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HC ने गायों की हत्या के लिए ले जाने वाले आसिफ की जमानत याचिका की खारिज, कहा- गोहत्या से शांति भंग होती है: जीवित प्राणियों के प्रति करुणा प्रत्येक नागरिक का दायित्व

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने गायों की हत्या के लिए राजस्थान ले जाने वाले आरोपित आसिफ की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि गाय भारत में पूजनीय है और गोहत्या जैसे कृत्य बड़ी आबादी की आस्था को ठेस पहुँचाते हैं, जिससे सार्वजनिक शांति को खतरा होता है।

रिपोर्ट के अनुसार, आसिफ पर हरियाणा पुलिस ने अप्रैल 2025 में गोवंश संरक्षण अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। उसके साथ दो अन्य लोग भी थे। इन पर गायों की हत्या के लिए राजस्थान ले जाने के आरोप में इसी साल अप्रैल में हरियाणा गोवंश संरक्षण एवं गोसंवर्धन अधिनियम, 2015 तथा क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत मामला दर्ज किया गया था। 

इस पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा है, “संविधान केवल अमूर्त अधिकारों की रक्षा नहीं करता बल्कि एक न्यायपूर्ण, करुणामय और एकजुट समाज के निर्माण का प्रयास भी करता है।”

हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा है कि गाय भारत की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। संविधान का अनुच्छेद 51(ए)(जी) सभी नागरिकों को जीव-जंतुओं के प्रति करुणा का भाव रखने को बाध्य करता है।

जाँच में कोर्ट ने पाया कि आसिफ ने पहले जमानत का दुरुपयोग किया और बार-बार गोहत्या जैसे अपराधों में शामिल रहा। कोर्ट ने कहा, “रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री से यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता ने पहली बार अपराध नहीं किया है। उस पर पहले भी इसी प्रकार के अपराधों से शामिल होने के आरोप वाली तीन अन्य प्राथमिकियाँ हैं।”

जिसके बाद कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जमानत देने से आसिफ जाँच में हस्तक्षेप या साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है। कोर्ट के अनुसार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है लेकिन बार-बार अपराध की प्रवृत्ति दिखाने वाले व्यक्ति को इसका लाभ नहीं दिया जा सकता है।

कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए कहा, ‘यह कोर्ट इस तथ्य से अनभिज्ञ नहीं रह सकती कि हमारे जैसे बहुलवादी समाज में कुछ कृत्य जो वैसे तो निजी होते हैं लेकिन तब सार्वजनिक शांति पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं जब वे किसी बड़ी आबादी वाले समूह की गहरी आस्थाओं को ठेस पहुँचाते हैं।’

आदेश में कहा गया है, “भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51ए(जी) के तहत प्रत्येक नागरिक पर यह दायित्व है कि वह सभी जीवित प्राणियों के प्रति करुणा दिखाए। इसी संदर्भ में, गोहत्या का कथित कार्य जिसे बार-बार, जानबूझकर और उकसावे की नीयत से अंजाम दिया गया, संवैधानिक नैतिकता और सामाजिक व्यवस्था की मूल भावना पर प्रहार करता है।”

बता दें कि हरियाणा पुलिस के अनुसार नूंह के रहने वाले आसिफ पर आरोप है कि वह दो गायों को हरियाणा से राजस्थान ले जाकर उनकी हत्या करने की योजना बना रहा था। यह अमानवीय कार्य हरियाणा गोवंश संरक्षण एवं गो संवर्धन अधिनियम, 2015 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 का उल्लंघन है।

पुलिस ने बताया कि आसिफ का आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ पहले भी गोहत्या से संबंधित तीन FIR दर्ज हो चुकी हैं। हालाँकि इसमें उसे जमानत दे दी गई थी, लेकिन इस बार कोर्ट ने ऐसा करने से साफ इंकार कर दिया है।

नाबालिग से रेप, जमीन पर कब्जा और मदरसे से धर्मांतरण नेटवर्क… छांगुर पीर गैंग का फरीदाबाद-बरेली-बलरामपुर कनेक्शन खुला: ‘मास्टरमाइंड’ अब्दुल मजीद के साथ सलमान, आरिफ और फहीम भी अरेस्ट

धर्मांतरण के मास्टरमाइंड जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर के नेटवर्क का जाल अब और भी गहरा होता जा रहा है। उनके पुराने मामलों के साथ ही, अब नए और चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। यह नेटवर्क सिर्फ जबरन धर्मांतरण ही नहीं, बल्कि शोषण, ब्लैकमेलिंग और यहाँ तक कि गायब करने जैसे गंभीर अपराधों में भी शामिल है। हाल ही में, फरीदाबाद में एक नाबालिग लड़की के साथ दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है, जबकि बलरामपुर में एक परिवार पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने का आरोप है। वहीं, बरेली में पुलिस ने एक ऐसे ही नए गिरोह को पकड़ा है, जो पूरे देश में धर्मांतरण करा रहा था और जिसका सरगना एक मदरसा संचालक है।

फरीदाबाद में नाबालिग लड़की से रेप

फरीदाबाद में एक नाबालिग लड़की ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि वह छांगुर पीर गैंग के प्रेम जाल में फँस गई थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस पूछताछ में पीड़ित लड़की ने बताया कि उसकी पहचान एक कॉलोनी में रहने वाली नेहा से हुई, जिसने उसे अपने भाई आमिर हुसैन से मिलवाया था। ये लोग उसे दिल्ली की निजामुद्दीन दरगाह पर ले गए थे, जहाँ उसकी मुलाकात सीधे छांगुर पीर से हुई।

छांगुर पीर ने लड़की को धर्म बदलने और निकाह करने के लिए कहा। बाद में, आमिर अपनी भाभी सबीना के घर पर ले गया, जहाँ उसके साथ जबरदस्ती गलत काम करने लगा, इसका वीडियो उसकी बहन नेहा ने रिकॉर्ड किया और फिर दोनों मिलकर नाबालिग को ब्लैकमेल करने लगे। वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर आमिर ने कई बार रेप किया।

पीड़िता ने बताया कि दिल्ली वाले घर में जब कोई नहीं होता, तब आमिर का अब्बू अबरार घर में घुसकर छेड़छाड़ करता है और प्राइवेट पार्ट को छूने की कोशिश करता है। विरोध करने पर मारपीट करता है। पुलिस ने इस मामले में पहले ही आमिर और नेहा को गिरफ्तार कर लिया था। अब पुलिस ने आमिर के 56 साल के अब्बू अबरार को भी दिल्ली से गिरफ्तार किया है, जिस पर नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप है।

बलरामपुर: पति गायब, जमीन पर कब्जा

‘छांगुर पीर’ के नेटवर्क का एक और डरावना चेहरा बलरामपुर में सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, शीला देवी नाम की एक महिला ने आरोप लगाया है कि उनके पति राजेंद्र कुमार को 2013 से गायब कर दिया गया है। महिला का आरोप है कि छांगुर गैंग के लोग उनके पति पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बना रहे थे। जब परिवार ने मना किया तो दबंगों ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया।

शीला देवी का कहना है कि आरोपित लगातार उन्हें धमका रहे हैं कि अगर वे धर्म नहीं बदलेंगी तो उनकी जमीन नहीं छोड़ी जाएगी। इस मामले में विशेष जाँच बल (STF) ने संज्ञान लिया है और जाँच शुरू कर दी है।

बरेली में पकड़ा गया नया धर्मांतरण गैंग

छांगुर गैंग की सक्रियता को देखते हुए बरेली पुलिस भी सतर्क हो गई थी, जिसकी वजह से एक और धर्मांतरण गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। जानकारी के अनुसार, इस गिरोह का सरगना अब्दुल मजीद है, जो एक मदरसा चलाता है। पुलिस ने उसके साथ सलमान, आरिफ और फहीम को भी गिरफ्तार किया है। यह गिरोह लोगों का ब्रेनवाश कर उनका धर्मांतरण कराता था। उन्होंने बरेली में एक पूरे परिवार को निशाना बनाया। बृजपाल नाम के एक व्यक्ति का ब्रेनवाश करके उसकी शादी एक मुस्लिम लड़की से कराई गई, फिर उसकी बहन का निकाह कराया गया और अंत में मजबूर होकर उनकी माँ ने भी धर्म बदल लिया।

पुलिस को शक है कि इस गिरोह को विदेश से फंडिंग मिल रही थी। सरगना अब्दुल मजीद के खाते में पिछले आठ महीनों में लगभग ₹13 लाख के 2,000 से ज्यादा लेनदेन हुए हैं। साथ ही, उसके सदस्यों के पास भी कई बैंक खाते पाए गए हैं, जिनकी जाँच जारी है।

छांगुर पीर का अबतक का काला-चिट्ठा

जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर यूपी बलरामपुर में अवैध धर्मांतरण का नेटवर्क चलाने वाला गिरोह सरगना है, जो गरीबों, दलितों और महिलाओं को प्रेमजाल, लालच व धमकी के जरिए इस्लाम कबूल करवाता था। छांगुर पीर ने 40+ बैंक खातों के जरिए विदेशों से ₹100 करोड़ से ज्यादा की फंडिंग पाई है। सिंधी परिवार समेत कई हिंदुओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें गैंग में शामिल किया और सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर संपत्ति बनाई। मामले में लखनऊ से उसकी और नीतू रोहरा उर्फ नसरीन की गिरफ्तारी हुई, कोठी पर बुलडोजर चला, पुणे में संपत्ति जब्त हुई। मामले में लगातार ATS, ED, STF जाँच कर रही हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे राष्ट्रविरोधी कार्रवाई बताकर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

भारत पर अमेरिका का 50% टैरिफ बुधवार से होगा लागू, रूस से तेल खरीदने के खिलाफ US ने उठाया था कदम: ट्रंप ने पहले लगाया था 25% इंपोर्ट ड्यूटी

अमेरिका ने भारतीय सामानों पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिससे कुल शुल्क अब 50% हो जाएगा। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की औपचारिक सूचना जारी कर दी गई है। यह टैरिफ 27 अगस्त 2025 की रात 12:01 बजे (ईस्टर्न डेलाइट टाइम) से लागू होगा।

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह अतिरिक्त टैक्स रूस की सरकार से मिलने वाले कथित खतरे के जवाब में लगाया गया है और भारत को उसी वजह से निशाना बनाया गया है।

होमलैंड सुरक्षा विभाग ने अधिसूचना में कहा कि अतिरिक्त कर रूसी संघ की सरकार द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका को दी गई धमकियों की प्रतिक्रिया स्वरूप लगाया गया है और भारत को भी इसी के लिए निशाना बनाया गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 6 अगस्त को कार्यकारी आदेश 14329 (Executive Order 14329) पर हस्ताक्षर कर इस कदम को अधिकृत किया। ऐसा अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) के माध्यम से होमलैंड सुरक्षा विभाग द्वारा जारी एक सार्वजनिक नोटिस में बताया गया।

नोटिस के अनुसार, जिन भारतीय सामानों को इस टैरिफ में शामिल किया गया है, उनकी सूची एक परिशिष्ट (Annexure) में दी गई है। 27 अगस्त की समयसीमा के बाद जो भी सामान अमेरिका पहुँचेगा या गोदामों से निकाला जाएगा, उन पर यह नया शुल्क लागू होगा।

ट्रंप ने पहले 25% टैक्स लगाया था लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 50% कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन में युद्ध को ‘फंड’ कर रहा है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर कोई समाधान नहीं निकला, तो वह रूस के साथ व्यापार करने वाले और देशों पर भी सख्त कार्रवाई करेंगे।

उन्होंने खासतौर पर भारत और ‘धनी भारतीय परिवारों’ को निशाना बनाया है, जबकि चीन और यूरोपीय देशों पर ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर जवाब देते हुए कहा था, “किसान, पशुपालक और लघु उद्योग हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। दबाव बढ़ेगा, लेकिन हम सह लेंगे।”

वहीं विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने भी भारत की ऊर्जा नीति का मजबूती से समर्थन किया और कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हित और रणनीतिक स्वायत्तता के अनुसार फैसले लेता रहेगा। जयशंकर ने यह भी कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ को गलत ढंग से ‘तेल विवाद’ के रूप में पेश किया जा रहा है।

उन्होंने यह सवाल उठाया कि चीन और यूरोप जैसे बड़े तेल आयातकों पर अमेरिका ने वैसी सख्ती क्यों नहीं दिखाई जैसी भारत पर की जा रही है। भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव तब से और बढ़ गया है, जब से ट्रंप ने यह दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान संघर्षविराम में मध्यस्थता की थी। इसे भारत सरकार ने साफ तौर पर नकार दिया था।

भोपाल के ‘मुस्लिम गैंग’ पर आरोप तय, जबरन धर्मांतरण-रेप-मारपीट मामले में मिले पर्याप्त सबूत: फरहान-साहिल-अबरार समेत 6 अपराधी हुए हैं गिरफ्तार

भोपाल में हिन्दू लड़कियों को निशाने पर लेकर उनका रेप करने वाला ‘मुस्लिम गैंग’ पर जिला न्यायालय ने आरोप तय कर दिए हैं। मुख्य आरोपित फरहान खान और उसके 5 साथियों को कोर्ट ने दुष्कर्म, मारपीट, जबरन धर्मांतरण, अश्लील वीडियो बनाने और हत्या के प्रयास में अभियुक्त माना है।

नई दुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने गैंग के सदस्यों को BNS की धारा 61(2), 64, 115(2), 35(2), 66(E), 296 और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 की धारा 3/5 के तहत अभियुक्त बनाया है। मामले की अगली सुनवाई 01 सितंबर 2025 को होगी। इस दिन एडिशनल पब्लिक प्रोसेक्यूटर कोर्ट में ट्रायल शुरू करेंगे, जिसके बाद गवाही शुरू की जाएगी।

ऑपइंडिया ने इस मामले में विस्तार से खबरें की हैं। भोपाल के ‘मुस्लिम गैंग’ की सारी करतूतें और उनकी गिरफ्तारी से लेकर हर कदम पर हमारी वेबसाइट ने खबरें छापी हैं।

मामले में कब कौन हुआ गिरफ्तार

जिन 6 आरोपितों को जिला न्यायालय ने अभियुक्त बनाया है उनपर हिंदू लड़कियों से रेप और धर्मांतरण के मुकदमे दर्ज किए गए थे। मामला सामने आने के बाद सबसे पहले गैंग का सरगना फरहान पकड़ा गया था, जिसके खिलाफ दो बहनों ने प्राथमिकी दर्ज होने के बाद 13 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया गया था।

इसके बाद 20 अप्रैल 2025 को दूसरे आरोपित साद को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इसके बाद लगातार FIR दर्ज होने के साथ-साथ आरोपितों के पकड़े जाने की कड़ी चलती रही। तीसरे आरोपित साहिल पन्ना को पुलिस ने 27 अप्रैल 2025 तो वहीं चौथे आरोपित अली को 28 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया।

इसी के दो दिन बाद 1 मई 2025 को पाँचवा आरोपित नबील भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया। हालाँकि छठा आरोपित अबरार काफी दिनों की पुलिस की गिरफ्त से फरार रहा। 30 जून 2025 को इटारसी से पुलिस ने अबरार को पकड़ा

रिपोर्ट्स के अनुसार, पूरे मामले में 57 गवाहों की सूची के साथ 240 पन्नों का चालान तैयार कर जिला न्यायालय में जज नीलम मिश्रा की कोर्ट में पेश किया गया था।

क्या था मामला ?

भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र के कोकता स्थित निजी कॉलेज में ‘मुस्लिम गैंग’ ने कई छात्राओं से रेप किया। छात्राओं को दोस्ती का झाँसा देकर फँसाया गया। आरोपितों ने पहले लड़कियों को अपने प्रेम जाल में उलझाया, फिर उनके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। इतना ही नहीं, उन्होंने पीड़िताओं पर धर्म बदलने का दबाव डाला और हिंदू धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं।

रेप कर उनका वीडियो बनाया गया। वायरल करने की धमकी दी गई। इसके बाद 12 अप्रैल 2025 को भोपाल के बागसेवनिया थाने में दो लड़कियों ने एफआईआर लिखवाई कि फरहान और उसके साथियों ने मिलकर उसके साथ रेप और ब्लैकमेलिंग समेत कई घटनाओं को अंजाम दिया है। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 13 अप्रैल को फरहान को गिरफ्तार किया।

एक शिकायत के बाद 5 अन्य पीड़िताओं ने भी हिम्मत दिखाई और FIR दर्ज करवाई। मामले की तह खुलती गई तो फरहान के अलावा 6 और आरोपित भी पुलिस के हत्थे चढ़े। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहन पड़ताल की और मामले की चार्जशीट दाखिल की। इसमें मेडिकल रिपोर्ट, डिजिटल सुबूत और गवाहों के बयान आदि को शामिल किया गया।

अखिलेश यादव ने 18000 शिकायत भेजने का किया दावा, चुनाव आयोग ने बताया – केवल 3919 मेल मिले, उनमें भी फर्जी या मृत व्यक्तियों के नाम: पकड़ी गई ‘वोट चोरी’ के नाम पर सपा की ‘हेराफेरी’

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया था कि उन्होंने उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग को 18 हजार मतदाताओं के शपथ पत्र सौंपे हैं, जिनमें साजिशन वोट काटे जाने की शिकायत की गई थी। लेकिन अब चुनाव आयोग ने इस दावे की पोल खोल दी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि उन्हें न तो 18 हजार शपथ पत्रों की मूल प्रतियाँ मिलीं और न ही इतनी संख्या में शिकायतें दर्ज हुई हैं। केवल 3,919 स्कैन कॉपियाँ ही ईमेल से प्राप्त हुईं हैं, जिनमें भी कई दस्तावेज या तो फर्जी हैं या मृत व्यक्तियों के नाम पर बनाए गए हैं।

अखिलेश यादव का दावा – 18 हजार शपथ पत्र सौंपे गए

अखिलेश यादव ने पहले 21 अगस्त 2025 को X ( पहले ट्विटर) पर लिखा, “हमने 18,000 एफिडेविट सौंपे, लेकिन आयोग ने सिर्फ़ 14 का जवाब दिया। बाकी 17,986 का क्या?”

फिर समाजवादी पार्टी की मीडिया सेल ने 25 अगस्त 2025 को X (पहले ट्विटर) पर लिखा, “2022 का विधानसभा चुनाव और उपचुनाव भाजपा की मिलीभगत से लूटे गए। चुनाव आयोग भाजपाई बेईमानियों में शामिल है।”

अखिलेश यादव ने यह भी दावा किया कि उन्होंने 18,000 मतदाताओं के शपथ पत्र चुनाव आयोग को सौंपे हैं, जो यह बताते हैं कि कैसे साजिश के तहत उनका वोट काटा गया।

चुनाव आयोग का जवाब– एक भी मूल शपथ पत्र नहीं मिला

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने अखिलेश यादव के दावे की हवा निकालते हुए साफ कहा, “18 हज़ार शपथ पत्रों के साथ की गई शिकायत का उल्लेख किया जा रहा है, लेकिन एक भी मतदाता का शपथ पत्र मूल रूप में प्राप्त नहीं हुआ है।” चुनाव आयोग ने बताया कि केवल 3919 स्कैन कॉपियाँ ईमेल के माध्यम से मिली हैं और वो भी कई मामलों में संदिग्ध पाई गई हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने समाजवादी पार्टी से अपील की, “अगर 18 हजार शपथ पत्र हैं, तो उनकी मूल प्रतियाँ उपलब्ध कराएँ, जिससे निष्पक्ष जाँच पूरी हो सके।” लेकिन अखिलेश यादव अब तक सिर्फ स्कैन कॉपियों और बयानबाज़ी पर अड़े हुए हैं, जबकि असली दस्तावेजों की डिमांड पर चुप्पी साध ली है।

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन की जाँच में सामने आया कि अब तक जिन 5 विधानसभा क्षेत्रों की जाँच हुई है, उनमें कई शपथ पत्र मृत व्यक्तियों के नाम पर बने हैं, जिनकी मौत 2022 से पहले ही हो चुकी थी। कुछ लोगों ने अपने नाम से बने शपथ पत्रों को देखने के बाद साफ इंकार कर दिया कि उन्होंने कोई हलफनामा दिया है। यानी, फर्जीवाड़ा साफ नजर आया। चुनाव आयोग ने यह भी याद दिलाया कि गलत साक्ष्य देना कानूनन अपराध है।

सपा नेता के दो-दो फर्जी वोट

समाजवादी पार्टी ने X (पहले ट्विटर) पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “तो दिक्कत क्या है? सस्पेंड करवाईए SDM को, सरकार आपकी है, मंत्री हैं आप। @ECISVEEP देख लीजिए।” वीडियो में दावा किया गया कि कन्नौज जिले में समाजवादी पार्टी के नेताओं के नाम से दो-दो फर्जी वोट दर्ज हैं और प्रशासन इस पर कार्रवाई नहीं कर रहा।

वीडियो में एक नेता का दावा है कि कन्नौज में वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी है। उन्होंने कहा कि कई लोगों के नाम दो-दो जगह पर हैं और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है नवाब सिंह यादव, जिन्हें ‘मिनी सीएम‘ कहा जाता है और जो अखिलेश यादव के करीबी माने जाते हैं।

नवाब सिंह का नाम एक ही चुनाव में दो अलग-अलग बूथों पर दर्ज है– बूथ 233 और बूथ 299। उनके भाई वीरपाल यादव के भी दो वोट दर्ज हैं– बूथ 233 और 300 पर। वीडियो में यह भी कहा गया कि नवाब सिंह यादव एक नाबालिग से रेप केस में जेल में बंद हैं और फिर भी उनके नाम से वोटर लिस्ट में गड़बड़ी है। नेता ने इस मामले की जाँच और कानूनी कार्रवाई की माँग की, ताकि दो-दो वोट बनाने वालों पर सख्त कदम उठाया जाए।

चुनाव आयोग का जवाब– कार्रवाई शुरू हो चुकी है

इस वीडियो और शिकायत पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश (CEO UP) ने साफ कहा, “मामले का संज्ञान ले लिया गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी कन्नौज को त्वरित और गहन जाँच करने व जरूरी कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं।”

पहले भी चुनाव आयोग ने डिजिटल इंडिया पर आरोप लगाने वाले अखिलेश यादव के दावों को खारिज किया था। अखिलेश यादव ने यूपी के कई जिलों- लखनऊ, कासगंज, बाराबंकी और जौनपुर की ओर उंगली उठाते हुए कहा था कि वोटर लिस्ट से लोगों के नाम गलत तरीके से हटाए गए है। लेकिन खुद जिले के DM ने अखिलेश यादव की पोस्ट का फैक्ट चुक करते हुए करारा जवाब दिया था।

दुनिया की सड़कों पर राज करेगी e-Vitara SUV, 100+ देशों को होगी एक्सपोर्ट: Make In India का ग्लोबल EV कार मार्केट में बजेगा डंका, PM मोदी ने Maruti Suzuki की फैक्ट्री का किया उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मारुति सुजुकी की पहली ग्लोबल इलेक्ट्रिक कार e- Vitara SUV को लॉन्च के लिए हरी झंडी दिखाई। पूरी तरह भारत में निर्मित ये इलेक्ट्रिक कार अब गुजरात से 100 से अधिक देशों में निर्यात की जाएगी। इनमें यूरोप और जापान जैसे दुनियाभर के विकसित बाजार भी शामिल हैं।

मंगलवार (26 अगस्त 2025) को पीएम नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय गुजरात के दौरे के दूसरे दिन हसंलपुर स्थित सुजुकी मोटर प्लांट पहुँचे। यहाँ दो स्वदेशी परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें मारुति सुजुकी के e- Vitara को निर्यात के लिए हरी झंडी दिखााई। इसके अलावा हाईब्रिड बैटरी इलेक्ट्रोड बनाने वाले पहले TDS लिथियम-आयन बैटरी प्लांट का भी उद्घाटन किया।

उद्घाटन कार्यक्रम से पहले पीएम मोदी ने एक्स/ट्विटर पर लिखा, “आज का दिन भारत की आत्मनिर्भरता और ग्रीन मोबिलिटी का केंद्र बनने की दिशा में बेहद खास है। हंसलपुर में आयोजित कार्यक्रम में e-VITARA को फ्लैग ऑफ किया जाएगा। यह बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (BEV) पूरी तरह भारत में बना है और इसे 100 से अधिक देशों में निर्यात किया जाएगा। हमारी बैटरी इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए गुजरात के एक संयंत्र में हाइब्रिड बैटरी इलेक्ट्रोड का उत्पादन भी शुरू होगा।”

e-Vitara में दो बैटरी ऑप्शन, सितंबर में लॉन्च के लिए तैयार

CarDekho के मुताबिक, पूरी तरह से भारत में निर्मित मारुति सुजुकी की e-Vitara सितंबर 2025 में लॉन्च के लिए तैयार है। इसकी अनुमानित कीमत 17 से 23 लाख रुपए के बीच तय की गई है। ये इलेक्ट्रिक SUV गुजरात में मैन्युफैक्चर होकर देशभर और विदेशों में भी निर्यात की जाएगी।

e-Vitara को पहली बार साल 2024 में ग्लोबल स्तर पर यूरोप में पेश किया गया था। इसके अलावा भारत मोबिलिटी शो 2025 में भी प्रदर्शित किया गया था। ये इलेक्ट्रिक कार 40PL समर्पित EV प्लेटफॉर्म पर बनाई गई है, जिसमें टोयोटा का भी सहयोग है।

ये इलेक्ट्रिक SUV 49kWh और 61kWh के दो बैटरी ऑप्शन में मिलेगी। बड़ी बैटरी डुअल-मोटर AWD (AllGrip-e) कॉन्फिगरेशन में उपलब्ध होगी। इसके वेरिएंट, फीचर्स और भारत में लॉन्च की सही तारीख के बारे में जानकारी जल्द ही सामने आने की उम्मीद है। लॉन्च होने के बाद इसका मुकाबला महिंद्रा BE6, हुंडई क्रेटा इलेक्ट्रिक, MG ZS EV और अन्य जैसी इलेक्ट्रिक कारों से होगा।

640 एकड़ में फैला मोटर प्लांट, हर साल 7.5 लाख कार का उत्पादन


जिस मारुति सुजुकी के हंसलपुर स्थित मोटर प्लांट में पीएम मोदी ने भारत में निर्मित पहली इलेक्ट्रिक कार को हरी झंडी दिखाई। वह प्लांट 640 एकड़ में फैला हुआ है। प्लांट की उत्पादन क्षमता हर साल करीब 7.5 लाख यूनिट है, जो इस नए e-Vitara का उत्पादन के शुरू होने के बाद और भी बढ़ जाएगी।

मारुति सुजुकी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में 67000 इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रोडक्शन का टार्गेट रखा है। इसका बड़ा हिस्सा निर्यात में जाएगा। इसके अलावा इस दशक के अंत तक कंपनी ने प्रोडक्शन क्षमता को लगभग दोगुना करके 40 लाख कारों तक पहुँचाने की भी योजना का ऐलान किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्लांट साल 2014 में शुरु किया गया। प्लांट में सबसे पहले मारुति सुजुकी की बलेनो कार का उत्पादन हुआ। फिर जनवरी 2018 में नेक्सट जेनरेशन मारुति सुजुकी स्विफ्ट हैचबैक का प्रोडक्शन शुरू किया गया।

बड़े निवेशकों को मुफ्त में जमीन, 300% SGST की प्रतिपूर्ति और 1 करोड़ युवाओं को रोजगार: बिहार की नीतीश सरकार ने किया ‘BIPPP-2025’ का ऐलान, जानें कब हैं आवेदन की अंतिम तिथि

बिहार में औद्योगिक विकास के मद्देनजर और युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर पैदा करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज (26 अगस्त 2025) ‘बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 (BIPPP-2025)’ की घोषणा की। इस पॉलिसी के तहत राज्य में उद्योगों को और निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई रियायत दी जाएँगी।

इस फैसले के तहत बिहार में 40 करोड़ रुपए तक के निवेश पर ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। साथ ही नई इकाइयों को स्वीकृत परियोजना लागत का 300% तक शुद्ध SGST की प्रतिपूर्ति 14 वर्षों तक की जाएगी। इसके अतिरिक्त, 30% तक पूंजीगत सब्सिडी भी प्रदान की जाएगी।

नई नीति के तहत निर्यात प्रोत्साहन की सीमा 14 वर्ष की अवधि के लिए 40 लाख रुपए प्रतिवर्ष की गई है। इसके अलावा कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग, स्टाम्प ड्यूटी एवं भूमि रूपांतरण शुल्क की प्रतिपूर्ति, निजी औद्योगिक पार्कों को सहयोग, पेटेंट पंजीकरण एवं गुणवत्ता प्रमाणन हेतु सहायता देने का भी ऐलान किया गया है।

बिहार में निवेश को बढ़ावा देने के लिए इस नई नीति के तहत ये भी निर्णय लिया गया है कि बड़े निवेशकों जैसे 100 करोड़ से अधिक का निवेश करने वाली एवं 1000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने वाली औद्योगिक इकाइयों को 10 एकड़ तक भूमि निःशुल्क आवंटित की जाएगी।

इसके अलावा 1000 करोड़ से अधिक का निवेश करने वाली औद्योगिक इकाइयों को 25 एकड़ तक भूमि निःशुल्क आवंटित की जाएगी। फॉर्च्यून 500 कंपनियों को 10 एकड़ तक भूमि निःशुल्क आवंटित की जाएगी।

इस योजना के लाभ के लिए निवेशकों के 31 मार्च 2026 से पहले आवेदन करना होगा। सरकार का उद्देश्य है कि उनके इस कदम से 5 वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को राज्य के भीतर रोजगार देना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

‘वनतारा’ की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई SIT, 12 सितंबर तक देनी होगी रिपोर्ट: जानवरों की अवैध खरीद-फरोख्त और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोप

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (25 अगस्त 2025) को रिलायंस फाउंडेशन के स्वामित्व वाले वनतारा ग्रीन जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर के खिलाफ लगे आरोपों की जाँच के लिए एक विशेष जाँच टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह SIT सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस चेलमेश्वर के नेतृत्व में काम करेगी। टीम में तीन अन्य सदस्यों में उत्तराखंड और तेलंगाना हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य जज जस्टिस राघवेंद्र चौहान, मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर हेमंत नगराले, और भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के अधिकारी आनंद गुप्ता शामिल हैं।

क्या है मामला और कोर्ट ने क्या दिया आदेश?

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पंकज मित्थल और प्रसन्ना बी वरले की बेंच ने कुछ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया, जिनमें वनतारा पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जैसे, भारत और विदेश से अवैध तरीके से जानवरों खासकर हाथियों को लाना, जानवरों के साथ बुरा व्यवहार इसके अलावा वित्तीय अनियमितताएँ और मनी लॉन्ड्रिंग।

कोर्ट ने माना है कि याचिकाएँ मुख्यतः समाचार रिपोर्ट्स, सोशल मीडिया पोस्ट्स और NGOs की शिकायतों पर आधारित थीं और उनके पास अभी तक कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं। लेकिन चूँकि आरोप सरकार के कुछ विभागों जैसे सेंट्रल जू अथॉरिटी और CITES (वन्यजीवों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर संधि) से भी जुड़े हैं, इसलिए कोर्ट ने निष्पक्ष जाँच को जरूरी समझा है।

SIT को जिन बिंदुओं की जाँच करनी है, उनमें शामिल है:

1. भारत और विदेश से, खासकर हाथियों की खरीद की प्रक्रिया।

2. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और जू के नियमों का पालन।

3. CITES और अन्य आयात/निर्यात नियमों का पालन।

4. पशुपालन, पशु चिकित्सा, जानवरों की देखभाल के मानदंड, मृत्यु दर और उसके कारण।

5. औद्योगिक क्षेत्र के पास होने और मौसम की स्थिति से जुड़े आरोप।

6. निजी संग्रह/शौक के लिए जानवरों का इस्तेमाल, संरक्षण और जैव विविधता से जुड़े आरोप।

7. पानी और कार्बन क्रेडिट के दुरुपयोग की शिकायतें।

8. वन्यजीवों की तस्करी, जानवरों/उनके अंगों के व्यापार, कानूनों के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतें।

9. वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी शिकायतें।

10. याचिकाओं में दिए गए अन्य सभी मुद्दे।

कोर्ट ने केंद्र सरकार, गुजरात सरकार, पर्यावरण मंत्रालय, सेंट्रल जू अथॉरिटी और CITES प्रबंधन प्राधिकरण को SIT को पूरा सहयोग देने का आदेश दिया है।

SIT को वनतारा सेंटर का भौतिक निरीक्षण भी करना होगा और पूरी जाँच के बाद अपनी रिपोर्ट 12 सितंबर 2025 तक सुप्रीम कोर्ट में जमा करनी होगी। वहीं अगली सुनवाई 15 सितंबर 2025 को होगी।

बता दें कि यह जाँच केवल तथ्यों की जाँच के लिए है, जिससे कोर्ट को सच्चाई पता चले और आगे उचित आदेश दिया जा सके। कोर्ट ने अभी तक लगाए गए आरोपों को सही या गलत नहीं माना है।

3 हजार एकड़ में फैला प्राकृतिक इकोसिस्टम ‘वनतारा’

वनतारा सेंटर की स्थापना मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी ने की थी और यह रिलायंस फाउंडेशन की एक पहल है। इसका उद्देश्य जानवरों को बचाना, उनकी देखभाल करना और पुनर्वास देना है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर और मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी ने 26 फरवरी 2024 को अपने खास प्रोजेक्ट ‘वनतारा (जंगल के सितारे)’ की सार्वजनिक घोषणा की थी। यह प्रोजेक्ट गुजरात के जामनगर में बनाया गया है और इसका उद्देश्य जानवरों का बचाव और पुनर्वास करना है।

वनतारा एक प्राकृतिक इकोसिस्टम है जो करीब 3000 एकड़ में फैला हुआ है। इसमें से 600 एकड़ सिर्फ हाथियों के लिए बनाया गया है। यहाँ पर अब तक 200 से ज्यादा हाथियों को देश के अलग-अलग हिस्सों से लाकर बसाया गया है। इसके अलावा 43 प्रजातियों के 2000 से अधिक जानवर यहाँ रह रहे हैं, जिनमें 300 से ज्यादा तेंदुए, शेर, बाघ और 300 से अधिक शाकाहारी जानवर शामिल हैं।

मीडिया से बातचीत करते हुए अनंत अंबानी ने बताया था कि उन्होंने कोविड महामारी के दौरान जानवरों को बचाने का काम शुरू किया था। उन्हें जानवरों की सेवा करने की प्रेरणा बचपन में उनके माता-पिता से मिली।

इसे बनाने और जानवरों की सेवा को लेकर अनंत ने कहा था कि जानवरों की सेवा करना भगवान की सेवा के बराबर है, क्योंकि हिंदू धर्म में जानवरों को देवताओं से जोड़ा गया है, जैसे माता दुर्गा का वाहन शेर, लक्ष्मी माता का उल्लू, सरस्वती माता का मोर और श्रीकृष्ण का जुड़ाव गाय-बछड़ों से है।

यहाँ पर एक आधुनिक पशु चिकित्सालय भी बनाया गया है, जिसमें MRI और CT स्कैन मशीनें, एंडोस्कोपिक रोबोटिक सर्जरी तकनीक, 6 सर्जरी सेंटर और कृत्रिम अंग लगाने की सुविधाएँ मौजूद हैं।

दिल्ली से ‘मुर्दों की तलाश में’ बिहार गया यूट्यूबर, INDI गठबंधन के लिए खोज रहा ‘मसाला’; पर मोदी-नीतीश के ‘स्तुतिगान’ को होना पड़ा मजबूर

खुद को पत्रकार कहने वाले यूट्यूबर अजीत अंजुम का एजेंडा एकदम क्लियर है। जो लाइन माई-बाप (INDI गठबंधन) खींच दे उसको पकड़कर चलना। बिहार में इस लाइन पर चलते-चलते अजीत अंजुम रोजाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों का बखान करने को भी मजबूर हैं।

बिहार में अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा के चुनाव होने हैं। राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव ‘वोट चोरी’ का कैंपेन चला रहे हैं। इसे देखते हुए अजीत अंजुम भी ‘मुर्दों की तलाश में’ बिहार घूम रहे हैं ताकि अपने ‘माई-बाप’ के प्रोपेगेंडा को हवा दे सके। इसमें उन्हें महत्ती कामयाबी अब तक तो नहीं मिली है, लेकिन बिहार की चकाचक सड़कों को इस चुनावी मौसम में खूब प्रचार मिल रहा है।

इससे पहले अजीत अंजुम बिहार उस समय भी गए थे, जब मतदाता सूची पुनरीक्षण (बिहार SIR) की प्रक्रिया चल रही थी। उस समय जबरन एजेंडा ठूँसने के फेर में वे अपने ऊपर केस करवाकर दिल्ली लौट आए थे। अब उनके ‘माई-बाप’ ने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ शुरू की है तो वे भी बिहार लौट आए हैं। एक-जगह से दूसरी जगह दौड़ रहे हैं ताकि ‘माई-बाप’ के लिए कुछ मसाला का जुगाड़ हो सके।

इसी क्रम में ​एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में अजीत अंजुम ने लिखा, “बिहार में सड़कें बहुत अच्छी बन गई हैं और लगातार बन रही है। लंबा सफर पहले की तुलना काफी आसान हो गया है। एक वक्त था जब हम लोग सोचते थे कि हरियाणा-पंजाब में इतनी अच्छी सड़कें हैं तो बिहार में क्यों नहीं हो सकती। मोदी राज में हाईवे का काफी बेहतर विस्तार हुआ है।”

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा है, “बेगूसराय से पटना जाना अब बहुत आसान हो गया है। सिमरिया का ये नया पुल इस रूट से सफर करने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी उपलब्धि है। पीएम मोदी ने दो दिन पहले इसी पुल का उद्घाटन किया था।”

इसके अलावा भी बिहार की अपनी यात्रा की जानकारी को साझा करने के लिए उन्होंने कई पोस्ट किए हैं जो राज्य में विकास कार्यों की तस्वीर दिखाते हैं। अजीत अंजुम खुद भी बिहार से हैं। उसी बिहार से जहाँ का मुख्यमंत्री हेमा मालिनी की गाल जैसी सड़कें बनवाने की बात करता था, पर सड़क और गड्ढों का अंतर मिट गया था। बिना हिचकोले खाए, कमर तोड़े कोई सफर पूर्ण नहीं होती थी। आज उसी बिहार की सड़कों पर अजीत अंजुम सरपट भाग रहे हैं।

उसी बिहार की सड़कों पर राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव बुलेट दौड़ा रहे हैं, जबकि इनकी पार्टियों के राज्य में बिहार के लोगों ने गड्ढों को ही सड़क मान लिया था। पर अजीत अंजुम के पोस्ट केवल सड़कों के ही बारे में नहीं बताते। ये बिहार की कानून-व्यवस्था के बारे में भी बताते हैं।

अजीत अंजुम ने लालू-राबड़ी का जंगलराज भी देखा है। वे बखूबी जानते हैं कि एक जज पुत्र होने के बावजूद उस दौर में वे बिहार में इतनी सुगमता से सफर नहीं कर सकते थे। इतना ही नहीं हर समय अनहोनी की आशंका भी बनी रहती थी। आज रात में भी बिना किसी आशंका के सफर कर सकते हैं। सड़क किनारे अपनी गाड़ी रोककर सत्तू का आनंद ले सकते हैं। यह बताता है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति में भी व्यापक बदलाव आया है।

नीतीश कुमार के इधर-उधर होने वाले छिटपुट कालखंडों को छोड़ दें तो बिहार के एनडीए सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि ही यही है कि कटु से कटु आलोचक भी इस बात को खारिज नहीं कर पाते कि बिहार में विकास नहीं हुआ है। उन लोगों के लिए तो ये सब कुछ स्वप्न सरीखा है, जिन्होंने लालटेन युग को ही अपनी नियति मान ली थी।

इसलिए अब कोई भी तंज कसते हुए आपसे ‘विकास’ का पता पूछे तो उसे एक बार बिहार की यात्रा पर जाने की सलाह जरूर दीजिएगा।

7 दिन बीत गए, राहुल गाँधी ने चुनाव आयोग को न दिया हलफनामा-न देश से माँगी माफी: बगैर सबूत ही ‘वोट चोरी’ का प्रोपेगेंडा फैला रहा INDI गठबंधन

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और उनकी INDI गठबंधन ने हाल में चुनाव प्रक्रिया और भारतीय चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने ‘वोट चोरी’, ‘जनता को वोट देने से वंचित करना’, और ‘चुनाव आयोग और भाजपा की मिलीभगत’ जैसे नारे और बयान दिए। उन्होंने यहाँ तक कहा, ‘बच्चे तक मुझसे कह रहे हैं – वोट चोर, गद्दी छोड़।’

इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने 17 अगस्त 2025 को राहुल गाँधी से एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर अपने दावों के सबूत पेश करने या फिर पूरे देश से माफी माँगने को कहा था। यह समय सीमा 25 अगस्त 2025 को समाप्त हो गई।

अब तक राहुल गाँधी ने न तो कोई सबूत दिए और न ही माफी माँगी। इसके बाद चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, “राहुल के वोट चोरी के आरोपों को अब अमान्य मानते हुए आगे कोई कार्यवाही की आवश्यकता नहीं है।”

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को सख्त लहजे में कहा था कि या तो वो अपने आरोपों को साबित करने के लिए हलफनामा दें या फिर देश से माफी माँगें। उन्होंने साफ कहा कि अगर सात दिनों में हलफनामा नहीं मिला, तो इसका मतलब है कि ये सारे आरोप बेबुनियाद हैं।

ज्ञानेश कुमार ने यह भी बताया था कि अगर किसी को चुनाव परिणाम पर आपत्ति है, तो वह 45 दिनों के भीतर संबंधित हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर सकता है, लेकिन किसी भी विपक्षी नेता या उम्मीदवार ने उस समय कोई आपत्ति नहीं उठाई।

SIR अभियान और विपक्ष की राजनीति

बता दें कि बिहार में चल रहे विशेष पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision – SIR) के जरिए चुनाव आयोग मतदाता सूची की गड़बड़ियों को सुधार रहा है। इसमें मतदाता, राजनीतिक दल और बूथ लेवल अधिकारी साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

बिहार में कॉन्ग्रेस और राजद की महागठबंधन सरकार इस प्रक्रिया का विरोध कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि यह अभियान फर्जी वोटरों को हटाकर असली वोटरों का अधिकार सुरक्षित करने का काम कर रहा है। इसमें कई विदेशी नागरिकों का भी पता चला है जो आधार कार्ड और अन्य भारतीय दस्तावेजों के सहारे वोटर बने हुए थे।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने हाल ही में आरोप लगाया था कि उनके दल द्वारा की गई रिसर्च में आपराधिक सबूत मिले हैं, जिससे साफ होता है कि भारत में चुनाव आयोग (ECI) लोकतंत्र को नुकसान पहुँचा रहा है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग की कार्रवाई देशभर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर कर रही है।

इसके जवाब में महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) ने राहुल गाँधी से एक हस्ताक्षरित घोषणा-पत्र, शपथपत्र या हलफनामा माँगा, जिसमें वह उन वैध वोटरों के नाम दें जिन्हें सूची से बाहर कर दिया गया हो, और ऐसे लोगों के नाम भी दें जो अपात्र होते हुए भी वोटर लिस्ट में शामिल हैं।

राहुल गाँधी लगातार चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते आ रहे हैं। वे दावा करते हैं कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी हो रही है और इससे जनता का लोकतंत्र से भरोसा उठ रहा है। लेकिन उनके ज्यादातर दावे अब तक झूठे और बेबुनियाद साबित हुए हैं। ऐसा लगता है कि ये एक सोची-समझी रणनीति है, जिससे लोगों को भड़काकर कुछ वोट हासिल किए जा सकें।

SIR  के दौरान विपक्षी दलों के बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) ने भी इस प्रक्रिया पर भरोसा जताया था। इसके बावजूद कॉन्ग्रस और राहुल गाँधी आरोप लगाते रहे, लेकिन कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सके। अब चुनाव आयोग ने साफ किया है कि कॉन्ग्रस की ओर से SIR को लेकर कोई लिखित शिकायत नहीं आई है।

राहुल गाँधी ने यह भी दावा किया कि कई फर्जी वोटर लिस्ट में ‘हाउस नंबर 0’ लिखा है, जो संदिग्ध है। जबकि चुनाव आयोग ने बताया कि यह उन लोगों के लिए किया जाता है जिनके पास स्थायी या स्पष्ट पता नहीं होता, जैसे बेघर, किराएदार, या जिनके मकान का नंबर नहीं है। ये प्रावधान पहले से हैं और कानूनन मान्य हैं।

राहुल गाँधी के आरोप बार-बार चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ दल को बदनाम करने के लिए लगाए जा रहे हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में कोई ठोस सबूत नहीं मिलते। आयोग ने हर बार तथ्यों और रिकॉर्ड के साथ जवाब दिया है, जबकि कॉन्ग्रेस ने ज्यादातर मामलों में औपचारिक शिकायत तक नहीं की। इससे यह स्पष्ट होता है कि ये आरोप ज्यादातर राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं, न कि किसी सच्ची समस्या का समाधान खोजने की कोशिश।