Home Blog Page 2283

सलमान खान को Y+ सिक्योरिटी: लॉरेंस बिश्नोई गैंग की धमकी के बाद तगड़े हुए सुरक्षा के इंतजाम, लाइसेंसी हथियार रखने की भी मिल चुकी है अनुमति

मुंबई पुलिस ने मंगलवार (1 नवंबर, 2022) को बॉलीवुड एक्टर सलमान खान की सुरक्षा बढ़ा दी है। सलमान को कुछ समय पहले लॉरेंस बिश्नोई गैंग से धमकी मिली थी, जिसके बाद उनकी सुरक्षा बढ़ाते हुए X कैटेगरी की सिक्योरिटी दी गई थी। हालाँकि, अब एक बार फिर उन पर मँडरा रहे खतरे को देखते हुए उन्हें Y+ कैटेगरी की सुरक्षा दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सलमान खान को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से मिली धमकी के बाद महाराष्ट्र सरकार उनकी सुरक्षा में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतना चाहती है। इसलिए ही, मुंबई पुलिस की प्रोटेक्शन ब्रांच ने सलमान की सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है।

अब तक सलमान खान को मिल रही X कैटेगरी की सिक्योरिटी में उनके साथ एक पुलिस गार्ड हथियारों के साथ हमेशा तैनात रहता था। लेकिन, अब Y+ कैटेगरी की सुरक्षा मिलने के बाद उनके साथ दो पुलिस गार्ड तैनात रहेंगे। साथ ही उनके घर पर दो सशस्त्र गार्ड भी तैनात रहेंगे। बता दें कि इससे पहले सलमान खान ने एक निजी हथियार के लाइसेंस के लिए आवेदन भी किया था, जिसके बाद उन्हें लाइसेंस जारी किया गया था।

दरअसल, इसी साल जून में सलमान खान और उनके पिता, सलीम खान को एक धमकी भरा पत्र भेजा गया था। इस पत्र में सलमान और सलीम को ‘मूसेवाला’ (सिंगर मूसेवाला की तरह) करने की धमकी दी गई थी। इसके बाद, मुंबई पुलिस ने लॉरेंस बिश्नोई के गिरोह से कई गैंगस्टरों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से कई ने सलमान को निशाना बनाने की साजिश रचने की बात भी कबूल की थी। उन्हें यह धमकी पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद दी गई थी।

क्यों मारना चाहता है लॉरेन्स बिश्नोई…

सलमान खान पर काला हिरण शिकार मामले में आरोप लगने के बाद से ही लॉरेंस बिश्नोई सलमान के पीछा पड़ा हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि बिश्नोई गैंग सलमान खान को हर हाल में मारना चाहता है। इसलिए, वह उनकी हत्या की साजिश भी रच चुका है। हालाँकि, वह कभी भी सफल नहीं हो पाया।

कब्रों पर फूल और मोमबत्तियाँ, चर्चों में जुटती है भारी भीड़: रोम से निकला है ‘ऑल सेंट्स डे’, अब दुनिया भर के ईसाई मनाते हैं ये त्योहार

दुनिया भर में हर साल एक नवंबर को ईसाई समुदाय ‘ऑल सेंट्स डे (All Saints Day)’ मनाता है। इस दिन ये लोग पवित्र आत्माओं को सम्मान देते हैं। ऑल सेंट्स डे की वास्तविक तारीख अभी तक निर्धारित नहीं की जा सकी है। माना जाता है कि यह 13 मई को 609 AD से इसे मनाया जा रहा है। इस दिन को मृतकों के दिन, सभी संतों के पर्व और हेलोमोस के सम्मान के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन स्पेन, पुर्तगाल और मैक्सिको, बेल्जियम, हंगरी और इटली जैसे देश दिवंगत परिवार के सदस्यों की कब्रों पर फूल चढ़ाते हैं।

ऑस्ट्रिया, क्रोएशिया, पोलैंड और रोमानिया जैसे देशों में मर चुके लोगों की कब्रों पर मोमबत्तियाँ जलाई जाती हैं। फिलीपींस में रिश्तेदारों की कब्रों पर जाकर उन्हें साफ-सुथरा किया जाता है।

1 नवंबर का दिन चुना

बताया जाता है कि मूल रूप से ‘ऑल सेंट्स डे‘ सबसे पहले सिर्फ रोम में मनाया जाता था, लेकिन 837 में पोप ग्रेगरी IV द्वारा ‘ऑल सेंट्स डे’ को पूरे मजहब में विस्तारित किया गया था। पोप ग्रेगरी IV ने ही ‘ऑल सेंट्स डे’ को 1 नवंबर को मनाने का निर्देश दिया था। ‘ऑल सेंट्स डे’ के दिन लोग भारी संख्या में चर्च जाते हैं और मास प्रेयर में हिस्सा लेते हैं। लैटिन समुदाय में लोग इस दिन अपने परिवार के मरे हुए लोगों के कब्र पर जाते हैं, वहाँ उनका पसंदीदा खाना बनवाते हैं और पार्टी करते हैं।

ऑल सेंट्स डे पवित्र दिन

बता दें कि मेथोडिस्ट संतों के जीवन और मृत्यु के लिए ईश्वर के प्रति अपनी ईमानदारी व्यक्त करने के लिए इसे ‘ऑल सेंट्स डे’ के रूप में मनाते हैं। ‘ऑल सेंट्स डे’ आमतौर पर कैथोलिकों के लिए दायित्व का पवित्र दिन होता है। इस दिन सभी से इसमें भाग लेने की उम्मीद की जाती है। प्रोटेस्टेंट सुधार के बाद, कई प्रोटेस्टेंट संप्रदायों ने ऑल सेंट्स डे मनाना जारी रखा। अधिकांश लोगों का मानना है कि यह 13 मई को 609 AD से चला आ रहा है। इस दिन कब्रिस्तान साफ-सुथरा और एक हरे-भरे बगीचे जैसा दिखता है।

3 भाई समीर, आरजू और गुलफाम ने 2 सगी बहनों से की छेड़छाड़, हिन्दू लड़कियों ने चप्पल से पीटा: हिन्दू संगठनों ने थाने में पढ़ी हनुमान चालीसा, गूँजा ‘जय श्री राम’

उत्तर प्रदेश के मेरठ में माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब 3 मुस्लिम युवकों ने हिन्दू समुदाय की 2 सगी बहनों से छेड़छाड़ की। तीनों आरोपितों के नाम समीर, आरजू और गुलफाम हैं। तीनों को आपस में भाई बताया जा रहा है। इस करतूत से नाराज हो कर हिन्दू संगठनों ने थाने में हनुमान चालीसा पढ़ी है। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना रविवार (30 अक्टूबर 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को दोनों बहनें अपने परिवार के एक बीमार सदस्य की दवा खरीद कर घर लौट रहीं थीं। इस रास्ते में एक सुनसान गली पड़ती है। आरोप है कि वहीं पर समीर, आरजू और गुलफाम ने दोनों बहनों को रोक कर छेड़छाड़ शुरू कर दी। छेड़छाड़ के विरोध में दोनों बहनों ने आरोपितों की चप्पलों से पिटाई कर दी। शोरगुल सुन कर आस-पास के लोग जमा होने लगे तो आरोपित भाग निकले।

मामले की जानकारी हिन्दू संगठनों को हुई तो वो थाने पहुँच गए। बजरंग दल के पदाधिकारियों ने आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए थाने में हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान सभी हिंदूवादी लोग थाने में ही बैठ कर हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे। हिन्दू संगठनों ने जय श्रीराम के नारे लगा कर योगीराज होने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस सरकार में ऐसे किसी भी अराजक तत्व को छोड़ा नहीं जाएगा।

थाना प्रभारी इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर के आरोपितों की तलाश शुरू कर दी। TV9 भारतवर्ष संवाददाता अनमोल शर्मा के मुताबिक तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मदरसों को स्कूल में बदलने का कानून: मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस, असम की सरमा सरकार ने लिया था फैसला

साल 2020 में असम विधानसभा में एक कानून पारित किया गया था, जिसके अनुसार राज्य सरकार द्बारा संचालित मदरसों को सामान्य स्कूलों में बदला जाना था। इस कानून को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखने का फैसला सुनाया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका पर मंगलवार (1 नवंबर। 2022) को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले पर नोटिस जारी किया है।

दरअसल, इस कानून के विरोध में मदरसों की प्रबंध समितियों द्वारा इस मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया था कि असम विधानसभा के इस कानून ने संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 का उल्लंघन किया है।

हालाँकि, मदरसों की प्रबंधन समितियों की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुधांशु धूलिया के नेतृत्व में हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने असम मदरसा शिक्षा (प्रांतीकरण) अधिनियम, 1995 को रद्द करते हुए निरसन अधिनियम, 2020 (असम विधानसभा द्वारा बनाए गए कानून) को बरकरार रखा था।

गुवाहाटी हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में असम सरकार पर विधायी और कार्यकारी दोनों शक्तियों का मनमाने ढंग से उपयोग करने का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि पर्याप्त मुआवजे के के बिना मदरसों के ‘मालिकाना अधिकारों में अतिक्रमण’ करना अनुच्छेद 30 (1 ए ) का उल्लंघन है। यह भी दावा किया गया है कि इस कानून ने अनुच्छेद 30 (1) के अंतर्गत शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन करने के अधिकारों को भी समाप्त कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता संजय हेगड़े ने जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस सीटी रविकुमार की खंडपीठ के समक्ष कहा है कि उच्च न्यायालय का फैसला गलत था, क्योंकि इसने राष्ट्रीयकरण के साथ प्रांतीयकरण की भी बराबरी की थी। उन्होंने यह भी कहा है कि यह पूरा मामला अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों से संबंधित है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब और धार्मिक शिक्षा नहीं हो सकती, क्योंकि संस्थानों को पूरी तरह से राज्य द्वारा संचालित किया जा रहा है।

इसके अलावा इस याचिका में यह भी कहा गया है कि साल 1995 का अधिनियम मदरसों में कार्यरत शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को वेतन का भुगतान करने और परिणामी लाभ प्रदान करने के लिए राज्य के उपक्रम तक सीमित था। साथ ही के लिए भी इन धार्मिक संस्थानों के प्रशासन, प्रबंधन और नियंत्रण का अधिकार था। हालाँकि, साल 2020 का कानून अल्पसंख्यकों की संपत्ति छीन रहा है और धार्मिक शिक्षा प्रदान करने के अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकार को प्रभावित करता है।

इस बारे में जस्टिस रस्तोगी ने पूछा कि आपके कहने का मतलब यह है कि मदरसों या अल्पसंख्यक समुदाय की संपत्ति भी सरकार द्वारा ली जा रही है? और नोटिफिकेशन केवल कर्मचारियों या मदरसों में तैनात शिक्षकों की सेवा शर्तों के संदर्भ में हैं?

इस पर याचिकाकर्ता के वकील हेगड़े ने कहा, “हाँ, नोटिफिकेशन तो बस इतना ही था। लेकिन, असल में मदरसों की संपत्ति छीन ली गई।” उन्होंने ने यह भी तर्क दिया है कि हाईकोर्ट के फैसले के संचालन के परिणामस्वरूप मदरसों को बंद कर दिया जाएगा। साथ ही, इस शैक्षणिक सत्र में पुराने पाठ्यक्रमों के लिए छात्रों को प्रवेश देने से रोक दिया जाएगा, जो कि अल्पसंख्यकों को अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए दी गई संवैधानिक गारंटी के खिलाफ होगा।

राहुल गाँधी करते हैं ‘डेथ ऑफ डेमोक्रेसी’ की बातें, लेकिन CM गहलोत के लिए लोकतंत्र की जड़ें गहरी: जम कर की PM मोदी की तारीफ़

एक तरफ कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) कह रहे हैं कि देश में लोकतंत्र की हत्या की जा रही है और दूसरी तरफ उनकी पार्टी के मुख्यमंत्री लोकतंत्र को मजबूत होता बता रहे हैं। इसके लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की तारीफ की है।

अशोक गहलोत ने कहा कि पीएम मोदी को दुनिया भर में इसलिए सम्मान मिलता है, क्योंकि वह ऐसे देश के प्रधानमंत्री हैं जहाँ लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हैं। सीएम गहलोत ने यह बात उस उक्त कही, जब मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद मौजूद थे।

बांसवाड़ा में ‘मानगढ़ धाम की गौरव गाथा’ कार्यक्रम को संबोधित करते सीएम गहलोत ने मंगलवार (1 नवंबर 2022) को कहा, “प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के मुल्कों में जाते हैं तो उन्हें कितना सम्मान मिलता है। ऐसा क्यों होता है… क्योंकि नरेंद्र मोदी जी उस देश के प्रधानमंत्री हैं जो गाँधी का देश है, जहाँ लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हैं, गहरी हैं। यहाँ 70 साल के बाद भी लोकतंत्र जिंदा रहा है।”

वहीं, भारत जोड़ो यात्रा पर निकले राहुल गाँधी ने सोमवार (31 अक्टूबर 2022) को कहा कि देश के लोकतंत्र पर हमले हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया और न्यायपालिका पर लगातार हमले हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कॉन्ग्रेस सत्ता में वापस आती है तो वे देश के संस्थानों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रभाव से मुक्त कराएँगे।

यह पहली बार नहीं है, जब राहुल गाँधी ने देश के संस्थानों को नुकसान पहुँचाने का आरोप भाजपा और संघ पर लगाया है। इससे पहले 5 अगस्त 2022 को राहुल गाँधी ने कहा था कि भारत में ‘लोकतंत्र की मौत’ हो रही है। उन्होंने कहा था कि जो भी सरकार का विरोध करता है, उस पर हमला किया जाता है और उसे जेल में बंद कर दिया जाता है।

कागज़ नहीं दिखा रहा था, पकड़ा गया… मुंबई में भारतीय बन कर रह रहा था बांग्लादेशी घुसपैठिया आरिफ, पुलिस ने दबोचा

मुंबई में पुलिस ने अवैध तौर पर रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार बांग्लादेशी का नाम आरिफ तमानजीत सरदार है। आरिफ बांग्लादेश के खुलना जिले के रहने वाला है। बताया जा रहा है कि पकड़ा गया बांग्लादेशी महाराष्ट्र में भारतीय बन कर रह रहा था। पुलिस आरोपित से पूछताछ कर रही है। गिरफ्तारी रविवार (30 अक्टूबर, 2022) को की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित की गिरफ्तारी मानखुर्द इलाके से रात लगभग 10 बजे के आस-पास की गई है। बताया जा रहा है कि आरिफ लल्लू भाई कम्पाउंड, हीरानंदानी आकुर्ती के बिल्डिंग नंबर 22 में पिछले कई वर्षों से रह रहा था। वह मूल रूप से बांग्लादेश के खुलना जिले में गाँव पुलवा, पोस्ट पाशापुर का निवासी है। जब पुलिस ने आरोपित से कागजात माँगे तब वो आनाकानी करता रहा। पुलिस उससे मिली जानकारी के आधार पर आगे की जाँच कर रही है। स्थानीय पत्रकार मनोज कुमार दुबे ने आरोपित को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम के बारे में भी बताया है।

महाराष्ट्र में पहले भी पकड़े गए हैं बांग्लादेशी

गौरतलब है कि आरिफ की गिरफ्तारी मुंबई में अवैध बांग्लादेशियों के पकड़े जाने की पहली घटना नहीं है। इस से पहले नवम्बर 2020 में भिवंडी में पुलिस ने 40 अवैध बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया था। नवम्बर 2020 में ही भिवंडी में से ही 9 अवैध बांग्लादेशी गिरफ्तार किए गए थे। ये सभी सरवल्ली गाँव में रह रहे थे। इन सभी को भिवंडी में बुलाने वाला मुख्य आरोपित सलीम शेख था जो लगभग 16 वर्षो से भिवंडी में अवैध तौर पर रह रहा था।

तब गिरफ्तार आरोपितों की पहचान सलीम अमीन शेख (30), रसल अबुल हसन शेख (27), मोहम्मद शाहिन शेख (24), मोहम्मद मासूम इस्लाम (21), तरुण त्रिपुरा (21), सुमन त्रिपुरा (25) इस्माइल खान (19), आजम खान (19) और मोहम्मद आमिर खान (26) के रूप में हुई थी।

ब्रिटेन के नए PM ऋषि सुनक ने प्रधानमंत्री आवास को बना दिया ‘विवाह भवन’, वायरल वीडियो के आधार पर दावा: जानें पूरा माजरा

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा कि है कि यह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (British Prime Minister Rishi Sunak) का है, जिन्होंने कथित तौर पर ’10 डाउनिंग स्ट्रीट’ को ‘एशियन वेडिंग वेन्यू’ में बदल दिया है। UB1UB2 साउथॉल नाम के ट्विटर हैंडल ने 30 अक्टूबर 2022 को इस वीडियो साझा किया है।

वीडियो में यूजर ने लिखा, “ऋषि सनक ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट को एशियन वेडिंग वेन्यू में बदल दिया। इस वीडियो में महिलाओं को साड़ी और पुरुषों को कोट पैंट पहने हुए ब्रिटिश पीएम के आधिकारिक आवास ’10 डाउनिंग स्ट्रीट’ पर पहुँचते हुए देखा गया।” बता दें कि जॉर्जियन आर्किटेक्चर स्टाइल में बना ’10 Downing Street’ लंदन के वेस्टमिनिस्टर में स्थित है, जो वहाँ के प्रधानमंत्री का आवास होता है। 100 कमरों वाला ये लक्ज़री स्थल 340 वर्ष पुराना है और ब्रिटेन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

दरअसल, हाल ही में ऋषि सुनक ने ‘10 डाउनिंग स्ट्रीट’ में दिवाली रिसेप्शन का आयोजन किया था। लेकिन ऋषि सुनक की छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए इसे इस तरह से फैलाया गया कि उन्होंने ’10 डाउनिंग स्ट्रीट’ को ‘एशियन वेडिंग वेन्यू’ में बदल दिया।

उल्लेखनीय है कि वायरल हो रही वीडियो का किसी वेडिंग से कोई लेना-देना नहीं है। ऑपइंडिया द्वारा किए गए फैक्ट चेक में यह सामने आया है​ कि यह दिवाली फंक्शन का एक वीडियो है, जिसे ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री ऋषि सुनक द्वारा ’10 डाउनिंग स्ट्रीट’ में आयोजित किया गया था। इस वीडियो को ‘डेली मेल’ ने अपने यूट्यूब चैनल पर शेयर किया है।

UB1UB2 Southall नाम का ट्विटर हैंडल वही है, जिसने 20 अक्टूबर, 2022 को ब्रिटिश पीएम का एक अन्य फेक वीडियो भी शेयर किया था। इस वीडियो में ऋषि सुनक के जैसा दिखने वाला एक व्यक्ति डांस करते हुए दिखाई दे रहा है। वीडियो में दावा किया गया था कि ऋषि सुनक ने पूर्व पीएम लिज ट्रस के इस्तीफे की बात सुनने के बाद जश्न मनाया था।

आपको बता दें कि पिछली वीडियो की तरह यह वीडियो भी फे​क था। वीडियो में दिखाई दे रहा शख्स ऋषि सुनक नहीं हैं। साथ ही वीडियो लेटेस्ट नहीं, बल्कि 3 साल पुराना है। इसे 2019 में एक वेरिफाइड इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया गया था।

बता दें कि आर्थिक संकटों में घिरे ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Rishi Sunak) को 24 अक्टूबर, 2022 को सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी ने अपना नेता चुना। सुनक अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को लेकर बेहद मुखर रहते हैं। गीता में उनकी गहरी आस्था है। बतौर सांसद उन्होंने गीता की ही शपथ ली थी। उनके प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद सोशल मीडिया पर कोहिनूर से लेकर भगोड़े कारोबारी विजय माल्या, नीरव मोदी तक की भारत वापसी पर नेटिजन्स चर्चा करते दिखे।

पूर्व प्रधानमंत्री लिज ट्रस ने कार्यभार संभालने के 45वें दिन, यानी 20 अक्टूबर 2022 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। पूर्व प्रधानमंत्री लिज ट्रस ने कहा था कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए, उन्हें लगता है कि वह उन वादों को पूरा नहीं कर पाई हैं, जिनके लिए वह लड़ी थीं। इसलिए वह अपना इस्तीफा दे रही हैं।

7 साल की हर्षानी ने मोरबी पुल हादसे में अपने माता-पिता को खोया, 4 साल का जियांश भी हो गया अनाथ: नदी में उतरे पूर्व भाजपा MLA की तस्वीर वायरल

गुजरात के मोरबी पुल हादसे के बाद अब कई दर्दनाक कहानियाँ निकलकर सामने आ रही हैं। किसी ने अपने माँ-बाप खोए, तो किसी ने अपने मासूम बच्चे को खोया। किसी के परिवार में कोई अकेला बचा तो कहीं एक साथ कई लोगों की अर्थियाँ उठीं। ऐसी ही दर्दनाक दास्ताँ है सात वर्षीय हर्षानी चावड़ा की, जिसने इस दुर्घटना में अपने माँ-बाप को खो दिया।

हर्षानी के आँखों के सामने उसके उसके माता-पिता मच्छू नदी में बह गए। हर्षानी अपने माता-पिता अशोकभाई और भावनाबेन के साथ अहमदाबाद से मोरबी घूमने आई थी। हर्षानी के माता-पिता तो बच नहीं पाए गए लेकिन उसे (हर्षानी) को बचा लिया गया। ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए अशोकभाई के पिता ने कहा, “हमें शाम को फोन आया और हम तुरंत मोरबी के लिए रवाना हो गए। जब हम वहाँ पहुँचे तो देखा कि मेरा बेटा और उसकी पत्नी मर चुके हैं, जबकि उनकी बेटी बच गई है। हर्षानी पूरी रात अपने माता-पिता के बारे में पूछ रही थी।”

अशोकभाई मेडिकल स्टोर पर दवा सप्लाई करते थे। वह अपने परिवार के साथ कच्छ की यात्रा पर थे और उन्होंने पुल को देखने का फैसला किया था। वहीं अशोकभाई की माँ ने बताया कि उनका परिवार बेटे की आय पर निर्भर था, लेकिन अब वह चला गया है। उन्होंने बताया कि उनकी पोती घटना के वक्त अपने पिता के कंधे पर थी।

हर्षानी की दादी ने कहा, “वह सात साल की है। वह कैसे जिएगी? मेरी उम्र 70 साल से अधिक है। हम नहीं जानते कि हम किस उम्र तक उसका साथ दे सकते हैं या उसका पालन-पोषण कर सकते हैं। अगर मुझे कुछ हो गया तो उसे कौन पालेगा?”

चार वर्षीय जियांश के भी माता-पिता की मौत

वहीं मोरबी में रहने वाले हार्दिक फलदू पत्नी मिरल और चार साल के बेटे जियांश के साथ रविवार की शाम घूमने निकले थे। शाम करीब 6 बजे तीनों ब्रिज पर पहुंचे और कुछ ही देर बाद ब्रिज टूट गया। तीनों नदी में गिर गए। हादसे में हार्दिक और पत्नी मिरल की मौत हो गई, लेकिन डूब रहे जियांश को किसी ने बचा लिया। जियांश की जान तो बच गई, लेकिन अब उसके सिर पर माता-पिता का साया नहीं रहा।

चार वर्षीय जियांश अपने माता-पिता के साथ (फोटो क्रेडिट -दैनिक भास्कर )

सुभाषभाई ने 8 लोगों की जान बचाई

हादसे के वक्त चश्मदीद सुभाषभाई ने कहा कि वो लोग पुल के बगल में स्वामीनारायण मंदिर के निर्माण पर काम कर रहे थे। पुल टूटा हुआ देखकर वो लोग तुरंत दौड़े और 8 की जान बचाई। उन्होंने बताया कि वो और लोगों को नहीं बचा सके। बड़े लोग पुल की रस्सी के सहारे बाहर निकले, लेकिन छोटे बच्चे नदी से बाहर नहीं निकल पाए।

मोरबी के पूर्व विधायक लोगों को बचाने नदी में कूदे

मोरबी के पूर्व विधायक कांति अमृतिया लोगों को बचाने के लिए खुद नदी में उतर गए। इस त्रासदी के बाद कांति ने एक वीडियो जारी कर कहा कि वहाँ तुरंत लाइटिंग की व्यवस्था की जाए। कलेक्टर ने उनकी सलाह पर काम किया और रेस्क्यू के लिए इंतजाम किया।

गुजरात के मोरबी पुल हादसे में मरने वालों की संख्याँ 140 से ज्यादा पहुँच गई है। मृतकों में 25 बच्चे भी शामिल हैं। 170 लोग अब तक रेस्क्यू किए गए हैं। हादसा रविवार शाम 6.30 बजे हुआ था। 143 साल पुराना यह पुल 6 महीने से बंद था। हाल ही में इसकी मरम्मत की गई थी।

उत्पीड़न, गर्भपात, आत्महत्या के लिए उकसाया… भोजपुरी स्टार पवन सिंह की दूसरी पत्नी की शिकायत पर कोर्ट का समन, पहली पत्नी ने कर ली थी आत्महत्या

भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार पवन सिंह (Superstar Pawan Singh) का विवादों से नाता है। एक बार फिर वे विवादों में घिर गए हैं। घरेलू मामले में कोर्ट ने पवन सिंह को समन भेजा है। दरअसल, उनकी दूसरी पत्नी ज्योति ने छह महीने पहले कोतवाली में उनके खिलाफ मानसिक उत्पीड़न, गर्भपात के लिए मजबूर करने और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है।

बिहार के आरा के रहने वाले पवन सिंह की शादी ज्योति के साथ साल 6 मार्च 2018 में उत्तर प्रदेश के बलिया स्थित मिड्ढी की रहने वाली ज्योति के साथ हुई थी। हालाँकि, लगभग पाँच साल में यह शादी भी टूटने के कगार पर पहुँच गई है। इसको लेकर अदालत में तलाक का मामला विचाराधीन है। इसके पहले उनकी पत्नी ने आत्महत्या कर लिया था।

अप्रैल 2022 में दी गई अपनी शिकायत में ज्योति ने आरोप लगाया है कि शादी के कुछ दिनों बाद ही पवन सिंह और उनके घरवाले उनके लुक को लेकर ताना देने लगे। ससुराल वाले तरह-तरह से प्रताड़ित करने के लिए आत्महत्या के लिए उकसा रहे हैं। ज्योति ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी सास ने उसके मामा से मिले करीब 50 लाख रुपए छीन लिए।

ज्योति ने शिकायत में पति पर मारपीट का भी आरोप लगाया है और कहा है कि उनका जबरन गर्भपात भी कराया गया। इतना ही नहीं, उससे दहेज में मर्सिडीज कार भी माँगी गई थी। ज्योति ने 22 अप्रैल को फैमिली कोर्ट में खिलाफ भरण-पोषण का मुकदमा दायर किया है। ज्योति ने कहा कि उनके पास आरोपों के सबूत हैं और समय आने पर वह इसे सार्वजनिक करेंगी।

बता दें कि भोजपुरी फिल्मों के सबसे महँगे स्टारों में एक पवन सिंह की पहली शादी साल 2014 में नीलम सिंह नाम की एक युवती के साथ हुई थी। हालाँकि, नीलम ने साल 2015 में आत्‍महत्‍या कर ली थी। इस शादी को लेकर पवन सिंह के तरह-तरह के आरोप भी लगे। इसके बाद उन्होंने ज्योति के साथ दूसरी शादी की थी।

इस मामले में यूपी के बलिया कोर्ट ने अभिनेता को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने 36 वर्षीय भोजपुरी सिनेमा के अभिनेता पवन सिंह को 5 नवंबर को कोर्ट में हाजिर होने के लिए कहा है।

मोरबी के 4 कब्रिस्तानों में लाशों का अंबार, कब्र खोदने में जुटे हैं 150 लोग: कर्मचारियों ने बताया – इतनी कब्रें कभी नहीं खोदी, बिना खाए-पिए कर रहे काम

रविवार (30 अक्टूबर, 2022) को गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी पर बने पुल के टूटने से हुए हादसे से पूरा देश स्तब्ध रह गया है। इस हादसे में अब तक 141 लोगों की मौत हो गई है। साथ ही, लगभग 100 लोग घायल हुए हैं। एनडीआरएफ की टीमें, तीनों सेना के जवान व स्थानीय लोग अब भी राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। हादसे में लापता हुए लोगों की तलाश चल रही है।

इस भीषण हादसे के बाद जिस तरह से मौत के आँकड़े आ रहे थे, उससे हर कोई सिहर उठता था। हादसे के बाद, मोरबी के सबसे बड़े कब्रिस्तान में लाशों की लाइन लगी हुई थी। हालत यह थी कि शहर के एक ही कब्रिस्तान में 26 लोगों को दफनाया गया है। इसके लिए घटना की रात से लेकर अगले दिन शाम 7 बजे तक करीब 150 लोग यहाँ कब्रें खोदने में जुटे रहे। शहर के 4 कब्रिस्तानों में मुर्दों को दफनाने के लिए वेटिंग चल रही थी।

दरअसल, कब्रिस्तान में काम करने वाले कर्मचारी इतनी कब्र नहीं खोद सकते थे। इसलिए, मृतकों के रिश्तेदारों के सहयोग के बाद कब्र खोदी गई हैं। हर कोई मृतकों के दफनाए जाने का इंतजार कर रहा था। लेकिन, ताबूतों की कमी और लाशों की संख्या में एक के बाद इजाफा होने के कारण इसमें काफी देरी हो रही थी।

इस कब्रिस्तान के मुख्य कार्यवाहक गफ्फूर पास्तिवाला ने कहा है कि पुल टूटने से हुए हादसे ने उन्हें हैरान कर दिया था। उन्हें रात भर में 40 कब्रें खोदनी पड़ीं थीं। कब्रिस्तान में 12 घंटे के भीतर 20 लोगों को दफनाया गया था, जिनमें 8 बच्चे भी शामिल थे। उन्होंने कहा है कि एक साथ इतनी सारी कब्रें उन्होंने कभी नहीं खोदी थी। पास्तिवाला ने कब्रिस्तान में चार कब्रों की लाइन की ओर इशारा करते हुए कहा है कि ये लोग सुमारा परिवार के थे। परिवार के 7 लोग मारे गए हैं। इनमें 4 महिलाएँ और 3 बच्चे हैं।

एक कब्रिस्तान के प्रभारी अधिकारी मोहम्मद तौफीक का कहना है कि उनके कर्मचारी पीड़ितों के परिवारों की मदद के लिए बिना रुके काम कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा, “हम कल रात से न तो सोए हैं और न ही कुछ खाया है। पूरा इलाका शोक में डूबा हुआ है। हम सभी टूटा और बिखरा हुआ महसूस कर रहे हैं। इस हादसे से हुए नुकसान के बारे में बताने के लिए मेरे पास कोई शब्द नहीं है। मुझे लगता है कि ऐसा कुछ भी नहीं है जो हमारे दर्द को कम कर सके।”

स्थानीय व्यवसायी रफीक गफ्फार अपने दो भतीजों निसार इकबाल और अरमान इरफान को दफना के लिए कब्रिस्तान आए हुए थे। गफ्फार ने दुःख जताते हुए कहा है कि यह भीषण त्रासदी थी। उन्होंने बताया कि लोग रो और चीख रहे थे। बाक़ायल गफ्फार, यह कयामत के दिन जैसा लग रहा था। नदी में हर तरफ लाशें तैर रहीं थीं। पुल में फँसे हुए लोग मदद के लिए चीख-चिल्ला रहे थे।

मोरबी में पुल टूटने से हुए हादसे में पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले का रहने वाला हबीबुल शेख काम करने के लिए मोरबी आया था। लेकिन, पुल टूटने से काल के गाल में समा गया। हबीबुल की मौत से उसके घरवालों का बुरा हाल है। उसके पिता महिबुल शेख ने कहा है कि यह उनकी इकलौती संतान थी।

इस हादसे में जिंदा बचे लोगों में से एक नईम शेख नामक व्यक्ति मोरबी के सिविल अस्पताल में भर्ती है। नईम शेख ने कहा, ”हम 6 लोग वहाँ गए थे। जिसमें से एक की मौत हो गई। 5 ही वापस आए हैं। मैं तैर सकता हूँ, इसलिए बच गया। मैं और मेरे दोस्त ने मिलकर कुछ लोगों को बचाया है। यह दिल दहला देने वाला हादसा था। जब मैं लोगों को सुरक्षित स्थान पर ला रहा था तो मुझे चोट लगी।”