Saturday, July 13, 2024
Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयखुली सड़कों पर हिजाब जलाए, बाल काट कर फेंके: ईरान में महसा अमिनी की...

खुली सड़कों पर हिजाब जलाए, बाल काट कर फेंके: ईरान में महसा अमिनी की हत्या के बाद औरतें भड़कीं, पुलिस की गोली चलने के बाद भी जारी रखा ‘कट्टरपंथ’ का विरोध

मसीह अलीनेजाद ने ईरानी औरतों की वीडियोज इकट्ठा करके अपने ट्विटर पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा है, "ईरानी महिला अपने बाल काट कर और हिजाब जलाकर महसा अमिनी की हत्या पर अपना गुस्सा दिखा रही हैं।"

ईरान में सिर सही से न ढकने के कारण हुई महसा अमिनी की हत्या के बाद वहाँ महिलाओं में हिजाब को लेकर भारी गुस्सा है। सोशल मीडिया पर ऐसी वीडियोज सामने आई हैं जिसमें औरतें खुले बाल लेकर अपने हिजाब को जला रही हैं और कुछ अपने बालों को काट कर घटना का विरोध कर रही हैं।

ये सारी वीडियोज इकट्ठा करके ईरान की पत्रकार मसीह अलीनेजाद ने अपने ट्विटर पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा है, “ईरानी महिला अपने बाल काट कर और हिजाब जलाकर महसा अमिनी की हत्या पर अपना गुस्सा दिखा रही हैं।”

अलीनेजाद बताती हैं कि 7 की उम्र से अगर ईरान में लड़कियाँ अपने बाल को न ढकें तो उन्हें स्कूल नहीं जाने दिया जाता और कोई जॉब नहीं मिलती। ईरान में औरतें इस लैंगिक भेदभाव की व्यवस्था से तंग आ गई हैं।

वीडियो में देख सकते हैं कि औरतें कैंची लेकर अपनी पूरी चोटी काट रही हैं। वहीं कुछ औरतें खुली सड़क पर बाल खोलकर हिजाब को आग लगा रही हैं। सोशल मीडिया पर तमाम लोग इन औरतों का समर्थन कर रहे हैं। हालाँकि, ये सब देख कट्टरपंथी नेता कह रहे हैं कि इस तरह सिर खोल कर जो औरतें आ रही हैं, इसके कारण वो मुश्किल में पड़ सकती हैं, इन्हें जेल में डाला जा सकता है।

हिजाब उतारकर प्रदर्शन

बता दें कि इससे पहले महसा अमिनी के अंतिम संस्कार के दौरान सैंकड़ों औरतों ने हिजाब को उतारकर सड़कों पर ‘मोरल पुलिस’ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। इसमें कई पुरुष भी शामिल थे। विरोध इतना बढ़ गया था कि पुलिस ने इन्हें रोकने के लिए गोली चला दी थी, आँसू गैस छोड़ दिए थे। इन सबमें कई लोग बहुत घायल हुए थे। बावजूद इसके औरतों ने प्रदर्शन नहीं रोका। वह भीड़ में सड़क पर आईं और विरोध दर्ज कराने के लिए कहती रहीं, “डरना मत, हम सब एक साथ हैं।”

महसा अमिनी की हत्या

उल्लेखनीय है कि ईरान में कुछ दिन पहले 22 साल की महसा को निर्ममता से पीट पीटकर कोमा में पहुँचाया। कथिततौर पर महसा ने ईरान में रहकर सही से हिजाब नहीं पहना था इसलिए पुलिस ने उन पर हमला किया और उन्हें इतना मारा कि उनका पहले ब्रेन डेड हुआ, वो कोमा में गईं और उसके बाद उनकी मृत्यु हो गई।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

लैंड जिहाद की जिस ‘मासूमियत’ को देख आगे बढ़ जाते हैं हम, उससे रोज लड़ते हैं प्रीत सिंह सिरोही: दिल्ली को 2000+ मजार-मस्जिद जैसी...

प्रीत सिरोही का कहना है कि वह इन अवैध इमारतों को खाली करवाएँगे। इन खाली हुई जमीनों पर वह स्कूल और अस्पताल बनाने का प्रयास करेंगे।

‘आपातकाल तो उत्तर भारत का मुद्दा है, दक्षिण में तो इंदिरा गाँधी जीत गई थीं’: राजदीप सरदेसाई ने ‘संविधान की हत्या’ को ठहराया जायज

सरदेसाई ने कहा कि आपातकाल के काले दौर में पूरे देश पर अत्याचार करने के बाद भी कॉन्ग्रेस चुनावों में विजयी हुई, जिसका मतलब है कि लोग आगे बढ़ चुके हैं।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -