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भगत सिंह, कुर्बानी, रैली… आरोपित शराब स्कैम में और तुलना बलिदानी से: CBI के सामने मनीष सिसोदिया की पेशी पर AAP का ‘ड्रामा’, BJP ने बताया ‘जश्न-ए-भ्रष्टाचार’

शराब घोटाला मामले में सीबीआई आज (17 अक्टूबर 2022) दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से पूछताछ कर रही है। सिसोदिया सीबीआई कार्यालय पहुँच चुके हैं। वहीं आम आदमी पार्टी के समर्थक इस दौरान कार्यालय के बाहर जमावड़ा लगाकर जुटे हैं। समर्थकों का दावा है कि सीबीआई ने सिसोदिया को गिरफ्तार करने के लिए बुलाया है। हालाँकि आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है।

बता दें कि सिसोदिया को पूछताछ के लिए तलब किए जाने के बाद से AAP की ओर से बयान आ रहे हैं। उनका कहना है कि गुजरात में चुनाव होने वाले हैं इसलिए उन्हें वहाँ जाने से रोकने के लिए ये सब किया जा रहा है। अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि 8 दिसंबर को गुजरात के परिणाम आएँगे ये लोग तब तक मनीष को जेल में रखने वाले हैं। वहीं खुद सिसोदिया ने पूछताछ से पहले कहा कि पूरा केस फर्जी है। बस गुजरात में चूँकि भाजपा हार रही है इसलिए जेल में डलवाने का काम हो रहा है।

मनीष सिसोदिया ने अपनी तुलना महात्मा गाँधी से करते हुए कहा कि जैसे बापू के ऊपर फर्जी मुकदमे हुए, उन्हें साजिश के तहत तब की सरकार ने जेल भेजा। वैसे ही उनके ऊपर भी फर्जी मुकदमे करके उन्हें जेल भेजने की तैयारी हो रही है।

सामने आई तस्वीरों और वीडियो में देख सकते हैं कि मनीष सिसोदिया कैसे भारी भीड़ लेकर सीबीआई कार्यालय गए। समर्थकों के बीच अपनी सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि वो लोग जेल जाने से नहीं डरते, वे भगत सिंह वाले लोग हैं। उन्होंने कहा कि आज देश कुर्बानी माँग रहा है और वह ये कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं। ऐसे में अगर वह जेल जाएँ तो उनके ऊपर गर्व किया जाए।

उनका ऐसा अंदाज देखने के बाद भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने अपना बयान दिया। उन्होंने AAP के इस रवैये को जश्न-ए-भ्रष्टाचार बताया। उन्होंने कहा, “जिस तरह से मनीष सिसोदिया खुली कार में अपने समर्थकों के साथ नारेबाजी की उसे देख ऐसा लगता है जैसे आम आदमी पार्टी ने भ्रष्टाचार का वर्ल्ड कप जीत लिया हो।”

उन्होंने कहा कि ये एक नया चलन है जब भ्रष्टाचारियों को सवाल जवाब करने के लिए बुलाया जाता है तो वो राजघाट चल देते हैं जैसे सत्याग्रह करने जा रहे हों। कॉन्ग्रेस और आप एक किस्म की नौटंकी करते हैं। याद करिए कि कुछ दिन पहले ऐसा ही राहुल गाँधी के समय हुआ था। जब उनको पूछताछ के लिए बुलाया गया था तब भी ऐसे ही दृश्य देखने को मिले थे।

‘The Wire’ की नजर में मार्क जुकरबर्ग से भी शक्तिशाली हैं अमित मालवीय, एक पल में हटवा सकते हैं कोई भी फेसबुक-इंस्टा पोस्ट: ‘बनावटी’ दस्तावेजों के आधार पर बेतुके दावे

प्रोपेगंडा पोर्टल ‘The Wire’ हिन्दुओं और भाजपा के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए जाना जाता है। अब उसने भाजपा की आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय को बदनाम करने का ठेका उठाया है। इसके लिए उसने एक रिपोर्ट प्रकाशित किया, जिसमें दावा किया गया कि अमित मालवीय इतने शक्तिशाली हैं कि फेसबुक या इंस्टाग्राम पर कोई पोस्ट अच्छा न लगने पर उसे तुरंत हटवा सकते हैं। ‘Meta’ के कम्युनिकेशंस हेड एंडी स्टोन ने इस पूरी खबर को बनावटी करार दिया।

उन्होंने कहा कि बनावटी दस्तावेजों के आधार पर ‘The Wire’ ने इस रिपोर्ट को तैयार किया है। हालाँकि, जब ‘The Wire’ ने ठेका ले ही लिया था तो वो क्यों पीछे हटता। उसने एक अलग रिपोर्ट लिख कर दावा किया कि जिन दस्तावेजों के आधार पर उसने रिपोर्ट बनाया है वो फर्जी नहीं हैं। फिर उसने एंडी स्टोन का एक ईमेल दिखाया, जिसमें उन्होंने कथित रूप से कंपनी के आंतरिक दस्तावेजों के लीक होने पर आपत्ति जताई थी।

‘The Wire’ ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फैलाया प्रोपेगंडा

इसके बाद ‘Meta’ के ‘चीफ इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर’ को सामने आकर मामले को साफ़ करना पड़ा। उन्होंने बताया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ‘The Wire’ ने ये हिटजॉब किया है। CISO गाय रोजन ने बताया कि ‘The Wire’ की रिपोर्ट्स में कोई तथ्य नाम की चीज नहीं है। उन्होंने बताया कि कंपनी के क्रॉस-चेक प्रोग्राम पर मीडिया संस्थान की रिपोर्ट्स गलत हैं। उसने एंडी स्टोन का जो ईमेल एड्रेस दिखाया, वो उनका है ही नहीं।

CISO ने तो उदारता दिखाते हुए आशा जताई कि ‘The Wire’ खुद किसी दुष्प्रचार का शिकार हो रहा है, खुद नहीं कर रहा। हालाँकि, इस प्रोपेगंडा पोर्टल के ट्रैक रिकार्ड्स कुछ और ही कहते हैं। अमेरिका के ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ)’ ने भी इस रिपोर्ट को लपक लिया और ‘Meta’ के खिलाफ दावे करने लगे। WSJ के पत्रकार जेफ्फ होरोविट्ज को रिप्लाई दिया। असल में ‘The Wire’ एक तरफ अमित मालवीय को सर्वशक्तिशाली साबित करने में लगा हुआ था, दूसरी तरफ ये भी दावा कर रहा था कि वो 5000 फॉलोवर वाले एक इंस्टाग्राम हैंडल के पीछे पड़े हैं।

उसका दावा है कि उक्त इंस्टाग्राम हैंडल को ‘प्राइवेट’ मोड में जाने के लिए सिर्फ इसीलिए मजबूर कर दिया गया, क्योंकि उसने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा था। सबसे बड़ी बात तो ये कि मनोविज्ञान में स्नातक करने वाले व्यक्ति से जटिल तकनीकी मुद्दों पर लेख लिखवाया गया। इसमें दावा किया गया कि अमित मालवीय के पास ‘XCheck’ वाला दर्जा मिला हुआ है, जिससे वो किसी भी पोस्ट को रिपोर्ट कर के हटवा सकते हैं और कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा।

दावा है कि दुनिया भर में चंद बड़े सेलब्रिटीज और हस्तियों को ये सुविधा मिली हुई है। एक अज्ञात सूत्र के आधार पर ‘The Wire’ ने दावा किया कि अमित मालवीय ने सोशल मीडिया से 705 पोस्ट्स हटवाए। ‘The Wire’ को कर रहा है, वो इस्लामी और वामपंथी प्रोपेगंडा के अनुरूप ही है। हमने देखा कि कैसे ट्विटर ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हैंडल को हटाया और वहाँ के चुनावों को प्रभावित किया। ‘The Wire’ कुछेक तकनीकी चीजों का नाम लेकर सोच रहा है कि लोग इसे सही मान लेंगे।

मी लॉर्ड! ये कैसा न्याय: 8वीं में पढ़ता था 13 साल का मुन्ना, नाबालिग मानने में कोर्ट ने लगाए 33 साल, बरी होने में लगे 43 साल

बिहार के बक्सर के रहने वाले मुन्ना सिंह आज 56 साल के हैं। 1979 में जब उन पर हत्या के प्रयास सहित कई धाराओं में केस दर्ज किया गया, तब वे 13 साल के थे। आठवीं में पढ़ते थे। लेकिन कोर्ट ने उन्हें नाबालिग घोषित करने में 33 साल लगाए। फिर मामले में उनको बरी करते-करते 10 साल और लग गए।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 11 अक्टूबर 2022 को मुन्ना सिंह को बरी किया गया। इसके बाद उन्होंने कहा, “इस घटना ने मेरे दिलों दिमाग में गहरे घाव छोड़े हैं। बरी होने के बाद राहत की साँस ली है। भगवान का शुक्र है कि यह फैसला मेरे जिंदा रहते ही आया है।”

क्या है मामला?

तारीख थी 7 सितंबर 1979। मुन्ना सिंह, उनके पिता श्याम बिहारी सिंह और अन्य 8 लोगों पर आईपीसी की धारा 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा करने) और 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया था। अब मुन्ना सिंह को लेकर फैसला आया है। सहायक अभियोजन अधिकारी एके पांडे ने कहा कि किशोर बोर्ड ने इस मामले की जाँच की। लेकिन मुन्ना सिंह के खिलाफ कोई गवाह नहीं मिला, इसलिए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

सिंह के वकील राकेश कुमार मिश्रा के मुताबिक घटना के वक्त उनके मुवक्किल केवल 13 वर्ष के थे। आठवीं कक्षा के छात्र थे। लेकिन 2012 तक उन्हें नाबालिग नहीं माना गया था। उन्होंने बताया कि बक्सर की एसीजेएम द्वितीय की अदालत में 2012 में सुनवाई के दौरान मुन्ना सिंह से उनकी उम्र पूछी गई। उन्होंने बताया कि वे अभी वह 46 वर्ष के हैं। इससे यह साफ हो गया कि जब मामला दर्ज किया गया था, उस वक्त वह नाबालिग थे।

इसके बाद नवंबर 2012 को इस मामले को बक्सर किशोर न्याय बोर्ड में स्थानांतरित कर दिया गया। मुरार पुलिस थाने के चौगाई गाँव निवासी मुन्ना सिंह का कहना है कि उन्होंने इसके बाद लगभग एक महीन जेल में बिताया था। आरोपित बनने के बाद उन्होंने काफी मानसिक प्रताड़ना झेली और अदालत के चक्कर लगाने पड़े।

बताया जाता है कि इस मामले के अन्य 5 आरोपितों जिनमें मुन्ना सिंह के पिता भी हैं, उनकी सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। बक्सर कोर्ट ने कुछ साल पहले इस मामले में 2 लोगों को दोषी करार दिया था और दो अन्य को बरी कर दिया था।

दिल्ली यूनिवर्सिटी में गुंडई का Video: लड़कों ने फाँदी मिरांडा हाउस की दीवार- लगाए आपत्तिजनक नारे, छात्राओं से छेड़छाड़

दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस (महिला) कॉलेज में लड़कियों के साथ छेड़छाड की घटना प्रकाश में आई है। आरोप है कि कुछ लड़कों ने कॉलेज परिसर में घुसकर वहाँ छात्राओं को छेड़ा और परिसर में ही नारे लगाए।

घटना से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई है। इसमें कुछ लड़कों को दीवार फाँदकर कॉलेज में घुसते देखा जा सकता है। इस वीडियो को देखने के बाद महिला आयोग ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

जिस वीडियो को देख महिला आयोग ने कार्रवाई की माँग की है वो 14 अक्टूबर की बताई जा रही है। इसमें साफ नजर आ रहा है कि कुछ लड़के पेड़ के सहारे दीवार पर चढ़ते हैं और फिर बाद में बाउँड्री की रेलिंग पर बैठ जाते हैं।

वीडियो को शेयर करते हुए दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाति मालीवाल ने इसे गुंडागर्दी बताया है। सुरक्षा प्रबंधों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने लिखा,

“दिल्ली के सबसे विख्यात कॉलेज में से एक मिरांडा हाउस में चल रहे दिवाली मेले में लड़के दीवार फाँदकर ज़बरदस्ती घुस रहे हैं। लड़कियों ने छेड़छाड़ और शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं। हम दिल्ली पुलिस और कॉलेज प्रशासन को नोटिस भेज रहे हैं। कैसे ये गुंडागर्दी हुई? क्या सुरक्षा प्रबंध किए?”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुतबिक 14 अक्टूबर को मिरांडा हाउस में दीपावली मेला उत्सव कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम में कॉलेज के सभी छात्रों को आमंत्रित किया गया था। कुछ देर बाद कैम्पस में काफी भीड़ जमा हो गई जिसके चलते मुख्य गेट को बंद करना पड़ा। गेट बंद होने के बाद कुछ छात्रों ने बॉउंड्री पर लगे पेड़ के सहारे कैम्पस में घुसने का प्रयास किया। इसी दौरान किसी ने वीडियो बना डाली जो 16 अक्टूबर (रविवार) से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

बताया जा रहा है कि दीवार फाँद कर घुसने की कोशिश कर रहे छात्रों को कॉलेज प्रशासन ने रोक दिया। इसके बाद वो दूसरे गेट से घुसने का प्रयास करने लगे लेकिन वहाँ भी उन्हें अंदर नहीं आने दिया गया। कुछ छात्राओं का आरोप है कि इस कार्यक्रम में उनके साथ अभद्रता की गई। कई लड़कों पर लड़कियों के क्लास रूम में भी घुस कर भद्दे कमेंट करने का भी आरोप है।

हालाँकि इस मामले में कॉलेज प्रशासन ने कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं करवाई पर पुलिस ने वायरल वीडियो का स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज कर ली। कॉलेज के वीमेन डेवलमेंट सेल ने भी घटना पर गुस्सा प्रकट किया है। उन्होंने बताया कि कई छात्रों ने कॉलेज में बवाल काटा है जिन्होंने प्रोफेसरों की बात भी नहीं मानी।

दैनिक जागरण का दावा है कि हंगामा करने वाले छात्र दिल्ली के ही रामजस कॉलेज से थे। बताया जा रहा है कि आरोपित छात्रों ने ‘रामजस का नारा है, पूरा मिरांडा हमारा है’ जैसे नारे भी लगाए। हालाँकि पुलिस का मानना है कि कॉलेज के अंदर कार्यक्रम शाँतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ है।

‘रुक तेरे को दिखाता हूँ’: आधी रात उबर ड्राइवर मोहम्मद मुराद के चंगुल में फँसी हिरोइन, बाइकर्स और रिक्शे वाले ने बचाया

मनवा नाइक (Manava Naik) मराठी फिल्मों की जानी-मानी अभिनेत्री और डायरेक्टर हैं। वे कई टीवी शो और फिल्मों में काम कर चुकी हैं। उनके साथ आधी रात मुंबई की सड़कों पर उबर ड्राइबर मोहम्मद मुराद ने जो कुछ किया, उससे वह खौफजदा हैं। उन्होंने अपनी आपबीती फेसबुक पर साझा की है। पुलिस ने आरोपित मुराद को गिरफ्तार कर लिया है।

मनवा नाइक (39) ने रविवार (16 अक्टूबर 2022) को फेसबुक पोस्ट के जरिए अपने साथ हुए दुर्व्यवहार के बारे में बताया। बताया कि किस तरह कैब ड्राइवर ने उन्हें धमकी दी। पुलिस ने मामले की जाँच की तो कैब ड्राइवर की पहचान 24 वर्षीय मोहम्मद मुराद के रूप में हुई।

अभिनेत्री ने बताया, “यह घटना तब हुई, जब मैंने बीकेसी से अपने घर (चेंबूर) जाने के लिए रात 8.15 बजे (शनिवार को) कैब (उबर पर) बुक की। ड्राइवर गाड़ी चलाते हुए फोन पर बात कर रहा था। इस पर मैंने आपत्ति जताई। इस बीच, बीकेसी पर सिग्नल क्रॉस करने के बाद एक ट्रैफिक पुलिस वाले ने उसे पकड़ लिया। मुझे देर हो रही थी इसलिए मैंने पुलिस से कहा कि कैब को जाने दें। लेकिन, इससे पहले ही ड्राइवर और कैब की फोटो पुलिस ने क्लिक कर ली थी। इस पर कैब ड्राइवर गुस्सा हो गया और मुझ पर चिल्लाने लगा। उसने मुझसे गुस्से में कहा कि ‘तू भरेगी क्या 500 रुपए’? इस पर मैंने कहा कि तुम ही तो फोन पर बात कर रहे थे। इसके बाद उसने मुझे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी।”

फोटो साभार: मनवा नाईक का फेसबुक

मनवा नाइक ने इस घटना के बारे में सिलसिलेवार तरीके से अपनी पोस्ट बताया, “जब मैंने मुराद को कैब लेकर पुलिस स्टेशन जाने के लिए कहा, तो उसने कैब को अंधेरी में एक सुनसान जगह पर रोक दिया। फिर स्पीड में चूनाभट्टी रोड और प्रियदर्शिनी पार्क के बीच एक नए रास्ते की ओर चल दिया। उसने मुझे धमकी देते हुए कहा कि रुक तुझे दिखाता हूँ। तभी मैंने उबर सेफ्टी हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया। जब मैंने हेल्पलाइन पर कॉल किया, ड्राइवर ने फिर कैब की स्पीड बढ़ा दी और वह किसी को फोन करने लगा। मैं चिल्लाने लगी। तभी एक बाइक पर सवार दो लोगों और एक ऑटोरिक्शा चालक ने कैब को रुकवाया और मुझे बचाया।”

बता दें कि नाइक की एफबी पोस्ट के तुरंत बाद मुंबई संयुक्त सीपी (एल एंड ओ) विश्वास नांगरे पाटिल ने उन्हें आरोपित को पकड़ने का भरोसा दिलाया। इसके बाद बीकेसी पुलिस ने कैब मालिक का पता लगाने के बाद मुराद को गिरफ्तार कर लिया। उबर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस घटना को निंदनीय बताया है।

बिहार की सामान्य चेकिंग में मजहब किसने ठूँसा?: कॉलेज प्रिंसिपल बोलीं- हिजाब के नाम पर छात्रा को बरगलाया, नहीं होता भेदभाव

बिहार के मुजफ्फरपुर के MDDM कॉलेज में मुस्लिम छात्राओं द्वारा मचाए गए बवाल पर अब हर जगह चर्चा हो रही है। हिजाबी छात्राओं ने आरोप लगाए कि टीचर ने उन्हें देशद्रोही कहा जबकि शिक्षक का कहना था कि वो बस कान में ब्लूटूथ चेक कराने को बोल रहे थे।

अब इस पूरे मामले को देखने के बाद स्कूल प्रिंसिपल मुस्लिम छात्राओं के ऐसे रवैये से बेहद परेशान हैं। उन्होंने कहा कि ये हैरान करने वाला है कि ग्याहरवीं की छात्राएँ ये सब कर रही हैं। ऐसा लगता है कि इन्हें कोई मजहब और हिजाब के नाम पर गलत राह दिखा रहा है। स्कूल में मजहब और जाति के नाम पर कोई भेदभाव होता ही नहीं है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कैसे लड़कियों ने कान न दिखाने के बदले पेपर छोड़ने की ठान ली थी और फिर बात मजहब पर ले आईं।

इससे पहले कॉलेज प्रिंसिपल ने घटना को बेहद शर्मनाक कहा था। उन्होंने बताया कि छात्राओं की यह हरकत यहाँ का माहौल बिगाड़ने की एक साजिश है। इस कॉलेज का इतिहास काफी पुराना है। ये छात्राएँ इंटर की हैं। सभी लोगों को मोबाइल हटाने और ब्लूटूथ हटाने को कहा गया था। लेकिन इन लोगों ने इसे एक अलग ही मामला बना लिया और धर्म से जोड़कर बवाल करने लगीं।

उन्होंने ये भी जानकारी दी थी कि छात्राओं की अटेंडेंस भी 75% से कम है। अब तो शिक्षा मंत्री और यूनिवर्सिटी का भी निर्देश है कि कम अटेंडेंस पर्सेंट वाली छात्राओं को फाइनल एग्जाम में बैठने नहीं दिया जाए। ये लोग बेवजह का दबाव बना रहे हैं। ताकि कॉलेज प्रशासन इनके सामने झुक जाए। हिजाब की कोई बात नहीं थी। ये जिस शिक्षक पर आरोप लगा रही हैं, उन्होंने देशद्रोही और पाकिस्तान जाने जैसी कोई बात नहीं कही थी। ये लोग मनगढ़ंत बातें बनाकर बेवजह मामले को तूल दे रही हैं।

मुजफ्फरपुर का हिजाब विवाद

गौरतलब है कि बिहार के एमडीडीएम कॉलेज में हिजाब को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब परीक्षा चल रही थी। क्लासरूम में परीक्षा के दौरान शशिभूषण नाम के टीचर को शक हुआ कि मुस्लिम छात्रा ने हिजाब के अंदर कान में ब्लूटूथ लगा रखा है। जैसे ही उन्होंने उस लड़की से चेकिंग कराने को कहा वैसे ही छात्रा भड़क गई और मजहब को बीच में लाकर बवाल शुरू हो गया।

मुस्लिम छात्राओं ने आरोप लगाया कि टीचर ने उन्हें देशद्रोही कहा और बोला कि वह पाकिस्तान चली जाएँ। छात्राओं ने बताया कि टीचर ने उन्हें ये भी कहा कि या तो वह अपना हिजाब हटाकर चेकिंग कराएँ वरना क्लास से बाहर जाएँ। हालाँकि टीचर का पक्ष है कि लड़की ने ये कहा था कि वो परीक्षा छोड़ सकती है लेकिन अपना कान कभी नहीं दिखाएगी।

तिलक लगा ‘अमर’ बन गया मोहम्मद अकरम, हिंदू महिला से रेप-मुस्लिम बनाने की कोशिश: भोपाल पुलिस कर रही तलाश

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। मोहम्मद अकरम पर अमर कुशवाहा बनकर हिंदू महिला से रेप और धर्मांतरण के लिए दबाव डालने का आरोप है। भोपाल पुलिस ने बताया है कि अकरम की तलाश की जा रही है।

पीड़िता शादीशुदा और दो बच्चों की माँ है। अकरम ने अमर नाम से सोशल मीडिया प्रोफाइल बना रखा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता का पति दूसरे प्रदेश में नौकरी करता है। आरोपित से उसकी जान-पहचान एक फोन कॉल के जरिए हुई। करीब 2 माह पहले घर की रंगाई-पुताई का काम करने वाले को कॉल करते हुए गलती से पीड़िता का फोन अकरम को लग गया। उस समय महिला ने कॉल काट दी। लेकिन इसके बाद अकरम खुद को अमर कुशवाहा बताते हुए मैसेज और कॉल करने लगा।

पीड़िता का यह भी आरोप है कि अकरम ने उसे विश्वास में लेने के लिए अपनी तिलक लगाई फोटो भेजी। कुछ दिनों बाद दोनों में बातचीत होने लगी। इस बीच अकरम ने रविवार (16 अक्टूबर 2022) को भोपाल के एमपी नगर के एक होटल में पीड़िता को बुलाकर उसके साथ रेप किया। आरोप है कि इस दौरान अकरम ने पीड़िता से इस्लाम कबूलने के लिए कहा। उस पर पीड़िता पर नमाज पढ़ने का दबाव बनाने का भी आरोप है। महिला का आरोप है कि होटल में ही उसे अमर के अकरम होने की जानकारी हुई।

अकरम के चंगुल से निकलकर पीड़िता एमपी नगर पुलिस स्टेशन पहुँची। यहाँ उसने अकरम के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर अकरम के खिलाफ IPC की धारा 376, 354 और धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धाराओं में FIR दर्ज कर ली है। घटना के बाद से अकरम फरार है।

130 करोड़ की आबादी, वोट सिर्फ 30 करोड़ ने दिया: मोदी घृणा में टेनिस ‘लीजेंड’ भूलीं सामान्य गणित, नेटिजन्स पूछ रहे- ये अनपढ़ है क्या

एक समय में टेनिस का जाना-माना नाम रहीं मार्टिना नवरातिलोवा (Martina Navratilova) आजकल अपने मोदी विरोधी (Modi Hatred) ट्वीट के कारण काफी फजीहत सह रही हैं। उन्होंने 13 अक्टूबर को अपने ट्विटर पर सवाल किया था, “क्या आपने भी मोदी के लिए वोट किया था।”

इस सवाल के बाद उन्हें बहुत जवाब मिले और लोगों ने खुलकर बताया कि उन्होंने मोदी को वोट किया था और आगे भी करते रहेंगे।

इसी क्रम में लेखक अजीत दत्ता ने भी मार्टिना के ट्वीट पर कहा कि हाँ उन्होंने 30 करोड़ लोगों के साथ नरेंद्र मोदी को वोट दिया था। ये मानव इतिहास का सबसे बड़ा चुनावी जनादेश था।

अजीत दत्ता के इसी जवाब से मार्टिना बौखला गईं और उन्होंने कहा कि जिस देश की आबादी ही 130 करोड़ है वहाँ ये कोई बड़ी जीत नहीं है। आपके पास सबसे ज्यादा वोटर हो सकते हैं लेकिन आपके पास बहुमत नहीं नहीं हो सकता।

अब नरेंद्र मोदी से घृणा दिखाने के चक्कर में मार्टिना यह भूल गईं कि देश की आबादी में वहाँ के नवजात भी शामिल होते हैं और साथ में किशोर और बुजुर्ग भी। लेकिन वोट देने की बारी जब आती है तो उसका अधिकार उन्हीं के पास होता है जो बालिग होते हैं, बूथ तक जाने लायक होते हैं और जिनका नाम वोटर आईडी में होता है। ऐसे में 130 करोड़ आबादी होने का मतलब यह नहीं है कि 130 करोड़ जनता वोट दे दे।

इसी बात पर मार्टिना को फजीहत सहनी पड़ रही है। उनके ट्वीट पर लोग उन्हें जीनियस कहकर तंज कस रहे हैं। लिखा जा रहा है कि एक अच्छा खिलाड़ी एक महान बेवकूफ भी हो सकता है।

एक ट्विटर यूजर लिखता है कि मार्टिना बड़े आराम से टेनिस आइकन से टूलकिट एक्टिविस्ट बन गई हैं। आखिर कोई देश के निर्वाचन तंत्र पर बिना बेसिक्स जाने कैसे कुछ बोल सकता है। मोदी के प्रति नफरत इनकी बेवकूफियों को दर्शा रही है।

एक यूजर ने लिखा कि ये अनपढ़ है क्या? एक ने कहा, “तुम राजनीति छोड़ दो। इस मासूम को तो न तो गणिता का ज्ञान है और न ही इसमें सामान्य बुद्धि है।”

एक ट्विटर यूजर ने पूछा कि क्या अमेरिका में 330 मिलियन की जनता है तो वहाँ हर किसी को वोट देने का अधिकार है। चाहे वो डायपर पहनने वाला बच्चा ही क्यों न हो। क्या बायडन ने 330 मिलियन वोट पाकर जीत हासित की थी। नहीं। लेकिन गजब बात है कि नरेंद्र मोदी ने इतने ही वोट पाकर जीत पाई है।

ब्लूटूथ लगा कर परीक्षा दे रही थीं हिजाबी छात्राएँ, रोकने पर बना दिया मजहब का मुद्दा: बिहार में मुस्लिम लड़कियों का हंगामा, कॉलेज ने कहा – माहौल बिगाड़ने की साजिश

जहाँ एक ओर इस्लामिक देश ईरान में महिलाएँ हिजाब का विरोध कर रहीं हैं। वहीं, दूसरी ओर भारत में हिजाब के समर्थन में ‘तमाशा’ देखने को मिल रहा है। बिहार के मुजफ्फरपुर में स्थित MDDM कॉलेज में परीक्षा के दौरान हिजाब पहने हुए छात्राओं से शिक्षक द्वारा कान दिखाने के लिए कहने पर छात्राओं ने जमकर बवाल मचाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुजफ्फरपुर के महंत दर्शन दास महिला कॉलेज में सेंट अप परीक्षा चल रही थी। इस दौरान, कुछ छात्राएँ हिजाब पहनकर बैठी हुईं थीं। एक शिक्षक को छात्राओं के ब्लूटूथ लगाए होने का शक हुआ और उन्होंने छात्राओं से कान दिखाने के लिए कहा। जिस पर छात्राएँ भड़क गईं और कॉलेज में ही बवाल करने लगीं।

छात्राओं का आरोप है कि परीक्षा के दौरान शिक्षक शशिभूषण ने छात्राओं से पहले तो हिजाब निकालने के लिए कहा। मुस्लिम लड़कियों की मानें तो इसके बाद उन्होंने आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए देशद्रोही कहा है। छात्राओं ने आरोप लगाया है कि शिक्षक ने उनसे कहा है कि रहते यहाँ हो और गाते वहाँ की हो, पाकिस्तान ही चले जाओ। इसके बाद, छात्राओं ने विरोध किया और बिना परीक्षा दिए ही कॉलेज के बाहर जाकर बवाल करने लगीं।

इस मामले में, कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. कनुप्रिया का कहना है कि छात्राओं की यह हरकत यहाँ का माहौल बिगाड़ने की एक साजिश है। इस कॉलेज का इतिहास काफी पुराना है। ये छात्राएँ इंटर की हैं। सभी लोगों को मोबाइल हटाने और ब्लूटूथ हटाने को कहा गया था। लेकिन इन लोगों ने इसे एक अलग ही मामला बना लिया और धर्म से जोड़कर बवाल करने लगीं।

उन्होंने यह भी कहा है कि यह बेहद ही शर्मनाक बात है। इन छात्राओं की अटेंडेंस भी 75% से कम है। अब तो शिक्षा मंत्री और यूनिवर्सिटी का भी निर्देश है कि कम अटेंडेंस पर्सेंट वाली छात्राओं को फाइनल एग्जाम में बैठने नहीं दिया जाए। ये लोग बेवजह का दबाव बना रहे हैं। ताकि कॉलेज प्रशासन इनके सामने झुक जाए। हिजाब की कोई बात नहीं थी। ये जिस शिक्षक पर आरोप लगा रही हैं, उन्होंने देशद्रोही और पाकिस्तान जाने जैसी कोई बात नहीं कही थी। ये लोग मनगढ़ंत बातें बनाकर बेवजह मामले को तूल दे रही हैं।

इस मामले में, स्थानीय मिठनपुरा थाने के प्रभारी एसएचओ श्रीकांत सिन्हा ने कहा है कि उन्होंने दोनों पक्षों से बातचीत की और परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई है। फिलहाल मामला दर्ज करने या इलाके में अतिरिक्त बल तैनात करने की जरूरत नहीं है। पुलिस प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

जिससे बॉलीवुड ने करवाया ड्राइवर और ऑफिस बॉय का काम, उसने बॉलीवुड की ही लगा दी वाट: प्रेरक है ‘कांतारा’ के लीड एक्टर की कहानी, वही हैं डायरेक्टर भी

किसी भी इंडस्ट्री में जगह बनाना बेहद मुश्किल काम है। खासतौर से फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म के कारण हर किसी को कड़ी मेहनत करते हुए आगे बढ़ना पड़ता है। कांतारा (Kantara) के लीड एक्टर रिषभ शेट्टी (Rishab Shetty) इन्हीं में से एक हैं। कन्नड़ फिल्मों के सुपरस्टार रिषभ आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। लेकिन, एक समय ऐसा भी था जब वह फिल्म प्रोड्यूसर के ड्राइवर थे।

रिषभ अपनी सुपर हिट फिल्म ‘कांतरा’ के लिए चर्चा में हैं। ‘कांतारा’ मूल रूप से कन्नड़ फिल्म है। लेकिन, इस फिल्म के कन्नड़ वर्जन की लोकप्रियता के कारण हिंदी पट्टी में भी रिलीज की माँग की गई थी। जिसके बाद, फिल्म को हिंदी में भी रिलीज किया गया है। ‘कांतारा’ के डायरेक्टर और फिल्म में लीड एक्टर रिषभ शेट्टी की लाइफ बेहद इंस्पायरिंग है।

रिषभ शेट्टी ने हाल ही में इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने अपनी पूरी कहानी बताई है। रिषभ ने बताया है कि साल 2006 में रिलीज हुई कन्नड़ फिल्म ‘सायनाइड’ (Cyanide) उनकी पहली फिल्म थी। इस फिल्म में उन्होंने बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया था। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड फिल्म ‘मर्डर’ के कन्नड़ रीमेक ‘गंडा हेंडथी’ (Ganda Hendathi) में भी काम किया था। हालाँकि, इसके बाद उनके पास काम नहीं था। इस दौरान एक बॉलीवुड फिल्म की टीम शूटिंग के लिए उनके गाँव के आसपास के किसी क्षेत्र में आई हुई थी। इस फिल्म के लिए रिषभ ने बतौर लोकल कॉर्डिनेटर काम किया था।

रिषभ में बताया है कि, इस बॉलीवुड फिल्म की यूनिट ने उन्हें ये कह कर मुंबई ले गए कि वह अच्छा आम कर रहा हैं। हालाँकि, मुंबई में ऑफिस बॉय और प्रोड्यूसर के ड्राईवर तक का काम करना पड़ा। रिषभ में कहा है कि उन्हें एडिटिंग का शौक था तो एडिटिंग टीम में भेज दिया गया था।

इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा है “मैं जानता था कि उधर भी ऐसा ही ऑफिस बॉय का काम करना पड़ेगा। वो हर सीनियर एडिटर के साथ जो नया आदमी आता है उसे करना पड़ता है। तो मैंने सोचा करते हैं कोई बात नहीं। मैं देखता रहा कि आगे कुछ नहीं हो रहा है तो फिर बैग उठाकर वापस गाँव चला गया।”

गौरतलब है कि साल 2018 में आयी रिषभ शेट्टी की फिल्म ‘रामन्ना राय’ को ‘बेस्ट चिल्ड्रन्स फिल्म’ का नेशनल अवार्ड मिला था। इससे पहले साल 2016 में आई उनकी फिल्म ‘किरिक पार्टी’ को स्टेट अवार्ड भी मिला था। हालाँकि, वह पहले 777 चार्ली और अब कांतारा के लिए तेजी से सुर्खियाँ बटोरते हुए चर्चा में बने हुए हैं।

रिषभ शेट्टी की फिल्म कांतारा 30 सितंबर को रिलीज हुई थी। फिल्म रिलीज के बाद से ही चर्चा में बनी हुई है। फिल्म की चर्चा का कारण न केवल स्टोरी और रिषभ शेट्टी की एक्टिंग बल्कि कमाई और IMDb पर रेटिंग भी है। जहाँ फिल्म अपनी लागत से 6 गुना अधिक की कमाई कर चुकी है। वहीं, IMDb पर सबसे अधिक रेटिंग पाने वाली फिल्म भी बन गई है। IMDb पर इस फिल्म को 9.5 रेटिंग दी गई है।