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हिंदू नाबालिग को रेप के बाद पेड़ से टाँगना झारखंड CM के लिए बस एक ‘घटना’, लड़की को जलाने के मामले में MLA भाई ने खोजा था ‘प्रेम प्रसंग’

दुमका झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का गृह जिला है। यहाँ हाल ही में हुई दो घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर रखा है। एक मामले में हिंदू लड़की को जलाकर मार डाला गया, दूसरी में हिंदू लड़की को बलात्कार के बाद हत्या कर शव को पेड़ से टाँग दिया गया। दोनों मामले में दरिंदगी की शिकार हुई लड़की नाबालिग थी। लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए यह महज एक ‘घटना’ है। उनकी प्रतिक्रिया से जाहिर होता है कि ये कोई गंभीर मामले नहीं है। ऐसी सामान्य घटनाएँ हैं जो होती रहती हैं।

शनिवार (3 सितंबर 2022) को दुमका में जनजातीय समाज की 14 साल की लड़की का शव पेड़ से टँगा मिला था। आरोप है कि अरमान अंसारी ने बलात्कार के बाद हत्या कर लड़की का शव पेड़ से लटका दिया ताकि सुसाइड लगे। इस संबंध में रविवार को पत्रकारों ने सोरेन से सवाल पूछा। जवाब में उन्होंने कहा, “घटनाएँ तो होती रहती हैं। घटनाएँ कहाँ नहीं होती हैं। घटना तो बोलकर आता नहीं है।”

इससे पहले दुमका में एक हिंदू नाबालिग लड़की जलाकर मार डाली गई थी। इस मामले में शाहरुख हुसैन ने नईम के साथ घर में घुस हिंदू नाबालिग पर पेट्रोल छिड़क उसे आग लगा दी थी। बाद में इलाज के दौरान लड़की की मौत हो गई। अब तक जो जानकारी सामने आई है उससे पता चलता है कि शाहरुख हुसैन लड़की के पीछे पड़ा था। दोस्ती नहीं करने पर उसे जान से मारने की धमकी देता था।

इस मामले को लेकर भी हेमंत सोरेन की सरकार ने फौरन हरकत नहीं दिखाई थी। इस मामले में इलाज में लापरवाही से लेकर एक डीएसपी नूर मुस्तफा पर हिंदू लड़की को बालिग दिखाने तक के गंभीर आरोप है। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री के भाई बसंत सोरेन जो कि दुमका से ही विधायक हैं ने इस मामले के लिए ‘प्रेम प्रसंग’ को जिम्मेदार बताया था।

बसंत सोरेन ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा था, “देखिए, प्रेम-प्रसंग का मामला है। इसमें व्यक्तिगत या सामाजिक तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता। हमारा-आपका प्रेम है और हमारी-आपकी प्रतिक्रिया है – इसमें घटना को अंजाम देने का काम कोई समाज तो करेगा नहीं न, या कोई पार्टी तो करेगी नहीं न। दो लोग साथ बैठे हुए हैं और उन्होंने मारपीट कर ली। कोई विधायक या कोई पार्टी, इसे किसी चीज से जोड़ना गलत है।”

नृशंस घटनाओं से यह यह बात भी सामने आई है कि दुमका में ऐसे गिरोह काम कर रहे हैं जो छोटी उम्र के हिंदू लड़कियों को टारगेट करते हैं। दुमका की ही एक युवती ने सामने आकर बताया है कि नईम ने उसे अगवा कर जबरन निकाह करने की कोशिश थी। बावजूद इसके मुख्यमंत्री की इस तरह की टिप्पणी चिंताजनक है। साथ ही जिहादी तत्वों के साथ सख्ती से निपटने की सरकार की कमजोर इच्छाशक्ति को भी दिखाता है।

भारतीय बनकर पाकिस्तानियों ने उगला अर्शदीप सिंह पर जहर, विकिपीडिया पर ‘खालिस्तानी’ बनाया: फैक्टचेक की जगह AltNews के जुबैर ने दी प्रोपेगेंडा को हवा

एशिया कप 2022 में भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान भारतीय क्रिकेटर अर्शदीप सिंह से एक कैच छूटने का बवाल बन चुका है। ये बवाल भारतीयों ने नहीं बनाया बल्कि सारा किया धरा पाकिस्तान का है।

कल (4 सितंबर 2022) के मैच में अर्शदीप ने 18 वें ओवर की तीसरी गेंद में आसिफ अली का कैच छोड़ा था, जिसके बाद देखा गया कि अचानक उनको सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाने लगा। कुछ अकॉउंट्स से उन्हें देश विरोधी जैसे शब्द तक कहे गए।

ट्विटर पर होते इन नेगेटिव पोस्ट के बाद अचानक से ऑल्ट न्यूज के फैक्टचेकर मोहम्मद जुबैर ने मोर्चे को संभाला और सारे ट्वीट इकट्ठा करके बताया कि देखो कैसे एक कैच मिस हुई तो अर्शदीप को भला-बुरा बोला जा रहा है।

जुबैर का ट्वीट

वहीं हरभजन सिंह भी इस बीच अर्शदीप के समर्थन में आ गए और उन्होंने बिना सारे मामले को समझे भारतीयों को फटकारते हुए कहा, 

“युवा अर्शदीप की आलोचनाएँ बंद करो। कोई जानबूझ कर कैच को नहीं छोड़ता है। हमें अपने लड़कों पर गर्व है। पाकिस्तान ने बढ़िया खेला। शर्म आनी चाहिए उन लोगों को जो अपने लोगों को ऐसा कहकर नीचा गिराते हैं। अर्शदीप सोना है।”

पाकिस्तानी अकॉउंट से हुए अर्शदीप को ‘खालिस्तान’ बताने वाले ट्वीट

अब इन्हीं ट्विट्स को लेकर ट्विटर यूजर ‘द हॉक आई’ ने जुबैर और हरभजन दोनों को आइना दिखाया। अपने ट्वीट में हॉक आई ने बताया कि कैसे ये जो ट्वीट अर्शदीप को देशद्रोही आदि बताते हुए किए गए हैं वो अधिकतर पाकिस्तान और अरब देशों के लोगों ने भारतीय बनकर किए हैं। उन्होंने याद दिलाया शमी के समय भी इसी तरह पोस्ट कर करके भारतीयों को बदनाम करने का प्रयास हुआ था।

देख सकते हैं कि पाकिस्तान के जैद हामिद ने ये सारा खेल शुरू किया था। अपने ट्वीट में उसने दिखाया कि पाकिस्तानियों की मदद सिख ने की। इसके बाद पाकिस्तान का जन्मा यूएस पत्रकार वीएस खान भी ऐसी हरकत करता पाया गया। पाकिस्तान के न्यूज चैनल से भी अर्शदीप को खालिस्तानी कहा गया।

इतने सारे सबूत होने के बावजूद ऑल्ट न्यूज के कथित फैक्ट चेकर्स ने इन पर रिपोर्ट नहीं की बल्कि अगर कोई एंगल खोजा तो केवल भारतीयों को कोसने का और उन्हें नीचा दिखाने का कि कैसे वो अपने क्रिकेटर के खिलाफ जहर उगलते हैं।

पाकिस्तान से बदला गया विकिपीडिया पर अर्शदीप का डाटा, लिखा गया खालिस्तानी

मालूम हो कि पाकिस्तानियों ने केवल सोशल मीडिया पर ही अर्शदीप को खालिस्तानी दिखाने की कोशिश नहीं की। बल्कि उन्होंने विकिपीडिया पर भी अर्शदीप का डाटा बदला। देख सकते हैं कि जहाँ-जहाँ अर्शदीप के नाम के साथ भारतीय होना चाहिए वहाँ जानबूझकर खालिस्तान लिखा गया।

अंशुल सक्सेना के ट्विटर हैंडल पर इस संबंध में स्क्रीनशॉट हैं। इनसे पता चलता है कि पहले अर्शदीप को खालिस्तान स्क्वॉड का बताया गया और फिर हर जगह भारत हटाकर उनके नाम के साथ खालिस्तान जोड़ा गया। ये सारी एडिटिंग जिस आईपी एड्रेस से की गई वो सर्च करने पर देख सकते हैं कि पाकिस्तान का मिला है।

याद दिला दें कि भारत-पाकिस्तान के बीच हुए टी-20 वर्ल्ड कप मैच के दौरान भारतीय गेंदबाज मोहम्मद शमी को इस तरह लोगों की नफरत का शिकार होना पड़ा था। बाद में पता चला था कि शमी के विरुद्ध किए गए ट्वीट ज्यादातर पाकिस्तानियों ने और विदेशी एजेंसियों ने किए थे। उस समय भी माहौल ऐसा बना दिया गया था कि सचिन, हरभजन सिंह जैसे खिलाड़ी शमी के समर्थन में उतर आए थे।

कंगना रनौत का दावा- असलम से महेश बने हैं ‘मूवी माफिया’, पूछा असली नाम क्यों छिपा रहे: बेटे राहुल ने भी बताया था- मेरा नाम मोहम्मद रखना चाहते थे

बॉलीवुड फिल्मकार महेश भट्ट (Mahesh Bhatt) का असली नाम ‘असलम’ है। यह दावा अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने किया है। इससे पहले खुद महेश भट्ट के बेटे राहुल ने बताया था कि उनके पिता उनका नाम ‘मोहम्मद’ रखना चाहते थे। इसी साल अप्रैल में जब आलिया भट्ट ने रणबीर कपूर से शादी की थी तो कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि महेश भट्ट ने बेटी को फेरों के दौरान वचन देने से रोक दिया था।

अब कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी में महेश भट्ट का एक पुराना वीडियो शेयर किया है। रविवार (4 सितंबर 2022) को शेयर किए गए इस वीडियो में भट्ट मुस्लिमों को संबोधित करते दिख रहे हैं। इसके साथ कंगना ने लिखा है कि बॉलीवुड फिल्मकार का असलमी नाम ‘महेश’ नहीं बल्कि ‘असलम’ है और वे इसे छिपा रहे हैं।

कंगना का कहना है कि महेश भट्ट को असली नाम का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्हें खुद को उस धर्म का नहीं दिखाना चाहिए, जिसमें वे सोनी राजदान से शादी के लिए आए हैं। साथ ही महेश भट्ट पर सभ्य भाषा में लोगों को हिंसा के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। कंगना ने लिखा है, “मुझे बताया गया कि महेश भट्ट का असली नाम असलम है। उन्होंने सोनी राजदान से शादी करने के लिए अपना धर्म बदल लिया। यह खूबसूरत नाम था तो इसे छिपा क्यों रहे हैं। उन्हें अपना असली नाम ही इस्तेमाल करना चाहिए और किसी खास धर्म का होने का नहीं दिखाना चाहिए।”

कंगना रनौत की इंस्टाग्राम स्टोरी

गौरतलब है कि कंगना भट्ट कैंप की कई फिल्मों में काम कर चुकी हैं। इसी कैंप की फिल्म ‘गैंगस्टर’ से उन्होंने डेब्यू किया था। बताया जाता है कि भट्ट कैंप की एक फिल्म का ऑफर कंगना ने ठुकरा दिया था। उसके बाद इनके रिश्तों में खटास शुरू हुई। कंगना महेश भट्ट को ‘मूवी माफिया’ बता चुकी हैं। कई मौकों पर आलिया भट्ट पर भी तंज कस चुकी हैं।

वैसे यह पहली बार नहीं है जब महेश भट्ट पर इस तरह का आरोप लगा है। खुद उनके बेटे राहुल भट्ट ने कहा था, “मेरे पिता का नजरिया मेरे लिए कभी बहुत अच्छा नहीं रहा। वह मुझे अपने बेटे की तरह मानते ही नहीं थे और न ही वैसा बर्ताव करते थे। वह मेरा नाम मोहम्मद रखना चाहते थे। बहुत से लोगों को इस बात पर भरोसा नहीं होता, लेकिन यह सच है। वह हमेशा चाहते थे कि मेरी पहचान मोहम्मद नाम से हो। पड़ोस में रहने वाले महाराष्ट्र के लोगों ने मेरी एंग्लो इंडियन माँ से इस मुद्दे पर निवेदन किया और कहा कि महेश भट्ट के पास अपनी धर्म निरपेक्षता दिखाने के और भी मौके हैं।”

उस इंटरव्यू के दौरान राहुल ने यह भी कहा था कि अगर महेश भट्ट को ऐसा लगता है कि वह एक अच्छे मुस्लिम हैं तो उन्हें अपनी सभी औलादों के साथ एक जैसा व्यवहार करना चाहिए।

कनाडा में 13 जगहों पर चाकू से हमला, 10 की मौत-15 घायल: सड़कों पर घूम रहे 2 संदिग्ध, पुलिस ने लोगों से घरों में ही रहने को बोला

कनाडा में 13 जगहों से सड़क पर चलते लोगों पर मास स्टैबिंग यानी कि चाकू से हमला करने का मामला प्रकाश में आया है। घटना में 10 लोगों की मौत जबकि 15 लोग घायल बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने 2 संदिग्धों की तस्वीर दिखाकर अलर्ट जारी कर दिया है। ये दोनों काले रंग की गाड़ी में बैठकर घटना को अंजाम दे रहे हैं। शहर में ‘सिविल इमरजेंसी’ भी लागू कर दी गई है।

रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस की असिस्‍टेंट कमिश्‍नर रोंडा ब्‍लैकमोर ने इस घटना को हाल के वर्षों की बड़ी घटनाओं में से एक बताया है। ब्लैकमोर के मुताबिक उन लोगों के पास घटना की सूचना सबसे पहले (स्थानीय समयानुसार) सुबह 5:40 पर आई थी। इसके बाद पता चला कि इन्होंने सस्‍काचुवान में भी कम से कम 13 लोगों को अपना निशाना बनाया।

संदिग्धों की लोकेशन का नहीं चल पाया है पता

पुलिस द्वारा जारी की गई जानकारी के मुताबिक संदिग्धों के नाम डेमियन सैंडरसन और माइल्स सैंडरसन हैं। ये दोनों निसान रोग गाड़ी में बैठ इधर-उधर घूमकर घटना को अंजाम दे रहे हैं। इनका कुछ पता नहीं है कि आखिर वो अभी कहाँ है।

असिस्टेंट कमिश्नर बोलीं कि घटना देख ऐसा लगता है कि कइयों को संदिग्ध अपना निशाना बना चुके हैं और कइयों को और बनाएँगे। इन्हें पकड़े बिना इनके मकसद को बता पाना सच में मुश्किल है। अल्बर्टा और मनिटोबा के प्रांत की पुलिसें अपने काम पर लगी हैं। पर उनकी लोकेशन का अभी पता नहीं चल सका है। इसके अलावा डेमियन और माइल्स के रिश्तेदारों का पता लगाना भी अभी संभव नहीं हो पा रहा है और इनका आपस में क्या संबंध है ये भी नहीं पता चल सका है।

सुरागों से दूर पुलिस ने अभी केवल स्थानीयों को घर में रहने की सलाह दी है। हालाँकि सोशल मीडिया पर लोग बता रहे हैं कि इन दोनों संदिग्धों को रेगिना में देखा गया है। इस बीच कमिश्नर ब्लैकमोर ने आरोपितों को संदेश जारी कर कहा है, “डेमियन और माइल्स अगर हमारी बात सुन रहे हैं तो उनसे कहा जाता है कि वो फौरन खुद को पुलिस के हवाले कर दें।”

बता दें कि सड़क चलते लोगों पर इस तरह हमला कनाडा में पहली बार नहीं है। 2 साल पहले यहाँ एक मास शूटिंग की घटना हुई थी। तब नोवा स्कोटिया के एक व्यक्ति ने 14 घंटों में घूम घूमकर लोगों को मारा था।

कनाडा PM ने जताया दुख

इस बार भी दो दर्जन लोग निशाना बनाए जा चुके हैं। कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने इसे भयावह और दिल तोड़ने वाली घटना कहा है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के साथ संवेदना व्यक्त की और आ बताया कि वह हालातों पर करीबी से नजर बनाए हुए हैं। पुलिस अपने प्रयास कर रही हैं।

‘इमरान हाशमी की फिल्म में काम देने का किया वादा, फोन पर अश्लील बातें की’ : अब यौन शोषण केस में KRK गिरफ्तार, पीड़िता ने कहा- जूस पिलाकर बनाए संबंध

कमाल राशिद खान उर्फ KRK की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। केआरके, ऋषि कपूर और इरफान खान पर विवादित टिप्पणी के मामले में पहले ही 30 अगस्त से न्यायिक हिरासत में थे। और अब, एक अभिनेत्री से कथित तौर पर छेड़छाड़ के मामले में मुंबई की वर्सोवा पुलिस ने हिरासत में लिया है।

इस मामले में, 27 वर्षीय पीड़िता ने पुलिस से शिकायत की थी कि वह 2017 में मुंबई आई थी जहाँ वह एक हाउस पार्टी में केआरके से मिली थी। इस मुलाकात में, केआरके ने खुद को निर्माता निर्देशक बताया था जिसके बाद दोनों के बीच फोन नंबर्स एक्सचेंज हुए थे।

पीड़िता ने पुलिस से बताया है, साल 2017 में ही केआरके ने कहा कि वह इमरान हाशमी स्टारर कैप्टन नवाब नामक एक फिल्म में उसे मुख्य भूमिका देंगे और फोन पर अश्लील बातें की।

ऑरेंज जूस पीने के बाद आ गया था चक्कर

अभिनेत्री ने केआरके पर आरोप लगाते हुए कहा है, जनवरी 2019 में, केआरके ने उसे अपने जन्मदिन के लिए अपने बंगले में बुलाया था। हालाँकि, वह उस दिन केआरके के घर नहीं गई थी। लेकिन वह अगले दिन शाम 7 बजे के आसपास कमाल आर खान (केआरके) के बंगले में चली गई। उस दिन गर्मी बहुत अधिक थी, इसलिए वह उसे बंगले की पहली मंजिल के एक कमरे में ले गया।

पीड़िता अभिनेत्री ने आगे कहा है कि केआरके ने उसे वोदका लेने के लिए कहा लेकिन उसने मना कर दिया। फिर केआरके ने उसे ऑरेंज जूस दिया जिसे उसने पी लिया। अभिनेत्री ने आगे कहा, “जैसे ही मैंने ऑरेंज जूस पिया मुझे चक्कर आ गया। इसके बाद खान ने उसके साथ यौन संबंध बनाने की कोशिश की। जिससे वह बेहद डर गई और वहाँ से चली गई।”

पीड़िता ने बताया है कि, इस पूरी घटना को लेकर उसने अपने दोस्त को फोन किया था। दोस्त ने कहा कि केआरके का फिल्म इंडस्ट्री में बड़ा दबदबा है इसलिए उसके बारे में शिकायत करने से उसका करियर प्रभावित हो सकता है।

पीड़िता का कहना है, साल 2021 में उसने एक अन्य दोस्त को अपनी आपबीती सुनाई, इस दोस्त ने उसे पुलिस में शिकायत करने की सलाह दी। जिसके बाद उसने वर्सोवा पुलिस स्टेशन से संपर्क किया और कमाल आर खान के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 ए (यौन उत्पीड़न) और 509 के तहत एफआईआर दर्ज कराई।

इस मामले में शनिवार (3 सितंबर) को वर्सोवा पुलिस ने केआरके को जेल से ही हिरासत में ले लिया था। इसके बाद रविवार (4 सितंबर) को बांद्रा में एक मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया। जहाँ से कोर्ट ने केआरके को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

पहले से ही न्यायिक हिरासत में था केआरके

गौरतलब है कि इससे पहले, कमाल राशिद खान उर्फ KRK को विवादित ट्वीट के चलते 30 अगस्त को मुंबई में गिरफ्तार किया गया था। दरअसल, केआरके ने साल 2020 में ऋषि कपूर और इरफान खान जैसे दिवंगत अभिनेताओं के ऊपर विवादित ट्वीट किए थे। इसी के बाद उनके ऊपर मलाड थाने में शिकायत दर्ज हुई। पुलिस ने उसी मामले में केआरके से पूछताछ करके उनको गिरफ्तार किया था।

लंदन से चोरी हुई 2 करोड़ की कार कराची में ‘बंगले वाले’ के पास मिली: लोगों ने खूब उड़ाया Pak का मजाक, कहा- ‘ये तो सच में महाचोर निकले’

ब्रिटेन की राजधानी लंदन से चोरी हुई एक कार पाकिस्तान के कराची में मिली है। बताया जा रहा है कि लग्जरी कार ‘बेंटले मल्सैन’ सेडान को ब्रिटेन से चुराकर पाकिस्तान लाया गया था जो अब कराची के एक बंगले से बरामद हुई है।

बताया जा रहा है कि ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) ने पाकिस्तान के कस्टम विभाग को कार चोरी होने की सूचना दी थी। इस सूचना के बाद पाकिस्तानी कस्टम अधिकारियों ने कराची के एक बंगले में छापेमारी करते हुए यह कार बरामद की है।

लंदन से चोरी के बाद कराची में बरामद हुई इस लग्जरी कार की कीमत करीब 3,00,000 डॉलर से भी अधिक बताई जा रही है। भारतीय रुपयों में इस कार की कीमत 2,39,24,714 रुपए है। ‘बेंटले मल्सैन’ ब्रांड की सबसे बड़ी और सबसे महंगी सेडान है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कार को जिस बंगले से बरामद किया गया है उसके मालिक से कस्टम विभाग के अधिकारियों ने कार के दस्तावेज माँगे थे। लेकिन, कार चोरी की होने के कारण वह दस्तावेज मुहैया नहीं करवा पाए। जिसके बाद अधिकारियों ने उसे और कार बेचने वाले दलाल को गिरफ्तार कर लिया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कार चोरी करने वाले गैंग ने कार को पाकिस्तान ले जाने के लिए पूर्वी यूरोपीय देश के एक राजनयिक के दस्तावेजों का उपयोग किया था। फिलहाल, इस राजनयिक को उसकी सरकार ने वापस बुला लिया है। राजनयिक किस देश का था यह बात अब तक सामने नहीं आ सकी है।

इस मामले में, कस्टम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कार का रजिस्ट्रेशन भी फर्जी है। कार चोरी के इस मामले में, दर्ज की गई एफआईआर (FIR) के मुताबिक, चुराई गई कार की तस्करी की वजह से करीब 30 करोड़ रुपए से ज्यादा के टैक्स की चोरी हुई है। कस्टम विभाग अब गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर रही है और इस पूरे घटनाक्रम में शामिल लोगों की तलाश कर रही है। वहीं सोशल मीडिया पर लोगों ने इस घटना को सुनने के बाद पाकिस्तान का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है कि हॉलीवुड तो ऐसी चोरियाँ सिर्फ फिल्मों में दिखा पाता है, लेकिन पाकिस्तान सच में इन्हें अंजाम दे देता है। कुछ यूजर्स हैरानी से कह रहे हैं कि पाकिस्तान तो सच में महाचोर निकला जो इतनी बड़ी गाड़ी को चुरा ले आए।

नहीं टूटी राधा-रानी मंदिर में 5000 साल पुरानी परंपरा, मीडिया ने झूठ फैलाया: समझें क्या है ‘सेवादार’ विवाद

बरसाने में राधा रानी के मंदिर में पूजा को लेकर उठे विवाद ने सोशल मीडिया पर तमाम सवालों को पैदा कर दिया था। कहीं कहा जा रहा था कि राधाष्टमी के मौके पर महिला पुजारी के पूजा करने से मंदिर की 5000 साल पुरानी परंपरा टूट जाएगी, तो कहीं पूछा जा रहा था कि क्या ये सब मोदी सरकार का किया धरा है?

इन सब सवालों के जवाब आइए सरल भाषा में आपको देते हैं और जानते हैं कि क्या सच में इस विवाद में सरकार से जुड़ा कोई एंगल है और क्या सच में हजारों वर्ष पुरानी परंपर टूट गई?

कैसे शुरू हुआ राधा रानी मंदिर में सेवादार बनने का विवाद

बरसाने में स्थित राधा-रानी मंदिर में पूजा-अर्चना का काम गोस्वामी समुदाय के तीन ब्राह्मण परिवारों के पास है। हर साल इन्हें बारी-बारी से सेवादार बनने का मौका मिलता है। लेकिन इस बार परेशानी तब शुरू हुई जब नियम के मुताबिक हरबंस लाल गोस्वामी का नाम सेवादार बनने के लिए आया।

हरबंस लाल गोस्वामी का निधन 1999 में हो गया था। ऐसे में उनके भाई के पौत्र रास बिहारी गोस्वामी ने इस पद को संभाला और 20 अप्रैल से 20 अक्टूबर के लिए सेवादार नियुक्त हुए। लेकिन इसी बीच एक मायादेवी नाम की एक महिला ने खुद को दिवंगत हरबंस लाल गोस्वामी की विधवा बताकर दावा कर दिया कि सेवादार बनने का अधिकार उनका है।

कोर्ट में पहुँचा राधा रानी मंदिर का ‘सेवादार’ विवाद

केस पहले निचली कोर्ट में गया जहाँ अदालत ने पक्ष सुने और मायादेवी को हरबंस लाल की विधवा मानते हुए उन्हें तय अवधि के लिए सेवादार बनाने का आदेश दे दिया। लेकिन, बाद में अन्य पहलुओं को देखते हुए जिला अदालत ने इस आदेश को रद्द किया और आगे मंदिर प्रशासन का नियंत्रण लेने के लिए याचिकाएँ हाईकोर्ट में डाली गईं।

कायदे से ये सब कार्य राधाष्टमी से पहले पूर्ण होने थे लेकिन देरी के कारण ऐसा नहीं हुआ। 2 सितंबर को आदेश पारित होने की बजाय कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 8 सितंबर दे दी।

अब समस्या ये आई कि इसी बीच 4 अप्रैल को राधाष्टमी पड़ गई जिसे हर साल बरसाने में धूम-धाम से मनाया जाता है। जिसमें लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में रास बिहारी दोबारा कोर्ट गए और तत्काल सुनवाई की माँग की। कोर्ट ने इस बार मायादेवी को नोटिस भेज मामले को 12 सितंबर तक टाल दिया।

5000 साल पुरानी परंपरा टूटने की खबरें मीडिया में

अब राधाष्टमी और कोर्ट की सुनवाई में देरी के चलते जगह-जगह ये बातें फैल गईं कि अब राधा-रानी मंदिर में 5000 साल पुरानी परंपरा टूट जाएगी और ऐसा पहली बार होगा कि कोई महिला पूजा करेगी। देख सकते हैं कि न्यूज 18 जैसे संस्थानों ने इस खबर को खूब विस्तार से लिखकर चलाया।

यही सब देख सामान्य जन ने इस मुद्दे पर बोला शुरू कर दिया। धीरे-धीरे देखा गया कि लोग इस विवाद में राजनीति का एंगल घुसाकर सरकार की आलोचना करने लगे। पूरे मामले में मोदी सरकार, योगी सरकार, बीजेपी को दोषी बताया जाने लगा। हालाँकि, समझें तो पता चलेगा कि वास्तविकता में यह पूरा विवाद पारिवारिक है।

रास बिहारी गोस्वामी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपने अधिकार के लिए दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने सुनवाई की और मायादेवी को नोटिस भेज दिया। इस बीच राधाष्टमी भी आई लेकिन 5000 साल पुरानी परंपरा नहीं टूटी। मंदिर में मौजूद गोस्वामी समाज के पुजारियों ने ही राधा अष्टमी के मौके पर मंदिर में पूजा संपन्न करवाई है।

फर्जी दस्तावेजों पर मायादेवी बनीं सेवादार: वकील आशुतोष शर्मा

मामले के वकील आशुतोष शर्मा ने बताया कि मायादेवी गोस्वामी समुदाय की नहीं हैं। उनका सेवादार बनना गलत था। ये बात कोर्ट ने मानी और निचली अदालत का फैसला खारिज हुआ। हालाँकि कानून प्रक्रिया के चलते रास बिहारी अपनी जगह नहीं ले पाए। आशुतोष ने दावा किया कि मायादेवी हरबंस लाल की पत्नी भी नहीं है। पूरा मामला फर्जी दस्तावेजों का है। उन्होंने जानकारी दी कि मीडिया में चलाई जा रही खबरें पूरी तरह झूठी हैं। मायादेवी को पूजा-अर्चना का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने माना है कि रास बिहारी की याचिका सही है।

साधु-संतों के बीच बैठकर लिया जाए फैसला: पाताल पुरी मठ के महंत

पाताल पुरी मठ के महंत बालक दास जी ने इस मुद्दे पर बात करते हुए ऑपइंडिया से कहा कि महिलाओं के पूजा करने से कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन परंपरा को नहीं बदला जाना चाहिए। ऐसे मामले कोर्ट में न जाकर साधु-संतों के बीच ही सुलझ जाने चाहिए। जब आप कोर्ट जाएँगे तो फिर तो अदालत अपने हिसाब से फैसला देगी और उसके बाद आपको वो फैसला मानना ही होगा।

घरों पर चाँद-तारे वाले हरे झंडे, मस्जिद-मदरसे, कारोबार में भी दखल: मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ ही नेपाल में कपिलवस्तु के ‘कृष्णा नगर’ पर गाढ़ा हुआ इस्लामी रंग – OpIndia Ground Report

हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल से लगी भारत की सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने भारत से लगे नेपाल के इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की दूसरी रिपोर्ट:

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ नगर जिले से भी नेपाल की सीमा लगती है। आप बढ़नी बॉर्डर से नेपाल के कपिलवस्तु जिले में प्रवेश करते हैं। यह भारत-नेपाल की व्यस्तत्म सीमाओं में से एक है।

यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

कपिलवस्तु की गिनती नेपाल के उन जिलों में होती है, जहाँ मुस्लिम आबादी अच्छी-खासी है। 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की कुल जनसंख्या का 18% मुस्लिम हैं। यहाँ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ही आपको मस्जिद और मदरसे भी दिखने लगते हैं।

नेपाल में प्रवेश करते ही मस्जिद-मदरसा

बढ़नी बॉर्डर से नेपाल में प्रवेश करने के बाद कपिलवस्तु जिले का कृष्णा नगर शुरू हो जाता है। यहाँ सीमा से लगा ही एक मार्केट है। मार्केट के ग्राउंड फ्लोर पर डॉक्टर सईद अहमद की क्लिनिक से लेकर फैजल प्रिंटिंग, इमरान मोबाइल जैसी कई दुकानें हैं। दूसरे तल पर अल हलाल पब्लिक सेकेंडरी स्कूल चलता है। जो बोर्ड लगा है उसके अनुसार यह इंग्लिश मीडियम का स्कूल है। दूसरे तल पर मस्जिद है, जिसकी गुंबद भारत की सीमा से भी दिखाई देती है।

सीमा पर मौजूद मस्जिद

इसी मस्जिद से सटा तीन मंजिला मदरसा भी है। मदरसे का नाम ‘दारुल सलाम’ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि मदरसे में नेपाल के अलग-अलग हिस्सों के तालिब (छात्र) हैं। इनके अलावा पश्चिम बंगाल और कश्मीर से भी लोग आकर दीनी तालीम हासिल कर रहे हैं।

मदरसा दारुल सलाम

बाजार में तमाम दुकानें मुस्लिमों की

मदरसा दारुल सलाम से एक गली कृष्णा नगर मुख्य बाजार की तरफ जाती है। इस रास्ते में अधिकतर दुकानें मुस्लिमों की है। बाजार में बुर्के वाली महिलाओं का खरीददारी करते दिखना सामान्य है। मर्दों की वेशभूषा पर भी इस्लामी असर दिखता है। कई घरों के ऊपर इस्लामी झंडे भी लगे हैं।

बाजार में खरीददारी करती महिलाएँ और घर पर लगा इस्लामी झंडा

सऊदी अरब जैसी मस्जिद

कृष्णानगर बाजार से करीब 1 किलोमीटर आगे बढ़ने पर एक और बड़ी मस्जिद और उसी से सटा हुआ मदरसा है। मस्जिद का ऊपरी हिस्सा सऊदी अरब में बनी मस्जिद अल नवाबी से मिलता-जुलता है। इस मस्जिद का नाम मदीना मस्जिद है। स्थानीय मुस्लिमों की मानें तो यह करीब 70 साल पुरानी मस्जिद है।

कपिलवस्तु की मदीना मस्जिद

मदीना मस्जिद के ठीक सामने एक बड़ा मदरसा सड़क के उस साइड है। इस मदरसे का नाम ‘जामिया उम्मे सलमा’ है। आसपास के लोगों ने बताया कि यहाँ भारत से भी सैकड़ों लड़के तालीम लेने आते हैं। किराने का दुकान चलाने वाले एक मुस्लिम बुजुर्ग ने बताया कि मदीना मस्जिद सुन्नी जमात की है, जबकि बॉर्डर पर दिखी मस्जिद अहले हदीस वालों की है।

मदरसा जामिया उम्मे सलमा

मदरसे से ठीक बगल में एक खंडहरनुमा मकान है। मकान देखने पर किसी पुराने मंदिर जैसा लग रहा था। लेकिन इस मकान के बारे में आसपास के लोग हमें कोई जानकारी नहीं दे सके। मदरसे के पास आरिफ खान की कोल्डड्रिंक की दुकान है। वे खुद को इलाके का भावी विधायक बताते हैं।

खुद को भावी विधायक बताने वाले आरिफ खान

विभिन्न पार्टियों में कई मुस्लिम नेता

ऑपइंडिया की टीम को कृष्णा नगर में कई राजनैतिक दलों के पोस्टर लगे दिखाई दिए। पोस्टरों से सभी राजनैतिक दलों में मुस्लिमों की अच्छी-खासी नुमाइंदगी का पता चलता है। इंतखाब अहमद खान, मिर्जा राशिद बेग, अकरम पठान जैसे नाम पोस्टरों पर भरे पड़े थे।

मुख्य हाईवे पर भी मुस्लिमों की दुकानें

एक हाईवे भारत के बढ़नी बॉर्डर को नेपाल की राजधानी काठमांडू से जोड़ता है। इस हाईवे के दोनों तरफ मुस्लिम समुदाय के लोगों की कई दुकानें हैं। चाहे वह फारुख की चिकन शॉप हो या चाँद का गैरेज… मुस्लिम नाम वाले व्यवसायिक प्रतिष्ठान भरे पड़े हैं। कृष्णा नगर में राजनीतिक तौर पर सक्रिय दीपेंद्र ने बताया कि चैपुरवा, लक्ष्मीनगर, भिलमी, बरगदी, क़ुदरबेटवा और जावाभारी जैसे कई इलाके कपिलवस्तु जिले में मुस्लिम बहुल हैं।

पढ़ें पहली रिपोर्ट: कभी था हिंदू बहुल गाँव, अब स्वस्तिक चिह्न वाले घर पर 786 का निशान: भारत के उस पार भी डेमोग्राफी चेंज, नेपाल में घुसते ही मस्जिद, मदरसा और इस्लाम – OpIndia Ground Report

‘पार्टी में होती है गाँधी परिवार की पूजा, जरूरत पड़ने पर नेता साथ नहीं देते’ : गुजरात में युवा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा, बताया- ₹1.7 करोड़ के बदले मिला था पद

गुजरात में राहुल गाँधी के दौरे से 24 घंटे पहले कॉन्ग्रेस को झटका मिला है। वहाँ युवा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष विश्वनाथ सिंह वाघेला ने कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दिया है। मुमकिन है कि अब वाघेला बीजेपी को ज्वाइन करें।

इस्तीफा देने के साथ वाघेला ने कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पार्टी में गाँधी परिवार की पूजा होती है। इनके मुख्य कार्यालयों में नेहरू, इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी, सोनिया गाँधी की तस्वीरें हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार वघाले ने अपने इस्तीफे के साथ बताया कि उन्हें धीरे-धीरे एहसास हुआ कि पार्टी की मूल विचारधारा का तो अब गला घोंटा जा चुका है। वाघेला ने यहाँ तक दावा किया कि उन्हें कॉन्ग्रेस ने उन्हें पैसों के बदले अध्यक्ष पद दिया था। उन्होंने कहा, “मेरे समूह ने युवा कॉन्ग्रेस चुनाव में पार्टी को 1 करोड़ 70 लाख रुपए दिए थे। इन्हीं पैसों के बदले कॉन्ग्रेस ने मुझे यह पद दिया था।”

विश्वनाथ ने कॉन्ग्रेस पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, “जब भी युवाओं को जरूरत होती है तो कॉन्ग्रेस के नेता कभी मौजूद नहीं होते। युवा ब्रिगेड को पार्टी के नेताओं की गुटबाजी और पार्टी सिस्टम से घृणा होने लगी है। देश के युवा कॉन्ग्रेस पार्टी में इसका भविष्य नहीं देखते हैं। यहाँ ईमानदार कार्यकर्ताओं का अपमान होता है।”

गौरतलब है कि राहुल गाँधी कल गुजरात दौरे पर अहमदाबाद पहुँचने वाले हैं। ऐसे में विश्वनाथ वाघेला का इस्तीफा पार्टी के लिए झटका है। वाघेला ने बताया कि उन्होंने इतिहास पढ़ पढ़कर कॉन्ग्रेस को ज्वाइन किया लेकिन यहाँ उन्होंने पाया कि स्वतंत्रता दिलाने वाले नेताओं की कॉन्ग्रेस कार्यालयों में तस्वीर नहीं है। वहाँ एक ही परिवार की भक्ति की जाती है। उन्होंने बताया कि वो तंग आकर ये पार्टी छोड़ रहे हैं। हार्दिक पटेल ने भी इन्हीं कारणों से पार्टी छोड़ी थी। वह बोले कि पार्टी के वरिष्ठ नेता जानते हैं कि इस पार्टी के युवा कार्यकर्ता क्यों पार्टी छोड़ रहे हैं।

निकाह के 8 साल बाद सलमान को नजमा लगने लगी ‘मोटी’ : पीटकर बोला- ‘अब तुम्हारे साथ नहीं रहना…तलाक-तलाक-तलाक’

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से तीन तलाक का मामला सामने आया है। यहाँ पति ने अपनी पत्नी को सिर्फ इसलिए तलाक दे दिया है क्योंकि उसका वजन बढ़ गया था और वह उसे मोटी लगने लगी थी। महिला ने अपने पति पर मारपीट करने और मोटी होने के कारण तलाक देने आरोप लगाते हुए स्थानीय लिसाड़ी गेट थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा मामला मेरठ जिले के लिसाड़ी गेट थाना अंतर्गत जाकिर कॉलोनी का है। यहाँ रहने वाली नजमा बेगम का निकाह करीब आठ साल पहले फतेहपुर निवासी मोहम्मद सलमान के साथ हुआ था। नजमा और सलामन का 7 साल का एक बेटा भी है।

नजमा बेगम ने आरोप लगाया है कि उसके शौहर सलमान ने पहले उसे घर से निकाल दिया था। इसके बाद अब उसके साथ मारपीट कर तीन बार तलाक बोलकर तलाक दे दिया है। साथ ही तलाक का नोटिस देने की बात भी कही जा रही है।

पीड़िता नजमा ने अपने शौहर मोहम्मद सलमान पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसके पति ने सिर्फ इसलिए तलाक दिया क्योंकि निकाह के बाद उसका वजन बढ़ गया है और वह मोटी हो गई है। नजमा ने कहा है कि उसका शौहर कहता है, “तुम मोटी हो गई हो, इसलिए अब मैं तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहता।” हालाँकि, नजमा बेगम अपने शौहर के साथ ही रहना चाहती है।

बताया जा रहा है कि नजमा की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपित सलमान के खिलाफ मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 3/4 और आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

पहले की मारपीट फिर दिया तीन तलाक

इस मामले में पुलिस का कहना है, महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि 28 अगस्त को सलमान 5 लोगों के साथ उसके अम्मी-अब्बू के घर गया और वहाँ उसकी पिटाई की। इसके बाद तीन तलाक देकर चला गया। कोतवाली मेरठ अंचल अधिकारी अरविंद कुमार चौरसिया ने कहा है कि शिकायत के आधार पर मामले की जाँच की जा रही है, आरोपित जल्द ही पुलिस की गिरफ्त में होगा।

दहेज में भैंस न लाने पर दिया तीन तलाक

बता दें, पिछले महीने भी उत्तर प्रदेश के बदांयू से ऐसा ही मामला सामने आया था। बदायूं में निकाह के 4 साल बाद एक महिला को दहेज में भैंस न लाने के कारण शौहर द्वारा तीन तलाक दे दिया गया था। इस मामले में पीड़िता ने शौहर और उसके घरवालों पर मारपीट कर घर से बाहर करने और तीन तलाक का आरोप लगाया था। पीड़िता की शिकायत के बाद, पुलिस ने शौहर सहित 4 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।