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‘रसूल-ए-पाक की शान में सर तन से जुदा’: RSS के कार्यक्रम में जाने पर BJP नेता जमाल सिद्दीकी को कट्टरपंथियों ने भेजी धमकी, शिकायत दर्ज

महाराष्ट्र के नागपुर में भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के गुरु पूजन कार्यक्रम में शामिल होना महंगा पड़ गया। उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई है। चिट्ठी में लिखा है, ‘रसूल-ए-पाक की शान में सर तन से जुदा’। सिद्दीकी ने पुलिस में इसकी शिकायत दे दी है।

जमाल सिद्दीकी को भेजी गई धमकी वाले पत्र के साथ उनकी दो तस्वीरें भी भेजी गई हैं। इन तस्वीरों में जमाल सिद्दीकी आरएसएस के एक कार्यक्रम में नजर आ रहे हैं। इसी कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उन्हें यह चिट्ठी भेजी गई है। यह कार्यक्रम गुरुपूजन का था।

जमाल को गुरुवार को मिली इस चिट्ठी को काली स्याही वाली कलम से लिखी गई है। चिट्ठी को देवनागरी लिपी और उर्दू भाषा में लिखी गई है। चिट्ठी मिलने के बाद जमाल सिद्दीकी ने नागपुर के सक्करदरा पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है।

जमाल सिद्दीकी का कहना है कि वे इन धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। वे पार्टी, देश और समाज के लिए काम करते रहें रहेंगे और अब और भी अधिक शिद्दत से करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पहले भी धरना-प्रदर्शन हुए हैं। अब बात हत्या की धमकी तक पहुँच गई है, लेकिन वे इससे डरने वाले नहीं हैं।

भाजपा नेता जमाल सिद्दीकी ने आगे बताया कि उन्होंने इस घटना की जानकारी महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को दे दी है। इसके साथ ही उन्होंने नागपुर के पुलिस कमिश्नर को भी जानकारी दी गई है।

इससे पहले राजस्थान की भाजपा नेता चारुल अग्रवाल को सितंबर में कट्टरपंथियों ने ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी थी। वाराणसी के ज्ञानवापी को लेकर फेसबुक पर टिप्पणी करने के कारण उन्हें 25 सितंबर तक हत्या करने की धमकी दी गई थी।

अलवर स्थित उनके घर के बाहर फेंके गए लेटर में कहा गया था, “चारुल अग्रवाल आईआईटी दिल्ली वाली… हमारे मजहब को लेकर कोई पोस्ट डालोगी तो तेरा भी वही हाल होगा, जो उदयपुर वाले का हुआ। ज्ञानवापी हमारा था और हमारा ही रहेगा।”

भारत के अंतिम गाँव में गूंजा ‘मोदी-मोदी’ नारा, PM ने उत्तराखंड दौरे पर कहा- मन प्रसन्न और जीवन धन्य हो गया

प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने अपने उत्तराखंड दौरे में चीनी सीमा से सटे माणा गाँव और बद्रीनाथ में सड़क और रोपवे परियोजनाओं का शिलान्यास क‍िया। इससे पहले उन्‍होंने बाबा केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन भी किए।

पीएम मोदी ने कहा, ”बाबा केदार और बद्री विशाल जी के दर्शन करके मन प्रसन्न हो गया, जीवन धन्य हो गया। माणा गाँव, भारत के अंतिम गाँव के रूप में जाना जाता है। लेकिन मेरे लिए सीमा पर बसा हर गाँव, देश का पहला गाँव है।”

पीएम ने कहा-प्रगति का कार्य कुछ लोगों के लिए अपराध की तरह

प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी के विकसित भारत के निर्माण के दो प्रमुख स्तंभ हैं। पहला- अपनी विरासत पर गर्व, दूसरा- विकास के लिए हर संभव प्रयास। उन्‍होंने कहा, ”देश की आजादी के 75 साल पूरे होने पर मैंने लाल किले पर एक आह्वान किया, ये आह्वान हैं गुलामी की मानसिकता से पूरी तरह मुक्ति का। क्योंकि आजादी के इतने वर्षों बाद भी, हमारे देश को गुलामी की मानसिकता ने ऐसा जकड़ा हुआ है कि प्रगति का कुछ कार्य कुछ लोगों को अपराध की तरह लगता है।”

आस्था के केंद्र हमारे लिए प्राणवायु की तरह : पीएम

पीएम ने कहा कि विदेशों में वहाँ की संस्कृति से जुड़े स्थानों की ये लोग तारीफ करते नहीं थकते थे, लेकिन भारत में इस प्रकार के काम को हेय दृष्टि से देखा जाता था। आस्था के ये केंद्र सिर्फ एक ढाँचा नहीं, बल्कि हमारे लिए प्राणवायु की तरह हैं। वो हमारे लिए ऐसे शक्तिपुंज हैं, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी हमें जीवंत बनाए रखते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, ”विकास के इन सभी प्रोजेक्ट्स के लिए, उत्तराखंड को और देश-विदेश के हर श्रद्धालु को मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूँ । गुरुओं की कृपा बनी रहे, बाबा केदार की कृपा बनी रहे, बद्री विशाल की कृपा बनी रहे, हमारे सभी श्रमिक साथियों को भी शक्ति मिले, यही प्रार्थना करते हैं।”

पीएम बोले : भारत अपने सांस्कृतिक उत्थान का आह्वान कर रहा

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में अयोध्या में बन रहे भव्‍य राममंद‍िर की भी चर्चा की। उन्‍होंने कहा, ”अयोध्‍या में इतना भव्य राममंदिर बन रहा है, गुजरात के पावागढ़ में माँ कालिका के मंदिर से लेकर विन्ध्यांचल देवी के कॉरिडोर तक, भारत अपने सांस्कृतिक उत्थान का आह्वान कर रहा है।”

प्रधानमंत्री ने कोरोना काल का ज‍िक्र करते हुए कहा, ”एक संवेदनशील सरकार, गरीबों का दुख-दर्द समझने वाली सरकार कैसे काम करती है, आज देश के हर कोने में लोग अनुभव कर रहे हैं। कोराना काल में जब वैक्सीन लगवाने की बारी आई, अगर पहले की सरकारें होती, तो शायद अभी तक वैक्सीन यहां तक नहीं आता।”

पीएम मोदी ने स्थानीय उत्पाद पर खर्च करने का किया आह्वान

इसके साथ ही पीएम मोदी ने लोगों से स्‍थानीय उत्‍पादों पर खर्च करने का कहा। उन्‍होंने कहा, ”लोकल फॉर वोकल की तरह ही आज मैं आपसे एक संकल्प की प्रार्थना करता हूँ- आप जितना भी खर्च करते हैं, उसका कम से कम 5 प्रतिशत स्थानीय उत्पाद पर खर्च कीजिए।”

पीएम ने 3400 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास क‍िया

पीएम मोदी ने केदारनाथ, बद्रीनाथ व माणा में 3400 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास क‍िया। इनमें केदारनाथ व हेमकुंड साहिब रोपवे और चीन सीमा से लगे माणा क्षेत्र में दो राजमार्गों से संबंधित योजनाएँ शामिल हैं।

सभी को दीपावाली की शुभकामनाएँ दीं

अपने संबोधन के आखिर में प्रधानमंत्री ने सभी को दीपावाली की शुभकामनाएँ दीं और जय बाबा केदार व बद्रीविशान के जयकारों के साथ अपना सम्‍बोधन समाप्‍त किया। इसके बाद जनसभा स्‍थल मोदी-मोदी के जयकारों को गूंज उठा।

पाकिस्तानी PM के तौर पर मिले जितने तोहफे, सब बेच डाले: तोशाखाना केस में इमरान खान की गई सांसदी, अगले 5 साल तक चुनाव लड़ने पर बैन

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Pakistan Ex PM Imran Khan) की संसद सदस्यता वहाँ के चुनाव आयोग ने शुक्रवार (21 अक्टूबर 2022) को खत्म कर दी। इसके साथ ही उन्हें अगले पाँच साल के लिए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित ठहरा दिया है। इसके बाद पाकिस्तान में तनाव की स्थिति देखी जा रही है।

दरअसल, प्रधानमंत्री रहने के दौरान विदेशी नेताओं द्वारा मिले उपहारों को तोशाखाना में जमा कराने के बजाए उसे बेचने के मामले में पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने इमरान खान के खिलाफ यह फैसला सुनाया है। चुनाव आयोग के इस फैसले के तुरंत बाद उसके दफ्तर के सामने फायरिंग करने की घटना सामने आई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त सिकंदर सुल्तान रजा की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय पीठ ने सर्वसम्मति के साथ यह फैसला दिया। हालाँकि, पंजाब के सदस्य घोषणा के लिए मौजूद नहीं थे। तोशखाना मामले में चुनाव आयोग ने 19 सितंबर 2022 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

वहीं, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के अध्यक्ष इमरान खान को भ्रष्टाचार का दोषी पाए जाने के बाद सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। वहीं, इमरान खान की पार्टी के समर्थक सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ आक्रामक हैं।

देश में हिंसा की आशंका को देखते हुए चुनाव आयोग के कार्यालय वाले इलाके में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। इमरान खान के समर्थकों को रोकने के लिए पाकिस्‍तान सरकार ने अर्धसैनिक बलों को तैनात किया है। पुलिस का कहना है कि किसी को भी चुनाव आयोग के पास नहीं आने दिया जाएगा। 

चुनाव आयोग के फैसले के विरोध में PTI के कार्यकर्ता देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे हैं। कहीं-कहीं टायरों में आग लगाकर सड़कों को जाम कर दिया गया है। वहीं, चुनाव आयोग के फैसले के बाद इमरान खान की पार्टी ने कहा कि वह इस फैसले को हाईकोर्ट को हाईकोर्ट में चुनौती देगी।

बता दें कि इमरान खान को हटाकर पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने के साथ ही शाहबाज शरीफ ने तोशखाना मामले की जाँच का आदेश दे दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री रहने के दौरान इमरान खान को जो भी उपहार मिले थे, उसे तोशाखाना में जमा कराने के बजाए उसे बेच दिया। वहीं, तोशाखाना में जमा उपहार को आधी कीमत में खरीद कर महंगे दामों में भी बेचने का आरोप है।

इस आरोप पर इमरान खान ने कहा था कि उनको मिले उपहार पर उन्हीं का हक है और वे चाहें तो उसे तोशाखाना में जमा करवाएँ या जो मर्जी करे वो करें। उन्होंने कहा था कि ये उपहार उन्हें मिले थे और यह उनकी मर्जी है कि उसे रखे या बेचें। उन्होंने कहा था, ‘मेरा तोहफा, मेरी मर्जी।’

सिर मुंडवाया, लाल कपड़े पहने…बन गई बौद्ध भिक्षु: 3 साल से पहचान छिपाकर दिल्ली में रह रही थी चीनी महिला, जासूसी का शक होने पर गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने मजनू का टीला इलाके से एक चीनी महिला को गिरफ्तार किया है। महिला चीन के हैनान प्रांत की रहने वाली है। उसका नाम काय रुओ (Cai Ruo बताया जा रहा है। चीनी महिला पर भारत में फर्जी पहचान पत्र बनाकर रहने और जासूसी करने का आरोप लगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार (21 अक्टूबर 2022) को गिरफ्तार की गई चीनी महिला के नेपाल के रास्ते भारत में आने का संदेह जताया जा रहा है। वह 3 साल से मजनू के टीला इलाके में बौद्ध भिक्षु की वेशभूषा में रह रही थी। काय रुओ के पास से कुछ दस्तावेज भी मिले हैं। इसमें उसका नाम डोल्मा लामा है और पता काठमांडू का लिखा हुआ है। लेकिन फॉरेन रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) की जाँच में पता चला है कि महिला चीन के हैनान प्रांत की रहने वाली है। वह अंग्रेजी, चीनी और नेपाली भाषा जानती है।

पुलिस ने उसके खिलाफ कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पूछताछ के दौरान महिला ने पुलिस को बताया कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता उसे जान से मारना चाहते थे, इसलिए वह उनसे बच रही है। दिल्ली पुलिस महिला से जुड़ी और जानकारी जुटाने में जुट गई है। साथ ही ये जानने की कोशिश भी कर रही है कि दिल्ली में उसके और कितने साथी हैं।

फॉरेन रजिस्ट्रेशन ऑफिस के मुताबिक चीनी महिला काय रुओ साल 2019 में चाईनीज पासपोर्ट पर भारत आई थी। इसके बाद उसने बौद्ध भिक्षुओं की तरह अपना सिर मुंडवाया और उनके जैसे पारंपरिक गहरे लाल रंग के कपड़े पहनकर मजनू का टीला इलाके में रहने लगी। संदिग्ध हाव-भाव के चलते दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को काफी दिनों से उसके ऊपर शक था।

बता दें कि भारत सरकार ने 1959 में मजनू का टीला में तिब्बत से आए शरणार्थियों को रहने की अनुमति दी गई थी। यह दिल्ली विश्वविद्यालय के नजदीक है।

‘मेरे पास रहने की जगह भी नहीं है’: J&K प्रशासन ने भेजा महबूबा मुफ्ती को सरकारी बंगला छोड़ने का नोटिस, अब्बू के CM बनने के बाद ‘फेयर व्यू’ में डाला था डेरा

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस दिया है। महबूबा फिलहाल श्रीनगर के हाई सिक्योरिटी इलाके गुपकार स्थित सरकारी बंगले ‘फेयर व्यू’ में रह रहीं हैं। इस बंगले को खाली करने के नोटिस को लेकर महबूबा ने कहा कि उन्हें इसकी पहले से ही उम्मीद थी।

जम्मू कश्मीर प्रशासन द्वारा सरकारी बंगला खाली करने के नोटिस को लेकर महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि उन्हें कुछ दिन पहले ही फेयर व्यू को खाली करने का नोटिस मिला है। उन्होंने कहा है, “फेयर व्यू से बेदखल करने का नोटिस मुझे कुछ दिन पहले ही दिया गया था। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है मुझे इसकी पहले ही उम्मीद थी। यह स्थान मेरे पिता (मुफ्ती मोहम्मद सईद) को दिसंबर 2005 में तब आवंटित किया गया था जब वह मुख्यमंत्री नहीं थे। इसलिए प्रशासन द्वारा बताया गया आधार सही नहीं है।”

मीडिया द्वारा महबूबा से जब यह पूछा गया कि क्या वह इस नोटिस के खिलाफ अदालत जाएँगी तो उन्होंने कहा “मेरे पास ऐसी जगह नहीं है जहाँ मैं रह सकूँ। इसलिए मुझे निर्णय लेने से पहले अपनी कानूनी टीम से परामर्श करना होगा।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, महबूबा मुफ्ती को दिए गए नोटिस में कहा गया है कि यह सरकारी आवास मुख्यमंत्री के लिए है और अब वह मुख्यमंत्री नहीं हैं। इसलिए उन्हें यह बंगला छोड़ना होगा।

बता दें, जम्मू कश्मीर प्रशासन ने महबूबा मुफ्ती को यह नोटिस जम्मू और कश्मीर सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1988, संशोधित अधिनियम, 2016 के अंतर्गत भेजा है। इस नोटिस में उन्हें कहा गया है कि अगर आपको सुरक्षा या किसी अन्य कारण से कोई अन्य वैकल्पिक आवासीय सुविधा की आवश्यकता है तो सरकार आपके आग्रह पर उसकी भी व्यवस्था करेगी।

उल्लेखनीय है, जम्मू कश्मीर विधानमंडल सदस्य पेंशन अधिनियम, 1984 के अनुसार जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवासीय सुविधा के साथ-साथ उसकी देखभाल और साज-सज्जा के लिए 35 हजार रूपये, टेलीफोन खर्च के लिए अधिकतम 48 हजार रूपये और बिजली शुल्क के लिए 1500 रुपए मासिक के अलावा वाहन, पेट्रोल और सहायक की सुविधा दी जाती थी। हालाँकि, 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम लागू होने के बाद से पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधा दिलाने वाला उक्त अधिनियम समाप्त हो गया है।

इससे पहले, पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, गुलाम नबी आजाद और उमर अब्दुल्ला को भी सरकारी बंगले छोड़ने पड़े थे। लेकिन, महबूबा मुफ़्ती ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सरकारी आवास नहीं छोड़ा था।

6 साल की उम्र में स्वामी विवेकानंद ने नहीं दी थी जमशेदजी टाटा को सलाह: PM मोदी के दावे का जानें पूरा सच, Video दिखाकर झूठ फैलाया गया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का एक शॉर्ट वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand) और टाटा संस के स्थापक जमशेद जी टाटा (Jamshed Ji Tata) के बीच के संवाद का जिक्र किया है।

प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा इस वीडियो में बोली गई बातों पर सवाल उठाते हुए उन्हें ट्रोल करने की कोशिश की जा रही है। दरअसल, पीएम मोदी ने इस वीडियो में कहा कि स्वामी विवेकानंद ने जमशेदजी टाटा को उद्योग स्थापित करने की सलाह दी थी।

वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह हैं, “जिसको मालूम होगा कि स्वामी विवेकानंद और जमशेद जी टाटा के बीच जो संवाद हुआ, जो दोनों के बीच पत्र-व्यवहार हुआ, वो किसी ने देखा होगा तो पता चलेगा कि उस समय गुलाम हिंदुस्तान था, तब भी विवेकानंद 30 साल का नौजवान, जमशेदजी टाटा जैसे व्यक्ति से कह रहा ह कि भारत में उद्योग लगाओ ना, मेक इन इंडिया बनाओ ना।”

यह वीडियो कुछ साल पहले का है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण के वर्षगाँठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा था कि स्वामी विवेकानंद ने मेक इन इंडिया की प्रेरणा जमशेदजी टाटा को दी थी।

इस वीडियो के वायरल कर पीएम को ट्रोल करने की कोशिश की जा रही है। आसिफ रहमान नाम के एक व्यक्ति ने ट्वीट में तंज कसते हुए कहा, “स्वामी विवेकानंद ने 6 साल की उम्र में जमशेदजी टाटा से मेक इन इंडिया के लिए अनुरोध किया था। जमशेदजी ने 1869 में कपड़ा उद्योग में कदम रखा था और स्वामी विवेकानंद का जन्म 1863 में हुआ था।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी विवेकानंद और जमशेदजी टाटा के जिस पत्र-व्यवहार का जिक्र कार्यक्रम में संबोधन के दौरान किया था, उसका जिक्र टाटा स्टील ने भी किया है। साल 2018 में टाटा स्टील ने एक ट्वीट कर इस पत्र-व्यवहार के बारे में बताया और उस पत्र की अर्काइव को भी साझा किया।

टाटा स्टील ने अपने ट्वीट में कहा था, “स्वामी विवेकानंद की 155वीं जयंती पर हम उन दिनों में वापस जाते हैं, जब हमारे संस्थापक जमशेदजी टाटा स्वामी जी से मिले थे। वे 1893 में जापान से शिकागो के लिए एक जहाज पर एक साथ यात्रा कर रहे थे। वह पत्र पढ़िए, जो जेएन टाटा ने स्वामीजी को लिखा था।”

दस्तावेजों के अनुसार, साल 1893 में स्वामी विवेकानंद शिकागो के धार्मिक सम्मेलन में शामिल होने पानी के जहाज से जा रहे थे। उसी जहाज में जमशेदजी नसरवानजी टाटा भी सवार थे। इस यात्रा के दौरान दोनों में लंबी बातचीत हुई थी। कहा जाता है कि इस दौरान स्वामी विवेकानंद को जमशेदजी ने बताया था कि वे भारत में स्टील फैक्ट्री स्थापित करना चाहते हैं।

इस स्वामी विवेकानंद ने उन्हें टेक्नोल़ॉजी ट्रांसफर करने का सुझाव दिया था। उनसे कहा था कि अगर ऐसा करेंगे तो भारत किसी पर निर्भर नहीं रहेगा और भारत के युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। तब जमशेद जी ने ब्रिटेन के उद्योगपतियों से बात की, लेकिन वे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए तैयार नहीं हुए। बाद में जमशेद जी अमेरिका गए और वहाँ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का भी समझौता किया।

कहा जाता है कि इस यात्रा में स्वामी विवेकानंद ने जमशेद जी टाटा को वर्तमान झारखंड के लौह खनिज संपदा और संसाधनों की जानकारी दी थी। इसके लिए उन्होंने सिंहभूम में ही फैक्र्ट्री लगाने की भी सलाह दी थी। इसके बाद साल 1907 में सिंहभूम में जमशेदपुर में टाटा स्टील की नींव रखी गई। साल 1898 में जमशेदजी ने स्वामी विवेकानंद को पत्र भी लिखा था, जिसे टाटा स्टील ने अपने ट्वीट के जरिए सार्वजनिक किया है।

दरअसल, जिस कपड़ा उद्योग का जिक्र करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झूठा साबित करने की कोशिश की जा रही है, वह सन 1868 का है। इसी जमशेदजी ने 21000 रुपए से खुद का व्यवसाय शुरू किया और उन्होंने एक दिवालिया तेल कारखाना खरीदा। बाद में इसे एक रुई के कारखाने में तब्दील कर दिया और उसका नाम बदल कर रखा एलेक्जेंडर मिल (Alexender Mill)। साल 1874 में उन्होंने नागपुर में एक रुई का कारखाना लगाया था।

‘देवी-देवताओं की मूर्ति तोड़ते हैं, पूजा नहीं करने देते’ : राजस्थान में बेटे-बहू पर माता-पिता बना रहे धर्मांतरण का दबाव, बात न सुनने पर पीटते हैं; FIR दर्ज

देश में धर्मांतरण के बढ़ते मामलों के बीच राजस्थान के अलवर जिले में माता-पिता पर अपने बेटे-बहू का धर्मांतरण कराने का आरोप लगा है। पीड़ित दंपति सोनू और उनकी पत्नी रजनी ने बुधवार (19 अक्टूबर 2022) को इस मामले में शिकायत दर्ज कराई। इन दोनों ने शिकायत देते हुए पुलिस से कहा है कि सोनू के माता-पिता ने घर में रखी मूर्तियों को तोड़ दिया और हिंदू देवी-देवताओं के पोस्टर्स को फाड़ दिया है। वे लोग, इन पर ईसाई धर्म अपनाने के लिए लगातार दवाब बना रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़ित दंपति ने राजस्थान के अलवर पुलिस स्टेशन में माता-पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। यह भी कहा जा रहा है कि दंपति ने शिकायत दर्ज कराने के लिए बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों से मदद माँगी थी। फिलहाल पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

सोनू ने शिकायत में कहा कि उसके माता-पिता सहित परिवार के कुछ सदस्य ईसाई धर्म अपना चुके हैं और उन्हें भी धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर कर रहे हैं। सोनू ने कहा, “जब हम हिंदू देवताओं की पूजा करते हैं, तो मेरे माता-पिता विरोध करते हैं। जब हम घर में दीया जलाते हैं या प्रार्थना करते समय अगरबत्ती का इस्तेमाल करते हैं तो वे विरोध करते हैं। उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को भी तोड़ दिया है और हमारे देवी-देवताओं के पोस्टर फाड़ दिए हैं। वे हमें परेशान करते हैं, हमें पीटते हैं और ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाते हैं।”

सोनू ने कहा कि वह और उसकी पत्नी हमेशा के लिए हिंदू धर्म का हिस्सा बनकर रहना चाहते हैं और ईसाई धर्म में परिवर्तित होने की उनकी कोई इच्छा नहीं है। उन्होंने कहा है “हमारे परिवार के सदस्य सोचते हैं कि हिंदू रीति-रिवाज और परंपराएँ बेकार हैं और ईसाई धर्म अपनाने से ही वास्तविक खुशी मिलेगी।”

सोनू ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनका परिवार पिछले दो वर्षों से ईसाई धर्म से संबंधित रीति-रिवाजों का पालन कर रहा है। बीते कुछ समय से धर्मांतरण के लिए लगातार परेशान किया जा रहा है। उन्होंने पुलिस से अपनी सुरक्षा की भी माँग की है। पुलिस अधीक्षक ने शिकायत दर्ज कर पीड़ित दंपति को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

दलितों का हो रहा धर्मांतरण, बात न सुनने पर धमकी

इस मामले में, विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष दिलीप मोदी ने कहा है कि राजस्थान के अलवर जिले में दलित समुदाय के कुछ लोगों पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि अलवर शहर में कुछ लोगों पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने प्रयास किया जा रहा है। शहर की हरिजन बस्ती में कुछ लोग हैं जो ईसाई धर्म में लोगों का परिवर्तन करा रहे हैं।

उन्होंने, आरोप लगाया है कि यहाँ धर्म परिवर्तन की एक चेन बनाई गई है। ये लोग कई तरीके के लालच देकर हिंदू देवी देवताओं का अपमान करते हुए ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाते हैं। ईसाई धर्म नहीं अपनाने पर बहिष्कार करने की धमकी देते हैं। यहाँ तक कि मारपीट भी करते हैं।

इस मामले में, पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम का कहना है, “पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि उनके परिवार के सदस्यों द्वारा उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के लिए दबाव डाला जा रहा था। प्रथम दृष्टया में यह मामला पारिवारिक मामला लग रहा है पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। जाँच के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

‘केदारनाथ में रुद्राभ‍िषेक, नंदी का आशीर्वाद, ₹3400 करोड़ की सौगात’ : जानें PM मोदी के उत्तराखंड दौरे में क्या-क्या खास

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) आज उत्‍तराखंड के दौरे पर हैं। इस दौरान सबसे पहले वह केदारनाथ पहुँचे और पूजा-अर्चना की। पीएम मोदी ने यहाँ भगवान शिव का रुद्राभ‍िषेक क‍िया। साथ ही उन्‍होंने भगवान नंदी का आशीर्वाद लिया और मंदिर की परिक्रमा की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी इस दौरान हिमाचल के खास परिधान चोला डोरा में नजर आए। जो वहाँ की महिलाओं द्वारा हाथों से बनाया गया है। यह वस्‍त्र प्रधानमंत्री को भेंट किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने इस दौरान धाम में मौजूद जनता का अभिवादन किया। पीएम ने केदारनाथ रोपवे का शिलान्यास भी किया। पीएम आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि स्थल पर दर्शन किए।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने केदारनाथ निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। 2013 की आपदा के बाद धाम में पुर्ननिर्माण कार्य किया जा रहा है। उन्‍होंने निर्माण कार्य में लगे श्रम‍िकों से संवाद भी क‍िया।

केदारनाथ धाम के बाद पीएम मोदी बद्रीनाथ पहुँचे। यहाँ उन्‍होंने पूजा अर्चना की । इसके बाद कई परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया। उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी भी उनके साथ मौजूद हैं।

प्रधानमंत्री मोदी आज अपने उत्तराखंड दौरे के वक्त चीनी सीमा से सटे भारत के आखिरी गाँव माणा का भी दौरा करने पहुँचे। उन्होंने हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे का शिलान्यास करने के साथ ही माणा गाँव के लिए दो डबल लेन सड़कों की आधारशिला रखी। साथ ही जनता को संबोधित करते हुए कहा,

“आज बाबा केदार और बद्री विशाल जी के दर्शन करके मन प्रसन्न हो गया, जीवन धन्य हो गया। माणा गाँव, भारत के अंतिम गाँव के रूप में जाना जाता है। लेकिन मेरे लिए सीमा पर बसा हर गाँव, देश का पहला गाँव है।”

उल्लेखनीय है की पीएम केदारनाथ, बद्रीनाथ व माणा में 3400 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास कर रहे हैं। इनमें केदारनाथ व हेमकुंड साहिब रोपवे और चीन सीमा से लगे माणा क्षेत्र में दो राजमार्गों से संबंधित योजनाएँ शामिल हैं।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छोटी दिवाली (23 अक्टूबर 2022) के अवसर पर अयोध्या जाएँगे। वे रामलला का दर्शन और उनकी पूजा-अर्चना करेंगे। मंदिर निर्माण के कार्यों की समीक्षा करेंगे। अयोध्या में छोटी दिवाली पर पीएम मोदी का कार्यक्रम शाम 4.55 बजे शुरू होगा और 07.25 बजे खत्म होगा। इस बीच पीएम रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र साइट का दौरा करेंगे। सरयूजी की घाट पर आरती करेंगे। राम की पैड़ी पर पर दीपोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे।

बलिदान पुलिसकर्मियों के परिजनों के ख्याल की बात CM केजरीवाल का राजनीतिक स्टंट: दंगों और कोरोना काल में कई मरे, घरवालों को आज भी है मुआवजे का इतंजार

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) की नेतृत्व वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार (Delhi AAP Government) सिर्फ क्रेडिट लेना जानती है। वादे पूरे करने में शायद उसका कोई विश्वास नहीं है। केजरीवाल सरकार ने एक बार फिर ऐसी ही घोषणा की और उसका क्रेडिट भी लिया, लेकिन अपने पिछले वादे कभी पूरी नहीं कर पाई।

‘पुलिस स्मृति दिवस’ के अवसर पर मुख्यमंत्री केजरीवाल ने शुक्रवार (21 अक्टूबर 2022) को एक न्यूज पोर्टल की दो साल पुरानी खबर की स्क्रीनशॉट को ट्वीट किया। इस खबर में ड्यूटी के दौरान बलिदान हुए 8 पुलिसकर्मियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए मुआवजा राशि जारी करने की घोषणा 17 सितंबर 2019 को सीएम केजरीवाल ने की थी।

उसी खबर की स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए सीएम ने शुक्रवार लिखा, “पुलिस स्मृति दिवस पर मैं उन सभी जाँबाज़ पुलिसकर्मियों को नमन करता हूँ, जिन्होंने पूरी निष्ठा से अपना कर्तव्य निभाते हुए जनता की सेवा में अपने प्राणों का बलिदान दिया। हमारी सरकार ऐसे सभी जाँबाज़ पुलिसकर्मियों के परिजनों का हमेशा ख़्याल रखती है।”

सीएम केजरीवाल ने अपने ट्वीट में दावा किया है कि दिल्ली की AAP सरकार बलिदान हुए पुलिसकर्मियों के परिजनों का हमेशा ख्याल रखती है। हालाँकि, हकीकत कुछ और है। दिल्ली सरकार वाहवाही लूटने के लिए घोषणा तो करती है, लेकिन वो सिर्फ घोषणा ही रह जाती है। घोषणा के बाद केजरीवाल सरकार बलिदान पुलिसकर्मियों की कभी सुध नहीं लेती।

ऐसे कुछ मामलों की याद दिलाते हैं, जिनसे केजरीवाल सरकार की झूठ का पर्दाफाश होता है। दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के दौरान 24 फरवरी 2020 को दंगाइयों की भीड़ ने मौजपुर इलाके में पुलिस की टीम पर हमला कर दिया था। इस हमले में दिल्ली पुलिस के 42 वर्षीय हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल बलिदान हो गए थे। 

उस समय लोगों की सहानुभूति बटोरने के लिए केजरीवाल सरकार ने रतन लाल के परिवार को एक करोड़ रुपए मुआवजा देने के साथ उनकी पत्नी को एक महीने में सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया था, लेकिन वह वादा दिल्ली सरकार आज तक पूरा नहीं कर पाई।

रतन लाल की पत्नी पूनम ने ऑपइंडिया को बताया, “सरकार ने जो वादे किए थे उनमें से कई अब तक पूरे नहीं हुए हैं। दिल्ली सरकार से एक करोड़ रुपए दो हिस्सों में मिले। अन्य कई लोगों ने भी उस समय कई वादे किए थे जो पूरे नहीं हुए। बुराड़ी में इनके (रतन लाल) के नाम से सड़क पर गेट बनवाने को बोला गया था, पर वो भी नहीं हुआ।”

पूनम आगे बताती हैं, “केजरीवाल ने भी शिक्षा के हिसाब से 1 महीने में नौकरी देने को कहा था, पर वो भी नहीं हुआ। ‘शहीद’ का सर्टिफिकेट देने के लिए बोला गया था, लेकिन वो भी अभी तक नहीं मिला है। गैलेंट्री अवार्ड 15 अगस्त को तो दिया गया है, लेकिन उसके फायदे नहीं मिल रहे हैं। उसका अभी तक एप्रूवल नहीं हुआ है। फैमिली जैसे-तैसे चल रही है।”

बलिदान हुए पुलिसकर्मी के परिजनों को मुआवजा और मदद देने में भी केजरीवाल सरकार की राजनीति भी दिखती है। वह वोटबैंक का ख्याल रखते हुए अपने वादे पूरी करती रही है। कोरोना काल में अपनी जान हथेली पर रखकर ड्यूटी करने वाले और फिर संक्रमित होकर बलिदान देने वाले दिल्ली पुलिस के अमित कुमार राणा के परिजनों को फूटी कौड़ी भी नहीं दी गई।

उस दौरान दिल्ली की AAP सरकार ने 1 करोड़ रुपए मुआवजा देने की घोषणा की थी, लेकिन उसे पाने के लिए अमित कुमार की विधवा आज भी दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। उस समय भी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करके अमित राणा की मौत पर दुःख जताया था और परिवार को 1 करोड़ रुपए बतौर मुआवजा देने की घोषणा की थी। 

जब घोषणा के बाद एक साल से अधिक समय गुजर गया और दिल्ली सरकार ने एक रुपए भी नहीं दिए तो दिवंगत अमित राणा की पत्नी पूजा को दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। कोर्ट में दिल्ली सरकार के वकील ने तर्क दिया कि ‘प्रशासनिक कारणों’ की वजह से मुआवजा राशि देने में देर हुई। कोर्ट में दिल्ली सरकार ने कहा कि कई लोगों को मुआवजा देने के लिए सरकार कदम उठा रही है।

अमित राणा की मौत के बाद भी अरविंद केजरीवाल ने कुछ ऐसी ही सहानुभूति व्यक्त की थी। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “अमित जी अपनी जान की परवाह ना करते हुए करोना की इस महामारी के समय हम दिल्ली वालों की सेवा करते रहे। वे खुद करोना से संक्रमित हो गए और हमें छोड़ कर चले गए। उनकी शहादत को मैं सभी दिल्लीवासियो की ओर से नमन करता हूँ। उनके परिवार को 1 करोड़ रुपए की सम्मान राशि दी जाएगी।”

हालाँकि, दिल्ली सरकार ने कोर्ट में एक साल से भी अधिक समय से मुआवजा नहीं देने के पीछे ‘प्रशासनिक कारण’ बता दिया, जबकि GTB अस्पताल में तैनात युवा डॉक्टर अनस मुजाहिद की मौत के मामले में ऐसा कोई कारण नहीं रहा। अनस मुजाहिद की मौत के बाद मुख्यमंत्री केजरीवाल खुद मुस्तफाबाद के भागीरथी विहार स्थित उनके घर गए और अनस के परिजनों को 1 करोड़ रुपए की सहायता राशि का चेक सौंपा।

वहीं, अमित राणा की मौत के बाद दिल्ली सरकार का एक भी अधिकारी उनके घर नहीं पहुँचा, जबकि कोरोना संक्रमण से अपनी जान गँवाने वाले अमित की विधवा पत्नी और उनका मासूम बेटा भी कोरोना से संक्रमित होकर जीवन और मौत की जंग लड़ रहे थे। परिजनों ने तो यहाँ तक आरोप लगाया कि अमित के इलाज के लिए दिल्ली सरकार ने समुचित व्यवस्था नहीं की थी। जाहिर सी बात है कि यहाँ सीएम केजरीवाल ने वोटबैंक की राजनीति को अधिक महत्व दिया।

दिवंगत अमित की पत्नी पूजा का कहना है कि परिवार को हाल ही में सूचित किया गया था कि उनके बेटे की फ़ाइल को दिल्ली सरकार ने अस्वीकार .कर दिया है, क्योंकि यह उनकी आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता है। उन्होंने बताया कि परिवार ने सरकारी विभाग द्वारा कहे गए सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए थे, लेकिन बाद में उन्हें सूचित किया गया कि उनकी फाइल इस आधार पर खारिज कर दी गई है कि अमित कोविड-19 ड्यूटी पर नहीं थे।

उपरोक्त मामले दिल्ली की केजरीवाल सरकार की घोषणाओं की कुछ बानगी हैं। इस तरह के तमाम ऐसी घोषणाएँ हैं, जिसे जनता को दिखाने के लिए केजरीवाल ने कर तो दिया, लेकिन उसे पूरा करने में कई बहाने बनाते रहे। ‘पुलिस स्मृति दिवस’ पर बलिदान हुए पुलिसकर्मियों के परिजनों की चिंता की बात करना केजरीवाल सरकार का सिर्फ राजनीतिक स्टंट है। उन्हें पीड़ित परिजनों के सुख-दुख से कोई खास चिंता नहीं है।

जिस आफताब के लिए दो-दो बार गिराए बच्चे, मुस्लिम बनना भी किया कबूल; उसने ही बेसहारा छोड़ा-दे रहा जान से मारने की धमकी

बिहार के बेगूसराय (Begusarai) से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। हिंदू युवती ने मोहम्मद आफताब आलम नाम के शख्स पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। लड़की ने बताया कि आफताब ने उससे फेसबुक के जरिए दोस्ती की और उसकी जिंदगी तबाह कर दी। उसके मायके वालों ने भी मुँह मोड़ लिया है ​और उसकी मदद करने से इनकार कर दिया है। बेगूसराय के एसपी योगेंद्र कुमार ने महिला थाना अध्यक्ष को इस मामले की जाँच करने का निर्देश दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, युवती समस्तीपुर की रहने वाली है और बेगूसराय में एक कपड़े की दुकान में काम करती है। सहरसा निवासी आफताब से उसकी दोस्ती जनवरी 2020 में फेसबुक के जरिए हुई थी। यह दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। इस बीच आफताब लड़की से मिलने के लिए बेगूसराय पहुँचा और दोनों ने शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद आफताब ने हिंदू लड़की से कई बार संबंध बनाए, जिसमें वह 2 बार गर्भवती भी हुई। आफताब ने उसका जबरन गर्भपात करा दिया। इस दौरान लड़की ने उस पर कई बार शादी के लिए दबाव बनाया, तब जाकर आफताब ने उसके साथ पहले मस्जिद में निकाह पढ़ा और फिर कोर्ट मैरिज की।

इसके बाद दोनों ने जनवरी 2022 में बेगूसराय के काली मंदिर में शादी की और शहर के काली स्थान चौक पर किराए के मकान में शौहर-बीवी की तरह रहने लगे। इस बीच आफताब कभी अपने गाँव में रहता तो कभी यहाँ आकर उसके साथ में रहता। निकाह के बाद से ही आफताब उस पर जबरन धर्मांतरण का दबाव बनाने लगा। लड़की काफी दबाव बनाने के बाद इस्लाम मजहब कबूल कर मुस्लिम बन गई। लेकिन जब वह तीसरी बार गर्भवती हुई तब आफताब उस पर फिर से गर्भपात कराने का दबाव बनाने लगा। इस बार युवती के गर्भपात कराने से इनकार करने पर आफताब आगबबूला हो गया और उससे अपना पीछा छुड़ाने के लिए अपना मोबाइल भी बंद कर लिया। यही नहीं उसने युवती को जान से मारने की धमकी भी दी।

बताया जा रहा है कि जब युवती ने अपने मायके वालों से मदद की गुहार लगाई तो उन्होंने उसे किसी भी तरह की मदद देने से मना कर दिया, क्योंकि उसने परिवारवालों के खिलाफ जाकर यह निकाह किया था। युवती ने समस्तीपुर महिला थाने में भी न्याय की गुहार लगाई, लेकिन वहाँ भी उसकी किसी ने मदद नहीं की और बेगूसराय में मामला दर्ज कराने को कहा। इसके बाद उसने बेगूसराय के एसपी से न्याय की गुहार लगाई तब कहीं जाकर उसका मामला महिला थाने में दर्ज हुआ है। एसपी योगेंद्र कुमार ने इस मामले को लेकर कहा, “लड़की ने सोशल मीडिया से दोस्ती करने और फिर शादी करने के बाद छोड़ देने का आरोप लगाया है। मामले की जाँच की जा रही है।”