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‘शिवलिंगम’ बन जाता है ‘महमूद गजनवी’, ‘वणक्कम’ हो जाता है ‘अस्सलामु अलैकुम’: धर्मांतरण मतलब राष्ट्रांतरण, प्रताप-शिवाजी नायक की जगह हो जाते हैं दुश्मन

गुजरात के डीसा में एक हिन्दू युवती को लव जिहाद में फँसा कर उसे मुस्लिम बना दिया। बाद में धाक-धमकी से माँ का भी इस्लामी धर्मांतरण करवा दिया और पिता से 25 लाख रुपए की माँग की गई। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, लड़की के चाचा ने बताया कि उनकी भतीजी को पड़ोस में रहने वाले एजाज ने प्रेमजाल में फँसाया और घर से भगाकर ले गया। बाद में उसका धर्म भी बदलवा दिया। जब लड़की की माँ बेटी को तलाशते हुए एजाज के यहाँ पहुँचीं तो उसे भी कैद कर लिया।

इसके बाद एजाज के परिवार वालों ने माँ-बेटी की रिहाई के बदले 25 लाख रुपए की माँग की। इससे परेशान होकर लड़की के पिता ने जहर खा लिया। उनका एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। शनिवार (3 सितंबर, 2022) को इस घटना के विरोध में डीसा  के हिन्दू सड़कों पर आ गए और लव जिहाद के खिलाफ रैली में 15,000 से अधिक लोग शामिल हुए।

धर्मांतरण से इतनी आपत्ति क्यों है?

अमूमन लव-जिहाद के केस में सेक्युलर जमात के लोग प्रश्न करते हैं कि धर्म भले ही बदल जाएगा लेकिन वे लोग रहेंगे तो भारतीय ही। तो धर्मांतरण से इतनी आपत्ति क्यों है? तो इस लेख के माध्यम से हम उस आपत्ति को समझाएँगे। RSS के 5वें सरसंघचालक केएस सुदर्शन ने अपनी एक पुस्तिका ‘धर्मांतरण अथवा राष्ट्रांतरण’ में एक दृष्टांत दिया है कि ‘मीनाक्षीपुरम में एक नवधर्मांतरित बच्चे व उसके पिता से एक पत्रकार की भेंट हुई।

बच्चे ने अपनी तमिल शैली में अभिवादन करते हुए जब ‘वणक्कम’ कहा तो तुरंत ही उसके पिता ने उसकी पीठ पर एक धौल जमाते हुए उसे डाँटा, “नहीं, अब तुम हिन्दू नहीं हो। तमिल भी नहीं हो। अब तुम्हें ‘वणक्कम’ नहीं,’अस्सलामु अलैकुम’ कहना चाहिए।” उस पत्रकार ने जब बच्चे से का नाम पूछा तो भोले बच्चे ने अपनी पहले की आदत के अनुसार कहा, ‘शिवलिंगम’।  पुनः सिर पर एक चपत और आदेश – “नहीं, वह नाम भूल जाओ। अब तुम ‘महमूद ग़ज़नवी’ हो।”

‘शिवलिंगम’ और ‘महमूद ग़ज़नवी’। सिक्का ही बदल गया! और भी बदले हुए नाम थे वहाँ पर – अफजलखां, मुहम्मद अली जिन्ना आदि।’ कहने की बात है कि धर्मांतरण की एक घटना के साथ ही ‘वणक्कम’ पराया हो गया और ‘अस्सलामु अलैकुम’ अपना हो गया। सोमनाथ के शिवलिंग को तोड़ने वाले विदेशी आक्रमणकारी महमूद ग़ज़नवी से नाता जुड़वा दिया। ऐसे में सम्पूर्ण हिन्दू समाज में जाति, पंथ, भाषा व दलों की सीमाओं को लाँघ कर धर्मांतरण से आपत्ति होना स्वाभाविक नहीं क्या?

इस विषय में सुदर्शन आगे लिखते हैं कि जिस धार्मिक और आध्यात्मिक आधार पर मातृभूमि के प्रति भक्ति का भाव भारत में सँवारा गया है, वह समग्र आधार ही इस्लामी चिंतन के अनुसार ‘बुतपरस्ती’ होने के कारण ‘कुफ्र’ है और इसीलिए सर्वथा त्याज्य है। वहाँ मातृभूमि के प्रति निष्ठा उत्पन्न करने का कोई आधार नहीं ,क्योंकि इस्लामी मिल्लत की संकल्पना किसी देश की सीमा को स्वीकार नहीं करती और दुनिया के सब मुस्लिमों की एक बिरादरी मानती है। 

इसपर MR बेग कहते हैं, “चूँकि सिद्धान्ततः मुस्लिमों का कोई देश नहीं होना चाहिए, इसलिए इस कमी की पूर्ति उनमें अत्यधिक संघभाव के द्वारा होती है। यह विशेषता उन्हें गैर-इस्लामी देशों में वहाँ के जीवन से समरस नहीं होने देती और एक निष्ठावान मुसलमान को न विश्ववादी बनने देती है, न राष्ट्रवादी और न मानवतावादी।” निष्ठा के सम्बन्ध में सुदर्शन लिखते हैं, “भारत का बहुजन समाज मूर्तिपूजक होने से हिन्दुस्थान दारुल-हरब है, यह भाव सर्वसाधारण मुस्लिमों के मन में रहना कोई अस्वाभाविक बात नहीं है और इसलिए यह देश उसकी श्रद्धा का पात्र तब तक नहीं बन सकता जब तक यह दारुल-इस्लाम नहीं बन जाता।”

हामिद दलवाई ने पश्चिम बंगाल के मुस्लिमों की भावना का उल्लेख करते हुए एक लेख में कहा, कि “पश्चिम बंगाल का हर मुस्लिम शेख मुजीबुर्रहमान को मीर जाफर समझता है और उसे गोली से उड़ा देना चाहता है। राष्ट्रनिष्ठा और इस्लामनिष्ठा के एक द्वैत का, जिसे मुस्लिम एक गैर-इस्लामी देश में अनुभव करता है, अभी तक का इस्लामी-चिन्तन कोई समाधान नहीं खोज पाया है और इसीलिए आज इस्लाम में पंथांतरित होने का अर्थ है – उस देशनिष्ठा से दूर जाना जो किसी भी देश की राष्ट्रीयता का आधार है।”

निष्ठाओं का यही संघर्ष आखिर एक दिन शेख मुजीबुर्रहमान और उनके परिवार की निर्मम हत्या में परिणत हो गया। अम्बेडकर ने भी इसी चिंता से कि इस्लाम में दलित वर्गों का धर्मांतरण उन सभी का अराष्ट्रीयकरण कर देगा, उन्होंने इस्लाम में जाना योग्य नहीं समझा। ‘अखण्ड भारत और मुस्लिम समस्या’ में पंडित दीनदयाल उपाध्याय लिखते हैं, “मुस्लिम बनते ही पहला विचार यदि कोई करेगा तो वह है पूरी दुनिया को मुस्लिम बनाऊँगा। मुस्लिम समझता है कि जो मुहम्मद को मानता है वह अपना और जो नहीं मानता वह काफिर है। इस प्रकार वह दूसरे धर्मों के प्रति असहिष्णु हो जाता है।”

इसी कारण से, कल तक जिस व्यक्ति की प्रेरणा के जो स्त्रोत वेद, रामायण, महाभारत, गीता थे, मुस्लिम बनने के बाद वह अब एक किताब के आगे कुछ भी मानने को तैयार नहीं होगा। कल तक वह राम और कृष्ण को अपना पूर्वज मानता था लेकिन अब सोहराब और रुस्तम को मानने लगेगा। कल तक गाय को पूजता था, अब उसी को खाने की परम लालसा रखेगा। कल तक उसके नायक प्रताप और शिवाजी थे, अब वे उसके दुश्मन बन जाएँगे।

कल तक वह भारत को माता की तरह पूजता था लेकिन अब यह देश उसकी श्रद्धा का पात्र नहीं रहेगा। एकाएक उसकी निष्ठा दारुल-इस्लामिक देशों के प्रति हो जाएगी जहाँ मुस्लिम बहुमत में होंगे। और कल तक जो भारत उसकी पुण्यभूमि थी, अब उसका स्थान मक्का-मदीना ले लेंगे। दीनदयाल उपाध्याय अपनी पुस्तिका में लिखते हैं, “जो मुस्लिम मोहम्मद का अनुयायी है, यदि वह अनुयायी मात्र ही हो तो कोई चिंता की बात नहीं, पर चिंता का विषय यह है कि मुस्लिम बनने के बाद उसकी प्रकृति ही बदल जाती है। वह राष्ट्र से अलग हो जाता है और राष्ट्र के लिए शत्रु हो जाता है।

‘प्रधान-पति महफूज खान करता है प्रताड़ित, जमीन पर किया कब्ज़ा’: कुशीनगर में दलितों ने लगाए ‘मकान बिकाऊ हैं’ के पोस्टर, कहा – पलायन को मजबूर

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के रामकोला थाना क्षेत्र स्थित सपहा दहाऊर टोला में मुस्लिम ग्राम प्रधान के पति के कारण हिन्दुओं के पलायन की खबर है। गाँव के हिन्दुओं ने कहा कि वो पलायन के लिए मजबूर हैं। 20 घरों के बाहर ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर भी लग गए हैं। दलित बस्ती के लोगों का कहना है कि ग्राम प्रधान के शौहर व प्रतिनिधि महफूज खान उन्हें पानी टंकी के नाम पर प्रताड़ित कर रहा है। लोगों ने उसे दबंग छवि का व्यक्ति करार दिया है।

आरोप है कि वो दलितों को धमकी देता है। उसके ही उत्पीड़न से तंग आकर लोगों ने अपने मकान बेचने का फैसला किया है। इस बस्ती में अधिकतर लोग अनुसूचित जाति (SC) से ताल्लुक रखते हैं। पोस्टर चस्पाने की खबर के बाद सोमवार (5 सितंबर, 2022) की देर रात पुलिस भी मौके पर पहुँची। पुलिसकर्मियों ने इन पोस्टरों को फाड़ डाला, लेकिन लोग अब भी अड़े हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हरिजन आबादी की जमीन कब्ज़ा कर के उस पर पानी टंकी बना तो उन्हें गाँव छोड़ना पड़ेगा।

पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाया-बुझाया। ये विवाद कप्तानगंज तहसील के सपहा दहाऊर टोले पर 284 नंबर की जमीन को लेकर है, जो दलित बस्ती के नाम पर है। इशरत जहाँ गाँव की प्रधान हैं, जिसके पति व प्रतिनिधि महफूज खान ने इसी जमीन पर कब्ज़ा कर के यहाँ पानी टंकी बनाने का प्रस्ताव पारित करवा दिया है। विरोध करने पर दलितों पर उसने मुकदमा भी दर्ज करवा दिया। महफूज खान पर ग्रामीणों को परेशान करने का भी आरोप है।

इसीलिए, लोगों ने गाँव से सामूहिक पलायन का फैसला लिया। ADM देवीदयाल वर्मा और ASP रितेश कुमार सिंह ने ग्रामीणों से वार्ता करने के बाद प्रशासन को निर्देश दिया कि पानी टंकी के लिए किसी और भूमि को चिह्नित किया जाए। इसके बाद ग्रामीण शांत हुए। पानी टंकी के लिए कहीं अन्य सरकारी जमीन की तलाश की जा रही है। सोशल मीडिया पर ‘मकान बिकाऊ है’ का पोस्टर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले पर संज्ञान लिया था।

2 दिन से गायब था 11 साल का समीर, मदरसे में रेत के नीचे दबा मिला: बदबू आने से लाश का पता चला, परिजन जता रहे हत्या की आशंका

हरियाणा के एक मदरसे से 11 साल के बच्चे की लाश मिली है। यह मदरसा नूँह जिले के शाह चोखा गाँव में है। बच्चा दो दिन से लापता था। परिजन हत्या की आशंका जता रहे हैं।

जिस बच्चे की लाश मिली है, वह मदरसे में ही पढ़ाई करता था। शनिवार (3 सितंबर 2022) को वह मदरसे से ही लापता हुआ था। सोमवार को उसका शव मदरसे के नीचे रेत में दबा मिला। शव से बदबू आ रही थी। मृतक बच्चे की पहचान समीर के तौर पर बताई गई है। उसके पिता इस दुनिया में नहीं हैं।

समीर अपने माता-पिता का इकलौता लड़का था। उसकी 3 बहने हैं। समीर के चाचा इकबाल ने हत्या की आशंका जताते हुए FIR दर्ज करवाई है।

बताया जा रहा है कि मदरसे में समीर एक साल से उर्दू और अरबी की पढ़ाई कर रहा था। मदरसा संचालक मौलाना जाकिर हुसैन ने बताया कि शनिवार की शाम पाँच बजे की नमाज में मौजूद था। लेकिन जब शाम के करीब 7 बजे बच्चों की हाजिरी ली गई तो वह नहीं मिला। इसके सभी बच्चों ने उसे तलाशा। जब उसका कोई पता नहीं चला तो परिवार वालों को इसकी सूचना दी गई।

समीर के चाचा ने बताया कि समीर के गायब होने की सूचना मदरसा संचालक ने फोन पर दी थी। उसके बाद हमने उसे हर जगह तलाशा। सोमवार को बदबू आने के बाद लोगों को उसके शव का पता चला। उन्होंने हत्या की आशंका जताते हुए मामले की गहराई से जाँच की माँग की है।

वहीं न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार एक अन्य घटना में नूँह जिले के ही पिनगवां स्थित एक मदरसे का छात्र सोमवार से लापता है। उसकी उम्र 15 साल है। अब तक उसका भी कोई सुराग नहीं लगा है।

‘वह पढ़ रहा है सारे कमेंट’ : माता-पिता बोले- एक दिन जरूर छाएगा अर्शदीप, विकिपीडिया से छेड़छाड़ कर बताया था खालिस्तानी

एशिया कप 2022 में भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान अर्शदीप सिंह से छूटी एक कैच के बाद वह लगातार चर्चा में हैं। उन्हें खालिस्तानी दिखाने के लिए पाकिस्तान से नए-नए अकॉउंट बनाए गए और बदनाम भारतीयों को किया गया। इस बीच दुबई में मैच देखने गए अर्शदीप के माता-पिता भी वापस लौटे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में उन सब सवालों पर प्रतिक्रिया दी जो इस समय अर्शदीप को लेकर उठ रहे हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, अर्शदीप के पिता, सीआईएसएफ में सेवा दे चुके दर्शन सिंह ने कहा, “हम मैच देखने गए थे। भारत-पाक मैच हमेशा दिलचस्प होता है। जब कोई टीम हार जाती है तो उनके प्रशंसक भावुक हो जाते हैं, गुस्सा हो जाते हैं और कुछ शब्द भी कह देते हैं। हम इसे सकारात्मक रूप से ले रहे हैं और इसमें कोई समस्या नहीं है।”

अर्शदीप की माँ बलजीत कौर कहती हैं, “हमने पहला मैच भी देखा था और दूसरा मैच भी अच्छा था। लेकिन कुछ गलतियाँ हो जाती हैं और वो किसी से भी हो सकती हैं। लोगो की आदत होती है कहना। उन्हें कहने दो। अगर लोग आप पर कमेंट कर रहे हैं तो इसका मतलब है कि वो आपको प्यार करते हैं।”

खुद सारी आलोचना पढ़ रहे हैं अर्शदीप

चंडीगढ़ में भी स्पोर्ट्स तक से बातचीत के दौरान अर्शदीप के पिता से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “मैं इसके बारे में ज्यादा बात नहीं करना चाहता। खेल में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। बिना फैन्स के कोई गेम कुछ नहीं है। कुछ फैन्स समर्थन में होते हैं कुछ आलोचना करते हैं। खिलाड़ी का काम ये होता है कि वह उसे पॉजिटिव ले। फैन तो चाहता है कि उनकी टीम हर मैच जीते। लेकिन जीतना तो उनमें से किसी एक को है जो ग्राउंड पर हैं। मैच अच्छा हुआ है।”

अर्शदीप के पिता ने खेल के अलावा किसी भी चीज पर टिप्पणी करने से बिलकुल मना किया। उन्होंने अर्शदीप के लिए ‘खालिस्तानी’ जैसे शब्द कहे जाने पर भी कोई बात नहीं की और न ही इस विषय पर कुछ कहा जहाँ सरकार ने विकिपीडिया से जवाब माँगा है।

उन्होंने कहा कि दुबई में अर्शदीप उनके साथ था और वो सारे कमेंट खुद पढ़ रहा था ताकि खुद को मजबूत बना सके। वह आलोचनाओं को सकारात्मक ढंग से ले रहा था और इसी तरह वो अपने खेल को आगे सुधार पाएगा। उसके तो शब्द यही थे, “मैं ये ट्वीट और मैसेज देखकर हँस रहा हूँ। मैं इसको पॉजिटिव ही लूँगा। इससे मुझे और आत्मविश्वास मिला है।” अर्शदीप के माता-पिता कहते हैं, “अभी बहुत सारे टूर्नामेंट बाकी बचे हैं। वो जरूर छाएगा।”

अर्शदीप को बदनाम करने की कोशिश, विकिपीडिया से सरकार का सवाल

बता दें कि एक ओर जहाँ अर्शदीप सिंह के माता-पिता हैं जो अपने बेटे की ट्रोलिंग पर कुछ भी टिप्पणी करने से ज्यादा भारत के लिए ट्रॉफी और बेटे के खेल पर बात कर रहे हैं। वहीं आम आदमी पार्टी के नेता व पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह और ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक जुबैर समेत तमाम लिबरल भारत को बदनाम करने में व्यस्त हैं। ये दिखाया जा रहा है कि भारतीय अर्शदीप को खालिस्तानी बता रहे हैं जबकि हकीकत ये है कि ऐसे ट्वीट करने वाले पाकिस्तान हैंडल्स हैं। इसी बीच आईटी मंत्रालय ने विकिपीडिया को समन भेजकर पूछा है कि कैसे अर्शदीप सिंह के विकि पेज के साथ छेड़छाड़ हुई और ऐसी हरकतों को रोकने के लिए उनके पास क्या सुरक्षा मापदंड हैं।

भारत की मदद से बांग्लादेश को मिलेगी सस्ती बिजली, जल बँटवारे से असम को भी लाभ: बांग्लादेशी प्रधानमंत्री से मिले मोदी, कहा – बढ़ रहे हमारे संबंध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की उनकी समकक्ष शेख हसीना ने दिल्ली में मंगलवार (6 सितंबर, 2022) को एक जॉइंट प्रेस मीट को सम्बोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने या दिलाया कि पिछले वर्ष हमने बांग्लादेश की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगाँठ, हमारे राजनयिक संबंधों की स्वर्ण जयंती, और बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की जन्म शताब्दी को एक साथ मनाया था। उन्होंने ये भी याद दिलाया कि पिछले वर्ष 6 दिसंबर को हमने पहला ‘मैत्री दिवस’ भी साथ मिलकर पूरी दुनिया में मनाया।

पीएम मोदी ने कहा कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री शेख हसीना जी की यात्रा हमारी आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान हो रही है, ऐसे में उन्हें पूरा विश्वास है कि अगले 25 वर्षों के अमृत काल में भारत-बांग्लोदश मित्रता नई ऊँचाइयाँ छूएगी। उन्होंने जानकारी दी कि आज बांग्लादेश भारत का सबसे बड़ा विकास साझीदार और क्षेत्र में हमारा सबसे बड़ा व्यापार पार्टनर है। उन्होंने कहा कि हमारे घनिष्ठ सांस्कृतिक और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों में भी निरंतर वृद्धि हुई है।

पीएम मोदी ने कहा, “हमने आईटी, अंतरिक्ष और न्यूक्लियर एनर्जी जैसे सेक्टर में भी सहयोग बढ़ाने का निश्चय किया, जो हमारी युवा पीढ़ियों के लिए रुचि रखते हैं। हम जलवायु परिवर्तन और सुंदरबन जैसी साझा धरोहर को संरक्षित रखने पर भी सहयोग जारी रखेंगे। मैत्री सुपर थर्मल पॉवर प्लांट के उद्घाटन से बांग्लादेश के लोगों को सस्ती बिजली मिलेगी। बिना किसी बाधा के बिजली की सप्लाई हो, इसके लिए पॉवर लाइन हेतु भी हमारे बीच बात चल रही है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी 54 नदियाँ हैं जो भारत-बांग्लादेश सीमा से गुज़रती हैं, और सदियों से दोनों देशों के लोगों की आजीविका से जुड़ी रही हैं। उन्होंने कहा कि ये नदियाँ, इनके बारे में लोक-कहानियाँ, लोक-गीत, हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत के भी साक्षी रहे हैं। उन्होंने ये जानकारी भी दी कि भारत-बांग्लादेश ने कुशियारा नदी से जल बँटवारे पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे भारत में दक्षिणी असम और बांग्लादेश में सिलहट क्षेत्र को लाभ होगा।

पीएम मोदी ने कहा कि आज हमने आतंकवाद और कट्टरवाद के खिलाफ सहयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि 1971 की भावना को जीवंत रखने के लिए भी यह बहुत आवश्यक है कि हम ऐसी शक्तियों का मिल कर मुकाबला करें, जो हमारे आपसी विश्वास पर आघात करना चाहती हैं। शेख हसीना के इस 4 दिवसीय दौरे में कई MoU पर भी हस्ताक्षर हुए हैं। उन्होंने ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए बधाई भी दी।

‘एक खास समुदाय को खुश करने के लिए मेरे पति को जेल में रखा है’: MLA राजा सिंह की पत्नी पहुँचीं हाईकोर्ट, त्वरित सुनवाई की माँग

भाजपा के निलंबित नेता और तेलंगाना के हैदराबाद स्थित गोशमहल के विधायक राजा सिंह की हिरासत के खिलाफ उनकी पत्नी उच्च-न्यायालय पहुँची हैं। उन्हें हैदराबाद पुलिस द्वारा ‘प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट (PD Act)’ के तहत हिरासत में रखा गया है। उन्हें पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। साथ ही इस मामले में त्वरित सुनवाई की माँग भी की गई है। हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर लिया है और जल्द ही इस पर सुनवाई होने की उम्मीद है।

विधायक राजा सिंह की पत्नी ने कहा है कि उनके पति को सिर्फ इसीलिए जेल में रखा गया है, ताकि एक खास समुदाय को संतुष्ट किया जा सके। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक खास समुदाय के तुष्टिकरण के लिए ये किया गया है और इसका अन्य कोई कारण नहीं है। राजा सिंह को 25 अगस्त, 2022 को चेरलापल्ली जेल में डाल दिया गया था। पुलिस का कहना है कि राजा सिंह के खिलाफ 101 आपराधिक मामले दर्ज हैं और उन पर सांप्रदायिक तनाव के भी 18 FIR दर्ज हैं।

हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर के आदेश पर राजा सिंह को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने दावा किया है कि वो आदतन भड़काऊ और उत्तेजक भाषण देने के आरोपित हैं, जिससे तेलंगाना और हैदराबाद के ‘शांतिपूर्ण माहौल’ में दो समुदायों के बीच संघर्ष का ख़तरा बना रहता है। पुलिस ने उन पर पैगंबर मुहम्मद और उनके जीवन के खिलाफ ‘काफी ईशनिंदा वाला बयान’ देने के आरोप भी लगाए हैं। इससे पहले 23 अगस्त को उन्हें हिरासत में लिया गया था, लेकिन फिर अदालत के आदेश के बाद रिहा कर दिया गया था।

दबीरपुरा पुलिस थाने में उनके खिलाफ कई धाराओं में FIR दर्ज की गई है। भाजपा ने कहा था कि उनका बयान पार्टी लाइन के विरुद्ध था। राजा सिंह ने YouTube पर एक वीडियो जारी किया था, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की। PD एक्ट के तहत पुलिस को किसी व्यक्ति को सिर्फ इसीलिए हिरासत में रखने का अधिकार मिल जाता है, क्योंकि उससे कानून-व्यवस्था को खतरा होने की आशंका रहती है, भले ही उसने कोई अपराध किया हो या नहीं।

3 बच्चों की माँ से जबरन निकाह करना चाहता था मुर्तजा, इनकार करने पर सीने में चाकू घोंप मार डाला: राजस्थान की घटना, बर्थडे पार्टी से लौट रही थी महिला

राजस्थान (Rajasthan) के बांसवाड़ा (Banswara) में एक सिरफिरे ने सोमवार (5 सितंबर 2022) की रात बर्थडे पार्टी से घर लौट रही महिला के सीने में चाकू घोंपकर उसकी हत्या कर दी। वह महिला पर कई दिनों से निकाह का दबाव बना रहा था। हत्या से कुछ दिन पहले उसने महिला से मारपीट भी की थी।

पुलिस ने बताया कि मुस्लिम कॉलोनी गली नंबर-6 की रहने वाली शहनाज अपनी भाभी के साथ रिश्तेदार की बर्थ डे पार्टी से घर लौट रही थी। तभी मुर्तजा ने रास्ते में उससे कुछ बात की और फिर उसके सीने में चाकू मार दिया। चाकू लगने के बाद शहनाज एक मकान के सामने गिर गई और आरोपित मौके से फरार हो गया। पुलिस जब घटनास्थल पर पहुँची तो वहाँ चारों और खून बिखरा था। शहनाज को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शहनाज तीन बच्चों की अम्मी थी। पहले शौहर से उसकी दो बेटियाँ हैं। ये रिश्ता ज्यादा नहीं चला। पहले शौहर को तलाक देने के बाद करीब सात साल पहले उसका दूसरा निकाह हुआ था, जिससे उसकी 1 बेटी है। वहीं, मुस्लिम कॉलोनी में गली नंबर-7 में रहने वाला मुर्तजा भी शादीशुदा था। लेकिन शहनाज से निकाह करने के लिए उसने अपनी बीवी को तलाक दे दिया। हत्यारा पेशे से ड्राइवर है।

मृतका की भतीजी फातेमा ने बताया कि मुर्तजा से चार साल पहले शहनाज ने उधार पैसे लिए थे। पैसे के बदले वह उससे दुर्व्यवहार करता था। उस पर निकाह के लिए दबाव बनाता था। घटना से चार दिन पहले ही मुर्तजा ने निकाह से इनकार करने पर शहनाज से मारपीट की थी। जाँच में सामने आया है कि मृतका ने बाजार से काफी कर्ज ले रखा था। ब्याजखोरों से उसने 20 से 30 प्रतिशत मासिक दर पर ब्याज से पैसे लिए थे। वह कर्ज नहीं चुका पा रही थी।

बताया जा रहा है कि वारदात के बाद मुर्तजा ने अपने दोस्तों को फोन किया था। उसने दोस्तों से कहा कि वह मर जाएगा, लेकिन पुलिस के हाथ नहीं आएगा। शहनाज ने उसे प्यार में धोखा दिया। उसने उसे इसकी सजा दी है। पुलिस आरोपित की तलाश कर रही है।

‘कोई मिनी-मिडी में स्कूल आना चाहे तो उसे आने दें क्या’ : कर्नाटक बुर्का विवाद पर SC का सवाल, जस्टिस ने कहा- पगड़ी और हिजाब एक नहीं

कर्नाटक के हिजाब विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने केस की सुनवाई की तारीख 7 सितंबर 2022 तय की। इससे पहले कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से सवाल किया कि क्या स्कूल में छात्र कुछ भी पहन सकते हैं जो उनकी इच्छा हो और क्या मजहबी अभ्यासों को स्कूल से अलग नहीं रखना चाहिए?

जस्टिस हेमंत गुप्ता और सुधांशु धुलिया ने मुख्य याचिकाकर्ता के वकील संजय हेगड़े से पूछा,

“क्या छात्र मिनी, मिडी जो चाहें उसे पहनकर स्कूल में आ सकते हैं। आपके पास धार्मिक अधिकार हो सकता है। पर ये अधिकार क्या शैक्षणिक संस्थानों के भीतर भी ला सकते हैं जहाँ यूनिफॉर्म निर्धारित की गई हों?”

बेंच ने कहा, “आप हिजाब या स्कार्फ पहनने के हकदार हो सकते हैं, लेकिन क्या एक यूनिफॉर्म निर्धारित जगह पर इस अधिकार का लाना ठीक है?

सुप्रीम कोर्ट के सवालों पर हेगड़े ने उत्तर देने की बजाय कहा, “क्या किसी को सिर्फ इसलिए कॉलेज से निकाला जा सकता है क्योंकि उसने तय यूनिफॉर्म कोड का पालन नहीं किया, ये उचित है क्या?” उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा राज्य के कानून में कॉलेज डेवलपमेंट कमेटी की कोई मान्यता नहीं है जबकि यही कमेटी ड्रेस कोड तय करती है।

हेगड़े की दलील पर एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया, “डेवलपमेंट कमेटी यूनिफॉर्म निर्धारित करती है क्योंकि राज्य सरकार ने उन्हें अधिकार दे रखा है। इस कमेटी में शिक्षक, पेरेंट्स, स्थानीय विधायक होते हैं। मुस्लिम कॉलेज में भी यूनिफॉर्म वहाँ की कमेटी तय करती है।”

वहीं, जस्टिस गुप्ता ने हेगड़े की बात सुन कहा कहा कि पब्लिक प्लेस पर ड्रेस कोड लागू होता ही है। एक महिला वकील बीते दिनों जींस पहनकर आ गईं थीं, उन्हें भी तुरंत मना किया है। इसी तरह गोल्फ कोर्स का भी अपना ड्रेस कोड होता है। इसके बाद कोर्ट ने कहा, “हिजाब का जो पूरा विवाद है वो धार्मिक नहीं है। केस की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।”

मालूम हो कि इस सुनवाई में हिजाब को उचित ठहराने के लिए पगड़ी और तिलक पर भी वकील राजीव धवन ने प्रश्न खड़े किए। हालाँकि जस्टिस गुप्ता ने कहा, “पगड़ी को हिजाब के समान नहीं कहा जा सकता, वह धार्मिक नहीं होती। इसे राजशाही दरबारों में पहना जाता था। मेरे दादा जी कानून की प्रेक्टिस करते हुए उसे पहनते थे। इसकी तुलना हिजाब से मत कीजिए।”

हिजाब विवाद पर हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया था?

बता दें कि कर्नाटक हाईकोर्ट में 14 मार्च को हाईकोर्ट का फैसला आया था। इसमें कहा गया था कि छात्राएँ तय यूनिफॉर्म को पहनकर आने से मना नहीं कर सकती हैं। इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में 23 याचिकाएँ डालकर चुनौती दी गई। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव धवन, कपिल सिब्बल, दुष्यंत दवे और संजय हेगड़े पक्ष को रख रहे हैं।

कॉन्ग्रेस की महिला नेता ने तिरुपति मंदिर में की मारपीट, दी गालियाँ, फिर सोशल मीडिया पर खेला ‘विक्टिम कार्ड’: TTD ने बताई पूर्व ‘मिस बिकनी’ की करतूत

कॉन्ग्रेस की महिला नेता व अभिनेत्री अर्चना गौतम ने आंध्र प्रदेश स्थित तिरुमला तिरुपति मंदिर में दर्शन के दौरान उन्हें प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया था। साथ ही उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया था। अब मंदिर प्रबंधन ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। ‘तिरुमला तिरुपति देवस्थानम’ ने कहा है कि अभिनेत्री अर्चना गौतम द्वारा उसके कर्मचारी पर निशाना साधना एक घृणित कृत्य है। TTD ने कहा कि वो पूरी मजबूती से अभिनेत्री द्वारा किए गए दावों को ख़ारिज करता है।

TTD ने कहा कि उत्तर प्रदेश के शिवकांत तिवारी और अभिनेत्री अर्चना गौतम सहित 7 लोग मंगलवार (30 अगस्त, 2022) दर्शन के लिए एक केंद्रीय मंत्री का पत्र लेकर यहाँ आए थे। संस्था ने बताया कि एडिशनल EO दफ्तर में उन लोगों ने दर्शन के लिए पंजीकरण कराया, जिसके बाद उनके अनुशंसा पत्र के आधार पर उन्हें 300 रुपए के टिकट्स दिए गए। संस्था ने बताया कि तिवारी के नंबर पर इस सम्बन्ध में SMS भी गया था।

TTD ने बताया कि इसके बावजूद उन्होंने दर्शन नहीं किया। अगले दिन जब वो लोग फिर से पहुँचे तो कर्मचारी ने उन्हें बताया कि उनके टिकट्स अब एक्सपायर हो चुके हैं और उन्होंने समय पर दर्शन नहीं किया। TTD का कहना है कि इसी बीच अर्चना गौतम दफ्तर में घुस कर हंगामा करने लगीं और कर्मचारियों के विरुद्ध अपशब्दों का इस्तेमाल किया। मंदिर प्रबंधन ने कहा कि इस दौरान शिवकांत तिवारी चुपचाप ये सब देखते रहे।

TTD ने कहा, “हमारे कर्मचारियों ने अर्चना गौतम को शांत करने के लिए उन्हें नियम समझाए, लेकिन उन्होंने हमारे एक कर्मचारी के साथ धक्का-मुक्की भी कर डाली। उन्हें फिर से 300 रुपए वाले टिकट्स दिए गए और दर्शन करने के लिए कहा गया। लेकिन, दर्शन करने की जगह अभिनेत्री पुलिस थाने में चली गईं और हमारे एक कर्मचारी के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज करा दी कि उसने उनके साथ मारपीट की और गालियाँ बकी।”

‘तिरुपति तिरुमला देवस्थानम’ ने कहा कि पुलिस ने भी वीडियो देखने के बाद यही पाया कि महिला ने कर्मचारियों के खिलाफ भद्दी भाषा का इस्तेमाल किया था। संस्था ने बताया कि जब उन्हें वीडियो दिखाया गया कि वो कर्मचारियों के साथ मारपीट कर रही हैं, तब वो पुलिस थाने से निकल गईं। दर्शन के लिए जिद की तो उन्हें 10,500 रुपए का टिकट कटा कर VIP दर्शन के लिए कहा गया। लेकिन, उन्होंने सोशल मीडिया में वीडियो डाल कर आरोप लगा दिए। TTD ने इन आरोपों को झूठा और आधारहीन करार दिया है।

बता दें कि बतौर मॉडल और अभिनेत्री काम करने वाली अर्चना गौतम अक्सर सोशल मीडिया पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राजस्थान के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट जैसे कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ तस्वीरें डालती रहती हैं। 2018 में ‘मिस बिकनी इंडिया’ का ख़िताब जीत चुकीं अर्चना गौतम ने मेरठ की जिले के हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र से 2022 में चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उनकी जमानत भी जब्त हो गई थी।

जुलाई में माय लव, सितंबर में न फोटो-न नाम: ललित मोदी ने इंस्टाग्राम पर किया बदलाव, सुष्मिता सेन के साथ ब्रेकअप के लग रहे कयास

चंद महीनों में ही बॉलीवुड अभिनेत्री सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) और ललित मोदी (Lalit Modi) के रिश्तों में खटास की खबरें आने लगी है। कहा जा रहा है कि दोनों के बीच ब्रेकअप हो गया है। ललित मोदी ने सुष्मिता सेन के साथ अपना रिश्ता खत्म कर दिया है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट में भी बदलाव किया है। इससे ब्रेकअप की खबर ने जोड़ पकड़ लिया है।

दरअसल, IPL के पूर्व चेयरमैन और भगोड़े कारोबारी ललित मोदी ने 14 जुलाई 2022 को पूर्व मिस यूनिवर्स के साथ कुछ तस्वीरें साझा करते हुए उन्हें ‘माय लव’ बताया था। साथ ही अपने इंस्टाग्राम की प्रोफाइल पिक्चर में भी सुष्मिता सेन के साथ वाली तस्वीर लगाई थी। उन्होंने बायो में लिखा था, “फाइनली मैं अपनी पार्टनर इन क्राइम के साथ अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने जा रहा हूँ। माय लव सुष्मिता सेन।”

फोटो साभार:ललित मोदी का इन्स्टाग्राम

अब ललित मोदी अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदल डाली है। इसमें सुष्मिता नहीं हैं। इंस्टा बायो से भी सुष्मिता का नाम हटा दिया है। हालाँकि पूर्व मिस यूनिवर्स उन्हें अभी भी फॉलो कर रही हैं।

फोटो साभार:ललित मोदी का इन्स्टाग्राम

बता दें कि जब ललित मोदी के सुष्मिता सेन के साथ पहली बार रोमांटिक तस्वीरें शेयर की थी तो दोनों के शादी करने के कयास लगने लगे थे। इसके बाद मोदी ने साफ़ किया था कि वे रिलेशनशिप में हैं। दरअसल, ललित मोदी ने अपने ट्वीट में सुष्मिता सेन के लिए ‘Betterhalf’ लिखा था। इससे लोगों को लगा कि दोनों ने शादी कर ली है।

ललित मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “परिवार के साथ मालदीव्स, सार्डिनिया सहित एक लम्बे वैश्विक दौरे के बाद अभी वापस लंदन में, मेरे साथ हैं मेरी बेटरहाफ सुष्मिता सेन, एक नई शुरुआत एक नया जीवन आखिरकार, चाँद के पार चलें टाइप!”

ललित मोदी की इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स और सेलेब्स उन्हें बधाई देने लगे थे। ऐसे में ललित मोदी ने कुछ ही देर बाद दूसरा ट्वीट किया और लिखा, “साफ कर दूँ कि शादी नहीं हुई है, हम एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। लेकिन शादी भी बहुत जल्दी होगी एक दिन।” दोनों के बीच ब्रेकअप की वजह सुष्मिता के पूर्व बॉयफ्रेंड रोहमन शॉल को बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि जिस तरह अब भी सुष्मिता के साथ उनकी नजदीकियाँ दिख रही हैं, उसके कारण ही ललित मोदी ने अपनी राहें अलग की है। हालाँकि इस मसले पर अब तक तीनों में से किसी की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।