Home Blog Page 2306

‘पंजाब की जगह केरल को ड्रग कैपिटल बना रही वामपंथी सरकार’: राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ने कहा- राज्य में अज्ञानियों का शासन, शराब-लॉटरी को दे रहे बढ़ावा

केरल (Kerala) सरकार की शराब नीति को लेकर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammad Khan) ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन (Pinarayi Vijayan) पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि केरल ‘ड्रग्स कैपिटल’ (Drugs Capital) के रूप में पंजाब (Punjab) की जगह लेता जा रहा है।

कोच्चि में एक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में राज्यपाल खान ने कहा कि केरल सरकार द्वारा राज्य में शराब की बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, “सभी शराब पीने के खिलाफ अभियान चलाते हैं। यहाँ शराब पीने को बढ़ावा दिया जा रहा है। कितने शर्म की बात है।”

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खाने ने आगे कहा, “हमने तय किया है कि हमारे (केरल के) विकास के लिए लॉटरी और शराब ही काफी है। शत-प्रतिशत साक्षरता वाले राज्य के लिए यह कितनी शर्मनाक स्थिति है।”

उन्होंने कहा, “राज्य का प्रमुख होने के नाते मुझे शर्मिंदगी महसूस होती है कि मेरे राज्य में राजस्व के दो मुख्य साधन- लॉटरी और शराब हैं। लॉटरी क्या है? यहाँ बैठे आप लोगों में से कभी किसी ने लॉटरी टिकट खरीदी है? सिर्फ बेहद गरीब लोग लॉटरी टिकट खरीदते हैं। आप उन्हें लूट रहे हैं। आप हमारे लोगों को शराब का आदी बना रहे हैं।”

लोगों को संबोधित करते हुए राज्यपाल खान ने कहा, “केरल सरकार के कानून मंत्री कहते हैं कि वे मेरी कार्रवाई की समीक्षा करेंगे। मैं राज्यपाल के रूप में उनके कार्यों की समीक्षा करने के लिए यहां हूँ। वे मेरे द्वारा नियुक्त किए गए हैं। वे संविधान के प्रावधानों से परिचित नहीं हैं, क्योंकि मेधावी लोग बाहर चले गए हैं और ये अज्ञानी राज्य पर शासन कर रहे हैं।”

वित्त मंत्री केएन बालागोपाल पर निशाना साधते हुए राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा, “वित्त मंत्री, जिसके राजस्व का मुख्य स्रोत अल्कोहल और लॉटरी है, वह पूछ रहा है कि यूपी के आए गवर्नर को केरल के एजुकेशन सिस्टम की क्या समझ है।”

उन्होंने कहा कि ऐसा कहकर सुप्रीम कोर्ट के बारे में भी ऐसी टिप्पणी ना करें, क्योंकि कल कोर्ट ने भी केरल केरल तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति की सरकार द्वारा की गई नियुक्ति के खिलाफ फैसला दिया है।

बता दें कि केरल में कुलपतियों की नियुक्तियों को लेकर विजयन सरकार और राज्यपाल के बीच अक्सर खींचतान होती रही है। राज्यपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि कुलपतियों की नियुक्ति राज्यपाल की जिम्मेदारी है।

वहीं, इस साल सितंबर में भी शराब और लॉटरी के राजस्व का मुख्य स्रोत बनने को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री विजयन के बीच कहासुनी हुई थी। राज्यपाल खान ने इसके लिए केरल की वामपंथी सरकार की बहुत आलोचना भी की थी।

‘जान बचा कर भागा, कार का शीशा फोड़ कर खींचा गया’: इमरान खान पर अब जानलेवा हमले का केस, चुनाव लड़ने पर पहले ही लग चुकी है रोक

चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित होने के बाद अब पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलों में और इजाफा हुआ है। इमरान के खिलाफ इस्लामाबाद में एक FIR दर्ज हुई है। इस FIR में उन पर हत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया है। यह केस पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज़ नामक संगठन के नेता मोहसिन शाहनवाज़ राँझा ने रज करवाया है। एक दिन पहले मोहसिन पर चुनाव आयोग के ऑफिस के बाहर हमला हुआ था। ये FIR शनिवार (21 अक्टूबर, 2022) को दर्ज हुई है।

शिकायतकर्ता रांझा के मुताबिक, इमरान खान को जिस तोशाखाना मामले में 5 साल के लिए पद के अयोग्य घोषित किया गया है, वो उसी केस में वादी हैं। पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में राँझा ने बताया कि 21 अक्टूबर, 2022 को उनके समर्थक और PTI (पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ) पार्टी के कार्यकर्ता इस्लामाबाद में चुनाव आयोग के ऑफिस पर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दिन उनकी चुनाव आयोग में बतौर वादी पेशी थी। जब वो चुनाव आयोग के ऑफिस से बाहर निकल रहे थे, तभी उन पर इमरान खान के समर्थक टूट पड़े।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहसिन शाहनवाज़ राँझा का दावा है कि अपनी जान बचा कर वो वो जैसे-तैसे कार तक पहुँचे पर वहाँ भी उनका पीछा नहीं छोड़ा गया। उनका दावा है कि इस दौरान उनके कार के शीशे फोड़ कर उन्हें बाहर खींचने का प्रयास किया गया। इस हमले के बाद उन्होंने इमरान खान के खिलाफ इस्लामाबाद के सचिवालय पुलिस थाने में FIR दर्ज करवाई है। अपनी शिकायत में रांझा ने लिखा है कि हमले के दौरान उनकी हत्या हो सकती थी।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में पुलिसकर्मियों को हलमावारों से उलझते भी देखा जा सकता है। आखिर में जैसे-तैसे पुलिस शाहनवाज राँझा को वहाँ से निकालने में सफल रही।

अपनी शिकायत में रांझा ने इमराना खान को मुख्य साजिशकर्ता बताया है। उन्होंने कहा है कि इमरान के ही इशारे पर उनके समर्थकों ने उन पर हमला किया था।

गौरतलब है कि इमरान खान पर आरोप है कि वो विदेशों से मिले उपहार को बेच दिया करते थे। पाकिस्तानी कायदों के मुताबिक उसे तोशाखाना (सरकारी ख़ज़ाने) में जमा किया जाता है। इन आरोपों की पुष्टि होने के बाद इमरान खान को 5 वर्षों के लिए पद के अयोग्य घोषित कर दिया गया। यह निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त सिकंदर सुल्तान रजा की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय पीठ ने सुनाया था।

अफगानिस्तान में बच्चों के हाथ लगा मोर्टार बम, खेल-खेल में दागा: धमाके में 2 की मौत, 2 घायल

अफगानिस्तान के पूर्वी प्रान्त में ब्लास्ट की खबर है जहाँ मोर्टार के गोले से 2 बच्चों की मौत हो गई है। इसी ब्लास्ट में 2 अन्य लोग घायल हुए हैं जिनको अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। बताया जा रहा है कि यह ब्लास्ट बच्चों द्वारा खेल-खेल में किया गया है। तालिबान प्रशासन इस बात की जाँच कर रहा है कि जिन्दा मोर्टार बच्चों के पास कैसे पहुँचा। घटना शनिवार (22 अक्टूबर 2022) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला पूर्वी प्रान्त के ज़ाज़ी जिले के पक्तिका का है। तालिबान के आधिकारिक प्रवक्ता ओमर बदरी के मुताबिक बच्चों ने खेल-खेल में ही मोर्टार को आग लगा दी जिस से धमाका हो गया। इस घटना के बाद आस-पास चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने इधर-उधर भागना शुरू कर दिया था। खामा प्रेस के मुताबिक घायलों का इलाज गार्दिज अस्पताल में किया जा रहा है।

लड़कियों के स्कूल बंद करने पर प्रदर्शन

इसी पक्तिका इलाके में बुधवार (19 अक्टूबर 2022) को स्थानीय निवासियों ने तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारी लड़कियों के स्कूलों को बंद करने से काफी नाराज थे। वो तालिबान से अपना फैसला वापस लेने और स्कूलों को दुबारा खोलने की माँग कर रहे थे।

लड़कियों की पढ़ाई रोकने के तालिबानी फरमान की उन्ही के देशवासियों द्वारा काफी आलोचना हो रही है।

पत्रकार और एक्टर को लिया हिरासत में

अफगानी पत्रकार बिलाल के मुताबिक तालिबान ने कांधार इलाके में पत्रकार और अभिनेता को हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए लोगों में सांगा रेडियो के पत्रकार शीर अहमद नूरी, एक स्थानीय अभिनेता अताउल्लाह ज़ार और एक अन्य व्यक्ति बिस्मिल्लाह को हिरासत में लिया है। ऐसा किसलिए किया गया है ये जानकारी अभी तक सामने नहीं आ पाई है।

लगातार तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति बने शी जिनपिंग, तोड़ा 40 साल पुराना नियम: जनता ने विरोध किया तो दूतावास को जेल बनाकर कुचली आवाज

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के 20वें अधिवेशन के समापन के बाद रविवार (22 अक्टूबर 2022) को शी जिनपिंग (Xi Jinping) को एक बार फिर राष्ट्रपति चुन लिया गया। इससे पहले उन्हें बंद कमरे में हुई वोटिंग में लगातार तीसरी बार पार्टी का महासचिव चुना गया।

बता दें कि चीन में इस पद पर चुने जाने वाला नेता ही देश का राष्ट्रपति होता है। इसके साथ ही वह चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) का कमांडर भी बन गए हैं। इस तरह साल शी जिनपिंग 1949 में पार्टी की स्थापना करने वाले माओत्से तुंग के बाद सबसे अधिक समय तक इस पद पर रहने वाले नेता बन गए है।

शीन जिनपिंग को इस अधिवेशन में कम्युनिस्ट पार्टी के केंद्रीय सैन्य आयोग का अध्यक्ष भी नामित किया गया था। इसके बाद वह चीन की सेना के प्रमुख भी बन गए हैं। पार्टी के महासचिव पद पर उन्हें अगले पाँच सालों के चुना गया है।

शी जिनपिंग ने चीन के नेता के रूप में ऐतिहासिक तीसरा कार्यकाल हासिल करने के बाद उन्होंने ‘कठिन परिश्रम से काम’ करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, “आपने हम पर जो भरोसा जताया है, उसके लिए मैं पूरी पार्टी का दिल की गहराइयों से धन्यवाद देता हूँ। हमारे लोगों लोगों ने जिस तरह से मुझ पर विश्वास जताया, उसको साबित करने के लिए अपने कर्तव्यों का पूरे लगन से पालन करूँगा।”

जिनपिंग के तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति बनने के साथ ही पार्टी का लगभग चार दशक पुराना नियम टूट गया। पार्टी के संस्थापक माओत्से तुंग लगभग तीन दशक तक पार्टी प्रमुख थे। इसके बाद साल 1980 में इस सर्वोच्च पद के लिए अधिकतम 10 साल के कार्यकाल का नियम बनाया गया था।

बता देें कि अधिवेशन के दौरान चीन के राष्ट्रपति रह चुके 80 वर्षीय हू जिंताओ को जबरन मीटिंग से निकाल दिया गया था। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बगल में बैठे हू जिंताओ को दो सुरक्षाकर्मियों ने कुर्सी से उठाया और मीटिंग हॉल से बाहर ले गए। इसका वीडियो भी सामने आया था।

वीडियो में दिख रहा है कि हू जिंताओ इस दौरान शी जिनपिंग से कुछ कहते नजर आए। इस दौरान वे वापस कुर्सी पर बैठने की कोशिश भी किए, लेकिन दो मार्शल उनकी बाँह में हाथ डालकर बाहर लेकर चले गए।

इसके अलावा, शी जिनपिंग ने चीन के पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले प्रधानमंत्री ली केकियांग को भी पार्टी के वरिष्ठ पद से हटा दिया है। उनके साथ-साथ तीन और शीर्ष नेताओं को हटाया गया है। अब ये चारों नेताओं को दोबारा कम्युनिस्ट पार्टी के सबसे ताकतवर पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य के रूप में दोबारा नियुक्त नहीं किया है और उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। 

पार्टी में पोलित ब्यूरो के 25 सदस्य और स्टैंडिंग कमेटी के 7 सदस्यों की वोटिंग की प्रक्रिया पूरी हो गई है। ये लोग कौन होंगे, इसका ऐलान आज हो सकता है। CCP की नई टीम से जिनपिंग ने अपने सारे विरोधियों को हटा दिया है। माना जा रहा है कि उन्होंने अपने भरोसेमंद लोगों को इसमें शामिल किया है। इससे उनके आजीवन राष्ट्रपति बने रहने का रास्ता साफ हो जाएगा। 

उल्लेखनीय है कि चीन का तीसरी बार राष्ट्रपति बनने से पहले शी जिनपिंग को जनता का काफी विरोध झेलना पड़ा। उनके खिलाफ पोस्टर लगे, नारेबाजी हुई। लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी ने सबकी आवाजें दबाने के लिए दूतावासों को ही जेल में बदल दिया और उन लोगों पर कार्रवाई शुरू कर दी जो उनके विरोध में बोल रहे थे।

‘वो लव जिहाद करवाना चाहती थी’: अलीगढ़ के कॉलेज में अंजान लड़के के संग घुसी मुस्लिम छात्रा, मंदिर के पास बैठी हिंदू लड़की से मिलवाया, बोली- कोई पूछे तो इसे भाई बता देना

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में कॉलेज में पढ़ने वाली एक छात्रा ने अपने साथ लव जिहाद की शिकायत की है। पीड़िता ने एक अन्य मुस्लिम छात्रा पर ही इस घटना का मास्टरमाइंड होने का भी आरोप लगाया है। आरोप है कि कॉलेज में बाहरी मुस्लिम लड़कों को बुला कर हिन्दू लड़कियों से दोस्ती करवाने की कोशिश की जा रही है। कॉलेज के ही अन्य छात्रों ने आरोपित लड़के को पुलिस के हवाले कर दिया है। हालाँकि पुलिस लव जिहाद के एंगल को नकार रही है। घटना शुक्रवार (21 अक्टूबर 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला अलीगढ़ के धर्म समाज महाविद्यालय का है। यहाँ BSC फर्स्ट ईयर की छात्रा ने आरोप लगाया कि घटना के दिन वो क्लास रूम के बाहर मंदिर के पास बैठी थी। तभी उसी कॉलेज की एक मुस्लिम छात्रा वहीं पर एक मुस्लिम लड़के के साथ पहुँची और उस से बात करने लगी। मुस्लिम युवक अलीगढ़ के ही दिल्ली गेट इलाके के शाह जमाल का निवासी बताया जा रहा है।

इसी दौरान कॉलेज में पढ़ने वाले कई हिन्दू छात्र वहाँ आ गए। उन्होंने बाहरी लड़के से परिचय पूछा तो वो कुछ सही से बता नहीं पाया। छात्रों ने आरोपित मुस्लिम लड़के की पिटाई कर दी और उसे कॉलेज प्रशासन को सौंप दिया। वहाँ से उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। उसी कॉलेज के छात्र नेता अमित गोस्वामी के मुताबिक इस से पहले भी डी एस कॉलेज में लव जिहाद की घटनाएँ हुईं हैं जिसमें पुलिस महज 151 शांतिभंग की धाराओं में कार्रवाई कर के खानापूर्ति करती है।

पीड़ित छात्रा का आरोप है कि उसे मुस्लिम लड़के से दोस्ती करवाने की कोशिश चल रही थी। बताया जा रहा है कि मुस्लिम छात्रा ने पीड़िता से ये भी कहा कि अगर प्रॉक्टर पूछेंगे तो लड़के को अपना भाई बता देना। पीड़ित छात्रा का कहना है कि शायद मुस्लिम लड़की उसके साथ लव जिहाद करवाने की कोशिश कर रही थी। छात्र नेता ने कॉलेज प्रशसन की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा है कि आखिर बाहरी लड़के कॉलेज परिसर में घुस कैसे जाते हैं।

बताया जा रहा है कि बाहरी लड़के को कॉलेज में बुलाने वाली मुस्लिम छात्रा को कॉलेज से निलंबित कर दिया गया है। वहीं पुलिस ने इस घटना में लव जिहाद के एंगल से इंकार किया है। DSP शिव कुमार के मुताबिक जाँच के दौरान लड़का और लड़की एक ही समुदाय के निकले हैं। उन्होंने बताया कि आरोपित छात्र का शांति भंग 151 की धारा में चालान किया गया है।

‘वह सुभाषचंद्र बोस ही थे या नहीं’: गृह मंत्रालय ने ‘गुमनामी बाबा’ की DNA रिपोर्ट की जानकारी देने से किया मना, देश की संप्रभुता और अखंडता का दिया हवाला

‘गुमनामी बाबा’ ही महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाषचंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) थे या नहीं, यह रहस्य ही रहेगा। गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) ने गुमनामी बाबा के DNA सैंपल की रिपोर्ट के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया है। देश की संप्रभुता और अखंडता का हवाला देते हुए CFSL ने इस पर RTI का जवाब देने से मना कर दिया।

जवाब के लिए दाखिल की गई RTI के जवाब में CFSL ने कहा कि जिसके बारे में जानकारी देने से देश की संप्रभुता एवं अखंडता और राष्ट्र की सुरक्षा, रणनीतिक, आर्थिक हित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसके कारण इलेक्ट्रोफेरोग्राम रिपोर्ट साझा नहीं किया जा सकता है।

दरअसल, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(ए), (ई) और 11(1) का हवाला देते हुए पश्चिम बंगाल स्थित हुगली के कोन्नगर निवासी सयाक सेन ने 24 सितंबर 2022 अर्जी दायर की थी। नेताजी बोस पर शोध करने वाले सेन से गुमनामी बाबा के DNA सैंपल की रिपोर्ट माँगी थी।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, सयाक सेन ने कहा कि इस आधार पर CFSL ने उनकी RTI को खारिज कर दिया। सेन ने RTI में यह भी पूछा कि उत्तर प्रदेश के सुदूर इलाके में रहने वाला एक व्यक्ति भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए इतना मायने क्यों रखता है कि अगर उसका इलेक्ट्रोफेरोग्राम सार्वजनिक किया जाता है तो देश में हलचल मच जाएगी।

सेन ने आगे बताया, “ये स्पष्ट संकेत है कि गुमनामी बाबा एक आम आदमी से कहीं अधिक और विशेष थे। मेरा मानना ​​है कि वह मेरे सभी निष्कर्षों के अनुसार गुमनामी बाबा के रूप में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ही थे।”

बता देें कि यह दावा किया गया है कि सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइवान में एक विमान दुर्घटना में हो गई थी। हालाँकि, लोगों के एक वर्ग का दावा है कि नेताजी बोस विमान दुर्घटना में बच गए थे और तत्कालीन ब्रिटिश सरकार से बचने के लिए गुमनामी बाबा के वेश में छिप कर रहते थे।

जिस राजीव गाँधी फाउंडेशन को मनमोहन सिंह देना चाहते थे ₹100 करोड़, उसका FCRA लाइसेंस गृह मंत्रालय ने रद्द किया: विदेशी फंडिंग में धांधली का आरोप

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गाँधी परिवार के गैर-सरकारी संगठन राजीव गाँधी फाउंडेशन (RGF) का FCRA (विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम) लाइसेंस रद्द कर दिया है। आरोप है कि ये ट्रस्ट विदेशी फंडिंग कानून का उल्लंघन करता पाया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2020 के जुलाई में गृह मंत्रालय द्वारा गठित मंत्रालय की समिति की जाँच की रिपोर्ट पर यह निर्णय लिया गया है। समिति की जाँच मुख्य रूप से इस पर थी कि क्या संगठनों ने आयकर दाखिल करते वक्त दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की या विदेशों से प्राप्त धन का शोधन किया। जाँच पूरी होने के बाद गृह मंत्रालय ने अपना निर्णय लिया।

मालूम हो कि राजीव गाँधी फाउंडेशन के साथ राजीव गाँधी चैरिटेबल ट्रस्ट का लाइसेंस भी कैंसिल कर दिया गया है।

बताया जा रहा है कि राजीव गाँधी फाउंडेशन का लाइसेंस रद्द करने की सूचना उनके पदाधिकारियों को भेज दी गई है। संगठन ने अभी इस मामले पर अपनी कोई टिप्पणी नहीं दी है।

चीन से मिला संगठन को फंड, गाँधी परिवार ने खुद डील की

साल 2020 में इसी संगठन को लेकर सामने आया था कि कैसे आरजीएफ को चीनी सरकार से 2006 और बाकी सालों में पैसे मिले। 2008 में कॉन्ग्रेस पार्टी और चीन की कन्युनिस्ट पार्टी के बीच मेमोरेंडम भी साइन हुआ ता कि वो हर विकास मुद्दे पर एक दूसरे की राय लेंगे। खास बात ये थी कि इसे राहुल गाँधी ने साइन किया था जो 2020 में चीन विवाद के बाद मोदी सरकार पर सवाल उठाते मिले थे।

बता दें कि इस संगठन की अध्यक्ष सोनिया गाँधी हैं। वहीं ट्रस्टियों में अशोक गांगुली, बंसी महता, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, पी चिदंबरम, और राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी का नाम शामिल है। राजीव गाँधी फाउंडेशन की शुरुआत साल 1991 में हुई थी। कथिततौर पर यह संगठन साल 1991 से 2009 तक स्वास्थ्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, महिलाओं और बच्चों, विकलांग सहायता आदि सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम करने का दावा करता था।

हालाँकि कुछ समय पहले यह संगठन विवादों में आ गया। ये भी खुलासा हुआ था कि इस संगठन को 1991-1992 में कॉन्ग्रेस सरकार में वित्त मंत्री रहते हुए मनमोहन सिंह ने 100 करोड़ रुपए बजट से देने की कोशिश की थी। मगर विपक्ष के हंगामे के बाद इस पैसे को फाउंडेशन को नहीं दिया जा सका।

वित्त मंत्री रहते हुए RGF को 100 करोड़ देना चाहते थे मनमोहन सिंह

1991-92 में भारतीय संसद की केंद्रीय बजट की चर्चा के संग्रहीत अभिलेख के एक सेक्शन में देखा जा सकता है कि जब तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने राजीव गाँधी फाउंडेशन को 100 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की थी, जिसपर विपक्षी दलों ने भारी हंगामा करते हुए सवाल खड़ा दिया था।

मनमोहन सिंह द्वारा बनाए गए 1991-92 के केंद्रीय बजट दस्तावेज में एक और प्रावधान भी था। इसमें कहा गया कि 5 साल की अवधि में राजीव गाँधी फाउंडेशन को 100 करोड़ रुपए की राशि दान की जाएगी। यह राशि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास, साक्षरता के प्रचार, पर्यावरण की सुरक्षा, सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने, दलितों के उत्थान के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग से संबंधित अनुसंधान और कार्रवाई कार्यक्रमों की पहल करने, महिलाओं और विकलांग व्यक्तियों, प्रशासनिक सुधार और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका के लिए बताई गई थी।

मेहुल चोकसी ने दिया दान

इसके अलावा राजीव गॉंधी फाउंडेशन (RGF) को मिले दान को लेकर एक खुलासा ये हुआ था कि इसे दान देने वालों में एक नाम मेहुल चोकसी का भी था। मेहुल चोकसी वही शख्स है जो पंजाब नेशनल बैंक के हज़ारों करोड़ रुपए के घोटाले में अभियुक्त है। पीएनबी घोटाले के तहत नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर 13 हज़ार करोड़ रुपए के ग़बन का आरोप है।

‘कांतारा में दिखाई गई ‘भूत कोला’ परंपरा हिंदू धर्म के अस्तित्व से पहले की’: अभिनेता चेतन के बयान पर कर्नाटक में FIR, हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का आरोप

कन्नड़ फिल्म ‘कांतारा’ की सफलता के बाद इसकी हर तरफ चर्चा है। फिल्म में ‘भूत कोला’ नाम की एक पुरानी परंपरा को दिखाया गया है। इस परंपरा को लेकर कन्नड़ फिल्मों के अभिनेता चेतन ने बयान दिया है। उनके बयान पर कर्नाटक पुलिस ने लोगों की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने के लिए FIR दर्ज किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े हिंदू जागरण वेदिका ने आरोप लगाया था कि फिल्म कांतारा में इस्तेमाल किए गए ‘भूत कोला’ की परंपरा पर बयान देते हुए एक्टर चेतन ने अपमानजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद वेदिका ने शिकायत में देते हुए कहा कि अभिनेता चेतन के बयान से हिंदुओं की भावना आहत हुई है।

चेतन ने कहा था कि भूत कोला की परंपरा हिंदू धर्म का हिस्सा नहीं है और यह हिंदू धर्म के अस्तित्व में आने से पहले भी मौजूद थी। कांतारा की रिलीज के बाद चेतन ने सोशल मीडिया पर लिखा था, “जैसे हिंदी भाषा को थोपा नहीं जा सकता, वैसे ही लोगों पर हिंदुत्व नहीं थोपा जा सकता। भूत कोला भूमि के मूल निवासियों की परंपरा है। यह हिंदू धर्म के तहत नहीं आएगा।”

फिल्म कांतारा 1847 के कालखंड की कहानी है। इसमें कर्नाटक के तटीय क्षेत्र में एक काल्पनिक गाँव की कहानी को दिखाया गया है। फिल्म में ऋषभ शेट्टी लीड रोल में हैं। 30 सितंबर को रिलीज हुई इस फिल्म को शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है।

वहीं, कांतारा फिल्म का तमिल, हिंदी, तेलुगु और मलयालम वर्जन भी बढ़िया कमाई कर रहा है। इसे 14 अक्टूबर को रिलीज किया गया। फिल्म समीक्षकों के मुताबिक, कांतारा ने दुनिया भर में अब तक 170 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई की है।

देश छोड़ कर फरार होने की फिराक में थी जैकलीन फर्नांडिस, मोबाइल से मिटाए सबूत: ED का खुलासा, ₹200 करोड़ ठगी मामले में कोर्ट से राहत

200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग केस में फँसी हुई जैकलीन फर्नांडिस शनिवार (22 अक्टूबर, 2022) को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुई। इस मामले की सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जैकलीन की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा है कि वह देश छोड़कर भागने की फिराक में थी। साथ ही जैकलीन ने कभी भी जाँच में सहयोग नहीं किया और सबूतों से छेड़छाड़ की है। हालाँकि, इसके बाद भी, कोर्ट ने जैकलीन की अंतरिम जमानत 10 नवंबर तक बढ़ा दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट में कहा है कि जैकलीन कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। बल्कि एक बॉलीवुड अभिनेत्री हैं, जिसके पास बहुत पैसा है और उनका कद प्रभावी और काफी ऊँचा है। इसलिए वह सबूतों और गवाहों को नुकसान पहुँचाकर जाँच को प्रभावित कर सकती हैं।

ईडी ने यह भी कहा है कि जैकलीन ने देश छोड़कर भागने की भी प्लानिंग की थी। हालाँकि, उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी कर दिया गया था जिसके बाद वह भागने में सफल नहीं हो पाईं।

ईडी ने जैकलीन की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए यह भी कहा है कि जैकलीन फर्नांडिस ने कभी भी जाँच में सहयोग नहीं किया। सबूत सामने आने पर ही उस बारे में बताया है। साथ ही, अपने फोन से कुछ सबूत भी डिलीट किए थे। ईडी ने यह भी कहा है कि महाठग सुकेश चन्द्रशेखर से मुलाकात के 10 दिन के अंदर ही जैकलीन को उसके आपराधिक इतिहास के बारे में जानकारी मिल गई थी। लेकिन, वह उससे दूर नहीं हुईं।

जैकलीन ने महाठग सुकेश चन्द्रशेखर से लिए थे करोड़ों के गिफ्ट

बता दें कि ₹215 करोड़ की ठगी के इस मामले में ईडी जैकलीन फर्नांडिस पर लगातार शिकंजा कस रही है। ईडी जैकलीन की 7.27 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर चुकी है। जैकलीन ने यह रकम फिक्स डिपॉजिट के रूप में अपने पास रखी हुई थी।

रिपोर्ट्स की मानें तो सुकेश ने जैकलीन की माँ को लग्जरी कार मासेराती और पॉर्श कार, बहन को उसने 1.50 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.20 करोड़ रुपए) लोन के रूप में दिए थे। वहीं, जैकलीन के भाई को भी 15 लाख रुपए भी दिए गए थे। जैकलीन की बहन अमेरिका में जबकि भाई ऑस्ट्रेलिया में रहता है।

इसके अलावा, महाठग सुकेश ने जैकलीन को डिजाइनर गुच्ची, चैनल एवं वाईएसएल बिर्किन के महँगे बैग व महँगे झुमके गिफ्ट किए थे। वाईएसएल, लुई वुइटन और गुच्ची के जूते, कार्टियर चूड़ियाँ तथा हेमीज़ एवं टिफ़नी के कंगन दिए। इसके अलावा रोलेक्स, रोजर डुबुइस और फ्रेेंक मूलर की लग्जरी घड़ियाँ गिफ्ट की थी।

यही नहीं, सुकेश जैकलीन पर इतना मेहरबान था कि उसने BMW (5) और मिनी कूपर कार भी जैकलीन को गिफ्ट की थी। इसके अलावा, गुच्ची के दो जिमवियर, 52 लाख रुपए का अरबी घोड़ा एस्पुएला, 9-9 लाख रुपए की तीन फारसी बिल्लियाँ भी दी थी। हालाँकि, जैकलीन फर्नांडिस ने बार-बार यह दावा किया है उसने कई सारी चीजें सुकेश चन्द्रशेखर को लौटा दी थी। इस मामले में महाठग सुकेश चन्द्रशेखर फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।

‘गुजरात में AAP को 98 सीटें’: ‘आज तक’ के नाम पर वायरल हो रहे ओपिनियन पोल को चैनल ने बताया फर्जी, नेता ने कहा – पार्टी ग्रुप से मिला स्क्रीनशॉट

इस साल के अंत तक गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों को लेकर सत्ताधारी भाजपा से लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और कॉन्ग्रेस एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। हालाँकि, अभी गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन, इससे पहले ही ओपिनियन पोल आने लगे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर कुछ फेक पोल भी शेयर किए जा रहे हैं। ऐसा ही एक पोल AAP कार्यकर्ता द्वारा शेयर किए जाने के बाद आज तक ने ट्वीट कर पोल को फर्जी बताया है।

यह पोल आम आदमी पार्टी, टोंक के पूर्व जिला उपाध्यक्ष हनुमान सेन द्वारा शुक्रवार (14 अक्टूबर, 2022) को फेसबुक पर शेयर किया गया था। इस पोल में आम आदमी पार्टी को गुजरात में भारी बहुमत के साथ सरकार बनाते हुए दिखाया गया है।

इंडिया टुडे और एक्सिस माई इंडिया के लोगो के साथ शेयर किए इस पोल में हेडिंग के रूप में लिखा हुआ है “गुजरात में बन सकती है ‘आप की सरकार’।” यही नहीं, इसमें, आम आदमी पार्टी को 94-98 सीटें, भाजपा को 67-71 सीटें, कॉन्ग्रेस को 7-11 सीट और अन्य को 0-2 सीट हासिल करते हुए दिखाया गया है।

इस पोल के सामने आने के बाद ‘आज तक’ ने ट्वीट कर इसे फर्जी बताया है। आज तक ने ट्वीट में लिखा है, “ये पोल फर्ज़ी है, हमारी ‘आप’ से अर्ज़ी है, अफवाहें न तो फैलाएँ, न ही इन्हें फैलने दें। इंडिया टुडे ग्रुप ने अभी ऐसा कोई सर्वे नहीं कराया है।”

वहीं, एक्सिस माई इंडिया ने भी फर्जी पोल को लेकर बयान जारी किया है। एक्सिस माई इंडिया ने कहा है “एक्सिस माई इंडिया-इंडिया टुडे ग्रुप ने हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 के लिए किसी भी तरह की ओपिनियन पोल या प्री-पोल नहीं किया है। एक्सिस माई इंडिया-इंडिया टुडे ग्रुप के नाम से फर्जी प्रेडिक्शन और फर्जी ओपिनियन पोल प्रसारित किए जा रहे हैं। हम ऐसी किसी भी फेक जानकारी के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।

एक्सिस माई इंडिया-इंडिया टुडे ग्रुप ईसीआई दिशानिर्देशों के अनुसार मतगणना के दिन से 2-3 दिन पहले हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए एग्जिट पोल प्रेडिक्शन जारी करेगा।”

जब हमने इस पोल को शेयर करने वाले ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ टोंक के पूर्व जिला उपाध्यक्ष हनुमान सेन से बात की तो उन्होंने कहा है कि उन्हें यह स्क्रीनशॉट पार्टी से ग्रुप से मिला था, जिसे उन्होंने फेसबुक पर शेयर कर दिया था। जब हमने उनसे आज तक द्वारा उनके इस पोस्ट को शेयर किए जाने को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

इस फेक पोल को लेकर ट्विटर यूजर मोहित प्रसाद ने लिखा “महा बेशर्म पार्टी है आम आदमी पार्टी, अब आज तक भी बोल रहा है।”

वहीं, अश्विनी वर्मा नामक ट्विटर यूजर ने कहा “इसका नेता फर्जीवाल उसका काम तो फ़र्ज़ी होगा ही। 50 आदमियों की सभा बुलाता है उसमें अपने 5 आदमी दिखाकर उन्हीं से सवाल पूछ कर जवाब लेता है। सब कुछ ठीक से हो रहा है, और वह बोलते हैं हाँ नेताजी हमें तो सब मिल गया। सारा काम अच्छा है। एजेंडा वाला प्रचार मंत्री।”

कुबेर कश्यप नामक ट्विटर यूजर ने तो आम आदमी पार्टी को लोकतंत्र के लिए खतरा बता दिया। उन्होंने लिखा “आम आदमी पार्टी लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।”