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क्या 2024 से पहले जमीन का मिजाज बदल देंगे राजनीति के ‘पलटू’ और ‘पप्पू’?

एक ने अपने राजनीतिक जीवन में इतनी बार पाला बदला है कि विरोधी तंज कसते हुए उन्हें ‘पलटू’ बताते हैं। दूसरी की राजनीतिक छवि ऐसी है कि स्वरा भास्कर जैसी पार्ट टाइम अभिनेत्री को आगे आकर कहना पड़ता है कि ‘मैं उनसे मिली हूँ। वे पप्पू नहीं हैं।’ ऐसे ही दो नेता बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की सोमवार (5 सितंबर 2022) को नई दिल्ली में मुलाकात हुई।

करीब 50 मिनट तक दोनों की बातें हुई। मीडिया में जो बातें आईं वो 2024 से पहले विपक्षी एकता के सुने-सुनाए राग पर केंद्रित थी। हाल ही में बिहार में लालू प्रसाद यादव से हाथ मिलाने वाले नीतीश कुमार इससे पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर से मिल चुके हैं। कर्नाटक वाले कुमारस्वामी से मुलाकात हुई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिलने वाले हैं। आगे और उन क्षेत्रीय क्षत्रपों से मिलने की योजना है, जिनकी राजनीति साँस नरेंद्र मोदी और बीजेपी की फिसलन नहीं देख उखड़ रही है।

चर्चा यह भी है कि चुनाव से पहले ऐसे कुछ दलों का आपस में विलय भी हो सकता है जो जनता परिवार के बिखरने से पैदा हुए हैं। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि अब ऐसे ज्यादातर दलों में दूसरी पीढ़ी का नेतृत्व आ चुका है जो अपने-अपने राज्यों में ही राजनीतिक तलाश रहा है। उनकी राष्ट्रीय राजनीति की महत्वाकांक्षाओं में वह टकराहट नहीं है जो उनसे पहले की पीढ़ी में था और जनता परिवार बिखर गया। वैसे कहीं का ईंट, कहीं का रोड़ा भानुमती का कुनबा जोड़ा टाइप की सियासत भारत में कई बार दिखी है। ऐसे प्रयासों को तार्किक बताने के लिए समाजवादियों के पास राम मनोहर लोहिया का एक सूत्र वाक्य भी है जो कहता है- जुड़ो, लड़ो और टूटो…

एक तरफ कथित समाजवादी 2024 से पहले विपक्षी एकता का झुनझुना बजा रहे हैं, दूसरी ओर राहुल गाँधी 7 सितंबर 2022 से एक यात्रा शुरू करने वाले हैं। इस यात्रा का नाम रखा गया है- भारत जोड़ो यात्रा। दिलचस्प यह है कि इस यात्रा की तुलना भी एक समाजवादी (पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर) की ही यात्रा से हो रही है। लेकिन नाम में ‘भारत’ होने के अलावा न तो इन दो यात्राओं और न उनकी अगुवाई करने वाले में समानता दिखती है।

भारत जोड़ो यात्रा

7 सितंबर 2022 को कन्याकुमारी से यह यात्रा शुरू हो रही है। 150 दिन तक चलने वाली यह यात्रा भारत के 12 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों से होकर गुजरेगी। करीब 3500 किमी लंबी यह यात्रा जम्मू-कश्मीर में समाप्त होनी है। इसके तीन उद्देश्य बताए गए हैं। पहला, मोदी सरकार में बढ़ी आर्थिक असमानता से लड़ाई। दूसरा, समाज में बढ़ते भेदभाव और अपराध से लड़ाई। तीसरा, केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग से लड़ाई।

भारत जोड़ने की जरूरत क्यों?

कॉन्ग्रेस के लिए अपने राजनीतिक फायदे के लिए भारत को बदनाम करना नई बात नहीं है। चाहे चीन की सत्ताधारी दल से समझौता हो या, उसके दूतों से गुपचुप मिलना या पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपनी ही सेना से शौर्य का सबूत माँगना। कॉन्ग्रेस अपने चाल-चरित्र से इसका लगातार प्रदर्शन करती रहती है। एक बार फिर अपने राजनीतिक यात्रा को ‘भारत जोड़ो’ नाम देकर उसने यही मानसिकता दिखाई है।

कोरोना जैसी वैश्विक आपदा के बावजूद हम दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं। नक्सली हिंसा में कमी आई है। आतंकी लगातार ढेर किए जा रहे हैं। 26/11 के बाद कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहे हैं। रसोई गैस हो या शौचालय, आवास हो या स्वच्छ पानी… ग्रामीण इलाकों तक पहुँच रहा है। आम आदमी की पहुँच में हैं। ऐसे में भारत को टूट का खतरा कहाँ से दिखता है जो उसे जोड़ने की बात की जाए। या फिर सिमटते जनाधार से परेशान कॉन्ग्रेस इस यात्रा के जरिए उन ताकतों को हवा देना चाहती है, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियाँ बढ़े। आंतरिक हालात बिगाड़ने के मकसद से प्रायोजित सीएए विरोधी हिंसा हो या दिल्ली के बॉर्डर पर कथित किसानों का जमावड़ा, इनके पीछे कॉन्ग्रेस और उसके नेताओं की संलिप्तता सार्वजनिक है। तो क्या 2024 से पहले कॉन्ग्रेस इस यात्रा के जरिए वैसे हालात पैदा करना चाहती है, जिससे सरकार को देश के भीतर ही कई मोर्चों पर जूझना पड़े? वैसे भी इस्लामी कट्टरपंथियों के तुष्टिकरण का उसका इतिहास रहा है।

क्या चंद्रशेखर की यात्रा से तुलना उचित?

चंद्रशेखर ने स्वतंत्र भारत की समस्याओं को अपने पैरों से नापने की कोशिश की थी। उन्होंने 6 जनवरी 1983 को कन्याकुमारी के विवेकानंद स्मारक से भारत यात्रा शुरू की। करीब 4200 किमी की यह पदयात्रा 25 जून 1984 को दिल्ली के राजघाट पर समाप्त हुई।
इस यात्रा के दौरान वे कई जगहों पर ठहरे और उनमें से कुछ को ​भारत यात्रा केंद्र के नाम से विचारों का केंद्र बनाया। इनमें से ही एक है लगभग 600 एकड़ में फैला भोंडसी स्थित भारत यात्रा केंद्र। बाद के वर्षों में सियासत का केंद्र बनने की वजह से भोंडसी आश्रम तो याद रहा, लेकिन वह यात्रा जेहन से मिटा दी गई।

लेकिन उस यात्रा के मर्म में कोई सियासत नहीं थी। केवल पाँच बुनियादी मसले थे,

  • सबको पीने का पानी
  • कुपोषण से मुक्ति
  • हर बच्चे को शिक्षा
  • स्वास्थ्य का अधिकार
  • सामाजिक समरसता

क्या हासिल होगा?

देश में आपातकाल जैसी कोई असामान्य स्थिति नहीं है कि विपक्षी दल अपने-अपने हितों का त्याग कर किसी छतरी के नीचे आ सकें। नीतीश कुमार जो कोशिश कर रहे हैं, कुछ महीने पहले उसी तरह का प्रयास ममता बनर्जी कर रहीं थीं। 2019 से पहले ऐसी ही हवा चंद्रबाबू नायडू ने बनाई थी। नतीजा सबको पता है।

राजनीतिक यात्राओं से सत्ता पाने का इतिहास में कई उदाहरण हैं। लेकिन उन सभी यात्राओं के पीछे कुछ कॉमन फैक्टर थे। मसलन, सत्ता से आम लोग नाराज थे। यात्रा की अगुआई करने वाले अपने राजनीतिक तेवर के लिए जाने जाते थे या फिर उनके साथ सहानुभूति थी, जैसे जगनमोहन के मामले में देखने को मिला। हाल के तमाम सर्वे बताते हैं कि नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता जस की तस है। भारत की आम जनता की उम्मीदों के नायक आज भी वही हैं। वहीं राहुल गाँधी आज भी इस देश की जनता की नजर में एक गंभीर राजनीतिज्ञ की छवि नहीं बना पाए हैं।

ऐसे में चाहे नीतीश कुमार का प्रयास हो या राहुल गाँधी की यात्रा, एक ऐसे झुनझुने की तरह लगती है जो भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में चुनावों से पहले शोर तो बहुत करता है, लेकिन अपनी कर्कश ध्वनि से लोगों को लुभा नहीं पाती।

‘गोबर खा लेते तो जीत पाते’ : ब्रिटेन में ऋषि सुनक की हार से खुश भारत के वामपंथी, हिंदू धर्म का उड़ाया मजाक, गौ-पूजन की Video देख भड़के थे

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चुनावों में भारतीय मूल के ऋषि सुनक पीएम बनने से जैसे ही चूके वैसे ही भारत के वामपंथी और कट्टरपंथी गिरोह में खुशी की लहर दौड़ गई। ट्विटर पर सुनक को तरह-तरह के ताने दिए जाने लगे। इसी क्रम में हिंदू धर्म का और हिंदुओं में पूजनीय गौ-माता का भी खुलकर मजाक बनाया गया। किसी ने ऋषि को इसलिए कोसा क्योंकि वो खुद को हिंदू दिखाकर मंदिर आदि जा रहे थे, तो किसी ने उन्हें याद दिलाया कि वो जो गौ-पूजन का ‘नाटक’ कर रहे थे, उससे ब्रिटेन में जीत नहीं मिल सकती।

ऋषि सुनक की हार से वामपंथी क्यों है खुश?

ट्विटर पर ऋषि सुनक की गाय के साथ फोटो शेयर कर करके दिखाया जा रहा है कि उन्हें चुनाव में जीत मिल सकती थी लेकिन जो उन्होंने ब्रिटेन में गौ पूजन किया उसके कारण उन्हें हार झेलनी पड़ी।

फेक न्यूज के लिए कुख्यात हिंदूफोबिक ट्विटर यूजर अशोक स्वेन ने ऋषि की वीडियो को शेयर करते हुए कहा, “इन हथकंडों के बावजूद ऋषि सुनक को लिज ट्रस ने हरा दिया और वह ब्रिटेन की नई प्रधानमंत्री बन गईं। जरूरी है खुद के साथ ईमानदार रहना- ब्रिटेन कोई उत्तर प्रदेश नहीं है।”

जिम्मी खान लिखता है, “ये जरूर दुख में होगा कि काश ये थोड़ा गौ मूत्र पी लेता तो शायद ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बन जाता।”

एक कॉमरेड नाम की आईडी से कहा गया, “मुझे लगता है कि ये गाय का गोबर और गौमूत्र पीना भूल गया, इसलिए इसे हार मिली।”

शबीना हुसैन लिखती हैं, “गौ माता ने ऋषि सुनक को आशीर्वाद देने से मना कर दिया।”

एक यूजर ने ऋषि की पूजा पाठ पर तंज कसते हुए कहा, “ऋषि सुनक, ये मंदिर और गाय की राजनीति सिर्फ उत्तर प्रदेश में काम आती है ब्रिटेन में नहीं।”

निधि राजदान को ब्रिटिशरों ने लगाई लताड़

इसके अलावा मीडिया गिरोह की जानी-मानी सदस्य निधि राजदान ने भी इस जीत-हार के मुद्दे में ‘नस्लवाद’ के एंगल को घुसाया और पूछा कि कहीं और किसी वजह से तो ऋषि नहीं हारे। उन्होंने ट्वीट किया, “लिज ट्रस ने ऋषि सुनक को पीएम बनने की रेस में हरा दिया। क्या नस्लवाद के कारण ऋषि हारे या फिर इसके पीछे और कोई कारण है।”

निधि के ट्वीट के बाद कई ब्रिटिशर भड़क गए। उन्होंने निधि राजदान की ऐसी हरकत को एकदम घटिया करार दिया। ब्रिटिश पत्रकार टॉम हैरवुड ने कहा ये ओछेपन की भी हद्द है। शर्म आनी चाहिए।

गौरतलब है कि ब्रिटेन में प्रधानमंत्री चुनाव से पहले ऋषि सुनक की एक वीडियो सामने आई थी। उस वीडियो में वह अपनी पत्नी अक्षता के साथ गौ पूजन कर रहे थे। पूजा के दौरान सामने खड़े पुजारी उन्हें विधियों के बारे में बता रहे थे। इसी वीडियो को देख वामपंथी उनसे नाराज थे और चुनाव में जब नतीजे आए, ऋषि को हार का मुँह देखना पड़ा तो यही लोग सबसे पहले उन्हें इसलिए कोसने लगे क्योंकि वो चुनाव के दौरान मंदिर जाने का काम, गौ-पूजन का काम कर रहे थे।

‘इस्लाम कबूल कर, वरना गोली मार दूँगा’ : नर्सिंग की हिंदू छात्रा पर जांबाज मंसूरी बना रहा था निकाह का दबाव, बीच सड़क बाइक पर बैठाया; एसिड फेंकने की धमकी

मध्य प्रदेश के खंडवा में एक हिंदू युवती के ऊपर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाए जाने का मामला सामने आया है। युवती नर्सिंग कॉलेज की छात्रा है। उसका आरोप है कि उसके गाँव का जांबाज मंसूरी उर्फ मोनू उसे काफी समय से परेशान कर रहा था और अब वह उसे बंदूक के साथ फोटो भेजकर धमकियाँ देता है। युवती ने हिंदू संगठनों की मदद से थाने में शिकायत दी है।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के अनुसार, युवती ने पुलिस के पास जाने का यह फैसला तब उठाया जब जांबाज ने सोमवार को (5 सितंबर 2022) उसे रास्ते पर रोककर उसके सिर पर फूल बरसाए और फिर उसे इस्लाम कबूलने को कहा। युवती के मुताबिक जांबाज ने इस दौरान उसे जबरन बाइक पर भी बैठाया, फिर गाड़ी स्पीड से चला दी। युवती इतना घबरा गई कि उसने चलती बाइक से छलांग लगा दी।

युवती को इस हालात में देख वहाँ भीड़ जुट गई। लोगों ने जांबाज को पकड़ने का प्रयास भी किया। हालाँकि वो हाथ नहीं आया। इसके बाद युवती हिंदू संगठन की मदद लेकर थाने गई। उसने जांबाज के खिलाफ शिकायत देते हुए जानकारी दी कि वह शहर में प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज में प्रथम वर्ष की छात्रा है। 5 अगस्त को दोपहर 3 बजे वह अपने कॉलेज से घर आशापुर जा रही थी। तभी, गाँव का जांबाज मंसूरी उसके रास्ते में आया और उस पर फूल बरसाकर शादी के लिए बोला।

पीड़िता के अनुसार, जांबाज पिछले एक साल से उसका पीछा कर रहा है। पहले वह हरसूद कॉलेज में पढ़ती थी, तब भी वह बीच रास्ते में आकर उसका रास्ता रोकता और शादी का दबाव बनाता था। हालाँकि तब लड़की ने ये बात अपने परिजनों को बता दी थी। परिवार वालों ने जांबाज के घर उसकी शिकायत भी की थी।

अब दोबारा वही हाल है। इस बार जांबाज ने कहीं से लड़की का नंबर निकाल लिया है। अब वह उसे धमकी देता है, “शादी कर लो वरना पूरे परिवार को जान से मार दूँगा।” लड़की के मुताबिक, सिरफिरा जांबाज अपनी बंदूक के साथ फोटो भेजकर धमकाता है, “धर्म परिवर्तन कर लो वरना गोली मार दूँगा।” पिछले महीने भी उसने खंडवा में रास्ता रोककर एसिड फेंकने की धमकी दी थी।

अब इस पूरे मामले से हिंदू स्टूडेंट आर्मी जुड़ गई है। वही लोग छात्रा को थाना लेकर गए और युवती की शिकायत के बाद आवश्यक कार्रवाई की माँग की।

राजपथ नहीं, अब ‘कर्तव्य पथ’ कहिए: मोदी सरकार एक-एक कर मिटा रही गुलामी की निशानियाँ, अंग्रेज राजा के सम्मान में रखा गया था ये नाम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त, 2022) पर गुलामी की हर चीज से मुक्त होने की बात कही थी। इसके बाद, ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि कई स्थानों के नाम बदले जाएँगे। उनमें से राजधानी दिल्ली के ‘राजपथ’ का नाम भी शामिल था। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने राजपथ का नाम बदलने का फैसला किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली के राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ रखने का विचार किया जा रहा है। इस बारे में, बुधवार (7 सितंबर, 2022) को नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में राजपथ का नाम कर्तव्य पथ करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। वहाँ ही इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई जाएगी।

बताया जा रहा है कि इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा से लेकर राष्ट्रपति भवन तक के पूरे मार्ग का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ किया जाना है। बता दें कि अंग्रेजी हुकूमत के समय राजपथ को ‘KingsWay ‘ कहा जाता था। किंग्सवे, अंग्रेज राजा जॉर्ज पंचम के नाम पर रखा गया था। हालाँकि, अब ऐसा लग रहा है सरकार अंग्रेजी हुकूमत से लेकर मुगलिया हुकूमत तक के सभी नामों में बदलाव करने का विचार कर रही है।

ये भी याद दिला दें कि सरकार ने हाल ही में भारतीय सेना के ध्वज से सेंट जॉर्ज क्रॉस को हटाया था। जबकि, इससे पहले जिस सड़क पर प्रधानमंत्री आवास स्थित है, उसका नाम भी बदलकर रेसकोर्स रोड से ‘लोक कल्याण मार्ग’ किया गया था।

‘मेरा मुस्लिम नाम इस्तेमाल करने को मजबूर कर रहे’: मोपला नरसंहार पर फिल्म को सेंसर से अनुमति नहीं, घर-वापसी करने वाले निर्देशक का आरोप – PFI का दबाव

केरल के सेंसर बोर्ड ने 27 जू,न 2022 को फिल्म निर्देशक अली अकबर उर्फ रामसिम्हन अबूबकर (Ali Akbar aka Ramasimhan Aboobakker) की आगामी मलयालम फिल्म ‘Puzha mutual Puzha Vare’ (नदी से नदी तक) को सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया था। यह फिल्म केरल में वर्ष 1921 में हुए मोपला नरसंहार पर आधारित है। बताया जाता है कि मोपला मुस्लिमों ने जमकर हिन्दुओं का नरसंहार किया था और बाद में इतिहासकारों ने इसे ‘जमींदारों के खिलाफ विद्रोह’ का नाम दे दिया था।

अली अकबर उर्फ ​​रामसिम्हन ने इस संदर्भ में ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “सेंसर बोर्ड ने मुझे अपनी फिल्म में तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाते हुए फटकार लगाई है और फिल्म के कुछ सीन्स कट करने के लिए कहे हैं।” यह निश्चित रूप से मोपला मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं के नरसंहार को क्लीन चिट देने जैसा है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए रामसिम्हन ने कहा कि वो लोग कई सीन्स पर कैंची चलाकर फिल्म के किरदार बदल देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने अपनी समीक्षा समिति की बैठक के दौरान उन्हें अपना मुस्लिम नाम अली अकबर को निर्देशक के रूप में इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया था। मलयाली फिल्मों के निर्देशक अली अकबर ने दिसंबर 2021 में इस्लाम मजहब छोड़ने का ऐलान किया था। जब मजहबी कट्टरपंथियों ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत का हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद खुशी का इजहार किया था, तब उन्होंने 13 जनवरी 2022 को पत्नी लुसिम्मा के साथ हिन्दू धर्म अपनाया था। उसके बाद वे रामसिम्हन के नाम से जाने जाते हैं।

अली अकबर ने कहा था, “करीब आठ दशक पहले मालाबार में इसी तरह एक व्यक्ति ने इस्लाम त्याग कर अपना नाम रामसिम्हन रखा था। कल अली अकबर को राम सिंह कहा जाएगा। यह सबसे अच्छा नाम है।” रामसिम्हन और उनके भाई दयासिम्हन, दयासिम्हन की पत्नी कमला, उनके रसोइया राजू अय्यर और परिवार के अन्य सदस्यों को आजादी से ठीक दो हफ्ते पहले 1947 में इस्लाम से हिंदू धर्म अपनाने के कारण इस्लामवादियों ने मार डाला था।

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) की समीक्षा बैठक के दौरान रामसिम्हन से सवाल किया गया था कि उन्होंने फिल्म के निर्देशक के रूप में हिन्दू नाम का इस्तेमाल क्यों किया। सेंसर बोर्ड ने यह बात जोर देकर कही थी कि वह अपने इस्लामी नाम अली अकबर का उपयोग निर्देशक के रूप में करते। दरअसल, रामसिम्हन ने फिल्म के निर्देशक के रूप में अपने हिंदू नाम और निर्माता के रूप में अपने इस्लामी नाम का उपयोग करने का फैसला किया था, लेकिन बोर्ड इस बात से सहमत नजर नहीं आया। उनके मुताबिक, निर्देशक के रूप में भी उनका नाम अली अकबर ही होना चाहिए।

उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “मुझे लगता है कि उन्हें एक समस्या यह भी है कि एक मुस्लिम व्यक्ति ने हिंदू धर्म अपना लिया और हिंदुओं के मालाबार नरसंहार पर एक फिल्म बना रहा है।”, उन्होंने कहा, “वे नहीं चाहते कि यह संदेश जाए।”

केरल सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्म को सर्टिफिकेट देने से इनकार करने के बाद, उन्होंने समीक्षा के लिए फिल्म को सीबीएफसी (CBFC) के पास भेज दिया। निर्देशक के अनुसार, समिति की 2 बैठकों में फिल्म के किरदार को बदलने वाले कटों का सुझाव दिया गया था। अकबर को संदेह है कि स्थानीय सेंसर बोर्ड ने केंद्रीय बोर्ड के फैसले को प्रभावित किया है और फिल्म की रिलीज को रोकने के लिए उन पर PFI का दबाव है।

यह पूछे जाने पर कि केंद्रीय बोर्ड इस तरह से क्यों व्यवहार कर रहा है, निर्देशक ने इस्लामवादियों और वामपंथियों का जिक्र करते हुए कहा, “कृपया विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ के के फेमस डायलॉग को याद करें- ‘सरकार उनकी है तो क्या हुआ, सिस्टम तो हमारा है’।

मोपला नरसंहार

मोपला नरसंहार को लेकर इतिहास में कई हृदय विदारक घटनाएँ दर्ज हैं। एक शिशु अपनी माता का स्तनपान कर रहा था। मोपला मुस्लिमों ने उस बच्चे को उसकी माता की छाती से छीन कर उसके दो टुकड़े कर दिए। एक जगह एक महिला का बार-बार इस तरह क्रूरता से रेप किया गया कि उसकी मृत्यु हो गई। उसका छोटा सा बच्चा काफी देर तक अपनी मरी हुई माँ के शरीर पर खेलता रहा और स्तनपान करने की कोशिश करता रहा। 10,000 हिन्दुओं का नरसंहार किया गया। उनकी जमीनें, मंदिर और खेत – सब छीन कर नष्ट कर दी गई।

आस मोहम्मद ने ‘आसु राणा’ बन 12वीं की छात्रा को फाँसा, पोल खुलने पर अश्लील तस्वीरें वायरल की: सेना में रह चुका है रसोइया

दिल्ली पुलिस ने शनिवार (3 सितंबर, 2022) को फेक सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए लड़की को बदनाम करने के आरोप में आस मोहम्मद नाम के युवक को गिरफ्तार किया है। पीड़िता ने आस मोहम्मद पर उसका पीछा करने का भी आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित आस मोहम्मद ने दिल्ली में रहने वाली 12वीं की एक छात्रा से सोशल मीडिया के जरिए दोस्ती की थी। इस दौरान उसने खुद को सेना का जवान बताते हुए अपना नाम ‘आसु राणा बताया था। इसके बाद पीड़ित लड़की और आरोपित के बीच सोशल मीडिया में ही बातचीत होने लगी और फिर दोनों ने अपने मोबाइल नंबर एक्सचेंज किए थे।

बताया जा रहा है कि आरोपित और पीड़िता इस दौरान चार-पाँच बार मिल भी चुके थे। लेकिन, जब लड़की की माँ को इनकी दोस्ती के बारे में पता चला और आरोपित की सच्चाई भी सामने आ गई तब लड़की ने दोस्ती तोड़ दी थी।

जब लड़की ने आस मोहम्मद से संपर्क बंद कर दिया, तब उसने लड़की को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर कई फेक एकाउंट्स बनाए। इन एकाउंट्स के जरिए आरोपित ने पीड़िता के दोस्तों और टीचर्स से संपर्क किया। साथ ही इन अकाउंट्स में उसने अश्लील फोटोज शेयर करने शुरू कर दिए। साथ ही इसने, फेक अकाउंट के जरिए, पीड़िता के टीचर्स और दोस्तों से पैसे भी माँगे थे। जिन लोगों ने उसे पैसे देने से मना कर दिया, उसे यह गाली देता था।

इसके बाद, लड़की ने तंग आकर इस मामले की शिकायत उत्तरी जिले की पुलिस से की। जहाँ, पुलिस ने जाँच के बाद आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में आरोपित के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 419, 500, 354-डी, 509 और पॉस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

इस मामले में पुलिस का कहना है जाँच के दौरान, उस इंस्टाग्राम अकाउंट की जानकारी निकाली गई। इससे पता चला कि इंस्टाग्राम अकाउंट को बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया मोबाइल नंबर उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के एक गाँव के निवासी आस मोहम्मद के नाम पर था। इसके बाद आरोपित को गिरफ्तार किया गया है। उसके पास से दो सिम कार्ड और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है। आरोपित, मुंबई के कलिना कैंट में भारतीय सेना में कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर रसोइया के रूप में काम कर चुका है। इसका पिछला रिकॉर्ड भी निकाला जा रहा है।

‘पाकिस्तानियों से जुबैर की मिलीभगत, सिखों के खिलाफ फैलाई नफरत’: गुरुद्वारा कमिटी के पूर्व अध्यक्ष ने दर्ज कराई शिकायत, अर्शदीप को ‘खालिस्तानी’ बताने का मामला

युवा क्रिकेटर अर्शदीप सिंह को ‘खालिस्तानी’ कहे जाने पर भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा (Manjinder Singh Sirsa) ने सोमवार (5 सितंबर, 2022) को ‘ऑल्ट न्यूज’ के मोहम्मद जुबैर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने मोहम्मद जुबैर के खिलाफ कथित तौर पर पाकिस्तान एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने और कैच छोड़ने पर क्रिकेटर अर्शदीप सिंह को ‘खालिस्तानी’ कहने का आरोप लगाया है।

पुलिस शिकायत में सिरसा ने बताया कि जुबैर द्वारा शेयर किए गए कुछ ट्वीट ऐसे अकाउंट से किए गए से थे, जिन्हें क्रिकेटर को ‘खालिस्तानी’ कहने और उनके खिलाफ नैरेटिव बनाने के उद्देश्य से बनाया गया था। उन्होंने कहा कि कैसे जुबैर के ट्वीट को पाकिस्तानियों द्वारा सिख विरोधी भावनाओं को भड़काने और भारत को बदनाम करने के साथ-साथ अशांति फैलाने के लिए आगे बढ़ाया गया था। उन्होंने दिल्ली पुलिस आयुक्त से जुबैर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और जाँच शुरू करने का अनुरोध किया है।

सिरसा ने आगे बताया कि कैसे मोहम्मद जुबैर ने क्रिकेटर को ‘खालिस्तानी’ कहने वाले स्क्रीनशॉट ढूँढने में मेहनत की और उसे अपने ट्विटर पर साझा किया, जिसमें दावा किया जा रहा है कि 4 सितंबर को एशिया कप 2022 में पाकिस्तान से हारने के बाद नाराज भारतीय क्रिकेटर अर्शदीप को गाली दे रहे हैं और उन्हें खालिस्तानी कह रहे हैं। सिरसा ने कहा कि जुबैर के ट्वीट का इस्तेमाल पाकिस्तानी एजेंसियों ने भारत को बदनाम करने और देश में सिखों के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए किया।

उन्होंने कहा कि जुबैर का यह कदम भारत में सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा करने की एक सोची-समझी साजिश थी। सिरसा ने इस बात की भी जाँच कराने की माँग की कि इस ‘खालिस्तानी’ एजेंडे को बनाने में किसने जुबैर का साथ दिया।

पाकिस्तान और अरब देशों से किए गए ट्वीट

पाकिस्तान के खिलाफ मैच में अर्शदीप ने 18वें ओवर की तीसरी गेंद में आसिफ अली का कैच छोड़ा था, जिसके बाद देखा गया कि अचानक उनको सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाने लगा। कुछ अकॉउंट्स से उन्हें देश विरोधी जैसे शब्द तक कहे गए। जो ट्वीट अर्शदीप को देशद्रोही आदि बताते हुए किए गए हैं, वो अधिकतर पाकिस्तान और अरब देशों के लोगों ने भारतीय बनकर किए हैं।

विकिपीडिया पर भी अर्शदीप का डाटा बदला

पाकिस्तानियों ने केवल सोशल मीडिया पर ही अर्शदीप को खालिस्तानी दिखाने की कोशिश नहीं की। बल्कि उन्होंने विकिपीडिया पर भी अर्शदीप का डाटा बदला। देख सकते हैं कि जहाँ-जहाँ अर्शदीप के नाम के साथ भारतीय होना चाहिए वहाँ जानबूझकर खालिस्तान लिखा गया।

अंशुल सक्सेना के ट्विटर हैंडल पर इस संबंध में स्क्रीनशॉट हैं। इनसे पता चलता है कि पहले अर्शदीप को खालिस्तान स्क्वॉड का बताया गया और फिर हर जगह भारत हटाकर उनके नाम के साथ खालिस्तान जोड़ा गया। ये सारी एडिटिंग जिस आईपी एड्रेस से की गई, वो सर्च करने पर देखा जा सकता है कि पाकिस्तान का मिला है। ‘केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)’ ने इस मामले में विकिपीडिया को समन भी किया है।

नेपाल में लव जिहाद: बढ़ती मुस्लिम आबादी और नेपाली लड़कियों से निकाह के खेल में ‘दिल्ली कनेक्शन’, तस्कर-गिरोह भारतीय सीमा पर खतरा – OpIndia Ground Report

हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल से लगी भारत की सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने भारत से लगे नेपाल के इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की तीसरी रिपोर्ट:

नेपाल में बढ़ रही मुस्लिम आबादी और इबादतगाहों की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान ऑपइंडिया को वहाँ लव जिहाद जैसी घटनाओं के प्रमाण भी मिले। स्थानीय नेपाली लड़कियों से झूठ बोल कर, प्यार के जाल में फँसा कर निकाह करने का खेल वहाँ भी चल रहा है। इसी के साथ भारत-नेपाल की सीमा का प्रयोग तस्करी और अन्य अपराधों में भी किया जा रहा है। हमने ऐसे अपराधों से संबंधित कुछ जानकारियाँ जुटाईं, कुछ आँकड़े निकाले।

यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

लव जिहाद: झूठ बोल कर प्यार का नाटक और निकाह

जून 2022 में रुपनदेही जिले की सीना लामा नाम की एक युवती ने केस दर्ज करवाया। कपिलवस्तु जिले में दर्ज केस में सनाउल्लाह नाम के व्यक्ति पर झूठ बोल कर निकाह करने का मामला था। सीना लामा ने नेपाली पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में कहा था कि सनाउल्लाह उसके गाँव में ईंट का कारोबार करने आया था और उसे प्रेम जाल में फँसा लिया।

सीना लामा के मुताबिक सनाउल्लाह ने खुद को अविवाहित बताया था। पुलिस की शिकायत में सीना ने यह भी बताया कि सनाउल्लाह ने उससे लगभग 11 लाख नेपाली रुपए और 4 तोला सोना झूठ बोल कर हड़प लिया।

सनाउल्लाह और सीना लामा

सीना लामा का निकाह इस्लामी तौर-तरीके से हुआ था। सीना ने इस केस में सनाउल्लाह के अब्बा, उसकी अम्मी और खुद सनाउल्लाह को नामजद किया है।

FIR कॉपी

निकाहनामा के फॉर्म की प्रिंटिंग दिल्ली में

सीना लामा और सनाउल्लाह का निकाह कपिलवस्तु जिले के एक मौलाना ने करवाया था। इस निकाहनामा को मौलाना ने फ़ारसी में लिखा था। अंत में ‘अहमदुल्लाह इस्लामपुर’ दर्ज था। इसके लिए प्रयोग होने वाला फॉर्म दिल्ली के पिनकोड 06 (जामा मस्जिद, चांदनी चौक, हौज काजी, चावड़ी बाजार आदि वाला एरिया) के पते पर किसी खुर्शीद बुक डिपो द्वारा प्रिंट और डिजायन किया गया था।

निकाहनामा

भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी: आँकड़े-आरोपितों से समझें साजिश किसकी?

नेपाल की खुली सीमा का फायदा दोनों तरफ के असामाजिक तत्व गैर-कानूनी कार्यों के लिए उठाया करते हैं। 25 अगस्त 2022 को नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश की सिद्धार्थनगर पुलिस ने 26 बोतल नेपाली शराब के साथ सद्दाम उर्फ़ जलालुद्दीन को गिरफ्तार किया था। जलालउद्दीन भारत के सिद्धार्थनगर का रहने वाला है।

18 अगस्त 2022 को उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर की ही शोहरतगढ़ पुलिस ने भारत से चुराई बाइक नेपाल में बेचने की फिराक में घूम रहे वाहन चोर महमूद शेख को गिरफ्तार किया था। महमूद शेख सिद्धार्थनगर का ही निवासी है।

चोरी की बाइकों के साथ महमूद शेख (चित्र साभार- सिद्धार्थनगर पुलिस)

अगस्त 2022 में ही बिहार के सीतामढ़ी जिले में बॉर्डर इलाके सुरसंड में सशस्र सीमा बल (SSB) ने अवैध रूप से भारत में घुस रही पाकिस्तानी युवती खुदीजा नूर को गिरफ्तार किया था। खुदीजा पाकिस्तान के फैसलाबाद की रहने वाली है।

31 जुलाई 2022 को उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में जिला पुलिस और SSB ने साझा गश्त करते हुए नेपाल सीमा से 51 लाख रुपए की स्मैक के साथ मोहम्मद आबिद को गिरफ्तार किया था। आबिद बहराइच का रहने वाला है।

23 जुलाई 2022 को सिद्धार्थनगर पुलिस ने नेपाल से खाद की अवैध तस्करी करने वाले सलमान अहमद को बजहा नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया था। आरोपित के पास तस्करी के लिए प्रयोग होने वाली 2 बाइकें और 39 बोरी खाद बरामद हुई थी। सलमान सिद्धार्थनगर का ही रहने वाला है।

9 जुलाई 2022 को उत्तर प्रदेश की शाहजहाँपुर पुलिस ने नेपाल से भारत में चरस की तस्करी करने वाले शाहनवाज को गिरफ्तार किया था। शाहनवाज के पास से लगभग 70 लाख रुपए मूल्य की चरस भी बरामद हुई थी। शाहनवाज शाहजहाँपुर जिले का ही रहने वाला है।

6 जुलाई 2022 को उत्तर प्रदेश की सिद्धार्थनगर पुलिस ने नेपाल से खाद की तस्करी करने वाले मज्जीबुला को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने तस्करी में प्रयोग होने वाली मज्जीबुल्ला की मार्शल जीप भी जब्त कर ली थी। आरोपित सिद्धार्थनगर का ही रहने वाला है, जिसके पास से 16 बोरी खाद बरामद हुई।

3 जुलाई 2022 को सिद्धार्थनगर पुलिस ने मोहना क्षेत्र में नशीले कैप्सूल और चाकू के साथ नेपाल के रूपनदेही जिले के जियाउद्दीन को गिरफ्तार किया था। जियाउद्दीन के पास प्रतिबंधित 280 कैप्सूल बरामद किए गए थे।

26 जून 2022 को उत्तर प्रदेश की सिद्धार्थनगर पुलिस ने भारत में चोरी की बाइक लेकर घुसे नेपाल के रूपनदेही जिले के निवासी तौफीक अहमद को गिरफ्तार किया था। तौफीक के पास से 70 नशीली गोलियाँ भी बरामद की गई थीं।

4 जून 2022 को उत्तर प्रदेश की बहराइच पुलिस ने 60 बोतल नेपाली शराब के साथ नबी अहमद को केवलपुर बॉर्डर क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। नबी अहमद बहराइच का रहने वाला है।

भारत-नेपाल बॉर्डर, मिर्जा दिलशाद बेग और दाऊद कनेक्शन

नेपाल के कपिलवस्तु जिले में तमाम लोग अभी भी 1990 के दशक में दुर्दांत अपराधी और वहाँ के 2 बार के विधायक रहे मिर्जा दिलशाद बेग का नाम ले रहे थे। हमने जिससे भी 1998 में छोटा राजन गैंग द्वारा मारे गए दिलशाद बेग का घर पूछा, उसने हाथ से उसके घर जाने वाली सड़क की तरफ इशारा किया।

दिलशाद बेग का घर बॉर्डर से लगभग 1 किलोमीटर अंदर नेपाल के कृष्णानगर में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वो पाकिस्तान के दाऊद गैंग का प्रमुख चेहरा बताया जाता था और ISI की गतिविधियों को बॉर्डर इलाके में संचालित करता था। दिलशाद बेग के घर पर कोई चहल-पहल नहीं दिखी।

इसी घर में रहता था मिर्ज़ा दिलशाद बेग

बॉर्डर पर कत्ल कर दिए गए थे हिन्दूवादी नेता मंगरे सिंह

बलरामपुर जिले के संघ के सीमा जागरण मंच के कार्यकर्ता ओपी मिश्रा और विद्याभूषण ने ऑपइंडिया को बताया, “70 के दशक में जनसंघ से हिंदूवादी नेता मंगरे सिंह भारत के बलरामपुर के तुलसीपुर विधायक बने थे। वो इलाके में हिन्दू धर्म को बचाने के लिए काफी सक्रिय थे। बाद में 90 के दशक में उनकी हत्या नेपाल के बॉर्डर जरवा के जंगलों में कर दी गई थी। इस हत्या में फ़िरोज़ पप्पू और मसूद अहमद का नाम सामने आया था। दोनों हत्यारोपित बाद में समाजवादी पार्टी से जुड़ गए थे।”

पढ़ें पहली रिपोर्ट : कभी था हिंदू बहुल गाँव, अब स्वस्तिक चिह्न वाले घर पर 786 का निशान: भारत के उस पार भी डेमोग्राफी चेंज, नेपाल में घुसते ही मस्जिद, मदरसा और इस्लाम – OpIndia Ground Report

पढ़ें दूसरी रिपोर्ट : घरों पर चाँद-तारे वाले हरे झंडे, मस्जिद-मदरसे, कारोबार में भी दखल: मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ ही नेपाल में कपिलवस्तु के ‘कृष्णा नगर’ पर गाढ़ा हुआ इस्लामी रंग – OpIndia Ground Report

‘मुझे झूठे केस में फँसाने को कहा गया, इसीलिए CBI अधिकारी ने कर ली आत्महत्या’: मनीष सिसोदिया के झूठ की खुली पोल, शराब घोटाले में क्लीन-चिट नहीं

शराब घोटाले में फँसे दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के झूठ का एक बार फिर पर्दाफाश हो गया है। मनीष सिसोदिया ने सोमवार (5 सितंबर, 2022) को कहा था कि CBI के अधिकारी जितेंद्र कुमार ने इसलिए आत्महत्या कर ली है, क्योंकि उस अधिकारी पर उन्हें झूठे केस में फँसाने के लिए दबाव डाला जा रहा था। CBI ने सिसोदिया के इस आरोप का सिरे से खंडन करते हुए उनके बयान को ‘शरारती और भ्रामक’ बताया है।

सीबीआई (CBI) की ओर से सिसोदिया के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा गया है, “मृतक जितेंद्र कुमार सीबीआई से सीधे तौर पर नहीं जुड़े हुए थे। वह सीबीआई में बतौर डिप्टी लीगल एडवाइजर प्रॉसिक्यूशन के इंजार्च थे। जितेंद्र कुमार का काम सीबीआई द्वारा चार्जशीट किए गए केसों की ट्रायल को देखना था।”

इसके अलावा, सीबीआई सीबीआई की ओर यह भी स्पष्ट किया गया कि आबकारी मामले में फिलहाल किसी को भी क्लिन चिट नहीं दी गई है। इस मामले में अभी जाँच की जा रही है। एजेंसी ने कहा कि मनीष सिसोदिया का बयान शरारती और भ्रामक होने के साथ ही इस मामले में चल रही जाँच से ध्यान भटकाने की कोशिश है।

बता दें, मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाते हुए कहा था कि सीबीआई के एक अधिकारी ने इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि उस पर उन्हें झूठे आबकारी मामले में फँसाने के लिए दबाव डाला गया था।

सिसोदिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, “पीएम मोदी से आज मैं कहना चाहता हूँ यदि आप मुझे फर्जी तरीके से फँसाना चाहते हैं, फँसा लीजिए। रेड करा लीजिए। लेकिन, अधिकारियों पर इस तरह का दबाव बनाकर उनको सुसाइड के लिए मजबूर मत करिए। उनका घर उजड़ रहा है। आप हर समय यही सोचते रहते हैं कि मैं सीबीआई और ईडी का इस्तेमाल कैसे करूँ और चुनी हुई सरकार को कैसे गिराऊँ।”

144 करोड़ के घोटाले में आरोपित हैं मनीष सिसोदिया

बता दें, दिल्ली की नई आबकारी नीति के अंतर्गत दिल्ली सरकार पर 144 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप है। इसमें, सीबीआई ने मनीष सिसोदिया समेत 15 अन्य लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। इस एफआईआर में सिसोदिया आरोपित नंबर 1 हैं। इस बड़े घोटाले की जाँच में सीबीआई ने गत 18 अगस्त को मनीष सिसोदिया के घर समेत 31 जगहों पर छापेमारी की थी, जिसके बाद से सिसोदिया सीबीआई पर हमलावर हैं।

काबुल में रूसी दूतावास के बाहर फिदायीन हमलावर ने खुद को उड़ाया, मरने वालों में रूस के 2 राजनयिक भी: 2016 में भी यहाँ हुआ था ब्लास्ट

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल सोमवार (5 सितंबर 2022) को आत्मघाती बम धमाके से दहल उठी। यह धमाका रूस के दूतावास के बाहर हुआ। धमाके में रूस के दो राजनयिकों की भी मौत हुई है। हालाँकि कुल मौतों को लेकर मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग नंबर बताए जा रहे हैं। कुछ में यह संख्या 25 तो कुछ में 20 बताई गई है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है।

रिपोर्ट के अनुसार एक संदिग्ध रूसी दूतावास के बाहर घूम रहा था। गेट पर सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोकने की कोशिश की। जब वह नहीं रुका तो उस पर फायरिंग की। इसमें वह जख्मी हो गया बावजूद उसने खुद को उड़ा लिया। जब यह धमाका हुआ कई अफगानी नागरिक भी दूतावास में वीजा कार्य के लिए मौजूद थे।

काबुल पुलिस के प्रमुख खालिद जादरान का कहना है कि हमलावर भीड़ के बीच में घुसकर आत्मघाती हमला करने की फिराक में था। यदि वह अपने मंसूबों में कामयाब हो जाता तो जान-माल की भारी क्षति हो सकती थी। खबर लिखे जाने तक हमलावर की पहचान सामने नहीं आई थी। न ही किसी आतंकी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी ली थी। 2016 में भी यहाँ धमाका हुआ था। उस समय 12 लोगों की मौत हो गई थी।

सोमवार को हुए हमले में अपने दो राजनयिकों की मौत की रूसी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि काबुल में हुए आतंकवादी हमले में दूतावास में तैनात दो अधिकारियों की मौत हो गई है।

बता दें इससे पहले अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में शुक्रवार (2 सितंबर 2022) को जुमे की नमाज के दौरान एक मस्जिद में धमाका हुआ था। इस धमाके में तालिबान के बड़े मौलवियों में से एक मुल्ला मुजीब उर रहमान अंसारी मारा गया था। हमले में 20 लोग मारे गए थे, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। उससे पहले 18 अगस्त को काबुल की ही एक मस्जिद में हुए धमाके में 21 लोग मारे गए थे।