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मोहम्मद जुबैर नोबेल शांति पुरस्कार का हकदार… ‘सर तन से जुदा’ का आतंक फैलाने वाले के लिए TIME मैगजीन की चाहत

TIME मैगज़ीन ‘बौद्धिक’ लोगों का मंच होने की आड़ में प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए कुख्यात रही है। अस्तित्व में आने के बाद से ही इसने वामपंथी मुखपत्र के रूप में काम किया है, जो ऐसी मिथकों और नैरेटिव को गढ़ने की कोशिश की है, जो वास्तविकता से बहुत दूर रही है। पाखंड की सीमा को पार करते हुए इसने ऑल्ट न्यूज़ (ALT News) के मोहम्मद जुबैर (Mohammad Zubair) और प्रतीक सिन्हा (Pratik Sinha) को नोबेल शांति पुरस्कार 2022 के लिए योग्य उम्मीदवार बता दिया है।

हालाँकि, नोबेल शांति पुरस्कार बहुत पहले ही अपनी विश्वसनीयता खो चुका है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के 2009 में जीतने के बाद मध्य-पूर्व में बम गिराकर सैकड़ों लोगों की जान लेने के बावजूद उन्हें ‘उदार’ पेश करते हुए यही अवॉर्ड दिया गया था।

TIME मैगज़ीन खुद को फैक्ट चेकर कहने वाले मोहम्मद जुबैर और प्रतीक सिन्हा को इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार के संभावित विजेताओं की सूची में रखा है। इस सूची में अन्य नाम वलोडिमिर ज़ेलेंस्की, डब्ल्यूएचओ, डेविड एटनबरो, ग्रेटा थुनबर्ग, एलेक्सी नवलनी सहित कई नाम हैं।

मोहम्मद जुबैर वही शख्स है, जिसके कारण कट्टरपंथियों ने देश में ‘सर तन से जुदा’ का आतंक फैला रखा था। इस हिंसा के कारण उदयपुर के कन्हैया साहू और अमरावती के उमेश कोल्हे सहित कम-से-कम 6 हिंदुओं को जान गँवानी पड़ी। ऐसे व्यक्ति को नोबेल शांति पुरस्कार 2022 की सूची में स्थान देना अत्यंत निंदनीय है और यह टाइम मैगज़ीन के निम्न मानकों को भी दर्शाता है।

TIME मैगज़ीन ने वही किया है, जो पश्चिमी मीडिया भारत के बारे में समाचारों को कवर करने के लिए जाने जाते हैं: अश्लीलता का सहारा लेना, तथ्यों को विकृत करना और एकतरफा स्टोरी प्रस्तुत करना। इसने सिन्हा और जुबैर को ऑनलाइन गलत सूचनाओं से जूझ रहे धर्मयुद्ध के रूप में वर्णित किया है। हालाँकि, ये नहीं बताया कि इन दोनों को फर्जी खबरें और झूठ फैलाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था।

TIME ने अपने आर्टिकल में लिखा है, “भारतीय फैक्ट-चेक वेबसाइट AltNews के सह-संस्थापक और पत्रकार प्रतीक सिन्हा और मोहम्मद जुबैर भारत में गलत सूचनाओं से लगातार जूझ रहे हैं, जहाँ हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी भाजपा पर मुस्लिमों के खिलाफ अक्सर भेदभाव के आरोप लगाए जाते हैं। यह एक तरह से भारत को बदनाम करने की भी कोशिश है।

दोनों शॉर्टलिस्ट नहीं

एक तरफ दोनों के नामों का अफवाह है तो दूसरी तरफ इन दोनों से सहानुभूति रखने वालों ने गलत सूचनाएँ फैलाना शुरू कर दिया कि जुबैर और सिन्हा नोबेल शांति पुरस्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए हैं। जुबैर और सिन्हा के कई समर्थकों ने सोशल मीडिया पर फेक न्यूज फैलाने का काम किया है।

जिस तरह से अफवाह उड़ाई जा रही है, उसमें शांति नोबेल पुरस्कार पाने वालों की आधिकारिक सूची जैसा कुछ भी नहीं है। यह टाइम मैगजीन द्वारा उल्लेखित कुछ नाम हैं, जिसको लेकर उसने सिर्फ अटकलें लगाई हैं। वहीं, जुबैर और सिन्हा के चीयरलीडर्स एक मीडिया संस्था की अटकलों और शॉर्टलिस्ट की सूची के बीच अंतर नहीं कर पा रहे हैं।

जुबैर ने न सिर्फ मुस्लिमों को भड़काकर कई हत्याएँ करवाईं, बल्कि वह फैक्ट और अपने ट्वीट के जरिए हिंदू देवी-देवताओं और हिंदू धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणी भी करता रहा है। उसके अतीत के ट्वीट इस बात के गवाह हैं। हिंदू भगवान का मजाक उड़ाने के लिए उस पर भारतीय कानून के तहत उस पर कार्रवाई भी जारी है।

इस्लामवादियों के समर्थन में जुबैर के साथ TIME भी

इसमें आश्चर्य की बात नहीं है कि टाइम मैगजीन ने इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अपने पसंदीदा मोहम्मद जुबैर को चुना, क्योंकि दोनों का इतिहास और पाखंड लगभग एक जैसा है। टाइम मैगजीन का कट्टरपंथी विचारधारा और इस्लामवादियों को बचाने और उन्हें महिमामंडित करने का लंबा इतिहास है, जबकि उनके पीड़ितों को उसने हमलावर के रूप में चित्रित है।

कन्हैया लाल की निर्मम हत्या के बाद टाइम मैगजीन ने एक लेख प्रकाशित किया था, जिसमें इस्लामवादियों की करतूत को छिपाकर पीड़ित को उनकी दुर्दशा के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया। कन्हैया लाल की हत्या पर टाइम में लिखते हुए सान्या मंसूर ने कहा था कि गरीब हिंदू दर्जी ने पूर्व भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा की ‘अपमानजनक टिप्पणियों’ का समर्थन करके इस्लामवादियों का गुस्सा मोल ले लिया था।

TIME मैगजीन द्वारा हिंदुओं के खिलाफ प्रदर्शित ऐतिहासिक पूर्वाग्रह और इस्लामवादियों के प्रति इसके पक्षपात को देखते हुए यह आश्चर्यजनक नहीं है कि मोहम्मद जुबैर को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुना। यह भारत के संदर्भ में उसके प्रोपेगेंडा को और मजबूत करने वाला एक तरह आधार बनाने की जैसा है।

दुर्गा पूजा में भक्ति गीत क्यों बजाया, आयोजन में क्यों जा रही हो: हिंदू महिलाओं और लड़की को कट्टरपंथी मुस्लिमों ने बेरहमी से मारा

मंदिर में भक्ति गीत बजाने और आयोजन में शामिल होने पर हिंदू महिलाओं और लड़की को पीटने का मामला सामने आया है। बिहार के गोपालगंज में मुस्लिम समुदाय के लोगों पर हनुमान मंदिर में महिलाओं की पिटाई का आरोप लगा है। वहीं, मध्य प्रदेश के खरगोन में एक मुस्लिम युवक ने हिंदू युवती के साथ सिर्फ इसलिए मारपीट की, क्योंकि वह उसकी मर्जी के खिलाफ एक आयोजन में शामिल होना जा रही थी। युवती को मुँह और नाक पर काफी चोट आई है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोपालगंज मामले में गोल्डन अहमद, सोबराती और सदीदन खातून पर नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा 15 से 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। मुस्लिम समुदाय के लोगों पर आरोप है कि उन्होंने मंदिर में पूजा करने गई तीन महिलाओं को पीटा। तीनों महिलाओं को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बताया जा रहा है कि दुर्गा पूजा के दौरान इस मंदिर में सुबह-शाम भक्ति गीत बज रहा था, जिसका मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विरोध किया था। उन्होंने लाउडस्पीकर बंद नहीं करने पर 3 महिलाओं को बेरहमी से पीटा, जिससे उन्हें काफी चोटें आई हैं। जख्मी बुजुर्ग महिला गुलाबी देवी ने बताया कि जब लड़कियाँ मंदिर में पूजा करने के लिए आती हैं, तो ये लोग उनके साथ छेड़खानी करते हैं।

इस घटना को लेकर गोपालगंज सदर एसडीपीओ संजीव कुमार ने कहा कि आरोपितों के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। एसडीपीओ ने यह भी कहा कि एक ही समाज और गाँव में रहने वाले लोगों के दिमाग में ऐसा विचार कैसे पनप सकता है कि आप आरती मत गाइए, आप भजन मत गाइए।

हिंदू लड़की को मारा क्योंकि वो आयोजन में जा रही थी

बिहार से दूर मध्य प्रदेश है तो क्या हुआ… हिंदू-घृणा कट्टरपंथी इस्लामियों के नस-नस में समाया हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खरगोन की 21 वर्षीय युवती रविवार (2 अक्टूबर 2022) को एक आयोजन में शामिल होने के लिए जा रही थी। तभी आरोपित मोईन (उम्र 21 साल, अब्बा का नाम दिलावर खान) ने उसे शिवशक्ति नगर में रोका और आयोजन में जाने से मना किया।

हिंदू युवती ने उसकी बात मानने से मना कर दिया। इसके बाद मोईन ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। वहाँ मौजूद लोगों ने आरोपित को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह वहाँ से भाग गया। युवती पहले हिंदू संगठन में शामिल रह चुकी है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

PM मोदी ने हिमाचल को दी ₹3650 करोड़ की सौगात, बोले- ‘मैं राज्य का बेटा… यहाँ की रोटी खाई है तो कर्ज चुकाऊँगा’

विजया दशमी के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में 3650 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया। बिलासपुर में लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने प्रदेश की वीर भूमि की रोटी खाई है और अब उन्हें इसका ऋण चुकाना है। उन्होंने हिमाचली में अपने संबोधन की शुरुआत की।

पीएम मोदी ने बिलासपुर में 1,470 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बने एम्स (AIIMS, Bilaspur) का उद्घाटन किया। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा पेंशन को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (Jairam Thakur) की प्रशंसा की। पीएम मोदी ने कहा कि हिमाचल देश का पहला ऐसा राज्य है, जिसने ड्रोन नीति बनाई है और आने वाले समय में लोगों को इसका बहुत लाभ मिलेगा। अब किसान-व्यापारी आलू, फल आदि ड्रोन से बड़ी मंडी में पहुँचा सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश को वीरों की भूमि बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं हिमाचल का बेटा हूँ, हिमाचल को कैसे भूल सकता हूँ। मैंने यहाँ की रोटी खाई है। अब मुझे यहाँ का कर्ज चुकाना है।” उन्होंने राज्य को मेडिकल टूरिज्म का हब बनाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि जब लोग विदेशों से उपचार कराने हिमाचल आएँगे तो आरोग्य होकर भी जाएँगे और यहाँ की खूबसूरत वादियां भी देखेंगे। इस तरह हिमाचल के दोनों हाथों में लड्डू है।  

पीएम मोदी ने कहा कि पूर्व की सरकारों की सोच विकृत थी। शिलान्यास का पत्थर लगाती थी और चुनाव के बाद भूल जाती थी। अटकना, लटकना और भटकना का जमाना चला गया। उन्होंने एक वाकये को याद करते हुए कहा, “ऊना के पास रेलवे लाइन बिछानी थी। रिव्यू कर रहा था तो देखा कि 35 साल पहले यह फैसला हुआ था।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि AIIMS, Bilaspur अस्पताल की आधारशिला साल 2017 में उन्होंने रखी थी। इस दौरान पीएम मोदी ने 1,611 करोड़ रुपए के अन्य परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास भी किए। पीएम ने बिलासपुर में हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज, बंदला का उद्घाटन किया। इसके अलावा, बद्दी मेडिकल डिवाइस पार्क और भारतमाला परियोजना के तहत पिंजौर से नालागढ़ के बीच बनने वाले 31 किलोमीटर लंबे फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग का भी वर्चुअल शिलान्यास किया।  

इस दौरान सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्य को 10,000 करोड़ रुपए की परियोजनाएँ मिलीं। उन्होंने कहा कि केंद्र में जब कॉन्ग्रेस की सरकार थी, उस दौरान हिमाचल को कोई अहमियत नहीं दी गई। पीएम मोदी ने देश में रिवाज बदल दिया है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय हिमाचल प्रदेश के दौरे पर हैं। वे आज कुल्‍लू में दशहरा महोत्‍सव में शामिल होंगे। इसके साथ ही वे अंतरराष्‍ट्रीय कुल्‍लू दशहरा में भगवान रघुनाथ जी व अन्‍य देवी-देवताओं का दर्शन कर उनका आशीर्वाद लेंगे।

Amasia: पूरी दुनिया का जमीन वाला हिस्सा लगभग एक हो जाएगा, न एशिया बचेगा ना अमेरिका, वैज्ञानिकों के शोध में सुपरकॉन्टिनेंट

न्यू कर्टिन यूनिवर्सिटी (New Curtin University) की अगुवाई में किए गए शोध में दुनिया के अगले सुपरकॉन्टिनेंट के बारे में पता लगाया गया है। नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि पृथ्वी का अगला सुपरमहाद्वीप 20 से 30 करोड़ साल के बीच बनेगा। इसका नाम एमेशिया (Amasia Supercontinent) भी तय हो चुका है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने यह जानकारी दी है कि पृथ्वी की सतह पर सुपरमहाद्वीप के बनने (Formation of Supercontinent) और विखंडित होने की प्रक्रिया लगातार चल रही है। अच्छी खबर यह है कि हमारे ग्रह यानी कि पृथ्वी के सबसे पुराने महासागर को खत्म होने में अभी 30 करोड़ (300 मिलियन) साल और बाकी हैं।

न्यू कर्टिन यूनिवर्सिटी (New Curtin University) की अगुआई में किए गए शोध में यह भी सामने आया है कि यह सुपरकॉन्टिनेंट प्रशांत महासागर के सिमट कर बंद हो जाने से बनेगा। इस दौरान अमेरिकी और एशिया महाद्वीप एक हो जाएँगे। यही कारण है कि वैज्ञानिकों ने इसे एमेशिया (Amasia Supercontinent) नाम दिया है।

नेशनल साइंस रिव्यू में प्रकाशित इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने एक सुपरकम्प्यूटर की मदद ली है। इस सुपरकम्प्यूटर में वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि सुपरकॉन्टिनेंट कैसे बनते हैं। उन्होंने इसका सिम्यूलेशन तैयार किया और पाया कि पृथ्वी अरबों सालों से ठंडी हो रही है। महासागरों के नीचे की प्लेटों की मोटाई और सतह समय के साथ कम होती जा रही है, जिससे अगले सुपरमहाद्वीप को पास आकर जुड़ने में दिक्कतें हो रही हैं।

कर्टिन यूनिवर्सिटी के अर्थ डायनामिक रिसर्च ग्रुप और स्कूल ऑफ अर्थ एंड प्लैनेटरी साइंसेस के वैज्ञानिक और अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ चुआन हुआंग का कहना है कि इस अध्ययन से पृथ्वी पर अगले 20 करोड़ सालों में क्या होगा, इसकी जानकारी मिल सकेगी। हुआंग ने कहा:

“पिछले दो अरब वर्षों में, पृथ्वी के महाद्वीप हर 30 करोड़ (600 मिलियन) वर्षों में एक सुपरकॉन्टिनेंट बनाने के लिए एक साथ टकराए हैं, जिसे सुपरकॉन्टिनेंट साइकिल के रूप में जाना जाता है।”

बता दें कि महाद्वीपों को आपस में जुड़ने में अटलांटिक और हिंद जैसे युवा महासागरों को खत्म करने में इसी वजह से दिक्कत आ रही है। इसलिए यह कार्य प्रशांत महासागर के जरिए होगा। प्रशांत महासागर दोनों महासागरों की तुलना में कहीं ज्यादा पुराना है।

‘अल्लाह के सिवा कोई नहीं… कयामत के बाद उठाया भी जाना है’: क्रिकेटर मोहम्मद शमी ने दी दशहरा की बधाई, कट्टरपंथी दे रहे गाली

बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक दशहरा का पवित्र त्योहार आज देश भर में पूरे धूमधाम और जोश-खरोश के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर क्रिकेटर मोहम्मद शामी ने भी देशवासियों को दशहरा की बधाई दी। हालाँकि, शामी का यह बधाई संदेश कट्टरपंथियों को रास नहीं आया और वे उन्हें ट्रोल करने लगे।

मोहम्मद शामी ने बुधवार (5 अक्टूबर 2022) को सोशल मीडिया पर भगवान राम द्वारा रावण का वध करते हुए एक तस्वीर डाला, जिस पर लिखा था हैप्पी दशहरा। तस्वीर के साथ ही उन्होंने ट्वीट किया, “दशहरे के शुभ अवसर पर मैं प्रार्थना करता हूँ कि भगवान राम आपके जीवन को ढेर सारी समृद्धि, सफलता और खुशियों से भर दें। आपको और आपके परिवार को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ।”

मोहम्मद शामी द्वारा दशहरा की बधाई देते ही कट्टरपंथी उन पर पिल पड़े। उन्होंने शामी को ट्रोल करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, कई कट्टरपंथी तो उन्हें इस्लाम समझाने लगे और मुस्लिम होने के गुण बताने लगे। अकील भट्टी नाम के एक ट्वीटर हैंडल ने लिखा, “शर्म आनी चाहिए शमी। क्या तुम मुस्लिम हो?”

एक ट्विटर यूजर ने तो हद कर दी। इब्न ए अहमद नाम के ट्विटर हैंडल ने शमी द्वारा दशहरा की बधाई देने पर कटाक्ष करते हुए लिखा, “टीम में नहीं लेंगे भाई।” बता दें कि मोहम्मद शमी लंबे समय से भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा नहीं हैं।

हसन मंजूर नाम के एक ट्विटर हैंडल ने लिखा, “ये जानते हुए कि अल्लाह के सिवा कोई खुदा नहीं है, एक मुस्लिम होने के नाते आप ऐसा कैसे कह सकते हैं?”

अमन मिर्जा ना के एक अन्य ट्विटर हैंडल ने लिखा, “मरने के बाद दोबारा उठाया भी जाना है। कब्र-कयामत सब भूल बैठे हैं। अल्लाह हिदायत दे।”

कला के नाम पर हिंदू देवी-देवताओं की नग्न पेंटिंग और अब मुगलों जैसा रावण: रामायण की ‘सीता’ ने कहा- बंद हो ऐसा मजाक

फिल्म आदिपुरुष (Adipurush) में सैफ अली खान (Saif ali Khan) के लुक पर खड़े हुए विवाद में अब रामायण धारावाहिक में सीता का रोल निभाने वाली दीपिका चिखलिया का भी बयान आया है। उन्होंने कहा है कि अगर फिल्म में दिखाया गया रावण लंका का है तो उसको मुगलों जैसा नहीं दिखना चाहिए। दीपिका के मुताबिक, फिल्म के टीजर में सैफ अली खान रावण जैसे नहीं लग रहे हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी सच्चाई और सादगी पर आधारित होनी चाहिए।

आजतक के एक शो में दीपिका ने कहा कि आदिपुरुष के टीजर में सैफ अली खान का लुक रामायण के रावण से मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा कि फिल्म सफल तभी होती है, जब उसके पात्र जो रोल निभा रहे हों वो वास्तव में उस रूप में दिखे। फिलहाल टीजर से फिल्म के आंकलन पर दीपिका ने कहा कि इससे फिल्म का आँकलन करना जल्दबाजी होगी।

दीपिका ने इसी बहस में आगे कहा कि अगर रावण श्रीलंका के हैं तो वो श्रीलंका के ही लगने चाहिए न कि किसी मुगल देश से। हिन्दू संगठनों द्वारा खड़े किए गए विवाद पर दीपिका ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी है, जो 30 सेकेंड के टीजर से शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि टीजर से फिल्म को तय नहीं किया जा सकता है, लेकिन उसमें जो दिख रहा है वो पारम्परिक रामायण से काफी अलग है।

सैफ अली के रोल पर दीपिका ने कहा कि अगर कोई ऐसा रोल निभा रहा हो, जिसे लोग अच्छे से जानते हों तो उसमें फिट होने में दिक्कत आती है। उन्होंने रामानंद सागर की रामायण को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि भले ही हर साल एक रामायण सीरियल बनता हो, लेकिन लोग उसकी तुलना रामानंद सागर की ही रामायण से करते हैं।

दीपिका के मुताबिक, जैसे रामायण धारावाहिक के बाद उनके साथ-साथ अन्य कलाकारों की किरदार वाली पहचान जीवन भर बनी रही, वैसा फिल्म आदिपुरुष के कलाकारों के साथ होना सम्भव नहीं है। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि आदिपुरुष के कलाकार लोगों के जेहन में मेन स्ट्रीम अभिनय करने वालों के तौर पर हैं।

दीपिका चिखलिया ने कहा कि हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं के साथ सभी लोग कुछ ज्यादा ही छूट उठाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने इसे बंद करने की माँग की। दीपिका ने कहा कि इसी छूट के नाम पर हिन्दुओं के आराध्यों की नग्न पेंटिंग तक बना दी जाती है।

रामायण और महाभारत को देश की धरोहर बताते हुए उन्होंने इसके खिलाफ होने वाली हरकतों को फ़ौरन रोकने की माँग की। दीपिका के मुताबिक, जिस प्रकार से सरकार के लिए संविधान है, वैसे ही आध्यात्म में भी है और वह है रामायण। कैसा बेटा होना चाहिए, कैसी बहू होनी चाहिए, किस तरह का जीवन जीना चाहिए… ये सब उसमें है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग लोगों द्वारा लिखी रामायण में बहुत कम अंतर है, लेकिन उसको मुद्दा न बनाकर हमारे ग्रंथों का सम्मान सुरक्षित होना चाहिए।

टैक्सी ड्राइवर से सवारी बन मिले तसलीम-शाहरुख-आबिद, सिर पर पत्थर मार हत्या की: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर फेंकी लाश, गिरफ्तार

दिल्ली के टैक्सी ड्राइवर विशाल की हत्या की गुत्थी सुलझ गई है। उसकी लाश दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस हाईवे के पास नाले से मिली थी। इस मामले में पुलिस ने तसलीम, शाहरुख और आबिद को गिरफ्तार किया है। विशाल की हत्या 19 सितम्बर 2022 को हुई थी। वह सवारी छोड़ने राजस्थान के अलवर गया था।

रिपोर्ट्स में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि टैक्सी मालिक हरविंदर सिंह ने 22 सितम्बर को अपने ड्राइवर विशाल की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। उन्होंने बताया था कि विशाल का मोबाइल फोन 19 सितम्बर की शाम से ही बंद है। पुलिस ने विशाल की तलाश शुरू की तो 26 सितम्बर को उसका शव दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस हाईवे के पास मिला।

पुलिस ने हत्याकांड की पड़ताल शुरू की तो सबसे पहले अलवर के ही फिरोजपुर थाना क्षेत्र के रवा गाँव के रहने वाले तसलीम का नाम सामने आया। तसलीम को गिरफ्तार कर के पूछताछ की गई तो उसने हत्या और लूट की बात कबूल कर ली। साथ ही बताया कि उसके रवा का शाहरुख और हरियाणा नूँह का आबिद भी इसमें शामिल था। पुलिस ने इन दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया है।

पूछताछ में तीनों ने बताया कि वे सवारी बनकर विशाल से अलवर में ही मिले थे। अलवर से 45 किलोमीर चलने पर फिरोजपुर के पास 2 आरोपितों ने टैक्सी रुकवाई और किराया देने के बहाने नीचे उत्तर गए। इस दौरान गाड़ी में ही बैठे एक अन्य आरोपित ने विशाल के सिर पर पीछे से लोहे की रॉड से वार किया, जिससे विशाल अचेत हो गया।

इसके बाद आरोपित विशाल को टैक्सी के पीछे डालकर घटनास्थल से कुछ दूरी पर स्थित नौगाँवा ले गए। यहाँ पर दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक नाले के पास पुलिया नंबर 82 पर रुक कर उन्होंने विशाल के सिर पर पत्थरों से वार कर उसकी हत्या कर दी। विशाल की लाश वहीं फेंक वे टैक्सी लेकर भाग गए।

जनसंख्या नियंत्रण पर सरसंघचालक का जोर, कहा- यह सब पर लागू हो, संतुलन बिगड़ने से बने कई देश: RSS के दशहरा मंच से मातृ शक्ति का भी उद्घोष

विजयादशमी (5 अक्टूबर 2022) के अवसर पर सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण (Population Control) पर जोर देते हुए इसके लिए एक समान कानून की पैरवी की। मौका था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विजयादशमी समारोह का। हर साल दशहरे पर होने वाले यह संघ का सबसे बड़ा कार्यक्रम है। माउंट ऐवरेस्ट फतह करने वाली संतोष यादव मुख्य अतिथि थीं। पहली बार इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कोई महिला बनी हैं।

इस खास अवसर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित रहे। इस दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने महिलाओं की भूमिका, जनसंख्या असंतुलन समेत कई बड़े मुद्दों पर बात की।

भागवत ने कहा कि शक्ति ही शुभ और शांति का आधार है। नारियों को लेकर कहा, “हम उन्हें जगत जननी मानते हैं, लेकिन उन्हें पूजाघर में बंद कर देते हैं ये ठीक नहीं है। मातृशक्ति के जागरण का कार्यक्रम अपने परिवार से प्रारंभ करना होगा, फैसला लेने में महिलाओं को भी शामिल करना होगा।”

मोहन भागवत ने आगे कहा, “2017 में विभिन्न संगठनों में काम करने वाली महिला कार्यकर्ताओं ने भारत की महिलाओं का सर्वांगीण सर्वेक्षण किया। महिलाओं के बिना विकास संभव नहीं है। जो काम मातृ शक्ति कर सकती हैं, वह काम पुरुष भी नहीं कर सकते। इसलिए उनको प्रबुद्ध, सशक्त बनाना, उनका सशक्तिकरण करना और उनको काम करने की स्वतंत्रता देना और कार्यों में बराबरी की सहभागिता देना जरूरी है।” उन्होंने यह भी कहा, “शासन व प्रशासन के इन शक्तियों के नियंत्रण व निर्मूलन के प्रयासों में हमको सहायक बनना चाहिए। समाज का सबल व सफल सहयोग ही देश की सुरक्षा व एकात्मता को पूर्णत: निश्चित कर सकता है।”

उन्होंने कहा, “समाज के विभिन्न वर्गों में स्वार्थ व द्वेष के आधार पर दूरियाँ और दुश्मनी बनाने का काम स्वतन्त्र भारत में भी चल रहा है। उनके बहकावे में न आते हुए उनकी भाषा, पंथ, प्रांत, नीति कोई भी हो उनके प्रति निष्ठुर होकर निर्भयतापूर्वक उनका प्रतिकार करना चाहिए।”

मोहन भागवत ने जनसंख्या को लेकर भी बड़ी बातें कहीं। उन्होंने कहा, “जनसंख्या बोझ है, लेकिन ये साधन भी बन सकता है। जनसंख्या नियंत्रण के साथ-साथ जनसंख्या संतुलन भी महत्व का विषय है। इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।” उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि एक भूभाग में जनसंख्या में संतुलन बिगड़ने का परिणाम है कि इंडोनेशिया से ईस्ट तिमोर, सूडान व सर्बिया से कोसोवा नाम के नए देश बन गए हैं। उन्होंने कहा कि जनसंख्या नीति गंभीर मंथन के बाद तैयार की जानी चाहिए और इसे सभी पर लागू किया जाना चाहिए।

वहीं, पद्मश्री संतोष यादव ने अपने सम्बोधन में कहा, “मैं पूरे भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के मानव समाज से अनुरोध करना चाहती हूँ कि वो आएँ और संघ के कार्यकलापों को देखें। यह शोभनीय एवं प्रेरित करने वाला है।” उन्होंने यह भी कहा कि बिना किसी को जाने उसके बारे में धारणा बना लेना भारतीय संस्कृति नहीं है।

बतौर मुख्य अतिथि पहुँची संतोष यादव ने कहा, “मेरे हाव-भाव को देखकर लोग पूछते थे कि क्या तुम संघी हो? तब मुझे नहीं पता था कि संघ क्या है। आज मेरी किस्मत मुझे इस सर्वोच्च मंच पर लेकर आई है।” उन्होंने कहा, “हमारा सनातन धर्म और संस्कृति हमें पंचतत्वों का संतुलन बनाना सिखाती है। स्वस्थ रहना हमारे लिए जरूरी है। इससे ही हम अपने अपने लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं।”

शशि थरूर का गेम सेट करने के लिए राहुल गाँधी तक गए कॉन्ग्रेसी, तिरुवनंतपुरम के MP ने कहा- चुनाव लड़ने से रोकना चाहते हैं कुछ नेता

कॉन्ग्रेस में दो राजनीतिक तमाशे इन दिनों साथ-साथ चल रहे हैं। एक, राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra)। दूसरा, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का चुनाव (Congress presidential election)। अध्यक्ष बनने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) और शशि थरूर (Shashi Tharoor) मुकाबिल हैं। थरूर के एक बयान ने कॉन्ग्रेस के भीतर आंतरिक लोकतंत्र की पोल खोल दी है। तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर का कहना है कि कुछ पार्टी नेता नहीं चाहते कि वे चुनाव लड़ें। नामांकन वापस लेने के लिए उन पर दबाव बनाने के मकसद से ये नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) से भी मिले थे।

थरूर ने बताया है कि उनकी हाल में राहुल गॉंधी से मुलाकात हुई थी। इस दौरान उन्होंने बताया कि पार्टी के कुछ नेताओं ने उनसे मिलकर कहा कि वे थरूर को नामांकन वापस लेने के लिए। तिरुवनंतपुरम सांसद के अुनसार राहुल ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, क्योंकि वे चाहते हैं कि थरूर चुनाव लड़ें।

रिपोर्ट्स के मुताबिक थरूर ने कहा कि राहुल गाँधी पिछले 10 साल से कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव कराने के समर्थक हैं। उनका मानना है कि चुनाव से बना अध्यक्ष कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए अच्छा काम करेगा। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक थरूर ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि पार्टी के बड़े लोग उनका साथ नहीं दे रहे हैं। उन्होंने खड़गे से वैचारिक मतभेद को खारिज करते हुए उन्हें भी अपनी तरह ही कॉन्ग्रेस की मूल सोच और विचारधारा वाला बताया है। लेकिन यह माना कि पार्टी को आगे बढ़ाने और 2024 में बीजेपी को चुनौती देने को लेकर दोनों की सोच में अंतर है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 17 अक्टूबर को चुनाव होने हैं। 19 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी। माना जा रहा है कि इन चुनावों में खड़गे को कॉन्ग्रेस के शीर्ष परिवार का समर्थन हासिल है।

बधाई हो! अब यूट्यूब पर भी तेज रफ्तार से ‘रवीश रोना’: कहा- बहुत देर कर दी, पहले ही ये काम कर लेना चाहिए था

आज (5 अक्टूबर 2022) दशहरा है। रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद का दहन होना है। उससे पहले मीडिया के स्वयंभू दशानन ने अपनी दुकान का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं रवीश कुमार (Ravish Kumar Youtube channel) के यूट्यूब चैनल की।

रवीश कुमार ने अपने यूट्यूब चैनल (Ravish Kumar Official) पर करीब 8 मिनट का वीडियो अपलोड कर बताया है कि यह उनका ही चैनल है और उन्हें यह कदम क्यों उठाना पड़ा है। यह भी बताया है कि यह चैनल उन्होंने इसी साल जून में ही बना ली थी, लेकिन एनडीटीवी प्राइम टाइम (NDTV Prime Time) की व्यस्तता के कारण समय नहीं मिल रहा था। इसकी वजह से वे बहुत कुछ नहीं कर पाए। लेकिन अब लगता है कि इसे सक्रिय कर देना चाहिए। उन्होंने अब लगातार और तेज रफ्तार से यूट्यूब चैनल पर सामग्री डालने का वादा किया है। साथ ही संकेतों में बताया है कि यही ‘नया रास्ता’ है।

इस वीडियो की खास बात यह है कि इसमें रवीश कुमार ने खुद को इतनी बार ‘असली’ बताया है, जितना खुद के विद्वान और पराक्रमी होने का ऐलान असली वाले रावण ने अपने पूरे जीवनकाल में नहीं किया होगा। इस चैनल के डिस्क्रिप्शन में कहा गया है, “यह पत्रकार रवीश कुमार का आधिकारिक यू-ट्यूब चैनल है। इसके अलावा कोई दूसरा चैनल नहीं है। रवीश सोशल मीडिया के पुराने नागरिक हैं। ब्लॉगर भी रहे हैं।”

रवीश कुमार ने फेसबुक पोस्ट के जरिए भी इसके बारे में बताया है। उन्होंने लिखा है, “बहुत देर कर दी। पहले ही ये काम कर लेना चाहिए था… अब जब यूट्यूब की घोषणा कर ही दी है तो कोशिश करूँगा कि पॉडकास्ट या वीडियो किसी भी रूप में नियमित रूप से आपके बीच पहुँचता रहूँ।”

वैसे रवीश कुमार के भविष्य में यूट्यूबर बनने की अटकलें पहले से ही लग रही थी। क्योंकि वे मीडिया में उसी पथ के अनुगामी बने हैं, जिसका निर्माण भारतीय मीडिया के पूर्व के दैत्येन्द्रों ने किया है। लेकिन यूट्यूब चैनल के आधिकारिक ऐलान के बाद अब सोशल मीडिया में यह चर्चा चल रही है कि मीडिया की लंका (एनडीटीवी) और रवीश कुमार का संबंध विच्छेद होने वाला है। हालॉंकि बीते अगस्त में खुद रवीश कुमार ने ऐसी अटकलों का खंडन किया था। उन्होंने लिखा था, “माननीय जनता, मेरे इस्तीफ़े की बात ठीक उसी तरह अफवाह है, जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुझे इंटरव्यू देने के लिए तैयार हो गए हैं और अक्षय कुमार बंबइया आम लेकर गेट पर मेरा इंतज़ार कर रहे हैं। आपका, रवीश कुमार। दुनिया का पहला और सबसे महँगा जीरो टीआरपी ऐंकर।”

वास्तविकता जो भी हो वह भविष्य में उसी तरह सामने आएगा, जैसे ‘रवीश की रिपोर्ट’ वाले एंकर का चेहरा प्राइम टाइम आते-आते दर्शकों के सामने बेनकाब हुआ था। लेकिन, यह मौका मोदी और हिंदुओं से घृणा करने वाले लिबरलों और वामपंथियों को बधाई देने का है। आखिर 2024 से पहले दिल बहलाने को उन्हें एक और भोंपू मिला गया है।