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राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को पद से हटाने में जुटी केरल की वामपंथी सरकार: सुप्रीम कोर्ट तक जाने की तैयारी, केवल कानूनी सलाह के लिए ₹46 लाख मंजूर

केरल (Kerala) में पिनराई विजयन (Pinarayi Vijayan) के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammad Khan) को परेशान करने के लिए संविधान की भी धज्जियाँ उड़ा रही है। एक तरफ विजयन सरकार राज्यपाल को विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति पद से हटाने के लिए अध्यादेश लाने पर विचार कर रही है तो दूसरी राज्यपाल को हटाने के लिए कानूनविदों का सहारा ले रही है।

सत्ताधारी CPM के राज्य समिति के पदाधिकारियों ने शनिवार (5 अक्टूबर 2022) को राजभवन के सामने एक विरोध सभा का आयोजन करने का फैसला किया। इस प्रदर्शन में CPIM महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा के राष्ट्रीय नेता, डी राजा और द्रमुक के वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

DMK ने केरल में CPIM को राज्यपाल के मसले पर समर्थन करने का फैसला लिया है, क्योंकि उसकी सरकार ने हाल ही में तमिलनाडु (Tamil Nadu) के राज्यपाल के खिलाफ केंद्र सरकार को पत्र लिखकर उन्हें वापस बुलाने की माँग की थी।

कहा जा रहा है कि CPIM के राज्य नेतृत्व ने विजयन सरकार से राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति पद से हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा है। इस संबंध में जल्द ही एक अध्यादेश लाया जाएगा।

कहा जा रहा है कि यदि राज्यपाल उस अध्यादेश पर हस्ताक्षर करने से इनकार करते हैं तो केरल सरकार विपक्षी दलों के साथ बात विधानसभा का सत्र बुलाएगी और उन्हें कुलाधिपति पद से हटाने के लिए कानून पारित करेगी। केरल विधान सभा विधेयकों पर लिखित कानूनी राय लेने के लिए केरल सरकार ने 45.9 लाख रुपए मंजूर किए हैं।

इसके साथ ही केरल सरकार राज्यपाल को हटाने के लिए कानूनी रास्ता भी तलाश रही है। सरकार सुप्रीम कोर्ट से वकीलों से सलाह ले रही है। सरकार प्रसिद्ध वकील फली नरीमन से सलाह ले रही है। इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट जा सकती है। तमिलनाडु ने भी राज्यपाल के खिलाफ कोर्ट जाने पर सहमति जताई है।

उधर, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र भेजकर शिकायत की है कि उन्हें मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की 10 दिवसीय विदेश यात्रा के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी। पत्र में उन्होंने कहा कि सीएम विजयन की अनुपस्थिति के दौरान सरकार चलाने के लिए किए गए वैकल्पिक व्यवस्थाओं की उन्हें जानकारी नहीं थी। बता दें कि विजयन 10 दिनों के लिए यूरोपीय देशों की यात्रा पर गए हुए थे।

‘भारत में बनाना था डर का माहौल’: टेरर फंडिंग केस में NIA ने दाऊद और छोटा शकील के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, D-कंपनी के 3 आतंकी गिरफ्तार

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने टेरर फंडिंग के मामले में माफिया दाऊद इब्राहिम और उसका दायाँ हाथ कहे जाने वाले छोटा शकील के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में इन दोनों के अलावा डी कम्पनी के ही 3 अन्य मेंबर शामिल हैं जिनके नाम आरिफ अबूबकर शेख, शब्बीर अबूबकर शेख और मोहम्मद सलीम कुरैशी हैं। इन तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि दाऊद और शकील को भगोड़ा घोषित किया गया है। इन सभी पर एक साथ मिल कर दुनिया भर में आतंकी गतिविधियों को संचालित करने वाला गिरोह चलाने का आरोप है। यह जानकारी शनिवार (5 नवम्बर 2022) को एक प्रेसनोट के माध्यम से दी गई है।

NIA द्वारा जारी प्रेसनोट में बताया गया है कि यह चार्जशीट 3 फरवरी 2022 को NIA द्वारा मुंबई में दर्ज एक FIR की जाँच के बाद दाखिल की गई है। बताया गया है कि गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपितों का दाऊद गैंग के इशारे पर भारत में कई घटनाओं को अंजाम देने का था। इसी चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि आरोपित अपनी हरकतों से आम जनमानस में डर का माहौल बनाना चाह रहे थे।

NIA के मुताबिक गिरफ्तार हुए आरिफ अबूबकर शेख, शब्बीर अबूबकर शेख और मोहम्मद सलीम कुरैशी हवाला के जरिए विदेशों से पैसे पा रहे थे। चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि आतंकी और आपराधिक हरकतों को अंजाम दे कर फरार कुछ अन्य संदिग्ध भी तीनों आरोपितों की आर्थिक मदद किया करते थे। इस केस में शामिल सभी 5 आरोपितों पर UAPA एक्ट, मकोका कानून व अन्य कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी का कहना है कि इस केस में अभी जाँच जारी है।

गौरतलब है कि गिरफ्तार हुए तीनों आरोपितों में सलीम फ्रूट फरार चल रहे छोटा शकील का जीजा है। वह डी कंपनी की आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने, टेरर फंड जुटाने के लिए छोटा शकील के नाम पर प्रॉपर्टी डीलिंग और विवादों के निपटारे के नाम पर उगाही में सक्रिय था।सलीम कुरैशी के संबंध जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैय्यबा और अल-कायदा से भी थे। उसका दक्षिण मुंबई में फलों का व्यापर है। वो सेंट्रल मुंबई के अरब लेन में रहता है। साल 2006 में उसको दुबई से भारत प्रत्यर्पित किया गया था, जिसके बाद 2010 तक वो जेल में रहा।

पहलवान को मारा, कुत्तों पर गोली चलाई…अब मिली बेल: सुशील कुमार को तिहाड़ के दूसरे गेट से किया गया बाहर, निगरानी में 2 सुरक्षाकर्मी तैनात

सागर धनखड़ हत्या केस में पहलवान सुशील कुमार को शनिवार रात बेल मिल गई। सुरक्षा कारणों से उन्हें दूसरे गेट से निकाला गया। बताया जा रहा है कि सुशील को उनकी पत्नी की सर्जरी के कारण बेल मिली है जिनकी लोअर बैक में दर्द रहता है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, सुशील को तिहाड़ की गेट नंबर 4 से रिहा किया गया जो कि ज्यादातर कैदियों के लिए प्रयोग में लाया जाता है। सुशील के वकील सुमीत शौकीन ने बताया कि ऐसा केवल सुरक्षा कारणों से हुआ। दिल्ली कोर्ट ने उन्हें शुक्रवार को बीवी की सर्जरी के कारण बेल दी थी। सुशील कुमार की बीवी की सर्जरी 7 नवंबर को होगी। इस दौरान उनके साथ दो सुरक्षाकर्मी सुशील कुमार की निगरानी और सुरक्षा के लिए उनके साथ रहेंगे।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिवाजी आनंद ने सुशील कुमार को 1 लाख रुपए के निजी मुचलके पर 12 नवंबर तक बेल दी है। कोर्ट ने कहा है कि आरोपित की बीवी की हालत देखते हुए व ये देखते हुए कि उनके दो बच्चे हैं और वहाँ उनकी उपस्थिति जरूरी है, कोर्ट उन्हें 12 नवंबर तक बेल देता है।

बता दें कि सुशील कुमार पिछले साल सागर धनखड़ हत्या केस में गिरफ्तार किए गए थे। जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने छत्रसाल स्टेडियम में हुई हत्या मामले में 170 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें सुशील कुमार मुख्य आरोपित बनाए गए थे। पूरे केस के मद्देनजर पहलवान और भारतीय यातायात सेवा के अधिकारी सुशील कुमार को रेलवे की नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया था।

चार्जशीट में इस बात का भी उल्लेख था कि पहलवान सागर धनखड़ को मारने से पहले जब सुशील कुमाप जब छत्रसाल स्टेडियम पहुँचे तो कुछ कुत्ते भौंकने लगे। लेकिन सुशील कुमार ने उनके ऊपर गोली चला दी। उन्होंने स्टेडियम में मौजूद एथलीटों को बंदूक की नोक पर धमकाया और उन्हें स्टेडियम छोड़कर जाने को भी कहा।

ट्विटर पर कटने लगे ब्लूटिक के बदले 655 रुपए/महीना: संस्थापक जैक डोर्सी ने पुराने कर्मचारियों को Sorry बोला, कहा- ‘इन हालातों के लिए मैं जिम्मेदार’

सोशल मीडिया साइट ट्विटर का मालिकाना हक बदलते ही बदलाव दिखने लगे हैं। कर्मचारियों की छंटनी से लेकर ब्लू टिक के लिए शुल्क लगाया गया है। ट्विटर ने लेटेस्ट अपडेट के साथ iOS पर मासिक $8 की सदस्यता शुल्क वाले ‘ट्विटर ब्लू’ को रोल आउट करना शुरू कर दिया है।

उधर, ट्विटर के संस्थापक जैक डोर्सी ने एलन मस्क (Elon Musk) द्वार कंपनी के कर्मचारियों में आधे की छँटनी करने के बाद माफी माँगी है। डोर्सी ने कहा कि उन्होंने इस प्लेटफॉर्म को बहुत तेजी से विकसित किया, जिसके बाद 50 प्रतिशत कर्मचारियों को निकाल दिया गया।

डोर्सी ने ‘ट्वीट किया, “पुराने और वर्तमान ट्विटर के लोग मजबूत और लचीले हैं। वे हमेशा एक रास्ता खोज लेंगे, चाहे वह क्षण कितना भी कठिन क्यों न हो। मुझे एहसास है कि बहुत से लोग मुझसे नाराज़ हैं। हर कोई इस स्थिति में क्यों है, इसकी ज़िम्मेदारी मेरी है: मैंने कंपनी का आकार बहुत तेज़ी से बढ़ाया। मैं उसके लिए माफी माँगता हूँ।”

साल 2006 में ट्विटर की स्थापना करने वाले जैक डोर्सी ने अगले ट्वीट में कहा, “मैं हर किसी के लिए आभारी हूँ और उनसे प्यार करता हूँ, जिन्होंने कभी भी ट्विटर में काम किया है।”

बता दें कि टेस्ला (Tesla) और स्पेसएक्स (SpaceX) कंपनी मालिक और वर्तमान में दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क (Elon Musk) ने हाल ही में वैश्विक स्तर पर ट्विटर के 7,500 कर्मचारियों में से आधे को निकाल दिया है। इसकी घोषणा उन्होंने ट्विटर पर की थी। उन्होंने कहा कि भारी नुकसान को कम करने के लिए इस कदम को उठाया जा रहा है।

डोर्सी ने इस साल मई में ट्विटर के बोर्ड से इस्तीफा देकर इस माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट से खुद को अलग कर दिया था। साल 2007 से वह कंपनी के डायरेक्टर थे और साल 2015 से ट्विटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद संभाल रहे थे।

पिछले साल नवंबर में उन्होंने पराग अग्रवाल (Parag Agrawal) को ट्विटर की जिम्मेदारी सौंपी थी और पराग ट्विटर के नए CEO बने थे। हालाँकि, एलन मस्क ने ट्विटर को खरीदते ही पराग सहित तीन बड़े अधिकारियों को निकाल दिया। इसके बाद अन्य कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की।

‘विमान से गुजरात में पैसे लाए केजरीवाल और भगवंत मान, लोगों को बेवकूफ बना रही AAP’: पार्टी के ही पूर्व नेता का बड़ा खुलासा, कहा – CM चेहरा भी तय था

गुजरात चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद नेताओं ने पाला बदलना शुरू कर दिया है। शुक्रवार (4 नवंबर, 2022) को गुजरात के पूर्व विधायक और आम आदमी पार्टी (AAP) नेता इंद्रनील राजगुरु कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए। राजगुरु इसी साल अप्रैल में कॉन्ग्रेस छोड़ AAP में आए थे। कॉन्ग्रेस जॉइन करने के बाद इंद्रनील ने AAP पर कई बड़े आरोप लगाते हुए कहा है कि ये पार्टी बुरी तरह भ्रष्ट है।

हाल ही में की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंद्रनील राजगुरु ने कहा, “कॉन्ग्रेस में वापसी के बाद आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि मैं सीएम पद का चेहरा बनना चाहता था और 15 लोगों की टिकट माँग रहा था। 6 महीने से वहाँ तय था उसका (मुख्यमंत्री का) चेहरा। इस बारे में लोगों से पूछ कर नहीं बल्कि यह पहले से तय था, जो अब लोगों को बताया गया है।”

उन्होंने 15 टिकट माँगने को लेकर लगाए गए आरोप के जवाब में कहा, “मैं जो 15 टिकट माँग रहा था वह अपने लिए नहीं माँग रहा था। मैंने भाजपा के खिलाफ मजबूत उम्मीदवार उतारने के सुझाव दिए। लेकिन, मुझे बोला गया कि ऐसे ही चलता है, कमलम (गुजरात भाजपा कार्यालय) से जो लिस्ट आता है वही करना पड़ता है।” इंद्रनील राजगुरु ने आम आदमी पार्टी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के भ्रष्टाचार न करने वाली बात को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “वो लोग बोलते हैं कि हम करप्शन (भ्रष्टाचार) नहीं करते। लेकिन, मैंने अपनी आँखों से देखा है। यदि करप्शन नहीं होता है तो इतना सारा पैसा कहाँ से आता है? मैंने यह भी देखा है कि ढेर सारा पैसा आया। कितना था यह पता, नहीं लेकिन बहुत पैसा आया।”

उन्होंने बड़ा खुलासा करते हुआ कहा कि 1 अक्टूबर को जब दोनों मुख्यमंत्री (केजरीवाल और भगवंत मान) राजकोट आए थे तो उन्होंने बहुत सारा पैसा देखकर उनसे पूछ लिया कि पैसा कहाँ से आया, तो उन्होंने हेलीकॉप्टर (किसी विमान) का इशारा करते हुए बताया कि ऐसे आया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी लोगों को बेवकूफ बनाने वाली पार्टी है।

गौरतलब है कि 2012 के विधानसभा चुनाव में इंद्रनील राजगुरु राजकोट पूर्वी विधानसभा से सीट से विधायक बने थे। इसके बाद साल 2017 के चुनाव में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के खिलाफ चुनाव लड़ा, जहाँ उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा था।

बता दें, गुजरात की सियासत में बीते 27 सालों से भाजपा का कब्जा बना हुआ है। आगामी चुनावों से पहले सामने आए सर्वे के हिसाब से भी ऐसा लग रहा है कि एक बार फिर भाजपा की वापसी होने वाली है। एबीपी न्यूज और सी-वोटर के सर्वे में गुजरात के 56 प्रतिशत लोगों ने सत्ताधारी भाजपा के पक्ष में वोट देने की बात कही। वहीं, 20 प्रतिशत लोगों का मानना है कि चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत होगी। सिर्फ 17 प्रतिशत लोगों का कहना है कि कॉन्ग्रेस की जीत होगी। सर्वे में 2 प्रतिशत लोगों का कहना है कि इन पार्टियों को छोड़कर अन्य की जीत हो सकती है।

उत्तराखंड में बनेगी साइंस सिटी, एस्ट्रो पार्क का भी होगा निर्माण: ‘आकाश तत्व’ के कार्यक्रम में CM धामी का बड़ा ऐलान, प्राचीन सनातन विज्ञान पर हुआ मंथन

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार (5 नवंबर, 2022) को में देहरादून स्थित उत्तरांचल यूनिवर्सिटी स्थित विज्ञान भारती उत्तराखंड एवं भारत सरकार के प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित “National Conference and Exhibition on Akash tattwa – Akash For Life” में हिस्सा लेकर एटलस एवं सार संग्रह का विमोचन किया। उन्होंने कार्यक्रम की तारीफ़ करते हुए कहा कि सनातन ज्ञान को आधुनिक सोच से जोड़कर किया जा रहा वैज्ञानिक मंथन अत्यंत सराहनीय पहल है।

इस दौरान उन्होंने कहा कि परिश्रम, उत्साह और लगन से काम करने पर सारा आकाश आपका हो सकता है। उन्होंने बताया कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकाश तत्व का सही प्रकार से प्रयोजन किया है। सीएम धामी ने कहा हमारे शोधार्थी आज विश्व चिंतन विषयों पर शोध कर रहे हैं और इस प्रकार के सम्मेलन से निकले मंथन के माध्यम से एक भारत-श्रेष्ठ भारत का रास्ता मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में भी पंच तत्व परिभाषित होते हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “मनुष्य दीर्घकालिक जीवन प्राप्त करने के लिए भी आकाश तत्व पर निर्भर है। संसार की विभिन्न चिकित्सा पद्धति ने भी आकाश तत्व को समझा है। आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन रहा है। काशी में भी भव्य कॉरिडोर बना है। उज्जैन में भी महाकाल कॉरिडोर बना है और उत्तराखंड में भी भव्य केदारपुरी का निर्माण हो रहा है।” सीएम धामी ने राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को लेकर नए ऐलान भी किए।

सीएम धामी ने कहा कि वैज्ञानिक सोच को जागृत करने और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में साइंस सिटी के निर्माण का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र तक अनुसंधान एवं शोध गतिविधियों को पहुँचाने लिए ’’लैब्स ऑन व्हील’’ और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में जागरूकता के लिए राज्य में एस्ट्रो पार्क बनाने पर भी विचार कर रहे हैं। ऐसे कार्यक्रमों में प्राचीन विज्ञान को आधुनिक शोधों से जोड़ कर काम किया जा रहा है।

छात्राओं को क्लास में पोर्न वीडियो दिखाता था मिशनरी स्कूल का शिक्षक, गलत तरीके से छूता था, पढ़ाता था ‘लव यू’ और ‘किस यू’: धमकी भी देता था

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित एक मिशनरी स्कूल में एक शिक्षक द्वारा छात्राओं से गंदी हरकतें करने का मामला सामने आया है। उक्त शिक्षक क्लास में लड़कियों को ‘लव यू’ और ‘किस यू’ जैसी चीजें पढ़ा रहा था। इतना ही नहीं, वो छात्राओं को पोर्न वीडियोज भी दिखा रहा था और उन्हें गंदे तरीके से छूता था। पीड़ित बच्चियों ने जब अपने अभिभावकों को ये बात बताई, तब जाकर इसका भंडाफोड़ हुआ। आरोपित शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया गया है।

उसका नाम लिजॉय है, जो तराना स्थित ‘दिनाह कॉन्वेंट स्कूल’ में पढ़ाता है। शनिवार (5 नवंबर, 2022) को बड़ी संख्या में हिन्दू कार्यकर्ता और अभिभावक स्कूल के बाहर पहुँचे और विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोगों ने स्कूल के खिलाफ नारेबाजी भी की। साथ ही स्कूल की तरफ पत्थर फेंके। शिकायत करने वाली छात्राएँ 12-14 साल की हैं, जो 7-9वीं कक्षाओं में पढ़ती हैं। वो कई दिनों से इस तरह की हरकतें कर रहा था।

लड़कियों का कहना है कि उन्होंने स्कूल प्रबंधन को भी शिक्षक की हरकतों के बारे में बताया था, लेकिन उनलोगों ने इस मामले को दबा दिया और मामले पर ध्यान नहीं दिया। पुलिस ने आरोपित शिक्षक के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और जाँच चल रही है। वो बच्चियों को ‘लव स्टोरी’ पढ़ाता था। साथ ही अपनी हरकतों के बारे में किसी को न बताने की धमकी भी देता था। जब आम लोग प्रदर्शन के लिए स्कूल पहुँचे थे, उस समय वो शिक्षक गायब था।

बाद में पुलिस वहाँ पर पहुँची और लोगों को समझाया। पुलिस का कहना है कि स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी जाँच किया जाएगा। शिक्षक फ़िलहाल सलाखों के पीछे है। एक बच्ची के पिता ने बताया कि बच्ची कुछ दिनों से उदास थी और चिड़चिड़ी हो गई थी। पहले परिजनों ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन बाद में बच्ची ने सब बातें बताई तो घर वालों के होश उड़ गए। स्कूल में बताने पर बच्ची को निकाल देने की धमकी भी दी गई थी।

साथ ही एक पत्र लिखवा कर उस पर उसके हस्ताक्षर ले लिए गए थे। साथ ही घर पर कुछ भी न बताने की धमकी दी गई थी। ये स्कूल पहले भी विवादों में रहा है। यहाँ एक बच्ची को एक्सपायर्ड दवा खिला दी गई थी। इससे उसे 37 बार उल्टियाँ हुई थीं और बड़ी मुश्किल से जान बच पाई थी। ताज़ा मामले में बाकी शिक्षक भी बच्चियों से मामला खत्म करने को कहते थे। कॉन्ग्रेस विधायक महेश परमार भी अभिभाकों के साथ विरोध प्रदर्शन के लिए पहुँचे थे।

चर्च में 70 लोग, जिनमें 50 हिन्दू समाज के… फतेहपुर में चल रहा था ईसाई धर्मांतरण का खेल, यूपी पुलिस ने पादरी सहित 10 को किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सामूहिक धर्मांतरण के एक पुराने मामले में पादरी सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। दरअसल, इसी साल 14 अप्रैल को यहाँ के हरिहरगंज में स्थित चर्च में धर्मांतरण की खबर मिली थी। इसके बाद पुलिस ने 55 लोगों के खिलाफ धर्मांतरण की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर 26 लोगों को गिरफ्तार किया था। हालाँकि, तब सबूतों के अभाव में सभी को छोड़ना पड़ा था। लेकिन, अब इस मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फतेहपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत हरिहरगंज मोहल्ले के चूना वाली गली स्थित चर्च भीतर देर शाम प्रार्थना सभा चल रही थी। उसी दौरान मोहल्ले के लोगों की सूचना पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ता पहुँच गए थे। इन कार्यकर्ताओं का कहना था कि गरीब हिंदू परिवारों को रुपयों का लालच देकर उनका मतांतरण करने की साजिश रची जा रही है।

इस बारे में जब चर्च के पादरी से पूछा गया तो उसने कबूल किया था कि चर्च के भीतर 70 से ज्यादा लोग मौजूद थे, जिनमें 50 से ज्यादा हिंदू समाज के लोग थे। इसकी सूचना पुलिस-प्रशासन को दी गई और उनसे आग्रह किया गया कि चर्च के भीतर जितने लोग प्रार्थना सभा कर रहे थे, उनकी आईडी चेक की जाए और उन्हें बाहर निकाला जाए। माँग की गई थी कि यदि मतांतरण का आरोप सही हो तो मुकदमा दर्ज किया जाए।

इस मामले में, एसडीएम से लेकर सीओ ने समझाइश देकर मामले को शांत कराने की कोशिश की थी। हालाँकि, हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता पादरी और अन्य आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने चर्च के भीतर मौजूद 55 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। बाद में, पुलिस ने 35 लोगों के खिलाफ नामजद व 20 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ धर्मांतरण की धाराओं पर एफआईआर दर्ज की थी। साथ ही 26 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था।

हालाँकि, जब इन आरोपितों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया तो कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपितों को रिहा कर दिया था। लेकिन, पुलिस सबूत जुटाने और आवश्यक कार्रवाई में जुटी थी। इसके बाद अब पुलिस ने धर्मांतरण के मास्टरमाइंड पादरी सहित 10 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। पुलिस के अनुसार, इस मामले के सभी आरोपितों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, ताज़ा खबर की बात करें तो फतेहपुर जिले के ही ललौली थाना अंतर्गत चर्च में प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण कराया जा रहा था। हिंदू संगठनों के विरोध के बाद पुलिस ने 5 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद पुलिस ने सदर कोतवाली थाना क्षेत्र से 6 और ललौली थाना क्षेत्र से 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में अब तक कुल 16 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

‘हिन्दू विहीन पंजाब बनाना चाहते हैं खालिस्तानी, कश्मीर वाला ही पैटर्न’: बोले पंजाब के हिंदूवादी नेता – वारदात के बाद पद और पैसे पाते हैं आतंकियों के परिजन

पंजाब के अमृतसर में शुक्रवार (4 नवंबर, 2022) को हिन्दू नेता सुधीर सूरी की खालिस्तानी आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। उनकी हत्या की जिम्मेदारी कनाडा में बैठे फरार आतंकी लखबीर सिंह लांडा ने ली है। पंजाब में लंबे समय से खालिस्तानियों के निशाने पर वो हिंदूवादी लोग रहे हैं, जो उनकी अलगाववादी सोच का विरोध करते आए हैं। उन्हीं में से एक नाम है पवन गुप्ता का भी। पवन गुप्ता ‘शिवसेना हिंदुस्तान’ नाम के संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।

बताया जाता है कि उन पर भी कई बार हमले का प्रयास किया जा चुका है। ऑपइंडिया ने खालिस्तान समस्या पर उनसे अगस्त 2022 को एक्सक्लूसिव बातचीत की थी।

खालिस्तानियों को सिर्फ हिन्दुओं से नफरत

पवन गुप्ता का कहना है कि खालिस्तानियों को केवल हिन्दुओं से नफरत है, जबकि उन्हें बाकी मत-मजहब वालों से कोई दिक्कत नहीं। हालाँकि, पवन गुप्ता ने कहा कि सिखों से हिन्दुओं का रोटी और बेटी का रिश्ता है और खालिस्तानी इस रिश्ते के दायरे से बाहर हैं। पवन गुप्ता का दावा है कि अधिकतर सिख समुदाय खालिस्तानियों की सोच से सहमत नहीं हैं, लेकिन वो इनका खुला विरोध करने से डरते हैं। इसके पीछे गुप्ता ने खालिस्तानियों की हिंसक हरकतों से पैदा किए गए दहशत के माहौल को जिम्मेदार बताया।

उन्होंने कहा कि खालिस्तानियों का ये दावा झूठा और मनगढ़ंत है कि सिख समाज के अधिकतर लोग उनका समर्थन करते हैं।

खालिस्तानी सोच का विरोध ही हिन्दुओं की हत्याओं की वजह

पवन गुप्ता ने कहा कि भले ही खालिस्तानी बाकी लोगों में अपनी दहशत बनाने में सफल हो गए, लेकिन पंजाब के हिन्दू समाज ने कभी उनके आगे घुटने नहीं टेके। खालिस्तानियों की हिन्दुओं से नफरत की गुप्ता ने यही वजह बताई। उनका कहना है कि शिवसेना और हिन्दू समाज के लोग ‘शिव-शक्ति का जाप करेंगे, अपनी रक्षा आप करेंगे’ का नारा लगा कर खालिस्तान वाली सोच से लोहा लेते हैं। हालाँकि, गुप्ता के मुताबिक, इस संघर्ष में कई हिन्दू बलिदान भी हुए हैं।

पवन गुप्ता ने कहा कि खालिस्तानी ये जानते हैं कि जब तक पंजाब में राष्ट्रवादी सोच के लोग हैं, तब तक उनका देश तोड़ कर खालिस्तान बनाने का सपना पूरा नहीं होने वाला – इसलिए उनके निशाने पर हिंदूवादी लोग होते हैं।

कश्मीरी और खालिस्तानी आतंकियों का एक पैटर्न

हमारे साथ अपने अनुभव साझा करते हुए पवन गुप्ता ने कहा कि खालिस्तानी और कश्मीरी आतंकियों का आतंक पैटर्न एक जैसा है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार कश्मीर के इस्लामी आतंकियों को वहम था कि घाटी हिन्दुओं से विहीन कर के वो कश्मीर को पाकिस्तान में मिला लेंगे वैसे ही खालिस्तानियों को भी भ्रम है कि वो हिन्दू विहीन पंजाब बना कर खालिस्तान बना लेंगे। हालाँकि, गुप्ता ने इसे खालिस्तानियों की महज ग़लतफ़हमी करार दिया।

खालिस्तानी आतंकियों को पद, पैसा और शाबासी

पवन गुप्ता ने दावा किया कि खालिस्तानी आतंकियों का बैकअप काफी मजबूत है। बड़े से बड़ा कांड करने के बाद उन्हें शाबाशी के साथ पैसा और समर्थन भी मिलता है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या का उदाहरण देते हुए गुप्ता ने बताया कि उनके हत्यारों के परिजनों को अकाल तख़्त पर सम्मानित कर के सोने के सिक्के दिए गए। उन्होंने बताया कि एक अन्य खालिस्तानी आतंकी की पत्नी विमल कौर खालसा को लोकसभा में चुन कर भेजा गया था। इसी के साथ एक और उदाहरण देते हुए पवन गुप्ता ने बताया कि भगत सिंह का अपमान करने वाला भी चुन कर जनप्रतिनिधि बना दिया जाता है।

पवन गुप्ता ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के कातिलों को सम्मानित कर के उनकी तस्वीरों को लगाया जा रहा है। तिहाड़ में बंद आतंकी जगतार सिंह हवारा का नाम लेते हुए उन्होंने बताया कि पंजाब के कई हिस्सों में उनको भी महिमामंडित किया जा रहा है और उसके परिवार को बाहर से पैसे आ रहे हैं। गुप्ता के अनुसार, कानूनी प्रक्रियाओं में फँसे खालिस्तानियों के केस पैसे के दम पर बड़े से बड़े वकील लड़ते हैं। पवन गुप्ता ने आगे बताया कि इसके उलट अपने समाज के लिए लड़ने वाले हिन्दुओं को हिन्दू समाज अकेला छोड़ देता है।

खालिस्तानियों के खिलाफ चाहिए योगी आदित्यनाथ जैसा शासक

पवन गुप्ता ने पंजाब में भी योगी आदित्यनाथ जैसे शासक की जरूरत पर जोर दिया। उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ योगी के कामों की तारीफ करते हुए उन्होंने बताया कि खालिस्तानियों के खिलाफ भी बुलडोजर चलाने की हिम्मत करने वाला कोई शासक ही पंजाब को खालिस्तान मुक्त कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि योगी जैसा कोई शासक उत्तर प्रदेश में आया तो उनकी पार्टी शिवसेना हिंदुस्तान उनका खुला समर्थन करेगी।

पंजाब में बद से बदतर हो गई है कानून व्यवस्था

हमसे बात करते हुए पवन गुप्ता ने पंजाब में नई बनी ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ की सरकार को अनुभवहीन बताया। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था की इतनी बुरी स्थिति पिछली किसी भी सरकार में नहीं रही है। पवन गुप्ता ने कहा कि महज सस्ती लोकप्रियता लेने के लिए भगवंत मान की सरकार ने कई लोगों की सुरक्षा हटाई थी, जिसका दुष्परिणाम सबने देखा है। गुप्ता के मुताबिक, पंजाब सरकार असल में दिल्ली से चलाई जा रही है।

पवन गुप्ता ने कहा कि महज कुछ ही दिनों में आम आदमी पार्टी सरकार लोगों के दिलो-दिमाग से उतर चुकी है। उनका कहना था कि इस सरकार ने कई लोगों की सुरक्षा हटा कर उसे अख़बारों में छपवा दिया, जिससे कातिलों को टारगेट खोजने में आसानी हो गई। पवन गुप्ता ने बताया कि वो ही नहीं, बल्कि उनका परिवार भी खालिस्तानियों के निशाने पर पहले से रहा है।

पाकिस्तान से सटा बॉर्डर खालिस्तानियों के लिए सुविधाजनक

पवन गुप्ता के मुताबिक, पंजाब बॉर्डर का पाकिस्तान सीमा से सटा होना खालिस्तानियों के लिए काफी सुविधाजनक साबित होता है। उनका कहना है कि इसी बॉर्डर का फायदा उठा कर पाकिस्तान भारत के खालिस्तानियों के साथ मिल कर देश विरोधी हरकतें करता और करवाता है। पवन गुप्ता का कहना था कि अब तक जगह-जगह खालिस्तान के नारे लग रहे हैं और भिंडरावाले के साथ मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या करने वाले हवारा की फोटो लगाई जा रही हैं, जिसमें सरकारी बसें भी शामिल हैं।

पंजाब के कुछ अफसर भी हैं हिन्दू विरोधी

पवन गुप्ता ने खुद को भी खालिस्तान की लड़ाई में सक्रियता से शामिल बताया। उनका कहना था कि कई सरकारी अधिकारी भी हिन्दुओं की बात नहीं सुनते, जिनकी उन्हें आवाज उठानी पड़ती है। उन्होंने ये भी बताया कि DGP के खिलाफ मोर्चा खोलने के चलते व्यक्तिगत खुन्नस में उनकी सुरक्षा हटा दी गई थी। गुप्ता ने पंजाब में हिन्दुओं को अल्पसंख्यक बताया।

दशकों से लटका है आतंकवाद पीड़ित हिन्दुओं का मुआवजा

पवन गुप्ता ने हमें बताया कि कृषि कानून के विरोध में हुए आंदोलन के दौरान खालिस्तानी गतिविधियाँ तेज हुई थीं, जो पंजाब में AAP की सरकार बनने के बाद बेकाबू हो गई हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से पंजाब के हिन्दुओं के हितों के बारे में सोचने की अपील करते हुए माँग की कि शुरुआत पंजाब में 36 हजार हिंसा पीड़ित हिन्दुओं के स्वीकृत हो चुका मुआवजा दिया जाए।

उन्होंने बताया कि पंजाब के आतंकवाद पीड़ित हिन्दुओं का ये 781 करोड़ रुपए का मुआवजा कई वर्षों से केंद्र सरकार की टेबल पर पड़ा है, जिसको स्वीकृत न जाने क्यों नहीं किया जा रहा है। पवन गुप्ता ने पंजाब के हिंदूवादी नेताओं के लिए केंद्रीय सुरक्षा की माँग भी की।

लगभग हर हिस्से में हुई हैं हिन्दुओं की हत्याएँ

पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद की विभीषिका बताते हुए पवन गुप्ता ने पंजाब के लगभग हर हिस्से में हुई हिन्दुओं की हत्या के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अमृतसर, मोगा, पटियाला, लुधियाना और जलंधर जैसे हिस्सों में कई हिंदूवादी नेताओं की हत्या हो चुकी है। हत्या के शिकार हिन्दुओं में उन्होंने शिवसेना के साथ संघ के नेताओं को भी शामिल बताया।

‘केजरीवाल के खालिस्तानी प्रेम ने मरवा दिया’ : सुधीर सूरी की हत्या में ISI लिंक, हिंदू संगठनों ने AAP सरकार पर लगाए गंभीर इल्जाम

पंजाब के अमृतसर में शिवसेना हिंदुस्तान के नेता सुधीर सूरी की हत्या के विरोध में हिंदू संगठनों ने शनिवार (5 नवंबर 2022) को पंजाब बंद का आह्वान किया था। इस दौरान हिंदू संगठन के नेताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए आईएसआई की भूमिका को संदिग्ध बताया है। साथ ही, उचित सुरक्षा व्यवस्था प्रदान न करने के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

पंजाब बंद के दौरान शिवसेना हिंदुस्तान समेत अन्य हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन करते हुए सुधीर सूरी की हत्या में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की भूमिका पर बात की। उन्होंने ये मुद्दा खालिस्तानी आतंकी गोपाल सिंह चावला की वीडियो सामने आने के बीच उठाया। गोपाल आईएसआई का करीबी है। उसने वीडियो में कहा है, “पूरे सिख समुदाय, मुस्लिम समुदाय और स्वतंत्रता तथा शांति चाहने वाले हर व्यक्ति को बधाई। अमृतसर में एक युवक ने सुधीर सूरी पर गोलियाँ चलाईं, अभी कुछ और भी लोग हैं, उन्हें भी जाना होगा।”

इसके अलावा, हिंदू संगठनों ने यह भी कहा है कि सुधीर सूरी की हत्या की साजिश रचे जाने की जानकारी पुलिस और पंजाब की भगवंत मान सरकार को थी। इसके बावजूजद भी उनकी सुरक्षा व्यवस्था में चूंक हुई और सरकार की तरफ से उन्हें उचित सुरक्षा प्रदान नहीं की गई थी। हिंदू संगठन के नेताओं ने यह भी कहा है कि यदि आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा उन्हें बुलेटप्रूफ जैकेट उपलब्ध कराई जाती तो यह दुर्घटना नहीं होती। सुधीर सूरी के पुत्र समेत अन्य नेता सुधीर सूरी को शहीद घोषित करने की माँग कर रहे हैं।

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने शिवसेना नेता के पोस्ट शेयर कर अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है “स्वर्गीय सुधीर सूरी जी के करीबियों ने 4 दिन पहले ही उनकी हत्या की आशंका जताई थी लेकिन अरविंद केजरीवाल और राघव चड्ढा के खालिस्तानी प्रेम ने एक और हिंदू नेता को मरवा दिया। चुनाव में खालिस्तानी आतंकवादी के घर सोकर केजरीवाल ने अपना खालिस्तानी प्रेम जगजाहिर कर दिया था।”

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदूवादी नेता सुधीर सूरी की हत्या के बाद से अमृतसर में तनाव का माहौल बना हुआ है। शुक्रवार (4 नवंबर 2022) शाम से ही घटना स्थल के आस-पास की दुकानें बंद कर दी गईं थीं। इसके अलावा, कुछ हिंसक घटनाएँ, दुकानों और पास खड़ी कारों में तोड़फोड़ की खबरें भी सामने आईं हैं। हिंदू संगठनों ने बंद का आह्वान किया था इसलिए अमृतसर के कई स्कूलों ने सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से छात्रों को स्कूल बंद होने की जानकारी भेजी थी। जिसके बाद, शहर के अधिकांश स्कूल बंद नजर आए।