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The Wire ने मेटा पर फर्जी स्टोरी से देश को किया बदनाम… अब पाठकों के सामने ‘संपादकीय नीति’ की नौटंकी और ‘माफीनामा’

Facebook की पैरेंट कंपनी Meta से संबंधित फर्जी कहानी गढ़ने के बाद वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट The Wire ने एक ‘माफीनामा’ प्रकाशित किया है, जिसमें वह संपादकीय मूल्यों की समीक्षा करने की बात कही है। वायर ने माफीनामे को जिस अंदाज में लिखा है, उससे लगता है कि वह विशुद्ध नौटंकी है। इस वामपंथी पोर्टल ने पहले फर्जी कहानी गढ़कर पूरी दुनिया में देश को बदनाम किया और फिर माफी की बात कहकर गुमराह करने वाला नौटंकी कर रहा है।

बुधवार (26 अक्टूबर 2022) को छापे अपने माफीनामे में वायर ने अपने पाठकों से ‘और बेहतर’ स्टोरी उपलब्ध कराने का वादा किया है। वायर ने दावा किया कि उसने बाहरी विशेषज्ञों की मदद से उपयोग की जाने वाली तकनीकी स्रोत सामग्री की आंतरिक समीक्षा करने के बाद अपनी मेटा कहानियों को हटा लिया है। इसके साथ ही वह आंतरिक संपादकीय प्रक्रियाओं की व्यापक समीक्षा भी कर रहा है।

वायर ने दावा किया कि यह प्रक्रिया अभी भी जारी है, लेकिन उसकी एक महत्वपूर्ण संपादकीय सीख यह रही कि जब उसके पास ‘जटिल तकनीकी साक्ष्य’ आएँ, चाहे वह उसकी टीम या किसी फ्रीलांसर द्वारा लाया जाए, तो तकनीकी स्किल वाली सभी प्रक्रियाओं को क्षेत्र के स्वतंत्र एवं प्रतिष्ठित विशेषज्ञों द्वारा क्रॉस-चेक किया जाएगा।

द वायर ने अपनी मेटा स्टोरी में दावा किया था कि उसके पास इस क्षेत्र के स्वतंत्र और प्रतिष्ठित विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने डेटा की जाँच करने के बाद निष्कर्षों को मंजूरी दी। द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन इस बाइलाइन स्टोरी को विशेषज्ञों ने ‘सबूत’ देने से इनकार कर दिया था। जाहिर सी बात है कि वायर की टीम ने स्वतंत्र विशेषज्ञों के नकली बयान दर्ज किए थे। वायर ने अपनी ‘माफी’ में इनमें से किसी का भी जिक्र नहीं किया है।

वायर ने यह भी नहीं बताया कि मेटा स्टोरी पर काम करने वाले उसकी टीम के कुछ सदस्य टेक फॉग फिक्शन में भी शामिल थे। इस साल जनवरी की शुरुआत में डॉकिंग सेवाएं प्रदान वाले लंदन स्थित संगठन Logically.ai से जुड़े देवेश कुमार और आयुष्मान कौल ने टेक फॉग स्टोरी पर काम किया था। टेक फॉग की कहानियां भी अब वापस ले ली गई हैं, लेकिन टेक फॉग का इस ‘माफी’ में कोई जिक्र नहीं है।

टेक फॉग स्टोरी में उन अज्ञात विशेषज्ञों का भी हवाला दिया गया, जिन्होंने इन निष्कर्षों को ‘सत्यापित’ करने का दावा किया था। टेक फॉग को इतना प्रचारित किया गया कि यह समाचार चैनलों पर प्राइम टाइम बहस का हिस्सा बन गया। एनडीटीवी इंडिया के रवीश कुमार ने इसे नाटकीय रूप से पेश किया था। इस मुद्दे को संसद में भी उठाया गया था और जाँच की माँग की गई थी। टेक फॉग की कहानियाँ वापस ले ली गईं, लेकिन वायर ने इसके लिए माफी नहीं माँगी।

इन दोनों स्टोरी में ऐसा दिखाने का प्रयास किया गया था कि भाजपा उसकी IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय इतने शक्तिशाली हैं कि वे सभी ऑनलाइन बातचीत और नैरेटिव को नियंत्रित कर रहे थे। हालाँकि, बाद में पता चला कि मोदी विरोध के चलते गढ़े हुए ‘सबूतों’ के साथ इस स्टोरी में जोड़-तोड़ की गई थी।

वायर और उसके संस्थापक संपादक वरदराजन गलत जानकारियाँ देने में सबसे आगे रहे हैं। जनवरी 2021 में गणतंत्र दिवस के दंगों के तुरंत बाद जब सैकड़ों तथाकथित किसानों ने लाल किले पर हमला किया था, उस दौरान एक ‘प्रदर्शनकारी’ नवप्रीत सिंह जिस ट्रैक्टर का इस्तेमाल कर रहा था, उसके पलट जाने से उसकी मौत हो गई।

वायर ने अपने लेख में कहा था कि नवप्रीत की मौत गोली लगने से हुई थी, न कि ट्रैक्टर के पलटने से। लेख में यहाँ तक झूठा दावा किया गया था कि पीड़ित के रिश्तेदारों ने पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर से बात की, जिसने कहा कि गोली लगने के दौरान ‘उसके हाथ बंधे हुए थे’। सरकार और पुलिस ने इससे इनकार किया और पोस्टमार्टम रिपोर्ट साझा की, लेकिन वायर ने इसे छापने की जहमत नहीं उठाई।

अपनी झूठी कहानियों के दम पर समाज में वैमनस्यता फैलाने और छवि खराब करने का वायर का पुराना रिकॉर्ड है। हालाँकि, वायर अपनी भूल सुधारने और माफी माँगने की कोशिश भी नहीं करता। मेटा मामले पर जब दुनिया भर में वायर की छिछालेदर हुई तो उसने माफी का दिखावा और अपने संपादकीय नीतियों की समीक्षा करने की नौटंकी कर रहा है।

जिन आतंकियों के लिए जेल को स्पा बना डाला, उनसे जुड़े कोयम्बटूर कार ब्लास्ट के तार: मुबीन के घर से मिले 75 किलो विस्फोटक, 5 जगहों पर होना था धमाका

तमिलनाडु के कोयम्बटूर में 1998 में हुए सीरियल ब्लास्ट में करीब 60 लोगों की मौत हो गई थी। इस ब्लास्ट से जुड़े आतंकियों के लिए जेल को स्पा में तब्दील करने के आरोप तत्कालीन डीएमके सरकार पर लगे थे। आरोपित अब्दुल नासिर महदानी को जेल में आयुर्वेदिक मालिश देने की बात सामने आई थी। अब इसी सीरियल ब्लास्ट से 23 अक्टूबर 2022 को कोयम्बटूर के कोट्टई ईश्वरम मंदिर के सामने हुए कार ब्लास्ट के तार भी जुड़ रहे हैं।

1998 सीरियल ब्लास्ट की तरह इस समय भी राज्य में कॉन्ग्रेस और उसके सहयोगी दल डीएमके की ही सरकार है। 23 अक्टूबर के ब्लास्ट में मारे गए आतंकी जमिजा मुबीन के घर से 75 किलो विस्फोटक बरामद हुए हैं। पुलिस ने अंदेशा जताते हुए कहा है कि बरामद सामग्रियों से ऐसा लगता है कि आरोपित और बम बनाने की तैयारी में थे। रिपोर्ट के अनुसार मुबीन ने 5 जगहों पर ब्लास्ट की साजिश रच रखी थी।

इस मामले में अब तक छह गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस आयुक्त बालकृष्णन ने कहा है,”मुबीन के घर से बरामद सामग्री कम तीव्रता वाले विस्फोटक बनाने में इस्तेमाल होते हैं। हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि विस्फोटक सामग्री की खरीद कैसे की गई थी।”

गिरफ्तार लोगों में मुबीन के रिश्ते का भाई अफसर खान भी है। उसके अलावा मोहम्मद थलका, मोहम्मद अजहरुद्दीन, मोहम्मद रियास, फिरोज इस्माइल और मोहम्मद अनस इस्माइल की गिरफ्तारी हुई है। इन पर यूएपीए लगाया गया है।

मुबीन से 2019 में आईएसआईएस से लिंक को लेकर पूछताछ की गई थी। यह अंदेशा भी जताया जा रहा है कि वह जहरान हाशिम नेटवर्क से जुड़ा था। जहरान हाशिम ईस्टर पर श्रीलंका में हुए सीरियल ब्लास्ट का मास्टरमाइंड है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार कोयम्बटूर में 1998 में हुए सीरियल ब्लास्ट से भी इसके लिंक मिल रहे हैं। कार ब्लास्ट के बाद पकड़े गए लोगों में मोहम्मद थलका भी शामिल है। वह नवाब खान का बेटा है, जो 1998 सीरियल ब्लास्ट में जेल में बंद है। सीरियल ब्लास्ट के लिए जिम्मेदार आतंकी संगठन अल-उमाह का मुखिया उसका चाचा सैयद अहमद बाशा ही है।

रिपोर्ट के अनुसार मुबीन उक्कडम में रहता था। यह इलाका हमेशा से संवेदनशील रहा है। खासकर 1998 के सीरियल ब्लास्ट के बाद से। यही कारण है कि विस्फोट के बाद जब मुबीन के घर के तलाशी ली जा रही थी, उसी समय अल-उमाह से जुड़े लोगों के घर पर भी दबिश दी गई। इनमें से एक घर नवाब खान का भी था। इसके बाद नवाब खान के बेटे थलका से पूछताछ की गई और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

23 अक्टूबर को हुए ब्लास्ट की पड़ताल में जिस तरह से चीजें सामने आ रही हैं, उससे लगता है कि 1998 के सिलसिलेवार धमाकों की तरह ही बड़ी साजिश रची गई थी। लेकिन किन्हीं कारणों से 24 साल बाद आतंकी उसी तरह की घटना को अंजाम देने में विफल रहे।

‘ऐसा ब्रिटेन बनाऊँगा जहाँ हमारे बच्चे दीया जला सके’: 10 डाउनिंग स्ट्रीट में दीवाली समारोह, ऋषि सुनक ने नवनिर्माण का संकल्प दुहराया

आर्थिक संकट में फँसे ब्रिटेन के ​नवनिर्माण को लेकर ऋषि सुनक (Rishi Sunak) ने अपनी प्रतिबद्धता दीपावली संदेश में भी दोहराई है। उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट में आयोजित दीवाली समारोह की तस्वीर ट्वीट कर कहा है कि वे ऐसे ब्रिटेन का निर्माण करेंगे, जहाँ हर बच्चा दीया जला सके।

सुनक ब्रिटेन के पहले अश्वेत और भारतीय मूल के प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने गुरुवार (27 अक्टूबर 2022) को ट्वीट कर कहा है, “आज की रात 10 डाउनिंग स्ट्रीट के दीवाली कार्यक्रम में हिस्सा लेना बेहतरीन रहा। इस पद पर रहते हुए मैं एक ऐसे ब्रिटेन के निर्माण के लिए सब कुछ करूँगा, जहाँ पर हमारे बच्‍चे और पोते-पोतियाँ दिया जला सकें और अपने भविष्य को लेकर आशान्वित हों। आप सबको दीपावली की शुभकामनाएँ।’

​42 साल के सुनक अपनी हिंदू जड़ों और संस्कृति तथा आस्था को लेकर बेहद मुखर रहे हैं। उन्होंने बतौर सांसद गीता पर हाथ रखकर शपथ ली थी। ब्रिटेन का वित्त मंत्री रहते हुए भी अपने आधिकारिक आवास में दीपावली मनाई थी। ऐसे में इस बार उनके लिए दीवाली बेहद खास थी। उन्होंने मंगलवार (25 अक्टूबर 2022) को किंग चार्ल्स III से मुलाकात कर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी सँभाली थी।

प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद ऋषि सुनक ने अपने पहले भाषण में देश में चल रहे आर्थिक संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध पर बात की थी। उन्होंने कहा था, “इस समय हमारा देश एक गहरे आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। यूक्रेन में युद्ध ने दुनिया भर के बाजारों को अस्थिर कर दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री लिज ट्रस ने इस देश के आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने की कोशिश की। मैं उनकी प्रशंसा करता हूँ। लेकिन उनके कार्यकाल में कुछ गलतियाँ हुईं हैं। हालाँकि, ये गलतियाँ गलत इरादे से नहीं की गईं, लेकिन गलतियाँ तो गलतियाँ ही होती हैं।”

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने यह भी कहा था, “मैं इस सरकार के एजेंडे के केंद्र में आर्थिक स्थिरता और विश्वास को रखूँगा। इसका मतलब होगा कि सरकार कठिन फैसले लेने वाली है। अपनी पार्टी और अपने देश को एक साथ लाना ही मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यही एक तरीका है जिसके जरिए हम सभी चुनौतियों का सामना करेंगे और अपने बच्चों के लिए एक बेहतर भविष्य तैयार करेंगे। मैं ईमानदारी के साथ दिन-रात काम करूँगा और ब्रिटेन के लोगों की सेवा करूँगा।”

बिहार के गया में देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ी, पुजारी का भी सुराग नहीं: सीता कुंड के सामने स्थित पंचदेव मंदिर बना निशाना, भारी पुलिस बल तैनात

बिहार के गया में पंचदेव मंदिर में देवताओं की मूर्तियाँ खंडित कर दी गई है। मंदिर के पुजारी को अगवा करने की बात भी कही जा रही है। घटना 25 अक्टूबर 2022 के रात की है। 26 अक्टूबर की सुबह लोगों को इसकी जानकारी मिली। श्रद्धालुओं का आक्रोश देखते हुए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है।

पुलिस की टीमें अपहृत पुजारी को खोजने में लगी हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला गया के मुफस्सिल थानाक्षेत्र का है। यहाँ बाईपास रोड पर जूना अखाड़े का पंचदेव मंदिर है। यह मंदिर फल्गु नदी के तट पर स्थित सीता कुंड के सामने ही है।

26 अक्टूबर की सुबह जब श्रद्धालु पंचदेव मंदिर में आए तो उन्हें सभी मूर्तियाँ क्षतिग्रस्त हालत में मिलीं। किसी मूर्ति का हाथ क्षतिग्रस्त था तो किसी का सिर। स्थानीय लोगों ने पुजारी तीर्थानंद की तलाश की तो उनका भी पता नहीं चला। मामले की जानकारी होने पर हिन्दू संगठनों के लोग भी मंदिर पहुँचे।

हालत तनावपूर्ण होते देख मंदिर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। मंदिर के पुजारी के मोबाइल से उनकी लोकेशन का पता लगाने का प्रयास हुआ। लेकिन पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली। एसपी मनीष कुमार के हवाले से आज तक ने बताया है कि आसपास के सीसीटीवी की जॉंच हो रही है। टेक्निकल टीम और डॉग स्क्वायड के किसी निष्कर्ष पर पहुँचने के बाद ही इस संबंध में कुछ कहा जा सकता है। एसपी ने आरोपितों को जल्द पकड़ने का भरोसा दिलाया है।

इस घटना के पीछे भूमाफियाओं का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। पंचदेव धाम के संस्थापक सदस्य बीगन विश्वकर्मा के अनुसार तीन साल पहले भी मंदिर के आसपास भूमाफियाओं ने कब्जे के दौरान हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया था।

स्थानीय भाजपा नेता मुन्ना सिंह ने भी इसके पीछे भूमाफियाओं का हाथ होने का अंदेशा जताया है। उन्होंने बताया कि भूमाफिया सरकारी जमीनों के अवैध कागज बनवाकर धड़ल्ले से बेच रहे हैं। स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से यहाँ कई अवैध निर्माण हुए हैं। उनके अनुसार कुछ दिन पहले ही मंदिर के पास एक स्थानीय व्यक्ति को गोली भी मारी गई थी।

हिजाब की आग में जल रहे ईरान में ISIS का हमला: शिया दरगाह पर बंदूकधारियों ने बरसाई गोलियाँ, 15 मरे-40 घायल

हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के बीच ईरान की एक शिया दरगाह में बंदूकधारियों ने गोलियाँ बरसाई। हमले में 15 लोगों की मौत हो गई। 40 जख्मी है। आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने हमले की जिम्मेदारी ली है।

हमला बुधवार (26 अक्टूबर 2022) को दक्षिणी ईरान के शिराज में स्थित शाह चेराघ दरगाह पर हुआ। इस्लामिक स्टेट ने टेलीग्राम चैनल के जरिए हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा है, “हमले में कम से कम से कम 20 शिया मारे गए और दर्जनों घायल हो गए।” वहीं, स्थानीय मीडिया के मुताबिक, इस हमले में 15 लोगों की मौत हुई है।

ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी ईरना ने न्याय विभाग के हवाले से कहा कि तीन हथियारबंद आतंकवादी स्थानीय समय के अनुसार शाम 5:45 बजे दरगाह में घुसे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, दरगाह में घुसते ही हथियारबंद आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। प्रवर्तन एजेंसियों ने दो आतंकवादियों को पकड़ लिया, जबकि तीसरे की तलाश जारी है। स्थानीय मीडिया ने बताया कि हमलावर ईरानी नागरिक नहीं हैं।

इस्लामिक स्टेट पहले भी शिया मस्जिद और दरगाहों पर हमले कर चुका है। आतंकियों ने 2017 में ईरानी संसद की इमारत और देश के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खोमैनी के मकबरे को निशाना बनाया था। ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने कहा कि वे इस हमले की साजिश रचने वालों को छोड़ेंगे नहीं।

गौरतलब है कि इस्लामी मुल्क ईरान में हिजाब के खिलाफ महिलाएँ महीने भर से अधिक समय से सड़कों उतर कर प्रदर्शन (Anti-Hijab Protest) कर रही हैं। इनमें स्कूल छात्राओं की भी बड़ी संख्या है। इन प्रदर्शनों में भाग लेने वाली छात्र-छात्राओं को पुलिस हिरासत में लेकर मानसिक अस्पतालों में भेज रही है।

महसा अमीनी की हत्या के बाद से महिलाएँ सड़कों पर उतर कर विरोध कर रही हैं। वे हिजाब फेंककर, जलाकर और अपने बालों को काटकर हिजाब के लिए इस्लामी सरकार का विरोध कर रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खुमेनाई की तस्वीरें भी जलाईं। इन प्रदर्शनकारी महिलाओं को देश-दुनिया से भर से भारी समर्थन मिल रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2022 में पुलिस द्वारा मारी गई महसा अमीनी की मौत के बाद से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन से 3 अक्टूबर के बीच ईरान के सुरक्षा बलों ने 144 लोगों की हत्या कर दी है। इनमें महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हैं। हालाँकि, मृतकों की वास्तविक संख्या इनसे कहीं अधिक बताई जा रही है।

ओडिशा से बंगाल जा रहा था तेल टैंकर, झारखंड में तलाशी हुई तो ठूँसे मिले गौवंश: 2 की हो चुकी थी मौत, शेख मेराज गिरफ्तार

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम में एक तेल टैंकर की तलाशी के दौरान उसमें ठूँस-ठूँस कर भरे गौवंश मिले। भारत पेट्रोलियम लिखे इस टैंकर में 23 गौवंश थे। इनमें से दो की मौत हो गई थी। यह मोडिफाइड तेल टैंकर ओडिशा से पश्चिम बंगाल जा रहा था। पुलिस ने टैंकर के ड्राइवर शेख मेराज को गिरफ्तार कर लिया है।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। टैंकर जब्त कर पुलिस ने जीवित गायें गौशाला को सौंप दी है। पूर्वी सिंहभूम जिला पुलिस ने यह कार्रवाई मंगलवार (25 अक्टूबर 2022) को की।

वायरल वीडियो में 2 लोग टैंकर में पीछे लगी सीढ़ियों के पास पिछला गेट खोलने का प्रयास कर रहे हैं। बाद में गेट खुलने के बाद अंदर से लकड़ी का एक चैंबर मिला, जिसे बाहर निकाला गया। इसके बाद टैंकर के किनारे बने खिड़कीनुमा झरोखों से अंदर गौवंश बेसुध हालत में दिखाई दे रहे हैं।

मामला थाना क्षेत्र बहरागोडा का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टैंकर का नंबर OR 11 D 6838 है। पुलिस द्वारा जामसोला के पास हो रही चेकिंग के दौरान इसे पकड़ा गया। इसे चला रहा ड्राइवर शेख मेराज ओडिशा के भद्रक का रहने वाला है। पूछताछ में उसने सहयोगी के तौर पर सुजीत मोहंती उर्फ बड़ा बाबू, अक्षय पैरीका के साथ टैंकर के मालिक का भी नाम बताया है। पुलिस ने ड्राइवर सहित इन सभी पर FIR दर्ज की है। झारखंड भाजपा नेता कुणाल सारंगी ने आरोप लगाया है कि गाय तस्करी को झारखंड सरकार का राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक शेख मेराज टैंकर पश्चिम बंगाल ले जा रहा था। गौ तस्करी के लिए टैंकर को मोड़ीफाई किया गया था। अंदर हवा जाने का भी रास्ता नहीं था, जिसके चलते अधिकतर गायें बेसुध हो गईं थीं।

‘ग्लोबल मुस्लिम मीडिया पर्सन ऑफ द ईयर’: राना अय्यूब के लिए नाइजीरिया के अजीबोगरीब पोर्टल से आया अवॉर्ड, ‘द गार्जियन’ बना हिजाब का सबसे बड़ा ‘दोस्त

वित्तीय धोखाधड़ी की आरोपित और वॉशिंगटन पोस्ट (Washinton Post) की स्तंभकार राना अय्यूब (Rana Ayyub) पिछले कुछ दिनों से अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ग्लोबल मुस्लिम मीडिया पर्सन ऑफ द ईयर अवॉर्ड से सम्मानित होने का दिखावा कर रही हैं।

सोशल मीडिया पर लोगों से बधाई मिलने के बाद उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक और पोस्ट डाला।

उन्होंने इस अवॉर्ड को ट्विटर पर भी शेयर किया है और तब से बधाइयों का तांता लगा हुआ है।

हम भी इस पुरस्कार को लेकर बहुत उत्सुक हैं। आखिरकार, नाइजीरिया की ‘मुस्लिम न्यूज’ नाम की एक वेबसाइट की टीम ने उन्हें चुना है। यह वेबसाइट नाइजीरिया और दुनिया भर में मुस्लिम अचीवर्स और इवेंट्स का एक मुखपत्र है, जिसे मुख्यधारा की मीडिया में कभी जगह नहीं मिलती। वेबसाइट के अनुसार, राना ‘आवाज़हीनों की आवाज़’ हैं और ‘मुस्लिमों, विशेष रूप से उन लड़कियों के अधिकारों की वकालत करने में सबसे आगे रहे हैं, जिन्हें दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र कहे जाने वाले भारत के विभिन्न भागों में निर्मम हिजाब प्रतिबंध के कारण शिक्षा से वंचित’ कर दिया गया है।

वेबसाइट ने डिस्क्लेमर दिया है कि ‘हालाँकि अय्यूब हिजाब नहीं पहनती हैं, लेकिन अवॉर्ड के आयोजकों ने पत्रकार की उस दृढ़ता की प्रशंसा की है, जिसके तहत वह मानती हैं कि भारत में हर मुस्लिम लड़की को हिजाब पहनने का मौलिक अधिकार है और उस अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए।”

वेबसाइट के प्रकाशक ने कहा कि अय्यूब आज हिजाब नहीं पहनती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह एक दिन इसका इस्तेमाल नहीं करेंगी। उन्होंने कहा, “इस तथ्य के कारण सम्मानित किया कि वह एक मुस्लिम हैं और भारत में लाखों लड़कियों को मोदी के उत्पीड़न का सामना करने के लिए हिजाब पहनने के लिए बोलती हैं। यह एक महान बलिदान है जिसे स्वीकार किया जाना चाहिए”। प्रकाशक अल्हाजी अबूबकर ने आगे कहा, “शरिया के अनुसार हिजाब अनिवार्य है, लेकिन शिक्षा लागू होने से पहले आती है, खासकर मुस्लिम या शरीयत राज्य में।”

हिजाब की बात करें तो इसी वेबसाइट ने इस साल सितंबर में यह पता लगाने के लिए एक पोल चलाया था कि कौन सा ग्लोबल मीडिया हाउस सबसे ‘हिजाब फ्रेंडली’ मीडिया हाउस है। इसमें ब्रिटेन के गार्डियन को सबसे ‘हिजाब फ्रेंडली’ मीडिया हाउस बताया गया था।

पोल में लोगों से यह चुनने के लिए कहा गया कि कौन-सा मीडिया हाउस उन्हें इस्लाम और उसके मूल्यों को बढ़ावा देने की अनुमति देता है। वेबसाइट ने मीडिया हाउस के हिजाबी पत्रकारों के बारे में कहा, “अपने संगठनों की संपादकीय नीतियों में हस्तक्षेप नहीं होने के बावजूद, जब हिजाब जैसे मुद्दे की बता आती है तो वे हमेशा अपनी कहानियों में, प्रिंट और ऑनलाइन दोनों में, नैरेटिव पर जोर देते हैं।”

हालाँकि, यह अनजान सा वेबसाइट नियमित रूप से अपडेट नहीं किया जाता है, क्योंकि उसके होम पेज के संपादकीय भाग को आखिरी बार जून 2020 में और उससे पहले नवंबर 2019 में अपडेट किया गया था। यह सामान्य नैरेटिव है कि मोदी फासीवादी हैं, आरएसएस अति-दक्षिणपंथी आतंकवादी समूह है और मुस्लिमों को भारत में कैसे सताया जाता है। यह वेबसाइट हिजाब पहनने वाली लड़कियों के प्रति बेहद जुनूनी है, क्योंकि इसके होम पेज पर कम से कम दो लेख हिजाब के बारे में हैं।

इस पर ईरान में हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिलाओं के बारे में एक भी रिपोर्ट नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि अय्यूब के अलावा ‘हिजाब के रखवाला’ नामक किसी को इस बार नाइजीरियाई मुस्लिम पर्सनालिटी ऑफ द ईयर से सम्मानित किया गया। ये ‘हिजाब के रखवाले’ नाइजीरिया के 12 मुस्लिम थे, जिन्होंने नाइजीरिया के सुप्रीम कोर्ट में हिजाब के लिए लड़ाई लड़ी थी। 17 जून 2022 को नाइजीरिया के सुप्रीम कोर्ट ने लागोस पब्लिक स्कूलों में हिजाब के इस्तेमाल को बरकरार रखा। यह फैसला 9 साल की कानूनी लड़ाई के बाद आया है। अय्यूब को सम्मानित करने वाली इस वेबसाइट के प्रकाशक के अनुसार, यह निर्णय ‘हाल के दिनों में नाइजीरियाई मुस्लिम समुदाय द्वारा दर्ज की गई सबसे बड़ी उपलब्धि’ थी।

यूक्रेन से युद्ध के बीच रूस ने निकाला अपना सबसे बड़ा हथियार! पुतिन के सामने न्यूक्लियर ड्रिल शुरू, रूसी रक्षा मंत्री ने राजनाथ सिंह को मिलाया फोन

पिछले 8 महीने से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध चल रहा है, लेकिन किसी भी पक्ष की तरफ परिणाम अब तक नहीं आया है। इसी बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक परमाणु ड्रिल का निरीक्षण किया है, जिसके बाद दुनिया भर में हलचल तेज़ हो गई है। रूस की ‘स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर फोर्सेज’ ने ये ड्रिल किया। सुदूर पूर्व और आर्कटिक की तरफ बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों को भी लॉन्च किया गया। अमेरिका को इस ड्रिल के बारे में ‘न्यू स्टार्ट आर्म्स ट्रीटी’ के तहत पहले ही सूचित कर दिया गया था।

हालाँकि, रूस का ये वार्षिक न्यूक्लियर ड्रिल था, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बीच इसे आयोजित किए जाने से तनाव बढ़ गया है। रूस ने आरोप लगाया है कि यूक्रेन अब युद्ध में ‘डर्टी बम’ का इस्तेमाल कर रहा है। ये एक प्रकार का ऐसा बम होता है, जिसे विस्फोटकों के साथ रेडियोएक्टिव मैटेरियल्स मिला कर बनाया जाता है। हालाँकि, पश्चिमी देश इस आरोप को झूठा बता रहे हैं। वहीं यूक्रेन का कहना है कि इस दावे से लगता है कि रूस खुद ऐसी कोई तैयारी कर रहा है।

जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था, उससे 5 दिन पहले भी न्यूक्लियर ड्रिल हुआ था। उधर उत्तर-पश्चिमी यूरोप में NATO भी ‘Steadfast Noon’ नामक सैन्य अभ्यास कर रहा है। इसमें 14 देश शामिल हैं। दक्षिणी और पूर्वी यूक्रेन में रूस अभी भी जमा हुआ है। रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने कहा है कि ये ड्रिल इसीलिए किया गया, ताकि अगर दुश्मन परमाणु हमला करे तो हम पूरी ताकत से परमाणु हथियारों से जवाब दे सकें।

उधर रूसी रक्षा मंत्री ने भारत के अपने समकक्ष राजनाथ सिंह से भी फोन पर बात की है। राजनाथ सिंह ने दो टूक कहा है कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किसी भी पक्ष द्वारा किसी भी कीमत पर नहीं किया जाना चाहिए और बातचीत के जरिए मामले को सुलझाना चाहिए। चूँकि यूक्रेन के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, राजनाथ सिंह का ये सन्देश रूस और पश्चिमी देशों के लिए था। रूसी रक्षा मंत्री ने इस फोन कॉल पर ‘डर्टी बम’ की आशंका सहित युद्ध की अन्य स्थितियों के बारे में राजनाथ सिंह से बात की।

असम में मियाँ म्यूजियम के पीछे पूर्व AAP नेता! अलकायदा से भी जुड़े तार: पुलिस ने 3 को दबोचा, संग्रहालय को सील कर चुकी है सरमा सरकार

असम में सील किए गए ‘मियाँ संग्रहालय’ संग्रहालय ने ना सिर्फ भूमि और संपत्ति कानूनों का उल्लंघन किया है, बल्कि इससे जुड़े सदस्यों के लिंक आतंकी संगठनों से भी जुड़े मिले हैं। ‘असम मियाँ परिषद’ के अध्यक्ष और महासचिव सहित तीन लोगों को भारतीय उपमहाद्वीप में अल कायदा (AQIS) और अंसारुल बांग्ला टीम (ABT) के साथ लिंक के लिए गिरफ्तार किया गया है।

असम के गोलपारा जिले के दपकाभिता में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवंटित एक घर में विवादास्पद ‘मियाँ संग्रहालय’ का खुलासा हुआ था। इसे 25 अक्टूबर 2022 को प्रशासन ने सील कर दिया था। इसके बाद मियाँ परिषद मामले का खुलासा हुआ है।

मियाँ परिषद के अध्यक्ष एम मोहर अली को गोलपाड़़ा जिले के दपकाभिता में संग्रहालय से पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मोहर अली संग्रहालय को खोलने के लिए अपने दो नाबालिग बेटों के साथ धरने पर बैठा था। मोहर एक निलंबित सरकारी स्कूल शिक्षक है। वहीं, इसके महासचिव अब्दुल बातेन शेख को मंगलवार (25 अक्टूबर 2022) की रात को धुबरी जिले के आलमगंज स्थित उसके आवास से हिरासत में लिया गया।

इसके अलावा तीसरा आरोपित तनु धादुमिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) का पूर्व नेता और अहोम रॉयल सोसाइटी का सदस्य तनु ने 23 अक्टूबर 2022 को संग्रहालय का उद्घाटन किया था। पुलिस ने डिब्रूगढ़ के कावामारी गाँव स्थित आवास से तनु को हिरासत में लिया है। उधर AAP का कहना है कि तनु को पार्टी से निकाल दिया गया है।

इन तीनों को हिरासत में लेने के बाद पूछताछ के बाद घोगरापार थाने में लाया गया है, जहाँ उनसे पूछताछ की जा रही है। तीनों पर आतंकवादी समूहों के साथ संबंधों के लिए गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

हिरासत में लिए गए तीन लोगों के नाम हाल ही में गिरफ्तार किए गए कुछ कट्टरपंथियों से पूछताछ के दौरान सामने आए हैं। नलबाड़ी के पुलिस अधीक्षक फणींद्र कुमार नाथ ने कहा, ”इस महीने की शुरुआत में हमने तीन जिहादियों- जुबैर हुसैन, अबू रेहान और हाबेल अली को गिरफ्तार किया था, जिनके एक्यूआईएस और एबीटी से संबंध थे। वे सभी, जो अब भी हमारी हिरासत में हैं, ने पूछताछ के दौरान कहा था कि मिया संग्रहालय की स्थापना में उनका कुछ योगदान था।”

संग्रहालय को सील करने की कार्रवाई से एक दिन पहले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने संग्रहालय की फंडिंग पर सवाल उठाया था। सरमा ने कहा था, “मुझे समझ में नहीं आता कि यह किस तरह का संग्रहालय है। संग्रहालय में उन्होंने जो हल रखा है, उसका उपयोग असमिया लोग करते हैं। यहाँ तक कि मछली पकड़ने के लिए उपयोग की जाने वाली वस्तुएँ भी असमिया समुदाय से हैं। ‘लुंगी’ को छोड़कर वहाँ रखी गई हर चीज असमिया लोगों की है। उन्हें यह साबित करना होगा कि नंगोल (हल) का उपयोग केवल मियाँ लोग करते हैं, अन्य नहीं। अन्यथा, मामला दर्ज किया जाएगा।”

सरमा ने कहा, “संग्रहालय में केवल पारंपरिक वस्तुएँ हैं जो पूरे असमिया समाज की संस्कृति को दर्शाती हैं न कि मियाँ समुदाय की। राज्य के बुद्धिजीवियों को इस पर विचार करना चाहिए। जब मैंने मियाँ शायरी के खिलाफ आवाज उठाई तो उन्होंने मुझे सांप्रदायिक कहा। अब मियाँ कविता, मियाँ स्कूल, मिया संग्रहालय यहाँ हैं… सरकार कार्यालय खुलने के बाद मामले पर कार्रवाई करेगी।”

इससे पहले, राज्य में भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने संग्रहालय खोलने वालों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी, जिन्होंने जिले में ‘प्रवासी मुसलमानों की संस्कृति’ को प्रदर्शित करने का दावा किया था। डिब्रूगढ़ के भाजपा विधायक प्रशांत फुकन संग्रहालय के खिलाफ आवाज उठाने वालों में सबसे पहले थे। उन्होंने कहा था, “मैं राज्य सरकार से इस संग्रहालय को बंद करवाने का अनुरोध करता हूँ।” भाजपा विधायक शिलादित्य देव ने भी संग्रहालय स्थापित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की थी।

रिपोर्टों के अनुसार, ‘मियाँ‘ शब्द का इस्तेमाल उन मुस्लिमों के लिए किया जाता है जो बंगाल से माइग्रेट कर गए थे और 1890 के दशक के अंत में असम में बस गए। अंग्रेजों ने उन्हें कथित तौर पर व्यावसायिक खेती के लिए खरीदा था।

दिवाली पर दोस्त से मिलने जा रहे थे 2 हिन्दू युवक, फैजी ने साथियों संग कर दिया हमला: अस्पताल में भर्ती, सरिया और ईंट-पत्थर से किया वार कर लूटे रुपए-चेन

उत्‍तर प्रदेश के कन्नौज में दिवाली के मौके पर अपने दोस्‍त से म‍िलने जा रहे दो हिन्दू युवकों पर फैजी व उसके साथ‍ियों ने हमला कर द‍िया। दोनों युवक इस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना सदर कोतवाली क्षेत्र के चिरैयागंज मोहल्ला स्थित कांशीराम कॉलोनी में हुई। यहाँ रहने वाले दीपू के घर उसके कुछ दोस्त मिलने आए थे।

एक र‍िपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार (25 अक्टूबर, 2022) की देर रात सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला चिरैयागंज में काशीराम कॉलोनी में देर रात जमकर संघर्ष हो गया। चित्रांश और निखिल मिश्रा काशीराम कॉलोनी में अपने दोस्त दीपू के घर उससे मिलने गए थे। वहीं रहने वाले फैजी नामक युवक से किसी बात को लेकर उनकी बहस हो गई, इस पर फैजी ने अपने आठ-दस साथी बुला ल‍िया और उन्होंने सरिया और ईंट-पत्थर से उन पर हमला कर दिया। पुलिस ने मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है ।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस एसपी कुँवर अनुपम सिंह फोर्स के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। पुलिस के आने की भनक लगते ही हमलावर भाग गए। घटना को लेकर निखिल मिश्रा के पिता प्रेमचंद्र मिश्रा ने कोतवाली में तहरीर दी है जिसमे फैजी, नफीस खलीफा, सूफियान, हसनैन, इकराम, सद्दाम, अजहर के खिलाफ बेटे पर लाठी सरिया और तमंचे से हमला बोलने का आरोप लगाया है। मिश्रा ने अपनी शिकायत में कहा है कि हमलावरों ने गोली भी चलाई तथा निखिल पास से 6500 रुपए और सोने की चेन छीन ली तथा चित्रांश के पास से 2500 रुपए निकाल लिए।

वहीं एक पत्रकार हिमांशु द्विवेदी ने एक वीडियो ट्वीट कर कहा, “दोस्त के घर दिवाली मिलने जा रहे युवकों पर हमला। युवकों पर सम्प्रदाय विशेष के युवकों ने किया हमला। हमले में दो युवक बुरी तरह हुए घायल। सदर कोतवाली क्षेत्र के चिरैयागंज कांशीराम कालोनी का मामला।”

वहीं घटना के बाद समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने हमले में घायल चित्रांश और न‍िख‍िल के घर जाकर उनसे मुलाकात की। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “चिरैयागंज में अराजक तत्वों द्वारा किये गए हमले में घायल चित्रांश एवं निखिल के घर जाकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और SP को आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने को निर्देशित किया, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।”

पुलिस अधीक्षक कुँवर अनुपम सिंह ने बताया कि चिरैयागंज में हुई घटना में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक युवक को हिरासत में लिया गया है। उससे पूछताछ की जा रही है।