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अब CBI जाँच के लिए जरूरी नहीं राज्य का आदेश: महाराष्ट्र में शिंदे सरकार ने पलटा उद्धव ठाकरे का फैसला, केंद्र के डर से लागू किया था अपना ‘कानून’

महाराष्ट्र की भाजपा गठबंधन वाली एकनाथ शिंदे सरकार ने शुक्रवार (21 अक्टूबर 2022) को बड़ा फैसला लेते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के फैसले को बदल दिया है। शिंदे सरकार ने आदेश जारी कर राज्य में जनरल कंसेंट बहाल कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब महाराष्ट्र में किसी भी मामले की जाँच के लिए सीबीआई को राज्य सरकार की अनुमति लेनी की आवश्यकता नहीं होगी।

दरअसल, 21 अक्टूबर 2020 को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार ने अक्टूबर 2020 में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की धारा 6 के तहत सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली थी। तत्कलीन सरकार ने इस सहमति को वापस लेते हुए आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार केंद्रीय जाँच एजेंसियों की मदद से राज्य सरकार को निशाना बना रही है।

बता दें, तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार ने गृह मंत्रालय के अनुरोध के बाद आदेश जारी कर कहा था कि केंद्रीय जाँच एजेंसियों को राज्य सरकार की अनुमति के बिना राज्य में किसी प्रकार की जाँच की अनुमति नहीं होगी। इस आदेश को जारी किए जाने के दौरान, अनिल देशमुख महाराष्ट्र के गृह मंत्री के थे। अब, उन पर एंटीलिया बम धमकी मामले से लेकर मनी लांड्रिंग के अलग-अलग मामले चल रहे हैं।

गौरतलब है कि देश के 7 गैर-बीजेपी शासित राज्यों पंजाब, पश्चिम बंगाल, झारखंड, केरल, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और मेघालय सीबीआई को दी हुई आम सहमति वापस ले चुके हैं। जिसका मतलब यह है कि केंद्रीय जाँच एजेंसियों को इन राज्यों में जाँच करने के लिए या तो राज्य सरकार से विशेष अनुमति लेनी होगी या फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा।

सीबीआई दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 के अंतर्गत कार्य करती है। विभिन्न राज्यों ने इसी अधिनियम के चलते आम सहमति वापस ली है। दरअसल, आम सहमति दो प्रकार की होती है। पहली स्पेसिफिक और दूसरी जनरल। राज्य सरकार राज्य में कार्रवाई के लिए सीबीआई को जनरल कंसेंट देती है। इसके जरिए सीबीआई किसी भी मामले में जाँच के लिए बगैर किसी अनुमति के संबंधित मामलों में छापेमारी या गिरफ्तारी कर सकती है।

‘काफिरों वक्त आने पर तुम्हें गाड़ देंगे’ : इंस्टाग्राम पर जहरीली रील बनाने वाला मुस्तफा अरशद खान गिरफ्तार, कंटेंट के नाम पर दी थी हिंदुओं को धमकी

राजस्थान की कोटा पुलिस ने गुरुवार (20 अक्टूबर 2022) को मुस्तफा अरशद अली उर्फ अरशद खान (Mustafa Arshad Ali aka Arshad Khan) नाम के एक इस्लामवादी इन्फ्लुएंसर को इंस्टाग्राम रील में हिंदुओं को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया। अरशद खान ने 17 अक्टूबर को पोस्ट की गई अपनी इंस्टाग्राम रील में कहा था, “हमारी खामोशी की अलामत काफिरों तुम्हारे लिए बेहतर नहीं। वक्त आने पर गाड़ देंगे तुम्हें, जहाँ तुम खड़े होगे वहीं।”

फोटो साभार: कोटा पुलिस

घटना की पुष्टि करते हुए कोटा पुलिस ने गुरुवार शाम जानकारी दी कि नईम अली के बेटे अरशद अली को गिरफ्तार कर लिया गया है। इससे पहले 19 अक्टूबर को कोटा पुलिस ने ट्वीट कर इस मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी थी। ध्यान दें, पुलिस ने अरशद अली नाम का इस्तेमाल किया। वहीं गिरफ्तार किए गए व्यक्ति ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अरशद खान नाम का इस्तेमाल किया। यहाँ वह आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट करता है।

यह घटना तब सामने आई जब कोलकाता स्थित इस्कॉन के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने ट्विटर पर इसका एक वीडियो साझा किया। वीडियो में मुस्तफा अरशद खान कहता है कि जब समय आएगा तो वह सभी काफिरों को जमीन में गाड़ देगा। राधारमण दास ने अपने ट्वीट में लिखा था, “यह एक इस्लामिक इन्फ्लुएंसर है। इंस्टाग्राम पर इसके 14,000 से अधिक फॉलोअर्स हैं। मुस्लिम इस बात को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि जब उनका समय आएगा तो वे हिंदुओं के साथ क्या करेंगे। हिंदुओं, आप क्या करेंगे?”

इस वीडियो को बॉम्बे हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले एडवोकेट और बीजेपी महाराष्ट्र के कानूनी सलाहकार आशुतोष जे दुबे ने भी शेयर किया था। उन्होंने 19 अक्टूबर को ट्वीट किया, “वह खुलेआम धमकी दे रहा है। प्रशासन क्या कर रहा है।” इस पर कोटा पुलिस ने जवाब दिया कि आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इस मामले की जानकारी दे दी गई है।

अपने दूसरे ट्वीट में दुबे ने लिखा, “आरोपित को नफरत फैलाने और हिंदुओं को खुलेआम धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है।” उन्होंने कोटा पुलिस से अरशद अली उर्फ अरशद खान की गिरफ्तारी का फोटो या वीडियो प्रदर्शित करने का भी अनुरोध किया। साथ ही उसके और उसके मित्र के सोशल मीडया पर नफरत और धमकी भरे वीडियो डिलीट करवाने की भी माँग की।”

इससे पहले उसने 6 अक्टूबर को अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया था। इसमें वह कह रहा है, “ना बीजेपी ना कॉन्ग्रेस मत बनो किसी के भी गुलाम। अपनी खुद की सरकार होगी इंशाअल्लाह आलम ए इस्लाम (AALM-E-ISLAM)।”

1 अक्टूबर को पोस्ट की गई एक अन्य वीडियो में आरोपित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ और गृहमंत्री अमित शाह के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए देखा जा सकता है। कहता है, “मोदी तू कुर्सी पर बैठा है, योगी तू भी कुर्सी पर बैठा है और अमित शाह तू भी कुर्सी पर बैठा है, लेकिन हुकुमत सिर्फ मेरे ख्वाजा की चलती है। इसलिए तुम्हें टुकड़े भी मेरा ख्वाजा ही देता है। इस वीडियो को करीब 18000 लोगों ने लाइक किया है।”

बता दें कि पुलिस ने भले ही हिंदुओं को खुलेआम धमकी देने के आरोप में अरशद को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन उन्होंने आपत्तिजनक वीडियो को अभी तक इंटरनेट से नहीं हटाया है। वीडियो को खान ने 17 अक्टूबर को पोस्ट किया था, जिसे लगभग 70,000 लोगों ने देखा और करीब 2600 लोगों ने लाइक किया है।

‘रसूल-ए-पाक की शान में सर तन से जुदा’: RSS के कार्यक्रम में जाने पर BJP नेता जमाल सिद्दीकी को कट्टरपंथियों ने भेजी धमकी, शिकायत दर्ज

महाराष्ट्र के नागपुर में भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के गुरु पूजन कार्यक्रम में शामिल होना महंगा पड़ गया। उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई है। चिट्ठी में लिखा है, ‘रसूल-ए-पाक की शान में सर तन से जुदा’। सिद्दीकी ने पुलिस में इसकी शिकायत दे दी है।

जमाल सिद्दीकी को भेजी गई धमकी वाले पत्र के साथ उनकी दो तस्वीरें भी भेजी गई हैं। इन तस्वीरों में जमाल सिद्दीकी आरएसएस के एक कार्यक्रम में नजर आ रहे हैं। इसी कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उन्हें यह चिट्ठी भेजी गई है। यह कार्यक्रम गुरुपूजन का था।

जमाल को गुरुवार को मिली इस चिट्ठी को काली स्याही वाली कलम से लिखी गई है। चिट्ठी को देवनागरी लिपी और उर्दू भाषा में लिखी गई है। चिट्ठी मिलने के बाद जमाल सिद्दीकी ने नागपुर के सक्करदरा पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है।

जमाल सिद्दीकी का कहना है कि वे इन धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। वे पार्टी, देश और समाज के लिए काम करते रहें रहेंगे और अब और भी अधिक शिद्दत से करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पहले भी धरना-प्रदर्शन हुए हैं। अब बात हत्या की धमकी तक पहुँच गई है, लेकिन वे इससे डरने वाले नहीं हैं।

भाजपा नेता जमाल सिद्दीकी ने आगे बताया कि उन्होंने इस घटना की जानकारी महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को दे दी है। इसके साथ ही उन्होंने नागपुर के पुलिस कमिश्नर को भी जानकारी दी गई है।

इससे पहले राजस्थान की भाजपा नेता चारुल अग्रवाल को सितंबर में कट्टरपंथियों ने ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी थी। वाराणसी के ज्ञानवापी को लेकर फेसबुक पर टिप्पणी करने के कारण उन्हें 25 सितंबर तक हत्या करने की धमकी दी गई थी।

अलवर स्थित उनके घर के बाहर फेंके गए लेटर में कहा गया था, “चारुल अग्रवाल आईआईटी दिल्ली वाली… हमारे मजहब को लेकर कोई पोस्ट डालोगी तो तेरा भी वही हाल होगा, जो उदयपुर वाले का हुआ। ज्ञानवापी हमारा था और हमारा ही रहेगा।”

भारत के अंतिम गाँव में गूंजा ‘मोदी-मोदी’ नारा, PM ने उत्तराखंड दौरे पर कहा- मन प्रसन्न और जीवन धन्य हो गया

प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने अपने उत्तराखंड दौरे में चीनी सीमा से सटे माणा गाँव और बद्रीनाथ में सड़क और रोपवे परियोजनाओं का शिलान्यास क‍िया। इससे पहले उन्‍होंने बाबा केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन भी किए।

पीएम मोदी ने कहा, ”बाबा केदार और बद्री विशाल जी के दर्शन करके मन प्रसन्न हो गया, जीवन धन्य हो गया। माणा गाँव, भारत के अंतिम गाँव के रूप में जाना जाता है। लेकिन मेरे लिए सीमा पर बसा हर गाँव, देश का पहला गाँव है।”

पीएम ने कहा-प्रगति का कार्य कुछ लोगों के लिए अपराध की तरह

प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी के विकसित भारत के निर्माण के दो प्रमुख स्तंभ हैं। पहला- अपनी विरासत पर गर्व, दूसरा- विकास के लिए हर संभव प्रयास। उन्‍होंने कहा, ”देश की आजादी के 75 साल पूरे होने पर मैंने लाल किले पर एक आह्वान किया, ये आह्वान हैं गुलामी की मानसिकता से पूरी तरह मुक्ति का। क्योंकि आजादी के इतने वर्षों बाद भी, हमारे देश को गुलामी की मानसिकता ने ऐसा जकड़ा हुआ है कि प्रगति का कुछ कार्य कुछ लोगों को अपराध की तरह लगता है।”

आस्था के केंद्र हमारे लिए प्राणवायु की तरह : पीएम

पीएम ने कहा कि विदेशों में वहाँ की संस्कृति से जुड़े स्थानों की ये लोग तारीफ करते नहीं थकते थे, लेकिन भारत में इस प्रकार के काम को हेय दृष्टि से देखा जाता था। आस्था के ये केंद्र सिर्फ एक ढाँचा नहीं, बल्कि हमारे लिए प्राणवायु की तरह हैं। वो हमारे लिए ऐसे शक्तिपुंज हैं, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी हमें जीवंत बनाए रखते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, ”विकास के इन सभी प्रोजेक्ट्स के लिए, उत्तराखंड को और देश-विदेश के हर श्रद्धालु को मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूँ । गुरुओं की कृपा बनी रहे, बाबा केदार की कृपा बनी रहे, बद्री विशाल की कृपा बनी रहे, हमारे सभी श्रमिक साथियों को भी शक्ति मिले, यही प्रार्थना करते हैं।”

पीएम बोले : भारत अपने सांस्कृतिक उत्थान का आह्वान कर रहा

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में अयोध्या में बन रहे भव्‍य राममंद‍िर की भी चर्चा की। उन्‍होंने कहा, ”अयोध्‍या में इतना भव्य राममंदिर बन रहा है, गुजरात के पावागढ़ में माँ कालिका के मंदिर से लेकर विन्ध्यांचल देवी के कॉरिडोर तक, भारत अपने सांस्कृतिक उत्थान का आह्वान कर रहा है।”

प्रधानमंत्री ने कोरोना काल का ज‍िक्र करते हुए कहा, ”एक संवेदनशील सरकार, गरीबों का दुख-दर्द समझने वाली सरकार कैसे काम करती है, आज देश के हर कोने में लोग अनुभव कर रहे हैं। कोराना काल में जब वैक्सीन लगवाने की बारी आई, अगर पहले की सरकारें होती, तो शायद अभी तक वैक्सीन यहां तक नहीं आता।”

पीएम मोदी ने स्थानीय उत्पाद पर खर्च करने का किया आह्वान

इसके साथ ही पीएम मोदी ने लोगों से स्‍थानीय उत्‍पादों पर खर्च करने का कहा। उन्‍होंने कहा, ”लोकल फॉर वोकल की तरह ही आज मैं आपसे एक संकल्प की प्रार्थना करता हूँ- आप जितना भी खर्च करते हैं, उसका कम से कम 5 प्रतिशत स्थानीय उत्पाद पर खर्च कीजिए।”

पीएम ने 3400 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास क‍िया

पीएम मोदी ने केदारनाथ, बद्रीनाथ व माणा में 3400 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास क‍िया। इनमें केदारनाथ व हेमकुंड साहिब रोपवे और चीन सीमा से लगे माणा क्षेत्र में दो राजमार्गों से संबंधित योजनाएँ शामिल हैं।

सभी को दीपावाली की शुभकामनाएँ दीं

अपने संबोधन के आखिर में प्रधानमंत्री ने सभी को दीपावाली की शुभकामनाएँ दीं और जय बाबा केदार व बद्रीविशान के जयकारों के साथ अपना सम्‍बोधन समाप्‍त किया। इसके बाद जनसभा स्‍थल मोदी-मोदी के जयकारों को गूंज उठा।

पाकिस्तानी PM के तौर पर मिले जितने तोहफे, सब बेच डाले: तोशाखाना केस में इमरान खान की गई सांसदी, अगले 5 साल तक चुनाव लड़ने पर बैन

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Pakistan Ex PM Imran Khan) की संसद सदस्यता वहाँ के चुनाव आयोग ने शुक्रवार (21 अक्टूबर 2022) को खत्म कर दी। इसके साथ ही उन्हें अगले पाँच साल के लिए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित ठहरा दिया है। इसके बाद पाकिस्तान में तनाव की स्थिति देखी जा रही है।

दरअसल, प्रधानमंत्री रहने के दौरान विदेशी नेताओं द्वारा मिले उपहारों को तोशाखाना में जमा कराने के बजाए उसे बेचने के मामले में पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने इमरान खान के खिलाफ यह फैसला सुनाया है। चुनाव आयोग के इस फैसले के तुरंत बाद उसके दफ्तर के सामने फायरिंग करने की घटना सामने आई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त सिकंदर सुल्तान रजा की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय पीठ ने सर्वसम्मति के साथ यह फैसला दिया। हालाँकि, पंजाब के सदस्य घोषणा के लिए मौजूद नहीं थे। तोशखाना मामले में चुनाव आयोग ने 19 सितंबर 2022 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

वहीं, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के अध्यक्ष इमरान खान को भ्रष्टाचार का दोषी पाए जाने के बाद सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। वहीं, इमरान खान की पार्टी के समर्थक सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ आक्रामक हैं।

देश में हिंसा की आशंका को देखते हुए चुनाव आयोग के कार्यालय वाले इलाके में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। इमरान खान के समर्थकों को रोकने के लिए पाकिस्‍तान सरकार ने अर्धसैनिक बलों को तैनात किया है। पुलिस का कहना है कि किसी को भी चुनाव आयोग के पास नहीं आने दिया जाएगा। 

चुनाव आयोग के फैसले के विरोध में PTI के कार्यकर्ता देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे हैं। कहीं-कहीं टायरों में आग लगाकर सड़कों को जाम कर दिया गया है। वहीं, चुनाव आयोग के फैसले के बाद इमरान खान की पार्टी ने कहा कि वह इस फैसले को हाईकोर्ट को हाईकोर्ट में चुनौती देगी।

बता दें कि इमरान खान को हटाकर पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने के साथ ही शाहबाज शरीफ ने तोशखाना मामले की जाँच का आदेश दे दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री रहने के दौरान इमरान खान को जो भी उपहार मिले थे, उसे तोशाखाना में जमा कराने के बजाए उसे बेच दिया। वहीं, तोशाखाना में जमा उपहार को आधी कीमत में खरीद कर महंगे दामों में भी बेचने का आरोप है।

इस आरोप पर इमरान खान ने कहा था कि उनको मिले उपहार पर उन्हीं का हक है और वे चाहें तो उसे तोशाखाना में जमा करवाएँ या जो मर्जी करे वो करें। उन्होंने कहा था कि ये उपहार उन्हें मिले थे और यह उनकी मर्जी है कि उसे रखे या बेचें। उन्होंने कहा था, ‘मेरा तोहफा, मेरी मर्जी।’

सिर मुंडवाया, लाल कपड़े पहने…बन गई बौद्ध भिक्षु: 3 साल से पहचान छिपाकर दिल्ली में रह रही थी चीनी महिला, जासूसी का शक होने पर गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने मजनू का टीला इलाके से एक चीनी महिला को गिरफ्तार किया है। महिला चीन के हैनान प्रांत की रहने वाली है। उसका नाम काय रुओ (Cai Ruo बताया जा रहा है। चीनी महिला पर भारत में फर्जी पहचान पत्र बनाकर रहने और जासूसी करने का आरोप लगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार (21 अक्टूबर 2022) को गिरफ्तार की गई चीनी महिला के नेपाल के रास्ते भारत में आने का संदेह जताया जा रहा है। वह 3 साल से मजनू के टीला इलाके में बौद्ध भिक्षु की वेशभूषा में रह रही थी। काय रुओ के पास से कुछ दस्तावेज भी मिले हैं। इसमें उसका नाम डोल्मा लामा है और पता काठमांडू का लिखा हुआ है। लेकिन फॉरेन रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) की जाँच में पता चला है कि महिला चीन के हैनान प्रांत की रहने वाली है। वह अंग्रेजी, चीनी और नेपाली भाषा जानती है।

पुलिस ने उसके खिलाफ कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पूछताछ के दौरान महिला ने पुलिस को बताया कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता उसे जान से मारना चाहते थे, इसलिए वह उनसे बच रही है। दिल्ली पुलिस महिला से जुड़ी और जानकारी जुटाने में जुट गई है। साथ ही ये जानने की कोशिश भी कर रही है कि दिल्ली में उसके और कितने साथी हैं।

फॉरेन रजिस्ट्रेशन ऑफिस के मुताबिक चीनी महिला काय रुओ साल 2019 में चाईनीज पासपोर्ट पर भारत आई थी। इसके बाद उसने बौद्ध भिक्षुओं की तरह अपना सिर मुंडवाया और उनके जैसे पारंपरिक गहरे लाल रंग के कपड़े पहनकर मजनू का टीला इलाके में रहने लगी। संदिग्ध हाव-भाव के चलते दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को काफी दिनों से उसके ऊपर शक था।

बता दें कि भारत सरकार ने 1959 में मजनू का टीला में तिब्बत से आए शरणार्थियों को रहने की अनुमति दी गई थी। यह दिल्ली विश्वविद्यालय के नजदीक है।

‘मेरे पास रहने की जगह भी नहीं है’: J&K प्रशासन ने भेजा महबूबा मुफ्ती को सरकारी बंगला छोड़ने का नोटिस, अब्बू के CM बनने के बाद ‘फेयर व्यू’ में डाला था डेरा

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस दिया है। महबूबा फिलहाल श्रीनगर के हाई सिक्योरिटी इलाके गुपकार स्थित सरकारी बंगले ‘फेयर व्यू’ में रह रहीं हैं। इस बंगले को खाली करने के नोटिस को लेकर महबूबा ने कहा कि उन्हें इसकी पहले से ही उम्मीद थी।

जम्मू कश्मीर प्रशासन द्वारा सरकारी बंगला खाली करने के नोटिस को लेकर महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि उन्हें कुछ दिन पहले ही फेयर व्यू को खाली करने का नोटिस मिला है। उन्होंने कहा है, “फेयर व्यू से बेदखल करने का नोटिस मुझे कुछ दिन पहले ही दिया गया था। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है मुझे इसकी पहले ही उम्मीद थी। यह स्थान मेरे पिता (मुफ्ती मोहम्मद सईद) को दिसंबर 2005 में तब आवंटित किया गया था जब वह मुख्यमंत्री नहीं थे। इसलिए प्रशासन द्वारा बताया गया आधार सही नहीं है।”

मीडिया द्वारा महबूबा से जब यह पूछा गया कि क्या वह इस नोटिस के खिलाफ अदालत जाएँगी तो उन्होंने कहा “मेरे पास ऐसी जगह नहीं है जहाँ मैं रह सकूँ। इसलिए मुझे निर्णय लेने से पहले अपनी कानूनी टीम से परामर्श करना होगा।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, महबूबा मुफ्ती को दिए गए नोटिस में कहा गया है कि यह सरकारी आवास मुख्यमंत्री के लिए है और अब वह मुख्यमंत्री नहीं हैं। इसलिए उन्हें यह बंगला छोड़ना होगा।

बता दें, जम्मू कश्मीर प्रशासन ने महबूबा मुफ्ती को यह नोटिस जम्मू और कश्मीर सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1988, संशोधित अधिनियम, 2016 के अंतर्गत भेजा है। इस नोटिस में उन्हें कहा गया है कि अगर आपको सुरक्षा या किसी अन्य कारण से कोई अन्य वैकल्पिक आवासीय सुविधा की आवश्यकता है तो सरकार आपके आग्रह पर उसकी भी व्यवस्था करेगी।

उल्लेखनीय है, जम्मू कश्मीर विधानमंडल सदस्य पेंशन अधिनियम, 1984 के अनुसार जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवासीय सुविधा के साथ-साथ उसकी देखभाल और साज-सज्जा के लिए 35 हजार रूपये, टेलीफोन खर्च के लिए अधिकतम 48 हजार रूपये और बिजली शुल्क के लिए 1500 रुपए मासिक के अलावा वाहन, पेट्रोल और सहायक की सुविधा दी जाती थी। हालाँकि, 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम लागू होने के बाद से पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधा दिलाने वाला उक्त अधिनियम समाप्त हो गया है।

इससे पहले, पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, गुलाम नबी आजाद और उमर अब्दुल्ला को भी सरकारी बंगले छोड़ने पड़े थे। लेकिन, महबूबा मुफ़्ती ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सरकारी आवास नहीं छोड़ा था।

6 साल की उम्र में स्वामी विवेकानंद ने नहीं दी थी जमशेदजी टाटा को सलाह: PM मोदी के दावे का जानें पूरा सच, Video दिखाकर झूठ फैलाया गया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का एक शॉर्ट वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand) और टाटा संस के स्थापक जमशेद जी टाटा (Jamshed Ji Tata) के बीच के संवाद का जिक्र किया है।

प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा इस वीडियो में बोली गई बातों पर सवाल उठाते हुए उन्हें ट्रोल करने की कोशिश की जा रही है। दरअसल, पीएम मोदी ने इस वीडियो में कहा कि स्वामी विवेकानंद ने जमशेदजी टाटा को उद्योग स्थापित करने की सलाह दी थी।

वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह हैं, “जिसको मालूम होगा कि स्वामी विवेकानंद और जमशेद जी टाटा के बीच जो संवाद हुआ, जो दोनों के बीच पत्र-व्यवहार हुआ, वो किसी ने देखा होगा तो पता चलेगा कि उस समय गुलाम हिंदुस्तान था, तब भी विवेकानंद 30 साल का नौजवान, जमशेदजी टाटा जैसे व्यक्ति से कह रहा ह कि भारत में उद्योग लगाओ ना, मेक इन इंडिया बनाओ ना।”

यह वीडियो कुछ साल पहले का है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण के वर्षगाँठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा था कि स्वामी विवेकानंद ने मेक इन इंडिया की प्रेरणा जमशेदजी टाटा को दी थी।

इस वीडियो के वायरल कर पीएम को ट्रोल करने की कोशिश की जा रही है। आसिफ रहमान नाम के एक व्यक्ति ने ट्वीट में तंज कसते हुए कहा, “स्वामी विवेकानंद ने 6 साल की उम्र में जमशेदजी टाटा से मेक इन इंडिया के लिए अनुरोध किया था। जमशेदजी ने 1869 में कपड़ा उद्योग में कदम रखा था और स्वामी विवेकानंद का जन्म 1863 में हुआ था।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी विवेकानंद और जमशेदजी टाटा के जिस पत्र-व्यवहार का जिक्र कार्यक्रम में संबोधन के दौरान किया था, उसका जिक्र टाटा स्टील ने भी किया है। साल 2018 में टाटा स्टील ने एक ट्वीट कर इस पत्र-व्यवहार के बारे में बताया और उस पत्र की अर्काइव को भी साझा किया।

टाटा स्टील ने अपने ट्वीट में कहा था, “स्वामी विवेकानंद की 155वीं जयंती पर हम उन दिनों में वापस जाते हैं, जब हमारे संस्थापक जमशेदजी टाटा स्वामी जी से मिले थे। वे 1893 में जापान से शिकागो के लिए एक जहाज पर एक साथ यात्रा कर रहे थे। वह पत्र पढ़िए, जो जेएन टाटा ने स्वामीजी को लिखा था।”

दस्तावेजों के अनुसार, साल 1893 में स्वामी विवेकानंद शिकागो के धार्मिक सम्मेलन में शामिल होने पानी के जहाज से जा रहे थे। उसी जहाज में जमशेदजी नसरवानजी टाटा भी सवार थे। इस यात्रा के दौरान दोनों में लंबी बातचीत हुई थी। कहा जाता है कि इस दौरान स्वामी विवेकानंद को जमशेदजी ने बताया था कि वे भारत में स्टील फैक्ट्री स्थापित करना चाहते हैं।

इस स्वामी विवेकानंद ने उन्हें टेक्नोल़ॉजी ट्रांसफर करने का सुझाव दिया था। उनसे कहा था कि अगर ऐसा करेंगे तो भारत किसी पर निर्भर नहीं रहेगा और भारत के युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। तब जमशेद जी ने ब्रिटेन के उद्योगपतियों से बात की, लेकिन वे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए तैयार नहीं हुए। बाद में जमशेद जी अमेरिका गए और वहाँ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का भी समझौता किया।

कहा जाता है कि इस यात्रा में स्वामी विवेकानंद ने जमशेद जी टाटा को वर्तमान झारखंड के लौह खनिज संपदा और संसाधनों की जानकारी दी थी। इसके लिए उन्होंने सिंहभूम में ही फैक्र्ट्री लगाने की भी सलाह दी थी। इसके बाद साल 1907 में सिंहभूम में जमशेदपुर में टाटा स्टील की नींव रखी गई। साल 1898 में जमशेदजी ने स्वामी विवेकानंद को पत्र भी लिखा था, जिसे टाटा स्टील ने अपने ट्वीट के जरिए सार्वजनिक किया है।

दरअसल, जिस कपड़ा उद्योग का जिक्र करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झूठा साबित करने की कोशिश की जा रही है, वह सन 1868 का है। इसी जमशेदजी ने 21000 रुपए से खुद का व्यवसाय शुरू किया और उन्होंने एक दिवालिया तेल कारखाना खरीदा। बाद में इसे एक रुई के कारखाने में तब्दील कर दिया और उसका नाम बदल कर रखा एलेक्जेंडर मिल (Alexender Mill)। साल 1874 में उन्होंने नागपुर में एक रुई का कारखाना लगाया था।

‘देवी-देवताओं की मूर्ति तोड़ते हैं, पूजा नहीं करने देते’ : राजस्थान में बेटे-बहू पर माता-पिता बना रहे धर्मांतरण का दबाव, बात न सुनने पर पीटते हैं; FIR दर्ज

देश में धर्मांतरण के बढ़ते मामलों के बीच राजस्थान के अलवर जिले में माता-पिता पर अपने बेटे-बहू का धर्मांतरण कराने का आरोप लगा है। पीड़ित दंपति सोनू और उनकी पत्नी रजनी ने बुधवार (19 अक्टूबर 2022) को इस मामले में शिकायत दर्ज कराई। इन दोनों ने शिकायत देते हुए पुलिस से कहा है कि सोनू के माता-पिता ने घर में रखी मूर्तियों को तोड़ दिया और हिंदू देवी-देवताओं के पोस्टर्स को फाड़ दिया है। वे लोग, इन पर ईसाई धर्म अपनाने के लिए लगातार दवाब बना रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़ित दंपति ने राजस्थान के अलवर पुलिस स्टेशन में माता-पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। यह भी कहा जा रहा है कि दंपति ने शिकायत दर्ज कराने के लिए बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों से मदद माँगी थी। फिलहाल पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

सोनू ने शिकायत में कहा कि उसके माता-पिता सहित परिवार के कुछ सदस्य ईसाई धर्म अपना चुके हैं और उन्हें भी धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर कर रहे हैं। सोनू ने कहा, “जब हम हिंदू देवताओं की पूजा करते हैं, तो मेरे माता-पिता विरोध करते हैं। जब हम घर में दीया जलाते हैं या प्रार्थना करते समय अगरबत्ती का इस्तेमाल करते हैं तो वे विरोध करते हैं। उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को भी तोड़ दिया है और हमारे देवी-देवताओं के पोस्टर फाड़ दिए हैं। वे हमें परेशान करते हैं, हमें पीटते हैं और ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाते हैं।”

सोनू ने कहा कि वह और उसकी पत्नी हमेशा के लिए हिंदू धर्म का हिस्सा बनकर रहना चाहते हैं और ईसाई धर्म में परिवर्तित होने की उनकी कोई इच्छा नहीं है। उन्होंने कहा है “हमारे परिवार के सदस्य सोचते हैं कि हिंदू रीति-रिवाज और परंपराएँ बेकार हैं और ईसाई धर्म अपनाने से ही वास्तविक खुशी मिलेगी।”

सोनू ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनका परिवार पिछले दो वर्षों से ईसाई धर्म से संबंधित रीति-रिवाजों का पालन कर रहा है। बीते कुछ समय से धर्मांतरण के लिए लगातार परेशान किया जा रहा है। उन्होंने पुलिस से अपनी सुरक्षा की भी माँग की है। पुलिस अधीक्षक ने शिकायत दर्ज कर पीड़ित दंपति को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

दलितों का हो रहा धर्मांतरण, बात न सुनने पर धमकी

इस मामले में, विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष दिलीप मोदी ने कहा है कि राजस्थान के अलवर जिले में दलित समुदाय के कुछ लोगों पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि अलवर शहर में कुछ लोगों पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने प्रयास किया जा रहा है। शहर की हरिजन बस्ती में कुछ लोग हैं जो ईसाई धर्म में लोगों का परिवर्तन करा रहे हैं।

उन्होंने, आरोप लगाया है कि यहाँ धर्म परिवर्तन की एक चेन बनाई गई है। ये लोग कई तरीके के लालच देकर हिंदू देवी देवताओं का अपमान करते हुए ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाते हैं। ईसाई धर्म नहीं अपनाने पर बहिष्कार करने की धमकी देते हैं। यहाँ तक कि मारपीट भी करते हैं।

इस मामले में, पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम का कहना है, “पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि उनके परिवार के सदस्यों द्वारा उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के लिए दबाव डाला जा रहा था। प्रथम दृष्टया में यह मामला पारिवारिक मामला लग रहा है पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। जाँच के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

‘केदारनाथ में रुद्राभ‍िषेक, नंदी का आशीर्वाद, ₹3400 करोड़ की सौगात’ : जानें PM मोदी के उत्तराखंड दौरे में क्या-क्या खास

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) आज उत्‍तराखंड के दौरे पर हैं। इस दौरान सबसे पहले वह केदारनाथ पहुँचे और पूजा-अर्चना की। पीएम मोदी ने यहाँ भगवान शिव का रुद्राभ‍िषेक क‍िया। साथ ही उन्‍होंने भगवान नंदी का आशीर्वाद लिया और मंदिर की परिक्रमा की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी इस दौरान हिमाचल के खास परिधान चोला डोरा में नजर आए। जो वहाँ की महिलाओं द्वारा हाथों से बनाया गया है। यह वस्‍त्र प्रधानमंत्री को भेंट किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने इस दौरान धाम में मौजूद जनता का अभिवादन किया। पीएम ने केदारनाथ रोपवे का शिलान्यास भी किया। पीएम आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि स्थल पर दर्शन किए।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने केदारनाथ निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। 2013 की आपदा के बाद धाम में पुर्ननिर्माण कार्य किया जा रहा है। उन्‍होंने निर्माण कार्य में लगे श्रम‍िकों से संवाद भी क‍िया।

केदारनाथ धाम के बाद पीएम मोदी बद्रीनाथ पहुँचे। यहाँ उन्‍होंने पूजा अर्चना की । इसके बाद कई परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया। उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी भी उनके साथ मौजूद हैं।

प्रधानमंत्री मोदी आज अपने उत्तराखंड दौरे के वक्त चीनी सीमा से सटे भारत के आखिरी गाँव माणा का भी दौरा करने पहुँचे। उन्होंने हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे का शिलान्यास करने के साथ ही माणा गाँव के लिए दो डबल लेन सड़कों की आधारशिला रखी। साथ ही जनता को संबोधित करते हुए कहा,

“आज बाबा केदार और बद्री विशाल जी के दर्शन करके मन प्रसन्न हो गया, जीवन धन्य हो गया। माणा गाँव, भारत के अंतिम गाँव के रूप में जाना जाता है। लेकिन मेरे लिए सीमा पर बसा हर गाँव, देश का पहला गाँव है।”

उल्लेखनीय है की पीएम केदारनाथ, बद्रीनाथ व माणा में 3400 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास कर रहे हैं। इनमें केदारनाथ व हेमकुंड साहिब रोपवे और चीन सीमा से लगे माणा क्षेत्र में दो राजमार्गों से संबंधित योजनाएँ शामिल हैं।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छोटी दिवाली (23 अक्टूबर 2022) के अवसर पर अयोध्या जाएँगे। वे रामलला का दर्शन और उनकी पूजा-अर्चना करेंगे। मंदिर निर्माण के कार्यों की समीक्षा करेंगे। अयोध्या में छोटी दिवाली पर पीएम मोदी का कार्यक्रम शाम 4.55 बजे शुरू होगा और 07.25 बजे खत्म होगा। इस बीच पीएम रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र साइट का दौरा करेंगे। सरयूजी की घाट पर आरती करेंगे। राम की पैड़ी पर पर दीपोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे।