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51 बीघा की पहाड़ी, 369 फीट की ऊँचाई: 10 साल में 50 हजार लोगों ने मिलकर बनाई महादेव की सबसे ऊँची मूर्ति, 20 किमी दूर से भी नजर आएगी

दुनिया की सबसे ऊँची शिव प्रतिमा बनकर तैयार हो चुकी है। ये मूर्ति राजस्थान के राजसमंद जिले के नाथद्वारा में बनी है। शिव प्रतिमा की ऊँचाई 369 फीट है। शनिवार (29 अक्टूबर 2022) को मोरारी बापू की रामकथा के साथ इस प्रतिमा का अनावरण कार्यक्रम शुरू होगा। अनावरण कार्यक्रम 6 नवंबर तक चलेगा। इस प्रतिमा को विश्वास स्वरूपम (स्टैच्यू ऑफ बिलीफ) नाम दिया गया है। खास बात यह है कि इसे 20 किलोमीटर दूर से भी देखा जा सकता है।

यह शिव प्रतिमा राजसमंद जिले के नाथद्वारा कस्बे में गणेश टेकरी नामक 51 बीघा की पहाड़ी पर बनी है। जिस परिसर में इस प्रतिमा का निर्माण किया गया है उसे तद पदम् उपवन नाम दिया गया है। प्रतिमा में भगवान भोलेनाथ को ध्यान एवं अल्हण मुद्रा में देखा जा सकता है। 369 फीट ऊँची इस प्रतिमा को दुनिया की 5 सबसे ऊँची प्रतिमा में भी शामिल किया गया है। इसकी ऊँचाई इतनी अधिक है कि कई किलोमीटर दूर से भी इसे देखा जा सकता है। यही नहीं, ‘विश्वास स्वरूपम’ नामक यह प्रतिमा रात में भी दिखाई दे इसलिए यहाँ विशेष लाइटिंग की व्यवस्था भी की गई है।

टाट पदम संस्थान द्वारा निर्मित दुनिया की सबसे ऊँची शिव प्रतिमा के निर्माण में 10 साल का लंबा वक्त लगा है। इस पूरी प्रतिमा के निर्माण में 50 हजार से अधिक लोगों ने काम किया है। इस प्रतिमा को बनवाने का जब प्लान तैयार किया गया था तब इसकी ऊँचाई 251 फीट तय की गई थी। हालाँकि, निर्माण के दौरान इसकी ऊँचाई 100 फीट अधिक यानी 351 फीट हो गई। साथ ही, जब भगवान शिव की जटा में माँ गङ्गा की जलधारा जोड़ने का प्लान बनाया गया तो इसकी ऊँचाई में 18 फीट की और बढ़ोतरी हो गई। इस प्रकार यह प्रतिमा 369 फीट ऊँची हो गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2012 में जब इस प्रतिमा का निर्माण कार्य शुरु हुआ था तब से सिर्फ कोविड-19 के कारण लगाए गए लॉकडाउन में ही इसका काम रोका गया था। लेकिन, इसके बाद कारीगर काम में वापस लौटते और फिर काम शुरू करते। प्रतिमा बनाने का काम दिन के साथ-साथ रात में भी चलता रहता था।

इस प्रतिमा में लिफ्ट, सीढ़ियाँ, हॉल आदि का निर्माण भी कराया गया है। निर्माण कै दौरान 3000 टन स्टील और लोहा, जबकि करीब 2.5 लाख क्यूबिक टन कंक्रीट और रेत का इस्तेमाल हुआ है। इसका निर्माण कुछ ऐसी डिजाइन से किया गया है कि 250 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार वाली हवाएँ भी इस प्रतिमा के आगे बेअसर साबित होंगीं। प्रतिमा के डिजाइन का विंड टनल टेस्ट ऑस्ट्रेलिया में किया गया है।

इस प्रतिमा के अलग-अलग हिस्सों के दर्शन करने के लिए 4 लिफ्ट और 3 सीढियाँ हैं। दर्शन करने वाले लोगों को 20 फीट से लेकर 351 फीट तक के अलग-अलग हिस्सों का दर्शन कराया जाएगा। प्रतिमा में 270 से 280 फीट की ऊँचाई पर जाने के लिए एक छोटा सा ब्रिज बनाया गया है। यह ब्रिज पत्थर या कंक्रीट का नहीं, बल्कि काँच का है।

मदरसों में न छात्रा सुरक्षित और न टीचर: MP में बच्ची से अश्लील हरकत करने वाला मौलाना गिरफ्तार, UP में शिक्षिका से गैंगरेप करने पर राशिद, हसन, मुजाहिद पर केस दर्ज

मदरसा में मासूम बच्ची के साथ गलत काम करने और एक शिक्षिका के साथ गैंगरेप करने का मामला सामने आया है। पहला मामला मध्य प्रदेश के खंडवा का है, जहाँ 6 साल की बच्ची के साथ गलत हरकत करने वाले मौलाना अब्दुल समद को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के बदायूँ का है। यहाँ की एक शिक्षिका ने अपने ही मदरसा के प्रबंधक राशिद अली, नजरुल हसन और मुजाहिद उर्फ गुड्डू के खिलाफ गैंगरेप का आरोप लगाया है। ​पुलिस ने तीनों के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज कर लिया है।

6 साल की बच्ची से अश्लील हरकत

रिपोर्ट्स के मुताबिक, खंडवा के खानशाहवली क्षेत्र में जकरिया मस्जिद में मौलाना अब्दुल समद ने 6 साल की बच्ची के साथ गलत हरकत की। जब उसने घर जाकर अपने परिजनों को यह बात बताई, तो उन्होंने मौलाना के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में पीड़िता के परिजन ने बताया कि मदरसे में बहुत सारे छोटे बच्चे पढ़ने जाते हैं। उनकी 6 साल की बच्ची भी मदरसे में पढ़ने जाती थी। इस दौरान मौलाना अब्दुल समद ने उसके साथ छेड़छाड़ की। जब बच्ची ने घर आकर इस घटना के बारे में उन्हें बताया तो उनके होश उड़ गए। इसके बाद वह और कुछ स्थानीय लोग थाने पहुँचे और मौलाना के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपित को तुरंत गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

नशीला पदार्थ देकर मदरसा शिक्षिका से गैंगरेप

वहीं, बदायूँ की घटना 26 अप्रैल 2020 की है। उस वक्त लॉकडाउन लगा हुआ था। अलापुर इलाके के ककराला स्थित मदरसा की शिक्षिका ने वहाँ के प्रबंधक समेत तीन लोगों के खिलाफ गैंगरेप आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि कोल्ड ड्रिंग में नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ गलत काम किया। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर मदरसा के प्रबंधक राशिद अली निवासी ककराला, नजरुल हसन और मुजाहिद उर्फ गुड्डू निवासी उरौलिया थाना अलापुर के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज कर लिया है।

आरोप है कि पुलिस ने इस मामले पर ध्यान नहीं दिया था, क्योंकि 2 साल बाद इस मामले में शिकायत की थी। इसको लेकर पीड़िता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि वह ककराला के एक मदरसा में वर्ष 2017 से पढ़ा रही थी। मदरसा प्रबंधक उससे आए दिन अश्लील बातें करता था।

लॉकडाउन के दौरान 16 अप्रैल 2020 को प्रबंधक ने शिक्षिका को फोन करके कहा कि कुछ बच्चे पढ़ने के लिए मदरसे में आए हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए आ जाओ। तुम्हें पूरे महीने का वेतन दिया जाएगा। जिसके बाद वह अपने भाई के साथ मदरसा पहुँची। वहाँ पर प्रबंधक समेत नजरुल हसन और मुजाहिद उर्फ गुड्डू मौजूद थे।

जब शिक्षिका ने पूछा, “बच्चे किधर हैं तो राशिद अली ने कहा कि आते होंगे। इसके बाद उसने मेरे भाई को घर भेज दिया। कहा कि दो घंटे बाद वह खुद उसकी बहन को घर छोड़ देगा।” इसके बाद प्रबंधक और उसके साथियों ने कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ गैंगरेप किया। होश में आने पर जब शिक्षिका ने इसका विरोध किया तो उन्होंने उसे और उसके परिवार वालों को जान से मारने की धमकी दी।

‘पिछले 5 वर्षों में यूपी पुलिस में एक भी भर्ती नहीं’: हैशटैग चला कर राम मंदिर पर भी साधा गया निशाना, आँकड़ों के साथ UP पुलिस ने बता दी सच्चाई

सोशल मीडिया पर यूपी पुलिस में भारतियों को लेकर झूठी खबरें शेयर की जा रही हैं। अब खुद उत्तर प्रदेश पुलिस ने सफाई देते हुए आँकड़ों के साथ इसका खंडन किया है। दरअसल, इन ख़बरों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधते हुए कहा जा रहा है कि पिछले 5 साल से यूपी पुलिस में कोई भर्ती ही नहीं हुई है, कोई वैकेंसी ही नहीं निकली है। सोशल मीडिया पर ये दावे किए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने इन दावों के साथ चलाए जा रहे हैशटैग ‘यूपी पुलिस वैकेंसी’ को लेकर कहा कि सुनियोजित तरीके से ऐसा किया जा रहा है। इन हैंडलों में से कोई पूछ रहा है कि यूपी पुलिस मर भर्ती कब होगी, तो कोई मीम्स शेयर कर के निशाना साध रहा है। साथ ही लिखा जा रहा है कि 2018 में भर्तियाँ हुई थीं, अब 2023 आने जा रहा है। एक ने लिखा, “भाषण नहीं, रोजगार चाहिए”। एक अन्य ने दावा किया कि यूपी पुलिस में नौकरी के इंतजार में युवा ओवरएज हो रहे हैं। देखें कुछ ट्वीट्स:

इतना ही नहीं, यूपी पुलिस में भर्तियों की बात करते हुए इनमें से कई हैंडल्स ने अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर पर भी निशाना साधा। ज्ञात हो कि ये मंदिर जनता के चंदे से बन रहा है, इसमें सरकारी रुपया नहीं लग रहा। यूपी पुलिस ने इन दावों को भ्रामक बताते हुए आँकड़े गिनाए हैं। यूपी पुलिस ने बताया कि पिछले 5 वर्षों में कुल 1,53,728 भर्तियाँ की गई हैं, जिनमें 22,000 से भी अधिक महिलाएँ पुलिसकर्मी बनी हैं।

इसी तरह, यूपी पुलिस ने बताया कि विभिन्न संवर्गों के 18,332 नए पदों का भी सृजन किया गया है। उत्तर प्रदेश की पुलिस ने ये भी जानकारी दी कि फ़िलहाल विभाग में 45,689 रिक्तियाँ हैं, जिन पर भर्ती की प्रक्रिया जल्द ही पूरी कर ली जाएगी। याद दिला दें कि फरवरी 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद बताया था कि बीते 5 वर्षों में कानून का राज स्थापित करने के लिए यूपी पुलिस में लगभग 1.5 लाख भर्तियाँ हुई हैं, जबकि इससे पहले के 15 सालों में सवा लाख से भी कम भर्तियाँ हुई थीं।

गुजरात में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी: उत्तराखंड की तर्ज पर हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमिटी का हो सकता है ऐलान

गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले वहाँ की सत्ताधारी भाजपा सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू कर सकती है। इसको लेकर राज्य सरकार ने कैबिनेट की बैठक बुलाई है, जिसमें कमिटी के गठन को लेकर मंथन होगा।

इस कमिटी की अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर जज करेंगे। इसमें कितने सदस्य होंगे, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। आज शनिवार दोपहर 3 बजे राज्य के गृहमंत्री हर्ष सांघवी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसके बारे में विस्तार से जानकारी दे सकते हैं।

माना जा रहा है कि मंगलवार या बुधवार (1 या 2 नवंबर 2022) को चुनाव आयोग गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। ऐसे में अगर गुजरात UCC लागू करने की घोषणा करता है तो वह इसे लागू करने वाला देश का पहला राज्य हो जाएगा। बता दें कि उत्तराखंड में भी UCC लागू करने के लिए इस साल मार्च में कमिटी का गठन किया गया था।

बता दें कि भाजपा के घोषणा पत्र में राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370 की समाप्ति और देश में समान नागरिक संहिता को लागू करना प्रमुख मुद्दा है। इनमें से दो वादे को भाजपा पूरा कर चुकी है और तीसरा एवं फिलहाल का अंतिम प्रमुख मुद्दा UCC को लागू करना भाजपा के लिए अभी बाकी है।

क्या है समान नागरिक संहिता

समान नागरिक संहिता एक ऐसा कानून है, जो देश के हर समुदाय पर समान रूप से लागू होता है। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, जाति का हो या पंथ का हो, सबके लिए एक ही कानून होगा। अंग्रेजों ने आपराधिक और राजस्व से जुड़े कानूनों को भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860, भारतीय साक्ष्य अधिनियम (IEA) 1872, भारतीय अनुबंध अधिनियम (ICA) 1872, विशिष्ट राहत अधिनियम 1877 आदि के माध्यम से सारे समुदायों पर लागू किया, लेकिन शादी-विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति, गोद लेने आदि से जुड़े मसलों को धार्मिक समूहों के लिए उनकी मान्यताओं के आधार पर छोड़ दिया।

आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने हिंदुओं के पर्सनल लॉ को खत्म कर दिया, लेकिन मुस्लिमों के कानून को ज्यों का त्यों बनाए रखा। हिंदुओं की धार्मिक प्रथाओं के तहत जारी कानूनों को निरस्त कर हिंदू कोड बिल के जरिए हिंदू विवाह अधिनियम 1955, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956, हिंदू नाबालिग एवं अभिभावक अधिनियम 1956, हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम 1956 लागू कर दिया गया। ये कानून हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख आदि पर समान रूप से लागू होते हैं।

मुस्लिमों का कानून पर्सनल कानून (शरिया), 1937 के तहत संचालित होता है। इसमें मुस्लिमों के निकाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, संपत्ति का अधिकार, बच्चा गोद लेना आदि आता है, जो इस्लामी शरिया कानून के तहत संचालित होते हैं। अगर समान नागरिक संहिता लागू होता है तो मुस्लिमों के निम्नलिखित कानून बदल जाएँगे।

UCC पर क्या कहता है संविधान

26 जनवरी 1950 को लागू किए गए संविधान के भाग 4 में अनुच्छेद 36 से लेकर 51 तक राज्य के नीति निदेशक तत्वों का वर्णन किया गया है। ये निदेशक तत्व, मूल अधिकारों की मूल आत्मा कहे जाते हैं। अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता को अनिवार्य बताया गया है। अनुच्छेद 44 में कहा गया है, “भारत पूरे देश में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता को लागू करने का प्रयास करेगा।”

यहाँ बताना आवश्यक है कि संविधान के अनुच्छेद 37 में अनुच्छेद 44 में जैसे नीति निदेशक तत्व कानून की अदालत में अप्रवर्तनीय है, फिर भी देश के शासन में मौलिक है और कानून बनाकर इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य (भारत) का कर्तव्य है।

समान नागरिकता पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने देश में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता पर हमेशा बल दिया है। मुस्लिम महिला शाह बानो के तीन तलाक उनका भरण-पोषण के लिए खर्चे के लिए दायर याचिका पर फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, “दुख की बात है कि हमारे संविधान का अनुच्छेद 44 एक मृत पत्र बना हुआ है। एक समान नागरिक संहिता परस्पर विरोधी कानूनों के प्रति असमानता वाली निष्ठा को हटाकर राष्ट्रीय एकीकरण के उद्देश्य को पूरा करने में मदद करेगी।”

द्विविवाह में प्रसिद्ध केस सरला मुद्गल के फैसले में भी सुप्रीम कोर्ट ने समान नागरिक संहिता नहीं लाने के लिए देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार के रवैये पर निराशा व्यक्त की था। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने साल 1954 में संसद में हिंदू कोड बिल लाया था, जिसके तहत हिंदू (बौद्ध, सिख, जैन आदि) के सिविल कानूनों को निर्धारित किया गया था।

जुलाई 2021 मे दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने हिन्दू मैरिज ऐक्ट 1955 से जुड़ी सुनवाई के दौरान देश में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता पर बल देते हुए केंद्र सरकार से इसके विषय में आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा था। कोर्ट ने कहा था कि UCC के कारण समाज में झगड़ों और विरोधाभासों में कमी आएगी, जो अलग-अलग पर्सनल लॉ के कारण उत्पन्न होते हैं।

मायरा उर्फ ​​वैष्णवी विलास शिरशिकर और दूसरे धर्म में शादी से जुड़ी 16 अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 नवंबर 2021 को सरकार से यूनिफॉर्म सिविल कोड के मामले में संविधान के अनुच्छेद 44 को लागू करने के लिए एक पैनल का गठन करने को कहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था समान नागरिक संहिता काफी समय से लंबित है और इसे स्वैच्छिक नहीं बनाया जा सकता है।

कोर्ट ने कहा था, “इस मामले पर अनावश्यक रियायतें देकर कोई भी समुदाय बिल्ली के गले की घंटी को बजाने की हिम्मत नहीं करेगा। यह देश की जरूरत है और यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वो नागरिकों के लिए यूसीसी को लागू करे और उसके पास इसके लिए विधायी क्षमता है।”

हिन्दू होने के कारण ‘द गार्जियन’ को खटके ऋषि सुनक, गोमांस न खाने और शराब से दूर रहने को बताया ‘सवर्णों वाली सोच’: लिखा – गाँधीवादी नहीं रहा भारत

यूनाइटेड किंगडम (UK) को ऋषि सुनक के रूप में नया प्रधानमंत्री मिला है। वहाँ के मीडिया संस्थान ‘द गार्जियन’ उन्हें सिर्फ इसीलिए निशाना बना रहा है, क्योंकि वो हिन्दू हैं और भारतीय मूल के हैं। यही अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान भारत में अल्पसंख्यकों (मुस्लिमों, जिनकी जनसंख्या ब्रिटेन की कुल जनसंख्या का 3 गुना है) की तथाकथित प्रताड़ना का रोना रोते हैं, अपने ही देश में एक ऐसे अल्पसंख्यक समुदाय के नेता पर निशाना साध रहे हैं जिनकी जनसंख्या 2% से भी कम है।

खास बात यह है कि इस लेख को पंकज मिश्रा नामक उपन्यासकार ने लिखा है। उनका दावा है कि ऋषि सुनक ‘कंजर्वेटिव पार्टी’ की विविधता वाली दृष्टि को ध्वस्त कर रहे हैं। लेखक का ये नहीं मानना है कि यूके को एक अल्पसंख्यक प्रधानमंत्री मिलना ऐतिहासिक क्षण है, बल्कि उनका कहना है कि भारत से लेकर ब्रिटेन तक हुए हो-हंगामे के कारण ऐसा दिखाया जा रहा है। पंकज मिश्रा ने ‘हिन्दू सुप्रेमासिस्ट्स’ (राष्ट्रवादी और भाजपा समर्थकों के लिए वामपंथियों/इस्लामवादियों द्वारा प्रयोग किया जाने वाला शब्द) का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लिए ऋषि सुनक ‘देशी ब्रो’ हैं।

‘द गार्जियन’ में प्रकाशित इस लेख में कहा गया है कि ये हिन्दू ऐसा सोचते हैं कि ऋषि सुनक भारत के गुप्त एजेंट हैं, जो दुनिया भर भारत के कब्जे का एक हिस्सा हैं। ऋषि सुनक गोमांस और शराब से दूर रहते हैं, जिसे पंकज मिश्रा ने अपर कास्ट टैबू’ बताया है। ध्यान दीजिए, यहाँ हिन्दू न कह कर सवर्णों को गाली दी गई है। साथ ही ऋषि सुनक भगवान गणेश की मूर्ति अपने साथ रखते हैं, इसे लेकर भी उनकी आलोचना की गई है।

इसमें ऋषि सुनक के पहनावे पर भी निशाना साधा गया है और कहा गया है कि उन्होंने काफी सावधानी से अपनी छवि बनाई है। ‘द गार्जियन’ लिखता है कि ऋषि सुनक सूट-बूट में रहते हैं, इसीलिए वो एक धार्मिक हिन्दू नहीं लगते, जैसा कि महात्मा गाँधी अपने पहनावे से लगते थे। ये भी इशारा किया गया है कि कैसे वो अपने अरबपति ससुर नारायणमूर्ति (इंफोसिस के संस्थापक) की एक निवेश कंपनी में निदेशक रह चुके हैं।

इसमें ये बिलकुल नहीं माना गया है कि ऋषि सुनक का प्रधानमंत्री बनना अल्पसंख्यकों की विजय है। उन्होंने आरोप लगाया कि नया भारत गाँधीवादी मूल्यों को नीचा दिखाते हुए सत्ता और धन की तरफ भाग रहा है। जानबूझ कर ये लेख लिखवाने के लिए एक भारतीय को चुना गया, ताकि विवाद न हो। द गार्जियन’ लेस्टर और बर्मिंघम में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में भी मुस्लिम आरोपितों को बचाते हुए हिन्दुओं को बदनाम कर चुका है। कई देशों में हिन्दू अहम मुकाम हासिल कर सत्ता में हस्तक्षेप करने की ताकत रखते हैं, इससे भी लेखक को दिक्कत है।

26 साल के जावेद के पास ही रहेगी 16 साल की बीवी: हाई कोर्ट का आदेश, कहा- 15 साल की मुस्लिम लड़की का निकाह जायज

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि 15 साल की मुस्लिम लड़की का निकाह जायज है। कोर्ट ने 26 साल के जावेद को 16 साल की बीवी के साथ रहने की इजाजत भी दी है। हाई कोर्ट ने शुक्रवार (28 अक्टूबर 2022) को जावेद की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।

जावेद ने याचिका दायर कर 16 वर्षीय बीवी को साथ रखने की अनुमति माँगी थी। उसने याचिका में कहा था कि उसकी पत्नी को हरियाणा के पंचकूला स्थित एक बाल गृह में रखा गया है। शादी के समय उसकी पत्नी की उम्र 16 साल से अधिक थी। यह शादी दोनों की मर्जी और बिना किसी दबाव के हुई थी। वे दोनों मुस्लिम हैं और उन्होंने 27 जुलाई को मनी माजरा की एक मस्जिद में उनका निकाह हुआ था।

लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम होने का हवाला देते हुए उसके परिजनों ने इस निकाह पर आपत्ति जताई थी। परिजनों का कहना था कि लड़की ने अपनी मर्जी से निकाह की है। इसके बाद पंचकूला के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने लड़की को चिल्ड्रेन होम भेजने का आदेश दिया था। जावेद ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी।

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि लड़की ने अपनी मर्जी से निकाह की है। साथ ही कहा कि इस्लामी कानून के हिसाब से यह निकाह वैध है। जस्टिस विकास बहल की एकल बेंच ने आवश्यक दस्तावेजों, कानूनी अधिकारियों और सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दिए गए लड़की के बयान को देखने के बाद लड़की को चिल्ड्रेन होम से रिहा करने और उसकी कस्टडी जावेद को सौंपने का आदेश दिया।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के अंतर्गत लड़की की यौन परिपक्वता अथवा अपनी इच्छा से शादी की आयु 15 साल की तय की गई है। ऐसे में बाल विवाह कानून के तहत ऐसी शादी पर रोक नहीं लगाई जा सकती। 16 वर्षीय मुस्लिम लड़की ने अपनी इच्छा से शादी की है तो इसे गैरकानूनी नहीं ठहराया जा सकता।

‘बिन शादी के माँ बनोगी तो भी दिक्कत नहीं’: जया बच्चन ने रिलेशनशिप पर नातिन को दिया ज्ञान, कहा- सिर्फ प्यार नहीं, शारीरिक संबंध जरूरी

बॉलीवुड अभिनेत्री जया बच्चन ने अपनी नातिन नव्या के पॉडकॉस्ट ‘द हेल नव्या’ पर बात करते हुए हाल में पहले के समय में रिलेनशिप और अब के टाइम के रिलेशनशिप पर बात की। उन्होंने कहा कि किसी भी रिश्ते में शारीरिक आकर्षण बहुत ज्यादा जरूरी होता है। रिश्ता सिर्फ प्यार, साफ हवा और अडजस्टमेंट पर नहीं चलता। उन्होंने इस पॉडकास्ट में 18 मिनट के बाद वाले स्लॉट में अपनी यह बात रखी। उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें इस बात से कोई दिक्कत नहीं अगर नव्या नवेली नंदा बिना शादी के बच्चा करना चाहें।

जया बच्चन कहती हैं, “लोगों को ये मुझसे सुनना बहुत आपत्तिजनक लगेगा लेकिन फिजिकल अट्रैक्शन और कंपैटिबिलिटी बहुत ज्यादा जरूरी होती है। हमारे समय में हम एक्सपेरिमेंट नहीं कर सकते थे। लेकिन आज की पीढ़ी ये सब करती है और उन्हें क्यों नहीं करना चाहिए? इसी से रिश्ते लंबे चलते हैं। अगर शारीरिक संबंध नहीं है तो रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चलने वाला। आप प्यार, ताजी हवा और अडजस्टमेंट के भरोसे रिश्ता नहीं निभा सकते। मुझे लगता है कि ये बहुत जरूरी है।”

जया बच्चन ने ये भी कहा कि उनकी पीढ़ी ऐसा नहीं कर सकती थी लेकिन अब की युवा पीढ़ी, श्वेता की पीढ़ी, नव्या की पीढ़ी ऐसा कर सकती है। अगर आपके बीच शारीरिक संबंध हैं और उसके बाद भी आपको लग रहा है कि यह रिश्ता आगे नहीं चलेगा तो आप चीजों को बदल सकते हैं

इस बातचीत में उन्होंने शादी और बच्चों पर भी बात की। उन्होंने कहा, “आजकल के रिश्तों में इमोशन्स और रोमांस की कमी होती है। मुझे लगता है कि आपको अपने सबसे अच्छे दोस्त से शादी करनी चाहिए। आपके पास एक अच्छा दोस्त होना चाहिए। आपको डिस्कस करना चाहिए। आपको कहना चाहिए- ‘हो सकता है कि मैं आपके साथ एक बच्चा पैदा करना चाहती हूँ, क्योंकि मैं आपको पसंद करती हूँ। मुझे लगता है कि आप अच्छे हैं तो चलिए शादी करते हैं, क्योंकि यही समाज का कहना है।’ मुझे कोई समस्या नहीं है अगर आपके बिना शादी के भी बच्चा हो। मुझे सच में कोई प्रॉब्लम नहीं है।”

उल्लेखनीय है कि जया बच्चन अक्सर कैमरा देख भड़कने के कारण मीडिया में चर्चा का कारण बनती हैं। कुछ दिन पहले भी पैपराजी को डाँटते हुए उनकी वीडियो वायरल हुई थी। उनका कहना था कि आखिर कैमरा लेकर कैसे किसी की भी जिंदगी में दखलअंदाजी दी जा सकती है। उस दौरान भी वह अपनी नातिन नव्या नवेली के साथ देखी गई थीं।

‘कांतारा’ में अब नहीं बजेगा ‘वराह रूपम’ गाना, केरल कोर्ट का आदेश: ऋषभ शेट्टी ने सुपरस्टार रजनीकांत के चरण छू लिया आशीर्वाद

सुपरहिट कन्नड़ फिल्म ‘कांतारा’ के निर्देशक व मुख्य अभिनेता ऋषभ शेट्टी ने तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई स्थित सुपरस्टार रजनीकांत के आवास पर जाकर उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने इसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा की। एक तस्वीर में वो वरिष्ठ अभिनेता के पाँव छूटे नज़र आ रहे हैं और सुपरस्टार उन्हें आशीर्वाद दे रहे हैं, जबकि एक अन्य तस्वीर में रजनीकांत उन्हें अंगवस्त्र ओढ़ा कर सम्मानित कर रहे हैं।

एक अन्य तस्वीर में दक्षिण भारत के दोनों कलाकार बैठ कर बातचीत करते नजर आ रहे हैं। एक तस्वीर में रजनीकांत, ऋषभ शेट्टी का हाथ पकड़े हुए हैं और उन्हें कुछ कह रहे हैं। ऋषभ शेट्टी ने सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को डालते हुए ‘कांतारा’ की तारीफ़ करने के लिए रजनीकांत को धन्यवाद दिया। बता दें कि रजनीकांत खुद कन्नड़ फिल्मों में काम कर चुके हैं और वो बेंगलुरु में ही बस कंडक्टर का काम किया करते थे।

उधर बॉक्स ऑफिस पर लगभग 250 करोड़ रुपए कमा चुकी ‘कांतारा’ को लेकर अब विवाद भी सामने आ रहे हैं। केरल की एक अदालत ने फिल्म को ‘वराह रूपम’ गाने का प्रयोग करने से रोक दिया है। कॉपीराइट के एक केस को लेकर ऐसा आदेश दिया गया। थिएटरों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर फिल्म वाले इस गाने का प्रयोग अब नहीं कर सकेंगे। कझिकोड के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने केरल के रॉक म्यूजिक बैंड ‘थाईक्कुडम ब्रिज’ ने आरोप लगाया है कि उक्त गाना उसके गाने ‘नवरासम’ की कॉपी है।

इस आदेश के बाद ‘कांतारा’ के निर्माताओं को न सिर्फ थिएटर और यूट्यूब, बल्कि ऑडियो गाने के सभी प्लेटफॉर्म से भी ‘वराह रूपम’ को हटाना पड़ेगा। हालाँकि, सुनवाई ख़त्म होने तक ये अस्थायी आदेश है। याचिकाकर्ताओं ने इसे प्लेजेरिज्म बताते हुए कहा है कि दोनों गानों का समान होना सिर्फ संयोग नहीं है। फिल्म में कर्नाटक के वनवासी समाज के एक ‘दैव (देव)’ को भगवान विष्णु का वराह अवतार बताते हुए इस स्तुति वाले गाने को डाला गया था।

‘मौलानाओं को ₹18000, पुजारियों को क्यों नहीं’: अनुराग ठाकुर ने उतारा केजरीवाल का मुखौटा, कहा- राम मंदिर के विरोधी आज हिंदू बन घूम रहे हैं

केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर (Anurag Singh Thakur) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) पर करारा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का विरोध और मौलानाओं को 18,000 रुपए सालाना देने वाले केजरीवाल अराजकता के प्रतीक हैं।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि अरविंद केजरीवाल भारतीय करेंसी पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर लगाने की इसलिए माँग कर रहे हैं, ताकि उनके द्वारा किए गए भ्रष्टाचार पर चर्चा ना हो। बता दें कि केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर भारतीय नोटों पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर लगाने की माँग की है। केजरीवाल का कहना है कि देश की समृद्धि के लिए देवताओं का आशीर्वाद जरूरी है।

अनुराग ठाकुर ने केजरीवाल पर हमला बोलते हुए आगे कहा कि जिन्होंने राम मंदिर निर्माण का विरोध किया, हिंदू देवताओं का अपमान किया, जिसे अपने मंत्री को बर्खास्त करना पड़ा, वे लक्ष्मी-गणेश के नाम पर नया प्रोपगेंडा फैला रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने आगे कहा, “आप (अरविंद केजरीवाल) दिल्ली में मुस्लिम मौलवियों को सालाना 18,000 रुपए देते हैं। क्या आप पुजारियों, गुरुद्वारा के ग्रंथियों और पादरियों को भी वही 18,000 रुपए देंगे? आपने ऐसा क्यों नहीं किया?”

अनुराग ठाकुर ने अरविंद केजरीवाल को अराजक के साथ-साथ फर्जी करार किया और कहा कि मंदिर का विरोध करने वाले ये लोग आज हिंदू बनने का ढोंग कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस पर भी प्रहार किया और कहा कि किसानों का कर्ज माफ करने का वह झूठे वादे करती है।

कुछ दिन पहले केजरीवाल ने कहा था कि नोट के एक तरफ ‘गाँधी जी’ की तस्वीर और दूसरी तरफ ‘लक्ष्मी-गणेश’ की तस्वीर लगाई जानी चाहिए। इससे उनका आशीर्वाद मिलेगा और देश की तरक्की होगी। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से अपील की और कहा कि वे 130 करोड़ लोगों की ओर से केंद्र सरकार और पीएम मोदी से यह अपील कर रहे हैं। बाद में केजरीवाल ने इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा।

NCB ने दाखिल की 200 पन्नों की चार्जशीट, क्या पति संग जेल जाएँगी भारती सिंह: 2 साल पहले कॉमेडियन जोड़े के घर से मिला था ड्रग्स

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने ड्रग्स मामले में कॉमेडियन भारती सिंह (Bharti Singh) और उनके पति हर्ष लिंबाचिया (Harsh Limbachiya) के खिलाफ कोर्ट में 200 पेज की चार्जशीट दाखिल की है। साल 2020 में NCB ने ड्रग्स के मामले में दोनों को गिरफ्तार भी किया था। फिलहाल ये कपल जमानत पर बाहर है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो साल बाद ड्रग्स मामले मे एनसीबी द्वारा दाखिल की गई 200 पेजों की चार्जशीट में क्या है अभी तक यह सामने नहीं आया है। कहा जा रहा है कि एक बार फिर से इस मामले में दोनों के सिर पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

बता दें कि NCB ने 21 नवंबर 2020 में कॉमेडियन भारती सिंह के प्रोडक्शन ऑफिस और घर पर छापा मारा था। उनके घर से 86.5 ग्राम गाँजा बरामद किया गया था, जिसके बाद दोनों को एनसीबी ने हिरासत में लिया था। मुंबई के जोनल डायरेक्टर ऑफिसर समीर वानखेड़े ने उस वक्त बताया था, “भारती और उनके पति को नशीले पदार्थ रखने के मामले में सवाल-जवाब के लिए हिरासत में ले लिया गया है।” लंबी पूछताछ के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया था।

जाँच एजेंसी के सामने भारती और उनके पति हर्ष ने गाँजे का सेवन करने की बात कबूल की थी। लेकिन दो दिन बाद ही यानी 23 नवंबर 2020 को इस केस में जमानत मिल गई थी।

गौरतलब है कि 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद एनसीबी ने ड्रग्स से जुड़े व्हाट्सएप चैट के आधार पर बॉलीवुड में नशीली दवाओं के इस्तेमाल के संबंध में जाँच शुरू की थी। एनसीबी ने सबसे पहले सुशांत की गर्लफ्रेंड रहीं रिया चक्रवर्ती, उसके भाई शौविक, दिवंगत फिल्म स्टार के कुछ कर्मचारियों और अन्य लोगों को एनडीपीएस कानून की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया था। इसके बाद ड्रग्स की जाँच के लपेटे में कई सेलिब्रिटीज जैसे दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह, अर्जुन रामपाल की पार्टनर गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स आए थे।