रीनशॉट में वह रामायण में माँ सीता का रोल करने वाली अभिनेत्री दीपिका को बुर्के में दिखाने वाला लिंक शेयर किया है।

महंत बजरंग मुनि उदासीन ने अपने ट्वीट में सिपाही मुशीर की आतंकी नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका जताई है। उन्होंने कहा है कि वो NIA से सिपाही के नेटवर्क की जाँच की माँग करेंगे। बजरंग मुनि की शिकायत पर ललितपुर पुलिस ने मामले की जाँच करवाने और कार्रवाई करने की जानकारी साझा की है।

ज़ाकिर नाईक के समर्थन वाले इस ग्रुप में इस्लाम की तमाम दीनी बातों के अलावा अक्सर आतंकी ज़ाकिर के कई वीडियो पोस्ट किए जाते हैं। मूल रूप से बिहार के गोपालगंज का रहने वाला ग्रुप एडमिन आमिर खान अपनी फेसबुक प्रोफ़ाइल के मुताबिक, फिलहाल सऊदी अरब के रियाद शहर में रहता है। उसके द्वारा शेयर किए जाने वाले वीडियो पर हजारों लाइक और कमेंट आते हैं। कॉन्स्टेबल मुशीर जैसे कई अन्य ग्रुप मेंबर ज़ाकिर की तकरीरों को लगातार शेयर भी कर रहे थे।

बताया जा रहा है कि मामले में हंगामा हो जाने के बाद सिपाही मुशीर खान ने अपने फेसबुक को बंद कर दिया है।

स्टेडियम से बाहर निकाला, क़तर पुलिस ने पकड़ा, गिर कर मर गए… क़तर में पत्रकार को भारी पड़ा समलैंगिकों के समर्थन वाली शर्ट पहनना

इस्लामी मुल्क कतर (Islamic Country Qatar) में हो रहे FIFA विश्व कप 2022 शुरू से ही विवादों में रहा है। आतंकियों से संबंधों वाला भगोड़ा कट्टरपंथी जाकिर नाइक को इस्लाम पर तकरीर देने के लिए बुलाने से लेकर मानवाधिकारों के दमन तक के कारण यह खेल आयोजन सुर्खियों में रहा। वहीं, खेल के दौरान समलैंगिक समुदाय का समर्थन करने पर जिस अंतरराष्ट्रीय पत्रकार को हिरासत में लिया गया था, उनकी अचानक मौत हो गई है।

कतर इस्लामी शरिया कानून पर आधारित है और यहाँ समलैंगिकता को लेकर सख्त कानून है। कतर में आयोजित FIFA वर्ल्ड विश्व कप के दौरान अमेरिकी पत्रकार ग्रांट वहल ने समलैंगिक समुदाय का समर्थन करने वाली शर्ट पहनी थी। इसके बाद कतर की पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। लगभग 30 मिनट तक हिरासत में रखने के बाद पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया था। इस घटना के कुछ दिन बाद उनकी मौत हो गई है।

ग्रांट शनिवार (10 दिसंबर 2022) को तड़के अर्जेंटीना और नीदरलैंड के बीच विश्व कप मैच को कवर कर रहे थे। वे लुसैल आइकॉनिक स्टेडियम में मीडिया ट्रिब्यून में अपनी सीट पर बैठे थे। अचानक वहाँ गिर गए। इसके बाद आपातकालीन सेवा को फोन किया गया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यूएस शॉकर फेडरेशन ने उनकी मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

सोमवार को ग्रांट को कुछ तकलीफ हुई थी, जिसका जिक्र उन्होंने अपने आर्टिकल में किया था और कहा था कि काम, नींद की कमी और तनाव के कारण उनका शरीर टूट रहा है। उन्होंने बताया कि यूएस-नीदरलैंड मैच दौरान उनकी छाती में दबाव और एक अलग तरह की बेचैनी महसूस हो रही थी। इसके बाद वे मेन मीडिया सेंटर की क्लिनिक में दिखाने गए। वहाँ उनकी कोविड रिपोर्ट निगेटिव मिली। उन्होंने कहा कि संभवत: उन्हें ब्रोनकाइटिस है। इसलिए कुछ ऐंटीबयोटिक और हेवी ड्रग दिए गए। अब वे थोड़ा बेहतर महसूस कर रहे हैं।

अमेरिका के फुटबॉल पत्रकार ग्रांट की मौत पर कई तरह की आशंकाएँ व्यक्त की जा रही हैं। स्नैपबैक स्पोर्ट्स के सीईओ जैक सेटलमैन ने ट्वीट किया, “भयावह! फ़ुटबॉल पत्रकार ग्रांट वहल, जिन्हें इस शर्ट के लिए क़तर के एक स्टेडियम से बाहर निकाल दिया गया था, आज अर्जेंटीना के खेल के दौरान वे कथित तौर पर गिर गए और उनका निधन हो गया। उनके भाई ने इंस्टाग्राम पर कहा कि ग्रांट पूरी तरह से स्वस्थ थे और उनका मानना है कि इसमें कुछ गड़बड़ है।” 

ग्रांट की पत्नी का कहना है कि इस घटना से उन्हें बहुत बड़ा झटका लगा है और अभी तक यह खुलासा नहीं हुआ है कि ग्रांट की मौत कैसे हुई है। बता दें कि इंग्लैंड के स्टार खिलाड़ी डेविड बेकहम के अमेरिका में स्टार बनने पर ग्रांट ने एक किताब लिखी थी। ‘द बेकहम एक्सपेरिमेंट’ नाम की यह किताब काफी लोकप्रिय हुई थी। 

पंजाब के पुलिस थाने पर रॉकेट लॉन्चर से हमला, बाल-बाल बचे पुलिसकर्मी: इमारत को पहुँचा नुकसान, मोहाली में भी हुआ था ब्लास्ट

पंजाब के तरनतारन जिले में एक धमाके की खबर है। बताया जा रहा है कि यहाँ रॉकेट लांचर से एक पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया गया है। हमले में थाने में मौजूद पुलिसकर्मी बाल-बाल बच गए हैं। थाने की बिल्डिंग को नुकसान पहुँचा है। पुलिस ने यह हरकत को करने वालों की तलाश शुरू कर दी है। घटना 9-10 दिसंबर 2022 रात लगभग 1 बजे की बताई जा रही है। इस मामले में NIA और IB की टीनें भी जाँच के लिए निकल चुकी हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना सरहाली पुलिस थाने की है। बताया जा रहा है कि रात में अचानक ही थाने की बिल्डिंग से लॉन्चर टकराने से अफरा-तफरी का माहौल हो गया। अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक़, रॉकेट लॉन्चर से हमला कहीं और किया गया था। किसी और टारगेट से डाइवर्ट हो कर लॉन्चर पहले थाने के गेट से टकराया फिर पिलर से। विषेशज्ञों की भाषा में इसे RPG हमला बोलते हैं, जिसे काफी खतरनाक माना जाता है।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, सरहाली थाना पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ है। काफी रात होने के चलते थाने में स्टाफ और आम जनता न के बराबर थी। हमला भारतीय सीमा के अंदर से ही होना बताया जा रहा है। इस हमले में प्रयोग हथियार पाकिस्तान से मिलने की आशंका जताई जा रही है। सामने आ रहे वीडियो में पुलिस स्टेशन के शीशे टूट गए हैं। आशंका यह भी जताई जा रही है कि हमलावर पुलिस स्टेशन को उड़ाने की नीयत रख कर आया था जिसमें वो सफल नहीं हुआ।

2 दिन पहले गिरफ्तार हुआ था बिक्रमजीत

गौरतलब है कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने 2 दिन पहले 8 दिसंबर, 2022 को फरार आतंकी बिक्रमजीत सिंह उर्फ़ बिक्कर को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। बिक्कर ऑस्ट्रेलिया में रहता था जो साल 2019 में तरनतारन जिले में हुए ब्लास्ट में आरोपित था। बिक्रमजीत पर अन्य आतंकी समूहों से भी साँठ-गाँठ का आरोप है। उसके खिलाफ NIA कोर्ट मोहाली से गैरजामंती वारंट भी जारी था।

मोहाली इंटेलिजेंस विभाग में भी हो चुका है ब्लास्ट

गौरतलब है कि इस साल मई में मोहाली पुलिस के इंटेलिजेंस विभाग में में भी एक विस्फोट हुआ था। यह ब्लास्ट कम क्षमता का था जिस से किसी के जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ था। इस ब्लास्ट में भी रॉकेट लॉन्चर का प्रयोग हुआ था।

कॉलेजियम की बैठक में क्या चर्चा हुई? सुप्रीम कोर्ट ने RTI के तहत जानकारी देने से किया इनकार, कहा – इसे सार्वजनिक नहीं कर सकते: केंद्र को भी चेताया

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का स्वघोषित कॉलेजियम सिस्टम (Collegium) पर केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) के साथ तकरार बढ़ रही है तो दूसरी तरफ वह इस सिस्टम को पारदर्शी बनने भी नहीं देना चाहता है। सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजियम सिस्टम के कामकाज और तौर-तरीकों की जानकारी देने से स्पष्ट मना कर दिया और कहा कि इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एमआर शाह और सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा कि सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत केवल अंतिम फैसले ही सार्वजनिक किए जा सकते हैं, न कि कॉलेजियम की बैठकों की चर्चा और जजों की नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया। इस मामले को लेकर दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (9 दिसंबर 2022) को खारिज कर दिया।

पीठ ने कहा, “अंतिम प्रस्ताव तैयार होने और कॉलेजियम के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर किए जाने के बाद ही, नियत प्रक्रिया और चर्चा/विचार-विमर्श और परामर्श की प्रक्रिया को पूरा करने के बाद होता है, उसे दिनांक 3 अक्टूबर, 2017 के प्रस्ताव के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित करने की जरूरत होती है।”

दरअसल, अंजलि नाम की एक ऐक्टिविस्ट ने याचिका दायर कर 2018 की कॉलेजियम की बैठक के विवरण का खुलासा करने का निर्देश देने की माँग की थी। इस बैठक हाईकोर्ट के दो मुख्य न्यायाधीशों को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि कॉलेजियम के सिर्फ निर्णय बताए जा सकते हैं, उसमें की गई चर्चा नहीं।

याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में तर्क दिया कि जनता में विश्वास पैदा करने के लिए हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति पारदर्शी तरीके से की जानी चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कॉलेजियम प्रणाली के भीतर चर्चा को RTI के माध्यम से सार्वजनिक डोमेन में नहीं रखा जा सकता है, क्योंकि वे अंतिम निर्णय के चरित्र को नहीं मानते।

न्यायमूर्ति शाह ने कहा, “कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया था, जिसकी परिणति कॉलेजियम के सभी सदस्यों द्वारा तैयार और हस्ताक्षरित एक अंतिम प्रस्ताव के रूप में हुई थी और उसे सार्वजनिक डोमेन में प्रकट करने की जरूरत नहीं थी और वह भी आरटीआई अधिनियम के तहत सार्वजनिक डोमेन में बिल्कुल नहीं।”

बता दें कि कॉलेजियम सिस्टम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी धमकी दे दी। कोर्ट ने कहा कि कॉलेजियम सिस्टम पर बयान देने से केंद्र अपने मंत्रियों को रोकें। बता दें कि कानून किरेन रिजिजू कॉलेजियम सिस्टम पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं और उसे एलियन प्रणाली बताते रहे है।

वहीं, उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी कॉलेजियम को लेकर कहा था कि दुनिया में सिर्फ भारत ही ऐसा देश है, जहाँ जज ही जज को चुनते और नियुक्त करते हैं। इसमें पारदर्शिता की भी घोर कमी है। सुप्रीम कोर्ट सरकार के इन बयानों से भड़क गया।

कोर्ट ने कहा था कि जब तक कॉलेजियम सिस्टम है, उसे सरकार को मानना पड़ेगा। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा था कि अगर उसे कॉलेजियम के खिलाफ कोई कानून पास करना है तो करे, लेकिन उसकी न्यायिक समीक्षा का अधिकार उसके पास है। उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार ने कॉलेजियम प्रणाली की जगह एक नया कानून बनाया था, जिसे न्यायिक समीक्षा का आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

बता दें कि कॉलेजियम प्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। जजों की नियुक्ति में भाई-भतीजावाद एवं जातिवाद को न्यायपालिका में ‘अंकल कल्चर’ कहा जाता है। कुछ तबका इसे खत्म करने की माँग करता है। वहीं, कुछ तबका इसे सही बताता है, लेकिन साथ में इसे पारदर्शी बनाने की वकालत करता है।

‘फवाद खान के फैन हो तो पाकिस्तान जाकर देखो फिल्म’: भारत में रिलीज होने जा रही है ‘मौला जट्ट’, MNS ने चेताया – देश में कहीं नहीं चलने देंगे

फवाद खान की पाकिस्तानी फिल्म ‘द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट’ भारत में रिलीज होने वाली है, लेकिन इससे पहले ही राज ठाकरे की MNS ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। फिल्म दुनिया भर में अभी तक ₹90 करोड़ रुपए से भी अधिक का कारोबार कर चुकी है। ‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना’ नेता अमेय खोपकर ने इस संबंध में चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी एक पाकिस्तानी फिल्म को भारत में रिलीज नहीं होने देगी।

उन्होएँ शुक्रवार (9 दिसंबर, 2022) को कहा कि पार्टी के अध्यक्ष राज ठाकरे के आदेश के अनुसार काम करते हुए मनसे कार्यकर्ता भारत में कहीं भी इस फिल्म को रिलीज नहीं होने देंगे। उन्होंने इस बात से नाराज़गी जताई कि एक भारतीय कंपनी ही इस फिल्म को भारत में रिलीज कर रही है। उन्होंने भारत में फवाद खान के फैंस को देशद्रोही करार देते हुए कहा कि अगर वो पाकिस्तानी अभिनेता के उतने ही बड़े फैन हैं तो पाकिस्तान जाकर देखें।

‘The Legend Of Maula Jatt’ के बारे में बता दें कि ये 1979 की पाकिस्तानी कल्ट-क्लासिक फिल्म से प्रेरित हैं। फिल्म में फवाद खान के अलावा माहिरा खान भी मुख्य भूमिका में हैं। पाकिस्तानी रुपयों में फिल्म 250 करोड़ (11 मिलियन डॉलर) का कारोबार दुनिया भर में कर चुकी है। फिल्म में हम अली अब्बासी ने कबीले के एक क्रूर सरदार का रोल निभाया है। बिलाल लाशरी इस फिल्म के निर्देशक हैं, जिनकी पिछली फिल्म ‘वार (2013)’ ने भी तगड़ा कारोबार किया था।

भारत में पाकिस्तानी फिल्म की रिलीज के खिलाफ भड़की मनसे

बता दें कि फवाद खान बॉलीवुड में भी काम कर चुके हैं। 2014 में उन्होंने ‘खूबसूरत’ में सोनम कपूर के साथ काम किया था। वहीं, मल्टी-स्टारर ‘कपूर एंड संस (2016)’ में भी उन्होंने ऋषि कपूर और सिद्धार्थ मल्होत्रा जैसे अभिनेताओं के साथ काम किया था। अमेय खोपकर ने कहा है कि उनकी बातों को ‘बयान’ नहीं, ‘धमकी’ के रूप में लिया जाए। उन्होंने कहा कि जो भी पाकिस्तानियों के एजेंट यहाँ हैं, वो इस बात को अच्छी तरह समझ लें।

‘फोटो लेकर बनाई अश्लील वीडियो, ब्लैकमेल किया’: HC ने फेसबुक पर ठोका ₹50 हजार का जुर्माना, 1 साल पुरानी PIL का नहीं दिया था जवाब

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने फेसबुक पर एक जनहित याचिका का जवाब नहीं देने पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। साल 2021 में कोर्ट ने फेसबुक से फर्जी आईडी और ब्लैकमेलिंग कर लोगों से पैसे माँगने के मामले में जवाब दाखिल करने को कहा था। हालाँकि, फेसबुक ने बीते एक साल में जबाव नहीं दिया। इससे उस पर जुर्माना लगाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विपिन सांघी व जस्टिस आरसी खुल्बे ने मामले की सुनवाई करते हुए मेटा के स्वामित्व वाली फेसबुक को 16 फरवरी तक जवाब देना का समय दिया है। साथ ही, समय पर जवाब देने पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।

कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा है, “यह जुर्माना जमा करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया जा रहा है। इसके लिए और अधिक समय नहीं दिया जाएगा।”

हालाँकि, फेसबुक के वकील ने अपील करते हुए अतिरिक्त समय की माँग की थी। इसके बाद, वकील के अनुरोध को स्वीकार करते हुए, कोर्ट ने जवाबी हलफनामा दायर करने के लिए चार सप्ताह की अनुमति दी। कोर्ट ने कहा है कि जवाबी हलफनामे में आईटी नियम, 2021 के अनुसार उठाए गए कदमों का भी जिक्र होना चाहिए।

दरअसल, साल 2021 में हरिद्वार के रहने वाले आलोक कुमार ने हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर कहा था कि फेसबुक में फर्जी आईडी बनाकर लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी जा रही है। इसके बाद, फेसबुक फ्रेंड की फोटोज को एडिट कर उनकी अश्लील वीडियो बनाई जाती है और ब्लैकमेलिंग की जाती है।

याचिकाकर्ता ने कहा था कि सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल से लोग आत्महत्या करने को मजबूर हैं। इसलिए, फेसबुक को यह निर्देश दिए जाएँ कि इस तरह की अश्लील वीडियो डालने वाले लोगों की आईडी ब्लॉक की जाए। साथ ही, फेसबुक को यह भी निर्देश दिए जाएँ कि एक ऐसा नंबर जारी करे जिसमें पीड़ित अपनी शिकायत दर्ज करवा सकें।

कोर्ट में दाखिल याचिका में, याचिकाकर्ता ने फेसबुक के अलावा केंद्र सरकार, राज्य सरकार, पुलिस अधिकारियों को भी ऑनलाइन दुर्व्यवहार से निपटने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने के निर्देश देने की माँग की थी।

याचिकाकर्ता के वकील अभिजय नेगी ने कहा कि पहले भी फेसबुक को नोटिस कोर्ट ने दिया था लेकिन जवाब अब तक नहीं दाखिल किया, जिसके बाद अब कोर्ट ने जुर्माना लगाया है।साथ ही ठगी के मामले भी फेसबुक पर आ रहे हैं जो बेहद गंभीर हैं।

याचिकाकर्ता की अर्जी पर सुनवाई करते हुए, कोर्ट ने इस मामले को विचारणीय माना था। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि लोगों की फर्जी आईडी बनाकर ब्लैकमेलिंग करने और जबरन वसूली करने को लेकर फेसबुक कैसे एक्शन ले रही है, इस बारे में कोर्ट को जानकारी दी जाए।

‘वे अल्लाह को नहीं मानते, बुत पूजते हैं…हमें नफरत है उनसे’: पाकिस्तानी बच्चों ने उगला भारतीयों के लिए जहर, Video वायरल

भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी संबंध कितने ही खराब क्यों न हों, एक भारतीय हमेशा शांति और चैन की ही बात करता है। हालाँकि, पाकिस्तान का हाल ऐसा नहीं है। वहाँ रहने वाले लोगों के दिमाग में भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर भरा हुआ है। आजकल सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें पाकिस्तानी ‘बच्चे’ भारत से नफरत और हिंदू धर्म का अपमान करते नजर आ रहे हैं।

वायरल वीडियो में, पाकिस्तानी यूट्यूबर सना अमजद वहाँ के बच्चों से भारत को लेकर सवाल पूछ रही हैं। इन सवालों के जवाब में पाकिस्तानी बच्चों के जवाब यह दर्शाते हैं कि भारत और हिंदुओं को लेकर उनके दिमाग में कितना कुछ भरा जा चुका है। सबसे बड़ी बात यह है कि ये बच्चे हर चीज के लिए इस्लाम की दुहाई दे रहे हैं।

यहाँ क्लिक कर आप वीडियो देख सकते हैं। इस वीडियो में 3.38 सेकेंड के स्लॉट के बाद पाकिस्तानी बच्चे हिंदू धर्म को अपमानित करते और भारत से अपनी नफरत जाहिर करते देखे जा सकते हैं।

वीडियो में देखा जा सकता है कि यूट्यूबर बच्चे से पूछ रही है कि इंडिया का नाम सुनते ही उसके दिमाग में सबसे पहले क्या आता है। इस पर वह कहता है “दुश्मनी, उनसे लड़ाई करें और गुस्सा आता है।” भारत से संबंधों के सुधार को लेकर बच्चे से सवाल पूछे कर जाने पर वह ‘नहीं’ का जवाब देता है और भारत से नफरत पर ‘हाँ’ कहता हुआ दिखाई देता है। एक अन्य बच्ची से सवाल पूछे जाने पर उसका जवाब भी यही है कि भारत का नाम सुनकर उसे गुस्सा आता है।

एक अन्य लड़के से भारत को लेकर यूट्यूबर द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में लड़का कहता है, भारतीयों में जहानत (समझदारी) की कमी है। इसके बाद यूट्यूबर उससे कहती है कि भारतीय तो बहुत आगे निकल गए हैं फिर उनमें समझदारी की कमी कैसे हुई। इस पर, लड़का जवाब देते हुए कहता है, “लिखा है कि इनको सब कुछ यहीं पर मिल जाना है और हमें ऊपर जाकर मिलना है।” उसके इस जवाब का सीधा मतलब यह था कि हिंदू अपने कर्म में विश्वास रखते हैं और उन्हें यहीं सब कुछ मिल जाना है। इसके ठीक विपरीत इस्लामवादियों के लिए 72 हूरों से लेकर जन्नत तक का हिसाब लिखा हुआ है।

इसके बाद, सना अमजद ने एक अन्य लड़के से वही पूछा, इस पर उसने कहा, “हमारे दिल में उनके लिए नफरत पैदा होती है।” लड़के ने इसका कारण बताते हुए आगे कहा, “हम तो अपने रब को रब मानते हैं और वो बुतों (मूर्तियों) को अपना रब मानते हैं।” पाकिस्तानी यूट्यूबर सना अमजद ने अपने अगले सवाल में उस लड़के से पूछा किसने बताया कि मजहब की वजह से नफरत कर सकते हैं। इस पर लड़का कहता है “इस्लाम ने बताया।”

सना अमजद आगे एक 10-12 साल की लड़की से भारत को लेकर पूछते हुए दिख रहीं हैं। सवाल के जवाब में लड़की कहती है, “पड़ोसी देश होने के कारण वह हमारा दुश्मन है। इस दुश्मनी की बड़ी वजह यह है कि वह (भारत) कश्मीर पर जुल्म करता है।” यूट्यूबर आगे पूछती हैं कि आपको ये सब किसने बताया? इस पर वह लड़की कहती है, “मैंने से सब किताबों में पढ़ा और सुना है। मैं कश्मीर होकर आई हूँ।” हालाँकि, यूट्यूबर के यह पूछे जाने पर कि क्या आपने वहाँ जुर्म होते देखा है। लड़की कहती है “नहीं, मैंने सिर्फ सुना है।”

वीडियो को थोड़ा आगे बढ़ाने पर, पाकिस्तानी यूट्यूबर दो लड़कों से बात करती नजर आती हैं। इन लड़कों से भी भारत को लेकर सवाल पूछने पर एक लड़का कहता है, “भारतीय दुश्मन हैं।” वहीं, दूसरा लड़का कहता है, “वे लड़ते हैं और बुरे हैं।” भारत को लेकर नफरत का कारण पूछने पर लड़का कहता है, “वे मुस्लिम नहीं हैं, वे अल्लाह को नहीं मानते और पत्थर को पूजते हैं।” पाकिस्तानी यूट्यूबर सना अमजद आगे पूछती हैं कि क्या मजहब को लेकर किसी से नफरत करना सही है? इस पर फिर लड़का कहता है, “हाँ।”

बता दें कि भारत देश और हिंदू धर्म से पाकिस्तान के कट्टरपंथियों की नफरत कई दफा वीडियोज में सामने आ चुकी है। कभी बच्चे लकड़ी की तलवार से काफिरों की मारने की बात करते हैं तो कई बार माता-पिता ही अपने बच्चों से ये कहलवाते दिखते हैं कि वो काफिरों को मारेगा।

गुजरात में BJP की प्रचंड लहर के बीच AAP को मिला 13 प्रतिशत वोट: कौन हैं वो लोग जिन्होंने अरविंद केजरीवाल को तरजीह दी? पढ़ें विश्लेषण

गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे (Gujarat Assembly Election Result) 8 दिसंबर 2022 को घोषित हो गए। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत की भविष्यवाणी की जा रही थी और माहौल को देखते हुए यह लगभग तय था कि इस चुनाव में भी जीत रही है। हालाँकि, यह अनुमान नहीं था कि बीजेपी को इतना प्रचंड बहुमत और ऐसी ऐतिहासिक जीत मिलेगी, क्योंकि पार्टी ने 182 में से 156 सीटों पर जीत हासिल की है। दूसरी ओर कॉन्ग्रेस 77 से 17 सीटों पर फिसल गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के पास खोने के लिए कुछ नहीं था, लेकिन वह उस तरह का प्रदर्शन नहीं कर सकी, जैसा उसने प्रचार किया था। इस चुनाव में AAP को सिर्फ 5 सीटें मिली हैं।

हालाँकि, AAP के नेताओं ने अपने समर्थकों के लिए खुशी की वजह ढूंढ ली है और वजह है AAP का राष्ट्रीय पार्टी बन जाना। नियमों के मुताबिक, किसी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी घोषित करने का एक मापदंड यह है कि उसे कम-से-कम चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में 6 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल करना होगा। जैसा कि AAP को 2020 में दिल्ली (54%), पंजाब (42%) और इस साल की शुरुआत में गोवा (6.8%) और अब गुजरात (12.9%) में 6% से अधिक वोट मिले हैं। इस तरह AAP ने राष्ट्रीय पार्टी के इस मानदंड को पूरा कर लिया है।

गुजरात में इस बार AAP को 5 सीटों पर जीत मिली है, जिनमें से 4 सौराष्ट्र और 1 मध्य गुजरात की सीटें हैं। बाकी सभी सीटों पर पार्टी ने चुनाव लड़ा और वे हार गए। 128 सीटों पर AAP के उम्मीदवार इतनी बुरी तरह हारे कि उनकी जमानत तक जब्त हो गई। पार्टी के बड़े चेहरे- इशुदान गढ़वी, गोपाल इटालिया, अल्पेश कथीरिया, धार्मिक मालवीय- भी नहीं जीत सके। हालाँकि, आम आदमी पार्टी को 12.92 फीसदी यानी करीब 13 फीसदी वोट मिले है। ऐसे में एक सवाल यह भी है कि ये वोटर कौन हैं?

AAP को किसका वोट मिला?

इस चुनाव में तीन तरह के वोटर थे। पहला, वे मतदाता जो भाजपा को वोट देते हैं और उम्मीदवार की परवाह किए बिना उसका समर्थन करते हैं। यह वर्ग भाजपा को ही वोट दिया। गुजरात में ऐसे मतदाताओं का एक बहुत बड़ा वर्ग है। दूसरा वर्ग है, जो कॉन्ग्रेस समर्थक मतदाता है। यह हर हालत में कॉन्ग्रेस को वोट देता है। हालाँकि ऐसे लोगों की संख्या धीरे-धीरे कम होती जा रही है। इन दोनों वर्गों से अलग मतदाताओं की एक तीसरी श्रेणी है, जो कई पहलुओं पर विचार कर मतदान करते हैं। इतना वोट शेयर हासिल करने में AAP को ऐसे वोटरों से काफी मदद मिली।

मुफ्त की रेवड़ी का असर गरीब लोगों पर पड़ा

आम आदमी पार्टी ने सोशल मीडिया पर हाइप क्रिएट किया, जिससे खासकर युवाओं पर कुछ असर पड़ा। इसके अलावा आम आदमी पार्टी ने भी तथाकथित युवा क्रांतिकारियों का हाथ थामा और इससे युवाओं का कुछ समर्थन भी मिला। इसलिए पहली बार के वोटरों और युवाओं के कुछ वोट आम आदमी पार्टी को मिल गए।

इसके अलावा आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल ने गुजरात का दौरा किया और मुफ्त योजनाओं का लाभ देने का खूब प्रचार किया। बिजली, पानी और सब कुछ मुफ्त करने की घोषणाओं के चलते गरीब और दूर-दराज के गाँवों में रहने वाले लोगों ने भरोसा कर लिया और उनमें से अधिकांश ने आम आदमी पार्टी को वोट किया।

वर्किंग क्लास के कुछ लोगों ने भी वोट किया

गुजरात में कर्मचारियों और वर्किंग क्लास का एक बड़ा तबका है, जो अपने ही कारणों से सरकार विरोधी है। इस वर्ग में सरकार विरोधी माहौल न केवल इस चुनाव में था, बल्कि उस समय भी था जब नरेंद्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री थे। हालाँकि, आबादी के अनुपात में वोटों की संख्या बेहद कम होने से सरकार को इसका कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन आम आदमी पार्टी को फर्क जरूर पड़ा। चुनाव से पहले चल रहे आंदोलनों की अगुआई AAP ने जिस तरह से की थी, उसे देखते हुए इस वर्ग के वोट मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

AAP को मुस्लिम वर्ग का वोट मिला या नहीं?

आम आदमी पार्टी को मुस्लिम वोटरों का भी अच्छा सहयोग मिला है। मतदान से कुछ दिन पहले अहमदाबाद में ‘मुस्लिम फाइटर्स क्लब’ ने एक बैठक आयोजित की और आम आदमी पार्टी के समर्थन में वोट देने की अपील की थी, जो काफी सुर्खियों में भी रही। हालाँकि गुजरात के मुस्लिम मतदाता कॉन्ग्रेस समर्थक रहे हैं, लेकिन पार्टी की निष्क्रियता ने उन्हें AAP में स्थानांतरित कर दिया होगा। कई मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में AIMIM की तुलना में AAP को अधिक वोट मिले। इससे पता चलता है कि पार्टी को अच्छी संख्या में मुस्लिम वोट मिले।

जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, तीसरी श्रेणी के अधिकतर मतदाताओं ने भी भाजपा के काम को देखा और उसे वोट दिया। इसे परिणामों में देखा जा सकता है। बाकी सरकार से असंतुष्ट मतदाताओं के वोट तब आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के बीच बँट गए। इसलिए कॉन्ग्रेस की निष्क्रियता का कुछ फायदा AAP को भी मिला और वह 13 फीसदी वोट शेयर पर पहुँच गई।

अब सवाल है कि आम आदमी पार्टी बड़ा अंतर क्यों नहीं ला पाई। इसकी वजह यह रही कि उसके वोट बँट गए। पार्टी को अधिक सीटें नहीं मिल सकीं, क्योंकि उसके पास पहले ही कम मतदाता थे और वे राज्य के अलग-अलग सीटों में बँटे हुए थे। कच्छ में बैठा व्यक्ति सोशल मीडिया पर किसी पोस्ट पर टिप्पणी कर सकता है और वलसाड में बैठा व्यक्ति भी उसी पोस्ट पर टिप्पणी कर सकता है, लेकिन एक भी सीट जीतने के लिए किसी पार्टी को एक जगह एक साथ केंद्रित वोटों की जरूरत होती है, जो AAP के पास नहीं था।

क्या AAP 2027 के विधानसभा चुनावों में बेहतर करेगी?

पहली बार 182 सीटों पर चुनाव लड़ने और 13 फीसदी वोट शेयर हासिल करने के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं और समर्थकों का दावा है कि पार्टी साल 2027 के विधानसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करेगी। हालाँकि, ऐसे दावे अत्यधिक आशावादी हैं, क्योंकि राजनीति में पाँच साल बहुत बड़ा कालखंड होता है।अगर भाजपा सरकार घोषणा पत्र के वादों पर टिकी रही और किसी विवाद में पड़े बिना सरकार चलती रही तो पाँच साल बाद वोट देने जाने वाला मतदाता दूसरा विकल्प क्यों चुने? तब तक बीजेपी को भी चुनाव में फायदा होने की स्थिति और भी मजबूत हो जाएगी।

दूसरी ओर आम आदमी पार्टी को अभी संगठन पर काफी मेहनत करनी है। इस चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं का उत्साह कम हो सकता है और वे मेहनत से परहेज कर सतके हैं। संभावनाएँ बहुत हैं और पर्याप्त समय भी है, लेकिन इन नतीजों से एक बात बिल्कुल साफ हो गई है कि आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस में से विपक्ष कौन होगा, इस पर चर्चा हो सकती है। वर्तमान स्थिति में गुजरात से भाजपा को हटाना इन दोनों पार्टियों के लिए संभव नहीं दिखता।