बिहार के समस्तीपुर जिले में दलित युवक को थूक चटवाने के मामले में पुलिस ने 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इसमें से एक आरोपित नामजद था, जिसका नाम फ़िरोज़ है। इसके अलावा पुलिस ने 2 अन्य आरोपितों की पहचान वीडियो फुटेज के आधार पर करने का दावा किया है। इनके नाम अनिल और विनोद पासवान हैं। मुख्य आरोपित अलाउद्दीन फरार है, जो वायरल वीडियो में मौलाना जैसी शक्ल में दिखाई दे रहा है। आरोप है कि उसी ने पीड़ित को थूक चाटने पर मजबूर किया था।
नहीं लगा है SC/ST एक्ट
इस घटना के शिकायतकर्ता चौकीदार राम भरोस पासवान ने अपनी शिकायत में 50 से 60 अज्ञात लोगों को आरोपित किया है। ऑपइंडिया ने इस घटना पर थाना प्रभारी विभूतिपुर संदीप कुमार से बात की। उन्होंने हमें बताया कि केस IPC की धारा 348 और 323 में दर्ज हुआ है। थाना प्रभारी के मुताबिक, अलाउद्दीन नाम का आरोपित अभी तक गिरफ्तार नहीं हुआ है और उसके बेटे फ़िरोज़ को पकड़ लिया गया है। गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई को थानेदार संदीप ने मिले सबूतों और जारी अनुसंधान के आधार पर बताया।
जानकारी के मुताबिक, IPC की धारा 348 किसी व्यक्ति को बंधक बना कर उस से कोई अपराध कबूल करवाने पर हुई मारपीट के बाद लगती है। जबकि IPC की धारा 323 किसी के विरुद्ध सामान्य मारपीट के बाद लगती है। इन केसों में अधिकतम 3 साल की सज़ा है। केस में SC/ST एक्ट की धारा न जोड़ने के सवाल पर संदीप कुमार ने कहा कि उच्चाधिकारियों के जो भी निर्देश आएँगे, उस अनुसार काम किया जाएगा।
थानेदार के मुताबिक, अब तक हुई 3 गिरफ्तारियों पर कोई पुलिस प्रेसनोट नहीं बनी है जिसे बनाना सीनियर आधिकारियों का काम है। कम्युनिस्ट पार्टी से स्थानीय विभूतिपुर के विधायक कॉमरेड विधायक अजय कुमार पहले ही भीड़ में राजू की ही जाति के कुछ लोगों की मौजूदगी का बयान दे कर उसे पंचायत का फैसला बता चुके हैं।
लड़का-लड़की का बयान ले कर तय हो विवाद की वजह
ऑपइंडिया ने पीड़ित युवक राजू पासवान के गाँव महिसारी के मुखिया श्रवण पासवान से बात की। श्रवण ने हमें बताया कि राजू की पिटाई की वजह की उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं है और जो प्यार-मोहब्बत की बातें सामने आ रहीं हैं, उस पर खुद लड़का और लड़की के बयान ले कर निर्णय लिया जाना चाहिए। मुखिया ने हमें बताया कि पीड़ित राजू को पंचायत में बिठाया गया था और वो घटनास्थल पर पहुँच कर उसे छुड़ा कर लाए थे। श्रवण का ये भी कहना था कि पीड़ित और आरोपित, दोनों ही पक्ष मामले में किसी भी प्रकार की पुलिस कार्रवाई नहीं चाहते।
मुखिया ने बताया कि चकहबीब में जो भी माहौल बना था उसमें उनकी प्राथमिकता सबसे पहले राजू को बचा कर लाना थी। श्रवण ने हमें बताया कि घटना के बाद विभूतिपुर थाने के स्टाफ गाँव में पूछताछ के लिए आए थे। उनके मुताबिक, तब राजू को उसके ही घर वालों ने डर से घर में रहने के लिए कह दिया था जिसके चलते उस से पूछताछ नहीं हो पाई थी। राजू के कहीं चले जाने की खबरों को भी मुखिया श्रवण ने अफवाह बताया और कहा कि वो अपने घर में ही है।
मेरा पति नहीं, कैसे लड़ पाएंगे मुकदमा
ऑपइंडिया ने पीड़ित राजू पासवान की माँ मंजू देवी से बात की। राजू की माँ ने बताया कि उनका बेटा और लड़की दोनों एक ही कोचिंग में पढ़ते थे और घटना के दिन लड़की ने खुद ही राजू से खुद को गाँव छोड़ कर आने के लिए कहा था। दोनों के बीच प्यार-मोहब्बत की बातों को पीड़ित की माँ ने परिचय और दोस्ती करार दिया। राजू की माँ ने हमें बताया कि उनका बेटा अभी नाबालिग है और उसके पिता की पूर्व में हो चुकी है।
अपने बेटे के साथ हुए अमानवीय कृत्य को गलत बताते हुए मंजू देवी ने कहा कि वो कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं चाहती हैं क्योंकि उनके घर में कोई मुकदमे आदि की पैरवी के लिए नहीं है। राजू की माँ मंजू देवी के मुताबिक भी राजू कहीं नहीं गया है और वो अपने घर पर है।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (Crime Branch, Delhi Police) ने सोमवार (31 अक्टूबर 2022) को वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ (The Wire) से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की। इस छापेमारी में द वायर के सह-संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन (Siddharth Varadrajan), एमके वेणु (MK Venu), सिद्धार्थ भाटिया (Sidharth Bhatia) और कर्मचारी जाह्नवी सेन (Jahanvi Sen) के घर शामिल हैं।
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद वामपंथी लॉबी (Left- Liberal Gang) सक्रिय हो गई है और विक्टिम कार्ड खेलना शुरू कर दिया है। इसमें वरदराजन की पत्नी नंदिनी सुंदर (Nandini Sundar) शामिल हैं। यह समूह अपने कुतर्कों से ये साबित करने का प्रयास कर रहा है कि पुलिस का यह एक्शन वर्तमान सरकार की नीतियों में कमियाँ दिखाने के कारण है। हालाँकि, असलियत कुछ और ही है।
अर्बन नक्सलियों से जुड़े समूह द्वार छापेमारी का विरोध
दिल्ली पुलिस की छापेमारी के विरोध में जो वामपंथी लॉबी एकजुट हुई है, उसमें DIGIPUB भी शामिल है। इस समूह के वाइस चेयरमैन प्रबीर पुरकायस्थ (Prabir Purkayastha) हैं। एक प्रेस रिलीज जारी करके DIGIPUB ने लिखा है कि एक पत्रकार की गलती की सज़ा पूरे द वायर संस्थान को देना गलत है। पुलिस कार्रवाई को उत्पीड़न घोषित करते हुए DIGIPUB ने कहा कि भारत की पत्रकारिता खराब दौर से गुजर रही है जिसमें पुलिस के इस कदम का और भी बुरा असर पड़ेगा।
Digipub’s statement on police searches on the homes of the editors and a reporter of The Wire pic.twitter.com/ewZCIZNL4C
— DIGIPUB News India Foundation (@DigipubIndia) November 1, 2022
DIGIPUB ने अपने बयान में कहा, “यह कार्रवाई भाजपा के ‘प्रवक्ता’ अमित मालवीय द्वारा दायर की गई प्राथमिकी के दो बाद की गई है। मालवीय की यह शिकायत सोशल मीडिया कंपनी मेटा (Meta) को लेकर वायर द्वारा की गई स्टोरीज की श्रृंखला से संबंधित है। इसमें कहा गया था कि X-Check नामक इंस्टग्राम प्रोग्राम के तहत मालवीय को स्पेशल सेंसरशिप प्रवीलेज मिली थी। वायर ने इन्हें यह कहते हुए हटा लिया कि इसके इन्वेस्टिगेटिव टीम के सदस्य ने धोखा दिया है।”
डीजीपब ने आगे कहा, “गलत रिपोर्ट पेश करने वाले पत्रकार या मीडिया हाउस को उसके साथियों या समाज द्वारा जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, लेकिन पुलिस द्वारा सत्ताधारी पार्टी के प्रवक्ता के मानहानि के एक निजी मामले में मीडिया हाउस के दफ्तर और संपादक के घरों की तलाशी लेने से उसके गलत इरादे की बू आती है। इस तलाशी में द वायर के पास उपलब्ध गोपनीय एवं संवेदनशील डेटा और सूचनाओं को जब्त करने या उसकी कॉपी करने के खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता।”
विक्टिम कार्ड खेलते हुए DIGIPUB ने आगे कहा, “जाँच कानूनी दायरे में नहीं होना चाहिए। यह पहले से ही भारत में डरी हुई मीडिया, जिसकी ग्लोबल मीडिया इंडेक्स और डेमोक्रेसी में लगातार गिरावट देखी जा रही है, को और बदतर करने के लिए नहीं होना चाहिए। हाल ही में ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं, जिसमें पत्रकारों को उनका काम करने से रोकने के लिए आपराधिक धमकी दी गई।”
DIGIPUB से जुड़े अर्बन नक्सलियों पर छापेमारी हुई थी
गौरतलब है कि DIGIPUB वही समूह है जिसका कनेक्शन फरवरी 2021 में नक्सली गौतम नवलखा से जुड़ा पाया गया था। इस संगठन पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप है। इस मामले में फरवरी 2021 में प्रबीर पुरकायस्थ के कार्यालय और घर पर छापेमारी हुई थी। कंपनी पर 3 साल में 30 करोड़ रुपए से अधिक लेने का आरोप है।
प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के प्रावधानों के तहत पीपीके न्यूजक्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित अपराध की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय द्वारा हाल ही में प्रबीर पुरकायस्थ के कार्यालय और घर पर छापा मारा गया था। कंपनी पर रुपये से अधिक लेने का आरोप है। 3 साल में 30 करोड़।
आरोप लगाया गया था कि परामर्श शुल्क के नाम पर पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को धन वितरित किया गया था। लाभार्थियों में तीस्ता सीतलवाड़ से जुड़े लोग शामिल हैं। अन्य लाभार्थियों में गौतम नवलखा, परंजॉय गुहा ठाकुरता शामिल हैं।
प्रबीर पुरकायस्थ गौतम नवलखा के साथ कंपनियों में निदेशक थे। गौतम नवलखा भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार ‘अर्बन नक्सल’ में से एक है और कथित तौर पर पाकिस्तान के आईएसआई से संबंध रखता है। उसकी गिरफ्तारी के बाद यह बताया गया कि गौतम नवलखा हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों के संपर्क में भी था।
गौतम नवलखा पीपी न्यूजक्लिक स्टूडियो एलएलपी के एक “स्वतंत्र भागीदार” थे, जहाँ उन्हें 17 अप्रैल 2017 को इस पद पर नियुक्त किया गया था। न्यूजक्लिक के वर्तमान मालिक पीपीके न्यूजक्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड को भीमा कोरेगांव हिंसा के 10 दिन बाद 11 जनवरी 2018 को बनाया गया था।
वायर के संपादक वरदराजन की पत्नी का विक्टिम कार्ड
सिद्धार्थ वरदराजन की पत्नी नंदिनी सुंदर ने ट्वीट करते हुए द वायर को पीड़ित घोषित किया है। अपने ट्वीट के थ्रेड में नंदिनी ने कहा, “द वायर देवेश कुमार द्वारा आपराधिक धोखाधड़ी का शिकार है। यह स्पष्ट नहीं है कि वह अपने दम पर काम कर रहा था या किसी बड़ी साजिश के तहत। दिलचस्प बात यह है कि मालवीय (अमित मालवीय) की शिकायत और एफआईआर में उनका नाम नहीं था। घटनाओं का क्रम इस प्रकार है-“
नंदिनी ने अगले ट्वीट में कहा, “6 अक्टूबर 2022 को द वायर ने संबंधित इंस्टाग्राम के एक अकाउंट होल्डर से प्राप्त एक ईमेल के आधार पर उसके इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट को अचानक हटाए जाने की एक कहानी प्रकाशित की। इसके बाद देवेश कुमार ने जाह्नवी सेन से संपर्क किया और उन्हें बताया कि उन्हें उनके एक निजी मित्र से जानकारी मिली है, जो सिंगापुर में इंस्टाग्राम के कार्यालय में एक वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी हैं, जिसका नाम फिलिप चुआ है। उन्होंने एक ईमेल फॉरवर्ड किया, जिसे उन्होंने फिलिप चुआ से प्राप्त होने का दावा किया था।”
उन्होंने आगे बताया, “उन्होंने एक ‘पोस्ट इंसीडेंट रिव्यू रिपोर्ट’ भी भेजी। ईमेल और रिपोर्ट दोनों में कहा गया है कि अमित मालवीय की शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई। इस बिंदु पर धोखाधड़ी का संदेह करने का कोई कारण नहीं था। वायर ने 11 अक्टूबर को एक ईमेल के आधार पर एक और कहानी प्रकाशित की। देवेश कुमार ने कहा कि उन्हें मेटा में एक सोर्स से प्राप्त हुआ था। उन्होंने कहा, इस सोर्स ने मेटा में कॉम्यनिकेशन प्रमुख एंडी स्टोन से भेजा था, जिसे उन्होंने हेडर से प्रामाणिक होने की पुष्टि की थी।”
(चित्र साभार- @nandinisundar)
नंदिनी आगे लिखती हैं, 15 और 17 अक्टूबर को दो और कहानियाँ भी इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ीकरण पर आधारित थीं, जिनमें देवेश कुमार द्वारा भेजे गए ईमेल और वीडियो शामिल हैं, जो कथित तौर पर इंस्टाग्राम और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा तथा दो स्वतंत्र विशेषज्ञों से उपलब्ध हुए थे।”
नंदिनी ने कहा कि जब दोनों विशेषज्ञों ने सिद्धार्थ वरदराजन को यह कहते हुए लिखा कि उन्होंने ईमेल नहीं लिखे हैं, तब द वायर ने अपनी समीक्षा शुरू की और कहानियों को वापस ले लिया। देवेश ने वायर के एक कर्मचारी के सामने स्वीकार किया है कि उसने ही सब कुछ गढ़ा है। देवेश ने स्टोरी को बाइलाइन भी नहीं लिया।
इसलिए हुई छापेमारी
वामपंथी गुट के दावे के उलट दिल्ली पुलिस ने कहा कि द वायर से जुड़े लोगों के ठिकाने पर छापेमारी जालसाजी, धोखाधड़ी, धोखाधड़ी, मनगढ़ंत और आपराधिक साजिश में उनकी संलिप्तता के आरोपों में हुई है। द वायर द्वारा ऐसी हरकत पहली बार नहीं की गई है, बल्कि उसका ऐसी करतूतों से पुराना नाता रहा है। हालाँकि ताजा मामले में अपने बचाव के लिए सिद्धार्थ वरदराजन एंड कंपनी ने सारा ठीकरा देवेश कुमार के सिर पर फोड़ दिया है।
यहाँ ये ध्यान रखने योग्य है कि सिद्धार्थ वरदराजन एन्ड टीम ने शुरू में इसी मामले में सोशल मीडिया पर उठ रहे विरोधों को नजरअंदाज किया था। तब वो अपने उसी स्टाफ की हरकतों के साथ मजबूती से खड़े रहे थे, जिस पर अब उन्होंने खुद से ही दोषारोपण कर दिया है। इससे पहले सिद्धार्थ वरदराजन ने उस बयान को ख़ारिज कर दिया था, जिसमें मेटा ने द वायर की भाजपा नेता अमित मालवीय के खिलाफ छपी रिपोर्ट का खंडन करते हुए आलोचना की थी।
यहाँ तक कि द वायर की टीम ने अपनी मनगढ़ंत कहानी को सही साबित करने के लिए एक फर्जी ई मेल का भी सहारा लिया। यह फर्जी ई मेल मेटा के अधिकारी एंडी स्टोन के नाम से बनाई गई थी। खुद एंडी स्टोन द्वारा इस मेल को फर्जी करार देने के बाद भी सिद्धार्थ वरदराजन अपने संस्थान द्वारा किए गए दावे पर कायम रहे थे। इस खबर में अमित मालवीय को इन्टाग्राम पर भाजपा के खिलाफ किसी भी पोस्ट को हटाने के विशेषाधिकार प्राप्त होने का दावा किया गया था।
पर बात यहीं खत्म नहीं हुई थी। द वायर एन्ड कम्पनी ने खुद के द्वारा बनाई गई एंडी स्टोन की नकली ईमेल को फर्जी तौर पर DKIM द्वारा सत्यापित बताया। इसके साथ ही वायर ने 2 बाहरी एक्सपर्ट द्वारा भी एंडी स्टोन के ईमेल को सर्टिफाइड करने का दावा किया। इन तमाम हरकतों से सिद्धार्थ वरदराजन एन्ड टीम ने अपने दावे पर कायम रहने की भरसक कोशिश की। बाद में DKIM द्वारा द वायर के दावों का खंडन करने के बाद इस पूरे मामले की पोल खुली। इतनी फजीहत के बाद द वायर ने न सिर्फ अपनी विवादित खबरों को हटाया, बल्कि सार्वजानिक रूप से माफ़ी का नाटक भी किया।
अपने बचाव में सिद्धार्थ वरदराजन ने यह कुतर्क भी दिया है कि द वायर द्वारा प्रयोग होने वाले कम्प्यूटर के डाटा में कोई कमी थी। इसके बाद भी यह सवाल उठता है कि अपने दावों को सही साबित करने के लिए हुए प्रयासों में किन कम्प्यूटरों का प्रयोग हुआ होगा। सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों के बाद सिद्धार्थ वरदराजन ने एक समय यह भी दावा किया था कि उन्होंने अपनी खबर की प्रामणिकता के लिए खुद मेटा के सूत्रों से मुलाकात की थी।
क्या है अमित मालवीय की FIR में
भाजपा नेता अमित मालवीय ने दिल्ली पुलिस में खुद को बदनाम करने के आरोप में द वायर के खिलाफ केस दर्ज करवा रखा है। इस केस में द वायर को एक ऑनलाइन समाचार पोर्टल बताते हुए सिद्धार्थ वरदराजन, सिद्धार्थ भाटिया, जान्हवी सेन, एमके वेणु को नामजद करते हुए कुछ अज्ञात को आरोपित किया गया है।
पंजाब में हुए जलियाँवाला नरसंहार के बारे में आप सभी ने पढ़ा होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि ऐसा ही एक जलियाँवाला बाग़ राजस्थान में भी है? जिस तरह पंजाब का अमृतसर बलिदानियों के खून से सनी मिट्टी होने के कारण हर एक देशभक्त के लिए पवित्र स्थल है, ठीक उसी तरह का महत्व राजस्थान के मानगढ़ का भी है। मानगढ़ में अंग्रेजों ने निशाना बनाया था जनजातीय समाज को, भीलों को, जिन्हें 1000 से भी अधिक संख्या में क्रूरता से मार डाला गया था।
राजस्थान और गुजरात की सीमा पर ये नरसंहार जलियाँवाला बाग़ सामूहिक हत्याकांड से 6 वर्ष पहले हुआ था, नवंबर 1913 में। इस महीने की 17 तारीख़ को यहाँ की भूमि बलिदानी भीलों के खून से रंग गई थी। मानगढ़, अरावली की पहाड़ियों पर स्थित है। भील समाज के बारे में विख्यात है कि कैसे उन्होंने मेवाड़ के राणाओं के साथ मिल कर इस्लामी आक्रांताओं को धूल चटाई थी। महाराणा प्रताप की सेना में भील तीरंदाज़ होते थे, जो मातृभूमि के लिए धन और सत्ता का लालच छोड़ कर मेवाड़ का साथ देते थे।
भील समाज आपको राजस्थान और गुजरात के अलावा मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी मिल जाएँगे। जहाँ एक तरफ जमींदारी प्रथा के युग में भीलों के लिए समस्या खड़ी हो गई थीं, वहीं दूसरी तरफ अंग्रेजों के कानूनों ने उनके लिए चीजें और खराब कर दी। अंग्रेज जल, जंगल और जमीन से जनजातीय समाज का हक़ छीनने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते थे। भीलों का इस्तेमाल बंधुआ मजदूरों के तौर पर किया जाने लगा था।
1899-1900 में डेक्कन और बॉम्बे प्रेसिडेंसी में भयंकर सूखा पड़ा, जिससे लाखों लोगों की मौत हुई। 6 लाख मृतकों में जनजातीय समाज के लोगों की संख्या सबसे अधिक थी। बँसवारा और संतरामपुर जैसी रियासतों में इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिला था। इसके बाद भारत में कुछ ऐसे महान लोग हुए, जिन्होंने सामाजिक रूप से पिछड़े और हाशिए पर चले गए समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रयास शुरू किया।
महात्मा गाँधी और वीर विनायक दामोदर सावरकर जैसे नेताओं ने दलितों के उद्धार के लिए कई कार्य किए। लेकिन, इस सूची में एक और नाम आता है गोविंद गिरी का, जिन्हें सम्मान के साथ लोग गोविंद गुरु भी कहते थे। उनका जन्म राजस्थान के डूंगरपुर में सन् 1874 में एक बंजारा परिवार में हुआ था। वो संतरामपुर में एक बंधुआ मजदूर के रूप में काम करते थे। सूखे के दौरान वो भील समाज के साथ करीब से काम करने लगे।
क्रूरता और सूखे से तंग आकर भील समाज के कई लोगों को उस समय डाका का सहारा लेना पड़ता था। गोविंद गिरी का मानना था कि समाजिक-आर्थिक रूप से इस समाज का हाशिए पर चला जाना और शराब का व्यसन – ये दोनों समुदाय के पतन के मुख्य कारण थे। सिलिए, उन्होंने 1908 में ‘भगत अभियान’ शुरू किया। उन्होंने भील समाज के बीच उनकी सनातन जड़ों को मजबूत करने के लिए ये अभियान चलाया। उनकी पुरानी हिन्दू संस्कृति के माध्यम से ही उन्हें समस्या से निजात दिलाने की कोशिश होने लगी।
इसके तहत कई भील शाकाहारी बन गए। साथ ही कइयों ने शराब का व्यसन भी छोड़ दिया। गोविंद गिरी ने न सिर्फ उन्हें बतौर बंधुआ मजदूर काम न करने की सलाह दी, बल्कि उनके भीतर और अधिकारों के लिए लड़ाई का जज्बा भी भरा। डूंगरपुर, बँसवारा और संतरामपुर की रियासतों को भील समाज का ये उत्थान पसंद नहीं आया। भील समाज ने रियासतों और अंग्रेजों से अपनी मजदूरी का उचित मेहनताना माँगना शुरू कर दिया।
कइयों ने संघर्ष के लिए हथियार उठाया और काम भी रोक दिया, जिससे अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुँचा। अक्टूबर 1913 में गोविंद गिरी भील साथियों के साथ मानगढ़ पहुँचे। ये बँसवारा और संतरामपुर की रियासतों के बीच घने जंगल में स्थित स्थान था। कार्तिक महीने में एक हिन्दू त्योहार के लिए उन्होंने होने अनुयायियों को वहाँ बुलाया। ये 13 नवंबर का दिन था। उस दिन कार्तिक पूर्णिमा था। इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। इसी दिन देव-दीपावली का त्योहार भी मनाई जाती है।
उस दिन एक बड़ा हवन होने वाला था, जिसे स्थानीय लोग धुनी भी कहते हैं। उस दिन मानगढ़ की पहाड़ियों पर 50,000 से लेकर 1 लाख तक के बीच में भीलों का जमावड़ा हुआ। अफवाह ये फ़ैल गई कि भील लोग रियासतों को उखाड़ फेंक कर अपना अलग राज्य बनाना चाहते हैं। रियासतों ने अंग्रेजों से मदद माँगी, क्योंकि वो उनके ही टट्टू थे। उस ब्रिटिश अधिकारी का नाम RE हैमिलटन था, जिसे इस घटना के निरीक्षण के लिए भेजा गया।
उसने बल-प्रयोग का निर्णय लिया। बँसवारा, डूंगरपुर, और संतरामपुर की संयुक्त सेनाएँ अंग्रेजों के नेतृत्व में हिन्दू भीलों का दमन करने पहुँच गई। मेवाड़ स्टेट के ‘भील कॉर्प्स’ को भी पहाड़ी को घेर लेने का आदेश दे दिया गया। ब्रिटिश सैन्य अधिकारी कर्नल शेरटन और मेजर एस बेली के अलावा कैप्टन ई स्टीली इस दमनकारी अभियान में सबसे आगे थे। मशीनगन और बंदूकें लहरा उठीं। भीलों से कहा गया कि वो 15 नवंबर तक इस जगह को खाली कर दें।
भील समाज के लोगों ने वहाँ से हटने और आत्म-समर्पण करने से साफ़ इनकार कर दिया। इसके बाद मशीनगन और बंदूकों से गोलीबारी शुरू कर दी गई, चारों तरफ से। खच्चरों और गदहों पर रख कर ऑटोमैटिक मशीनगन ले जाए गए थे। उन्हें भी बिना रुके गोलीबारी के आदेश दिए गए। आँकड़ों की मानें तो 1000-1500 भीलों की उस दिन सामूहिक हत्या कर दी गई। गोविंद गिरी समेत कई भील नेताओं को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
फरवरी 1914 में उन्हें अदालत द्वारा सरकार के विरुद्ध बगावत का दोषी पाया गया। उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई। हालाँकि, उनके अच्छे व्यवहार और लोकप्रियता के कारण उन्हें 1919 में ही जेल से छोड़ना पड़ा। लेकिन, जिन रियासतों में उनके सबसे ज्यादा अनुयायी थे, वहाँ उनके घुसने पर ही प्रतिबंध लगा दिया गया। सन् 1931 में गुजरात के लिम्बडी के नजदीक उनका निधन हुआ। गुजरात के गोधरा में उनकी याद में 2015 में ‘गोविंद गुरु यूनिवर्सिटी’ की स्थापना की गई।
मानगढ़ का नरसंहार ब्रिटिश इंडिया के सबसे खौफनाक चैप्टर्स में से एक है। इसमें अंग्रेजों के अलावा रियासतों का भी दोष था। बँसवारा-पंचमहल-डूंगरपुर के भील आज भी उस खौफनाक वारदात की कहानी सुनाते हैं। जलियाँवाला बाग़ में 1000 की हत्या की गई थी, मानगढ़ में इससे डेढ़ गुना से भी अधिक संख्या में लोगों को मारा गया। लेकिन, इसने उन सभी को देशवासियों के दिलों में अमर कर दिया, वेडसा गाँव के गोविंद गिरी के साथ ही।
वो गोविंद गिरी ही थे, जिन्होंने व्यसनों से दूर रहने और भक्ति में भील समाज के उत्थान का उपाय देखा। ‘इंडिया टुडे’ में सितंबर 2012 में प्रकाशित एक लेख में स्थानीय भीलों के हवाले से बताया गया था कि कैसे उन्होंने अपने पूर्वजों से सुना था कि एक अंग्रेज अधिकारी ने थोड़ी देर के लिए गोलीबारी तभी रोकी, जब उसने देखा कि एक शिशु अपनी मरी हुई माँ के स्तनों से दूध पीने की कोशश कर रहा है। गदहों पर मशीनगन रख कर उन्हें चारों तरफ घुमाया जाता था, ताकि तबाही ज्यादा से ज्यादा हो।
कई लोग तो पहाड़ी से भागने की कोशिश में फिसल कर गिरे और उनकी मृत्यु हो गई। भील समाज के बीच इस नरसंहार ने ऐसा खौफ का आलम बिठा दिया कि आज़ादी के वर्षों बाद तक वो मानगढ़ नहीं गए। ‘भगत अभियान’ की सफलता के लिए गोविंद गिरी के नेतृत्व में हर गाँव में ‘सम्फ सभा’ का आयोजन किया जाता था। वहाँ ‘जगमंदिर सत का चोपड़ा’ नाम से एक स्मारक भी लोगों ने बनाया। गोविंद गुरु ने 1890 के दशक में ही भील उत्थान का कार्य शुरू कर दिया था।
इसके तहत भील समाज वैदिक देव अग्नि की पूजा करते थे। हवन किया जाता था। धुनी रमय जाता था। सन् 1910 में उनसे प्रभावित भीलों ने अंग्रेजों के सामने अपने अधिकार के लिए 33 माँगें रखी थीं, जो बंधुआ मजदूरी से संबंधित थीं। भील समाज पर उस समय कर भी काफी ज़्यादा लगा दिया गया था। अंग्रेजों ने माँगें नकारते हुए आंदोलन को खत्म करने में बल लगा दिया। अंग्रेज इससे भी नाराज़ थे कि संतरामपुर में एक पुलिस थाने पर हुए हमले में उनका एक अधिकारी गुल मोहम्मद मारा गया था।
#Gujarat has a Jallianwala Bagh like dark page of history too. It was when Govind Guru had launched a movement called “Bhagat movement” in the late 19th century among Bhil tribes, which aimed to ’emancipate’ them by prescribing, among other things, adherence to vegetarianism… pic.twitter.com/Ady2IvV0Yr
इस हमले का नेतृत्व गोविंद गिरी के शिष्य धीरजी पाघरी ने किया था। भीलों का एक ही नारा था – ‘ओ भूरेटिया नई मानू रे, नई मानू (ओ अंग्रेजों, हम तुम्हारे सामने नहीं झुकेंगे।)’ भील समाज के पास देशी बंदूकें और तलवारे थीं, लेकिन ब्रिटिश मशीनगनों के सामने ये कहाँ तक टिकतीं। इसके बाद 900 भीलों को गिरफ्तार किया गया था। गुजरात के कम्बोई में गोविंद गुरु समाधि मंदिर है, जहाँ उन्हें मानने वाले आज भी जाते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब से ही उन्होंने इस नरसंहार को ध्यान में रखते हुए इसे इतिहास में स्थान दिलाने की कोशिश की और भीलों को सम्मान दिया। उन्होंने 2013 में इस घटना के 100 वर्ष पूरे होने पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन करवाया। गोविंद गुरु के पोते मानसिंह को इस समरोह में सम्मानित किया गया। एक बॉटनिकल गार्डन का उद्घाटन हुआ। 31 जुलाई, 2013 को हुए उस कार्यक्रम में 80,000 भील पहुँचे थे।
कर्नाटक के 23 साल के इंजीनियरिंग छात्र फैज रशीद को 5 साल की सजा सुनाई गई है। उसने 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले का जश्न मनाते हुए फेसबुक पोस्ट किया था। ‘अच्छे व्यवहार’ की दुहाई देकर उसने अदालत से रिहाई की गुहार लगाई थी। लेकिन बेंगलुरु की विशेष अदालत ने यह दलील खारिज करते हुए उसे सजा सुनाई।
अदालत ने सोमवार (31 अक्टूबर 2022) को फैसला सुनाते हुए रशीद पर 25,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम(UAPA) की विशेष अदालत के न्यायाधीश गंगाधर ने कहा कि यदि वह जुर्माना भरने में विफल रहता है तो सजा छह महीने और बढ़ा दी जाएगी।
बेंगलुरु के कचरकनहल्ली के रशीद ने कथित तौर पर सिर्फ आतंकी हमले पर भड़काऊ पोस्ट करने के लिए फेसबुक अकाउंट बनाया था। क्राइम ब्रांच ने रशीद को उसके घर के पास एक बेकरी से गिरफ्तार किया था। फेसबुक पोस्ट के बाद उसके खिलाफ बनासवाड़ी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। रशीद शहर के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार शाखा में अपना तीसरा सेमेस्टर कर रहा था। 17 फरवरी, 2019 को गिरफ्तारी के बाद से रशीद न्यायिक हिरासत में परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में बंद था।
राज्य सरकार की ओर से पेश हुए विशेष लोक अभियोजक जीएन अरुण बताया कि विशेष अदालत ने रशीद को आईपीसी की धारा 153 ए (समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 201 (अपराध के सबूतों को गायब करना), और यूएपीए की धारा 13 (गैरकानूनी गतिविधियों के लिए सजा) के तहत दोषी ठहराया है।
रशीद के वकील ने कोर्ट से उसके अच्छे व्यवहार को देखते हुए उसे रिहा करने का आग्रह किया, लेकिन न्यायाधीश ने इससे साफ़ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, ”वह (फैज रशीद) कोई अनपढ़ या सामान्य व्यक्ति नहीं है। अपराध किए जाने के समय वह इंजीनियरिंग का छात्र था। उसने जानबूझकर अपने फेसबुक अकाउंट पर पुलवामा हमले को लेकर पोस्ट किए। उसने पुलवामा हमले के महान बलिदानियों की मौत पर खुशी का इजहार किया। इसलिए आरोपित द्वारा किया गया अपराध इस महान राष्ट्र के खिलाफ और जघन्य है।”
पुलवामा हमले में 40 जवान हुए थे बलिदान
जम्मू-कश्मीर पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को आतंकी हमला किया गया था। उस हमले में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी आदिल अहमद डार ने 350 किलो विस्फोटक से भरी गाड़ी जवानों की बस से भिड़ा दी थी। इस हमले में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के 40 जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी ।
मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल में बंद दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendar Jain) को लेकर महाठग सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) ने सनसनीखेज दावा किया है। दिल्ली के उपराज्यपाल को चिट्ठी लिखकर बताया है कि जैन उससे मिलने तिहाड़ जेल में आते थे। उन्होंने 10 करोड़ रुपए उससे ‘प्रोटेक्शन मनी’ के तौर पर लिए।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 200 करोड़ रुपए की ठगी के आरोपित ने दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना (Vinai Kumar Saxena) को लिखे पत्र में कहा है कि वह 2015 से AAP नेता को जानता है। उसने AAP को कुल 50 करोड़ रुपए का भुगतान किया था, क्योंकि सत्येंद्र जैन ने उससे वादा किया था कि उसे दक्षिण भारत में पार्टी का बड़ा नेता बनाया जाएगा।
महाठग के मुताबिक, “2017 में मेरी गिरफ्तारी के बाद दिल्ली की तिहाड़ जेल में कई बार सत्येंद्र जैन मुझसे मिलने आए थे।” सुकेश चंद्रशेखर ने पत्र में लिखा है कि 2019 में सत्येंद्र के पीए ने उसे जेल के अंदर सभी बुनियादी सुविधाएँ प्राप्त करने के लिए प्रोटेक्शन राशि के रूप में हर महीने 2 करोड़ रुपए देने को कहा था। उस वक्त जैन के पास जेल विभाग का जिम्मा था।
बताया जा रहा है कि जेल में बैठकर लिखे गए इस पत्र को सुकेश ने अपने वकील अनंत मलिक के जरिए भेजा था। बीजेपी सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा और पार्टी की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इस खुलासे के बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा है, क्योंकि केजरीवाल लगातार यह दावा करते रहे हैं कि सत्येंद्र जैन बेहद ईमानदार नेता हैं। उन्होंने (प्रवेश साहिब) ने लिखा, “सुकेश चंद्रशेखर ने स्वीकार किया है कि उसने सत्येंद्र जैन को 10 करोड़ रुपए दिए, अब ईमानदारी का सर्टिफिकेट देने वाले अरविंद केजरीवाल जी बताए इसमें आपका हिस्सा कितना था?”
सुकेश चंद्रशेखर ने स्वीकार किया है उसने सत्येन्दर जैन को 10 करोड़ रुपए दिए, अब ईमानदारी का सर्टिफिकेट देने वाले @ArvindKejriwal जी बताए इसमें आपका हिस्सा कितना था?? pic.twitter.com/EHpu7VmOiI
AAP and it’s jailed Jail Minister Satyendra Jain conned conman Sukesh Chandrashekhar, extracted 10 crore as protection (in Tihar) money and 50 crore for an influential party position in South India. AAP leaders are extortionists. Satyendra is still a minister in Kejriwal’s Govt… pic.twitter.com/mMSmXCOAUc
बता दें कि मंडोली जेल में बंद चंद्रशेखर को फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर शिविंदर मोहन सिंह की पत्नी अदिति सहित हाई-प्रोफाइल लोगों से ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। सुकेश को इस साल अगस्त में तिहाड़ से दिल्ली की मंडोली जेल में स्थानांतरित किया गया था, क्योंकि उसने दावा किया था कि उसे तिहाड़ जेल के अंदर जान से मारने की धमकी मिली है।
गौरतलब है कि भ्रष्टाचार के मामले में जेल में बंद दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन पर दो दिन पहले तिहाड़ जेल में VIP सुविधाएँ मिलने का आरोप लगा था। यह आरोप खुद ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने कोर्ट में शपथ-पत्र दाखिल करके लगाया था। शपथ-पत्र में बताया गया था कि सत्येंद्र जैन की पत्नी पूनम उनसे बिना रोकटोक मिलती हैं। इसी के साथ एफिडेविट में जैन पर इन सुविधाओं को पाने के लिए अपने मंत्री पद के दुरुपयोग का आरोप है। अपने आरोपों के समर्थन में ED ने कोर्ट में एक CCTV फुटेज भी सबमिट की थी।
पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से गुजरात आए अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता मिलेगी। केंद्र की मोदी सरकार ने यह निर्णय लिया है। इन अल्पसंख्यकों में हिंदुओं के अलावा सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शामिल हैं।
केंद्र गृह मंत्रालय ने सोमवार (31 अक्टूबर 2022) को इस संबंध में आदेश जारी किया। इस फैसले से गुजरात के आणंद और मेहसाणा जिले में रह रहे इन देशों से आए अल्पसंख्यकों को लाभ मिलेगा। नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (CAA) की जगह 1955 के नागरिकता अधिनियम को इस फैसले का आधार बनाया गया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय से जारी आदेश के अनुसार गुजरात के आणंद और मेहसाणा जिले में रहने वाले हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा पांच के तहत भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकरण कराने की अनुमति दी जाएगी या अधिनियम की धारा छह और नागरिकता नियम 2009 के प्रावधानों के अनुसार प्रमाणपत्र दिया जाएगा।
पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में सताए गए हिन्दुओं समेत अन्य अल्पसंख्यकों को केंद्र सरकार देगी नागरिकता
नागरिकता देने की प्रक्रिया क्या होगी?
गुजरात के 2 जिलों (आणंद और मेहसाणा) में रहने वाले ऐसे लोगों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जिला स्तर पर कलेक्टर की ओर से इसका वेरिफिकेशन किया जाएगा। इसके बाद कलेक्टर आवेदन के साथ अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार के पास भेजेगा। अगर कलेक्टर पूरी प्रक्रिया से संतुष्ट होता है तो वह आवेदक को भारतीय नागरिकता प्रदान करेगा और इसका सर्टिफिकेट भी सौंपेगा। कलेक्टर के पास ऑनलाइन के साथ ही फिजिकल रजिस्टर भी रखा जाएगा। इसमें देश के नागरिक के रूप में इस प्रकार रजिस्ट्रीकृत या देशीयकृत व्यक्तियों का ब्यौरा होगा, जिसकी एक कॉपी हफ्ते भर के अंदर केंद्र सरकार के पास भेजनी होगी।
CAA के तहत क्यों नहीं दी नागरिकता
CAA अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले हिंदुओं, सिखों, बौद्ध, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को भारतीय नागरिकता देने का भी प्रावधान करता है। चूँकि अधिनियम के तहत नियम अब तक सरकार की ओर से नहीं बनाए गए हैं, इसलिए इसके तहत अब तक किसी को भी नागरिकता नहीं दी जा सकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कुछ याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए सोमवार को असम और त्रिपुरा की सरकारों को तीन सप्ताह का समय दिया था। इस मुद्दे पर अगली सुनवाई के लिए छह दिसंबर की तारीख तय की गई है।
गृह मंत्रालय ने इससे पहले 2016, 2018 और 2021 में, गुजरात, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के कई जिलों में जिला कलेक्टरों को वैध दस्तावेजों पर भारत में प्रवेश करने वाले छह समुदायों के प्रवासियों को नागरिकता प्रमाण पत्र प्रदान करने का अधिकार दिया था।
बॉलीवुड में डिस्को और पॉप म्यूजिक का दौर शुरू करने वाले सिंगर और म्यूजिक डायरेक्टर बप्पी लहिरी (Bappi Lahiri) का एक गाना इन दिनों चीन में छाया हुआ है। चीन (China) की कठोर कोविड नीति के कारण लागू पाबंदियों से परेशान देश की जनता लॉकडाउन के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है।
@ananthkrishnan on how Jimmy Jimmy is now Jie Mi (give me rice) for Chinese stuck at home during lockdowns. The famous Bappi Lahiri’s score for Disco Dancer (made in the 80s) is widespread in China. https://t.co/WkvFng6t0T
इसके लिए स्थानीय लोग 1982 में आई फिल्म ‘डिस्को डांसर’ के म्यूजिक डायरेक्टर बप्पी लहिरी के लोकप्रिय गाने ‘जिम्मी जिम्मी आजा आजा’ का जमकर उपयोग कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर चीन के लोगों का ‘जिम्मी जिम्मी आजा आजा’ गाने पर अनोखा प्रदर्शन देखकर हर कोई हैरान है।
फोटो साभार: द हिन्दू
चीन की सोशल मीडिया साइट ‘दोयूयिन’ (टिकटॉक का चीनी नाम) पर लहिरी के संगीत से सजे पार्वती खान द्वारा गाए गए इस गाने को वहाँ की स्थानीय भाषा ‘मंदारिन’ में गाया जा रहा है। ‘जि मी, जि मी’ (Jie mi) शब्द का चीन में अर्थ है- मुझे चावल दो, मुझे चावल दो। कुछ महिलाएँ तो वीडियो में भारतीय साड़ी और कुर्ता पहने हुए दिखाई दे रही हैं। चीनी वायरल वीडियो में यह दिखाने के लिए कि कैसे वे लॉकडाउन के दौरान आवश्यक खाद्य पदार्थों से वंचित हैं, खाली बर्तन दिखा रहे हैं। इस वीडियो पर अभी तक चीनी सेंसर बोर्ड की कैंची नहीं चल पाई है, जो देश के विरोध में किए गए किसी भी पोस्ट को तुरंत हटा देता है।
दरअसल, चीन जीरो कोविड नीति को लाकर बुरा फँस गया है। शंघाई सहित दर्जनों शहर, जिनकी आबादी 25 मिलियन (करीब 2.5 करोड़) से अधिक है, वहाँ हफ्तों से लोग अपने घरों में बंद रहने को मजबूर हैं। बीते दिनों ऐसे सैकड़ों वीडियो सामने आए हैं, जिनमें सुरक्षा अधिकारियों को लॉकडाउन का विरोध कर रहे लोगों पर नकेल कसते हुए देखा जा सकता है।
वहीं कुछ अन्य रिपोर्टों की मानें तो इस साल अक्टूबर के मध्य में कुछ लोगों के बीमार पड़ने के बाद भी उन्हें कोई इलाज मुहैया नहीं कराया गया, जिसके बाद श्रमिकों ने फॉक्सकॉन कारखाने को छोड़ना शुरू कर दिया। रविवार (30 अक्टूबर 2022) को चीन में कोरोना के 2,675 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले दिन से 802 ज्यादा थे।
बता दें कि बीजिंग सहित लगभग सभी शहरों के निवासियों के लिए कोरोना टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है। नेगेटिव रिपोर्ट आने के बाद ही वे रेस्टोरेंट, बाजारों सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आ-जा सकते हैं।
एलन मस्क (Elon Musk) अब ट्विटर के इकलौते बॉस हैं। उन्होंने बोर्ड डायरेक्टर्स की छुट्टी कर दी है। यूएस सिक्योरिटीज ऐंड एक्सचेंज कमीशन को यह जानकारी सोमवार (31 अक्टूबर 2022) को दी गई। कंपनी में बड़े पैमाने पर छंटनी का दावा करने वाली रिपोर्टों को खारिज किए जाने के कुछ घंटों बाद ही यह जानकारी सामने आई है।
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन डायरेक्टर्स को हटाया है उनमें मार्था लेन फॉक्स, ओमिड कोर्डेस्टानी, डेविड रोसेनब्लैट, पैट्रिक पिचेट, एगॉन डरबन, फी-फी ली और मिमी अलेमायेहौ शामिल हैं। दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने 27 अक्टूबर 2022 को 44 बिलियन डॉलर करीब (362461220000 रुपए) में ट्विटर को खरीदने के तुरंत बाद कंपनी के CEO पराग अग्रवाल, CFO नेड सेगल और लीगल अफेयर-पॉलिसी हेड विजया गाड्डे को टर्मिनेट कर दिया था।
एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि टेस्ला चीफ मस्क ट्विटर के 75 प्रतिशत कर्मचारियों को बर्खास्त कर सकते हैं, जिससे कर्मचारियों की संख्या 7500 से घटकर 2000 हो जाएगी। हालाँकि, मस्क ने इन खबरों का खंडन किया है। द न्यूयॉर्क टाइम्स, द वाशिंगटन पोस्ट और द वर्ज जैसे मीडिया हाउस ने आंतरिक दस्तावेजों और ट्विटर के कर्मचारियों के हवाले से छंटनी की रिपोर्ट दी थी।
इस बीच यह बात सामने आई है कि ट्विटर के संचालन संबंधी फैसलों को लेकर मस्क एक भारतवंशी से ही सलाह ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि चेन्नई के भारतीय टेक्नोलॉजिस्ट और इन्वेस्टर श्रीराम कृष्णन इस भूमिका में हैं। A16z के श्रीराम कृष्णन ने हाल ही में एक ट्वीट कर यह बात स्वीकार की है कि वह ट्विटर के लिए एलन मस्क की मदद कर रहे हैं। A16z का मतबल Andreessen Horowitz है। इसी कंपनी में श्रीराम जनरल मैनेजर हैं।
Now that the word is out: I’m helping out @elonmusk with Twitter temporarily with some other great people.
I ( and a16z) believe this is a hugely important company and can have great impact on the world and Elon is the person to make it happen. pic.twitter.com/weGwEp8oga
श्रीराम कृष्णन ने सोमवार (31 अक्टूबर, 2022) को ट्वीट कर कहा था कि वह एलन मस्क की सहायता कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ”जैसा कि अब यह बात सामने आ चुकी है, मैं ट्विटर में एलन मस्क की अस्थायी तौर पर सहायता कर रहा हूँ। मैं (और A16z) मानता हूँ कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण कंपनी है, दुनिया पर इसका बहुत अधिक प्रभाव हो सकता है और एलन मस्क ही ऐसा संभव कर सकते हैं।”
रविवार (30 अक्टूबर, 2022) को गुजरात के मोरबी में केबल पुल टूटने के बाद हुए भीषण हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट पर है। इस हादसे से सीख लेते हुए अब अहमदाबाद के अटल ब्रिज से होकर यात्रा करने वालों की संख्या तय कर दी गई है। इस ब्रिज से अब एक समय में 3000 लोग ही गुजर सकेंगे। मोरबी हादसे की स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर को एक हाई लेवल मीटिंग भी की है। इसके अलावा वह मंगलवार (1 नवंबर, 2022) को मोरबी का दौरा भी करेंगे।
अहमदाबाद की शान बन चुके ‘अटल ब्रिज’ का निर्माण साबरमती नदी पर एलिस ब्रिज और सरदार ब्रिज के बीच किया गया है। 74 करोड़ रुपए की लागत से बने इस ब्रिज का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल 27 अगस्त को किया था। इस फुट ओवर ब्रिज को साबरमती नदी पर एलिस ब्रिज और सरदार ब्रिज के बीच बनाया गया है। इससे पहले तक इस पुल से गुजरने वालों पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई थी। लेकिन, अब अहमदाबाद नगर निगम ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि अब पुल पर एक साथ सिर्फ 3 हजार लोगों को जाने की ही अनुमति होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय गुजरात दौरे पर हैं। सोमवार (31 अक्टूबर, 2022) को उन्होंने मोरबी हादसे की स्थिति जानने के लिए एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। इस मीटिंग में गुजरात सीएम भूपेंद्र पटेल समेत गुजरात कैबिनेट के कई मंत्री मौजूद रहे। इसके अलावा वह इस दुर्घटना का जायजा लेने के लिए मंगलवार (1 अक्टूबर, 2022) को मोरबी का दौरा भी करेंगे। पीएम मोदी ने 31 अक्टूबर को गुजरात के केवडिया में देश पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी जयंती पर ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मोरबी हादसे में प्रभावित हुए लोगों को याद किया।
पीएम ने भावुक होते हुए कहा, “मैं केवड़िया में हूँ, लेकिन मेरा दिल मोरबी में है। मोरबी ब्रिज हादसे में मारे गए लोगों के प्रति मेरी संवेदना है।” प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार पीड़ितों के परिवारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार बचाव कार्य में लगी हुई है और केंद्र सरकार हर संभव मदद कर रही है।
बता दें, घटना के तुरंत बाद गुजरात सरकार ने मृतकों के परिवार को 4 लाख और घायलों के परिवार को 50 हजार रुपए का मुआवजा देने का ऐलान किया है। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से हादसे में जान गंवाने वालों के परिवार को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया है।
वहीं, इस हादसे को लेकर FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने गिरफ्तारियाँ शुरू कर दी हैं। अब तक इस घटना में कुल 9 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं पुलिस द्वारा कुछ अन्य आरोपितों को हिरासत में ले कर पूछताछ किए जाने की भी खबर है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपितों में ओवेरा कम्पनी के 2 मैनेजर, इसी कम्पनी से जुड़े 2 ठेकेदार, 2 टिकट विक्रेता और 3 सिक्योरिटी गार्ड शामिल हैं। अभी तक मिल रही जानकारी के मुताबिक, अजंता ओरेवा के मुखिया जयसुख पटेल को हिरासत में नहीं लिया गया है।
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान पाकिस्तान के बल्लेबाज बाबर आजम खासे ख़राब फॉर्म से गुजर रहे हैं। T20 विश्व कप में उनके खराब फॉर्म ने पाकिस्तानी टीम को टूर्नामेंट से लगभग बाहर कर दिया है। ऐसे में पूर्व भारतीय स्पिन गेंदबाज अमित मिश्रा ने बाबर आजम को टैग करते हुए एक ट्वीट किया, “ये समय भी बीत जाएगा, मजबूत बने रहें।” हालाँकि, पाकिस्तानियों का मानना है कि ये उनका तंज है। इसीलिए, शाहिद अफरीदी जैसे पूर्व पाकिस्तानी दिग्गज क्रिकेटर भी उनके खिलाफ उतर आए।
शाहिद अफरीदी ने इसके बाद चिढ़ते हुए कहा, “ये जो आप नाम ले रहे हैं अमित मिश्रा, ये भी इंडिया से खेला हुआ है। ये स्पिनर था कि बैट्समैन था?” उन्होंने ‘समाँ टीवी’ द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में ऐसा कहा। उन्होंने फिर कहा, “कोई बात नहीं। चलें आगे। ये भी बीत जाएगा।” बता दें कि पाकिस्तान ने नीदरलैंड्स को हरा कर इस टूर्नामेंट में अपनी पहली जीत दर्ज की है। 91 रनों का पीछा करते हुए पाकिस्तानी टीम ने 6 विकेट से ये जीत दर्ज की।
हालाँकि, इस टूर्नामेंट में बाबर आजम अब तक 3 मैचों में 8 रन ही बना सके हैं। जहाँ पहले ही मैच में भारत के विरुद्ध वो गोल्डन डक पर आउट हो गए, वहीं दूसरे मैच में जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने 9 गेंदों में मात्र 4 रनों की पारी खेली। नीदरलीकंडस के विरुद्ध भी वो 5 गेंदों में मात्र 4 रन ही बना सके। उनकी विराट कोहली से उनके प्रशंसक तुलना करते हैं, ऐसे में अब उनका खूब मजाक बन रहा है। अब गुरुवार (3 नवंबर, 2022) को पाकिस्तान की भिड़ंत दक्षिण अफ्रीका से है। भारत को हरा कर साउथ अफ्रीका के हौसले बुलंद हैं।
Afridi has played against Amit Mishra few times but he doesn’t even remember him or he’s pretending “Mishra india se khela hua hai shayed spinner tha ya batsman tha spinner tha shayed” LOL pic.twitter.com/L6y1wOnZXU
खास बात ये है कि बाबर आजम के फॉर्म पर ट्वीट करने वाले उस अमित मिश्रा को शाहिद अफरीदी नहीं पहचानने का नाटक कर रहे हैं, जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए एक वनडे मैच में 28 रन देकर 2 विकेट झटके थे। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ एक टी20 मैच भी खेला था, जिसमें उन्होंने 22 रन देकर 2 विकेट लिए थे। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अमित मिश्रा के 156 और IPL में उनके नाम 166 विकेट्स हैं।
हालाँकि, ये पहली बार नहीं है जब ये दोनों आपस में भिड़े हों। आतंकी यासीन मलिक का समर्थन करने पर भारतीय स्पिन गेंदबाज अमित अमित मिश्रा ने पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी को करारा जवाब दिया था। भारत के लिए 68 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके दाहिने हाथ के लेग-ब्रेक स्पिनर अमित मिश्रा ने शाहिद अफरीदी के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा था, “प्रिय शाहिद अफरीदी, यासीन मलिक ने अदालत में खुद ही अपना दोष कबूल किया है। सब कुछ आपके जन्मतिथि की तरह भ्रामक नहीं है।”