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18 सालों में 1 रुपए के नोट से ₹500 तक पहुँच गए गाँधी, जानें उससे पहले रहती थी किसकी तस्वीर: लक्ष्मी-गणेश पर चर्चा के बीच भारतीय करेंसी का इतिहास

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल (Delhi CM & AAP Chief Arvind Kejriwal) ने भारतीय करेंसी पर एक तरफ महात्मा गाँधी और दूसरी तरफ देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की तस्वीर छापने की माँग करके राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि देश तभी समृद्ध होगा, जब देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलेगा।

करेंसी नोट की चर्चा होने के बाद अब लोगों में जिज्ञासा हो रही है कि महात्मा गाँधी की तस्वीर नोटों पर कब से क्यों छप रहे हैं। क्या शुरू से ही महात्मा गाँधी की तस्वीर नोटों पर थी? दरअसल, नोटों पर महात्मा गाँधी की तस्वीर पहली बार उनकी 100वीं जयंती पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सन 1969 में छापा था। यह नोट 1 रुपए का था। इस तस्वीर में महात्मा गाँधी को वर्धा (महाराष्ट्र) के सेवाग्राम आश्रम में बैठे हुए दिखाया गया था।

इसके बाद सन 1987 में 500 रुपए के नोट को महात्मा गाँधी की तस्वीर के साथ दोबारा जारी की गई। इसके बाद सन 1996 में RBI ने 100 रुपए के साथ-साथ 10 रुपए के नोटों की सीरीज को महात्मा गाँधी की तस्वीर के साथ जारी किया। इस साल से छपने वाले लगभग हर नोट पर महात्मा गाँधी की तस्वीर छपने लगी।

हालाँकि, इसके बीच सन 1980 में जो नए नोट जारी किए थे, उसमें भारत के विभिन्न प्रतीकों को दर्शाया गया था। ये प्रतीक भारत की प्रगति को दर्शा रहे थे। उस समय 1 रुपए के नोट पर ऑयल रिंग, 2 रुपए के नोट पर आर्यभट्ट, 5 रुपए के नोट पर किसान एवं ट्रैक्टर, 10 रुपए के नोट पर राष्ट्रीय पक्षी मोर और 20 रुपए के नोट पर कोणार्क के सूर्य मंदिर को दर्शाया गया था।

महात्मा गाँधी की तस्वीर से पहले की करेंसी

देश में मुद्रा छापने का काम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) करता है। ब्रिटिश इंडिया सरकार ने इस बैंक की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को किया था। शुरू में RBI का मुख्यालय कोलकाता में था। हालाँकि, 1937 में स्थानांतरित होकर हमेशा के लिए मुंबई चला गया। निजी स्वामित्व वाला यह बैंक साल 1949 में राष्ट्रीयकरण के बाद पूर्णत: सरकारी स्वामित्व वाला हो गया।

RBI ने पहली बार सन 1938 में 5 रुपए का नोट जारी किया था। इस नोट पर ब्रिटेन के राजा जॉर्ज VI की तस्वीर थी। इसके बाद इसी तरह के 10 रुपए, 100 रुपए, 1000 रुपए और 10,000 रुपए का नोट जारी किया था। इन नोटों पर उस RBI के दूसरे गवर्नर जेम्स टेलर के हस्ताक्षर थे। जॉर्ज की तस्वीर वाले ये नोट अगले 11 साल तक यानी 1948 तक चलन में रहे।

सन 1947 में देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद भारतीय करेंसी को नए सिरे से डिजाइन किया गया। साल 1949 में नए नोटों पर ब्रिटिश राजा जॉर्ज VI की तस्वीर को हटा दिया गया। भारतीय नोटों पर जॉर्ज की तस्वीर की जगह पर राष्ट्रीय चिह्न सारनाथ के अशोक स्तंभ को लगाया गया।

साल 1954 में RBI ने तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर की तस्वीर के साथ 1,000 रुपए का नोट छापा। इसके साथ ही 5,000 रुपए के नोटों पर गेटवे ऑफ इंडिया की तस्वीर और 10,000 रुपए के नोट पर अशोक स्तंभ की तस्वीर जारी की गई थी। सन 1978 में उच्च मूल्य वाले नोटों को छापना बंद कर दिया गया।

महात्मा गाँधी की तस्वीर पर RBI का तर्क

सन 1996 के बाद से लगभग हर भारतीय नोट पर महात्मा गाँधी की तस्वीर छपने लगी। इसके पीछे RBI ने तर्क दिया था कि महात्मा गाँधी की तस्वीर से पहले जितने प्रतीकों का इस्तेमाल नोटों पर किया जाता रहा है, उनका आसानी से नकल किया जा सकता था।

RBI ने कहा कि इन प्रतीकों का इसलिए नकल आसान है, क्योंकि ये निर्जीव वस्तुएँ हैं। इसके विपरीत, मानव चेहरे की नकल करना मुश्किल है। बता दें कि भारतीय नोटों पर महात्मा गाँधी की जो तस्वीर इस्तेमाल की जाती है, वह कैरिकेचर नहीं है।

महात्मा गाँधी के साथ ब्रिटिश राजनेता लॉर्ड फ्रेडरिक विलियम पेथिक-लॉरेंस (फोटो साभार: विकिमिडिया)

सन 1946 में तत्कालीन वायसराय के निवास स्थान यानी आज के राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली के बाहर महात्मा गाँधी की तस्वीर ली गई थी। इस तस्वीर में महात्मा गाँधी मुस्कुरा रहे हैं। तस्वीर में महात्मा गाँधी के साथ एक और व्यक्ति खड़ा है, जिसका नाम लॉर्ड फ्रेडरिक विलियम पेथिक-लॉरेंस है। फ्रेडरिक ब्रिटेन के राजनेता थे। इसी तस्वीर को क्रॉप करके भारतीय नोटों पर छापा जाता है।

नोटों पर अन्य सेनानियों की तस्वीर की माँग

भारतीय नोटों पर महात्मा गाँधी की तस्वीर छापने के बाद अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरें भी नोटों पर छापने की माँग उठी थी। साल 2014 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में कहा था, “RBI के एक पैनल ने बैंक नोटों पर किसी अन्य राष्ट्रीय नेता की तस्वीर को शामिल करने के खिलाफ यह कहते हुए निर्णय लिया है कि महात्मा गाँधी की तुलना में कोई अन्य व्यक्तित्व देश के लोकाचार का बेहतर प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है।”

दरअसल, अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को लेकर सबसे बड़ी समस्या ये आ रही थी, बैंक नोटों पर किसको शामिल किया जाए और किसे छोड़ा जाए। अगर किसी एक को शामिल किया जाता है तो दूसरे लोग दूसरे सेनानियों के लिए ऐसी ही माँग करेंगे। इस तरह विवादों से बचने के लिए महात्मा गाँधी को चुना गया।

मुस्लिम PM का रट्टा मारने वालो, आक्रांताओं को बाप मानना बंद करो… ब्रिटेन में कामगार बन कर गए थे हिन्दू, आज 51000 को देते हैं रोजगार: भारत में आक्रमण-धर्मांतरण करने कौन आया?

ऋषि सुनक जब से ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बने हैं, भारत में लिबरल और सेक्युलर गिरोह का एक तबका ज्ञान बाँटने और नसीहतें देने पर फिर से उतर आया है। कॉन्ग्रेस को मुस्लिम प्रधानमंत्री चाहिए तो असदुद्दीन ओवैसी को एक हिजाबी महिला को प्रधानमंत्री के रूप में देखना है। जिस देश की सर्वोच्च पद पर एक जनजातीय समाज की महिला हैं, उस देश में इस तरह का प्रपंच चलाने वालों को इतिहास में भी झाँकना चाहिए।

क्योंकि वर्तमान में तो सबको दिख रहा है कि जहाँ भारत में मुस्लिम कट्टरपंथी ‘सर तन से जुदा’ का नारा लगा रहे हैं और हत्याएँ भी कर रहे हैं, वहीं ब्रिटेन में रह रहे हिन्दू या भारतीय समाज के लोग वहाँ की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। ब्रिटेन में आज 8 लाख से भी अधिक हिन्दू हैं, जिनमें 70% अकेले गुजरात से हैं। इसके बाद पंजाब (15%) का नंबर आता है। आज UK में 190 से भी अधिक मंदिर हैं और वहाँ के सामाजिक कार्यों में भी ये रुचि लेते हैं।

ब्रिटेन में ईसाइयों और मुस्लिमों के बाद सबसे बड़ी जनसंख्या हिन्दुओं की ही है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारतीय नागरिकों ने ब्रिटेन का रुख किया गया। भारतीय नागरिकों को ब्रिटेन ने अपनी सेना में रखा था, यहाँ की महिलाओं को ब्रिटिश अधिकारियों ने अपने घर में बच्चों के देखभाल के लिए रखा था। इससे पहले दादाभाई नैरोजी (1825-1917) जैसे विद्वान भी हुए, जो 20वीं सदी शुरू होने से पहले ही ब्रिटेन में सांसद के पद पर पहुँचे।

बाद में वो कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भी रहे। 2002 के बाद से ब्रिटेन जाने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियरों में से दो तिहाई भारत से ही जा रहे हैं। अगर ब्रिटिश इंडियंस की बात करें तो जहाँ ये ब्रिटेन में 2% ही हैं, लेकिन वहाँ के डॉक्टरों में से 12% इसी समुदाय से हैं। चूँकि वहाँ रह रहे भारतीयों में से 85% हिन्दू ही हैं, इसीलिए स्वाभाविक है कि इनमें हिन्दुओं की जनसंख्या ज्यादा होगी। वहाँ के व्यापार का 4.4% हिस्सा हिन्दुओं के पास है और वो 51,000 लोगों को नौकरी देते हैं।

भारत में मुस्लिमों की बात करें तो स्थिति इसके एकदम उलट है। यहाँ अरब से इस्लामी आक्रांता आए, सूफी आए। एक ने तलवार के दम पर और एक ने चमत्कार के दम पर धर्मांतरण किया। भारत के अधिकतर मुस्लिम धर्मांतरित मुस्लिम हैं, जिनके पूर्वज पहले हिन्दू ही हुआ करते थे। लेकिन, कालांतर में ये अपने अरबी समाज से ज्यादा कट्टर होते चले गए। इसका एक परिणाम हमें देश का विभाजन और 20 लाख मौतों के रूप में देखने को मिला।

इसका परिणाम हमें जम्मू कश्मीर में देखने को मिला। इसका परिणाम हमें PFI जैसे संगठन के रूप में देखने को मिला, जो हजारों मुस्लिमों की भर्ती कर के भारत सरकार से युद्ध छेड़ने की तैयारी में था। 1926 में स्वामी श्रद्धानंद से लेकर 2022 में कन्हैया लाल तेली की हत्या तक, इस्लामी कट्टरपंथियों का रुख वही रहा है। और पीछे जाएँ तो अर्जन सिंह और तेग बहादुर जैस सिख गुरुओं की हत्याएँ याद आएँगी। भारतवर्ष पर अपने पहले ही आक्रमण में इस्लामी आक्रांताओं ने राजा दाहिर का सिर काट कर खलीफा को उपहार के रूप में भेजा था।

भारतीय ब्रिटेन में ऐसे नहीं घुसे थे। जब ईस्ट इंडिया कंपनी यहाँ ‘कारोबार’ करने आई थी, तब यहाँ वो कई भारतीयों को अपने साथ ले जाती थी। जहाज से ब्रिटेन जाने वाले ये भारतीय वहाँ से लौटने में अक्षम होते थे, इसीलिए उनमें से कई वहीं बस गए। भारतीय महिलाओं को बच्चों की देखभाल के लिए ब्रिटिश अधिकारी हायर करते थे (आया, नैनी, अम्मा इत्यादि) और यहाँ कार्यकाल पूरा हो जाने पर कइयों को अपने साथ ले जाते थे। नौकरों को लेकर भी ऐसा ही था।

भारत में तो मुस्लिम भी आक्रांता बन कर आए थे और ब्रिटिश भी बाद में कारोबारी से आक्रांता बन गए। लेकिन, आज ब्रिटेन हो या अरब, भारतीय हर जगह अपना परचम लहरा रहे हैं और वहाँ की अर्थव्यवस्था को चला रहे हैं। भारतीयों को अंग्रेजों ने अपने जहाजों और बंदरगाहों पर काम करने के लिए हायर किया था। यही कारण है कि ब्रिटेन के पोर्ट टाउन्स में ही सबसे पहले के ब्रिटिश इंडियंस मिलेंगे। 19वीं सदी खत्म होते-होते 40,000 भारतीय छात्र, राजनयिक, कारोबारी, विद्वान, सैनिक और जहाज पर काम करने वाले लोग यूके में बस चुके थे।

सन् 1931 के आँकड़े बताते हैं कि उस समय ब्रिटेन में 2000 भारतीय छात्र थे। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन में कामगारों की भारी कमी थी, ऐसे में उन्होंने रेलवे में भारत के मजदूरों और कर्मचारियों को हायर करना शुरू कर दिया। उन्हें यहाँ इस क्षेत्र में काम का अनुभव भी था। नॉर्थ-वेस्ट यूके में टेक्सटाइल सेक्टर में गुजरातियों का दबदबा बढ़ता चला गया। जब ‘नेशनल हेल्थ सर्विस’ का गठन हुआ तो यहाँ से कई मेडिकल प्रोफेशनल वहाँ गए।

केन्या, युगांडा और ज़ांज़ीबार से निकाले जाने के कारण 1960-70 के दशक में ईस्ट अफ्रीका में रह रहे कई भारतीय ब्रिटेन पहुँचे। इस तरह भारतीयों ने काम के लिए ब्रिटेन या किसी भी जगह को को केंद्र बनाया, आक्रमण या धर्मांतरण के लिए नहीं। आज कोरोना काल में ब्रिटेन में भारत के मंदिरों ने समाजसेवा और जागरूकता फैलाने का जो कार्य किया है, उसकी सराहना वहाँ के लोग भी करते हैं। यहाँ के मस्जिदों ने कोरोना काल में क्या किया, इसकी एक मिसाल दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के अड्डे से पता चल जाता है।

किस तरह जमातियों ने देश के अलग-अलग जगहों पर छिप कर कोरोना फैलाया और उन मुस्लिम बहुल इलाकों में जाने वाले पुलिसकर्मियों एवं मसिकल प्रोफेशनल्स पर हमले हुए, इसकी कई ख़बरें आपको मिल जाएँगी। जहाँ तक ऋषि सुनक की बात है, उनके पूर्वज भी ब्रिटेन आक्रमण या धर्मांतरण के लिए नहीं गए थे। जहाँ उनके पिता एक जनरल फिजिसियन थे, उनकी माँ सॉउथम्पटन में एक फार्मेसी चलाती थीं। पंजाबी मूल के उनके ग्रैंडपेरेंट्स 1960 के दशक में ईस्ट अफ्रीका से इंग्लैंड गए थे।

विंचेस्टर ऑक्सफ़ोर्ड में पढ़ाई करने वाले ऋषि सुनक शाकाहारी हैं, बीफ नहीं खाते हैं और शराब का सेवन भी नहीं करते हैं। उनके कामकाज वाली टेबल पर एक भगवान श्रीकृष्ण की छोटी सी प्रतिमा होती है। वो ब्रिटेन को अपना घर मानते हैं, लेकिन कहते हैं कि उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक जड़ें भारत की हैं। उनके दादा ने ‘वैदिक सोसाइटी हिन्दू मंदिर’ की स्थापना की, जहाँ वो अक्सर जाते हैं। सांसद बनने के बाद उन्होंने भगवद्गीता पर शपथ ली।

बतौर वित्त मंत्री No 11, Downing Street स्थित उनके सरकारी आवास में दीवाली के कार्यक्रम हुआ करते थे। उन्हें घर में रंगोली बनाते हुए और दीये जलाते हुए भी 2020 में देखा गया था। उनका कहना है कि जीवन में परिवार का बड़ा महत्व है और बच्चों में परिवार ही संस्कार देता है, ये उन्होंने काफी पहले ही सीख लिया था। उन्होंने मंदिर में जाकर अपने परिवार द्वारा खाना बनाने और भोजन लोगों में बाँटने की बात भी कही थी।

जो लोग भारत में मुस्लिम प्रधानमंत्री की बात करते हैं, क्या वो नहीं जानते कि ये एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है और यहाँ प्रधानमंत्री चुना जाता है, नियुक्त नहीं किया जाता। जिस हिजाब के कारण कर्नाटक में हिंसा हुई, उस हिजाब को पहनने वाली प्रधानमंत्री आखिर किसी को क्यों चाहिए? आक्रांताओं को अपना ‘बाप’ मानने वालों को देश क्यों स्वीकार करे? औरंगजेब और टीपू सुल्तान जैसों की इबादत करने वाले ये तो बताएँ कि क्या ब्रिटेन में बसे भारतीय वहाँ के दुश्मनों के गुण गाते हैं?

भारत में मुस्लिम आक्रांता और धर्मांतरण कराने वाले बन के आए और सैकड़ों वर्षों तक राज़ किया, फिर भी आज उन्हें सब्सिडी मिलती है। यहाँ तक कि हज भी वो सरकारी पैसे से करते रहे हैं। जब इस्लामी आक्रांताओं का राज़ था, हिन्दुओं को ‘जजिया’ टैक्स देना होता था। अपना तीर्थ घूमने के लिए भी टैक्स देना होता था। उनके 30,000 मंदिर ध्वस्त कर दिए गए। ब्रिटेन में भारतीयों ने चर्च ध्वस्त किए? टैक्स वसूला? सब्सिडी लिया? नहीं। वो वहाँ की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे।

जो लोग मुस्लिम प्रधानमंत्री की बात कर रहे हैं, वो पहले कश्मीर में हिन्दू मुख्यमंत्री की बात करें। मक्का-मदीना में गैर-मुस्लिमों की एंट्री की बात करें। पंजाब में हिन्दू मुख्यमंत्री की बात करें। क्या इन्होंने कभी अरब देशों में हिन्दू शासक की वकालत की है? इन्हें हिजाबी पीएम तो चाहिए, लेकिन कोई मुस्लिम लड़की तिलक लगा ले तो ये उसे ‘मुर्तद’ बताते हुए शिर्क करने का आरोप लगाते हैं, इनसे ये बर्दाश्त नहीं होता। ब्रिटिश भारतीय समुदाय को लेकर ये भसड़ आपने कभी सुनी है?

जहाँ तक भारत की बात है, खुद सोनिया गाँधी का इटली में जन्म हुआ था और वो 10 वर्षों तक रिमोट कंट्रोल से सत्ता चलाती रहीं। इस दौरान अल्पसंख्यक सिख समाज के मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री रहे। भारत में ज़ाकिर हुसैन, फखरुद्दीन, और अब्दुल कलाम के रूप में 3 मुस्लिम राष्ट्रपति हुए। ज्ञानी जैन सिंह राष्ट्रपति बने, जो सिख समाज के थे। सोनिया गाँधी रोमन कैथोलिक ईसाई समुदाय से हैं। ऐसे में भारत को ज्ञान की ज़रूरत ही नहीं है। भारत में पारसी समुदाय से भी 3 मुख्य न्यायाधीश रहे हैं।

यहाँ सबसे बड़ा सवाल तो ये उठता है कि जब बात अल्पसंख्यक की होती है तो सिर्फ मुस्लिमों की ही क्यों? सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और यहूदी प्रधानमंत्री की बात क्यों नहीं करते ये लोग? क्योंकि मुस्लिम आज मेजोरिटी हैं, माइनॉरिटी नहीं। जितनी यूके की पूरी जनसंख्या है, उससे तीन गुना ज्यादा तो भारत में सिर्फ मुस्लिम हैं। ऐसे में उनके तुष्टिकरण के लिए ऐसा किया जाता है। अब मुस्लिम प्रधानमंत्री का रट्टा मारने वाले ही बताएँ कि जब इस पर पर उन्हें मुस्लिम ही चाहिए तो वो बाकी के दिनों में सेक्युलरिज्म के झंडाबरदार क्यों बने रहते हैं?

इस साल 1.62 करोड़ पर्यटक पहुँचे जम्मू कश्मीर, 75 सालों में ये सबसे बड़ा आँकड़ा: अनुच्छेद-370 हटने के बाद बदलाव, पहली बार ठंड में भी खुले रहेंगे कई स्थल

कश्मीर को यूँ ही नहीं भारत का स्‍वर्ग कहा जाता है। वहाँ की छटा ही इतनी निराली है क‍ि जो भी एकबार वहाँ जाता है, मंत्रमुग्‍ध हो जाता है। कश्‍मीर निःसंदेह आज भी भारत में सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है और लगभग सभी यात्रियों की यात्रा की विश लिस्‍ट में यह शामिल होता है। धारा 370 हटने के बाद यहाँ यात्रियों की संख्या में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्वतंत्र भारत के 75 सालों के इतिहास में पहली बार (वर्ष 2022) में जम्मू-कश्मीर में 1.62 करोड़ पर्यटक आए हैं।

केंद्र शासित प्रदेश में इस बढ़े हुए पर्यटन ने विभिन्न क्षेत्रों में सबसे बड़ा रोजगार पैदा किया है। इस प्रकार एक रचनात्मक दृष्टिकोण, परिवर्तनकारी पहल और अपने लोगों, संस्कृति और समाज के लिए जम्मू-कश्मीर को सशक्त बनाने से यहाँ चौतरफा विकास हो रहा है। केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटन उद्योग को 786 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें पिछले कुछ महीनों में यह क्षेत्र अब तेजी से विकास कर रहा है।

हालाँकि, कड़ाके की ठंड और भारी बर्फबारी के कारण घाटी के अधिकांश हिस्से सर्दियों के दौरान बंद रहते हैं, जिससे यात्रा करना मुश्किल हो जाता है।कुछ लोकप्रिय पर्यटन स्थल जैसे करनाह, सोनमर्ग और गुरेज आमतौर पर कम दृश्यता और बर्फबारी के कारण पर्यटकों के लिए बंद रहते हैं। अब, 70 वर्षों के बाद, इलाके के पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सभी तीन स्थान सर्दियों के महीनों में पर्यटकों के लिए खुले रहेंगे।

‘टाइम्‍स ट्रेवल’ की र‍िपोर्ट के मुताबिक, कथ‍ित तौर पर, सरकार, 70 वर्षों में पहली बार, उन स्थानों (करनाह, सोनमर्ग और गुरेज) पर एडवेंचर खेल और अन्य गतिविधियों को शुरू करने की योजना बना रही है, ताकि न केवल पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो, बल्कि उनके अनुभव को भी बढ़ाया जा सके।

हाल ही में, इस मनोरम राज्य में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास में, प्राधिकरण पर्यटकों के लिए नए वेंचर्स खोल रहे हैं। पिछले तीन वर्षों के दौरान, सरकार ने उत्तर में गुलमर्ग के प्रसिद्ध स्कीइंग गंतव्य से परे अन्य जगहों पर कश्‍मीर में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने की पूरी कोशिश की है। सड़कों के अवरुद्ध होने के कारण दुर्गम रहने वाले बर्फीले क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

रिपोर्ट की मानें तो नए प्रस्तावित स्की ढलानों को अच्छी कनेक्टिविटी के साथ बर्फीले क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा। हालाँकि, गुलमर्ग शहर सर्दियों के दौरान पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है, बाकी जगहों पर अपेक्षाकृत कम पर्यटक आते हैं। रिपोर्ट के अनुसार मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में दूधपथरी सूची में नवीनतम होगा और दोनों गंतव्यों तक सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है।

इस बीच, यह भी बताया गया है कि कनेक्टिविटी में सुधार के लिए जम्मू-कश्मीर में बर्फीले इलाकों में हेलीकॉप्टर सेवाएँ शुरू की जाएँगी। पर्यटक ज्यादातर गर्मी के महीनों के दौरान इस जगह की यात्रा करना पसंद करते हैं, लेक‍िन नई पहल से पर्यटक अब पूरे वर्ष जम्मू और कश्मीर के शानदार नजारों का लुफ्त उठा सकेंगे।

शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने से स्थानीय और पर्यटन पर निर्भर लोगों के लिए रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही कश्मीर को शीतकालीन पर्यटन स्थल के रूप नई पहचान म‍िलेगी।

‘उसने पहली असफल शादी की बात छिपाई’: सुष्मिता सेन के भाई ने अपनी पत्नी को बताया ‘ड्रामा क्वीन’, मारपीट और गाली बकने का लगा था आरोप

अभिनेत्री चारु असोपा (Charu Asopa) और राजीव सेन (Rajeev Sen) के तलाक की चर्चाएँ जोरों पर हैं। पत्नी चारु असोपा के मीडिया में गंभीर आरोप लगाने के बाद सुष्मिता सेन के भाई ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि चारु ने मीडिया जो भी बताया है, वह पूरी तरह झूठ है।

राजीव ने कहा, “इसीलिए मैं उसे ड्रामा क्वीन कहता हूँ। सबसे पहली बात… अगर उसे तलाक ही चाहिए तो वो मुझे और मेरी फैमिली को डायरेक्ट फोन कर सकती है। इस चीज के लिए मीडिया को कॉल करने की क्या जरूरत है?”

राजीव सेन ने आगे कहा, “वो स्टेबल इंसान नहीं है। उसने मुझसे अपनी पहली असफल शादी के बारे में छिपाया। तलाक लेकर अपने जीवन में आगे बढ़ने के बजाए वह मीडिया में मेरे खिलाफ झूठे आरोप लगा रही है कि मैं महीनों तक उसे छोड़कर गायब हो जाता था, उसे गालियाँ देता हूँ, उसके साथ मैंने मार-पीट की है। सच तो यह है कि मैंने कभी भी मीडिया से कुछ नहीं कहा। केवल उसके आरोपों का जवाब देते हुए खुद को डिफेंड किया है। मैं अपनी बेटी की सेफ्टी को लेकर परेशान हूँ, क्योंकि वो उसके पास है। अपनी बेटी को प्रोटेक्टशन देने के लिए मैं एक्शन लूँगा। मैं भी चारु और उसके परिवार के बारे में बहुत कुछ कह सकता हूँ, लेकिन उनका अभी भी सम्मान करता हूँ।”

बता दें कि सुष्मिता सेन के भाई-भाभी ने जून 2019 में शादी की थी। कुछ दिनों बाद ही इनके बीच मनमुटाव की खबरें सामने आने लगी थीं। जिसके बाद इन्होंने अलग होने का फैसला किया था, लेकिन अपनी बेटी के लिए दोनों ने अपने रिश्ते को एक और मौका देने का फैसला किया था।

इस बार चारु ने राजीव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, “राजीव हर झगड़े के बाद हफ्तों या महीनों के लिए गायब हो जाता था और मुझसे संपर्क के सभी साधनों से ब्‍लॉक कर देता था, ताकि मैं उस तक न पहुँच सकूँ और न ही उसके ठिकाने को जान सकूँ। लॉकडाउन से कुछ दिन पहले वह मुझे तीन महीने के लिए छोड़ कर चला गया था। उस दौरान मैं अकेला थी।

‘तुम्हें जहन्नुम में भेज दूँगा’: असलम उर्फ़ ‘चक्कू’ ने VHP नेता के सीने पर तमंचा रख कर दिया फायर, संगठन का सवाल – पुलिस रोकेगी या हिन्दू खुद रोकें?

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के नेता विकास मिश्रा पर जानलेवा हमले की खबर है। हमलावर का नाम असलम उर्फ़ चक्कू है। हमने में VHP नेता बाल-बाल बचे हैं। उन्होंने अपने साथियों सहित आरोपित को दौड़ा कर पकड़ लिया और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया है। असलम को जेल भेज दिया गया है। घटना सोमवार (24 अक्टूबर, 2022) की है।

यह घटना खोड़ा थानाक्षेत्र के दीपक विहार इलाके की है। मामले की शिकायत खुद विहिप कार्यकर्ता विकास मिश्रा ने पुलिस में दी है। शिकायत के मुताबिक, घटना की रात दीपावली होने के कारण लगभग 11:45 पर विकास मिश्रा अपने दोस्तों से मिलने निकले थे। तभी घटनास्थल पर असलम उर्फ़ चक्कू नाम का एक बदमाश आया और उनकी छाती पर कट्टा (तमंचा) तान दिया। विकास ने शिकायत में आगे लिखा कि इस दौरान असलम ने कहा, “तुम्हे बजरंग दल का नेता बना कर जहन्नुम में भेज दूँगा।”

अपनी शिकायत में विकास ने आगे लिखा है कि इतना कह कर असलम ने तमंचे से फायर कर दिया। शिकायत के मुताबिक, गोली असलम के तमंचे में फँस गई और इस दौरान विकास के दोस्त असलम से अवैध हथियार छीनने का प्रयास करने लगे। आगे बताया गया है कि आरोपित खुद को छुड़ा कर भागने लगा जिसका पीछा विकास के साथियों ने किया। इसी दौरान पुलिस को भी सूचना दे दी गई। शिकायत के मुताबिक असलम को बाद में राजीव विहार में पकड़ लिया गया, जहाँ उसके पास से तमंचा और जिन्दा कारतूस बरामद हुआ।

शिकायतकर्ता के मुताबिक ,बाद में असलम को पुलिस के हवाले कर दिया गया। अपनी शिकायत में विकास ने यह भी बताया है कि आरोपित असलम एक पेशेवर अपराधी है। शिकायत के मुताबिक, असलम पर कई केस विभिन्न थानों में चल रहे हैं। विकास ने यह भी लिखा है कि खुद उन्होंने कई बार खोड़ा थाने में असलम की शिकायत की है। विहिप नेता ने असलम पर कठोर कार्रवाई की माँग भी की है।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय सह मंत्री विजय शंकर तिवारी ने इस घटना पर नाराजगी जताई है। उन्होंने लिखा, “ऐसे हमले पुलिस रोकेगी या स्वयं हिन्दू समाज को ही रोकना पड़ेगा।

ऑपइंडिया से बता करते हुए विकास मिश्रा ने बताया कि असलम की करतूतों की जानकारी वो पुलिस को दिया करते थे। उन्होंने कहा कि संभवतः उन पर हमले की यही वजह होगी। विहिप नेता विकास की शिकायत पर पुलिस ने असलम को IPC की धारा 307, 506 के अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के तहत गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक मामले की जाँच की जा रही है।

केरल के वामपंथी मंत्री ने उत्तर प्रदेश पर दिया आपत्तिजनक बयान: राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने माँगा इस्तीफा, CM विजयन का इनकार

केरल में ‘अज्ञानियों का शासन’ बताने वाले राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammad Khan) ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन (CM Pinarayi Vijayan) को चिट्ठी लिखकर राज्य के वित्त मंत्री केएन बालगोपाल (KN Balgopal) को हटाने के लिए कहा है। हालाँकि, मुख्यमंत्री विजयन ने इससे इनकार कर दिया।

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने सीएम विजयन को लिखी चिट्ठी में कहा, “केएन बालगोपाल जानबूझकर शपथ का उल्लंघन करके भारत की एकता और अखंडता को कमजोर कर रहे हैं।” राज्यपाल ने कहा कि मंत्रिमंडल में बालगोपाल के रहने से वे खुश नहीं हैं। इसलिए उनके खिलाफ संविधान के तहत कार्रवाई की जाए। इस माँग को सीएम विजयन ने खारिज कर दिया।

सीएम विजयन को लिखे अपने पत्र में केरल के राज्यपाल ने कहा कि वित्तमंत्री बालगोपाल ने 19 अक्टूबर को एक विश्वविद्यालय परिसर में भाषण दिया। इसमें बालगोपाल ने क्षेत्रीयता और प्रांतीयता की आग को भड़काने और भारत की एकता को कमजोर करने का प्रयास किया था। इसलिए उन्हें यह बताने के लिए मजबूर होना पड़ा कि वित्त मंत्री का बयान शर्मनाक है।

दरअसल, राज्य के विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने पिनराई विजयन की सरकार पर सवाल उठाया था। इस बात से राज्यपाल और सराकर के बीच खींचतान चल रही थी। इसी बीच विश्वविद्यालय में भाषण के दौरान बालगोपाल ने कह दिया कि यूपी के आए गवर्नर को केरल के एजुकेशन सिस्टम की क्या समझ है।

इसके बाद 24 अक्टूबर को राज्यपाल ने विजयन सरकार द्वारा नियुक्त 9 कुलपतियों से इस्तीफा माँग लिया था, लेकिन कुलपतियों ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। इस पर राज्यपाल ने उन लोगों को नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद सभी कुलपति कोर्ट चले गए, जहाँ कोर्ट ने कहा कि तय प्रक्रिया के तहत ही कुलपतियों को हटाया जा सकता है।

एक कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा था, “सभी शराब पीने के खिलाफ अभियान चलाते हैं। यहाँ (केरल में) शराब पीने को बढ़ावा दिया जा रहा है। कितने शर्म की बात है। हमने तय किया है कि हमारे (केरल के) विकास के लिए लॉटरी और शराब ही काफी है। शत-प्रतिशत साक्षरता वाले राज्य के लिए यह कितनी शर्मनाक स्थिति है।”

वित्त मंत्री केएन बालागोपाल पर निशाना साधते हुए राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा था, “वित्त मंत्री, जिसके राजस्व का मुख्य स्रोत अल्कोहल और लॉटरी है, वह पूछ रहा है कि यूपी के आए गवर्नर को केरल के एजुकेशन सिस्टम की क्या समझ है।”

लोगों को संबोधित करते हुए राज्यपाल खान ने कहा था, “केरल सरकार के कानून मंत्री कहते हैं कि वे मेरी कार्रवाई की समीक्षा करेंगे। मैं राज्यपाल के रूप में उनके कार्यों की समीक्षा करने के लिए यहां हूँ। वे मेरे द्वारा नियुक्त किए गए हैं। वे संविधान के प्रावधानों से परिचित नहीं हैं, क्योंकि मेधावी लोग बाहर चले गए हैं और ये अज्ञानी राज्य पर शासन कर रहे हैं।”

‘अब से हमारी बेटी ‘रूह दी’ कहलाएगी’: जेल से निकले गुरमीत राम रहीम ने बदला हनीप्रीत का नाम, डेरा की गद्दी को लेकर भी साफ़ कर दिया अपना फैसला

‘डेरा सच्‍चा सौदा’ प्रमुख गुरमीत राम रहीम 40 दिन के पैरोल पर बाहर आया है और अपना समय बागपत के बरनावा आश्रम में बीता रहा है। सुनार‍िया जेल से पैरोल से बाहर आने के बाद से ही वह चर्चा में है। डेरा प्रमुख ने अपनी मुँहबोली ‘बेटी’ व राजदार हनीप्रीत का नाम बदलकर ‘रूहानी दीदी’ रख द‍िया है। हनीप्रीत भी विवादों में रह चुकी है और जेल भी जा चुकी है।

र‍िपोर्ट के मुताबिक, राम रहीम ने डेरा सच्चा सौदा में किसी भी तरह के नेतृत्व परिवर्तन को पूरी तरह से नकार दिया है और कहा है कि फिलहाल वो ही डेरा का प्रमुख बना रहेगा। राम रहीम ने गुरु और गद्दी बदलने की चर्चाओं पर कहा, “डेरे के गुरु हम थे, हम हैं और हम ही रहेंगे।” लोगों का मानना है कि इसके बाद अब हनीप्रीत और डेरे को लेकर जो भी चर्चाएँ चल रही थीं, बंद हो जाएँगी।

हनीप्रीत को लेकर उसने कहा, “हमारी बेटी का नाम हनीप्रीत है। हर कोई उन्हें ‘दीदी’ कहता है, इसलिए इससे भ्रम होता है। इसलिए हमने अब उनका नाम ‘रूहानी दीदी’ रखा है और इसका उच्चारण आसान करने के लिए ‘रूह दी’ के रूप में मॉडर्नाइज किया है।”

राम रहीम ने बरनावा डेरे में दीपावली भी मनाई और लोगों से प्रदूषण का ध्यान रखकर दीपावली मनाने की अपील की। हरियाणा में आगामी निकाय चुनाव को देखते हुए कई नेता गुरमीत राम रहीम के सत्संग में पहुँचकर आशीर्वाद ले रहे हैं। राम रहीम ने जेल से निकलते ही सोशल मीडिया पर अपना एक वीडियो अपलोड कर अपने समर्थकों को मैसेज दिया। राम रहीम के भक्त भी डेरा प्रमुख के आश्रम में काफी संख्या में पहुँच रहे हैं । प्रशासन और आश्रम के लोग किसी भी अनजान व्यक्ति को प्रवेश नहीं दे रहे हैं।

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम दो महिला भक्तों के रेप के आरोप में 20 साल जेल की सजा काट रहा है। साल 2019 में राम रहीम और तीन अन्य को पत्रकार राम चंदर छत्रपति की 2002 की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था। पिछले साल उसे चार अन्य लोगों के साथ डेरा के पूर्व प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या की साजिश रचने के लिए दोषी ठहराया गया था। रंजीत सिंह की 2002 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

‘थैंक गॉड’ से दोगुनी ‘राम सेतु’ की कमाई: बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन कुछ यूँ रहा अक्षय और अजय की फिल्मों का हाल, देखें कलेक्शंस

जहाँ भारतीय बॉक्स ऑफिस पर अब तक तमिलनाडु की ‘PS 1’ और कर्नाटक की ‘कांतारा’ धमाल मचा रही थी, वहीं अब बुधवार (25 अक्टूबर, 2022) को अक्षय कुमार की ‘राम सेतु’ और अजय देवगन की ‘थैंक गॉड’ के रूप में दो हिंदी फिल्मों की एंट्री हुई। जहाँ ‘Ram Setu’ ने पहले दिन भारत में 15.50 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया, वहीं ‘Thank God’ के मामले में ये आँकड़ा इसका लगभग आधा, 8.10 करोड़ रुपए रहा।

ये भी बताया जा रहा है कि ‘राम सेतु’ इस साल की दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग लेने वाली फिल्म बन गई है और इससे ऊपर 37 करोड़ रुपए के नेट कलेक्शंस के साथ रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की ‘ब्रह्मास्त्र’ ही है। इसके बाद क्रमशः ‘भूल भूलैया’ (14.11 करोड़ रुपए), ‘बच्चन पांडेय’ (13.25 करोड़ रुपए), ‘लाल सिंह चड्ढा’ (11.70 करोड़ रुपए), ‘सम्राट पृथ्वीराज’ (10.70 करोड़ रुपए), ‘विक्रम वेदा’ (10.58 करोड़ रुपए), ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ (10.50 करोड़ रुपए), ‘शमशेरा’ (10.25 करोड़ रुपए) और ‘जुग जुग जियो’ (9.28 करोड़ रुपए) का स्थान आता है।

अक्षय कुमार की पिछली कुछ फ़िल्में औसत ओपनिंग लेने के बावजूद फ्लॉप हो गईं, क्योंकि उन्हें अच्छी समीक्षा नहीं मिली और उनका बजट भी ज्यादा था। ऐसे में, उन्हें ‘राम सेतु’ से खासी उम्मीदें हैं। इस साल उनकी ‘रक्षा बंधन’ भी आई थी, जो नहीं चली। चूँकि अभी छुट्टियाँ चल रही हैं, इसीलिए लंबे वीकेंड में अक्षय कुमार और अजय देवगन, दोनों ही अच्छे कलेक्शंस की उम्मीद कर रहे हैं। ‘राम सेतु’ में जैकलीन फर्नांडिस और नुसरत भरुचा भी हैं।

जहाँ तक ‘थैंक गॉड‘ की बात है, इसमें अजय देवगन के किरदार का नाम ‘चित्रगुप्त’ होने से इसे पहले ही विवादों का सामना करना पड़ा है। हालाँकि, बाद में इसे बदल कर ‘CG’ कर दिया गया। फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा और रकुल प्रीत सिंह भी मुख्य किरदारों में हैं। हाल ही में इस फिल्म की स्क्रीनिंग में इन तीनों ही हस्तियों को देखा गया था। मुंबई में मंगलवार को हुई स्क्रीनिंग में सिद्धार्थ मल्होत्रा की वर्तमान गर्लफ्रेंड कियारा अडवाणी भी पहुँची थीं।

‘मैं उनके भाषण देखता हूँ, वैश्विक तनाव के बीच कर रहे बेहतरीन काम’: S जयशंकर के मुरीद हुए UAE के मंत्री, कहा – उनसे काफी प्रभावित हूँ

संयुक्त अरब अमीरात के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डिजिटल इकॉनमी राज्य मंत्री उमर सुल्तान अल ओलमा (Omar Sultan Al Olama) ने बुधवार (26 अक्टूबर, 2022) को विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि वह भू-राजनीतिक तनावों के बीच वैश्विक स्तर पर बेहतरीन कार्य करने वाले भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से काफी प्रभावित हैं।

उमर सुल्तान अल ओलमा ने दिल्ली स्थित एक थिंक टैंक सम्मेलन में वर्चअल भाग लिया। इस सम्मेलन में भारत के केंद्रीय मंत्रियों और कई सांसदों ने भी हिस्सा लिया। सुल्तान ने कहा, “मैं आपके विदेश मंत्री एस जयशंकर से बहुत प्रभावित हूँ। मैं उनके कुछ भाषण देखता हूँ। संयुक्त अरब अमीरात और भारत दोनों के लिए एक बात बहुत स्पष्ट है कि हमें पक्ष चुनने की आवश्यकता नहीं है।”

उमर सुल्तान अल ओलमा ने कहा, “अगर यूएई भारत के साथ काम करता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह अमेरिका के साथ काम नहीं कर सकता। हम तीनों एक साथ काम कर सकते हैं। I2U2 (भारत-इजराइल-यूएई-यूएसए) समूह एक महान उदाहरण है।” राज्य मंत्री ने आगे व्यापार और निवेश के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि अब व्यापार के माध्यम से दुनिया पर दबदबा बनाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश दुनिया भर में अपने पैर पसारने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं।

संयुक्त अरब अमीरात के मंत्री ओलामा ने CyFY2022 कार्यक्रम में कहा, “भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच गहरा रिश्ता है। सहयोग के लिए कई संभावित क्षेत्र हैं, खासकर दोनों देशों में स्टार्टअप को लेकर सहयोग।”

बता दें कि ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और समाज पर चर्चा के लिए आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन आज से शुरू हुआ। अगले तीन दिनों में CyFy 2022 सम्मेलन में 37 देशों के 150 वक्ताओं और प्रश्नोत्तर सत्रों सहित 28 से अधिक पैनल चर्चाएँ आयोजित की जाएँगी।

3 बच्चों की माँ को भगा ले गया जियाउद्दीन, ‘राजेश’ बन कर रह रहा था हिन्दू महिला के साथ: फैक्ट्री में हुई थी जान-पहचान, आधार कार्ड से खुला राज़

उत्तर प्रदेश के आगरा में पुलिस ने उत्तराखंड से 3 बच्चों की माँ को भगा कर लाने वाले व्यक्ति को हिरासत में लिया है। आरोपित का नाम जियाउद्दीन है, जो मूल रूप से UP के बिजनौर का रहने वाला है। पुलिस को यह सूचना वि’श्व हिन्दू परिषद’ (VHP) के कार्यकर्ताओं ने दी है। महिला को नारी निकेतन भेज कर उनके परिजनों को सूचित कर दिया गया है। मामला मंगलवार (25 अक्टूबर 2022) का है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बरहन थानाक्षेत्र के गाँव बाधनू की है। बताया जा रहा है कि यहाँ पर पिछले 4-5 दिनों से एक संदिग्ध एक महिला को ले कर एक मकान में रह रहा था। गाँव वालों को जब वो संदिग्ध दिखे तब उन्होंने विश्व हिन्दू परिषद कार्यकर्ताओं को इसकी सूचना दी। विहिप कार्यकर्ताओं ने मकान में पहुँच कर मामले की जानकारी ली। पहले तो आरोपित ने उन्हें गुमराह करने का प्रयास किया, लेकिन बाद में आधार कार्ड से सारा भेद खुल गया।

मिली जानकारी के मुताबिक, महिला शादीशुदा है और 3 बच्चों की माँ है। वह मूल रूप से उत्तराखंड के पिथौरागढ़ की रहने वाली है। मामले को संदिग्ध देख कर VHP कार्यकर्ताओं ने बरहन थाने को सूचना दी। नजदीकी पुलिस चौकी आंवलखेड़ा ने दोनों को कस्टडी में ले कर पूछताछ की। पीड़िता के परिजनों को सूचित कर दिया गया है। वहीं पुलिस आरोपित से पूछताछ कर रही है।

ऑपइंडिया ने आरोपित को पकड़ने वाले हिन्दू कार्यकर्ता लवकुश से बात की। उन्होंने हमें बताया कि लड़का और लड़की एक हिन्दू के ही घर रुके थे। उन्होंने बताया कि आधार कार्ड के मुताबिक लड़की जियाउद्दीन से लगभग 8 साल बड़ी है। लवकुश ने हमें बताया कि पहले जियाउद्दीन ने खुद को राजेश बताया, लेकिन बाद में वो आधार कार्ड से पकड़ा गया। पूछताछ के दौरान दोनों ने खुद के अलीगढ़ से होने और ताजमहल देखने के लिए आगरा आने की बात कही थी। लवकुश के अनुसार, लड़की ने करवा चौथ की मेहँदी आदि लगा रखी है, जिससे पता चल रहा है कि वो अपने घर से हाल ही में भागी होगी।

लवकुश ने हमें आगे बताया कि उन्हें लड़की को भगाने की साजिश में लड़के जियाउद्दीन के घर वालों के भी शामिल होने का शक है। लवकुश के अनुसार, अभी तक लड़की के परिजन पुलिस के पास नहीं पहुँच पाए हैं लेकिन जियाउद्दीन को पकड़ने के कुछ ही देर बाद उसके घर वाले थाने पर हाजिर थे। लवकुश ने हमें बताया कि लड़का और लड़की ने पूछताछ में हम लोगों को बताया कि वो दोनों एक साथ एक फैक्ट्री में काम करते थे और वहीं उनका परिचय हुआ था।