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5 दिन में मात्र ₹6.56 करोड़! सलमान खान की नई फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर हो गया बुरा हाल, दशहरा की छुट्टियों के बावजूद दर्शकों का अता-पता नहीं

तेलुगु फिल्मों के मेगास्टार चिरंजीवी की फिल्म ‘गॉडफादर’ हिंदी भाषी क्षेत्रों में अच्छा नहीं कर रही है। ये सब इसके बावजूद हो रहा है, जब फिल्म में कैमीरो अपीयरेंस में सलमान खान भी है। 5 दिनों के क्सटेंडेड वीकेंड में ‘गॉडफादर’ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन मात्र 6.56 करोड़ रुपए रहा है। फिल्म के पहले टीजर में भी चिरंजीवी के साथ सलमान खान को दिखाया गया था। हालाँकि, तेलुगु में फिल्म का प्रदर्शन अच्छा रहा है।

फिल्म समीक्षक एवं विश्लेषक तरण आदर्श के अनुसार, ‘गॉडफादर’ ने बुधवार (5 अक्टूबर, 2022) को 1.61 करोड़ रुपए की ओपनिंग ली। लेकिन, अगले दो दिनों में इसका कलेक्शन गिर कर 87 लाख रुपए और 97 लाख रुपए पहुँच गया। शनिवार को 1.45 करोड़ रुपए और रविवार को 1.67 करोड़ रुपए की कमाई कर के इसने औसत से भी नीचा प्रदर्शन किया। इस तरह साउथ की फिल्म में सलमान खान का अनुभव अच्छा नहीं रहा।

वहीं वर्ल्डवाइड कलेक्शंस की बात करें तो चिरंजीवी के कारण ये अच्छा रहा है। मेगास्टार की पिछले फ़िल्में लगातार फ्लॉप हो रही थीं। उन्होंने 2017 में लगभग 10 वर्षों बाद लीड रोल में ‘खैदी नंबर 786’ से वापसी की थी और ये चली भी। ये विजय की तमिल फिल्म ‘Kaththi’ की रीमेक थी। हालाँकि, इसके बाद चिरंजीवी की ‘सायरा नरसिंहा रेड्डी (2019)’ और ‘आचार्य (2022)’ फ्लॉप रही। ‘गॉडफादर’ से उन्हें कमबैक की उम्मीदें थीं।

‘गॉडफादर’ फिल्म ने अब तक 85 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है और ये दुनिया भर में 100 करोड़ रुपए कमाने की तरफ बढ़ रही है। हालाँकि, इसे हिट की श्रेणी में जाने के लिए और कमाने की ज़रूरत है। उधर तमिल फिल्म PS-1 ने दुनिया भर में 380 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है। विक्रम और ऐश्वर्या राय की इस फिल्म में कई बड़े स्टार्स हैं। सैफ अली खान और ऋतिक रोशन की ‘विक्रम वेधा’ उधर फ्लॉप हो गई है।

‘वीडियो में किसी का नाम नहीं लिया, AIMIM के इशारे पर दर्ज हुआ झूठा केस’: MLA राजा सिंह ने निलंबन के बाद भाजपा की नोटिस का दिया जवाब

भाजपा ने तेलंगाना के अपने विधायक राजा सिंह को पार्टी से निलंबित कर दिया था। साथ ही उन्हें ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करते हुए 10 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया था। राजा सिंह पर पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी का आरोप लगने और वीडियो वायरल होने के बाद उन पर ये कार्रवाई की गई थी। उन्हें गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया गया था। अब विधायक राजा सिंह ने भाजपा हाईकमान को अपनी प्रतिक्रिया भेजी है।

भाजपा की केंद्रीय अनुशासन समिति के अध्यक्ष ओम पाठक को भेजे गए पत्र में विधायक ने कहा है कि उन्हें 2014 और 2018 में लगातार दो बार हैदराबाद के गोशमहल विधानसभा क्षेत्र से बतौर भाजपा उम्मीदवार जीत मिली है। उन्होंने चुनाव लड़ने का मौका देने के लिए भाजपा का धन्यवाद करते हुए कहा कि वो 2014 में तेलंगाना में चुने गए भाजपा के 5 विधायकों में से एक थे और उन्हें बाकी चारों के साथ मिल कर काम करने का मौका मिला।

राजा सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया में भाजपा आलाकमान को लिखा, “2018 में भाजपा की तरफ से जीत दर्ज करने वाला मैं तेलंगाना में एकमात्र विधानसभा उम्मीदवार था। 2020-21 के उपचुनावों में पार्टी के दो अन्य उम्मीदवार जीत कर विधायक बने। उसके बाद से ही हम तीनों लगातार पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं। 8 वर्षों के विधानसभा कार्यकाल में मैंने अब तक पार्टी के अनुशासन को भंग नहीं किया। मैं पार्टी के हर कार्यक्रम में हिस्सा लेता हूँ।”

हैदराबाद के गोशमहल से विधायक राजा सिंह ने निलंबन पर भाजपा को भेजी प्रतिक्रिया

विधायक राजा सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उनका जो वीडियो वायरल हुआ है, उसमें उन्होंने न तो किसी कड़े शब्द का प्रयोग किया है और न ही किसी को गाली दी है। उन्होंने ये भी बताया कि इस वीडियो में उन्होंने किसी का नाम भी नहीं लिया है। विधायक ने बताया कि उन्होंने किसी समाज की भावनाएँ आहत करने वाला कोई कार्य नहीं किया और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के इशारे पर हैदराबाद पुलिस ने उन पर झूठा केस दर्ज कर लिया।

राजा सिंह ने पत्र में लिखा है कि जब अदालत ने भी उनके खिलाफ मामले को ख़ारिज कर दिया तो PD एक्ट लगा कर उन्हें जेल में डाला गया। उन्होंने बताया कि वीडियो में गूगल की सूचनाओं का प्रयोग करते हुए उन्होंने बस कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी की नक़ल की थी। उन्होंने किसी मजहब की आलोचना नहीं की। उन्होंने भारत माता की सेवा के लिए आगे मौका देने की माँग करते हुए कहा कि वो आगे ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जिससे पार्टी का अनुशासन भंग हो और पार्टी की विधारधारा के हिसाब से चलते रहेंगे।

गजवा-ए-हिंद का सपना, पुलिस से बचने के लिए मोबाइल में खास App: UP ATS ने गिरफ्तार किए 8 आतंकी, बरामद हुए 2.5 लाख रुपए और जिहादी सामग्री

उत्तर प्रदेश की एंटी टेररिज्म स्क्वॉड ने 8 आतंकियों को गिरफ्तार किया है। ये आतंकी जमात-उल-मुजाहिद्दीन और अलकायदा से जुड़े बताए जा रहे हैं। खबरों के अनुसार इन सबने यूपी को दहलाने की साजिश रची हुई थी। लेकिन इससे पहले ये अपने मनसूबों में कामयाब होते ATS ने इन्हें धर दबोचा।

समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया, यूपी एटीएस ने बांग्लादेशी आतंकवादी संगठन ‘जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश और अल कायदा इंडियन सबकॉन्टिनेंट या अल कायदा बर्र-ए-सगीर’ से जुड़े 8 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया। संदिग्ध आतंकियों के पास से 2.5 लाख रुपए नकद बरामद किए गए हैं।

8 आरोपितों की पहचान लुकमान, कारी शहजाद, कामिल, मोहम्मद अलीम, शहजाद, अली नूर (बांग्लादेशी), नवाजिश अंसारी और मुदस्सिर के तौर पर हुई है। इनमें ज्यादातर सहारनपुर इलाके से हैं। पुलिस इन सबको हिरासत में लेने के बाद अपनी जाँच कर रही है।

इनके पास से अभी तक पेन ड्राइव, मोबाइल समेत कैश बरामद हुआ है। इनके अलावा कुछ जिहादी सामग्री मिलने की बातें भी सामने आई हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 121ए, 123 व यूएपीए की धारा 18, 18बी, 20, 38, 40 के तहत केस दर्ज किया है।

एटीएस ने बताया कि भारत में गजवा-ए-हिंद का सपना लेकर अपने साथ लोगों को जोड़ने का काम करने वाले ये संदिग्ध अपना नाम बदल-बदल कर भारत में रहते हैं और पुलिस व एजेंसियों से बचने के लिए कुछ खास मोबाइल एप्स को प्रयोग में लाते हैं। इनके अलावा इन एप्स पर बातचीत के लिए कोड भी नए लोगों को दिया जाता है। ये लोग

‘ऐसी याचिकाएँ लेकर ही क्यों आते हो?’: सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज की गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग वाली याचिका, सुनवाई से भी किया इनकार

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग लंबे समय से चल रही है। इसी सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का निर्देश देने की अपील की गई थी। हालाँकि, सोमवार (10 अक्टूबर, 2022) को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। जस्टिस एस के कौल और जस्टिस अभय एस ओका की बेंच ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आखिर गाय के राष्ट्रीय पशु न होने से कौन सा मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहा है जो आपने अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की है?

उन्होंने सवाल किया कि आप ऐसी चिढ़ वाली याचिकाओं के साथ कोर्ट में क्यों आते हैं। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, “क्या यह अदालत का काम है? आप ऐसी याचिकाएँ दायर ही क्यों करते हैं कि हमें उस पर जुर्माना लगाना पड़े? कौन-से मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ? आप अदालत आए हैं तो क्या हम नकारात्मक नतीजे की परवाह किए बिना इस पर सुनवाई करें?”

सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि गौ संरक्षण बहुत जरूरी है। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट की ओर से वकील को आगाह किया कि याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके बाद उन्होंने याचिका वापस ले ली और मामले को खारिज कर दिया गया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट गैर-सरकारी संगठन (NGO) ‘गोवंश सेवा सदन’ और अन्य की एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इसमें केन्द्र सरकार को गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का निर्देश देने का माँग की गई थी।

दरअसल, गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग लंबे समय से की जा रही है। दिसंबर 2021 में राज्यसभा में भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने गौ हत्या पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय कानून बनाए जाने की माँग की थी। किरोड़ी लाल मीणा ने गौहत्या पर रोक के लिए केंद्रीय कानून बनाने के साथ ही गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग की थी।

राज्यसभा के शून्यकाल के दौरान किरोड़ीलाल मीणा ने कहा था जब किसी देश की संस्कृति और उसकी आस्था को ठेस पहुँचती है, तो देश कमजोर होता है। उन्होंने बताया था कि चाणक्य ने अर्थशास्त्र में लिखा है कि किसी देश को नष्ट करना है, तो पहले उसकी संस्कृति नष्ट कर दो, देश अपने आप ही नष्ट हो जाएगा। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए ज्यादातर राज्यों में गौ-हत्या पर रोक है।

उन्होंने विशेष उल्लेख के जरिए यह भी कहा था कि सनातन धर्म में गाय को माता मानकर पूजा जाता है। गाय हिंदू संस्कृति का मजबूत प्रतीक और आस्था का केंद्र है। इसलिए जब कोई भी गौ हत्या कर देता है, तो सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ जाता है। गाय का मांस खाना किसी का मौलिक अधिकार नहीं हो सकता, बल्कि जो लोग गाय की पूजा करते हैं, गाय की रक्षा करना उनका सबसे बड़ा कर्तव्य है।

नहीं रहा केरल का शाकाहारी मगरमच्छ ‘बाबिया’, अंतिम संस्कार में जुटेंगे भक्त: खाता था केवल मंदिर का प्रसाद, 70 साल से कर रहा था भगवान के गुफा की रक्षा

केरल के कासरगोड स्थित श्री आनंदपद्मनाभ स्वामी मंदिर की सालों से रखवाली करने वाले ‘शाकाहारी’ मगरमच्छ बाबिया (Crocodile Babiya) का रविवार (10 अक्टूबर 2022) रात को निधन हो गया। बाबिया मंदिर के पास मृत पाया गया था। बताया जाता है कि यह मगरमच्छ मंदिर परिसर के अंदर बने तालाब में रहता था और 70 से अधिक सालों से इसकी रक्षा कर रहा था।

मंदिर के पुजारियों के अनुसार, दिव्य मगरमच्छ अपना अधिकांश समय गुफा के अंदर बिताता था। वह सिर्फ दोपहर में प्रसाद के लिए बाहर निकलता था। वहीं, मंदिर के ट्रस्टी उदयकुमार आर गैट्टी ने कहा कि बाबिया की तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब चल रही थी। मंगलुरु के पिलिकुला बायोलॉजिकल पार्क के पशु चिकित्सक उसकी देखभाल कर रहे थे। उन्होंने कहा, “पिछले दो दिनों से बाबिया भोजन के लिए भी नहीं आया था। जब हमने उसकी तलाश की तो वह हमें नहीं मिला। लेकिन रविवार की रात, हमने इसे झील में मृत पाया। मंदिर में उसके अंतिम संस्कार में 1000 से अधिक भक्तों के आने की उम्मीद है।” गैटी ने कहा, “बाबिया को पूरे सम्मान के साथ मंदिर के मैदान में दफनाया जाएगा।”

मंदिर प्रबंधन के अनुसार, बाबिया दिन में दो बार भगवान के दर्शन करने निकलता था। इस दौरान वह परोसे जाने वाले चावल और गुड़ के प्रसाद को ही खाकर रहता था। इसलिए उसे शाकाहारी मगरमच्छ कहा जाता है। मगरमच्छ बाबिया तालाब में रहने के बावजूद मछलियाँ और दूसरे जलीय जीवों को नहीं खाता था। उसने आज तक किसी के साथ भी हिंसक व्यवहार नहीं किया था। कहा जाता है कि मगरमच्छ बाबिया उस गुफा की रक्षा करता था, जिसमें भगवान गायब हो गए थे। कोई नहीं जानता था कि बाबिया तालाब में आखिर कैसे और कहाँ से आया था। बाबिया की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गई हैं।

बता दें कि यह मंदिर कासरगोड जिले के अनंतपुर नाम के छोटे से गाँव में बना है। इस मंदिर को तिरुवनंतपुरम के पद्मनाभ स्वामी के मंदिर के मूलस्थान के तौर पर जाना जाता है।

अमेठी में मिलाद-उन-नबी पर गूँजा ‘सर तन से जुदा’ का नारा, देश विरोधी नारेबाजी भी: यूपी पुलिस ने दर्ज किया मामला, राजस्थान में भी ऐसी ही घटना

देश में सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की लगातार कोशिश की जा रही है। रविवार (9 अक्टूबर, 2022) को उत्तर प्रदेश के अमेठी और राजस्थान के जोधपुर में ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए हैं। इन नारों की वजह से समाज में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इन दोनों ही घटनाओं पर स्थानीय पुलिस से शिकायत की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश के अमेठी में ईद मिलादुन्नबी के मौके पर जुलूस जा रहा था। इस जुलूस में सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग जुटे थे। इस जुलूस के दौरान कई लोग एकजुट होकर देश विरोधी नारों के साथ ही ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगने की खबर सामने आयी है। इस पूरी घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस से शिकायत की गई है। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने 9 लोगों पर नामजद तथा 10-15 अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध धारा 147, 153ए, 188 व 506 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज करते हुए आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है।

इसी प्रकार, राजस्थान के जोधपुर जिले के पीपाड़ में भी ईद मिलादुन्नबी का जुलूस निकाला गया था। जहाँ इस जुलूस में इस्लाम से संबंधित नारे बाजी के बीच युवा ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगाते हुए देखे गए हैं। इस घटना का वीडियो भी सामने आ चुका है। सबसे बड़ी बात यह है कि जब जुलूस में ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगाए जा रहे थे तब वहाँ पुलिस भी मौजूद थी। हालाँकि, वहाँ खड़े सभी पुलिसकर्मी सिर्फ मूकदर्शक ही बने रहे।

इस घटना की जानकारी जब हिंदू संगठनों को हुई तो उन्होंने पुलिस को इस घटना की पूरी जानकारी देते हुए शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत और वीडियो के आधार पर पुलिस रविवार रात आरोपितों की तलाश करती रही। हालाँकि, वीडियो फुटेज होने के बाद भी देर रात सिर्फ एक आरोपित को को गिरफ्तार किया है। उसकी पहचान रोशन अली सिंधी के रूप में हुई है। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।

ईद मिलादुन्नबी पर ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगने पर जोधपुर ग्रामीण एसपी अनिल कयाल का कहना है कि ईदमिलादुन्नबी के मौके पर पीपाड़ में निकाले गए धार्मिक जुलूस के दौरान ‘सिर तन से जुदा’ करने के नारे लगाने की शिकायत की गई थी। इसके साथ ही इस घटना का वीडियो भी पुलिस के पास था। इस वीडियो के आधार पर ही पुलिस ने मुख्य आरोपित रोशन अली की पहचान करते हुए उसे गिरफ्तार किया है।

कभी लड़की से उतरवाए अंडरगार्मेंट्स, तो कभी अपना प्राइवेट पार्ट दिखाया: बिग बॉस-16 से साजिद खान को निकलवाने के लिए DCW ने केंद्र को लिखा पत्र

बिग बॉस-16 में साजिद खान की एंट्री को लेकर बवाल अभी थमा नहीं है। सोशल मीडिया पर सवाल उठने के बाद दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को पत्र लिखा है। इसमें माँग की गई है कि शो से साजिद खान को हटाया जाए।

बता दें कि साजिद खान ने बिग बॉस-16 में 1 अक्टूबर को एंट्री की थी। वो इस शो में घर के सदस्य के तौर पर आए हैं। महिला आयोग की अध्यक्ष ने पत्र में इस बात पर गौर करवाया कि कम से कम 10 महिलाएँ साजिद पर यौन शोषण के आरोप लगा चुकी हैं।

इन आरोपों के कारण उन्हें साल 2018 में हाउसफुल-4 में डारेक्टर पद से भी हटा दिया गया था। ऐसे में कुछ साल बाद उसका बिग बॉस में घर का सदस्य बनकर आना दुर्भाग्यपूर्ण है। ये शो बड़े-बच्चे सब देखते हैं ऐसे में एक यौन आरोपित को लाना बेहद गलत है।

पत्र में कहा गया कि इस तरह साजिद को घर में लाना मतलब उन्हें एक अवसर देना है जिसमें वो अपने कुकर्मों पर लीपापोती कर सकें और अपने आपको भारतीय दर्शकों के सामने दोबारा आने के लिए तैयार कर सकें।

मालीवाल ने अनुरोध किया है कि अनुराग ठाकुर इस मामले में हस्तक्षेप करें और साजिद खान को पर्दे पर आने से रोकने के लिए कोई कदम उठाएँ। उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह इस मामले में उनका साथ दें।

उनका कहना है कि इस तरह साजिद खान का शो में दाखिल करना बताता है कि कैसे इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपमानजनक कृत्य करने के बावजूद कुछ मर्द बिना परिणाम भुगते बच निकलते हैं। ये उन महिलाओं का अपमान है जो यौन अपराधियों के विरुद्ध आवाज उठाती हैं। स्वाति ने अपील की है कि साजिद खान को बिग बॉस शो से बाहर किया जाए।

अपने पत्र में उन्होंने उन 10 महिलाओं के आरोपों को भी जोड़ा है जिन्होंने साजिद खान का मीटू के दौरान नाम लिया। इसमें बताया गया कि कैसे कभी साजिद ने किसी पीड़िता को जबरन किस किया, किसी से उसके अंडरगार्मेंट उताने को कहे, किसी के सामने प्राइवेट पार्ट निकाला, किसी से पूछा कि ‘क्या तुम 100 करोड़ में कुत्ते के साथ सेक्स करोगी।’

उल्लेखनीय है कि साजिद खान पर ‘मी टू’ (MeeToo) कैंपेन के दौरान 9-10 महिलाओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसके बाद इन आरोपों के आधार पर द इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन (IFTDA) ने उनके फिल्में डायरेक्ट करने पर रोक लगा दी थी। शनिवार (1 अक्टूबर, 2022) को जब साजिद खान ‘बिग बॉस’ के मंच पर पहुँच तो उन्होंने सलमान खान (Salman Khan) से बातचीत करते हुए अपना दुखड़ा रोया। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत करने के बाद भी हाउसफुल 4 का क्रेडिट उनसे छीन लिया गया और बीते 4 सालों में उन्हें किसी ने कोई काम नहीं दिया।

मुस्लिम नेताओं को रिझाने गई थी AAP, मस्जिदों से जारी हुए कॉन्ग्रेस को वोट देने के फरमान: धोखों के बावजूद तुष्टिकरण में लगे हैं केजरीवाल

कुछ दिनों पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें मुस्लिमों को रिझाने के लिए वो रिलायंस समूह के मुखिया मुकेश अम्बानी का घर ‘एंटीलिया’ को तुड़वाने की बात कर रहे थे। केजरीवाल और उनकी पार्टी ने इससे पहले भी रमजान के मौके पर मुस्लिम कर्मचारियों को 2 घंटे की छुट्टी देकर और ‘मुस्लिमों के मसीहा जनाब केजरीवाल’ के पोस्टरों के माध्यम से मुस्लिम तुष्टिकरण के भरपूर प्रयास किए हैं।

लेकिन, ये प्रयास नए नहीं हैं। ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ आंदोलन एवं आम आदमी पार्टी (AAP) के शुरुआती दिनों में जब बाबा रामदेव, श्री श्री रविशंकर, साध्वी ऋतम्भरा, भाजपा एवं RSS के स्वयंसेवक अपना समर्थन अन्ना एवं केजरीवाल को दे रहे थे, तब मुस्लिमों ने केजरीवाल से दूरी बना रखी थी। उस समय भी केजरीवाल और उनकी टीम ने मुस्लिमों का समर्थन लेने के लिए अफलातून प्रयास किए, लेकिन मुस्लिमों की ओर से उन्हें धोखा ही मिला।

IAC मूवमेंट में कोर टीम के सदस्य रहे एवं आप आदमी पार्टी की नेशनल एग्जीक्यूटिव कमिटी के पूर्व सदस्य मयंक गाँधी ने अपनी पुस्तक ‘AAP & Down’ में आम आदमी पार्टी की परदे के पीछे की घटनाओं का उल्लेख किया है। इस पुस्तक के तीसरे अध्याय वे लिखते हैं, “जब IAC मूवमेंट आगे बढ़ रहा था, तब लोगों के बीच ऐसी धारणा बन रही थी कि IAC एक अल्पसंख्यक-विरोधी एवं प्रो-अपर क्लास हिन्दुओं का आंदोलन है। दुर्भाग्य से कोर कमिटी में एक भी विश्वसनीय मुस्लिम या पिछड़ी जातियों का नेता नहीं था।”

वो आगे लिखते हैं, “तब मैंने स्वामी अग्निवेश को कॉल किया और पूछा, यदि वे महाराष्ट्र से किसी राष्ट्रवादी मुस्लिम नेता को जानते हैं जो हमारे साथ जुड़ सके। तब स्वामी अग्निवेश ने एक मैगज़ीन के एडिटर जावेद आनंद के बारे में बताया। मैंने तुरंत ही जावेद से पूछा यदि वह कुछ अच्छे मुस्लिम नेताओं के नाम सुझा सकें। इसके दो दिन बाद, 14 अप्रैल 2011 को मैंने The Indian Express में उसी जावेद आनंद का सम्पादकीय पढ़ा जिसमें वह दावा कर रहा था कि मैं (मयंक गाँधी) मुस्लिमों को अच्छे और बुरे की श्रेणी में बाँट रहा हूँ। यह पढ़कर मैं हक्का-बक्का रह गया।”

मयंक गाँधी की पुस्तक का हिस्सा

दूसरा किस्सा 2014 के लोकसभा चुनाव का है, जब मयंक गाँधी ने महाराष्ट्र की नॉर्थ-वेस्ट मुंबई की सीट से आम आदमी पार्टी की ओर से चुनाव लड़ा था। मयंक लिखते हैं, “चुनाव प्रचार के दौरान मैं अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं के पास पहुँचा। मैंने उनको कहा कि आम आदमी पार्टी के पास मुस्लिम समुदाय के लिए तीन बेहतरीन एजेंडा हैं। एक, जिन मुस्लिम युवाओं को आतंकवाद के मामलों में फ्रेम किया गया है उनके केसेस को फ़ास्ट-ट्रेक में ले जाना और जो वास्तव में दोषी है उसे सा दिलवाना। दूसरा, गरीबी दूर करना और तीसरा, मुस्लिम नेताओं को पार्टी की निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करना।”

AAP में मयंक गाँधी के अनुभव, जो उन्होंने पुस्तक में लिखा

मयंक बताते हैं कि मुस्लिम नेताओं द्वारा तीनों सुझावों का दिल खोल के स्वागत किया गया। लेकिन, चुनाव के ठीक एक दिन पहले, मुस्लिमों के लिए मस्जिदों एवं मदरसों से कॉन्ग्रेस को ही वोट देने के का फरमान जारी किया गया। जब परिणाम आए तो मयंक के चुनावी-क्षेत्र से शिवसेना जीत चुकी थी। दूसरे क्रम पर कॉन्ग्रेस थी और AAP के मयंक मात्र 50,000 के वोट के साथ चौथे क्रम पर थे। मयंक की जमानत भी जब्त हो चुकी थी। 

तिरंगे में अशोक चक्र की जगह दो तलवारें और चाँद: पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन पर राष्ट्रध्वज का अपमान, बिहार का वीडियो वायरल

बिहार के दो जिलों से राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का अपमान करने का मामला सामने आया है। ईद मिलादुन्नबी (पैगंबर मुहम्मद के जन्मदिवस) के जुलूस के दौरान रविवार (9 अक्टूबर, 2022) को सिवान में तिरंगे झंडे से अशोक चक्र को हटाकर इसकी जगह दो तलवारों के चिह्न वाला तिरंगा लहराया गया। वहीं, शिवहर में अशोक चक्र की जगह चाँदनुमा आकार वाले झंडे के साथ जुलूस निकाला गया। इसका वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में खासा आक्रोश है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इस घटना को राष्ट्रद्रोह और तिरंगे का अपमान बताते हुए दोषियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई करने की माँग की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिवान और शिवहर में ईद मिलादुन्नबी के दौरान राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का मामला तूल पकड़ने के बाद दोनों जिले की पुलिस जाँच में जुट गई है। शिवहर में आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। सदर एसडीओ ने बताया कि मामले की जाँच चल रही है। इस दौरान एक युवक को हिरासत में भी लिया गया है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यह किसी पार्टी विशेष का भी झंडा हो सकता है, क्योंकि बिना अशोक चक्र के तिरंगा झंडा राष्ट्रीय ध्वज नहीं हो सकता।

शिवहर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जुलूस में तिंरगे के बीच से अशोक चक्र हटाकर और चाँदनुमा आकार का झंडा बनाया गया था। यह झंडा जुलूस के साथ पूरे रास्ते में लहराते हुए नजर आया। एसपी अनन्त कुमार राय ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसकी जानकारी मिलने के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव कुमार पांडेय ने जिलाधिकारी मुकुल गुप्ता से कहा कि तिंरगे का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे असामाजिक तत्वों पर राष्ट्रद्रोह की धारा के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए।

इसके बाद डीएम मुकुल गुप्ता ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जाँच के आदेश दिए है। जाँच की जिम्मेदारी सदर एसडीओ मोहम्मद इश्तियाक अली अंसारी और डीएसपी को सौंपी गई है। इस मामले में विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष अशोक उपाध्याय ने कहा, “हम इस तरह के राष्ट्र विरोधी कुकृत्य की घोर निंदा करते हैं और जिला प्रशासन से आग्रह करते हैं कि इन असामाजिक तत्वों को चिन्हित कर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की घटनाओं को दोहरा ना सके।”

बता दें कि जून 2022 में भी तेलंगाना के महबूबनगर से इसी तरह राष्ट्रीय ध्वज की एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई थी। महबूबनगर में बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की विवादित टिप्पणी को लेकर प्रदर्शन किया गया था। विरोध के दौरान प्रदर्शनकारियों ने तिरंगे का अपमान किया था। इसमें अशोक चक्र की जगह ‘कलमा’ लिखा हुआ था। अशोक पंडित ने इस तस्वीर को अपने ट्विटर हैंडल पर साझा किया था।

‘पंजाब में 5 फसलों पर मिलती है MSP’: गुजरात में अरविंद केजरीवाल ने किया वादा, उधर पंजाब के किसान संगठनों ने खोला मोर्चा; कहा – बोल रहे झूठ

आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल अपने झूठे दावों और गलत बयानों के चलते हमेशा ही सुर्खियों में बने रहते हैं। गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल कई बेतुके बयान दे चुके हैं। उनके एक बयान को लेकर पंजाब के किसान संगठनों व विपक्षी दल भाजपा व शिरोमणि अकाली दल ने कहा है कि केजरीवाल और भगवंत मान ने एमएसपी पर जनता को गुमराह किया है।

दरअसल, अरविंद केजरीवाल ने शनिवार (8 अक्टूबर, 2022) को कहा था कि आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब में 5 फसलों पर एमएसपी दे रही है। यदि गुजरात की जनता विधानसभा चुनाव में आप को वोट देती है तो यहाँ के किसानों को भी इन फसलों पर एमएसपी मिलेगा।

केजरीवाल के इस बयान पर पंजाब के किसान संगठनों ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत मान गुजरात के लोगों को गुमराह कर रहे हैं। किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा गेहूँ, धान और कपास पर एमएसपी प्रदान किया जाता है, जबकि मक्का पर कोई एमएसपी नहीं है। यह भी कहा गया है कि सरकार द्वारा मूँग के लिए एमएसपी की घोषणा की गई थी, लेकिन इसके बाद भी किसानों को मूँग की फसल कम कीमत पर बेचनी पड़ी है।

भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहन ने कहा कि आप सरकार ने मूँग पर एमएसपी देने वादा किया था, लेकिन किसानों को नहीं मिला। वह सभी फसलों पर एमएसपी की माँग कर रहे हैं, लेकिन यह पंजाब में गेहूँ और धान से आगे नहीं जा रहा है। कपास के अलावा किसी अन्य फसल को वह मूल्य नहीं मिला है, एमएसपी किसानों को हक है।

वहीं, ‘भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंडा’ के उपाध्यक्ष मनजीत सिंह धनेर का कहना है कि केजरीवाल का पंजाब में पाँच फसलों पर एमएसपी का दावा हास्यास्पद और पूरी तरह झूठा है। इसके अलावा, भाजपा नेता हरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि आप (AAP) लगातार झूठ बोल रही है और झूठे दावे कर रही है जैसे वह दिल्ली में करती है। केजरीवाल और भगवंत मान को फसलों पर एमएसपी देने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के योगदान के बारे में बताना चाहिए और लोगों को गुमराह करना बंद करना चाहिए।

शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता और पूर्व कैबिनेट मंत्री दलजीत सिंह चीमा ने कहा है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अरविंद केजरीवाल गुजरात में दावा कर रहे हैं कि पंजाब में आप की सरकार 5 फसलों पर एमएसपी दे रही है तथा गुजरात में सरकार बनने पर यही फॉर्मूला दोहराया जाएगा।

उन्होंने कहा, “सच तो यह है कि केन्द्र सरकार भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से पंजाब में एमएसपी पर गेंहू और धान की खरीद कर रही है। इसी प्रकार ही कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से कपास की खरीद करता है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसानों से मूँग की बुवाई करने का आग्रह किया था और पूरी फसल को 7250 रुपए में खरीदने का वादा किया था। लेकिन, उन्होंने इस फसल का दस फीसदी भी नहीं खरीदा। पंजाब सरकार भी मक्का की फसल खरीदने से मुकर गई तथा किसानों को भाग्य के सहारे छोड़ दिया।”

अकाली दल के नेता चीमा ने यह भी कहा कि केजरीवाल से गुजरात के किसानों को झूठी उम्मीदें नही देने की अपील करते हुए कहा कि गुजरात के किसानों को पंजाब में आकर जमीनी हकीकत खुद देखनी चाहिए। पंजाब के किसान कर्जदार हैं क्योंकि उन्होंने आप पार्टी की सरकार पर विश्वास करके बड़े पैमाने पर मक्का और मूँग की फसल की बुवाई की थी।

दलजीत सिंह चीमा ने यह भी कहा कि सभी फसलों पर एमएसपी देना तो दूर की बात है। पंजाब सरकार ने अब तक उन किसानों को मुआवजा तक नहीं दिया, जिनकी फसल बेमौसम बारिश के कारण बर्बाद हो गई थी। सरकार ने किसानों को मौजूदा धान की फसल में बड़े पैमाने पर हुए नुकसान का भी कोई मुआवजा भी नहीं दिया है।