Homeव्हाट दी फ*महसूस नहीं हो रही पहले जैसी मर्दाना ताकत... TMC नेता ने सील करवाई बिरयानी...

महसूस नहीं हो रही पहले जैसी मर्दाना ताकत… TMC नेता ने सील करवाई बिरयानी की दुकानें, कहा – इसे खाने से घट रही लोगों की सेक्स पॉवर

कूचबिहार नगरपालिका अध्यक्ष घोष ने जिन दो दुकानों को सील करवाया है, उनके मालिकों ने इस कार्रवाई का विरोध नहीं किया है। साथ ही लोगों की 'मर्दाना कमजोरी' को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी इन दुकानदारों ने कोई सफाई नहीं दी है। 

भाजपा लगातार आरोप लगा रही है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व में चल रही सरकार मनमाने ढंग से काम कर रही है। वहाँ, कानून व्यवस्था से लेकर बाकी सारी व्यवस्थाएँ अव्यवस्था में बदल चुकी हैं। हाल ही में तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता और कूचबिहार नगरपालिका अध्यक्ष रवींद्र नाथ घोष का नया कारनामा सामने आया है। दरअसल, रवींद्र नाथ घोष ने बिरयानी की दो दुकानों को सील करवा दिया है। उन्होंने इन दुकानों को बंद करवाने के पीछे तर्क दिया है कि बिरयानी खाने से लोगों की मर्दाना ताकत कमजोर हो रही थी। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ममता बनर्जी सरकार में मंत्री रहे रवींद्र नाथ घोष ने इन दुकानों को सील करवाते हुए कहा है कि बीते कई दिनों से ऐसी शिकायतें मिल रहीं थीं कि इन दुकानों की बिरयानी खाने से लोगों की सेक्स ड्राइव में कमी आई है। उन्होंने यह भी कहा कि, लोग आरोप लगा रहे हैं कि बिरयानी बनाने में उपयोग किए जाने वाली सामग्री और मसालों के कारण वह पहले जैसी मर्दाना ताकत महसूस नहीं कर पा रहे हैं।

तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता रवींद्र नाथ घोष ने कहा है कि इन तमाम शिकायतों के बाद वह यहाँ आए हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के लोग यहाँ बिरयानी बेच रहे थे। उन्होंने दावा किया कि ये दुकानें बिना लाइसेंस के ही चल रहीं थीं, इसलिए उन्हें बंद करवाया गया है।

दुकानदारों ने नहीं दी सफाई

रिपोर्ट्स के अनुसार, कूचबिहार नगरपालिका अध्यक्ष घोष ने जिन दो दुकानों को सील करवाया है, उनके मालिकों ने इस कार्रवाई का विरोध नहीं किया है। साथ ही लोगों की ‘मर्दाना कमजोरी’ को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी इन दुकानदारों ने कोई सफाई नहीं दी है।  हालाँकि, अब तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि बिरयानी खाने या उसमें पड़ने वाले मसालों से किसी प्रकार की मर्दाना कमजोरी हो रही थी या नहीं। साथ ही, दुकानों के मसालों की भी जाँच नहीं की गई है। 

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।

हैशटैग लगाओ, दुनिया बदलो… कितना आसान है न? क्या सोशल मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है?

लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
- विज्ञापन -