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महाराष्ट्र में 180km लंबा बनेगा 10 लेन वाला नासिक-पुणे एक्सप्रेस-वे: शिंदे सरकार का फैसला, फ्लाइट लैंडिंग और टेकऑफ की भी होगी सुविधा

महाराष्ट्र (Maharashtra) में भाजपा समर्थित एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) सरकार के आने के बाद से ही राज्य में विकास को प्राथमिकता मिल रही है। अभी हाल ही में 701 किलोमीटर लंबे मुंबई-नागपुर एक्सप्रेस-वे का काम पूरा हुआ है। सीएम एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस की नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार अब पुणे और नागपुर को जोड़ने वाली एक और एक्सप्रेस-वे बनाने के लिए तैयार है।

यह नियोजित एक्सप्रेस-वे चिंबली के पास प्रस्तावित पुणे रिंग रोड से शुरू होकर लगभग 180 किलोमीटर लंबा होगा और राष्ट्रीय राजमार्ग 60 पर शिंदे के पास समाप्त होगा। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के तत्वाधान में यह काम पूरा होगा।

MSRDC के एक अधिकारी ने कहा, “एक औद्योगिक शहर होने के नाते यहाँ आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि देखते हुए माल और यात्री परिवहन की माँग में वृद्धि होगी। वर्तमान में मुंबई और पुणे यशवंतराव चव्हाण एक्सप्रेस-वे तथा मुंबई और नासिक हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे महाराष्ट्र समृद्धि महामार्ग से जुड़े हुए हैं। हालाँकि, पुणे और नासिक के बीच कोई एक्सप्रेस-वे कनेक्टिविटी नहीं है, लेकिन एक चार लेन का कैरिजवे राष्ट्रीय राजमार्ग आंशिक रूप से पूरा हो चुका है।”

वहीं, मुंबई और पुणे पहले से ही एक एक्सप्रेस-वे से जुड़े हुए हैं। अब निर्माणाधीन मुंबई-नागपुर एक्सप्रेस-वे मुंबई को नासिक से जोड़ेगा। इस प्रकार पुणे-नासिक एक्सप्रेस-वे मुंबई, नासिक और पुणे के बीच में तेजी से विकसित हो रहे ‘गोल्डन ट्राएंगल’ क्षेत्र को आपस में जोड़ेगा।

पुणे-नासिक एक्सप्रेस-वे पुणे जिले के जुन्नेर, अम्बेगाँव, खेड़ तथा नागेड़ जिले के संगमनेर के साथ-साथ नासिक जिले के सिन्नार से होकर गुजरेगा। इसे दस लेन एक्सप्रेस-वे के रूप में विकसित करने की योजना है।

एक अधिकारी ने बताया, “एक्सप्रेस-वे पर फ्लाइट लैंडिंग और टेकऑफ़ की सुविधा होगी। इसके अलावा, हर 5 किलोमीटर पर आपातकालीन टेलीफोन, पार्किंग और ट्रक वे, एम्बुलेंस और टोइंग सुविधाएँ, त्वरित प्रतिक्रिया वाहन होगी। हर 50 किलोमीटर पर आराम क्षेत्र होगा, जिसमें फूड प्लाजा, ट्रॉमा सेंटर, आईटी पार्क शामिल हैं। सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं में मुफ्त वाई-फाई का उपयोग, यातायात निगरानी, सीसीटीवी आदि लगाए जाएँगे।”

निर्माणाधीन एक्सप्रेस-वे के अलावा, महाराष्ट्र सरकार पहले ही पुणे और नासिक के बीच एक सेमी हाईस्पीड रेलवे के निर्माण का काम अपने हाथों में लिया है। महाराष्ट्र सरकार ने वार्षिक बजट 2021-22 में लंबित पुणे-नासिक रेलवे परियोजना को मंजूरी दे दी है।

सेमी हाईस्पीड रेलवे लाइन की प्रस्तावित लंबाई लगभग 235 किलोमीटर है और मार्ग पर 24 स्टेशन बनाने की योजना है। ट्रेन की गति 200 किलोमीटर प्रति घंटा होगी और परियोजना की अनुमानित लागत 16,039 करोड़ रुपए है। इसमें 18 सुरंगों का निर्माण किया जाएगा। पुणे-नासिक सेमी हाईस्पीड रेल लाइन महाराष्ट्र के तीन जिलों- पुणे, अहमदनगर और नासिक से होकर गुजरेगी।

मस्जिद में घुसकर ताज मोहम्मद ने कुरान को जलाया, गिरफ्तारी के बाद बोला- ‘मैंने नहीं, मेरी रूह ने किया ये सब’

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में मस्जिद में घुसकर कुरान का अपमान करने वाले आरोपित ताज मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया गया है। वह मस्जिद से 3 किलोमीटर दूर बावूजई मोहल्ले का रहने वाला है। शाहजहाँपुर पुलिस ने आरोपित की तस्वीरें जारी करते बताया कि मजहबी ग्रंथ को नुकसान पहुँचाने वाले अभियुक्त ताज मोहम्मद (अब्बा का नाम युसुफ) को 24 घंटों के गिरफ्तार कर लिया गया। अभियुक्त से पूछताछ कर इस मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

एसपी एस आनंद ने बताया कि आरोपित की मानसिक स्थिति सही नहीं लग रही है। उसके परिजनों को भी बुलाया गया है। इनके अलावा शहर के इमाम मौलाना हुजूर अहमद मंजरी और कुछ अन्य मजहबी उलेमाओं को भी पुलिस थाने में बुलाया गया है। वहीं, आईजी रमित शर्मा ने बताया कि आरोपित पूछताछ में बहकी-बहकी बातें कर रहा है। मजहबी ग्रंथ क्यों जलाया के सवाल पर ताज मोहम्मद ने बताया, “मैंने नहीं बल्कि मेरी रूह ने जलाया है।” उसका कहना है कि वह कोई काम नहीं करता है। हमेशा इधर-उधर घूमता है। परिवार वाले उसका निकाह नहीं करवा रहे हैं, जिसकी वजह से वह बहुत परेशान रहता है।

इस मामले में वादी हाफिज हसीब ने बताया कि इस घटना के बाद इलाके में काफी तनाव है। हर रोज की तरह सुबह भी नमाज पढ़ी गई, लेकिन लोग आज उतनी बड़ी संख्या में नमाज पढ़ने नहीं आए।

बताया जा रहा है कि शाहजहाँपुर शहर के चौक कोतवाली क्षेत्र के मुहल्ला बावूजई में सैयद शाह फखरे आलम मियां मस्जिद है। बुधवार (2 नवंबर 2022) शाम को दो युवकों ने मस्जिद में घुसकर वहाँ रखे मजहबी ग्रंथ को जला दिया। जब नमाज के लिए इमाम हाफिज नदीम व अन्य लोग वहाँ पहुँचे, तो कुरान के जले हुए पन्ने देख उन्होंने मस्जिद के इमाम को सूचना दी। तकरीबन 8 बजे के आस-पास इलाके में भीड़ जमा हो गई। युवाओं ने वहाँ लगे भाजपा के होल्डिंग्स को फाड़कर उसमें आग लगा दी। इसके बाद सूचना पा​कर मौके पर पहुँचे एसपी, एसपी सिटी, एसपी ग्रामीण समेत भारी पुलिस बल ने भीड़ तितर-बितर करने के लिए लाठी चार्ज किया। इसके बाद पुलिस ने रात 9 बजे तक स्थिति पर काबू पाया। मामले का एक CCTV फुटेज भी सामने आया जिससे ताज मोहम्मद के कृत्य का खुलासा हुआ।

‘मैं नर्स बनना चाहती थी, अब ISIS में आतंकी हूँ’: The Kerala Story का टीजर आउट, 32000 महिलाओं की झकझोर देने वाली कहानी

बॉलीवुड के मशहूर निर्माता विपुल अमृतलाल शाह की फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) का टीजर रिलीज हो गया है। यह फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है। इसमें केरल की 32000 महिलाओं की तस्करी-धर्मांतरण की दिल दहला देने वाली क्रूरता दिखाई जाएगी। गुरुवार (3 नवंबर 2022) को यू-ट्यूब पर शेयर किया टीजर 1 मिनट 19 सेकंड का है। ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) का प्रभावशाली टीजर आपको बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देगा।

टीजर में एक ऐसी महिला की कहानी दिखाई गई है, जो नर्स बनने का सपना देखती थी, लेकिन उसका उसके घर से अपहरण कर लिया जाता है और अब वह महिला आईएसआईएस आतंकवादी के रूप में अफगानिस्तान में जेल में बंद है। फिल्म में बॉलीवुड एक्ट्रेस अदा शर्मा लीड रोल में हैं। एक्ट्रेस ने अपने इंस्टाग्राम पर फिल्म का टीजर शेयर किया है। टीजर में अदा शर्मा बुर्का पहने हुए दिखाई दे रही हैं। वह कहती हैं, “मेरा नाम शालीनी उन्नीकृष्णन था। मैं नर्स बनकर लोगों की मदद करना चाहती थी। अब मैं फातिमा बा हूँ। एक आईएसआईएस (ISIS) आतंकवादी, जो अफगानिस्तान की जेल में बंद है। मैं अकेली नहीं हूँ। मेरी जैसी 32000 और लड़कियाँ कन्वर्ट होकर सीरिया और यमन में दफन हो चुकी हैं।”

अदा आगे कहती हैं, “एक नॉर्मल लड़की को खूँखार आईएसआईएस आतंकवादी बनाने का खतरनाक खेल केरल में चल रहा है और वो भी खुलेआम। कोई नहीं रोकेगा इसे। ये है मेरी कहानी। ये है उन 32000 लड़कियों की कहानी। यह है ‘द केरल स्टोरी’।”

दरअसल, निर्माता विपुल अमृतलाल शाह ने इस भयावह सच्ची घटना को बड़े पर्दे पर उतारने के लिए कई सालों तक गहन रिसर्च की है। उनके अलावा निर्देशक सुदीप्तो सेन ने केरल और यहाँ तक ​​कि अरब देशों की यात्रा की। इस साल मार्च में डायरेक्टर सुदीप्तो सेन ने बताया था, “हाल ही में एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया, वर्ष 2009 से केरल और मैंगलोर की लगभग 32000 लड़कियों को हिंदू और ईसाई से इस्लाम मजहब में कन्वर्ट किया गया है और उनमें से ज्यादातर सीरिया, अफगानिस्तान और अन्य ISIS व हक्कानी प्रभावशाली क्षेत्र में पहुँच जाती हैं।” फिल्म बनाने से पहले सुदीप्तो ने इस विषय पर काफी रिसर्च की। इस दौरान उन्हें यह भी पता चला कि अपहरण और तस्करी के जरिए गायब हुईं कुछ लड़कियाँ अफगानिस्तान और सीरिया की जेल में पाई गई थीं। इनमें से ज्यादातर लड़कियों की शादी ISIS के आतंकवादियों से की गई थी और उन्हें ‘सेक्स स्लेव’ बनाया गया था।

बता दें कि जून 2021 में अफगानिस्तान में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) में शामिल हुई केरल की चार महिलाओं के जेल में बंद होने की खबर सामने आई थी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इसकी पुष्टि की थी कि केरल की ये चार महिलाएँ अफगानिस्तान की जेल में बंद हैं, जिन्हें भारत वापस लौटने की इजाजत नहीं दी जाएगी। ये महिलाएँ अफगानिस्तान के खुरासान प्रांत में अपने शौहरों के साथ इस्लामिक स्टेट में शामिल होने के लिए गई थीं।

गुजरात में कॉन्ट्रैक्ट जॉब खत्म करने का वादा, राजस्थान में संविदा पर ही 10 हजार भर्ती: चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस का पाखंड बेनकाब

सत्ता में रहने के दौरान कॉन्ग्रेस (Congress) की अलग नीति होती है और विपक्ष के रूप में अलग। अगर चुनाव का मौसम हो और वादे ही करने हो तो कॉन्ग्रेस ऐसे-ऐसे वादे करती है, जिसे सत्ता में आने के बाद वह खुद तोड़ देती है। चाहे वह किसानों की कर्ज माफी का वादा हो या संविदा पर युवाओं की बहाली का विरोध, कॉन्ग्रेस दोनों ही मोर्चे पर बेनकाब हुई है।

दरअसल, कॉन्ग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने कहा कि गुजरात में सत्ता में वापसी करने पर कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम बंद करने का वादा किया है। वहीं, राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार ने महात्मा गाँधी अँग्रेजी मीडियम स्कूलों में 10,000 शिक्षकों की संविदा पर भर्ती का आदेश जारी किया है।

ऐसा पहली बार नहीं है कि कॉन्ग्रेस की कथनी करनी में अंतर दिख रहा है। पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी ने यूपी में संविदा पर युवकों की भर्ती को उनका अपमान बताकर भाजपा सरकार की आलोचना की थी। उसके कुछ समय बाद राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार ने कंप्यूटर शिक्षकों की भर्ती संविदा पर करने का ऐलान किया था।

दरअसल, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार (3 अक्टूबर 2022) को गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के ‘8 संकल्प’ का ऐलान करते हुए ट्वीट किया। इन संकल्पों के बारे में बताते हुए उन्होंने दो ट्वीट किए। इसमें एक संकल्प ‘सरकारी नौकरियों में कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम बंद करना और ₹300 बेरोजगारी भत्ता देना’ भी है।

अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “₹500 में LPG सिलेंडर, 300 यूनिट तक बिजली फ्री, ₹10 लाख तक का इलाज व दवाइयाँ मुफ्त, किसानों का ₹3 लाख तक कर्ज माफ, सरकारी नौकरियों में कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम बंद और ₹300 बेरोजगारी भत्ता, 3 हजार सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूल, को-ऑपरेटिव सोसायटी में दूध पर ₹5/लीटर सब्सिडी, कोरोना से जान गंवाने वाले 3 लाख लोगों के परिवार को ₹4 लाख मुआवजा।”

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खड़गे के ट्वीट के ठीक एक दिन पहले राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने महात्मा गाँधी अँग्रेजी मीडियम स्कूलों में अलग से 10,000 शिक्षकों को संविदा पर भर्ती करने का ऐलान किया। प्रदेश में अँग्रेजी माध्यम की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने इन स्कूलों को खोला है।

राजस्थान सरकार ने संविदा पर कर्मियों की भर्ती के लिए बकायदा इस साल एक नीति बनाई है। इसे ‘संविदा भर्ती नियम 2022’ के नियम से जाना जाता है। संविदा पर इन शिक्षकों की भर्ती इसी नियम के तहत किया जाएगा। राजस्थान सरकार की इस नीति का खूब विरोध हो रहा है।

दरअसल, 13 दिसंबर 2020 को प्रियंका गाँधी ने ट्वीट कर उत्तर सरकार को संविदाकर्मियों की भर्ती पर घेरने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था, “युवा नौकरी की माँग करते हैं और यूपी सरकार भर्तियों को 5 साल के लिए संविदा पर रखने का प्रस्ताव ला देती है। ये जले पर नमक छिड़कर युवाओं को चुनौती दी जा रही है। गुजरात में यही फिक्स पे सिस्टम है। वर्षों सैलरी नहीं बढ़ती, परमानेंट नहीं करते। युवाओं का आत्मसम्मान नहीं छीनने देंगे।”

पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी संविदा पर भर्ती को युवाओं के सम्मान से खिलवाड़ बता रही थीं, उसके ठीक एक साल बाद राजस्थान सरकार ने कंप्यूटर शिक्षकों की संविदा पर भर्ती निकाल कर प्रियंका गाँधी के बयान का माखौल उड़ा दिया। अब अंग्रेजी शिक्षकों की कॉन्ट्रैक्ट भर्ती निकाली गई है। इधर, पार्टी अध्यक्ष संविदा पर भर्ती को खत्म करने की बात कर रहे हैं।

‘किसानों से ₹5000 रिश्वत लेता हूँ’: राजस्थान में अधिकारी ने बेशर्मी से कबूला गुनाह, सांसद ने थप्पड़ मारा; कहीं उठे सवाल, कहीं तारीफ मिल रही

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के नारकोटिक्स विभाग में अफीम लाइसेंस वितरण के दौरान चित्तौड़गढ़़ के भाजपा सांसद सी पी जोशी मंगलवार (1 नवंबर 2022) शाम प्रतापगढ़ खंड प्रथम कार्यालय पहुँचे थे। इस दौरान उन्हें एक अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत मिली। उन्होंने अधिकारी को अपने पास बुलाकर इस संबंध में पूछा। जहाँ अधिकारी ने अपना गुनाह कबूल किया। अधिकारी की बेशर्मी देख सांसद इतना आग बबूला हो गए कि उन्होंने आपा खोते हुए उसे थप्पड़ मार दिया।

घटना की वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। मीडिया जहाँ इस घटना पर सांसद के ऊपर सवाल उठा रहा है। वहीं कुछ लोग तारीफ करते हुए कह रहे हैं कि अधिकारी पर कड़ा एक्शन लिया जाना चाहिए।

जानकारी के अनुसार, किसानों व मुखियाओं से अवैध वसूली की शिकायत पर सांसद सीपी जोशी ने अधिकारियों और कर्मचारियों को लताड़ लगाई। लोगों का आरोप था कि किसानों से नामांतरण व लाइसेंस वितरण में अवैध वसूली की जाती है। इस दौरान कई पुलिस और प्रशासनिक कर्मचारी-अधिकारी भी मौजूद थे।

एक न्यूज चैनल के रिपोर्टर विपिन सोलंकी ने घटना का वीडियो ट्वीट कर कहा, ”राजस्थान के चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी ने कर्मचारी को तमाचा जड़ दिया । अफीम पट्टे नामान्तरण के लिए कर्मचारी द्वारा 5 हजार रुपए की रिश्वत लेने सामने आने के बाद गुस्से में आए सांसद सीपी जोशी ने कर्मचारी को तमाचा जड़ा।”

सांसद ने वहाँ मौजूद कर्मचारी भंवर सिंह को बुलाकर पूछा कि एक पट्टे के कितने पैसे लेते हो। कर्मचारी ने जवाब दिया कि एक पट्‌टे के 5000 रुपए लेते हैं। वह आगे कुछ बोलता कि सांसद भड़क गए। इसके बाद उन्होंने उसे जोरदार थप्पड़ मारा।

वित्त मंत्रालय को भ्रष्टाचार की शिकायत भेजी

इस घटनाक्रम को लेकर हालाँकि चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है । लेकिन भाजपा जिला अध्यक्ष गोपाल कुमावत ने सांसद का पक्ष रखते हुए कहा कि पिछले दिनों से जिला अफीम कार्यालय के कर्मचारियों के भ्रष्टाचार की शिकायतें मिल रही थी। इस पर सांसद जोशी कार्यालय पहुँचे थे। उन्होंने इस मामले में वित्त मंत्रालय को कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शिकायत भेजी है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, अफीम विभाग में तैनात कर्मचारियों व अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों की वसूली की शिकायतें जनप्रतिनिधियों को मिल रही थीं। इस पर सांसद जोशी भीलवाड़ा पहुँचकर नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी डीके सिंह व दो सब इंस्पेक्टर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि किसानों को परेशान करना, कागजी खानापूर्ति के नाम पर बार-बार घुमाना गलत है। कर्मचारियों को चेताया कि लाइसेंस के नाम पर पैसा मांगना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

₹2 लाख करोड़ की 225 परियोजनाओं को केंद्र ने दी मंजूरी, 8 साल में 8 करोड़ औरतों की मदद: महाराष्ट्र के रोजगार मेले में PM मोदी, कहा- अब नौकरी का स्वरूप बदल रहा है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (3 नवंबर 2022) को महाराष्ट्र में आयोजित रोजगार मेले को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को सरकारी विभागों में सामूहिक रूप से नियुक्ति पत्र देने के अभियान में महाराष्ट्र का नाम जुड़ रहा है।

उन्होंने कहा, “धनतेरस के दिन केंद्र सरकार ने 10 लाख नौकरियाँ देने के अभियान की शुरुआत की थी। तभी मैंने कहा था कि आने वाले दिनों में विभिन्न राज्य सरकारें भी रोजगार मेले किया करेंगी। इसी कड़ी में आज महाराष्ट्र सैकड़ों युवाओं को एक साथ नियुक्ति पत्र दिए जा रहे हैं। इस समय देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, देश विकसित भारत के लक्ष्य पर काम कर रहा है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में बहुत बड़ी भूमिका हमारे देश के युवाओं की है।”

‘रोजगार के लाखों नए अवसर’

पीएम मोदी ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा महाराष्ट्र के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य में 2 लाख करोड़ रुपए की 225 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में रेलवे में 75 हजार करोड़ रुपए और आधुनिक सड़कों के लिए 50 हजार करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए हैं। सरकार जब इतनी बड़ी राशि इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करती है तो उस वजह से भी रोजगार के लाखों नए अवसर बनते हैं।

युवाओं को नियुक्ति पत्र मिलने की बधाई देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मैं सीएम एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का अभिनंदन करता हूँ। इतने कम समय में रोजगार मेले के आयोजन से साफ है कि महाराष्ट्र सरकार युवाओं को रोजगार देने की दिशा में मजबूती के साथ बढ़ रही है।”

‘स्टार्टअप्स, एमएसएमई को हर संभव आर्थिक सहायता’

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि सरकार स्टार्टअप्स, एमएसएमई को हर संभव आर्थिक सहायता दे रही है। दलितों, जनजातीय वर्ग, अल्पसंख्यकों और महिलाओं को समान रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं। पिछले 8 वर्षों में, गाँवों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 8 करोड़ महिलाओं को 5.5 लाख करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता दी गई।

पीएम मोदी के अनुसार, बदलते समय में नौकरियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, सरकार भी लगातार अलग-अलग तरह की नौकरियों के अवसर पैदा कर रही है। मुद्रा ऋण योजना के तहत सरकार ने युवाओं को 20 लाख करोड़ रुपए की सहायता प्रदान की है। इस योजना से महाराष्ट्र के युवाओं को काफी फायदा हुआ है।

बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा इसी तरह स्टार्ट-अप्स और एमएसएमई सेक्टर को भी बड़े पैमाने पर सपोर्ट किया जा रहा है। युवाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है, ताकि युवा अवसरों से न चूकें और अपनी प्रतिभा का अधिकतम लाभ उठाएँ।

केरल CM को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ने याद दिलाई ‘लक्ष्मण रेखा’: आरोपों पर कहा- ‘मेरे हस्तक्षेप को साबित करें तो दे दूँगा इस्तीफा, वर्ना वे कुर्सी छोड़ें’

केरल की वामपंथी सरकार राज्यपाल को प्रताड़ित करने से बाज नहीं आ रही है। यही कारण है कि राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammad Khan) और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन (CM Pinarayi Vijayan) की सरकार के बीच खींचतान बढ़ती जा रही है। विजयन सरकार ने राजभवन पर राजनीतिक हस्तक्षेप करने का आरोप मढ़ा है। वहीं, राज्यपाल ने कहा कि अगर केरल सरकार एक भी ऐसा उदाहरण दे देगी तो वे अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।

केरल के मुख्यमंत्री विजयन को चुनौती देते हुए राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि अगर वे राजनीतिक हस्तक्षेप का एक भी उदाहरण दिखा देंगे तो वे राज्यपाल के पद से इस्तीफा दे देंगे। दरअसल, राज्यपाल ने सीएम विजयन द्वारा विश्वविद्यालयों में की गई कुलपतियों की नियुक्ति पर सवाल उठाया था। इसे सीएम ने राजनीतिक हस्तक्षेप बता दिया था।

आरिफ मोहम्मद खान ने कहा, “वे (सीएम) बार-बार कह रहे हैं कि मैं आरएसएस के लोगों को लाने के लिए ऐसा कर रहा हूँ। अगर मैंने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए एक भी व्यक्ति, आरएसएस ही नहीं किसी भी व्यक्ति, को नामित किया है तो मैं इस्तीफा दे दूँगा। अगर वह इसे साबित नहीं कर पाए तो क्या वह इस्तीफा देने के लिए तैयार होंगे?”

राज्यपाल ने आरोप लगाया, “सीएम कह रहे हैं कि मैं एक समानांतर सरकार चला रहा हूँ और वे कह रहे हैं कि वे शिक्षा क्षेत्र में सुधार कर रहे हैं। कैसे? विश्वविद्यालयों में CPIM नेताओं के कम पढ़े-लिखे और अयोग्य रिश्तेदारों के पदों को भरकर?”

इतना ही नहीं, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने सोना तस्करी मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय का नाम आने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “मैं देख रहा हूँ कि तस्करी गतिविधियों को मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा संरक्षण दिया जाता है। अगर राज्य सरकार, मुख्यमंत्री कार्यालय और सीएम के करीबी लोग तस्करी की गतिविधियों में शामिल हैं तो मेरे लिए हस्तक्षेप करने का आधार है। ऐसे मुद्दे हैं जिनमें मुझे हस्तक्षेप करना चाहिए।”

राज्यपाल ने विजयन सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “मैंने विश्वविद्यालय से संबंधित हर फाइल लौटा दी है। सभी के लिए एक ‘लक्ष्मण रेखा’ है। राज्यपाल के कॉल का जवाब नहीं दे रहे मुख्यमंत्री उस ‘लक्ष्मण रेखा’ पार कर रहे हैं। सीएम कार्यालय में लोग तस्करी को संरक्षण दे रहे हैं।”

उन्होंने आगे कि कहा, “मैंने (सीएम विजयन पर) कोई आरोप नहीं लगाया है। सीएम के सचिव को बर्खास्त कर दिया गया है। क्या वह बिना सीएम की जानकारी के मामले में शामिल लोगों को संरक्षण दे रहे थे? फिर, यह सीएम की क्षमता का प्रतिबिंब है।” बता दें कि विजयन और उनके परिवार पर सोना तस्करी में शामिल होने का आरोप गोल्ड तस्करी कांड की मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश ने लगाया था।

स्वप्ना सुरेश ने कहा था, “इस मामले में मैंने अदालत से केरल के मुख्यमंत्री, उनके पूर्व प्रमुख सचिव एम. शिवशंकर, विजयन की पत्नी कमला, बेटी वीणा, उनके अतिरिक्त निजी सचिव सी.एम. रवींद्रन, पूर्व नौकरशाह नलिनी नेट्टो और पूर्व मंत्री के.टी. जलील की संलिप्तता के बारे में भी बताया है। साथ ही मैंने कोर्ट में अपनी सुरक्षा की माँग करते हुए याचिका भी दायर की है।”

इसके पहले राज्यपाल खान ने कहा था कि केरल सरकार द्वारा राज्य में शराब की बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है और विजयन सरकार केरल को ड्रग्स कैपिटल बना रही है। उन्होंने कहा, “सभी शराब पीने के खिलाफ अभियान चलाते हैं। यहाँ शराब पीने को बढ़ावा दिया जा रहा है। कितने शर्म की बात है।” उन्होंने आगे कहा, “हमने तय किया है कि हमारे (केरल के) विकास के लिए लॉटरी और शराब ही काफी है। शत-प्रतिशत साक्षरता वाले राज्य के लिए यह कितनी शर्मनाक स्थिति है।”

जिस तकनीक से UP-हरियाणा में आई राहत, उसके प्रयोग से बच रही AAP सरकार: प्रदूषण का ठीकरा केंद्र पर फोड़ा, पंजाब में धड़ाधड़ जल रही पराली

दिल्ली-एनसीआर की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। गुरुवार (3 नवंबर 2022) को वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 से 900 के बीच दर्ज किया गया। यह खतरनाक श्रेणी में आता है। राष्ट्रीय राजधानी गैस चैंबर में तब्दील हो गई है। वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए केंद्र सरकार और पड़ोसी राज्यों को इसके लिए ​जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

वायु प्रदूषण को लेकर केंद्र सरकार के पैनल ने जो आँकलन किया है उसके मुताबिक, आप के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने पराली जलाने वालों पर शिकंजा कसने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। केंद्र ने यह भी बताया कि जैव-अपघटक का इस्तेमाल यूपी, हरियाणा और दिल्ली में सफल रहा है। लेकिन पंजाब में पराली प्रबंधन की तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए राज्य सरकार द्वारा कोई प्रयास नहीं किया गया।

पंजाब के उलट हरियाणा और उत्तर प्रदेश ने क्रमशः 500000 एकड़ और 138000 एकड़ में जैव-अपघटक का उपयोग करने का विकल्प चुना। पंजाब ने इसका उपयोग केवल 7,500 एकड़ में किया। Nurture Farms ने CSR पहल के माध्यम से राज्य में अन्य 250,000 एकड़ में एक और बायो डिकंपोजर का उपयोग किया। पैनल ने कहा कि न केवल बायो-डिकंपोजर बल्कि सरकार रेसिडू मैनेजमेंट मशीनों को प्रभावी ढंग से लगाने में भी विफल रही है।

पंजाब में पराली जलाने के मामले बढ़े

मौजूदा आँकड़ों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में 15 सितंबर से 1 नवंबर के बीच पराली जलाने के मामलों में 33.5% की वृद्धि हुई है। पिछले साल 15,065 मामले सामने थे, जबकि 2022 में ऐसे 17,846 मामले सामने आए। ईटी के मुताबिक, 2021 में 1 नवंबर को पराली जलाने की 1796 घटनाएँ हुईं। 2022 में यह बढ़कर 1,846 हो गई। ध्यान दें, पंजाब में 40% फसल की कटाई अभी तक नहीं हुई है और आने वाले हफ्तों में ऐसी और घटनाओं के बढ़ने की उम्मीद है।

आँकड़ों से पता चलता है कि अमृतसर, संगरूर, फिरोजपुर, गुरदासपुर, कपूरथला, पटियाला और तरनतारन जिलों में 70% खेतों में आग लगी थी। इन जिलों को 2021 में भी रेड फ्लैग किया गया था।

हरियाणा-यूपी में पराली जलाने के मामले कम हुए

आँकड़ों के मुताबिक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने के मामले कम करने के लिए बड़े पैमाने पर काम किए जा रहे हैं। 2021 में, हरियाणा में पराली जलाने के 3,038 मामले सामने आए थे। जबकि इस साल केवल 2,083 इतने ही मामले दर्ज हुए हैं। यानी 24% की सीधा कमी आई है। वहीं एनसीआर के आसपास के क्षेत्र में, 2021 में 53 पराली जलाने के मामले सामने थे, जो इस साल घटकर 33 हो गए हैं।

‘आप’ ने केंद्र पर लगाया आरोप

पंजाब की आप सरकार ने किसानों के लिए नकद प्रोत्साहन (पराली नहीं जलाने के लिए) के लिए केंद्र से संपर्क किया था, जिसे अस्वीकार कर दिया गया था। ऐसे में ‘आप’ सरकार ने दिल्ली को गैस चैंबर में बदलने के लिए केंद्र पर आरोप लगाया है। वहीं केंद्र सरकार ने आँकड़े पेश कर आप सरकार की पोल खोल दी है। 120,000 फसल अवशेषों की मशीनों को लगाने में विफल रहने वाली पंजाब सरकार को सबके सामने उजागर किया है। केंद्र ने कहा कि पराली जलाने के मामलों को कम करने के लिए 2022-23 सहित पिछले 5 वर्षों में पंजाब को 1,347 करोड़ रुपए भेजे गए हैं। लेकिन पंजाब सरकार संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने की बजाए अपनी गड़बड़ी के लिए केंद्र और पड़ोसी राज्यों को दोष दे रही है।

बता दें कि दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने 30 अक्टूबर, 2022 को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य के प्रदूषण के लिए उत्तर प्रदेश की सरकारी बसों को जिम्मेदार ठहराया था। गोपाल राय ने कहा था, “राज्य में उत्तर प्रदेश की सरकारी बसों के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली के आनंद विहार और विवेक विहार में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) यूपी सरकार की बसों से निकलने वाले धुंए के कारण निम्न स्तर पर पहुँच गया है। इसलिए, उनकी यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील है कि वह इन बसों की जाँच कराएँ।”

गुजरात में जमीन से गायब कॉन्ग्रेस, AAP की जमीन का पता नहीं: क्या मोदी के रहते जो नहीं हुआ, वह इस बार कर दिखाएगी BJP

182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा चुनाव (Gujarat Assembly Election 2022) का आधिकारिक बिगुल गुरुवार (3 नवंबर 2022) को बज गया। चुनाव आयोग ने राज्य में दो चरणों में 1 और 5 दिसंबर को मतदान की घोषणा की है। नतीजे हिमाचल प्रदेश के साथ 8 दिसंबर को आएँगे।

चुनावी तारीखों के ऐलान से कुछ घंटे पहले ही कॉन्ग्रेस का वह विलाप शुरू हो गया जो वह 2014 के बाद से हर चुनावों से पहले करती रही है। उसने एक एक ट्वीट में तंज कसते हुए कहा है, “भारत निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त संस्थान है। ये निष्पक्ष चुनाव कराता है।” साथ ही गाँधी जी के तीन बंदर (बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत बोलो) वाली इमोजी भी लगाई है।

जैसे भारतीय राजनीति में मोदी के उभार के बाद हर चुनाव से पहले आयोग, ईवीएम, वीवीपैट को लेकर कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का रोना शुरू हो जाता है, वैसे ही गुजरात में विधानसभा चुनाव आते ही KHAM की चर्चा शुरू हो जाती है। खाम ने कॉन्ग्रेस को जिस नंबर तक 1985 में पहुँचाया था, उस नंबर तक नरेंद्र मोदी के रहते हुए भी गुजरात में बीजेपी कभी पहुँच नहीं पाई। लेकिन इस बार माना जा रहा है कि बीजेपी उस इतिहास को दोहरा सकती है।

बीजेपी की इन उम्मीदों के पीछे के कारण को समझने से पहले कॉन्ग्रेस के विलाप पर लौटते हैं। 2014 के बाद कुछेक अपवादों को छोड़ दे तो कॉन्ग्रेस और चुनावी पराजय एक-दूसरे के पूरक रहे हैं। गुजरात में तो खैर इसका इतिहास और भी पुराना है। इसलिए हर चुनाव से पहले चुनाव आयोग और ईवीएम पर सवाल उठाने की कॉन्ग्रेस ने परिपाटी बना ली है। ताकि नतीजों के बाद वह अपनी पराजय को लोकतंत्र की पराजय के तौर पर प्रस्तुत कर सके। संवैधानिक संस्थाओं पर मोदी के काबिज होने की जीत बता सके। जबकि यही कॉन्ग्रेस सत्ता में रहते हुए चुनाव आयोग जैसी संस्था पर नवीन चावला जैसे मुख्य निर्वाचन आयुक्त थोप चुकी है।

चुनाव भले 5 साल पर आते हैं, लेकिन बीजेपी वह पार्टी है जो एक चुनाव जीतते ही दूसरे की तैयारी में लग जाती है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक चुनावी जीत जश्न मनाने को नहीं ठहरते। वे दूसरे चुनावी मोर्चे पर मुस्तैद हो जाते हैं। इसके ठीक उलट अन्य दल तब सक्रिय होते हैं जब अपना अस्तित्व बचाने के लिए चुनाव लड़ना उनकी मजबूरी हो जाती है। यही कारण है कि वे चुनाव आयोग या ईवीएम के बीजेपी का पिट्ठू होने का नैरेटिव गढ़ने की कोशिश करते हैं ताकि उनकी कमजोरियों पर चर्चा नहीं हो। यह भी उल्लेखनीय है कि यदि किसी चुनाव में बीजेपी विरोधी दलों को सफलता मिल जाती है तो नतीजे आते ही वे चुनाव आयोग से लेकर ईवीएम तक पर चुप्पी साध जाते हैं। लेकिन यदि नतीजे बीजेपी के पक्ष में आते हैं तो उनका विलाप और तेज हो जाता है।

गुजरात में गायब कॉन्ग्रेस

गुजरात में कॉन्ग्रेस मुख्य विपक्षी दल है। 2017 के विधानसभा चुनावों में वह बीजेपी को टक्कर देने में भी कामयाब रही थी। लेकिन इस बार वह जमीन से गायब है। पिछले चुनावों में उसकी उम्मीदें तीन लोगों (हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर, जिग्नेश मेवाणी) के बीजेपी विरोध पर टिकी थी। इनमें से दो पटेल और ठाकोर अब बीजेपी के साथ हैं। कॉन्ग्रेस प्रभारी अशोक गहलोत चुनावी रणनीति बनाने की जगह राजस्थान में अपनी कुर्सी बचाने में लगे हुए हैं। चुनावी गतिविधियों से पार्टी के बड़े नेता अब तक दूर हैं।

AAP का खाता खुलेगा?

वैसे चुनाव से पहले हवा-हवाई दावे करना आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए नई बात नहीं है। गुजरात को लेकर भी वह ऐसा ही उत्साह दिखा रही है। सूरत नगर निगम के चुनावों में कॉन्ग्रेस को पीछे छोड़ने का हवाला दे वह खुद को बीजेपी के मुकाबिल भी बता रही है। उसने उम्मीद पाल रखी है कि दिल्ली की तरह बीजेपी विरोधी वोट गुजरात में उसके पास एकमुश्त आएँगे और वह कॉन्ग्रेस से विपक्षी दल का दर्जा छीनने में कामयाब रहेगी।

लेकिन ऑपइंडिया गुजराती के संपादक सिद्धार्थ छाया के अनुसार इन चुनावों में AAP की भूमिका वोटकटवा से अधिक की नहीं दिखती। पूरे राज्य में उसका सांगठनिक विस्तार नहीं होने के कारण वह कॉन्ग्रेस के परंपरागत वोटरों को आकर्षित करने में विफल रही है। साथ ही गुजरात के उसे अपने प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया के हिंदू विरोधी बयान भी भारी पड़ रहे हैं। हालाँकि छाया का मानना है कि आप को बीजेपी विरोधी वोटों में से कुछ हिस्सा मिल सकता है, लेकिन यह सीटों में शायद ही बदले।

क्या है KHAM

KHAM थ्योरी और इंदिरा गाँधी की हत्या से पैदा सहानुभूति के सहारे कॉन्ग्रेस ने 1985 के गुजरात विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड 55.55 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। उसे 149 सीटें मिली थी। खाम का मतलब वह जातीय समीकरण है जो क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिमों को मिलाकर बनता है। सरदार पटेल के बाद गुजरात के सबसे लोकप्रिय नेता होने के बावजूद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भी बीजेपी कभी इस नंबर तक नहीं पहुँच सकी।

बीजेपी का मिशन 150

सिद्धार्थ छाया के अनुसार सवाल यह नहीं है कि गुजरात का चुनाव कौन जीतेगा। वे कहते हैं, “बीजेपी की जीत तय है। कॉन्ग्रेस का दूसरे नंबर पर रहना भी तय है। सवाल यह है कि कॉन्ग्रेस को आप कितना नुकसान पहुँचाएगी। इससे ही यह तय होगा कि क्या बीजेपी इस बार सीटों का रिकॉर्ड बना पाएगी।” वे कहते हैं, “अब तक गुजरात में सीधा मुकाबला बीजेपी और कॉन्ग्रेस के बीच होता रहा है। लेकिन इस बार जमीन से कॉन्ग्रेस के गायब रहने और आप की अति सक्रियता की वजह से बीजेपी सीटों का रिकॉर्ड बना सकती है। यह इससे तय होगा कि आप और ओवैसी बीजेपी विरोधी वोटों में कितनी सेंधमारी करने में कामयाब रहते हैं।”

हालिया सर्वे भी इस बार सत्ता विरोधी वोटों में बँटवारे का इशारा कर रहे हैं। अक्टूबर की शुरुआत में ABP-CVoter ने एक सर्वे किया था। इस सर्वे की माने तो आप को 2 से अधिक सीट नहीं मिलेगी, लेकिन वह कॉन्ग्रेस के वोट शेयर में सेंध लगा सकती है। टाइम्स नाउ नवभारत-ईटीजी के ओपिनियन पोल में बीजेपी को 48 फीसदी तक वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है। इसी तरह लोकनीति-CSDS के सर्वे में शामिल दो तिहाई लोगों ने गुजरात सरकार के कामकाज को लेकर संतुष्टि जताई है। 2017 के मुकाबले यह 11 फीसदी अधिक है। यही कारण है कि बीजेपी ने इस बार अपने लिए ‘मिशन 150’ का लक्ष्य तय किया है।

हेड मसाज, फुट मसाज, बीवी के साथ एक्स्ट्रा समय: जेल में बंद होकर भी AAP मंत्री के ‘फुल मजे’, ED की शिकायत पर केंद्र ने माँगा मुख्य सचिव से जवाब

आप नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री सत्येन्द्र जैन (Satyendar Jain)  को जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट दिए जाने पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया है। मंत्रालय ने दिल्ली सरकार के चीफ सेक्रेट्री से रिपोर्ट माँगी है । जैन पर आरोप है कि वह तिहाड़ जेल में रहते हुए जेल अधिकारियों की मिलीभगत से सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।

मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में तिहाड़ जेल में बंद सत्येंद्र जैन के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी। ईडी ने आरोप लगाया था कि सत्येंद्र जैन को तिहाड़ जेल में स्पेशल ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। इडी ने सत्येंद्र जैन से संबंधित समस्त डेटा गृह मंत्रालय को भी दिया था।

आरोप है कि सत्येंद्र जैन की पत्नी पूनम जैन को उनके सेल तक पहुँचने की सुविधा दी गई है। कई बार वह मुलाकात के लिए तय समय से अधिक देर तक वहाँ रुकती हैं। इसके अलावा जैन को जेल में हेड मसाज, फुट मसाज और बैक मसाज जैसी तमाम सुविधाएँ दी जा रही हैं।

ईडी ने कोर्ट को दी शिकायत में कहा था कि सत्येंद्र जैन जेल के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। इतना ही नहीं ईडी ने सत्येंद्र जैन के ऐशो-आराम की तमाम सीसीटीवी फुटेज भी कोर्ट को सौंपी थीं।

ईडी के मुताबिक, जेल सुपरिटेंडेंट हर रोज नियमों के खिलाफ सत्येंद्र जैन से मुलाकात करते हैं। ताकि सलाखों के पीछे मंत्री को कोई दिक्कत न हो। सत्येंद्र जैन के लिए कोर्ट के आदेश की अवेलहना करते हुए घर का बना खाना जेल में मुहैया कराया जाता है।

गिरफ्तारी के बाद भी जैन मंत्रिमंडल में शामिल

प्रवर्तन निदेशालय ने मई में जैन को धनशोधन के एक मामले में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद जैन के पास जो स्वास्थ्य, गृह, बिजली और शहरी विकास समेत अन्य विभाग थे, उन्हें उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सौंप दिया गया। हालाँकि, जैन दिल्ली मंत्रिमंडल में बिना प्रभार के मंत्री बने हुए हैं।

वहीं इससे पहले महाठग सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में सत्येंद्र जैन को लेकर सनसनीखेज दावा किया था। उसने दिल्ली के उप-राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर बताया था कि जैन उससे मिलने तिहाड़ जेल में आते थे और ‘प्रोटेक्शन मनी’ के तौर पर उससे 10 करोड़ रुपए लिए थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस पत्र को दिल्ली के उप-राज्यपाल वी के सक्सेना ने कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव को भेज दिया था।