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सुशासन बाबू! सीवान के इस पिता का गुनाह क्या है: नाबालिग हिंदू लड़की को अगवा कर ले गया सलमान, बिहार पुलिस कह रही- मुस्कान खातून बन भेज रही मैसेज

भले ही बिहार पुलिस का क्राइम डाटा राज्य की कानून-व्यवस्था पर पर गंभीर सवाल खड़े करता हो, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उनके समर्थक ‘सुशासन बाबू’ कहते हैं। पर त्रासदी यहीं खत्म नहीं होती। सुशासन में करीब तीन महीने पहले सीवान से एक नाबालिग हिंदू लड़की अगवा कर ली गई। आरोप सलमान अंसारी पर है। पीड़ित पिता बेटी की बरामदगी की गुहार लगा रहा है। आरोपित के परिवार पर धमकी देने का आरोप है। इन सबके बावजूद बिहार पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

बिहार पुलिस एक तरफ यह भी मान रही है कि लड़की नाबालिग है। दूसरी तरफ यह भी बता रही है कि वह मुस्कान खातून बन गई है। मैसेज भेजकर गुजारिश कर रही है कि उसे फ्री छोड़ दिया जाए। साथ ही यह भी बता रही है कि बार-बार सिम बदलने की वजह से लड़की की बरामदगी में दिक्कत आ रही है।

नाबालिग हिंदू को 17 अक्टूबर 2022 को अगवा किया गया था। उसके पिता ने इसको लेकर महराजगंज थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में सलमान अंसारी, शहाबुद्दीन अंसारी, हजरत अंसारी, इश्हाक मियाँ, सदीना और लाडली को नामजद किया है। पीड़ित पिता का कहना है कि पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने पुलिस पर उलटे खुद को ही परेशान करने का आरोप लगाया है। पीड़ित पिता के अनुसार मामले में नामजद कुछ आरोपितों को पुलिस ने पहले दिन पकड़ा। लेकिन 3 दिनों के अंदर ही छोड़ दिया।

पीड़ित पिता ने ऑपइंडिया को बताया कि उनकी बेटी की लोकेशन अभी मुंबई में बता रही है। लेकिन सब कुछ जानते हुए भी पुलिस प्रशासन उनकी बेटी की बरामदगी के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा। पीड़ित पिता का कहना है कि उन्होंने खुद ही पता कर पुलिस को मुंबई में लोकेशन की जानकारी दी। पुलिस ने जाने का भरोसा भी दिया पर गई नहीं। उनका आरोप है कि पुलिस ने आने-जाने का भाड़ा माँगा था। वे इसके लिए भी तैयार थे।

पीड़ित पिता का कहना है कि बेटी के बारे में जानकारी जुटाने के लिए वे अपने स्तर पर करीब 90 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। उन्होंने सलमान के बड़े भाई हजरत पर धमकी देने और हिंदुओं को गाली दने का भी आरोप लगाया है। यह भी बताया कि सलमान का परिवार भरी पंचायत में 3 बार लड़की को वापस करने की जुबान देकर मुकर चुका है। उन्होंने लड़की को मुंबई से पुणे शिफ्ट किए जाने की आशंका जताई गई है। पीड़ित पिता के अनुसार 11 दिसंबर 2022 को बजरंग दल के लोग उनके घर आए थे। ये लोग जब उनके घर से लौट गए तो महराजगंज थाने से एक पुलिसकर्मी ने फोन कर उन्हें धमकी दी।

पुलिस ने कहा- नाराजगी में लगा रहे आरोप

ऑपइंडिया ने पीड़ित पिता के आरोपों को लेकर महराजगंज थाना प्रभारी से बात की। उनका कहना है कि लड़की की बरामदगी न होने की नाराजगी में वे ऐसा कह रहे। थाना प्रभारी ने बताया कि लड़की खुद को मुस्कान खातून बता कर पुलिस को मैसेज भेज रही है। मैसेज में खुद को स्वतंत्र छोड़ देने की गुजारिश कर रही है। लड़की को नाबालिग बताते हुए थानाध्यक्ष ने बताया कि लगातार सिम बदलने की वजह से आरोपित और लड़की को रिकवर करने में दिक्कत आ रही है। लेकिंन हम जल्द ही सफल होंगे।

पीड़ित पिता को थाने से कॉल कर धमकी दिए जाने के आरोप को लेकर उन्होंने कहा कि इसके लिए पुलिस स्टेशन के सभी कर्मचारी जिम्मेदार हैं। कोई भी ऐसी हरकत नहीं करेगा। ऑपइंडिया ने जब उस नंबर पर कॉल किया जिससे पीड़ित पिता को धमकी दी गई थी तो कॉल किसी ने नहीं उठाया।

गौरतलब है कि जिस सलमान पर परिजनों के साथ मिलकर लड़की को अगवा करने का आरोप है वह मुंबई में बेल्ट बनाने का काम करता है। उसके भाई व परिवार के अन्य सदस्य गाँव में ही रहते हैं। सलमान और लड़की का घर आसपास ही है। पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 363, 366 (A) और 34 के तहत केस दर्ज कर रखा है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है।

बंगाल में अब रथ यात्रा पर हमला, गीता जयंती महोत्सव को बनाया निशाना: BJP का दावा – TMC के गुंडों की करतूत, तलवार-डंडे-छड़ों से भक्तों को पीटा

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में हिंदुओं की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। वहाँ, हिंदुओं पर हो रहे हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने ‘तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं’ पर रथ यात्रा में हमला करने का आरोप लगाया है। अधिकारी ने हमले में घायल हुए लोगों की फोटो भी शेयर की है। साथ ही, पुलिस पर एफआईआर न दर्ज करने का भी आरोप लगाया है।

कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बेटबेरिया में हर वर्ष की भाँति गीता जयंती महोत्सव मनाया जा रहा था। इस दौरान, रविवार (11 दिसंबर, 2022) को कुछ लोगों ने रथ परिक्रमा में शामिल हिंदुओं पर हमला कर दिया। इस हमले में कई हिंदू भक्त घायल हुए हैं।

सोमवार (12 दिसंबर, 2022) को पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने ट्वीट कर कहा है, “दक्षिण 24 परगना जिले के बुरईपुर में स्थित बेटबेरिया के राधा मोहन मंदिर में बीते 20 सालों से गीता जयंती महोत्सव मनाया जा रहा है। 10 दिवसीय महोत्सव का समापन कल रथ यात्रा के साथ होना था। रथ परिक्रमा के दौरान गुंडों ने सनातनी भक्तों पर हमला कर दिया।”

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में आरोप लगाते हुए कहा है, “गुंडों ने पहले सड़क को जाम करते हुए रथ को बाधित कर दिया। जबरदस्ती हाथापाई की और फिर लोहे की छड़ों, तलवारों और डंडों से श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया। योजनाबद्ध तरीके से किए गए इस हमले के बारे में भक्तों को कोई जानकारी नहीं थी। हमले में कई सनातनियों को गंभीर चोटें आईं हैं। अंदाजा लगाइये, प्रशासन ने क्या किया होगा?”

अधिकारी ने अगले ट्वीट में कहा है, “पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया। TMC विधायक ने ‘गुंडों’ से मुलाकात की, लेकिन भक्तों से मिलने की जहमत नहीं उठाई। ममता बनर्जी की पुलिस ने विरोध करने के लिए एकजुट हुए भक्तों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज भी किया। क्या पश्चिम बंगाल की कानून और व्यवस्था इतनी खराब है कि भक्त रथयात्रा भी नहीं निकाल सकते?”

बता दें, इससे पहले पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने आरोप लगाते हुए कहा था कि तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के समर्थकों ने उनके काफिले पर हमला किया था। उन्होंने कहा था कि हमला करने वालों के हाथों में TMC का झंडा था।

सजदा खालिक को, इब्लीस से याराना भी… हज के बाद वैष्णो देवी के दरबार में SRK को देख भड़के मुस्लिम कट्टरपंथी, कहा – फ्लॉप होगी ‘पठान’ फिल्म

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) की फिल्म ‘पठान’ (Pathaan) 25 जनवरी, 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म की रिलीज से पहले अभिनेता मक्का में उमराह करने के बाद (Mata Vaishno Devi) माता वैष्णो देवी के दरबार पहुँचे। यहाँ एक्टर ने माता के आगे माथा टेका।

सोशल मीडिया पर उनके मंदिर पहुँचने के कई वीडियो सामने आए हैं, जहाँ कुछ लोग उनके ‘उमराह’ के बाद वैष्णो मंदिर पहुँचने की तारीफ कर रहे हैं। वहीं कुछ कट्टरपंथी उनके हिंदू मंदिर जाने से आक्रोशित हैं। अली बिन मुहम्मद लिखता है, “मजाक बना के रख दिया है मजहब को।”

शनामन लिखती है, “कुछ भी कर लो तुम्हारी हर फिल्म का विरोध होगा।”

ट्विटर पर ‘@Real_Immu’ नाम के अकाउंट ने अभिनेता के लिए लिखा कि सजदा खालिक को, इब्लीस से याराना भी। हश्र में किससे मोहब्बत का सिला माँगेगा? खान साहेब ने शाहरुख खान की वीडियो पर कमेन्ट किया, “बेगैरत।”

अब्बास कहता है, “पठान भी फ्लॉप होगी।”

ट्विटर पर ‘@seek_er__’ नाम के अकाउंट ने लिखा, “आगे क्या है, चर्च या गुरुद्वारा।”

दरअसल, यह कोई पहला मामला नहीं है, जब शाहरुख को मुस्लिम कट्टरपंथियों ने निशाने पर लिया हो। इससे पहले 1 दिसंबर, 2022 को शाहरुख खान की मक्का में उमराह (Umrah) करते हुए कई तस्वीरें सामने आई थीं। जैसे ही मक्का में उमराह करते शाहरुख खान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तो मुस्लिम कट्टरपंथियों ने बॉलीवुड अभिनेता को गाली देना और उन पर सवाल उठाना शुरू कर दिया।

अमाल ने कहा था, “शाहरुख मूर्तियों की पूजा करता है। वह अपने घर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ रखता है। इस्लाम में यह सबसे बड़ा पाप माना जाता है।” वहीं रिज नाम के ट्विटर अकाउंट ने कहा था कि शाहरुख खान की बॉलीवुड से कमाई इस्लाम के अनुसार हराम है, ऐसे में उसका उमराह कैसे कबूल किया जाएगा।

गौरतलब है कि अगस्त 2022 में शाहरुख खान द्वारा गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान की मूर्ति की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करने पर उनके मजहब के कुछ लोग भड़क उठे और उन्हें खरी-खोटी सुनाई थी। तैमूर उल हसन नामक ने लिखा था, “मुस्लिमों के लिए कितनी शर्म की बात है सर। आपको मुस्लिम या हिंदू होने के लिए किसी एक मजहब को चुनना चाहिए। आपको पता होना चाहिए कि मुस्लिम केवल अल्लाह की इबादत करते हैं और पैगंबर मुहम्मद मानवता के जीवन को बदलने के लिए आए थे। पैगंबर ने हमें सुंदर मजहब दिया।”

वर्क फ्रंट की बात करें तो शाहरुख खान कई वर्षों के बाद ‘पठान’ के साथ बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे हैं। इस फिल्म में उनके साथ जॉन अब्राहम और दीपिका पादुकोण भी मुख्य भूमिका में हैं। इसके अलावा वह नयनतारा के साथ ‘जवान’ और तापसी पन्नू के साथ राजकुमार हिरानी की फिल्म ‘डंकी’ में भी लीड रोल में हैं।

जिसकी ‘हत्या’ में पति को UP में हुई जेल, वह 6 साल बाद ‘दूसरे पति’ के साथ राजस्थान में मिली: पीड़ित ने कहा- थर्ड डिग्री इस्तेमाल कर पुलिस ने ‘जुर्म’ कबूल करवाया

2015 में मथुरा की एक महिला की हत्या के आरोप में उसके पति को 18 महीने जेल में रहना पड़ा। पति का दोस्त भी नौ महीने जेल में रहा। अब वह महिला दूसरे पति के साथ राजस्थान के दौसा में मिली है।

महिला 2015 में गायब हो गई थी। उसके पिता ने हत्या का केस दर्ज करवाया था। महिला के पति और उसके दोस्त की गिरफ्तारी हुई थी। जमानत मिलने के बाद से पति और उसके दोस्त ने महिला की खोजबीन शुरू की। करीब सात साल बाद महिला के राजस्थान में होने की बात सामने आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2015 में वृंदावन में रहने वाली आरती नामक महिला ने घर से भागकर राजस्थान के दौसा में रहने वाले सोनू सैनी से शादी की थी। शादी के कुछ दिनों बाद ही वह गायब हो गई। इसके बाद, आरती के पिता ने वृंदावन कोतवाली थाने में अपनी बेटी के गुम होने की एफआईआर दर्ज कराई। एफआईआर में, सोनू सैनी, गोपाल सैनी और अरविंद पाठक पर आरोप लगाए गए थे।

इसके बाद, पुलिस ने जाँच शुरू करते हुए, सोनू सैनी और गोपाल सैनी को गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि, अरविंद पाठक पुलिस के हाथ नहीं लगा। इसी दौरान वृंदावन कोतवाली पुलिस को मथुरा जिले के नहरी क्षेत्र में एक महिला का शव मिला। आरती के पिता ने शव की पहचान अपनी बेटी के रूप में ही। इसके बाद, करीब 6 महीने बाद आरती के पिता ने सोनू सैनी सहित अन्य लोगों पर आरती की हत्या करने और शव को छिपाने के लिए फेंकने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई।

एफआईआर दर्ज होने के बाद, वृंदावन कोतवाली पुलिस ने राजस्थान के दौसा जाकर सोनू सैनी और गोपाल सैनी को गिरफ्तार किया। साथ ही, हत्या का आरोपित बताते हुए धारा 302 (हत्या) के मामले में कोर्ट में चार्जशीट भी पेश कर दी। इसके बाद, सोनू और गोपाल जेल में बंद थे।

हालाँकि, इसके बाद उन लोगों को इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत मिल गई। जमानत पर बाहर आने के बाद, दोनों ने मिलकर आरती की तलाश शुरू की। तलाशी के दौरान सोनू और गोपाल, दौसा के बालाजी थाना क्षेत्र के विशाला गाँव पहुँचे, जहाँ उन्होंने पाया कि आरती अपने परिवार (दूसरे पति) के साथ रह रही है।

इसके बाद, उन लोगों ने स्थानीय पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने मथुरा पुलिस को पूरे मामले से अवगत कराया। फिर, मथुरा पुलिस ने विशाला गाँव पहुँचकर आरती को हिरासत में लिया और कोर्ट में पेश किया है। फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले कि जाँच करते हुए आरती से पूछताछ करने के साथ ही उसके पिता की तलाश कर रही है। साथ ही, यह जानने की कोशिश कर रही है कि आरती के पिता ने किस आधार पर हत्या का आरोप लगाया था।

वहीं, इस मामले में जेल में बंद रहे सोनू सैनी ने कहा है कि शादी के कुछ दिन बाद ही आरती ने उससे संपत्ति अपने नाम करने और 50 हजार रुपए व कार की माँग की थी। उसने मना कर दिया था। इसके बाद, घर छोड़कर भाग गई थी। उसने अपनी ओर से उसकी तलाश की थी। चूँकि, आरती ने कहा था कि वह घर से भागकर आई है। इसलिए, उसने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी।

यही नहीं, पीड़ित सोनू ने कहा है कि उसने खुद को बेगुनाह बताया था। लेकिन पुलिस ने थर्ड डिग्री टॉर्चर कर गुनाह कबूल करने के लिए कहा था। इसलिए, उसने गुनाह कबूल कर लिया था। सोनू ने अपने साथ हुए अन्याय को लेकर सीबीआई जाँच की भी माँग की है।

अलीगढ़ से भी आया था ऐसा ही मामला

इसी तरह का एक मामला हाल में अलीगढ़ से सामने आया था। 2015 में अलीगढ़ से गायब हुई एक नाबालिग लड़की की हत्या के आरोप में उसके गाँव के विष्णु गौतम को जेल जाना पड़ा था। सात साल बाद वह लड़की आगरा में जिंदा मिली है। इतना ही नहीं उसकी शादी हो चुकी थी और दो बच्चे भी हैं।

इस्लामी कट्टरपंथ के बाद सेक्स से भी सकते में फ्रांस: एड्स-STI रोकने के लिए युवाओं को FREE कंडोम, नाबालिगों के लिए भी आएगी स्कीम

इस्लामी कट्टरपंथ के उभार से चिंतित फ्रांस ने हाल ही में इस पर अंकुश के लिए कई कठोर फैसले लिए हैं। इसी तरह असुरक्षित सेक्स भी उसकी चिंता का नया सबब बनकर उभरा है। यौन रोगों से बचाव के लिए सरकार ने युवाओं को अब फ्री में कंडोम मुहैया कराने का फैसला किया है। आने वाले दिनों में इस सुविधा का लाभ नाबालिगों को भी मिल सकता है।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने युवाओं को मुफ्त में कंडोम बाँटने का फैसला किया है। फ्रांस सरकार का कहना है कि देश में बढ़ते यौन रोगों से बचाव के लिए उसने ये कदम उठाया है। इसकी शुरुआत नए साल, यानी 1 जनवरी, 2023 से होगी। मैक्रों के मुताबिक, 18-25 साल के युवाओं को फ्री में कंडोम बाँटा जाएगा। बता दें कि इस्लामी कट्टरपंथ से जूझ रहे फ़्रांस ने कई मस्जिदों को बंद करने समेत कई कड़े फैसले लिए हैं।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने युवाओं के साथ एक एक स्वास्थ्य चर्चा में गुरुवार (8 दिसंबर, 2022) को यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि गर्भ-निरोधन की दिशा में यह एक छोटी सी क्रांति है। राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि सरकार 18-25 साल के युवाओं के लिए मेडिकल की दुकानों पर पर मुफ्त कंडोम मुहैया कराएगी। उनका कहना है कि इस फैसले की वजह फ्रांस में एड्स और दूसरे सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (एसटीआई) को फैलने से रोकना है। साथ ही इस फैसले का उद्देश्य अनचाही प्रेग्नेंसी पर भी लगाम लगाना भी है।

फ्रांसीसी सरकार ने इस साल 25 साल तक की सभी लड़कियों और महिलाओं के लिए गर्भ-निरोधक फ्री कर दिए थे। इसका उद्देश्य यह था कि कोई भी महिला पैसे की कमी की वजह से गर्भ-निरोधक से वंचित ना रहे। इसका फायदा करीब 30 लाख लड़कियों और महिलाओं को मिल रहा है। इससे पहले 18 साल से कम उम्र की लड़कियों को ही गर्भ-निरोधक फ्री में मिलते थे।

ऐसा नहीं है कि सरकार ने एसटीआई को रोकने के लिए अभी कदम उठाया है। फ़्रांस की सरकार ने साल 2018 से ही लोगों को कंडोम के पैसे वापस करना शुरू किया था। हालाँकि, इसके लिए डॉक्टर की मंजूरी ज़रूरी होती थी और इसके बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली (NHS) द्वारा कंडोम लेने वाले शख्स को पैसा वापस लौटाया जाता था।

मैक्रों की इस संबंध में घोषणा के बाद एक फ्रांसीसी टीवी एंकर ने राष्ट्रपति से शुक्रवार (9 दिसंबर, 2022) को सोशल मीडिया पर सवाल किया कि मुफ्त कंडोम नाबालिगों के लिए क्यों नहीं उपलब्ध है, जिसके बाद राष्ट्रपति ने भी इस बाबत कार्यक्रम को विस्तार देने पर सहमती जताई। मैक्रों ने एक सेल्फी वीडियो में कहा, “चलिए इसे भी करते हैं।” उन्होंने कहा कि कई नाबालिगों भी यौन संबंध बनाते हैं। उन्हें भी खुद को बचाने की जरूरत है।”

उल्लेखनीय है कि 2020 और 2021 में फ्रांस में एसटीआई दर में 30 फीसदी का इजाफा हुआ था। मैक्रों ने भी इस पर चिंता जाहिर की है। मैक्रों ने कहा था कि सेक्सुअल एजुकेशन को लेकर फ्रांस के सामने चुनौतियाँ हैं। उन्होंने स्वीकार किया था कि इस विषय में फ़्रांस का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता थ्योरी से अलग होती है।

FIFA में जिस इस्लामी मुल्क की जीत से खुश हो रहा ‘उम्माह’, वहाँ बुर्का-हिजाब पर पूर्ण बैन: मोरक्को के फुटबॉलर की पत्नी को देख आँख फोड़ लेंगे कट्टरपंथी

क्या आपको पता है कि जिस मोरक्को की जीत को दुनिया भर के मुस्लिम ‘उम्माह’ की दिशा में कदम बता रहे हैं, वहाँ पर बुर्के पर प्रतिबंध है? जहाँ एक तरफ भारत में भी कई मुस्लिम नेताओं और एक्टिविस्ट्स ने मोरक्को की जीत पर ऐसे ख़ुशी जताई, जैसे कि वो उनकी जन्मधरती ही हो। हालाँकि, मोरक्को के फुटबॉलर अशरफ हकीमी और उनकी पत्नी स्पेनिश अभिनेत्री हिबा अबूक की तस्वीरें देख कर भारत में बुर्का-हिजाब की वकालत करने वालों को गहरा धक्का लगेगा। अभिनेत्री हिबा अबूक जहाँ 36 साल की हैं, उनके फुटबॉलर पति उनसे 12 साल छोटे हैं।

लेखिका तसलीमा नसरीन ने भी इन दोनों की तस्वीरें शेयर कर के बताया कि कैसे स्टार फुटबॉलर की पत्नी ने न तो बुर्का पहन रखा है और न ही हिजाब। अशरफ हकीमी को ‘मोरक्को का डेविड बेकहम’ भी कहा जाता है। उनकी पत्नी को दुनिया की सबसे खूबसूरत अभिनेत्रियों में से एक गिना जाता है। उन्होंने ही वो जिताऊ पेनल्टी लगाई थी, जिसके कारण स्पेन फीफा वर्ल्ड कप 2022 से बाहर हो गया। ‘Vogue’ के अरबिया संस्करण के ये दोनों फोटोशूट भी करा चुके हैं।

जनवरी 2017 में ही मोरक्को की सरकार ने बुर्का बनाने, खरीदने-बेचने और इसके प्रचार-प्रसार तक पर रोक लगा दी थी। जिस देश में 99% से भी अधिक जनसंख्या सुन्नी मुस्लिमों की हो, वहाँ इस प्रकार का निर्णय लिया गया। लेकिन, भारत में मुस्लिमों के ठेकेदार कहते हैं कि वो स्कूल-कॉलेज में भी बुर्का-हिजाब चाहते हैं। मोरक्को की सरकार का तर्क था कि बुर्का की आड़ में आतंकियों और अपराधियों ने अपनी करतूतों को अंजाम देना शुरू कर दिया था, इसीलिए सुरक्षा चिंताओं के कारण इसे प्रतिबंधित किया गया।

चोरी से लेकर कई बड़े अपराधों में भी बुर्का के इस्तेमाल की खबरें सामने आई थीं। लेकिन, ये फैसला कट्टर ‘सलाफी इस्लाम’ को भी ध्यान में रखते हुए लिया गया, जिसके कारण खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन ISIS वहाँ पाँव पसार रहा था। मोरक्को में हर साल 1 करोड़ के आसपास पर्यटक आते हैं, ऐसे में राजस्व के सबसे बड़े साधन को वो लोग हाथ से नहीं जाने देंगे। मोरक्को में वैसे भी काफी कम संख्या में महिलाएँ बुर्का या हिजाब का इस्तेमाल करती थीं।

भारत में जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह भी मोरक्को की जीत से खासे खुश नज़र आए। क्या जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में वो सिर्फ मुस्लिमों के सीएम हुआ करते थे या फिर वहाँ बसे हिन्दुओं, बौद्धों और ईसाइयों के भी? सवाल ये है कि मोरक्को ने जब तरक्की, विकास और पर्यटकों को लुभाने को प्राथमिकता पर रखा, तो फिर भारत के मुस्लिम क्यों चाहते हैं कि यहाँ उन्हें कट्टरवादी मानसिकता के खुलेआम प्रदर्शन की अनुमति मिले?

सबसे बड़ी बात तो ये है कि मोरक्को में जब हिजाब-बुर्का को प्रतिबंधित किया गया, तब वहाँ की जनता ने कोई विरोध प्रदर्शन नहीं किया। ऐसा कुछ नहीं हुआ, जिससे इस निर्णय की समीक्षा करनी पड़ी हो। हाँ, कुछ सलाफी मुस्लिमों ने ज़रूर इसका विरोध किया। आतंकियों के हमदर्दों की मोरक्को सरकार ने एक न सुनी। महिलाओं के संगठनों ने इस बैन का स्वागत किया। महिला अधिकार की पैरवी करने वालों ने इस फैसले का स्वागत किया। भारत के मुस्लिम मोरक्कों की जीत का जश्न तो मना रहे हैं, लेकिन उससे ये सब सीखने से मना कर रहे हैं।

‘मोदी की हत्या के लिए तत्पर रहो’: कॉन्ग्रेस के पूर्व मंत्री का Video वायरल, कभी राहुल गाँधी की शादी पर कहा था- तुम्हारी बहू-बेटी हो तो ले आओ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्द बोलना कॉन्ग्रेस नेताओं के लिए कोई बड़ी बात नहीं है। कॉन्ग्रेसी अक्सर पीएम मोदी के लिए अपनी नफरत व्यक्त करते हुए भूल जाते हैं कि उन्हें कम से कम पीएम पद का सम्मान करना चाहिए। आज एक वीडियो सोशल मीडिया पर फिर सामने आई है जिसमें मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस नेता राजा पटेरिया नजर आ रहे हैं और जनता से पीएम मोदी की हत्या की बात करने को कह रहे हैं।

भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय द्वारा शेयर की गई वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता कहते सुनाई पड़ते हैं, “मोदी चुनाव खत्म कर देगा, वो धर्म, जाति, भाषा के आधार पर बाँट देगा। दलितों का, वनवासियों का और अल्पसंख्यकों का भावी जीवन खतरे में है। संविधान यदि बचाना है तो मोदी की हत्या करने पर तत्पर रहो।” वीडियो में साफ सुन सकते हैं कि पहले पटेरिया ने हत्या की बात को साफ कहा और उसके बाद उसे संभालते हुए बोले, “मोदी की हत्या का मतलब मोदी को हराने के लिए तैयार रहो। कार्यकर्ता की उपेक्षा नेता की उपेक्षा होती है।”

जानकारी के मुताबिक पन्ना जिले के पवई में कॉन्ग्रेस नेता अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। वहीं उन्होंने पीएम मोदी की हत्या की बात की। जब बयान वायरल हो गया और लोग कार्रवाई की माँग करने लगे तो उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत ढंग से पेश किया जा रहा है, वो तो सिर्फ मोदी को चुनावों में हराने की बात कर रहे थे।

नवभारत टाइम्स से बात करते हुए वह बोले, “मैं गाँधी को मानने वाला शख्स हूँ। मैं हत्या की बातें नहीं कर सकता। बयान तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है।” उनकी सफाई से अंसतुष्ट मध्य प्रदेश सीएम शिवराज सिंह चौहान ने बयान पर संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि ऐसी बयानबाजी करने वालों को सरकार नहीं बख्शेगी। वहीं गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि पटेरिया का बयान गाँधी वाली कॉन्ग्रेस का नहीं है। ये इटली कॉन्ग्रेस का है। इसलिए इस मामले में तत्काल केस दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

बता दें कि राजा पटेरिया प्रदेश में कॉन्ग्रेस काल के वक्त मंत्री रहे थे। वह मोदी की हत्या पर बयान देने से पहले पुलिस को धमकी देने की वजह से चर्चा में आए थे। उन्होंने पुलिस अधिकारी से कहा था अगर आदिवासियों की बात नहीं मानोगे तो आदिवासियों को नक्सली बना देंगे। नक्सली बनाने के अपने बयान पर भी पटेरिया सफाई भी दी थी। उन्होंने अपना बयान ये कहकर जायज ठहराया था कि आदिवासियों के साथ अन्याय हो रहा है। उनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं, महिलाओं के साथ मारपीट चल रही है, इसलिए उन्होंने बोल दिया आदिवासियों के साथ इस तरह का अन्याय ही नक्सलवाद को जन्म देता है।

इसके अलावा उन्होंने राहुल गाँधी की शादी के सवाल पर भी विवादित बात कही थी। उन्होंने कहा था कि अगर राहुल गाँधी ने शादी नहीं की तो भाजपा वालों के पेट में क्यों दर्द हो रहा है। वह बोलते दिखे थे, “मोदी जी आपके परिवार में कोई अच्छी बच्ची हो तो प्रपोज करो, शायद उसको ठीक लगे। हमारा राष्ट्रीय अध्यक्ष कहता है कि पहले राष्ट्र है… इसमें क्या दिक्कत है। तुम्हारे पेट में क्यों दर्द है, तुम्हारी बहू-बेटी हो तो ले आओ।”

इस्लामी टोपी-बुर्के में आए श्री राम को साथ लेकर गए: रामपुर के 80 मुस्लिमों ने की घर वापसी, दावा- आजम खान के खौफ से कबूला था इस्लाम

8 दिसंबर 2022 को उत्तर प्रदेश के रामपुर को पहला हिंदू विधायक मिला है। ऐसा देश की स्वतंत्रता के बाद पहली बार हुआ है। 20 चुनावों के बाद यह अवसर आया। अब रामपुर जिले के करीब एक दर्जन परिवारों के 80 सदस्यों ने घर वापसी की है। इनका दावा है कि आजम खान के डर से इन्होंने इस्लाम कबूला था।

मुजफ्फरनगर के एक आश्रम में इन लोगों की घर वापसी हुई। रविवार (11 दिसंबर 2022) को शुद्धिकरण के बाद महाराज यशवीर ने इनको फिर से हिंदू धर्म में लौटाया। दलित समाज से आने वाले इन लोगों ने गंगाजल पी कर गायत्री मंत्र का उच्चारण किया। इस्लामी टोपी और बुर्के पहुँचे ये लोग घर वापसी के भगवान श्री राम की तस्वीरों के साथ अपने घर लौटे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घर वापसी का यह कार्यक्रम मुजफ्फरनगर के बघरा ब्लॉक स्थित योग साधना आश्रम में सम्पन्न हुआ है। इसे सम्पन्न महराज यशवीर ने करवाया है। महराज यशवीर ने भी घर वापसी करने वाले सदस्यों पर आज़म खान के द्वारा अत्याचार किए जाने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन सभी 80 लोगों को लालच और धमकी देकर मुस्लिम बनाया गया था। घर वापसी करने वालों का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो वैदिक मंत्रों के बीच हवन करते दिखाई दे रहे हैं।

घर वापसी करने वालों के नाम अब हिन्दू धर्म के मुताबिक रखे गए हैं। मसलन इमराना अब कविता और फरजाना अब सविता नाम से जानी जाएँगी। कविता ने बताया कि उनके परिवार ही नहीं] बल्कि अन्य कई घरों को आज़म खान ने अपनी सरकार में बहुत तंग किया था। बताया यह भी जा रह है कि लोगों के घरों को भी तोड़ दिया गया था। सभी लोगों के मुताबिक आज़म के अत्याचारों से बचने के लिए उनके पास इस्लाम कबूल करना ही अंतिम विकल्प बचा था।

इमराना ने हिन्दू धर्म में वापसी कर खुद को बेहद खुश बताया। उन्होंने भी आज़म खान के गुर्गों पर इस्लाम कबूलने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने ने बताया कि आज़म की वजह से उनके पास बर्तन भी नहीं बचे थे। वहीं फरजाना से सविता बनीं महिला ने बताया कि आजम खान के दबाव में उन्हें इस्लाम कबूलना पड़ा था। उनकी जमीन-जायदाद तक छीन ली गई थी। इन सभी लोगों को घर वापसी के बाद भगवान राम की तस्वीरें दी गईं।

जानवर के मल को ‘अंडेनुमा गोला’ बताकर हुई सनसनी पत्रकारिता: कानपुर पुलिस के ट्वीट के बाद NBT के पत्रकार का बना मजाक

कानपुर के बिल्हौर के एक गाँव को लेकर नवभारत टाइम्स के एक पत्रकार ने हाल में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया। इस पोस्ट में दिखाया गया कि कैसे बिल्हौर के एक गाँव में अंडेनुमा गोले मिले हैं और ग्रामीण इसे लेकर अलग-अलग चर्चा कर रहे हैं। पत्रकार ने अपने ट्वीट में ये भी बताया कि पुलिस सूचना होने पर इसे  देखने आई थी और जाँच के बाद चौंकाने वाले खुलासे हुए।

पत्रकार का नाम सुमित शर्मा है। वह नवभारत टाइम्स के लिए काम करते हैं। उन्होंने यूपी पुलिस को टैग करके ये वीडियो डाली।  उन्होंने लिखा, “कानपुर के बिल्हौर के एक गाँव में मिले अंडेनुमा गोले… ग्रामीणों में तरह-तरह की चर्चा… पुलिस के पहुँचने पर हुआ चौंकाने वाला खुलासा।”

इस ट्वीट को चूँकि उन्होंने यूपी पुलिस को भी टैग किया था तो इस पर कानपुर पुलिस कमिश्नर की भी प्रतिक्रिया आई। उन्होंने वीडियो पर जो जवाब दिया उसके कारण अब पत्रकार का मजाक बन रहा है और कहा जा रहा है कि हर बात को सनसनी बनाकर नहीं पेश करना चाहिए।

दरअसल कानपुर पुलिस कमिश्नर ने कहा था, “कुछ भी संदिग्ध नहीं है, ये किसी जानवर का मल है।”

इस ट्वीट के आते ही प्रतिक्रियाओं की भरमार लग गई।  इकोनॉमिक टाइम्स की पत्रकार अनुराधा शुक्ला ने लिखा, “ये बहुत ज्यादा कमाल था।”

रतन लाल ने कहा, “मेरे दादाजी की मौत हो गई। मैं अर्थी को कंधो पर लेकर जा रहा हूँ। लेकिन  यह ट्वीट देखने के बाद अब हँसता हँसता जा रहा हूँ।”

विष्णु ने कहा, “शायद ये डायनासोर का मल होगा। मुझे नहीं लगता कि कोई जानवर इतना बड़ा ठोस, गोलाकार मल करता होगा।”

एक यूजर ने कानपुर पुलिस कमिश्नर से कहा, “आप तो खुलासा कर दिए। अभी तो साहब सनसनी बना ही रहे थे।”

1992 में मुंबई में हुआ दंगा, 2004 में भगोड़ा घोषित हुआ, अब गोरेगांव से पकड़ा गया तबरेज अजीम खान: पहचान बदलकर रह रहा था

तबरेज अजीम खान को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वह 18 साल से फरार चल रहा था। वह 1992 के दंगों में आरोपित है। वह मंसूरी के नाम से भी जाना जाता है। 2004 में अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित किया था। गोरेगांव से उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि रविवार (11 दिसंबर 2022) को की गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तबरेज खान को जिस मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया है, उसमें साल 1992 में 9 आरोपितों पर IPC की अलग-अलग धाराओं में FIR दर्ज हुई थी। इन सभी में से 2 आरोपित ट्रायल के दौरान कोर्ट से बरी हो गए थे। एक अन्य आरोपित की मौत हो गई थी। इस बीच तबरेज फरार हो गया था। रिपोर्ट के अनुसार तबरेज नाम और पहचान बदलकर गोरगांव में रह रहा था। रियल एस्टेट एजेंट के तौर पर काम कर रहा था। इस संबंध में सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पहले उस पर नजर रखनी शुरू की। फिर छापेमारी कर उसे धर दबोचा।

इससे पहले 4 नवम्बर को मुंबई 1992 सीरियल ब्लास्ट मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया था कि हिंसा के दौरान 60 पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिला था, जबकि 108 परिवारों का कुछ पता नहीं चल पाया था। इसके बाद कोर्ट ने बचे परिवारों को भी मुआवजा देने के आदेश दिए थे। इस मुआवजे के लिए कोर्ट ने सरकार को 9 माह का समय भी दिया था।

गौरतलब है कि साल 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद देश के तमाम हिस्सों में कट्टरपंथियों ने हिंसा शुरू कर दी थी। इसी हिंसा की चपेट में मुंबई भी आ गई थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक सितम्बर 1992 और जनवरी 1993 के बीच इस हिंसा में लगभग 900 लोग मारे गए थे और 3000 लोग घायल हुए थे। इसी हिंसा में 170 लोग घायल भी हुए थे और करोड़ों रुपए की सार्वजानिक और निजी सम्पत्ति का नुकसान हुआ था।