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इस गाँव में 32 एकड़ जमीन बंदरों के नाम, शादियों में सबसे पहले उन्हें ही मिलता है भोजन: शास्त्रविधि से दिया जाता है सम्मान

वर्तमान समय में जहाँ एक ओर जमीन के एक छोटे हिस्से के लिए भाई-भाई में विरोध की खबरें सामने आती हैं। वहीं, दूसरी ओर महाराष्ट्र के उस्मानाबाद जिले में बंदर बड़े ‘भूमिहार’ हैं। यहाँ, एक, दो नहीं बल्कि पूरे 32 एकड़ जमीन बंदरों के नाम पर है। यहाँ लोग बंदरों को बड़ा सम्मान देते हैं। यहाँ तक कि शादियों में भी पहले बंदरों को खाना खिलाया जाता है फिर अन्य लोग खाते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उस्मानाबाद जिले का उपला गाँव बंदरों को लेकर चर्चा में है। यहाँ, हर कोई बंदरों को सम्मान देता है। यही कारण है कि इस गाँव की 32 एकड़ जमीन बंदरों के नाम पर है। यहाँ के किसी भी घर में जब बंदर जाते हैं तो उन्हें सम्मान पूर्वक खाना दिया जाता है।

उपला गाँव के सरपंच बप्पा पड़वाल का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है कि यहाँ की 32 एकड़ जमीन बंदरों की है। हालाँकि, यह जमीन बंदरों के नाम पर किसने और कब की है इस बारे में कुछ भी पता नहीं है।

सरपंच ने यह भी कहा है कि पहले बंदर गाँव में होने वाले सभी आयोजनों हिस्सा होते थे। हालाँकि, अब धीरे-धीरे यह सब बदल रहा है। इस गाँव में करीब 100 बंदर हैं। पिछले कुछ सालों में बंदरों की संख्या कम हो रही है क्योंकि ये लंबे समय तक एक स्थान पर नहीं रहते। यहाँ की जमीन पर वन विभाग ने वृक्षारोपण भी किया है। पहले यहाँ एक पुराना मकान भी था, लेकिन वह अब ढह चुका है।

उन्होंने यह भी कहा है पहले के समय में गाँव में जब शादियाँ होतीं थीं तो बंदरों को पहले भेंट दी जाती थी, खाना खिलाया जाता था उसके बाद ही समारोह शुरू होता था और फिर अन्य लोग खाना खाते थे। लेकिन, अब बहुत कम लोग इस प्रथा का पालन कर रहे हैं। ये एक तरह से शास्त्रविधि ही है, जिसका स्थानीय स्तर पर पालन होता आ रहा है।

‘मुल्लों को भागना ही पड़ेगा’: ईरान हिजाब विरोधी प्रदर्शन में महिलाओं का नारा, समर्थन करने वाली फिल्मी हस्तियों को भी गिरफ्तार कर रहा इस्लामी मुल्क

ईरान में जैसे-जैसे इस्लामी का दमन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे वहाँ की महिलाओं एवं लोगों का हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन (Iran Anti-Hijab Protest) तेज होता जा रहा है। हिजाब जलाते-जलाते ईरान के लोग सर्वोच्च नेता और धार्मिक गुरु अयातुल्लाह अली खुमेनाई (Ayatollah Ali Khomeini) की तस्वीर जलाने लगे। उनका नारा ‘महिलाओं के अधिकार’ से आगे बढ़कर ‘मुल्ला भाग जाओ’।

देश भर में इंटरनेट सेवा बंद करने के बावजूद महिलाएँ बिना हिजाब के शनिवार (15 अक्टूबर 2022) को राजधानी तेहरान की सड़कों पर उमड़ पड़ीं। इस दौरान उन्होंने नारे लगाए, “Guns, tanks, fireworks; the mullahs must get lost” यानी बंदूक, टैंक या बम इस्तेमाल करो, लेकिन मुल्ला (खुमेनाई का इस्लामी शासन) को भागना पड़ेगा।

महिलाओं के तेहरान मार्च मार्च का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वहीं, तेहरान के पश्चिम में हमदान शहर में एक ऐतिहासिक गोल चक्कर के पास हजारों लोग इकट्ठा होकर नारे लगाए और सुरक्षा बलों को देख सीटियाँ बजाई एवं उन पर प्रोजेक्टाइल फेंके।

वहीं, कुर्दिस्तान प्रांत में महसा अमिनी के गृह नगर साकेज और पश्चिम अजरबैजान के महाबाद में दुकानदारों ने हड़ताल की। उधर खुमेनाई और उनकी सरकार ने ईरान में विरोध प्रदर्शन को भड़काने के लिए अमेरिका और इज़राइल सहित देश के दुश्मनों पर लगाया है।

उधर पुरस्कार विजेता ईरानी फिल्म निर्माता मनी हघीघी (Mani Haghighi) पर ईरान की सरकार ने प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने के कारण प्रतिबंधित कर दिया है। हघीघी की फिल्म ‘नॉयर थ्रिलर सब्सट्रैक्शन’ प्रतिष्ठित लंदन फिल्म समारोह में शनिवार (15 अक्टूबर 2022) को प्रदर्शित हुई।

प्रसिद्ध फिल्म निर्माता हघीघी शुक्रवार (14 अक्टूबर 2022) से कलाकारों एवं एथलीटों वाली ईरानी हस्तियों की उस सूची में शामिल हो गए, जिन्हें प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए गिरफ्तार किया गया है या उनकी ईरान में यात्रा पर प्रतिबंध लगाया गया है।

उन्होंने कहा, “शायद अधिकारियों ने सोचा था कि मुझे यहाँ रखकर वे मुझ पर कड़ी नज़र रख सकते हैं या फिर शायद मुझे धमकाने और मुझे चुप कराने के लिए ऐसा किया गया हो” उन्होंने कहा कि हिजाब विरोधी युवाओं का यह प्रदर्शन आने वाले दिनों में ईरान की ‘मुल्ला सरकार’ के लिए मुसीबतें बनने वाला है।

बता दें कि ईरान की पुलिस प्रदर्शनकारी महिलाओं को पकड़ कर उन्हें मानसिक अस्पतालों में भेज रही है। इसके साथ ही सरकार का दमन भी लगातार जारी है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपने हालिया रिपोर्ट में कहा है कि सितंबर मध्य से शुरू हुए इस आंदोलन में 3 अक्टूबर तक 144 लोग मारे गए हैं, जिनमें 23 बच्चे भी शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षाबल जानबूझकर बच्चों एवं किशोरों का निशाना बना रहे हैं।

गौरतलब है कि महसा अमीनी की हत्या के बाद से महिलाएँ सड़कों पर उतर कर विरोध कर रही हैं। वे हिजाब फेंककर, जलाकर और अपने बालों को काटकर हिजाब के लिए इस्लामी सरकार का विरोध कर रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खुमेनाई की तस्वीरें भी जलाईं। इन प्रदर्शनकारी महिलाओं को देश-दुनिया से भर से भारी समर्थन मिल रहा है।

भारत से भी ईरानी की महिलाओं को लगातार समर्थन मिल रहा है। बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा और मंदाना करीमी ने हिजाब (Hijab) का विरोध किया है। वहीं, बॉलीवुड में काम करने वाली ईरानी अभिनेत्री एलनाज नोरौजी (Elnaaz Norouzi) ने हिजाब का विरोध करते हुए अपने कपड़े उतार दिए। इसका एक वीडियो उन्होंने इंस्टाग्राम पर भी शेयर किया।

बता दें कि गत 13 सितंबर को हिजाब न पहनने की वजह से महसा अमीनी को मोरल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हिरासत में उसे इतना मारा गया कि वह कोमा में चली गई। तीन दिन बाद यानी 16 सितंबर को उसकी मौत हो गई। इसके बाद से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए, जो कि सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण हिंसक होते चले गए।

‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के नारे के साथ कश्मीरी हिन्दू का अंतिम संस्कार, बहन ने कहा – घाटी छोड़ दें हिन्दू, आतंकी कर रहे हैं तलाश

जम्मू कश्मीर के शोपियाँ में शनिवार (15 अक्टूबर, 2022) को एक कश्मीरी हिन्दू पूरन कृष्ण भट की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पूरन का अंतिम संस्कार रविवार (16 अक्टूबर, 2022) को किया गया। इस दौरान, पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए गए हैं। वहीं, मृतक पूरन कृष्ण भट की बहन ने कई खुलासे किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कश्मीरी हिन्दू पूरन कृष्ण भट का अंतिम संस्कार जम्मू के मुट्ठी स्थित बान तालाब श्मशान घाट में किया गया है। अंतिम संस्कार में करीब एक हजार लोग शामिल हुए। इस दौरान, शोक में डूबे हुए लोगों ने पूरन को पाकिस्तान मुर्दाबाद, हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारों के साथ अंतिम विदाई दी है। साथ ही, लोगों ने ‘जिस कश्मीर को खून से सींचा, वो कश्मीर हमारा है’ के नारे भी लगाए हैं।

आतंकवादियों द्वारा पूरन कृष्ण भट की हत्या के बाद उनकी बहन नीलम भट ने कई खुलासे किए हैं। नीलम ने कहा है कि आतंकी कश्मीरी हिंदुओं को मारने के लिए तलाश रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि पूरन को अपने ऊपर आने वाले खतरे का पहले ही अंदेशा था।

नीलम भट ने कहा है कि शुक्रवार शाम को फोन पर उनकी बात पूरन से हुई थी। बातचीत में पूरन ने कहा था असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पूरन की इस बात को सुनकर उनका परिवार डर गया था और उन्हें कश्मीर छोड़कर जम्मू आने के लिए कहा था। लेकिन, पूरन ने कहा था कि वह सेब बेच कर बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे इकट्ठा कर रहे हैं।

मृतक पूरन की बहन नीलम ने यह भी कहा है कि कश्मीरी घाटी में हिंदू सुरक्षित नहीं है। वहाँ पड़ोसी भी कहते थे कि वे उनको बचा नहीं पाएँगे। उन्होंने कहा, “सभी कश्मीरी हिंदुओं को यह कहना चाहती हूँ कि घाटी छोड़ दें आतंकी हिंदुओं की तलाश कर रहे हैं।”

उन्होंने यह भी कहा है कि कुछ हफ्ते पहले दहशतगर्दों ने एक स्कूल में आतंक मचाया था। आतंकी वहाँ 3 हिंदू शिक्षकों को ढूँढ रहे थे। लेकिन शिक्षकों की किस्मत अच्छी थी और वह स्कूल में नहीं थे।

बता दें, कश्मीरी हिंदू पूरन कृष्ण को तब गोली मार दी गई, जब वे चौधरी गुंड स्थित अपने घर के लॉन में बैठे हुए थे। घायल अवस्था में उन्हें नजदीकी अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी हत्या की जिम्मेदारी आतंकी संगठन कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स (KFF) ने ली है। मध्य कश्मीर के पुलिस उपमहानिरीक्षक (IGP) सुजीत कुमार ने कहा कि प्रारंभिक जाँच से पता चलता है कि हत्या में केवल एक आतंकवादी शामिल था। उन्होंने कहा, “एक बार जब चीजें स्पष्ट हो जाएँगी तो पूरी जानकारी दी जाएगी।”

सुजीत कुमार ने कहा कि अगर सुरक्षा गार्डों या क्षेत्र के प्रभारी अधिकारी की ओर से सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक पाई जाती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि एक आतंकवादी संगठन ने छद्म नाम ‘कश्मीर फ्रीडम फाइटर (KFF)’ से हमले की जिम्मेदारी ली है।

घटना के बाद कश्मीर के बडगाम सहित कई इलाकों के हिंदू सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। इस घटना से पीएम पैकेज के तहत कश्मीर में काम करने वाले हिंदुओं में खासा रोष है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और हिंदुओं को सुरक्षित जगह शिफ्ट करने की माँग की है।

इससे पहले मई 2022 में बडगाम के चदूरा स्थित तहसील कार्यालय में राहुल भट की टारेगट किलिंग के बाद कर्मचारियों ने कश्मीर छोड़ने की धमकी दी थी। ये कर्मचारी पीएम पैकेज के तहत काम कर रहे हैं। पीएम पैकेज के कर्मचारी वे कश्मीरी हिंदू हैं, जो 90 के दशक में घाटी छोड़कर चले गए, लेकिन सरकारी नौकरी मिलने के बाद वापस कश्मीर लौट आए। पैकेज के तहत कश्मीर में कम-से-कम 6000 प्रवासी कश्मीरी पंडित काम कर रहे हैं।

MS धोनी को भी बॉलीवुड पर भरोसा नहीं, साउथ के स्टार्स के साथ बनाएँगे फिल्म: माही ने खोली प्रोडक्शन कंपनी, थलापति विजय और महेश बाबू को लाएँगे एक साथ

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट के अलावा कई क्षेत्रों में हाथ आजमाने के लिए जाने जाते हैं। धोनी अब अपनी नई पारी की शुरुआत साउथ इंडस्‍ट्री के दिग्‍गजों के साथ फिल्‍म बनाकर करने वाले हैं। मजे की बात तो यह है कि बॉलीवुड की डूबती नैया को धोनी का भी सहारा नहीं मिला।

आईपीएल की टीम सीएसके के कप्‍तान (MS Dhoni to Produce film) पर हिंदी में बायोपिक ‘एम एस धोनी- द अनटोल्‍ड स्‍टोरी’ (2016) बन चुकी है, बावजूद इसके धोनी ने अपने फिल्‍मी करियर की शुरुआत साउथ इंडस्‍ट्री से करना उचित समझा। इससे साफ पता चलता है कि भारतीय टीम के पूर्व दिग्‍गज को भी बॉलीवुड इंडस्‍ट्री पर भरोसा नहीं है। एमएस धोनी फिल्‍म में धोनी का किरदार सुशांत सिंह राजपूत ने निभाया था, जिनके कथित आत्महत्या के बाद से ही बॉलीवुड के बूरे दिन शुरू हो गए थे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अपने पहले प्रोजेक्‍ट में धोनी साउथ के सुपरस्‍टार्स थलापति विजय और महेश बाबू को लेने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा मलयालम इंडस्‍ट्री से पृथ्वीराज सुकुमारन और कन्नड़ इंडस्‍ट्री से किच्‍चा सुदीप को भी प्रोजेक्‍ट में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

सीएसके के सूत्रों के अनुसार, धोनी विजय के साथ उनकी ‘थलापति 70’ में नजर आ साथ आ सकते हैं। वैसे धोनी (MS Dhoni to Produce film) का लकी नंबर भी 7 है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 41 वर्षीय क्रिकेटर फिल्म में एक कैमियो करते दिखेंगे। यह धोनी के फैंस के लिए किसी तोहफे से कम नहीं होगा। इस संबंध में जल्द ही एक आधिकारिक घोषणा की उम्मीद है।

कुछ दिन पहले यह भी खबर आई थी कि साउथ की अभिनेत्री नयनतारा भी कैप्‍टन कूल की पहली फिल्‍म का हिस्‍सा होंगी, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई पक्‍की जानकारी सामने नहीं आई है।

धोनी का खुद का प्रोडक्‍शन हाउस (एम एस धोनी एंटरटेनमेंट) है और बताया जा रहा है कि इसका नया ऑफिस चेन्‍नई में निर्माणाधीन है। धोनी की पत्‍नी साक्षी भी उनके साथ इस कंपनी को मैनेज करती हैं। धोनी अब तक कृषि, मुर्गीपालन, ब्रेवरीज, कपड़े और जिम जैसे क्षेत्रों में अपना हाथ आजमा चुके हैं।

‘द गार्जियन’ ने ऑपइंडिया पर लगाया अपने पत्रकार पर ‘हमले’ का आरोप, लेस्टर हिंसा पर की थी हिन्दू विरोधी कवरेज: सच जानने के लिए पढ़ें हमारा जवाब

शुक्रवार (14 अक्टूबर, 2022) की रात मुझे एक ईमेल मिला था। इसका विषय ‘गार्जियन रिपोर्टर आइना जे खान’ था। इस ईमेल में ऑपइंडिया अंग्रेजी की संपादक, निरवा मेहता और मुझे (ऑपइंडिया की प्रधान संपादक नूपुर जे शर्मा) को टैग किया गया था।

इस ईमेल में हमें ‘वेबसाइट, व्यक्तिगत और ऑफिशियल हैंडल द्वारा आइना जे खान के खिलाफ ऑनलाइन हमलों को रोकने’ के लिए कहा गया था। इस ईमेल का सीधा अर्थ यह था कि हमारे पास आइना को इस्लामवादी कहने का कोई आधार नहीं था और हमारे ऐसा करने से उसे किसी तरह का नुकसान हुआ था। इस लेख में, गार्जियन द्वारा भेजे गए मेल को लेकर हमारी प्रतिक्रिया क्या है इस बारे में बताया गया है।

मैं और मेरी टीम और पूरी तरह से खुश थे। हमने इस मेल का जवाब बेहद विनम्रता से यह पूछते हुए दिया कि ऑपइंडिया के किस लेख में आइना जे खान पर ‘हमला’ किया गया है। हमने यह भी सोचा कि शीला पुलहम द्वारा भेजे गए इस ईमेल में आइना को क्यों टैग नहीं किया गया। वास्तव में, हम यह भी सोच रहे थे कि हो सकता है कि यह ईमेल किसी हैकर द्वारा किया गया होगा, जिसने डोमेन के साथ छेड़छाड़ करते हुए ईमेल भेजा हो। इसके बाद जब हमने ट्वीट किया कि इस ईमेल का जवाब बाद में देंगे।

तब, गार्जियन कम्युनिकेशन हैंडल ने ईमेल के स्क्रीनशॉट के साथ नीरवा मेहता को जवाब दिया। इस ट्वीट में गार्जियन ने लिखा कि वह केवल ‘अनुरोध कर रहे थे कि हम उनके पत्रकार पर हमला न करें’।

यहाँ यह बताना जरूरी है कि इस लेख को लिखते समय तक हमें, शीला पुलहम से हमारे द्वारा पूछे गए प्रश्न पर कोई सटीक जवाब नहीं मिला है। हम यह जानना चाहते थे कि ऑपइंडिया के किस लेख ने आइना जे खान पर ‘हमला’ किया और हमें भेजे गए मेल में आइना को टैग क्यों नहीं किया गया। दरअसल, अब यह जरूरी हो गया है कि हम इस मेल का खुले तौर पर जवाब दें, क्योंकि ईमेल का स्क्रीनशॉट ‘द गार्जियन’ द्वारा शेयर करके ही इस पूरी बात को सामने लाया गया है।

हमें जो ईमेल भेजा गया था, उसका टेक्स्ट नीचे बोल्ड में है और उसके बाद, शीला पुलहम के मेल पर हमारा जवाब…

प्रिय नूपुर जे शर्मा

शुरुआत में मुझे काफी सुखद आश्चर्य हुआ कि आपने मेरा नाम सही तरीके से लिखा और उस पर “जे” जोड़ा। ‘द गार्जियन ‘और आइना खान की पत्रकारिता का समर्थन करने वाले कई व्यक्तियों ने लगातार मेरी मौत के लिए ‘दुआएँ’ की हैं। साथ ही, मुझे नूपुर शर्मा समझकर ‘सिर कलम’ करने की धमकी दी है। आपके द्वारा भेजे गए पूरे ईमेल का जवाब देने से पहले, मैं बिना किसी पूर्वाग्रह के आइना सहित आपकी पूरी संपादकीय टीम को इसके लिए बधाई देना चाहती हूँ। बेशक, जिस तरह से आपने नूपुर शर्मा को कवर किया और उनका सिर कलम करने की धमकियों की खबरों को प्रस्तुत किया है, उसे देखकर मुझे अब ऐसा लगता है कि मेरा भी वही हश्र होने वाला है, क्योंकि अब आपने पूरा ध्यान मुझ पर लगाया हुआ है।

मैं यह अनुरोध कर रही हूँ कि ऑपइंडिया के प्रकाशन और आधिकारिक तथा व्यक्तिगत सोशल मीडिया चैनलों के माध्यम से गार्जियन रिपोर्टर आइना जे खान पर हो रहे ऑन लाइन हमलों को रोक दीजिए।

आपने इस मेल में जिस तरह से ‘अनुरोध’ शब्द का उपयोग किया है, वह सिर्फ यह दिखाने के लिए है कि आप अनुरोध कर रहे हैं और बेहद विनम्र हैं। हालाँकि यह एक तरह से पर्दा है, (हमारा ऐसा कोई इरादा नहीं है। लेकिन ऐसा न हो कि आपकी ‘पत्रकार’ आइना खान “पर्दा” शब्द को उसकी पहचान के खिलाफ एक और “इस्लामोफोबिक हमला करार दें) जिसका उपयोग पूर्वाग्रहों, निराधार आरोपों को छिपाने के लिए किया गया है।

सबसे पहले, मेरी संपादक, निरवा मेहता ने आपके ईमेल का जवाब दिया। आपको हमारे प्रकाशन, और आधिकारिक तथा व्यक्तिगत हैंडल के माध्यम से अपने पत्रकार के खिलाफ इस कथित ‘हमले’ के सबूत प्रस्तुत करने के लिए कहा। हालाँकि, आपने अब तक इसका जवाब देने की कोशिश नहीं कि। 200 साल पुराने मीडिया संगठन के रूप में, मुझे लगता है कि आपको यह पता होगा कि किसी की रिपोर्ट की आलोचना करना किसी भी तरह से रिपोर्टर के खिलाफ ‘हमला’ नहीं माना जा सकता है।

बेहद संवेदनशील मुद्दे की रिपोर्ट करने में साफतौर से पूर्वाग्रह दिखाने वाला एक लेख आपने छापा, जबकि सच्चाई ये थी कि ब्रिटिश हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमला किया गया था। लेकिन, उसे ऐसा दिखाना की ‘हिंदुत्व की भीड़’ ने हमला किया है, या फिर यह कहना कि हमलों के लिए राष्ट्रवादी हिन्दू ही जिम्मेदार है – पूरी तरह से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने जैसा है। अब, यदि ऑपइंडिया ने इसकी आलोचना की है तो क्या इसे ‘द गार्जियन’ द्वारा हमला माना जाएगा?

मुझे लगता है कि लीसेस्टर हिंसा के मुद्दे पर ‘द गार्जियन’ की रिपोर्टर ने गलत तरीके से पूरी घटना को प्रस्तुत करने की कोशिश की है। लीसेस्टर में तनाव की शुरुआत से 28 अगस्त को भारत-पाकिस्तान मैच के बाद हुई एक झड़प से हुई थी। इस झड़प की शुरुआत तब हुई जब एक सिख ने भारतीय ध्वज (तिरंगे) का अपमान किया था, जिसके बाद हिंदुओं की उससे झड़प हुई थी।

इस घटना के बाद, 4 सितंबर को इस्लामवादियों की भीड़ ने हिंदुओं, उनके घरों और उनके प्रतिष्ठानों पर हमला किया था। इस हमले के बाद, अल्पसंख्यक ब्रिटिश हिंदू समुदाय ने उनके खिलाफ हुई हिंसा को लेकर विरोध मार्च निकालने का फैसला किया था। इसके बाद, 17 सितंबर को, इस्लामवादियों द्वारा लगातार फेक खबरों और दुष्प्रचार के कारण, हिंदुओं पर फिर से हमला किया गया। इस हमले के लिए हिंदुओं के घरों में लगे धार्मिक प्रतीक चिन्हों से पहचान कर हमले की योजना बनाई गई थी।

गौरतलब है कि फेक खबरों के सामने आने की घटनाएँ अगस्त में तब शुरू हो गई थीं जब लीसेस्टर में मुस्लिम संगठनों ने पुलिस से शिकायत करते हुए दावा किया था कि हिंदुओं ने ‘मुस्लिम मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए थे। इसे मुद्दे को पहले तो लीसेस्टर पुलिस ने गलत तरीके से आगे बढ़ाया और फिर 1 सितंबर को खारिज कर दिया। जहाँ तक ​​ऑपइंडिया का संबंध है, हमारा परिचय आइना खान से तब हुआ जब हम लीसेस्टर हिंसा की विस्तृत कवरेज शुरू ही करने वाले थे। 19 सितंबर को, जब हिन्दुओं पर लगातार हमले हो रहे थे और अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय खतरे में था तब आइना खान लीसेस्टर से रिपोर्ट कर रहीं थीं। 

इस रिपोर्ट के दौरान, आइना खान ने दावा किया कि उसने एक ‘हिंदू राष्ट्रवादी’ का इंटरव्यू लिया है, उस व्यक्ति ने हेलमेट पहना हुआ था और उसके पास भारतीय ध्वज (तिरंगा) था। आईना खान ने दावा किया था कि उस व्यक्ति ने खुद को आरएसएस समर्थक बताया था और कहा कि आरएसएस तानाशाह मुसोलिनी से प्रेरित था। हालाँकि, इस दावे का समर्थन करने के लिए उसके पास कोई सबूत नहीं है। वास्तव में, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के पिता, स्टेफानो माइनो मुसोलिनी की सेना में एक पैदल सैनिक के रूप में कार्य करते थे।

आइना खान के बारे में हमारी पहली रिपोर्ट का एक अंश यहाँ दिया गया है:

आइना खान ने दावा किया था कि हेलमेट पहनने वाले व्यक्ति ने कहा कि ब्रिटेन में मुस्लिम एक समस्या हैं और उसने रॉदरहैम ग्रूमिंग गैंग के बारे में बात की। उस व्यक्ति द्वारा ‘मुस्लिमों’ को एक समस्या कहने का कोई वीडियो क्लिप या सबूत नहीं है। हालाँकि, सच्चाई यह है कि रॉदरहैम ग्रूमिंग गैंग मामले में कई मुस्लिम मुख्य आरोपित हैं, कोई नहीं देखता कि इसमें गलत क्या है।

आइना को ऑपइंडिया द्वारा अब तक इस्लामवादी के रूप में संबोधित नहीं किया गया है। हमने केवल यह बताया है कि उसकी रिपोर्ट एकतरफा और बिना सबूत के है। आइना खान द्वारा कई अन्य झूठे प्रचार भी किए गए हैं। इनमें आरएसएस और हिंदुओं के खिलाफ एक अजीबोगरीब हमला भी शामिल था। चूँकि, आइना सभी आलोचनाओं को इस्लामोफोबिया के रूप में दिखाने की कोशिश करती हैं, ऐसे में उनका हिंदूफोबिया तब सामने आया जब उन्होंने कहा कि ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने से उनके द्वारा की जा रही बातचीत ‘बहस’ में बदल गई। वह ‘जय श्री राम’ के नारे को ‘भारत में चरमपंथियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले हिंदू मंत्र’ के रूप में दिखाती हैं। यही नहीं, आइना यह भी आरोप लगाती है कि जय श्री राम अब मुस्लिम विरोधी घृणा का पर्याय बन गया है।

एक संगठन को फासीवादी के रूप में, हिंदुओं को चरमपंथी और हिंदू धार्मिक मंत्रों को युद्ध के रूप में प्रदर्शित करते हुए, आइना हमेशा की तरह इस्लामोफोबिया का रोना रोती है। वह यह बताती है कि लीसेस्टर हिंसा की सच्चाई सामने लाने की कोशिश के दौरान उसके साथ एक ‘स्थानीय मुस्लिम कार्यकर्ता’ माजिद फ्रीमैन भी था। लीसेस्टर के बारे में आइना ने किस तरह से झूठ बोला है वह आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

यही वह समय था जब ऑपइंडिया ने माजिद फ्रीमैन की तलाश शुरू की। इस तलाश में हमने पाया कि माजिद ने हिंदुओं के खिलाफ हिंसा फैलाने के लिए फेक खबरों का उपयोग किया था। यह हमारे लिए बेहद निराशा की बात है कि जिस व्यक्ति को आईएसआईएस/अल कायदा के प्रति सहानुभूति थी, वही लीसेस्टर के गार्जियन के कवरेज का मार्गदर्शन कर रहा था। आतंकी संगठनों के साथ सीरिया की यात्रा करने वाले आतंकी हमदर्द माजिद फ्रीमैन ने एक मस्जिद पर हिंदुओं द्वारा हमला किए जाने के बारे में, एक हिंदू व्यक्ति द्वारा एक मुस्लिम लड़की के अपहरण के प्रयास के बारे में तथा कुरान के पन्नों को फाड़ने के बारे में झूठी खबरें फैलाने के अलावा ऐसी ही अनेकों फेक न्यूज फैलाई थीं। माजिद ने मुस्लिमों को हिंदुओं पर हमला करने के लिए इकट्ठा होने का आह्वान किया था।

एक आतंकवादी जो आतंकी संगठनों से जुड़ा हुआ है, जिसने हिंदुओं के खिलाफ हमलों को उकसाया, वह ‘कार्यकर्ता’ था। यही ‘कार्यकर्ता’ गार्जियन की ‘पत्रकार’ आइना खान का मार्गदर्शक था। जब पीड़ितों को अपराधियों के रूप में दिखाया जाता है तो यह स्पष्ट हो जाता है कि वास्तव में पत्रकारिता नहीं बल्कि ‘एजेंडेबाजी’ हो रही है। यही नहीं, एक मंदिर में हुए हमले के बाद उसने एक इमाम की तारीफ भी की थी, जहाँ हिंदू मंदिर के बाहर इस्लामी भीड़ ने झंडा तोड़ कर फेंक दिया था और एक झंडे को जला दिया गया था। हालाँकि, आइना ने हिंदू मंदिरों पर हमला करने वालों का जिक्र नहीं किया था। लेकिन, यह हर कोई जानता है कि इस्लाम में मूर्ति पूजा हराम है।

अब, ‘द गार्जियन’ की शीला पुलहम के ईमेल के अनुसार, व्यक्तिगत और आधिकारिक हैंडल से कथित ‘हमलों’ पर आते हैं…

प्रिय पुलहम, मैं इस बात से अनजान हूँ कि आइना खान ने आपको किस हद तक जानकारी दी है। हालाँकि, आपको पता होना चाहिए कि आपकी ‘पत्रकार’ ने हिंदुओं को लेकर दोहरी मानसिकता और झूठ फैलाने के 20 दिन बाद आपको इस बारे में बताया है। पब्लिश किए गए लेख में, हमने यह बताया था कि कैसे आइना खान हिंदुओं के खिलाफ कुछ भी मनगढ़ंत लिख रही हैं। क्योंकि, वह जानती हैं कि ऐसा करने के बाद भी वह सुरक्षित रहेंगीं। वहीं, यदि वह ठीक ऐसा ही अपने धर्म के लोगों के खिलाफ कुछ भी लिखें तो क्या वह सुरक्षित रह पाएँगीं? ईरान में जो कुछ हो रहा है, उसे देखते हुए, मुझे यकीन है कि आप यह देख रही होंगी कि आइना खान हिंदुओं के खिलाफ खुलकर लिख रही है लेकिन क्या वह ईरान में हो रहे अत्याचार के खिलाफ कुछ भी लिखकर सुरक्षित रह सकती है।

इसके अलावा, मुझे आश्चर्य है कि क्या आपने (पुलहम ने) अपनी ‘पत्रकार’ से यह पूछा कि उन्होंने किस आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है कि वे छात्राएँ जो स्कूलों में हिजाब लगाने का विरोध करते हुए और यूनिफॉर्म नियमों का उल्लंघन कर रहीं थीं उन्हें मजहबी क्यों कहा जा रहा है। वहीं, हिन्दू सिर्फ भीड़ हो जाते हैं। क्या यह गार्जियन की संपादकीय नीति है?

यही नहीं, क्या आपने आइना खान से यह भी पूछा है कि हिजाब न पहनना नग्नता कैसे है? और अगर यह वास्तव में उनके विचार हैं तो उन्हें उनके ऐसे विचारों के लिए इस्लामवादी कहा जाता है, तो यह ‘ऑनलाइन हमला”‘ कैसे होता है? दरअसल, आइना खान ने एक रिपोर्ट में हिजाब न पहनने वालों को ‘नग्न’ कहा था।

क्या यह गार्जियन की संपादकीय स्थिति है कि उनके पत्रकार अपनी पत्रकारिता के दौरान किसी को कुछ भी कह सकते हैं। लेकिन, जब उनकी कथित पत्रकारिता की आलोचना हो तो वह इसे ‘हमला’ करार देते हुए ‘इस्लामोफोबिया’ का रोना शुरू कर दें। स्पष्ट रूप से, एक संपादक के रूप में, क्या आपको नहीं लगता है कि हिंदुओं को सभी प्रकार के लेबलों के साथ ब्रांडेड किया जा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब गार्जियन ऐसा कुछ कर रहा हो। लेकिन, यदि कोई आपकी कथित पत्रकारिता के घटिया स्तर की आलोचना कर दे तो आप उसे हमला करार देंगीं।

आपको लगता है कि आइना खान पर ‘इस्लामवादी’ होने या फिर पक्षपात पूर्ण पत्रकारिता करने का आरोप नहीं लगाना चाहिए?

आइना खान पर उसकी रिपोर्टिंग में पक्षपाती होने का आरोप लगाने का आधार अंग्रेजों की सत्ता के समय उनके साम्राज्य के आकार से बड़ा आधार है। हालाँकि, बहुत कुछ पहले ही समझाया जा चुका है। लेकिन, फिर भी सरल शब्दों में समझना है तो…

1.) यदि इस्लामवादियों ने अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हमला किया है, तो एक पत्रकार को अपनी रिपोर्ट को आईएसआईएस/अल कायदा समर्थक के कहने पर तैयार नहीं करनी चाहिए। ऐसा व्यक्ति जो फर्जी खबरें फैलाता है और हिंदुओं के खिलाफ जानलेवा हमलों के लिए मुस्लिमों को उकसाता है उसके साथ रहकर रिपोर्टिंग करना पत्रकारिता नहीं है।

2.) आइना खान के पास हर हिंदू को आरएसएस समर्थक (हालाँकि, आरएसएस समर्थक होने में कुछ भी गलत नहीं है) और आरएसएस के मुसोलिनी से प्रेरित बताने का कोई तथ्य/सबूत नहीं है। लेकिन, फिर भी वह बता रही है।

3.) सभी हिंदू पीड़ित, ‘भीड़’ कैसे हो सकते हैं। क्या आइना ने स्वीकार किया कि एक हिंदू मंदिर पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था? यदि अगर उसने स्वीकार किया कि मुस्लिम भीड़ ने ही हमला किया था, तो बिना किसी सबूत के एक इमाम की प्रशंसा क्यों की गई?

4.) क्या सुश्री आइना खान ने लीसेस्टर के अपने कवरेज के दौरान अपने मार्गदर्शक माजिद फ्रीमैन द्वारा हिंदुओं के खिलाफ फैलाई जा रही फर्जी खबरों के बारे में विस्तार से लिखा है? क्या उसने आपके पाठकों को आतंकी संगठनों से उसके संबंधों के बारे में सूचित किया है? यदि नहीं, तो क्या यह उसके पूर्वाग्रह की बात नहीं करता है?

5.) आइना खान ने अपनी पत्रकारिता की हमारी आलोचना को किस आधार पर ‘इस्लामोफोबिया’ करार दिया? क्या आपकी ‘पत्रकार’ हर चीज को उसके धार्मिक विश्वास के चश्मे से देख रही है, क्या ये भी उसके पूर्वाग्रह की ओर इशारा नहीं कर रहा है?

अब, आइए उसके ‘इस्लामवादी’ कहे जाने के बारे में बात करते हैं।

आइना खान को एक इस्लामवादी के रूप में ब्रांडेड किया जा रहा है, वह भी तब, जब 20 दिन पहले प्रकाशित हुए एक लेख को लेकर आपकी पत्रकार के अचानक से नाराज होने के बाद मैंने उसे जवाब दिया। यदि पुलहम आप चाहती हैं कि लोग यह विश्वास करें कि आपके आक्रोश का आधार केवल आपके पत्रकार को इस्लामवादी कहा जाना है, तो आपका तर्क उतना ही विश्वसनीय है जितना कि आपका देश दावा कर रहा है कि वे ब्रिटिश संग्रहालय को सुशोभित करने वाली चोरी की कलाकृतियों के असली मालिक हैं। जब आपकी पत्रकार हिंदुओं को ‘फासीवादी’ कहती तो मुझे उसी तरह से जवाब देने का अधिकार है।

जब कोई माजिद फ्रीमैन जैसे तत्वों के साथ तालमेल बिठाता है, तो गार्जियन को अपने पत्रकार के नाम से क्या उम्मीद थी? वास्तव में, गार्जियन ने खुद 9/11 के हमले को ‘इस्लामी कट्टरपंथी’ करार दिया था – अब, यदि आपकी पत्रकार किसी ऐसे व्यक्ति को मार्गदर्शक मानती है जो आतंकवादी हो या उनसे संबंध रखता हो तो क्या उसे इस्लामवादी नहीं कहा जाना चाहिए?

ऐसे समय में जब दुनिया भर में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ रहा है, एक युवा महिला रिपोर्टर के खिलाफ नफरत को प्रोत्साहित करना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है, चाहे वह ऑनलाइन हो या व्यक्तिगत रूप से। इसके अलावा, ऐसा करने से एक मीडिया संगठन के रूप में आपकी विश्वसनीयता को कम करने का जोखिम है।

आपने एक बार फिर से आपने ‘पर्दे’ का बेहतरीन उपयोग किया है आपने पत्रकारों की सुरक्षा का एक असंबंधित मुद्दा उठाया है। हाँ, पत्रकार निश्चित रूप से खतरे में हैं – वास्तव में, एक पत्रकार को कल ही भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल में हिंदुओं के खिलाफ हमले की रिपोर्ट करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। यह स्टोरी द गार्जियन पर कभी भी प्रकाशित नहीं होगी। “नफरत” के आरोप को आगे बढ़ाते हुए बिना किसी आधार के। शारीरिक हमले के वास्तविक खतरे के साथ आपने “ऑनलाइन हमलों” से “नफरत” में कितनी सहजता से बदल दिया है। क्या आप जानतीं हैं कि वास्तव में कौन नफरत को बढ़ावा दे रहा है और सुरक्षा को खतरे में कौन डाल रहा है? माजिद फ्रीमैन जैसे तत्व जो आपके पत्रकार के साथ थे।

और हाँ, हमारे संगठन की विश्वसनीयता के बारे में चिंता करने के लिए धन्यवाद। उस पर हमला करने के लिए एक पूरा कबीला मौजूद है। जैसे कि विकिपीडिया पर हम जो कचरा देखते हैं, और अब तक हम उससे बचाव करने के तरीके ढूंढ चुके हैं। ऐसे परिदृश्य में, यह कथित चिंता एक खतरे की तरह लगती है “हम आपकी विश्वसनीयता को नष्ट कर देंगे”। क्या यह हमारे खिलाफ तैयार किए जा रहे हिटजॉब है? मुझे उम्मीद है कि कम से कम यह द गार्जियन में प्रकाशित हुआ है। बता दूँ, ऑपइंडिया भारत में ब्राउन कूलियों द्वारा चलाई जाने वाली वेबसाइ में से नहीं हैं। आप यह जान लें, हम सभी चीजों के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

मैं देख सकती हूँ कि ऑपइंडिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जा रहे कार्यों की हमारी द्वारा कवरेज से ऑपइंडिया असहमत है; आप हमारे कवरेज की आलोचना करने के हकदार हैं। हालाँकि आप फिट देखते हैं, लेकिन हमारे पत्रकारों पर व्यक्तिगत हमले करने के लिए नहीं।

ईमानदारी से, मुझे यकीन नहीं है कि इस पर कहाँ से शुरुआत करनी। मैं आपको बताना चाहूँगी कि ईमेल का यह विशिष्ट भाग मेरी टीम के लिए निरंतर मनोरंजन का स्रोत था। प्रधानमंत्री मोदी का लीसेस्टर हिंसा के हमारे कवरेज, माजिद फ्रीमैन या इस तथ्य से कोई लेना-देना नहीं है कि आतंकवादी हमदर्द आपके पत्रकार का प्राथमिक स्रोत था। यदि आप मानती हैं कि हमने लीसेस्टर के बारे में आपके रिपोर्ताज की आलोचना की है सिर्फ इसलिए की है कि हमें आपका पीएम मोदी का कवरेज पसंद नहीं है, तो यह पूरी तरह से आपकी कल्पना है।
 
हमारे लिए, लीसेस्टर हिंदुओं पर इस्लामवादियों द्वारा हमले किए जाने के लिए फोकस में था और आपकी इस्लामवादी पत्रकार ने पीड़ितों को दोषी ठहराया, जबकि एक अन्य इस्लामवादी की तारीफ में कसीदे पढ़ रही थी। आपका इस तरह से तर्क देना बेतुका है और मैं सुरक्षित रूप से यह निष्कर्ष निकाल सकती हूँ कि आप और गार्जियन की संपादकीय टीम भारतीयों की तुलना में भारतीय प्रधान मंत्री के प्रति अधिक जुनूनी प्रतीत होती है। मेरी आपको शुभकामनाएँ।

जहाँ तक ​​मेरे हक का सवाल है, मैं आपको बता सकती हूँ कि दशकों पहले आपके देश ने यह तय करने का अधिकार खो दिया था कि हम क्या पाने के हकदार हैं। यदि आप चाहें तो भारतीयों से मुकाबला करने के लिए मैं आपको कुछ अलग चीजों का सुझाव दे सकती हूँ।

यदि आपको गार्जियन के संपादकीय कवरेज के बारे में कोई चिंता है, तो आप हमारे स्वतंत्र पाठकों के संपादक को [email protected] पर ईमेल कर सकते हैं।

ठीक है, सुश्री पुलहम, आपने अपने कृपालु ईमेल के जवाब के रूप में ईमेल पर हमारे प्रश्न का उत्तर देने से इनकार कर दिया।इसलिए, आपके सुझाव के लिए धन्यवाद जिसे ध्यान में रखते हुए विधिवत खारिज कर दिया गया है। आपने इसे सार्वजनिक करने का फैसला किया है और हम इसका पालन करेंगे और अपनी प्रतिक्रिया को सार्वजनिक रूप से भी प्रकाशित करेंगे।हालाँकि, मैं अपने पाठकों को आपके स्वतंत्र पाठकों के संपादक को लिखने और गार्जियन के संपादकीय स्तर और आपके पत्रकारों के आचरण के साथ उनकी शिकायतों को सामने लाने के लिए प्रोत्साहित करती हूँ।

(नूपुर जे शर्मा द्वारा लिखे गए मूल अंग्रेजी लेख को आप यहाँ क्लिक कर के पढ़ सकते हैं। आकाश शर्मा ‘नयन’ ने इसका हिंदी में अनुवाद किया है।)

अदनान ने साथियों संग मिल नितेश को मार डाला, परिजन बोले- RSS से जुड़ने के कारण बनाया निशाना, मस्जिद से आए थे बदमाश: पुलिस ने नकारा कम्युनल एंगल

देश की राजधानी दिल्ली के बलजीत नगर में उफीजा ने अपने दोस्त अदनान और अब्बास के साथ मिलकर नितेश को सरेआम पीट-पीट कर हत्या कर दी। इसके बाद तीनों आरोपित फरार हो गए हैं। इस घटना के 5-6 बीत जाने के बाद भी पुलिस की निष्क्रियता पर लोगों में उबाल आ गया है। स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए हैं और अपराधियों को फाँसी देने की माँग की है।

पुलिस ने बताया कि घटना दो गुटों के बीच हुई। अब्बास, उफीजा और अदनान एक तरफ थे तथा दूसरी तरफ आलोक, मोंटी और नितेश थे। मारपीट के दौरान अदनान और उसके दोस्तों में आलोक और नितेश को बुरी तरह घायल कर दिया। इसके बाद दोनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ नितेश की मौत हो गई।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि फरार आरोपितों को जल्दी ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस ने मामले में किसी भी तरह के सांप्रदायिक एंगल होने से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि CCTV के फुटेज देखकर पता चलता है कि झगड़े की शुरुआत नितेश और आलोक ने की थी।

नितेश के परिजन शव को बीच सड़क पर रखकर शासन से इंसाफ की माँग कर रहे हैं। वहीं, लोग भी सड़कों पर उतरकर सड़क को जाम कर दिया है और आरोपितों के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा देने की माँग की है। इलाके के हालात को देखते हुए रैपिड ऐक्शन फोर्स (RAF) को तैनात कर दिया गया है।

नितेश के परिजनों का कहना है कि उनका बेटा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बजरंग दल (Bajarang Dal) से जुड़ा हुआ था और हिंदुत्व के मसले को लेकर वह खुलकर अपनी राय जाहिर करता था। इसके कारण वह कई लोगों के निशाने पर था। इसीलिए झगड़े की आड़ में उसकी हत्या कर दी गई।

नितेश की ताई का कहना है कि अदनान अपने साथियों के साथ बाइक पर सवार होकर नितेश के पीछे आया और इस दौरान उन लोगों को ने नितेश को माँ-बहन की गाली दी। इसके बाद नितेश ने उन्हें रोक पूछा कि क्यों गाली दे रहे हो, इसके बाद तीनों ने नितेश और उसके साथियों पर हमला कर दिया।

नितेश की ताई का कहना है, “नितेश ने उनकी गाली पर एतराज जताया, तब तीनों ने उसे पीट-पीटकर मार दिया। उन लोगों ने गर्दन पकड़ कर नीचे गिरा दिया, उसके बाद उसे छोड़ा ही नहीं। हम चौधरी होने का दर्द भोग रहे हैं। अगर ये बात उनकी कम्युनिटी (मुस्लिमों के साथ) के साथ हो जाती तो हमें पुलिस कब का उठा लेती।”

बाहर से ‘सत्संग भवन’, अंदर से चर्च: महादेव की नगरी में ईसाई धर्मांतरण के लिए ₹50000 का लालच, पादरी छोटेलाल जायसवाल को किया गया पुलिस के हवाले

उत्तर प्रदेश के वाराणसी एक एक चर्च में में धर्मान्तरण के प्रयास का एक नया मामला सामने आया है। आरोप है कि एक चर्च संचालक ने लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाते हुए पैसे का लालच भी दिया था। ‘हिन्दू जागरण मंच’ के सदस्यों ने चर्च मे पहुँच कर कार्यक्रम को रोकने का दावा किया है। इसी के साथ उन्होंने थाने में तहरीर दे कर आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की है। आरोपित पॉस्टर को हिन्दू संगठनों ने पुलिस को सौंप दिया है। पुलिस ने मामले में जाँच कर के कार्रवाई का भरोसा दिया है। घटना रविवार (16 अक्टूबर, 2022) की है।

घटना वाराणसी देहात के थानाक्षेत्र फूलपुर की है। आरोप है कि यहाँ के बावतपुर इलाके में छोटेलाल जायसवाल नाम का व्यक्ति चर्च चलाता था। चर्च का नाम ‘सर्व इंडिया मिनिस्ट्री’ है। इस चर्च पर ‘सत्संग भवन’ लिखा हुआ है। बाबतपुर क्षेत्र में ही वाराणसी का एयरपोर्ट भी है। छोटेलाल स्थानीय बाबतपुर क्षेत्र का ही रहने वाला है। हिंदू संगठनों द्वारा थाने में दी गई शिकायत के मुताबिक, आरोपित चर्च संचालक ने हिन्दू धर्म के लोगों को धर्म परिवर्तन करने पर 50 हजार रुपए प्रति व्यक्ति का वादा किया। आरोप यह भी लगाया गया है कि छोटेलाल ने इसके लिए 2-2 हजार रुपए एडवांस में भी दिए थे।

शिकायत कॉपी

जिन लोगों को धर्मान्तरण के लिए एडवांस पैसे दिए गए थे उनके नाम गौरव सिंह और वैभव सिंह हैं। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। इस शिकायत कॉपी में आगे बताया गया है कि रविवार के दिन धर्मान्तरण की साजिश के तहत सभी को चर्च आने के लिए भी कहा गया था। इस घटना का एक वीडियो भी ऑपइंडिया के पास मौजूद है, जिसमें हिन्दू संगठन के लोग कार्यक्रम के बीच में पहुँच कर छोटेलाल को धर्मान्तरण रोकने के लिए कह रहे हैं। इसी वीडियो में कुछ महिलाएँ भी दिखाई दे रही हैं, जो हिन्दू संगठनों से बहस कर रही हैं।

इसी वीडियो में हिन्दू संगठन के सदस्य कार्यक्रम में प्रयोग मज़हबी साहित्य दिखा रहे हैं। मौके पर एक रजिस्टर भी दिख रहा है, जिसमें कई नाम आदि लिखे हुए हैं। चर्च में खाली कुर्सियाँ दिखाई दे रहीं हैं और कुछ लोगों की आपस में बहस भी हो रही है। इस वीडियो पर IG रेंज वाराणसी ने वाराणसी देहात पुलिस को कार्रवाई का निर्देश दिया। IG के जवाब में वाराणसी पुलिस ने थाना फूलपुर द्वारा जाँच और उसके बाद कार्रवाई करने का जवाब दिया है।

हिन्दू संगठनों का आरोप है कि जब वो चर्च में पहुँचे तब वहाँ धर्मान्तरण करवाया जा रहा था। ‘धर्म जागरण मंच’ के सदस्यों के मुताबिक, मौके से सदस्यता फार्म और स्टील से बना ईसाई क्रॉस मिला है। फादर छोटेलाल को हिन्दू संगठनों ने पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया है। घटना की जानकारी होने पर तमाम हिन्दू संगठनों और भाजपा नेताओं ने थाने पर पहुँच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की है।

अपने दोस्त सुशांत सिंह राजपूत की मौत को बताया था हत्या, अब फाँसी के फंदे से लटकता मिला शव: ‘मूवी माफिया’ पर भी उठाया था सवाल

टीवी सीरियल (TV Serial) की मशहूर अभिनेत्री वैशाली ठक्कर (Vaishali Thakkar) ने मध्य प्रदेश के इंदौर (Indore, Madhya Pradesh) में स्थित अपने घर में रविवार (16 अक्टूबर 2022) को फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को वैशाली के पास से एक सुसाइड नोट भी मिला है। आत्महत्या की वजह प्रेम प्रसंग बताई जा रही है। 

वैशाली ठक्कर संदिग्ध परिस्थितियों में मरे बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की अच्छी दोस्त थीं। जब सुशांत सिंह के आत्महत्या की बात सामने आई थी, तब वैशाली ने आवाज उठाई थी और इसे मर्डर बताया था। वैशाली ने कहा था कि सुशांत के असली हत्यारे रिया चक्रवर्ती के पीछे छुपे हुए हैं। अब वैशाली की आत्महत्या भी संदेह के घेरे में आ गई है।

अभिनेता के निधन पर वैशाली ने पोस्ट शेयर की थी। उसमें लिखा था, “नो, नो नो, मेरा रोना रुक नहीं रहा। कोई बताओ कि ये एक सपना है। सुशांत एक कमाल का इंसान और एक्टर था। मुझे लगा जैसे हम हमेशा दोस्त रहेंगे, क्यों सुशांत क्यों?”

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ फेम ऐक्ट्रेस वैशाली पिछले एक साल से इंदौर के साईं बाग स्थित अपने घर पर थीं। घटना की सूचना मिलने के बाद तेजाजी नगर थाना की पुलिस मौके पर पहुँची। उसने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए इंदौर के एमवॉय हॉस्पिटल भेज दिया है।

पुलिस ने वैशाली का मोबाइल भी जब्त कर लिया है। पुलिस को वैशाली के घर से सुसाइड नोट मिला है, लेकिन उसने अभी तक खुलासा नहीं किया है कि इसमें क्या लिखा है। थाना प्रभारी आरडी कानवा का कहना है कि मोबाइल और सुसाइड नोट में लिखी बातों की जाँच की जा रही है। उसके आधार पर मामले का खुलासा किया जाएगा।

शुरुआती खबर जो आ रही है, उसमें कहा जा रहा है कि अभिनेत्री वैशाली ठक्कर की आत्महत्या करने की वजह प्रेम प्रसंग है। पुलिस भी जाँच की शुरुआत इसी ऐंगल से की है। हालाँकि, जाँच अधिकारी अन्य कोणों को नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं।

वैशाली अपने घर में छोटे भाई और पिता के साथ रहती थीं। घटना के समय वैशाली अपने कमरे में सो रही थी। जब वह काफी देर तक नहीं उठी तो पिता ने जाकर दरवाजा खटखटाया, लेकिन दरवाजा नहीं खुला। इसके बाद उन्होंने खिड़की से झाँक कर देखा तो वह फाँसी के फंदे से लटकी हुई थी। बताया जा रहा है कि वैशाली का व्यवसाय है और छोटा भाई भी किसी व्यवसाय से जुड़ा हुआ है।

अभी हाल ही में वैशाली ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वो ‘दिल जिगर नजर क्या है, मैं तो तेरे लिए जान भी दे दूँ…’ गाने को गुनगुनाती नजर आई थीं। वीडियो में वो खुश नजर आ रही थीं। इस घटना से उनके फैन्स और परिजनों में मायूसी छा गई है।

वैशाली ठक्कर मूल रूप से मध्य प्रदेश के उज्जैन के नजदीक स्थित माहिदपुर की रहने वाली थी। टीवी सीरियलों में ऑफर मिलने के बाद वह साल 2013 में मुंबई चली गई थी। कुछ समय पहले वह राजस्थान की राजधानी जयपुर चली गई थीं। एक साल से वह इंदौर में रह रही थीं।

बता दें कि पिछले साल अप्रैल में वैशाली की सगाई हुई थी, लेकिन उन्होंने एक महीने बाद ही सगाई टूटने की घोषणा कर दी थी। उन्होंने कहा था कि केन्या में डेंटल सर्जन अपने मंगेतर अभिनंदन सिंह हुंडल से वह शादी नहीं करेंगी।

उस वक्त वैशाली ने वैशाली ने बताया था कि वो शादी स्थगित कर रही हैं, क्योंकि ऐसे वक्त में जब लोग कोरोना से जूझ रहे हैं तो वो कोई सेलिब्रेशन नहीं करना चाहतीं। बाद में उन्होंने इंस्टाग्राम पर रोका सेरेमनी की शेयर की गई वीडियो को भी डिलीट कर दिया था। अभिनंदन और वैशाली लॉकडाउन के दौरान मैट्रिमोनियल साइट के जरिए मिले थे। 

वैशाली ठक्कर ने अपनी करियर की शुरुआत एंकरिंग से की थी। ऐक्टिंग में स्टार प्लस के शो ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ से डेब्यू किया था। इस धारावाहिक में उन्होंने साल 2015 से 2016 तक संजना का किरदार निभाया था। उनका यह किरदार काफी सराहा गया था और वह घर-घर तक पहचानी जाने लगी थीं। उन्होंने बिग बॉस में भी काम किया था।

इसके बाद वैशाली ने ‘ये है आशिकी’ में वृंदा का रोल निभाया। वैशाली ठक्कर ने ‘ससुराल सिमर का’ में अंजली भारद्वाज का किरदार निभाया था। इस निगेटिव रोल के लिए उन्हें ‘गोल्डन पेटल अवॉर्ड्स के बेस्ट एक्ट्रेस इन निगेटिव रोल’ से सम्मानित किया गया था।

इसके अलावा वैशाली ने सुपर सिस्टर्स में शिवानी शर्मा, विष या अमृत में नेत्रा सिंह राठौड़, मनमोहिनी में अनन्या मिश्रा का किरदार निभाया था। अंतिम बार वैशाली टीवी शो ‘रक्षाबंधन’ में कनक सिंह ठाकुर के रोल में नजर आई थीं।

सुशांत सिंह की मौत पर वैशाली ने कहा था, “सुशांत की मौत के बाद उसकी शव तस्वीरें कुछ देर बाद ही सोशल मीडिया पर वायरल हुईं और मेरे पास भी पहुँची थीं। मेरी उसे देखने की हिम्मत नहीं हुई। मैं उसकी मौत से इतनी परेशान थी कि दो-तीन दिन तक रोती रही थी। मैं ये स्वीकार नहीं कर पा रही थी। लोगों ने जब कहा कि उसका मर्डर हुआ है, शरीर में निशान देखिए तब मैंने उन निशान को करीब से देखा। मुझे लगा कुछ तो गड़बड़ है। पहले मूवी माफियाओं पर आरोप लगाया गया लेकिन, अब रिया चक्रवर्ती का सच सामने आ रहा है।”

मंदिर पर कब्ज़ा करना चाहती थी आंध्र सरकार, HC ने अधिकारी की नियुक्ति करने से रोका: कहा – ये मठ का हिस्सा, न करें हस्तक्षेप

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने अहोबिलम मंदिर को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि कुरनूल में अहोबिलम मंदिर के संचालन और संरक्षण के लिए एक ‘कार्यकारी अधिकारी’ को नामित करने का राज्य का निर्णय संविधान के अनुच्छेद 26 (डी) का उल्लंघन है और मठाधिपतियों के अधिकारों में हस्तक्षेप करता है। मुख्य न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति डीवीएसएस सोमयाजुलु की खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि मंदिर तमिलनाडु में अहोबिलम मठ का एक अंग है।

अदालत ने राज्य के इस दावे से असहमति जताई कि मंदिर और मठ अलग-अलग संगठन हैं। पीठ ने कहा कि मठ वर्तमान में तमिलनाडु राज्य में स्थित है और मंदिर आंध्र प्रदेश राज्य में स्थित है, इसलिए यह दावा गलत है कि मंदिर मुख्‍य मठ से संबंधित धार्मिक पूजास्‍थल नहीं रह जाता है। अदालत ने यह भी कहा कि एक समय दोनों स्थान एक ही संयुक्त राज्य मद्रास के अंतर्गत थे।

अदालत ने कहा, “अहोबिलम मंदिर अहोबिलम मठ का एक अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, जिसे हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार और श्री वैष्णववाद सम्बंधित आध्यात्मिक सेवा प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया था। जीयार अहोबिलम देवस्थानम के ट्रस्टी हैं और चूँकि सरकार अहोबिलम मठ के लिए एक कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति नहीं कर सकती है, इसलिए इसे मठ से अलग मानकर मंदिर के लिए एक कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने की कोई अधिकार नहीं है। मंदिर मठ का एक हिस्सा है, इसलिए एक कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद 26 (डी) का उल्लंघन है। सरकार द्वारा कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति जीयार/मठाधिपतियों के प्रशासन के अधिकार को प्रभावित करता है।“

अदालत ने आगे कहा कि आध्यात्मिक/धार्मिक या सांप्रदायिक एकरूपता होने के बावजूद मठ और मंदिर के दूर होने का तथ्य महत्वहीन है। भले ही मठ और मंदिर भौगोलिक रूप से अलग हों, अगर संप्रदाय, प्रथाओं, अनुष्ठानों आदि में एकता या एकरूपता है, तो मंदिर को मठ से जुड़ा होना चाहिए। कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति से मठाधिपतियों की शक्तियों को नकारा या छीना नहीं जा सकता है।

पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य को मठ की निगरानी और शासन करने का सामान्य अधिकार नहीं दिया गया है और इसके संचालन में हस्तक्षेप केवल तभी किया जाना चाहिए, जब ऐसा करने का उचित कारण (जैसे खराब प्रबंधन) हो। हालाँकि, इस मामले में यह पाया गया कि राज्य द्वारा अधिकारी को नामांकित करने करने का कोई आधार नहीं था।

अदालत ने कहा कि 1927 के बंदोबस्ती अधिनियम से शुरू होकर 1951, 1959 और 1966 के अधिनियमों से होते हुए 1987 के अधिनियम तक, मंदिर मठाधिपतियों के प्रबंधन के अधीन रहा। याचिकाकर्ताओं (अधिकांश भक्त) ने इससे पहले कहा था कि एपी चैरिटेबल और हिंदू धार्मिक संस्थान और बंदोबस्ती अधिनियम के अनुसार, राज्य को मठ या मंदिर के लिए कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि अधिनियम के अध्याय 5 के तहत मठ को एक विशिष्ट दर्जा और अपने स्वयं के मामलों को विनियमित करने का अधिकार दिया जाना चाहिए।

सरकार के प्रतिनिधि, महाधिवक्ता एस श्रीराम ने तर्क दिया कि अहोबिलम मठ और मंदिर स्वतंत्र संगठन हैं। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि एक मंदिर, मठ के विपरीत सार्वजनिक धार्मिक पूजा का स्थान है, जो एक निश्चित समुदाय की सेवा करता है और आध्यात्मिक सेवाओं जैसी गतिविधियों की मेजबानी करता है। उन्होंने कहा कि मठ के संबंध में अधिनियम द्वारा लगाई गई सीमाएँ मंदिर पर लागू नहीं होती हैं।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद, अदालत ने अपने आदेश में कहा, “आंध्र प्रदेश राज्य के पास कानून के तहत श्री अहोबिला मठ परम्परा अधिना श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी देवस्थानम (अहोबिलम मठ मंदिर) के कार्यकारी अधिकारी को नियुक्त करने का कोई अधिकार क्षेत्र या अधिकार नहीं है।”

‘गिरफ्तार होंगे मनीष सिसोदिया’: CBI ने शराब घोटाले के आरोपित दिल्ली के डिप्टी CM को समन भेज कर बुलाया, केजरीवाल ने भगत सिंह से कर दी तुलना

दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को CBI ने पूछताछ के लिए समन भेजा है और सोमवार (17 अक्टूबर, 2022) को पेश होने के लिए कहा है। वहीं AAP का दावा है कि मनीष सोसोदिया को गिरफ्तार करने के लिए बुलाया जा रहा है। उन्हें सुबह 11 बजे जाँच एजेंसी के समक्ष पेश होना है। AAP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि पूछताछ के बाद मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए ऐसा किया जा रहा है।

मनीष सिसोदिया ने खुद ट्वीट कर कहा, “मेरे घर पर 14 घंटे CBI रेड कराई, कुछ नहीं निकला। मेरा बैंक लॉकर तलाशा, उसमें कुछ नहीं निकला। मेरे गाँव में इन्हें कुछ नहीं मिला। अब इन्होंने कल 11 बजे मुझे CBI मुख्यालय बुलाया है। मैं जाऊँगा और पूरा सहयोग करूँगा। सत्यमेव जयते।” वहीं सौरभ भारद्वाज ने कहा कि शराब घोटाले को झूठमूठ का 10,000 करोड़ रुपए का बताया जा रहा है और CBI ने 500 लोकेशंस पर छापेमारी की है।

उन्होंने दावा किया कि इससे पहले सुबह से लेकर रात तक मनीष सिसोदिया से पूछताछ की गई और जाँच एजेंसी को कुछ नहीं मिला। बता दें कि हाल ही में मनीष सिसोदिया 6 दिनों के चुनाव प्रचार अभियान के लिए गुजरात गए थे। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी पिछले दो महीनों में कई बार राज्य का दौरा किया है। AAP ने अब पहले ही मनीष सिसोदिया की गिरफ़्तारी की भविष्यवाणी कर दी है, जबकि CBI ने ऐसा कुछ नहीं कहा है।

अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए लिखा, “जेल की सलाख़ें और फाँसी का फंदा भगत सिंह के बुलंद इरादों को डिगा नहीं पाए ये।आज़ादी की दूसरी लड़ाई है। मनीष और सत्येंद्र आज के भगत सिंह हैं। 75 साल बाद देश को एक शिक्षा मंत्री मिला, जिसने ग़रीबों को अच्छी शिक्षा देकर सुनहरे भविष्य की उम्मीद दी। करोड़ों ग़रीबों की दुआएँ आपके साथ है।” ध्यान देने लायक है कि जेल में बंद अपने स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का केजरीवाल अब भी बचाव कर रहे हैं।