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‘यूट्यूब पर अश्लील AD देख भटका ध्यान, मुझे ₹75 लाख मुआवजा दिलाओ’: परीक्षा में फेल होने के बाद SC पहुँचा युवक, कोर्ट ने ठोका ₹25 हजार का जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट में एक युवक ने याचिका दायर कर कहा था कि यूट्यूब (Youtube) में अश्लील विज्ञापन देखने के कारण उसका ध्यान भंग हुआ और इससे वह परीक्षा में फेल हो गया। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में यूट्यूब से 75 लाख रुपए के मुआवजे की भी माँग की थी। हालाँकि, कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए उस पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। याचिकाकर्ता की पहचान, आनंद किशोर चौधरी निवासी मध्य प्रदेश के रूप में हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सजंय किशन कौल और जस्टिस अभय एस. ओक की बेंच ने शुक्रवार (9 दिसंबर 2022) को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा, “यह अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई अब तक की सबसे ‘खराब’ याचिकाओं में से एक है।”

जस्टिस कौल ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा, “आपको किस बात का मुआवजा चाहिए। आप इंटरनेट देखते हैं इसलिए या फिर इंटरनेट देखने की वजह से एग्जाम नहीं पास कर पाए, इसलिए मुआवजा चाहिए? क्योंकि विज्ञापन में सेक्सुअल कंटेंट था, इसलिए आप अदालत से मुआवजा लेने पहुँच गए। ये तो आपकी मर्जी है कि आप विज्ञापन देखें।”

सुनवाई के दौरान जस्टिस कौल ने कहा, “विज्ञापन में यौन सामग्री था, इससे आपकी अटेंशन डायवर्ट हो गई इसलिए आप कोर्ट में बोल रहे हैं मुआवजा दे दो।” कोर्ट ने कहा, “आपको विज्ञापन नहीं देखना है तो ना देखें इस तरह की याचिका को दायर करना अदालत के कीमती वक्त को बर्बाद करने जैसा है। अब आपको अपने आचरण के कारण जुर्माना भरना होगा।”

याचिकायकर्ता को फटकारते हुए कोर्ट ने उस पर 1 लाख का जुर्माना लगाया। हालाँकि 1 लाख रुपए के जुर्माने की बात सुनने के बाद याचिकाकर्ता ने प्रार्थना करते हुए कहा, “न्यायधीश महोदय मेरे माता-पिता मजदूरी करते हैं, मुझे माफ कर दीजिए।” इस पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कौल ने कहा, “आप को लगता है कि प्रचार के लिए जब चाहें इधर आ सकते हैं। जुर्माना कम कर दूँगा, लेकिन माफ नहीं करूँगा।” इसके बाद उन्होंने, जुर्माने की राशि घटाकर 25000 रुपए करने का आदेश जारी कर दिया।

याचिकाकर्ता ने बेंच से कहा, “मेरे पास रोजगार नहीं है, मैं जुर्माना नहीं दे पाऊँगा।” तब, जस्टिस कौल ने कहा, “रोजगार नहीं हैं तो हम रिकवरी करेंगे, और क्या।”

दरअसल, याचिकाकर्ता आनंद किशोर चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 19 (2) के तहत याचिका दाखिल कर कहा था कि यूटयूब पर अश्लील विज्ञापन के चलते उसका ध्यान भंग हुआ और वह मध्य प्रदेश पुलिस में भर्ती की परीक्षा पास नहीं कर पाया। इसके एवज में उसे यूट्यूब द्वारा 75 लाख का मुआवजा दिया जाना चाहिए। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में युवक ने सोशल मीडिया पर ऐसे विज्ञापनों (अश्लीलता) पर रोक लगाने की भी माँग की थी।

‘कांतारा फिल्म देखकर हिंदू संस्कृति का समर्थन कर रहे हो’: कर्नाटक में मूवी देखने गए मुस्लिम स्टूडेंट कपल से मारपीट, बिना फिल्म देखे भगाया, मामला दर्ज

कर्नाटक (Karnataka) में सुपरहिट मूवी कांतारा (Kantara) देखने गए एक मुस्लिम युवक को उसके ही समुदाय के कुछ लोगों ने रोक लिया। जब युवक ने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है।

मामला कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के सुलिया शहर का है। पुत्तुर स्थित संतोष सिनेमा हॉल में बुधवार (7 दिसंबर 2022) को मोहम्मद इम्तियाज ऋषभ शेट्टी की सुपरहिट मूवी कांतारा देखने के लिए गया था। उसके साथ एक लड़की भी थी। इसी दौरान उसे मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने उसे रोक दिया और फिर उसके साथ मारपीट की।

सामने आए वीडियो में ग्रुप के लोग इम्तियाज के साथ बहस करते दिख रहे हैं। वहीं, कुछ लोग उसके साथ गई लड़की के साथ बहस कर रहे थे। मामला जब बढ़ गया तो संतोष सिनेमा हॉल के मालिक ने इसकी शिकायत पुलिस में की। वहीं, एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने संज्ञान लिया और कपल को शिकायत दर्ज कराने के लिए मनाया।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि लड़का और लड़की विद्यार्थी थे और केरल के कॉलेज केवीजी संस्थान में पढ़ाई कर रहे हैं। दोनों संतोष थिएटर में फिल्म देखने के लिए आए थे। लड़की को हिजाब में देखकर पास के ही एक दुकानदार ने मुस्लिम युवक को रोका। इसके बाद कई लोग आ गए और दोनों को फिल्म देखने के लिए पूछताछ की।

पुलिस में दी गई शिकायत के अनुसार, हमलावरों ने कहा कि वे फिल्म देखकर हिंदू संस्कृति का समर्थन कर रहे हैं। इस घटना और विवाद के बाद दोनों कपल बिना फिल्म देखे ही थिएटर से वापस लौट आए। पीड़ित युवक बंटवाल तालुक के बी मुडा गाँव का रहने वाला है।

सुलिया पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर के अनुसार, “हमें सोशल मीडिया के माध्यम से घटना की जानकारी मिली है। दंपति ने शिकायत दर्ज नहीं की, लेकिन हमने उन्हें ट्रैक किया और शिकायत दर्ज करने के लिए कहा। उनकी शिकायत के आधार पर हमने एक प्राथमिकी दर्ज की है और हम संदिग्ध की तलाश कर रहे हैं।”

पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 341, 323 (हमला), 504 (जानबूझकर अपमान) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है।

‘मेरे 4 बच्चे नहीं होते अगर कॉन्ग्रेस बिल ले आती…’ : जनसंख्या नियंत्रण पर बोले रवि किशन, कहा- अब सॉरी फील करता हूँ

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गोरखपुर से सांसद रवि किशन ने जनसंख्या नियंत्रण कानून के संबंध में बड़ा ही रोचक बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर कॉन्ग्रेस पहले जनसंख्या नियंत्रण बिल लेकर आई होती तो वह चार बच्चे नहीं करते। उन्होंने कहा की कॉन्ग्रेस ने देश पर लंबे समय तक शासन किया। इस दौरान पार्टी को इसे लेकर जागरूकता फैलानी चाहिए थी।

रवि किशन ने कहा, “मैं इस कार्यक्रम से निकलकर सीधा पार्लियामेंट में बिल पेश करने जा रहा हूँ।” आजतक के एक कार्यक्रम में रवि किशन से जब यह पूछा जाता है कि उनके चार बच्चे हैं और वह इसे कैसे डिफेंड करेंगे, वीडियो के 20:00 मिनट में उन्हें कहते सुना जा सकता है, ”मेरे चार बच्चे हैं और मैंने उनकी परवरिश की है। उनके परवरिश के टाइम मैंने काफी स्ट्रगल किया। मेरी पत्नी लंबी और छरहरी थी। हर बच्चे के डिलीवरी के बाद वाइफ के शरीर को बिगड़ते हुए देखा। अब जब मैं उनको देखता हूँ तो सॉरी फील करता हूँ।”

इसके बाद एंकर चित्रा त्रिपाठी पूछती हैं कि चाहे जो कुछ भी हो, अब लोग तो यही बोलेंगे कि अपना तो कर लिए और दूसरे को रोक रहे हैं, इसपर रवि किशन कहते हैं, “मेरे 4 बच्चे हैं, ये कोई गलती नहीं है, अगर कॉन्ग्रेस ये बिल लेकर आती, अगर कानून बना होता, तो हम 4 बच्चे नहीं करते। इसके लिए कॉन्ग्रेस दोषी है। उनकी सरकार थी, हम जागरूक नहीं थे। उन्हें इस मामले में गंभीर होना चाहिए था।”

रवि किशन ने आगे कहा, “चीन और अन्य देशों ने जनसंख्या पर नियंत्रण किया। चीजों को सही किया। अगर हम अपने देश के संदर्भ में बात करें तो इस देश को चलाना बड़ी बात है। अगर कॉन्ग्रेस ने आने वाली पीढ़ियों को लेकर सोचा होता, तो हमें जो स्ट्रगल नहीं करना पड़ रहा है वह नहीं करना पड़ता।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ करते हुए कहा कि देश की आबादी 135 करोड़ है और प्रधानमंत्री जी 80 करोड़ की आबादी को कोविड के बाद मुफ्त में अनाज दे रहे हैं। इसके आलावा भी कई सारी योजनाओं से लोगों को लाभ पहुँचाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “अब चीजें सही हो रही हैं। देश में फाइटर हेलिकॉप्टर बन रहा है। सर्जिकल स्ट्राइक किया जा रहा है। हम आईएनएस विक्रांत बना रहे हैं। जीडीपी में हमने ब्रिटेन को पीछे छोड़ दिया है। कोरिडोर भी बन रहा है तो एम्स भी बन रहा है। प्रभु राम का मंदिर भी बन रहा है तो सड़कें भी बन रही हैं।” इसी बीच जब वहाँ बैठे दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी ने जब रवि किशन के चार बच्चे होने को गलती बताया तो रवि किशन ने फिर कहा यह गलती नहीं है। इसको गलती नहीं कह सकते हैं। कॉन्ग्रेस अगर बिल लाती तो ऐसा होता ही नहीं।

कोर्ट में ‘तारीख-पे-तारीख’ का कारण वकीलों की हड़ताल: सुप्रीम/हाई कोर्ट भी नहीं ले पाते कड़े फैसले… सलमान खुर्शीद ने ‘खुल के’ में बताई वजह

‘दामिनी’ फिल्म का प्रसिद्ध डायलॉग ‘तारीख-पे-तारीख’ आज के दौर में अदालत की सच्चाई है। भारत की अदालतों में वकीलों ने हड़ताल-पे-हड़ताल करके न्याय प्रणाली को बाधित करने का काम किया है। यह देश में पाँच करोड़ लंबित मामलों में ‘तारीख-पे-तारीख’ के प्रमुख कारणों में से एक है।

वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने मॉडरेटर मनोज रघुवंशी के साथ वकीलों की हड़ताल के जटिल मुद्दे का समाधान खोजने के लिए रविवार (4 दिसंबर 2022) को ‘खुल के’ मंच पर ऑनलाइन राउंडटेबल चर्चा की।

सुप्रीम कोर्ट ने हालाँकि बार-बार कहा है कि वकील हड़ताल पर नहीं जा सकते हैं, लेकिन ये निर्देश ‘हड़तालों’ को रोकने में सफल नहीं हो रहे। यह न्याय में देरी के शिकार करोड़ों निर्दोष भारतीयों के लिए एक अभिशाप की तरह है। इस राउंडटेबल चर्चा से ठीक दस दिन पहले गुजरात, तेलंगाना और उत्तराखंड में वकीलों ने काम करना बंद कर दिया था।

सलमान खुर्शीद को यह बताया गया कि उत्तराखंड के तीन जिलों में मौजूद अदालतों में वकील बीते 35 साल से हर शनिवार हड़ताल कर रहे हैं। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने इन हड़तालों को अवैध करार दिया था।

यह मामला जब सुप्रीम कोर्ट के सामने आया था तो कोर्ट ने काफी सख्त टिप्पणी की थी। कई बार नेपाल में भूकंप, पाकिस्तान के एक स्कूल में बम विस्फोट, श्रीलंका के संविधान में संशोधन जैसे ‘मामूली’ वजहों से हड़ताल किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे ‘मजाक’ करार दिया था और उच्च न्यायालय के फैसले की पुष्टि की थी।

वकीलों की हड़ताल पर ‘खुल के’ चर्चा

सलमान खुर्शीद ने खेद व्यक्त करते हुए बताया कि कभी-कभी हड़तालें हिंसक हो जाती हैं, जिसमें काम करने वाले बार के सदस्य के साथ ‘क्रूरता’ की जाती है। राउंडटेबल चर्चा में अधिवक्ता ने खुलासा किया कि कोर्ट द्वारा कई बार यह सिफारिश की गई है कि बार एसोसिएशन में एक शिकायत समिति होनी चाहिए, जो हड़ताल करने के लिए बार एसोसिएशन के हर प्रस्ताव की जाँच करे और उसे मंजूरी दे।

आश्चर्य जताते हुए अधिवक्ता ने सवालिया लहजे में बात आगे बढ़ाई कि क्या ये हड़ताल इसलिए किए जाते हैं क्योंकि ‘कुछ सहयोगी’ काम नहीं करना चाहते हैं और सिर्फ ‘बहाने ढूंढते हैं’। सलमान खुर्शीद ने खुलासा किया कि यह सुनिश्चित करने के लिए कोई सिस्टम नहीं बनाया गया है कि ये हड़ताल न हो।

सलमान खुर्शीद ने कहा कि हालाँकि उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ वकीलों को इस संबंध में ‘अवमानना’ के लिए जेल भी भेजा है, लेकिन जब इसमें सैकड़ों या हजारों वकील शामिल होते हैं तो न्यायाधीशों के लिए स्थिति से निपटना मुश्किल हो जाता है। पैनलिस्ट ने जोर देकर कहा कि अदालतें अवमानना के लिए 5000 वकीलों को जेल नहीं भेज सकती हैं।

सलमान खुर्शीद ने स्पष्ट किया कि ‘कानूनी संस्कृति’ के तहत वकील ‘काली पट्टी’ बाँधकर अपना विरोध जता सकते हैं या एक घंटे ‘देर’ से काम शुरू कर सकते हैं, लेकिन प्रयास यह होना चाहिए कि ‘महत्वपूर्ण मामले’ प्रभावित न हों।

राउंडटेबल चर्चा में सलमान खुर्शीद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के शब्दों को दोहराया, जिसमें उन्होंने कहा था कि इन हड़तालों के वास्तविक शिकार न तो न्यायाधीश हैं, न ही वकील हैं, बल्कि निर्दोष ‘मुवक्किल’ हैं जो अक्सर बेहद गरीब होते हैं। खुर्शीद ने कहा कि निर्दोष लोगों के अलावा ‘न्याय की व्यवस्था भी शिकार’ हो जाती है।

खुल के‘ राउंडटेबल चर्चा के दौरान हड़तालों की उलझन को सुलझाने के मामले पर सलमान खुर्शीद को एक सुझाव जानदार लगा। हड़ताल के लिए सैकड़ों या हजारों वकीलों को जिम्मेदार ठहरा पाने में सुप्रीम कोर्ट की दिक्कत का समाधान है – केवल दो व्यक्तियों को जिम्मेदार ठहरा कर। ये दो होंगे – वो बार मेंबर जिसने हड़ताल के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किया और वो ‘रीडर’ या जिला न्यायाधीश का ‘पेशकार’ जिसने इस प्रस्ताव को ‘स्वीकार’ किया। इस सुझाव पर सलमान मान गए, लेकिन तुरंत एक शर्त जोड़ दी कि चीजें हमेशा ब्लैक एंड व्हाइट नहीं होतीं। कभी-कभी चीजें ‘धुंधली’ होती हैं।

सलमान खुर्शीद ने चर्चा का समापन यह सुझाव देकर किया कि ‘तारीख-पे-तारीख’ कार्यक्रम में उठाए गए इन सभी ‘मुद्दों’ की एक समिति द्वारा पूरी तरह से जाँच की जानी चाहिए। इसमें पुराने न्यायाधीश, नए न्यायाधीश, वकील और ‘आप लोग (‘खुल के’ के दर्शक) मिलकर एक समाधान खोजिए ।

‘1 साल में 87 लोगों की भर्ती, 20 का AAP से संबंध’ : DCW में अवैध नियुक्तियों को लेकर स्वाति मालीवाल पर शिकंजा कसा, दिल्ली कोर्ट ने आरोप तय करने का दिया आदेश

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की करीबी और दिल्ली महिला आयोग (DCW) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल की मुश्किलें बढ़ती दिख रहीं हैं। दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली महिला आयोग में नियुक्तियों में हुई अनियमितता के एक मामले में स्वाति मालीवाल समेत चार अन्य लोगों पर आरोप तय करने के आदेश दिए हैं।

कोर्ट ने क्या कहा

रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुवार (8 दिसंबर 2022) को हुई सुनवाई में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जस्टिस दिगविनय सिंह ने कहा है कि दिल्ली महिला आयोग में नियुक्तियाँ 6 अगस्त 2015 से लेकर 1 अगस्त, 2016 के बीच की गईं थी। स्वाति मालीवाल व अन्य आरोपितों पर पद के दुरुपयोग का शक काफी मजबूत है। साथ ही, प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री भी उपलब्ध है।

भ्रष्टाचार और नियुक्तियों में अनियमितता को लेकर कोर्ट ने कहा है कि महिला आयोग द्वारा अलग-अलग डेट्स पर बैठकें की गईं थीं। कोर्ट में पेश किए मीटिंग से जुड़े दस्तावेज, ‘मिनट्स ऑफ मीटिंग्स’ पर चारों आरोपितों के साइन थे। इसलिए, प्रथम दृष्टया यह संदेह होता है कि ये सभी नियुक्तियाँ इन्हीं आरोपितों द्वारा की गई थीं। कोर्ट ने यह भी कहा है कि किसी भी आरोपित ने ‘अवैध नियुक्तियों’ पर न तो आपत्ति दर्ज की और ना ही असहमति दिखाई बल्कि महिला आयोग की बैठकों में नियुक्ति को लेकर सर्वसम्मति से निर्णय लिए गए थे।

यही नहीं कोर्ट ने, स्वाति मालीवाल के अलावा महिला आयोग की तत्कालीन सदस्य प्रोमिला गुप्ता, सारिका चौधरी और फरहीन मलिक पर आईपीसी की धारा 120 (बी) और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13 (2), 13(1)(डी) के तहत आरोप तय करने के आदेश दिए हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा है कि महिला आयोग दिल्ली सरकार से रिक्त पदों पर नियुक्ति करने के लिए कह रहा था। लेकिन, दिल्ली सरकार ने समय पर नियुक्तियाँ नहीं कीं। इसका मतलब यह नहीं है कि महिला आयोग के पास मनमानी ढंग से नियुक्ति करने का अधिकार मिल गया था।

कोर्ट ने आगे कहा है, “प्रस्तुत तथ्य एक मजबूत संदेह पैदा करते हैं कि आरोपितों के कार्यकाल के दौरान विभिन्न पदों पर भर्ती मनमाने ढंग से की गई थी। इसमें, सभी नियमों और विनियमों का उल्लंघन किया गया था जिसमें करीबी और प्रियजनों को नियुक्त करते हुए सरकारी खजाने से वेतन दिया गया था।”

जस्टिस दिग विनय सिंह ने यह भी कहा है, “प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हो रहा है कि महिला आयोग में की गईं अधिकांश नियुक्तियाँ आरोपित व्यक्तियों/ आम आदमी पार्टी के करीबी और प्रिय लोगों को दी गई थीं। इस प्रकार, आरोपित व्यक्तियों द्वारा यह दावा नहीं किया जा सकता है कि उन्होंने अपने पद का गलत इस्तेमाल कर आर्थिक लाभ नहीं लिया, या ऐसा करने (नियुक्ति करने) के पीछे कोई गलत इरादा नहीं था।”

अगर ये मान लिया जाए कि दिल्ली महिला आयोग (DCW) एक स्वायत्त संस्था है और पद भी उसी ने बनाया है, या नियुक्ति की प्रक्रिया और शर्तें भी उसी ने बनाई हैं, तब भी प्रथम दृष्टया उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) (डी) के तहत केस बनता है। चूँकि, आरोपितों ने सरकार से पैसा लिया है इसलिए उनके खिलाफ केस चलाया जा रहा है।”

कोर्ट ने ‘अवैध’ नियुक्तियों पर जोर देते हए कहा है, “दिल्ली महिला आयोग में न तो मनमाने ढंग से पद बनाए जा सकते और ना ही अपने करीबियों के लिए नियमों का उल्लंघन किया जा सकता है। अपने लोगों के हितों को तरजीह और भाई-भतीजावाद भी एक तरह का भ्रष्टाचार है।”

भ्रष्टाचार और नियुक्तियों में अनियमितता को लेकर कोर्ट ने कहा है कि महिला आयोग द्वारा अलग-अलग डेट्स पर बैठकें की गईं थीं। कोर्ट में पेश किए मीटिंग से जुड़े दस्तावेज, ‘मिनट्स ऑफ मीटिंग्स’ पर चारों आरोपितों के साइन थे। इसलिए, प्रथम दृष्टया यह संदेह होता है कि ये सभी नियुक्तियाँ इन्हीं आरोपितों द्वारा की गई थीं। कोर्ट ने यह भी कहा है कि किसी भी आरोपित ने ‘अवैध नियुक्तियों’ पर न तो आपत्ति दर्ज की और ना ही असहमति दिखाई बल्कि महिला आयोग की बैठकों में नियुक्ति को लेकर सर्वसम्मति से निर्णय लिए गए थे।

स्वाति मालीवाल व अन्य पर क्या हैं आरोप

इस मामले में दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी की विधायक बरखा शुक्ला सिंह की शिकायत के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने एफआईआर दर्ज की थी। बरखा शुक्ला ने आरोप लगाए थे कि स्वाति मालीवाल ने नियमित प्रक्रिया की अनदेखी कर AAP कार्यकर्ताओं और करीबी लोगों को दिल्ली महिला आयोग में अलग-अलग पदों पर नियुक्तियाँ की थीं। महिला आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के इस फैसले से वे लोग नौकरी से वंचित हो गए थे जो इसके हकदार थे।

FIR के अनुसार, दिल्ली महिला आयोग में 6 अगस्त, 2015 से 1 अगस्त, 2016 के बीच 90 नियुक्तियाँ की गईं थीं। इनमें से 71 लोगों को अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर नियुक्त किया गया था। वहीं, 16 को ‘डायल 181’ संकट हेल्पलाइन के लिए नियुक्त किया गया। यही नहीं, इस मामले में शेष तीन लोगों की नियुक्तियों का कोई रिकॉर्ड प्राप्त नहीं हुआ।

आरोपों के बाद जाँच में क्या हुआ

बरखा शुक्ला सिंह की शिकायत के बाद दर्ज हुई एफआईआर के आधार पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने जाँच शुरू की। इस जाँच में एसीबी ने पाया कि 27 जुलाई 2015 को स्वाति मालीवाल को दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष नियुक्त करने के साथ प्रोमिला गुप्ता, सारिका चौधरी और फरहीन मलिक को सदस्य बनाया गया था।

इस दौरान, 6 अगस्त 2015 से 1 अगस्त 2016 के बीच इनके कार्यकाल में आयोग में 26 स्वीकृत पदों की जगह 87 लोगों की नियुक्ति की गई। यही नहीं, इस जाँच में यह भी पाया गया था कि नियुक्त किए गए 87 व्यक्तियों में से कम से कम 20 लोग सीधे आप से जुड़े हुए थे।

इस जाँच के दौरान, एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने यह दावा भी किया था कि ये नियुक्तियाँ चयन प्रक्रिया और नियमों के विरुद्ध थीं। इसमें सामान्य वित्त नियम (GFR) का भी उल्लंघन किया गया था। अप्रैल 2016 में सदस्य सचिव की नियुक्ति उप राज्यपाल की अनुमति के बिना की गई थी। यही नहीं, महिला आयोग को 676 लाख रुपए किश्तों में जारी करने के बजाय एक मुश्त राशि जारी की गई थी।

स्वाति मालीवाल समेत प्रोमिला गुप्ता, सारिका चौधरी और फरहीन मलिक को आरोपित बनाते हुए दाखिल किए गए आरोप पत्र में कहा गया है कि दिल्ली महिला आयोग ने स्टाफ की संख्या बढ़ाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग से अनुमति नहीं ली थी।

एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा की गई जाँच के दौरान महिला आयोग की ओर से जवाब दिया गया था कि नियुक्तियों के लिए इंटरव्यू लिए गए थे, लेकिन इसको लेकर महिला आयोग किसी प्रकार के दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। आरोप पत्र में यह भी कहा गया है कि नियुक्ति के बाद वेतन नियमों में उल्लंघन करते हुए दो लोगों का वेतन कुछ ही समय में दोगुना कर दिया गया था।

स्वाति मालीवाल और अरविंद केजरीवाल के बीच संबंध

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के बीच संबंधों को लेकर सोशल मीडिया से लेकर मीडिया तक में चर्चा होती रही है। महिला आयोग में स्वाति मालीवाल की नियुक्ति के बाद कई बार उन्हें केजरीवाल की बहन तक कहा गया है। हालाँकि, दोनों ही आपसी संबंधों की किसी बात से इनकार करते रहे हैं।

हालाँकि, दोनों के बीच के संबंध कैसे हैं इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि स्वाति मालीवाल केजरीवाल के एनजीओ ‘परिवर्तन’ से जुड़ी रहीं हैं। इसके अलावा, दिल्ली की सत्ता संभालने के बाद केजरीवाल ने उन्हें अपना सलाहकार भी नियुक्त था। इस दौरान स्वाति की सैलरी को लेकर भी काफी बवाल हुआ था। दरअसल, अरविंद केजरीवाल ने उन्हें 1.5 लाख (डेढ़ लाख रुपए) रुपए की सैलरी दे रहे थे।

यही नहीं, जब दिल्ली महिला आयोग में स्वाति मालीवाल को अध्यक्ष बनाया गया था, तब वह आम आदमी पार्टी के नेता नवीन जयहिंद की पत्नी थीं। हालाँकि, दोनों के बीच अब तलाक हो चुका है। नवीन जयहिंद आम आदमी पार्टी हरियाणा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं और उन्हें केजरीवाल का करीबी माना जाता है।

सरकार बनाने का दावा कर AAP ने 128 पर जब्त करवाई जमानत, कॉन्ग्रेस के दुर्ग ध्वस्त; गुजरात में चहुँओर BJP: 182 में से 105 नए चेहरे

गुजरात में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद नई सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। भाजपा ने गुजरात विधानसभा चुनाव में सातवीं बार जीत हासिल कर सत्ता बरकरार रखी है। इतना ही नहीं भाजपा ने राज्य में अब तक का सबसे बड़ा बहुमत हासिल किया। भाजपा की इस बड़ी जीत के साथ कई रिकॉर्ड टूटे हैं। कई रिकॉर्ड बने भी हैं। एक नजर डालते हैं गुजरात विधानसभा चुनाव से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातों पर।

विधानसभा में 105 नए चेहरे

भाजपा के पक्ष में नतीजे आने के बाद नई विधानसभा का स्वरूप भी साफ हो गया है। नई विधानसभा के 182 सदस्यों में 156 भाजपा के हैं। इसके अलावा कॉन्ग्रेस के 17, आम आदमी पार्टी के 5 और 4 निर्दलीय जीते हैं। इस बार राज्य विधानसभा में 105 नए चेहरे चुनकर आए हैं। 14 महिला और 1 मुस्लिम भी चुनाव जीते हैं। अहमदाबाद की जमालपुर खड़िया विधानसभा सीट से एकमात्र मुस्लिम ने जीत दर्ज की है। कॉन्ग्रेस के इमरान खेड़ावाला इस सीट से लगातार दूसरी बार एमएलए बने हैं।

गुजरात के चारों क्षेत्रों में खिला कमल

भाजपा को इस बार गुजरात के चारों क्षेत्रों में सीटें मिली है। मध्य गुजरात के 61 सीटों में से 55 पर भाजपा ने जीत हासिल की है। 5 सीट कॉन्ग्रेस और 1 सीट अन्य के खाते में गई है। आम आदमी पार्टी का यहाँ खाता भी नहीं खुला। सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र की बात करें तो यहाँ की 54 सीटों में से 46 सीटों पर भाजपा की जीत हुई। कॉन्ग्रेस के खाते में सिर्फ 3 सीटें और आम आदमी पार्टी को यहाँ से 4 सीटें मिली है। एक सीट अन्य के खाते में गई है। आपको बता दें 2017 के विधानसभा चुनावों में भाजका सबसे ज्यादा नुकसान इसी क्षेत्र में हुआ था। बीजेपी को यहाँ सिर्फ 23 सीटें मिली थीं।

उत्तर गुजरात की 32 सीटों में से भाजपा ने 22 हासिल की है। कॉन्ग्रेस को 8 सीटें, जबकि अन्य को 2 सीटों पर कामयाबी मिली है। उत्तर गुजरात में भी आम आदमी पार्टी का खाता नहीं खुला है। दक्षिण गुजरात पारंपरिक तौर पर भाजपा का गढ़ माना जाता है। यहाँ की 35 सीटों में से भाजपा ने 33 पर कब्जा किया है। कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी को 01- 01 सीट से संतोष करना पड़ा है। कुल मिलाकर गुजरात के 33 जिलों में से 22 में तो कॉन्ग्रेस का खाता भी नहीं खुला।

भाजपा कैसे बनी चक्रवर्ती

भाजपा के इस प्रचंड जीत का सबसे बड़ा कारण यह भी रहा कि इस साल हर तबके का साथ पार्टी को मिला है। राज्य की 27 ST सीटों में से भाजपा ने इस बार 23 सीटें जीती है। कॉन्ग्रेस को सिर्फ 3 सीटों पर जीत मिली है। 2017 में कॉन्ग्रेस को 27 में से 15 सीटें हासिल हुई थी। इसी तरह SC की 13 सीटों में भाजपा को 11 सीटें मिली है। उन 19 सीटों पर जहाँ मुस्लिम वोटर अच्छी-खासी संख्या में हैं बीजेपी को 15 सीटें मिली है।

128 सीटों पर AAP की जमानत जब्त

गुजरात में सरकार बनाने का दावा करने वाली आप अब 5 सीटों पर जीत और राष्ट्रीय दर्जा मिलने पर अपनी पीठ थपथपा रही है। लेकिन 182 में से 15 सीटें ऐसी हैं, जहाँ नोटा (NOTA) को आप से अधिक वोट मिले हैं। वे सीटे हैं- अब्दासा, रापर, वाव, थराद, धनेरा, राधनपुर, खेरालू, कलोल, खंभात, बोरसाद, अंकलव, मातर, पदरा, वागरा और सूरत पूर्व। इतना ही नहीं, आम आदमी पार्टी के 182 उम्मीदवारों में से 128 उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हो गई है।

दिल्ली का GB रोड, कोलकाता का सोनागाछी, राम रहीम की गुफा से पैदा हुए… महिला सांसद की जीत, पार्टी दे रही गालियाँ

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी उपचुनाव में गुरुवार (8 दिसंबर 2022) को समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने बीजेपी के रघुराज शाक्य को हराकर जीत दर्ज की। डिपंल के चुनाव जीतते ही उनकी पार्टी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए। समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल पर भाजपा और उनके नेताओं के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्हें और उनके परिवार वालों को गालियाँ दी जा रही हैं।

एक ट्वीट में प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी को टैग करते हुए समाजवादी पार्टी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर लिखा गया, “जल्द ही तुम्हारी भी दलाली बंद होगी। तुम अपने लिए दिल्ली की GB रोड और कोलकाता के सोनागाछी में अपना नया ठिकाना ढूँढो। वहीं तुम्हें राम रहीम की गुफा व चिन्मयानंद से उत्पन्न अपने अन्य परिजन भी मिलेंगे।”

फोटो साभार: समाजवादी पार्टी मीडिया सेल

सपा द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग करने पर राकेश त्रिपाठी ने ट्वीट किया, “यह पहली बार नहीं बल्कि लगातार किया जा रहा है। ये सब अखिलेश यादव की अनुमति-सहमति और निर्देश पर हो रहा है। मेरे बुजुर्ग माता-पिता और पत्नी (जिनका राजनीति से कोई प्रत्यक्ष सरोकार नहीं है), को लेकर लगातार बेहद घटिया और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया जा रहा है।”

इसके बाद भी समाजवादी पार्टी ने गालियाँ देना बंद नहीं किया। उन्होंने बीजेपी नेता के ट्वीट को टैग करते हुए लिखा, “सुनो, नैनमटक्के राकेश त्रिपाठी तुम्हें और तुम जैसे घटिया भाजपाइयों को अभी तक सिर्फ बैंकॉक, GB रोड और सोनागाछी व राम रहीम की गुफा की सैर कराई है। आगे से अनर्गल टिप्पणी करोगे तो तुम्हें पूरे विश्व की सैर कराएँगे। आज से फिर से गिनती शुरू। अगली बार फिर सपरिवार माकूल जवाब मिलेगा।”

फोटो साभार: समाजवादी पार्टी मीडिया सेल

यही नहीं उन्होंने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के ट्वीट का भी मजाक उड़ाया। डिप्टी सीएम ने ट्वीट कर गुरुवार को मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में डिंपल यादव को जीत की बधाई दी और भाजपा कार्यकर्ताओं का विपरीत परिस्थितियों में भी संघर्ष के लिए अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि जनता जनार्दन का फैसला ही लोकतंत्र में अंतिम फैसला, सम्मान के साथ स्वीकार है। इसको लेकर सपा के मीडिया सेल ने लिखा, “निराश और हताश मत हो केशव प्रसाद मौर्य अभी तुम्हें और जलील होना है।”

फोटो साभार: समाजवादी पार्टी मीडिया सेल

मैनपुरी उपचुनाव की जीत इस कदर सपा के मीडिया सेल पर हावी हुई कि उन्होंने एक के बाद एक बीजेपी नेता के बारे में विवादित टिप्पणी की। मनीष शुक्ला को टैग करते हुए उन्होंने लिखा, “सुन मनीष शुक्ला ये ज्ञान अपने उन आकाओं को देना, जो पिछले 10 वर्ष से भाषाई मर्यादा भूलकर सत्तामद में विपक्ष पर अनर्गल टिप्पणियाँ कर रहे हैं। जिस दिन सत्ता परिवर्तन हुआ उस दिन जनता तुम भाजपाइयों को जूतों से पीटेगी। भाजपा का नामलेवा कोई नहीं रहेगा। अहंकार का हश्र आज सामने है।”

इसके बाद जब प्रदेश प्रवक्ता ने उन्हें जवाब दिया, “अधजल गगरी छलकत जाए यही हाल है अखिलेश यादव और उनकी मीडिया सेल का। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर इस तरह का बयान ओछी मानसिकता की प्रतीक है।” फिर सड़क छाप भाषा का प्रयोग करते हुए सपा के मीडिया सेल ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, “सुन रे श्रीकांत शर्मा के पूर्व दलाल और चप्पल चट्टे। जनता ने आज अपना जनमत देकर तुम भाजपाइयों और बिकाऊ दलाल पत्तलकारों को अपना तमाचा नहीं बल्कि जोरदार ‘चट्ठा’ मारा है। तमाचे से ज्यादा करारा ‘चट्ठा’ होता है, जो अक्सर तुम बचपने में गली मुहल्ले में खाए होंगे।”

फोटो साभार: समाजवादी पार्टी मीडिया सेल
फोटो साभार: समाजवादी पार्टी मीडिया सेल

अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने वाली पार्टी के ट्वीट को सैकड़ों लोग रिट्वीट कर चुके हैं। सोशल मीडिया पर कई लोगों के विरोध जताने के बाद भी अखिलेश यादव की पार्टी के मीडिया सेल अकॉउंट से लगातार गाली गलौच और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। पत्रकार अखिलेश तिवारी ने अपने ट्वीट में लिखा कि अखिलेश यादव जी… अपनी पार्टी के मीडिया सेल की भाषा देखिए… सभ्य समाज में इस तरह की भाषा ठीक नहीं होती है।

तमाम शिकायतों के बाद भी अखिलेश यादव की पार्टी का मीडिया सेल नहीं रुका। जब भाजपा और उनके नेताओं को गाली देने से मन नहीं भरा, तो उन्होंने पत्रकार के खिलाफ भी जहर उगलना शुरू कर दिया। टाईम्स नाउ के पत्रकार सुशांत सिन्हा को टैग करते हुए समाजवादी पार्टी के ट्विटर अकाउंट पर लिखा गया, “भाजपा दफ्तर की जूठन पर जीवन यापन करने वाले दलाल। इससे बेहतर तो ये होगा कि भाजपा दफ्तर और अपने स्टूडियो की दूरी को कम करो। उसका एक रास्ता यह है कि भाजपा दफ्तर के बाहर किसी खूंटे पर जाकर अपने गले का पट्टा डाल दो, बाकी पत्तलकारों का हिस्सा भी तुम्हें मिल जाएगा।”

फोटो साभार: समाजवादी पार्टी मीडिया सेल

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर डिंपल यादव की कई ऐसी वीडियोज सामने आई हैं, जिनमें मुलायम सिंह यादव के नाम डिंपल यादव के लिए वोट माँगा गया था और वह केवल हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन कर रही थीं। यही वजह है कि इस जीत को मैनपुरी की जनता और सपा द्वारा मुलायम सिंह यादव की जीत कहा जा रहा है।

केरल की सत्ताधारी CPM के युवा नेता सहित 8 लोगों ने किशोरी का किया रेप, मोबाइल में 30 से अधिक लड़कियों से यौन संबंध बनाने के मिले अश्लील वीडियो

केरल पुलिस (Kerala Police) ने 7 दिसंबर को डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के स्थानीय नेता जिनेश जयन को विलावुरक्कल मलयम के जिनेश भवन से 16 वर्षीय लड़की का यौन शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने नाबालिग सहित लगभग 30 महिलाओं के साथ आरोपित द्वारा यौन संबंध बनाने का आपत्तिजनक का वीडियो साक्ष्य के रूप में बरामद करने के बाद की। बता दें कि DYFI सत्तारूढ़ CPI (M) पार्टी की युवा शाखा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने जिनेश के साथ 7 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है। ये सब भी नाबालिग का यौन शोषण करने में शामिल बताए जा रहे हैं। ये सभी एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट थे। पुलिस ने सभी आठों आरोपितों के खिलाफ POCSO ऐक्ट में मामला दर्ज किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों में त्रिशूर का एस सुमेज (21), मलयम चिथिरा का ए अरुण (27), शाजी भवन का एस अभिजीत (20), पूझिकुन्नु का आर विष्णु (20), पेरुकाव का सिबी (20) और ए अनंतु (18) शामिल है।

पुलिस ने जिनेश के फोन की जाँच की तो उसमें खंजर, चाकू और तलवार जैसे घातक हथियारों का इस्तेमाल करते हुए उसकी कई तस्वीरें मिलीं। फोन में सेव किए गए कुछ वीडियो में आरोपित लड़कियों को नशीला पदार्थ खिलाते हुए भी नजर आ रहे हैं। DYFI के स्थानीय नेताओं में से एक जिनेश का फोन जाँच के लिए भेज दिया गया है। वहीं, आरोपित अभी रिमांड पर है।

पीड़िता किशोरी ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा है कि वह आरोपी से फोन के जरिए मिली थी। कोडुंगल्लुर के रहने वाले आरोपित को पुलिस ने एक लड़की के साथ भागने की कोशिश करने के दौरान गिरफ्तार कर लिया। इस लड़की से वह इंस्टाग्राम पर मिला था। लड़की के भाई ने उसे अपना बैग पैक करते देख लिया और अपनी माँ एवं पंचायत सदस्यों को इसके बारे में बताया। इसके बाद लोगों ने पुलिस को फोन करके सूचित किया। किशोरी ने खुलासा किया कि पिछले दो साल से उसका यौन शोषण किया जा रहा था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आरोपित छह साल पहले इसी तरह के एक मामले में शामिल था। उस दौरान एक लड़की ने आरोप लगाया था कि जिनेश ने उसका नंबर कुछ अश्लील व्हाट्सएप ग्रुपों में साझा किया था। जब लड़की ने जिनेश के खिलाफ कार्रवाई की बात कही तो पार्टी ने हस्तक्षेप किया और उसे बचाया था। इसके बाद जिनेश के माता-पिता ने माफी माँगी और गाँधी भवन नामक एनजीओ को 25,000 रुपए का भुगतान किया। ये पीड़िता की माँग थी।

5 साल की बच्ची को अकेला देखा, लिफ्ट में अख्तर हुसैन ने किया यौन शोषण: पड़ोस के घर में AC ठीक करने आता था

महाराष्ट्र के रायगढ़ से 5 साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है। महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद अख्तर हुसैन नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है। अख्तर पेशे से एसी मैकेनिक है। वह पीड़ित बच्ची के पड़ोस में काम के सिलसिले में आता रहता था।

पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार 19 साल का अख्तर पेशे से सी मैकेनिक है। वह काम को लेकर अक्सर पीड़ित बच्ची के पड़ोस में आया करता था। एक दिन बच्ची को अकेला पाकर अख्तर उसे लिफ्ट में ले गया। जहाँ उसने बच्ची का यौन शोषण किया। घर पहुँचने के बाद बच्ची को उल्टी होने लगी। बच्ची ने अपनी माँ को आपबीती सुनाई। बच्ची के साथ हुई हैवानियत की जानकारी मिलते ही परिजन और पड़ोसी घर के बाहर जमा हो गए। इसके पहले कि अख्तर भाग पाता उसे पकड़ लिया गया।

पुलिस ने अख्तर को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि इसके पहले भी उसने किसी बच्ची या महिला के साथ किसी तरह का अपराध तो नहीं किया है।

बता दें कि कुछ दिन पहले महाराष्ट्र के पालघर में शाहनवाज (19 साल) नाम के शख्स ने 5 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। उसने बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। दुष्कर्म के बाद फरार होने की फिराक में था। शाहनवाज ने दुष्कर्म के बाद बच्ची को धमकाया था कि यदि उसने घटना के बारे में किसी को बताया तो वह उसे मार डालेगा। बच्ची जब रोते हुए अपने घर पहुँची तो उसके माता-पिता को दुष्कर्म की जानकारी हुई। बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया और बोइसर पुलिस से संपर्क कर आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई।

हिमाचल में बस 1 महिला MLA, गुजरात में 1 ही मुस्लिम बना विधायक: कौन है कमल खिलाने वाली रीना और हाथ छाप इमरान

साल 2022 में हुए दो राज्यों के विधानसभा चुनावों में नतीजों के बाद एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। 68 विधानसभा सीट वाले हिमाचल प्रदेश में जहाँ महिला विधायक के नाम पर एक अकेली भाजपा की रीना कश्यप का चुनाव हुआ। वहीं गुजरात में भी 182 सीटों में से केवल एक सीट पर इमरान खेड़वाला अकेले मुस्लिम विधायक निर्वाचित हुए।

मालूम हो कि ऐसा नहीं है कि हिमाचल में महिला उम्मीदवार नहीं उतारी गईं या गुजरात में मुस्लिमों को प्रत्याशी बनने का मौका नहीं मिला। गुजरात में मुस्लिम उम्मीदवारों की बात करें तो इस बार चुनाव में भाजपा ने एक भी मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा था। मगर कॉन्ग्रेस ने 6, आम आदमी पार्टी ने 3 और औवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) की ओर से कई मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया था।

फिर भी गुजरात की 182 सीटों में केवल एक सीट पर ही मुस्लिम उम्मीदवार जीतकर विधायक बन सका। जमालपुर खड़िया से कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार इमरान खेड़ावाला बीजेपी उम्मीदवार भूषण भट को 13 हजार से अधिक वोटों से हराकर इस बार विधानसभा पहुँचने वाले इकलौते मुस्लिम विधायक बने।

बताया जाता है कि 182 सदस्यीय गुजरात में 30 सीटें ऐसी थीं, जहाँ मुस्लिम आबादी 15 फीसदी से अधिक हैं। इस​के बावजूद केवल एक ही मुस्लिम विधायक बन पाया। इस बार गुजरात में सातवीं बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है। पार्टी ने यहाँ 182 में से 156 सीटें जीतकर रिकॉर्ड जीत हासिल की है। वहीं कॉन्ग्रेस को 17 सीटें और ‘आप’ का आँकड़ा मात्र 5 सीटों तक ही पहुँचा।

इसी तरह हिमाचल प्रदेश की बात करें तो इस बार मैदान में 24 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया था। मगर जीत केवल रीना कश्यप की हुई। रीना कश्यप ने पच्छाद विधानसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस की दयाल प्यारी को हराकर 3857 वोटों से जीत हासिल की। रीना ने कुल 34.52 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि दयाल प्यारी को 28.25 फीसदी वोट मिले।

कश्यप ने वर्ष 2021 में पच्छाद (एससी) विधानसभा से उपचुनाव भी जीता था। इस चुनाव में जीतकर वह अपनी सीट बरकरार रखने में सफल रहीं। उनके अलावा कोई और महिला विधायक नहीं चुनी गई। हैरानी इस बात की है कि ये नतीजे तब देखने को मिले जब राज्य के कुल मतदाताओं में आधी संख्या महिलाओं की है। 2017 में केवल चार महिला उम्मीदवार विधानसभा चुनाव जीतने में सफल रही थीं।

उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश की तो राज्य की 68 सीटों में से कॉन्ग्रेस ने 40 सीटों और भाजपा ने 25 पर जीत दर्ज की है। इसके अलावा 3 सीटें अन्य के खाते में गई हैं। वहीं, आदमी पार्टी यहाँ अपना खाता भी नहीं खोल पाई। यहाँ 68 में से सिर्फ एक सीट पर महिला प्रत्याशी रीना कश्यप को जीत मिली है। वह इकलौती भाजपा की विधायक हैं।