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‘मेरा तन, मेरा मन’: हिजाब के विरोध में ईरानी एक्ट्रेस ने उतारे शरीर से सारे कपड़े, Video इंस्टाग्राम पर शेयर की

ईरान में हिजाब को लेकर भड़की आग सोशल मीडिया के जरिए पूरी दुनिया में फैल चुकी है। बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा और मंदाना करीमी के बाद अब हिजाब (Hijab) को लेकर एक और अभिनेत्री का रिएक्शन सामने आया है। नेटफ्लिक्स की हिट सीरीज सेक्रेड गेम्स में काम कर चुकी एलनाज नोरौजी (Elnaaz Norouzi) ने हिजाब का विरोध करते हुए मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है।

इस वीडियो को उन्होंने ‘मॉय बॉडी-मॉय चॉइस’ का नाम दिया है। इसमें वह कैमरे के सामने एक-एक करके अपने सारे कपड़े उतारती हुई नजर आ रही हैं। उनकी वीडियो का काफी लोग सपोर्ट कर रहे हैं। उन्ही में से एक एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला भी हैं। उन्होंने उनकी पोस्ट पर कमेंट भी किया है।

उर्वशी रौतेला ने लिखा, “हमें आप पर गर्व है क्वीन। हम महिलाओं का समर्थन करते हैं।” वहीं टीवी एक्ट्रेस स्मृति खन्ना ने भी कमेंट में सलाम करने वाला इमोजी बनाया है। इनके अलावा अन्य यूजर्स ने भी नोरौजी के इस वीडियो की सराहना की है।

फोटो साभार: एलनाज नोरौजी का इंस्टाग्राम

दरअसल, बॉलीवुड एक्ट्रेस एलनाज नौरोजी मूल रूप से ईरान की रहने वाली हैं। उनका पूरा परिवार भी ईरान में ही रहता है। सितंबर 2022 में भी उन्होंने हिजाब विरोधी प्रदर्शन को लेकर इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में उन्होंने बताया था कि कैसे ईरान में छोटी-छोटी बातों को लेकर लोगों के साथ बुरी तरह व्यवहार किया जाता है। यदि वजह थोड़ी सी भी बड़ी हुई तो उन्हें बेरहमी से पीटा भी जाता है। वह बॉलीवुड के कई कलाकारों के साथ टीवी एड में भी काम कर चुकी हैं।

बता दें कि ईरान में इन दिनों हिजाब विरोधी प्रदर्शन तेज हो गया है। इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हिजाब नहीं पहनने के कारण महसा अमीनी नाम की लड़की की पुलिस की पिटाई से मौत के बाद हुई थी। इस विरोध प्रदर्शन में अब तक कई लोग मारे जा चुके हैं। इसके बावजूद यह प्रदर्शन रुकने का नाम नहीं ले रहा है।

पहले किया दुष्कर्म, फिर वेश्यावृत्ति में धकेला: ब्रैडफॉर्ड में छोटी बच्ची से रेप मामले में उमर, खालिद, जमील समेत 24 आरोपित गिरफ्तार

यूनाइटेड किंगडम की वेस्ट यॉर्कशायर पुलिस ने ब्रैडफोर्ड के बाल यौन शोषण मामले में गुरुवार (6 अक्टूबर 2022) को उमर ताज नाम के एक अन्य आरोपित को गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी के बाद, यौन शोषण के इस मामले में आरोपितों की संख्या 24 हो गई है। आरोपित ने 13 साल की बच्ची के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया और उसे वेश्यावृत्ति में धकेल दिया था।

वेस्ट यॉर्कशायर पुलिस ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि बच्ची का दुष्कर्म करने के आरोपित उमर ताज (35) को शुक्रवार (7 अक्टूबर 2022) को ब्रैडफोर्ड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। इस मामले के शेष आरोपित सितंबर में अदालत में पेश हो चुके हैं। पीड़ित बच्ची के साथ साल 2007 से 2011 के बीच दुष्कर्म को अंजाम दिया गया था।

बलात्कार और बाल वेश्यावृत्ति सहित यौन अपराधों के लिए अब तक पासकले मासिमो (40), खजर हुसैन (41), सैयद शब्बीर (39), अब्बास हुसैन (41), मुसादक हुसैन (37), अमजद हुसैन) 36 सैयद हसन बशारत (33), हन्नान मिया (37), बुरहान उद्दीन अली (36), अब्दुल बसिथ (40), आसिफ बुधिया (39), शाजाद खादम (38), इब्राहिम अली (35), अशफाक अहमद (34) ), आफताब अहमद (33), यूसुफ भट्टी (36), अनवर अजीज (32), शाहीनुल हक (35), जमील अहमद (32), ब्रायन डेविस (53), खालिद परवेज (63), मोहम्मद नदीम अली (38) और मुहम्मद यासिर (36) को गिरफ्तार किया गया है।

बाल यौन शोषण के अलावा, यह मामला ग्रूमिंग जिहाद से भी संबंधित है। वास्तव में, ग्रूमिंग जिहाद एक वैश्विक मुद्दा है। हालाँकि, यह यूनाइटेड किंगडम में सबसे अधिक तेजी से बढ़ता जा रहा है। जहाँ, इस्लामवादी लड़के वहाँ की कम उम्र की लड़कियों और महिलाओं को अपना ‘शिकार’ बना रहे हैं। इस्लामिक लड़के, लड़कियों को सजा देने के तौर पर उनका दैहिक शोषण करते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 में, यूनाइटेड किंगडम की पुलिस ने वेस्ट यॉर्कशायर में कम उम्र की 8 लड़कियों के खिलाफ 150 से अधिक यौन अपराधों के लिए 32 पुरुषों को आरोपित बनाया है। पीड़ित लड़कियों के साथ साल 1999 से 2012 के बीच सैकड़ों बार दुष्कर्म किए गए थे। सबसे बड़ी बात यह है कि इन लड़कियों की उम्र 13-16 वर्ष के बीच थी।

अधिकांश आरोपी यूनाइटेड किंगडम के बैटले और ड्यूस्बरी इलाकों के रहने वाले हैं। उन पर बलात्कार, अभद्रता, एक बच्चे के साथ यौन गतिविधि, तस्करी, बलात्कार के लिए उकसाने, बलात्कार की साजिश, बच्चों की अश्लील तस्वीरें बनाने और पॉर्न वीडियो बनाने सहित कई गंभीर यौन अपराधों का आरोप लगाया गया है।

2018-2019 में इंग्लैंड में लगभग 19,000 बच्चियों का किया गया यौन शोषण

डेलीमेल की रिपोर्ट में बताया गया है, आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि पिछले वर्ष इंग्लैंड में लगभग 19,000 नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण किया किया गया था। इंग्लैंड में स्थानीय अधिकारियों ने 2018-19 में लगभग 18,700 संदिग्ध पीड़ितों की पहचान की है। यह संख्या पाँच साल पहले 3,300 थी। इसका सीधा मतलब है कि यूनाइटेड किंगडम में इस्लामवादी लड़के, छोटी बच्चियों का साथ बड़ी संख्या में यौन शोषण कर रहे हैं।

पहले देना पड़ा इस्तीफा, अब पहुँचे थाने: 10 हजार हिंदुओं के धर्मांतरण कार्यक्रम में ‘हिंदूविरोधी शपथ’ लेकर फँसे AAP के पूर्व मंत्री, शिकायतें दर्ज

केजरीवाल सरकार के पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम (Rajendra Pal Gautam) की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद दिल्ली पुलिस आज (11 अक्टूबर 2022) उनके घर पर पहुँची। हिंदू देवी-देवताओं को ना मानने की शपथ दिलाने के ​मामले में पुलिस ने उन्हें नोटिस देकर पहाड़गंज थाने में पूछताछ के लिए बुलाया। इसके बाद वह पूछताछ के लिए यहाँ पहुँचे।

दिल्ली पुलिस के नोटिस में कहा गया, “दशहरे के दिन (5 अक्टूबर 2022) नई दिल्ली के अंबेडकर भवन में हुए एक कार्यक्रम में कुछ शब्द कहे गए थे। इनसे हिंदुओं की भावनाएँ आहत हुई हैं। इस कार्यक्रम में आप (राजेंद्र पाल गौतम) भी मौजूद थे।” दिल्ली पुलिस की ओर से यह भी कहा गया है कि इस मामले में लिखित शिकायतें मिली हैं, जिनके आधार पर मामले की जाँच की जा रही है।

दिल्ली पुलिस का नोटिस (फोटो साभार: इंडिया टुडे)

बता दें कि राजेंद्र पाल गौतम 5 अक्टूबर 2022 को दिल्ली में आयोजित एक धर्मांतरण कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इसमें 10 हजार हिंदुओं को बौद्ध धर्म में धर्मांतरित किया गया था। कार्यक्रम का वीडियो दिल्ली बीजेपी ने शेयर किया था। वीडियो में आप (AAP) मंत्री समेत कई अन्य लोगों को शपथ लेते हुए दिखाया गया है।

शपथ में कहा जा रहा था, “मैं हिंदू धर्म के देवी देवताओं ब्रह्मा, विष्णु, महेश, श्रीराम और श्रीकृष्ण को भगवान नहीं मानूँगा, न ही उनकी पूजा करूँगा। मुझे राम और कृष्ण में कोई विश्वास नहीं होगा, जिन्हें भगवान का अवतार माना जाता है।”

यह शपथ बीआर अंबेडकर की विवादास्पद 22 प्रतिज्ञाओं से काफी मिलती-जुलती थी। इस दौरान उन्हे यह भी कहते हुए सुना गया था, “मैं इस बात को नहीं मानता और न ही मानूँगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे। मैं इसे केवल पागलपन और झूठा प्रचार मानता हूँ। मैं श्राद्ध नहीं करूँगा और न ही पिंडदान करूँगा।”

इसके बाद भाजपा दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने 7 अगस्त 2022 को आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल और राजेंद्र पाल गौतम के खिलाफ संसद मार्ग थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। आदेश गुप्ता ने अपनी शिकायत में केजरीवाल और गौतम पर हिंदुओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर आम जनता को भड़काने और अंबेडकर भवन में बयान देकर उसे सोशल मीडिया साझा करके दंगा, हिंसा और सार्वजनिक उपद्रव भड़काने की कोशिश करने का आरोप लगाया था।

‘पालघर हत्याकांड की हो CBI जाँच, हमें कोई दिक्कत नहीं’ : SC में बोली महाराष्ट्र की शिंदे सरकार, उद्धव सरकार हमेशा विरोध करती थी

साल 2020 में महाराष्ट्र के पालघर में मॉब लिंचिंग कर साधुओं की हत्या कर दी गई थी। हत्या के इस मामले में महाराष्ट्र सरकार रुख बदलते हुए इसकी जाँच सीबीआई को सौंपने को तैयार हो गई है। मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र की भाजपा-शिंदे सरकार ने कोर्ट से कहा है कि उन्हें इस मामले की जाँच सीबीआई से कराने में कोई आपत्ति नहीं है। इससे पहले, तत्कालीन उद्धव सरकार ने सीबीआई जाँच कराने से इनकार कर दिया था।

दरअसल, अप्रैल 2022 में महाराज कल्पवृक्ष गिरि और सुशील गिरि महाराज को पालघर में भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था। जब यह घटना हुई थी तब दोनों साधु मुंबई से सूरत की यात्रा कर रहे थे। इस यात्रा के दौरान, उनकी कार को 200 से अधिक लोगों की भीड़ ने रोक लिया था। इसके बाद भीड़ ने पथराव करने के बाद उनकी कार को उलट दिया था। जिसके बाद, साधुओं की इतनी पिटाई की गई थी कि उन्होंने दम तोड़ दिया था।

इस घटना के बाद, जून 2020 में पंच दशाबन जूना अखाड़े के हिंदू साधुओं और दो मृतक साधुओं के रिश्तेदारों ने मामले की जाँच कर रहे राज्य के अधिकारियों पर पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट से एनआईए/सीबीआई जाँच की माँग की थी।

इस मामले में, भाजपा समर्थित एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामे दाखिल कर कहा कि वह पालघर हिंसा मामले में दो साधुओं समेत 3 लोगों की हत्या के मामले की जाँच को सीबीआई को सौंपने के लिए तैयार है। इस जाँच से सरकार को कोई आपत्ति नहीं होगी।

गौरतलब है कि इससे पहले जब इस मामले की सुनवाई हुई थी तब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली तत्कालीन महाविकास अघाड़ी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई जाँच का विरोध किया था। उद्धव ठाकरे सरकार की ओर से यह दलील दी गई थी कि महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की है। साथ ही, जिन पुलिसकर्मियों ने इसकी जाँच में लापरवाही की थी उनके खिलाफ एक्शन भी लिया जा चुका है।

बंगाल में ₹5000 करोड़ के घोटाले को पार्थ चटर्जी ने अकेले नहीं दिया अंजाम, TMC विधायक मणिक भट्टाचार्य भी थे साथ: ED ने गिरफ्तार किया

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी के बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक माणिक भट्टाचार्य (Trinamool Congress MLA Manik Bhattacharya) को गिरफ्तार किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) की सुबह भट्टाचार्य को गिरफ्तार किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दायर चार्जशीट में यह खुलासा किया गया था कि पार्थ चटर्जी और माणिक भट्टाचार्य ने मिलकर शिक्षक भर्ती में धांधली की है। पार्थ चटर्जी के फोन से भी जाँच एजेंसी को माणिक भट्टाचार्य के बारे में कई जानकारियाँ मिली थीं।

अधिकारियों ने टीएमसी के विधायक को सोमवार (10 अक्टूबर 2022) को पूछताछ के लिए बुलाया था। रातभर चली लंबी पूछताछ के बाद उन्हें आज गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में भट्टाचार्य केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) और ईडी की जाँच के दायरे में थे। जुलाई 2022 में जाँच एजेंसियों ने उनके घर की तलाशी ली थी। वहाँ से उन्होंने एक हार्ड डिस्क ड्राइव भी बरामद किया था, जिसमें भर्ती घोटाले में नौकरी पाने वाले अयोग्य उम्मीदवारों की सूची दिखाई गई थी।

माणिक भट्टाचार्य पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय की एकल पीठ ने सितंबर 2022 में उन्हें प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश दिया था।

बताया गया था कि सुप्रीम और हाई कोर्ट के निर्देश के बावजूद माणिक सीबीआई दफ्तर में नहीं पहुँचे थे। उनका मोबाइल फोन भी बंद था। इसके बाद हाई कोर्ट की तरफ से इस मामले के लिए नियुक्त किए गए एसीपी ने जादवपुर थाने जाकर उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। हालाँकि, माणिक के घरवालों ने कहा था कि वे सुबह ही निकल गए थे। जबकि उनके कुछ करीबियों के मुताबिक वे दिल्ली में थे।

बता दें कि पश्चिम बंगाल के शिक्षक घोटाले में पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को ईडी ने 23 जुलाई 2022 को गिरफ्तार किया था। अपनी करीबी अर्पिता मुखर्जी के अलग-अलग फ्लैटों में मिले करोड़ों रुपए को लेकर पार्थ चटर्जी ने अलग ही कहानी बयाँ की थी। 28 सितंबर, 2022 को पार्थ चटर्जी की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई थी। इस दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पार्थ को जमानत देने का विरोध किया था। ED ने अपने 14,643 पन्नों के दस्तावेज कोर्ट में जमा किए थे। एजेंसी ने खुलासा किया था कि पार्थ ने अपनी पत्नी की मौत के बाद उसकी कंपनी टेक्स्ट फैब प्राइवेट लिमिटेड के अधिकांश शेयर अर्पिता के नाम कर दिए थे।

ट्विन टॉवर गिराने का दिया आदेश, 30 साल बाद अपने पिता का आदेश पलटा : जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ बनेंगे देश के 50वें मुख्य न्यायाधीश, CJI यूयू ललित ने भेजा नाम

देश के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित (CJI UU Lalit) ने मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) को अपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (Justice DY Chandrachud) के नाम की सिफारिश की है। सीजेआई यूयू ललित आगामी 8 नवंबर को अपने पद से रिटायर हो रहे हैं। जिसके बाद, 9 नवंबर को जस्टिस चंद्रचूड़ देश के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कानून मंत्री किरण रिजिजू ने शुक्रवार (7 अक्टूबर 202) को सीजेआई यूयू ललित को पत्र लिखकर उनसे उनके उत्तराधिकारी का नाम बताने के लिए कहा था। इसके बाद सीजेआई ललित ने जस्टिस चंद्रचूड़ को अपना उत्तराधिकारी बताया। नियमानुसार, देश के वर्तमान न्यायाधीश जिसके नाम की भी सिफारिश करते हैं वही व्यक्ति देश का अगला मुख्य न्यायाधीश होता है।

वर्तमान में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस उदय उमेश ललित (यूयू ललित) देश के 49वें मुख्य न्यायाधीश हैं और अब जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ (डीवाई चंद्रचूड़) देश के 50वें मुख्य न्यायाधीश होंगे। सीजेआई यूयू ललित का कार्यकाल 8 नवंबर 2022 को खत्म हो रहा है। जबकि, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल 9 नवंबर से शुरू होकर 10 नवंबर 2024 तक होगा।

जस्टिस चंद्रचूड़ के पिता यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ (याईवी चंद्रचूड़) देश के 16वें मुख्य न्यायाधीश थे। उनका कार्यकाल 22 फरवरी 1978 से 11 जुलाई 1985 तक लगभग 7 साल का था। भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में यह अब तक का सबसे लंबा कार्यकाल है। पिता के रिटायर होने के 37 साल बाद अब जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ उसी कुर्सी पर बैठने जा रहे हैं।

11 नवंबर 1959 को जन्‍मे जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ (डीवाई चंद्रचूड़) वर्तमान समय में सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज हैं। उन्‍होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से एलएलबी (LLB) की है। इसके अलावा उन्होंने, ऑस्‍ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड लॉ स्‍कूल समेत देश-विदेश के कई लॉ स्कूलों में लेक्‍चर्स दिए हैं। साल 1998 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया गया था।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ 13 मई 2016 से सुप्रीम कोर्ट के जज हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदभार संभालने से पहले वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रह चुके हैं। इसके अलावा, जज नियुक्त होने से पहले वह देश के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भी रह चुके हैं। यही नहीं, वह सबरीमाला भीमा कोरेगांव, समलैंगिकता, आधार और अयोध्या केस में भी जज रह चुके हैं।

इसके अलावा नोएडा का जो ट्विन टॉवर गिराया गया उसे लेकर भी डीवाई चंद्रचूड़ ने फैसला सुनाया था। इसके अलावा वह 2017-18 में अपने पिता द्वारा सुनाए गए फैसलों को पलटने के कारण भी चर्चा में आए थे। ये फैसला एडल्टरी लॉ और शिवकांत शुक्ला वर्सेज एडीएम जबलपुर केस में था। डीवाई चंद्रचूड़ ने इस केस को मौलिक अधिकार से जुड़ा केस माना था जबकि उनके पिता इसे मौलिक अधिकार नहीं माना था।

इसी तरह 1985 में तत्कालीन सीजेआई वाईवी चंद्रचूड़ की बेंच ने सौमित्र विष्णु मामले में आईपीसी की धारा 497 को बरकरार रखा था लेकिन 2018 में डीवाई चंद्रचूड़ वाली बेंच ने इसको बदल दिया था।

‘देखो मेरा पूरा घर जला दिया… सब लूट ले गए’: बंगाल के मोमिनपुर में कट्टरपंथियों का आतंक, सहमी हिंदू महिलाओं ने सुनाई आपबीती; Videos

कोलकाता के मोमिनपुर इलाके में इस्लामवादियों द्वारा हिंदुओं पर हमला करने के दो दिन बाद पीड़ितों ने सामने आकर अपनी आपबीती बताई है। एक हिंदू महिला ने बताया, “हम परसों रात से डर के साए में जी रहे हैं। उन्होंने बम फेंककर दहशत का माहौल पैदा कर दिया। हमारे लड़कों को घर से भगा दिया। हमारे घर जला दिए गए। डर से हम लोगों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।”

पीड़िता ने कहा कि इस क्षेत्र के लोगों को अपने घरों को छोड़कर सड़कों पर रहने को विवश होना पड़ा। पुलिस भी 4 घंटे के बाद आई। हिंदू निवासियों ने स्थानीय प्रशासन द्वारा कोई भी मदद नहीं करने पर दुख व्यक्त किया। जबकि कोलकाता के मेयर और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस क्षेत्र के बेहद करीब रहते थे। लेकिन इनमें से कोई भी स्थानीय हिंदुओं की मदद के लिए नहीं आया। वहाँ रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि पुलिस स्टेशन यहाँ से सिर्फ 15 मिनट की दूरी पर है।

मोमिनपुर हिंसा में इस्लामवादियों ने हिंदुओं का सारा सामान जलाकर खाक कर दिया है। लेकिन पुलिस अभी भी मुस्लिम बहुसंख्यकों पर नरम दिखाई दे रही है। वीडियो में एक व्यक्ति पीछे से कहता है, “देखो मेरा घर पूरी तरह से जल गया है।” पीड़ितों ने शिकायत की कि उनके घरों को इस्लामवादियों ने लूट भी की। पीली साड़ी पहने हुए एक महिला काफी दुखी नजर आई। उसने बताया, “इस बमबारी में मुझे सबसे अधिक नुकसान हुआ।”

वीडियो में आप देख सकते हैं कि बमबारी में उसका बिस्तर जलकर राख बन गया है। महिला वीडियो में कह रही है, “दादा, देखो वो मेरा सारा सामान लूटकर ले गए। कुछ भी नहीं बचा है। जिस दीवार पर टीवी लगा है, उसे भी बमबारी में उड़ा दिया। पंखे की हालत देखिए। हमें सुरक्षा दी जाए।”

एक अन्य हिंदू पीड़ित ने बताया, “खिड़कियों से हमारे घरों पर पेट्रोल बम फेंके गए। खिड़की टूट गई थी और काँच पूरे बिस्तर पर बिखरा हुआ था। पथराव की वजह से जगह-जगह ईंटें पड़ी थीं। सुबह हमें गंदगी साफ करनी थी। हमें डर था कि कहीं छत गिर न जाए। हमारा सारा सामान बिस्तर पर था।”

मोमिनपुर हिंदू विरोधी दंगे

इससे पहले ऑपइंडिया ने बताया था कि कैसे इस्लामवादियों ने रविवार (9 अक्टूबर) शाम को मोमिनपुर के मैला डिपो में हिंदुओं पर हमला किया। यहाँ लक्ष्मी पूजा की शाम हिंदुओं की दुकानों और घरों पर दंगाइयों ने तोड़फोड़ की। इस दौरान हिंदुओं के घरों पर पेट्रोल बम फेंके गए, उनकी झोपड़ियों में आग लगा दी गई, उनके सामान तोड़ दिए गए। इसके बाद ये कट्टरपंथी भीड़ इकबालपुर थाने के भीतर इस्लामी झंडा लेकर घुसी और वहाँ भी काफी उत्पात मचाया गया।

पश्चिम बंगाल भाजपा प्रमुख सुकांत मजूमदार के अनुसार, कोलकाता बंदरगाह क्षेत्र के मयूरभंज में उनके घरों पर हमले के बाद हिंदुओं को पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं, भाजपा नेता प्रीतम सूर ने भी इस भयावह घटना का वीडियो साझा किया, जहाँ बदमाशों को सड़कों पर हाथापाई करते हुए देखा गया।

हिंसा के मद्देनजर प्रदेश के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने बंगाल के गवर्नर व गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अपील की थी कि वह मोमिनपुर में सेंट्रोल फोर्स (CAPF) तैनात करें क्योंकि राज्य सरकार दंगाइयों का मजहब देख उन्हें कुछ भी कहने से बच रही है।

उल्लेखनीय है कि बंगाल में यह हिंसा 9 अक्टूबर 2022 को भड़की। वहाँ पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन के मौके पर इस्लामियों ने हिंदुओं के घरों और दुकानों पर इस्लामी झंडे लगा दिए थे, जिन्हें कथिततौर पर हिंदुओं ने खोल दिया था। इसी के बाद 700 से अधिक की भीड़ में कट्टरपंथी इकट्ठा हुए और हिंदुओं के घर में तोड़फोड़ शुरू कर दी। बार-बार पुलिस को बुलाए जाने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई। 

‘पहली बीवी को नहीं खिला पा रहा जो मुस्लिम उसे दूसरे निकाह का अधिकार नहीं’: इलाहाबाद कोर्ट ने कुरान का हवाला देकर सुनाया फैसला, 3 बच्चों के अब्बा की याचिका खारिज

इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad high Court) ने दो निकाह करने वाले एक व्यक्ति के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने इस मामले में सोमवार (10 अक्टूबर 2022) को सुनवाई करते हुए कहा, “कुरान के अनुसार एक मुस्लिम व्यक्ति दूसरा निकाह तभी कर सकता है, जब वह अपनी पहली बीवी और बच्चों को पालने में सक्षम हो। यदि वह उन्हें पालने में असमर्थ है, तो उसे दूसरा निकाह करने का कोई अधिकार नहीं है।”

अदालत ने सूरा 4 आयत 3 (कुरान) का हवाला देते हुए कहा, “दूसरा निकाह तभी किया जा सकता है, जब शौहर अपनी पहली बीवी और उससे हुए बच्चों का भरण पोषण करने में सक्षम हो। यह बात सभी मुस्लिम पुरुषों पर लागू होती है।” इसके बाद अदालत ने शौहर अजीजुर्रहमान की याचिका खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति सूर्य प्रकाश केसरवानी और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की पीठ ने कहा, “जिस समाज में महिला का सम्मान नहीं, उसे सभ्य समाज नहीं कहा जा सकता। महिलाओं का सम्मान करने वाले देश को ही सभ्य देश कहा जा सकता है। मुस्लिमों को खुद ही पहली बीवी के रहते दूसरा निकाह करने से बचना चाहिए। कुरान भी एक बीवी के साथ न्याय न कर पाने वाले मुस्लिम व्यक्ति को दूसरे निकाह की इजाजत नहीं देता।”

दो जजों की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के तमाम फैसलों का हवाला देते हुए आगे कहा कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रत्येक नागरिक को गरिमामय जीवन जीने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार प्राप्त है। अनुच्छेद-14 सभी को समानता का अधिकार देता है और अनुच्छेद-15(2) लिंग आदि के आधार पर भेदभाव करने पर रोक लगाता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजीजुर्रहमान और हमीदुन्निशा का निकाह 12 मई 1999 को हुआ था। वादी बीवी अपने अब्बा की इकलौती संतान है, जिसके चलते उसके अब्बा ने अपनी सारी संपत्ति उसे दान कर दी है। महिला अपने तीन बच्चों के साथ 93 वर्षीय अब्बा की देखभाल करती है। उसके शौहर ने उसे बिना बताए दूसरा निकाह कर लिया और उससे भी उसके बच्चे हैं। शौहर ने फैमिली कोर्ट में दूसरी बीवी को अपने साथ रखने के लिए केस दायर किया था। जब यहाँ अजीजुर्रहमान के पक्ष में फैसला नहीं आया, तो उसने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

‘गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, सिर तन से जुदा’ : UP से लेकर MP तक ईद के जुलूस में लगे ‘कट्टरपंथी नारे’, इस्लामी भीड़ में नाबालिग भी उछलते दिखे

ईद मिलादुन्नबी के मौके पर रविवार (9 अक्टूबर, 2022) को देश के अलग-अलग हिस्सों में ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगे हैं। राजस्थान के जोधपुर व उदयपुर, गुजरात के ऊना, उत्तर प्रदेश के अमेठी और आज़मगढ़, मध्यप्रदेश के खंडवा, महाराष्ट्र के अमरावती में इस तरह की नारेबाजी हुई है। हिन्दू संगठनों ने ऐसी नारेबाजी के खिलाफ कड़ी आपत्ति दर्ज करवाई है। अलग-अलग हिस्सों में पुलिस ने केस दर्ज कर के कार्रवाई शुरू कर दी है।

आज़मगढ़ में 3 गिरफ्तार और जिला बदर की कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ में भी ईद मिलादुन्नबी के मौके पर ‘सिर तन से जुदा’ का नारा लगाया गया। यह नारेबाजी शहर के पुरानी कोतवाली क्षेत्र में की गई। नारेबाजी के वायरल वीडियो में ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक सज़ा- सिर तन से जुदा, सिर तन से जुदा’ के साथ ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर’ भी कहा जा रहा है।

नारेबाजी के बाद पुलिस ने फ़ौरन ही कार्रवाई करते हुए 3 नाबालिगों को हिरासत में ले लिया। पुलिस के मुताबिक बाकी आरोपितों की पहचान करवाई जा रही है। पुलिस के अनुसार इन आरोपितों को साम्प्रदयिक गुंडा घोषित करते हुए उन्हें जिला बदर किया जाएगा।

खंडवा में नारेबाजों की गिरफ्तारी के बाद हंगामा

मध्यप्रदेश के खंडवा में भी ईद मिलादुन्नबी के मौके पर ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगे। इस नारेबाजी का भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में बीच सड़क पर हरे झंडे लहराते हुए यह नारेबाजी की गई।

इस नारेबाजी पर जवाब देते हुए मध्यप्रदेश के गृहमंन्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि केस दर्ज हो चुका है और सबूतों की जाँच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने रात में कार्रवाई करते हुए नारेबाजी के आरोप में 4 युवकों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद थाने के आगे मुस्लिम महिलाओं की भारी भीड़ जमा हो गई। भीड़ ने कुछ देर बाद धरने का रूप ले लिया जिसमें शहर के क़ाज़ी भी मौजूद थे। पुलिस द्वारा आधी रात के बाद चारों आरोपितों को छोड़ने के बाद धरना खत्म हुआ। इस हंगामे का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

गुजरात के ऊना में नारेबाजी

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गुजरात के ऊना में भी ‘सिर तन से जुदा’ का नारा ईद मिलादुन्नबी के मौके पर लगाया गया है। इस वीडियो में एक भीड़ बाजार के बीच से यही नारा लगाती गुजरती दिखाई दे रही है। नारेबाजी करने वालों में कुछ नाबालिग लड़के भी दिख रहे हैं। बाद में ‘नारा-ए-हैदरी, या अली या अली’ भी सुनाई दे रहा है।

एक अन्य वीडियो में कुछ ही देर बाद यही भीड़ ऊना पुलिस स्टेशन के आगे से गुजरती हुई दिखाई दे रही है।

अमरावती में DJ पर बजाया सिर तन से जुदा का गाना

ईद मिलादुन्नबी के मौके पर ‘सिर तन से जुदा’ के नारे महाराष्ट्र के अमरावती में भी लगने का आरोप है। यहाँ के वायरल हो रहे वीडियो में बाकायदा गाड़ी पर DJ बाँध कर न सिर्फ ये गाना जोर-जोर से बजाया जा रहा है बल्कि मौजूद भीड़ भी उस नारे के सुर में सुर मिलाती दिख रही है। यहाँ भी भीड़ में हरे झंडों के साथ कई नाबालिग दिखाई दे रहे हैं।

महाराष्ट्र से भाजपा के राज्यसभा सांसद अनिल बोंडे के मुताबिक ‘सिर तन से जुदा’ की नारेबाजी करने वाले लोग PFI से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि नारेबाजी अमरावती के 2 अलग-अलग हिस्सों में की गई। किसी का कत्ल करने की सोच पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस से कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है।

गौरतलब है कि इस से पहले उत्तर प्रदेश के अमेठी और राजस्थान के जोधपुर में सिर तन से जुदा की नारेबाजी की गई थी। इन दोनों मामलों में पुलिस केस दर्ज कर के जाँच कर रही है।

सुल्तानपुर और गोंडा में कट्टरपंथियों का उपद्रव: मस्जिद के पास शोभा यात्रा पर पथराव, सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर घर पर हमला

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर और गोंडा में इस्लामी कट्टरपंथियों का उपद्रव सामने आया है। सुल्तानपुर में मस्जिद के पास से गुजर रही माँ दुर्गा की शोभा यात्रा पर पथराव हुआ। पत्थरबाजी में पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं। वहीं गोंडा में सोशल मीडिया पोस्ट से नाराज मुस्लिमों ने एक हिन्दू परिवार पर हमला कर दिया। पुलिस ने दोनों मामलों में केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। घटनाएँ सोमवार (10 अक्टूबर 2022) की हैं।

सुल्तानपुर में शोभा यात्रा पर हमला

मामला सुल्तानपुर के बल्दीराय थानाक्षेत्र का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रद्धालु देवी माता की प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जा रहे थे। वलीपुर बाजार के पास जब शोभा यात्रा मस्जिद के पास से गुजर रही थी तो डीजे को लेकर कुछ लोगों ने विवाद पैदा कर दिया। इसके बाद शोभायात्रा पर पथराव शुरू कर दिया गया। आरोप है कि हथगोले भी फेंके गए। पुलिसकर्मी सहित 10 लोगों के घायल होने की सूचना है।

आरोप है कि पुलिस के वाहनों के साथ देवी प्रतिमा में भी तोड़फोड़ की गई है। अतिरिक्त फ़ोर्स आने पर उपद्रवियों को लगभग डेढ़ घंटे बाद क़ाबू किया जा सका। सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक के मुताबिक घटना के सभी दोषियों को चिन्हित कर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। घटना के फुटेज और घायलों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं हैं।

गोंडा में हिंदू परिवार पर हमला

उत्तर प्रदेश के ही गोंडा जिले में सोशल मीडिया पोस्ट से नाराज मुस्लिम समूह ने एक हिन्दू परिवार पर हमला कर दिया। घटना खरगूपुर थाना क्षेत्र की है। बताया जा रहा है कि भीड़ ने रिक्की नाम के एक युवक की लिखी पोस्ट से नाराज होकर पथराव किया। पुलिस ने फ़ौरन ही मौके पर पहुँच कर हालत को काबू में किया। रिक्की को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

इस हमले में पुलिस के वाहन के साथ कई घरों के शीशे टूटे हैं। गोंडा पुलिस के मुताबिक रिक्की के घर पर पथराव करने वाले आरोपितों को चिन्हित कर उनके खिलाफ भी केस दर्ज किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार अब तक पथराव में शामिल कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।