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‘उसने इतनी दया तो दिखाई कि पीड़िता को ज़िंदा छोड़ दिया’: हाईकोर्ट ने घटाई बलात्कारी की सज़ा, 4 साल की बच्ची का किया था रेप

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर बेंच ने एक बलात्कारी की सज़ा आजीवन कारावास से बदल कर 20 साल की जेल कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि कम से कम उसमें इतनी दया तो थी कि उसने पीड़िता को ज़िंदा छोड़ दिया। उक्त अपराधी ने मात्र 4 साल की बच्ची का निर्मम बलात्कार किया था। जस्टिस सुबोध अभयंकर और जस्टिस एसके सिंह की पीठ ने ये फैसला सुनाया। पीठ ने कहा कि दोषी करार दिए जाने में कोई गलती नहीं है, लेकिन सज़ा घटाए जाने की माँग भी सही है।

हाईकोर्ट ने कहा, “ऐसी परिस्थितियों में हम ट्रेल कोर्ट द्वारा सबूतों को देख कर सुनाई गई इस सज़ा में कोई खोट नहीं देखते हैं। याचिकाकर्ता ने एक शैतानी घटना को अंजाम दिया ऐसा लगता है कि एक महिला की प्रतिष्ठा के प्रति उसके मन में कोई सम्मान नहीं है। उसने 4 साल की बच्ची का बलात्कार कर के अपनी प्रवृत्ति दिखाई। अतः, हम इस सज़ा को उसके द्वारा अब तक भोगी गई सज़ा की अवधि तक नहीं घटा सकते हैं।”

लेकिन, अदालत ने आगे कहा कि चूँकि उसमें इतनी दयालुता थी कि उसने बच्ची की हत्या नहीं की और बलात्कार के बाद उसे ज़िंदा छोड़ दिया, इसीलिए न्यायालय का विचार है कि आजीवन कारावास की सज़ा को घटा कर 20 वर्ष किया जा सकता है। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसने इस मामले में झूठा फँसाया गया है। उसने दावा किया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट को रिकॉर्ड में नहीं प्रस्तुत किया गया और ये ऐसा मामला नहीं है कि उसे सज़ा मिले।

हालाँकि, पुलिस ने कहा कि बलात्कारी दया का पात्र नहीं है और उसके मामले को ख़ारिज किया जाए। हालाँकि, FSL रिपोर्ट को रिकॉर्ड में न पेश किए जाने को अदालत ने पुलिस की घोर लापरवाही करार दिया। हालाँकि, हाईकोर्ट ने माना कि बाक़ी सभी सबूत बताते हैं कि उस व्यक्ति ने इस अपराध को अंजाम दिया है। इस मामले में प्रत्यक्षदर्शी गवाह के अलावा मेडिकल सबूत भी उसके खिलाफ पाए गए। हाईकोर्ट ने कहा कि बिना किसी शक के अपराध साबित होता है।

नर्स के हाथ-पाँव बाँध कर 5 लोगों ने बारी-बारी से किया रेप, 2 घंटे तक करते रहे ज्यादती: छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के एक सरकारी अस्पताल में एक नर्स के हाथ-पाँव बाँध कर पाँच लोगों ने बारी-बारी से रेप किया। पुलिस ने इस मामले में 4 को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक आरोपित फरार चल रहा है। अंबिकापुर जिले से 2 आरोपितों को पकड़ा गया। घटना झाग्राखण्ड पुलिस थाना की है। पीड़िता परदोल गाँव की रहने वाली है। ये इलाका कोरिया जिले के महेंद्रगढ़ तहसील के अंतर्गत पड़ता है।

झाग्राखण्ड के थानाधिकारी दीपेश सैनी ने ‘इंडिया टुडे’ को बताया कि ये घटना शुक्रवार (22 अक्टूबर, 2022) को एक हेल्थ सेंटर में हुई। दिवाली के कारण उस दिन दोपहर को ही अस्पताल बंद कर दिया गया था। नर्स यहाँ से अपने घर जाने ही वाली थी, तभी 5 लोग आए और उसे बंधक बना लिया। पीड़िता ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया है कि उसके हाथ-पाँव बाँध दिए गए, जिसके बाद तीनों ने बारी-बारी से उसके साथ बलात्कार किया।

उस दिन तक़रीबन शाम के 5 बजे पीड़िता को छोड़ा गया। बलात्कारियों ने उसे धमकी दी कि वो इस घटना के बारे में किसी को भी न बताए। हालाँकि, घर आने के बाद उसने परिवार वालों को अपने साथ हुई क्रूरता के बारे में बताया। इसके बाद वो पुलिस के पास पहुँचे। इसके तुरंत बाद ही दो आरोपित धर-दबोचे गए। तीसरे की तलाश जारी है। पीड़िता का कहना है कि आरोपितों ने गैंगरेप का वीडियो भी बना लिया है। पीड़िता के गाँव में कुछ जवानों को तैनात किया गया है, ताकि स्थिति न बिगड़े।

फ़िलहाल आरोपितों के नाम भी पुलिस ने सार्वजनिक नहीं किए हैं। इस घटना के बाद राज्य में विपक्षी पार्टी भाजपा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पार्टी की महिला मोर्चा ने जिले में विरोध प्रदर्शन किया। जिस उप-स्वास्थ्य केंद्र में ये घटना हुई है, उसी परिसर में माध्यमिक पाठशाला, आंगनबाड़ी और ग्राम पंचायत भवन भी है। मुख आरोपित 17 साल का नाबालिग बताया जा रहा है। 2 घंटे से भी ज्यादा समय तक वो ज्यादती करते थे रहे।

आतंकी को पनाह देने वाला अजमेर का तौसीफ चिश्ती गिरफ्तार, अब्बा हैं दरगाह के खादिम: कन्हैया लाल के हत्यारे के तार भी यहाँ से जुड़े थे

नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल तेली का गला रेत दिया गया था। इस मामले में हत्यारों के तार अजमेर स्थित ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती दरगाह से जुड़े थे। अब एक और आतंकवादी घटना के तार अजमेर से जुड़े हैं। पंजाब पुलिस की स्पेशल टीम ने शुक्रवार (21 अक्टूबर, 2022) को कार्रवाई करते हुए स्थानीय ‘अंजुमन कमिटी’ के जॉइंट सेक्रेटरी के बेटे तौसीफ चिश्ती को गिरफ्तार किया है।

उस पर आतंकवादी को पनाह देने के आरोप लगे हैं। ये मामला मोहाली के CID मुख्यालय पर गोलीबारी से जुड़ा हुआ है। हमलावरों को अजमेर में पनाह मिली थी। क्लॉक टॉवर थाना पुलिस की मदद से डिग्गी बाजार स्थित एक कैफे में तलाशी के बाद पंजाब पुलिस ने तौसीफ चिश्ती को गिरफ्तार करने में कामयाबी पाई। उसने 5 महीने पहले हुई घटना के हमलावर चरत सिंह को छिपाया था। उसने ही गिरफ़्तारी के बाद तौसीफ चिश्ती का नाम कबूला था।

पंजाब पुलिस तौसीफ चिश्ती को लेकर पंजाब गई है, जहाँ उससे पूछताछ की जा रही है। उसका अब्बा अजमेर दरगाह के खादिमों में से एक है। चरत सिंह को हाल ही में मुंबई से गिरफ्तार किया गया था। चिश्ती को अदालत में पेश करने के बाद पुलिस ने 5 दिन के रिमांड पर लिया है। चरत सिंह की निशानदेही पर पाकिस्तान से मँगाए गए हथियार भी बड़ी संख्या में बरामद हुए थे। 9 मई को चलती कार से मोहाली में हमला किया गया था।

इससे पहले पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्‍या में आरोपित दीपक टीनू राजस्थान के अजमेर से ही दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया था। दिल्ली पुलिस ने ये कार्रवाई की थी। वो मनसा से पुलिस की हिरासत से भाग निकला था। 1 अक्टूबर को सीआईए इंचार्ज टीनू को उसकी गर्लफ्रेंड से मिलाने के लिए सरकारी आवास पर लेकर गए थे। यहीं वह मौका देख फरार हो गया। पुलिस ने उसकी बहुत तलाश की। एयरपोर्ट पर आने-जाने वाले यात्रियों का पता लगवाया। लेकिन कुछ पता नहीं चला। राजस्थान में उसके छिपे होने की खबर आने पर पुलिस ने ये कार्रवाई की।

OYO के कमरे में गुप्त कैमरा, प्रेमी जोड़ों के वीडियो बना कर करते थे ब्लैकमेल: यूपी पुलिस ने अब्दुल सहित वसूली गिरोह के 4 को दबोचा, जामताड़ा से कनेक्शन

उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस ने ओयो (OYO) होटल्स के कमरों में गुप्त कैमरे लगाकर वीडियो बनाने और फिर ब्लैकमेल कर पैसे वसूलने वाले गिरोह के चार लोगों को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते दिनों एक लड़का अपनी महिला मित्र के साथ ओयो होटल में रुका था। इसके कुछ दिन बाद उसे होटल रूम का पर्सनल वीडियो भेजा गया। वीडियो भेजने वाले लोगों ने उससे पैसों की माँग की। जब लड़के ने पैसे भेजने से मना कर दिया तो इन लोगों ने वीडियो वायरल करने की धमकी दी थी। इसके बाद, लड़के ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

इस मामले में नोएडा सेंट्रल के एडीसीपी साद मियाँ खान ने कहा, “फेज 3 पुलिस स्टेशन में सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति अपनी महिला मित्र के साथ एक होटल में रुका था। लेकिन कुछ समय बाद उसे होटल में रुकने का वीडियो मिला और उससे रंगदारी की माँग की गई।”

उन्होंने आगे कहा कि इस मामले की जाँच करते हुए पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया था। इन आरोपितों ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया कि वे कुछ दिन पहले उसी होटल के कमरे में रुके थे और वहाँ कैमरा लगाया था। बाद में जब ये पीड़ित लड़का और उसकी दोस्त वहाँ गए तो इन लोगों ने वीडियो रिकॉर्ड कर पैसे की माँग की।”

पुलिस ने जानकारी दी कि इसके अलावा, गिरफ्तार आरोपितों ने एक गिरोह के बारे में भी बताया जो बैंक पासबुक, सिम, एटीएम और अन्य बैंक सुविधाओं से युक्त किट उपलब्ध कराता है। इसमें किट बेचने वाले रैकेट के दो व्यक्ति शामिल पाए गए हैं, जिनमें से एक को गिरफ्तार कर लिया गया है। इनके संबंध जामताड़ा से भी पाए गए हैं।”

एडीसीपी साद मियाँ खान ने खुलासा करते हुए कहा है कि इन लोगों ने हाल ही में एक कॉल सेंटर चलाने वाले अनुराग को एक किट बेची थी। अनुराग 3 अवैध कॉल सेंटर चला रहा था और ड्यूटी-फ्री आईफोन बेच रहा था जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है। अनुराग के लास लैपटॉप सहित विभिन्न सामग्री जब्त की गई है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपितों की पहचान खोड़ा निवासी अब्दुल वहाव, विष्णु सिंह निवासी गढ़ी चौखंडी, पंकज कुमार निवासी नोएडा और अनुराग कुमार निवासी विजय नगर गाजियाबाद के रूप में की है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि आरोपितों के खिलाफ नोएडा फेज 3 पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) 386 (मौत/गंभीर चोट के डर से रंगदारी) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने इन लोगों से 11 लैपटॉप, सात सीपीयू, 21 मोबाइल, 22 एटीएम कार्ड और अन्य कंप्यूटर सामग्री भी जब्त की है।

प्रयागराज में जुमे की नमाज के बाद इस्लामी भीड़ ने बरपाया था कहर, HC ने आरोपित फज़ल खान को दी अग्रिम जमानत: घटना के बाद से फरार था सपा पार्षद

प्रयागराज के अटाला क्षेत्र में 10 जून, 2022 को हुई हिंसा में आरोपित फ़ज़ल खान को इलाहबाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है। फ़ज़ल खान समाजवादी पार्टी से पार्षद भी है। घटना के बाद से वो फरार चल रहा था, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही थी। फ़ज़ल खान मस्जिद से निकली उस भीड़ को भड़काने में आरोपित है, जिसने पुलिसकर्मियों पर हमला किया था और शहर में हिंसा फैलाई थी। फ़ज़ल को यह अग्रिम जमानत शनिवार (22 अक्टूबर, 2022) को मिली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ़ज़ल खान पर प्रयागराज पुलिस ने कुल 3 केस दर्ज किए हैं, जिसमें से उसे 2 केसों में अग्रिम जमानत मिली है। हाईकोर्ट ने फ़ज़ल खान के मामले में प्रदेश सरकार से जवाब भी तलब किया है। उस पर आगजनी और पत्थरबाजी का भी आरोप है।

मुख्य आरोपित जावेद पंप ने रासुका को दी चुनौती

इससे पहले अटाला हिंसा के मुख्य आरोपित जावेद पम्प ने पिछले सप्ताह 15 अक्टूबर को हाईकोर्ट में खुद पर हुई रासुका (NSA) की कार्रवाई को इलाहबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में जावेद ने खुद पर लगे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को नियम विरुद्ध बताया है। जावेद की इस याचिका के बाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर के जवाब के लिए 2 सप्ताह का समय दिया है। इस याचिका पर सुनवाई 5 हफ्ते बाद होगी।

हिंसा के बाद से फरार इश्तियाक भी गिरफ्तार

अटाला हिंसा के बाद से अब तक फरार चल रहे आरोपितों की धर-पकड़ में जुटी पुलिस ने एक अन्य आरोपित इश्तियाक को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। इश्तियाक का नाम ‘भैया’ भी है। पुलिस के मुताबिक, वह अटाला हिंसा में सक्रिय रूप से शामिल था जिस पर तमाम धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ था। पुलिस ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि 19 अक्टूबर, 2022 को की है।

गौरतलब है कि प्रयागराज के करेली क्षेत्र में आने वाले अटाला में जुमे की नमाज़ के बाद 10 जून, 2022 को हिंसा भड़क गई थी। हिंसक भीड़ को नूपुर शर्मा के विरोध के नाम पर जुटाया गया था। बाद में भीड़ ने पुलिस बल पर हमला बोल दिया था जिसमें कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं थीं। इस घटना के बाद पुलिस ने कुल 95 नामजद और 5400 अज्ञात उपद्रवियों पर केस दर्ज किया था।

15 साल के लड़के का पादरी ने घर जाकर किया यौन शोषण, शिकायत के लिए परिजन 5 थाने भटके: 1 साल बाद सुनवाई, 3 पर केस दर्ज

महाराष्ट्र के पुणे में शुक्रवार (21अक्टूबर 2022) को 15 वर्षीय लड़के का यौन शोषण करने के आरोप में 3 पादरियों के खिलाफ पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। इस मामले का मुख्य आरोपित फादर विंसेंट परेरा फरार बताया जा रहा है। जबकि, दो अन्य पादरियों पर इस यौन उत्पीड़न को दबाने का आरोप लगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला सितंबर 2021 का है। हालाँकि, पीड़ित लड़के व उसके परिवार वालों की लाख कोशिशों के बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी। लेकिन, अब एक्टिविस्ट की सहायता के बाद आरोपित पादरियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

यौन शोषण केस की सजा भुगत चुका है पादरी, घर जाकर दूसरे लड़के को निशाना बनाया

रिपोर्ट के अनुसार, 15 वर्षीय लड़के के साथ यौन शोषण का मुख्य आरोपित पादरी विंसेंट परेरा यौन शोषण के एक अन्य मामले में पुणे की यरवदा जेल में 18 महीने बिता चुका है। तब, उसने साल 2018 में पैट्रिक हाई स्कूल में प्रिंसिपल रहते हुए 8वीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र के साथ मारपीट करते हुए अश्लील वीडियो दिखाए थे। इसके बाद, जब वह जमानत पर जेल से बाहर आया तो उसने 15 वर्षीय लड़के को अपने शिकार बनाया है।

हालिया घटना की बात करें तो आरोपित पादरी, पीड़ित लड़के के घर गया था। जहाँ, उसने लड़के का यौन उत्पीड़न किया। पीड़ित ने अपनी शिकायत में कहा है कि पीड़ित के परिवार के सदस्यों ने इस घटना के बारे में पुणे के पादरी थॉमस डाबरे और बॉम्बे के आर्कबिशप कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस को सूचित किया था। हालाँकि, दोनों ने परेरा के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की।

शिकायत लेकर दर-दर भटके परिजन

पीड़ित के परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि कथित यौन उत्पीड़न होने के बाद अगले तीन माह में शिकायत दर्ज कराने के लिए 5 थानों में गए थे। लेकिन, कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। हालाँकि, इसके बाद लेकिन अगस्त में पुणे के दो एक्टिविस्ट से संपर्क करने के बाद शिकायत दर्ज हो सकी है।

एक्टिविस्ट मारुति भापकर और डोमिनिक लोबो ने इस मामले को लेकर अगस्त महीने में पुणे पुलिस कमिश्नर से संपर्क किया था। इसके बाद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने सितंबर में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में जाकर पीड़ित लड़के के बयान दर्ज करवाए और पुलिस को नोटिस जारी करवाया। एक्टिविस्ट भापकर की शिकायत के जवाब में 30 सितंबर को हडपसर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है और बाद में मामला कोंढवा थाने ले जाया गया है।

नहीं गिरफ्तार हुए आरोपित

इस संबंध में पुणे के पुलिस कमिश्नर का कहना है कि मामले के मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है और अन्य दो आरोपितों पर लगे आरोपों की जाँच की जा रही है। हालाँकि, कोंढवा थाने के इंस्पेक्टर सरदार पाटिल ने कहा है कि मामले का मुख्य आरोपित परेरा अब भी फरार है चल रहा है। उन्होंने कहा है “परेरा फरार है लेकिन हम उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लेंगे। हमने बिशप और कार्डिनल को गिरफ्तार नहीं किया है क्योंकि ऐसा लगता है कि वे इस कृत्य में शामिल नहीं थे, लेकिन हमने उन्हें कोई क्लीन चिट नहीं दी है। हमने उनके खिलाफ अपराध की जानकारी होने के बावजूद शिकायत दर्ज नहीं करने का मामला दर्ज किया है।”

इस बीच, आरोपित थॉमस डाबरे ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा है, वह पोप और उनके कर्मचारियों के प्रति आभारी है। वह बोले, “यह पूरी बात मनगढ़ंत है। मैं केवल चर्च कानून के अनुसार कार्य करता हूँ। आपको यह समझना होगा कि मैं उन सिविल अधिकारियों के प्रति आभारी हूँ जिनकी मैं आज्ञा मानता हूँ। लेकिन मैं पोप और उनके कर्मचारियों के प्रति भी आभारी हूँ। मैंने उन्हें मामले की सूचना दी है और मैं वही कर रहा हूँ जो मुझे उनके द्वारा बताया गया था। मेरा काम केवल पुलिस को सूचित करना था, मेरा काम एफआईआर दर्ज करना नहीं था।”

वहीं, इस मामले में पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने पुणे के पाँच पुलिस स्टेशनों- हडपसर, कोंढवा, वानावाड़ी, बुंद गार्डन और पुणे रेलवे स्टेशनों पर दिसंबर, जनवरी और फरवरी में शिकायत की, लेकिन कहीं भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। फिर उन्होंने बॉम्बे के आर्कबिशप, कार्डिनल ग्रेसियस से इस मामले में जानकारी दी। इसके बाद, उन्होंने पुणे के फादर को इस मामले पर कार्रवाई करने के लिए कहा।

चर्च और पुलिस दोनों ने नहीं की मदद: परिवार का आरोप

इसके बाद अप्रैल में, पुणे में फादर विल्फ्रेड फ्रांसिस नाम के एक पादरी ने पुणे के फादर के कहने पर कोंढवा पुलिस स्टेशन पर शिकायत की थी। हालाँकि, पीड़ित के परिजनों के अनुसार पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित परिवार आरोपित पादरी को अच्छी तरह से जानता था। इसलिए ही वह उनके घर चला गया था।

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने चर्च और पुलिस दोनों से मदद माँगी थी। लेकिन, किसी ने भी उनका सहयोग नहीं किया। इसके बाद ही उन्हें एक्टिविस्ट से सहायता माँगनी पड़ी।

इस मामले में, पीड़ित परिवार की सहायता करने वाले एक्टिविस्ट मारुति भापकर ने कहा है कि दोनों ही पादरियों आर्कबिशप और कार्डिनल ग्रेसियस को मामले की पूरी जानकारी थी। दोनों ने मुख्य आरोपित को बचाने की कोशिश की है।

वहीं, पीड़ित परिवार की सहायता करने वाले एक अन्य एक्टिविस्ट डोमिनिक लोबो का कहना है “पॉक्सो एक्ट के तहत नियमों के अनुसार, संस्था के प्रभारी व्यक्ति को ऐसे मामलों की पुलिस को रिपोर्ट करने की आवश्यकता होती है। उनमें से किसी ने भी आरोपित के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस बहुत दबाव में है क्योंकि इस मामले में हाई-प्रोफाइल लोग शामिल हैं।”

दिवाली के दिन 15 लाख दीपों से जगमगाएगी अयोध्या: PM मोदी करेंगे रामनगरी में दीपोत्सव का शुभारंभ, CM योगी भी मौजूद रहेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) छोटी दिवाली के दिन यानी 23 अक्टूबर 2022 को भगवान राम की अयोध्या नगरी में रहेंगे। इस दिन छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार शाम को मोर दीपक जलाकर दीपोत्सव के त्योहार का शुभारंभ करेंगे। दीपोत्सव के लिए अयोध्या को सजाया जा रहा है। दिवाली के दिन 15 लाख दीप जलाया जाएगा, जो एक रिकॉर्ड होगा।

प्रधानमंत्री अयोध्या में लगभग 4 घंटे तक रहेंगे। इस दौरान शाम को राम की पैड़ी पर बन रहे मुख्य मंच पर पीएम मोदी, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राष्ट्रीय पक्षी मोर के रूप में बने दीप को जलाकर समारोह का शुभारंभ करेंगे।

अयोध्या में भूमि पूजन के बाद पीएम मोदी पहली बार अयोध्या जाएँगे। मुख्य मंच के ठीक सामने दीपों से राम मंदिर मॉडल बनाया जा रहा है। मंदिर मॉडल में लगभग 10,000 दीप सजाए जा रहे हैं। इसे इस प्रकार से तैयार किया जा रहा है, कि मंच पर बैठे अतिथियों की इस पर सीधी नजर पड़े।

इसके साथ ही सरयू नदी के घाट नंबर 10 पर एक भव्य भी रंगोली बनाई जाएगी। यह रंगोली फूलों से बनेगी। इसके लिए एक क्विंटल से अधिक फूलों की पंखुडियों का इस्तेमाल किया जाएगा।

दीपोत्सव के दौरान शोभायात्रा में 16 झाँकियाँ निकाली जाएँगी, जिनमें भगवान राम के जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक के प्रसंगों को दिखाया जायेगा। इसमें 10 देशों की टीम मंचन भी करेगी। लेजर और साउंड शो का रिहर्सल भी पूरा कर लिया गया है। 

इस आयोजन के लिए अयोध्या को ऐसे सजाया जा रहा है, जैसे इस बार राजा रामचंद्र साक्षात अयोध्या पधार रहे हों। अयोध्या में प्रवेश के लिए 26 तोरण द्वार बनाए गए हैं। शहर की सड़कों को चमकाया जा रहा है और रंगे-बिरंगे झालरों से सजाया जा रहा है। सफाई व्यवस्था के लिए 1000 कर्मचारी दिन-रात लगे हैं।

दीपोत्सव में VVIP मूवमेंट के कारण सुरक्षा व्यवस्था को भी चाक-चौबंद किया गया है। कदम-कदम पर सादी वर्दी में खुफिया विभाग और पुलिस के जवान तैनात होंगे। इस दौरान ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से अयोध्या पर नजर रखी जाएगी।

जिन्हें AAP बताती है ‘दुनिया का सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मंत्री’, उन्हें नहीं पता भगवान धन्वंतरि पुरुष हैं या महिला: ट्विटर पर ‘माँ’ बता कर दी शुभकामना, ट्रोल हुए तो किया डिलीट

दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री ने ट्विटर से लोगों को धनतेरस की शुभकामनाएँ दी हैं। हालाँकि अरविन्द केजरीवाल द्वारा भारत रत्न के योग्य और संसार के सबसे अच्छे शिक्षा मंत्री घोषित मनीष सिसोदिया को भी हिन्दू त्योहारों की थोड़ी और जानकारी लेने की जरूरत है। मनीष सिसोदिया ने अपने एक डिलीट किए जा चुके ट्वीट में लिखा, “स्वास्थ्य व समृद्धि की देवी माँ धन्वन्तरि से प्रार्थना करता हूँ कि सभी के जीवन में खुशहाली व सुख-शाँति बनाए रखें और सभी की मनोकामनाएँ पूरी करें। सभी देशवासियों को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएँ।”

मनीष सिसोदिया द्वारा डिलीट ट्वीट का स्क्रीनशॉट

कथित तौर पर दुनिया के ‘सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मंत्री’ को यह भी नहीं पता कि धन्वन्तरि एक देवता हैं न कि देवी। अपनी अज्ञानता के चलते नेटिज़ेंस ने उन्हें ट्रोल किया तब उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया। विक्रांत कुमार नाम के एक ट्विटर यूजर ने मनीष सिसोदिया को चुनावी हिन्दू कहा। उन्होंने लिखा, “भारत रत्न के काबिल, सबसे अच्छे शिक्षा मंत्री और आधुनिक भगत सिंह ने भगवान धन्वन्तरि को पुरुष से महिला में बदल दिया। ऐसा तब होता है जब आप ‘चुनावी हिन्दू’ हों।”

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ने मनीष सिसोदिया के ट्वीट पर तंज कसा है। उन्होंने लिखा, “सिर्फ चुनावों के समय मंदिर जाने और बाकी समय में हिन्दुओं को गाली देने वालों से ऐसा ही होता है।”

इसके अलावा कई अन्य नेटीजेंस ने मनीष सिसोदिया को हिन्दू त्योहारों के बारे में जानकारी दी। आख़िरकार सिसोदिया ने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया।

दरअसल सिसोदिया को हिन्दू त्योहारों के बारे में सच में सीखने की जरूरत है। धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहते हैं जो धन्वन्तरि भगवान की जयंती का भी दिन है। धन्वन्तरि को आयुर्वेद का भी देवता कहा जाता है। हिन्दू ग्रंथों के मुताबिक, समुद्र देवता और असुरों के बीच हो रहे समुद्र मंथन के दौरान अमृत का कलश ले कर भगवान धन्वन्तरि ही प्रकट हुए थे। साल 2016 से केंद्र सरकार ने इस दिन को ‘राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस’ के तौर पर स्वीकार किया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अपनी पार्टी के अमूमन उन्ही नेताओं का महिमामंडन करते है जिन पर या तो घोटालों के आरोप हों या उन्हें गिरफ्तार किया गया हो। शराब घोटाले में फँसने के बाद ऐसा ही उन्होंने मनीष सिसोदिया के साथ भी किया था और उनके लिए ‘भारत रत्न’ की माँग कर डाली थी।

केजरीवाल ने ऐसा ही अपने मंत्री सत्येंद्र जैन के ठिकानों पर ED की छापेमारी के दौरान किया था। तब उन्होंने जैन को ‘पद्म विभूषण’ देने की माँग की थी।

80 साल के पूर्व राष्ट्रपति को भरी सभा से बाहर निकाला, चीन के PM की भी कर दी छुट्टी: कैमरे में कैद हुई शी जिनपिंग की ‘तानाशाही’

चीन के राष्ट्रपति के तौर पर लगातार तीसरी बार सत्ता हथियाने के बाद शी जिनपिंग (China President Xi Jinping) और भी ताकतवर बनकर उभरे हैं। इसके साथ ही वो अपने विरोधियों को कुचलने का काम शुरू कर दिया। एक बैठक के दौरान देश के पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ को जबरन बाहर निकाल दिया गया। इसके साथ ही जिनपिंग ने प्रधानमंत्री ली केकियांग को भी पार्टी लीडरशिप से हटा दिया है। 

चीन में कॉन्ग्रेस की 20वीं बैठक यानी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) की बैठक के दौरान चीन के राष्ट्रपति रह चुके 80 वर्षीय हू जिंताओ को जबरन मीटिंग से निकाल दिया गया। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बगल में बैठे हू जिंताओ को दो सुरक्षाकर्मियों ने कुर्सी से उठाया और मीटिंग हॉल से बाहर ले गए। इसका वीडियो भी सामने आया है।

वीडियो में दिख रहा है कि हू जिंताओ इस दौरान शी जिनपिंग से कुछ कहते नजर आए। इस दौरान वे वापस कुर्सी पर बैठने की कोशिश भी किए, लेकिन दो मार्शल उनकी बाँह में हाथ डालकर बाहर लेकर चले गए।

कहा जा रहा है कि हू जिंताओ पार्टी में सुप्रीम लीडर या पारामाउंट की हैसियत रखते हैं, लेकिन अब शीन जिनपिंग ने उन्हें भी किनारे कर दिया है। इस वीडियो को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि जिंताओ का स्वास्थ्य खराब चल रहा है, इसलिए वे मार्शल के सहयोग से बैठक से बाहर निकल गए। हालाँकि, इसको लेकर किसी तरह आधिकारिक बयान नहीं आया है।

जिंताओ कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और 15 मार्च 2003 से 14 मार्च 2013 तक चीन के राष्ट्रपति थे। पार्टी संविधान के मुताबिक दो कार्यकाल पूरे होने के बाद उन्होंने पद छोड़ दिया था। उनके पद छोड़ने के बाद शी जिनपिंग साल 2013 में चीन के राष्ट्रपति बने थे।

वहीं, शी जिनपिंग ने चीन के पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले प्रधानमंत्री ली केकियांग को भी पार्टी के वरिष्ठ पद से हटा दिया है। उनके साथ-साथ तीन और शीर्ष नेताओं को हटाया गया है। अब ये चारों नेता दोबारा कम्युनिस्ट पार्टी के ताकतवर पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य के रूप में दोबारा नियुक्त नहीं किया है। 

प्रधानमंत्री ली केकियांग के साथ 7 सदस्यीय सबसे ताकतवर पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमिटी से जिन तीन अन्य नेताओं को हटाया गया है, उनमें शंघाई पार्टी के प्रमुख हान झेंग, पार्टी एडवाइजरी काउंसिल के प्रमुख वांग यांग और नेशनल पीपुल्स कॉन्ग्रेस के प्रमुख ली झांशु शामिल हैं।

लगातार सात दिनों तक चली कॉन्ग्रेस की बैठक खत्म हो गई है। इस बदलाव के बाद माना जा रहा है कि शी जिनपिंग के आजीवन चीन का राष्ट्रपति बने रहना लगभग तय हो गया है। अब शी जिनपिंग अब माओत्से तुंग, माओ जेडॉन्ग के नाम से भी जाना जाता है, के बाद चीन के सबसे शक्तिशाली नेता बन गए हैं।

साल 2021 की कॉन्ग्रेस की बैठक में राष्ट्रपति जिनपिंग के खिलाफ बयानबाजी को अपराध की कैटेगरी में डालते हुए सजा का प्रावधान किया गया था। इसके साथ ही दो कार्यकाल तक राष्ट्रपति रहने की बाध्यता भी खत्म कर दी गई थी।

खूंखार कुत्ते ने 5 साल की मासूम को गर्दन पर बुरी तरह नोचा, अस्पताल में मौत: परिवार ने बताया- बच्ची चॉकलेट लेने निकली थी

देशभर में कुत्तों का कहर बढ़ता जा रहा है। कभी पालतू तो कभी आवारा कुत्ते लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में 5 साल की मासूम बच्ची पर आवारा कुत्ते के हमले की घटना सामने आई है। कुत्ते के हमले के बाद बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई थी। जिसके बाद उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जहाँ, इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना खरगोन जिले के बेड़िया थाना अंतर्गत बांकवाँ गाँव में शुक्रवार (21 अक्टूबर 2022) शाम की है। घरवालों ने बताया कि 5 साल की मासूम बच्ची सोनिया उसके घर के पास ही स्थित एक दुकान में चॉकलेट लेने के लिए गई थी। उसी समय आवारा कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया था।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कुत्ते ने हमला करते हुए सोनिया की गर्दन पकड़ ली थी। इस दौरान, वहाँ मौजूद लोगों ने कुत्ते के चंगुल से बच्ची को छुड़ाने की काफी कोशिश की। लेकिन, कुत्ता बच्ची को नहीं छोड़ रहा था। हालाँकि, बाद में काफी मशक्कत के बाद उसने बच्ची को छोड़ दिया।

इसके बाद, लहूलुहान हालत में उसे नजदीकी सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जहाँ देर रात तक उसका इलाज चल रहा था। हालाँकि, अधिक खून बह जाने के कारण इलाज के दौरान ही उसने दम तोड़ दिया।

इससे पहले, मध्य प्रदेश के सतना जिले में भी ऐसी ही घटना सामने आई थी। जहाँ, शनिवार (15 अक्टूबर 2022) को जिले के अमरपाटन थाना क्षेत्र अंतर्गत इटमा कोठार में जर्मन शेफर्ड ने अपने ही मालिक पर हमला कर बुरी तरह जख्मी कर दिया था। इस कुत्ते को पीड़ित सनी के भाई ने हमले से 4 दिन पहले ही राजधानी भोपाल से भेजा था।

सनी ही हर रोज जर्मन शेफर्ड कुत्ते को खाना-पानी देता और उसका ख्याल रखता था। शनिवार को घर में कुछ बच्चे खेल रहे थे और कुत्ता खुला घूम रहा था। ऐसे में, सनी ने कुत्ते को बाँधने की कोशिश की, इसी दौरान कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया। कुत्ते ने सीधे सनी की गर्दन पकड़ ली थी। किसी तरह सनी ने अपनी गर्दन छुड़ाई तो उसने सनी के हाथ, चेहरे और सिर पर हमला कर दिया। इसके बाद, सनी किसी तरह बच पाया। पीड़ित सनी को स्थानीय हॉस्पिटल और फिर जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। फिलहाल, उसकी हालत स्थिर बनी हुई है।