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‘सिखों के लिए ऐतिहासिक पल, वाहेगुरु ने सुन ली अरदास’: हेमकुंट साहिब रोपवे के शिलान्यास पर सिख संस्थाओं ने PM मोदी को कहा धन्यवाद, ‘अकाल तख़्त’ ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड के चमोली में स्थित हेमकुंट साहिब का दर्शन सुगम बनाने के लिए रोपवे की सौगात दी है, जिसके बाद सिख समाज ने उन्हें धन्यवाद दिया है। ‘श्री अकाल तख़्त साहिब’ के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने गोविंदघाट और हेमकुंट साहिब को जोड़ने वाले इस रोपवे के शिलान्यास के लिए पीएम मोदी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सिखों के लिए ये एक ऐतिहासिक पल है और इससे श्रद्धालु अधिक से अधिक संख्या में तीर्थस्थल पहुँच पाएँगे।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिख परंपराओं और गुरु ग्रन्थ साहिब की शिक्षाओं के प्रति गहरी संवेदना और सम्मान का प्रदर्शन किया है। इस क्रम में आपने कई कदम उठाए हैं, जिनमें गुरु तेग बहादुर जी का गुरु परब लाल किले पर मनाना भी शामिल है। जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अकाल तख़्त आए थे, जब सिखों से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों पर गहन चर्चा हुई थी। उन्होंने आश्वस्त किया था कि वो व्यक्तिगत रूप से आपसे इन मुद्दों पर चर्चा करेंगे और हम सब मिल कर इससे उबरेंगे।”

ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि वो अब इसके सकारात्मक परिणति की तरफ देख रहे हैं, जिससे सिख समाज का भविष्य चमकदार होगा। इसके अलावा ‘दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमिटी (DSGMC)’ ने भी कहा है कि सिख संगत केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय द्वारा बनवाए जा रहे इस 12.4 किलोमीटर के रोपवे को लेकर मोदी सरकार को धन्यवाद देता है। संस्था ने कहा कि बुजुर्ग सिख भी गुरु साहिब का दर्शन के पाएँगे और यात्रा का समय भी घट जाएगा।

महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित तख़्त सचखंड श्री हुजूर साहिब के प्रशासक ने भी पत्र लिख कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया है। संस्था ने कहा कि हेमकुंट साहिब एक स्वर्ग जैसा स्थान है, जहाँ गुरु गोविंद सिंह ने अपने पिछले जन्म में तपस्या की थी, लेकिन 19 किलोमीटर के पहाड़ी ट्रेक के कारण कई श्रद्धालु यहाँ नहीं जा पाते थे। संस्था ने कहा कि वाहेगुरु ने अब हमारी अरदास सुन ली है। ‘द सिख फोरम’, हरियाणा की गुरुद्वारा कमिटी और ‘वाहेगुरु कमिटी’ सहित कई सिख संस्थाओं और संगठनों ने इस निर्णय पर ख़ुशी जताई है।

बता दें कि शुक्रवार (21 अक्टूबर, 2022) को पीएम नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखंड के माणा में 3400 करोड़ रुपये से अधिक की सड़क और रोपवे परियोजनाओं की आधारशिला रखी। 2 रोपवे – केदारनाथ से गौरीकुंड और हेमकुंड रोपवे के बारे में चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने बाबा केदारनाथ, बद्री विशाल और सिख गुरुओं के आशीर्वाद को इसकी प्रेरणा एवं प्रगति का श्रेय दिया। उन्होंने कामगारों और इंजीनियरों से भी बात की और लोगों से उनका ख्याल रखने की सलाह देते हुए कहा कि वो भगवान का कार्य कर रहे हैं।

UP में सर्वे के दौरान खुलासा: देवबंद का दारुल उलूम यूपी मदरसा बोर्ड में नहीं है पंजीकृत, सहारनपुर में मिले 360 मदरसे

नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश की सीमा पर बढ़ते मस्जिद-मरदसों पर ऑपइंडिया की रिपोर्टिंग की श्रृंखला के बाद प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार (Yogi Adityanath Government) ने मदरसों के सर्वे का आदेश दिया था। इसके तहत यूपी में मदरसों के सर्वे का काम बहुत तेजी से चल रहा है।

सर्वे में अकेले यूपी के सहारनपुर में अब तक 360 मदरसे ऐसे मदरसे मिले हैं, जो सरकार से गैर-अनुदान वाले और गैर-मान्यता प्राप्त हैं। इनमें से एक भारत के सबसे बड़े मदरसों में शामिल देवबंद का दारुल उलूम मदरसा (Darul Ulum Deoband Madarsa) भी शामिल है।

देवबंद का दारुल उलूम मदरसा लगभग 156 साल पुराना है और यह मदरसा सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत है। सर्वे के दौरान यह बात सामने आई है कि दारुल उलूम यूपी मदरसा बोर्ड में पंजीकृत नहीं है और यह सरकारी सहायता भी नहीं लेता है।

सहारनपुर के सदर तहसील में गैर-सहायता प्राप्त मदरसों की संख्या सबसे अधिक 123 है। वहीं, बेहट तहसील में इनकी संख्या सबसे कम है। हालाँकि, सर्वे का काम अभी भी जारी है और इन मदरसों की संख्या और बढ़ सकती है।

मदरसों के सर्वे का काम 10 सितंबर 2022 से चालू है। सर्वे रिपोर्ट को तैयार कर डीएम अखिलेश सिंह 15 नवंबर तक शासन को भेजेंगे। सर्वे में मदरसों का पाठ्यक्रम, स्थापना वर्ष, संस्थापक, संचालित करने वाली संस्था, छात्रों की संख्या, मदरसे को सरकारी मदद व शिक्षकों की संख्या आदि पर बिन्दुवार रिपोर्ट को तैयार की जा रही है।

डीएम अखिलेश सिंह ने बताया कि दारुल उलूम भी सरकार से मदद नहीं लेता और यह सोसाइटी एक्ट में है पंजीकृत है, लेकिन यह अवैध है ऐसा नहीं कहा जा सकता। जो मदरसे सरकार से सहायता प्राप्त हैं, उनका अल्पसंख्यक विभाग में पंजीकरण आवश्यक है। जो मदरसे सरकार से मदद नहीं ले रहे उनको अवैध तब तक नहीं कह सकते, जब तक कि यह पुष्टि न हो जाए कि उनको प्राप्त मदद का स्रोत उचित नहीं है।

बता दें कि प्रदेश सरकार द्वारा गैर सहायता प्राप्त मदरसों का सर्वे कराने के विरोध में दारुल उलूम देवबंद में यूपी के मदरसों का सम्मेलन हुआ था। इसमें मौलाना अरशद मदनी ने कहा था कि मदरसों का सर्वे कराना सरकार का अधिकार है। मदरसों के अंदर कोई अवैध गतिविधि नहीं होती, इसके बारे में पता करना सरकार की जिम्मेदारी है।

मुंबई के होटल में बम ब्लास्ट की धमकी देने वाला गिरफ्तार, शराब के नशे में किया कॉल: पहले यूनिवर्सिटी में धमाके की बात बोलने पर पकड़ा गया था

मुंबई पुलिस को फोन करके बम धमकी देने वाले शख्स को गिरफ्तार कर लिया गया। युवक की गिरफ्तारी ऐसे मामले में दूसरी बार हुई है। बताया जा रहा है युवक ने शराब के नशे में पुलिस को फोन करके धमकाया था। हालाँकि पुलिस ने छानबीन में पाया कि वो ऐसा पहले भी करता रहा है।

बता दें कि मुंबई पुलिस को गुरुवार (20 अक्टूबर 2022) को रात 8: 49 पर एक फोन कॉल आया था। कॉल पर अज्ञात ने कहा कि शहर के ग्रैंड हयात में धमाके होने वाले हैं। पुलिस ने कॉल किए गए नंबर को ट्रेस किया और शुक्रवार (21 अक्टूबर 2022) तक आरोपित की गिरफ्तारी हुई।

रिकॉर्ड की छानबीन में पता चला कि आरोपित ने इससे पहले मुंबई यूनिवर्सिटी में बम धमाके के बारे में गलत जानकारी दी थी। इसके बाद वकोला पुलिस थाने में उसे कस्टडी में लिया गया था।

उल्लेखनीय है कि 18 अक्टूबर को रात के 10:45 पर नवी मुंबई पुलिस के पास हेल्पलाइन नंबर 112 पर एक कॉल आई थी। कॉल पर कहा गया था कि मुंबई के इनफिनिटी मॉल, पीवीआर मॉल, सहारा मॉल में धमाके होने वाले हैं।

जानकारी पाते ही पुलिस सीआईएसएफ के साथ मौके पर पहुँची। हर जगह छानबीन बुई लेकिन कहीं कुछ नहीं मिला। केस को दर्ज करके आगे की जाँच शुरू कर दी गई है। मुंबई पुलिस का कहना है कि फर्जी कॉल कर करके केवल डर फैलाने की कोशिश हो रही है। शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। वहीं 1 नवंबर से 15 नवंबर तक सुरक्षा लिहाज से धारा 144 लगाने का फैसला लिया है।

ऐ रुक जा, रुक जा… भरी ट्रेन में 4 मुस्लिमों ने पढ़ी तसल्ली से नमाज, आते-जाते यात्रियों को गेट पर रोका: BJP के पूर्व MLA भी हुए परेशान, Video देख प्रशासन हरकत में आया

सोशल मीडिया पर ट्रेन के अंदर सामूहिक नमाज़ का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो उत्तर प्रदेश के कुशीनगर का बताया जा रहा है। वीडियो के अंदर स्लीपर क्लास में न सिर्फ कई लोग आने-जाने वाली गैलरी में नमाज़ पढ़ रहे हैं बल्कि उधर से गुजरने वालों से रोक-टोक भी कर रहे हैं। इस वीडियो को भाजपा के पूर्व विधायक द्वारा बनाया गया बताया जा रहा है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने मामले की जाँच की बात कही है। SP रेलवे का कहना है कि अगर तहरीर मिली तो FIR भी दर्ज की जाएगी। वीडियो शुक्रवार (21 अक्टूबर 2022) को वायरल हुआ है।

वीडियो सत्याग्रह एक्सप्रेस का बताया जा रहा है जिसका ट्रेन नंबर (15273) है। वायरल वीडियो में स्लीपर क्लास की बोगी में दोनों तरफ यात्री बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। गलियारे में बाकायदा चादर बिछाई गई है जिसमें एक लाईन से 4 नमाज़ी इबादत करते देखे जा सकते हैं। इस दौरान एक अन्य व्यक्ति इन नमाज़ियों की रखवाली करते हुए आने-जाने वालों को रुकने और इंतज़ार करने के लिए कह रहा है। असुविधा का सामना करने वाले यात्रियों में महिलाओं को भी साफ़ देखा जा सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नमाज़ियों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। लेकिन मिली जानकारी के अनुसार ये वीडियो कुशीनगर के खड्डा रेलवे स्टेशन पर भाजपा के पूर्व विधायक दीपलाल भारती द्वारा बनाया गया है। दीपलाल भारती ने ऐसी हरकत को नागवार बताते हुए कहा कि वो खुद उसी ट्रेन से सफर कर रहे थे। पूर्व विधायक के मुताबिक असुविधा के शिकार वो स्वयं हुए क्योंकि उन्हें दूसरे कोच में जा कर बैठना पड़ा था। इसी के साथ दीपलाल भारती ने ऐसा करने वालों पर कार्रवाई की माँग की है।

वीडियो वायरल होने के बाद हरकत में आए प्रशासन ने मामले की जाँच शुरू कर दी। घटना का संज्ञान उत्तर प्रदेश राज्य रेलवे पुलिस सुरक्षा बल और केंद्रीय रेलवे सुरक्षा बल दोनों ने लिया है। क्षेत्र के SP रेलवे अवधेश सिंह के मुताबिक वायरल वीडियो का संज्ञान लिया गया है। वहीं RPF वाराणसी परिक्षेत्र भी लोगों से जानकारी जुटा कर जाँच और कार्रवाई की जानकारी दे रहा है।

कर्नाटक सरकार ने 10889 मस्जिदों को दिए लाउडस्पीकर्स बजाने के लाइसेंस, अकेले बेंगलुरु में 1841 मस्जिदों को माइक पर अजान की अनुमति: रिपोर्ट

देश में जब लाउडस्पीकर्स को हटाने की बात की जा रही है, तब कर्नाटक सरकार ने अजान के लिए कई मस्जिदों को स्थायी लाइसेंस दे दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने राज्य में कुल 17,850 लाइसेंस जारी किए हैं, जिसमें से 10,000 से अधिक लाइसेंस मस्जिदों को जारी किए गए हैं। दरअसल, ‘डेक्कन हेराल्ड’ ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि कर्नाटक सरकार के पास लाउडस्पीकर्स के लाइसेंस के लिए आवेदन आए थे, जिसमें से सरकार ने राज्य में 10,889 लाइसेंस सिर्फ मस्जिदों को अजान के लिए जारी किए हैं।

इन लाइसेंसों के लिए सरकार ने 400 रुपए का शुल्क निर्धारित किया है। लाइसेंस दो साल तक मान्य रहेंगे। गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में कई हिंदू संगठनों ने एकजुट होकर लाउडस्पीकर्स पर बैन लगाने की माँग करते हुए प्रदर्शन किए थे। इसके बाद भी राज्य सरकार ने लाइसेंस जारी कर दिए हैं। ‘डेक्कन हेराल्ड’ ने रिपोर्ट में गृह मंत्रालय के आँकड़ों के हवाले से बताया है कि लाउडस्पीकर के लिए सबसे अधिक 1841 लाइसेंस बेंगलुरु में जारी किए गए हैं।

इनमें मस्जिद, मंदिर, चर्च और कुछ रेस्टॉरेंट शामिल हैं। वहीं, विजयपुरा में लाउडस्पीकर के लिए सबसे अधिक 744 मस्जिदों को लाइसेंस दिया गया है। इस मामले में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने कहा है कि मस्जिदों को लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने की इजाजत इसके खिलाफ किए गए प्रयासों को झटका नहीं है, बल्कि हर कोई सिर्फ नियम का पालन चाहता है। सुप्रीम कोर्ट ने लाउडस्पीकर के उपयोग के संबंध में दिशानिर्देश निर्धारित किए हैं।

इस हिसाब से रात 10 से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर नहीं बजने चाहिए। सरकार द्वारा अगर लाउडस्पीकर के लिए लाइसेंस दिया भी जाता है, तो इसका डेसिबल स्तर क्या है? यह सब तय होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि इस साल ही शुरुआत में, कर्नाटक सरकार ने लाउडस्पीकरों को लेकर हुए विवादों के बाद रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकर के उपयोग को प्रतिबंधित कर दिया था। हालाँकि, सरकार द्वारा जारी इस आदेश में यह भी कहा गया था कि आवश्यक होने पर संबंधित अधिकारियों की अनुमति के बाद लाउडस्पीकर का उपयोग किया जा सकता है।

कर्नाटक सरकार ने औद्योगिक क्षेत्र में दिन के दौरान 75 डेसिबल और रात में 70 डेसिबल के शोर स्तर की अनुमति दी थी। वाणिज्यिक क्षेत्रों में दिन के दौरान 65 डेसिबल और रात में 55 डेसिबल के शोर स्तर की अनुमति है। रिहायशी इलाकों में दिन में ध्वनि स्तर 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल है। इसके अलावा, शांत क्षेत्र में दिन के दौरान 50 डेसिबल और रात में 40 डेसिबल तक शोर की अनुमति है। गौरतलब है कि मस्जिदों में अजान के समय उपयोग किए जाने लाउडस्पीकर्स को लेकर श्रीराम सेना के अध्यक्ष प्रमोद मुतालिक ने कहा था कि वह अजान को काउंटर करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे।

उन्होंने कहा था, “कोर्ट के आदेश के अनुसार रात 10 से सुबह 6 के बीच लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जा सकता लेकिन वे लोग (मुस्लिम) सुबह 5 बजे कर रहे हैं। इसलिए, हम भी इसका उल्लंघन करेंगे और इस तरह सरकार को चेतावनी देंगे। हमारी लड़ाई मस्जिदों में अजान या नमाज अदा करने के खिलाफ नहीं है, बल्कि लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के खिलाफ है।”

‘1 लाख राजपूत सर कटाने को तैयार हैं…’: दिल्ली-मुंबई नहीं, नाथद्वारा से क्यों लॉन्च हुआ रिलायंस का 5G? इस इतिहास में गोवर्धन पर्वत और औरंगजेब भी

मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ने 5G सेवाएँ लॉन्च कर दी गई है। इसके लिए उनके बेटे आकाश अंबानी परिवार सहित नाथद्वारा पहुँचे थे, जहाँ ये कार्यक्रम हुआ। अब आपके मन में ये सवाल ज़रूर उठ सकता है कि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु या चेन्नई जैसे शहरों से क्यों नहीं, राजस्थान के राजसमंद स्थित एक छोटे से शहर से भला 5G जैसी सेवा क्यों लॉन्च की गई, जिससे देश भर में डिजिटल क्रांति आने वाली है। आगे बढ़ने से पहले बता दें कि नाथद्वारा, श्रीनाथजी का नगर है।

रिलायंस परिवार की श्रीनाथजी में रही है गहरी आस्था, यहीं से लॉन्च हुआ 4G और 5G

इसी मंदिर के मोती महल परिसर में आकाश अंबानी ने रिलायंस जियो की 5G सेवाओं का शुंभारंभ किया। शनिवार (22 अक्टूबर, 2022) को सुबह 10:30 से लेकर दोपहर 12 बजे तक ये कार्यक्रम चला। नाथद्वारा में 5G सेवाओं के लिए 20 टॉवर की व्यवस्था की गई है, जिससे लोगों को हाईस्पीड इंटरनेट मिलेगी। याद रखने वाली बात ये भी है कि 2015 में 4G सेवाएँ लॉन्च करने से पहले मुकेश अंबानी ने यहाँ श्रीनाथजी का दर्शन किया था।

इस साल भी करीब एक महीने पहले वो अपनी होने वाली बहू राधिका मर्चेंट के साथ श्रीनाथजी के दरबार में पहुँचे थे। उन्होंने तभी इसका ऐलान कर दिया था और धनतेरस के अवसर पर इसकी शुरुआत भी हो गई। मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी की माँ कोकिलाबेन श्रीनाथजी मंदिर ट्रस्ट की वाइस प्रेजिडेंट भी हैं। श्रीनाथजी के प्रति धीरूभाई अंबानी की भी गहरी आस्था थी। मुकेश अंबानी कभी विग्रह के सामने अपना मोबाइल फोन नहीं निकालते हैं।

श्रीनाथजी बाल स्वरूप भगवान हैं। इस मंदिर परिसर में मोती महल चौक, महाप्रभु जी की बैठक, कीर्तनिया गली, रतन चौक, कमल चौक, गोवर्धन पूजा चौक, प्रीतमपोली, नक्कारखाना, कृष्ण भण्डार, समाधान, खर्च भण्डार, लालन का चबूतरा, प्रसादी भण्डार और नाक चौक जैसे स्थल आते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का ये मंदिर हवेलीनुमा है। सन् 1672 में ब्रज से ये प्रतिमा आई थी। यह वल्लभ संप्रदाय का प्रधान पीठ है, ऐसे में वैषणव समाज की श्रीनाथजी में गहरी आस्था है।

राजस्थान के सजसमंद स्थित नाथद्वारा का श्रीनाथजी मंदिर: परिचय

अब हम आपको श्रीनाथजी मंदिर का इतिहास बताएँगे, लेकिन उससे पहले मंदिर के बारे में जानते हैं। सबसे पहले तो ये जानिए कि यहाँ के मुख्य विग्रह के रूप में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को अपने हाथ की उँगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाए दिखाया गया है। कथा कुछ यूँ है कि ब्रजभूमि में जब इंद्र ने मूसलाधार बारिश कराई तो श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्क ऊँगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा कर समस्त जनता को अतिवृष्टि से बचाया। अंत में इंद्र को अपनी गलती का पछतावा हुआ और उन्होंने भगवान से क्षमा माँगी।

नाथद्वारा मंदिर का पेंटिंग की दुनिया में भी खासा महत्व है। सुंदर-सुंदर चित्रकारी का ये शहर हब रहा है। नाथद्वारा शैली की चित्रकारी को ‘पिछवाई’ भी कहते हैं, जो आकार में बड़ी होती है और सामान्यतः कपड़ों पर बनाई जाई है। स्थानीय लोग इसे ‘ठाकुर जी की हवेली’ भी कहते हैं। सुबह के लगभग 11 बजे ‘राजभोग दर्शन’ होता है, जब भगवान को दिन का भोजन दिया जाता है। मंदिर परिसर की दीवारों पर रंगीन चित्रकारियाँ लगी हुई हैं। मुख्य मंदिर के भीतर मोबाइल या कैमरे का प्रयोग करने की अनुमति नहीं है। बनास नदी के किनारे स्थित इस शहर को आप छोटा ब्रज भी कह सकते हैं।

श्रीनाथजी की मूर्ति दुर्लभ संगमरमर वाले काले पत्थर से तराशी गई है। जिस रथ से इस प्रतिमा को ब्रज से यहाँ लाया गया था, उसे भी सजा कर और संरक्षित कर के रखा गया है। मंदिर की रसोई में स्थानीय और मौसमी सब्जियाँ बनती हैं। वल्लभाचार्य के वंशज इस मंदिर के स्थायी अभीक्षक होते हैं।श्रीनाथजी मंदिर पर इस पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था भी निर्भर है। नाथद्वारा ‘पुदीना चाय’ के लिए भी विख्यात है, जहाँ पुदीने वाली चाय आपको मिलती है।

कुल्हड़ में रख कर सामन्यतः इस अलग स्वाद वाले चाय को परोसा जाता है। भगवान को यहाँ मौसम के हिसाब से प्रसाद अर्पित किया जाता है। नाथद्वारा अगर आपको ट्रेन से जाना है तो आपको 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मावली जंक्शन या फिर 50 किलोमीटर दूर उदयपुर जंक्शन पर उतरना होगा। उदयपुर में महाराणा प्रताप एयरपोर्ट भी है। यहाँ आने वाले लोग हल्दीघाटी भी जाते हैं, जहाँ महाराणा प्रताप और अकबर की फ़ौज का युद्ध हुआ था। एकलिंग जी का दर्शन भी करते हैं।

भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के इस मंदिर का इतिहास

गोवर्धन पर्वत उठाने वाली द्वापर युग की कथा आज भी जीवित है। दुनिया भर में हिन्दू कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की प्रथमी तिथि को ये त्योहार मनाते हैं। दीपावली के एक दिन बाद आने वाले इस पर्व को ‘अन्नकूट’ के नाम से भी जानते हैं। कहते हैं, जब इस्लामी शासकों द्वारा मंदिरों का विध्वंस किया जा रहा था, तब वल्लभाचार्य संप्रदाय के 2 साधु इस मूर्ति को ब्रज से यहाँ छिपते हुए लेकर आए। रथ के पहिए यहाँ धँस जाने के कारण भगवान को यहीं स्थापित किया गया।

10 फरवरी, 1672 को नाथद्वारा में श्रीनाथजी मंदिर की स्थापना की गई थी। महाराजा राजसिंह (1652-1680) के काल में यहाँ की चित्रकारी शैली का विकास हुआ। वल्लभाचार्य के जो 2 साधु इस प्रतिमा को लेकर आए थे, उन्हें महाराणा ने शरण दी। उनके नाम थे गोविंद और दामोदर। सिहाड़ गाँव में भगवान का नया मंदिर बना। ब्रज और मेवाड़ का ये मिलान चित्रकारी की एक शैली का भी जन्मदाता बना, जिसे नाथद्वारा शैली या ‘हवेली शैली’ कहा गया।

ये वो समय था, जब औरंगजेब लगातार मंदिरों को ध्वस्त किए जा रहा था और उनमें से कइयों की जगह मस्जिदों का निर्माण करवा रहा था। ऐसे समय में महाराणा राजसिंह ने श्रीनाथजी की रक्षा के लिए सिर कटाने तक की शपथ ली। राजस्थान में महाराणा राजसिंह ने औरंगजेब का सामना ऐसे ही किया, जैसे पंजाब में गुरु गोविंद सिंह और महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी कर रहे थे। राणा ने एक चुनौती के रूप में इसे लिया और इस विग्रह की तब रक्षा की, जब औरंगजेब के भय से कोई उन साधुओं को शरण देने को तैयार नहीं था।

किशनगढ़ की राजकुमारी रानी चारुमति ने औरंगजेब को ठुकरा कर राजसिंह से विवाह किया था, जिससे मुग़ल बादशाह उनसे खासा नाराज़ रहता था। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि श्रीनाथजी की रक्षा के लिए 1 लाख राजपूत अपना सर कटाने के लिए तैयार हैं। जोधपुर के चौपासनी में भी श्रीनाथजी वाली बैलगाड़ी कई दिनों तक खड़ी रही थी, वहाँ भी उनका मंदिर है। कोटा से 10 किलोमीटर दूर जहाँ भगवान की चरण पादुकाएँ रखी हुई हैं, उसे चरण चौकी मंदिर के रूप में जानते हैं।

मंदिर में 8 प्रकार के दर्शन का विधान है। सन् 1934 में उदयपुर के शासक ने आदेश जारी किया था कि मंदिर की संपत्ति पर मंदिर का ही अधिकार होगा। इस तरह मंदिर की 562 प्रकार की संपत्तियों को संरक्षित किया गया। तिलकायत जी महाराज इसके मुख्य पुजारी थे, जिन्हें मंदिर का संरक्षक, प्रबंधक और ट्रस्टी नियुक्त किया गया। क्षेत्र के वनवासियों की भी इस मंदिर में खास आस्था है, जिन्हें प्रसाद का एक हिस्सा (इसे ‘लूटना’ भी कहा जाता है) मिलता है।

झारखंड में घर से घूमने निकली ST लड़की का 10 लड़कों ने किया गैंगरेप, दोस्त को मारपीट कर भगाया: BJP ने उठाए हेमंत सरकार पर सवाल

झारखंड के चाईबासा में जनजातीय समुदाय की एक लड़की से गैंगरेप की घटना सामने आ रही है। इस घटना में आरोपितों की संख्या 10 बताई जा रही है जिनकी पहचान अभी नहीं हो पाई है। पीड़िता सॉफ्टवेयर इंजीनियर है जो फ़िलहाल घर से ही काम कर रही थी। पुलिस ने केस दर्ज कर के कुछ संदिग्धों से पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं भाजपा ने इस मामले को ले कर राज्य सरकार को महिला सुरक्षा में असफल बताया है। घटना गुरुवार (20 अक्टूबर 2022) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना मुफस्सिल थानाक्षेत्र के टेकराहासू की है। पीड़िता अपने एक दोस्त के साथ इसी क्षेत्र में बनी एक हवाई पट्टी पर घूमने गई थी जहाँ उसे शाम हो गई। तभी वहाँ लगभग 10 अनजान लोग आ गए जिन्होंने पहले पीड़िता के दोस्त को मारपीट कर भगा दिया। इस दौरान आरोपितों ने पीड़िता के दोस्त का मोबाईल फोन और जेब में रखे 5 हजार रुपए भी छीन लिए। बाद में सभी ने पीड़िता को कुछ दूर सुनसान में ले जा कर उसके साथ रेप किया।

घटना के बाद पहुँची पुलिस ने पीड़िता को अस्पताल में भर्ती करवाया जहाँ उन्हें किसी से मिलने-जुलने की इजाजत नहीं है। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर 10 अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज कर ली है। कुछ संदिग्धों को पूछताछ के लिए भी उठाया गया है। हालाँकि अब तक पुलिस द्वारा किसी की आधिकारिक गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इस मामले की जाँच के लिए 15 सदस्यीय SIT का गठन किया गया है।

भाजपा ने झारखंड सरकार पर उठाए सवाल

झारखंड में भाजपा प्रवक्ता कुणाल सारंगी ने प्रदेश सरकार के कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए गए हैं। कुणाल के मुताबिक चाईबासा में हुई SIT टीम का गठन महज एक खानापूर्ति है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी घटनाएँ अब आम बात हो चुकी हैं। भाजपा प्रवक्ता के मुताबिक आरोपित अपनी पहुँच सीधे मुख्यमंत्री ऑफिस तक बताया करते हैं। कुणाल सारंगी ने हेमंत है तो हिम्मत है के नारे को कटघरे में खड़ा करते हुए बताया कि अब सिर्फ अपराधियों की हिम्मत है और यही हाल रहा तो इस प्रदेश में आम लोगों का रहना भी दूभर हो जाएगा।

’27 अक्टूबर तक ट्रैफिक उल्लंघन करने पर भी नहीं कटेगा कोई चालान’: गुजरात सरकार का दिवाली पर ‘अनोखा’ तोहफा, पुलिस फूल देकर समझाएगी

गुजरात की भाजपा सरकार ने कहा कि दिवाली के चलते 21 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक चालान नहीं काटा जाएगा। हालाँकि, गुजरात की जनता ने गुजरात सरकार ने कहा कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें, लेकिन इस दौरान अगर किसी से गलती हो जाती है तो उससे जुर्माना नहीं वसूल किया जाएगा।

गुजरात के गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी ने इस बात का ऐलान किया है। उन्होंने कहा, “ट्रैफिक पुलिस 21 से 27 अक्टूबर तक नागरिकों से कोई जुर्माना नहीं वसूलेगी। इसका यह मतलब नहीं कि आप (नागरिक) यातायात नियमों का पालन नहीं करें।”

उन्होंने कहा कि इस दौरान अगर कोई नियमों का उल्लंघन करता है तो ट्रैफिक पुलिस उसे फूल देकर समझाएगी। उससे जुर्माना नहीं लिया जाएगा। बता दें कि गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं और दिवाली के बाद कभी भी चुनाव के तारीखों की घोषणा हो सकती है।

संघवी ने ट्विटर पर साल 2018 का अपना एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “दीवाली पास में है, चलो खुशियों से कुछ घर सजाते है, कुछ मुस्काने रोशन करते है।” उन्होंने कहा कि गुजरात की भूपेंद्र पटेल की सरकार ने यह निर्णय जनता के हित में लिया है।

संघवी ने अपना एक पुराना ट्वीट भी शेयर किया, जिसमें लिखा है, “इस दिवाली क्यों न हम कुछ खास करते है, इस दिवाली उनके साथ खुशिया बाँटते हैं, जो हमारा हाथ बँटाते हैं। इस दिवाली हम सब लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाते हैं, जो हमारी जरूरतों को अच्छे से समझते हैं। हम सब साथ मिलकर इस दिवाली को खुशहाली के रंगों से रोशन करते हैं। दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ।”

दिवाली पार्टी के बहाने अमेरिका में इकट्ठा हो रहा PAK के जेहादी संगठन के लिए धन: बांग्लादेश में नरसंहार के लिए था जिम्मेदार, हमास का भी है मददगार

पाकिस्तान स्थित एक जिहादी संगठन के लिए धन जुटाने के लिए रविवार (23 अक्टूबर 2022) को न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन के ‘द बेल हाउस’ में दिवाली पार्टी का आयोजन किया जा रहा है। पाकिस्तान में बाढ़ पीड़ितों के लिए धन जुटाने के बहाने इस आयोजन से होने वाली आय अल खिदमत फाउंडेशन (कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी की चैरिटी विंग) को दी जा रही है।

इस मामले को सबसे पहले ‘स्टॉप हिंदू हेट एडवोकेसी नेटवर्क (SHHAN)’ ने उस समय उठाया, जब ‘द बेल हाउस’ ने एक ट्वीट करके इसके बारे में जानकारी दी। इसके बाद इसकी सोशल मीडिया पर आलोचना होने लगी।

अपने ट्वीट में द बेल हाउस ने लिखा, “इस रविवार 10/23, आरती गोलापुडी और माया देशमुख दिवाली पार्टी 2022 पेश कर रहे हैं! अपर्णा नानचेरला, सुनीता मणि, प्रोमा खोसला, पूजा रेड्डी और जुबी अहमद, डीजे रेखा और कार्डडममी के संगीत के साथ! पाकिस्तान में राहत प्रयासों का सहयोग करने के लिए इसकी आय अल खिदमत फाउंडेशन को जाएगी।”

यह कार्यक्रम रविवार (23 अक्टूबर) को ‘द बेल हाउस’ में शाम 7:30 बजे (स्थानीय समयानुसार) से आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में सामान्य प्रवेश के लिए प्रति व्यक्ति $19.72 (INR 1,627 के बराबर) लिया जा रहा है।

इस कार्यक्रम का पोस्टर इंटरनेट पर खूब वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर इसकी आलोचना होने के बाद ‘द बेल हाउस’ ने बिना किसी स्पष्टीकरण के अपने ट्वीट को तुरंत डिलीट कर दिया। हालाँकि, लेखन के समय टिकट का लिंक अभी भी लाइव था।

अल खिदमत फाउंडेशन का आतंकवाद से नाता

राबा टाइम्स की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, अल खिदमत फाउंडेशन इस्लामवादी पाकिस्तान के राजनीतिक दल जमात-ए-इस्लामी (JeI) के चैरिटी विंग के रूप में कार्य करता है। साल 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान बंगाली आबादी के नरसंहार के लिए यह संगठन जिम्मेदार था।

2006 में JeI ने कथित तौर पर यहूदियों और इज़राइल के खिलाफ जिहाद को जारी रखने के लिए आतंकवादी संगठन हमास को 1,00,000 डॉलर (लगभग 83 लाख रुपए) भेजे थे। राबा टाइम्स ने बताया था कि यह कैसे संगठन ‘हेल्पिंग हैंड फॉर रिलीफ एंड डेवलपमेंट (HHRD)’ नाम के एक मुस्लिम अमेरिकी चैरिटी संगठन के साथ मिलकर काम कर रहा है।

पिछले साल जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख सिराज-उल हक ने पाकिस्तान में मंदिर निर्माण के लिए वहाँ के लोगों के पैसे का उपयोग करने का विरोध किया था। हक ने पाकिस्तान के सभी करदाताओं को केवल ‘मुस्लिम’ मानते हुए कहा था कि पैसे का इस्तेमाल शरीयत के दिशा-निर्देशों और देश में मुस्लिम आबादी के विवेक के खिलाफ नहीं किया जा सकता।

सिराज-उल हक के बयान की आलोचना करते हुए पाकिस्तान के हिंदू कार्यकर्ता कपिल देव ने ट्वीट किया था, “सिराज-उल-हक इस देश में पाँच मिलियन (50 लाख) हिंदू करदाता हैं। इसे उनके पैसे से बनाया जाएगा। मंजूर न भी हो तो हमारे नाम से शराब खरीदने-बेचने से मिलने वाले टैक्स से कर दो। यदि नहीं तो बंदोबस्ती विभाग बंद कर दीजिए और मंदिरों एवं गुरुद्वारों के किराए से निर्माण कीजिए।”

लाहौर में अबुल आला मौदूदी द्वारा स्थापित जमात-ए-इस्लामी विभाजन के तुरंत बाद जमात-ए-इस्लामी (हिंद) और पाकिस्तान में विभाजित हो गया था। इससे पहले ऑपइंडिया की एक रिपोर्ट में हमने खुलासा किया था कि यह संगठन भारत में कट्टरपंथी इस्लाम फैलाने के लिए सऊदी अरब से कैसे धन प्राप्त कर रहा है।

गरीब हूँ, पढ़ा-लिखा हूँ, अब्बा गार्ड हैं… ISIS के साथ मिल अमेरिकन स्कूल को उड़ाना चाहता था अनीस अंसारी, कोर्ट ने 8 साल बाद सुनाई उम्रकैद की सजा

मुंबई के अमेरिकी स्कूल पर आतंकी हमले की साजिश रचने वाले अनीस अंसारी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। अनीस कम्प्यूटर इंजीनियर है जिसे साल 2014 में महाराष्ट्र ATS ने गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उसके निशाने पर स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे थे। इस हमले को वह लोन वुल्फ अंदाज में अंजाम देना चाहता था। अनीस आतंकी समूह ISIS का भी समर्थक बताया जा रहा है। अनीस को यह सज़ा शुक्रवार (21 अक्टूबर 2022) को सुनाई गई है।

इसे महाराष्ट्र में साइबर आतंक में मिली पहली सज़ा बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह फैसला मुंबई की एक अदालत के अतरिक्त सत्र न्यायाधीश ए.ए. जोगलेकर ने सुनाया है। आरोपित अंसारी एक प्राइवेट कम्पनी में एसोसिएट जियोग्राफिक में बतौर टेक्नीशियन काम करता था। इस दौरान उसने अपने ऑफिस के कम्प्यूटर का भी दुरुपयोग किया। बताया जा रहा है कि अनीस अंसारी ऑफिस से ही एक नकली फेसबुक बना कर आपत्तिजनक और साम्प्रदायिक पोस्ट करता था।

18 अक्टूबर 2014 को उसे महाराष्ट्र ATS ने गिरफ्तार कर लिया था। सुरक्षा एजेंसी का आरोप था कि अनीस उमर एल्हाजी के साथ फेसबुक पर बातें करता था। सोशल मीडिया पर अनीस ISIS का भी समर्थन करता था। उस पर आरोप है कि वो अकेले ही एक अमेरिकी स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को निशाना बनाने की फिराक में था। यह स्कूल बांद्रा-कुर्ला काम्प्लेक्स में था। ATS द्वारा पेश किए गए पुख्ता सबूतों के चलते ही साल 2014 से अब तक अनीस की जमानत नहीं हो पाई थी। जाँच एजेंसी ने अंसारी और अमेरिका के उमर एल्हाजी के बीच हुई बातचीत का ब्यौरा कोर्ट में दिया है। उस बातचीत में न सिर्फ बच्चों पर हमला करने की बात कही कई है बल्कि दूतावासों को भी निशाने पर बताया गया है।

अनीस अंसारी के वकील शरीफ शेख ने कोर्ट में दलील की कि आरोपित ने अपना गुनाह कबूल नहीं किया था। इसी के साथ उन्होंने अनीस की उम्र और पढ़ाई आदि की दुहाई देते हुए उसके भविष्य का वास्ता भी अदालत में दिया। अनीस के लिए उनके वकील शरीफ की पैरवी में आरोपित के गरीब घर से होने और अब्बा द्वारा गार्ड की नौकरी करने जैसी बातें कहीं गई। सरकारी वकील मधुकर दलवी ने आरोपित अंसारी को कड़ी सज़ा देने की माँग की। उन्होंने कहा कि अंसारी पढ़ा लिखा है और बाद में वो अपने अधूरे मंसूबों को अंजाम दे सकता है।