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चेहरे पर एसिड डाला, शरीर पर गर्म लोहे से वार, प्राइवेट पार्ट में फँसी थी बोतल… गैंगरेप-हत्या केस में HC ने सुनाई थी सज़ा-ए-मौत, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपितों को बरी किया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (7 नवंबर, 2022) को दिल्ली के छावला इलाके में युवती के साथ हुए सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में 3 आरोपितों को बरी कर दिया है। साल 2012 के इस मामले में दिल्ली की एक अदालत ने तीनों को दोषी करार देते हुए मौत की सज़ा सुनाई थी। इसके बाद हाई कोर्ट ने भी सजा बरकरार रखते हुए कहा था कि दोषियों के लिए किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीनों युवकों को बरी किए जाने के बाद मृतक की माँ ने कहा है, “हमें उम्मीद थी कि न्याय मिलेगा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने हमें तोड़ दिया है। समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें। हमारी सोचने की ताकत खत्म हो गई है।”

दरअसल, साल 2012 में दिल्ली के छावला इलाके से 19 वर्षीय एक युवती का अपहरण किया गया था। इसके बाद उसे हरियाणा के रेवाड़ी ले जाकर 3 दिन तक गैंगरेप को अंजाम दिया गया था। यही नहीं, उसके चेहरे पर एसिड डाल दिया गया था और शरीर के कई हिस्सों में गर्म लोहे से वार किए गए थे। जब उसका शव बरामद हुआ, तब प्राइवेट पार्ट में बोतल फँसी हुई मिली थी।

बलात्कार और हत्या के इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों रवि, राहुल और विनोद को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने युवती के अपहरण के समय सामने आए चश्मदीदों के बयान के आधार पर लाल इंडिका गाड़ी की तलाश की थी। इसके बाद उसी गाड़ी के साथ राहुल नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था।

राहुल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कहा था कि उसने अपना गुनाह कबूल लिया है और अपने दोनों साथियों रवि और विनोद के बारे में भी जानकारी दी। इन तीनों की निशानदेही के बाद लड़की का शव बरामद किया गया था। पुलिस ने कहा था कि रवि ने अपराध की साजिश रची, क्योंकि युवती ने रवि के प्रपोजल को ठुकरा दिया था।

इस मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली की निचली अदालत ने डीएनए रिपोर्ट समेत अन्य सबूतों के आधार पर तीनों को दोषी करार देते हुए साल 2014 में फाँसी की सज़ा सुनाई थी। इसके बाद तीनों युवकों ने हाई कोर्ट का रुख किया था। हालाँकि, हाई कोर्ट ने भी उनकी सजा को बरकरार रखते हुए कहा था ये वो हिंसक जानवर हैं, जो सड़कों पर शिकार ढूँढ़ते हैं। लेकिन, अब सुप्रीम कोर्ट ने तीनों को बरी कर दिया है।

‘फ़ारसी है हिन्दू शब्द, इसका मतलब बहुत गंदा’: कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष के बोल, कहा – विदेशी शब्द पर बात ही नहीं होनी चाहिए

कॉन्ग्रेस नेताओं का हिन्दू विरोध समय-समय पर निकलकर सामने आ ही जाता है। ऐसा लगता है कि पार्टी ने मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति को अपना मुख्य एजेंडा बना लिया है, तभी तो इनके कुछ नेता हिन्दू धर्म और हिन्दुओं का अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। इस बार यह जिम्मेदारी कर्नाटक कॉन्ग्रेस (Karnataka Congress) के नेता सतीश जारकीहोली (Satish Jarkiholi) ने अपने कंधों पर उठाई है।

दरअसल, जारकीहोली ने हिन्दू धर्म को लेकर बेहद ही शर्मनाक बयान दिया है। कॉन्ग्रेस नेता ने कहा है कि हिंदू शब्द तो भारत का है ही नहीं। उन्होंने कहा कि हिंदू शब्द पर्शिया से आया है। वह यहीं नहीं रुके, हिन्दू धर्म का अपमान करते हुए यह तक कह दिया कि हिंदू शब्द का अर्थ भी काफी गंदा है और विदेशी शब्द पर भारत में बात होनी ही नहीं चाहिए।

कॉन्ग्रेस नेता कर्नाटक के बेलगावी जिले के निप्पान्नी इलाके में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुँचे थे। उन्होंने कहा, “हिन्दू शब्द कहाँ का है। भारत का इससे क्या संबंध है। आपका कैसा हो गया हिन्दू। चर्चा होना चाहिए। आपका नहीं है ये शब्द। फिर आप इसको सिर पर बैठा कर क्यों रखे हैं। उसका मीनिंग आपको समझ में आ गया तो आपको शर्म आ जाएगा। हिन्दू का जो मीनिंग है वह बहुत गंदा है। कहीं का धर्म, कहीं का शब्द लाकर आप हम पर थोप रहे हैं।”

वहीं भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने ट्वीट कर कॉन्ग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने कहा, “शिवराज पाटिल के बाद अब कर्नाटक कॉन्ग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष सतीश जारकीहोली हिंदुओं को भड़काते और उनका अपमान करते हैं। उन्होंने कहा है कि हिन्दू शब्द का मतलब बहुत ही गंदा है। यह संयोग नहीं बल्कि वोट बैंक का उद्योग है।”

कॉन्ग्रेस नेताओं के लिए हिंदू धर्म को अपमानित करना नया नहीं है। ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी भी कॉन्ग्रेसियों ने गढ़ी थी। इसी क्रम में शिवराज पाटिल ने 20 अक्‍टूबर, 2022 को जिहाद को गीता से जोड़ने का प्रयास किया था। उन्होंने यह बताने की कोशिश की थी कि जिहाद का कॉन्‍सेप्‍ट गीता का भी हिस्सा है और श्रीकृष्‍ण ने अर्जुन को इसका पाठ पढ़ाया था।

पाटिल ने कॉन्‍ग्रेस नेता मोहसिना किदवई (Mohsina Kidwai) की किताब के विमोचन के मौके पर यह व‍िवादास्‍पद बयान दिया था। उन्होंने कहा था , ”इस्लाम में जिहाद के बारे में बहुत चर्चा हुई है। भारतीय संसद में हमारा काम जिहाद के बारे में नहीं, बल्कि आदर्शों के बारे में है। जिहाद तभी पैदा होता है जब स्वच्छ दिमाग से किए गए सभी प्रयास विफल हो जाते हैं।” पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री ने दावा किया था, “यह (जिहाद) केवल कुरान में नहीं है, बल्कि महाभारत, गीता में भी है। श्रीकृष्ण भी अर्जुन से जिहाद के बारे में बात करते हैं और यह चीज केवल कुरान या गीता में ही नहीं, बल्कि ईसाई धर्म में भी है।”

एफिल टॉवर के सामने लड़कियों ने उतारे कपड़े, सेमी-न्यूड फोटोशूट पर आक्रोशित हुए लोग: रोकती रह गई पुलिस, देखने के लिए जमा हुई थी भीड़

ब्राजीलियाई मॉडल्स का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो पेरिस के एफिल टावर के पास बनाया है। इस वीडियो में दो मॉडल एफिल टॉवर के सामने बिकिनी में फोटोशूट कराती हुई दिखाई दे रही हैं। इन मॉडल्स की पहचान 24 वर्षीय गैब्रिएला वर्सियानी और 27 वर्षीय गैबिली के रूप में हुई है। यह घटना 31 अक्‍टूबर की बताई जा रही है। वीडियो में एक महिला पुलिस अधिकारी उनके पास जाकर उन्हें खुद को कवर करने के लिए कह रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेरिस के एफिल टावर के पास दो ब्राजीलियन मॉडल के फोटोशूट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद से बवाल मच गया गया है। वे अपनी फोटो और वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर करने के बाद यूजर्स के निशाने पर आ गई हैं। लोगों ने कहा कि मॉडल्स को अपनी हरकत पर शर्मिंदा होना चाहिए। वहीं, एक यूजर ने कहा कि अगर आप अपने ब्रांड का प्रचार करना चाहती थीं कि तो आपको किसी कैरेबियाई देश जाना चाहिए था या फिर स्विमिंग पूल में जाना चाहिए था। वहीं कुछ यूजर्स ने इन मॉडल का समर्थन भी किया।

इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक लड़की लंबे काले कोट पहने हुए है, उसे उतार रही है। वहीं एक अन्‍य मॉडल ने ब्‍लेजर पहना हुआ है। इनकी हरकतें देखने के लिए वहाँ भीड़ जमा हो गई। इसके बाद कुछ पुलिस अधिकारी भी वहाँ पहुँच गए। एक महिला पुलिस अधिकारी ने महिलाओं को उनकी बॉडी कवर करने को कहा। इस दौरान मॉडल्स की फोटो क्लिक कर रही वैनेसा लोपेज ने घटना के बारे में सोशल मीडिया पर बताया, “हम लोग गिरफ्तार होते होते बचे हैं, क्योंकि हम बिकिनी का प्रमोशन कर रहे थे और हमें वहाँ ऐसा करने की इजाजत नहीं थी।”

वैनेसा ने आगे बताया कि ये मॉडल अपने बिकिनी बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए आई थीं। पुलिस अधिकारियों ने उन लोगों से कहा कि यहाँ के कानून के मुताबिक कोई भी, किसी टूरिस्ट स्पॉट के सामने सेमी-न्यूड फोटो नहीं ले सकते हैं।

चीतल को ढेर किया, 2 घंटे में खा-पी कर ख़त्म कर दिया… नामीबिया से आए 2 चीतों ने किया अपना पहला शिकार, सामने आई तस्वीरें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन पर मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए चीते छोड़े थे। हालाँकि, चीतों को अभी तक एक बाड़े में रखा गया था। उन्हें बाड़े में ही खाने के लिए मांस दिया जाता था। चीतों ने छोटे बाड़े से छूटने के 24 घंटे के भीतर में अपना पहला शिकार किया है। उन्होंने चीतल (चित्तीदार हिरण) को अपना शिकार बनाया।

जिला वन अधिकारी (डीएफओ) प्रकाश कुमार वर्मा ने कहा, “श्योपुर के कुनो नेशनल पार्क में एक बड़े बाड़े में छोड़े जाने के 24 घंटे के भीतर दो चीतों ने अपना पहला शिकार किया।” अधिकारी ने कहा कि चीतों ने रविवार की रात या सोमवार की तड़के (6-7 अक्टूबर 2022) एक चीतल (चित्तीदार हिरण) का शिकार किया। अधिकारियों ने बताया कि निगरानी दल को इस शिकार की जानकारी सोमवार सुबह (7 अक्टूबर, 2022) में मिली। चीतल का शिकार करने के बाद चीतों ने उसे दो घंटे के भीतर खा कर खत्म कर दिया।

अधिकारी ने कहा कि सितंबर के मध्य में नामीबिया से भारत में छह चीतों को लाया गया। फ़्रेडी और एल्टन नाम के चीतों को 17 सितंबर से अलग रहने के बाद 5 नवंबर को बड़े बाड़े में छोड़ा गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चीतों को बड़े बाड़े में छोड़े जाने पर ख़ुशी व्यक्त की थी।

पीएम मोदी ने रविवार (6 अक्टूबर 2022) को ट्वीट कर कहा, “अच्छी खबर! मुझे बताया गया है कि मैंडेटरी क्वारंटाइन के बाद, 2 चीतों को कुनो निवास स्थान के अनुकूलन के लिए एक बड़े बाड़े में छोड़ दिया गया है। अन्य को जल्द ही छोड़ दिया जाएगा। मैं यह जानकर खुशी हुई कि सभी चीते स्वस्थ, सक्रिय और अच्छी तरह से तालमेल बिठा रहे हैं।”

गत सितंबर माह में नामीबिया से 8 चीते लाए गए थे। जिनमें से 5 मादा और 3 नर चीते शामिल हैं। इन्हें पीएम मोदी ने अपने जन्मदिन पर कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। लगभग एक महीने तक  इन दोनों चीतों को क्वारंटीन में रखने के बाद 5 नवंबर को बड़े बाड़े में छोड़ दिया गया। शुरुआती योजना के तहत इन चीतों को एक महीने तक क्वारंटीन में रखा गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, आमतौर पर जंगली जानवरों को स्थानांतरण से पहले और बाद में एक महीने के लिए क्वारंटीन किया जाता है, ताकि वे दूसरे देश से अपने साथ लाए किसी बीमारी को फैला ना पाएँ।

दिल्ली शराब घोटाले में बढ़ीं मनीष सिसोदिया की मुश्किलें, करीबी ही सरकारी गवाह बनने को तैयार: खटखटाया कोर्ट का दरवाजा, कहा – सब कुछ बताऊँगा

दिल्ली की शराब नीति को लेकर उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सिसोदिया का करीबी और आबकारी घोटाला मामले का आरोपित दिनेश अरोड़ा सरकारी गवाह बनने को तैयार हो गया है। उसने कहा ​है कि वह बिना किसी दबाव के सरकारी गवाह बनना चाहता है। इसके लिए दिनेश ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उसने कहा कि वह इस मामले में अपनी भूमिका और इससे जुड़े सच से पर्दा उठाएँगे।

कोर्ट इस मामले में 14 नवंबर को सुनवाई करेगा और उसका बयान दर्ज किया जाएगा। राऊज एवेन्यू कोर्ट उसके बाद तय करेगा कि दिनेश अरोड़ा को सरकारी गवाह बनाया जाए या नहीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिनेश अरोड़ा सोमवार (7 नवंबर, 2022) को अदालत में पेश हुआ और कहा कि वह अपनी मर्जी से सरकारी गवाह बनने के लिए तैयार हुआ है। अरोड़ा ने कहा, “मैं इस मामले से जुड़े सभी तथ्य अदालत के समक्ष रखूँगा।”

इस पर कोर्ट ने आरोपित से पूछा कि उस पर किसी तरह का कोई दबाव तो नहीं है या सीबीआई की तरफ से कोई धमकी तो नहीं दी गई है, तो आरोपित ने कहा, “मैं इस मामले में मेरे ऊपर जो आरोप लगे हैं और अपनी भूमिका के बारे में सब कुछ सच बताऊँगा। मैं जाँच में भी सहयोग करता रहा हूँ और आगे भी करता रहूँगा। मैं जाँच अधिकारी के सामने कुछ स्टेटमेंट दे चुका हूँ और कोर्ट के सामने अपना कंफेशन स्टेटमेंट भी दे चुका हूँ।”

बता दें ​कि इससे पहले सीबीआई ने अपनी प्राथमिकी में कहा था कि अमित अरोड़ा, दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे मनीष सिसोदिया के करीबी सहयोगी थे और शराब लाइसेंसधारियों से इकट्ठा किए गए पैसों का प्रबंधन करने में सक्रिय रूप से शामिल थे। सिसोदिया इस मामले में मुख्य आरोपित हैं। जाँच एजेंसी ने यह भी कहा था कि इंडोस्पिरिट्स के निदेशक समीर महेंद्रू ने एक करोड़ रुपए राधा इंडस्ट्रीज के अकाउंट में ट्रांसफर किए। यह इंडस्ट्री अरोड़ा की है।

गौरतलब है कि दारू घोटाले में घिरने के बाद दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को सीबीआई (CBI) ने अक्टूबर 2022 में पूछताछ के लिए बुलाया था। सीबीआई ने उनसे करीब 9 घंटे तक पूछताछ की थी, जिसके बाद सिसोदिया ने दावा किया था कि CBI ने उन पर AAP छोड़ने का दबाव डाला। जाँच एजेंसी ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि पूछताछ वैधानिक और पेशेवर तरीके से हुई है।

9 लोगों ने इस्लाम छोड़ कर हिन्दू धर्म में की घर-वापसी, बताया – 150 साल पहले दबाव में पूर्वज बन गए थे मुस्लिम: उत्तराखंड में भी मिले ऐसे आवेदन

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 9 लोगों ने इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म में ‘घर वापसी’ की है। धर्म परिवर्तन करने वाला परिवार मूल रूप से सहारनपुर का रहने वाला है। इनके पूर्वजों ने 150 साल पहले दबाव में आकर इस्लाम अपनाया था। लेकिन, अब स्वेच्छा से हिंदू धर्म में वापसी की है। वहीं, उत्तराखंड के देहरादून में मुस्लिम युवक ने हिंदू धर्म अपनाने को लेकर कलेक्टर के पास अर्जी लगाई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सहारनपुर के मुस्लिम परिवार ने मुजफ्फरनगर के योग साधना यशवीर आश्रम बघरा में हिंदू धर्म अपनाया है। इस आश्रम में स्वामी यशवीर महाराज की उपस्थिति में यज्ञ-हवन कराकर वैदिक रीति-रिवाज के साथ परिवार के 9 लोगों का धर्म-परिवर्तन कराया गया है। हिंदू धर्म अपनाने वाले वादिल को विवेक सैनी, अलीसा को अनन्या सैनी, राबिया को पल्लवी सैनी, नाजिया को नीतू सैनी, वरीसा को मनीषा सैनी, गुलिस्तां को रविता सैनी, सानिया को निशा सैनी, आकिल को रोहित सैनी और रुखसाना को बबीता सैनी नाम दिया गया है।

योग साधना यशवीर आश्रम बहरा के स्वामी यशवीर महाराज का कहना है कि ये सभी लोग पहले हिंदू सैनी थे। लेकिन, इनके पूर्वज 150 साल पहले दवाब में आकर मुस्लिम बन गए थे। ये लोग लंबे समय से इस्लाम को मानते आ रहे हैं। अब अपनी इच्छा से सनातन धर्म संस्कृति को स्वीकार करते हुए हिंदू धर्म अपना रहे हैं।

इससे पहले, यशवीर महाराज ने आरोप लगाया था कि जनपद के गाँव फुलत स्थित मदरसे में लोगों का धर्मांतरण कराया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि अब तक लाखों हिंदुओं को प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराया जा चुका है। इसलिए, फुलत मदरसे की जाँच कर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, उत्तराखंड के देहरादून में लक्खीबाग निवासी सईद अरशद नामक व्यक्ति मुस्लिम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने के लिए जिला न्यायालय पहुँचा था। जहाँ से उसे कलेक्टर से संपर्क करने के लिए कहा गया था। इसके बाद उसने कलेक्टर के पास अर्जी लगाते हुए स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपनाने की बात कही है।

इस मामले में कलेक्टर सोनिका का कहना है कि जल्द से जल्द धर्म-परिवर्तन की कार्यवाही पूरी की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा है मुस्लिम धर्म त्यागकर हिंदू धर्म अपनाने के अन्य आवेदन भी मिले हैं। इन पर भी कार्यवाही की जा रही है।

पत्रकार दीपक चौरसिया के खिलाफ जारी हुआ गिरफ़्तारी वॉरंट, अदालत ने नहीं मानी ‘मेडिकल समस्याओं’ वाली दलील: बॉन्ड भी किया रद्द

हरियाणा में गुरुग्राम की एक विशेष अदालत ने पत्रकार दीपक चौरसिया (Deepak Chaurasia) के खिलाफ गिरफ्तारी वॉरंट जारी किया है। यह वारंट दीपक चौरसिया के खिलाफ 2013 के एक मामले में जारी किया गया है। दरअसल, टीवी पत्रकार पर आरोप पर है कि उन्होंने 10 वर्षीय लड़की और उसके परिवार के ‘मॉर्फेड, एडिट और अश्लील’ वीडियो को प्रसारित किया और उसे स्वघोषित बाबा आसाराम के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले से जोड़ कर दिखाया था।

अदालत ने यह आदेश 28 अक्टूबर, 2022 को तब जारी किया जब चौरसिया ने गंभीर स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पेशी में छूट की माँग करते हुए एक याचिका दायर की थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) चौहान ने कहा कि 23 सितंबर को भी इसी तरह की एक याचिका दायर की गई थी। उनके विरोधी पक्ष ने दलील दी कि ऐसा प्रतीत होता है कि चौरसिया जानबूझकर अदालत आने से बच रहे हैं। कोर्ट में उनकी मेडिकल रिपोर्ट दीपक चौरसिया की दलीलों को साबित नहीं कर पाई।

इसके बाद अदालत ने उनकी पेशी से बचने की याचिका को खारिज करते हुए उनका बेल बॉन्ड भी रद्द कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, न्यायाधीश शशि चौहान ने 21 नवंबर, 2022 को गिरफ्तारी का वॉरंट जारी किया। इस मामले में अब तक मीडिया में दीपक चौरसिया की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मालूम हो कि दीपक चौरसिया उन आठ लोगों में शामिल हैं, जिन पर दस साल की बच्ची और उसके परिवार के एडिट, अश्लील वीडियो प्रसारित करने और वीडियो को यौन उत्पीड़न से जोड़ कर दिखाने के ​मामले में चार्जशीट दायर की गई थी।

बता दें कि यह मामला 2013 में बच्चे के रिश्तेदार की शिकायत पर दर्ज एफआईआर से संबंधित है। न्यूज चैनल न्यूज 24, इंडिया न्यूज और न्यूज नेशन पर वीडियो प्रसारित करने का आरोप लगाया गया था। खबरों के मुताबिक, न्यूज 24 के पूर्व मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम, एंकर चित्रा त्रिपाठी और चौरसिया पर आरोप है कि इन समाचार चैनलों पर प्रसारित वीडियो में आंशिक रूप से बच्ची, शिकायतकर्ता की पत्नी और कुछ अन्य महिलाओं के चेहरे दिखाई गए थे।

नारी पूजन को बलात्कार से जोड़ने वाला कॉमेडियन बेंगलुरु में करेगा शो, हिन्दू संगठन ने दर्ज कराई शिकायत: कहा – कानून-व्यवस्था बिगड़ने की है आशंका

अमेरिका में जाकर भारत का अपमान करने वाले और नारी को पूजने की परंपरा को रेप से जोड़ने वाले कॉमेडियन वीर दास एक बार फिर से चर्चा में हैं। कर्नाटक में ‘हिंदू जनजागृति समिति’ ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। समिति ने 10 नवंबर को बेंगलुरु में होने वाले उनके शो को रद्द करने की माँग की है।

समिति की तरफ से व्यालिकावल पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। समिति ने कहा, “यह पता चला है कि कि विवादित कॉमेडियन वीर दास बेंगलुरु के मल्लेश्वरम में चौडिया मेमोरियल हॉल में 10 नवंबर को कॉमेडी शो कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने वॉशिंगटन के जॉन एफ कैनेडी सेंटर में महिलाओं, हमारे प्रधानमंत्री और भारत के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिया था।”

उक्त कार्यक्रम में उन्होंने भारत की महिलाओं के बारे में भी अभद्र टिप्पणी की थी और देश में पूजने की परंपरा को रेप से जोड़ा था। समिति की शिकायत में भी इसका जिक्र किया गया है। शिकायत के अनुसार, “वीर दास ने कहा था कि भारत में हम दिन में महिलाओं की पूजा करते हैं और रात में गैंगरेप करते हैं। इस संबंध में हमने मुंबई और दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। आईपीसी की धारा के तहत ये गंभीर अपराध है।”

समिति ने कहा कि इन सब चीजों को देखते हुए इस विवादित शख्स को बेंगलुरु जैसे सामुदायिक रूप से संवेदनशील इलाके में कार्यक्रम के लिए मंजूरी देना ठीक नहीं है, वो भी ऐसे समय में जब कर्नाटक पहले से ही सांप्रदायिक घटनाओं के चलते कानून-व्यवस्था संबंधी समस्याओं का सामना कर रहा है। आशंका जताई गई है कि ऐसे कार्यक्रम से कानून-व्यवस्था और बिगड़ सकती है। इसी आधार पर माँग की गई है कि वीर दास के कार्यक्रम को मंजूरी ना मिले।

दरअसल, वीर दास ने 16 नवंबर, 2021 को जॉन एफ केनेडी सेंटर में 7 मिनट तक भारत विरोधी प्रोपगेंडा को जमकर हवा दी थी। अपने वन लाइनर्स की मदद से उन्होंने भारत को, भारत की राजनीति को, स्थानीय मुद्दों को, पीएम मोदी को खूब कोसा और भारत में नारी को पूजने की जो परंपरा है, उसे रेप से जोड़ा था।

मंच पर खड़ा होकर वीर दास ने कहा था, “मैं उस भारत से आता हूँ जहाँ महिला को सुबह पूजा जाता है और रात में गैंगरेप होता है।” उन्होंने एक अंग्रेजी कविता ‘आई कम फ्रॉम टू इंडिया’ (मैं दो भारत से आता हूँ) सुनाई थी। तब वकील आशुतोष जे दुबे ने भी मुंबई पुलिस में कॉमेडियन के विरुद्ध शिकायत करवाई थी।

राजस्थान में मिशनरियों के टारगेट पर 3 लाख लोग, घूम-घूमकर मूर्ति पूजा पर हो रहा दुष्प्रचार: मध्य प्रदेश में धर्मांतरण करा रहे 8 गिरफ्तार

हाल ही में उत्तर प्रदेश के मेरठ से मदद के नाम पर 400 लोगों को धर्मांतरित कर ईसाई बनाने का मामला सामने आया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में भी हिंदुओं के धर्मांतरण की साजिश बड़े पैमाने पर रची जा रही है। राज्य के करीब तीन लाख लोगों के संपर्क में ईसाई प्रचार मंडलियाँ हैं और मूर्ति पूजा को लेकर दुष्प्रचार किया जा रहा है। वहीं मध्य प्रदेश में ईसाई धर्मांतरण में लिप्त आठ लोग गिरफ्तार किए गए हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर से महज 22 किमी दूर वाटिका ग्राम पंचायत की ढाणी बैरावालाें में मिशनरी सक्रिय हैं। 400 परिवारों की इस बस्ती के लोगों को लालच देकर धर्मांतरण का प्रयास किया जा रहा है।

ईसाई प्रचारक लोगों से मूर्ति पूजा बंद करने, व्रत न रखने, हिंदू देवी-देवताओं को न मानने का उपदेश बाँटते फिर रहे हैं। साथ ही दावा करते हैं कि ईसा मसीह की पूजा से बीमारी से लेकर अन्य सभी समस्याएँ दूर हो जाएँगी। वहीं, देवी-देवताओं की पूजा से अनर्थ हो जाएगा।

स्थानीय लोगों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि मिशनरी से जुड़े लोग रोजगार का लालच दे देवी-देवताओं की मूर्तियाँ नदी, तलाब में फेंकने या फिर पीपल पेड़ के पास रखने के लिए कहते हैं। फिर, यीशू की शरण में आने के लिए प्रार्थना करने के लिए कहा जाता है। धर्म जागरण मंच के हवाले से बताया गया है कि राज्य के 12 से 13 जिलाें में ऐसा चल रहा है। इन जिलों के करीब तीन लाख लाेगों के संपर्क में मिशनरी के प्रचारक हैं।

वहीं, मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के डाला में जबरन धर्मांतरण करा रहे 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी आरोपित ईसाई मिशनरी से जुड़े हुए थे। पुलिस ने बताया है कि डाला गाँव में सोहनलाल नागेश के घर पर कुछ लोगों का धर्मांतरण कराए जाने की शिकायत मिली थी। धर्म परिवर्तन के बदले आर्थिक मदद प्रलोभन भी दिया जा रहा था।

इस मामले में श्रीराम सेना के प्रांतीय अध्यक्ष शुभम सिंह ने ऑपइंडिया को बताया, “सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में धर्मांतरण की घटनाएँ सामने आती रहती हैं। आदेगाँव में पहले भी धर्मांतरण हुआ है। लेकिन अब इन लोगों ने गिरफ्तारी से धर्मांतरण में कमी आएगी।”

परिवार को मारने पर स्वर्ग या नर्क: गूगल पर किया सर्च… माँ-बाप और 2 बेटों को मार डाला, फिर खुद भी पानी की टंकी में कूद मर गया

राजस्थान के जोधपुर में 3 नवंबर 2022 को एक ही परिवार के 5 लोगों के शव मिले थे। अब यह जानकारी सामने आई है कि इनमें से एक ने अन्य की पहले हत्या की और फिर खुद भी आत्महत्या कर ली। इस जघन्य कांड को अंजाम देने की वह कई दिनों से तैयारी कर रहा था। यहाँ तक कि गूगल से भी पूछा था कि परिवार की हत्या के बाद स्वर्ग मिलेगा या फिर नर्क।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला जोधपुर के लोहावट इलाके का है। यहाँ 38 साल का शंकर लाल अपने परिवार के साथ रहता था। वह खेती-बाड़ी का काम करता था। परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटे और माता-पिता भी थे। शंकर लाल को अफीम की लत लग गई थी, जिसकी वजह से उसका अपनी पत्नी से आए दिन झगड़ा होता रहता था। इसी वजह से वो खुद ही अपने परिवार का दुश्मन बन बैठा। शंकर लाल सितम्बर 2022 से ही अपने परिवार को खत्म करने का प्लान बना रहा था।

आखिरकार 3 नवम्बर 2022 को शंकर लाल ने पत्नी छोड़ कर अपने पूरे परिवार को मार डाला। सबसे पहले शंकर लाल ने अपने 65 साल के पिता सोनाराम की कुल्हाड़ी मार कर हत्या की। इसके बाद वो घर से भाग गया। कुछ लोगों ने सोनाराम को अस्पताल पहँचाया लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। बाद में घर आ कर उसने पूरे परिवार को नींद की गोलियाँ खिला दीं। गहरी नींद में सो जाने के बाद शंकर लाल ने बारी-बारी अपनी माँ और दोनों बेटों को पानी की टंकी में फेंक दिया।

इसके बाद शंकर लाल ने खुद भी पानी की टंकी में कूद कर आत्मह्त्या कर ली। पुलिस ने इन सभी मौतों के पीछे के कारणों की जाँच शुरू की तो उसमें शंकर लाल के मोबाइल की डिटेल अहम साबित हुई। पुलिस ने शंकर लाल की मोबाइल हिस्ट्री में पाया कि उसने सर्च किया था कि वो मौत के बाद स्वर्ग जाएगा या नर्क। इस बात से अनुमान लगाया जा रहा है कि वो अपने ही परिवार को खत्म करने से पहले अपने मौत के बाद के बारे में जानकारी जुटा रहा था।

शंकर लाल के फोन की हिस्ट्री में दूसरी अहम बात नींद की गोलियों के बारे में जुटाई गई सूचना थी। इसके लिए शंकर लाल ने अच्छी क्वालिटी की नींद की गोलियों के बारे में काफी सर्च किया था। क्वालिटी के साथ शंकर लाल ने किस गोली का कितना और कितनी देर तक असर रहता है, इसकी भी जानकारी ली थी। माना जा रहा है कि शंकर लाल की तैयारियों में अपने परिवार को नींद की गोलियों के साथ जहर भी देना शामिल था। मौत से पहले उसने परिवार के सदस्यों को नींद की 22 गोलियाँ खिलाई थी। ये गोलियाँ उसने सोने से पहले पी गई शिकंजी में डाल कर दी थीं।

इंटरनेट पर इन तमाम खोजबीन के साथ शंकर लाल सावधान इंडिया और क्राइम पेट्रोल शो भी देख रहा था। 14 सितम्बर से उसने कई अन्य क्राइम सीरीज भी देखना शुरू कर दिया था। माना जा रहा था कि हत्या की प्लानिंग उसने इन्हीं शोज को देखकर की होगी। जानकारी के अनुसार 4 शो देखने के बाद उसने घर वालों को मारने की पुख्ता तैयारी कर डाली थी। शंकर लाल अपनी पत्नी को नहीं मरना चाहता था। शंकर लाल के मोबाइल से विधवा पेंशन के बारे में जानकारी खोजी गई थी। उसकी सर्च में ये भी शामिल था कि मौत के बाद किसी परिवार के लिए सरकार क्या करती है।