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बच्ची को गोद लेकर उसके साथ बलात्कार कर रहा था बिस्मिल्ला कॉलोनी का 55 वर्षीय पप्पू, यूपी पुलिस ने पॉक्सो के तहत दर्ज किया मामला: बहू ने रंगे हाथों पकड़ा

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में एक सौतेले पिता द्वारा 10 वर्षीय मासूम के साथ बीते दो साल से बलात्कार का मामला सामने आया है। कुछ दिनों पहले आरोपित की बहू ने उसे मासूम बच्ची के साथ गलत हरकत करते देखा था। इसके बाद उसने मामले की शिकायत पुलिस से की थी। हालाँकि, कोई कार्रवाई न होने के बाद भाजपा नेता की शिकायत के बाद पुलिस ने पाक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अलीगढ़ के क्वार्सी थाना क्षेत्र अंतर्गत रहने वाला पप्पू करीब सात साल पहले पीड़िता को एक भट्ठे से उठाकर घर ले आया था। पीड़िता का कहना है कि उसके वास्तविक माता-पिता उसी भट्टे में काम करते थे। आरोपित जब उसे उठाकर अपने घर ले आया था, तब से ही पीड़ित बच्ची उसे पिता बोलती थी। मासूम जब करीब 8 साल की हो गई तब पप्पू की नीयत बदल गई और वह मासूम का यौन शोषण करने लगा।

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि आरोपित उसका सौतेला पिता पप्पू उसके साथ हो रही घटना के बारे में किसी को बताने से मना करता था और बताने पर जान से मारने की धमकी देता था। रिपोर्ट के अनुसार, बीते दिनों आरोपित पप्पू मासूम बच्ची के साथ गलत हरकत कर रहा था। तभी, आरोपित के बेटे की पत्नी वहाँ पहुँच गई और उसने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद उन्होंने मामले की जानकारी आसपास के लोगों को दी।

भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष धर्मवीर सिंह लोधी व उपाध्यक्ष सौरभ चौधरी का कहना है कि नगला पटवारी चौकी इंचार्ज को इस पूरे मामले की जानकारी थी। लेकिन, इसके बाद भी उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया है कि चौकी इंचार्ज ने महिला कांस्टेबल की उपस्थिति के बिना ही बच्ची को चौकी बुलाकर पूछताछ की थी।

धर्मवीर सिंह लोधी ने कहा है कि इसके बाद उन्होंने शुक्रवार (28 अक्टूबर 2023) को सीओ तृतीय श्वेताभ पांडेय से मुलाकात कर आरोपित पर कार्रवाई की माँग की। जिसके बाद उनके आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मुकदमा पीड़िता और उसकी भाभी की सहमति से दर्ज हुआ है। इस मामले पर, इंस्पेक्टर पंकज कुमार मिश्रा का कहना है कि आरोपित पप्पू के खिलाफ पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पीड़िता किशोरी का मेडिकल कराया गया है अब धारा 164 के तहत बयान कराए जाएँगे। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।

2024 में BJP के टिकट पर मंडी से ताल ठोकेंगी कंगना रनौत? कहा – लोगों की सेवा के लिए तैयार हूँ, पिता सुबह-शाम बोलते हैं जय मोदी-जय योगी

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने सिनेमा से सियासत में जाने की इच्छा व्यक्त की है। हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) की रहने वाली कंगना रनौत का कहना है कि वो लोगों की सेवा करना चाहती हैं और इसके लिए उन्हें मौका मिलता है तो वह राजनीति में जाने के लिए भी तैयार हैं। हिमाचल प्रदेश के शिमला में ‘पंचायत आज तक’ कार्यक्रम में पहुँची कंगना रनौत ने कहा कि अगर जनता चाहती है और भाजपा उन्हें उनके गृहनगर मंडी से टिकट देती है तो उन्हें चुनाव लड़ने में कोई आपत्ति नहीं है।

कार्यक्रम में जब कंगना रनौत से राजनीति में शामिल होने के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “जिस तरह के हालात होंगे, सरकार चाहेगी कि मेरी भागीदारी हो, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है।” उन्होंने कहा, “अगर मुझे हिमाचल प्रदेश के लोगों की सेवा करने का मौका मिलता है तो यह निश्चित रूप से मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी। लेकिन मैं चाहती हूँ कि हमारे से अलग और लोग भी राजनीति में आगे आएँ, जो बहुत संघर्ष कर रहे हैं और बहुत काबिल हैं।”

‘आपका परिवार कॉन्ग्रेस को सपोर्ट करता था’ – इसके जवाब में बॉलीवुड की क्वीन ने कहा, “मैं राजनीतिक फैमिली से ताल्लुक रखती हूँ। मेरे पिता जी भी राजनीति से ताल्लुक रखते हैं। हमारा जो भी सिस्टम रहा है, मेरे पिता ने सारी चीजें कॉन्ग्रेस के माध्यम से ही कीं। लेकिन 2014 में जब मोदी जी आए तब अचानक ट्रांसफॉर्मेशन हुआ। मेरे पिता ने पहली बार मुझे मोदी जी के बारे में बताया और 2014 में हम ऑफिशियल कंवर्ट हो गए।”

कंगना ने आगे कहा कि अब उनके पिता सुबह उठते समय ‘जय मोदी जी’ और शाम को ‘जय योगी जी’ ही बोलते हैं। उन्होंने कहा कि वह पूरी तरह कंवर्ट हो गए हैं। कंगना रनौत ने पीएम मोदी को महापुरुष बताते हुए कहा कि यह दुखद है कि वो और राहुल गाँधी दोनों प्रतिस्पर्धी हैं, लेकिन मोदी जी जानते हैं कि उनका कोई विरोधी नहीं है। बता दें कि हिमाचल प्रदेश में 12 नवंबर को विधानसभा चुनाव होंगे और मतगणना 8 दिसंबर को होगी।

झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स, बनावटी दस्तावेज, कपटपूर्ण इरादा… अमित मालवीय ने ‘The Wire’ के खिलाफ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में दर्ज कराई शिकायत

भाजपा की आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने प्रोपेगंडा पोर्टल ‘The Wire’ के विरुद्ध दिल्ली पुलिस में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। ‘द वायर’ ने अमित मालवीय को निशाना बनाते हुए झूठी ख़बरें प्रकाशित की थीं, जिन्हें उसे वापस लेना पड़ा है। अमित मालवीय ने ये शिकायत दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस को भेजी है। जल्द ही इस शिकायत के आधार पर FIR भी दर्ज किया जा सकता है।

इस शिकायत में ‘The Wire’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन, संपादक एमके वेणु और उप-संपादक जाह्नवी सेन का नाम लिखा है। साथ ही IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-420 (धोखाधड़ी), 468 (झूठे दस्तावेजों का इस्तेमाल कर के साजिश), 469 (झूठे दस्तावेजों के सहारे किसी की मानहानि करना), 471 (जानबूझ कर झूठे इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों का इस्तेमाल करना) और 500 (मानहानि) के अलावा 134B (आपराधिक साजिश) और (समान इरादे से सामूहिक अपराध) के तहत मामला दर्ज करने की माँग की गई है।

अमित मालवीय ने खुद को भाजपा की ‘इन्फॉर्मेशन एवं टेक्नोलॉजी सेल’ का राष्ट्रीय संयोजक बताते ‘फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म’ नामक संगठन का नाम भी अपनी शिकायत में लिया है, जो ‘The Wire’ को चलाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने के लिए ठगी और धोखाधड़ी का सहारा लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स और फेक दस्तावेजों के सहारे उनकी मानहानि की गई है।

बता दें कि वामपंथी वेबपोर्टल ने एक रिपोर्ट प्रकाशित किया, जिसमें दावा किया था कि अमित मालवीय इतने शक्तिशाली हैं कि फेसबुक या इंस्टाग्राम पर कोई पोस्ट अच्छा न लगने पर उसे तुरंत हटवा सकते हैं। हालाँक‍ि, ‘Meta’ के कम्युनिकेशंस हेड एंडी स्टोन ने इस पूरी खबर को बनावटी करार दिया था। उन्होंने कहा था कि बनावटी दस्तावेजों के आधार पर ‘The Wire’ ने इस रिपोर्ट को तैयार किया है। एक अज्ञात सूत्र के आधार पर ‘The Wire’ ने दावा किया था कि अमित मालवीय ने सोशल मीडिया से 705 पोस्ट्स हटवाएँ हैं।

हँसते हुए कहा बाय-बाय और खा ली सल्फास की गोलियाँ… वायरल हुआ 3 सहेलियों की आत्महत्या वाला वीडियो, स्कूल प्रिंसिपल ने कहा – पढ़ने में अच्छी थी तीनों

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से तीन सहेलियों का जहर खाने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि तीनों लड़कियाँ अपने हाथ में सल्फास की दर्जनों गोलियाँ लिए हुए हैं और बाय-बाय करती हुई नजर आ रही हैं। यही नहीं, सुसाइड करने से पहले तीनों को मुस्कुराते हुए भी देखा जा सकता है। इनमें से दो की मौत हो गई है और तीसरी की हालत गंभीर बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला सिहोर जिले के आष्टा का है। तीनों लड़कियाँ 12वीं कक्षा की छात्रा थीं। स्कूल के ​प्रिंसिपल ने बताया कि ये तीनों छात्राएँ बहुत होशियार थीं। वे शुक्रवार (28 अक्टूबर, 2022) को स्कूल पहुँची थी, लेकिन यूनिफार्म नहीं पहनकर आने पर गार्ड ने दो छात्राओं को बाहर ही रोक दिया। ऐसे में तीसरी जो स्कूल की ड्रेस पहनकर आई थी, वह भी उनके साथ चली गई। इसके बाद तीनों सीधा बस से इंदौर पहुँची और वहाँ राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में जहर खा लिया।

प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि एक ने अपने दोस्त के मिलने से मना करने और दूसरी ने परिवार से परेशान होकर यह कदम उठाया था। वहीं तीसरी ने इन दोनों को देखकर सुसाइड किया। बताया जा रहा है कि पायल इंदौर अपने दोस्त रोहित से मिलने आई थी। पार्क में पहुँचने के बाद पायल ने रोहित को मिलने के लिए बुलाया, लेकिन वह नहीं आया और उसे घर लौटने के लिए कहा। इस बात को लेकर पायल और रोहित का झगड़ा हो गया। झगड़े से नाराज होकर पायल ने जहर खा लिया। वहीं दूसरी सहेली पूजा अपने परिवार की कलह से परेशान थी।

जब उसने अपनी सहेली को जहर खाता देखा तो उसने भी खा लिया। इसके बाद तीसरी लड़की इनको देखकर डर गई और उसने भी सल्फास की गोलियाँ खा लीं। तीनों में से पायल और पूजा की मौत हो गई है। वहीं आरती जिंदगी की जंग लड़ रही है। आरती ने बताया कि जहर खाते ही उसे उल्टी हुई। उसे डर था कि वह इनके साथ भाग कर आई है, ऐसे में इन दोनों की मौत के बारे में परिजनों को क्या बताएगी। यही सोचकर उसने भी जहर खाया।

आष्टा थाना प्रभारी पुष्पेंद्र राठौर ने बताया कि पुलिस हर एंगल से इस मामले की जाँच कर रही है। साथ ही पुलिस यह पता लगाने में लगी है कि छात्राओं ने इतना बड़ा कदम किस वजह से उठाया।

गुजरात में चोर-चोर के नारों से हुआ अरविंद केजरीवाल का स्वागत, लोगों ने दिखाए काले झंडे भी: 4 नवंबर को CM प्रत्याशी के चेहरे का ऐलान करेगी AAP

गुजरात के नवसारी में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का स्वागत ‘चोर-चोर’ के नारों के साथ हुआ। जनता ने AAP नेताओं के काफिले के सामने ‘मोदी-मोदी’ के नारे भी लगाए। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसके बाद AAP की खूब खिल्ली उड़ रही है। नारे लगाने वालों में कई महिलाएँ भी शामिल थीं। लोगों ने अरविंद केजरीवाल के काफिले को काले झंडे भी दिखाए। ये वीडियो चिखली तालुका में खुदवेल और गोलवड गाँव के बीच का है।

उस समय AAP नेताओं का काफिला वहाँ से गुजर रहा था। वहाँ AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी एक रैली को संबोधित करने पहुँचे थे। सीएम केजरीवाल ने रैली में अपने भाषण के दौरान इस घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि काले झंडे दिखाने वालों को वो अपना भाई मानते हैं और उन्हें विश्वास है कि एक दिन वो उनलोगों का भी दिल जीतते हुए उन्हें अपनी पार्टी में शामिल करेंगे।

दूसरी पार्टियों के समर्थकों से अपील करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वो अपनी-अपनी पार्टी के साथ ही रहें, लेकिन वोट AAP को दें। उन्होंने कहा कि जनता जिसे चाहे देख कर चिल्लाए और जिसे चाहे वोट दें, वो उनके लिए अच्छे स्कूल बनवाएँगे और बीमारों का इलाज करवाएँगे। ये अलग बात है कि दिल्ली में खुद उनकी सरकार घोटालों में फँसी हुई है और छठ महापर्व के बीच यमुना को प्रदूषित छोड़ कर सीएम खुद गुजरात में चुनाव के प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं।

AAP शुक्रवार (4 नवंबर, 2022) को गुजरात में अपने मुख्यमंत्री के चेहरे का ऐलान करने वाली है। पार्टी ने पंजाब की तर्ज पर 6357000360 नंबर पर कॉल, SMS और व्हाट्सएप्प के माध्यम से सुझाव माँगे हैं। 3 नवंबर को शाम 5 बजे तक ये चालू रहेगा। इसी बहाने बाद में केजरीवाल ये दावा करेंगे कि उन्होंने जनता से पूछ कर उम्मीदवार का चयन किया है। गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान भी चुनाव आयोग द्वारा बाकी है।

ज्ञानवापी केस की पैरवी में CM योगी आदित्यनाथ को शामिल करने की तैयारी, 5 मामलों में पावर ऑफ अटॉर्नी सौंपेगा विश्व वैदिक सनातन संघ

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे से संबंधित मामलों की सुनवाई में अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) को भी शामिल करने की तैयारी हो रही है। मुकदमों की पावर ऑफ अटॉर्नी जल्द ही मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी। विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह विसेन ने शनिवार (29 अक्टूबर 2022) को यह जानकारी। अभी तक ये सभी मुकदमे विश्व वैदिक सनातन संघ देख रहा है।

जितेंद्र सिंह विसेन ने बताया, “ज्ञानवापी परिसर से संबंधित लगभग सभी मुकदमे हमारे द्वारा ही फाइल किए गए थे। लेकिन वर्तमान में हम केवल 5 मुकदमों को ही देख रहे हैं। इसमें माँ श्रृंगार गौरी केस, भगवान आदि विश्वेश्वर विराजमान के अलावा तीन अन्य मुकदमे हैं। इन पाँचों मुकदमों की पावर ऑफ अटॉर्नी अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सौंप दी जाएगी। इस संबंध में सभी कानूनी प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी कर ली जाएगी।”

आसान शब्दों में पावर ऑफ अटॉर्नी (POA) का अर्थ एक ऐसी एक कानूनी व्यवस्था से है, जो किसी व्यक्ति को उसकी अनुपस्थिति में उसकी संपत्ति, चिकित्सा मामलों और वित्त प्रबंधन करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति या संगठन को नियुक्त करने की अनुमति देता है। अधिकृत व्यक्ति को एजेंट या पावर ऑफ अटॉर्नी एजेंट कहा जाता है। नियमों और शर्तों के आधार पर अधिकृत एजेंट के पास संपत्ति, चिकित्सा मामलों और वित्त से संबंधित कानूनी निर्णय लेने के लिए व्यापक या सीमित अधिकार हो सकते हैं। यह पावर ऑफ अटॉर्नी एक्ट, 1888 द्वारा शासित होता है।

बता दें कि ज्ञानवापी से संबंधित कई केस लंबित हैं। इनमें चार प्रमुख माँ श्रृंगार गौरी केस, भगवान श्री आदि विश्वेश्वर विराजमान, ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग को लेकर धार्मिक भावनाएँ आहत करने का आरोप और प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग आदिविश्वेश्वर का साल 1991 का केस है। इलाहाबाद ​हाई कोर्ट में ज्ञानवापी के पुरातात्विक सर्वेक्षण की माँग से जुड़े मामले की नियमित सुनवाई चल रही है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में ज्ञानवापी परिसर के पुरातात्विक सर्वेक्षण की माँग का एक मामला नियमित सुनवाई पर चल रहा है। इसके अलावा, श्रृंगार गौरी के केस के दौरान ही मई 2022 में कमीशन कार्रवाई रोकने के लिए पिटीशन फाइल की गई थी, जो डिसमिस कर दी गई थी।

पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ 10000 के पार, पिछले साल के मुकाबले 25% बढ़ गए केस: बोली BJP – AAP दीवाली को करती है बदनाम

मौजूदा मौसम में पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ 10,000 के पार हो गई हैं। उधर नवाँशहर पहुँचे राज्य के कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल कह रहे हैं कि राज्य की AAP सरकार ने किसानों को पराली के प्रबंधन के लिए सब्सिडी पर 1.33 लाख उपकरण मुहैया कराए हैं। जबकि वास्तविकता ये है कि अकेले शुक्रवार (28 अक्टूबर, 2022) को राज्य में पराली जलाने की 2000+ घटनाएँ सामने आई हैं। ये अब तक एक दिन में रिकॉर्ड है।

अगर समान अवधि की ही बात करें तो पिछले साल के मुकाबले इस साल पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 26.5% की वृद्धि दर्ज की गई है। शुक्रवार को 2067 जगह पराली जलाया जाना एक नया रिकॉर्ड है। पराली जलाने की कुल घटनाओं की संख्या अब 10,214 के पार चली गई है। जबकि पिछले वर्ष 15 सितंबर से लेकर 28 अक्टूबर तक इसी अवधि में ऐसी 7503 घटनाएँ सामने आई थीं। शुक्रवार को सबसे ज्यादा मामले संगरूर में सामने आए।

जिले में पराली जलाने की एक दिन में 296 मामले सामने आए। इसके बाद पटियाला का स्थान आता है, जहाँ 274 जगह पराली जलाई गई। तीसरे नंबर पर तरनतारण जिले में 258 जगह से पराली जलाने की घटनाएँ सामने आईं। इसी तरह कपूरथला (137), फ़िरोजपुर (131), बठिंडा (124) और जालंधर (116) भी पीछे नहीं रहा। पठानकोट अकेले ऐसा जिला है, जहाँ से पराली जलाने की कोई भी घटना सामने नहीं आई।

अब तक के कुल आँकड़ों की बात करें तो इस साल सबसे ज्यादा पराली जलाने की घटनाएँ तरनतारण (1996) में सामने आई हैं। इसी तरह अमृतसर में पराली जलाने की 1245, पटियाला में 1059 और संगरूर में 760 मामले सामने आए हैं। खास बात ये भी है कि संगरूर में 760 में से 550 मामले पिछले 3 दिनों में ही सामने आए हैं। अकेले पंजाब के 10 जिले राज्य में पराली जलाने की 83% घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं।

इनमें से 5 जिले मालवा में आते हैं, जबकि 2 दोआब और 3 माँझा में स्थित हैं। हरियाणा में पराली जलाने के मामले में सुधार हुआ है। जहाँ पिछले साल इस तरह की 2252 घटनाएँ सामने आई थीं, इस साल आँकड़ा 24% की गिरावट के साथ 1701 पर है।2021 में दिल्ली में पराली जलाने के एक भी मामले नहीं थे, जबकि इस साल यहाँ भी ऐसी 5 घटनाएँ हुई हैं। मध्य प्रदेश में भी 14% की गिरावट दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश में भी मामले घटे हैं।

भाजपा इसे लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर हमलावर हैं, जो पिछले साल तक पंजाब-हरियाणा को दोष देते फिरते थे और इस साल चुप्पी साध कर दीवाली के पटाखे प्रतिबंधित करने में लगे रहे। दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार प्रदूषण को नियंत्रित करने में नाकाम रही है और यमुना साफ़ करने के नाम पर उसमें ज़हरीला सिलिकॉन डिफॉमर डाल रही है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कहा कि प्रदूषण का कारण पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि है, लेकिन हिन्दू विरोधी AAP दीवाली को बदनाम करती है।

J&K हाईकोर्ट का आदेश- जल्द पूरी करें नदीमर्ग नरसंहार की सुनवाई, 70 साल की महिला से लेकर 2 साल के मासूम तक को मारी थी गोली

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक दशक पहले बंद हो चुके नदीमर्ग नरसंहार केस में जम्मू-कश्मीर पुलिस की पुनरीक्षण याचिका को मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी का मतलब है कि नदीमर्ग नरसंहार केस एक बार फिर से खोला जाएगा। नदीमर्ग नरसंहार मार्च 2003 में पुलवामा जिले के नदीमर्ग गाँव में हुआ था। लश्कर आतंकियों ने 24 कश्मीरी हिन्दुओं की निर्मम हत्या कर दी थी।

शनिवार (29 अक्टूबर 2022) को हुई सुनवाई में जस्टिस विनोद चटर्जी कौल ने निचली अदालत को आदेश देते हुए कहा है कि वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए (कमीशन जारी करके या रिकॉर्ड करके) गवाहों के बयान लेने और उसकी जाँच सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करें।

कोर्ट ने निचली अदालत को यह भी कहा है कि नदीमर्ग नरसंहार मामले की जल्द से जल्द सुनवाई करें ताकि इस मामले को जल्द खत्म किया जा सके।

अगस्त में खुली थी नरसंहार की फाइल

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 26 अगस्त 2022 को न्यायमूर्ति संजय धर ने राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए इस केस को फिर से खोलने का आदेश दिया था। इस याचिका में दिसंबर 2011 के आदेश को वापस लेने की माँग की गई थी। उस समय आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई थी।

नदीमर्ग नरसंहार मामले में स्थानीय जैनपोरा थाने में धारा 302, 450, 395, 307, 120-बी, 326, 427 आरपीसी, 7/27 आर्म्स एक्ट और धारा 30 के तहत दर्ज किया गया था। शुरुआती जाँच के बाद 7 आरोपितों के खिलाफ प्रधान सत्र न्यायालय पुलवामा में चालान पेश किया गया। बाद में केस शोपियाँ के प्रधान सत्र न्यायालय में ट्रांसफर कर दिया गया था।

शोपियाँ की अदालत को अभियोजन पक्ष ने बताया था कि गवाह डर के कारण घाटी छोड़कर जा चुके हैं। वे सुनवाई के दौरान हाजिर नहीं हो सकते। इसके बाद केस बंद कर दिया गया। लेकिन, जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के ताजा आदेश से इस मामले में एक बार फिर न्याय की उम्मीद जगी।

क्या है नदीमर्ग नरसंहार

शोपियाँ जिले में नदीमर्ग (अब पुलवामा में) एक हिंदू बहुल गाँव था, जिसकी कुल आबादी मात्र 54 थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद के पैतृक गाँव से 7 किलोमीटर दूर स्थित इस गाँव में 23 मार्च, 2003 की रात सब तबाह हो गया। जब पूरा देश भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की याद में शहीद दिवस मना रहा था, तब नदीमर्ग में हिन्दुओं का नरसंहार हो रहा था। उस दिन 7 आतंकवादी गाँव में घुसे और सभी हिंदुओं को चिनार के पेड़ के नीचे इकठ्ठा करने लगे। रात के 10 बजकर 30 मिनट पर इन आतंकियों ने 24 हिंदुओं की गोली मार कर हत्या कर दी। गौर करने वाली बात थी कि 23 मार्च को पाकिस्तान का राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है।

मरने वालों में 70 साल की बुजुर्ग महिला से लेकर 2 साल का मासूम बच्चा तक शामिल था। क्रूरता की हद पार करते हुए एक दिव्यांग सहित 11 महिलाओं, 11 पुरुषों और 2 बच्चों पर बेहद नजदीक से गोलियाँ चलाई गई थी। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि पॉइंट ब्लेंक रेंज से हिंदुओं के सिर में गोलियाँ मारी गई थी। आतंकी यही नहीं रुके उन्होंने घरों को लूटा और महिलाओं के गहने उतरवा लिए। न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार ने इस घटना का जिम्मेदार ‘मुस्लिम आतंकवादियों’ को बताया। अमेरिका के स्टेट्स डिपार्टमेंट ने भी इसे धर्म आधारित नरसंहार माना था।

आतंकियों को मदद पड़ोस के मुस्लिम बहुलता वाले गाँवों से मिली थी। उस दौरान जम्मू-कश्मीर पुलिस के इंटेलिजेंस विंग को संभाल रहे कुलदीप खोड़ा भी मानते हैं कि बिना स्थानीय सहायता के नदीमर्ग नरसंहार को अंजाम ही नहीं दिया जा सकता था।

नरसंहार के चश्मदीद बताते है कि आतंकियों ने हिंदुओं को उनके नाम से पुकारकर घरों से बाहर निकाला था। यानी वे पहले से ही इस योजना पर काम कर रहे थे। आतंकियों ने गाँव का दौरा किया हो, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इस प्रकरण में राज्य सरकार की भूमिका भी संदेह वाली बनी रही। उस इलाके की सुरक्षा में लगी पुलिस को हटा लिया गया था। घटना से पहले वहाँ 30 सुरक्षाकर्मी तैनात थे, जिनकी संख्या उस रात घटाकर 5 कर दी गई।

नदीमर्ग नरसंहार के बाद जम्मू-कश्मीर के हिंदुओं के मन में डर बैठ गया कि वे राज्य में सुरक्षित नहीं हैं। इस नरसंहार के करीब एक महीने बाद आतंकी जिया मुस्तफा गिरफ्तार किया गया था। वह पाकिस्तान के रावलकोट का रहने वाला था और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तय्यबा का एरिया कमांडर था। उसने बताया था कि लश्कर के अबू उमैर ने उसे ऐसा करने के लिए कहा था। मुस्तफा के मुताबिक वह उन बैठकों का हिस्सा रहा था, जहाँ भारत के हिंदू मंदिरों पर आतंकी हमले की योजना बनाई गई थी। 

जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके में 24 अक्टूबर 2021 को सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच एक मुठभेड़ में जिया मुस्तफा मारा गया था। कश्मीर की कोट बलवाल जेल में बंद मुस्तफा को 10 दिनों की रिमांड पर लिया गया था। भाटा दूरियान नाम की जगह पर पहचान के लिए उसे ले जाते वक़्त आतंकियों ने जवानों पर फायरिंग कर दी थी। आग से घिर जाने के चलते आतंकी मुस्तफा को निकाला नहीं सके। बाद में उसकी लाश बरामद की गई।

पराग अग्रवाल को लगा कंगना रनौत का श्राप! मस्क के आते ही ट्विटर पर ट्रेंड हुईं: बोलीं- ‘मैं वो भविष्यवाणी करती हूँ, जो जल्दी होने वाली होती है’

दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क (Elon Musk) ने ट्विटर को खरीदते ही कंपनी के भारतीय मूल के सीईओ पराग अग्रवाल (CEO Parag Agrawal) समेत तीन टॉप एग्जीक्यूटिव्स की छुट्टी कर दी। इसको लेकर बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने भी रिएक्ट किया है।

कंगना ने शनिवार (29 अक्टूबर 2022) अपनी इंस्टा स्टोरी पर अप्रत्यक्ष रूप से लिखा,

“मैं हमेशा उन चीजों की भविष्यवाणी करती हूँ, जो जल्द ही होने वाली होती हैं… कुछ लोग मेरी दूरदर्शिता को एक्स-रे कहते हैं, कुछ उसे श्राप कहते हैं और कुछ इसे जादू-टोना कहते हैं। हम कब तक इस तरह एक महिला प्रतिभा को खारिज करते रहेंगे… भविष्य की भविष्यवाणी करना आसान नहीं है। इसके लिए मानव प्रवृत्ति की उल्लेखनीय पहचान और व्याख्या के साथ-साथ ऑबसर्वेशनल स्किल्स की भी जरूरत पड़ती है। सबसे बड़ी बात इसके लिए अपनी पसंद और नापसंद को भी छोड़ना पड़ता है, ताकि हम जिस टॉपिक का अध्ययन करना चाहते हैं, उसका अध्ययन कर सके।”

फोटो साभार: कंगना का इंस्टाग्राम

इसके अलावा कंगना रनौत (Kangana ranaut Twitter) ने अपनी इंस्टा स्टोरी में अपने फैंस द्वारा किए गए कई ट्वीट भी शेयर किए हैं, जो बहुत फनी है। दरअसल, एलन मस्क के ट्विटर पर टेकओवर के बाद कंगना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड कर रही हैं। उनके नाम वाले हैशटैग में कई लोग ट्वीट करके कह रहे हैं कि कंगना का अकॉउंट जल्द रिस्टोर होगा।

इस हैशटैग में सागर नाम के यूजर ने अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की फोटो शेयर करते हुए लिखा, “एलन मस्क के ट्विटर खरीदने के बाद डोनाल्ड ट्रंप और कंगना रनौत।” इस तस्वीर के नीचे यूजर ने लिखा है, “गेस करो हम कहाँ हैं।”

फोटो साभार: @sagarcasm

बॉलीवुड एक्ट्रेस ने लेडी सुपरस्टार कंगना रनौत नाम के ट्विटर हैंडल का पोस्ट भी अपनी इंस्टा स्टोरी में साझा किया है।

फोटो साभार: @ladyranaut

बता दें कि कंगना का ट्विटर अकाउंट पिछले साल मई में बंगाल विधानसभा के नतीजों को लेकर की गई पोस्ट के बाद सस्पेंड कर दिया गया था। ट्विटर ने कहा था कि ये कार्रवाई नियमों के उल्लंघन पर हुई है। वहीं कंगना रनौत ने इस कार्रवाई को पक्षपाती और अनुचित करार दिया था। उन्होंने कहा था कि पश्चिम बंगाल में हिंसा रोकने के लिए लोगों को लगातार आवाज उठानी चाहिए। वहीं, एक्ट्रेस के यू अचानक अकाउंट बंद से फैंस काफी आक्रोशित नजर आए थे। उन्होंने कंगना का सपोर्ट करते हुए ट्विटर की कार्रवाई को गलत ठहराया था। बता दें कि अब नए मालिक के आने के बाद एक्ट्रेस के फैन्स उनके अकाउंट को रीस्टोर करने की भी बात कर रहे हैं।

UCC की राह पर बढ़ा गुजरात: BJP सरकार ने कमेटी के गठन का किया ऐलान, गृहमंत्री बोले- PM मोदी के नेतृत्व में समान नागरिक संहिता पर काम शुरू

गुजरात (Gujarat) में विधानसभा चुनाव से पहले वहाँ की सत्ताधारी भाजपा सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। शनिवार (29 अक्टूबर 2022) को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल (CM Bhupendra Patel) की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को पास किया गया।

इस बात की जानकारी देते हुए प्रदेश के गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने कहा, “पीएम नरेंद्र मोदी और यूनियन एचएम अमित शाह के नेतृत्व में सीएम भूपेंद्र पटेल ने आज कैबिनेट बैठक में राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए कमिटी बनाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।”

इस कमिटी की अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर जज करेंगे। बता दें कि इससे पहले उत्तराखंड में भी भाजपा की सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले UCC लागू करने का वादा किया था और सत्ता में वापसी करते ही इस साल मार्च में एक कमिटी का गठन किया था।

बता दें कि भाजपा के घोषणा पत्र में राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370 की समाप्ति और देश में समान नागरिक संहिता को लागू करना प्रमुख मुद्दा है। इनमें से दो वादे को भाजपा पूरा कर चुकी है और तीसरा एवं फिलहाल का अंतिम प्रमुख मुद्दा UCC को लागू करना भाजपा के लिए अभी बाकी है।

क्या है समान नागरिक संहिता

समान नागरिक संहिता एक ऐसा कानून है, जो देश के हर समुदाय, चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख हो या ईसाई, सब पर समान रूप से लागू होता है। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, जाति का हो या पंथ का हो, सबके लिए सिविल कानून एक ही होगा। वर्तमान में ऐसा नहीं है।

अंग्रेजों ने आपराधिक और राजस्व से जुड़े कानूनों को भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860, भारतीय साक्ष्य अधिनियम (IEA) 1872, भारतीय अनुबंध अधिनियम (ICA) 1872, विशिष्ट राहत अधिनियम 1877 आदि के माध्यम से सारे समुदायों पर लागू किया, लेकिन शादी-विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति, गोद लेने आदि से जुड़े मसलों को धार्मिक समूहों के लिए उनकी मान्यताओं के आधार पर छोड़ दिया।

आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने हिंदुओं के पर्सनल लॉ को खत्म कर दिया, लेकिन मुस्लिमों के कानून को ज्यों का त्यों बनाए रखा। हिंदुओं की धार्मिक प्रथाओं के तहत जारी कानूनों को निरस्त कर हिंदू कोड बिल के जरिए हिंदू विवाह अधिनियम 1955, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956, हिंदू नाबालिग एवं अभिभावक अधिनियम 1956, हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम 1956 लागू कर दिया गया। ये कानून हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख आदि पर समान रूप से लागू होते हैं।

मुस्लिमों का कानून पर्सनल कानून (शरिया), 1937 के तहत संचालित होता है। इसमें मुस्लिमों के निकाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, संपत्ति का अधिकार, बच्चा गोद लेना आदि आता है, जो इस्लामी शरिया कानून के तहत संचालित होते हैं। अगर समान नागरिक संहिता लागू होता है तो मुस्लिमों के निम्नलिखित कानून बदल जाएँगे।