Homeदेश-समाजमी लॉर्ड! ये कैसा न्याय: 8वीं में पढ़ता था 13 साल का मुन्ना, नाबालिग...

मी लॉर्ड! ये कैसा न्याय: 8वीं में पढ़ता था 13 साल का मुन्ना, नाबालिग मानने में कोर्ट ने लगाए 33 साल, बरी होने में लगे 43 साल

"इस घटना ने मेरे दिलों दिमाग में गहरे घाव छोड़े हैं। बरी होने के बाद राहत की साँस ली है। भगवान का शुक्र है कि यह फैसला मेरे जिंदा रहते ही आया है।"

बिहार के बक्सर के रहने वाले मुन्ना सिंह आज 56 साल के हैं। 1979 में जब उन पर हत्या के प्रयास सहित कई धाराओं में केस दर्ज किया गया, तब वे 13 साल के थे। आठवीं में पढ़ते थे। लेकिन कोर्ट ने उन्हें नाबालिग घोषित करने में 33 साल लगाए। फिर मामले में उनको बरी करते-करते 10 साल और लग गए।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 11 अक्टूबर 2022 को मुन्ना सिंह को बरी किया गया। इसके बाद उन्होंने कहा, “इस घटना ने मेरे दिलों दिमाग में गहरे घाव छोड़े हैं। बरी होने के बाद राहत की साँस ली है। भगवान का शुक्र है कि यह फैसला मेरे जिंदा रहते ही आया है।”

क्या है मामला?

तारीख थी 7 सितंबर 1979। मुन्ना सिंह, उनके पिता श्याम बिहारी सिंह और अन्य 8 लोगों पर आईपीसी की धारा 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा करने) और 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया था। अब मुन्ना सिंह को लेकर फैसला आया है। सहायक अभियोजन अधिकारी एके पांडे ने कहा कि किशोर बोर्ड ने इस मामले की जाँच की। लेकिन मुन्ना सिंह के खिलाफ कोई गवाह नहीं मिला, इसलिए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

सिंह के वकील राकेश कुमार मिश्रा के मुताबिक घटना के वक्त उनके मुवक्किल केवल 13 वर्ष के थे। आठवीं कक्षा के छात्र थे। लेकिन 2012 तक उन्हें नाबालिग नहीं माना गया था। उन्होंने बताया कि बक्सर की एसीजेएम द्वितीय की अदालत में 2012 में सुनवाई के दौरान मुन्ना सिंह से उनकी उम्र पूछी गई। उन्होंने बताया कि वे अभी वह 46 वर्ष के हैं। इससे यह साफ हो गया कि जब मामला दर्ज किया गया था, उस वक्त वह नाबालिग थे।

इसके बाद नवंबर 2012 को इस मामले को बक्सर किशोर न्याय बोर्ड में स्थानांतरित कर दिया गया। मुरार पुलिस थाने के चौगाई गाँव निवासी मुन्ना सिंह का कहना है कि उन्होंने इसके बाद लगभग एक महीन जेल में बिताया था। आरोपित बनने के बाद उन्होंने काफी मानसिक प्रताड़ना झेली और अदालत के चक्कर लगाने पड़े।

बताया जाता है कि इस मामले के अन्य 5 आरोपितों जिनमें मुन्ना सिंह के पिता भी हैं, उनकी सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। बक्सर कोर्ट ने कुछ साल पहले इस मामले में 2 लोगों को दोषी करार दिया था और दो अन्य को बरी कर दिया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

भगवान राम का अपमान, आजादी के नारे और तिरंगे से बदसलूकी: कॉकरोचों को ये तक नहीं पता कि वे क्यों आए हैं, पढ़ें- CJP...

कॉकरोचों के प्रदर्शन में छात्रों के मुद्दे नहीं बल्कि आजादी के नारे, डफली गैंग, तिरंगे से बदसलूकी और हिंदू देवी-देवताओं का अपमान दिखा। पढ़ें रिपोर्ट।

तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के ‘घृणा मॉडल’ को अन्नामलाई की चुनौती, पेरियार नहीं, कलाम हैं आदर्श: समझें- ‘We The Change’ से राष्ट्रवाद का शंखनाद...

अन्नामलाई ने कहा कि तमिल संस्कृति-भाषा पर गर्व और भारत माता के प्रति समर्पित रहना एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
- विज्ञापन -