केरल के कोझिकोड टाउन हॉल के सामने मुस्लिम महिलाओं के एक समूह ने रविवार (6 नवंबर 2022) को हिजाब जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। भारत में हिजाब जलाने की यह पहली घटना है। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएँ शामिल हुईं। ऐसा करके उन्होंने ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी आंदोलन का समर्थन करते हुए एकजुटता का संदेश दिया। यह घटना केरल युक्तिवादी संगम द्वारा आयोजित एक सेमिनार के दौरान हुई।
Kerala | A protest burning hijab was staged in Kozhikode on November 6th, in solidarity with the anti-hijab movement in Iran. pic.twitter.com/vVGaq6UEsG
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोझिकोड में ‘फैनोस-साइंस एंड फ्री थिंकिंग’ टाइटल का एक सेमिनार आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम के तहत मुस्लिम महिलाओं ने ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाई और संगठन की छह मुस्लिम महिलाओं की अगुवाई में हिजाब जलाया गया। इस दौरान महिलाएँ हाथों में पोस्टर लेकर नारे लगाते हुए भी नजर आईं।
युक्तिवादी संगम एक राष्ट्रीय संगठन है, जिसके द्वारा हर साल इस तरह के सेमिनार आयोजित किए जाते हैं। इस आयोजन में मुस्लिम महिलाओं सहित विभिन्न धर्मों के लोग भाग लेते हैं, जो संगठन का हिस्सा हैं।
गौरतलब है कि ईरान में इन दिनों हिजाब विरोधी प्रदर्शन तेज हो गया है। इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हिजाब नहीं पहनने के कारण हुई थी। ईरान में 13 सितंबर 2022 को हिजाब न पहनने की वजह से महसा अमीनी (22) को मोरल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हिरासत में उसे इतना मारा गया कि वह कोमा में चली गई। तीन दिन बाद यानी 16 सितंबर को उसकी मौत हो गई। इसके बाद से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए, जो कि सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण हिंसक होते चले गए। महसा अमीनी की हत्या के बाद से महिलाएँ सड़कों पर उतर कर विरोध कर रही हैं। वे हिजाब फेंककर, जलाकर और अपने बालों को काटकर हिजाब के लिए इस्लामी सरकार का विरोध कर रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खुमेनाई की तस्वीरें भी जलाई थीं। इन प्रदर्शनकारी महिलाओं को देश-दुनिया से भारी समर्थन मिल रहा है।
भारत से भी ईरानी की महिलाओं को लगातार समर्थन मिल रहा है। बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा और मंदाना करीमी ने हिजाब (Hijab) का विरोध किया है। वहीं, बॉलीवुड में काम करने वाली ईरानी अभिनेत्री एलनाज नोरौजी (Elnaaz Norouzi) ने हिजाब का विरोध करते हुए अपने कपड़े उतार दिए। इसका एक वीडियो उन्होंने इंस्टाग्राम पर भी शेयर किया था।
सेक्स करने की उम्र लड़कियों के लिए क्या होनी चाहिए… ये बहस कोई नई नहीं है। केवल बुद्धिजीवी ही नहीं बल्कि अदालत भी इस पर विचार-विमर्श करता रहता है। 3 साल पहले मद्रास हाईकोर्ट में लड़कियों के लिए सेक्स की सही उम्र तय करने का मुद्दा उठा था और अब 2022 में इस विषय पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने लॉ कमीशन से कहा है कि वो जरा इस मामले को देखें कि क्या लड़कियों की सेक्स की उम्र 16 नहीं हो सकती।
कोर्ट का तमाम मामलों को मद्देनजर रखते हुए कहना है कि 16 साल की उम्र में लड़कियाँ प्रेम में पड़कर घर से भाग जाती हैं और फिर लड़के के साथ उनके शारीरिक संबंध बनते हैं। ये उनकी इच्छा से होता है लेकिन जब बात सुनवाई की आती है तो ये तय करना पड़ता है कि आईपीसी की धारा और पॉक्सो की धारा के तहत अपराध है या नहीं।
लाइव लॉ की खबर का स्क्रीनशॉट
अदालतों की यह दुविधा सही है… शायद कोर्ट में ऐसे तमाम मामले आते हों जब न्यायधीशों को नाबालिग लड़कियों की नादानी के कारण और कानून के दायरे में रहते हुए सख्त फैसले देने पड़ते हों, आपसी सहमति से बने संबंधों को भी अपराध कहना पड़ता हो… मगर क्या इस दुविधा को सुलझाने का उपाय केवल यह है कि लॉ कमीशन से लड़कियों की सेक्स की उम्र कम करने पर विचार करने को कहा जाए?
क्या ये समाज के लिए दो विरोधाभासी बातें नहीं कि एक ओर देश की सरकार लड़कियों को शिक्षित करने के लिए, उनकी भलाई के लिए शादी की उम्र 18 से 21 करने पर लगातार विचार कर रही है, ताकि उनका सामाजिक, मानसिक विकास हो सके। वहीं दूसरी ओर हम केस की जटिलताओं को देखते हुए लड़कियों की सेक्स करने की उम्र ही कम करने की बात कर रहे हैं।
मैं जानती हूँ कि सेक्स और शादी का आपस में संबंध नहीं होता, न ही लोकतंत्र में कोई इसके लिए बाध्य है कि शादी के बाद ही सेक्स होना चाहिए… पर यहाँ बात उम्र की है। 16 की उम्र में अधिकांश लड़कियाँ 10वीं या 12वीं में पढ़ाई कर रही होती हैं। ये समय उनके शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास के लिए अहम होता है। समाज में चल रही सभी चीजें, सिनेमा में दिखाए जा रहे सभी दृश्य उन्हें भीतर तक प्रभावित करते हैं। ऐसे में उनके सामने सेक्स को एक अधिकार के तौर पर रखना कितना उचित होगा ये एक बड़ा सवाल होना चाहिए।
संभव है लड़कियाँ इस उम्र में आकर्षण और प्रेम के बीच उलझकर अपनी शिक्षा और भविष्य को ताक पर रखने के लिए तैयार हो जाएँ। पर, क्या ये फर्ज समाज का, अदालत का नहीं है कि वो सामने आ रही जटिलताओं से ऊपर उठकर लड़कियों की मनोवस्था को केंद्रित करने पर विचार करें। ऐसा करने से संभवत: उन मामलों में अपने आप कमी आ जाए जहाँ नाबालिग की सहमति से बनाए रिश्ते के बाद लड़कों पर सवाल उठते हैं।
कोर्ट ने खुद कहा कि लड़कियाँ कम उम्र में घरों को छोड़कर अपने प्रेमी के साथ रहने चली जाती हैं। आप सोचिए क्या उन लड़कियों से ये अपेक्षा करना ठीक है कि वो अपने सही-गलत का निर्णय इतनी कम उम्र में ले पाएँगी और इन सबका प्रभाव उनके मानसिक विकास पर नहीं पड़ेगा।
सरकार हो, समाज हो या सामान्य जन हों…एक लड़की की 16 की उम्र आते-आते सबका ध्यान इस बात पर ज्यादा होना चाहिए कि वो उसके सामाजिक विकास में कैसे उसका साथ दे सकते हैं। न कि इस बात में अगर उसका मन किसी गलत दिशा की तरफ भाग रहा है तो या उसके लिए उसे आजाद कहकर खुली छूट दे दी जाए। वरना समाज की उलाहना देकर उसके सारे अधिकार छीन कर घरों में बैठा दिया जाए।
आज का दौर इंटरनेट का दौर है। इस समय में तमाम तरह के कंटेंट को सोशल मीडिया पर देखते-देखते रिलेशनशिप का ज्ञान बड़ों से ज्यादा छोटे बच्चों के पास आ गया है। इसका मतलब ये नहीं कि वो उसे संभालने के भी योग्य हो गए हों। समय चाहे पहले का हो या फिर अब का शिक्षा ग्रहण करने में जितना समय तब लगता था उतना ही अब भी लगता है। 16 तो फिर वो उम्र होती है जिसमें ठान लिया जाना चाहिए कि क्या जीवन को कौन सी दिशा में लेकर जाना है। फिर चाहे वो अकादमिक क्षेत्र में हो या खेल-कूद में।
प्रेम के नाम पर किसी की ओर आकर्षित होना और फिर अपने आपको पूरी तरह उसे समर्पित कर देना केवल एक 16 वर्ष की लड़की को मनोवस्था को कमजोर बनाता है इसके अतिरिक्त कुछ नहीं।
आज सोशल मीडिया पर किसी का पसंद आना और फिर घरवालों को बिन बताए उससे मिलने के लिए निकल जाना…बहुत सामान्य खबरें लगने लगीं हैं, लेकिन इसके बाद लड़की के साथ क्या होता ये कोई नहीं जानता। वो या तो किसी बुरे कारण से खबरों का हिस्सा बन जाती हैं और नहीं तो अपने जीवन को जीवनसाथी के साथ चलाने के लिए संघर्ष करती रहती हैं।
समय चाहे कितना बदल जाएगा… आधुनिकता के नाम पर कितने बदलाव हो जाएँगे, मगर लड़की के विकास के लिए कम उम्र में सेक्स करने का अधिकार मिलना कभी भी शिक्षा के अधिकार से ऊपर नहीं जा सकता। 16 की उम्र शिक्षित होने, खुद को तन-मन दोनों से मजबूत बनाने, भविष्य सुरक्षित करने की होती है। इस गुमान में जीने की नहीं कि पास में सेक्स का अधिकार है…।
कोर्ट के सामने तमाम केस हैं जिसके कारण ऐसे मुद्दों पर विचार करने को कहना उनकी जरूरत है। लेकिन आप अपनी संस्कृति और आसपास की लड़कियों को देखकर सोचिएगा कि क्या 16 साल की उम्र में अगर सहमति से सेक्स करने का अधिकार दे दिया जाता है तो इससे उन लड़कियों का कितना भला होगा जो जीवन में बहुत कुछ करने की चाह रखती हैं, लेकिन कुछ डिस्ट्रैक्शन के कारण वो सब खोती जा रही हैं और ऐसे कदम उठा रही है जिससे न उनका भविष्य बल्कि उनकी जिंदगी भी खतरे में पड़ रही है।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में मुस्लिम भीड़ द्वारा सड़क पर नमाज़ पढ़ने का मामला सामने आया है। वीडियो वायरल होने के बाद हिन्दू संगठनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने इमाम मोहम्मद नाज़िर हुसैन और अज्ञात नमाज़ियों के खिलाफ FIR दर्ज करते हुए मामले की जाँच शुरू कर दी है। पुलिस फुटेज के आधार पर बाकी नमाज़ियों की पहचान कर रही है। शिकायत में इलाके को हिन्दू बहुल बताया गया है। मामला शुक्रवार (4 नवम्बर 2022) का है।
यह मामला खोड़ा थाना क्षेत्र का है। पुलिस में हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता विकास तिवारी द्वारा शिकायत दर्ज करवाई गई है। विकास के मुताबिक, हिन्दू बहुल दीपक विहार इलाके में 50 गज के दायरे में एक मस्जिद है। यहाँ 300 गज की सड़क पर पहले से नमाज़ पढ़ी जाती रही है। शिकायतकर्ता ने पहले भी की गई शिकायतों का हवाला देते हुए प्रशासन ने नमाज़ियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। उन्होंने लिखा कि सख्ती होने पर बीच-बीच में नमाज़ बंद हो जाती है, लेकिन थोड़े समय बाद वो फिर से शुरू कर दी जाती है।
विकास ने 5 नवंबर, 2022 को सोशल मीडिया पर पुलिस को टैग करते हुए नमाज़ का वीडियो भी शेयर किया था। मामले की जाँच नेहरू गार्डन चौकी इंचार्ज ने की। अपनी जाँच में उन्होंने पाया कि जहाँ नमाज़ पढ़ी गई, वहाँ ख्वाजा गरीब नवाज़ नाम की मस्जिद है। इस मस्जिद में मूल रूप से बिहार के कटिहार का रहने वाला इमाम मोहम्मद नाज़िर हुसैन रहता है। नाजिर के अब्बा का नाम मोहम्मद फज़लुल रहमान है। उसी के द्वारा लगभग 25 से 30 लोगों को गली में जमा कर के नमाज़ पढ़वाई गई थी। पुलिस ने इमाम की हरकत को इलाके में लगी धारा 144 का उल्लंघन माना है।
थाना खोडा पर अभियोग पंजीकृत कर वैधानिक कार्यवाही प्रचलित की गई है ।
विकास की शिकायत पर पुलिस ने IPC की धारा 188 के तहत केस दर्ज किया है। इस केस में इमाम नाज़िर को नामजद करते हुए 25 से 30 नमाज़ियों को अज्ञात में दिखाया गया है। ऑपइंडिया के पास मामले में दर्ज FIR मौजूद है।
सुकेश चंद्रशेखर ने दिल्ली के उपराज्यपाल विनय सक्सेना को एक और चिट्ठी भेजी है। यह उसकी तीसरी चिट्ठी है। इसमें उसने अपनी जान को दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन से खतरा बताया है। साथ ही इस मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की संलिप्तता को उजागर करते हुए दावा किया है कि 50 करोड़ रुपए मिलने के बाद वे उसके साथ डिनर करने दिल्ली के हयात होटल आए थे।
तीन पन्नों की इस चिट्ठी में सुकेश ने CBI जाँच और FIR दर्ज करने की माँग की है। कहा है कि प्रोटेक्शन मनी वसूलने के मामले की सच्चाई सामने आने के बाद उसके साथ कोई अनहोनी हो सकती है। उसने जैन के अलावा तिहाड़ जेल के पूर्व महानिदेशक संदीप गोयल पर भी धमकाने का आरोप लगाया है। सुकेश के वकील ने इस पत्र को एलजी को भेजे जाने की पुष्टि की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एलजी सक्सेना को लिखे पत्र में सुकेश ने आम आदमी पार्टी से हुए लेन-देन का जिक्र किया है। खुद पर भारी दबाव होने की भी बात कही है। चिट्ठी में कहा गया है कि मामला सिर्फ सत्येंद्र जैन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि केजरीवाल भी इसमें शामिल है।
I request you to direct an urgent CBI investigation & allow me to file FIR as the pressure is getting too much& any undue event may take place before the truth about AAP is exposed: Conman Sukesh Chandrashekhar in a letter written to Delhi LG that has been confirmed by his lawyer pic.twitter.com/IaxikFrNk6
चिट्ठी में उसने कहा है कि उसे पता चला है कि केजरीवाल ने उसे देश का सबसे बड़ा ठग बताया है। कहा है कि चुनाव देखकर बीजेपी उसका इस्तेमाल कर रही है। वे मामले को भटकाना चाहते हैं। इसलिए सच उजागर होना चाहिए।
सुकेश ने पूछा है कि यदि वह सबसे बड़ा ठग है तो केजरीवाल उसके साथ डिनर करने के लिए 2016 में हयात में क्यों आए थे। उसने बताया है कि यह मुलाकात 50 करोड़ रुपए कि डिलिवरी के बाद हुआ था।
इससे पहले पत्र में सुकेश ने केजरीवाल के लिए लिखा था, “अगर आपके हिसाब से मैं दुनिया का सबसे बड़ा ठग हूँ तो आपने मुझसे किस बिनाह पर 50 करोड़ लिए और मुझको राज्यसभा सीट देने का वादा किया। ये सब क्या आपको महाठग नहीं बनाता?” एक पत्र में उसने खुलासा किया था कि दिल्ली के जेल मंत्री रहते हुए सत्येंद्र जैन ने उससे ‘प्रोटेक्शन मनी’ के तौर पर लिया था।
सानिया मिर्जा (Sania Mirza) के तलाक को लेकर अटकलें लग रही हैं। उन्होंने 2010 में पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक से निकाह किया था। अटकलें सानिया की एक पोस्ट से शुरू हुई हैं, जिसमें उन्होंने लिखा है, “टूटे हुए दिल आखिर कहाँ जाते हैं…।”
12 साल पहले जब यह निकाह हुआ था, तब भी काफी विवाद हुआ था। सानिया की सगाई बचपन के दोस्त सोहराब मिर्जा से हुई थी। लेकिन बाद में यह टूट गई। इसी तरह हैदराबाद की आयशा नामक महिला ने दावा किया था कि शोएब मलिक उससे फोन पर पहले ही निकाह कर चुके हैं। 2010 में जब सानिया शोएब का निकाह हुआ तो आयशा के दावे खूब चर्चित हुए थे।
वैसे विवाद और सानिया के रिश्ते केवल निकाह तक सीमित नहीं हैं। 2005 में उनकी स्कर्ट को लेकर एक कट्टरपंथी संगठन ने फतवा ही जारी कर दिया था। इसके अलावा वीना मलिक के साथ सोशल मीडिया पर 2019 में हुई उनकी तकरार भी काफी चर्चा में रही। यह बहस क्रिकेट वर्ल्ड कप में भारत के हाथों पाकिस्तान की हार के बाद हुई थी। पाकिस्तानी अभिनेत्री वीना मलिक (Veena malik) ने हार के लिए शोएब मलिक और उनकी बीवी सानिया मिर्जा को निशाना बनाया था।
दरअसल, पाकिस्तान की हार के बाद एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें सानिया मिर्जा और कुछ साथी खिलाड़ियों के साथ शोएब मलिक हुक्का पार्टी करते हुए देखे गए थे। इसके बाद वीना मलिक ने ट्वीट कर कहा था, “सानिया, दरअसल मैं तुम्हारे बच्चे के लिए बहुत चिंतित हूँ। तुम लोग अपने बेटे को शीशा पैलेस लेकर कैसे चले गए? क्या यह उसकी सेहत के लिए हानिकारक नहीं है। साथ ही जहाँ तक मुझे याद है, आर्चीज में जंक फूड मिलता है जो एक एथलीट और बच्चे के लिए ठीक नहीं है। यह आपको अच्छी तरह पता होना चाहिए क्योंकि आप एक माँ के साथ एथलीट भी हैं।”
जवाब में सानिया मिर्जा ने ट्वीट कर कहा था, “वीना मैं अपने बच्चे को शीशा पैलेस लेकर नहीं गई थी। आपको और बाकी दुनिया को ये चिंता करने की जरूरत नहीं है कि मैं अपने बच्चे का ख्याल किसी से भी कम नहीं रखती हूँ। दूसरी बात ये है कि मैं ना तो पाकिस्तानी क्रिकेट टीम की डाइटीशियन हूँ और ना ही उनकी अम्मी, प्रिंसिपल और टीचर।”
Veena,I hav not taken my kid to a sheesha place. Not that it’s any of your or the rest of the world’s business cause I think I care bout my son a lot more than anyone else does 🙂 secondly I am not Pakistan cricket team’s dietician nor am I their mother or principal or teacher https://t.co/R4lXSm794B
इसके बाद सानिया ने एक और ट्वीट कर कहा था, “मैं नहीं जानती वह कब सोते हैं, कब उठते हैं और कब खाते हैं। तीसरी बात और बहुत महत्वपूर्ण मगर मैं तुम्हारी जगह होती तो मैं अपने बच्चों को लेकर और चिंतित होती, क्योंकि वह तुम्हारी अश्लील मैगजीन कवर फोटो देखता। तुम जानती हो यह खतरनाक हो सकता है। सही कहा ना? लेकिन शुक्रिया इतना चिंतित होने के लिए।” बाद में सानिया ने यह ट्वीट डिलीट कर दिया। लेकिन तब तक वीना मलिक इसका स्क्रीनशॉट ले चुकी थीं। फिर इस स्क्रीनशॉट के साथ उन्होंने दर्द भरे कई ट्वीट किए थे।
कौन नेता कितना लोकप्रिय है या उसका किसी खास क्षेत्र में कितना प्रभाव है, मीडिया इसका अनुमान अक्सर चुनावी रैलियों और रोड शो में भाग लेने वाली भीड़ को देखकर लगाती रही है। ये बात भी किसी से छिपी नहीं है कि इसके लिए नेता अपनी पूरी ताकत झोंक देते हैं और कई नेताओं द्वारा तो रैलियों में लोगों को बुलाने के लिए तरह-तरह के तिकड़म आजमाए जाते हैं।
हालाँकि, समय-समय पर ऐसे वीडियो भी वायरल होते रहते हैं, जिसमें ऐसे ‘समर्थक’ अक्सर रैली, रोड शो और यहाँ तक कि उस नेता के बारे में अनजान होते हैं, जिनके समर्थन में उन्हें जुटाया जाता है। ऐसा हाल ही में गुजरात में अपार भीड़ जुटाने का दावा करने वाले आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल (Arvind kejriwal) द्वारा राजकोट में आयोजित रोड शो के साथ हुआ। अरविंद केजरीवाल ने रविवार (6 नवंबर, 2022) को गुजरात के राजकोट पूर्व निर्वाचन क्षेत्र में एक रोड शो किया, जहाँ एक महीने से भी कम समय में चुनाव होने हैं।
‘राजकोट ईस्ट’ में भी स्थानीय लोग बड़ी संख्या में AAP के रोड-शो में शामिल हुए। https://t.co/FVWJ0SI20T
स्थानीय निवासी केजरीवाल के बारे में काफी अनजान थे और कुछ को यह भी नहीं पता था कि वे किसके रोड शो में भाग ले रहे थे और क्यों। वे सिर्फ इसलिए आए क्योंकि उनके जान-पहचान या पड़ोस के AAP नेताओं ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा था। ‘बीबीसी गुजराती’ की ओर से शेयर किए गए एक वीडियो में, केजरीवाल के रोड शो में शामिल हुई राजकोट की कुछ महिलाओं से सवाल पूछे गए, जिसका उन्होंने बहुत ही रोचक तरीके से जवाब दिया।
जब ‘बीबीसी गुजराती’ के रजनीश ने केजरीवाल के रोड शो में भाग लेने वाली एक टेम्पो पर महिलाओं के एक समूह से पूछा कि वो किस रैली में हिस्सा लेने आई हैं, तो उनके पास कुछ दिलचस्प और मनोरंजक जवाब थे। एक महिला हंसाबेन भरतभाई परमार ने बड़े गर्व से कहा कि ‘केजरीवाला’ राजकोट आए हैं । यह पूछे जाने पर कि केजरीवाल कौन हैं, उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता।
उन्होंने कहा, “ये तो मालूम नहीं कौन केसरीवाला, केजरीवाला… सवर्णवाला।” गुजराती में सवर्ण का मतलब झाड़ू होता है, जो आम आदमी पार्टी का चुनाव चिन्ह है। हालाँकि, जब उनसे जोर देकर केजरीवाल के बारे में पूछा गया तो, तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता।
एक अन्य महिला ने कहा कि वह ‘मितेशभाई’ की रैली में भाग ले रही हैं, जो उनका पड़ोसी है। उन्होंने कहा कि मितेशभाई उसे यह कहते हुए रैली में ले आए कि अगर वह इसमें शामिल होंगी, तो स्कूल की फीस माफ कर दी जाएगी, पानी का बिल, बिजली का शुल्क, सब मुफ्त हो जाएगा। यह पूछे जाने पर कि रैली किस पार्टी के लिए थी, उन्होंने कहा कि यह आम आदमी पार्टी की रैली थी, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि नेता कौन है। एक अन्य महिला द्वारा इशारा किए जाने के बाद महिला ने अरविंद केजरीवाल का नाम लिया।
यह पूछे जाने पर कि गुजरात का मुख्यमंत्री कौन है, महिला ने तुरंत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया। पत्रकार फिर दूसरी महिलाओं के समूह से यही सवाल करता है, सभी एक स्वर में नरेंद्र मोदी कहती हैं। जब उन्होंने पूछा कि भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री कौन हैं, तो हंसाबेन भरतभाई परमार जवाब देती हुई कहती हैं कि जब वे राजकोट से बाहर नहीं निकले हैं तो उन्हें कैसे पता चलेगा।
फिर पत्रकार पूछता है कि वे किसके रोड शो में भाग ले रहे हैं। दो महिलाओं ने कहा कि वह नाम नहीं जानती। जब उन्होंने पूछा कि क्या वे मुख्यमंत्री बदलना चाहते हैं, तो एक महिला ने कहा कि उन्हें AAP का झंडा दिया गया है, इसलिए इसका झंडा उठाया है।
केजरीवाल ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी राज्य में चुनाव प्रचार के लिए भी शामिल किया है, जबकि पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ बदस्तूर जारी है। इस वजह से दिल्ली और आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुँच रही है। केजरीवाल लंबे समय से दिल्ली की सत्ता में हैं। इसके बावजूद दिल्ली में हवा की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ है। राष्ट्रीय राजधानी हर साल गैस चैंबर में बदल जाती है, जिससे साँस लेने में तकलीफ होती है।
भारत (India) ने टी-20 वर्ल्ड कप (T20 World Cup 2022) में रविवार (6 नवंबर, 2022) को जिम्बाब्वे (Zimbabwe) को 71 रनों की करारी शिकस्त दी। हालाँकि, इस मैच से पहले ही टीम इंडिया का सेमीफाइनल के लिए टिकट कट चुका था। इस दौरान मैच का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा के फैन का है, जो उनसे मिलने के लिए मेलबर्न के मैदान में घुस गया। यह घटना दूसरी पारी यानी जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी के दौरान हुई।
काले कपड़े पहने हुआ यह फैन अपने हाथ में तिरंगा लिए रोहित शर्मा के करीब पहुँच गया। रोहित शर्मा को देखते ही उसकी आँखों से आँसू निकल गए, लेकिन वह ज्यादा बात नहीं कर सका।
इस दौरान मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) में सुरक्षा गार्डों ने उसे पकड़ लिया और मैदान से बाहर ले गए। कहा जा रहा है कि मैदान में जबरन घुसने के कारण फैन पर 6.5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है।
A fan invaded the field today to meet Rohit Sharma, he was in tears when he came close to Rohit.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय कप्तान रोहित शर्मा का फैन जब मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में घुसा उस वक्त भारत की गेंदबाजी पारी का 17वाँ ओवर चल रहा था। सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह उन्हें चकमा देकर कप्तान की तरफ बढ़ने लगा। तभी एक गार्ड ने उसे लपक कर पकड़ लिया। इसके बाद दूसरा गार्ड भी आ गया। दोनों गार्डों के इस तरह से उसे पकड़ने पर रोहित शर्मा वहाँ फौरन पहुँचे और मासूम फैन को आराम से बाहर निकालने को कहा।
इस दौरान उसकी आँखों में आँसू आ गए। फैन अपने फेवरिट क्रिकेटर को पास से देकर भावुक हो गया, लेकिन कप्तान रोहित शर्मा ने उसे प्यार से बाहर जाने को कहा।
बता दें कि भारतीय टीम अपने आखिरी लीग मैच में जिम्बाब्वे को 71 रनों से हराकर ग्रुप 2 में पहले स्थान पर है। इसके साथ ही टीम इंडिया प्वाइंट टेबल में टॉप पर रहते हुए सेमीफाइनल में पहुँच चुकी है। ऐसे में ग्रुप-1 में दूसरे नंबर की टीम इंग्लैंड से भारत का मुकाबला होगा। 10 नवंबर, 2022 को एडिलेड में भारतीय टीम सेमीफाइनल में इंग्लैंड के साथ भिड़ेगी। फाइनल में जो दो टीमें पहुँचेंगी, उनका मुकाबला रविवार (13 नवंबर, 2022) को होगा।
भारत की स्टार टेनिस प्लेयर रह चुकीं सानिया मिर्जा और पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब मलिक के डायवोर्स को लेकर उड़ रही खबरों के बीच सानिया का एक अजीबोगरीब पोस्ट सोशल मीडिया पर सामने आया है। इस पोस्ट को देखकर लगता है कि शायद तलाक की अफवाहें सच हैं और दोनों के बीच कुछ सही नहीं चल रहा है।
सानिया ने अपने पोस्ट में लिखा है, “टूटे हुए दिल आखिर कहाँ जाते हैं… अल्लाह की तलाश में।”
इस पोस्ट के बाद से लगातार सोशल मीडिया पर लोग अपने अपने कयास लगाने में जुटे हुए हैं। कहा जा रहा है कि कहीं ये बात सच तो नहीं कि दोनों तलाक ले रहे हों।
बता दें कि इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट बॉलीवुड लाइफ की खबर से लिया गया है। खबर लिखते समय सानिया की स्टोरी में ऐसा कोई पोस्ट नहीं था। इसलिए ऑपइंडिया इसके सही या गलत होने की पुष्टि नहीं करता। लेकिन खबरों के अनुसार, शोएब मलिक और सानिया मिर्जा में दूरियाँ एक शो ‘स्प्रेड लाइक का वाल्ड फायर’ के बाद शुरू हुईं थी जहाँ शोएब पर इल्जाम लगा था कि वो सानिया को धोखा दे रहे हैं।
12 साल पहले हुआ था निकाह
उल्लेखनीय है कि सानिया मिर्जा भारत की टेनिस स्टार हैं। वहीं शोएब पाकिस्तान के मशहूर क्रिकेटर। दोनों का निकाह 2010 में हुआ था। इस निकाह के कारण सानिया की काफी आलोचना भी हुई थी। हालाँकि तब सानिया खुश थीं। मगर अब 12 साल बाद हालात वैसे नहीं हैं। दोनों के रिश्तों पर सवाल उठ रहे हैं। मीडिया में लगातार खबरें आ रही हैं। इस बीच सानिया के ऐसे पोस्ट ने उन अटकलों को और रफ्तार देदी है जो दावा कर रहे थे कि सानिया और शोएब का तलाक होगा। आपको बता दें दोनों का एक बेटा भी है इजहान मलिक। उसके बर्थडे पर पिछले दिनों शोएब मलिक ने एक पोस्ट शेयर किया था। उसमें उन्होंने कहा था कि वो जहाँ भी रहें इजहान को मोहब्बत करते रहेंगे।
विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर का संचालन करने वाली ट्रस्ट तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने एक श्वेत पत्र जारी किया है। शनिवार (5 नवंबर 2022) को जारी श्वेत पत्र के अनुसार ट्रस्ट के पास 2.26 लाख करोड़ रुपए से अधिक की प्रॉपर्टी है।
मंदिर ट्रस्ट (Tirupati Temple Trust) ने बताया है कि उसका राष्ट्रीयकृत बैंकों में ₹5,300 करोड़ से अधिक का 10.3 टन सोना जमा है। 15,938 करोड़ रुपए कैश हैं। इस जानकारी के बाद यह स्पष्ट है कि TTD ने आंध्र प्रदेश और केंद्र सरकार के बॉन्ड की प्रतिभूतियों में निवेश नहीं किया है, जैसा कि दावा किया जा रहा था।
ट्रस्ट के मुताबिक, साल 2022-23 में 3,100 करोड़ का बजट पेश किया गया था, जिसमें से 668 करोड़ रुपए तो बैंकों से मिलने वाले ब्याज के ही थे। मंदिर के एक अधिकारी ने कहा कि तिरुपति में नकद और सोने के आभूषण चढ़ाने में लगातार वृद्धि हो रही है। बैंकों से मिलने वाले ब्याज के कारण भी यह बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। मंदिर के अधिकारियों ने आगे कहा कि ट्रस्ट द्वारा संपत्तियों का जो विवरण दिया गया है, उनमें प्राचीन आभूषणों और कुछ गेस्ट हाउस को शामिल नहीं किया गया है।
30 सितंबर, 2022 तक सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के 24बैंकों में TTD के 15,938 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा थी। इसमें तीन साल में 2,913 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई है। बता दें कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम की देश भर में 7,000 एकड़ से अधिक की 900 से अधिक अचल संपत्तियाँ हैं। यह आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, ओडिशा, हरियाणा, महाराष्ट्र और नई दिल्ली में मंदिरों का संचालन करती है।
ट्रस्ट बोर्ड ने यह भी दावा किया कि उसने 2019 से अपने इन्वेस्टमेंट गाइडलाइंस को मजबूत किया है। बैंकों में मंदिर का सोना जमा 2019 में 7.3 टन से बढ़कर 2022 में 10.25 टन हो गया है। पिछले तीन सालों की इन्वेस्टमेंट में 2,900 करोड़ की वृद्धि हुई है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और इंडियन ओवरसीज बैंक में जमा सोने पर भी अच्छा ब्याज मिल रहा है। इसमें एसबीआई के पास 9.8 टन सोना जमा है और शेष इंडियन ओवरसीज बैंक के पास है।
तिरुपति मंदिर के बारे में मान्यता है कि जो भी यहाँ अपने पाप और बुराइयों को छोड़ जाता है, उसके दुख देवी लक्ष्मी खत्म कर देती हैं। इसलिए यहाँ आने वाले श्रद्धालु बुराइयों के तौर पर अपने बाल छोड़ जाते हैं। साथ ही इस मंदिर में भगवान को चढ़ाया गया तुलसी पत्र भी भक्तों को नहीं दिया जाता। उसे मंदिर परिसर के कुएँ में डाल दिया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के नागरिकों को मिल रहे आरक्षण (EWS) को बरकरार रखा है। चीफ जस्टिस यूयू ललित के नेतृत्व में 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने 3:2 से संविधान के 103वें संशोधन के पक्ष में फैसला सुनाया। दूसरी ओर कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने फैसले के विरोध में सुप्रीम कोर्ट को ‘जातिवादी’ करार दिया।
CJI UU Lalit agreed with Justice S Ravindra Bhat & gave a dissent judgement
Five-judge Constitution bench by a majority of 3:2 upholds the validity of Constitution’s 103rd Amendment Act which provides 10% EWS reservation in educational institutions and government jobs pic.twitter.com/OwGygzSTpP
हालाँकि, खुद चीफ जस्टिस EWS आरक्षण के खिलाफ थे और उनका साथ जस्टिस रविन्द्र भट्ट ने दिया। उल्लेखनीय है कि मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित का सोमवार (7 नवंबर, 2022) को आखिरी कार्य दिवस भी है। उनका कहना था कि SC/ST वर्ग को इससे बाहर नहीं रखा जा सकता है। जिस अधिनियम की वैधता पर सुनवाई हो वही थी, वो शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 10% ईडब्ल्यूएस आरक्षण प्रदान करता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह अब बरकरार रहेगा।
वहीं जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने EWS आरक्षण के पक्ष में फैसला सुनाया। तीन जजों ने कहा यह संशोधन संविधान के मूल भावना के खिलाफ नहीं है। जस्टिस रवींद्र भट्ट ने EWS कोटे पर अलग रुख अपनाया है। जस्टिस भट्ट ने कहा कि संविधान सामाजिक न्याय के साथ छेड़छाड़ की अनुमति नहीं देता है। जस्टिस भट्ट ने कहा आरक्षण की सीमा पार करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उनका मानना है कि आरक्षण देना गलत नहीं है, लेकिन EWS आरक्षण एससी-एसटी और ओबीसी के लोगों को भी मिलना चाहिए।
जस्टिस जेबी पारदीवाला ने EWS कोटा को सही बताया और कहा कि वो जस्टिस माहेश्वरी और जस्टिस त्रिवेदी के फैसले के साथ हैं। जस्टिस बेला त्रिवेदी ने अपने फैसले में कहा कि एससी-एसटी और ओबीसी को तो पहले से ही आरक्षण मिला हुआ है, इसलिए EWS आरक्षण को इसमें शामिल नहीं किया जा सकता है। वहीं जस्टिस माहेश्वरी ने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण देना संविधान की मूल भावना के खिलाफ नहीं है।
फैसले के बाद इसका स्वागत और विरोध करते कई तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रहीं हैं। कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने धड़ाधड़ ट्वीट कर सुप्रीम कोर्ट को ही जातिवादी बता दिया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “सुप्रीम कोर्ट जातिवादी है, अब भी कोई शक! EWS आरक्षण की बात आई तो कैसे पलटी मारी कि 50% की सीमा संवैधानिक बाध्यता नहीं है, लेकिन जब भी SC/ST/OBC को आरक्षण देने की बात आती थी तो इंदिरा साहनी मामले में लगी 50% की सीमा का हवाला दिया जाता रहा।”
सुप्रीम कोर्ट जातिवादी है, अब भी कोई शक! EWS आरक्षण की बात आई तो कैसे पलटी मारी कि 50% की सीमा संवैधानिक बाध्यता नही है लेकिन जब भी SC/ST/OBC को आरक्षण देने की बात आती थी तो इंदिरा साहनी मामले में लगी 50% की सीमा का हवाला दिया जाता रहा।
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि वो गरीब सवर्णों के आरक्षण के विरुद्ध नहीं हैं, बल्कि उस मानसिकता के हैं कि जब जब SC/ST/OBC का मामला आया तो हमेशा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इंदिरा साहनी मामले में लगी 50% सीमा पार नहीं की जा सकती।
मैं गरीब सवर्णों के आरक्षण के विरुद्ध नही हूं बल्कि उस मानसिकता का हूं कि जब जब SC/ST/OBC का मामला आया तो हमेशा SC ने कहा कि इंदिरा साहनी मामले में लगी 50% सीमा पार नही की जा सकती।
ईडब्ल्यूएस कोटे की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। इस मामले में कई याचिकाओं पर लंबी सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने 27 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। तत्कालीन सीजेआई एसए बोबडे, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी, जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने पांच अगस्त, 2020 को इस मामले को संविधान पीठ को भेज दिया था।