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108 स्तंभ, धागे का शिवलिंग, दीवारों पर शिवपुराण… राष्ट्र को ‘महाकाल लोक’ अर्पित करेंगे PM मोदी: 200 संत-60000 आम जन बनेंगे साक्षी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) को ‘महाकाल लोक’ राष्ट्र को अर्पित करेंगे। इससे पहले उन्होंने वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर देश को समर्पित किया था।

मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर लोक परियोजना का काम दो चरणों में किया जा रहा है। 856 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना के पहले चरण का कार्य पूरा हो चुका है। करीब 200 संतों और 60 हजार आम लोगों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री मोदी इसका उद्घाटन करेंगे। इसके बाद पीएम कमलकुंड, सप्तऋषि, मंडपम और नवग्रह का भी अवलोकन करेंगे।

महाकाल लोक परियोजना क्या है

महाकाल लोक परियोजना का मकसद तीर्थयात्रियों को विश्व स्तरीय आधुनिक सुविधाएँ प्रदान करना है। इससे मंदिर परिसर का करीब सात गुना विस्तार होगा। इस क्षेत्र में भीड़भाड़ को कम करना और विरासत संरचनाओं के संरक्षण एवं बहाली पर विशेष बल देना परियोजना का मुख्य उद्देश्य है। इससे मंदिर में तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। मौजूदा वक्त में लगभग 1.5 करोड़ हर साल तीर्थ यात्री यहाँ आते हैं। इस परियोजना के बाद यह संख्या दोगुना होने की उम्मीद है।

महाकाल लोक परियोजना की खासियत

कॉरिडोर की लंबाई 900 मीटर से ज्यादा है। इस परियोजना में महाकाल पथ में बलुआ पत्थर से 108 स्तंभ बनाए गए हैं। ये भगवान शिव के तांडव स्वरूप को दर्शाते हैं। 2.5 हेक्टेयर में फैला प्लाजा क्षेत्र कमल के तालाब से घिरा हुआ है। इसमें फव्वारे के साथ शिव की मूर्ति भी स्थापित है। इसके अलावा महाकाल पथ के किनारे भगवान शिव के जीवन को दर्शाने वाली कई मूर्तियाँ भी स्थापित की गई हैं। पथ के साथ भित्ति दीवार चित्र शिव पुराण की कहानियों पर आधारित हैं, जिनमें गणेश का जन्म, सती और दक्ष कहानियाँ आदि शामिल हैं। पूरे परिसर की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी। यह निगरानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सर्विलांस कैमरों की मदद से इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर द्वारा की जाएगी।

केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है, जो ड्रोन के जरिए बनाया गया है। उन्होंने सोमवार (10 अक्टूबर 2022) को ट्वीट किया, “जय महाकाल के श्री महाकालेश्वर मंदिर कॉरिडोर के पहले चरण का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 11 अक्टूबर को करेंगे।”

बता दें कि महाकालेश्वर मंदिर कॉरिडोर के मुख्य गेट पर करीब 20 फीट का शिवलिंग धागे से बनाया गया है। इस पर से पर्दा उठाकर पीएम मोदी कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। महाकालेश्वर मंदिर विकास परियोजना के तहत मध्य प्रदेश के उज्जैन में पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

‘मुझे अपना प्राइवेट पार्ट दिखाया, कहा- इसकी रेटिंग करो’: साजिद खान को बिग बॉस के घर में घुस जवाब देना चाहती हैं शर्लिन चोपड़ा

बॉलीवुड डायरेक्टर साजिद खान (Sajid Khan) पर कई अभिनेत्री यौन उत्पीड़न का आरोप लगा चुकी हैं। साजिद खान के बिग बॉस-16 (Bigg Boss 16) में एंट्री के बाद फिर से ये मामले चर्चे में हैं। इस शो से उसे हटाने को लेकर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को पत्र लिखा है। वहीं अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा (Sherlyn Chopra) ने कहा है कि साजिद खान ने उसे अपना लिंग दिखाते हुए नंबर देने को कहा था। वह बिग बॉस के घर में घुसकर उसे जवाब देना चाहती हैं।

शर्लिन ने सोमवार (10 अक्टूबर 2022) को ट्विटर पर एक आर्टिकल शेयर करते हुए कहा, “अब समय आ गया है कि सलमान खान स्टैंड लें।” साजिद खान पर ‘मी टू’ (MeeToo) कैंपेन के दौरान 9 महिलाओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इनमें शर्लिन चोपड़ा भी शामिल थीं। शर्लिन चोपड़ा ने ट्वीट कर कहा है, “साजिद खान ने मुझे अपना प्राइवेट पार्ट दिखाकर 0-10 के स्केल पर रेटिंग करने को कहा था। मैं ‘बिग बॉस 16’ के घर में जाकर साजिद खान को रेटिंग देना चाहती हूँ। मैं चाहती हूँ कि पूरी दुनिया इसकी गवाह बने। सलमान खान जी प्लीज स्टैंड लीजिए।”

फिल्मीबीट से बात करते हुए शर्लिन ने साजिद खान की ‘बिग बॉस’ में एंट्री पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, “अगर साजिद ने सलमान खान के करीबी या किसी जानने वाली लड़की के साथ छेड़छाड़ की होती, तो क्या वह साजिद को ‘बिग बॉस’ के घर में एंट्री करने देते? उन सभी महिलाओं के दुख-दर्द का क्या, जिनका साजिद ने सेक्सुअल हैरेसमेंट किया।”

MeToo के और भी कई आरोपितों को इंडस्ट्री में काम मिल रहा है। इस पर निराशा व्यक्त करते हुए शर्लिन ने कहा, “यह इंडस्ट्री एक माफिया की तरह काम करती है। मोलेस्टर, नशेड़ी, बलात्कारी, सेक्सिस्ट सभी को दोबारा मौका दिया जाता है। उन्हें पीड़ित के साथ कोई सहानुभूति नहीं होती। जब तक हम माफिया के खिलाफ एक ताकत के रूप में एकजुट नहीं होंगे, तब तक यह ऐसे ही फलता-फूलता रहेगा।” शर्लिन ने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को धन्यवाद देते हुए एक और ट्वीट किया है।

शर्लिन ने लिखा, “धन्यवाद स्वाति जी। अगर सलमान खान सर के किसी करीबी महिला मित्र या रिश्तेदार के साथ साजिद खान कोई घिनौनी हरकत करता, तो क्या सलमान सर साजिद के खिलाफ एक्शन नहीं लेते? सलमान सर हम पीड़ित महिलाओं के भाई-जान क्यों नहीं बन सकते?” एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा 4 अक्टूबर 2022 को भी सलमान खान पर बुरी तरह भड़की थीं और पूछा था कि उन्होंने साजिद खान जैसे मोलेस्टर को बिग बॉस में क्यों लिया?

बता दें कि जब से साजिद खान को टेलीविजन के सबसे चर्चित और विवादास्पद रिएलिटी शो ‘बिग बॉस 16’ में एक कंटेस्टेंट के रूप में लिया गया है, तब से सोशल मीडिया पर हंगामा मचा हुआ है। शर्लिन से पहले मंदाना करीमी (Mandana Karimi) ने ‘बिग बॉस 16’ में साजिद खान को एक प्रतिभागी के रूप में लेने पर निर्माताओं के प्रति नाराजगी जाहिर की थी। करीमी भी उन अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिन्होंने साजिद खान पर MeeToo का आरोप लगाया था।

NCPCR ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताई मोहम्मद जुबैर की करतूत: नाबालिग बच्ची की पहचान सार्वजनिक की, मिली रेप की धमकियाँ

ऑल्टन्यूज (Alt News) के सह-संस्थापक और कथित फैक्टचेकर मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) की अपने खिलाफ दर्ज FIR निरस्त करने से जुड़ी याचिका का दिल्ली हाईकोर्ट में राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने विरोध किया है। आयोग की तरफ से उच्च न्यायालय को बताया गया कि मोहम्मद जुबैर ने अभी तक नाबालिग लड़की के खिलाफ किया वह ट्वीट डिलीट नहीं किया है। आयोग ने यह भी बताया कि जुबैर ने संबंधित अधिकारियों को नाबालिग लड़की का यौन उत्पीड़न करने वाले यूजर्स के बारे में कोई जानकारी भी नहीं दी है। दिल्ली हाईकोर्ट में यह सुनवाई सोमवार (10 अक्टूबर 2022) को हुई।

लाइव बीट के मुताबिक राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने हाईकोर्ट में इसे एक गंभीर मुद्दा बताया। आयोग के मुताबिक दिल्ली पुलिस का स्पष्ट तौर पर कहना है कि जुबैर जाँच में सहयोग करने के बजाए मामले को भटकाने का प्रयास कर रहा है। आयोग द्वारा बताया गया है कि जुबैर की मंशा सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की भी है। यह सुनवाई मोहम्मद जुबैर पर दर्ज पॉक्सो एक्ट की FIR के मामले में हो रही थी।

दिल्ली उच्च न्यायालय में बाल संरक्षण आयोग ने जुबैर की करतूत के बारे में बताया। आयोग ने कहा कि जुबैर द्वारा एक नाबालिग लड़की की फोटो को रीट्वीट किया गया जिससे उसकी पहचान उजागर हो गई। इसी जवाब में दिल्ली पुलिस के हवाले से बताया गया है कि इसके चलते नाबालिग लड़की ऑनलाइन यौन उत्पीड़न का शिकार हुई थी।

गौरतलब है कि फैक्टचेकिंग के नाम पर लोगों की निजी और गोपनीय जानकारियाँ सार्वजानिक करने के लिए ऑल्टन्यूज कुख्यात है। मोहम्मद जुबैर ने 7 अगस्त 2020 को एक ट्विटर यूजर को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने के लिए नाबालिग बच्ची की तस्वीर सार्वजानिक कर दी थी। यह बच्ची उस यूजर की पोती थी और उसे जुबैर के ट्वीट के बाद रेप की धमकियाँ मिली थी। इस केस में जुबैर पर IPC की धारा 509बी, आईटी धारा 67 के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत FIR दर्ज हुई थी। इस FIR में ट्विटर एकाउंट्स @de_real_mak और @syedsarwar के भी नाम हैं, जिन्होंने बच्ची के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया था।

यह FIR राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की शिकायत पर दर्ज हुई थी। इसी FIR पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 सितंबर 2020 को मोहम्मद जुबैर को राहत देते हुए गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

मुलायम तो अपने घर गए… लेकिन कोठारी बंधु की घर लौटने की वह यात्रा कभी पूरी ही नहीं हुई: ‘धरती पुत्र’ थे जब CM, तब मारी गई थी गोली

समर्थकों के लिए ‘धरती पुत्र’ रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और देश के रक्षा मंत्री रहे मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का सोमवार (10 अक्टूबर 2022) को इंतकाल हो गया। उसके बाद उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए उनके पैतृक गाँव सैफई लाया गया। यही उनका अंतिम संस्कार होना है। लेकिन रामभक्त कोठारी बंधु का पार्थिव शरीर उनके घर लौट नहीं पाया था। गोली मारकर उनकी हत्या तब की गई थी, जब मुलायम सिंह यूपी के सीएम हुआ करते थे।

खत आया, भाई न आए

साल था 1990 और महीना था दिसंबर। पहले हफ्ते के एक दिन डाकिया आज के कोलकाता और तब के कलकत्ता के खेलत घोष लेन स्थित एक घर में पोस्टकार्ड लेकर पहुॅंचता है। बकौल पूर्णिमा कोठारी, “चिट्ठी देख मैं बिलख पड़ी। उसने माँ और बाबा का ध्यान रखने को लिखा था। साथ ही कहा था कि चिंता मत करना हम तुम्हारी शादी में पहुँच जाएँगे।” यह पत्र था पूर्णिमा के भाई शरद कोठारी का जो अपने बड़े भाई रामकुमार के साथ अयोध्या में 2 नवंबर को ही बलिदान हो चुके थे। चिट्ठी बलिदान से कुछ घंटों पहले ही लिखी गई थी।

वादा जो पूरा न हुआ

22 साल के रामकुमार और 20 साल के शरद कोलकाता में अपने घर के करीब बड़ा बाजार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखा में नियमित रूप से जाते थे। दोनों द्वितीय वर्ष प्रशिक्षित थे। कई अन्य स्वयंसेवकों की तरह ही राम और शरद ने भी विहिप की कार सेवा में शामिल होने का फैसला किया। 20 अक्टूबर 1990 को उन्होंने अयोध्या जाने के अपने इरादे के बादे में पिता हीरालाल कोठारी को बताया। उसी साल दिसंबर के दूसरे हफ्ते में बहन पूर्णिमा की शादी होनी तय थी। पिता ने कहा- कम से कम एक भाई तो घर पर रुको ताकि शादी के इंतजाम हो सके। पर दोनों भाई इरादे से पीछे नहीं हटे।

बकौल पूर्णिमा, “आखिर में एक शर्त पर पिता राजी हुए। उनसे हर रोज अयोध्या से खत लिखते रहने को कहा। अयोध्या के लिए निकलने से पहले उन्होंने ढेर सारे पोस्टकार्ड खरीदे ताकि चिट्ठियाँ लिख सके। मुझे जब पता चला कि भाई अयोध्या जा रहे हैं तो मैं दुखी हो गई। उन्होंने वादा किया कि वे मेरी शादी तक जरूर लौट आएँगे।” दिसंबर के पहले हफ्ते में पूर्णिमा को जो चिट्ठी मिली वो इनमें से ही एक पोस्टकार्ड पर लिखा गया था। पूर्णिमा की शादी भी उसी साल दिसंबर में हो गई। लेकिन, बहन से किया वादा पूरा करने दोनों भाई घर लौट नहीं पाए।

घर न लौटने की वह यात्रा

राम और शरद ने 22 अक्टूबर की रात कोलकाता से ट्रेन पकड़ी। हेमंत शर्मा ‘युद्ध में अयोध्या’ में लिखते हैं- बनारस आकर दोनों भाई रुक गए। सरकार ने गाड़ियाँ रद्द कर दी थी तो वे टैक्सी से आजमगढ़ के फूलपुर कस्बे तक आए। यहाँ से सड़क रास्ता भी बंद था। 25 तारीख से कोई 200 किलोमीटर पैदल चल वे 30 अक्टूबर की सुबह अयोध्या पहुँचे। 30 अक्टूबर को विवादित जगह पहुँचने वाले शरद पहले आदमी थे। विवादित इमारत के गुंबद पर चढ़कर उन्होंने पताका फहराई। दोनों भाइयों को सीआरपीएफ के जवानों ने लाठियों से पीटकर खदेड़ दिया। शरद और रामकुमार अब मंदिर आंदोलन की कहानी बन गए थे। अयोध्या में उनकी कथाएँ सुनाई जा रही थी।

दोनों भाइयों के साथ कोलकाता से अयोध्या के लिए निकले राजेश अग्रवाल के मुताबिक वे 30 अक्टूबर को तड़के 4 बजे अयोध्या पहुँचे। वे बताते हैं कि विवादित ढाँचे की गुंबद पर भगवा ध्वज फहरा कोठारी बंधुओं ने उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव की दावे की हवा निकाल दी थी। मुलायम ने कहा था, “वहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता।”

घर से खींच मारी गोली

फिर आया 2 नवंबर का दिन। ‘युद्ध में अयोध्या’ के अनुसार दोनों भाई विनय कटियार के नेतृत्व में दिगंबर अखाड़े की तरफ से हनुमानगढ़ी की ओर बढ़ रहे थे। जब सुरक्षा बलों ने फायरिंग शुरू की तो दोनों पीछे हटकर एक घर में जा छिपे। सीआरपीएफ के एक इंस्पेक्टर ने शरद को घर से बाहर निकाल सड़क पर बिठाया और सिर को गोली से उड़ा दिया। छोटे भाई के साथ ऐसा होते देख रामकुमार भी कूद पड़े। इंस्पेक्टर की गोली रामकुमार के गले को भी पार कर गई। दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। उनकी अंत्येष्टि में सरयू किनारे हुजूम उमड़ पड़ा था। बेटों की मौत से हीरालाल को ऐसा आघात लगा कि शव लेने के लिए अयोध्या आने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके। दोनों का शव लेने हीरालाल के बड़े भाई दाऊलाल फैजाबाद आए थे और उन्होंने ही दोनों का अंतिम संस्कार किया था।

हिन्दुओं के घरों-दुकानों पर जबरन लगा दिए इस्लामी झंडे, BJP ने राज्यपाल से की जाँच की माँग, बंगाल में मुस्लिम भीड़ पर आगजनी का आरोप

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासनकाल मे आए दिन हिंसा की खबरें सामने आती रहती हैं। यहाँ, मुस्लिमों द्वारा हिन्दुओं पर लगातार अत्याचार किया है रहा है। रविवार (9 अक्टूबर, 2022) को मोमिनपुर में मुस्लिमों द्वारा हिन्दुओं के घरों में आगजनी और तोड़फोड़ की गई है। यहाँ हुई हिंसा को लेकर भाजपा ने राज्यपाल व गृह मंत्रालय से केंद्रीय बलों की तैनाती व राष्ट्रीय जाँच एजेंसी से घटना की जाँच कराने का आग्रह किया है।

इस बारे में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने ट्वीट कर बताया, “बंगाल भाजपा के विधायक दल ने माननीय राज्यपाल ला गणेशन को ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में उनसे मोमिनपुर हिंसा के मद्देनजर केंद्रीय बलों को तैनात करने, एक उच्च स्तरीय समिति बनाने, एनआईए जाँच आदि जैसे तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया गया है।”

वहीं, सुवेंदु अधिकारी ने अपने एक अन्य ट्वीट में कहा था, “इससे पहले कि बंगाल में कानून-व्यवस्था हाथ से बाहर हो जाए, मैंने माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राज्यपाल ला गणेसन जी को पत्र लिखकर मोमिनपुर हिंसा और एकबालपुर पुलिस स्टेशन में तोड़फोड़ के मद्देनजर केंद्रीय बलों को तैनात करने का अनुरोध किया है।”

दरअसल, यह पूरी घटना मोमिनपुर इलाके की है। यहाँ ईद मिलादुन्नबी के मौके पर मुस्लिमों ने हिन्दुओं के घरों और दुकानों पर जबरदस्ती इस्लामी झंडे लगा दिए थे। इसके बाद, जब हिन्दुओं ने इन झंडों को निकालने की कोशिश की तो मुस्लिम भड़क गए। इसके बाद, सैकड़ों की तादाद में इकट्ठा होकर इन लोगों ने हिन्दुओं के घरों और दुकानों पर हमला कर दिया।

इस हमले में सिर्फ पत्थर या डंडे ही नहीं बल्कि पेट्रोल बम तक का इस्तेमाल करने की बात सामने आई है। इस घटना में, कई हिन्दुओं के घरों में आग लगी है। साथ ही, उनके वाहनों और दुकानों में भी आगजनी और तोड़फोड़ की गई है। फिलहाल, इस पूरे इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है। साथ ही, बंगाल पुलिस 39 आरोपितों की गिरफ्तारी की बात भी कह रही है।

उद्धव ठाकरे की नई पार्टी को मिला मशाल चुनाव चिह्न, नाम – ‘शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे’: एकनाथ शिंदे की पार्टी को भी मिला नया नाम

महाराष्ट्र में जारी सियासी खींचतान के बीच चुनाव आयोग ने सोमवार (10 अक्टूबर, 2022) को उद्धव ठाकरे गुट को अंधेरी पूर्व सीट पर विधानसभा उपचुनाव लड़ने के लिए मशाल चुनाव चिह्न दिया है। हालाँकि, चुनाव आयोग ने यह कहते हुए एकनाथ शिंदे गुट को कोई भी चुनाव चिह्न नहीं दिया कि धार्मिक प्रतीकों को चुनाव चिह्न नहीं बनाया जा सकता।

दरअसल, उद्धव गुट ने अंधेरी पूर्व सीट पर विधानसभा उपचुनाव के लिए मशाल, त्रिशूल और उगता हुआ सूरज इन तीन चिह्नों के विकल्प चुनाव आयोग के सामने रखे थे। वहीं शिंदे गुट ने गदा, उगता हुआ सूरज और त्रिशूल का विकल्प दिया था।

चूँकि गदा और त्रिशूल ही हिन्दू धर्म की आस्था के प्रतीक हैं, इसलिए ये चिह्न उन्हें नहीं दिए गए। उगते सूरज को इसलिए खारिज किया गया है क्योंकि यह पहले से ही ‘द्रविड़ मुनेत्र कड़गम’ का चुनाव चिह्न है। ऐसे में, चुनाव आयोग ने शिंदे गुट के तीनों विकल्पों को खारिज कर दिया है। चूँकि शिंदे गुट के तीनों विकल्प खारिज कर दिए गए हैं, इसलिए अब चुनाव आयोग ने इस गुट को मंगलवार (11 अक्टूबर, 2022) सुबह 10 बजे तक तीन चिह्नों की एक नई सूची प्रस्तुत करने के लिए कहा है।

उद्धव गुट को चुनाव आयोग ने पार्टी का नाम ‘शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे’ दिया है। वहीं, शिंदे गुट की पार्टी का नाम ‘बालासाहेबांची शिवसेना’ होगा। चुनाव आयोग ने कहा है कि पार्टी के नाम को लेकर शिंदे गुट की जो पहली प्राथमिकता थी, वही विरोधी गुट ने भी पहली प्राथमिकता में रखी थी। ऐसे में दोनों ही गुटों को वह नाम नहीं दिया गया है।

उपचुनाव के लिए चुनाव चिह्नों और पार्टी का नाम मिलने पर उद्धव ठाकरे गुट के सांसद अरविंद सावंत ने कहा है उनका गुट मशाल चिह्न और पार्टी के नाम के साथ खुश है। उन्होंने शिंदे गुट पर आरोप लगाते हुए कहा कि शिंदे गुट उनके चिह्नों और नामों की नकल कर रहा है।

ठाकरे गुट के एक अन्य करीबी भास्कर जाधव ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि उद्धव, बालासाहेब और ठाकरे के लिए जो तीन नाम हमारे लिए सबसे ज्यादा मायने रखते हैं, उन्हें नए नाम में रखा गया है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में आगामी 3 नवंबर को अंधेरी पूर्व सीट पर विधानसभा उपचुनाव होना है। यह उपचुनाव एक तरीके से दोनों ही गुटों की शक्ति परीक्षण के जैसा होगा। यह सीट शिवसेना विधायक रिमेश लातके के निधन के बात खाली हो गई थी थी। इस सीट से शिवसेना दिवंगत विधायक रिमेश तालके की पत्नी रितुजा तालके को टिकट दिया है। वहीं शिंदे गुट और भाजपा साल 2019 के चुनाव में इस सीट से हारे हुए प्रत्याशी मुरजी पटेल को उतारने की योजना में है।

जब मुलायम सिंह यादव के भाषण के बाद बिजनौर में भड़के थे दंगे, राम मंदिर के लिए यात्रा निकाल रही हिन्दू महिलाएँ भी बनीं निशाना: 20+ मौतों का सरकारी आँकड़ा

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) ने आज (10 अक्टूबर 2022) गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अंतिम साँस ली। उनके बेटे अखिलेश यादव ने ट्वीट कर उनके निधन के बारे में बताया। मुलायम सिंह के निधन के बाद लोग उनके भाषण और उनसे जुड़ी घटनाओं को याद कर रहे हैं। इस क्रम में उनका 1990 में बिजनौर में दिया गया भाषण भी चर्चा में है। इसके बाद बिजनौर में दंगा भड़क गया था। यहाँ कर्फ्यू लगा दिया गया। दंगे में 20 से अधिक लोगों ने अपनी जान गँवा दी थी। वाहनों को फूँक डाला गया। कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया। एक सप्ताह से ज्यादा का कर्फ्यू लगा रहा।

लेखक दिव्य कुमार सोती ने सपा नेता के निधन पर ट्विटर पर लिखा, “नेताजी चमत्कारी भाषण देते थे। 30 अक्टूबर 1990 को बिजनौर में भाषण दिया। सीएम नेताजी का हेलीकाप्टर उड़ा और रैली से उत्साहित होकर लौटी समुदाय विशेष की भीड़ ने पूरे जिले पर हमला कर दिया। राम मंदिर को लेकर यात्रा निकाल रही महिलाएँ उठा ली गईं। सरकारी आँकड़ा 20 मौतों का है, वैसे 200 प्लस। नमन।” इसके साथ ही उन्होंने ”अमर उजाला में प्रकाशित बिजनौर दंगों की उस रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट भी साझा किया है। यह रिपोर्ट अगस्त 2020 में प्रकाशित की गई थी।

दरअसल, 32 साल (9 अक्टूबर 1990) पहले बिजनौर के प्रदर्शनी मैदान में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह की सभा का आयोजन किया गया था। मुलायम सिंह की सभा में ट्रकों के अलावा अन्य वाहनों में लदकर एक संप्रदाय के लोग आए थे। मुख्यमंत्री ने सभा के दौरान भाषण दिया था कि अयोध्या में उनके रहते परिंदा भी पर नहीं मार सकता है। उन्होंने पूरी अयोध्या की किलेबंदी कर दी थी। उस वक्त राम मंदिर को लेकर पहले से ही माहौल गरम था। ऐसे में मुलायम के हेलीकॉप्टर से उड़ते ही बिजनौर में तनाव व्याप्त हो गया। सभा के बाद दोनों संप्रदाय के लोग कई जगहों पर आमने-सामने आ गए थे। सभा से लौटते हुए वहाँ जमकर पथराव हुआ। यह तनाव कई दिनों तक चलता रहा।

30 अक्टूबर 1990 को बड़ी तादाद में लोग बिजनौर के एक स्कूल में राम मंदिर आंदोलन के मुद्दे को लेकर इकट्ठा हुए थे। उसके बाद कलक्ट्रेट में ज्ञापन देने के लिए निकले थे। जैसे ही लोग बाजार में घुसे उन पर पथराव और गोलीबारी शुरू हो गई। बिजनौर में दंगा भड़क गया। बताया जाता है कि इसमें 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इस दंगे को याद करके आज भी लोग सिहर उठते हैं।

तेलंगाना के CM ने बदला पार्टी का नाम, भारत के नक़्शे से गायब कर दिया जम्मू कश्मीर और लद्दाख: बोली BJP – ये देश की अखंडता का अपमान

तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (TRS) का नाम बदलकर भारत राष्ट्रीय समिति (BRS) करने के कुछ दिनों बाद ही सीएम के चंद्रशेखर राव (KCR) विवादों में हैं। चंद्रशेखर राव पर भारत राष्ट्रीय समिति के बैनर और पोस्टर में भारत का गलत नक्शा दिखाने और देश की अखंडता का अपमान करने का आरोप है। ये बैनर-पोस्टर राजधानी हैदराबाद में कई जगहों पर लगाए गए हैं।

भारत के अधूरे नक्शे में बीआरएस सुप्रीमो केसीआर की फोटो के अलावा खैरताबाद के विधायक दानम नागेंद्र और उनकी पार्टी के अन्य नेताओं की तस्वीरें भी लगी हुई हैं। यह पोस्टर सामने आने के बाद सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ कार्रवाई की माँग की जा रही है। तेलगांना के निजामाबाद से बीजेपी सांसद अरविंद धर्मपुरी ने ट्विटर पर KCR की पार्टी का पोस्टर शेयर किया है, जिसमें आधा कश्मीर गायब है। बीजेपी सांसद का आरोप है कि KCR की पार्टी ने भारत के नक्शे को गलत दिखाया है, यह भारत के संविधान और अखंडता का अपमान है।

बीजेपी सांसद ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा, “भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में देश का क्षेत्र परिभाषित किया गया है। पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है। पीओके को देश के नक्शे से हटाकर केसीआर की पार्टी पाकिस्तान का समर्थन कर रही है।” वहीं, इस मामले पर बीजेपी के ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री डॉ. पार्थसारथी ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, “यह देश का नेता नहीं बल्कि देशद्रोही है।” मालूम हो कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने दशहरे के मौके पर अपनी पार्टी (तेलंगाना राष्ट्र समिति) का नया नाम भारत राष्ट्र समिति करने का ऐलान किया था।

बता दें कि यह कोई पहला मौका नहीं है, जब किसी पार्टी ने भारत के गलत नक्शे को दिखाकर देश का अपमान किया हो। इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने भी यही गलती की थी। सितंबर 2022 में शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने अपनी पार्टी के घोषणा पत्र को लेकर ट्विटर पर भारत का एक नक्शा साझा किया था। इस नक्शे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का कुछ हिस्सा गायब था। हालाँकि, इस पर विवाद गहराने के बाद उन्होंने इसे अपने ट्विटर हैंडल से हटा दिया था।

‘साँस लेने में भी लोगों को हो रही तकलीफ’: सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर प्रतिबंध हटाने से किया इनकार, बढ़ते प्रदूषण पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (10 अक्टूबर, 2022) को हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध हटाने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह दिल्ली में पटाखों से प्रतिबंध नहीं हटाएँगे, उनका आदेश बिल्कुल स्पष्ट है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस दीवाली भी पटाखों पर बैन लगा रहेगा और दिल्ली वाले यह दीवाली भी बिना पटाखों के ही मनाएँगे।

दिल्ली बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के स्तर पर चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट में एम आर शाह की बेंच ने कहा है कि दिल्ली में पर्यावरण की स्थिति बेहद ही खराब हो चुकी है। यहाँ लोगों को साँस लेने में भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में पटाखों पर लगे बैन को हटाया नहीं जा सकता है। अगर ऐसा करते हैं, तो प्रदूषण अपने चरम पर पहुँच जाएगा।

इस याचिका में सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता मनोज तिवारी से कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर हमारा आदेश बिल्कुल स्पष्ट है। हम पटाखों की अनुमति कैसे दे सकते हैं, भले ही वे ग्रीन पटाखे हों। क्या आपने दिल्ली का प्रदूषण देखा है? सुप्रीम कोर्ट ने वर्तमान याचिका को अन्य लंबित मामलों के साथ जोड़ते हुए यह भी कहा कि पराली के मौसम भी आ रहा है। ऐसे में ग्रीन पटाखों के उपयोग को भी प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। अगले कुछ दिन हम सभी के लिए बेहद कठिन होंगे।

दरअसल, दिल्ली सरकार ने आदेश जारी कर आगामी 1 जनवरी, 2023 तक पटाखों के उत्पादन, भंडारण, बिक्री और इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी। यहाँ तक कि पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। दिल्ली सरकार के इस फैसले का पटाखा व्यावसायियों ने विरोध करते हुए इसे निराशाजनक बताया था। इसके बाद ही, मनोज तिवारी ने दिल्ली में पटाखा बैन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने अपनी याचिका में दिल्ली सरकार के उस आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि सरकार के आदेश में हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों और अन्य लोगों के त्यौहारी सीजन के दौरान पटाखों की बिक्री, खरीद और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

उन्होंने अपनी याचिका में सभी राज्यों को यह निर्देश देने की भी माँग की थी कि आगामी त्यौहारी सीजन के दौरान पटाखों की बिक्री या उपयोग करने वाले आम लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने जैसी कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।

मनोज तिवारी ने याचिका में कहा था, “दीपावली जैसे त्योहारों के मौसम में इस तरह की गिरफ्तारी और प्राथमिकी से न केवल बड़े पैमाने पर समाज में एक बहुत बुरा संदेश जाता है। बल्कि, अनावश्यक रूप से लोगों में भय और गुस्सा भी पैदा हुआ है।” गौरतलब है, गत वर्ष कोर्ट ने कहा था कि पटाखों के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं है। केवल वे पटाखे जिनमें बेरियम एसिड होता है वह पूरी तरह बैन है। सुप्रीम कोर्ट के रुख से साफ है कि दिवाली, छठ पूजा, गुरु नानक जयंती, क्रिसमस और नए साल पर दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध जारी रहेगा।

‘काफिर की रूह को नहीं मिलती शांति, जहन्नुम में जाएगा’: जिनके लिए रामभक्तों पर गोली चलवा कर ‘मुल्ला’ बने मुलायम, वही मुस्लिम मना रहे निधन का जश्न

अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) अब इस दुनिया में नहीं रहे। मुलायम के निधन की खबर सुनकर उनके विरोधी नेता भी शोक जता रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम उनके जाने का जश्न मना रहे हैं। फेसबुक पर अली सोहराब नाम के शख्स ने लिखा, “मुलायम सिंह यादव अब इस दुनिया में नहीं रहे।” इसके साथ उसने #FNJ भी लिखा है।

अली सोहराब का फेसबुक पोस्ट

इस पोस्ट को देखते ही फेसबुक पर कट्टरपंथी मुस्लिमों की मानो खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। ज्यादातर ने इस पोस्ट पर लॉफिंग इमोजी बनाया है। मोहम्मद शाहिद नाम का एक यूजर पूछता है कि ये FNJ क्या है। इस पर सलाफी नाम का यूजर कहता है कि ‘फी नारे जहन्नम’।

फोटो साभार: अली सोहराब का फेसबुक पोस्ट

इसके अलावा ये लोग उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री को ‘काफिर’ बताकर उनके निधन की खबर वाली फेसबुक पोस्ट पर हाहा रिएक्शन दे रहे हैं।

फोटो साभार: अली सोहराब का फेसबुक पोस्ट
फोटो साभार: अली सोहराब का फेसबुक पोस्ट

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव का 82 साल की उम्र में सोमवार (10 अक्टूबर, 2022) को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। समाजवादी पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से अखिलेश यादव का बयान ट्वीट करके कहा गया- “मेरे आदरणीय पिता जी और सबके नेता जी नहीं रहे।”

बता दें कि 2 नवंबर, 1990 को अयोध्या में रामधुन में राम भक्तों पर फायरिंग हुई थी। अयोध्या की गलियों में रामभक्तों को दौड़ा-दौड़ा कर निशाना बनाया गया। 3 नवंबर 1990 को जनसत्ता में छपी एक रिपोर्ट में लिखा गया, “राजस्थान के श्रीगंगानगर का एक कारसेवक, जिसका नाम पता नहीं चल पाया है, गोली लगते ही गिर पड़ा और उसने अपने खून से सड़क पर लिखा सीताराम। पता नहीं यह उसका नाम था या भगवान का स्मरण। मगर सड़क पर गिरने के बाद भी सीआरपीएफ की टुकड़ी ने उसकी खोपड़ी पर सात गोलियाँ मारी।”

कारसेवकों द्वारा जारी की गई सूची में 40 कारसेवकों के मारे जाने की बात कही गई थी। जबकि विश्व हिन्दू परिषद ने 59 लोगों के मारे जाने की बात कही थी। राम भक्तों के इस नरसंहार के बाद मुलायम को ‘मौलाना मुलायम’ का तमगा हासिल हुआ।