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लाल किला हमला: लश्कर के आतंकी मोहम्मद आरिफ को होकर रहेगी फाँसी, SC ने खारिज की पुनर्विचार याचिका

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने साल 2000 के लाल किला हमले (Lal Qila Attack) मामले के दोषी मोहम्मद आरिफ उर्फ अशफाक को किसी तरह की राहत देने से इनकार करते हुए फाँसी की सजा को बरकरार रखा है। इस मामले में निचली अदालत ने आरिफ को फाँसी की सजा सुनाई थी।

दरअसल, साल 2005 में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फाँसी की सजा को आरिफ ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद बाद आरिफ ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने उसकी इस याचिका को खारिज कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने कहा, “हमने प्रार्थनाओं को स्वीकार कर लिया है कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उसका दोष सिद्ध होता है। हम इस अदालत द्वारा लिए गए विचार की पुष्टि करते हैं और समीक्षा याचिका को खारिज करते हैं।”

इस मामले में आरिफ को निचली अदालत ने 31 अक्टूबर 2005 को दोषी मानते हुए फाँसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने आरिफ की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए फाँसी की सजा को बरकरार रखा था। साल 2014 में आरिफ द्वारा दाखिल क्यूरेटिव याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

इस बार भी इस्लामी आतंकी आरिफ ने फाँसी की सजा से बचने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। आरिफ की ओर से दाखिल याचिका की सुनवाई ओपन कोर्ट में की गई।

बता दें कि साल 2015 में आतंकी याकूब मेमन और आरिफ की याचिका पर ही फैसला दिया था कि फाँसी की सजा पाए दोषियों की पुनर्विचार याचिका ओपन कोर्ट में सुनी जानी चाहिए। इसके पहले पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई न्यायाधीश अपने चैंबर में करते थे।

दरअसल, पाकिस्तान स्थित कुख्यात इस्लामी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कुछ आतंकवादी 22 दिसंबर 2000 को लाल किले परिसर में घुसकर में घुसकर राजपूताना राइफल्स की 7वीं बटालियन के जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस हमले में दो जवान और एक आम नागरिक मारे गए थे। हालाँकि, जवानों ने कार्रवाई करते हुए दो आतंकियों को मार गिराया था, लेकिन अन्य आतंकी लाल किले की दीवार फाँदकर भागने में सफल रहे थे।

इस मामले में पाकिस्तान के एबटाबाद के मास्टरमाइंड मोहम्मद आरिफ समेत 11 लोगों को दोषी ठहराया गया था। 18 साल से फरार एक अन्य आतंकवादी बिलाल अहमद कावा को दिल्ली पुलिस और गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते ने 2018 में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) पर गिरफ्तार किया था।

दिल्ली पुलिस ने अपनी जाँच में पाया था कि बिलाल के बैंक खाते में आरिफ ने लाल किले पर हमले के लिए 29.5 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, आरिफ ने जुलाई 2000 में कनॉट प्लेस के एक निजी बैंक में खाता खुलवाया था और इसी खाते से उसने जुलाई और नवंबर 2000 के बीच पैसे भेजे थे।

पूछताछ के दौरान बिलाल ने पुलिस को बताया था कि वह पिछले 18 सालों में बार-बार अपना ठिकाना बदलता रहा है। जिस समय उसे गिरफ्तार किया गया था, वह कश्मीर में रह रहा था। बताया जाता है कि बिलाल दिल्ली में रहने वाले अपने भाई से मिलने जा रहा था, तभी उसे हवाईअड्डे पर गिरफ्तार किया गया था।

182 सीट, 4.9 करोड़ वोटर, 51000 पोलिंग स्टेशन: 2 चरणों में पूरा होगा गुजरात विधानसभा चुनाव, फर्जी न्यूज फैलाने वालों को ECI ने दी चेतावनी

गुजरात में विधानसभा चुनाव इस बार दो चरणों में पूरे होंगे। चुनाव आयोग ने आज (3 नवंबर 2022) तारीखों की घोषणा कर दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि गुजरात में पहले चरण के चुनाव 1 दिसंबर 2022 को और दूसरे चरण के चुनाव 5 दिसंबर 2022 को होंगे। वहीं वोटों की गिनती 8 दिसंबर को शुरू होगी और 10 दिसंबर तक चुनाव पूरे हो जाएँगे।

चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने जानकारी दी कि गुजरात में इस बार 4.9 करोड़ वोटर्स अपना वोट देंगे। इसमें 4.6 लाख नए वोटर होंगे। 51782 मतदान केंद्रों पर मतदान होगा। वहीं दिव्यांगों के लिए 182 और महिलाओं के लिए 1274 स्पेशन पोलिंग स्टेशन बनाए जाएँगे।

चुनाव आयुक्त ने अपील की है कि चुनाव के दौरान जो खबर भी लोगों को फर्जी लगे उसे आगे न बढ़ाया जाए। उन्होंने बताया है कि ऐसी फेक न्यूज जो शांति को भंग करने वाली और नतीजों पर फर्क डाल सकती हैं उनपर निगरानी रखने के लिए सोशल मीडिया टीम बनाई गई है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर आईपीसी की धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों को भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, “कुछ लोगों ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) पर सवाल उठाए हैं, लेकिन जब वे उन्हीं ईवीएम से चुनाव जीत जाते हैं तो वे चुप हो जाते हैं। परिणाम ईसीआई की निष्पक्षता का सबसे बड़ा प्रमाण हैं।”

उल्लेखनीय है कि गुजरात में 182 विधानसबा सीटों पर चुनाव हो रहा है। पहले चरण में 89 सीटों पर वोट डलेंगे जबकि दूसरे चरण में 93 सीटों पर मतदान होगा। राज्य में पिछले ढाई ढशक से भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। लेकिन इस बार अरविंद केजरीवाल पूरी कोशिशों में हैं कि किसी तरह राज्य में अपनी जगह बना सकें। उन्होंने डेट की घोषणा होने के बाद कहा है कि गुजरात की जनता इस बार बड़े बदलाव के लिए तैयार हैं। उनकी पार्टी जरूर जीतेगी।

तूफान में लड़खड़ाते विमान को तिरछा करके लैंड कराया, Crosswind Landing के लिए पायलटों की हो रही तारीफ: देखें वीडियो

ब्रिटेन (Britain) में बुधवार (2 नवंबर 2022) को तेज हवाओं के बीच Aurigny ATR72-600 नामक विमान को बेहद खतरनाक परिस्थितियों में लैंड कराया गया। विमान को लैंड कराने के लिए पायलट संघर्ष करते रहे। इसका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें विमान को असमान में तेज हवाओं के बीच डगमगाते हुए देखा जा सकता है। अंत में इसे ब्रिस्टल हवाई अड्डे पर लैंड करा लिया गया।

द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, जब विमान ब्रिस्टल एयरपोर्ट पर उतरने का प्रयास कर रहा था, तभी बरसात और तेज हवाओं के कारण विमान डगमगाने लगा। इसके चलते विमान को एयरपोर्ट पर उतारने में पायलटों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। यहाँ तक कि रनवे के पास पहुँचने पर भी विमान खराब मौसम के कारण स्थिर नहीं हो पा रहा था। कई लोग इस दिल दहला देने वाली लैंडिंग का नजारा देखकर हैरान रह गए। लेकिन पायलटों ने अपनी सूझबूझ से कुछ ही सेकंड के बाद विमान को लैंड कराने में सफलता हासिल की।

बताया जा रहा है कि यूके में तूफान, बारिश और तेज हवा के कारण यह भयावह स्थिति देखने को मिली। जब विमान लैंडिंग कर रहा था, उस समय 44 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से हवा चल रही थी। मौसम विभाग ने भी अलर्ट जारी किया था कि सड़क, रेल, हवाई और नौका परिवहन में देरी की संभावना है और बिजली जाने की संभावना है। दक्षिणी स्कॉटलैंड में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक और उत्तरी आयरलैंड में सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।

बता दें कि इस साल फरवरी में लंदन का एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला वीडियो वायरल हुआ था। विमान के पहियों ने दो बार जमीन को छुआ और वह फिर से उड़ने लगा। वीडियो के आखिर में देखा जा सकता है कि विमान ने जमीन को पूरी तरह छू लिया था, जिसके चलते विमान वहाँ पलट भी सकता था, लेकिन पायलट ने समझदारी दिखाते हुए विमान को ऊपर की तरफ उड़ाना शुरू किया, जिससे लोगों की जान बच सकी।

रात में हिंदू युवती के घर में घुसा था जियाउर्रहमान… अस्पताल में तोड़ा दम: पीट-पीटकर हत्या का आरोप, सहारनपुर में तनाव

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में देर रात एक हिंदू लड़की के घर में घुसे मुस्लिम युवक की मौत के बाद से तनाव पैदा हो गया है। घटना रामपुर मनिहारान थाना क्षेत्र के इस्लामनगर की है। मृत युवक की पहचान 19 साल के जियाउर्रहमान के तौर पर हुई है। जिस लड़की के घर में वह घुसा था, उसे मीडिया रिपोर्टों में जियाउर्रहमान की प्रेमिका बताया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार जियाउर्रहमान मंगलवार (1 नवंबर 2022) की देर रात लड़की के घर में घुसा था। बताया जा रहा है कि लड़की के परिजनों ने पकड़कर उसकी पिटाई की। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस जब पहुँची तो युवक घायल था। उसे अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसकी कथित प्रेमिका ने भी फाँसी लगा ली।

युवक-युवती के अलग-अलग समुदाय से होने के कारण इस घटना के बाद से तनाव पसरा हुआ है। इसे देखते हुए गाँव में पुलिस फोर्स की तैनाती कर दी गई है। आरोप है कि जियाउर्रहमान युवती से छेड़छाड़ और अश्लील हरकत करते पकड़ा गया था।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मृत युवक-युवती एक साथ पढ़ाई कर रहे थे। ही क्लास में पढ़ते थे और बीएससी कर रहे थे। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि जियाउर्रहमान को युवती के परिजन बुलाकर अपने घर ले गए और फिर उसकी पिटाई की। सहारनपुर पुलिस ने बुधवार (2 नवंबर 2022) को ट्वीट कर बताया है कि पुलिस इस मामले में विधिक कार्रवाई कर रही है। युवक और युवती के परिजनों से बातचीत की गई है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

एसएसपी विपिन टाडा ने बताया है, “रात्रि में कुछ लोगों द्वारा एक युवक की पिटाई करने की सूचना मिली थी। पुलिस ने युवक को अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।। इसके बाद युवती ने भी फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। दोनों पक्षों में से अभी किसी भी पक्ष की तरफ से तहरीर नहीं आई है। तहरीर आने पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा । गाँव में फ़िलहाल शांति है और मौके पर पुलिस बल मौजूद हैं।”

₹16 करोड़ में बनी ‘कांतारा’ ने कमाए ₹300 करोड़: मोदी के मंत्री भी हुए मुरीद, निवेशकों को फिल्म की सफलता से ‘रिटर्न मंत्र’ सीखने की दी सलाह

कन्नड़ ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘कांतारा’ (Kantara) रिलीज के पाँच हफ्ते बाद भी बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है। दुनिया भर में फिल्म की कहानी, निर्देशन, सिनेमेटोग्राफी और संगीत के लिए जमकर सराहना की जा रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Commerce and Industry Minister Piyush Goyal) ने भी साउथ स्टार और निर्देशक ऋषभ शेट्टी की फिल्म ‘कांतारा’ की तारीफ की है। उन्होंने बुधवार (2 नवंबर 2022) को बेंगलुरु में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट (जीआईएम) में उद्योगपतियों और निवेशकों को ‘कांतारा’ की सफलता की कहानी का हवाला दिया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “कांतारा 16 करोड़ रुपए के मामूली बजट में बनी फिल्म है। इसमें कर्नाटक की कला और संस्कृति को बेहद खूबसूरती के साथ दिखाया गया है। इस फिल्म ने 300 करोड़ रुपए का बिजनेस किया है।” इसके बाद उन्होंने कहा, “मुझे यकीन है कि ‘कांतारा’ की सफलता ने यहाँ कई कंपनियों के नेतृत्वकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया है कि रिटर्न कैसे प्राप्त करें।” गोयल ने निवेशकों को बताया कि कर्नाटक में उद्योगपतियों की योजनाओं के बारे में जानने के बाद और जिस तरह से वे यहाँ अपने कार्यों का विस्तार करना चाहते हैं, उसने उन्हें ‘कांतारा’ की सफलता की याद दिला दी।

बता दें कि ऋषभ शेट्टी के निर्देशन में बनने वाली कन्नड़ फिल्म ‘कांतारा’ को दर्शकों और समीक्षकों का बढ़िया रिस्पांस मिल रहा है। 30 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म का पाँचवाँ हफ्ता चल रहा है और यह अभी भी यह बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। ‘कांतारा’ ने वर्ल्डवाइड अब तक कुल 300 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया है। अकेले भारत में फिल्म ने 200 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस किया है और जल्द ही 250 करोड़ को पार करने का अनुमान है। KGF चैप्टर 2 के बाद इस फिल्म को कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की दूसरी बड़ी फिल्म माना जा रहा है। वहीं, एक हफ्ते पहले रिलीज हुई अक्षय कुमार की फिल्म ‘राम सेतु’ और अजय देवगन व सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म ‘थैंक गॉड’ बॉक्स ऑफिस पर दम तोड़ चुकी हैं।

बांग्लादेश को बिना खेले चाहिए था 5 रन, उतने ही रनों से हारने पर ‘कोहली की फेक फिल्डिंग’ का रोना-धोना, मातम में पाकिस्तानी भी शामिल

T20 क्रिकेट वर्ल्ड कप चल रहा है। भारत ने बांग्लादेश को 5 रनों से हरा दिया है। हार मानने के बजाय बांग्लादेशी विराट कोहली का नाम लेकर ‘फेक फिल्डिंग (fake fielding)’ और 5 रन का रोना रो रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड ओवल में खेले गए 2 नवंबर के मैच में ‘फेक फिल्डिंग’ वाली यह बात 7वें ओवर में हुई, ऐसा बांग्लादेशियों का आरोप है। अक्षर पटेल की बॉल पर लिटन दास ने ऑफ साइड पर शॉट खेला था। अर्शदीप ने फिल्डिंग करते हुए बॉल को विकेटकीपर दिनेश कार्तिक की ओर फेंका। इसी बीच विराट कोहली ने भी बॉल को थ्रो करने का इशारा किया। बवाल ‘थ्रो करने के इसी इशारे (Virat Kohli fake fielding)’ को लेकर है।

मजेदार बात यह है कि मैच के दौरान इसकी शिकायत न तो दोनों बांग्लादेशी बैट्समैन ने की, ना ही दोनों अंपायर ने इसे देखा। ESPN क्रिकइंफो की रिपोर्ट के अनुसार, यही कारण है कि इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। इसके उलट सोशल मीडिया और बांग्लादेशी मीडिया में यह लिखा जा रहा है कि कोहली की इस ‘फेक फिल्डिंग’ को लेकर उस समय नजमुल हुसैन शैंटो ने अंपायर से शिकायत की थी, लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया।

मैच हारने के बाद बांग्लादेशी क्रिकेटर नुरुल हसन ने मीडिया से विराट कोहली की ‘फेक फिल्डिंग’ पर बात की। बारिश, खिलाड़ियों का मोमेंटम, गीली आउटफिल्ड आदि की बात करते हुए नुरुल हसन ने फ्री के 5 रन वाली बात कर दी। बांग्लादेशियों को और वहाँ की मीडिया को इससे मसाला मिल गया। लगे रोने-धोने।

क्या होती है ‘फेक फिल्डिंग’?

ICC के नियम 41.5 यह कहता है – “जानबूझकर बैट्समैन की एकाग्रता भंग करना, धोखा देना या उसे बाधा पहुँचाना प्रतिबंधित है।” इसमें आगे लिखा गया है कि यदि ऐसा किया जाता है तो अंपायर उस बॉल को डेड बॉल घोषित कर सकते हैं, बैटिंग कर रही टीम को 5 रन दिया जा सकता है।

बांग्लादेशी क्रिकेटर नुरुल हसन को लेकिन शायद यह नहीं पता था कि ‘फेक फिल्डिंग’ के इसी नियम में यह भी स्पष्ट लिखा गया है – “यह दोनों अंपायरों में से किसी एक को तय करना है कि खेल के दौरान जानबूझकर बैट्समैन की एकाग्रता भंग की गई है या नहीं, धोखा दिया गया है या नहीं या उसे बाधा पहुँचाई गई है या नहीं।”

खेल के बाद मैच रेफरी या कोई दूसरे ‘फेक फिल्डिंग’ को लेकर फैसला नहीं सुना सकते। यही कारण है कि कप्तान शाकिब अल हसन ने टीम की हार को स्वीकार किया और मीडिया के सामने ऐसी कोई बात नहीं की।

हार बांग्लादेश की, मातम पाकिस्तान में

‘फेक फिल्डिंग’ को लेकर बांग्लादेशियों से ज्यादा पाकिस्तानी रो रहे हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करके आईसीसी के नियमों का हवाला दे रहे।

पाकिस्तानियों को समझना चाहिए कि उनके यहाँ तो शोएब अख्तर भी अपनी बात से पलटा खा जाते हैं, फिर भी लगे पड़े हैं बेचारे… उनका दुख खत्म ही नहीं हो रहा!

जिनकी रसोई में बर्तन मांजने पर राष्ट्रपति बनाए जाने का दावा, उनके नाम पर चल रहे रसोई का बर्तन चाट रहे सूअर: देखिए Video

कॉन्ग्रेस के शीर्ष परिवार के प्रति वफादारी जताने का एक तरीका सत्ता में आने के बाद परिवार से जुड़े लोगों के नाम पर सरकारी योजनाओं का नामकरण करना भी है। इन योजनाओं से जनता का भला हो या न हो, लेकिन कॉन्ग्रेसियों का खुद का भला हो जाने का यह नुस्खा पुराना और आजमाया हुआ है। इसी परंपरा के तहत अशोक गहलोत राजस्थान में इंदिरा रसोई योजना लेकर आए।

गरीबों को 8 रुपए में भरपेट खाना खिलाने के नाम पर शुरू की गई इस योजना में अनियमितता को लेकर आए दिन रिपोर्ट आती रहती है। अब एक वीडियो वायरल हुआ है, इसमें इंदिरा रसोई के बर्तन सूअर चाटते दिख रहे हैं। यह वीडियो भरतपुर के एमएजे कॉलेज के पास स्थित इंदिरा रसोई का बताया जा रहा है। इसमें रसोई क्रमांक 676 के बाहर पड़े गंदे बर्तन सूअर चाटते दिख रहे हैं। यहाँ पर इस तरह की स्थिति आए दिन देखने को मिलती। जिन बर्तनों में लोगों को खाना परोसा जाता है, उसे खुले में ऐसे ही फेंक दिया जाता है और फिर उसे सूअर चाटते रहते हैं।

इस वी​डियो को बुधवार (2 नवंबर 2022) को पत्रकार राजकिशोर ने अपने ट्विटर हैंडल पर साझा किया। मामला तूल पकड़ने के बाद भरतपुर नगर निगम ने इस रसोई का संचालन करने वाली संस्था का अनुबंध समाप्त कर नोटिस जारी किया है।

इंदिरा रसोई की प्लेट चाटते सूअरों का वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस घटना को घृणित बताया है। उन्होंने कहा है, “राजस्थान के भरतपुर से कई मीडिया संगठनों द्वारा डाला गया एक वीडियो गरीबों के लिए कॉन्ग्रेस की योजनाओं की वास्तविकता को दर्शाता है। इंदिरा रसोई में गरीबों के लिए बनी थाली से सूअर…यह न केवल अस्वच्छ और घृणित है, बल्कि यह अपमानजनक भी है। इस मामले में पूछताछ होनी चाहिए।”

इस रसोई का संचालन मदर टेरेसा नामक संस्था द्वारा किया जा रहा था। नगर पालिका अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) को बताया ‘इंदिरा रसोई योजना’ के तहत संचालित भरतपुर के फूड सेंटर के बाहर पड़े गंदे बर्तनों को सूअर चाटते दिखे हैं। अनियमितताएँ पाए जाने पर ठेका रद्द कर दिया गया है। मामले की जाँच के लिए टीम गठित की गई है।

बीते दिनों मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान के शहरों में चल रही 870 इंदिरा रसोइयों के खाने की गुणवत्ता सुधार के लिए नई जिम्मेदारी तय की थी। इसके तहत कहा गया था कि सभी जिलों की 870 इंदिरा रसोइयों का विधायक निरीक्षण करेंगे। वे इंदिरा रसोई का खाना खाएँगे और गुणवत्ता सुधार करवाएँगे। हालाँकि, वायरल वीडियो सामने आने की बाद ऐसा प्रतीत होता है कि ज़िम्मेदारी नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है।

उल्लेखनीय है कि कभी राजस्थान की ही कॉन्ग्रेस सरकार में पंचायत और वक्फ राज्यमंत्री रहे अमीन खां ने बताया था कि प्रतिभा पाटिल किसी जमाने में इंदिरा गाँधी के घर का रसोई सँभालती थीं। खाना बनाती थीं। बर्तन धोती थीं। बाद में इसी वफादारी के लिए सोनिया गाँधी ने उन्हें राष्ट्रपति बना दिया। जब अमीन खां ने यह बात कही थी, उस समय प्रतिभा पाटिल देश की राष्ट्रपति हुआ करती थीं। अमीन खां ने यह बात कार्यकर्ताओं को निष्ठा और समर्पण का महत्व समझाने के लिए कही थी। दुखद यह है कि आज उसी इंदिरा के नाम पर चल रही योजना के क्रियान्वयन को लेकर कॉन्ग्रेस की प्रदेश सरकार वही निष्ठा और समर्पण दिखाने में असफल रही है।

किंग से भी कट्टर किंगमेकर, इजरायल से निकाले जाएँगे मुस्लिम! बेंजामिन नेतन्याहू की शानदार वापसी, लेकिन फिलिस्तीन के लिए असली खतरा ये

इजरायल (Israel) में मतदान बाद के सामने आए आंशिक नतीजों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के खास दोस्त और पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) एक बार फिर सत्ता में वापसी करने जा रहे हैं। नेतान्याहू की सत्ता में वापसी के पीछे वहाँ के धुर दक्षिणपंथी नेता इतामार बेन-ग्विर (Itamar Ben-Gvir) का महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है और नई सरकार में वे किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं।

इजरायल में हुए आम चुनाव के 86% मतों की गिनती हो चुकी है। इसमें नेतन्याहू गुट को 120 में से 65 सीटें जीतने मिलती दिख रही हैं। रीलियस जियोनिज्म पार्टी के अति-राष्ट्रवादी और धुर दक्षिणपंथी प्रमुख बेन-ग्विर का समर्थन 73 वर्षीय नेतन्याहू की भारी बहुमत वाली जीत को सुनिश्चित किया है।

बेन-ग्विर और बेज़ेल स्मोट्रिच को अरब विरोधी रूख और ‘अविश्वासघाती’ राजनेताओं एवं नागरिकों के निर्वासन की वकालत करने वाले नेता के रूप में जाना जाता है। बेन-ग्विर दिवंगत अति-राष्ट्रवादी मीर कहाने के अनुयायी हैं। कहाने के संगठन को इज़राइल में प्रतिबंधित कर दिया गया था और अमेरिका ने एक आतंकवादी समूह के रूप में नामित किया गया था।

हालाँकि, बहुमत को देखते हुए बेन-ग्विर ने बुधवार (2 नवंबर 2022) को मीडिया से कहा कि वे सभी इजरायल के सभी नागरिकों के लिए काम करेंगे, चाहें वे उनसे नफरत करने वाले ही क्यों ना हों। हालाँकि, उनकी विजय भाषण के दौरान लोगों ने ‘आतंकवादियों को मौत’ के नारे लगाए।

पिछले महीने बेन-ग्विर उस समय खूब सुर्खियों में रहे, जब पूर्वी यरुशलम के अरब शेख जर्राह जिले फ्लैशपॉइंट के दौरा करने के दौरान फिलिस्तीनियों ने पत्थर से उन्हें निशाना बनाया था। उसके बाद बेन-ग्विर ने अपराधियों को गोली मारने के लिए बुलाया था। इस दौरान उन्हें बंदूक निकालते हुए भी देखा गया था।

नई सरकार में पुलिस मंत्री बनने के इच्छुक 46 वर्षीय बेन-ग्विर को साल 2007 में अरबों के खिलाफ नस्लवादी उकसावे और कच के समर्थन के लिए दोषी ठहराया गया था। कच को इजरायल और अमेरिकी ने आतंकवादी की सूची में डालकर ब्लैकलिस्ट कर रखा है।

इसी साल 29 सितंबर को जो बाइडेन की सरकार में एक अधिकारी के हवाले से इजरायली ह्योम अखबार ने लिखा था, “बेन-ग्विर के इतिहास, उनके कार्यों, उनके बयानों को देखें तो ये कोई ऐसा व्यक्ति नहीं हैं, जिन्हें हम सरकार के हिस्से के रूप में देखना चाहते हैं।”

हालाँकि, बेन-ग्विर को लेकर अमेरिकी चिंता को बेंजामिन नेतन्याहू ने सिरे से खारिज कर दिया था। नेतन्याहू ने 26 अक्टूबर को इज़राइल के चैनल 14 टीवी को बताते हुए कहा था, “तो उन्हें (अमेरिका को) अपनी राय देने दें। इसका मुझ पर कोई प्रभाव नहीं है।”

बेन-ग्विर एक ऐसे नेता के रूप में जाने जाते हैं, जो इजरायल से सभी फिलिस्तीनियों के निष्कासन की वकालत करता है। हालाँकि, समय के साथ उनके रूख में भी थोड़ा-बहुत परिवर्तन देखने को मिल रहा है। बेन-ग्विर का कहना है कि वे केवल उन लोगों के निष्कासन की बात करते हैं, जो देशद्रोही या आतंकवादी हैं। उनका मानना है कि यहूदियों को देश के प्रति वफादार होना चाहिए।

बेन-ग्विर फाँसी की सजा और सैनिकों को कार्रवाई की स्वतंत्रता के समर्थक हैं। इतना ही नहीं, बेन-ग्विर उस अंतरिम शांति समझौते के भी खिलाफ रहे हैं, जिसके तहत इज़रायल के कब्जे में सन 1967 में आए वेस्ट बैंक के कुछ हिस्सों में फिलिस्तीनी प्राधिकरण के शासन का अधिकार दिया गया है। वे इस पूरी तरह इजरायल के नियंत्रण में लाना चाहते हैं। वे ‘गे’ को भी घृणित मानते हैं और शादी को यहूदी नियमों के अनुसार संचालन की वकालत करते हैं।

पेशे से वकील बेन-ग्विर यरुशलम के अल-अक्सा मस्जिद के पास भी अक्सर जाते रहते हैं। इसे यहूदी पवित्र टेंपल माउंट मानते हैं। यह इलाका यहूदियों का सबसे पवित्र और मुस्लिमों का तीसरा सबसे पवित्र जगह है। उस जगह वे अक्सर कहते हैं, “मैं यहाँ देश को बचाने के लिए आया हूँ।” वे कहते हैं, “मैं जेहादियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा हूँ और अपने देश को बचाने निकला हूँ।”

‘भारत में बने कफ सिरप से हुई 66 बच्चों की मौत – इसकी पुष्टि नहीं’: गाम्बिया को भारत की जाँच पर भरोसा, WHO ने भारतीय कंपनी पर डाला था इल्जाम

गाम्बिया ने कहा है कि भारत के हरिआयाना में स्थित कंपनी मेडेन फार्मास्यूटिकल्स के कफ सिरप से 66 बच्चों की मौत हुई, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। अटलांटिक महासागर के किनारे स्थित देश में 66 बच्चों की मौत से हड़कंप मच गया था। इसमें भारतीय कंपनी के कफ सिरप का नाम सामने आया था। हालाँकि, अब गाम्बिया की मेडिसिन कंट्रोल एजेंसी ने कहा है कि इस कफ सिरप से ही बच्चों के गुर्दों को नुकसान पहुँचा, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

वहीं ‘मेडेन फर्मास्यूटिक्लस’ की दवाएँ हरियाणा के कुंडली स्थित HSIDC इंडस्ट्रियल एरिया में बनती हैं। हालाँकि, कंपनी ने अब साफ़ किया गया है कि घरेलू बाजार में वो अपना कोई भी उत्पाद नहीं बेचता है। साथ ही उसने पंजीकृत और विश्वसनीय कंपनियों से कच्चे सामान ख़रीदने का भी दावा किया है। WHO ने कंपनी के खिलाफ अलर्ट जारी किया है। कंपनी ने कहा कि सैम्पल लिए गए हैं और जाँच चल रही है, ऐसे में इसके निष्कर्षों का इंतजार करना चाहिए।

बता दें कि इन बच्चों की मौत उनकी किडनी में अचानक से खराबी आ जाने के कारण हुई थी। भारतीय एजेंसियों ने भी ‘मेडेन फर्मास्यूटिक्लस’ के खिलाफ जाँच शुरू कर दी है। सोनीपत स्थित उसकी फैक्ट्री में उत्पादन भी फ़िलहाल रोक दिया गया है। शुरुआती जाँच में इस कंपनी द्वारा बनाए गए 4 कफ सिरप का रोल सामने आया था। हालाँकि, अब पता चला है कि कुछ बच्चों ने दवा ली ही नहीं थी, तो कुछ के सैंपल्स में दावा कोई कोई गड़बड़ी नहीं सामने आई।

बता दे कि इस साल जुलाई में ही पश्चिमी अफ्रीका में स्थित गाम्बिया के बच्चों में किडनी की बीमारियाँ सामने आने और उनकी मौत होने की खबरें सामने आने लगी थीं। 29 सितंबर को WHO ने भारतीय कंपनी को इस मामले में गहरा। भारत की ‘केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने तुरंत कार्रवाई करते हुए हरियाणा प्रशासन से संपर्क किया और जाँच शुरू कर दी। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन कई मृत बच्चों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उन्हें ईकोलाई और डायरिया होने की बातें सामने आई हैं, ऐसे में सवाल है कि उन्हें कफ सिरप क्यों दिया जा रहा था?

‘अदालत को मौलानाओं के आगे सरेंडर नहीं करना चाहिए’: केरल हाईकोर्ट ने ‘खुला’ की समीक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा- मुस्लिम महिलाओं को भी निकाह खत्म करने का अधिकार

केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने कहा है कि इस्लामी मौलानाओं के पास कानून की शिक्षा नहीं होती। इसलिए कोर्ट को मुस्लिम पर्सनल लॉ से संबंधित कानूनी मामले का फैसला करते समय इस्लामी विद्वानों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

मुस्लिम महिलाओं की ‘खुला’ प्रथा से जुड़े एक रिव्यू याचिका पर सुनवाई करते हुए केरल हाईकोर्ट के जस्टिस मोहम्मद मुस्ताक और जस्टिस सीएस डायस की खंडपीठ ने कहा है कि मौलानाओं के पास कोई औपचारिक कानूनी प्रशिक्षण नहीं है और उनके लिए इस्लामी कानून को समझना मुश्किल है। इसलिए कोर्ट को उन पर भरोसा करने से बचना चाहिए।

हालाँकि, कोर्ट ने आगे कहा, “विश्वासों और प्रथाओं से संबंधित मामलों में उनकी राय न्यायालय के लिए निस्संदेह मायने रखती है और न्यायालय को उनके विचारों के लिए सम्मान होना चाहिए।” कोर्ट ने कहा कि एक धर्मनिरपेक्ष देश की अदालत में नैतिक निषेधाज्ञा और कानूनी अधिकार का प्रतिच्छेदन कानूनी अधिकार की वैधता का निर्धारण नहीं हो सकता है।

इस प्रथा को लेकर कोर्ट ने कहा कि खुला से संबंधित दुविधा शायद उस प्रथा से अधिक संबंधित है, जो वर्षों से चली आ रही है। कोर्ट ने कहा कि कानूनी मानदंड के अनुरूप मुस्लिम महिलाओं को अपने पति की सहमति के बिना विवाह समाप्त करने का अधिकार है।

अदालत की खंडपीठ ने कहा, “ऐसी परिस्थितियों में अदालत से कानूनी मानदंडों को देखने की उम्मीद की जाती है, अगर वह कुरान के कानूनों और पैगंबर (सुन्नत) की बातों और प्रथाओं पर निर्भर करता है।” कोर्ट ने कहा कि मौलानाओं के पास कानून का प्रशिक्षण नहीं होता, इसलिए न्यायालय उनकी राय के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा।

अदालत के सामने उसकी पिछली निर्णय की समीक्षा के लिए एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें अदालत ने कहा था कि एक मुस्लिम पत्नी को अपने शौहर की इच्छा के बिना भी अपने निकाह को समाप्त करने का पूरा अधिकार है, जो कुरान द्वारा दिया गया है।

कोर्ट ने कहा, “यह एक सामान्य समीक्षा है, जो दर्शाती है कि मुस्लिम महिलाएँ अपने पुरुष समकक्षों की इच्छा के अधीन हैं। इस समीक्षा याचिका से ऐसा प्रतीत होता है कि यह अपील मौलाना और वर्चस्ववादी पुरुषत्व द्वारा समर्थित और समर्थित है। मुस्लिम महिलाओं के ‘खुला’ अधिकार को मुस्लिम समुदाय पचाने में असमर्थ है।

कोर्ट ने कहा कि विश्वासों और प्रथाओं से संबंधित नियमों को निर्धारित करने के अलावा इस्लाम में एक कानून संहिता है। कानूनी मानदंड मुस्लिम समुदाय के भीतर एक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था बनाने की आधारशिला हैं।

एक उदाहरण के रूप में अदालत ने तीन तलाक को समझने में मौलानाओं की दुविधा का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि यह सदियों से समाज में अपनाई जाने वाली प्रथा थी, जो खलीफा उमर के एक फरमान से संबंधित थी कि एक बार में ही तीन तलाक कहने पर तलाक को वैध माना जाएगा।

किताबों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि खलीफा उमर ने महिलाओं की शिकायतों के निवारण के लिए एक विशेष आवश्यकता को पूरा करने के लिए अपनी कार्यकारी शक्ति का प्रयोग करते हुए डिक्री जारी की थी। उस कार्यकारी शक्ति का प्रयोग एक विशेष स्थिति से निपटने के लिए किया गया था। कोर्ट ने कहा कि हालाँकि, यह डिक्री कुरान के कानून के अनुरूप नहीं दिखती है।

कोर्ट ने कहा कि एक विशेष समय में दी अनुमति की इस प्रथा पर इस्लामी मौलानाओं द्वारा कुरान के निषेधाज्ञा की अनदेखी करते हुए तात्कालिक ट्रिपल तलाक को सही ठहराने का प्रयास किया गया।

समीक्षा याचिका दायर करने वाले शौहर के अलावा सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष लोगों से भरा हुआ था। इस दौरान अदालत ने सभी इच्छुक पक्षों को सबमिशन करने की अनुमति देने का फैसला किया, जिसमें एक मुस्लिम विद्वान से वकील बने हुसैन सीएस भी शामिल हैं।

एडवोकेट हुसैन सीएस के अनुसार, कुरान महिलाओं को खुला लेने का अधिकार देता है, लेकिन यह इसके लिए कोई प्रक्रिया निर्धारित नहीं करता है। ऐसे में खुला के लिए सही प्रक्रिया थाबित की हदीस से प्रमाणित की जा सकती है।