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खोदा मस्जिद तो नीचे से निकला मंदिर, अदालत ने 9 नवंबर तक स्थगित की सुनवाई: ASI सर्वे की माँग पर बोला मुस्लिम पक्ष – ये वक्फ की संपत्ति

कर्नाटक में मंगलुरु की एक अदालत ने मलाली विवादित ढाँचे की सुनवाई 9 नवंबर, 2022 तक के लिए स्थगित कर दी है। इस साल अप्रैल में मंगलुरु के बाहरी इलाके में एक पुरानी मस्जिद के नीचे हिंदू मंदिर जैसा वास्तुशिल्प डिजाइन पाए जाने के बाद इस मामले में सुनवाई शुरू हुई थी। जुमा मस्जिद में नवीनीकरण कार्य के दौरान यह वास्तुशिल्प डिजाइन मिला था।

मस्जिद के अंदर से मंदिर का डिजाइन निकलने के बाद हिंदू कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई थी और इसकी जाँच की माँग की थी। इसके जवाब में मस्जिद प्रबंधन समिति ने एडिशनल सिविल कोर्ट में काउंटर अर्जी दाखिल की थी। मस्जिद समिति के वकील ने तर्क दिया था कि यह मस्जिद वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। उन्होंने हिंदुओं की याचिका खारिज करने की माँग की थी। वहीं, भाजपा के विधायक भरत शेट्टी ने घटनास्थल की ASI से सर्वे कराने की माँग की थी। वो इसे सामाजिक मुद्दा बता चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2022 में मस्जिद के अंदर से हिंदू संरचना निकलने के बाद स्थानीय लोगों ने कहा था कि इस बात की पूरी संभावना है कि इस स्थल पर एक हिंदू या जैन मंदिर मौजूद था, क्योंकि इसमें कलश, तोमर और स्तंभ दिखाई दे रहा है। वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेताओं ने जिला प्रशासन से दस्तावेजों के सत्यापन होने तक काम रोकने की अपील की थी। इसके बाद 25 मई, 2022 को विश्व हिन्दू परिषद (VHP) और बजरंग दल (Bajrang Dal) के कार्यकर्ताओं ने गंजिमुत में श्री रामंजनेय भजन मंदिरा थेनकुलीपदी में पूजा यानि ‘तंबुला प्रश्ने’ अनुष्ठान किया। VHP कार्यकर्ताओं ने ये पूजा मस्जिद के जीर्णोद्धार के दौरान मिले मंदिर जैसे ढाँचे पर हो रहे विवाद के समाधान के लिए की थी।

उस वक्त ज्योतिष के अनुसार, हिंदू संगठनों ने मौके पर देवत्व स्थापित करने की ‘रस्म’ निभाई थी। इसके जरिए ये पता लगाया जाता है कि स्थान विशेष में दैवीय शक्तियाँ हैं या नहीं। थेनकुलीपाडी में 25 मई को सुबह 8:30 बजे से 11 बजे तक VHP ने ये अनुष्ठान किया था। किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए पुलिस कमिश्नर ने गाँव के मलाली में जुमा मस्जिद के 500 मीटर के दायरे में धारा 144 को लागू कर दिया था। इसके साथ ही शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल को भी तैनात किया गया था।

‘…जो आजादी दलित-मुसलमानों को बराबरी दे, वो मुझे नहीं चाहिए’ : TMC नेता ने किया RSS के ‘गुरुजी’ को बदनाम, पोल खुलने पर भी ट्वीट डिलीट नहीं

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) नेता और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद (Kirti Azad) ने रविवार (16 अक्टूबर 2022) को ट्विटर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर (गुरुजी) की फोटो के साथ फेक कोट् शेयर किया था। जिसमें, कहा गया है कि गोलवलकर अंग्रेजों की गुलामी करने को तैयार थे। लेकिन, ऐसी आजादी नहीं चाहते थे जो दलित, पिछड़ों और मुस्लिमों को बराबरी के अधिकार दिलाए।

कीर्ति आजाद द्वारा शेयर की गई इस फोटो में किसी भी तरह से प्रमाणिकता का कोई भी उल्लेख नहीं है। इस फोटो को शेयर करते हुए कीर्ति आजाद ने पूछा है कि क्या यह सच है? उनके इस ट्वीट के बाद, कई ट्विटर यूजर्स ने बताया कि यह कथन गोलवलकर का नहीं है, और उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा। ट्विटर यूजर ने एक ट्वीट शेयर करते हुए कहा कि गोलवलकर ने यह कभी नहीं कहा। उसने लिखा “यह सच नहीं है। अब चुप रहो और बैठ जाओ।”

एक अन्य ट्विटर यूजर सुशील अग्रवाल ने लिखा कि यह कथन किसी भी स्थिति में गोलवलकर का नहीं है। उन्होंने कीर्ति आजाद को जवाब देते हुए कहा, ” जिस पुस्तक का जिक्र फोटो में किया गया है उसे आरएसएस और गुरु जी ने अस्वीकार कर दिया था। इसलिए इसमें आरएसएस का आधिकारिक दृष्टिकोण शामिल नहीं है। इसके अलावा, इस पुस्तक की सामग्री भी संदिग्ध है। आरएसएस के विचारों की आधिकारिक किताब बंच ऑफ थॉट्स है।”

कई अन्य ट्विटर यूजर्स ने बताया कि यह कथन फेक है और ऐसी कोई टिप्पणी गोलवलकर द्वारा कभी नहीं की गई थी। हालाँकि, कीर्ति आजाद ने अब तक अपने ट्विटर अकाउंट से इस भ्रामक तस्वीर को डिलीट नहीं किया है।

यह पहली बार नहीं है जब टीएमसी नेता कीर्ति आजाद ने फेक खबर फैलाने की कोशिश की हो। आजाद ने इसी साल फरवरी में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान प्रदेश में भाजपा नेताओं पर हमले के बारे में झूठी खबर फैलाई थी। जिसके लिए, उन्हें सोशल मीडिया पर बुरी तरह से ट्रोल किया गया था।

कीर्ति आजाद की इस हरकत पर भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य डॉ अनिर्बान गांगुली ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद के बेटे कीर्ति आजाद को उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में अंतर न समझने को लेकर और झूठी खबर फैलाने को लेकर जमकर फटकार लगाई थी।

उन्होंने लिखा था, ” हाय कीर्ति, यह देखकर मज़ा आ रहा है कि आप, भागवत झा आजाद के बेटे पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के इलाकों के बीच अंतर नहीं कर पा रहे हैं। यह क्लिप उस समय की है जब 30 अप्रैल 2021 को चुनाव के दिन, टीएमसी द्वारा मुझ पर जिहादी हमला किया गया था।”

दरअसल, कीर्ति आज़ाद ने जिस वीडियो को शेयर करते हुए उत्तर प्रदेश का बताया था। वह वास्तव में पश्चिम बंगाल का था। जहाँ, 30 अप्रैल 2021 को बंगाल चुनाव के अंतिम दौर की मतदान प्रक्रिया के दौरान पश्चिम बंगाल के बीरभूम के इलामबाजार में टीएमसी के गुंडों ने भाजपा नेता डॉ. अनिर्बान गांगुली के साथ मारपीट की थी।

जिस वीडियो के आधार पर ‘Meta’ पर निशाना साध रहा ‘The Wire’, वो निकला SPOOF: पोल खुलने पर कहा – अब हम ये खेल जारी रखने को तैयार नहीं

‘The Wire’ पिछले कुछ दिनों से ये साबित करने में लगा है कि ‘Meta’ कंपनी भाजपा नेता अमित मालवीय के इशारों पर नाचती है। उसने एक ‘एक्सप्लेनेशन वीडियो’ भी पोस्ट किया। अब ‘Meta’ ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि एक ‘स्पूफ वीडियो’ के आधार पर ‘The Wire’ ने ये वीडियो बनाया है। उक्त स्पूफ वीडियो बनाने वाले का हैंडल हटा कर कंपनी मामले की जाँच कर रही है। उसका कहना है कि मीडिया संस्थान के वीडियो में इंस्टाग्राम के आंतरिक कामकाज को नहीं दिखाया गया है।

इस स्पूफ वीडियो को फ्री ट्रायल वर्कस्पेस अकाउंट का प्रयोग कर के बनाया गया था और उसके प्रोफाइल पिक्चर के रूप में इंस्टाग्राम का ब्रांड दिखाया गया था। इसे सीधे अर्थों में समझें तो जिस वीडियो के आधार पर वीडियो बना कर ‘The Wire’ अपने दावों को सच्चा बता रहा, वो वीडियो इंस्टाग्राम के वर्किंग सिस्टम को नहीं दिखाता और लोगों को ठगने के लिए उस मेटा वर्कफोर्स अकाउंट को बनाया गया था। इसे 13 अक्टूबर को क्रिकेट किया गया था, ‘The Wire’ द्वारा Meta-भाजपा रिश्ते वाली रिपोर्टिंग के बाद।

कंपनी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि ‘The Wire’ के दावों को सच्चा दिखाने के लिए ही इसे बनाया गया था। जबकि मीडिया संस्थान कह रहा है कि ‘Meta’ में उसके अंदरूनी सूत्र ने ये ‘रियल टाइम वीडियो’ बना कर भेजा है। हालाँकि, विशेषज्ञों ने इस वीडियो को नकार दिया है। इसमें देखा जा सकता है कि एक जगह माउस के कर्सर का अजीब मूवमेंट होता है। ऐसा तभी हो सकता है जब वीडियो को मोडिफाई किया गया हो।

अपनी ख़बरों को सही साबित करने के लिए ‘The Wire’ ये भी कह रहा है कि उसने रिपोर्टर ने ‘Meta’ में काम करने वाले एक इनसाइडर से व्यक्तिगत रिश्ते बनाए और जानकारियाँ लीं। एक बयान जारी कर कंपनी ने कहा कि अब वो आगे इस खेल को जारी रखने के लिए तैयार नहीं है। साथ ही ये दावा भी किया कि ‘Meta’ में उसके सोर्स ने डॉक्यूमेंट लीक कराए। ‘The Wire’ की इस खामियों वाली रिपोर्टिंग का लोग मजाक उड़ा रहे हैं।

22 साल बाद जाकर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का ठना चुनाव, 9000+ प्रतिनिधि करेंगे फैसला: शशि थरूर बोले- पार्टी का पुनरुत्थान शुरू

कॉन्ग्रेस अध्‍यक्ष पद के लिए मतदान (Congress President Poll Live) जारी है। चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर आमने-सामने हैं। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, शशि थरूर ने कहा कि कॉन्‍ग्रेस पार्टी का पुनरुत्‍थान शुरू हो गया है और भारतीय राष्‍ट्रीय कॉन्ग्रेस का भाग्‍य अब पार्टी कार्यकर्ताओं के हाथ में है। वहीं खड़गे ने कहा, “हमें साथ मिलकर पार्टी बनानी है।”

हालाँकि दोनों नेताओं ने इससे पहले कई मौकों पर इस पद के लिए खुद को बेहतर साबित करने वाले बयान भी दिए हैं ।

बता दें कि आज कॉन्ग्रेस अध्‍यक्ष पद के लिए 22 साल बाद चुनाव हो रहे हैं। 2017 में राहुल गाँधी निर्विरोध कॉन्‍ग्रेस अध्‍यक्ष चुने गए थे। मतदान 10 बजे सुबह शुरू हुआ और यह 4 बजे समाप्‍त होगा। चुनाव (Congress President Poll Live) के नतीजे 19 अक्‍टूबर को आएँगे। 9,000 से अधिक प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी (पीसीसी) के प्रतिनिधि गुप्त मतदान में पार्टी प्रमुख को चुनने के लिए मतदान कर रहे हैं।

शशि थरूर ने आज सुबह (17 अक्टूबर 2022) ट्वीट कर कहा कि उन्‍होंने अपने प्रतिद्वंदी मल्लिकार्जुन खड़गे से बातचीत की और उन्‍हें चुनाव के लिए शुभकामनाएँ दी।

वहीं खड़गे ने सामाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “यह हमारा आंतरिक चुनाव है। हम दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ जो भी कहा है, वह सौहार्दपूर्ण माहौल में कहा गया है। हम दोनों को साथ मिलकर पार्टी को आगे बढ़ाना है। थरूर ने मुझे फोन किया और शुभकामनाएँ दी। मैंने भी उन्‍हें शुभकामनाएँ दीं।”

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद के लिए राहुल गाँधी ने भी मतदान किया। उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा के शिविर में बने बूथ में अपना वोट डाला।

अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कॉन्ग्रेस मुख्यालय पर अपना वोट डाला।

यह पहली बार नहीं है कि कॉन्‍ग्रेस के अध्‍यक्ष पद के चुनाव के लिए गॉंधी परिवार से बाहर के नेता चुनाव लड़ रहे हैं। 22 साल पहले जितेंद्र प्रसाद ने सोनिया गाँधी के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गए थे। आज दोबारा से ये चुनाव हो रहे हैं। सोनिया गाँधी और जितेंद्र प्रसाद की जगह मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर हैं। 65 मतदान केंद्रों पर वोट पड़ रहा है। 138 साल पुरानी पार्टी में ये छठी बार अध्यक्ष पद के चुनाव हैं। गाँधी परिवार के अलावा इस कुर्सी पर अब कौन बैठेगा, इसका फैसला 19 अक्टूबर को किया जाएगा।

‘Meta’ को निशाना बनाने के लिए ‘The Wire’ लेकर आया फेक स्क्रीनशॉट, जिसमें दिन और तारीख़ का ही मेल नहीं: कहा – हमारे टेक एक्सपर्ट का अकाउंट हैक

‘The Wire’ ने अमेरिकी कंपनी ‘Meta’ के खिलाफ तथाकथित खुलासा करते हुए कहा कि फेसबुक-इंस्टाग्राम पर अमित मालवीय किसी भी पोस्ट को हटवा सकते हैं, बिना किसी सवाल-जवाब के। उसने ‘Meta’ के एक अधिकारी का ईमेल दिखाया, जिसमें आतंरिक डॉक्यूमेंट लीक करने की बात की गई थी। उस डॉक्यूमेंट की तरह ये ईमेल भी फर्जी निकला। लेकिन, ‘The Wire’ ने आईटी दिग्गज कंपनी द्वारा खंडन किए जाने के बाद भी अड़ियल रवैया अपनाना जारी रखा।

अब किस्म-किस्म के दावे कर के प्रोपेगंडा पोर्टल अपनी खबर को सही साबित करने में लगा हुआ है। ‘Meta’ के अधिकारी एंडी स्टोन ने कहा कि ये पूरा का पूरा मामला फर्जी है और ऐसी रिपोर्ट्स को लिखने वाले भी ये बात जानते हैं। उन्होंने कहा कि उनका जो ईमेल दिखा-दिखा कर ‘The Wire’ अपनी स्टोरी की पुष्टि में लगा हुआ है, वो उन्होंने भेजना और लिखना तो दूर, सोचा तक नहीं है। इन्हीं बनावटी सबूतों के आधार पर ‘The Wire’ कह रहा है कि भाजपा और Meta के बीच करार हुआ है।

इस मामले पर प्रोपेगंडा पोर्टल और अमेरिकी दिग्गज आईटी कंपनी लड़ रहे हैं, लेकिन भाजपा या केंद्र सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। अमित मालवीय ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। आपको याद होगा कि ‘The Wire’ ने दावा किया था कि भाजपा आईटी सेल ने ‘Tek Fog’ नामक एप बनाया है, जिसके तहत पार्टी के खिलाफ बोलने वालों के विरुद्ध पोस्ट्स और ट्वीट्स की बाढ़ ला दी जाती है।

हालाँकि, इसका कोई सबूत नहीं मिला और ये मामला भी ठंडा पड़ गया। ताज़ा मामले में ‘Squarespace’ कंपनी के तकनीकी विशेषज्ञ ब्रेंट किमेल ने भी ‘The Wire’ को लताड़ते हुए कहा है कि उसके दावे सही नहीं है। वो एंडी स्टोन के साथ काम कर चुके हैं और उनका कहना है कि भले ही एक दशक से उन दोनों की बातचीत नहीं हुई, लेकिन उन्होंने कभी पहले एंडी स्टोन को उस भाषा में बात करते नहीं देखा, जैसा ईमेल में दिख रहा है।

‘The Wire’ ने दावा किया कि ‘@fb.com’ ईमेल एड्रेस पर भेजे गए उसके ईमेल को वहाँ किसी ने खोला और पढ़ा, इसका उसके पास सबूत हैं। इसके लिए उसने ‘superhuman’ तकनीक का सहारा लिया, जो दिखाता है कि किसी के द्वारा भेजे गए ईमेल को कितनी बार खोला गया। ये तकनीक ईमेल में एक तस्वीर डाल देता है, जिसे जितनी बार खोला जाए सूचना सेन्डर के पास पहुँच जाती है। प्राइवेसी का झंडाबरदार बनने की नाटक करने वाले ‘The Wire’ की ये हरकत प्राइवेसी का खुला उल्लंघन है।

हालाँकि, तकनीकी एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ऐसी कोई भी तकनीक शत-प्रतिशत सच नहीं बता सकती। एक तरह से ‘The Wire’ एक स्पाई एप का प्रयोग कर के अपनी बात को सही साबित करना चाह रहा। मीडिया संस्थान ने इसके बाद ‘dkimpy’ नामक प्लेटफॉर्म का यूज करने का दावा करते हुए कहा कि इससे पता चलता है कि कोई ईमेल ऑथेंटिक सोर्स से आया है या नहीं। ‘टेक्नीकल ट्रेडिंग गुरु’ नामक एक ट्विटर हैंडल ने भी स्क्रीनशॉट के माध्यम से बताया है कि ‘The Wire’ ने ईमेल से छेड़छाड़ कर के 2021 की जगह उसे 2022 का बना दिया है।

यानी, उसने फोटोशॉप के जरिए अपनी बात को सही साबित करना चाहा। उसने स्क्रीनशॉट में तारीख़ तो बदल दी, लेकिन सप्ताह का दिन नहीं बदल पाया और यहीं पकड़ा गया। बाद में इज्जत बचाने के लिए ‘The Wire’ ने दावा किया कि ‘Meta’ वाली स्टोरी पर काम कर रहे उसके टेक्नीकल एक्सपर्ट का ईमेल अकाउंट हैक कर लिया गया है। इसके बाद लोगों ने मीडिया संस्थान का मजाक बनाते हुए कहा कि उसने ऐसे ‘टेक एक्सपर्ट’ हैं, जो खुद का हैंडल नहीं संभाल सकते।

SSR की दोस्त ने क्यों की आत्महत्या? : अब सुसाइड नोट से खुलेगा राज, लिखा मिला- 2.5 साल से दी जा रही थी प्रताड़ना

टीवी सीरियल की मशहूर एक्ट्रेस व सुशांत सिंह राजपूत की अच्छी दोस्त वैशाली ठक्कर ने रविवार (16 अक्टूबर 2022) को मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित अपने घर में आत्महत्या कर ली थी। यह खबर सामने आने के बाद से आत्महत्या के कारणों को लेकर अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे थे। हालाँकि अब, पुलिस को वैशाली की डायरी में सुसाइड नोट मिला है, जिसके आधार पर आगे की जाँच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वैशाली ठक्कर ने आत्महत्या करने से पहले सुसाइड नोट लिखा है। इस सुसाइड नोट में उन्होंने इस कदम के लिए अपने माता-पिता से माफी माँगी है। साथ ही, राहुल नवलानी और उसकी पत्नी दिशा नवलानी पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।

इस सुसाइड नोट के आधार पर बाद ने नवलानी दंपती पर धारा 306 (आत्महत्या के लिए मजबूर करने) के तहत केस दर्ज करते हुए राहुल को गिरफ्तार भी कर लिया है। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। सुसाइड नोट में जिस राहुल नवलानी को सजा दिलाने के लिए कहा गया है, उसे कुछ मीडिया रिपोर्ट में, वैशाली का एक्स बॉयफ्रेंड बताया जा रहा है।

वैशाली का सुसाइड लेटर

दैनिक भास्कर ने अपने की एक रिपोर्ट में बताया है कि, वैशाली के घर से पुलिस को मिले सुसाइड नोट में लिखा है, “राहुल ने मुझे परेशान कर रखा है। उसने मेरी दोस्ती का फायदा उठाया। मुझे राहुल ने इस कदर परेशान किया कि मुझे आत्महत्या करनी पड़ रही है। राहुल ने धोखे से मेरे फोटो ले लिए। फिर ये फोटो-वीडियो मेरे मंगेतर अभिनंदन को भेज दिए।”

डायरी में यह भी लिखा है, “मैं जा रही हूँ माँ, लव यू पापा मुझे माफ करना मैं एक अच्छी बेटी नहीं बन पाई। प्लीज राहुल और उसकी फैमिली को सजा दिलवाना। मुझे राहुल और दिशा ने 2.5 साल से मेंटली टॉर्चर किया है। वरना मेरी आत्मा को शांति नहीं मिलगी। आपको मेरी कसम। खुश रहना। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ। मितेश से कहना मुझे माफ करे। मैं जा रही हूँ।”

वैशाली ठक्कर की आत्महत्या के बाद उनकी एक दोस्त जाह्नवी का कहना है कि कुछ दिन पहले ही उनकी वैशाली से बात हुई थी। वह दिसंबर में शादी करने वाली थी। उसने कहा था कि दीपावली के बाद वह शादी की शॉपिंग के लिए मुंबई जाएगी। जाह्नवी ने यह भी कहा था कि उसने वैशाली के होने वाले पति मितेश से भी वीडियो कॉल पर बात की थी। तब, वैशाली बेहद खुश थी।

फिलहाल पुलिस ने वैशाली के घर से मिले सुसाइड नोट, डायरी, मोबाइल व अन्य आवश्यक सामान जब्त कर लिए हैं। डायरी में जो भी लिखा है पुलिस उसे सुसाइड नोट मान कर चल रही है। हालाँकि, अभी इसके वेरिफिकेशन के लिए हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से जाँच कराई जाएगी।

शादी टूटने की घोषणा

बता दें, वैशाली ठक्कर मूल रूप से मध्य प्रदेश के उज्जैन के नजदीक स्थित माहिदपुर की रहने वाली थी। टीवी सीरियलों में ऑफर मिलने के बाद वह साल 2013 में मुंबई चली गई थी। कुछ समय पहले वह राजस्थान की राजधानी जयपुर चली गई थीं। एक साल से वह इंदौर में रह रही थीं।

पिछले साल अप्रैल में वैशाली की सगाई हुई थी, लेकिन उन्होंने एक महीने बाद ही सगाई टूटने की घोषणा कर दी थी। उन्होंने कहा था कि केन्या में डेंटल सर्जन अपने मंगेतर अभिनंदन सिंह हुंडल से वह शादी नहीं करेंगी।

उस वक्त वैशाली ने बताया था कि वो शादी स्थगित कर रही हैं, क्योंकि ऐसे वक्त में जब लोग कोरोना से जूझ रहे हैं तो वो कोई सेलिब्रेशन नहीं करना चाहतीं। बाद में उन्होंने इंस्टाग्राम पर रोका सेरेमनी की शेयर की गई वीडियो को भी डिलीट कर दिया था। अभिनंदन और वैशाली लॉकडाउन के दौरान मैट्रिमोनियल साइट के जरिए मिले थे। 

कौन से मीडिया से आए हो, कौन सा अखबार है? : पैपराजी पर फिर भड़कीं जया बच्चन, लोग बोले- कितनी असभ्य महिला है

बॉलीवुड एक्ट्रेस और समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन (Jaya Bachchan) मीडियाकर्मियों को बेइज्जत करने के कारण सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर उनका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

​दरअसल, मुंबई में चल रहे लैक्मे फैशन वीक (Lakme Fashion Week) के आखिरी दिन रविवार (16 अक्टूबर 2022) को जया बच्चन (Jaya Bachchan) अपनी पोती नव्या नवेली नंदा के साथ पहुँची थीं। वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि जैसे ही पैपराजी उनकी तस्वीरें क्लिक करने की कोशिश करते हैं, जया उन पर भड़क जाती हैं।

पहले तो हर बार की तरह इस बार भी पहले वह मीडियाकर्मियों को नजरअंदाज करती दिखीं। इसके बाद गुस्से में उनसे सवाल करने लगती हैं, “आप लोग कौन हैं? आप लोग मीडिया से हैं? कौन से मीडिया से हैं?”

वहाँ मौजूद कुछ कैमरामैन ने खुद को मशहूर सेलिब्रिटी फोटोग्राफर विरल भयानी और मानव मंगलानी की टीमों का हिस्सा होने की बात कही। ये सुनकर जया गुस्से में पूछती हैं, “क्या? कौन? ये कौन सा अखबार है?” इस दौरान नव्या अपनी नानी को शांत करती हुई दिखाई दीं। हालाँकि, यह पहली बार नहीं है, जब उन्होंने मीडियाकर्मियों को बेइज्जत किया हो। इससे पहले भी वह कई बार उनके साथ रूडली पेश आ चुकी हैं।

जया बच्चन के पैपराजी पर भड़कने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल के बाद यूजर्स उन्हें जमकर खरी खोटी सुना रहे हैं। उन्हें असभ्य महिला कह रहे हैं। एक यूजर ने लिखा- बच्चन फैमिली इसके साथ कैसे रहती होगी। वहीं एक अन्य ने लिखा- पता नहीं किस बात का एटिट्यूड है। आरती नाम की यूजर लिखती हैं, “इस मैडम की अपनी एक अलग ही दुनिया।”

फोटो साभार: वायरल वीडियो

इनके अलावा राज नाम के एक यूजर ने लिखा, “बहुत दुःखी आत्मा है भई, सबसे लड़ती रहती है। मुझे उन पर दया आती है। भगवान् सद्बुद्धि दें। अमिताभ जी आप धन्य हैं।”

बता दें कि बॉलीवुड के मशहूर फोटोग्राफर विरल भयानी और मानव मंगलानी के सोशल मीडिया पर लाखों फॉलाअर्स हैं। विरल भयानी को इंस्टाग्राम पर जहाँ 4.5 मिलियन (4500000 लाख) वहीं मानव मंगलानी को 2 मिलियन (2000000 लाख) लोग फॉलो करते हैं।

The Wire जिस ईमेल को ‘Meta’ के अधिकारी का बता रहा, उसमें स्पेलिंग मिस्टेक और लाइक बटन: खुद लिबरल गिरोह को भरोसा नहीं

प्रोपेगंडा पोर्टल ‘The Wire’ ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ये दावा कर दिया कि अमित मालवीय इतनी ताकत रखते हैं कि फेसबुक या इंस्टाग्राम पर कोई पोस्ट उन्हें अच्छा नहीं लगे तो तुरंत हटवा सकते हैं। इस तरह मीडिया संस्थान ने भाजपा और Meta के कथित रिश्तों को लेकर दावे किए। हालाँकि, खुद लिबरल गिरोह के लोग उसकी बात नहीं मान रहे हैं। पत्रकारों, तकनीकी विशेषज्ञों और Meta के अधिकारियों के अलावा लिबरल गिरोह के लोग भी उसका यकीन नहीं कर रहे।

इसमें सबसे बड़ा नाम आता है आकर पटेल का, जो ‘एमनेस्टी इंडिया’ के मुखिया रह चुके हैं और खुद भाजपा विरोधी प्रोपेगंडा में महारत के लिए जाने जाते हैं। ‘The Wire’ ने दावा किया कि ‘Meta’ के अधिकारी एंडी स्टोन ने उसे ईमेल भेज कर ‘आतंरिक दस्तावेजों’ के लीक होने पर आपत्ति जताई। कंपनी का कहना है कि ये ईमेल भी उनका नहीं है। आकार पटेल ने भी इस ईमेल की भाषा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका स्टाइल देशी है, असामान्य तरीके का है।

उनके कहने का अर्थ था कि अमेरिकी कंपनी का कोई बड़ा अधिकारी इस तरह की भाषा में ईमेल नहीं लिख सकता। अर्थात, उनकी मानें तो किसी भारतीय की अंग्रेजी इस तरह की नहीं हो सकती, जैसी अमेरिकी लोगों की होती है। अंग्रेजी के कई अन्य जानकर भी कह रहे हैं कि एंडी स्टोन इस तरह का ईमेल नहीं लिख सकते। ‘Mozilla’ के अधिकारी डेनिएल नजर ने भी इसे फेक करार दिया। उन्होंने कहा कि ‘The Wire’ का इस तरह से नीचे गिरना दुःखी करने वाला है।

सिद्धार्थ वरदराजन का ट्वीट

‘The Wire’ ने इस कथित ईमेल का स्क्रीनशॉट शेयर कर के ये तो जताना चाहा कि उसने ‘Meta’ का डॉक्यूमेंट ‘लीक’ कर के उन्हें भी हैरान कर दिया है, लेकिन इस ईमेल में स्पेलिंग मिस्टेक के साथ-साथ वाक्यों की संरचना भी गड़बड़ है। और सबसे बड़ी बात जानकर ये पूछ रहे हैं कि एक ईमेल में ‘लाइक’ बटन का क्या काम? जी हाँ, इस ईमेल में ‘लाइक’ बटन दिख रहा है। साथ ही नाम में टाइपो भी है। TMC के नेता डेरेक ओब्रायन जैसे लोग इस प्रोपेगंडा में ‘The Wire’ का समर्थन कर रहे हैं।

मीडिया संस्थान की कुलबुलाहट तो देखिए कि अपनी स्टोरी को पुष्ट दिखाने के लिए उसने सिंगापुर में माइक्रोसॉफ्ट के एक अधिकारी से ‘सर्टिफिकेट’ प्राप्त करने का दावा किया। ‘The Wire’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन ने दावा किया कि माइक्रोसॉफ्ट अधिकारी उज्जवल कुमार ने उनकी स्टोरी को वेरिफाई कर दिया है। फिर उन्होंने ट्वीट डिलीट कर दिया। फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट की ईमेल सेवाएँ लेता है, इसीलिए ‘The Wire’ ने इस ‘सर्टिफिकेट’ का प्रदर्शन किया।

सिर पर चोट के निशान, हाथ-पाँव टेप से बँधे: पेरिस में 12 साल की लापता लड़की का शव सूटकेस में बरामद, 4 अल्जीरियाई हिरासत में

फ्रांस की राजधानी पेरिस में शुक्रवार (14 अक्टूबर 2022) को लापता हुई 12 वर्षीय लड़की मृत पाई गई है। लड़की का शव एक सूटकेस में मिला। शुरुआती जाँच में सामने आया कि पेरिस की 12 साल की लड़की की हत्या में 4 अफ्रीकियों का हाथ है। लड़की के सिर पर कट के कई निशान पाए गए हैं और उसके शरीर पर नंबर लिखे हुए हैं। इस मामले में पूछताछ के लिए स्थानीय पुलिस ने 4 संदिग्ध अल्जीरियाई लोगों को हिरासत में लिया है।

फ्रांसीसी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 12 वर्षीय लड़की का नाम लोला (Missing Paris girl lola) था। पुलिस को उसका शव एक सूटकेस में मिला है। छानबीन में पुलिस ने देखा कि लोला के हाथ और पैर में टेप बाँधी गई थी। उसके सिर पर कई कट के निशान थे और शरीर पर 1 और 0 नंबर लिखा हुआ था। लोला का शव देखने के बाद अंदाजा लगाया जा रहा है कि पीड़िता की मौत दम घुटने से हुई।

स्थानीय मीडिया के मुताबिक, जिन संदिग्धों को पकड़ा गया उनके नाम डाहबिया बी, अमीन के, फ्रीहा बी और रचिड एन हैं। इन चारों का जन्म अल्जीरिया में हुआ था। इन्हें इस मामले में सोमवार (17 अक्टूबर 2022) को मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने के लिए कहा था। रिपोर्ट के अनुसार, 24 वर्षीय महिला डाहबिया मानसिक रूप से अस्वस्थ है। वह स्कूली छात्रा की हत्या कर सकती है।

बताया जा रहा है कि लोला के माता-पिता द्वारा उसके लापता होने की सूचना देने के कुछ ही घंटों बाद उसके शव को बरामद कर लिया गया। हत्या से कुछ समय पहले लड़की का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया। लड़की के माता-पिता ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी शुक्रवार दोपहर लगभग 3.30 बजे स्कूल के बाद घर नहीं आई।

लड़की के पिता, जो उस बिल्डिंग में केयरटेकर हैं उन्होंने पुलिस को बताया कि उसने अपनी बेटी को यहाँ से एक 20 साल की महिला के साथ सीसीटीवी फुटेज में जाते हुए देखा था। महिला बाद में एक सूटकेस लेकर बाहर निकलती हुई दिखाई दी। पुलिस ने शिकायत मिलने बाद में इस बिल्डिंग के तहखाने से अपहरण के सबूत बरामद किए। फिर रात के करीब 11:30 बजे पुलिस को वो सूटकेस मिला जिसमें लड़की का शव था।

12 साल की बच्ची को क्यों बनाया गया निशाना?

पुलिस ने कहा कि नंबर 1 और 0 को मारी गई बच्ची के शरीर पर एक निशानी के तौर रखा गया था। कुछ लोगों ने यह सवाल उठाया है कि क्या श्वेत लड़की की हत्या एक सीरियल किलर के हाथों की गई है। या फिर उसे एक प्रवासी होने के कारण निशाना बनाया गया है। पेरिस में अभियोजक का कार्यालय इस बात की जाँच कर रहा है कि नंबर 1 और 0 क्या ’15 साल से कम उम्र के नाबालिग की हत्या’ के रूप में दिया गया लेबल है।

50 साल का कॉन्ग्रेस नेता 22 साल की लड़की के पीछे पड़ा था, प्रपोजल ठुकराया तो उसके प्रेमी रुपेश की हत्या कर खेत में गाड़ दिया

मध्य प्रदेश में एक कॉन्ग्रेस नेता ने अपने बेटों और अन्य साथियों के साथ मिलकर 24 वर्षीय रुपेश बिरला की हत्या कर दी। कॉन्ग्रेस नेता की पहचान 50 साल के आशिक पटेल के तौर पर हुई है। करीब छह महीने पहले ही पटेल को असंगठित कामगार और कर्मचारी कॉन्ग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई का उपाध्यक्ष बनाया गया था।

घटना मध्य प्रदेश के धार जिले के पीथमपुर का है। बताया जाता है कि आशिक पटेल एक 22 साल की लड़की के पीछे पड़ा था। ने उसका प्रपोजल ठुकरा दिया था। मृतक रुपेश इसी लड़की का प्रेमी था। हत्या के बाद पटेल ने रुपेश की लाश अपने खेत में गाड़ दी थी। पुलिस ने इस मामले में पटेल सहित अब तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। पटेल के बेटे असलम और अजरुद्दीन फरार हैं। उसके मकान पर प्रशासन ने बुलडोजर भी चलाया है।

12 अक्टूबर 2022 को रुपेश की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज उसके परिजनों ने दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक आशिक पटेल अपने यहाँ एकाउंटेंट का काम करने वाली एक 22 वर्षीय युवती से एकतरफा प्रेम करता था। इसके चलते वो आए दिन लड़की को परेशान करने लगा। लड़की के मुताबिक उसने आशिक पटेल की छेड़छाड़ का विरोध किया और उसे बताया कि वह रुपेश से प्रेम करती है। रुपेश पीथमपुर के ही बजाज फाइनेंस कम्पनी में काम करता था।

आरोप है कि जब आशिक पटेल को अपनी कर्मचारी के रुपेश से रिश्तों की जानकारी हुई तो वह बहुत नाराज हुआ। उसने लड़की को रुपेश और उसके परिवार वालों को खत्म करने की धमकी दी। इसके बाद अचानक एक दिन रुपेश गायब हो गया। उसके परिजनों ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आशिक पटेल पर शक जताया।

इसके बाद पुलिस ने आशिक को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की तो वह टूट गया। उसने पुलिस को बताया कि उसने अपने 5 साथियों के साथ मिलकर पहले रुपेश को अगवा किया। फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। हत्या धन्नड़ इलाके में स्थित पटेल की एक बिल्डिंग के तीसरे फ्लोर पर की गई थी। हत्या के बाद रुपेश की लाश को पटेल ने अपने खेत में गाड़कर उस पर नमक की बोरी रख दी। खुदाई का पता न चले इसलिए उस जगह को पत्तों से ढक दिया। पटेल का साथ देने के आरोप में पुलिस ने अखिलेश मिश्रा, अंकुश दुबे, सुरेंद्र उर्फ कालू, रवि मंडल और दीपक को भी गिरफ्तार किया है।

धार जिले के एडिशनल SP देवेंद्र पाटीदार के मुताबिक रुपेश की हत्या को कुल 8 लोगों ने मिलकर अंजाम दिया था। हत्या के बाद से अजरुद्दीन और असलम फरार चल रहे हैं।

आशिक पटेल के घर पर चला बुलडोजर

रुपेश की हत्या का खुलासा होने के बाद हिन्दू संगठनों ने प्रदर्शन किया। कठोर कार्रवाई की माँगकी। प्रशासन ने पटेल की अवैध इमारत पर बुलडोजर चला कर उसे ध्वस्त कर दिया है।

डॉ उदित राज ने किया था नियुक्त

आशिक पटेल की कॉन्ग्रेस पार्टी में नियुक्ति पूर्व सांसद डॉ. उदित राज ने लगभग 6 माह पूर्व की थी। आशिक पटेल ने कर्मचारी कॉन्ग्रेस की डिजिटल सदस्यता मेंअच्छी भागीदारी करवाई थी। इसके बाद असंगठित कामगार और कर्मचारी कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. उदित राज ने उसे प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष बिसेन की मौजूदगी में प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी थी।