नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की जब से गठबंधन वाली सरकार बिहार में बनी है, तब से उनके मंत्रियों पर अलग-अलग आरोपों की खबरें भी सामने आ रही हैं। इसी क्रम में कानून मंत्री बने कार्तिकेय सिंह को तो अपने मंत्री पद से इस्तीफा तक देना पड़ गया, लेकिन उनके ऊपर चल रहा अपहरण का केस अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। वहीं कार्तिकेय सिंह इस समय अंडरग्राउंड बताए जा रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्व कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह पर अब पटना के एक बिल्डर राजू सिंह के अपहरण (Builder Raju Singh Abduction Case) का आरोप तो था ही, अब उन पर उन्हें जान से मार डालने की धमकी दिलवाने का आरोप भी लगा है। वहीं उन पर ये आरोप किसी ओर ने नहीं, बल्कि बिल्डर राजू सिंह की पत्नी दिव्या सिंह ने लगाए हैं। उन्होंने ने तो इस मामले में पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को एक पत्र भी लिखा है।
क्या बोलीं बिल्डर की पत्नी दिव्या सिंह
‘एबीपी न्यूज’ से से बातचीत करते हुए दिव्या सिंह ने बताया कि 20 अगस्त को कुछ लोग गाड़ियों के साथ पटना की बेउर जेल (जहाँ राजू सिंह बंद हैं) पहुँचे और उनके पति राजू सिंह को बुला कर समझौता करने का दबाव बनाया गया। दिव्या सिंह ने बताया कि उनके घर पर भी बहुत सारे लोग आ रहे हैं।
दिव्या ने आगे कहा कि उनके घर पर खुद को कार्तिकेय सिंह का आदमी बताने वाले लोग आ रहे हैं और कह रहे हैं कि समझौता कर लो, वरना दिक्कत हो जाएगी। दिव्या ने बताया कि इस मामले में उन्होंने SSP को पत्र भी लिखा और उनसे खुद मुलाकात भी की। वहीं उनसे सुरक्षा की माँग भी की, लेकिन अभी तक दिव्या सिंह तथा उनके परिवार को सुरक्षा नहीं दी गई है।
Patna, Bihar | Alok Singh, his (Kartikeya Singh’s) relative,said Raju Singh will be killed if he doesn’t compromise in the case…We are scared,can be killed anytime:Divya Singh, wife of Raju Singh, whose alleged kidnapping led to former Law Minister Kartikeya Singh’s resignation pic.twitter.com/ORV6fBBf8q
दिव्या सिंह बताया कि इसकी शुरुआत वर्ष 2014 से हुई थीं, उनके पति बिल्डर राजू सिंह का अपहरण किया गया और उनको मारने की भी कोशिश की गई। दिव्या ने आरोप लगाया कि कार्तिकेय सिंह का केस जानने के बाद भी, उन पर अपहरण का इतना बड़ा मामला होने के बाद भी, वो चुनाव लड़ते हैं और कानून मंत्री बनते हैं। दिव्या के मुताबिक, जब सरकार में ही आपराधिक किस्म के इंसान मौजूद रहेंगे तो आम जनता कैसे सुरक्षित रहेगी?
जब दिव्या सिंह से यह पूछा गया कि नीतीश कुमार को सुशासन बाबू के नाम से जाना जाता है, कानून के राज का दावा करने की बातें की जाती रहीं, क्या आपको लगता है कि ऐसा कुछ है? इसके जवाब में सिंह ने कहा कि अभी तक उन्हें ऐसा कुछ नहीं लगता, क्योंकि उन्होंने सुरक्षा की माँग की, लेकिन अभी तक उन्हें सुरक्षा नहीं मिली है। दिव्या ने कहा कि अगर कानून मंत्री ही अपराधी हो, तो कैसा सुरक्षा मिलेगी और कैसी सरकार चलेगी।
गौरतलब है कि दिव्या सिंह ने पटना हाई कोर्ट के जज को भेजे गए पत्र में लिखा, “मेरे पति से मिलने आए लोगों और उनके सीसीटीवी फुटेज का ब्यौरा निकाला जाए। मुझे कोर्ट पर पूरा भरोसा है।” दिव्या के अनुसार, कभी भी कुछ भी हो सकता है। उन्होंने बताया, “मेरे बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं, मैं बाहर नहीं जा रही हूँ। मुझे नीतीश जी से बहुत उम्मीदें हैं। मैं उनसे सही लोगों का समर्थन करने और कार्तिकेय सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध करती हूँ।”
उत्तर प्रदेश सरकार ने हाथरस हिंसा की साजिश में गिरफ्तार सिद्दीकी कप्पन (Siddique Kappan Case) की जमानत याचिका का विरोध किया है। इस मामले के जाँच अधिकारी, डिप्टी एसपी, एसटीएफ यूनिट आगरा और यूपी सरकार की तरफ से हलफनामा दाखिल किया गया है। कप्पन एक स्वतंत्र पत्रकार होने का दावा करता है, जबकि हलफनामे में कहा गया है कि कप्पन के राष्ट्रविरोधी एजेंडा रखने वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) जैसे चरमपंथी संगठन से गहरे संबंध रहे हैं।
वो दूसरे आरोपितों के साथ मिलकर देश में आंतक, धार्मिक कलह भड़काने की साजिश में शामिल था। हलफनामे में यूपी सरकार ने कहा है कि जाँच से पता चला है कि कप्पन के पीएफआई और सीएफआई के शीर्ष नेतृत्व, उनके छात्र संगठन से व्यक्तिगत संबंध हैं। वह तुर्की में IHH जैसे संगठनों के माध्यम से CFI और इस्लामिक आतंकवादी संगठन अलकायदा के बीच संपर्क स्थापित करता है।
हलफनामे में कहा गया है, “इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पिछले महीने कप्पन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।” हलफनामे में कप्पन की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा गया है कि आरोपित जानता था कि कानून की खामियों का फायदा कैसे उठाया जाता है और अगर उसे रिहा कर दिया गया, तो इस मामले से जुड़े गवाहों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। हलफनामे में, उत्तर प्रदेश सरकार ने उन मुद्दों को भी सूचीबद्ध किया है, जिनके बारे में सिद्दीकी कप्पन ने झूठ बोला था और जिन तथ्यों को उसने जमानत के लिए अदालत से छिपाया था।
1. सऊदी अरब में रोजगार
अपनी जमानत याचिका में सिद्दीकी कप्पन ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह 2002-2011 से सऊदी अरब में काम करता था। कप्पन ने आगे कहा कि 2011 में उसने सऊदी अरब में अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और केरल में बस गया। उसका कहना है कि वह पत्रकारिता के प्रति बहुत जुनूनी और एक सामयिक लेखक था, इसलिए उसने कोझीकोड में ‘Thejas’ समाचार पत्र में बतौर उप-संपादक शामिल होने का विकल्प चुना।
लेकिन, इसमें उसने यह उल्लेख नहीं किया कि उसने सऊदी अरब में लगभग एक दशक तक किसके लिए और किस कंपनी के लिए काम किया। उत्तर प्रदेश सरकार की जाँच में पता चला है कि सिद्दीकी कप्पन करीब 2009 से जेद्दा में गल्फ तेजस डेली में एक रिपोर्टर के रूप में कार्यरत था। आगरा में उसके लैपटॉप के एफएसएल से पुलिस को “Sidhique Kappan Resume.docx” नाम से एक फाइल मिली, जिसमें उसकी नौकरी के बारे में लिखा हुआ है।
सिद्दीकी कप्पन का रिज्यूमे
हलफनामे में कहा गया है, “Thejas चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का मलयालम भाषा का मुखपत्र है, जिसके केरल में छह संस्करण हैं और सऊदी अरब, कतर और बहरीन में अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो है। न्यूज पेपर की कवरेज का उद्देश्य धार्मिक कलह पैदा करना था। 2018 में इसे भारत में बंद करने के लिए कहा गया था।”
यूपी सरकार के हलफनामे में आगे कहा गया है, मई 2011 में जब अमेरिका ने इस्लामिक आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को मारा था, उस वक्त जिस मैगजीन के लिए कप्पन ने काम किया था, उसके संस्करण को कुरान की आयतों और उस पर शहीद लिख कर कवर पेज पर ओसामा की तस्वीर के साथ प्रकाशित किया गया था।
2011 में तेजस के कवर पेज पर ओसामा बिन लादेन
कवर पेज पर कुरान की आयत का अनुवाद है, “यह मत सोचो कि वे मर चुके हैं, अल्लाह की राह में क़त्ल करने वाले लोग, वे अल्लाह के साथ हैं उन्हें वहाँ उपहार दिए जाते हैं।” हलफनामे में यह भी कहा गया है कि जब यह मैगजीन प्रकाशित हुई थी, तब सिद्दीकी कप्पन इसमें कार्यरत था और एक दशक से अधिक समय तक वह इस मैगजीन के साथ जुड़ा रहा, जो एक आतंकवादी विचारधारा का समर्थन करती है।
2. कप्पन का झूठ- मेरे पास Tejhas का ID कार्ड नहीं
अपनी जमानत याचिका में सिद्दीकी कप्पन ने दावा किया कि जब उसे हाथरस जाते समय गिरफ्तार किया गया था, तो उसके पास तेजस का आईडी कार्ड नहीं था, बल्कि उसके पास केवल प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का कार्ड था। हालाँकि, उत्तर प्रदेश के हलफनामे में कप्पन के इस झूठ को भी उजागर किया गया है। हलफनामे में बताया गया है कि जब कप्पन को 5 अक्टूबर, 2020 में हाथरस में सामूहिक बलात्कार पीड़िता की मौत के बाद वहाँ जाते वक्त रास्ते में गिरफ्तार कर लिया गया था, तब उसके पास से 4 पहचान पत्र बरामद किए गए थे।
इसमें से 2 Thejas Daily के थे, 1 दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स का था और 1 प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का कार्ड था।
कप्पन के आईडी कार्ड
3. सिद्दीकी कप्पन को पीएफआई/सीएफआई ने नहीं कहा था
कप्पन का कहना है कि हाथरस जाने के लिए उसे पीएफआई या सीएफआई ने नहीं बल्कि उनकी कंपनी के मालिक ने कहा था। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन लोगों का विवरण दिया है जिनके साथ वह हाथरस जाने के दौरान था और वह कैसे पीएफआई और सीएफआई से जुड़ा था। सरकार ने कहा कि वह उन लोगों के साथ यात्रा कर रहा था जिन्हें पिछले दंगों में आरोपित बनाया गया था।
अतीकुर्रहमान, सीएफआई का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, मुजफ्फरनगर दंगों का आरोपित (केस क्राइम नंबर 1161/2019, पीएस कोतवाली नगर, मुजफ्फरनगर)
2. सीएफआई के दिल्ली चैप्टर के पूर्व महासचिव मसूद अहमद पर बहराइच दंगों का आरोप लगाया गया था। (केस क्राइम नंबर 225/2020, पीएस जारवाल रोड, बहराइच)
3. कार में सवार तीसरा सह-आरोपित यानि ड्राइवर आलम, सह-आरोपित दानिश खान का साला था, जो दिल्ली दंगों के मामले में आरोपित है (केस क्राइम नम्बर 59/2020, पीएस क्राइम ब्रांच सेल, दिल्ली)।
सरकार का तर्क है कि अगर वह केवल अपनी पत्रकारिता कर रहा था, तो वह दंगा आरोपितों के साथ क्यों जा रहा था? कप्पन से यह सवाल किया गया था और वह इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया था। हलफनामे में आगे कहा गया है, जाँच में यह भी सामने आया है कि याचिकाकर्ता वास्तव में आतंक फैलाने के लिए पीएफआई/सीएफआई के सदस्यों का हिस्सा था। सह-आरोपित रऊफ शरीफ (राष्ट्रीय महासचिव, सीएफआई) के निर्देश पर उसे हाथरस भेजा गया था, यहाँ जाने के लिए उसे पैसे भी दिए गए थे।
इसके अलावा, रऊफ शरीफ ने 05/10/2020 को दोपहर 12:26 बजे कप्पन को एक व्हाट्सएप मैसेज भेजा था। हलफनामे में कहा गया है, “व्हाट्सएप मैसेज में विशेष रूप से पूछा गया है कि वहाँ की स्थिति क्या है, जिसका अर्थ यह है कि शरीफ याचिकाकर्ता की जगह से अच्छी तरह वाकिफ था। सह-आरोपित रऊफ शरीफ के बयानों से भी इसकी पुष्टि होती है।
ऐसे में स्पष्ट है कि कप्पन को पीएफआई/सीएफआई द्वारा नियुक्त किया गया था। क्योंकि अज़ीमुखुम के संपादक के बयान में भी कहीं नहीं कहा गया है कि उन्होंने हाथरस की घटना को कवर करने के लिए याचिकाकर्ता को नियुक्त किया था। याचिकाकर्ता ने 5.10.2022 को दोपहर 12.10 बजे ऑफिस को एक व्हाट्सएप मैसेज भेजा था कि वह हाथरस जा रहा है।
5. सिद्दीकी कप्पन को पैसे किसलिए मिले?
कप्पन ने अपनी जमानत याचिका में दावा किया है कि सितंबर में मिले 25,000 रुपए और अक्टूबर में मिले 20,000 रुपए सिक्रेट वर्कशॉप और हाथरस की यात्रा करने के लिए नहीं मिले थे। यूपी सरकार का कहना है कि कप्पन के दावे झूठे और उच्च न्यायालय में दिए गए उसके बयान के विरोधाभासी हैं।
सरकार के हलफनामे में कहा गया है, “वर्तमान याचिका में, याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि 15.09.2020 को 25,000 रुपए उसके द्वारा जमा कराए गए थे, जिसे उसने एक घर बनाने के लिए बचाया था। वहीं, 4.10.2020 के 20,000 रुपए उसने अपने दोस्तों से जो उधार लिया था उसे वापस कर दिया था। हालाँकि, हाई कोर्ट के सामने याचिकाकर्ता ने (364 पृष्ठ पर) कहा है कि उसे ये रुपए तेजस डेली में काम करने के लिए उसके वेतन के रूप में दिए गए हैं।” इस प्रकार, याचिकाकर्ता के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास है।”
इसके अलावा, सरकार का कहना है कि कप्पन और पीएफआई के महासचिव कमल केपी के बीच बातचीत हुई है, जिससे पता चलता है कि सितंबर में कप्पन को एक सीक्रेट वर्कशॉप आयोजित करनी थी। कप्पन ने कमल केपी को अपने वॉयस नोट में यह भी कहा था, “वॉयस नोट सुनने के बाद उसे हटा दें।” इस वर्कशॉप के बाद कप्पन को दो बार 25,000 रुपए का भुगतान किया गया। हलफनामे में कहा गया है, “आगे सह-आरोपित रऊफ शरीफ ((Annexure R/7) के बयान में बताया गया है कि कमल केपी ने हाथरस यात्रा के लिए याचिकाकर्ता के खाते में पैसे जमा कराए थे। याचिकाकर्ता ने बाद में उच्च न्यायालय में दलील दी कि 09.01.2020 के वॉयस नोट में संदर्भित वर्कशॉप केवल एक विकिपीडिया वर्कशॉप थी।
6. सिद्दीकी कप्पन का दावा, पीएफआई/सीएफआई के साथ कोई संबंध नहीं
हलफनामे में कहा गया है, “जाँच में याचिकाकर्ता का चरमपंथी संगठन पीएफआई और सीएफआई के साथ गहरे संबंध का खुलासा किया गया है। पीएफआई/सीएफआई (मूल रूप से सिमी के पूर्व सदस्यों से बना है) के शीर्ष नेतृत्व के साथ उसके अच्छे संबंध है। यही नहीं उसके तुर्की में IHH जैसे अलकायदा से जुड़े संगठनों के साथ भी संबंध पाए गए हैं। याचिकाकर्ता और पीएफआई के शीर्ष नेतृत्व के बीच व्हाट्सएप चैट से इस बारे में पता चला है।”
वह केवल Thejas के साथ नहीं, इनके साथ भी जुड़ा हुआ था। सुप्रीम कोर्ट 9 सितंबर को कप्पन की जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर हलफनामे में कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। यूपी सरकार के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में अपनी जमानत याचिका में झूठ बोला है।
बता दें कि सिद्दीकी कप्पन को यूपी पुलिस ने 5 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था, जब वह हाथरस मामले को कवर करने के लिए गया हुआ था। PFI के चार सदस्य सिद्दीक कप्पन, अतीकुर्रहमान, आलम और मसूद को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के बाद यह खुलासा हुआ था कि उनकी हाथरस में दंगा फैलाने की साजिश थी। साथ ही रऊफ शरीफ का नाम सामने आया था।
हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल-भारत सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की चौथी रिपोर्ट;
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में बौद्धों के आस्था केंद्रों के पास दरगाह और मजारों का होना सामान्य है। अंगुलीमाल गुफा के आसपास के कई गाँव मुस्लिम बहुल हैं।
यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
पुरैनिया गाँव में अर्ध निर्मित मजार और ईदगाह
अंगुलीमाल गुफा से लगभग 1 किलोमीटर दूर भिनगा रोड पर हाइवे से लगभग 100 मीटर दूर बाग़ में एक अर्धनिर्मित मज़ार दिखी। इमारत के निर्माण का काम पूरा चुका था और प्लास्टर का काम बाकी था। निर्माण कौन करवा रहा था, इसका जवाब देने के लिए मौके पर कोई मौजूद नहीं था।
पुरैनिया में अर्ध निर्मित इबादतगाह
इस इबादतगाह से करीब आधा किलोमीटर आगे बढ़ने पर एक ईदगाह दिखी। यह ईदगाह मुख्य हाईवे से गाँव को जोड़ने वाले लिंक रोड से सटी हुई है। ईदगाह में लगभग 200 लोगों के एक साथ जमा होने की क्षमता है। ईदगाह को पक्की बॉउंड्री से घेरकर मुख्य द्वार पर लोहे का गेट लगा हुआ है।
सड़क के पास बनी ईदगाह
ग्राम पंचायत के तालाब पर भी मज़ार
श्रावस्ती के ही इकौना क्षेत्र में आने वाले गाँव पंचायत कटरा में हमने देखा कि जल संचयन के लिए मनरेगा के माध्यम से बने तालाब पर भी मज़ार बननी शुरू हो गई है। तालाब के बाँध पर कर्बला की आकृति बना उसे सीमेंट से पक्का कर दिया गया है। उस जगह पर इस्लामी झंडे भी लगे थे।
तालाब के बंधे पर बनी मज़ार
ग्राम पंचायत कटरा के जिस सर्वजनिक तालाब के बाँध पर मजार बन रही है, उसका निर्माण शासकीय योजना के अंतर्गत हुआ था। तालाब में पानी नाममात्र का था और उसमें हमें कई ताजिया फेंकी मिली। यह तालाब मुख्य हाईवे से अधिकतम 100 मीटर अंदर की तरफ है जो कटरा गाँव की कनेक्टेड सड़क पर है।
सर्वजनिक तालाब में फेंकी गई ताजिया के अवशेष
खंभों पर अयूब खान
श्रावस्ती जिले में बने हाईवे पर आगे बढ़ते हुए हमने राजनैतिक तौर पर सबसे अधिक डॉक्टर अयूब खान के बोर्ड देखे। ये बोर्ड हाइवे से सटे बिजली के खंभों पर लगे हुए थे। इन बोर्डों में सम्पूर्ण स्वराज्य रैली का आह्वान किया गया था। ये बोर्ड बलरामपुर जिले की सीमाओं से ले कर भिनगा तक लगभग 20 किलोमीटर के क्षेत्रों में लगे दिखाई दिए।
अयूब खान के बोर्ड
गौरतलब है कि डॉक्टर अयूब को भड़काऊ पर्चे बाँटने के आरोप में UP पुलिस 1 अगस्त 2021 को गिरफ्तार किया था। अक्टूबर 2021 में उन्हें जमानत मिली थी।
गोपियापुर में एक साथ कई कर्बला
श्रावस्ती से हाईवे के रास्ते बलरामपुर लौटते हुए हमें गोपियापुर नाम की जगह दिखाई दी। इस जगह पर सड़क के एकदम बगल में इस्लामी झंडे लगे हुए थे। कुछ झंडे हरे रंग के थे और कुछ लाल रंग। यहाँ हमें सड़क से सटे कम से कम 3 पक्के निर्माण दिखे, जिन्हें हरे रंग से रंगा गया था। स्थानीय लोगों से बताया कि यह कर्बला है।
गोपियापुर में बने कर्बला और टूटे ताज़िया
घरों पर इस्लामी झंडे, दरगाह और मदरसा
भले ही उस समय देश आज़ादी का 75वां साल मनाया रहा हो लेकिन गोपियापुर के पास सड़क के किनारे बने कई घरों पर इस्लामी झंडे फहराते दिखाई दिए। इन घरों के नीचे आमीन मोबाइल और यादव ट्रेवल्स के बोर्ड लगे दिखे। हरे झंडे के बीच में एक तिरंगा भी लहरा रहा था।
छतों पर लहराते इस्लामी झंडे
श्रावस्ती जाने वाले मुख्य हाईवे पर गोपियापुर के ही पास सड़क से सटी हुई एक दरगाह दिखी। इस दरगाह के आसपास चादरें बिक रहीं थीं और कई लोग जमा थे।
सड़क के किनारे बनी एदरगाह
इस दरगाह से महज 200 मीटर और आगे श्रावस्ती की तरफ बढ़ते ही सड़क से सटा एक मदरसा दिखाई दिया। मदरसे में काले रंग का गेट लगा हुआ था और बाहर अरबी भाषा में कुछ शब्द लिखे हुए थे।
गोपियापुर का मदरसा
मदरसे के पास ही चाय की दुकान पर एक व्यक्ति ने हमें बताया कि जितना आपको सड़क पर दिख रहा है, उसका कई गुना अंदर गाँवों में दिखेगा। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि अगर आप इसी जिले के भिनगा क्षेत्र में जाएँगे तो आपको इससे अधिक मस्जिद और मदरसे दिखाई देंगे।
दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों की आरोपित और तथाकथित मुस्लिम एक्टिविस्ट सफूरा जरगर का एडमिशन रद्द किए जाने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान इन छात्रों ने भड़काऊ नारे भी लगाए। सफूरा जरगर फरवरी 2020 में राष्ट्रीय राजधानी में हुए दंगों की आरोपित हैं, जो फ़िलहाल जमानत पर बाहर चल रही हैं। गर्भवती होने के कारण मानवीय आधार पर अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी।
जामिया के छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान ‘RSS की कब्र खुदेगी, जामिया की धरती पर’ और ‘ABVP की कब्र खुदेगी, जामिया की धरती पर’ जैसे भड़काऊ नारे भी लगाए। सफूरा जरगर ने अपना थीसिस पूरा नहीं किया था और इसमें कोई प्रगति भी नजर नहीं आ रही थी, जिसके बाद जामिया ने उनका एडमिशन रद्द कर दिया। 5 सेमेस्टर होने के बावजूद उन्होंने अपनी M.Phil की थीसिस सबमिट नहीं की थी। अब छात्र पोस्टर-बैनर लेकर उनके समर्थन में नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन के लिए उतरे हैं।
सफूरा जरगर ने सोशियोलॉजी विभाग में एडमिशन ले रखा था। जामिया ने कहा था कि उनके प्रोजेक्ट सुपरवाइजर को उनकी रिपोर्ट संतोषजनक नहीं लगी। साथ ही उन्होंने एक्सटेंशन के लिए भी अप्लाई नहीं किया था। कोरोना के कारण उन्हें एक अतिरिक्त छठा सेमेस्टर भी दिया गया था, जो 6 फरवरी, 2022 को ही ख़त्म हो चुका है। UAPA के तहत बुक की जा चुकीं सफूरा जरगर को CAA विरोधी दंगों के बाद अप्रैल 2020 में गिरफ्तार किया गया था।
सफूरा जरगर उस साजिश का हिस्सा थीं, जिसमें भारत सरकार को अस्थिर करने के लिए खून-खराबे किए गए थे। दिल्ली उच्च-न्यायालय ने उसी साल जून में उन्हें मानवीय आधार पर जमानत दे दी थी। केंद्र सरकार ने कहा था कि उनकी रिहाई से उसे कोई आपत्ति नहीं है, जिसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया। उन्हें कहा गया था कि वो जाँच को प्रभावित नहीं करेंगी और बोना अदालत को सूचित किए दिल्ली क्षेत्र को नहीं छोड़ेंगी।
सफूरा जरगर खुद भी सोशल मीडिया के माध्यम से जामिया मिल्लिया इस्लामिया के इस फैसले को मुद्दा बना रही हैं। इससे पहले उन्होंने दावा किया था कि एक्सटेंशन के लिए उन्हें दौड़ाया जा रहा है। उन्होंने खुद के ‘शिक्षा के अधिकार’ छीने जाने का आरोप लगाते हुए प्रोफेसरों पर धोखेबाजी और बेईमानी का आरोप भी मढ़ा था। उन्होंने अपने समर्थन में 150 कथित एक्टिविस्ट्स से जामिया को पत्र भी लिखवाया है। अब कैंपस में उनके समर्थन में भड़काऊ नारेबाजी हो रही है।
पुडुचेरी के कराईकल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ 8वीं कक्षा में पढ़ रहे एक छात्र को केवल इस कारण जान से हाथ धोना पड़ गया, क्योंकि उसने क्लास में टॉप किया था। क्लास में दूसरे स्थान पर आने वाली छात्रा की माँ विक्टोरिया सहयारानी ने इसी बात की जलन के कारण मासूम की हत्या कर दी। अब पुलिस ने उस औरत को गिरफ्तार कर लिया है।
मृतक छात्र का नाम बाला मणिकंदन (13) था। वह नहरू नगर कराईकल के स्टर्लाइट इंग्लिश स्कूल में आठवीं कक्षा में पढ़ाई करता था। स्कूल के वार्षिक उत्सव के दौरान उसकी एक सहपाठी की माँ ने उसे कोल्ड ड्रिंक में जहर देकर मारा।
ये है पूरा मामला
मृतक छात्र के पिता राजेंद्रन ने बताया कि उनका बेटा बाला शनिवार (2 सितंबर 2022) की सुबह स्कूल के वार्षिक उत्सव में भाग लेने गया था। दोपहर में जब घर लौटा तो उल्टी करने लगा। जब उससे खाने-पीने के बारे में पूछा गया तो उसने कहा कि स्कूल के गार्ड ने उसे कोल्ड ड्रिंक पीने को दी थी, जिसके बाद से उसे उल्टियाँ होने लगीं। बाला की हालत देखते हुए परिजनों ने उसे कराईकल के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। मगर इलाज के दौरान उसकी जान चली गई।
बच्चे की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला कि उसको कोल्ड ड्रिंक के जरिए जहर दिया गया था। जब परिवारवालों ने स्कूल के गार्ड देवदास से इसके बारे में पूछा तो उसने बताया कि बाला की रिश्तेदार होने का दावा करने वाली एक महिला ने उसे कोल्ड ड्रिंक देने के लिए कहा था। वही कोल्ड ड्रिंक उसने बाला को दी थी।
गार्ड के बयान के आधार पर जब स्कूल का सीसीटीवी कैमरा चेक किया गया तो उसमें विक्टोरिया सहयारानी को देखा गया। इसके बाद बाला के परिजनों ने पुलिस थाने में विक्टोरिया के विरुद्ध शिकायत दर्ज करवाई और मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने फौरन आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ के दौरान विक्टोरिया ने अपना सारा जुर्म कबूला। उसने बताया कि उसकी बेटी भी बाला की ही क्लास में पढ़ती है। बाला के टॉप करने के कारण उसकी बेटी दूसरे स्थान पर आती थी। इसी कारण उसे बाला से जलन हो गई और उसने अपनी बेटी को टॉपर बनाने के लिए बाला को जहर दे दिया। पुलिस ने पूछताछ के बाद महिला को मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया और वहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अमिताभ बच्चन, रश्मिका मंदाना और नीना गुप्ता-स्टारर फिल्म ‘गुडबाय’ (Goodbye) का ट्रेलर आज (6 सितंबर 2022) रिलीज हो गया है। मुंबई में ट्रेलर लॉन्च के मौके पर बिग बी के अलावा रश्मिका मंदाना (Rashmika Mandanna), नीना गुप्ता और फिल्म की प्रोड्यूसर एकता कपूर नजर आए। यह पहली बार है जब एकता ने बिग बी के साथ किसी फिल्म में काम किया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एकता कपूर (Ekta Kapoor) ने बताया कि अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) के साथ काम करना उनका बचपन का सपना था। उन्होंने कभी भी खान या किसी और के साथ काम करने का सपना नहीं देखा था, लेकिन वह हमेशा बिग बी के साथ काम करना चाहती थीं।
‘गुडबाय’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान एकता कपूर ने एक किस्सा सुनाते हुए कहा,
“बचपन से ही मैं हमेशा एक ही व्यक्ति के साथ काम करने का सपना देखती थी और वो थे बिग बी। मैं अमित जी के घर बर्थडे पार्टी में जाती थी। श्वेता और अभिषेक बच्चन मेरे दोस्त हैं। अमिताभ सर ने एक बार मेरे पापा (जितेंद्र) से कहा था कि वह बस बैठी और पूरी शाम मुझे देखती रही। मुझे नहीं लगता कि मैं कभी किसी के साथ काम करना चाहती थी। खान या फिर किसी और के साथ नहीं बस मिस्टर अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का मेरा सपना था। आखिरकार, ये सच हो गया। इस तरह की फिल्म में काम करने का अनुभव अलग है।”
ट्रेलर को अपने इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए एकता ने लिखा, “फैमिली बॉन्डिंग तो सुना होगा,पर फैमिली ट्यूनिंग पहली बार देखोगे! फैमिली ड्रामा फिल्म में आपको कॉमेडी, ढेर सारा इमोशन और बहुत सारा प्यार देखने को मिलेगा।”
बता दें कि फैमिली ड्रामा फिल्म Goodbye में अमिताभ बच्चन ने रश्मिका मंदाना के पिता का किरदार निभाया है। रश्मिका इस फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू कर रही हैं। निर्देशक विकास बहल की फिल्म ‘गुडबाय’ 7 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। आज इसका ट्रेलर रिलीज हुआ है। इसी दौरान एकता ने अपने मन की बात बताई।
मालूम हो कि बीते अगस्त में जब बायकॉट से ‘लाल सिंह चड्ढा’ का बुरा हाल था तो इन्हीं एकता कपूर ने बॉलीवुड के ‘खान’ में से एक आमिर का समर्थन किया था। आमिर खान को लीजेंड बताते हुए कहा था कि उनका बायकॉट करना सही नहीं है।
झारखंड (Jharkhand) के खूँटी (Khunti) जिले से जनजातीय समाज (ST) की 15 साल की लड़की से दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोपित भी नाबालिग बताया जा रहा है। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर बाल सुधार गृह भेज दिया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने इस घटना के बाद कहा है कि जिस तरह लव जिहाद के मामले बढ़ रहे हैं, उससे झारखंड में आदिवासियों का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
मामला खूँटी के जरियागढ़ क्षेत्र का है। एसपी अमन कुमार ने बताया है कि पीड़िता 4 महीने की गर्भवती है। उसका मेडिकल कराया गया है। मामले की जाँच जारी है। जानकारी के मुताबिक, आदिवासी लड़की दसवीं कक्षा में पढ़ती है। आरोपित ने छात्रा के साथ चार बार दुष्कर्म किया। मामले का खुलासा तब हुआ जब छात्रा गर्भवती हो गई। पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने सोमवार (5 सितंबर 2022) को आरोपित को गिरफ्तार कर रिमांड होम भेज दिया है।
Jharkhand |An incident of rape of a minor girl, in Jariagarh village in Khunti dist, was reported. Accused is also a minor & was nabbed. It came to light that victim girl is 4 months pregnant, her medical examination was done. Reports will ascertain further:Aman Kumar, SP, Khunti pic.twitter.com/f6eV0zqFkq
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि जब वह 9वीं में पढ़ती थी, तब उसे एक लड़के का फोन आया था। नाम-पता पूछने पर उसने फोन काट दिया। कुछ दिनों बाद उस लड़के ने फिर फोन किया और अपना नाम और पता बताया। 9वीं की परीक्षा खत्म होने के बाद लड़का उससे मिलने स्कूल के पास आया और बाइक पर बैठाकर उसे सुनसान जगह पर स्थित एक घर में ले गया। वहाँ उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। नाबालिग लड़की लगातार पेट में दर्द की शिकायत कर रही थी। इसके बाद परिजन उसे डॉक्टर के पास लेकर गए। डॉक्टर ने का चेकअप किया तो वह 4 माह की गर्भवती निकली। इसके बाद जब परिजनों ने पूछताछ की तो लड़की ने पूरी घटना के बारे में बताया।
खूंटी ज़िले के कर्रा प्रखंड में एक और १५ वर्षीया नाबालिग आदिवासी युवती के लव जिहाद का शिकार होने की घटना से मन विचलित है।
पुलिस ने यौन शोषण कर बच्ची को गर्भवती करने के आरोपी को भी नाबालिग बता गिरफ़्तारी के बाद राँची के सुधार गृह भेज दिया है। इस तरह लव जिहादी बाढ़ से तो झारखंड१/२
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने ट्वीट कर कहा है, “15 साल की नाबालिग आदिवासी युवती के लव जिहाद का शिकार होने की घटना से मन विचलित है। पुलिस ने यौन शोषण कर बच्ची को गर्भवती करने के आरोपी को भी नाबालिग बता सुधार गृह भेज दिया है।” उन्होंने कहा है, “इस तरह लव जिहादी बाढ़ से तो झारखंड में आदिवासियों का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। लेकिन तुष्टिकरण के पैरों तले दबे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ऐसी लोमहर्षक घटनाएँ भी सामान्य बात दिखती है।”
गौरतलब है कि पिछले दिनों दुमका में जनजातीय समाज की 14 साल की लड़की का शव पेड़ से टँगा मिला था। आरोप है कि अरमान अंसारी ने बलात्कार के बाद हत्या कर लड़की का शव पेड़ से लटका दिया ताकि सुसाइड लगे। इस घटना के बारे में सवाल पूछे जाने पर रविवार (4 सितंबर 2022) को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा था, “घटनाएँ तो होती रहती हैं। घटनाएँ कहाँ नहीं होती हैं। घटना तो बोलकर आता नहीं है।”
लखनऊ के लुलु मॉल से कथिततौर पर एक बार फिर नमाज पढ़ने की घटना सामने आई है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक महिला कोने में बैठ नमाज पढ़ रही है। लोग इसे शेयर करके दावा कर रहे हैं कि ये जगह लुलु मॉल की ही है।
Uttar Pradesh: #Namaz offered in Lucknow’s Lulu Mall again.
In July this year, four people were arrested for unauthorisedly offering namaz in the mall. The accused were Mohammad Rehan, Atif Khan, Mohammad Lokman and Mohammad Noman. pic.twitter.com/jmeQJ0rkua
हालाँकि, पुलिस का इस मामले में कहना है कि अभी उन्हें पक्का नहीं पता कि ये वीडियो कब और कहाँ का है। वह इस वीडियो के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। उनके मुताबिक, सोमवार (5 सितंबर 2022) को यह इंटरनेट पर वायरल होने के बाद उनके संज्ञान में आई। इसके बाद पुलिस टीम फौरन लुलु मॉल गई और सीसीटीवी कैमरे चेक होने शुरू हुए। मामले की जाँच अभी चल ही रही है।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इंस्पेक्टर शैलेंद्र गिरी ने बताया कि वह लोग पता लगा रहे हैं कि ये वीडियो कितने दिन पहले का है। सारी जाँच-पड़ताल हो रही है।
लुलु मॉल में पढ़ी गई नमाज
उल्लेखनीय है कि इसी साल जुलाई महीने में लुलु मॉल का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। इसमें 9 व्यक्तियों को नमाज पढ़ते हुए रिकॉर्ड किया गया था। उस वक्त सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस प्रकार के तत्वों से सख्ती से निपटने का आदेश भी दिया था।
वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए पुलिस ने भी तब 9 में से 4 लोगों को गिरफ्तार किया था। वहीं पुलिस कमिश्नर ने बताया था कि गिरफ्तार किए गए चारों अभियुक्तों के खिलाफ धारा 153 A (1) 341, 505 295 A के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है।
लखनऊ पुलिस कमिश्नर ध्रुवकांत ठाकुर ने इन आरोपितों की गिरफ़्तारी की जानकारी देते हुए कहा था कि चारों गिरफ्तार किए गए अभियुक्त साथ में ही लुलु मॉल के अंदर नमाज अदा की थी। CCTV के माध्यम से आरोपितों की शिनाख्त की गई थी। रेहान, लुकमान, नोमान लखनऊ के इंदिरानगर थाने के खुर्रमनगर के अबरार में रहते हैं। अतिफ खान लखीमपुर के मोहम्मदी का रहने वाला है। लुकमान और नोमान दोनों सगे भाई हैं, जो कि सीतापुर के लहरपुर थानाक्षेत्र के मंगोलपुर के रहने वाले हैं। ये बाइक से मॉल में नमाज पढ़ने के लिए पहुँचे थे।
हाल के दिनों में असम में आतंकी गतिविधयों का हब बने 3 मदरसे को ध्वस्त किया जा चुका है, साथ ही जिहादी गतिविधियों में लिप्त मौलानाओं समेत 3 दर्जन से भी अधिक लोगों की गिरफ़्तारी हुई है। लेकिन, अब असम के एक मदरसे पर सरकार का नहीं, बल्कि जनता का बुलडोजर चला है। ताज़ा घटना गोलपारा की है, जहाँ के एक मदरसे को स्थानीय लोगों ने ही ध्वस्त कर डाला। ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित गोलपारा, गुवाहाटी से 134 किलोमीटर पश्चिन की तरफ स्थित है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मदरसे से जिहादी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था। पाखिउरा चार क्षेत्र में स्थित दरोगार अलगा में ये मदरसा स्थित था। साथ ही मदरसे के बगल में स्थित एक घर को भी लोगों ने ध्वस्त कर दिया। बताया जा रहा है कि उस घर को दो बांग्लादेशी आतंकी इस्तेमाल में ला रहे थे। इसीलिए, स्थानीय लोगों में आक्रोश था। जलालुद्दीन शेख नामक व्यक्ति इस मदरसे का संचालन कर रहा था, जो पहले से ही पुलिस की गिरफ्त में है।
उसने 2020 में अनिमुल इस्लाम, उस्मान, मेहदी हसन और जहाँगीर आलोम को बतौर शिक्षक इस मदरसे में नियुक्त किया था। इनमें से दो अलकायदा (AQIS) और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) के आतंकी निकले। दोनों फ़िलहाल फरार चल रहे हैं। 31 अगस्त, 2022 को बोंगाईगाँव प्रशासन ने मरकजूल मारीफ उ-करियाना मदरसे को ध्वस्त किया था। ये बच्चों के लिए असुरक्षित था और इसके पास दस्तावेज भी नहीं थे। यहाँ से आतंकी गतिविधि चल रही थी सो अलग।
असम में बदरुद्दीन अजमल के राजनीतिक दल AIUDF ने मदरसों पर कार्रवाई का विरोध किया है। पार्टी ने कहा है कि अल्पसंख्यकों के इलाकों में बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पर हमला किया जा रहा है। बदरुद्दीन अजमल ने दावा किया कि मदरसे सार्वजनिक संपत्ति होते हैं और उन्हें बिना कानूनी नोटिस दिए ध्वस्त नहीं किया जा सकता। इससे पहले जमीउल हुदा नाम के एक मदरसे को प्रशासन ने ध्वस्त किया था। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भी कह चुके हैं कि जिन मदरसों से आतंकी गतिविधियाँ चलेंगी, उन्हें ध्वस्त कर दिया जाएगा।
तेलंगाना (Telangana) की राजधानी हैदराबाद (Hyderabad) में नाबालिग से गैंगरेप केस की जाँच कर रही पुलिस के सामने कई मुश्किलें आ रही हैं। वे आरोपितों के मोबाइल फोन से डेटा नहीं जुटा पा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, हैदराबाद पुलिस ने गैंगरेप में शामिल सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके वो मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए हैं, जिनसे उन्होंने इस घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया था।
इन सबके बावजूद पुलिस को जाँच के दौरान कई तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि आरोपितों ने गिरफ्तार होने से पहले अपने खिलाफ सभी सबूत मिटाने के लिए कथित तौर पर मोबाइल फोन को नष्ट कर दिया था।
8 जून 2022 को आरोपितों को हिरासत में लिए जाने के तुरंत बाद पुलिस नष्ट किए गए फोन को बरामद करने में सफल रही, लेकिन तीन महीने की चल रही जाँच के बाद भी वे डेटा को फिर से प्राप्त करने में असमर्थ हैं। 6 आरोपितों में से एक मोहम्मद सदाद्दिन मलिक ने अन्य आरोपितों को गिरफ्तारी से पहले उनके मोबाइल फोन नष्ट करने को कहा था।
फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के टेक्निकल एक्सपर्ट ने मामले को विस्तार से बताते हुए कहा कि पुलिस ने फॉरेंसिक जाँच के लिए मोबाइल फोन नहीं भेजे, क्योंकि उन्हें पहले से ही पता था कि फोन से कोई डेटा प्राप्त नहीं किया जा सकता है। हालाँकि, पुलिस ने छोटे वीडियो क्लिप बरामद किए हैं, जिसमें घटना से जुड़ा कोई वीडियो नहीं है।
बता दें कि हैदराबाद में इस साल 28 मई को नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। पीड़िता पब से एक पार्टी के बाद अपने घर लौट रही थी। उसी वक्त हैदरबाद के जुबली हिल्स इलाके में उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। यह मामला तब सामने आया जब पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। रिपोर्टस की मानें तो आरोपितों ने पहले पीड़िता से उसके घर छोड़ने की बात कही। बाद में एक पार्क की हुई कार के अंदर उसके साथ मारपीट की गई और फिर बारी-बारी से सभी ने उसके साथ बलात्कार किया।
इस दौरान दूसरे आरोपित कार के बाहर पहरा दे रहे थे। घटना की जानकारी होने के बाद लड़की के पिता ने इस संबंध में शिकायत दी थी और पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 323 और पॉक्सो एक्ट की धार 9 और 10 के तहत मामला दर्ज किया था।